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NIOS • कक्षा X • Science & Technology (212) • अध्याय 20
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

पृथ्वी पर जीवन का इतिहास (History of Life on Earth)

पृथ्वी पर जीवन के इतिहास के लिए व्यापक अध्ययन सामग्री और अध्याय नोट्स, एनआईओएस माध्यमिक (कक्षा 10) विज्ञान और प्रौद्योगिकी (212) के लिए व्यवस्थित रूप से तैयार। नवीनतम नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग पाठ्यक्रम के साथ संरेखित, यह गाइड मुख्य सैद्धांतिक अवधारणाओं, प्रयोगशाला टिप्पणियों, प्रयोगात्मक तरीकों, ट्यूटर मार्क्ड असाइनमेंट (टीएमए) दिशानिर्देशों और सार्वजनिक परीक्षा में निपुणता पर जोर देती है।

🧬 क्या आपने कभी सोचा है: आपकी आँखें मम्मी जैसी और नाक पापा जैसी क्यों हैं? और एक संन्यासी ने मटर के दानों से पूरी दुनिया का सबसे बड़ा आनुवंशिक रहस्य कैसे सुलझाया?

ज़रा सोचिए: जब कोई नवजात शिशु जन्म लेता है, तो उसे तत्काल छोड़ दिया जाता है- "इसकी जगह तो बिल्कुल माँ जैसी होती है, पर मुस्कान दादाजी को दिखाया जाता है!" लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि आपके शरीर की नाभि को कैसे पता चला कि आंख का रंग मां से और नाक की मजबूती पिता से ली गई है?

आज से लगभग 170 वर्ष पहले जब दुनिया में किसी ने डीएनए, जीन या संगीतकार का नाम तक नहीं सुना था, तब ऑस्ट्रिया के एक ईसाई मठ में एक पादरी मैटर के 28,000 निकोला को ओलाकर, उनके फूलों को चिमटी से लेकर चूंकर और मोतियों जैसे दानों को गिनाकर की एक ऐसी डायरी लिखी हुई थी जिसने पूरी तरह से मानव जाति का भविष्य बदल दिया था! इनका नाम ग्रेगर जॉन मेंडल था।

मेंडल ने सिद्ध किया कि हमारे शरीर के हर लक्षण माता-पिता से मिलने वाले अदृश्य 'कारकों' (जिन्हें आज हम जीन/जीन कहते हैं) द्वारा नियंत्रित होता है। इतना ही नहीं, हमारे समाज से हमारे समाज में बेटी पैदा होने पर बलात्कार को दोष देने की पक्षपातपूर्ण कुप्रथा रही है, नागा विज्ञान ने अचूक प्रमाण के साथ सिद्ध कर दिया कि बच्चा लड़का होगा या लड़की—इसका पिता के परामर्श पर पूरी तरह से सहमति है! आइए, आनुवंशिकी के इस चमत्कारी और युगांतरकारी विज्ञान का विस्तार से अवलोकन!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

इस अध्याय का अध्ययन आपके लिए क्यों आवश्यक है?

  1. बोर्ड परीक्षा का सर्वोच्च स्कोरिंग अध्याय: झारखंड बोर्ड (एनआईओएस कक्षा 10) विज्ञान परीक्षा में "मंडल का एकसंकर एवं द्वितीयसंकर संकरण (अनूपात 3:1, 1:2:1, 9:3:3:1)", "प्रभावी बनाम अप्रभावी लक्षण", "मानव में लिंग का आरेख", और "अर्जित बनाम अप्रभावी लक्षण" पर 5 से 7 बजे के प्रश्न निश्चित रूप से पूछे जाते हैं।
  2. नीट एवं जेनेटिक्स की सूची: 11वीं एवं 12वीं जीव विज्ञान की सबसे बड़ी एवं महत्वपूर्ण इकाई 'जेनेटिक्स एवं इवोल्यूशन' का 60% आधार इसी अध्याय से बना है।
  3. सामाजिक कुरीतियों का वैज्ञानिक वैज्ञानिक साइंटिस्ट:संतान के लिंग में महिलाओं पर दोषारोपण की कुप्रथा को वैज्ञानिक तर्कों से समाप्त करने और जैविक समानता स्थापित करने में यह ज्ञान अत्यंत शक्तिशाली है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • कोशिका के केंद्रक (नाभिक), क्रोमैटिन जालिका एवं कोशिका (क्रोमोसोम) की संरचना।
  • लैंगिक जनन में नर एवं मादा युग्मकों (शुक्राणु व अंडाणु) का संलयन।
  • अर्धसूत्री विभाजन में गुणसूत्र संख्या का आधा (हाप्लॉयड - n) होना।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • आनुवंशिकता, विभिन्नता, जीन, युग्मविकल्पी (एलेल्स), जीनरूप (जीनोटाइप) और दृश्यरूप (फेनोटाइप) की प्रारंभिक परिभाषा दे।
  • मेंडल द्वारा मटर के पौधे के चयन के वैज्ञानिक कारणों और मटर के 7 विपर्यासी लक्षणों को सूचीबद्ध कर सकेंगे।
  • एकसंकर संकर (मोनोहाइब्रिड क्रॉस) का पैनेट वर्ग (पुनेट स्क्वायर) प्रभावित होता है और पृथक्करण के संबंध को सिद्ध कर दिया जाता है।
  • द्विसंकर संकरण (डायहाइब्रिड क्रॉस) के 9:3:3:1 अनुपात की व्युत्पत्ति कर स्वतंत्र अपव्यूहन के नियमों को स्पष्ट कर देना।
  • मानव में लिंग निर्धारण की संपूर्ण आनुवंशिक क्रियाविधि का रेखाचित्र बनाकर यह सिद्ध कर सकेंगे कि लिंग निर्धारण हेतु पिता उत्तरदायी होता है।
  • जन्मजात लक्षण (अधिग्रहीत लक्षण) और आनुवंशिक लक्षण (विरासत में मिले लक्षण) में स्पष्ट अंतर बताएं।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. आनुवंशिकता की आधारभूत संकल्पना ए...
2 2. मेंडल का प्रयोग एवं उद्यान मटर क...
3 3. एकसंकर संकरण एवं मंडल के दो नियम...
4 4. द्विसंकर संकरण एवं स्वतंत्र अपव्...
5 5. मानव में लिंग निर्धारण की क्रिया...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. आनुवंशिकता की आधारभूत संकल्पना एवं शब्दावली

आनुवंशिकी को समझने के लिए सबसे पहले इसके पारिभाषिक शब्दों को समझना अत्यंत आवश्यक है:

पारिभाषिक शब्द वैज्ञानिक परिभाषा विशिष्ट उदाहरण / प्रतीक
1. जीन (Gene / कारक) DNA का वह विशिष्ट क्रियात्मक खंड जिसमें किसी विशेष लक्षण की अभिव्यक्ति के लिए प्रोटीन निर्माण का कूट संदेश निहित होता है। मेंडल ने इसे 'कारक' (Factor) कहा था। मटर के पौधे की लंबाई का जीन, बीज के रंग का जीन।
2. युग्मविकल्पी (Alleles) एक ही जीन के दो या अधिक वैकल्पिक रूप जो समान गुणसूत्र पर एक ही स्थान (Locus) पर स्थित होते हैं और किसी लक्षण के परस्पर विरोधी रूपों को नियंत्रित करते हैं। लंबाई के लिए: $T$ (लंबा) तथा $t$ (बौना)।
3. प्रभावी लक्षण (Dominant Trait) वह लक्षण जो विषमयुग्मजी ($Tt$) अवस्था में भी स्वयं को अभिव्यक्त करने में समर्थ होता है और दूसरे लक्षण के प्रभाव को छिपा देता है। लंबा पौधा ($T$), गोल बीज ($R$), बैंगनी फूल ($W$)।
4. अप्रभावी लक्षण (Recessive Trait) वह लक्षण जो प्रभावी युग्मविकल्पी की उपस्थिति में छिप जाता है और केवल समयुग्मजी ($tt$) अवस्था में ही स्वयं को अभिव्यक्त कर पाता है। बौना पौधा ($t$), झुर्रीदार बीज ($r$), सफेद फूल ($w$)।
5. समयुग्मजी बनाम विषमयुग्मजी समयुग्मजी (Homozygous): जब दोनों युग्मविकल्पी समान हों।
विषमयुग्मजी (Heterozygous): जब दोनों युग्मविकल्पी भिन्न हों।
समयुग्मजी: $TT$ (शुद्ध लंबा) या $tt$ (शुद्ध बौना)।
विषमयुग्मजी: $Tt$ (संकर लंबा)।
6. दृश्यरूप बनाम जीनरूप दृश्यरूप (Phenotype): जीव के बाह्य रूप से दिखाई देने वाले लक्षण।
जीनरूप (Genotype): जीव की आनुवंशिक संरचना या जीनी संयोजन।
दृश्यरूप: लंबा पौधा।
जीनरूप: $TT$ अथवा $Tt$।

(ख) अर्जित लक्षण बनाम आनुवंशिक लक्षण (Acquired vs Inherited Traits)

यह बोर्ड परीक्षा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण 3-अंक का प्रश्न है:

तुलना का बिंदु अर्जित लक्षण (Acquired Traits) आनुवंशिक लक्षण (Inherited Traits)
उत्पत्ति का कारण जीव द्वारा अपने जीवनकाल में पर्यावरण, अनुभव, अभ्यास या दुर्घटना से प्राप्त किए जाते हैं। जनक कोशिकाओं के DNA में होने वाले परिवर्तनों द्वारा संतानों को प्राप्त होते हैं।
कोशिकीय स्तर ये परिवर्तन केवल कायिक ऊतकों (Somatic cells) तक सीमित रहते हैं; जनन कोशिकाओं के DNA पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। ये परिवर्तन जनन कोशिकाओं (Germ cells / Gametes) के DNA में उपस्थित होते हैं।
वंशागति (Inheritance) ये लक्षण अगली पीढ़ी में स्थानांतरित नहीं होते। ये लक्षण पीढ़ी-दर-पीढ़ी संतानों में स्थानांतरित होते हैं।
जैव विकास में भूमिका जैव विकास में इनका कोई योगदान नहीं होता। ये प्राकृतिक चयन और जैव विकास का मूल आधार बनते हैं।
उदाहरण चूहों की पूंछ काटने पर अगली पीढ़ी में पूंछयुक्त चूहे जन्म लेते हैं; तैरना सीखना; संगीत बजाना; कुपोषण से कम वजन। आँखों का रंग (नीला/भूरा); त्वचा का रंग; बालों की बनावट; कर्णपालि (कान की लौ) का जुड़ा या स्वतंत्र होना।

2. मेंडल का प्रयोग एवं उद्यान मटर के चयन के कारण

ग्रेगर मेंडल ने अपने संकरण प्रयोगों के लिए उद्यान मटर (गार्डन मटर - पिसम सैटिवम) को चुनें।

(के) मेंडल द्वारा मैटर के उपचार के चयन के चार वैज्ञानिक कारण (बोर्ड में 3 अंक):

  1. स्पष्ट विपर्यसी लक्षण (विशिष्ट विरोधाभासी अक्षर): मटर में आसानी से पहचाने जा सकने वाले एकताविरोधी लक्षण (जैसे कि वजन बनाम बौना, गोल बनाम झुर्रीदार बीज) उपलब्ध थे।
  2. छोटा जीवन चक्र (लघु जीवन काल): मातृ एकवर्षीय पौधा है, जिसके कारण कुछ ही महीनों में नई पीढ़ी के परिणाम प्राप्त हुए थे और कम समय में अनेकों का अध्ययन संभव हुआ।
  3. द्विलिंगी पुष्प एवं स्व-परागण (उभयलिंगी एवं स्व-परागण): मातृ के पुष्प द्विलिंगी होते हैं और प्राकृतिक रूप से स्व-परागण होते हैं, जिससे शुद्ध वंशक्रम (शुद्ध रेखाएं) प्राप्त करना आसान था।
  4. सुगम कृत्रिम पर-परागण (आसान कृत्रिम क्रॉस-परागण): कृत्रिम रूप से पर-परागण पर-परागण (आसान कृत्रिम क्रॉस-परागण) की आवश्यकता होती है। कृत्रिम रूप से पर-परागण पर-परागण (उपजाऊ) होता था।

(ख) मेंडल द्वारा मुद्रित मैटर के 7 अतिरिक्त विपर्यसी लक्षण:

क्र.सं. लक्षण (विशेषता) प्रभावी रूप (प्रमुख रूप) अप्रभावी रूप (रिसेसिव फॉर्म)
1 पादप की लंबाई लम्बा ($T$) बौना ($t$)
2 बीज का आकार गोल ($R$) झुर्रीदार ($r$)
3 बीज का रंग पीला ($Y$) हरा ($y$)
4 पुष्प का रंग बैंगनी / लाल ($W$) सफेद ($w$)
5 फ़ली का आकार फूली हुई ($I$) सिकुड़ी हुई ($i$)
6 फली का रंग हरा ($G$) पीला ($g$)
7 पुष्प की स्थिति काक्षीय ($A$) अंतस्थ ($a$)

3. एकसंकर संकरण एवं मंडल के दो नियम (मोनोहाइब्रिड क्रॉस)

जब केवल एक ही लक्षण के दो विपर्यय सिद्धांत (जैसे औषध की लंबाई: लम्बाई बनाम बौना) की वंशगति का अध्ययन करने के लिए संकरण प्रचलित है, तो उसे एकसंकर संकरण (मोनोहाइब्रिड क्रॉस) कहते हैं।

(क) प्रयोग का चरणबद्ध विवरण:

  1. उत्पन्न जनरेशन ($P$): शुद्ध बौना पौधा ($TT$) $\times$ शुद्ध बौना पौधा ($tt$).
  2. युग्मक निर्माण: $TT$ से केवल '$T$' युग्मक निर्मित हैं; $tt$ से केवल '$t$' युग्मक बने हैं।
  3. प्रथम संतानीय पीढ़ी ($F_1$): सभी उपचार $Tt$ (संकर लांग) प्राप्त। $F_1$ में एक भी बौना पौधा नहीं मिला.
  4. द्वितीय सनातन पीढ़ी ($F_2$): जब $F_1$ सैद्धांतिक का स्वामित्व में स्व-परागण ($Tt \times Tt$) विकसित हुआ, तो $F_2$ पीढ़ी में लंबी और बौने दोनों प्रकार के उपकरण प्राप्त हुए।

(ख) $F_2$ पीढ़ी का पनेट वर्ग (पुनेट स्क्वायर):

मादा \ नर युग्मक $T$ $t$
$T$ $TT$
(शुद्ध भार)
$Tt$
(संकर लम्बाई)
$t$ $Tt$
(संकर लम्बाई)
$tt$
(शुद्ध बौना)
एकसंकर संकरण के परिणाम (कंठस्थ करें):
• दृश्यरूप अनुपात (फेनोटाइपिक अनुपात): 3 भार : 1 वजन (3 :1)
• जीनरूप अनुपात (जीनोटाइपिक अनुपात): 1 शुद्ध वजन ($TT$) : 2 शुद्ध वजन ($Tt$) : 1 शुद्ध वजन ($tt$) $\Rightarrow$ 1 : 2 : 1

(जी) एकसंकर संकरण पर आधारित मॉडल के नियम:

  1. 1. प्रभावित का नियम (प्रभुत्व का नियम): जब दो भिन्न युग्मविकल्पी ($Tt$) एक साथ उपस्थित होते हैं, तो केवल एक ही कारक स्वयं को व्यक्त कर पाता है (प्रभावी लक्षण - प्रभुत्व का नियम), जबकि दूसरा कारक छिपा रहता है (अप्रभावी लक्षण - बौनापन)।
  2. 2. युग्मकों के पृथक्करण के नियम (Law of Segregadation / युग्मकों के स्वर्ण का नियम): युग्मक निर्माण (अर्धसूत्रीविभाजन) के समय लक्षण किसी के दोनों कारक (युग्मविकल्पी) एक-दूसरे से पूरी तरह से अलग-अलग (अलग-अलग) हो जाते हैं, जिससे प्रत्येक युग्मक में दो से केवल एक ही कारक निर्धारित होता है। युग्मक कभी भी संराश्रय नहीं होते, वे सदैव शुद्ध होते हैं। इसलिए $F_2$ पीढ़ी में अप्रभावी लक्षण ($tt$ - बौनापन) बिना किसी विकृति के पुनः प्रकट हो जाता है।

4. द्विसंकर संकरण एवं स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम (डायहाइब्रिड क्रॉस)

जब दो युगल विपर्ययि रहस्य की वंशगति का एक साथ अध्ययन किया जाता है, तो उसे द्विसंकर संकरण (डायहाइब्रिड क्रॉस) कहा जाता है।

(के) मेंडल का द्विसंकर प्रयोग:

  • मूल पीढ़ी ($P$): गोल और पीले बीज वाला पौधा ($RRYY$) $\times$ पीले बीज वाला पौधा ($rryy$)।
    (जहाँ $R$ = गोल, $r$ = झुर्रीदार; $Y$ = पीला, $y$ = हरा).
  • युग्मक: $RY$ तथा $ry$.
  • $F_1$ पीढ़ी: सभी उपाय $RrYy$ (गोल एवं पीले बीज वाले संरा) प्राप्त।
  • $F_2$ पीढ़ी: जब $F_1$ प्रमाणित में स्व-परागण ($RrYy \times RrYy$) युग्मक बने, तो 4 प्रकार के नर और 4 प्रकार के युग्म युग्म ($RY$, $Ry$, $rY$, $ry$) बने, जिससे 16 का संयोजन हुआ।

(ख) $F_2$ पीढ़ी का दृश्यरूप अनुपात (9 : 3 : 3 : 1):

दृश्यरूप (फेनोटाइप) संभावित जीनरूप संख्या (कुल 16 में से) प्रकृति
गोल एवं पीला (गोल पीला) $R-Y-$ ($RRYY, RrYY, RRYy, RrYy$) 9 सामान्य संयोजन (अभिभावक)
गोल एवं हरा (गोल हरा) $R-yy$ ($RRyy, Rryy$) 3 न्या पुनर्संयोजन (पुनः संयोजक)
झुर्रीदार एवं पीला (झुर्रीदार पीला) $rrY-$ ($rrYY, rrYy$) 3 न्या पुनर्संयोजन (पुनः संयोजक)
झुर्रीदार एवं हरा (झुर्रीदार हरा) $rryy$ 1 जनक संयोजन (अभिभावक)

(जी) मेंडल का तृतीय नियम: स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम (स्वतंत्र वर्गीकरण का नियम)

जब किसी संकर्ण में दो या दो से अधिक जोड़ी विपर्ययसी औषधि को एक साथ लिया जाता है, तो किसी एक लक्षण की वंशगति का अन्य लक्षण की वंशगति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। प्रत्येक लक्षण के युग्मविकल्पी युग्मक निर्माण के समय एक-दूसरे से स्वतंत्र रूप से अपव्यूहित (अलग एवं पुनर्संयोजित) होते हैं।

यही कारण है कि $F_2$ पीढ़ी में सामान्य संयोजन (गोल-पीला और झुर्रीदार-हरा) के साथ-साथ दो पूर्ण नए संयोजन-गोल-हरा तथा झुर्रीदार-पीला-भी प्रकट हुए।

5. मानव में लिंग निर्धारण की क्रियाविधि (मनुष्यों में लिंग निर्धारण)

मानव में लिंग का जन्म पूर्ण रूप से आनुवंशिक आधार पर होता है। यह पर्यावरण या तापमान पर प्रतिबंध नहीं लगाता है (जैसे कि कुछ सरीसृपों-मैगरमच्छ और कैटल-में अंडे सेने का तापमान लिंग निर्धारित होता है, डायनासोर मानव में ऐसा नहीं है)।

(क) मानव में पुरातत्वविदों की संरचना:

  • प्रत्येक मानव मच्छर में 23 सम्मिलित (कुल 46) 8§ होते हैं।
  • एलिंग प्रयोगशाला (ऑटोसोम्स - 22 जोड़ = 44 कोशिकाएं): ये स्त्री और पुरुष दोनों में समान होते हैं और सामान्य शारीरिक प्रयोगशालाओं को निर्धारित करते हैं।
  • लिंग गुणसूत्र (सेक्स क्रोमोसोम - 1 जोड़ा = 2 जोड़े): यह 23वाँ जोड़ा लिंग का जन्म होता है:
    • मादा (स्त्री): दोनों लिंग युग समान और पूर्ण आकार के होते हैं $\Rightarrow$ $XX$। मूलतः स्त्री समयुग्मकी (होमोगैमेटिक) होती है और केवल एक ही प्रकार की और उत्पन्न होती है (सभी अंडों में $22 + X$ समाज होते हैं)।
    • नर (पुरुष): लिंग विपणन बेमेल होते हैं; एक सामान्य आकार का X और दूसरा छोटा Y होता है $\Rightarrow$ $XY$। मूलतः पुरुष विषम युग्मकी (Heterogametic) होता है और दो प्रकार के स्वर 50-50% मात्रा में उत्पन्न होते हैं:
      1. 50% $22 + X$ टमाटर वाले।
      2. 50% सिलिकॉन $22 + Y$ सेवोर्स वाले।

(ख) लिंग आनुवंशिकी प्रक्रिया:

मादा अंड (स्त्री) \ नरसका (पुरुष) $X$ हेल्थकेयर (50%) $Y$ हेल्थकेयर (50%)
$X$ और (100%) $XX$
लड़की (मादा शिशु) - 50%
$XY$
लड़का (नर शिशु) - 50%

(जी) वैज्ञानिक निष्कर्ष (अत्यंत महत्वपूर्ण सामाजिक एवं बोर्ड बिंदु):

  1. माता से बच्चे को हमेशा केवल '$X$' ही प्राप्त होता है।
  2. अगर पिता का '$X$' सेज ले जाने वाला स्कॉर्पियन एंड को निश्चित करता है, तो युग्मनज '$XX$' बनेगा और लड़की का जन्म होगा।
  3. यदि पिता का '$Y$' संग्रहालय ले जाने वाला शुगर एंड को निषेचित करता है, तो युग्मनज '$XY$' बनेगा और लदका का जन्म होगा।
  4. हर गर्भावस्था में लड़का या लड़की होने की प्राथमिकता बिल्कुल समतुल्य 50% (1 : 1) होती है।
  5. अतः वैज्ञानिक रूप से यह सिद्ध है कि संत के लिंग का प्रदर्शन केवल पिता का वीर्य (शुक्रानु) के लिए जिम्मेदार है। हमारे समाज में कन्या शिशु के जन्म के लिए माता को दोष देना या पूर्ण करना, आधारहीन और घोर अज्ञानता का परिचय है।

महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र, अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

मानव गुणसूत्र संख्या
2n = 46 (22 जोड़े कायिक/ऑटोसोम + 1 जोड़ा लिंग गुणसूत्र)
स्त्री का गुणसूत्रीय संयोजन
44 + XX (समयुग्मकी - केवल X युक्त अंड)
पुरुष का गुणसूत्रीय संयोजन
44 + XY (विषमयुग्मकी - 50% X तथा 50% Y युक्त शुक्राणु)
एकसंकर दृश्यरूप अनुपात (F2)
प्रभावी : अप्रभावी = 3 : 1 (लंबा : बौना)
एकसंकर जीनरूप अनुपात (F2)
TT : Tt : tt = 1 : 2 : 1
द्विसंकर दृश्यरूप अनुपात (F2)
गोल-पीला : गोल-हरा : झुर्रीदार-पीला : झुर्रीदार-हरा = 9 : 3 : 3 : 1
द्विसंकर जीनरूप अनुपात (F2)
1:2:1:2:4:2:1:2:1 (कुल 9 जीनरूप, 16 संयोजन)
लिंग निर्धारण प्रायिकता
लड़का (XY) : लड़की (XX) = 1 : 1 (50% : 50%)
प्रभाविता का नियम सूत्र
विषमयुग्मजी (Tt) अवस्था में केवल T व्यक्त होगा (लंबा)
युग्मकों की शुद्धता का नियम
युग्मक निर्माण में T और t अलग-अलग हो जाते हैं (कोई संकर युग्मक नहीं)

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
प्रश्न 1 (जेएसी 2023 - 5 अंक): एक लंबे समय तक चलने वाले उपचार (टीटी) का समाधान। (के) एफ1 पीढ़ी में किस प्रकार के साधन प्राप्त होंगे? (ख) F2 जनरेशन में प्राप्त प्रमाणित का दृश्यरूप जीन एवं रूप अनुपात लेखन। (छ) इस प्रयोग से मेंडल ने कौन-सा नियम प्रतिपादित किया?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: (के) एफ1 पीढ़ी के उद्देश्य: शुद्ध लांग ($TT$) तथा शुद्ध बाउने ($tt$) के संकरण से $F_1$ पीढ़ी में सभी साधन संकर लांग ($Tt$) प्राप्त होंगे। $F_1$ पीढ़ी में कोई भी पौधा नहीं उगा।

(ख) F2 पीढ़ी के अनुपात: जब $F_1$ अनुमोदित का स्व-परागण ($Tt \times Tt$) का उपयोग किया जाता है: • दृष्टिकोण अनुपात (फेनोटाइपिक अनुपात):

$$\text{लंबे पौधे} : \text{बौने पौधे} = 3 : 1$$

(75% औषधियाँ लम्बी तथा 25% औषधियाँ छूटेंगी)। • जीनोटाइपिक अनुपात (जीनोटाइपिक अनुपात):

$$TT \text{ (शुद्ध लंबा)} : Tt \text{ (संकर लंबा)} : tt \text{ (शुद्ध बौना)} = 1 : 2 : 1$$

(जी) प्रतिपादित नियम: इस प्रयोग के आधार पर मेण्डल में दो मुख्य नियम दिये गये हैं:

  1. प्रभाविता का नियम: जब दोविपरीत रहस्य वाले अधिसूचना में संकरण होता है, तो $F_1$ में केवल प्रभावकारी लक्षण (लाम्बापन) ही दिखाई देता है। 2।
उदाहरण 2
प्रश्न 2 (जेएसी 2022 - 5 अंक): मानव में बच्चे का लिंग प्रतिष्ठान किस प्रकार होता है? एक आनुवंशिक आँकड़े (फ्लोचार्ट) साझी व्याख्या: लड़की या लड़का होने की संभावना 50-50% क्यों होती है।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: 1. लिंग आश्रम की क्रियाविधि: • मानव में कुल 23 जोड़े अवशेष पाए जाते हैं। 23वाँ जोड़ा लिंग विक्रेता विशेषज्ञ है। • माता (स्त्री) के पास समान लिंग देवता $XX$ होते हैं। मूल रूप से माता से बनने वाले सभी अंडों में केवल $X$ पुजारीहोता है। • पिता (पुरुष) के पास बेमेल लिंग सेटर $XY$ होते हैं। मूलतः पिता से दो प्रकार के स्कार्स संयुक्त होते हैं—50% स्कार्सा $X$-युक्त और 50% स्कार्सा $Y$-युक्त होते हैं।

2. आनुवंशिकी आण्विक (जेनेटिक क्रॉस):

जनक:          माता (XX)        ×        पिता (XY)
                 ↓                         ↓
युग्मक:        X      X                 X      Y
                 ↓                         ↓
संयोजन:     X × X  →  XX (लड़की - 25%)
            X × Y  →  XY (लड़का - 25%)
            X × X  →  XX (लड़की - 25%)
            X × Y  →  XY (लड़का - 25%)

परिणाम: • कुल लड़कियाँ ($XX$) = 50% • कुल लड़का ($XY$) = 50% • अनुपात = 1 :1

निष्कर्ष: $X$ और $Y$ सर्जकों की समान संख्या (50-50%) होती है, वास्तव में किसी भी तरह से $X$ या $Y$ में ‍निश्चित करने की संभावना पूर्णतः समान होती है। इसलिए लड़का या लड़की की संभावना हमेशा 50% होती है।

उदाहरण 3
प्रश्न 3 (JAC 2020 - 3 अंक): यदि एक गोल और हरे बीज वाले उपचार (RRYY) का संकरण जरूरी है और पीले बीज वाले उपचार (rrYY) से बचा जाए, तो (क) F1 पीढ़ी में उपचार कैसे होंगे? (ख) F2 पीढ़ी में नया पुनर्संयोजन किसे प्राप्त होगा और उनका अनुपात क्या होगा?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: (के) एफ1 पीढ़ी: गोल-हरे ($RRyy$) के युग्मक = $Ry$ ज्यूरीदार-पीले ($rrYY$) के युग्मक = $rY$ $F_1$संस्कार = $RrYy$ चॉकलेट गोल ($R$) झुर्रीदार ($r$) पर और पीला ($Y$) हरे ($y$) पर प्रभावशाली है, बल्कि $F_1$ के सभी उपाय गोल और पीले बीज वालेहोंगे।

(ख) F2 पीढ़ी के नवीन पुनर्संयोजन: द्विसंकर संकरण के $F_2$ पीढ़ी का दृश्यरूप अनुपात 9 : 3 : 3 : 1 होता है : • गोल-पीला (पैतृक)=9 • गोल-हरा (पुनः संयोजक - नया संयोजन) = 3 • झुरिदार-पीला (पुनः संयोजक - नया संयोजन) = 3 • ज़ुर्रीदार-हरा (माता-पिता) = 1

मूलतः दो नए पुनर्संयोजन गोल-हरा (3/16) तथा झुर्रीदार-पीला (3/16) प्राप्त होंगे। यह मेंडल के 'स्वतंत्र अपव्यूहन के नियमों' को प्रमाणित करता है।

उदाहरण 4
प्रश्न 4 (JAC 2021 - 3 अंक): एक अध्ययन से पता चला कि बच्चों की आंखों वाले बच्चों के माता-पिता की आंखें भी कैसे होती थीं। इसके आधार पर हम क्या कह सकते हैं कि पीले रंग की आंखों के लक्षण प्रभावी या अप्रभावी हैं? अपने उत्तर की पुष्टि करें।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: नहीं, केवल इस सूचना के आधार पर हम यह निश्चित रूप से नहीं कह सकते कि आंखों का रंग प्रभावी या अप्रभावी है।

पुष्टि के कारण:

