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NIOS • कक्षा X • Science & Technology (212) • अध्याय 4
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण (Chemical Reactions & Equations)

दैनिक जीवन में हमारे चारों ओर निरंतर अनेक परिवर्तन घटित होते रहते हैं—जैसे दूध का फटना व दही बनना, लोहे के तवे अथवा कील को आर्द्र वायुमंडल में खुला छोड़ देने पर उस पर जंग लगना, भोजन का पकना, हमारे शरीर में भोजन का पाचन तथा सांस लेना। ये सभी परिवर्तन सामान्य भौतिक परिवर्तन नहीं हैं, बल्कि इनमें प्रारंभिक पदार्थ अपनी प्रकृति और पहचान खोकर सर्वथा नए गुणधर्मों वाले पदार्थों में परिवर्तित हो जाते हैं। जब भी कोई रासायनिक परिवर्तन होता है, तो हम कह सकते हैं कि एक रासायनिक अभिक्रिया (Chemical Reaction) संपन्न हुई है। रासायनिक अभिक्रिया वह प्रक्रिया है जिसमें एक या एक से अधिक पदार्थ (जिन्हें अभिकारक / Reactants कहा जाता है) परस्पर क्रिया करके या टूटकर नए गुणधर्मों वाले एक या अधिक नए पदार्थ (जिन्हें उत्पाद / Products कहा जाता है) का निर्माण करते हैं। किसी भी रासायनिक अभिक्रिया को संक्षिप्त और वैज्ञानिक रूप में प्रतीकों एवं सूत्रों द्वारा निरूपित करना रासायनिक समीकरण (Chemical Equation) कहलाता है। प्राकृतिक विज्ञान का एक सार्वभौमिक नियम है—'द्रव्यमान संरक्षण का नियम' (Law of Conservation of Mass), जिसके अनुसार किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान का न तो निर्माण हो सकता है और न ही विनाश। इसका सीधा अर्थ यह है कि रासायनिक अभिक्रिया के पहले (अभिकारकों में) एवं उसके पश्चात (उत्पादों में) प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की कुल संख्या सदैव समान होनी चाहिए। इसी सिद्धांत की संतुष्टि के लिए रासायनिक समीकरणों को संतुलित (Balance) करना अनिवार्य होता है। इस अध्याय में रासायनिक अभिक्रिया के चार मूलभूत लक्षणों (अवस्था में परिवर्तन, रंग में परिवर्तन, गैस का निकास एवं तापमान में परिवर्तन), रासायनिक समीकरण लिखने व संतुलित करने की 'हिट एंड ट्रायल विधि', रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रमुख प्रकार—संयोजन अभिक्रिया (Combination), वियोजन या अपघटन अभिक्रिया (Decomposition: ऊष्मीय, वैद्युत एवं प्रकाशीय), विस्थापन अभिक्रिया (Displacement), द्वि-विस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement) तथा उपचयन एवं अपचयन (Oxidation & Reduction / Redox Reactions)—का अत्यंत विस्तृत और व्यावहारिक अध्ययन समाहित है। इसके साथ ही दैनिक जीवन में उपचयन अभिक्रियाओं के दो अत्यंत महत्वपूर्ण दुष्प्रभावों—संक्षारण (Corrosion) एवं विकृतगंधिता (Rancidity) तथा उनकी रोकथाम के उपायों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया गया है। झारखंड बोर्ड (NIOS Class 10) विज्ञान की बोर्ड परीक्षा में यह अध्याय 6 से 8 अंकों का सर्वोच्च आधारभूत महत्व रखता है। इसमें रासायनिक समीकरण संतुलित करने, अभिक्रियाओं की पहचान व उदाहरण, श्वसन को ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया क्यों कहते हैं, और संक्षारण व विकृतगंधिता पर लघु व दीर्घ उत्तरीय प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं।

⚗️ क्या आपने कभी सोचा है: जब बिना बुझे चूने में साधारण ठंडा पानी मिलाया जाता है, तो वह बिना आग के ही उबलने क्यों लगता है?

दीपावली पर जब सफेदी (सफेदी) करने के लिए बाजार में 'काली चूना' (क्विकटाइम) खरीदकर मिट्टी या लोहे के मटके में डाला जाता है और ठंडा पानी उड़ाया जाता है, तो कुछ ही पलों में पोषाहार के रूप में से खौलने लगता है! इसमें इतनी ऊर्जा और ऊर्जा नहीं है कि अगर कोई हाथ लगा दे तो त्वचा जल जाए!

बिना चूल्हे या गैस के यह पानी आप कैसे खोल रहे हैं? इसके पीछे कौन सा अदृश्य जादू काम कर रहा था? यह कोई जादू नहीं, बल्कि विज्ञान का चमत्कार है—यह एक तीव्र ऊर्जा संयोजन रासायनिक अभिक्रिया (एक्सोथर्मिक कॉम्बिनेशन रिएक्शन) है!

इसी प्रकार, क्या आपने कभी सोचा कि कटे सेब को थोड़ी देर की हवा में भूरा रंग क्यों मिलता है? चिप्स के चिप्स में चिप्स कम और हवा (गैस) अधिक क्यों होती है? और अँधेरे में चमकने वाले जुगनू के पेट में ऐसी कौन-सी रासायनिक अभिक्रिया होती है जो बिना गर्म-गर्म रोशनी छोड़ती है? आईये, परमाणु के परमाणु और कारखाने के इस जादुई संसार का सजीव साक्षात्कार!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

इस अध्याय का अध्ययन आपके लिए क्यों आवश्यक है?

