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CBSE • कक्षा 8 • Social Science • अध्याय 6
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

The Parliamentary System – Legislature and Executive

केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) एवं NCERT पाठ्यक्रम पर आधारित कक्षा 8 नागरिक शास्त्र का तीसरा अध्याय "संसद तथा कानूनों का निर्माण" (Parliament and the Making of Laws) भारत के संसदीय लोकतंत्र की सर्वोच्च प्रतिनिधि संस्था और विधि निर्माण प्रक्रिया का सांगोपांग विवरण प्रस्तुत करता है। भारतीय नागरिकों को अपने प्रतिनिधियों को चुनने और निर्णय लेने में भागीदार बनने का अधिकार 1947 में लंबी आजादी की लड़ाई के बाद मिला। इस अध्याय में यह गहराई से विश्लेषित किया गया है कि देश में संसद की क्या भूमिका है—(1) राष्ट्रीय सरकार का चयन करना (लोकसभा और राज्यसभा का गठन), (2) सरकार को नियंत्रित करना, मार्गदर्शन देना और सूचना लेना (शून्यकाल, प्रश्नकाल और अविश्वास प्रस्ताव), तथा (3) पूरे देश के लिए नए कानूनों का निर्माण करना। अध्याय में संसद के दोनों सदनों—लोकसभा (जनता का सदन - 543 निर्वाचित सदस्य) और राज्यसभा (राज्यों की परिषद - 245 सदस्य) के गठन, शक्तियों और कार्यप्रणाली की तुलना की गई है। इसके साथ ही एक आम विधेयक (Bill) के कानून (Act) बनने की जटिल प्रक्रिया, नागरिक समाज द्वारा घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम (2005) को बनवाने का ऐतिहासिक संघर्ष, तथा अलोकप्रिय व विवादास्पद कानूनों के विरुद्ध जन-आंदोलनों और न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) की लोकतांत्रिक शक्ति का विस्तृत व परीक्षा-उपयोगी विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।

⚡ संसद भवन में गूँजती बहसें, मेजें थपथपाते सांसद और प्रश्नकाल में मंत्रियों से तीखे सवाल—क्या यह केवल राजनीति है या 140 करोड़ भारतीयों की तकदीर लिखने का सबसे बड़ा मंच?

क्या आपने कभी सोचा है कि जब आप बाजार से कोई सामान खरीदते हैं, स्कूल की फीस देते हैं, या सड़क पर चलते हैं, तो ये नियम किसने तय किए? भारत का कोई भी कानून किसी राजा या तानाशाह के कमरे में नहीं बनता, बल्कि देश के कोने-कोने (कश्मीर से कन्याकुमारी और झारखण्ड के संथाल परगना से लेकर कच्छ तक) से जनता द्वारा चुनकर भेजे गए 543 सांसदों की खुली बहस और मतदान से पारित होता है। जब महिलाएं अपने ही घरों में हिंसा का शिकार हो रही थीं, तो उन्होंने संसद को कानून बदलने पर कैसे मजबूर किया? आइए देखें संसद के भीतर कानून बनने का पूरा रोमांचकारी सफर!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

