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NIOS • कक्षा X • Science & Technology (212) • अध्याय 26
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

वायु एवं जल (Air and Water)

संसार की प्रत्येक वस्तु जिस सामग्री से निर्मित है, उसे वैज्ञानिक भाषा में पदार्थ (पदार्थ) कहा जाता है। जिस हवा में हम सांस लेते हैं, जो खाना हम ग्रहण करते हैं, पत्थर, बादल, तार, साधन एवं जानवर, यहां तक ​​कि पानी की एक बाल्टी या रेती का एक कण—ये सभी पदार्थ हैं। पदार्थ की साइंटिक वैज्ञानिक परिभाषा यह है कि वह प्रत्येक वस्तु जो स्थान सासारती है (अर्थ जिसका आयतन होता है) और जिसमें द्रव्यमान (मास) होता है, वह पदार्थ कहलाती है। प्राचीन काल से ही मानव अपने आस-पास के परिवेश को समझाने का प्रयास कर रहा है। भारत के प्राचीन सिद्धांतों ने पदार्थों को पांच मूल पदार्थ बताया-'पंचतत्व' (वायु, पृथ्वी, अग्नि, जल और आकाश) में शामिल किया गया था। उनके अनुसार प्रत्येक सजीव या निर्जीव वस्तु का दर्शन पंचतत्वों के विशिष्ट संयोजन से होता है। आधुनिक पदार्थों को उनके भौतिक गुणधर्मों (भौतिक गुण) एवं रासायनिक प्रकृति (रासायनिक प्रकृति) के आधार पर दो प्रमुख पदार्थों में शामिल किया गया है। इस अध्याय में हम पदार्थ के भौतिक स्वरूप, पदार्थ के अभिलाक्षणिक गुण, पदार्थ की तीन प्रमुख अवस्थाएँ-ठोस (ठोस), द्रव (तरल) एवं गैस (गैस)-तथा उनके भौतिक स्वरूप, तापमान और दाब के प्रभाव, गुप्त आकाश (संगलन की प्रसुप्त ऊष्मा एवं वाष्पीकरण की प्रसुप्त ब्रह्मा) तथा वाष्पीकरण (वाष्पीकरण) की प्रकृति का वैज्ञानिक वस्तु विश्लेषण करेंगे। सरकारी अध्यवसायी परिषद (एनआईओएस रांची) द्वारा आयोजित कक्षा 9वीं बोर्ड परीक्षा में इस अध्याय से 6 से 8 अंक के अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे जाते हैं। विशेष रूप से तापमान के टुकड़ों का एकरूपता (केल्विन और कोलक्स), गुप्त ऊर्जा की अवधारणा, वैश्वीकरण को प्रभावित करने वाले कारक और वैश्वीकरण के कारण शीतलता उत्पन्न होने के सामान्य सिद्धांत (जैसे कि समुद्र में पानी का ठंडा होना, सूटी कपड़े का आभूषण, एसीटोन या रासायनिक यौगिकों का उपयोग पर आधारित) परीक्षण के सर्वोच्च प्राथमिक बिंदु हैं।

🧊 क्या आपने कभी विचार किया है: जब बर्फ पिघलकर पानी बनती है, तो पूरा पिघलने तक थर्मामीटर का तापमान 0°C पर ही क्यों अटका रहता है?

एक बीकर में स्नो केट के टुकड़े और मठों में लेजर प्लास्टर बर्नर पर धीरे-धीरे गर्म करना शुरू करें। जब बर्फ पिघलती है, तब समुद्र का तापमान 0°C होता है। आप लगातार नीचे से गैस चूल्हे की लौ से ऊर्जा ऊर्जा दे रहे हैं, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि जब तक बीकर की अंतिम बर्फ की डाली पूरी तरह से जल नहीं बन पाई, तब तक समुद्र का तापमान 1 डिग्री से भी ऊपर नहीं है! वह लगातार 0°C ही रहता है!

नीचे से दी जा रही भयानक ऊर्जा ऊर्जा का अंतिम कारण गायब हो रही है? क्या ख़तरे ख़राब हो गए हैं? या कोई अदृश्य शक्ति उस ऊर्जा को निगल रही है? यह कोई रहस्य नहीं है, बल्कि पदार्थ के समागम के बीच होने वाले अंतराणुक आकर्षण बल को तोड़ने में खर्च वाली ऊर्जा है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में 'संगलन की प्रसुप्त ऊर्जा' (संलयन की गुप्त ऊष्मा) कहा जाता है! जब तक सभी कन्न अपने ठोस बंधन को विविधता के रूप में स्वतंत्र नहीं हो जाते, तब तक यह तापमान वृद्धि बिना गुप्त रूप से विस्तारित रहती है। आइए, इस सूक्ष्म एवं रासायनिक पदार्थ के वैज्ञानिक जगत की यात्रा प्रारंभ करें!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

यह अध्याय आपकी वैज्ञानिक यात्रा एवं जीवन के लिए क्यों भिन्न है?