  1. बोर्ड परीक्षा में उच्च स्कोरिंग: एनआईओएस कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षा में "रासायनिक गुणात्मक मूल्यांकन (हिट और ट्रायल विधि)", "संयोजन बनाम विज्ञान अभिक्रिया", "विस्थापन अभिक्रिया और सक्रिय श्रेणी", और "रेडॉक्स अभिक्रिया में उपचयित/उपचयित सामग्री की पहचान" पर 5 से 8 अंक के प्रश्न शत-प्रतिशत निश्चित होते हैं।
  2. उच्चतर विज्ञान (कक्षा 11 और 12) की परिभाषा: बारहवीं और बारहवीं कक्षा की संपूर्ण और रसायन विज्ञान (अकार्बनिक और भौतिक रसायन विज्ञान) का आधार रासायनिक तत्व, आयन, संतुलन और ऊष्मीय विज्ञान (थर्मोडायनामिक्स) के मूल सिद्धांतों पर आधारित है।
  3. दैनिक जीवन एवं स्वास्थ्य सुरक्षा: भोजन को खराब होने (विकृतगंधिता) से बचाना, लौह के संक्षारण को लाभ, अग्निशामक यंत्रों की विफलता, और शरीर में श्वसन एवं पाचन क्रिया को नुकसान।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • परमाणु संरचनात्मक संरचना (वैलेंसी): विभिन्न संरचनाएं (H, O, C, N, Na, Mg, Al, Fe, Cu, Zn आदि) के रासायनिक संरचनाएं और उनकी संयोजकताएं।
  • रासायनिक सूत्र निर्माण: धनायनों एवं ऋणायनों के संयोजन से रासायनिक सूत्र निर्माण (जैसे Na⁺ + Cl⁻ → NaCl, Ca²⁺ + 2OH⁻ → Ca(OH)₂)।
  • भौतिक बनाम रासायनिक परिवर्तन: भौतिक परिवर्तन में कोई नया पदार्थ नहीं बनता (उदा. बर्फ का पिघलना), जबकि रासायनिक परिवर्तन में नए रासायनिक बंध बनते हैं व नए पदार्थ का निर्माण होता है।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • रासायनिक परिवर्तन और रासायनिक अभिक्रिया के चार मुख्य प्रेक्षणों/लक्षणों की पहचान व व्याख्या कर सकेंगे।
  • द्रव्यमान संरक्षण के नियम के आधार पर किसी भी असंतुलित (ढांचा) रासायनिक समीकरण को चरणबद्ध संतुलित कर सकेंगे।
  • संयोजन, वियोजन (ऊष्मीय, प्रकाश-रासायनिक, विद्युत-अपघटनी), विस्थापन एवं द्वि-विस्थापन अभिक्रियाओं में अंतर स्पष्ट कर सकेंगे।
  • ऊर्जाक्षेपी (एक्ज़ोथर्मिक) एवं ऊर्जाशोषी (एंडोथर्मिक) अभिक्रियाओं का उदाहरण शामिल परिभाषा कर फ़ार्म (उदा. श्वसन एवं प्रकाश आयाम)।
  • ऑक्सीकरण (उपचयन), अपचयन, उपचायक एवं अपचायक पदार्थों की पहचान रेडॉक्स अभिक्रियाओं में कर सकेंगे।
  • दैनिक जीवन में संक्षारण और विकृतगंधिता के कारणों, प्रभावों एवं उनके व्यावहारिक निवारण के उपायों का विश्लेषण कर सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. रासायनिक अभिक्रिया के लक्षण एवं...
2 2. रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रमुख प...
3 3. विस्थापन एवं द्वि-विस्थापन अभिक्...
4 4. उपचयन एवं अपचयन: रेडॉक्स अभिक्रि...
5 5. दैनिक जीवन में उपचयन अभिक्रियाओं...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. रासायनिक अभिक्रिया के लक्षण एवं संतुलित रासायनिक समीकरण

(क) रासायनिक अभिक्रिया के चार प्रमुख प्रेक्षण (लक्षण)

जब भी कोई रासायनिक अभिक्रिया संपन्न होती है, तो निम्नलिखित चार प्रेक्षणों में से कम से कम एक परिवर्तन अवश्य दृष्टिगोचर होता है:

  1. अवस्था में परिवर्तन (Change in State): जैसे हाइड्रोजन गैस ($H_2$) और ऑक्सीजन गैस ($O_2$) के परस्पर मिलने से द्रव जल ($H_2O$) बनता है।
  2. रंग में परिवर्तन (Change in Colour): जैसे लोहे की कील को नीले रंग के कॉपर सल्फेट ($CuSO_4$) के विलयन में डालने पर विलयन का रंग हल्का हरा ($FeSO_4$) हो जाता है तथा कील पर भूरे रंग की कॉपर की परत चढ़ जाती है।
  3. गैस का निकास या उत्सर्जन (Evolution of a Gas): दानेदार जस्ते (Zinc) पर तनु सल्फ्यूरिक अम्ल ($H_2SO_4$) डालने पर हाइड्रोजन गैस ($H_2$) के बुलबुले निकलते हैं, जो पॉप (Pop) ध्वनि के साथ जलती है।
  4. तापमान में परिवर्तन (Change in Temperature): कली चूने (CaO) में जल मिलाने पर अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है और परखनली अत्यधिक गर्म हो जाती है।

(ख) रासायनिक समीकरण को संतुलित करना क्यों आवश्यक है?

द्रव्यमान संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Mass): 18वीं शताब्दी में वैज्ञानिक एंटोनी लैवोजियर ने प्रतिपादित किया था कि "किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में न तो द्रव्यमान का सृजन होता है और न ही विनाश।"

अतः अभिक्रिया के पहले उपस्थित अभिकारकों का कुल द्रव्यमान अभिक्रिया के पश्चात बनने वाले उत्पादों के कुल द्रव्यमान के ठीक बराबर होना चाहिए। इसका गणितीय नियम यह है कि तीर के निशान ($\to$) के बाईं ओर (LHS) प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या दाईं ओर (RHS) के परमाणुओं की संख्या के पूर्णतः समान होनी चाहिए। जो समीकरण संतुलित नहीं होता, उसे कंकाली या ढांचा समीकरण (Skeletal Equation) कहते हैं।

