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NIOS • Class X • Science & Technology (212) • Ch 5
Estimated Time: 45 Mins
Study Progress: In Progress

Atomic Structure

19वीं शताब्दी के अंत तक वैज्ञानिक समुदाय यह मानता था कि डाल्टन के सिद्धांत के अनुसार परमाणु एक अविभाज्य एवं अविनाशी कण है। परंतु 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध और 20वीं शताब्दी के प्रारंभ में विद्युत विसर्जन नलिका (Discharge Tube Experiments) एवं रेडियोएक्टिविटी की क्रांतिकारी खोजों ने यह सिद्ध कर दिया कि परमाणु स्वयं अविभाज्य नहीं है, बल्कि यह और भी अधिक सूक्ष्म अपरमाणुक कणों (Sub-atomic Particles)—मुख्यतः इलेक्ट्रॉन (Electron), प्रोटॉन (Proton) एवं न्यूट्रॉन (Neutron) से मिलकर बना है। 1897 में जे.जे. थॉमसन द्वारा इलेक्ट्रॉन ($e^-$) की खोज तथा 1886 में ई. गोल्डस्टीन द्वारा कैनाल किरणों (प्रोटॉन - $p^+$) की खोज के उपरांत यह सबसे बड़ा वैज्ञानिक प्रश्न बन गया कि ये धनावेशित और ऋणावेशित कण परमाणु के भीतर किस प्रकार व्यवस्थित रहते हैं? इस गुत्थी को सुलझाने के लिए वैज्ञानिकों ने विभिन्न परमाणु मॉडल प्रस्तुत किए—जे.जे. थॉमसन का तरबूज मॉडल, अर्नेस्ट रदरफोर्ड का स्वर्ण-पन्नी प्रकीर्णन प्रयोग एवं नाभिक की खोज, तथा अंततः मैक्स प्लांक के क्वांटम सिद्धांत पर आधारित नील्स बोर का परमाणु मॉडल। 1932 में जेम्स चैडविक द्वारा अनावेशित कण न्यूट्रॉन ($n^0$) की खोज ने परमाणु की संरचना की तस्वीर पूर्ण कर दी। इस अध्याय में हम परमाणु के तीनों मूल कणों के गुणधर्मों, रदरफोर्ड के ऐतिहासिक प्रयोग व उसकी कमियों, बोर के मॉडल और ऊर्जा स्तरों (K, L, M, N कोश), बोर-बरी योजना ($2n^2$ नियम) के अनुसार इलेक्ट्रॉनों के वितरण, संयोजकता (Valency), परमाणु संख्या ($Z$), द्रव्यमान संख्या ($A$), तथा समस्थानिक (Isotopes) एवं समभारिक (Isobars) का उनके व्यावहारिक व परमाणु-ऊर्जा अनुप्रयोगों सहित गहन वैज्ञानिक अध्ययन करेंगे। झारखंड बोर्ड (NIOS Ranchi Class 9) की वार्षिक परीक्षा में यह अध्याय अत्यंत उच्च अंक भार वाला अध्याय है। रदरफोर्ड के अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग के प्रेक्षण व निष्कर्ष, पहले 20 तत्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास व संयोजकता निकालना, समस्थानिक व समभारिक में अंतर तथा समस्थानिकों के उपयोग (उदा. यूरेनियम-235, कोबाल्ट-60, आयोडीन-131) पर लघु व दीर्घ उत्तरीय प्रश्न प्रतिवर्ष शत-प्रतिशत पूछे जाते हैं।

⚡ यदि परमाणु के भीतर प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन हैं, तो रदरफोर्ड ने जब सोने की अत्यंत पतली पन्नी पर अल्फा कणों की बौछार की, तो 20,000 में से 1 कण सीधे 180° पर पीछे क्यों लौट आया?

1911 में वैज्ञानिक अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने सोने की एक अत्यंत पतली पन्नी (मात्र 1000 परमाणुओं जितनी मोटी) पर तीव्र गति से चलने वाले धनावेशित अल्फा कणों ($He^{2+}$) की बौछार की। थॉमसन के तरबूज मॉडल के अनुसार अल्फा कणों को थोड़ा-बहुत विक्षेपित होकर सीधे निकल जाना चाहिए था।

अधिकांश अल्फा कण बिना किसी रुकावट के सीधे निकल गए, कुछ थोड़े कोण से मुड़े। परंतु अचानक एक ऐसी घटना घटी जिसने रदरफोर्ड को हतप्रभ कर दिया—लगभग 20,000 कणों में से एक कण जिस रास्ते गया था, ठीक उसी रास्ते 180° पर उछलकर वापस आ गया!

रदरफोर्ड ने स्वयं लिखा था: "यह घटना उतनी ही अविश्वसनीय थी जैसे कि आप एक 15 इंच के तोप के गोले को टिश्यू पेपर (पतले कागज) पर दाग रहे हों और वह गोला कागज से टकराकर वापस आए और आपको ही उड़ा दे!" उस टिश्यू पेपर जैसी सोने की पन्नी के भीतर ऐसा कौन-सा अत्यधिक भारी और अदृश्य किला छुपा था जिसने भारी अल्फा कण को वापस फेंक दिया? वह था परमाणु का रहस्यमयी केंद्र—परमाणु नाभिक (Nucleus)! आइए, परमाणु के इस परमाणु-गर्भगृह का रहस्योद्घाटन करें!

