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BSEB • कक्षा 6 • Science • अध्याय 9
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

बिजली और सर्किट (Electricity and Circuits)

बिहार राज्य विद्यालय परीक्षा बोर्ड (BSEB) के कक्षा 6 विज्ञान पाठ्यक्रम का अध्याय 9 'विद्युत तथा परिपथ' भौतिक विज्ञान की आधारशिला है। इस अध्याय में विद्यार्थी विद्युत ऊर्जा की अवधारणा, इसके उत्पादन स्रोतों तथा दैनिक जीवन में इसकी अनिवार्य उपयोगिता का अनुशीलन करते हैं। अध्ययन की शुरुआत विद्युत सेल की संरचना से होती है, जिसमें धातु की टोपी (धनात्मक सिरा) और धातु की चकती (ऋणात्मक सिरा) के बीच रासायनिक ऊर्जा के विद्युत ऊर्जा में रूपांतरण को स्पष्ट किया गया है। इसके पश्चात टॉर्च के बल्ब की आंतरिक बनावट, टंगस्टन फिलामेंट की भूमिका तथा आधार पर स्थित दो पृथक टर्मिनलों की व्यवस्था का विश्लेषण किया गया है। अध्याय का केंद्रीय भाग विद्युत परिपथ है, जहां बंद लूप (Closed Circuit) की अनिवार्यता, पारंपरिक विद्युत धारा की दिशा (धनात्मक से ऋणात्मक टर्मिनल) तथा खुले परिपथ या फ्यूज बल्ब के कारणों का प्रायोगिक परीक्षण किया गया है। स्विच की क्रियाविधि को सरल सुरक्षा पिन मॉडल के माध्यम से समझाया गया है। अंत में, मुक्त इलेक्ट्रॉनों के आधार पर पदार्थों का वर्गीकरण विद्युत चालक (तांबा, एल्युमीनियम, ग्रेफाइट, मानव शरीर) एवं विद्युतरोधी (रबर, प्लास्टिक, कांच, सूखी लकड़ी) के रूप में किया गया है तथा विद्युत सुरक्षा के सार्वभौमिक नियमों को रेखांकित किया गया है।

क्या आपने कभी सोचा है?

कल्पना कीजिए कि सूर्यास्त के बाद अचानक संपूर्ण शहर अथवा गांव की बिजली गुल हो जाए। न पंखा चल सके, न मोबाइल चार्ज हो सके, न जल पंप से खेतों में सिंचाई हो सके और न ही अध्ययन के लिए प्रकाश उपलब्ध हो। तब हमारे हाथ में केवल एक छोटी सी टॉर्च होती है, जिसका स्विच दबाते ही चमकदार प्रकाश पुंज अंधकार को चीर देता है। क्या आपने कभी विचार किया है कि बिना किसी बाहरी तार या विद्युत खंभे के टॉर्च का छोटा सा बल्ब कैसे जल उठता है? उस बेलनाकार सेल के भीतर ऐसा क्या रासायनिक रहस्य छिपा है जो विद्युत धारा का सृजन करता है? टॉर्च के भीतर का वह सूक्ष्म कुंडलित तार कैसे श्वेत तप्त होकर प्रकाश उत्सर्जित करता है? विद्युत धारा किस प्रकार एक अदृश्य ऊर्जा के रूप में प्रवाहित होती है और एक साधारण सुरक्षा पिन किस तरह पूरे परिपथ को नियंत्रित करने वाले शक्तिशाली स्विच में बदल जाती है? यह अध्याय हमें विद्युत के इसी आश्चर्यजनक एवं व्यावहारिक संसार से जोड़ता है।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

विद्युत आधुनिक मानव सभ्यता की जीवनरेखा है। घरेलू प्रकाश एवं उपकरणों से लेकर बिहार के ग्रामीण अंचलों में 'हर घर बिजली' योजना तथा कृषि पंपों तक, विद्युत ऊर्जा आर्थिक और सामाजिक विकास का आधार है। कक्षा 6 के स्तर पर परिपथ के मूलभूत नियमों, धारा प्रवाह की दिशा तथा चालक व विद्युतरोधी पदार्थों का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करना न केवल आगामी कक्षाओं में भौतिकी के उन्नत सिद्धांतों को समझने हेतु आवश्यक है, बल्कि दैनिक जीवन में विद्युत उपकरणों का सुरक्षित उपयोग करने तथा विद्युत आघात (Electric Shock) से जीवन की रक्षा करने के लिए भी अपरिहार्य है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • ऊर्जा के मूलभूत रूपों (प्रकाश, ऊष्मा तथा गतिज ऊर्जा) की प्रारंभिक समझ।
  • दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले सामान्य विद्युत उपकरणों (टॉर्च, पंखा, बल्ब, सेल) की बाह्य पहचान।
  • पदार्थों के मूलभूत भौतिक गुणों (कठोरता, चमक तथा पारदर्शिता) का ज्ञान जैसा कि अध्याय 2 में पढ़ा गया है।
  • वैज्ञानिक प्रयोगों के दौरान सुरक्षा, अवलोकन तथा तार्किक निष्कर्ष निकालने की बुनियादी आदत।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • विद्युत सेल की बाह्य एवं आंतरिक संरचना की पहचान करना तथा इसके धनात्मक (+) व ऋणात्मक (-) टर्मिनलों को सही प्रकार से नामांकित करना।
  • टॉर्च बल्ब के टंगस्टन फिलामेंट, दो मोटे आधार तारों तथा दो पृथक टर्मिनलों की बनावट और कार्यप्रणाली का वैज्ञानिक विवेचन करना।
  • एक पूर्ण (बंद) विद्युत परिपथ का निर्माण करना तथा परिपथ में पारंपरिक विद्युत धारा के प्रवाह की दिशा (धनात्मक से ऋणात्मक) को निरूपित करना।
  • फ्यूज्ड बल्ब की स्थिति में परिपथ के टूटने (ओपन सर्किट) के कारण को वैज्ञानिक रूप से समझाना।
  • दैनिक उपयोग की वस्तुओं (जैसे सुरक्षा पिन, थर्माकोल, ड्राइंग पिन) से एक कार्यकारी विद्युत स्विच का निर्माण करना तथा इसके ON/OFF तंत्र को स्पष्ट करना।
  • पदार्थों को विद्युत चालक (Conductors) तथा विद्युतरोधी (Insulators) में उनके आंतरिक इलेक्ट्रॉनिक व्यवहार के आधार पर वर्गीकृत करना।
  • विद्युत परीक्षण यंत्र (Conduction Tester) तैयार करके विभिन्न ठोस एवं द्रव पदार्थों की चालकता का प्रायोगिक परीक्षण करना।
  • मानव शरीर की विद्युत चालकता को समझना तथा 220V घरेलू मेंस से संबंधित जीवनरक्षक विद्युत सुरक्षा नियमों और प्राथमिक उपचार का पालन करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 मॉड्यूल 1: विद्युत: दैनिक जीवन, उपय...
2 मॉड्यूल 2: विद्युत सेल: रासायनिक ऊर...
3 मॉड्यूल 3: टॉर्च का बल्ब: आंतरिक सं...
4 मॉड्यूल 4: विद्युत परिपथ: बंद लूप,...
5 मॉड्यूल 5: विद्युत स्विच: संरचना, क...
6 मॉड्यूल 6: विद्युत चालक एवं विद्युत...
7 मॉड्यूल 7: विद्युत सुरक्षा, सावधानि...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

मॉड्यूल 1: विद्युत: दैनिक जीवन, उपयोगिता एवं विद्युत उत्पादन तंत्र

1.1 विद्युत ऊर्जा का स्वरूप एवं आधुनिक समाज में अपरिहार्यता

विद्युत ऊर्जा आधुनिक मानव सभ्यता की सर्वाधिक गतिशील, स्वच्छ एवं बहुमुखी ऊर्जा है। यह ऊर्जा का वह द्वितीयक रूप है जिसे प्राथमिक ऊर्जा स्रोतों (जैसे कोयला, प्राकृतिक गैस, बहता जल, नाभिकीय विखंडन अथवा सूर्य का प्रकाश) के रूपांतरण से प्राप्त किया जाता है। हमारे दैनिक जीवन का कोई भी क्षेत्र विद्युत ऊर्जा की उपस्थिति के बिना संचालित नहीं हो सकता।

प्रातःकाल उठने से लेकर रात्रि में सोने तक, मानव जीवन का प्रत्येक क्रियाकलाप विद्युत तंत्र पर निर्भर है:

  1. घरेलू प्रकाश एवं सुख-सुविधाएं: सूर्यास्त के उपरांत घरों, सड़कों, विद्यालयों, कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों को प्रकाशित करने वाले एलईडी (LED), सीएफएल (CFL) और ट्यूबलाइट विद्युत से ही प्रदीप्त होते हैं। गर्मियों में पंखे, कूलर और वातानुकूलक (Air Conditioners) तथा सर्दियों में हीटर और गीजर विद्युत ऊर्जा द्वारा ही ऊष्मा अथवा शीतलता प्रदान करते हैं।
  2. पेयजल एवं कृषि सिंचाई प्रणाली: भूमिगत जल को गहरे नलकूपों (Tubewells) से खींचकर छतों की टंकियों तक पहुंचाने वाले इलेक्ट्रिक मोटर पंप विद्युत से संचालित होते हैं। कृषि प्रधान राज्य बिहार में धान, गेहूं और मक्का की फसलों की समयबद्ध सिंचाई विद्युत चालित पंपिंग सेटों पर टिकी है।
  3. संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी: हमारे स्मार्टफोन, कंप्यूटर, लैपटॉप, टेलीविजन, रेडियो, इंटरनेट राउटर और दूरसंचार टॉवर विद्युत शक्ति द्वारा ही क्रियाशील रहते हैं।
  4. स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवाएं: अस्पतालों में जीवनरक्षक उपकरण, जैसे गहन चिकित्सा कक्ष (ICU) के वेंटिलेटर, मॉनिटर, एक्स-रे मशीन, ईसीजी (ECG), डायलिसिस मशीन और जीवनरक्षक दवाओं को सुरक्षित रखने वाले रेफ्रिजरेटर निरंतर विद्युत आपूर्ति की मांग करते हैं।
  5. परिवहन एवं उद्योग: भारतीय रेल का विशाल विद्युतीकृत नेटवर्क, मेट्रो रेल, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), आटा चक्की, तेल पेराई मिलें, कपड़ा उद्योग और इस्पात कारखाने पूरी तरह विद्युत ऊर्जा पर निर्भर हैं।

1.2 विद्युत उत्पादन के प्राथमिक स्रोत एवं ऊर्जा रूपांतरण सिद्धांत

विद्युत ऊर्जा का निर्माण किसी बंद कमरे में स्वतः नहीं होता, अपितु बड़े-बड़े ऊर्जा उत्पादन केंद्रों (Power Stations / Power Generating Plants) में प्राथमिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदला जाता है। विद्युत उत्पादन का मुख्य वैज्ञानिक सिद्धांत 'विद्युत-चुंबकीय प्रेरण' (Electromagnetic Induction) है, जिसमें विशाल जनरेटर (विद्युत जनित्र) के आर्मेचर को घुमाकर यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है। जनरेटर को घुमाने के लिए विभिन्न प्रकार के टर्बाइनों का उपयोग किया जाता है।

प्रमुख विद्युत उत्पादन विधियां निम्नलिखित हैं:

1. ताप विद्युत संयंत्र (Thermal Power Stations)

  • कार्यप्रणाली: कोयले, प्राकृतिक गैस अथवा पेट्रोलियम को विशाल बॉयलरों में जलाया जाता है। दहन से उत्पन्न अत्यधिक ऊष्मा से जल को उच्च दाब वाली भाप (High-Pressure Steam) में परिवर्तित किया जाता है। यह भाप अत्यंत तीव्र गति से टर्बाइन के पंखों पर टकराती है, जिससे टर्बाइन तेजी से घूमता है। टर्बाइन से जुड़ा विद्युत जनरेटर घूमकर विशाल मात्रा में विद्युत उत्पन्न करता है।
  • ऊर्जा रूपांतरण चक्र:

$$\text{कोयले की रासायनिक ऊर्जा} \xrightarrow{\text{दहन}} \text{ऊष्मीय ऊर्जा} \xrightarrow{\text{भाप}} \text{गतिज ऊर्जा} \xrightarrow{\text{टर्बाइन व जनरेटर}} \text{विद्युत ऊर्जा}$$

  • बिहार में प्रमुख संयंत्र: बिहार में विद्युत का एक बड़ा भाग ताप विद्युत गृहों से प्राप्त होता है। राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम (NTPC) द्वारा संचालित प्रमुख संयंत्र हैं:
    • NTPC बाढ़ (Barh Super Thermal Power Station, पटना): बिहार का विशालतम आधुनिक सुपरक्रिटिकल ताप विद्युत संयंत्र।
    • NTPC कहलगांव (Kahalgaon Super Thermal Power Station, भागलपुर): बिहार और पूर्वी भारत को विद्युत आपूर्ति करने वाला प्रमुख केंद्र।
    • बरौनी थर्मल पावर स्टेशन (Barauni Thermal Power Station, बेगूसराय): बिहार राज्य विद्युत बोर्ड का ऐतिहासिक ताप विद्युत गृह।

2. जल विद्युत संयंत्र (Hydroelectric Power Stations)

  • कार्यप्रणाली: नदियों पर विशाल बांध बनाकर वर्षा अथवा हिमनदों के जल को विशाल ऊंचाई पर संचित किया जाता है। संचित जल में अत्यधिक गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy) होती है। जब इस जल को पेनस्टॉक (मोटे पाइपों) के माध्यम से नीचे गिराया जाता है, तो स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा में बदल जाती है। यह तीव्र जल प्रवाह जल-टर्बाइन (Hydro-turbine) के ब्लेडों पर गिरकर उन्हें घुमाता है, जिससे जनरेटर द्वारा विद्युत का उत्पादन होता है।
  • ऊर्जा रूपांतरण चक्र:

$$\text{जल की स्थितिज ऊर्जा} \xrightarrow{\text{पतन}} \text{गतिज ऊर्जा} \xrightarrow{\text{जल-टर्बाइन}} \text{यांत्रिक ऊर्जा} \xrightarrow{\text{जनरेटर}} \text{विद्युत ऊर्जा}$$