पदार्थ की भौतिक अवस्था संकेत (Notation) उदाहरण
ठोस (Solid) (s) $Fe(s)$, $Zn(s)$, $CaCO_3(s)$
द्रव (Liquid) (l) $H_2O(l)$, $Br_2(l)$
गैस (Gas) (g) या ↑ $H_2(g)$, $O_2(g)$, $CO_2(g)$
जलीय विलयन (Aqueous) (aq) जल में घुला हुआ पदार्थ: $HCl(aq)$, $CuSO_4(aq)$
अवक्षेप (Precipitate) (ppt) या ↓ अघुलनशील ठोस उत्पाद: $BaSO_4(s)↓$ (सफेद अवक्षेप)

(ग) समीकरण संतुलन की चरणबद्ध विधि (Hit and Trial Method)

उदाहरण: भाप पर लोहे की अभिक्रिया: $Fe + H_2O \to Fe_3O_4 + H_2$

  • चरण 1: सूत्र के चारों ओर बॉक्स बना लें और बॉक्स के अंदर कोई परिवर्तन न करें।
  • चरण 2: दोनों ओर तत्वों के परमाणुओं की सूची बनाएं:
    • Fe: LHS = 1, RHS = 3
    • H: LHS = 2, RHS = 2
    • O: LHS = 1, RHS = 4
  • चरण 3: सबसे अधिक परमाणु वाले तत्व (ऑक्सीजन) को पहले संतुलित करें: LHS में $H_2O$ के आगे 4 लगाएं $\to 4H_2O$।
  • चरण 4: अब हाइड्रोजन को संतुलित करें: LHS में $4 imes 2 = 8$ हाइड्रोजन हैं, अतः RHS में $H_2$ के आगे 4 लगाएं $\to 4H_2$।
  • चरण 5: लोहे (Fe) को संतुलित करें: RHS में 3 Fe हैं, अतः LHS में Fe के आगे 3 लगाएं $\to 3Fe$।
  • संतुलित अंतिम समीकरण: $$3Fe(s) + 4H_2O(g) \to Fe_3O_4(s) + 4H_2(g)$$

2. रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रमुख प्रकार: संयोजन एवं वियोजन

1. संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction)

वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें दो या दो से अधिक अभिकारक मिलकर एकल उत्पाद (Single Product) का निर्माण करते हैं, संयोजन अभिक्रिया कहलाती है।

सामान्य रूप: $A + B \to AB$

  • कोयले का दहन: $$C(s) + O_2(g) \to CO_2(g) + ext{ऊष्मा}$$
  • जल का निर्माण: $$2H_2(g) + O_2(g) \to 2H_2O(l)$$
  • कली चूने से बुझे चूने का निर्माण (अत्यधिक ऊष्माक्षेपी): जब बिना बुझे चूने (कैल्शियम ऑक्साइड) में जल डाला जाता है, तो भारी मात्रा में ऊष्मा के साथ बुझा हुआ चूना (कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड) बनता है: $$CaO(s) + H_2O(l) \to Ca(OH)_2(aq) + ext{ऊष्मा}$$ दीवारों पर चमक का रहस्य: बुझे हुए चूने $Ca(OH)_2$ के विलयन से सफेदी करने पर हवा में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड से धीरे-धीरे क्रिया करके दीवारों पर दो-तीन दिन में कैल्शियम कार्बोनेट ($CaCO_3$) की पतली चमकदार परत बन जाती है: $$Ca(OH)_2(aq) + CO_2(g) \to CaCO_3(s) + H_2O(l)$$
💡 ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया (Exothermic Reaction): जिन अभिक्रियाओं में उत्पाद के निर्माण के साथ-साथ ऊष्मा भी मुक्त होती है।
उदाहरण: प्राकृतिक गैस (मीथेन) का दहन: $CH_4(g) + 2O_2(g) \to CO_2(g) + 2H_2O(g) + ext{ऊष्मा}$
श्वसन एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है: हमारे द्वारा खाया गया कार्बोहाइड्रेट पचकर ग्लूकोज बनता है। कोशिकाओं में यह ग्लूकोज ऑक्सीजन के साथ मिलकर ऊर्जा प्रदान करता है: $$C_6H_{12}O_6(aq) + 6O_2(aq) \to 6CO_2(aq) + 6H_2O(l) + ext{ऊर्जा (ATP)}$$

2. वियोजन या अपघटन अभिक्रिया (Decomposition Reaction)

वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें एकल अभिकारक टूटकर दो या दो से अधिक सरल उत्पादों में विभाजित हो जाता है, वियोजन अभिक्रिया कहलाती है। यह संयोजन अभिक्रिया के ठीक विपरीत होती है।

सामान्य रूप: $AB \to A + B$

ऊर्जा के स्रोत के आधार पर वियोजन अभिक्रियाएँ तीन प्रकार की होती हैं:

प्रकार क्रियाविधि एवं ऊर्जा स्रोत संतुलित समीकरण एवं प्रेक्षण
(क) ऊष्मीय वियोजन (Thermal Decomposition) ऊष्मा (गर्म करने) के प्रभाव से अभिकारक का टूटना। 1. फेरस सल्फेट (हरे क्रिस्टल) को गर्म करने पर भूरा फेरिक ऑक्साइड व सल्फर की तीखी गंध वाली गैसें निकलती हैं:
$$2FeSO_4(s) \xrightarrow{\Delta} Fe_2O_3(s) + SO_2(g) + SO_3(g)$$
2. चूना पत्थर से कली चूना बनना:
$$CaCO_3(s) \xrightarrow{\Delta} CaO(s) + CO_2(g)$$
3. लेड नाइट्रेट को गर्म करने पर भूरे रंग का धुआँ ($NO_2$) निकलता है:
$$2Pb(NO_3)_2(s) \xrightarrow{\Delta} 2PbO(s) + 4NO_2(g)↑ + O_2(g)↑$$
(ख) वैद्युत अपघटन (Electrolytic Decomposition) विद्युत धारा प्रवाहित करने पर अभिकारक का अपघटन। जल का वैद्युत अपघटन: अम्लीकृत जल में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर कैथोड पर $H_2$ गैस और एनोड पर $O_2$ गैस 2:1 के आयतन अनुपात में प्राप्त होती है:
$$2H_2O(l) \xrightarrow{ ext{विद्युत धारा}} 2H_2(g) + O_2(g)$$
(ग) प्रकाशीय वियोजन (Photochemical Decomposition) सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में वियोजन। (श्याम-श्वेत फोटोग्राफी में उपयोग)। सफेद सिल्वर क्लोराइड धूप में धूसर (ग्रे) रंग का हो जाता है:
$$2AgCl(s) \xrightarrow{ ext{सूर्य का प्रकाश}} 2Ag(s) + Cl_2(g)$$
$$2AgBr(s) \xrightarrow{ ext{सूर्य का प्रकाश}} 2Ag(s) + Br_2(g)$$

