1.1 चुंबकत्व की खोज का ऐतिहासिक वृत्तांत: गड़ेरिया मैगनस की कथा
चुंबकत्व का इतिहास हजारों वर्ष प्राचीन है और इसकी खोज की कथा प्राचीन यूनान (ग्रीस) की सुरम्य वादियों से जुड़ी है। प्राचीन ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, क्रीट द्वीप के समीप 'मैग्नेशिया' (Magnesia) नामक एक पर्वतीय क्षेत्र था, जहाँ 'मैगनस' (Magnes) नाम का एक वृद्ध गड़ेरिया रहता था। मैगनस प्रतिदिन अपनी भेड़ों और बकरियों के झुंड को चराने के लिए माउंट इडा की पथरीली ढलानों पर ले जाया करता था।
पशुओं को नियंत्रित करने तथा पहाड़ी रास्तों पर संतुलन बनाए रखने के लिए मैगनस अपने हाथ में लकड़ी की एक पारंपरिक छड़ी रखता था। उस छड़ी के निचले सिरे पर सुरक्षा और घिसाव रोकने के लिए लोहे की एक मजबूत टोपी (लोहे की नाल अथवा फेर्यूल) चढ़ी हुई थी। इसके अतिरिक्त, पथरीले कांटों से पैरों की रक्षा हेतु उसके चमड़े के जूतों के तलवों में हाथ से गढ़ी गई लोहे की कीलें जड़ी हुई थीं।
एक दोपहर, जब मैगनस एक विशाल काली चट्टान के ऊपर से गुजर रहा था, तो उसे एक अत्यंत विस्मयकारी और अप्रत्याशित भौतिक अनुभूति हुई:
- जब उसने अपनी छड़ी को उस काले पत्थर पर टिकाया, तो छड़ी का निचला सिरा पत्थर से अत्यंत मजबूती से चिपक गया। छड़ी को पत्थर से छुड़ाने के लिए मैगनस को आश्चर्यजनक रूप से अपनी पूरी ताकत लगाकर उसे ऊपर खींचना पड़ा।
- उसी क्षण, उसके पैरों के तलवे भी पत्थर से ऐसे जकड़ गए जैसे कोई अदृश्य, गुप्त शक्ति उसके जूतों की लोहे की कीलों को नीचे पाताल की ओर खींच रही हो।
- मैगनस ने जब कौतूहलवश ध्यानपूर्वक परीक्षण किया, तो पाया कि यह खिंचाव केवल और केवल लोहे की वस्तुओं (उसकी छड़ी की टोपी और जूतों की कीलों) पर ही लग रहा था। चट्टान ने उसकी लकड़ी की छड़ी, ऊनी कपड़ों अथवा आसपास पड़े साधारण चूना-पत्थरों पर तनिक भी आकर्षण बल नहीं लगाया।
वह काली चट्टान वास्तव में लोहे का एक प्राकृतिक अयस्क थी जो प्राकृतिक रूप से चुंबकित था। गड़ेरिए 'मैगनस' के नाम पर अथवा उस क्षेत्र 'मैग्नेशिया' के नाम पर उस प्राकृतिक पत्थर को मैग्नेटाइट (Magnetite) कहा गया। बाद में, लोहे को आकर्षित करने वाले ऐसे सभी पदार्थों को सार्वभौमिक रूप से चुंबक (Magnet) तथा इस भौतिक परिघटना को चुंबकत्व (Magnetism) नाम दिया गया।
[प्राकृतिक रूप से चुंबकित लौह अयस्क]
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[मैग्नेशिया क्षेत्र में गड़ेरिया मैगनस द्वारा खोज]
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[खनिज नाम: मैग्नेटाइट (Fe3O4)]
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[दिशा सूचक गुण के कारण नाविकों द्वारा नाम: लोडस्टोन (पथ-प्रदर्शक)]
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[आधुनिक युग में मानव-निर्मित कृत्रिम चुंबक]
1.2 प्राकृतिक चुंबक (Natural Magnets): रासायनिक संरचना एवं सीमाएं
प्राकृतिक चुंबक वे पत्थर, खनिज अथवा चट्टानें हैं जो प्रकृति में भूगर्भीय प्रक्रियाओं द्वारा स्वतः निर्मित होती हैं और जिनमें बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के स्थायी चुंबकत्व उपस्थित होता है।
1. रासायनिक संगठन एवं भूगर्भीय उत्पत्ति
- प्रकृति में पाया जाने वाला मुख्य प्राकृतिक चुंबक मैग्नेटाइट है, जो लोहे का एक सघन काला ऑक्साइड अयस्क है। इसका रासायनिक सूत्र $\text{Fe}_3\text{O}_4$ (फेरोसोफेरिक ऑक्साइड अथवा $\text{FeO} \cdot \text{Fe}_2\text{O}_3$) होता है।
- जब भू-सतह पर स्थित मैग्नेटाइट की चट्टानों पर आकाशीय बिजली (तड़ित) का भीषण विद्युत विसर्जन गिरता है, तो अत्यधिक तीव्र विद्युत धाराओं के चुंबकीय क्षेत्र से चट्टान के आंतरिक डोमेन स्थायी रूप से एक ही दिशा में संरेखित हो जाते हैं। ऐसी अत्यधिक चुंबकित प्राकृतिक चट्टान को ऐतिहासिक रूप से लोडस्टोन (Lodestone) कहा जाता है।
- 'लोडस्टोन' शब्द प्राचीन अंग्रेजी भाषा के शब्द Lode से बना है, जिसका अर्थ होता है 'मार्ग' (Way), 'दिशा' (Course) अथवा 'यात्रा'। चूंकि प्राचीन नाविक इस पत्थर को पतले धागे से लटकाकर बादलों से घिरे समुद्र में सही दिशा ज्ञात करते थे, अतः इसे 'मार्ग दिखाने वाला पत्थर' या 'लोडस्टोन' कहा गया।
2. प्राकृतिक चुंबकों की भौतिक एवं व्यावहारिक सीमाएं
यद्यपि लोडस्टोन विज्ञान के आरंभिक विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा, किंतु आधुनिक तकनीकी आवश्यकताओं की दृष्टि से इसमें कई गंभीर कमियां पाई जाती हैं:
- अनियमित एवं बेडौल आकृति: प्राकृतिक चट्टानें उबड़-खाबड़, बेडौल पत्थरों के रूप में मिलती हैं, जिन्हें सटीक वैज्ञानिक यंत्रों में लगाना संभव नहीं होता।
- दुर्बल एवं असमान चुंबकीय शक्ति: प्राकृतिक पत्थरों का चुंबकीय बल तुलनात्मक रूप से बहुत क्षीण होता है और पत्थर के भीतर विभिन्न स्थानों पर बेतरतीब फैला रहता है।
- अत्यधिक भंगुरता (Brittleness): मैग्नेटाइट एक भंगुर खनिज है; इसे तराशने, काटने या छेद करने का प्रयास करने पर यह चटक कर टुकड़ों में बिखर जाता है।
1.3 कृत्रिम चुंबक (Artificial Magnets): धातु विज्ञान एवं ज्यामितीय रूप
प्राकृतिक पत्थरों की सीमाओं को दूर करने के लिए वैज्ञानिकों ने लौहचुंबकीय धातुओं को कृत्रिम रूप से चुंबकित करने की विधियां विकसित कीं। कृत्रिम चुंबक (Artificial Magnets) वे चुंबक हैं जिनका निर्माण मानव द्वारा कारखानों एवं प्रयोगशालाओं में विशिष्ट धातुओं तथा मिश्रधातुओं (जैसे लोहा, कार्बन इस्पात, निकेल, कोबाल्ट, तथा आधुनिक एल्निको एवं नियोडिमियम) को चुंबकीय क्षेत्र में रखकर किया जाता है।
कृत्रिम चुंबकों के प्रमुख तकनीकी लाभ निम्नलिखित हैं:
- इन्हें इच्छानुसार अत्यधिक शक्तिशाली और तीव्र चुंबकीय क्षमता वाला बनाया जा सकता है।
- इन्हें किसी भी मनचाहे ज्यामितीय आकार एवं आकार-माप (Dimensions) में ढाला जा सकता है।
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| कृत्रिम चुंबकों के प्रमुख मानक ज्यामितीय रूप |
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| चुंबक का नाम | भौतिक संरचना एवं ध्रुवों की स्थिति |
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| 1. छड़ चुंबक | आयताकार अथवा वर्गाकार सीधी छड़; उत्तरी (N) व |
| (Bar Magnet) | दक्षिणी (S) ध्रुव दोनों विपरीत सिरों पर होते हैं।|
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| 2. नाल चुंबक | अंग्रेजी के 'U' या घोड़े की नाल के आकार का; दोनों|
| (Horse-shoe Magnet) | ध्रुव समानांतर और पास-पास लाए जाते हैं। |
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| 3. बेलनाकार चुंबक | ठोस गोल बेलन; इसके दोनों चपटे वृत्ताकार फलकों पर |
| (Cylindrical Magnet) | ध्रुव स्थित होते हैं। |
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| 4. गोलांत चुंबक | डंबल जैसी संरचना; एक संकरी छड़ के दोनों सिरों पर |
| (Ball-ended Magnet) | दो ठोस गोलियां (गोले) जुड़ी होती हैं। |
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| 5. वलय/चकती चुंबक | गोल चपटी टिकिया अथवा छिद्रयुक्त छल्ला (Ring); |
| (Ring / Disc Magnet) | ऊपर और नीचे के चपटे तलों पर ध्रुव उपस्थित होते हैं।|
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प्रत्येक आकार का अपना एक विशिष्ट वैज्ञानिक उद्देश्य होता है। उदाहरण के लिए, नाल चुंबक (Horse-shoe Magnet) में दोनों विपरीत ध्रुवों को बिल्कुल पास लाया जाता है, जिससे उनके बीच के संकीर्ण अंतराल में अत्यंत प्रबल और सघन चुंबकीय क्षेत्र बनता है, जो भारी लोहे की वस्तुओं को उठाने के लिए सर्वोत्तम है। वलय चुंबक (Ring Magnet) का उपयोग रेडियो, टेलीविजन और मोबाइल फोन के लाउडस्पीकरों में ध्वनि तरंगें उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।