3. सौर ऊर्जा संयंत्र (Solar Power Stations)

  • कार्यप्रणाली: सूर्य की विकिरण ऊर्जा को फोटोवोल्टिक सेलों (Photovoltaic Solar Panels) पर आपतित कराकर बिना किसी गतिमान पुर्जे के सीधे दिष्ट धारा (DC Electricity) में परिवर्तित किया जाता है।
  • बिहार संदर्भ: बिहार राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए बिहार अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (BREDA) द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर स्ट्रीट लाइट, सरकारी भवनों पर रूफटॉप सोलर पैनल तथा किसानों के लिए सौर ऊर्जा चालित कृषि पंप स्थापित किए जा रहे हैं।

1.3 विद्युत संचरण, वितरण एवं घरेलू मेंस (220V AC) की प्रकृति

विद्युत उत्पादन संयंत्रों में उत्पादित विद्युत को हजारों किलोमीटर दूर स्थित शहरों और गांवों तक पहुंचाने के लिए एक सुव्यवस्थित ग्रिड प्रणाली कार्यरत होती है:

  1. स्टेप-अप ट्रांसफॉर्मर: उत्पादन केंद्र पर उत्पादित विद्युत वोल्टता को ट्रांसफॉर्मर द्वारा $11,000\text{ V}$ ($11\text{ kV}$) से बढ़ाकर $132,000\text{ V}$ ($132\text{ kV}$) या $400,000\text{ V}$ ($400\text{ kV}$) तक किया जाता है, ताकि संचरण तारों में प्रतिरोध के कारण ऊष्मा के रूप में ऊर्जा की हानि ($H = I^2Rt$) न्यूनतम हो।
  2. पारेषण लाइनें (Transmission Lines): विशाल लोहे के टावरों पर लटके मोटे एल्युमिनियम चालकों द्वारा उच्च वोल्टता पर विद्युत को राज्यों और जिलों के मुख्य ग्रिड उपकेंद्रों तक भेजा जाता है।
  3. स्टेप-डाउन सब-स्टेशन: विद्युत उपकेंद्रों पर ट्रांसफॉर्मर वोल्टता को घटाकर $33\text{ kV}$ और फिर मोहल्लों के ट्रांसफॉर्मर द्वारा $440\text{ V}$ (तीन-फेज) अथवा $220\text{ V}$ (एकल-फेज) में बदलते हैं।
  4. घरेलू मेंस आपूर्ति (Domestic Mains): भारत में घरों में आपूर्ति की जाने वाली विद्युत $220\text{ V}$ की वोल्टता और $50\text{ Hz}$ आवृत्ति की प्रत्यावर्ती धारा (Alternating Current - AC) होती है।
[विद्युत उत्पादन केंद्र] 
       ↓ (11 kV)
[स्टेप-अप ट्रांसफॉर्मर] 
       ↓ (132 kV / 400 kV उच्च वोल्टता संचरण)
[पारेषण ग्रिड एवं विशाल टावर] 
       ↓ 
[जिला उपकेंद्र (स्टेप-डाउन 33 kV / 11 kV)] 
       ↓ 
[स्थानीय मोहल्ला ट्रांसफॉर्मर (स्टेप-डाउन)] 
       ↓ (220V AC सुरक्षित घरेलू स्तर)
[घरेलू विद्युत मीटर, मेन स्विच एवं परिपथ]

1.4 घरेलू मेंस (220V AC) बनाम शुष्क सेल (1.5V DC): विभव एवं सुरक्षा तुलना

विज्ञान की प्रयोगशाला में प्रयोग करते समय अथवा दैनिक जीवन में विद्युत के उपयोग के दौरान यह समझना अनिवार्य है कि घरेलू दीवार के सॉकेट में आने वाली विद्युत और टॉर्च के सेल से मिलने वाली विद्युत में बुनियादी अंतर क्या है:

तुलनात्मक मापदंड घरेलू मेंस आपूर्ति (Domestic Mains) शुष्क सेल (Dry Cell)
विद्युत धारा का प्रकार प्रत्यावर्ती धारा (AC - Alternating Current) दिष्ट धारा (DC - Direct Current)
विभवांतर (Voltage) $220\text{ V}$ (अत्यधिक उच्च विभव) $1.5\text{ V}$ प्रति सेल (अत्यंत निम्न विभव)
ऊर्जा का मूल स्रोत दूरस्थ विद्युत संयंत्र (कोयला, जल, सौर आदि) सेल के भीतर संचित रासायनिक पदार्थ
सुवाह्यता (Portability) स्थिर (तारों द्वारा दीवार सॉकेट से बंधी हुई) पूर्णतः सुवाह्य (हाथ में, टॉर्च या घड़ी में ले जाने योग्य)
आघात जोखिम (Shock Hazard) अत्यंत घातक; स्पर्श करने पर हृदय गति रुक सकती है पूर्णतः सुरक्षित; मानव त्वचा पर कोई झटका नहीं लगता
शैक्षणिक प्रयोगों में उपयोग सर्वथा वर्जित; छात्रों द्वारा कभी प्रयोग न किया जाए आदर्श एवं अनुशंसित; कक्षा 6 के सभी प्रयोगों हेतु अनिवार्य

1.5 बिहार राज्य का ऊर्जा परिदृश्य एवं प्रमुख विकासात्मक उपलब्धियां

बिहार में विद्युत का विकास सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण का प्रतीक रहा है:

  1. 'हर घर बिजली' योजना (सात निश्चय कार्यक्रम): बिहार सरकार के सात निश्चय योजना के अंतर्गत राज्य के सभी 39,073 राजस्व गांवों और सुदूर ग्रामीण टोलों का शत-प्रतिशत विद्युतीकरण संपन्न किया गया है। हर घर तक मीटरयुक्त सुरक्षित विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।
  2. समर्पित कृषि विद्युत फीडर (Dedicated Agriculture Power Feeders): राज्य में किसानों को सिंचाई हेतु सस्ती, निर्बाध और उच्च गुणवत्ता वाली विद्युत प्रदान करने के लिए घरेलू लाइनों से अलग कृषि फीडर स्थापित किए गए हैं, जिससे डीजल पंपों पर किसानों की निर्भरता घटी है और पर्यावरण प्रदूषण कम हुआ है।
  3. मधेपुरा विद्युत रेल इंजन कारखाना (Madhepura Electric Locomotive Factory): बिहार के मधेपुरा में स्थापित अत्याधुनिक रेल इंजन कारखाने में भारत के सर्वाधिक शक्तिशाली $12,000$ अश्वशक्ति (Horsepower) वाले वातानुकूलित फ्रेट इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव (WAG-12B) का निर्माण किया जा रहा है, जो संपूर्ण भारतीय रेल के भारी मालगाड़ी गलियारों (Dedicated Freight Corridors) को शक्ति प्रदान कर रहा है।

मॉड्यूल 2: विद्युत सेल: रासायनिक ऊर्जा, आंतरिक संरचना एवं टर्मिनलों का विश्लेषण

2.1 विद्युत सेल की वैज्ञानिक परिभाषा एवं ऊर्जा रूपांतरण सिद्धांत

विद्युत सेल (Electric Cell) एक स्वतंत्र, सुवाह्य (Portable) विद्युत रासायनिक युक्ति (Electrochemical Device) है जो अपने भीतर संचित रासायनिक पदार्थों की रासायनिक ऊर्जा (Chemical Energy) को निरंतर विद्युत ऊर्जा (Electrical Energy) में रूपांतरित करती है।

जब किसी टॉर्च, दीवार घड़ी, टीवी के रिमोट, रेडियो अथवा खिलौने में विद्युत सेल को स्थापित किया जाता है, तो सेल अपने दोनों टर्मिनलों के बीच एक निश्चित विभवांतर (Potential Difference) स्थापित करता है। यह विभवांतर चालक तारों में उपस्थित मुक्त आवेशों पर विद्युत बल आरोपित करता है, जिससे परिपथ में विद्युत धारा प्रवाहित होने लगती है।

[रासायनिक ऊर्जा] 
       ↓ (आंतरिक रासायनिक रेडॉक्स अभिक्रियाएं)
[विद्युत विभव अंतर (1.5V EMF)] 
       ↓ (बाह्य चालक परिपथ जोड़ने पर)
[मुक्त इलेक्ट्रॉनों का संगठित प्रवाह] 
       ↓ 
[विद्युत धारा (विद्युत ऊर्जा)]

2.2 विद्युत सेल की बाह्य संरचना एवं दो टर्मिनलों की पहचान

किसी मानक शुष्क सेल (Dry Cell - लेक्लांशी सेल का सुवाह्य रूप) का बाह्य निरीक्षण करने पर इसकी निम्नलिखित स्पष्ट विशेषताएं दृष्टिगोचर होती हैं:

          (+) धनात्मक टर्मिनल (धातु की टोपी - Metal Cap)
             ┌───────┐
          ┌──┴───────┴──┐
          │  ┌─────┐   │
          │  │     │   │
          │  │सेल का│   │  विद्युतरोधी आवरण (कार्डबोर्ड/प्लास्टिक जैकेट)
          │  │पिंड  │   │
          │  │     │   │
          │  └─────┘   │
          └──┬───────┬──┘
             └───────┘
          (-) ऋणात्मक टर्मिनल (धातु की सपाट चकती - Metal Disc)
  1. धातु की टोपी (Metal Cap) — धनात्मक टर्मिनल ($+$ Terminal):
    • सेल के ऊपरी सिरे पर एक छोटी, गोल, उभरी हुई धातु की टोपी लगी होती है।
    • इस टोपी के समीप सेल के खोल पर धनात्मक चिह्न ($+$) अंकित होता है।
    • यह सेल का धनात्मक टर्मिनल (Positive Terminal) कहलाता है।
    • आंतरिक रूप से यह टोपी सेल के मध्य में स्थित कार्बन (ग्रेफाइट) की छड़ के सीधे संपर्क में होती है।
  2. धातु की चकती (Metal Disc) — ऋणात्मक टर्मिनल ($-$ Terminal):
    • सेल के ठीक विपरीत निचले तल पर एक सपाट, चिकनी धातु की गोल चकती होती है।
    • इस चकती के समीप खोल पर ऋणात्मक चिह्न ($-$) अंकित होता है।
    • यह सेल का ऋणात्मक टर्मिनल (Negative Terminal) कहलाता है।
    • आंतरिक रूप से यह समतल आधार सेल के जस्ता (Zinc) के बाहरी बर्तन का निचला तल होता है।
  3. दो टर्मिनलों की सार्वभौमिक वैज्ञानिक अनिवार्यता:
    • ब्रह्मांड में प्रत्येक विद्युत स्रोत में दो विपरीत ध्रुव या टर्मिनल होना अनिवार्य है।
    • एक टर्मिनल उच्च विभव (High Potential) पर होता है (धनात्मक) तथा दूसरा निम्न विभव (Low Potential) पर (ऋणात्मक)।
    • यदि केवल एक टर्मिनल हो, तो विभव अंतर शून्य होगा, आवेशों पर कोई बल नहीं लगेगा और विद्युत धारा का प्रवाह असंभव हो जाएगा।

2.3 विद्युत सेल की आंतरिक रासायनिक संरचना एवं संघटक

शुष्क सेल के बाहरी सुरक्षात्मक प्लास्टिक या मुद्रित कार्डबोर्ड आवरण के भीतर एक जटिल रासायनिक तंत्र उपस्थित होता है:

  1. जस्ता (Zinc) का बेलनाकार पात्र:
    • सेल का बाह्य कठोर ढांचा जस्ता धातु का बना एक बेलनाकार पात्र होता है।
    • यह पात्र केवल रासायनिक पदार्थों को रखने का बर्तन नहीं है, बल्कि स्वयं रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेता है और एनोड / ऋणात्मक इलेक्ट्रोड के रूप में कार्य करता है।
  2. केंद्रीय कार्बन (ग्रेफाइट) छड़:
    • सेल के ठीक मध्य में एक सघन कार्बन (ग्रेफाइट) की छड़ ऊर्ध्वाधर रूप से स्थित होती है।
    • यह छड़ कैथोड / धनात्मक इलेक्ट्रोड का कार्य करती है। इसके शीर्ष पर पीतल या जस्ते की टोपी लगी होती है।
  3. रासायनिक विद्युत-अपघट्य लेई (Electrolyte Paste):
    • शुष्क सेल को 'शुष्क' (Dry) इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें द्रव रसायन नहीं होते जो छलक सकें, अपितु एक गाढ़ी लेई (Paste) भरी होती है।
    • इस लेई में निम्नलिखित प्रमुख रासायनिक यौगिक मिश्रित होते हैं:
      • अमोनियम क्लोराइड ($NH_4Cl$) एवं जिंक क्लोराइड ($ZnCl_2$): यह आयनों के संचलन हेतु प्राथमिक इलेक्ट्रोलाइट का कार्य करते हैं।
      • मैंगनीज डाइऑक्साइड ($MnO_2$) एवं कार्बन चूर्ण: कार्बन छड़ के चारों ओर मलमल की थैली में भरा यह चूर्ण विध्रुवक (Depolarizer) का कार्य करता है, जो रासायनिक क्रिया के दौरान उत्पन्न होने वाली हाइड्रोजन गैस के बुलबुलों को सोखकर सेल के आंतरिक प्रतिरोध को बढ़ने से रोकता है।
  4. इंसुलेटिंग सील (विद्युतरोधी ढक्कन):
    • सेल के शीर्ष पर डामर (Pitch) या मोम की एक वायुरोधी सील लगी होती है, जो रासायनिक लेई को सूखने से बचाती है तथा धातु की टोपी और जिंक पात्र के बीच सीधे संपर्क को रोकती है।

2.4 सेल की रासायनिक क्रियाविधि एवं निःशेषण (Cell Exhaustion)