3. विस्थापन एवं द्वि-विस्थापन अभिक्रियाएँ

1. विस्थापन अभिक्रिया (विस्थापन प्रतिक्रिया)

वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें अधिक अभिक्रियाशील तत्व होता है काम अभिक्रिया तत्व को उसके सिलिकॉन (विलेन) से मोशन (हटा) कर देता है, विस्थापन अभिक्रिया कहलाती है।

सामान्य रूप: $A + BC \to AC + B$ (जहाँ तत्व ए, बी से अधिक सक्रिय है)।

  • लोहे एवं कॉपर मोनोलेज़ की अभिक्रिया: जब लोहे की कील को कोलतार विलयन में दबाया जाता है, तो लोहे अधिक सक्रिय होने के कारण कॉपर को मोर्टार कर देता है: $$Fe(s) + CuSO_4(aq) ext{ (नीला)} \to FeSO_4(aq) ext{ (हल्का हरा)} + Cu(s) ext{ (भूरा लाल)}$$
  • जिंक एवं कॉपर मोनोलॅक: रेसकोर्स कॉपर से अधिक सक्रिय है, मूल रूप से रंगहीन जिंक कॉपर मोनोलैटिन है: $$Zn(s) + CuSO_4(aq) \to ZnSO_4(aq) + Cu(s)$$
  • लेड एवं कॉपर वेल्डिंग: $$Pb(s) + CuCl_2(aq) \to PbCl_2(aq) + Cu(s)$$
⚠️ एक्टिविटी श्रेणी (रिएक्टिविटी सीरीज) के नियम: अगर हम कॉपर के बर्तनों को फेरस एनालिस्ट ($FeSO_4$) के विलयन में शामिल करते हैं, तो कोई अभिक्रिया नहीं होगी, क्योंकि कॉपर ज्वालामुखी की तुलना कम एक्शनशील है ($Cu < Fe$)!

2. द्विविस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction)

वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें अभिक्रियाओं के बीच आयनों का मिलन-जोड़ना (आयनों का आदान-प्रदान)होता है, द्वि-विस्थापन अभिक्रिया कहलाती है।

सामान्य रूप: $AB + CD \to AD + CB$

अवक्षेपण अभिक्रिया (वर्षा अभिक्रिया): जब अस्थानिक अवक्षेपण (श्वेत अवक्षेपण) बनता है:

$$Na_2SO_4(aq) + BaCl_2(aq) \to BaSO_4(s)↓ + 2NaCl(aq)$$
  • यहाँ $Ba^{2+}$ आयन और $SO_4^{2-}$ आयन संयुक्त जुड़कर सफेद अवक्षेप $BaSO_4$ टूटते हैं।
  • लेड नाइट्रेट और पोटेशियम आयोडाइड की अभिक्रिया (पीला अवक्षेप): $$Pb(NO_3)_2(aq) + 2KI(aq) \to PbI_2(s)↓ ext{ (पीला अवक्षेप)} + 2KNO_3(aq)$$

4. उपचयन एवं अपचयन: रेडॉक्स अभिक्रिया (रेडॉक्स प्रतिक्रियाएं)

(क) उपचयन एवं अपचयन की परिभाषा

प्रक्रिया ऑक्सीजन एवं साधारण के आधार पर इलेक्ट्रॉनिक संकल्पना (आधुनिक)
उपचयन / ऑक्सीकरण (ऑक्सीकरण) किसी पदार्थ में ऑक्सीजन का शामिल होना या हाइड्रोजन का निष्कासन. इलेक्ट्रॉनों का त्याग करना (इलेक्ट्रॉनों की हानि - $Na \to Na^+ + e^-$).
अपचयन (कमी) किसी पदार्थ में हाइड्रोजन का जुड़ना या ऑक्सीजन का निष्कासन. इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करना (इलेक्ट्रॉनों का लाभ - $Cl + e^- \to Cl^-$).

(ख) रेडॉक्स अभिक्रिया (रेडॉक्स प्रतिक्रिया)

वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें एक अभिकारक अपचयित (ऑक्सीकृत) होता है तथा दूसरा अभिकारक अपचयित (कम) होता है, उपचयन-अपचयन या रेडॉक्स अभिक्रिया कहलाती है।

सर्वप्रमुख बोर्ड परीक्षा उदाहरण 1:

$$CuO(s) + H_2(g) \xrightarrow{\Delta} Cu(s) + H_2O(l)$$
  • $CuO$ से ऑक्सीजन अलग-अलग मात्रा $Cu$ बनती है $\to$ CuO का अपचयन (कमी) हुआ है।
  • $H_2$ में ऑक्सीजन जुड़कर $H_2O$ बनता है $\to$ $H_2$ का उपचयन (ऑक्सीकरण) हुआ है।
  • उपचायक (ऑक्सीकरण एजेंट): वह पदार्थ जो दूसरे का उपचयन करता है और स्वयं अपचयित होता है $\to$ यहां CuO उपचायक है।
  • अपचायक (अपचायक): वह पदार्थ जो दूसरे का अपचयन करता है और स्वयं उपचायक होता है $\to$ यहां $H_2$ अपचायक है।

उदाहरण 2:

$$ZnO(s) + C(s) \to Zn(s) + CO(g)$$
  • $ZnO$ अपचयित लक्ष्य $Zn$ बनता है।
  • कार्बन ($C$) उपचयित कार्बोन मोनोऑक्साइड ($CO$) बनता है।

