(के) कार्टिय तल और बिंदु के निर्देश:
कार्तिय तल में दो उभयलिंगी रेखाएं होती हैं—क्षैतिज रेखा को $x$-अक्ष तथा तरल रेखा को $y$-अक्ष कहा जाता है। दोनों का प्रतिच्छेदित बिंदु मूलबिंदु $O(0, 0)$ संबंध है।
- कोई बिंदु $P(x, y)$ में प्रथम मान $x$ को भुज (एब्सिस्सा) कहते हैं (यह $y$-अक्ष से दूरी है)।
- द्वितीय मान $y$ को कोटि (ऑर्डिनेट) कहते हैं (यह $x$-अक्ष से दूरी है)।
- $x$-अक्ष पर स्थित किसी भी बिंदु के निर्देशांक $(x, 0)$ रूप के होते हैं ($y = 0$).
- $y$-अक्ष पर स्थित किसी भी बिंदु के निर्देशांक $(0, y)$ रूप के होते हैं ($x = 0$).
(ख) दूरी सूत्र का पाइथागोरस निगमन (दूरी सूत्र की व्युत्पत्ति):
मान लीजिए कि सममिति में दो बिंदु $P(x_1, y_1)$ और $Q(x_2, y_2)$ स्थित हैं।
$P$ और $Q$ से $x$-अक्ष पर क्रमशः $PR$ और $QS$ खींचिए। $P$ से $QS$ पर लंबाई $PT$ खींचें।
टैब समकोण $\triangle PTQ$ में:
- आधार $PT = RS = OS - OR = x_2 - x_1$
- लम्ब $QT = QS - TS = QS - PR = y_2 - y_1$
पाइथागोरस प्राइमे लागू करने पर:
$$PQ^2 = PT^2 + QT^2 = (x_2 - x_1)^2 + (y_2 - y_1)^2$$ $$\mathbf{PQ = \sqrt{(x_2 - x_1)^2 + (y_2 - y_1)^2}}$$1. किन्हीं दो बिंदु $P(x_1, y_1)$ और $Q(x_2, y_2)$ के बीच की दूरी: $$\mathbf{d = \sqrt{(x_2 - x_1)^2 + (y_2 - y_1)^2} = \sqrt{(x_1 - x_2)^2 + (y_1 - y_2)^2}}$$ (चूंकि किसी संख्या का वर्ग सदैव धनात्मक होता है, मूलतः $(x_2 - x_1)^2 = (x_1 - x_2)^2$होता है)।
2. मूलबिंदु $O(0, 0)$ से बिंदु $P(x, y)$ की दूरी (JAC 1 अंक): $$\mathbf{OP = \sqrt{x^2 + y^2}}$$