1.1 विद्युत ऊर्जा का स्वरूप एवं आधुनिक समाज में अपरिहार्यता
विद्युत ऊर्जा आधुनिक मानव सभ्यता की सर्वाधिक गतिशील, स्वच्छ एवं बहुमुखी ऊर्जा है। यह ऊर्जा का वह द्वितीयक रूप है जिसे प्राथमिक ऊर्जा स्रोतों (जैसे कोयला, प्राकृतिक गैस, बहता जल, नाभिकीय विखंडन अथवा सूर्य का प्रकाश) के रूपांतरण से प्राप्त किया जाता है। हमारे दैनिक जीवन का कोई भी क्षेत्र विद्युत ऊर्जा की उपस्थिति के बिना संचालित नहीं हो सकता।
प्रातःकाल उठने से लेकर रात्रि में सोने तक, मानव जीवन का प्रत्येक क्रियाकलाप विद्युत तंत्र पर निर्भर है:
- घरेलू प्रकाश एवं सुख-सुविधाएं: सूर्यास्त के उपरांत घरों, सड़कों, विद्यालयों, कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों को प्रकाशित करने वाले एलईडी (LED), सीएफएल (CFL) और ट्यूबलाइट विद्युत से ही प्रदीप्त होते हैं। गर्मियों में पंखे, कूलर और वातानुकूलक (Air Conditioners) तथा सर्दियों में हीटर और गीजर विद्युत ऊर्जा द्वारा ही ऊष्मा अथवा शीतलता प्रदान करते हैं।
- पेयजल एवं कृषि सिंचाई प्रणाली: भूमिगत जल को गहरे नलकूपों (Tubewells) से खींचकर छतों की टंकियों तक पहुंचाने वाले इलेक्ट्रिक मोटर पंप विद्युत से संचालित होते हैं। कृषि प्रधान राज्य बिहार में धान, गेहूं और मक्का की फसलों की समयबद्ध सिंचाई विद्युत चालित पंपिंग सेटों पर टिकी है।
- संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी: हमारे स्मार्टफोन, कंप्यूटर, लैपटॉप, टेलीविजन, रेडियो, इंटरनेट राउटर और दूरसंचार टॉवर विद्युत शक्ति द्वारा ही क्रियाशील रहते हैं।
- स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवाएं: अस्पतालों में जीवनरक्षक उपकरण, जैसे गहन चिकित्सा कक्ष (ICU) के वेंटिलेटर, मॉनिटर, एक्स-रे मशीन, ईसीजी (ECG), डायलिसिस मशीन और जीवनरक्षक दवाओं को सुरक्षित रखने वाले रेफ्रिजरेटर निरंतर विद्युत आपूर्ति की मांग करते हैं।
- परिवहन एवं उद्योग: भारतीय रेल का विशाल विद्युतीकृत नेटवर्क, मेट्रो रेल, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), आटा चक्की, तेल पेराई मिलें, कपड़ा उद्योग और इस्पात कारखाने पूरी तरह विद्युत ऊर्जा पर निर्भर हैं।
1.2 विद्युत उत्पादन के प्राथमिक स्रोत एवं ऊर्जा रूपांतरण सिद्धांत
विद्युत ऊर्जा का निर्माण किसी बंद कमरे में स्वतः नहीं होता, अपितु बड़े-बड़े ऊर्जा उत्पादन केंद्रों (Power Stations / Power Generating Plants) में प्राथमिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदला जाता है। विद्युत उत्पादन का मुख्य वैज्ञानिक सिद्धांत 'विद्युत-चुंबकीय प्रेरण' (Electromagnetic Induction) है, जिसमें विशाल जनरेटर (विद्युत जनित्र) के आर्मेचर को घुमाकर यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है। जनरेटर को घुमाने के लिए विभिन्न प्रकार के टर्बाइनों का उपयोग किया जाता है।
प्रमुख विद्युत उत्पादन विधियां निम्नलिखित हैं:
1. ताप विद्युत संयंत्र (Thermal Power Stations)
- कार्यप्रणाली: कोयले, प्राकृतिक गैस अथवा पेट्रोलियम को विशाल बॉयलरों में जलाया जाता है। दहन से उत्पन्न अत्यधिक ऊष्मा से जल को उच्च दाब वाली भाप (High-Pressure Steam) में परिवर्तित किया जाता है। यह भाप अत्यंत तीव्र गति से टर्बाइन के पंखों पर टकराती है, जिससे टर्बाइन तेजी से घूमता है। टर्बाइन से जुड़ा विद्युत जनरेटर घूमकर विशाल मात्रा में विद्युत उत्पन्न करता है।
- ऊर्जा रूपांतरण चक्र:
$$\text{कोयले की रासायनिक ऊर्जा} \xrightarrow{\text{दहन}} \text{ऊष्मीय ऊर्जा} \xrightarrow{\text{भाप}} \text{गतिज ऊर्जा} \xrightarrow{\text{टर्बाइन व जनरेटर}} \text{विद्युत ऊर्जा}$$
- बिहार में प्रमुख संयंत्र: बिहार में विद्युत का एक बड़ा भाग ताप विद्युत गृहों से प्राप्त होता है। राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम (NTPC) द्वारा संचालित प्रमुख संयंत्र हैं:
- NTPC बाढ़ (Barh Super Thermal Power Station, पटना): बिहार का विशालतम आधुनिक सुपरक्रिटिकल ताप विद्युत संयंत्र।
- NTPC कहलगांव (Kahalgaon Super Thermal Power Station, भागलपुर): बिहार और पूर्वी भारत को विद्युत आपूर्ति करने वाला प्रमुख केंद्र।
- बरौनी थर्मल पावर स्टेशन (Barauni Thermal Power Station, बेगूसराय): बिहार राज्य विद्युत बोर्ड का ऐतिहासिक ताप विद्युत गृह।
2. जल विद्युत संयंत्र (Hydroelectric Power Stations)
- कार्यप्रणाली: नदियों पर विशाल बांध बनाकर वर्षा अथवा हिमनदों के जल को विशाल ऊंचाई पर संचित किया जाता है। संचित जल में अत्यधिक गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy) होती है। जब इस जल को पेनस्टॉक (मोटे पाइपों) के माध्यम से नीचे गिराया जाता है, तो स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा में बदल जाती है। यह तीव्र जल प्रवाह जल-टर्बाइन (Hydro-turbine) के ब्लेडों पर गिरकर उन्हें घुमाता है, जिससे जनरेटर द्वारा विद्युत का उत्पादन होता है।
- ऊर्जा रूपांतरण चक्र:
$$\text{जल की स्थितिज ऊर्जा} \xrightarrow{\text{पतन}} \text{गतिज ऊर्जा} \xrightarrow{\text{जल-टर्बाइन}} \text{यांत्रिक ऊर्जा} \xrightarrow{\text{जनरेटर}} \text{विद्युत ऊर्जा}$$
3. सौर ऊर्जा संयंत्र (Solar Power Stations)
- कार्यप्रणाली: सूर्य की विकिरण ऊर्जा को फोटोवोल्टिक सेलों (Photovoltaic Solar Panels) पर आपतित कराकर बिना किसी गतिमान पुर्जे के सीधे दिष्ट धारा (DC Electricity) में परिवर्तित किया जाता है।
- बिहार संदर्भ: बिहार राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए बिहार अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (BREDA) द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर स्ट्रीट लाइट, सरकारी भवनों पर रूफटॉप सोलर पैनल तथा किसानों के लिए सौर ऊर्जा चालित कृषि पंप स्थापित किए जा रहे हैं।
1.3 विद्युत संचरण, वितरण एवं घरेलू मेंस (220V AC) की प्रकृति
विद्युत उत्पादन संयंत्रों में उत्पादित विद्युत को हजारों किलोमीटर दूर स्थित शहरों और गांवों तक पहुंचाने के लिए एक सुव्यवस्थित ग्रिड प्रणाली कार्यरत होती है:
- स्टेप-अप ट्रांसफॉर्मर: उत्पादन केंद्र पर उत्पादित विद्युत वोल्टता को ट्रांसफॉर्मर द्वारा $11,000\text{ V}$ ($11\text{ kV}$) से बढ़ाकर $132,000\text{ V}$ ($132\text{ kV}$) या $400,000\text{ V}$ ($400\text{ kV}$) तक किया जाता है, ताकि संचरण तारों में प्रतिरोध के कारण ऊष्मा के रूप में ऊर्जा की हानि ($H = I^2Rt$) न्यूनतम हो।
- पारेषण लाइनें (Transmission Lines): विशाल लोहे के टावरों पर लटके मोटे एल्युमिनियम चालकों द्वारा उच्च वोल्टता पर विद्युत को राज्यों और जिलों के मुख्य ग्रिड उपकेंद्रों तक भेजा जाता है।
- स्टेप-डाउन सब-स्टेशन: विद्युत उपकेंद्रों पर ट्रांसफॉर्मर वोल्टता को घटाकर $33\text{ kV}$ और फिर मोहल्लों के ट्रांसफॉर्मर द्वारा $440\text{ V}$ (तीन-फेज) अथवा $220\text{ V}$ (एकल-फेज) में बदलते हैं।
- घरेलू मेंस आपूर्ति (Domestic Mains): भारत में घरों में आपूर्ति की जाने वाली विद्युत $220\text{ V}$ की वोल्टता और $50\text{ Hz}$ आवृत्ति की प्रत्यावर्ती धारा (Alternating Current - AC) होती है।
[विद्युत उत्पादन केंद्र]
↓ (11 kV)
[स्टेप-अप ट्रांसफॉर्मर]
↓ (132 kV / 400 kV उच्च वोल्टता संचरण)
[पारेषण ग्रिड एवं विशाल टावर]
↓
[जिला उपकेंद्र (स्टेप-डाउन 33 kV / 11 kV)]
↓
[स्थानीय मोहल्ला ट्रांसफॉर्मर (स्टेप-डाउन)]
↓ (220V AC सुरक्षित घरेलू स्तर)
[घरेलू विद्युत मीटर, मेन स्विच एवं परिपथ]
1.4 घरेलू मेंस (220V AC) बनाम शुष्क सेल (1.5V DC): विभव एवं सुरक्षा तुलना
विज्ञान की प्रयोगशाला में प्रयोग करते समय अथवा दैनिक जीवन में विद्युत के उपयोग के दौरान यह समझना अनिवार्य है कि घरेलू दीवार के सॉकेट में आने वाली विद्युत और टॉर्च के सेल से मिलने वाली विद्युत में बुनियादी अंतर क्या है:
| तुलनात्मक मापदंड | घरेलू मेंस आपूर्ति (Domestic Mains) | शुष्क सेल (Dry Cell) |
|---|---|---|
| विद्युत धारा का प्रकार | प्रत्यावर्ती धारा (AC - Alternating Current) | दिष्ट धारा (DC - Direct Current) |
| विभवांतर (Voltage) | $220\text{ V}$ (अत्यधिक उच्च विभव) | $1.5\text{ V}$ प्रति सेल (अत्यंत निम्न विभव) |
| ऊर्जा का मूल स्रोत | दूरस्थ विद्युत संयंत्र (कोयला, जल, सौर आदि) | सेल के भीतर संचित रासायनिक पदार्थ |
| सुवाह्यता (Portability) | स्थिर (तारों द्वारा दीवार सॉकेट से बंधी हुई) | पूर्णतः सुवाह्य (हाथ में, टॉर्च या घड़ी में ले जाने योग्य) |
| आघात जोखिम (Shock Hazard) | अत्यंत घातक; स्पर्श करने पर हृदय गति रुक सकती है | पूर्णतः सुरक्षित; मानव त्वचा पर कोई झटका नहीं लगता |
| शैक्षणिक प्रयोगों में उपयोग | सर्वथा वर्जित; छात्रों द्वारा कभी प्रयोग न किया जाए | आदर्श एवं अनुशंसित; कक्षा 6 के सभी प्रयोगों हेतु अनिवार्य |
1.5 बिहार राज्य का ऊर्जा परिदृश्य एवं प्रमुख विकासात्मक उपलब्धियां
बिहार में विद्युत का विकास सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण का प्रतीक रहा है:
- 'हर घर बिजली' योजना (सात निश्चय कार्यक्रम): बिहार सरकार के सात निश्चय योजना के अंतर्गत राज्य के सभी 39,073 राजस्व गांवों और सुदूर ग्रामीण टोलों का शत-प्रतिशत विद्युतीकरण संपन्न किया गया है। हर घर तक मीटरयुक्त सुरक्षित विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।
- समर्पित कृषि विद्युत फीडर (Dedicated Agriculture Power Feeders): राज्य में किसानों को सिंचाई हेतु सस्ती, निर्बाध और उच्च गुणवत्ता वाली विद्युत प्रदान करने के लिए घरेलू लाइनों से अलग कृषि फीडर स्थापित किए गए हैं, जिससे डीजल पंपों पर किसानों की निर्भरता घटी है और पर्यावरण प्रदूषण कम हुआ है।
- मधेपुरा विद्युत रेल इंजन कारखाना (Madhepura Electric Locomotive Factory): बिहार के मधेपुरा में स्थापित अत्याधुनिक रेल इंजन कारखाने में भारत के सर्वाधिक शक्तिशाली $12,000$ अश्वशक्ति (Horsepower) वाले वातानुकूलित फ्रेट इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव (WAG-12B) का निर्माण किया जा रहा है, जो संपूर्ण भारतीय रेल के भारी मालगाड़ी गलियारों (Dedicated Freight Corridors) को शक्ति प्रदान कर रहा है।