Why This Chapter Matters

यह अध्याय आपकी शैक्षणिक यात्रा एवं जीवन के लिए क्यों निर्णायक है?

  1. NIOS बोर्ड परीक्षा में अधिकतम अंक प्राप्ति: इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखना ($2, 8, 8, ...$), संयोजकता ज्ञात करना, रदरफोर्ड मॉडल के दोष, बोर मॉडल के अभिगृहीत, और समस्थानिकों के उपयोग पर 6 से 8 अंक निश्चित होते हैं।
  2. Class 11 & 12 Chemistry (Structure of Atom & Periodic Table) का प्रवेश द्वार: 11वीं कक्षा का 'परमाणु की संरचना' (ऑर्बिटल, क्वांटम संख्याएँ, पाउली व हुंड का नियम, ऑफबाऊ सिद्धांत) की संपूर्ण नींव इसी बोर-बरी वितरण पर आधारित है।
  3. आधुनिक परमाणु ऊर्जा एवं चिकित्सा विज्ञान: कैंसर के उपचार में कोबाल्ट-60, घेंघा रोग के उपचार में आयोडीन-131, तथा परमाणु रिएक्टरों में बिजली बनाने के लिए यूरेनियम-235 समस्थानिक के उपयोग का आधार यही अध्याय सिखाता है।

Before You Begin (Prerequisites)

  • परमाणु और अणु की प्राथमिक अवधारणा (डाल्टन का सिद्धांत)।
  • विद्युत आवेश के प्रकार: धनात्मक आवेश (+) एवं ऋणात्मक आवेश (-), समान आवेश प्रतिकर्षित करते हैं, विपरीत आवेश आकर्षित करते हैं।
  • तत्वों के परमाणु द्रव्यमान की सामान्य समझ।

What You Will Learn (Core Objectives)

  • इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन के खोजकर्ता, आवेश, सापेक्ष द्रव्यमान और स्थिति का तुलनात्मक चार्ट बना सकेंगे।
  • जे.जे. थॉमसन के तरबूज मॉडल के गुण व सीमाओं की व्याख्या कर सकेंगे।
  • रदरफोर्ड के अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग के तीनों प्रेक्षणों एवं उनसे निकाले गए तीनों वैज्ञानिक निष्कर्षों का विश्लेषण कर सकेंगे।
  • नील्स बोर के परमाणु मॉडल के मुख्य अभिगृहीतों और विविक्त कक्षाओं (K, L, M, N कोश) को स्पष्ट कर सकेंगे।
  • बोर-बरी योजना ($2n^2$ नियम) के अनुसार प्रथम 20 तत्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिख सकेंगे।
  • किसी तत्व की संयोजकता (Valency) उसके संयोजकता इलेक्ट्रॉनों (Valence Electrons) के आधार पर परिकलित कर सकेंगे।
  • परमाणु संख्या ($Z$) एवं द्रव्यमान संख्या ($A$) में अंतर स्पष्ट कर न्यूट्रॉनों की संख्या ($n = A - Z$) ज्ञात कर सकेंगे।
  • समस्थानिक (Isotopes) एवं समभारिक (Isobars) की परिभाषा, उदाहरण एवं उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों की व्याख्या कर सकेंगे।

Chapter Roadmap & Progression

1 1. अपरमाणुक कणों की खोज: इलेक्ट्रॉन...
2 2. प्रारंभिक परमाणु मॉडल: थॉमसन मॉड...
3 3. नील्स बोर का परमाणु मॉडल एवं बोर...
4 4. परमाणु संख्या ($Z$), द्रव्यमान स...

Complete Concept Guide (100% Curriculum Coverage)

1. अपरमाणुक कणों की खोज: इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन एवं न्यूट्रॉन