  1. विद्युत उत्पादन की रासायनिक प्रक्रिया:
    • जब सेल के दोनों सिरों को किसी बाह्य परिपथ (जैसे टॉर्च के बल्ब) से जोड़ा जाता है, तो जिंक पात्र और इलेक्ट्रोलाइट लेई के बीच रासायनिक रेडॉक्स अभिक्रिया (Oxidation-Reduction Reaction) प्रारंभ हो जाती है।
    • जिंक धातु इलेक्ट्रॉनों का त्याग करती है, जिससे ऋणात्मक चकती पर अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन एकत्रित होते हैं।
    • कार्बन छड़ इन इलेक्ट्रॉनों को बाह्य परिपथ के माध्यम से आकर्षित करती है। इस प्रकार, बाह्य परिपथ में इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह ऋणात्मक चकती से धनात्मक टोपी की ओर होता है, जिससे परिपथ में विद्युत धारा उत्पन्न होती है।
  2. सेल का निःशेष होना (Exhaustion of Cell):
    • विद्युत सेल ऊर्जा का शाश्वत स्रोत नहीं है। इसके भीतर रासायनिक पदार्थों की मात्रा सीमित होती है।
    • जैसे-जैसे सेल का उपयोग होता है, जिंक पात्र धीरे-धीरे घुलता जाता है और $MnO_2$ तथा $NH_4Cl$ रासायनिक रूप से प्रयुक्त हो जाते हैं।
    • जब रासायनिक अभिक्रिया रुक जाती है, तो सेल विभवांतर बनाए रखने में असमर्थ हो जाता है। इसे आम बोलचाल में 'सेल का खत्म होना' या 'डेड होना' (Exhausted Cell) कहते हैं।
    • ऐसे निःशेष सेल को बदलकर नया सेल स्थापित करना पड़ता है।

2.5 प्राथमिक सेल बनाम द्वितीयक सेल (Primary vs Secondary Cells)

मापदंड प्राथमिक सेल (Primary Cell) द्वितीयक सेल (Secondary Cell / Storage Battery)
पुनर्चार्जन क्षमता गैर-रिचार्जेबल (Non-rechargeable); केवल एक बार उपयोग योग्य रिचार्जेबल (Rechargeable); बार-बार चार्ज किया जा सकता है
रासायनिक उत्क्रमणीयता रासायनिक अभिक्रियाएं अनुत्क्रमणीय (Irreversible) होती हैं रासायनिक अभिक्रियाएं उत्क्रमणीय (Reversible) होती हैं
विद्युत धारा दिशा रासायनिक क्रिया से केवल धारा प्राप्त की जा सकती है धारा देकर रासायनिक स्थिति को पुनः मूल रूप में लाया जा सकता है
सामान्य उदाहरण साधारण टॉर्च का शुष्क सेल, घड़ी का बटन सेल, रेडियो सेल मोबाइल फोन की लीथियम-आयन बैटरी, कार/इन्वर्टर की लेड-एसिड बैटरी
लागत एवं वजन अत्यंत सस्ता, हल्का और सुवाह्य प्रारंभिक लागत अधिक, तुलनात्मक रूप से भारी

2.6 विद्युत सेल के प्रयोग में महत्वपूर्ण चेतावनियां एवं सावधानियां

  1. सीधा शॉर्ट सर्किट कभी न करें:
    • विद्युत सेल के धनात्मक टर्मिनल और ऋणात्मक टर्मिनल को बिना किसी बल्ब, प्रतिरोधक अथवा लोड के सीधे तार से कभी नहीं जोड़ना चाहिए।
    • ऐसा करने पर परिपथ का प्रतिरोध लगभग शून्य हो जाता है। अत्यधिक तीव्र धारा बहने से सेल के भीतर उपस्थित रासायनिक पदार्थ कुछ ही मिनटों में पूरी तरह जलकर नष्ट हो जाते हैं।
    • सेल अत्यधिक गर्म हो जाता है और रासायनिक गैसों के दबाव से फट सकता है अथवा उसमें से हानिकारक रासायनिक लेई रिस सकती है।
  2. उपकरणों में सेल संयोजन की ध्रुवता (Polarity):
    • जब किसी टॉर्च या रिमोट में एक से अधिक सेल लगाए जाते हैं, तो उन्हें श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है।
    • सदैव पहले सेल की ऋणात्मक चकती को दूसरे सेल की धनात्मक टोपी के संपर्क में रखना चाहिए ($+ \to - \to + \to -$)।
    • यदि दोनों सेलों की टोपियां ($+$ और $+$) आमने-सामने लगा दी जाएं, तो उनका विभवांतर एक-दूसरे को निरस्त कर देगा ($1.5\text{ V} - 1.5\text{ V} = 0\text{ V}$) और उपकरण कार्य नहीं करेगा।
  3. पर्यावरणीय सुरक्षा एवं निपटान:
    • प्रयुक्त शुष्क सेलों को कभी भी आग में नहीं फेंकना चाहिए, क्योंकि बंद पात्र में रासायनिक वाष्प के प्रसार से भीषण विस्फोट हो सकता है।
    • सेलों को बच्चों की पहुंच से दूर रखना चाहिए ताकि रासायनिक पेस्ट मुंह या आंखों में न जाए।

मॉड्यूल 3: टॉर्च का बल्ब: आंतरिक संरचना, फिलामेंट एवं टर्मिनल विन्यास

3.1 टॉर्च बल्ब का परिचय एवं बाह्य स्वरूप

टॉर्च का बल्ब (Torch Bulb) विद्युत ऊर्जा को दीप्त प्रकाश ऊर्जा में रूपांतरित करने वाली एक अत्यंत सूक्ष्म एवं परिशुद्ध युक्ति है। यदि हम किसी सामान्य टॉर्च के सामने लगे कांच के परावर्तक को खोलकर उसके नन्हें बल्ब को ध्यानपूर्वक देखें, तो हमें पारदर्शी कांच के भीतर एक अत्यंत महीन कुंडलित तार चमकता हुआ दिखाई देता है।

एक सामान्य टॉर्च बल्ब की बाह्य संरचना में दो मुख्य भाग होते हैं:

  1. कांच का गोलाकार आवरण (Glass Envelope / Bulb): यह अत्यंत पतले, पारदर्शी कांच का बना होता है जो आंतरिक सूक्ष्म घटकों को धूल, नमी और बाह्य वायुमंडलीय ऑक्सीजन से सुरक्षित रखता है।
  2. धातु का आधार (Metallic Base): कांच के आवरण के नीचे एक बेलनाकार धातु की टोपी या पेंचदार आधार (Metallic Screw Base) लगा होता है, जो बल्ब को टॉर्च के सॉकेट में मजबूती से थामे रखता है और विद्युत संपर्क स्थापित करता है।

3.2 फिलामेंट (तंतु): पदार्थ, भौतिक गुण एवं प्रकाश उत्सर्जन का सिद्धांत

कांच के आवरण के ठीक मध्य में स्थित महीन, स्प्रिंगनुमा कुंडलित तार को फिलामेंट या तंतु (Filament) कहा जाता है। यह बल्ब का वह क्रियाशील घटक है जो वास्तव में प्रकाश उत्पन्न करता है।

                  ┌──────────────┐
                  │ पारदर्शी कांच│
                  │   का आवरण   │
                  │              │
                  │   /\/\/\/\   │ ← फिलामेंट (टंगस्टन धातु का कुंडलित तार)
                  │   │      │   │
                  │   │      │   │ ← दो मोटे सहायक धातु के तार
                  │   │      │   │
            ┌─────┴───┴──────┴───┴─────┐
            │   धातु का बेलनाकार आवरण   │ ← प्रथम टर्मिनल (टर्मिनल 1)
            │      (Metal Casing)      │
            ├──────────────────────────┤
            │  विद्युतरोधी सील (काला मोम)│ ← इंसुलेटर (दोनों टर्मिनलों को अलग रखता है)
            └───────────┬──────────────┘
                        │
                        ▼
            धातु की नुकीली निचली नोक ← द्वितीय टर्मिनल (टर्मिनल 2)
            (Metal Tip at the Base)

1. टंगस्टन (Tungsten) धातु का चयन

फिलामेंट के निर्माण के लिए सामान्य तांबे या लोहे के तार का उपयोग नहीं किया जा सकता। इसके लिए विशेष रूप से टंगस्टन (रासायनिक प्रतीक: W, परमाणु क्रमांक: 74) नामक संक्रमण धातु का उपयोग किया जाता है। टंगस्टन के चयन के वैज्ञानिक कारण निम्नलिखित हैं:

  • अत्यधिक उच्च गलनांक (Extremely High Melting Point): टंगस्टन का गलनांक लगभग $3422^\circ\text{C}$ ($3695\text{ K}$) होता है, जो सभी शुद्ध धातुओं में सर्वाधिक है।
  • उच्च प्रतिरोधकता (High Resistivity): इसका विद्युत प्रतिरोध पर्याप्त उच्च होता है, जिससे धारा प्रवाहित होने पर तीव्र ऊष्मा उत्पन्न होती है।
  • उच्च तन्यता (High Ductility): टंगस्टन को खींचकर मानव बाल से भी कई गुना पतले तार में परिवर्तित किया जा सकता है।

2. विद्युत धारा का उष्मीय प्रभाव एवं प्रकाश उत्सर्जन

  • जब विद्युत धारा फिलामेंट के अत्यंत बारीक टंगस्टन तार से होकर गुजरती है, तो उच्च प्रतिरोध के कारण जूल के उष्मीय नियम ($H = I^2Rt$) के अनुसार विद्युत ऊर्जा तीव्र ऊष्मा में परिवर्तित होने लगती है।
  • फिलामेंट का तापमान तेजी से बढ़कर लगभग $2000^\circ\text{C}$ से $2500^\circ\text{C}$ तक पहुंच जाता है।
  • इस अत्यधिक उच्च तापमान पर टंगस्टन धातु श्वेत-तप्त (White Hot / Incandescent) हो जाती है और दृश्य प्रकाश की किरणें विकीर्ण करने लगती है। इस प्रकार, बल्ब का फिलामेंट प्रदीप्त हो उठता है।

3. बल्ब के भीतर का वातावरण: निर्वात अथवा अक्रिय गैस

  • यदि फिलामेंट सामान्य वायु की उपस्थिति में $2000^\circ\text{C}$ तक गर्म हो, तो वायु में उपस्थित ऑक्सीजन के साथ टंगस्टन तुरंत अभिक्रिया करके जल जाएगा (ऑक्सीकृत होकर वाष्पीकृत हो जाएगा) और फिलामेंट तत्काल टूट जाएगा।
  • अतः बल्ब के कांच के गोले के भीतर से वायु को पूरी तरह निकालकर या तो उच्च निर्वात (Vacuum) उत्पन्न किया जाता है, या फिर उसमें आर्गन (Argon) अथवा नाइट्रोजन जैसी रासायनिक रूप से अक्रिय गैसें अल्प दाब पर भरी जाती हैं, जिससे फिलामेंट का वाष्पीकरण रुक जाता है और बल्ब की आयु बढ़ जाती है।

3.3 दो मोटे सहायक तार (Thick Supporting Wires)

फिलामेंट हवा में तैरता नहीं रह सकता; इसे आधार प्रदान करने और विद्युत धारा पहुंचाने के लिए दो मोटे धातु के तार प्रयुक्त होते हैं:

  1. यांत्रिक सहारा प्रदान करना: ये दोनों मोटे तार कांच के स्तंभ से निकलकर ऊपर की ओर जाते हैं और उनके शीर्ष पर टंगस्टन फिलामेंट को दोनों सिरों से मजबूती से जकड़ा जाता है।
  2. विद्युत संवहन का कार्य: ये तार अच्छे विद्युत चालक (तांबा या निकल-लोहा मिश्रधातु) के बने होते हैं। मोटे होने के कारण इनका प्रतिरोध बहुत कम होता है, अतः धारा बहने पर ये स्वयं गर्म होकर नहीं चमकते, बल्कि धारा को बिना किसी रुकावट के सीधे फिलामेंट तक पहुंचाते हैं।

3.4 टॉर्च बल्ब के दो पृथक टर्मिनल (Two Terminals of the Bulb)

कक्षा 6 के विज्ञान में सबसे महत्वपूर्ण अवधारणा यह समझना है कि टॉर्च के बल्ब में विद्युत धारा के प्रवेश और निकास हेतु दो अलग-अलग टर्मिनल कहां स्थित होते हैं:

  1. प्रथम टर्मिनल — धातु का बेलनाकार आवरण (Metal Casing):
    • एक मोटा सहायक तार नीचे जाकर बल्ब के बेलनाकार धातु के आवरण (धातु की चूड़ीदार सतह) से आंतरिक रूप से वेल्ड या जुड़ा होता है।
    • यह धातु का आवरण बल्ब का पहला टर्मिनल (Terminal 1) बनता है।
  2. द्वितीय टर्मिनल — आधार के केंद्र पर स्थित धातु की नोक (Metal Tip at the Base):
    • दूसरा मोटा सहायक तार धातु के आवरण को बिना स्पर्श किए सीधे नीचे जाता है और बल्ब के ठीक तल के केंद्र पर स्थित नुकीली धातु की नोक से जुड़ा होता है।
    • यह नुकीला सिरा बल्ब का दूसरा टर्मिनल (Terminal 2) बनता है।
  3. टर्मिनलों के मध्य विद्युतरोधी पृथक्करण (Insulation Barrier):
    • बल्ब के तल पर धातु के आवरण और केंद्र की धातु की नोक के बीच एक गहरे काले रंग का कठोर पदार्थ (कांच अथवा विशेष विद्युतरोधी सीलिंग मोम) भरा होता है।
    • यह विद्युतरोधी पदार्थ दोनों टर्मिनलों को एक-दूसरे से पूर्णतः पृथक रखता है ताकि वे आपस में स्पर्श न कर सकें।
    • यदि ये दोनों टर्मिनल आपस में छू जाएं, तो धारा फिलामेंट में जाने के बजाय सीधे आधार से ही वापस लौट जाएगी (आंतरिक शॉर्ट सर्किट), और बल्ब कभी नहीं जलेगा।

3.5 बल्ब का फ्यूज होना (Fused Bulb): भौतिक कारण एवं परिपथ पर प्रभाव

दैनिक जीवन में हम प्रायः सुनते हैं कि 'बल्ब फ्यूज हो गया है'। विज्ञान की दृष्टि से इसका सटीक अर्थ निम्नलिखित है:

[सामान्य कार्यशील बल्ब]                  [फ्यूज्ड बल्ब (Fused Bulb)]
     /\/\/\/\ (अखंड फिलामेंट)                /\/\  /\/\ (टूटा हुआ फिलामेंट)
     │      │                                │      │
     │      │                                │      │
[विद्युत धारा प्रवाहित होती है]          [धारा का मार्ग अवरुद्ध (खुला परिपथ)]
[बल्ब प्रदीप्त होता है]                  [बल्ब नहीं जलता]
  1. फिलामेंट का टूटना:
    • जब बल्ब में बहुत अधिक समय तक धारा बहने से फिलामेंट घिसकर पतला हो जाता है, अथवा परिपथ में अचानक अत्यधिक वोल्टता (विद्युत झटका) आ जाती है, तो फिलामेंट का तापमान उसके सुरक्षित स्तर से ऊपर चला जाता है और वह बीच से पिघलकर या टूटकर दो टुकड़ों में बंट जाता है।
  2. परिपथ में विखंडन (Break in Circuit):
    • फिलामेंट के टूट जाने से बल्ब के प्रथम टर्मिनल और द्वितीय टर्मिनल के बीच का चालक संपर्क समाप्त हो जाता है।
    • दोनों टुकड़ों के बीच खाली स्थान (हवा) आ जाती है, जो विद्युत की कुचालक है।
  3. परिणाम:
    • जब किसी परिपथ में फ्यूज्ड बल्ब को जोड़ा जाता है, तो परिपथ अपूर्ण (खुला परिपथ / Open Circuit) हो जाता है।
    • विद्युत सेल से निकलने वाले आवेश फिलामेंट के टूटे हुए सिरे से आगे नहीं बढ़ पाते, धारा का प्रवाह शून्य हो जाता है और बल्ब प्रकाश उत्सर्जित नहीं करता।

मॉड्यूल 4: विद्युत परिपथ: बंद लूप, घटक एवं पारंपरिक विद्युत धारा की दिशा

4.1 विद्युत परिपथ की वैज्ञानिक परिभाषा

विद्युत परिपथ (Electric Circuit) किसी विद्युत स्रोत (जैसे विद्युत सेल अथवा बैटरी) के दोनों टर्मिनलों के मध्य विद्युत धारा के सतत, निर्बाध एवं बंद प्रवाह के संपूर्ण चालक मार्ग (Continuous Closed Conducting Path) को कहते हैं।

भौतिकी का एक अटल नियम है: विद्युत धारा केवल और केवल तभी प्रवाहित हो सकती है जब उसके संचरण के लिए आरंभिक बिंदु से लेकर अंतिम बिंदु तक एक अटूट, अखंड बंद लूप (Closed Loop) उपलब्ध हो। यदि इस मार्ग में कहीं भी कोई दरार, ढीला जोड़, विद्युतरोधी पदार्थ अथवा विच्छेद उपस्थित हो, तो आवेशों की गति तात्कालिक रूप से रुक जाती है।


4.2 विद्युत परिपथ के अनिवार्य घटक एवं उनके विशिष्ट कार्य

एक बुनियादी कार्यकारी विद्युत परिपथ के निर्माण हेतु निम्नलिखित चार घटकों का परस्पर संयोजन आवश्यक है:

                   चालक संयोजक तार (Connecting Wire)
         ┌──────────────────────────────────────────────────┐
         │                                                  │
         ▼                                                  │
      ┌─────┐                                               │
      │ (+) │ धनात्मक टर्मिनल                               │
      │     │                                               │
      │ सेल │ विद्युत सेल (ऊर्जा स्रोत)                      ▼
      │     │                                            ┌──────┐
      │ (-) │ ऋणात्मक टर्मिनल                             │ बल्ब │ लोड (उपभोक्ता)
      └─────┘                                            └──────┘
         ▲                                                  │
         │                                                  │
         └───────────────[ \_ ]─────────────────────────────┘
                         स्विच (ON/OFF नियंत्रक)
  1. विद्युत ऊर्जा स्रोत (Source of Electrical Energy - विद्युत सेल):
    • परिपथ में आवेशों को गति प्रदान करने के लिए आवश्यक विद्युत विभव अंतर (विद्युत वाहक बल - EMF) उत्पन्न करता है।
    • इसके बिना परिपथ में उपस्थित मुक्त इलेक्ट्रॉन किसी निश्चित दिशा में गति नहीं कर सकते।
  2. चालक संयोजक तार (Connecting Wires):
    • सामान्यतः उत्कृष्ट चालक धातुओं (जैसे तांबा अथवा एल्युमीनियम) के बने होते हैं जिनके ऊपर रंगीन प्लास्टिक (PVC) का सुरक्षात्मक आवरण चढ़ा होता है।
    • तारों के सिरों से प्लास्टिक हटाकर धातु को सीधे सेल और बल्ब के टर्मिनलों से जोड़ा जाता है।
    • यह आवेशों के प्रवाह हेतु न्यूनतम प्रतिरोध वाला मार्ग प्रदान करते हैं।
  3. विद्युत लोड / उपभोग युक्ति (Electrical Load - टॉर्च का बल्ब):
    • वह उपकरण जो परिपथ में प्रवाहित होने वाली विद्युत ऊर्जा को कार्य अथवा ऊर्जा के अन्य उपयोगी रूपों (जैसे प्रकाश और ऊष्मा) में रूपांतरित करता है।
  4. परिपथ नियंत्रक युक्ति (Switch / Key):
    • परिपथ को अपनी इच्छानुसार पूर्ण (बंद) करने अथवा खंडित (खुला) करने वाला यांत्रिक द्वार।

4.3 पारंपरिक विद्युत धारा की दिशा (Conventional Current Direction)

विद्युत धारा की दिशा का निर्धारण भौतिक विज्ञान का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक मानक है:

  1. अंतरराष्ट्रीय मानक नियम:
    • किसी विद्युत परिपथ में पारंपरिक विद्युत धारा की दिशा सदैव विद्युत सेल के धनात्मक टर्मिनल ($+$) से आरंभ होकर बाह्य परिपथ तथा लोड (बल्ब) से होते हुए ऋणात्मक टर्मिनल ($-$) की ओर मानी जाती है।
    • परिपथ आरेखों में विद्युत धारा की दिशा को धनात्मक सिरे से ऋणात्मक सिरे की ओर जाते हुए तीर ($\rightarrow$) के निशान द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।

$$\text{पारंपरिक धारा की दिशा (बाह्य परिपथ)}: \quad \text{धनात्मक टर्मिनल } (+) \xrightarrow{\quad \text{चालक तार एवं लोड} \quad} \text{ऋणात्मक टर्मिनल } (-)$$

  1. इलेक्ट्रॉनों का वास्तविक प्रवाह बनाम पारंपरिक धारा (सूक्ष्म दृष्टि):
    • 18वीं शताब्दी में वैज्ञानिक बेंजामिन फ्रैंकलिन के समय जब विद्युत के नियम बने, तब यह माना जाता था कि धनात्मक आवेश प्रवाहित होते हैं।
    • 19वीं शताब्दी के अंत में जब जे.जे. थॉमसन द्वारा इलेक्ट्रॉन की खोज हुई, तब ज्ञात हुआ कि ठोस धातु चालकों में केवल ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन ही गतिमान होते हैं।
    • इलेक्ट्रॉन सेल के ऋणात्मक टर्मिनल (जहाँ इलेक्ट्रॉनों का आधिक्य है) से प्रतिकर्षित होकर धनात्मक टर्मिनल (जहाँ इलेक्ट्रॉनों की कमी है) की ओर गति करते हैं।
    • अतः, इलेक्ट्रॉनों के वास्तविक प्रवाह की दिशा ($- \to +$) पारंपरिक विद्युत धारा की दिशा ($+ \to -$) के ठीक विपरीत होती है।
    • तथापि, बोर्ड परीक्षाओं और भौतिकी के सभी गणनात्मक नियमों में पारंपरिक दिशा ($+ \to -$) को ही सार्वभौमिक रूप से प्रयुक्त किया जाता है।

4.4 परिपथ की स्थितियां: बंद परिपथ बनाम खुला परिपथ

मापदंड बंद परिपथ (Closed Circuit) खुला परिपथ (Open Circuit)
चालक मार्ग की प्रकृति अखंड, सतत एवं पूर्णतः जुड़ा हुआ लूप मार्ग में किसी स्थान पर विच्छेद अथवा रिक्त स्थान
स्विच की स्थिति चालू (ON); संपर्क पूर्ण बंद (OFF); संपर्क टूटा हुआ
विद्युत धारा का मान सामान्य एवं सतत ($I > 0$) शून्य ($I = 0$); कोई धारा नहीं बहती
बल्ब की स्थिति फिलामेंट तप्त होकर प्रकाश उत्सर्जित करता है बल्ब बुझा रहता है (अदीप्त)
संभावित कारण सभी तार, टर्मिनल और फिलामेंट सही जुड़े हैं तार का छूटना, ढीला जोड़, स्विच OFF या बल्ब फ्यूज होना

4.5 सेलों एवं बल्ब के संयोजनों का प्रायोगिक परीक्षण (NCERT क्रियाकलाप 2)

कक्षा 6 के प्रायोगिक पाठ्यक्रम में एक सेल, दो तारों और एक टॉर्च बल्ब को लेकर विभिन्न विन्यासों में जोड़ने का परीक्षण किया जाता है:

  1. व्यवस्था A (दोनों टर्मिनल जुड़े - सीधा संयोजन):
    • तार 1: सेल के धनात्मक टोपी से बल्ब के धातु आवरण (टर्मिनल 1) तक।
    • तार 2: सेल की ऋणात्मक चकती से बल्ब के आधार की नोक (टर्मिनल 2) तक।
    • परिणाम: परिपथ पूर्ण $\to$ बल्ब प्रदीप्त होता है।
  2. व्यवस्था B (एक तार टूटा हुआ):
    • सेल के धनात्मक सिरे से तार बल्ब तक जाता है, परंतु ऋणात्मक सिरे वाला तार बीच में कटा हुआ है।
    • परिणाम: खुला परिपथ $\to$ बल्ब नहीं जलता।
  3. व्यवस्था C (दूसरा तार टूटा हुआ):
    • ऋणात्मक सिरे से तार जुड़ा है परंतु धनात्मक सिरे का तार बीच में टूटा है।
    • परिणाम: खुला परिपथ $\to$ बल्ब नहीं जलता।
  4. व्यवस्था D (सेल के दोनों तार बल्ब के केवल एक ही टर्मिनल से जुड़े):
    • सेल के दोनों सिरों के तार बल्ब के आधार की नोक पर ही लपेट दिए गए हैं और धातु आवरण खाली है।
    • परिणाम: फिलामेंट के माध्यम से धारा नहीं बही $\to$ बल्ब नहीं जलता।
  5. व्यवस्था E (सेल के दोनों तार बल्ब के केवल धातु आवरण से जुड़े):
    • दोनों तार केवल धातु की चूड़ी पर जुड़े हैं और निचली नोक अछूती है।
    • परिणाम: फिलामेंट का दूसरा सिरा परिपथ में नहीं आया $\to$ बल्ब नहीं जलता।
  6. व्यवस्था F (उलटी ध्रुवता का पूर्ण संयोजन):
    • तार 1: सेल के धनात्मक टोपी से बल्ब के आधार की नोक (टर्मिनल 2) तक।
    • तार 2: सेल की ऋणात्मक चकती से बल्ब के धातु आवरण (टर्मिनल 1) तक।
    • परिणाम: परिपथ पूर्ण $\to$ बल्ब प्रदीप्त होता है।

निष्कर्ष: टॉर्च का बल्ब केवल तभी प्रदीप्त होगा जब सेल के दोनों भिन्न टर्मिनलों का संबंध बल्ब के दोनों भिन्न टर्मिनलों से एक बंद एवं अटूट चालक लूप द्वारा स्थापित किया जाए।

मॉड्यूल 5: विद्युत स्विच: संरचना, कार्यप्रणाली एवं परिपथ नियंत्रण

5.1 विद्युत स्विच की वैज्ञानिक अवधारणा एवं परिभाषा

विद्युत स्विच (Electric Switch) एक अत्यंत सरल किंतु अपरिहार्य यांत्रिक युक्ति (Mechanical Control Device) है, जिसका उपयोग किसी विद्युत परिपथ में विद्युत धारा के प्रवाह को अपनी इच्छानुसार जोड़ने (पूर्ण करने / बंद करने) अथवा तोड़ने (खंडित करने / खोलने) के लिए किया जाता है।

यदि परिपथ में स्विच न हो, तो किसी उपकरण (जैसे पंखा या बल्ब) को बंद करने के लिए हमें बार-बार तारों को सेल अथवा सॉकेट से खींचकर अलग करना पड़ेगा, जो न केवल असुविधाजनक है बल्कि स्पार्किंग और विद्युत आघात (Electric Shock) के कारण अत्यंत जोखिमपूर्ण भी है। स्विच हमें बिना किसी खतरे के एक स्पर्श द्वारा पूरे परिपथ को नियंत्रित करने की सुविधा प्रदान करता है।


5.2 साधारण प्रायोगिक स्विच का निर्माण (DIY Science Activity Model)

कक्षा 6 के विज्ञान पाठ्यक्रम के अंतर्गत दैनिक घरेलू वस्तुओं की सहायता से एक पूर्णतः कार्यशील विद्युत स्विच का निर्माण किया जा सकता है:

                  ┌────────────────────────────────────────┐
                  │          थर्माकोल या लकड़ी का आधार      │
                  │                                        │
      तार 1 ──────┼───● ड्राइंग पिन A                     │
                  │    \                                   │
                  │     \  सुरक्षा पिन (Safety Pin)         │
                  │      \ (घूर्णन योग्य धातु की पत्ती)     │
                  │       \                                │
      तार 2 ──────┼────────● ड्राइंग पिन B                 │
                  │                                        │
                  └────────────────────────────────────────┘

1. आवश्यक सामग्रियां

  • एक छोटा थर्माकोल का टुकड़ा अथवा चिकना सूखा लकड़ी का बोर्ड (विद्युतरोधी आधार के रूप में)।
  • दो पीतल अथवा इस्पात की चमकदार ड्राइंग पिन (Drawing Pins / Thumb Tacks)।
  • एक सामान्य धातु की सुरक्षा पिन (Safety Pin) अथवा पेपरक्लिप।
  • दो तांबे के संयोजक तार (जिनके सिरों से 1 सेमी प्लास्टिक इंसुलेशन हटा दिया गया हो)।
  • एक 1.5V का शुष्क सेल तथा एक टॉर्च का बल्ब।