  1. NIOS परीक्षा में अनिवार्य अंक: बोर्ड तापमान रूपांतरण (केल्विन $K = ^\circ C + 273.15$), शीतलन प्रक्रिया की विविधता, और पदार्थ के विभिन्न स्तरों के असमान गुणधर्मों पर वस्तुनिष्ठ (MCQ), अति-लघु और 3-अंक के व्याख्यात्मक प्रश्न 100% पूछे जाते हैं।
  2. कक्षा 11 रसायन विज्ञान (पदार्थ की अवस्थाएँ एवं ऊष्मागतिकी) की अवधारणा: बारहवीं कक्षा में 'गैसीय नियम' (बॉयल और चार्ल्स का नियम), अंतराणुक बल (अंतरआण्विक बल) और एन्थैल्पी (संलयन/वाष्पीकरण की एन्थैल्पी) को समझने का प्राथमिक आधार यही अध्याय है।
  3. दैनिक वैज्ञानिक सिद्धांत: वैज्ञानिक, वायु शर्करा, मिट्टी के घड़ों में जल का प्राकृतिक उपचार, कोयला/पर फोम का वाष्पीकरण और कोयला (एलपीजी) और सीएनजी (सीएनजी) गैसों का संपीडन जैसे विशेषज्ञों का वैज्ञानिक वैज्ञानिक ज्ञान कारण।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • द्रव्यमान (मास) और भार (वजन) का प्राथमिक अर्थ: द्रव्यमान किसी वस्तु में पदार्थ की वास्तविक मात्रा है (एसआई मात्रा: किग्रा)।
  • आयतन (वॉल्यूम) की मापात्मक समझ: वस्तु द्वारा घेरा गया त्रिविमीय स्थान (SI परिमाण: $m^3$ या लीटर $L$)।
  • तापमान की आधारभूत संकल्पना: गर्माहट या ठंडक की माप (सेल्सियस एवं केल्विन पैमाने)।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • पदार्थ के कणों के भौतिक स्वरूप (कणों का अत्यंत सूक्ष्म होना, कणों के बीच रिक्त स्थान, कणों की निरंतर गतिशीलता एवं उनके बीच आकर्षण बल) को प्रयोगों द्वारा सिद्ध कर सकेंगे।
  • ठोस, द्रव और गैस के भौतिक अभिलक्षणों (आकार, आयतन, संपीड़्यता, विसरण दर, घनत्व और अंतराणुक बल) का विस्तृत तुलनात्मक चार्ट बना सकेंगे।
  • तापमान परिवर्तन के प्रभाव (गलनांक, क्वथनांक, ऊर्ध्वपातन एवं निक्षेपण) को समझ सकेंगे तथा सेल्सियस व केल्विन इकाइयों में सटीक रूपांतरण कर सकेंगे।
  • संगलन की गुप्त ऊर्जा (संलयन की गुप्त ऊष्मा) और वैश्वीकरण की गुप्त ऊर्जा (वाष्पीकरण की गुप्त ऊष्मा) की वैज्ञानिक व्याख्या कर सकती है।
  • परिवर्तनशीलता एवं क्वथन (उबलना) में स्पष्ट वैज्ञानिक अंतर निरूपित कर फ़ेन।
  • वाष्पीकरण की दर को प्रभावित करने वाले चारों कारकों (सतह का क्षेत्रफल, तापमान, आर्द्रता एवं वायु की गति) का विश्लेषण कर दैनिक जीवन के उदाहरणों की पुष्टि कर सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. पदार्थ का भौतिक स्वरूप एवं कणों...
2 2. पदार्थ की अवस्थाएँ: ठोस, द्रव एव...
3 3. पदार्थ की अवस्था में परिवर्तन: त...
4 4. वाष्पीकरण (वाष्पीकरण) एवं शीतलन...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. पदार्थ का भौतिक स्वरूप एवं कणों के अभिलाक्षणिक गुण

(क) पदार्थ कणों से मिलकर बना है (Particulate Nature of Matter)

प्राचीन काल में पदार्थ के स्वरूप के बारे में दो विचारधाराएँ प्रचलित थीं। एक विचारधारा का मानना था कि पदार्थ लकड़ी के लट्ठे की तरह 'सतत' (Continuous) होता है, जबकि दूसरी विचारधारा मानती थी कि पदार्थ रेत के कणों की तरह सूक्ष्म कणों (Particles) से मिलकर बना है।

प्रायोगिक सत्यापन (पोटैशियम परमैंगनेट प्रयोग): यदि हम 100 mL जल में पोटैशियम परमैंगनेट ($KMnO_4$) के मात्र 2-3 छोटे क्रिस्टल घोलें, तो पूरा जल गहरे गुलाबी/बैंगनी रंग का हो जाता है। अब इस घोल में से 10 mL निकालकर 90 mL स्वच्छ जल में मिलाएँ। फिर इस नए घोल से 10 mL निकालकर अगले 90 mL स्वच्छ जल में मिलाएँ। इस प्रकार 5 से 8 बार तनुकरण (Dilution) करने पर भी जल का रंग रंगीन बना रहता है। यह सिद्ध करता है कि $KMnO_4$ के एक छोटे से क्रिस्टल में करोड़ों-अरबों अत्यंत सूक्ष्म कण विद्यमान होते हैं, जो बार-बार विभाजित होकर जल के कणों में फैलते चले जाते हैं।

(ख) पदार्थ के कणों के तीन प्रमुख अभिलाक्षणिक गुण

  1. पदार्थ के कणों के बीच रिक्त स्थान (Intermolecular Space) होता है: जब हम पानी में नमक, शर्करा (चीनी) या डेटॉल घोलते हैं, तो जल का स्तर (Water level) बिल्कुल नहीं बढ़ता। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि नमक के कण जल के कणों के बीच उपस्थित खाली स्थानों में पूर्णतः समाहित हो जाते हैं।
  2. पदार्थ के कण निरंतर गतिशील होते हैं (Particles are in Constant Motion):
    • कमरे के एक कोने में रखी बिना जली अगरबत्ती की सुगंध लेने के लिए हमें उसके समीप जाना पड़ता है, किंतु जलाई गई अगरबत्ती की खुशबू दूर बैठे ही हमारे पास पहुँच जाती है।
    • कणों की यह गति उनके भीतर उपस्थित गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) के कारण होती है। तापमान बढ़ाने पर कणों की गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है, जिससे कणों का वेग तीव्र हो जाता है।
    • दो विभिन्न पदार्थों के कणों का स्वतः मिलना विसरण (Diffusion) कहलाता है। तापमान में वृद्धि होने पर विसरण की दर तीव्र हो जाती है।
  3. पदार्थ के कण एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं (Intermolecular Force of Attraction): लोहे की कील, चाक का टुकड़ा और एक रबर बैंड लें। हथौड़ा मारकर या खींचकर इन्हें तोड़ने का प्रयास करें। हम पाते हैं कि चाक आसानी से टूट जाता है, रबर बैंड खींचने पर थोड़ा प्रतिरोध दिखाता है, किंतु लोहे की कील को तोड़ना अत्यधिक कठिन है। यह दर्शाता है कि विभिन्न पदार्थों में कणों के बीच आकर्षण बल का परिमाण भिन्न-भिन्न होता है (लोहा > रबर बैंड > चाक)।

2. पदार्थ की अवस्थाएँ: ठोस, द्रव एवं गैस का विस्तृत तुलनात्मक विश्लेषण

कणों के बीच के आकर्षण बल और उनके बीच के रिक्त स्थान के आधार पर पदार्थ की मुख्य रूप से तीन भौतिक अवस्थाएँ होती हैं:

गुणधर्म (Property) ठोस (Solid) द्रव (Liquid) गैस (Gas)
1. आकार एवं आयतन निश्चित आकार एवं निश्चित आयतन होता है। बाह्य बल लगाने पर भी आकार नहीं बदलता (दृढ़)। आकार अनिश्चित (जिस बर्तन में रखें उसी का आकार लेता है), परंतु आयतन निश्चित होता है। आकार एवं आयतन दोनों अनिश्चित होते हैं। संपूर्ण उपलब्ध स्थान को घेर लेती है।
2. अंतराणुक रिक्त स्थान अत्यंत न्यूनतम (कण बहुत पास-पास संकुलित होते हैं)। मध्यम (ठोस से अधिक परंतु गैस से कम)। अत्यधिक विशाल (कण एक-दूसरे से बहुत दूर-दूर होते हैं)।
3. अंतराणुक आकर्षण बल सर्वाधिक प्रबल (कण अपनी माध्य स्थिति पर केवल कंपन करते हैं)। मध्यम (कण एक-दूसरे के ऊपर फिसलने के लिए स्वतंत्र होते हैं)। नगण्य / न्यूनतम (कण तीव्र वेग से सभी दिशाओं में यादृच्छिक गति करते हैं)।
4. संपीड़्यता (Compressibility) नगण्य (इन्हें दबाया नहीं जा सकता)। बहुत कम (लगभग असंपीड्य)। अत्यधिक उच्च (उच्च संपीड़्यता के कारण ही LPG व CNG को सिलेंडरों में भरा जाता है)।
5. विसरण की दर (Diffusion) अत्यंत धीमी या नगण्य। मध्यम (ठोस और गैस दोनों द्रवों में विसरित हो सकते हैं)। तीव्रतम (कणों के उच्च वेग और अत्यधिक रिक्त स्थान के कारण)।
6. तरलता / बहाव (Fluidity) दृढ़ होते हैं, इनमें बहाव नहीं होता। तरल होते हैं, उच्च तल से निम्न तल की ओर बहते हैं। सभी संभव दिशाओं में स्वतः तीव्र प्रवाह करते हैं।
विशेष वैज्ञानिक तथ्य (पदार्थ की 4थी एवं 5वीं अवस्थाएँ):
  • प्लाज्मा (Plasma): यह अत्यधिक ऊर्जा वाले और अति-उत्तेजित आयनित गैस के कणों की अवस्था है। फ्लोरोसेंट ट्यूब और नियॉन बल्ब में प्लाज्मा चमकता है। सूर्य और तारों की चमक भी उच्च तापमान पर प्लाज्मा बनने के कारण होती है।
  • बोस-आइंस्टीन संघनन (BEC - Bose-Einstein Condensate): 1920 में भारतीय वैज्ञानिक सत्येंद्र नाथ बोस और अल्बर्ट आइंस्टीन ने इसकी गणना की। सामान्य वायु के घनत्व के एक लाखवें भाग जितने कम घनत्व वाली गैस को अति-निम्न तापमान (Super low temperature) पर ठंडा करने पर BEC अवस्था प्राप्त होती है (2001 में कॉर्नेल, केटरले और वीमन को इसके लिए नोबेल पुरस्कार मिला)।

3. पदार्थ की अवस्था में परिवर्तन: तापमान एवं दाब का प्रभाव

(क) तापमान परिवर्तन का प्रभाव

जब किसी ठोस को ऊष्मा दी जाती है, तो उसके कणों की गतिज ऊर्जा बढ़ती है। गतिज ऊर्जा बढ़ने से कण तेजी से कंपन करने लगते हैं। दी गई ऊष्मा कणों के बीच के अंतराणुक आकर्षण बल को पार कर लेती है, जिससे कण अपनी नियत स्थिति को छोड़कर स्वतंत्र रूप से गति करने लगते हैं।

  1. गलनांक (Melting Point): वह तापमान जिस पर वायुमंडलीय दाब पर कोई ठोस पिघलकर द्रव बन जाता है, उसका गलनांक कहलाता है। बर्फ का गलनांक 0°C अर्थात 273.15 K होता है। किसी ठोस का गलनांक उसके कणों के बीच आकर्षण बल के सामर्थ्य का सूचक होता है।
  2. क्वथनांक (Boiling Point): वह तापमान जिस पर वायुमंडलीय दाब पर कोई द्रव उबलने लगता है, उसका क्वथनांक कहलाता है। क्वथन एक समष्टि परिघटना (Bulk Phenomenon) है, जिसमें द्रव के भीतर के सभी कण वाष्प में बदलने के लिए पर्याप्त ऊर्जा प्राप्त कर लेते हैं। जल का क्वथनांक 100°C अर्थात 373.15 K होता है।
  3. संगलन की प्रसुप्त ऊष्मा (Latent Heat of Fusion): वायुमंडलीय दाब पर 1 किलोग्राम ठोस को उसके गलनांक पर पूर्णतः द्रव में बदलने के लिए जितनी ऊष्मीय ऊर्जा की आवश्यकता होती है, उसे संगलन की प्रसुप्त ऊष्मा कहते हैं। यही कारण है कि 0°C (273 K) पर जल के कणों की ऊर्जा उसी तापमान पर बर्फ के कणों की ऊर्जा से अधिक होती है।
  4. वाष्पीकरण की प्रसुप्त ऊष्मा (Latent Heat of Vaporization): वायुमंडलीय दाब पर 1 किलोग्राम द्रव को उसके क्वथनांक पर वाष्प (गैस) में बदलने के लिए आवश्यक ऊष्मीय ऊर्जा को वाष्पीकरण की प्रसुप्त ऊष्मा कहते हैं। यही कारण है कि 100°C के उबलते जल की अपेक्षा 100°C की भाप (Steam) से जलने पर अधिक तीव्र पीड़ा होती है, क्योंकि भाप के कणों में गुप्त ऊष्मा के रूप में अतिरिक्त ऊर्जा होती है।
  5. ऊर्ध्वपातन (Sublimation) एवं निक्षेपण (Deposition):
    • द्रव अवस्था में परिवर्तित हुए बिना ठोस अवस्था से सीधे गैस बनने की प्रक्रिया ऊर्ध्वपातन कहलाती है (जैसे कपूर, अमोनियम क्लोराइड $NH_4Cl$, नैफ्थलीन की गोलियाँ, शुष्क बर्फ)।
    • वाष्प या गैस से बिना द्रव में बदले सीधे ठोस में बदलने की प्रक्रिया को निक्षेपण (Deposition) कहते हैं।

(ख) दाब परिवर्तन का प्रभाव एवं गैसों का द्रवीकरण

जब किसी सिलेंडर में भरी गैस पर पिस्टन लगाकर दाब बढ़ाया जाता है और तापमान घटाया जाता है, तो गैस के कण अत्यधिक समीप आ जाते हैं। उनके बीच का अंतराणुक बल बढ़ जाता है और गैस संघनित होकर द्रव (Liquid) में बदल जाती है।

  • ठोस कार्बन डाइऑक्साइड (शुष्क बर्फ - Dry Ice): जब गैसीय $CO_2$ पर 1 वायुमंडलीय (atm) दाब कम किया जाता है, तो यह बिना द्रव अवस्था में आए सीधे गैसीय अवस्था में परिवर्तित हो जाती है। इसी कारण ठोस कार्बन डाइऑक्साइड को 'शुष्क बर्फ' (Dry Ice) कहा जाता है।

4. वाष्पीकरण (वाष्पीकरण) एवं शीतलन प्रभाव का वैज्ञानिक विश्लेषण

(क) वाष्पीकरण की परिभाषा एवं क्वथन से अंतर

वाष्पीकरण: क्वथनांक से कम किसी भी तापमान पर द्रव की सतह के कणों का वाष्प में परिवर्तित होने की स्वतः प्रक्रिया को वाष्पीकरण (Evaporation) कहते हैं।

द्रव के भीतर सभी कणों की गतिज ऊर्जा एकसमान नहीं होती। सतह पर स्थित कुछ कणों में इतनी अधिक गतिज ऊर्जा होती है कि वे अन्य कणों के आकर्षण बल से मुक्त होकर वायु में वाष्पीकृत हो जाते हैं।

तुलना का आधार वाष्पीकरण (Evaporation) क्वथन (Boiling)
तापमान क्वथनांक से कम किसी भी तापमान पर निरंतर होता है। केवल एक निश्चित नियत तापमान (क्वथनांक) पर ही होता है।
प्रकार / परिघटना यह केवल द्रव की सतह पर होने वाली परिघटना (Surface phenomenon) है। यह संपूर्ण द्रव में होने वाली समष्टि परिघटना (Bulk phenomenon) है।
शीतलन प्रभाव वाष्पीकरण से सदैव शीतलता (ठंडक) उत्पन्न होती है। क्वथन के दौरान कोई शीतलन प्रभाव नहीं होता।
बुलबुलों का बनना इसमें कोई बुलबुले नहीं बनते। द्रव के भीतर से वाष्प के तीव्र बुलबुले उठते हैं।

(ख) वाष्पीकरण की दर को प्रभावित करने वाले 4 मुख्य कारक

  1. सतह का क्षेत्रफल (Surface Area): वाष्पीकरण एक सतही प्रक्रिया है। अतः सतह का क्षेत्रफल बढ़ाने पर वाष्पीकरण की दर बढ़ जाती है। उदाहरण: गीले कपड़ों को सुखाने के लिए हम उन्हें फैलाकर डालते हैं। गर्म चाय को कप की बजाय प्लेट/तश्तरी में डालने पर वह शीघ्र ठंडी हो जाती है।
  2. तापमान में वृद्धि (Temperature): तापमान बढ़ने पर अधिक संख्या में कणों को पर्याप्त गतिज ऊर्जा प्राप्त होती है, जिससे वे तेजी से वाष्प में बदलते हैं। अतः गर्मियों में कपड़े शीघ्र सूखते हैं।
  3. आर्द्रता में कमी (Humidity): वायु में उपस्थित जलवाष्प की मात्रा को आर्द्रता कहते हैं। यदि वायु में पहले से ही जलवाष्प की मात्रा अधिक हो, तो वाष्पीकरण की दर घट जाती है। बरसात के उमस भरे दिनों में पसीना आसानी से नहीं सूखता।
  4. वायु की गति में वृद्धि (Wind Speed): तेज हवा में जलवाष्प के कण हवा के साथ तेजी से उड़ जाते हैं, जिससे आस-पास जलवाष्प की मात्रा कम हो जाती है और वाष्पीकरण तीव्र हो जाता है। पंखे के नीचे गीले कपड़े शीघ्र सूख जाते हैं।

(ग) वाष्पीकरण के कारण शीतलता उत्पन्न होने के दैनिक जीवन में उदाहरण

वाष्पीकरण के दौरान सतह के कण आस-पास से ऊष्मा ऊर्जा अवशोषित कर लेते हैं। ऊष्मा का अवशोषण होने से परिवेश ठंडा हो जाता है:

  • मिट्टी के घड़े (मटके) का जल शीतल होना: मटके की दीवारों में अनगिनत अति-सूक्ष्म छिद्र होते हैं, जिनसे जल रिसकर बाहर आता रहता है। बाहरी सतह पर उपस्थित जल जब वाष्पीकृत होता है, तो वह मटके और भीतर के जल से वाष्पीकरण की गुप्त ऊष्मा खींच लेता है, जिससे भीतर का पानी अत्यंत शीतल हो जाता है।
  • हथेली पर एसीटोन / इत्र / सैनिटाइज़र लगाने पर ठंडक: ये अत्यधिक वाष्पशील द्रव हैं। जैसे ही इन्हें हथेली पर डाला जाता है, ये हथेली से ऊष्मा लेकर वाष्पीकृत हो जाते हैं, जिससे हथेली पर ठंडक महसूस होती है।
  • गर्मियों में सूती (Cotton) कपड़े पहनना: गर्मियों में हमारे शरीर से अधिक पसीना निकलता है। सूती कपड़े जल के अच्छे अवशोषक होते हैं। ये पसीने को सोखकर वायुमंडल में आसानी से वाष्पीकृत कर देते हैं, जिससे शरीर को निरंतर शीतलता मिलती है।

महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र, अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

तापमान रूपांतरण (सेल्सियस से केल्विन)
K = °C + 273.15 (सुविधा हेतु गणना में K = °C + 273 प्रयुक्त होता है)
तापमान रूपांतरण (केल्विन से सेल्सियस)
°C = K - 273.15
बर्फ का गलनांक (बर्फ का पिघलने बिंदु)
0°C = 273.15 K
जल का क्वथनांक (पानी का क्वथनांक)
100°C = 373.15 K
घनत्व का सूत्र (घनत्व सूत्र)
घनत्व (d) = द्रव्यमान (M) / आयतन (V); मात्रक: kg/m³
दबाव की एसआई मात्रा (दबाव की इकाई)
पास्कल (Pascal, Pa); 1 वायुमंडल (atm) = 1.01 × 10⁵ Pa
गुप्त ऊष्मा का गणितीय रूप
Q = m × L (जहाँ Q = ऊष्मा, m = द्रव्यमान, L = गुप्त ऊष्मा)
संगलन की प्रसुप्त ऊष्मा (बर्फ हेतु)
L_f = 3.34 × 10⁵ J/kg (0°C पर 1 kg बर्फ को जल बनाने हेतु)
वाष्पीकरण की प्रसुप्त ऊष्मा (जल हेतु)
L_v = 2.26 × 10⁶ J/kg (100°C पर 1 kg जल को भाप बनाने हेतु)
शुष्क बर्फ का रासायनिक संघटन
ठोस कार्बन डाइऑक्साइड (Solid CO₂) उच्च दाब पर संग्रहित

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
जेएसी बोर्ड मॉडल प्रश्न (3 अंक): (ए) केल्विन स्केल में निम्नतम तापमान: (i) 25°C (ii) 373°C। (बी) निम्नलिखित तापमानों को दक्षिणी पैमाने में परिवर्तित किया गया: (i) 300 K (ii) 573 K।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
(ए) कोल्ड से केल्विन में रूपांतरण सूत्र: $K = ^\circ C + 273$ (i) $25^\circ C = 25 + 273 = 298\text{ K}$ (ii) $373^\circ C = 373 + 273 = 646\text{ K}$ (बी) केल्विन से सेलेअल में रूपांतरण सूत्र: $^\circ C = K - 273$ (i) $300\text{ K} = 300 - 273 = 27^\circ C$ (ii) $573\text{ K} = 573 - 273 = 300^\circ C$
उदाहरण 2
कारण स्पष्ट कीजिए (3 अंक): (a) उबलते हुए जल अथवा भाप में से जलने की तीव्रता किसमें अधिक महसूस होती है और क्यों? (b) गर्मियों में हमें सूती कपड़े क्यों पहनने चाहिए?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

(a) 100°C के सामान्य जल की तुलना में 100°C की भाप (भाप) से जलने पर अधिक तीव्र जलन महसूस होती है। वैज्ञानिक कारण: 'वाष्पीकरण की गुप्त ऊर्जा' ($2.26 \times 10^6\text{ J/kg}$) के रूप में 'वाष्पीकरण की गुप्त ऊर्जा' ($2.26 \times 10^6\text{ J/kg}$) के रूप में अतिरिक्त ऊर्जा संग्रह कर रखा जाता है। वस्तुतः समान पर स्टॉक में समुद्री जल की तुलना में अधिक उभरती है, जो त्वचा के संपर्क में आने पर भारी गंभीर जलन पैदा होती है।

(बी) गर्मियों में शारीरिक तापमान नियंत्रण के लिए भारी पशुधन है। सूती (कपास) कपड़ा जल का बहुत अच्छा अवशोषकहोता है। यह मसालों को त्वचा से लेकर ब्लास्टिंग के संपर्क में फैला हुआ देता है, जिससे ऑक्सिजन का प्लास्टीक्रेशन क्षरण होता है। वैसीकरण के दौरान हमारे शरीर से वैरिएक्शन का प्रसुप्त ऊर्जा अवशोषित होता है, जिससे हमारे शरीर को निरंतर शीतलता प्राप्त होती है।

उदाहरण 3
जेएसी बोर्ड लघु उत्तरीय प्रश्न (3 अंक): नैफ्थलीन (कपूर) को इस समय जारी करने पर कोई भी ठोस छोड़े बिना गायब क्यों हो जाता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

नैफ्थलीन (कपूर) एक उर्ध्वपातज (उत्थान योग्य) पदार्थ है।

  1. नैफ्थलीन के साएम के बीच बल लीज वाला अंतरानुक आकर्षण अत्यंत दुर्बल होता है।
  2. मूल रूप से सामान्य कमरे के तापमान पर ही यह स्थिर रूप से परिवर्तित होता हुआ प्रतीत होता है। इस कार्यक्रम को ऊर्ध्वपातन (उच्च बनाने की क्रिया) कहते हैं।
  3. समय के साथ टकराने के साथ ही नेफथलीन के संपूर्ण ठोस कण वायुमंडल में विसरित हो जाते हैं, जहां ज्वालामुखी में बिना किसी चट्टान के नैफथलीन पूरी तरह से अदृश्य हो जाती है।
उदाहरण 4
व्याख्या कीजिए (2 अंक): बर्फ का टुकड़ा जल पर क्यों तैरता है, जबकि अधिकांश ठोस अपने ही द्रव से भारी होते हैं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

वैज्ञानिक सिद्धांत: कोई भी वस्तु किसी भी द्रव पर तब तैरती है जब उसका घनत्व (घनत्व) होता है वह द्रव्य का घनत्व ($d_{\text{वस्तु}} < d_{\text{द्रव}}$) होता है।

  1. जब पानी बर्फ में 0°C तक ठंडा हो जाता है, तो पानी के कणों के बीच ठोस बंधों के कारण एक विशिष्ट पिंजरानुमा (पिंजरे जैसी खुली षट्कोणीय संरचना) संरचना बन जाती है।
  2. यह त्रिविमीय पिंजरानुमा संरचना के कारण कणों के बीच काफी रिक्त स्थान पर रहता है, जिससे बर्फ का आयतन समान द्रव्यमान वाले द्रव जल के आयतन से अधिक हो जाता है।
  3. घनत्व सूत्र $\text{घनत्व} = \frac{\text{द्रव्यमान}}{\text{आयतन}}$ के आयतन में वृद्धि पर बर्फ का घनत्व द्रव जल के घनत्व (लगभग $1\text{ g/cm}^3$) से कम (लगभग $0.917\text{ g/cm}^3$) हो जाता है। घनत्व कम होने के कारण बर्फ के पानी पर नमी तैरती रहती है।
उदाहरण 5
संख्यात्मक प्रश्न (3 अंक): 0°C पर उपस्थित 5 किलो बर्फ को 0°C के जल में परिवर्तित करने के लिए कितनी ऊर्जा की आवश्यकता होगी? (बर्फ की संगलन की प्रसुप्त ऊष्मा = $3.34 \times 10^5\text{ J/kg}$)
विस्तृत समाधान / उत्तर:
दिया गया है: बर्फ का द्रव्यमान ($m$) = $5\text{ kg}$ संगलन की प्रसुप्त ऊर्जा ($L_f$) = $3.34 \times 10^5\text{ J/kg}$ सूत्र: आवश्यक ऊर्जा ($Q$) = $m \times L_f$ $Q = 5\text{ kg} \times (3.34 \times 10^5\text{ J/kg})$ $Q = 16.7 \times 10^5\text{ J} = 1.67 \times 10^6\text{ J}$ (अर्थात 1670 कि जूल) मूल रूप से 0°C पर 5 चट्टानी बर्फ़ को पिघलाकर जल बनाने के लिए $1.67 \times 10^6\text{ Joule}$ गुप्त ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

