1. खाद्य सामग्रियों का रासायनिक स्वरूप
हम प्रतिदिन जो भी भोजन ग्रहण करते हैं, वह एक या अनेक कच्ची सामग्रियों से मिलकर बना होता है। ये सामग्रियां हमें या तो पौधों से प्राप्त होती हैं (जैसे अनाज, दालें, फल, सब्जियां) या जंतुओं से (जैसे दूध, मक्खन, अंडे, मांस, मछली)। जब वैज्ञानिक इन सामग्रियों का रासायनिक विश्लेषण करते हैं, तो पता चलता है कि इनमें कुछ विशिष्ट रासायनिक यौगिक होते हैं जिनकी हमारे शरीर को स्वस्थ रहने, विकसित होने और दैनिक कार्य करने के लिए अत्यंत आवश्यकता होती है। इन घटकों को पोषक तत्व (Nutrients) कहा जाता है।
मानव पोषण मुख्य रूप से पांच प्रमुख पोषक तत्वों, तथा दो अनिवार्य गैर-पोषक शारीरिक घटकों पर आधारित होता है:
भोजन के प्रमुख घटक
├── 1. कार्बोहाइड्रेट ──> त्वरित व निरंतर ऊर्जा देने वाला जैविक ईंधन
├── 2. वसा (चिकनाई) ──> अत्यधिक सघन ऊर्जा भंडार (दोगुनी ऊर्जा)
├── 3. प्रोटीन ──> कोशिका निर्माण, वृद्धि व ऊतक मरम्मत (शरीर-वर्धक)
├── 4. विटामिन ──> सूक्ष्म जैविक उत्प्रेरक व रोग प्रतिरोधक (रक्षात्मक)
├── 5. खनिज लवण ──> अस्थि, दंत, रक्त व हार्मोन नियामक अकार्बनिक तत्व
├── 6. आहारी रेशे ──> आंतों की गतिशीलता व मल निष्कासन (रुक्षांश)
└── 7. जल ──> पोषक तत्वों का विलायक, तापमान नियंत्रण व अपशिष्ट उत्सर्जन
2. कार्बोहाइड्रेट: शरीर का मुख्य जैविक ईंधन
कार्बोहाइड्रेट कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन ($C_x(H_2O)_y$) से बने कार्बनिक यौगिक हैं। हमारे भोजन में कार्बोहाइड्रेट मुख्य रूप से दो स्वरूपों में पाया जाता है:
- सरल कार्बोहाइड्रेट (शर्करा / Sugars): ये पचने में बहुत तेज होते हैं और रक्त में घुलकर तुरंत ऊर्जा प्रदान करते हैं। उदाहरण: ग्लूकोज, पके मीठे फलों व शहद में पाई जाने वाली फ्रुक्टोज, तथा गन्ने व चुकंदर से बनने वाली साधारण चीनी (सुक्रोज)।
- जटिल कार्बोहाइड्रेट (मंड / Starch): यह पौधों द्वारा संचित ग्लूकोज की लंबी शृंखला होती है। यह धीरे-धीरे पचकर शरीर को लंबे समय तक निरंतर ऊर्जा प्रदान करता है।
- प्रमुख खाद्य स्रोत: भारत के सभी मुख्य खाद्यान्न कार्बोहाइड्रेट के विपुल भंडार हैं—गेहूं (रोटी), धान (चावल), मक्का, बाजरा, ज्वार और रागी। इसके अतिरिक्त जमीन के नीचे उगने वाले कंद जैसे आलू, शकरकंद, तथा पके फल (केला, आम, पपीता, तरबूज) मंड और शर्करा के उत्कृष्ट स्रोत हैं।
3. वसा: सघन ऊर्जा का भंडार
वसा (चिकनाई या लिपिड्स) भी कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बनती है, किंतु इसमें ऑक्सीजन का अनुपात बहुत कम होता है। इस कारण वसा भोजन का सबसे सघन ऊर्जा स्रोत है:
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ऊर्जा की तुलना: समान मात्रा में वसा से कार्बोहाइड्रेट की तुलना में दोगुनी से भी अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है। 1 ग्राम कार्बोहाइड्रेट या प्रोटीन के दहन से जहां लगभग 4 किलोकैलोरी (kcal) ऊर्जा मिलती है, वहीं 1 ग्राम वसा से लगभग 9 किलोकैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है।
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वसा के प्रमुख स्रोत:
- पादप स्रोत (वनस्पति तेल): सरसों का तेल (बिहार में सर्वाधिक प्रयुक्त), मूंगफली का तेल, सोयाबीन का तेल, नारियल तेल, तिल, सूरजमुखी का तेल, तथा सूखे मेवे (बादाम, काजू, अखरोट)।
- जंतु स्रोत: देसी घी, मक्खन, शुद्ध दूध, मलाई, पनीर, अंडे की जर्दी (पीला भाग), मछली का तेल और मांस।
4. कार्बोहाइड्रेट बनाम वसा: कार्य एवं मोटापे का खतरा
कार्बोहाइड्रेट और वसा दोनों को सम्मिलित रूप से 'ऊर्जा देने वाला भोजन' (Energy-giving food) कहा जाता है:
| तुलनात्मक मानक | कार्बोहाइड्रेट | वसा (Fats) |
|---|---|---|
| प्राथमिक कार्य | दैनिक कार्यों हेतु तत्काल व सुलभ ऊर्जा | दीर्घकालिक ऊर्जा संचय व आंतरिक अंगों का ताप-रोधन |
| ऊर्जा उत्पादन | ~4 किलोकैलोरी प्रति ग्राम | ~9 किलोकैलोरी प्रति ग्राम (दोगुनी से अधिक) |
| पाचन गति | तीव्र से मध्यम | धीमी (पेट में अधिक समय तक रहती है) |
| अतिरिक्त मात्रा का प्रभाव | ग्लाइकोजन में बदलकर अंततः वसा में संचित | त्वचा के नीचे एडिपोज ऊतकों में सीधे चर्बी के रूप में जमा |
- मोटापे (Obesity) का संकट: यद्यपि वसा शरीर के कोमल अंगों की रक्षा और विटामिनों के अवशोषण के लिए अनिवार्य है, किंतु अत्यधिक तली-भुनी चीजें (समोसे, कचौरी, पूड़ी, पकौड़े) खाने से अतिरिक्त वसा त्वचा के नीचे चर्बी के रूप में जमा हो जाती है। इसे मोटापा कहते हैं, जिससे हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और आलस्य जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं।