औपनिवेशिक शासन के दौरान भारतीयों को अंग्रेजों की बनाई नीतियों की आलोचना करने का अधिकार नहीं था; विरोध करने पर कठोर यातनाएं दी जाती थीं:
- स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा: स्वतंत्रता सेनानियों ने तय किया कि स्वतंत्र भारत में प्रत्येक वयस्क नागरिक को सरकार के फैसलों में हिस्सेदारी मिलेगी। 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पहली बार मांग की थी कि विधायिका में भारतीयों को बजट पर चर्चा करने और प्रश्न पूछने का अधिकार मिले।
- सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार: 1950 में संविधान लागू होते ही सभी 18 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों को वोट का अधिकार मिला। नागरिक अपने प्रतिनिधियों को चुनते हैं, और वे प्रतिनिधि संसद में बैठकर पूरे देश के लिए फैसले लेते हैं।