परीक्षार्थी अक्सर वाष्पीकरण और क्वथन को एक ही परिघटना समझ लेते हैं।

सही वैज्ञानिक तथ्य

क्वथन केवल क्वथनांक (जैसे जल हेतु 100°C) पर संपूर्ण द्रव में होने वाली समष्टि परिघटना है, जबकि वाष्पीकरण क्वथनांक से कम किसी भी तापमान पर केवल सतह पर होने वाली स्वतः प्रक्रिया है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

तापमान बदलते समय छात्र प्रायः K से °C में बदलते समय 273 जोड़ देते हैं।

सही वैज्ञानिक तथ्य

याद रखें: °C से K में जाता समय 273 बढ़ा हुआ है ($K = ^\circ C + 273$), और K से °C में आया समय 273 बढ़ा हुआ है ($^\circ C = K - 273$). केल्विन के साथ डिग्री (°) का चिन्ह कभी भी उपयोग नहीं किया जाता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

छात्र सोचते हैं कि जब बर्फ पिघलती है तो गुप्त ऊष्मा देने से तापमान बढ़ रहा होता है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

अवस्था परिवर्तन के दौरान जब तक पूरा ठोस द्रव नहीं बन जाता या पूरा द्रव गैस नहीं बन जाता, तब तक तापमान पूर्णतः स्थिर रहता है। गुप्त ऊष्मा केवल कणों के आकर्षण बल को तोड़ने में व्यय होती है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

गैस और वाष्प (गैस और वाष्प) एक ही अनुभव है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

जो पदार्थ कमरे के सामान्य तापमान और दाब पर स्वतः गैसीय अवस्था में होता है (जैसे ऑक्सीजन, नाइट्रोजन), उसे गैस कहते हैं। जो पदार्थ सामान्य ताप पर द्रव या ठोस होता है और गर्म करने पर गैसीय अवस्था में जाता है (जैसे जलवाष्प, कपूर वाष्प), उसे वाष्प कहते हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

नमी (आर्द्रता) में वृद्धि पर वैश्वीकरण की दर में वृद्धि हुई है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

आर्द्रता का अर्थ है हवा में पहले से उपस्थित नमी। हवा में नमी जितनी अधिक होगी, वाष्पीकरण की दर उतनी ही मंद हो जाएगी। अतः आर्द्रता बढ़ने पर वाष्पीकरण घटता है।

पदार्थ की त्रिस्तरीय अवस्थाओं का अंतःपरिवर्तन चक्र (पदार्थ की अवस्थाओं का अंतर्रूपांतरण)

पदार्थ की अवस्थाओं का त्रिकोणीय अंतःरूपांतरण NCERT / JAC Board Class 9 Science Chapter 1 ठोस (SOLID) निश्चित आकार व आयतन उदा: बर्फ, लोहा द्रव (LIQUID) निश्चित आयतन, अनिश्चित आकार उदा: जल, तेल गैस (GAS) अनिश्चित आकार व आयतन उदा: भाप, वायु, CO₂ संगलन / पिघलना (Melting) [ऊष्मा +] जमुना / दृढ़ीकरण (Solidification) [ठंडा] वाष्पीकरण (Vaporization) संघनन (Condensation) ऊर्ध्वपातन (Sublimation) निक्षेपण (Deposition) ऊष्मा देने पर गतिज ऊर्जा बढ़ती है • दाब बढ़ाने पर कण पास आते हैं