उदाहरण 3:

$$MnO_2 + 4HCl \to MnCl_2 + 2H_2O + Cl_2$$
  • $HCl$ उपचयित फिल्में $Cl_2$ बनती है (हाइड्रोजन का निष्कासन).
  • $MnO_2$ अपचयित फिल्म $MnCl_2$ बनती है (ऑक्सीजन का निष्कासन)।

5. दैनिक जीवन में उपचयन अभिक्रियाओं के प्रभाव: संक्षारण एवं विकृतगंधिता

1. संक्षारण (संक्षारण)

जब कोई धातु अपने आस-पास अम्ल, रसायन (नामी), वायु आदि के संपर्क में आती है, तो उसकी ऊपरी सतह धीरे-धीरे उपचयित होती है। इस प्रक्रिया को संस्कृति कहते हैं।

  • लोहे पर जंग लगना (लोहे पर जंग लगना): लोहे को नाम वायु में खुली छूट पर उस पर लाल-भूरे रंग के अवशेषों की परत चढ़ाई जाती है, जिसे जंग कहा जाता है। जंग का रासायनिक सूत्र जलयोजित फेरिक प्रयोगशाला ($Fe_2O_3 \cdot xH_2O$) है: $$4Fe + 3O_2 + 2xH_2O \to 2Fe_2O_3 \cdot xH_2O$$
  • तांबे पर संरक्षण: तांबे नाम वायु में उपस्थित $CO_2$ से क्रिया करके हरे रंग की खरीया कॉपरेटिव कंपनी [$CuCO_3 \cdot Cu(OH)_2$] की परत रचना है।
  • पानी का काला पड़ना: सिल्वर वायु में उपस्थित अतिथि (जैसे $H_2S$) से क्रिया करके काले रंग के सिल्वर सल्तनत पिरामिड ($Ag_2S$) की समकक्ष स्थापना है।
  • संक्षारण से नुकसान: घटिया पुल, कार की बॉडी, जहाज, रेलवे लाइन और लोहे की संरचनाएं नष्ट हो जाती हैं, जिससे अरबों डॉलर की आर्थिक क्षति होती है।
  • संक्षारण से मुक्ति के उपाय:
    1. पेंट या नामांकन करके।
    2. तेल या गुरूग्राम की परत चढ़ाकर।
    3. जस्ते (जस्ता) की परत चढ़ाने की विधि।
    4. विद्युतलेपन (इलेक्ट्रोप्लेटिंग - क्रोमियम या टिन की परत चढ़ाना)।
    5. मिश्रधातु युगल (उदा. क्लासिक स्टील: आयरन + निकेल + क्रोमियम)।

2. विकृतगंधिता (बासीपन)

वसाकार या तैलीय खाद्य सामग्री जब लंबे समय तक वायु (ऑक्सीजन) के संपर्क में रहती है, तो वे उपचयित (ऑक्सीकृत) हो जाते हैं। उपचयित पर उनके स्वाद और गंध में परिवर्तन आते रहते हैं। इस परिघटना को विकृतगंधिता कहते हैं।

  • रोकथाम के उपाय:
    1. एंटी-ऑक्सीकारक (एंटीऑक्सिडेंट) मिलाना: BHA (ब्यूटाइल युक्त हाइड्रॉक्सीएनिसोल) और BHT जैसे खाद्य पदार्थों में मिलाए जाते हैं जो उपचयन की दर को धीमा कर देते हैं।
    2. अक्रिय गैस ($N_2$) भरी जाती है, क्योंकि चिप्स के टुकड़े में से ऑक्सीजन गैस सिलिकॉन शामिल है नाइट्रोजन गैस ($N_2$) भरी होती है, क्योंकि एक अक्रिय गैस है जो तेलिया चिप्स का उपचयन होने से रोकती है।
    3. वायुरोधी पोटीन (वायुरोधी कंटेनर) में रखें: ऑक्सीजन से संपर्क कम होता है जिससे उपचयन धीमा हो जाता है।
    4. शीतलन (प्रशीतन): भोजन को फ़र्ज़ी में कम तापमान पर बनाए रखने पर से रासायनिक उपचयन की गति अत्यंत मंद हो जाती है।

महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र, अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

मैग्नीशियम का दहन
2Mg(s) + O₂(g) → 2MgO(s) + प्रकाश व ऊष्मा (चमकदार श्वेत ज्वाला)
कली चूने की जल से क्रिया
CaO(s) + H₂O(l) → Ca(OH)₂(aq) + ऊष्मा (ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया)
दीवारों पर सफेदी चमक
Ca(OH)₂(aq) + CO₂(g) → CaCO₃(s) + H₂O(l)
कोयले का दहन
C(s) + O₂(g) → CO₂(g) + ऊष्मा
प्राकृतिक गैस का दहन
CH₄(g) + 2O₂(g) → CO₂(g) + 2H₂O(g) + ऊष्मा
श्वसन रासायनिक समीकरण
C₆H₁₂O₆(aq) + 6O₂(aq) → 6CO₂(aq) + 6H₂O(l) + 38 ATP ऊर्जा
फेरस सल्फेट का ऊष्मीय वियोजन
2FeSO₄(s) —Δ→ Fe₂O₃(s) + SO₂(g) + SO₃(g)
चूना पत्थर का वियोजन
CaCO₃(s) —Δ→ CaO(s) + CO₂(g)
लेड नाइट्रेट का वियोजन
2Pb(NO₃)₂(s) —Δ→ 2PbO(s) + 4NO₂(g)↑ (भूरा धुआं) + O₂(g)↑
जल का वैद्युत अपघटन
2H₂O(l) —विद्युत धारा→ 2H₂(g) (कैथोड) + O₂(g) (एनोड)
सिल्वर क्लोराइड का प्रकाशीय वियोजन
2AgCl(s) —सूर्य का प्रकाश→ 2Ag(s) + Cl₂(g)
सिल्वर ब्रोमाइड (ब्लैक-व्हाइट फोटोग्राफी)
2AgBr(s) —सूर्य का प्रकाश→ 2Ag(s) + Br₂(g)
लोहे द्वारा कॉपर का विस्थापन
Fe(s) + CuSO₄(aq) → FeSO₄(aq) + Cu(s)
जिंक द्वारा कॉपर का विस्थापन
Zn(s) + CuSO₄(aq) → ZnSO₄(aq) + Cu(s)
द्वि-विस्थापन (सफेद अवक्षेप)
Na₂SO₄(aq) + BaCl₂(aq) → BaSO₄(s)↓ (सफेद) + 2NaCl(aq)
द्वि-विस्थापन (पीला अवक्षेप)
Pb(NO₃)₂(aq) + 2KI(aq) → PbI₂(s)↓ (पीला) + 2KNO₃(aq)
रेडॉक्स अभिक्रिया (कॉपर ऑक्साइड + H₂)
CuO(s) + H₂(g) —Δ→ Cu(s) + H₂O(l)
लोहे पर जंग लगने का सूत्र
4Fe + 3O₂ + 2xH₂O → 2Fe₂O₃·xH₂O (जलयोजित फेरिक ऑक्साइड)
तांबे पर हरी परत का सूत्र
CuCO₃·Cu(OH)₂ (क्षारीय कॉपर कार्बोनेट)
चांदी पर काली परत का सूत्र
Ag₂S (सिल्वर सल्फाइड)