(क) तीनों मूल अपरमाणुक कणों की ऐतिहासिक खोज

  1. इलेक्ट्रॉन ($e^-$): 1897 में ब्रिटिश भौतिकशास्त्री जे.जे. थॉमसन ने कैथोड किरण विसर्जन नलिका प्रयोग के दौरान ऋणावेशित कणों की खोज की, जिन्हें इलेक्ट्रॉन नाम दिया गया। इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान हाइड्रोजन परमाणु के द्रव्यमान का लगभग $ rac{1}{2000}$ (सटीक: $ rac{1}{1840}$) होता है। इस पर इकाई ऋण आवेश ($-1.6 imes 10^{-19} ext{ C}$) होता है।
  2. प्रोटॉन ($p^+$): 1886 में जर्मन वैज्ञानिक ई. गोल्डस्टीन ने एक नए गैस विसर्जन में धनावेशित विकिरणों की खोज की, जिन्हें कैनाल किरणें (Canal Rays) कहा गया। बाद में इन्हीं धनावेशित कणों को प्रोटॉन नाम दिया गया। प्रोटॉन का द्रव्यमान इलेक्ट्रॉन से लगभग 2000 गुना अधिक (लगभग $1 ext{ u}$) होता है तथा इस पर इकाई धन आवेश ($+1.6 imes 10^{-19} ext{ C}$) होता है।
  3. न्यूट्रॉन ($n^0$): 1932 में जेम्स चैडविक ने बेरीलियम पर अल्फा कणों की बौछार करके एक ऐसे अपरमाणुक कण की खोज की जो सर्वथा उदासीन (अनावेशित) था और जिसका द्रव्यमान लगभग प्रोटॉन के बराबर ($1 ext{ u}$) था। हाइड्रोजन के सबसे सामान्य परमाणु (प्रोटियम) को छोड़कर न्यूट्रॉन सभी परमाणुओं के नाभिक में विद्यमान होते हैं।
कण (Particle) प्रतीक खोजकर्ता (Year) सापेक्ष आवेश द्रव्यमान (Mass)
इलेक्ट्रॉन $e^-$ जे.जे. थॉमसन (1897) $-1$ ($-1.6 imes 10^{-19} ext{ C}$) नगण्य ($ rac{1}{1840} ext{ u} \u0007pprox 9.1 imes 10^{-31} ext{ kg}$)
प्रोटॉन $p^+$ ई. गोल्डस्टीन (1886) $+1$ ($+1.6 imes 10^{-19} ext{ C}$) $1 ext{ u}$ ($1.672 imes 10^{-27} ext{ kg}$)
न्यूट्रॉन $n^0$ जेम्स चैडविक (1932) $0$ (विद्युत उदासीन) $1 ext{ u}$ ($1.675 imes 10^{-27} ext{ kg}$)

2. प्रारंभिक परमाणु मॉडल: थॉमसन मॉडल एवं रदरफोर्ड का स्वर्ण-पन्नी प्रयोग

(क) जे.जे. थॉमसन का तरबूज मॉडल (Plum Pudding Model)

थॉमसन ने प्रस्तावित किया कि परमाणु एक धनावेशित गोला होता है जिसमें इलेक्ट्रॉन तरबूज के लाल खाने वाले भाग में धंसे हुए बीजों की तरह अथवा क्रिसमस केक में सूखे मेवों (Plums) की तरह बिखरे रहते हैं।

थॉमसन मॉडल की मुख्य स्थापना: ऋणात्मक और धनात्मक आवेश परिमाण में पूर्णतः समान होते हैं, इसलिए परमाणु वैद्युतीय रूप से उदासीन (Electrically Neutral) होता है।
कमी: यह मॉडल अन्य वैज्ञानिकों द्वारा किए गए प्रयोगों (विशेषकर रदरफोर्ड के प्रकीर्णन प्रयोग) के परिणामों की व्याख्या नहीं कर सका।

(ख) रदरफोर्ड का अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग (Alpha Particle Scattering Experiment, 1911)

रदरफोर्ड ने सोने की लगभग 1000 परमाणु मोटी पन्नी पर द्वि-आवेशित हीलियम आयनों ($\u0007lpha$-कण, द्रव्यमान = $4 ext{ u}$, आवेश = $+2$) की तीव्र बौछार की।

प्रायोगिक प्रेक्षण (Observations) रदरफोर्ड के वैज्ञानिक निष्कर्ष (Conclusions)
1. अधिकांश अल्फा कण सोने की पन्नी से बिना विक्षेपित हुए सीधे निकल गए। परमाणु के भीतर का अधिकांश भाग रिक्त (खोखला) है।
2. बहुत कम अल्फा कण छोटे कोणों से विक्षेपित (मुड़े) हुए। परमाणु में धनावेशित भाग बहुत कम स्थान घेरता है (क्योंकि समान आवेश अल्फा कणों को प्रतिकर्षित करता है)।
3. लगभग 20,000 में से 1 अल्फा कण अपने ही मार्ग पर 180° के कोण से वापस लौट आया। परमाणु का संपूर्ण धनावेश एवं संपूर्ण द्रव्यमान परमाणु के केंद्र में एक अत्यंत सूक्ष्म आयतन में केंद्रित है, जिसे 'नाभिक' (Nucleus) कहते हैं।

आकार की तुलना: नाभिक की त्रिज्या ($10^{-15} ext{ m}$) परमाणु की त्रिज्या ($10^{-10} ext{ m}$) से लगभग $10^5$ (एक लाख) गुना छोटी होती है। (यदि परमाणु को एक बड़ा क्रिकेट स्टेडियम मान लिया जाए, तो उसका नाभिक बीच में रखी एक छोटी सी मक्खी या गेंद के बराबर होगा!)

रदरफोर्ड मॉडल की गंभीर कमी (कमजोरी):

मैक्सवेल के विद्युतचुंबकीय सिद्धांत के अनुसार, त्वरित आवेशित कणों को निरंतर विकिरण के रूप में ऊर्जा उत्सर्जित करनी चाहिए। यदि इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर वृत्ताकार कक्षा में चक्कर लगाते हैं, तो उनका मार्ग त्वरित होगा और वे निरंतर ऊर्जा खोते जाएंगे। अंततः एक सर्पिलाकार मार्ग तय करते हुए $10^{-8}$ सेकंड के भीतर इलेक्ट्रॉन को नाभिक में गिर जाना चाहिए था! यदि ऐसा होता, तो परमाणु कभी स्थिर नहीं रह सकता था और संपूर्ण पदार्थ नष्ट हो जाता, जबकि हम जानते हैं कि परमाणु अत्यधिक स्थायी होते हैं। रदरफोर्ड परमाणु के इस स्थायित्व की व्याख्या नहीं कर सके।

3. नील्स बोर का परमाणु मॉडल एवं बोर-बरी योजना (इलेक्ट्रॉनिक विन्यास)

(क) नील्स बोर का परमाणु मॉडल (1913)

रदरफोर्ड की कमियों को दूर करने के लिए डेनिश वैज्ञानिक नील्स बोर ने निम्नलिखित दो क्रांतिकारी अभिगृहीत प्रस्तुत किए:

  1. इलेक्ट्रॉन केवल कुछ निश्चित विशेष कक्षाओं में ही चक्कर लगा सकते हैं, जिन्हें इलेक्ट्रॉन की विविक्त कक्षाएँ (Discrete Orbits / Stationary Energy Levels) कहते हैं।
  2. जब इलेक्ट्रॉन इन विविक्त कक्षाओं में परिक्रमा करते हैं, तो उनकी ऊर्जा का विकिरण नहीं होता। अतः परमाणु पूर्णतः स्थायी रहता है।

इन कक्षाओं (ऊर्जा स्तरों) को अक्षरों K, L, M, N... अथवा मुख्य क्वांटम संख्याओं n = 1, 2, 3, 4... द्वारा दर्शाया जाता है। नाभिक के सबसे समीप वाली कक्षा K (n=1) की ऊर्जा न्यूनतम होती है।

(ख) बोर-बरी योजना (Bohr-Bury Scheme - इलेक्ट्रॉनों का वितरण नियम)

विभिन्न कक्षाओं में इलेक्ट्रॉनों के वितरण के लिए नील्स बोर और चार्ल्स बरी ने तीन नियम प्रतिपादित किए:

  1. $2n^2$ नियम: किसी कक्षा में उपस्थित अधिकतम इलेक्ट्रॉनों की संख्या सूत्र $2n^2$ द्वारा दी जाती है, जहाँ $n$ कक्षा की क्रम संख्या है।
    • प्रथम कक्षा (K कोश, $n=1$): $2 imes (1)^2 = 2$ इलेक्ट्रॉन
    • द्वितीय कक्षा (L कोश, $n=2$): $2 imes (2)^2 = 8$ इलेक्ट्रॉन
    • तृतीय कक्षा (M कोश, $n=3$): $2 imes (3)^2 = 18$ इलेक्ट्रॉन
    • चतुर्थ कक्षा (N कोश, $n=4$): $2 imes (4)^2 = 32$ इलेक्ट्रॉन
  2. अष्टक नियम (Octet Rule): सबसे बाहरी कोश (Outermost shell) में इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या 8 से अधिक नहीं हो सकती (K कोश हेतु अधिकतम 2)।
  3. किसी परमाणु के बाह्य कोश में इलेक्ट्रॉन तब तक स्थान नहीं लेते जब तक कि भीतरी कोश पूरी तरह भर न जाएँ। अर्थात कोश क्रमानुसार (Stepwise) भरते हैं।

(ग) संयोजकता (Valency) का निर्धारण

परमाणु के सबसे बाहरी कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों को संयोजकता इलेक्ट्रॉन (Valence Electrons) कहते हैं। उत्कृष्ट गैसों की तरह स्थायी अष्टक (8 इलेक्ट्रॉन) प्राप्त करने के लिए परमाणु जितने इलेक्ट्रॉनों का त्याग, ग्रहण अथवा साझा करता है, वह संख्या उस तत्व की संयोजकता कहलाती है।

  • यदि संयोजकता इलेक्ट्रॉन $\le 4$ हों: $ ext{संयोजकता} = ext{संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या}$ (उदा: Na = 2,8,1 $ o$ संयोजकता = 1; Mg = 2,8,2 $ o$ 2; Al = 2,8,3 $ o$ 3; C = 2,4 $ o$ 4)।
  • यदि संयोजकता इलेक्ट्रॉन $> 4$ हों: $ ext{संयोजकता} = 8 - ext{संयोजकता इलेक्ट्रॉन}$ (उदा: N = 2,5 $ o 8 - 5 = 3$; O = 2,6 $ o 8 - 6 = 2$; F = 2,7 $ o 8 - 7 = 1$; Ne = 2,8 $ o 8 - 8 = 0$ अक्रिय)।

4. परमाणु संख्या ($Z$), द्रव्यमान संख्या ($A$), समस्थानिक एवं समभारिक

(क) परमाणु संख्या एवं द्रव्यमान संख्या

  1. परमाणु संख्या (Atomic Number - $Z$): किसी तत्व के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की कुल संख्या को उस तत्व की परमाणु संख्या ($Z$) कहते हैं। उदासीन परमाणु में: $Z = ext{प्रोटॉनों की संख्या} = ext{इलेक्ट्रॉनों की संख्या}$। किसी तत्व की पहचान उसकी परमाणु संख्या से होती है।
  2. द्रव्यमान संख्या (Mass Number - $A$): नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों की कुल संख्या के योग को द्रव्यमान संख्या कहते हैं। प्रोटॉन एवं न्यूट्रॉन को सामूहिक रूप से न्यूक्लिऑन (Nucleons) कहा जाता है। $$A = Z + n \implies n = A - Z \quad ( ext{न्यूट्रॉनों की संख्या})$$
  3. संकेतन रूप (Symbolic Notation): किसी तत्व $X$ को व्यक्त करने की अंतर्राष्ट्रीय पद्धति: $$_Z^A X \quad ext{अर्थात } _{ ext{परमाणु संख्या}}^{ ext{द्रव्यमान संख्या}} ( ext{तत्व का प्रतीक})$$ उदाहरण: $_{7}^{14}N$ (नाइट्रोजन: $Z=7, A=14, n=14-7=7$); $_{11}^{23}Na$ (सोडियम: $Z=11, A=23, n=23-11=12$)।

(ख) समस्थानिक (Isotopes) एवं समभारिक (Isobars)

तुलना का बिंदु समस्थानिक (Isotopes) समभारिक (Isobars)
परिभाषा एक ही तत्व के ऐसे परमाणु जिनकी परमाणु संख्या ($Z$) समान परंतु द्रव्यमान संख्या ($A$) भिन्न होती है। अलग-अलग तत्वों के ऐसे परमाणु जिनकी द्रव्यमान संख्या ($A$) समान परंतु परमाणु संख्या ($Z$) भिन्न होती है।
प्रोटॉन एवं न्यूट्रॉन प्रोटॉन समान होते हैं, न्यूट्रॉनों की संख्या भिन्न होती है। प्रोटॉन भिन्न होते हैं, किंतु न्यूक्लिऑनों ($p+n$) का कुल योग समान होता है।
रासायनिक गुण रासायनिक गुण पूर्णतः समान होते हैं (क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक विन्यास समान है)। रासायनिक गुण सर्वथा भिन्न-भिन्न होते हैं।
भौतिक गुण भौतिक गुण (क्वथनांक, घनत्व) थोड़े भिन्न होते हैं। भौतिक गुण पूर्णतः भिन्न होते हैं।
प्रमुख उदाहरण 1. हाइड्रोजन के 3 समस्थानिक: प्रोटियम ($_{1}^{1}H$), ड्यूटीरियम ($_{1}^{2}H$ या $D$), ट्राइटियम ($_{1}^{3}H$ या $T$)।
2. कार्बन: $_{6}^{12}C$ और $_{6}^{14}C$।
3. क्लोरीन: $_{17}^{35}Cl$ और $_{17}^{37}Cl$ ($3:1$ अनुपात में)।
1. आर्गन ($_{18}^{40}Ar$) एवं कैल्शियम ($_{20}^{40}Ca$): दोनों की द्रव्यमान संख्या 40 है।
2. कार्बन ($_{6}^{14}C$) एवं नाइट्रोजन ($_{7}^{14}N$): दोनों की द्रव्यमान संख्या 14 है।
समस्थानिकों के अति-महत्वपूर्ण वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुप्रयोग (JAC Board Hot Topic):
  • यूरेनियम का समस्थानिक ($^{235}U$): परमाणु भट्ठियों (Nuclear Reactors) में नाभिकीय विखंडन द्वारा विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए ईंधन के रूप में प्रयुक्त होता है।
  • कोबाल्ट का समस्थानिक ($^{60}Co$): कैंसर के घातक ट्यूमरों के विकिरण उपचार (Radiotherapy) में प्रयुक्त होता है।
  • आयोडीन का समस्थानिक ($^{131}I$): घेंघा रोग (Goitre / थायरॉयड ग्रंथि विकार) के निदान एवं उपचार में प्रयुक्त होता है।
  • सोडियम का समस्थानिक ($^{24}Na$): मानव शरीर में रक्त परिसंचरण के थक्के (Blood Clots) का पता लगाने में ट्रेसर के रूप में प्रयुक्त होता है।

Key Formulas, Reactions & Definitions

अधिकतम इलेक्ट्रॉन सूत्र (बोर-बरी)
2n² (जहाँ n कोश संख्या है: K=1, L=2, M=3, N=4)
द्रव्यमान संख्या सूत्र
A = Z + n (द्रव्यमान संख्या = प्रोटॉन संख्या + न्यूट्रॉन संख्या)
न्यूट्रॉनों की संख्या ज्ञात करना
n = A - Z (द्रव्यमान संख्या - परमाणु संख्या)
क्लोरीन का औसत परमाणु द्रव्यमान
(35 × 3 + 37 × 1) / 4 = 142 / 4 = 35.5 u
इलेक्ट्रॉन का वास्तविक आवेश
-1.602 × 10⁻¹⁹ कूलॉम (C)
प्रोटॉन का वास्तविक आवेश
+1.602 × 10⁻¹⁹ कूलॉम (C)
इलेक्ट्रॉन का विराम द्रव्यमान
9.109 × 10⁻³¹ kg (लगभग 1/1840 u)
प्रोटॉन का द्रव्यमान
1.6726 × 10⁻²⁷ kg (लगभग 1.00727 u ≈ 1 u)
न्यूट्रॉन का द्रव्यमान
1.6749 × 10⁻²⁷ kg (लगभग 1.00866 u ≈ 1 u)

Conceptual Solved Examples & Case Studies

Example 1
JAC बोर्ड मॉडल प्रश्न (3 अंक): एक तत्व $X$ का परमाणु क्रमांक 12 तथा द्रव्यमान संख्या 24 है। (a) इसमें प्रोटॉनों, इलेक्ट्रॉनों और न्यूट्रॉनों की संख्या ज्ञात कीजिए। (b) इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए। (c) इसकी संयोजकता क्या होगी?
Step-by-Step Solution:

दिया गया है: परमाणु क्रमांक ($Z$) = 12 द्रव्यमान संख्या ($A$) = 24

(a) कणों की संख्या:

  • प्रोटॉनों की संख्या = $Z = 12$
  • उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या = प्रोटॉन संख्या = 12
  • न्यूट्रॉनों की संख्या = $A - Z = 24 - 12 = 12$

(b) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: कुल 12 इलेक्ट्रॉनों का बोर-बरी योजना अनुसार वितरण:

$$K = 2, \quad L = 8, \quad M = 2$$

अतः विन्यास $2, 8, 2$ है। (यह तत्व मैग्नीशियम - Mg है)।

(c) संयोजकता: बाहरी कोश (M कोश) में 2 संयोजकता इलेक्ट्रॉन हैं। अष्टक पूर्ण करने के लिए यह सुगमता से इन 2 इलेक्ट्रॉनों का त्याग कर देता है। अतः तत्व $X$ की संयोजकता $+2$ है।

Example 2
JAC बोर्ड संख्यात्मक प्रश्न (3 अंक): क्लोरीन के दो समस्थानिक $_{17}^{35}Cl$ और $_{17}^{37}Cl$ प्रकृति में क्रमशः $75\%$ और $25\%$ ($3:1$ अनुपात) में पाए जाते हैं। क्लोरीन का औसत परमाणु द्रव्यमान परिकलित कीजिए।
Step-by-Step Solution:

दिया गया है:

  • समस्थानिक 1: द्रव्यमान = $35\text{ u}$, प्रतिशत = $75\%$ (अनुपात = $\frac{3}{4}$)
  • समस्थानिक 2: द्रव्यमान = $37\text{ u}$, प्रतिशत = $25\%$ (अनुपात = $\frac{1}{4}$)

सूत्र:

$$\text{औसत परमाणु द्रव्यमान} = \left(35 \times \frac{75}{100}\right) + \left(37 \times \frac{25}{100}\right)$$

$$\text{औसत द्रव्यमान} = \left(35 \times \frac{3}{4}\right) + \left(37 \times \frac{1}{4}\right)$$

$$\text{औसत द्रव्यमान} = \frac{105}{4} + \frac{37}{4} = \frac{142}{4} = 35.5\text{ u}$$

अतः क्लोरीन का औसत परमाणु द्रव्यमान $35.5\text{ u}$ होता है। यही कारण है कि आवर्त सारणी में क्लोरीन का द्रव्यमान भिन्न (Fractional) $35.5\text{ u}$ लिखा जाता है।

Example 3
JAC बोर्ड विश्लेषणात्मक प्रश्न (3 अंक): रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल के तीन प्रमुख प्रेक्षण एवं निष्कर्ष लिखिए।
Step-by-Step Solution:

रदरफोर्ड के अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग:

  1. प्रेक्षण 1: अधिकांश अल्फा कण बिना किसी विचलन के सीधे निकल गए।
    • निष्कर्ष: परमाणु के भीतर का अधिकांश स्थान पूर्णतः रिक्त (खाली) है।
  2. प्रेक्षण 2: कुछ अल्फा कण छोटे कोणों से विक्षेपित हुए।
    • निष्कर्ष: परमाणु के केंद्र में धनावेश विद्यमान है जो धनावेशित अल्फा कणों को प्रतिकर्षित करता है।
  3. प्रेक्षण 3: 20,000 में से लगभग 1 कण 180° के कोण से वापस लौट आया।
    • निष्कर्ष: परमाणु का संपूर्ण धनावेश एवं संपूर्ण द्रव्यमान केंद्र में अत्यंत सूक्ष्म स्थान में केंद्रित है, जिसे नाभिक (Nucleus) कहते हैं।
Example 4
विभेदन कीजिए (3 अंक): समस्थानिक एवं समभारिक में कोई तीन प्रमुख अंतर उदाहरण सहित लिखिए।
Step-by-Step Solution:

अंतर सारणी:

  1. परमाणु क्रमांक बनाम द्रव्यमान संख्या:
    • समस्थानिकों में परमाणु संख्या समान ($Z_1 = Z_2$) परंतु द्रव्यमान संख्या भिन्न होती है।
    • समभारिकों में द्रव्यमान संख्या समान ($A_1 = A_2$) परंतु परमाणु संख्या भिन्न होती है।
  2. तत्व की पहचान:
    • समस्थानिक एक ही तत्व के परमाणु होते हैं (उदा: $_{6}^{12}C$ और $_{6}^{14}C$ दोनों कार्बन हैं)।
    • समभारिक भिन्न-भिन्न तत्वों के परमाणु होते हैं (उदा: $_{18}^{40}Ar$ और $_{20}^{40}Ca$ क्रमशः आर्गन और कैल्शियम हैं)।
  3. रासायनिक गुणधर्म:
    • समस्थानिकों के रासायनिक गुण पूर्णतः समान होते हैं क्योंकि उनका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास एक जैसा होता है।
    • समभारिकों के रासायनिक गुण सर्वथा भिन्न होते हैं क्योंकि उनका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास अलग-अलग होता है।
Example 5
कारण बताइए (2 अंक): हीलियम परमाणु के बाह्य कोश में 2 इलेक्ट्रॉन हैं फिर भी इसकी संयोजकता 2 न होकर शून्य (0) क्यों है?
Step-by-Step Solution:

हीलियम (He) का परमाणु क्रमांक 2 है।

  1. बोर-बरी योजना के अनुसार हीलियम में केवल एक ही कोश—K कोश ($n=1$) होता है।
  2. सूत्र $2n^2$ ($2 imes 1^2 = 2$) के अनुसार प्रथम कोश (K कोश) की अधिकतम धारण क्षमता केवल 2 इलेक्ट्रॉनों की ही होती है।
  3. चूँकि हीलियम का K कोश 2 इलेक्ट्रॉनों से पूर्णतः भरा हुआ (संतृप्त ड्युपलेट - Duplet) है, इसलिए इसे किसी अन्य परमाणु के साथ इलेक्ट्रॉन साझा करने, त्यागने या ग्रहण करने की आवश्यकता नहीं होती। अतः हीलियम रासायनिक रूप से पूर्णतः अक्रिय (Inert) है और इसकी संयोजकता शून्य (0) होती है।

Common Misconceptions & Examiner Traps

Common Misconception

नाभिक में इलेक्ट्रॉन को भी शामिल मान लेना।

Scientific Reality & Correction

नाभिक में केवल प्रोटॉन और न्यूट्रॉन (न्यूक्लिऑन्स) उपस्थित होते हैं। इलेक्ट्रॉन नाभिक के बाहर विविक्त कक्षाओं में परिक्रमा करते हैं।

Common Misconception

द्रव्यमान संख्या ($A$) और परमाणु द्रव्यमान को एक ही मान लेना।

Scientific Reality & Correction

द्रव्यमान संख्या ($A$) प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों की कुल पूर्ण संख्या (पूर्णांक) है (जैसे Cl के लिए 35 या 37)। जबकि परमाणु द्रव्यमान समस्थानिकों का भारित औसत होता है जो भिन्न में हो सकता है (जैसे Cl = 35.5 u)।

Common Misconception

आर्गन ($_{18}^{40}Ar$) और कैल्शियम ($_{20}^{40}Ca$) को समस्थानिक लिख देना।

Scientific Reality & Correction

इन दोनों के परमाणु क्रमांक भिन्न (18 व 20) तथा द्रव्यमान संख्या समान (40) है, अतः ये समभारिक (Isobars) हैं, समस्थानिक नहीं।

Common Misconception

संयोजकता निकालते समय क्लोरीन ($2,8,7$) की संयोजकता 7 लिख देना।

Scientific Reality & Correction

बाहरी कोश में 4 से अधिक इलेक्ट्रॉन होने पर संयोजकता $8 - ext{बाहरी इलेक्ट्रॉन}$ होती है। क्लोरीन हेतु संयोजकता $8 - 7 = 1$ होगी, 7 नहीं।

Common Misconception

हाइड्रोजन के सभी समस्थानिकों में न्यूट्रॉन मानना।

Scientific Reality & Correction

याद रखें: हाइड्रोजन के सबसे सामान्य रूप "प्रोटियम" ($_{1}^{1}H$) में कोई न्यूट्रॉन नहीं होता ($n = 1 - 1 = 0$)। केवल प्रोटियम ही एकमात्र ऐसा परमाणु है जिसमें न्यूट्रॉन अनुपस्थित होता है।

बोर का परमाणु मॉडल एवं कोशों की ऊर्जा स्तर संरचना (Bohr Atomic Shell Diagram)

नील्स बोर का परमाणु मॉडल एवं कोश व्यवस्था NCERT / JAC Board Class 9 Science Chapter 4 नाभिक (p⁺+n⁰) K L M N बोर-बरी 2n² नियम सारणी K कोश (n = 1): अधिकतम = 2 × (1)² = 2 e⁻ 2 e⁻ L कोश (n = 2): अधिकतम = 2 × (2)² = 8 e⁻ 8 e⁻ M कोश (n = 3): अधिकतम = 2 × (3)² = 18 e⁻ 18 e⁻ N कोश (n = 4): अधिकतम = 2 × (4)² = 32 e⁻ 32 e⁻ ★ बाह्यतम कोश में अधिकतम 8 इलेक्ट्रॉन ही रह सकते हैं नाभिक में प्रोटॉन (+) व न्यूट्रॉन (0) • कक्षाओं में इलेक्ट्रॉन (-) ऊर्जा विकीर्ण किए बिना चक्कर लगाते हैं

Chapter Summary & 10 Key Takeaways

Takeaway 1
इलेक्ट्रॉन (e⁻) की खोज जे.जे. थॉमसन, प्रोटॉन (p⁺) की खोज ई. गोल्डस्टीन तथा न्यूट्रॉन (n⁰) की खोज जेम्स चैडविक ने की।
Takeaway 2
थॉमसन के तरबूज मॉडल के अनुसार धनावेशित गोले में इलेक्ट्रॉन धंसे रहते हैं; परमाणु वैद्युतीय रूप से उदासीन होता है।
Takeaway 3
रदरफोर्ड के स्वर्ण-पन्नी प्रयोग ने सिद्ध किया कि परमाणु का अधिकांश भाग खोखला है तथा संपूर्ण धनावेश और द्रव्यमान केंद्र में स्थित सूक्ष्म "नाभिक" में केंद्रित है।
Takeaway 4
नील्स बोर ने स्पष्ट किया कि इलेक्ट्रॉन निश्चित विविक्त कक्षाओं (K, L, M, N) में बिना ऊर्जा विकीर्ण किए चक्कर लगाते हैं, जिससे परमाणु स्थायी रहता है।
Takeaway 5
बोर-बरी योजना के अनुसार किसी कक्षा में अधिकतम इलेक्ट्रॉनों की संख्या 2n² होती है तथा बाह्यतम कोश में अधिकतम 8 इलेक्ट्रॉन हो सकते हैं।
Takeaway 6
परमाणु के बाह्यतम कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉन संयोजकता इलेक्ट्रॉन कहलाते हैं; अष्टक प्राप्त करने के लिए त्यागे, ग्रहण किए या साझे इलेक्ट्रॉनों की संख्या संयोजकता कहलाती है।
Takeaway 7
परमाणु संख्या (Z) नाभिक में प्रोटॉनों की संख्या है; द्रव्यमान संख्या (A) प्रोटॉनों एवं न्यूट्रॉनों का कुल योग (A = Z + n) है।
Takeaway 8
समान परमाणु संख्या किंतु भिन्न द्रव्यमान संख्या वाले एक ही तत्व के परमाणु समस्थानिक (Isotopes) कहलाते हैं (उदा. ¹H, ²H, ³H; ¹²C, ¹⁴C)।
Takeaway 9
भिन्न परमाणु संख्या किंतु समान द्रव्यमान संख्या वाले भिन्न तत्वों के परमाणु समभारिक (Isobars) कहलाते हैं (उदा. ⁴⁰Ar एवं ⁴⁰Ca)।
Takeaway 10
समस्थानिकों का उपयोग परमाणु ऊर्जा (U-235), कैंसर चिकित्सा (Co-60) एवं घेंघा रोग (I-131) में होता है।

Check Your Understanding (Diagnostic Practice Questions)

Diagnostic questions testing core conceptual clarity. Answers are hidden initially — solve each problem first, then click to reveal the step-by-step verified solution.

1
कैनाल किरणें (Canal Rays) क्या थीं? इनकी खोज किसने की?
Reveal Answer & Explanation
Answer: कैनाल किरणें विसर्जन नलिका के एनोड से कैथोड की ओर चलने वाली धनावेशित विकिरणें थीं, जिनकी खोज 1886 में ई. गोल्डस्टीन ने की। इन्हीं से प्रोटॉन की खोज संभव हुई।
2
रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की मुख्य कमी क्या थी?
Reveal Answer & Explanation
Answer: रदरफोर्ड मॉडल त्वरित वृत्ताकार कक्षाओं में घूमते इलेक्ट्रॉनों द्वारा ऊर्जा के निरंतर उत्सर्जन और परमाणु के स्थायित्व की व्याख्या करने में असमर्थ रहा।
3
सोडियम परमाणु (Z=11) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास एवं संयोजकता लिखिए।
Reveal Answer & Explanation
Answer: सोडियम (11) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास K=2, L=8, M=1 (2, 8, 1) है। इसके बाह्यतम कोश में 1 इलेक्ट्रॉन है, जिसे त्यागकर यह स्थायी अष्टक प्राप्त करता है, अतः इसकी संयोजकता +1 है।
4
परमाणु संख्या 8 वाले तत्व का नाम, विन्यास एवं संयोजकता बताइए।
Reveal Answer & Explanation
Answer: परमाणु संख्या 8 वाला तत्व ऑक्सीजन (O) है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 6 है। अष्टक पूरा करने के लिए इसे 2 इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता है, अतः इसकी संयोजकता 8 - 6 = 2 है।
5
समस्थानिकों के कोई दो प्रमुख व्यावहारिक उपयोग बताइए।
Reveal Answer & Explanation
Answer: (1) यूरेनियम-235 का उपयोग परमाणु भट्ठी में ईंधन के रूप में विद्युत उत्पादन हेतु किया जाता है। (2) कोबाल्ट-60 का उपयोग कैंसर के उपचार (रेडियोथेरेपी) में किया जाता है।
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