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
प्रत्येक वस्तु जो स्थान घेरती है और जिसमें द्रव्यमान होता है, पदार्थ कहलाती है।
मुख्य बिंदु 2
पदार्थ अत्यंत सूक्ष्म कणों से मिलकर बना है, जिनके बीच रिक्त स्थान होता है, वे निरंतर गतिशील रहते हैं तथा एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं।
मुख्य बिंदु 3
ठोसों का निश्चित आकार व निश्चित आयतन होता है; द्रवों का निश्चित आयतन परंतु अनिश्चित आकार होता है; गैसों का न आकार निश्चित होता है और न ही आयतन।
मुख्य बिंदु 4
गैसों में संपीड़्यता और विसरण की दर सर्वाधिक होती है; ठोसों में नगण्य होती है।
मुख्य बिंदु 5
0°C = 273.15 K; कोलसेल केल्विन में 273 पौधे हैं ($K = ^\circ C + 273$)।
मुख्य बिंदु 6
राज्य परिवर्तन के दौरान जब तक संपूर्ण पदार्थ का रूप नहीं बदला जाता, तापमान स्थिर रहता है; दी जाने वाली ऊष्मा गुप्त ऊष्मा (अव्यक्त ऊष्मा) कहलाती है।
मुख्य बिंदु 7
द्रव अवस्था में आए बिना ठोस का सीधा द्रव्य में अवशेष उर्ध्वपातन (ऊर्ध्वपातन) और द्रव अवस्था में सीधे ठोस में द्रव द्रव्य का सीधा आयतन (जमाव) निकलता है।
मुख्य बिंदु 8
गैसों को तरलीकृत (तरलीकृत) करके दाब बढ़ाना और तापमान अनुपात बढ़ाना संभव है।
मुख्य बिंदु 9
क्वथनांक से कम किसी भी तापमान पर द्रव की सतह के समुच्चय का वाष्पीकरण में परिवर्तन (वाष्पीकरण) का महत्व होता है।
मुख्य बिंदु 10
वाष्पीकरण की दर सतह का क्षेत्रफल, तापमान एवं वायु की गति बढ़ने पर बढ़ती है तथा आर्द्रता बढ़ने पर घटती है; वाष्पीकरण से शीतलता उत्पन्न होती है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
पदार्थ के कणों की गतिज ऊर्जा पर तापमान का क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: तापमान बढ़ाने पर पदार्थ के कणों की गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है, जिससे कण अधिक तेजी से गति करने लगते हैं और विसरण की दर तीव्र हो जाती है।
2
ठोस कार्बन द्रव्यमान को शुष्क बर्फ (सूखी बर्फ) क्यों कहते हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: क्योंकि 1 वायुमंडलीय दाब पर जब इसका दाब कम किया जाता है, तो यह बिना द्रव अवस्था में आए सीधे गैसीय अवस्था में परिवर्तित हो जाती है, जिससे यह सतह को गीला नहीं करती।
3
गर्मियों में कूलर अधिक ठंडा क्यों करता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: गर्मियों में तापमान अधिक और वायु में आर्द्रता कम होती है। ये दोनों परिस्थितियाँ वाष्पीकरण की दर को तीव्र कर देती हैं, जिससे अधिक मात्रा में ऊष्मा अवशोषित होती है और कूलर अधिक शीतल हवा फेंकता है।
4
273 K पर जल के कणों की ऊर्जा उसी तापमान पर बर्फ के कणों की ऊर्जा से अधिक क्यों होती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: क्योंकि 273 K (0°C) पर जल के कणों ने बर्फ से पिघलने के लिए अतिरिक्त "संगलन की प्रसुप्त ऊष्मा" अवशोषित कर रखी होती है।
5
एलपीजी (एलपीजी) और सीएनजी (सीएनजी) का पूरा नाम लिखें और तीन प्रतिभागियों में उपयोग का वैज्ञानिक कारण बताएं।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: एलपीजी = एलपीजी एलपीजी गैस (एलपीजी) सीएनजी = कंप्रेस्ड बिटकॉइन गैस (संपीडित प्राकृतिक गैस)। गैसों में अत्यधिक संपीड्यता (हाई कंप्रेसिबिलिटी) होने के कारण भारी मात्रा में गैस को उच्च दबाव पर छोटे-छोटे उपकरणों में तरलता से भरा और डुबाया जा सकता है।
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कक्षा 10 Science & Technology (212) के सभी अध्याय

अध्याय 1: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में मापन (Measurement in Science & Tech) अध्याय 2: हमारे आस-पास के पदार्थ (Matter in Our Surroundings) अध्याय 3: परमाणु एवं अणु (Atom and Molecules) अध्याय 4: रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण (Chemical Reactions & Equations) अध्याय 5: परमाणु संरचना (Atomic Structure) अध्याय 6: तत्वों का आवर्त वर्गीकरण (Periodic Classification of Elements) अध्याय 7: रासायनिक आबंधन (Chemical Bonding) अध्याय 8: अम्ल, क्षारक और लवण (Acids, Bases and Salts) अध्याय 9: गति और उसका वर्णन (Motion and its Description) अध्याय 10: बल एवं गति (Force and Motion) अध्याय 11: गुरुत्वाकर्षण (Gravitation) अध्याय 12: ऊर्जा के स्रोत (Sources of Energy) अध्याय 13: कार्य एवं ऊर्जा (Work and Energy) अध्याय 14: ऊष्मीय ऊर्जा (Thermal Energy) अध्याय 15: प्रकाश ऊर्जा (Light Energy) अध्याय 16: विद्युत ऊर्जा (Electrical Energy) अध्याय 17: विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव (Magnetic Effects of Current) अध्याय 18: ध्वनि एवं संचार (Sound and Communication) अध्याय 19: सजीवों का वर्गीकरण (Classification of Living Organisms) अध्याय 20: पृथ्वी पर जीवन का इतिहास (History of Life on Earth) अध्याय 21: जीवन की इकाइयाँ: कोशिका एवं ऊतक (Cell and Tissues) अध्याय 22: जैव प्रक्रम-1: पोषण, वहन, श्वसन एवं उत्सर्जन (Life Processes - 1) अध्याय 23: जैव प्रक्रम-2: नियंत्रण एवं समन्वय (Control and Coordination) अध्याय 24: जैव प्रक्रम-3: जनन (Reproduction) अध्याय 25: आनुवंशिकता (Heredity) अध्याय 26: वायु एवं जल (Air and Water) अध्याय 27: धातु और अधातु (Metals and Non-metals) अध्याय 28: कार्बन और उसके यौगिक (Carbon and Its Compounds) अध्याय 29: प्राकृतिक पर्यावरण (Natural Environment) अध्याय 30: पर्यावरण पर मानवीय प्रभाव (Human Impact on Environment) अध्याय 31: खाद्य उत्पादन (Food Production) अध्याय 32: स्वास्थ्य एवं स्वच्छता (Health and Hygiene)

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