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
प्रश्न 1 (अति लघु उत्तरीय - 1 ए.एम.): मैग्नेशियम रिबन को वायु में जलाने से पहले रेगमाल (सैंडपेपर) से साफ क्यों किया जाता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर:
मैग्नीशियम एक अत्यंत क्रियाशील धातु है। नाम वायु के संपर्क में इसकी सतह पर मैग्नीशियम प्राइमरी (एमजीओ) की एक सफेद पेंटिंग परत परत जाम रहती है। यह पैरामैक्सीन को ऑक्सीजन के सीधे संपर्क में आने से रोकता है। मूल रूप से उसे पहले रेगमाल से राँचीकर के उस पार्ट को हटा दिया गया है ताकि वह बिना किसी बाधा के आसानी से जल सुरक्षित रह सके।
उदाहरण 2
प्रश्न 2 (लघु उत्तरीय - 2 अंक): श्वसन को ऊर्जा अभिक्रिया (एक्सोथर्मिक रिएक्शन) क्यों कहा जाता है? रासायनिक गुणांक समसामयिक।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर:
जीवित रहने के लिए हमें ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जो हमें भोजन से जोड़ता है। पाचन क्रिया के दौरान जटिल खाद्य पदार्थ पदार्थ (जैसे ग्लूकोज) टूट जाते हैं। श्वसन प्रक्रिया में यह ग्लूकोज हमारी बॉडी के उपकरण में ऑक्सीजन के साथ मिलकर आयोडीनकृत होता है और भारी मात्रा में ऊर्जा (एटीपी के रूप में) मुक्त करता है। इस प्रक्रिया में ऊर्जा विकिरण होता है, हर्ट्ज़ को ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया कहा जाता है।

संतुलित रासायनिक गुणांक:
$$C_6H_{12}O_6(aq) + 6O_2(aq) \to 6CO_2(aq) + 6H_2O(l) + ext{ऊर्जा (38 ATP)}$$
उदाहरण 3
प्रश्न 3 (लघु उत्तर - 3 अंक): प्रारंभिक रासायनिक अनुपात:
(i) $HNO_3 + Ca(OH)_2 \to Ca(NO_3)_2 + H_2O$
(ii) $NaOH + H_2SO_4 \to Na_2SO_4 + H_2O$
(iii) $BaCl_2 + H_2SO_4 \to BaSO_4 + HCl$
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर:
(i) $2HNO_3 + Ca(OH)_2 \to Ca(NO_3)_2 + 2H_2O$
संतुलन: ऊपर की ओर $NO_3$ के 2 मूलक हैं, मूलतः $HNO_3$ के आगे 2 मूलक हैं। इसके बाद प्रारंभिक ओर $H_2O$ के आगे 2 का अनुमान लगाया गया।

(ii) $2NaOH + H_2SO_4 \to Na_2SO_4 + 2H_2O$
संतुलन: ऊपर की ओर $Na_2SO_4$ में 2 परमाणु परमाणु हैं, मूलतः $NaOH$ के आगे 2 लगाए गए हैं। मूल रूप से आरंभ करने के लिए $H_2O$ के आगे 2 का उपयोग किया गया।