संसद भारतीय लोकतंत्र का हृदय है। झारखण्ड के 14 लोकसभा सांसद और 6 राज्यसभा सांसद राज्य के आदिवासियों, किसानों, मजदूरों और खनिज संपदा के हितों को देश की सर्वोच्च पंचायत में उठाते हैं और कानून निर्माण को प्रभावित करते हैं।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार (वोट देने का अधिकार) की अवधारणा।
  • चुनाव प्रक्रिया और सांसद (MP) व विधायक (MLA) के बीच अंतर की समझ।
  • सरकार के तीन अंगों में विधायिका (Legislature) की भूमिका।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • संसद के तीनों घटकों—राष्ट्रपति, लोकसभा और राज्यसभा—के संवैधानिक स्वरूप की व्याख्या कर सकेंगे।
  • लोकसभा और राज्यसभा की संरचना, कार्यकाल, चुनाव पद्धति और शक्तियों की तुलना कर सकेंगे।
  • संसद के तीन मुख्य कार्यों—सरकार का चुनाव, सरकार पर नियंत्रण (प्रश्नकाल), और कानून निर्माण का विश्लेषण कर सकेंगे।
  • एक साधारण विधेयक के कानून बनने के विभिन्न चरणों (प्रारूप, बहस, मतदान, राष्ट्रपति की स्वीकृति) को रेखांकित कर सकेंगे।
  • घरेलू हिंसा कानून (2005) के उदाहरण से समझ सकेंगे कि नागरिक समाज और महिला संगठन कैसे नए कानून बनवाते हैं।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. लोगों को निर्णय क्यों लेना चाहिए...
2 2. संसद के दोनों सदन: लोकसभा और राज...
3 3. संसद के कार्य: सरकार पर नियंत्रण...
4 4. कानून कैसे बनते हैं? घरेलू हिंसा...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. लोगों को निर्णय क्यों लेना चाहिए? (Why Should People Decide?)

औपनिवेशिक शासन के दौरान भारतीयों को अंग्रेजों की बनाई नीतियों की आलोचना करने का अधिकार नहीं था; विरोध करने पर कठोर यातनाएं दी जाती थीं:

  • स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा: स्वतंत्रता सेनानियों ने तय किया कि स्वतंत्र भारत में प्रत्येक वयस्क नागरिक को सरकार के फैसलों में हिस्सेदारी मिलेगी। 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पहली बार मांग की थी कि विधायिका में भारतीयों को बजट पर चर्चा करने और प्रश्न पूछने का अधिकार मिले।
  • सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार: 1950 में संविधान लागू होते ही सभी 18 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों को वोट का अधिकार मिला। नागरिक अपने प्रतिनिधियों को चुनते हैं, और वे प्रतिनिधि संसद में बैठकर पूरे देश के लिए फैसले लेते हैं।

2. संसद के दोनों सदन: लोकसभा और राज्यसभा (Two Houses of Parliament)

भारतीय संसद के तीन अंग हैं—राष्ट्रपति, राज्यसभा और लोकसभा:

विशेषतालोकसभा (House of the People)राज्यसभा (Council of States)
कुल सदस्य संख्या543 निर्वाचित सदस्य245 सदस्य (233 निर्वाचित + 12 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत)
चुनाव पद्धतिजनता द्वारा प्रत्यक्ष मतदान (Direct Election)राज्यों की विधानसभाओं के विधायकों (MLAs) द्वारा अप्रत्यक्ष चुनाव
कार्यकाल5 वर्ष (समय से पहले भी भंग हो सकती है)स्थायी सदन (कभी भंग नहीं होता; 1/3 सदस्य प्रति 2 वर्ष में सेवानिवृत्त, कार्यकाल 6 वर्ष)
अध्यक्षतालोकसभा अध्यक्ष (Speaker)भारत के उपराष्ट्रपति (पदेन सभापति - Ex-officio Chairman)
विशेष शक्तिधन विधेयक (Money Bill) केवल लोकसभा में पेश हो सकता है; कार्यपालिका इसी के प्रति जवाबदेह होती है।राज्यों के हितों की संरक्षक; किसी सामान्य कानून की समीक्षा व संशोधन करती है।

3. संसद के कार्य: सरकार पर नियंत्रण और प्रश्नकाल (Functions of Parliament & Question Hour)

संसद केवल कानून बनाने का कारखाना नहीं है, बल्कि यह सरकार की जवाबदेही तय करने का सबसे बड़ा मंच है:

  • 1. राष्ट्रीय सरकार का चुनाव: लोकसभा चुनाव के बाद जिस दल या गठबंधन के पास बहुमत (कम से कम 272 सीटें) होता है, वह सरकार बनाता है। बहुमत दल का नेता प्रधानमंत्री बनता है जो अपने मंत्रियों का चयन करता है।
  • 2. सरकार को नियंत्रित करना (प्रश्नकाल - Question Hour): संसद के प्रत्येक कार्यदिवस का पहला घंटा (11 से 12 बजे) प्रश्नकाल होता है। इसमें सांसद मंत्रियों से सरकार की नीतियों, घोटालों, खर्चों और समस्याओं पर तीखे प्रश्न पूछते हैं। इससे सरकार सतर्क रहती है और जनता की नब्ज समझती है।
  • 3. कानून बनाना (Law Making): देश के हर नागरिक के लिए कानून संसद द्वारा ही पारित किए जाते हैं।

4. कानून कैसे बनते हैं? घरेलू हिंसा कानून का उदाहरण (How Laws are Made)

कोई कानून सीधे संसद में नहीं आ जाता; अक्सर इसके पीछे नागरिकों का लंबा संघर्ष होता है:

  • विधेयक से कानून बनने के चरण: प्रारूप (Draft Bill) → प्रथम वाचन (प्रस्तुति) → द्वितीय वाचन (खंडवार विस्तृत बहस व संसदीय स्थायी समिति द्वारा समीक्षा) → तृतीय वाचन (मतदान) → दूसरे सदन में पारित होना → राष्ट्रपति के हस्ताक्षर → राजपत्र (Gazette) में अधिसूचना।
  • घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम (2005): 1990 के दशक में महिला संगठनों और वकीलों (Lawyers Collective) ने घर के भीतर शारीरिक, मौखिक और आर्थिक हिंसा झेल रही महिलाओं के लिए नागरिक सुरक्षा की मांग उठाई। जन-सुनवाई, रैलियों और मीडिया अभियानों के दबाव में संसद ने 2005 में यह ऐतिहासिक कानून पारित किया जो 2006 से लागू हुआ।
  • अलोकप्रिय और विवादित कानून: यदि संसद ऐसा कानून बना दे जो संविधान के अनुरूप न हो या जनता के हितों के विरुद्ध हो, तो जनता धरने, प्रदर्शन और मीडिया द्वारा उसका विरोध करती है। अदालत ऐसे कानूनों को "असंवैधानिक" घोषित कर निरस्त (Strike Down) कर सकती है।

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शब्दावली, कालक्रम एवं प्रशासनिक व्यवस्था

भारतीय संसद के तीन अंग
राष्ट्रपति (President) + लोकसभा (Lok Sabha) + राज्यसभा (Rajya Sabha)
संविधान के अनुच्छेद 79 के अनुसार तीनों मिलकर संघ की संसद का निर्माण करते हैं।
लोकसभा में बहुमत का जादुई आंकड़ा
कुल 543 सीटें | सरकार बनाने हेतु न्यूनतम: 272 सीटें
104वें संविधान संशोधन (2019) द्वारा 2 एंग्लो-इंडियन सीटों का मनोनयन समाप्त कर दिया गया।
झारखण्ड का संसदीय प्रतिनिधित्व
लोकसभा सीटें = 14 | राज्यसभा सीटें = 6 (कुल सांसद = 20)
झारखण्ड की 14 लोकसभा सीटों में से 5 अनुसूचित जनजाति (ST) और 1 अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित हैं।
कानून निर्माण की प्रक्रिया
विधेयक (Bill) → दोनों सदनों में पारित → राष्ट्रपति के हस्ताक्षर = अधिनियम (Act)
राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद ही कोई विधेयक वैधानिक कानून का रूप लेता है।
संसद में प्रश्नकाल (Question Hour)
संसद बैठक का पहला घंटा (प्रातः 11:00 से 12:00 बजे)
कार्यपालिका को विधायिका के प्रति जवाबदेह बनाए रखने का सबसे सशक्त लोकतांत्रिक औजार।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
प्रश्न 1: लोकसभा और राज्यसभा के बीच किन्हीं तीन प्रमुख अंतरों को स्पष्ट कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: लोकसभा और राज्यसभा में मुख्य अंतर इस प्रकार हैं:

  1. निर्वाचन पद्धति: लोकसभा के सदस्यों (सांसदों) को देश की जनता सीधे वयस्क मताधिकार द्वारा चुनती है। जबकि राज्यसभा के सदस्यों को राज्यों की विधानसभाओं के चुने हुए विधायक (MLAs) चुनते हैं।
  2. कार्यकाल और विघटन: लोकसभा का सामान्य कार्यकाल 5 वर्ष होता है और इसे समय से पूर्व भी भंग किया जा सकता है। राज्यसभा एक स्थायी सदन है, जो कभी भंग नहीं होता; इसके एक-तिहाई सदस्य हर 2 वर्ष में सेवानिवृत्त होते हैं और प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल 6 वर्ष होता है।
  3. वित्तीय शक्तियां: लोकसभा को धन विधेयक (Money Bill) और बजट के मामले में सर्वोच्च शक्तियां प्राप्त हैं। सरकार केवल तभी तक टिक सकती है जब तक उसे लोकसभा में बहुमत प्राप्त हो।
उदाहरण 2
प्रश्न 2: संसद में "प्रश्नकाल" (Question Hour) का क्या महत्व है? यह सरकार को कैसे सतर्क रखता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: प्रश्नकाल संसद के कार्यदिवस का सबसे महत्वपूर्ण घंटा होता है:

  1. जवाबदेही सुनिश्चित करना: प्रश्नकाल के दौरान विपक्षी और सत्ता पक्ष के सांसद मंत्रियों से उनके विभागों की नीतियों, योजनाओं में देरी, भ्रष्टाचार और जनता की समस्याओं पर सीधे प्रश्न पूछते हैं।
  2. जनता का प्रतिनिधित्व: सांसदों के माध्यम से जनता के मुद्दे सीधे सरकार के संज्ञान में आते हैं।
  3. सतर्कता: तीखे सवालों के डर से मंत्री और नौकरशाही सतर्क रहते हैं और कोई भी नीतिगत फैसला लेने में लापरवाही नहीं बरतते।
उदाहरण 3
प्रश्न 3: घरेलू हिंसा कानून (Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005) कैसे बना? समझाइए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: यह कानून नागरिक समाज और संसद की साझी जीत का ऐतिहासिक उदाहरण है:

  1. आवश्यकता का अनुभव: 1990 के दशक में महसूस किया गया कि महिलाओं को घरों के भीतर होने वाली हिंसा (मारपीट, दहेज प्रताड़ना, मानसिक उत्पीड़न) से तुरंत सुरक्षा और साझी छत का कानूनी अधिकार मिलना चाहिए।
  2. नागरिक आंदोलन: महिला संगठनों, वकीलों के समूह और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मिलकर एक मसौदा विधेयक तैयार किया और देश भर में जन-सुनवाई आयोजित की।
  3. संसदीय प्रक्रिया: 2002 में विधेयक संसद में पेश हुआ और संसदीय स्थायी समिति को भेजा गया, जहाँ महिला संगठनों ने अपने सुझाव दिए।
  4. पारित होना: दिसंबर 2005 में संसद ने इस संशोधित विधेयक को पारित किया और 2006 में यह पूरे देश में लागू हुआ।
उदाहरण 4
प्रश्न 4: गठबंधन सरकार (Coalition Government) से क्या आशय है? यह कब बनती है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: गठबंधन सरकार का आशय दो या दो से अधिक राजनीतिक दलों द्वारा मिलकर बनाई गई सरकार से है:

  1. परिस्थिति: जब आम चुनाव में किसी भी एक राजनीतिक दल को लोकसभा में सरकार बनाने के लिए स्पष्ट बहुमत (न्यूनतम 272 सीटें) प्राप्त नहीं होता।
  2. निर्माण: तब समान विचार वाले कई दल मिलकर एक गठबंधन (Alliance) बनाते हैं और संसद में अपना संयुक्त बहुमत सिद्ध करते हैं।
  3. उदाहरण: 1990 के दशक से भारत में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) जैसी गठबंधन सरकारें केंद्र में सफलतापूर्वक कार्य कर चुकी हैं।
उदाहरण 5
प्रश्न 5: यदि संसद कोई ऐसा कानून बना दे जो जनता को पसंद न हो या अनुचित लगे, तो नागरिक क्या कर सकते हैं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिक अलोकप्रिय कानूनों के विरुद्ध निम्नलिखित कदम उठा सकते हैं:

  1. शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन: नागरिक जनसभाएं, रैलियां, धरने और हस्ताक्षर अभियान चलाकर कानून का विरोध कर सकते हैं।
  2. मीडिया और जनमत: समाचार पत्रों, टीवी चैनलों और सोशल मीडिया के माध्यम से कानून की कमियों को उजागर कर सरकार पर पुनर्विचार का दबाव बना सकते हैं।
  3. न्यायपालिका की शरण: यदि कानून संविधान के मूल ढांचे या मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है, तो नागरिक अदालत जा सकते हैं। न्यायपालिका "न्यायिक समीक्षा" (Judicial Review) के तहत उस कानून को रद्द कर सकती है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

छात्र अक्सर सोचते हैं कि संसद में केवल लोकसभा और राज्यसभा ही शामिल हैं।

सही वैज्ञानिक तथ्य

संविधान के अनुच्छेद 79 के अनुसार भारत की संसद में राष्ट्रपति, लोकसभा और राज्यसभा तीनों मिलकर शामिल हैं। बिना राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के कोई विधेयक कानून नहीं बन सकता।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह मान लेना कि राज्यसभा को भी राष्ट्रपति समय से पहले भंग कर सकते हैं।

सही वैज्ञानिक तथ्य

राज्यसभा एक स्थायी सदन (Permanent House) है, इसे कभी भंग नहीं किया जा सकता। केवल इसके एक-तिहाई सदस्य हर दो वर्ष में बदलते हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह समझना कि कानून केवल मंत्री और संसद में बैठे नेता ही अपनी मर्जी से बनाते हैं।

सही वैज्ञानिक तथ्य

कानून निर्माण में आम नागरिकों, सामाजिक संस्थाओं, मीडिया और महिला आंदोलनों का भारी दबाव और योगदान होता है (जैसे आरटीआई और घरेलू हिंसा कानून)।

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

भारतीय संसद की संरचना एवं विधि निर्माण चक्र (Indian Parliament) लोकतंत्र की सर्वोच्च प्रतिनिधि सभा: राष्ट्रपति + लोकसभा + राज्यसभा भारत के राष्ट्रपति (President) संसद का अभिन्न अंग • अंतिम स्वीकृति लोकसभा (जनता का सदन - Lower House) • 543 निर्वाचित सदस्य (प्रत्यक्ष चुनाव) • बहुमत दल (272+ सीटें) बनाता है राष्ट्रीय सरकार • धन विधेयक (Money Bill) पर विशेष अधिकार कार्यकाल: 5 वर्ष (लोकसभा अध्यक्ष द्वारा संचालित) राज्यसभा (राज्यों की परिषद - Upper House) • 245 सदस्य (233 निर्वाचित + 12 मनोनीत) • विधायकों (MLAs) द्वारा अप्रत्यक्ष चुनाव • स्थायी सदन (कभी भंग नहीं होता, 1/3 द्विवार्षिक) सभापति: भारत के उपराष्ट्रपति (कार्यकाल: 6 वर्ष) विधेयक से कानून बनने की 5-चरणीय लोकतांत्रिक प्रक्रिया 1. प्रस्ताव / मसौदा नागरिक मांग / बिल → 2. प्रथम सदन बहस, संशोधन व पास → 3. द्वितीय सदन समीक्षा व मतदान → 4. राष्ट्रपति हस्ताक्षर अंतिम संवैधानिक मोहर → 5. वैधानिक कानून राजपत्र में लागू

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
  1. भारतीय संसद देश के लोकतांत्रिक नागरिकों की संप्रभु इच्छा का प्रतिनिधित्व करने वाली सर्वोच्च संस्था है।
मुख्य बिंदु 2
  1. सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार नागरिकों को अपने प्रतिनिधियों को चुनने और शासन पर नियंत्रण रखने की शक्ति देता है।
मुख्य बिंदु 3
  1. भारतीय संसद के तीन अभिन्न अंग हैं: भारत के राष्ट्रपति, लोकसभा और राज्यसभा (अनुच्छेद 79)।
मुख्य बिंदु 4
  1. लोकसभा में 543 निर्वाचित सदस्य होते हैं जिन्हें जनता प्रत्यक्ष रूप से 5 वर्षों के लिए चुनती है।
मुख्य बिंदु 5
  1. सरकार बनाने के लिए किसी दल या गठबंधन को लोकसभा में न्यूनतम 272 सदस्यों (स्पष्ट बहुमत) का समर्थन आवश्यक होता है।
मुख्य बिंदु 6
  1. राज्यसभा एक स्थायी सदन है जिसमें 245 सदस्य होते हैं, जिन्हें राज्यों की विधानसभाओं के विधायक चुनते हैं।
मुख्य बिंदु 7
  1. संसद के प्रत्येक कार्यदिवस का पहला घंटा "प्रश्नकाल" (Question Hour) होता है, जिसमें सांसद सरकार से तीखे सवाल पूछकर उसकी जवाबदेही तय करते हैं।
मुख्य बिंदु 8
  1. कोई भी विधेयक तब तक कानून नहीं बनता जब तक वह संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित होकर राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षरित न हो जाए।
मुख्य बिंदु 9
  1. नागरिक समाज, वकीलों और महिला आंदोलनों के सतत संघर्ष के फलस्वरूप 2005 में ऐतिहासिक "घरेलू हिंसा महिला संरक्षण कानून" बना।
मुख्य बिंदु 10
  1. न्यायपालिका के पास "न्यायिक समीक्षा" की शक्ति है, जिसके तहत वह संविधान का उल्लंघन करने वाले किसी भी संसदीय कानून को रद्द कर सकती है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
भारतीय संसद में सरकार बनाने के लिए लोकसभा में न्यूनतम कितनी सीटों का बहुमत आवश्यक है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: 272 सीटें
लोकसभा की कुल 543 निर्वाचित सीटों में से सरकार बनाने हेतु आधे से अधिक (272+) का समर्थन आवश्यक होता है।
2
राज्यसभा का पदेन सभापति (Ex-officio Chairman) कौन होता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: भारत के उपराष्ट्रपति
संविधान के अनुसार भारत के उपराष्ट्रपति ही राज्यसभा के पदेन सभापति के रूप में सदन का संचालन करते हैं।
3
संसद की बैठक का पहला घंटा किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: प्रश्नकाल (Question Hour)
प्रातः 11:00 से 12:00 बजे तक प्रश्नकाल होता है, जिसमें सांसद मंत्रियों से सरकारी कामकाज पर सीधे सवाल पूछते हैं।
4
संसद द्वारा पारित "घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण कानून" किस वर्ष बना था?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: 2005 में
यह विधेयक 2005 में पारित हुआ था और 2006 से पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू हुआ।
5
राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल कितने वर्ष का होता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: 6 वर्ष
राज्यसभा स्थायी सदन है। इसके सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष होता है और इसके एक-तिहाई सदस्य प्रत्येक 2 वर्ष में सेवानिवृत्त होते हैं।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
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