2. संयोजन विधि

  1. सुरक्षा पिन के पिछले गोल छल्ले में पहली ड्राइंग पिन (पिन A) को पिरोएं और उसे थर्माकोल बोर्ड में मजबूती से गाड़ दें। यह सुनिश्चित करें कि सुरक्षा पिन इस पिन A के चारों ओर स्वतंत्रतापूर्वक घूम सके।
  2. अब दूसरी ड्राइंग पिन (पिन B) को बोर्ड पर पिन A से कुछ दूरी पर इस प्रकार गाड़ें कि जब सुरक्षा पिन को घुमाया जाए, तो उसका नुकीला अगला सिरा पिन B के चौड़े सिरे को भली-भांति स्पर्श कर सके।
  3. तार 1 के छीले हुए सिरे को पिन A के नीचे दबा दें तथा तार 2 के छीले हुए सिरे को पिन B के नीचे कस दें।
  4. तार 1 के दूसरे सिरे को सेल के धनात्मक टर्मिनल से और तार 2 को बल्ब से होते हुए सेल के ऋणात्मक टर्मिनल से जोड़ दें।

5.3 स्विच की दो मूलभूत अवस्थाएं एवं उनका भौतिक विश्लेषण

हमारा यह साधारण सुरक्षा पिन स्विच दो विशिष्ट भौतिक स्थितियों में कार्य करता है:

1. स्विच की ON स्थिति (चालू स्थिति / बंद परिपथ)

  • यांत्रिक क्रिया: जब हम सुरक्षा पिन को घुमाकर उसके मुक्त सिरे को दूसरी ड्राइंग पिन B के संपर्क में लाते हैं, तो सुरक्षा पिन दोनों ड्राइंग पिनों के मध्य सेतु (Bridge) का कार्य करती है।
  • भौतिक अवस्था: चूंकि सुरक्षा पिन इस्पात (धातु) की बनी है और धातुएं उत्कृष्ट विद्युत चालक होती हैं, अतः ड्राइंग पिन A और B के बीच चालक संपर्क पूर्ण हो जाता है।
  • परिपथ की स्थिति: परिपथ एक अखंड, बंद लूप (Closed Circuit) बन जाता है।
  • विद्युत धारा: सेल से निकलने वाले आवेश बिना किसी अवरोध के पूरे लूप में प्रवाहित होने लगते हैं।
  • परिणाम: टॉर्च का बल्ब तत्काल प्रदीप्त हो उठता है।

2. स्विच की OFF स्थिति (बंद स्थिति / खुला परिपथ)

  • यांत्रिक क्रिया: जब हम सुरक्षा पिन के सिरे को हटाकर ड्राइंग पिन B से दूर कर देते हैं, तो दोनों पिनों के बीच सीधा धातु संपर्क टूट जाता है।
  • भौतिक अवस्था: अब ड्राइंग पिन A और पिन B के बीच में केवल वायु (Air) उपस्थित होती है। चूंकि सामान्य वायु विद्युत की एक अत्यंत उत्कृष्ट कुचालक (विद्युतरोधी) है, अतः आवेश वायु के इस अंतराल (Air Gap) को पार नहीं कर सकते।
  • परिपथ की स्थिति: परिपथ खंडित हो जाता है और एक खुला परिपथ (Open Circuit) बन जाता है।
  • विद्युत धारा: परिपथ में विद्युत धारा का मान तत्काल शून्य ($I = 0$) हो जाता है।
  • परिणाम: टॉर्च का बल्ब तुरंत बुझ जाता है।

5.4 व्यावहारिक एवं आधुनिक स्विचों की संरचनात्मक विविधता

यद्यपि सभी स्विचों का मूल सिद्धांत ड्राइंग पिन मॉडल जैसा ही होता है (संपर्क बनाना और संपर्क तोड़ना), किंतु विभिन्न आवश्यकताओं के अनुसार इनके कई व्यावहारिक रूप उपलब्ध हैं:

  1. टॉर्च का स्लाइड स्विच (Slide Switch):
    • टॉर्च के प्लास्टिक आवरण के ऊपर एक प्लास्टिक का बटन लगा होता है जिसे अंगूठे से आगे या पीछे खिसकाया जाता है।
    • प्लास्टिक बटन के नीचे एक छोटी धातु की पत्ती जुड़ी होती है। जब बटन को आगे खिसकाते हैं, तो यह पत्ती सेल और बल्ब के संपर्क बिंदुओं को जोड़ देती है (ON)। पीछे खींचने पर संपर्क टूट जाता है (OFF)।
  2. घरेलू दीवार के टॉगल स्विच (Wall Rocker / Toggle Switches):
    • घरों के बिजली बोर्ड में लगे स्विच एक स्प्रिंग-लोडेड तंत्र पर कार्य करते हैं, जिससे वे तेजी से ऑन या ऑफ होते हैं ताकि स्पार्किंग न्यूनतम हो।
    • महत्वपूर्ण सुरक्षा नियम: घरेलू वायरिंग में स्विच को सदैव जीवित तार (Live Wire / Phase) के क्रम में ही जोड़ा जाता है, कभी भी उदासीन (Neutral) तार में नहीं। यदि स्विच को उदासीन तार में लगाया जाए, तो स्विच OFF होने पर भी उपकरण में 220V की घातक वोल्टता बनी रहेगी और मरम्मत के दौरान छूने पर भीषण झटका लग सकता है।
  3. लघु परिपथ वियोजक (MCB - Miniature Circuit Breaker):
    • आधुनिक भवनों में पुराने फ्यूज के स्थान पर MCB का प्रयोग किया जाता है।
    • यह एक स्वचालित विद्युत-चुंबकीय स्विच है। जब परिपथ में शॉर्ट सर्किट अथवा अतिभारण (Overload) के कारण अत्यधिक सुरक्षित सीमा से अधिक धारा बहती है, तो MCB का स्विच स्वतः नीचे गिरकर (Trip होकर) परिपथ को तोड़ देता है और आग लगने से बचाता है। दोष ठीक करने के बाद इसे पुनः ऊपर उठाकर चालू किया जा सकता है।

मॉड्यूल 6: विद्युत चालक एवं विद्युतरोधी पदार्थ: इलेक्ट्रॉनिक सिद्धांत एवं वर्गीकरण

6.1 पदार्थों का विद्युतीय वर्गीकरण एवं परमाणु स्तर पर भौतिक आधार

पदार्थ अपने भीतर से विद्युत आवेशों (इलेक्ट्रॉनों) को गुजरने देने की क्षमता के आधार पर एक समान व्यवहार प्रदर्शित नहीं करते। कुछ पदार्थ विद्युत धारा को अत्यधिक सुगमता से प्रवाहित होने देते हैं, जबकि कुछ पदार्थ धारा के मार्ग में अभेद्य अवरोध उत्पन्न करते हैं।

इस व्यवहार का मूल कारण पदार्थों की परमाण्विक संरचना (Atomic Structure) और उनमें उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की स्वतंत्रता की स्थिति है:

  • प्रत्येक परमाणु के नाभिक में धनावेशित प्रोटॉन होते हैं और बाहर विभिन्न कक्षाओं में ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन परिक्रमा करते हैं।
  • बाह्यतम कक्षा के इलेक्ट्रॉनों को संयोजी इलेक्ट्रॉन (Valence Electrons) कहा जाता है।
  • जिस पदार्थ में संयोजी इलेक्ट्रॉन नाभिक के आकर्षण से मुक्त होकर पूरे पदार्थ में भ्रमण करने के लिए स्वतंत्र होते हैं, वह पदार्थ विद्युत चालक बनता है।
  • जिस पदार्थ में सभी इलेक्ट्रॉन नाभिक द्वारा दृढ़ता से बंधे होते हैं और कोई भी इलेक्ट्रॉन गति हेतु उपलब्ध नहीं होता, वह पदार्थ विद्युतरोधी (कुचालक) बन जाता है।

6.2 विद्युत चालक (Conductors): लक्षण, वैज्ञानिक आधार एवं उदाहरण

1. वैज्ञानिक परिभाषा

विद्युत चालक (Electrical Conductors) उन पदार्थों को कहा जाता है जो अपने भीतर से विद्युत आवेशों अथवा विद्युत धारा को अत्यंत न्यूनतम प्रतिरोध के साथ सुगमतापूर्वक प्रवाहित होने की अनुमति देते हैं।

2. वैज्ञानिक आधार

चालकों के भीतर विशाल संख्या में मुक्त इलेक्ट्रॉन (Free Electrons) उपस्थित होते हैं। जब किसी चालक तार के सिरों पर किसी सेल द्वारा विभवांतर आरोपित किया जाता है, तो ये सभी मुक्त इलेक्ट्रॉन विद्युत क्षेत्र की विपरीत दिशा में एक संगठित धारा के रूप में बहने लगते हैं।

3. प्रमुख उदाहरण

  • धातुएं (Metals): सभी धातुएं विद्युत की उत्कृष्ट चालक होती हैं।
    • चांदी (Silver - Ag): प्रकृति में सबसे श्रेष्ठ विद्युत चालक। (अत्यधिक महंगी होने के कारण सामान्य तारों में प्रयुक्त नहीं होती)।
    • तांबा (Copper - Cu): अत्यधिक उच्च चालकता, सस्ता और तन्य; घरेलू एवं औद्योगिक वायरिंग का मुख्य आधार।
    • एल्युमिनियम (Aluminium - Al): हल्का और अच्छा चालक; उच्च वोल्टता वाली दूरस्थ पारेषण लाइनों में प्रयुक्त।
    • लोहा, इस्पात, पीतल, कांसा और सोना: अन्य महत्वपूर्ण चालक धातुएं।
  • अधातु अपवाद — ग्रेफाइट (Graphite): यद्यपि अधातुएं कुचालक होती हैं, किंतु कार्बन का एक विशेष अपररूप 'ग्रेफाइट' (जो पेंसिल की लेड में पाया जाता है) अपनी विशिष्ट परतदार आणविक संरचना के कारण मुक्त इलेक्ट्रॉन रखता है और विद्युत का बहुत अच्छा चालक होता है।
  • अशुद्ध एवं लवणयुक्त जल (Aqueous Solutions): नल का पानी, कुएं का पानी, नदी का पानी, तालाब का जल तथा नमक घुला हुआ जल। इनमें घुले हुए खनिज लवण आयनों ($Na^+$, $Cl^-$ आदि) में टूट जाते हैं, जो धारा का वहन करते हैं।
  • मानव शरीर (Human Body): हमारे रक्त और कोशिकाओं में लवण और जल उपस्थित होने के कारण मानव शरीर विद्युत का एक अत्यंत संवेदनशील एवं प्रभावी चालक है।

6.3 विद्युतरोधी / कुचालक पदार्थ (Insulators): लक्षण, आधार एवं उदाहरण

1. वैज्ञानिक परिभाषा

विद्युतरोधी या कुचालक (Electrical Insulators) उन पदार्थों को कहा जाता है जो अपने भीतर से विद्युत धारा को प्रवाहित नहीं होने देते तथा धारा के प्रवाह का अत्यधिक प्रचंड प्रतिरोध करते हैं।

2. वैज्ञानिक आधार

विद्युतरोधी पदार्थों के परमाणुओं में संयोजी इलेक्ट्रॉन अपने नाभिकों के साथ अत्यंत शक्तिशाली वैद्युत आकर्षण बल द्वारा आबद्ध रहते हैं। सामान्य परिस्थितियों में इनमें एक भी मुक्त इलेक्ट्रॉन गति करने हेतु उपलब्ध नहीं होता। अतः जब इन पर कोई विद्युत विभव लगाया जाता है, तब भी आवेशों का कोई प्रवाह उत्पन्न नहीं होता।

3. प्रमुख उदाहरण

  • रबर (Rubber): प्राकृतिक एवं सिंथेटिक रबर, जो विद्युत का अभेद्य अवरोधक है।
  • प्लास्टिक (Plastics - विशेष रूप से PVC / बैकेलाइट): तारों के ऊपर चढ़ाए जाने वाले पॉलीविनाइल क्लोराइड तथा स्विचों में प्रयुक्त कठोर बैकेलाइट।
  • कांच (Glass): अत्यधिक उच्च प्रतिरोध वाला पारदर्शी विद्युतरोधी पदार्थ।
  • शुष्क लकड़ी एवं कार्डबोर्ड (Dry Wood & Paper): नमी रहित सूखी लकड़ी और कागज। (ध्यान दें: यदि लकड़ी गीली हो, तो वह पानी के कारण अल्प चालक बन सकती है)।
  • पोर्सिलेन / चीनी मिट्टी (Porcelain): उच्च वोल्टता वाले ग्रिड इंसुलेटर में प्रयुक्त।
  • शुद्ध आसुत जल (Pure Distilled Water): बिना किसी लवण या खनिज वाला जल पूर्णतः विद्युतरोधी होता है।
  • शुष्क वायु (Dry Air): हमारे चारों ओर उपस्थित वायु विद्युत की उत्कृष्ट कुचालक है, जिसके कारण दीवार के सॉकेट से धारा स्वतः हवा में कूदकर हमारे शरीर में नहीं आती।

6.4 द्वैध-सामग्री वास्तुकला (Dual-Material Engineering Architecture)

मानव समाज में विद्युत का सुरक्षित एवं प्रभावी उपयोग केवल तभी संभव हुआ है जब वैज्ञानिकों ने चालक और कुचालक पदार्थों को एक साथ जोड़कर विशेष संरचनाएं तैयार कीं:

उपकरण / वस्तु चालक घटक (Conductor Core) विद्युतरोधी घटक (Insulating Jacket) वैज्ञानिक उद्देश्य
घरेलू विद्युत तार आंतरिक तांबा अथवा एल्युमिनियम का तार बाह्य रंगीन PVC या रबर का आवरण तांबा धारा ले जाता है; PVC व्यक्ति को छूने पर करंट लगने से बचाता है।
इलेक्ट्रीशियन का पेचकस अग्र भाग कठोर क्रोम-वैनेडियम इस्पात का हत्था (Handle) मोटा पारदर्शी प्लास्टिक या सेल्यूलोज धातु पेंच कसती है; प्लास्टिक हाथ को 220V विभव से सुरक्षित रखता है।
प्लास (Pliers) जबड़े और जोड़ मजबूत लोहे के हत्थों पर चढ़ी मोटी रबर की आस्तीन (Sleeve) लोहे से तार काटा/मोड़ा जाता है; रबर प्रयोक्ता को विद्युत आघात से बचाती है।
बिजली के प्लग और पिन सॉकेट में जाने वाली पीतल की ठोस पिनें बाहर का प्लास्टिक या बैकेलाइट का खोल (Casing) पीतल परिपथ से धारा ग्रहण करता है; बाहरी खोल सुरक्षित पकड़ देता है।
हाई-टेंशन बिजली के खंभे एल्युमिनियम के संचरण तार (कंडक्टर) खंभे और तार के बीच चीनी मिट्टी (Porcelain) के डिस्क विद्युत तार के करंट को लोहे के खंभे में उतरने से रोकते हैं।

6.5 चालकता परीक्षक (Conduction Tester) द्वारा पदार्थों का प्रायोगिक परीक्षण

एक सेल, एक बल्ब और तीन तारों की सहायता से एक 'चालकता परीक्षक' तैयार किया जाता है जिसमें दो तारों के सिरे A और B खुले छोड़े जाते हैं। जब विभिन्न वस्तुओं को सिरे A और B के बीच रखा जाता है, तो निम्नलिखित प्रेक्षण प्राप्त होते हैं:

परीक्षण वस्तु पदार्थ का प्रकार बल्ब की स्थिति (जला / नहीं जला) वैज्ञानिक निष्कर्ष
लोहे की कील धातु (लोहा) जला (प्रदीप्त) विद्युत चालक (Conductor)
पेंसिल की लेड अधातु (ग्रेफाइट) जला (प्रदीप्त) विद्युत चालक (Conductor)
तांबे का सिक्का धातु (तांबा) जला (प्रदीप्त) विद्युत चालक (Conductor)
प्लास्टिक का स्केल प्लास्टिक (पॉलिमर) नहीं जला (बुझा रहा) विद्युतरोधी (Insulator)
रबर की इरेज़र रबर नहीं जला (बुझा रहा) विद्युतरोधी (Insulator)
सूखी लकड़ी की तीली सेल्युलोज (शुष्क) नहीं जला (बुझा रहा) विद्युतरोधी (Insulator)
कांच की चूड़ी का टुकड़ा सिलिका (कांच) नहीं जला (बुझा रहा) विद्युतरोधी (Insulator)
कागज़ की पट्टी पादप रेशा नहीं जला (बुझा रहा) विद्युतरोधी (Insulator)
स्टील का चम्मच मिश्रधातु (इस्पात) जला (प्रदीप्त) विद्युत चालक (Conductor)
एल्युमिनियम फॉयल धातु (एल्युमिनियम) जला (प्रदीप्त) विद्युत चालक (Conductor)

मॉड्यूल 7: विद्युत सुरक्षा, सावधानियां, मानव शरीर एवं प्राथमिक उपचार

7.1 मानव शरीर की विद्युत चालकता एवं जैविक प्रभाव

मानव शरीर विद्युत का एक अत्यंत सुग्राही एवं उत्कृष्ट चालक है। हमारे शरीर के कुल भार का लगभग $65\%$ से $70\%$ भाग जल है, जिसमें सोडियम ($Na^+$), पोटेशियम ($K^+$), कैल्शियम ($Ca^{2+}$) और क्लोराइड ($Cl^-$) जैसे महत्वपूर्ण खनिज आयन घुले होते हैं। यही आयनिक द्रव हमारी तंत्रिकाओं (Nerves) में संदेशों के संचरण को संभव बनाता है।

जब मानव शरीर किसी बाह्य विद्युत विभव (जैसे 220V घरेलू मेंस) के संपर्क में आता है और साथ ही शरीर का कोई अन्य भाग पृथ्वी (Ground) या किसी सुचालक फर्श के संपर्क में होता है, तो मानव शरीर एक संयोजक तार की भांति परिपथ को पूर्ण कर देता है।

1. त्वचा का प्रतिरोध एवं नमी का विनाशकारी प्रभाव

विद्युत धारा के प्रवाह में मानव शरीर का मुख्य प्रतिरोध उसकी बाहरी त्वचा (Skin) पर निर्भर करता है:

  • शुष्क त्वचा का प्रतिरोध (Dry Skin Resistance): पूर्णतः सूखी और मोटी त्वचा का विद्युत प्रतिरोध लगभग $100,000\ \Omega$ ($100\text{ k}\Omega$) से लेकर $500,000\ \Omega$ तक हो सकता है। इस स्थिति में यदि गलती से अल्प विभव का तार छू जाए, तो प्रतिरोध धारा को बहुत कम रखता है।
  • गीली त्वचा का प्रतिरोध (Wet Skin Resistance): जब त्वचा पसीने, पानी अथवा गीले फर्श के संपर्क में आती है, तो जल में लवण घुलकर त्वचा के प्रतिरोध को तेजी से गिरा देते हैं। गीली त्वचा का प्रतिरोध घटकर मात्र $1,000\ \Omega$ ($1\text{ k}\Omega$) या उससे भी कम रह जाता है।

2. ओम के नियम द्वारा धारा की गणना ($I = V / R$)

यदि कोई व्यक्ति 220V की घरेलू विद्युत आपूर्ति को गीले हाथों से छूता है:

$$I = \frac{V}{R} = \frac{220\text{ V}}{1000\ \Omega} = 0.22\text{ A} = 220\text{ mA}$$

मानव शरीर पर विभिन्न विद्युत धाराओं का प्रभाव निम्नलिखित है:

  • $1\text{ mA}$: हल्का सा कंपन महसूस होना।
  • $5\text{ mA}$: हल्का झटका, व्यक्ति हाथ खींच सकता है।
  • $10 - 20\text{ mA}$: पेशियों का अनैच्छिक संकुचन (Muscle Freezing); व्यक्ति तार को छोड़ नहीं पाता।
  • $50\text{ mA}$ से अधिक: श्वसन तंत्र का पक्षाघात (Respiratory Paralysis) और हृदय की धड़कनों का अनियंत्रित होना (Ventricular Fibrillation)।
  • $100 - 220\text{ mA}$: हृदय गति तत्काल रुक जाना और कुछ ही सेकंडों में मृत्यु।

अतः, गीले हाथों से 220V मेंस को छूना सीधे मृत्यु को निमंत्रण देना है।


7.2 घरेलू एवं विद्यालयी स्तर पर विद्युत सुरक्षा के अनिवार्य नियम

विद्युत ऊर्जा अत्यंत उपयोगी सेवक है, किंतु तनिक सी असावधानी इसे जानलेवा बना देती है। प्रत्येक छात्र को निम्नलिखित सुरक्षा नियमों को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाना चाहिए:

  1. घरेलू मेंस सॉकेट से कभी खिलवाड़ न करें:
    • घर की दीवारों में लगे प्लग सॉकेट, इनवर्टर, जनरेटर तथा सड़कों पर लगे ट्रांसफॉर्मर और बिजली के खंभों में $220\text{ V}$ से लेकर $11,000\text{ V}$ तक की प्राणघाती विद्युत धारा प्रवाहित होती है।
    • छात्रों को कभी भी इन सॉकेटों में तार, कील, चिमटी या पेंसिल डालकर कोई प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  2. प्रयोगों हेतु केवल शुष्क सेल का ही उपयोग करें:
    • कक्षा 6 के स्तर पर परिपथ, बल्ब, स्विच या चालकता से संबंधित सभी वैज्ञानिक प्रयोग केवल और केवल 1.5V के शुष्क सेल (Dry Cell) की सहायता से ही किए जाने चाहिए। 1.5V का विभव मानव त्वचा के उच्च प्रतिरोध को पार नहीं कर सकता और पूर्णतः सुरक्षित होता है।
  3. गीले हाथों एवं नंगे पैरों से विद्युत उपकरण न छुएं:
    • कभी भी स्नान के तुरंत बाद, गीले हाथों से अथवा पानी भरे फर्श पर नंगे पैर खड़े होकर किसी गीजर, हीटर, कूलर, पंखे या स्विच को चालू/बंद न करें। हमेशा सूखी रबर की चप्पलें पहनें।
  4. क्षतिग्रस्त तारों और ढीले जोड़ों से बचाव:
    • यदि किसी तार का प्लास्टिक इंसुलेशन कट गया हो या अंदर का तांबा दिखाई दे रहा हो, तो उस तार का उपयोग तुरंत बंद करें और उस पर इलेक्ट्रीशियन इंसुलेशन टेप लगाएं।
  5. एक ही सॉकेट पर अत्यधिक भार (Overloading) न डालें:
    • एक ही मल्टी-प्लग में कई भारी उपकरण (जैसे हीटर, आयरन, इंडक्शन) एक साथ लगाने से तारों में अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है और शार्ट सर्किट से भीषण आग लग सकती है।
  6. आंधी-तूफान एवं तड़ित (आकाशीय बिजली) के दौरान सावधानियां:
    • आंधी में यदि सड़क पर बिजली का तार टूटकर गिर जाए, तो उसके पास न जाएं और तुरंत विद्युत विभाग को सूचित करें।
    • आकाशीय बिजली चमकने के समय ऊंचे पेड़ों, धातु के खंभों या मोबाइल टॉवरों के नीचे शरण न लें।

7.3 इलेक्ट्रीशियन के व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE)

बिजली मिस्त्री (Electrician) जब सजीव विद्युत लाइनों पर कार्य करते हैं, तो वे विशिष्ट सुरक्षा युक्तियों का प्रयोग करते हैं:

  1. विद्युतरोधी रबर के दस्ताने (High-Voltage Insulating Rubber Gloves):
    • ये दस्ताने शुद्ध मोटे रबर के बने होते हैं जो 1000V से अधिक विभव का सामना कर सकते हैं।
    • यदि मिस्त्री का हाथ किसी नंगे जीवित तार को छू भी जाए, तो रबर का अत्यधिक उच्च प्रतिरोध धारा को शरीर में प्रवेश नहीं करने देता।
  2. रबर या पीवीसी के मोटे तलवे वाले सुरक्षा जूते (Rubber-Soled Safety Boots):
    • ये जूते मानव शरीर और पृथ्वी (जमीन) के बीच एक पूर्ण विद्युतरोधी अवरोध स्थापित कर देते हैं।
    • पृथ्वी के साथ संपर्क कट जाने के कारण परिपथ खुला (Open Circuit) रहता है और धारा शरीर से होकर जमीन में नहीं जा पाती।
  3. इंसुलेटेड टूल्स (विद्युतरोधी औजार):
    • पेचकस, प्लास और कटर के हत्थों पर 1000V रेटेड प्लास्टिक का मोटा आवरण चढ़ा होता है।

7.4 विद्युत दुर्घटना के समय तात्कालिक प्राथमिक उपचार (First Aid Protocol)

यदि आपके सामने कोई व्यक्ति दुर्घटनावश किसी विद्युत तार के संपर्क में आ जाए और उसे करंट लग रहा हो, तो घबराने के बजाय तत्काल निम्नलिखित वैज्ञानिक चरणों का पालन करें:

[विद्युत आघात की आपातकालीन स्थिति]
            ↓
[चरण 1: पीड़ित को सीधे नंगे हाथों से कदापि न छुएं!]
            ↓
[चरण 2: तुरंत मुख्य विद्युत स्विच (Main Switch / MCB) बंद करें]
            ↓
[चरण 3: यदि स्विच दूर हो, तो सूखी लकड़ी / प्लास्टिक के डंडे से तार को अलग करें]
            ↓
[चरण 4: पीड़ित को सूखी जमीन पर लिटाएं, श्वास व नाड़ी की जांच करें]
            ↓
[चरण 5: आवश्यक होने पर CPR दें तथा तुरंत 108/112 एम्बुलेंस को कॉल करें]
  1. स्वयं की सुरक्षा सर्वोपरि:
    • पीड़ित को कभी भी सीधे नंगे हाथों से न पकड़ें! चूंकि मानव शरीर सुचालक है, पीड़ित को छूते ही आप भी उसी परिपथ का हिस्सा बन जाएंगे और करंट आपके शरीर में भी प्रवाहित होने लगेगा।
  2. विद्युत आपूर्ति विच्छेद (Power Isolation):
    • सर्वप्रथम दौड़कर घर का मेन स्विच (Main Switch) अथवा MCB बंद कर दें। विद्युत प्रवाह रुकते ही पीड़ित तार से स्वतः मुक्त हो जाएगा।
  3. गैर-चालक वस्तु का प्रयोग (Non-Conducting Separation):
    • यदि मेन स्विच तुरंत न मिले, तो अपने पैरों में सूखी रबर की चप्पल पहनें, और किसी सूखे लकड़ी के डंडे, प्लास्टिक की पाइप, सूखी झाड़ू अथवा मुड़े हुए सूखे अखबार की सहायता से तार को पीड़ित के शरीर से दूर झटक दें अथवा पीड़ित के कपड़ों के किसी ढीले सूखे हिस्से को पकड़कर दूर खींचें।
  4. चिकित्सीय प्राथमिक उपचार एवं पुनर्प्राप्ति:
    • पीड़ित को हवादार स्थान पर समतल भूमि पर लिटाएं और कपड़े ढीले करें।
    • यदि व्यक्ति अचेत हो और श्वास बंद हो गई हो, तो प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा तुरंत कृत्रिम श्वास और सीपीआर (Cardiopulmonary Resuscitation - CPR) देना प्रारंभ करें।
    • अविलंब आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा (108 / 112) अथवा निकटतम चिकित्सक को बुलाएं।

महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र, अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

विद्युत सेल टर्मिनल एवं विभवांतर संरचना नियम (Electric Cell Terminal & Potential Framework)

विद्युत सेल एक स्वतंत्र विद्युत रासायनिक स्रोत है जिसमें दो ध्रुव होते हैं:

  1. धनात्मक टर्मिनल (+): शीर्ष पर स्थित धातु की उभरी टोपी (Metal Cap), जो आंतरिक रूप से केंद्रीय कार्बन/ग्रेफाइट छड़ से जुड़ी होती है।
  2. ऋणात्मक टर्मिनल (-): तल पर स्थित समतल धातु की चकती (Metal Disc), जो जिंक के बाहरी पात्र का निचला भाग होती है। कार्यकारी नियम:

$$विभवांतर (V) = V_{(+)} - V_{(-)} = 1.5 V$$

धारा प्रवाह की अनिवार्य शर्त: परिपथ में आवेशों की गति केवल तभी संभव है जब सेल के दोनों भिन्न टर्मिनलों के मध्य बाह्य चालक मार्ग जुड़ा हो। यदि सेल के केवल एक टर्मिनल से तार जोड़े जाएं तो कोई विभव अंतर कार्य नहीं करेगा और धारा शून्य रहेगी।

टॉर्च बल्ब फिलामेंट एवं द्वैध टर्मिनल विन्यास नियम (Bulb Anatomy & Terminal Separation Framework)

टॉर्च का बल्ब विद्युत धारा के उष्मीय प्रभाव पर कार्य करता है:

  1. फिलामेंट (तंतु): टंगस्टन धातु (गलनांक $3422^$) का कुंडलित तार जो उच्च तापमान ($2000^-2500^$) पर श्वेत-तप्त होकर प्रकाश उत्सर्जित करता है।
  2. दो सहायक तार: एक तार धातु के आवरण (टर्मिनल 1) से तथा दूसरा तार आधार की नुकीली नोक (टर्मिनल 2) से जुड़ता है।
  3. विद्युतरोधी सील: दोनों टर्मिनलों के मध्य कठोर काला सीलिंग मोम या कांच भरा होता है ताकि वे आपस में स्पर्श न करें। नियम: बल्ब केवल तभी प्रदीप्त होगा जब धारा फिलामेंट के भीतर से प्रवेश करके दूसरे टर्मिनल से बाहर निकले। आधार पर टर्मिनलों का परस्पर स्पर्श आंतरिक शॉर्ट सर्किट उत्पन्न करता है।
पूर्ण बंद परिपथ एवं पारंपरिक धारा प्रवाह दिशा नियम (Closed Circuit & Conventional Current Rule)

विद्युत परिपथ एक अखंड चालक लूप है जो धारा प्रवाह को सक्षम बनाता है:

  1. बंद परिपथ (Closed Circuit): स्रोत, चालक तार, लोड और नियंत्रक बिना किसी विच्छेद के जुड़े होते हैं; परिपथ में $I > 0$ होता है और बल्ब जलता है।
  2. खुला परिपथ (Open Circuit): तार टूटने, ढीला होने, स्विच OFF होने या बल्ब फ्यूज होने पर मार्ग टूट जाता है; $I = 0$ होता है और बल्ब नहीं जलता।
  3. पारंपरिक धारा की दिशा: बाह्य परिपथ में सदैव सेल के धनात्मक सिरे (+) से लोड होते हुए ऋणात्मक सिरे (-) की ओर होती है।

$$दिशा: (+) →{ बाह्य परिपथ एवं बल्ब } (-)$$

इलेक्ट्रॉनों का वास्तविक प्रवाह इसके विपरीत ऋणात्मक (-) से धनात्मक (+) की ओर होता है।

फ्यूज्ड बल्ब एवं परिपथ विच्छेद विश्लेषण नियम (Fused Bulb & Open Circuit Diagnostic Framework)

फ्यूज्ड बल्ब (Fused Bulb) की वैज्ञानिक पहचान एवं परिपथ प्रभाव:

  1. भौतिक कारण: अत्यधिक धारा, वोल्टता झटके या निरंतर घिसाव के कारण टंगस्टन फिलामेंट का बीच से टूट जाना।
  2. आंतरिक स्थिति: फिलामेंट के टूटने से टर्मिनल 1 और टर्मिनल 2 के बीच का भौतिक चालक संपर्क समाप्त हो जाता है और मध्य में हवा आ जाती है।
  3. नैदानिक सूत्र:

$$फिलामेंट अखंड ⇒ परिपथ पूर्ण (Closed) ⇒ धारा प्रवाह ⇒ बल्ब प्रदीप्त$$

$$फिलामेंट खंडित ⇒ परिपथ अपूर्ण (Open) ⇒ धारा अवरुद्ध (I=0) ⇒ बल्ब अदीप्त$$

अतः, किसी परिपथ में बाकी सभी तार व सेल ठीक होने पर भी यदि बल्ब का फिलामेंट टूटा है तो वह खुले परिपथ की भांति कार्य करेगा।

सुरक्षा पिन स्विच क्रियाविधि एवं वायु अंतराल नियम (Switch Mechanism & Air-Gap Framework)

विद्युत स्विच परिपथ को जोड़ने या तोड़ने वाला यांत्रिक द्वार है:

  1. ON स्थिति (चालू): सुरक्षा पिन दोनों ड्राइंग पिनों को स्पर्श करती है। धातु संपर्क के कारण चालक मार्ग पूर्ण हो जाता है, जिससे बंद परिपथ बनता है और धारा प्रवाहित होती है।
  2. OFF स्थिति (बंद): सुरक्षा पिन को दूसरी ड्राइंग पिन से अलग कर दिया जाता है। दोनों पिनों के बीच वायु (Air) आ जाती है।
  3. वायु अंतराल नियम:

$$शुष्क वायु = उत्कृष्ट विद्युतरोधी (इंसुलेटर) ⇒ आवेशों का संचरण असंभव ⇒ I = 0$$

घरेलू सुरक्षा नियम: दीवार के स्विच को सदैव फेज/जीवित तार (Live Wire) के क्रम में जोड़ा जाता है ताकि स्विच OFF करने पर उपकरण में कोई अवशिष्ट वोल्टता न रहे।

पदार्थों का इलेक्ट्रॉनिक चालकता वर्गीकरण नियम (Electronic Conduction & Insulation Framework)

पदार्थों का विद्युतीय व्यवहार उनमें उपस्थित मुक्त इलेक्ट्रॉनों पर निर्भर करता है:

  1. विद्युत चालक (Conductors): प्रचुर मात्रा में मुक्त संयोजी इलेक्ट्रॉन उपस्थित; न्यूनतम प्रतिरोध ($R → 0$); उदाहरण: तांबा, एल्युमिनियम, चांदी, लोहा, ग्रेफाइट, अशुद्ध जल, मानव शरीर।
  2. विद्युतरोधी (Insulators): मुक्त इलेक्ट्रॉनों का पूर्ण अभाव; सभी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दृढ़तापूर्वक बंधे; अत्यधिक उच्च प्रतिरोध ($R → $); उदाहरण: रबर, प्लास्टिक (PVC), कांच, सूखी लकड़ी, वायु। चालकता परीक्षण नियम:

$$परीक्षण वस्तु को परिपथ में लगाने पर: बल्ब जला ⇒ चालक, बल्ब नहीं जला ⇒ विद्युतरोधी$$

द्वैध-सामग्री सुरक्षा वास्तुकला सिद्धांत (Dual-Material Safety Engineering Principle)

विद्युत उपकरणों की संरचना दो विपरीत सामग्रियों के सामंजस्य पर आधारित होती है:

  1. अंतर्निहित चालक कोर (Conductive Core): परिपथ में विद्युत धारा को बिना ऊर्जा हानि के गंतव्य तक पहुंचाना (जैसे तांबे का आंतरिक तार, पेचकस का इस्पात अग्र भाग, प्लग की पीतल पिन)।
  2. बाह्य विद्युतरोधी आवरण (Insulating Sheath): धारा को बाहर लीक होने से रोकना तथा प्रयोक्ता को विद्युत संपर्क से बचाना (जैसे PVC जैकेट, प्लास्टिक हैंडल, रबर ग्रिप)। इंजीनियरिंग नियम:

$$उपकरण कार्यक्षमता = चालक कोर + विद्युतरोधी आवरण$$

यदि बाह्य इंसुलेशन कट जाए या घिस जाए, तो उपकरण तात्कालिक रूप से घातक खतरे में बदल जाता है।

विद्युत आघात प्रतिरोध एवं प्राथमिक उपचार सुरक्षा प्रोटोकॉल (Ohm's Law Shock & First Aid Protocol)

मानव शरीर की विद्युत चालकता और आघात तीव्रता का नियम:

  1. ओम का नियम: प्रवाहित धारा $I = V / R$।
  2. त्वचा प्रतिरोध प्रभाव:

$$शुष्क त्वचा: R ≈ 100,000\ ⇒ I = {220}{100000} = 2.2 mA (हल्का कंपन)$$

$$गीली त्वचा: R ≈ 1,000\ ⇒ I = {220}{1000} = 220 mA (घातक हृदय आघात)$$

  1. आपातकालीन प्राथमिक उपचार प्रोटोकॉल:
  • कभी भी पीड़ित को नंगे हाथों से न छुएं।
  • सर्वप्रथम मेन स्विच / MCB बंद करें।
  • सूखी लकड़ी या प्लास्टिक से तार को अलग करें।
  • 108 / 112 एम्बुलेंस को तत्काल सूचित करें।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
विद्युत सेल के दो टर्मिनलों के नाम लिखिए तथा बताइए कि सेल पर उनकी पहचान किस प्रकार की जाती है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

विद्युत सेल में दो विशिष्ट टर्मिनल (सिरे) होते हैं:

  1. धनात्मक टर्मिनल (+ Positive Terminal):
    • पहचान: सेल के ऊपरी सिरे पर एक छोटी, उभरी हुई धातु की टोपी (Metal Cap) लगी होती है। इसके निकट सेल के आवरण पर धनात्मक चिह्न (+) अंकित होता है।
  2. ऋणात्मक टर्मिनल (- Negative Terminal):
    • पहचान: सेल के निचले सिरे पर एक सपाट, चिकनी धातु की गोल चकती (Metal Disc) होती है। इसके निकट सेल के आवरण पर ऋणात्मक चिह्न (-) अंकित होता है।
उदाहरण 2
एक छात्र ने एक कार्यशील विद्युत सेल और टॉर्च के बल्ब को तारों से जोड़ा, फिर भी बल्ब प्रदीप्त नहीं हुआ। इसके संभावित 3 वैज्ञानिक कारण लिखिए और उनका निवारण बताइए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

बल्ब के प्रदीप्त न होने के तीन प्रमुख वैज्ञानिक कारण एवं उनके निवारण निम्नलिखित हैं:

  1. बल्ब का फ्यूज होना (Broken Filament):
    • कारण: बल्ब का आंतरिक टंगस्टन फिलामेंट बीच से टूटा हो सकता है, जिससे परिपथ खुला (अपूर्ण) रह जाता है।
    • निवारण: बल्ब को रोशनी में देखकर फिलामेंट की जांच करें; यदि टूटा हो तो नया बल्ब लगाएं।
  2. तारों का ढीला अथवा अनुचित जुड़ाव (Loose or Improper Connection):
    • कारण: तारों के सिरों से प्लास्टिक इंसुलेशन पूरी तरह न हटाया गया हो या सेल व बल्ब के टर्मिनलों पर तार ढीले बंधे हों।
    • निवारण: तारों के सिरों को 1 सेमी छीलकर धातु-से-धातु का संपर्क सुनिश्चित करें और कसकर बांधें।
  3. विद्युत सेल का निःशेष होना (Exhausted / Dead Cell):
    • कारण: सेल के भीतर के रासायनिक पदार्थ पूरी तरह प्रयुक्त हो चुके हों, जिससे वह 1.5V का विभवांतर उत्पन्न न कर पा रहा हो।
    • निवारण: पुराने सेल के स्थान पर एक नया आवेशित शुष्क सेल लगाकर परीक्षण करें।
उदाहरण 3
सुरक्षा पिन और ड्राइंग पिन की सहायता से बनाए गए साधारण विद्युत स्विच की ON और OFF स्थितियों की वैज्ञानिक कार्यप्रणाली स्पष्ट कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

सुरक्षा पिन स्विच की कार्यप्रणाली निम्नलिखित दो स्थितियों पर आधारित है:

  1. स्विच की ON (चालू) स्थिति:
    • जब सुरक्षा पिन के स्वतंत्र सिरे को घुमाकर दूसरी ड्राइंग पिन के संपर्क में लाया जाता है, तो दोनों धातु पिनों के बीच सीधा चालक सेतु बन जाता है।
    • चूंकि सुरक्षा पिन और ड्राइंग पिन इस्पात/पीतल (विद्युत चालक) की बनी हैं, अतः परिपथ एक सतत, अखंड बंद लूप (Closed Circuit) बन जाता है।
    • सेल से विद्युत धारा प्रवाहित होने लगती है और टॉर्च का बल्ब तुरंत जल उठता है।
  2. स्विच की OFF (बंद) स्थिति:
    • जब सुरक्षा पिन को दूसरी ड्राइंग पिन से दूर हटा दिया जाता है, तो दोनों पिनों के बीच का धातु संपर्क टूट जाता है।
    • दोनों पिनों के मध्य रिक्त स्थान में केवल 'वायु' (Air) आ जाती है, जो विद्युत की उत्कृष्ट कुचालक (विद्युतरोधी) है।
    • परिपथ खंडित (Open Circuit) हो जाता है, धारा का प्रवाह शून्य हो जाता है और बल्ब तुरंत बुझ जाता है।
उदाहरण 4
विद्युत चालक एवं विद्युतरोधी (कुचालक) पदार्थों में मुख्य अंतर स्पष्ट कीजिए। प्रत्येक के दो-दो दैनिक उदाहरण दीजिए तथा बताइए कि बिजली के तारों पर प्लास्टिक का आवरण क्यों चढ़ाया जाता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
  1. विद्युत चालक एवं विद्युतरोधी पदार्थों में अंतर:

    • विद्युत चालक (Conductors): वे पदार्थ जो अपने भीतर से विद्युत धारा को आसानी से प्रवाहित होने देते हैं। इनमें प्रचुर संख्या में 'मुक्त इलेक्ट्रॉन' उपस्थित होते हैं।
      • उदाहरण: तांबा (Copper), एल्युमिनियम, लोहा, ग्रेफाइट।
    • विद्युतरोधी / कुचालक (Insulators): वे पदार्थ जो अपने भीतर से विद्युत धारा को प्रवाहित नहीं होने देते। इनमें मुक्त इलेक्ट्रॉन अनुपस्थित होते हैं और सभी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दृढ़तापूर्वक बंधे होते हैं।
      • उदाहरण: रबर, प्लास्टिक (PVC), कांच, सूखी लकड़ी।
  2. बिजली के तारों पर प्लास्टिक आवरण चढ़ाने का वैज्ञानिक कारण:

    • बिजली के तारों का आंतरिक कोर तांबे या एल्युमिनियम (चालक) का बना होता है जो विद्युत धारा को ले जाता है।
    • यदि यह तार नंगा रहे और कोई व्यक्ति इसे छू ले, तो मानव शरीर (जो स्वयं चालक है) के माध्यम से धारा प्रवाहित होकर पृथ्वी में जाने लगेगी और व्यक्ति को भीषण विद्युत आघात (करंट) लग जाएगा।
    • प्लास्टिक (PVC) एक उत्कृष्ट विद्युतरोधी पदार्थ है। इसका आवरण धारा को तार के भीतर ही सीमित रखता है और बाहर लीक नहीं होने देता।
    • अतः व्यक्ति तार को बाहर से बिना किसी खतरे के सुरक्षित रूप से स्पर्श कर सकता है।
उदाहरण 5
(क) किसी परिपथ में पारंपरिक विद्युत धारा की दिशा क्या होती है और यह इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह से किस प्रकार भिन्न है? (ख) क्या होगा यदि किसी विद्युत सेल के दोनों टर्मिनलों को बिना किसी बल्ब या लोड के सीधे एक तार से जोड़ दिया जाए?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

(क) पारंपरिक विद्युत धारा की दिशा बनाम इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह:

  1. पारंपरिक विद्युत धारा की दिशा:
    • अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक मानक के अनुसार, बाह्य परिपथ में पारंपरिक विद्युत धारा की दिशा सदैव सेल के धनात्मक टर्मिनल (+) से लोड (बल्ब) होते हुए ऋणात्मक टर्मिनल (-) की ओर मानी जाती है।
  2. इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह से अंतर:
    • चालक तारों में वास्तव में ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन गति करते हैं।
    • चूंकि समान आवेश प्रतिकर्षित होते हैं, इलेक्ट्रॉन सेल के ऋणात्मक टर्मिनल से प्रतिकर्षित होकर धनात्मक टर्मिनल की ओर गति करते हैं।
    • अतः इलेक्ट्रॉनों के वास्तविक प्रवाह की दिशा ($- \to +$) पारंपरिक धारा की दिशा ($+ \to -$) के ठीक विपरीत होती है।

(ख) सेल के दोनों टर्मिनलों को सीधे तार से जोड़ने का परिणाम (शॉर्ट सर्किट):

  • यदि किसी सेल के धनात्मक और ऋणात्मक टर्मिनलों को बिना किसी बल्ब, प्रतिरोधक अथवा लोड के सीधे तार से जोड़ दिया जाए, तो परिपथ का प्रतिरोध लगभग शून्य हो जाता है।
  • अत्यधिक तीव्र विद्युत धारा प्रवाहित होने लगती है।
  • इसके दो गंभीर दुष्परिणाम होते हैं:
    1. सेल के भीतर संचित रासायनिक पदार्थ अत्यधिक तीव्र गति से अभिक्रिया करके कुछ ही मिनटों में पूरी तरह समाप्त (निःशेष) हो जाते हैं।
    2. अत्यधिक आंतरिक ऊष्मा उत्पन्न होने से सेल फूल सकता है, उसमें से रासायनिक लेई रिस सकती है अथवा वह फट सकता है।
  • अतः ऐसा करना सर्वथा वर्जित है।
उदाहरण 6
विद्युत सुरक्षा से संबंधित निम्नलिखित प्रश्नों के वैज्ञानिक उत्तर दीजिए: (क) मानव शरीर विद्युत का चालक है या कुचालक? (ख) गीले हाथों से बिजली के स्विच को छूना क्यों जानलेवा होता है? (ग) बिजली मिस्त्री काम करते समय रबर के दस्ताने और जूते क्यों पहनते हैं? (घ) यदि किसी व्यक्ति को करंट लग रहा हो, तो आपको तत्काल क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

(क) मानव शरीर की प्रकृति:

  • मानव शरीर विद्युत का एक अत्यंत उत्कृष्ट चालक (Good Conductor) है, क्योंकि हमारे शरीर के लगभग 70% जल में सोडियम, पोटेशियम व क्लोराइड जैसे खनिज आयन घुले होते हैं।

(ख) गीले हाथों से स्विच छूने का जानलेवा कारण:

  • सूखी त्वचा का विद्युत प्रतिरोध बहुत अधिक ($100,000\ \Omega$) होता है, जो धारा को रोकता है।
  • किंतु गीले हाथों पर उपस्थित पानी व पसीना त्वचा के प्रतिरोध को तेजी से घटाकर मात्र $1,000\ \Omega$ कर देता है।
  • ओम के नियम ($I = V/R$) के अनुसार, 220V घरेलू मेंस से $I = 220 / 1000 = 0.22\text{ A} = 220\text{ mA}$ धारा प्रवाहित हो सकती है। चूंकि $50\text{ mA}$ से अधिक धारा हृदय गति रोक सकती है, अतः यह घातक सिद्ध होती है।

(ग) बिजली मिस्त्री द्वारा रबर के दस्ताने व जूते पहनना:

  • रबर एक उत्कृष्ट विद्युतरोधी (इंसुलेटर) है जिसका प्रतिरोध लगभग अनंत होता है।
  • रबर के दस्ताने सजीव तार से आने वाली धारा को हाथों में प्रवेश नहीं करने देते।
  • रबर के मोटे तलवे वाले जूते शरीर और पृथ्वी (जमीन) के मध्य विद्युत संपर्क को तोड़कर परिपथ को खुला (Open) रखते हैं, जिससे धारा शरीर से होकर जमीन में नहीं जा पाती।

(घ) विद्युत आघात के समय तात्कालिक प्रोटोकॉल:

  1. क्या न करें:
    • पीड़ित व्यक्ति को कभी भी अपने नंगे हाथों से सीधे न छुएं, अन्यथा आप भी परिपथ का हिस्सा बनकर करंट की चपेट में आ जाएंगे।
  2. क्या करें:
    • तुरंत घर का मेन स्विच (Main Switch) अथवा MCB बंद करें ताकि विद्युत आपूर्ति कट जाए।
    • यदि स्विच दूर हो, तो सूखी लकड़ी के डंडे, प्लास्टिक पाइप या सूखी झाड़ू से तार को पीड़ित से दूर हटाएं।
    • पीड़ित को सूखी जमीन पर लिटाकर तुरंत आपातकालीन एम्बुलेंस (108 / 112) को कॉल करें।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

विद्युत सेल में केवल एक ही टर्मिनल होता है और वह ऊर्जा का अनंत, कभी न खत्म होने वाला स्रोत है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

विद्युत सेल में अनिवार्य रूप से दो टर्मिनल होते हैं—धातु की टोपी (धनात्मक, +) और धातु की चकती (ऋणात्मक, -)। यह ऊर्जा का शाश्वत स्रोत नहीं है; इसके भीतर संचित रासायनिक पदार्थों की मात्रा सीमित होती है। जब रासायनिक पदार्थ पूरी तरह प्रयुक्त हो जाते हैं, तो सेल विद्युत उत्पन्न करना बंद कर देता है (डेड हो जाता है)।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

बल्ब के आधार पर केवल एक ही टर्मिनल होता है, अतः सेल के दोनों तारों को बल्ब की धातु की चूड़ी पर कहीं भी लपेट देने से बल्ब जल जाएगा।

सही वैज्ञानिक तथ्य

टॉर्च के बल्ब में दो पूर्णतः पृथक टर्मिनल होते हैं—एक धातु का बेलनाकार आवरण और दूसरा तल के केंद्र पर स्थित नुकीली धातु की नोक। दोनों के बीच विद्युतरोधी सीलिंग मोम भरा होता है। बल्ब केवल तभी जलेगा जब एक तार धातु आवरण से और दूसरा तार निचली नोक से जुड़े ताकि धारा फिलामेंट के माध्यम से प्रवाहित हो सके।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

स्विच OFF करने पर भी परिपथ में तारों के माध्यम से थोड़ी-बहुत विद्युत धारा का रिसाव होता रहता है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

स्विच OFF करने पर दोनों संयोजकों के बीच धातु संपर्क पूरी तरह टूट जाता है और मध्य में केवल वायु (Air) आ जाती है। सामान्य परिस्थितियों में शुष्क वायु एक उत्कृष्ट विद्युतरोधी (इंसुलेटर) है, जिसके कारण परिपथ में विद्युत धारा का मान तात्कालिक रूप से पूर्ण शून्य (I = 0) हो जाता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

चूंकि सभी अधातुएं कुचालक होती हैं, इसलिए पेंसिल की लेड से कभी करंट प्रवाहित नहीं हो सकता।

सही वैज्ञानिक तथ्य

पेंसिल की लेड ग्रेफाइट (कार्बन का अपररूप) से बनी होती है। यद्यपि कार्बन एक अधातु है, किंतु ग्रेफाइट की विशिष्ट क्रिस्टलीय संरचना में मुक्त संयोजी इलेक्ट्रॉन उपस्थित होते हैं, जिससे यह विद्युत का अत्यंत उत्कृष्ट चालक होता है। दोनों तरफ से छीली हुई पेंसिल को परिपथ में लगाने पर बल्ब प्रदीप्त हो उठता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

विद्युत धारा बल्ब में जाकर खर्च (उपभोग) हो जाती है, अतः धनात्मक तार से आने वाली धारा की तुलना में ऋणात्मक तार से लौटने वाली धारा बहुत कम होती है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

आवेश संरक्षण के सार्वभौमिक नियम के अनुसार विद्युत आवेश कभी नष्ट या खर्च नहीं होते। विद्युत धारा केवल आवेशों (इलेक्ट्रॉनों) की प्रवाह दर है। बल्ब में विद्युत ऊर्जा का रूपांतरण प्रकाश एवं ऊष्मा में होता है, न कि आवेशों का। जितना आवेश धनात्मक सिरे से निकलता है, ठीक उतना ही आवेश लोड से होकर ऋणात्मक सिरे में वापस लौटता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

विद्यालय या घर पर सेल उपलब्ध न होने पर सीधे दीवार के 220V बिजली सॉकेट में तार डालकर टॉर्च का बल्ब जलाकर प्रयोग किया जा सकता है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

घरेलू दीवार सॉकेट में आने वाली 220V AC विद्युत आपूर्ति अत्यंत प्राणघाती होती है। इसे छूने से तत्काल जानलेवा विद्युत आघात लग सकता है, और छोटा बल्ब अत्यधिक उच्च वोल्टता से तुरंत विस्फोटित होकर फट सकता है। छात्रों को सभी विज्ञान प्रयोग केवल और केवल 1.5V के शुष्क सेल से ही करने चाहिए।

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
विद्युत सेल में रासायनिक ऊर्जा का विद्युत ऊर्जा में रूपांतरण होता है; रासायनिक पदार्थों के समाप्त होने पर सेल कार्य करना बंद कर देता है।
मुख्य बिंदु 2
सेल के धनात्मक (+) और ऋणात्मक (-) दोनों टर्मिनलों को बिना किसी लोड के सीधे तार से जोड़ने पर शॉर्ट सर्किट होता है और सेल नष्ट हो जाता है।
मुख्य बिंदु 3
बल्ब का प्रकाश उत्सर्जन फिलामेंट के अत्यधिक उच्च ताप (2000°C-2500°C) पर श्वेत-तप्त होने के कारण होता है।
मुख्य बिंदु 4
बल्ब के दोनों टर्मिनल आंतरिक रूप से कभी एक-दूसरे को स्पर्श नहीं करते; उनके बीच विद्युतरोधी सील लगी होती है।
मुख्य बिंदु 5
विद्युत धारा केवल तभी बह सकती है जब परिपथ पूर्णतः बंद (Closed) हो; तार टूटने या स्विच OFF होने पर धारा शून्य हो जाती है।
मुख्य बिंदु 6
चालक तारों में इलेक्ट्रॉनों का वास्तविक प्रवाह ऋणात्मक (-) से धनात्मक (+) टर्मिनल की ओर होता है, जो पारंपरिक धारा (+ से -) के विपरीत है।
मुख्य बिंदु 7
स्विच OFF स्थिति में संपर्कों के बीच उपस्थित वायु उत्कृष्ट कुचालक का कार्य करती है, जिससे परिपथ टूट जाता है।
मुख्य बिंदु 8
विद्युत तारों और औजारों में द्वैध-सामग्री सिद्धांत अपनाया जाता है: भीतर चालक कोर (तांबा) और बाहर विद्युतरोधी आवरण (PVC/रबर)।
मुख्य बिंदु 9
अधातु होने के बावजूद ग्रेफाइट (पेंसिल लेड) अपनी मुक्त इलेक्ट्रॉन संरचना के कारण विद्युत का सुचालक है।
मुख्य बिंदु 10
विद्युत आघात पीड़ित को कभी नंगे हाथों से न छुएं; सर्वप्रथम मेन स्विच बंद करें अथवा सूखी लकड़ी/प्लास्टिक से तार को अलग करें।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
एक विद्युत सेल की धातु की टोपी और धातु की चकती किन-किन टर्मिनलों को प्रदर्शित करती हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:
2
टॉर्च के बल्ब में प्रकाश उत्सर्जित करने वाले पतले कुंडलित तार को क्या कहते हैं और यह किस धातु का बना होता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:
3
यदि किसी परिपथ में बल्ब का फिलामेंट बीच से टूट जाए, तो परिपथ किस अवस्था में आ जाता है और बल्ब क्यों नहीं जलता?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:
4
किसी बाह्य विद्युत परिपथ में पारंपरिक विद्युत धारा के प्रवाह की दिशा क्या मानी जाती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:
5
निम्नलिखित में से कौन सा पदार्थ समूह केवल विद्युत चालकों (Conductors) का प्रतिनिधित्व करता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:
6
बिजली का कार्य करते समय इलेक्ट्रीशियन रबर के दस्ताने क्यों पहनते हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
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