(iii) $BaCl_2 + H_2SO_4 \to BaSO_4 + 2HCl$
संतुलन: बाईं ओर 2 परमाणु और 2 परमाणु परमाणु हैं, मूल रूप से दाईं ओर $HCl$ के आगे 2 का उपयोग किया गया है।
उदाहरण 4
प्रश्न 4 (दीर्घ उत्तरीय - 5 अंक): वियोजन अभिक्रिया को संयोजन अभिक्रिया के विपरीत क्यों कहा जाता है? ऊष्मीय, प्रकाशीय और वैद्युत वियोजन के एक-एक संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर:
संयोजन बनाम विन्यास का पुरातन अंतर:
  • संयोजन अभिक्रिया: इसमें दो या दो से अधिक अभिकारक संपर्क जुड़कर एकल नए उत्पाद बनाए गए हैं ($A + B \to AB$)। इसमें सामान्यतः ऊर्जा मुक्त होती है (ऊष्माक्षेपी).
  • वियोजन अभिक्रिया: इसमें एकल अभिकारक ऊर्जा संयोजन बनाकर तोड़ता है और दो या दो से अधिक सरल कलाकारों का निर्माण करता है ($AB \to A + B$)। बांधों को तोड़ने के लिए बाहरी ऊर्जा परमाणु ऊर्जा संयंत्र (ऊष्माशोषी) है।
मूल रूप से अभिक्रिया और संरचना की संख्या और ऊर्जा के संयोजन-समुच्चय की दृष्टि से अभिक्रिया संयोजन के पूर्ण रूप से विपरीत होता है।
वियोजन अभिक्रिया के तीन प्रकार एवं अनुपात:
  1. ऊष्मीय वियोजन (थर्मल अपघटन):
    काली मिट्टी (कैल्शियम प्लास्टर) को गर्म करने पर वह काली मिट्टी और कार्बन डाइऑक्साइड में विघटित हो जाती है:
    $$CaCO_3(s) \xrightarrow{\Delta} CaO(s) + CO_2(g)$$
  2. प्रकाशीय वियोजन (फोटोकैमिकल अपघटन):
    सूर्य के प्रकाश में व्हाइट सिल्वर ग्लोब वॉयजिट स्टार धूसर रंग का सिल्वर और सोलर गैस कंपनी है:
    $$2AgCl(s) \xrightarrow{ ext{सूर्य का प्रकाश}} 2Ag(s) + Cl_2(g)$$
  3. वैद्युत वियोजन (इलेक्ट्रोलाइटिक अपघटन):
    अम्लीकृत जल में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर वह पेट्रोलियम गैसों में प्रयुक्त होता है:
    $$2H_2O(l) \xrightarrow{ ext{विद्युत धारा}} 2H_2(g) + O_2(g)$$
उदाहरण 5
प्रश्न 5 (दीर्घ उत्तरीय - 5 अंक): रेडॉक्स अभिक्रिया क्या है? अभिक्रिया $CuO + H_2 \ o Cu + H_2O$ में (क) उपचायित पदार्थ, (ख) उपचायित पदार्थ, (ग) उपचायक और (घ) उपचयित पदार्थ की पहचान। दैनिक जीवन में संक्षारण और विकृतगंधिता को समझें।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर:
रेडॉक्स अभिक्रिया (रेडॉक्स रिएक्शन): वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें एककारक का उपचयन (रेडॉक्स अभिक्रिया) होता है और दूसरा अभिकारक का अपचयन होता है, उसे उपचयन-अपचयन या रेडॉक्स अभिक्रिया कहते हैं।
अभिक्रिया का विश्लेषण: $CuO(s) + H_2(g) \xrightarrow{\Delta} Cu(s) + H_2O(l)$
  • (के) उपचयित पदार्थ (पदार्थ ऑक्सीकृत): $H_2$ (क्योंकि ऑक्सीजन का योग हुआ है और यह $H_2O$ इसमें बन गया है)।
  • (ख) अपचयित पदार्थ (पदार्थ कम): $CuO$ (क्योंकि इससे ऑक्सीजन का निष्कासन हुआ है और यह $Cu$ बन गया है)।
  • (जी) उपचायक (ऑक्सीकारक एजेंट): $CuO$ (एकमात्र प्रमाणित ऑक्सीजन प्रदान की जाती है)।
  • (घ) अपचायक (रिड्यूसिंग एजेंट): $H_2$ (अचानक स्थापित क्यूप्रिक संकाय सेसोग्य को चीना/हटाया).

दैनिक जीवन में उपचयन के प्रभाव:
  1. संक्षारण (संक्षारण): जब धातुओं के मिश्रण, ऑक्सीजन और अम्लों से क्रिया करके धीरे-धीरे नष्ट होना प्रतीत होता है। उदाहरण: आयरन पर जंग लगाना ($Fe_2O_3 \cdot xH_2O$). रोकथाम: गैल्वनक्रियेशन (जस्ते की परत चढ़ाना), पेंट करना।
  2. विकृतगंधिता (बासीपन): तेल और वसायुक्त खाद्य पदार्थ लंबे समय तक हवा में रहने पर उपचयित पदार्थ अरुचिकर गंध और स्वाद शामिल हैं। रोकथाम: चिप्स के टुकड़ों में तरल गैस भरना, प्रति-ऑक्सीकारक (एंटीऑक्सिडेंट) मिलाना और वायुरोधी डिब्बों में रखना।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

समकालिक समसामयिक रचना के सूत्र के पदांक (Subscript) को बदलना देना (जैसे H₂O को H₂O₂ लिखना देना)।

सही वैज्ञानिक तथ्य

यह एक गंभीर वैज्ञानिक त्रुटि है। यौगिक का सूत्र (जैसे $H_2O$) कभी बदला नहीं जा सकता क्योंकि $H_2O_2$ जल नहीं बल्कि ठोस पेरोक्साइड बन जाता है। संतुलन केवल सूत्र के आगे गुण (गुणांक) ही लगाया जाता है (जैसे $2H_2O$)।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

जल के वैद्युत अपघटन में कैथोड और एनोड पर एकत्र होने वाली गैसों में भ्रमित होना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

हमेशा याद रखें: कैथोड (धनात्मक परमाणु) पर ठोस ($H_2$) गैस एक साथ होती है, और नोड (धनात्मक परमाणु) पर ऑक्सीजन ($O_2$) गैस। रिज़ल्ट वाली गैसों का आयतन अनुपात $H_2 : O_2 = 2 : 1$ होता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

जंग और जंग (जंग) को एक ही खरोंच।

सही वैज्ञानिक तथ्य

संक्षारण एक व्यापक प्रक्रिया है जो सभी सामग्रियों (लोहा, तांबा, चांदी, एल्यूमिनियम) में होती है। जंग लगना (जंग लगना) केवल लोहे के संरक्षण के लिए उपयुक्त विशिष्ट शब्द है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

रेडॉक्स अभिक्रिया में उपचायक और अपचायक को उत्पादों में से चुन लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

उपचयित पदार्थ, अपचयित पदार्थ, उपचायक और अपचायक—ये चारों सदैव अभिकारकों (तीर के बाईं ओर) में से ही होते हैं, उत्पादों में से कभी नहीं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

चिप्स के पैकेट में भरी जाने वाली गैस को हीलियम या हाइड्रोजन समझ लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

चिप्स के पैकेट में केवल नाइट्रोजन ($N_2$) गैस भरी जाती है क्योंकि यह वायुमंडल में प्रचुर, सस्ती, अज्वलनशील और कमरे के तापमान पर अत्यधिक अक्रिय गैस है जो तेल के उपचयन को रोकती है।

रासायनिक अभिक्रियाओं के 5 प्रकार: आणविक दृश्य एवं ऊर्जा वर्गीकरण

🧪 रासायनिक अभिक्रियाओं के मूलभूत प्रकार (Types of Chemical Reactions)

1. संयोजन (Combination)

A + B → AB
दो या अधिक मिलकर एक उत्पाद बनाते हैं।
उदा: CaO + H₂O → Ca(OH)₂

2. वियोजन (Decomposition)

AB → A + B
एक यौगिक टूटकर कई उत्पाद देता है।
उदा: CaCO₃ —Δ→ CaO + CO₂

3. विस्थापन (Displacement)

A + BC → AC + B
अधिक सक्रिय तत्व कम को हटाता है।
उदा: Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu

4. द्वि-विस्थापन (Double Disp.)

AB + CD → AD + CB
आयनों का पारस्परिक आदान-प्रदान।
उदा: Na₂SO₄ + BaCl₂ → BaSO₄↓ + 2NaCl

⚡ ऊर्जा नियम: संयोजन प्रायः ऊष्माक्षेपी (ΔH < 0) तथा वियोजन सदैव ऊष्माशोषी (ΔH > 0) होता है।

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
  1. रासायनिक अभिक्रिया में नए गुणधर्मों वाले पदार्थों का निर्माण होता है; इसमें अवस्था, रंग, गैस उत्सर्जन या तापमान में परिवर्तन होता है।
मुख्य बिंदु 2
  1. द्रव्यमान संरक्षण के नियम के अनुसार किसी रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान का न निर्माण होता है और न विनाश; अतः समीकरण संतुलित करना अनिवार्य है।
मुख्य बिंदु 3
  1. संयोजन अभिक्रिया में दो या अधिक अभिकारक मिलकर एक एकल उत्पाद बनाते हैं (उदा. कली चूने में जल मिलना)।
मुख्य बिंदु 4
  1. वियोजन अभिक्रिया में एकल अभिकारक टूटकर दो या अधिक सरल उत्पाद बनाता है; यह ऊष्मा, प्रकाश या विद्युत ऊर्जा द्वारा संपन्न होता है।
मुख्य बिंदु 5
  1. श्वसन एक ऊर्जा प्रक्षेपण कार्यक्रम है जिसमें ग्लूकोज ऑक्सीजन से लेकर सामूहिक ऊर्जा, सीओ₂ और जल निर्माण शामिल हैं।
मुख्य बिंदु 6
  1. अभिक्रिया में अधिक सक्रिय धातु (जैसे Fe, Zn) कम सक्रिय धातु (जैसे Cu) को उसके जलीय लवण विलयन से मिलाया जाता है।
मुख्य बिंदु 7
  1. द्वि-विस्थापन अभिक्रिया में अभिकारकों के आयनों का जुड़ाव-प्रभाव होता है; इसमें बार-बार एक अघुलनशील अवक्षेप बनता है (जैसे BaSO₄)।
मुख्य बिंदु 8
  1. उपचयन में ऑक्सीजन का योग या हाइड्रोजन का निष्कासन होता है; अपचयन में हाइड्रोजन का योग या ऑक्सीजन का निष्कासन होता है।
मुख्य बिंदु 9
  1. संक्षारण में रसायन एवं वायु के प्रभाव से धातु की सतह नष्ट होती है (उदा. आयरन पर जंग $Fe_2O_3·xH_2O$); इसे गैल्वनीकरण, पेंट से मापा जाता है।
मुख्य बिंदु 10
  1. विकृतगंधिता में वसा व तेल का उपचयन होने से उनका स्वाद व गंध खराब हो जाती है; इसे नाइट्रोजन गैस व एंटीऑक्सीडेंट से रोका जाता है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
1. लोहे की कील को कॉपर सल्फेट के नीले विलयन में 20 मिनट डुबोने पर विलयन के रंग में क्या परिवर्तन होता है और क्यों?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: विलयन का नीला रंग मलेशियाई प्रभाव हरा हो जाता है, क्योंकि लौह (Fe) कॉपर (Cu) से अधिक क्रियाशील होने के कारण कॉपर मोनोऑक्साइड से कॉपर को मिश्रित कर हरा फेरस अवशेष (FeSO₄) बनता है।
2
2. जल के विद्युत अपघटन में एनोड और कैथोड पर कौन-सी गैसें मुक्त होती हैं तथा उनका आयतन अनुपात क्या होता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: कैथोड पर हाइड्रोजन (H₂) और एनोड पर ऑक्सीजन (O₂) गैस एकत्र होती है; इनका आयतन अनुपात 2:1 होता है।
3
3. तेल एवं वसायुक्त खाद्य पदार्थों को विकृतगंधिता से बचाने के लिए चिप्स के पैकेट में कौन-सी गैस प्रवाहित की जाती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: नाइट्रोजन गैस (N₂), क्योंकि यह एक अक्रिय गैस है जो तेल व वसा का उपचयन होने से रोकती है।
4
4. यशदलेपन (गैल्वनीकरण) क्या है और इसका क्या महत्व है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: लोहे के उत्पादन को जंग (संक्षारण) से सुरक्षित रखने के लिए उन पर जस्ते (जस्ता) की परत चढ़ाने की विधि को यशदलेपन कहते हैं।
5
5. निम्नलिखित अभिक्रिया में उपचयित एवं अपचयित पदार्थ का नाम लिखें: ZnO + C → Zn + CO
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: उपचयित पदार्थ: कार्बन (C) [इसमें ऑक्सीजन जुड़कर CO बना]; अपचयित पदार्थ: प्राइमेट (ZnO) [इससे संबंधित ऑक्सीजन अलग-अलग पदार्थ Zn बना]।
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कक्षा 10 Science & Technology (212) के सभी अध्याय

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