  1. **यदि आपके सभी बच्चों में अनिवार्य रूप से केवल $b$ युग्मविकल्पी ही होंगे। मूलतः सभी बच्चे $bb$ (हल्की आँख वाले) ही होंगे।
  2. यदि लक्षण प्रभावी है: यदि युवा रंग की आंख प्रभावशाली ($B$) है और माता-पिता दोनों समयुग्मजी प्रभावशाली ($BB$) हैं, तब भी सभी बच्चे $BB$ (हल्की आंख वाले) ही होंगे।
  3. निष्कर्ष: जब तक हमें कम से कम तीन ग्रहों का वंशावली विश्लेषण (वंशावली चार्ट) या विषमयुग्मजी जनकों से विभिन्न प्रकार के बच्चों का अनुपात प्राप्त नहीं हुआ, तब तक किसी भी लक्षण से प्रभावित या अप्रभाविता का पता नहीं चल सका।
उदाहरण 5
प्रश्न 5 (JAC 2019 - 2 अंक): यदि एक चूहे की पूँछ कई साल तक लगातार कटती रही, तब भी अगली पीढ़ी में बिना पूँछ वाला चूहा क्यों पैदा नहीं हुआ? इस प्रयोग का जैव विकास के सन्दर्भ में क्या महत्व है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: 1. बिना पूंछ वाले पूछे न पैदा होने का कारण: पूंछ का काटना एक अर्जित लक्षण (अधिग्रहीत गुण) है। टेल कटर से केवल कायिक स्नायुबंधन (दैहिक कोशिकाएं) प्रभावित होती हैं, चूहे की इच्छा या अंग की जनन कोशिका (जर्म कोशिकाएं) के डीएनए में कोई परिवर्तन नहीं होता है। संतृप्त वंशावली केवल जनन कोयले के डीएनए से होती है, मूल रूप से कटी टेल का लक्षण संतानों में स्थानांतरण नहीं होता है।

2. जैव विकास में महत्वपूर्ण: यह प्रयोग वैज्ञानिक ऑगस्ट वीज़मैन द्वारा लैमार्क के "उपराजित मिशन के वंशगति के सिद्धांत" को गलत सिद्ध करने के लिए किया गया था। यह स्पष्ट कर दिया गया है कि केवल अगली पीढ़ी में वंशानुगत जैव विकास को प्रेरित किया जाता है, प्रयोगशाला में वैज्ञानिक चिकित्सीय परिवर्तन नहीं।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह मानना कि लिंग निर्धारण के लिए माता उत्तरदायी है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

माता के पास केवल XX उपग्रह पाए जाते हैं, मूलतः वह केवल X और दे सकते हैं; संतान लड़का (XY) होगा या लड़की (XX), यह पूरी तरह से पिता के X या Y सिद्धांत पर प्रतिबंध लगाता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

एकसंकर संकरण में दृश्यरूप (फेनोटाइप) और जीनरूप (जीनोटाइप) अनुपातों को उलट देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

दृश्यरूप अनुपात सदैव 3 : 1 होता है (बाहरी दिखावट); जीन का अनुपात हमेशा 1: 2: 1 होता है (जीन संरचना: टीटी: टीटी: टीटी)।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

अर्जित लक्षणों (जैसे मांसपेशियों का विकास) को आनुवंशिक मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

जिम बिल्डर द्वारा निर्मित मांसपेशियां या दुर्घटना में कटी फिंगर अगली पीढ़ी में नहीं है क्योंकि वे कायिक कोयले में होते हैं, जनन नाखून (डीएनए) में नहीं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

द्विसंकर संकरण के अनुपात में 9:3:3:1 में नए पुनर्संयोजनों को न पहचानना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

9 (गोल-पीला) और 1 (झुर्रीदार-हरा) जनकीय लक्षण हैं; बीच के 3 (गोल-हरा) और 3 (झुर्रीदार-पीला) नए पुनर्संयोजन हैं जो स्वतंत्र अपव्यूहन से बने हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

समयुग्मजी (Homozygous) और विषमयुग्मजी (Heterozygous) के प्रतीक त्रुटिपूर्ण।

सही वैज्ञानिक तथ्य

समजी में दोनों अक्षर समान केस में होते हैं (टीटी या टीटी); विषमयुग्मजी में एक बड़ा और एक छोटा अक्षर होता है (Tt)।

मेंडल के आनुवंशिकी नियम एवं मानव में लिंग निर्धारण प्रवाह आरेख

आनुवंशिकी: एकसंकर संकरण एवं मानव में लिंग निर्धारण (Genetics & Sex Determination) मेंडल का एकसंकर संकरण (Monohybrid Cross) जनक पीढ़ी (P Generation): शुद्ध लंबा (TT) × शुद्ध बौना (tt) F1 पीढ़ी (प्रथम संतानीय): सभी संकर लंबे (Tt) — प्रभाविता का नियम F2 पीढ़ी (स्व-परागण Tt × Tt): पनेट वर्ग T t T TT शुद्ध लंबा Tt संकर लंबा t Tt संकर लंबा tt शुद्ध बौना दृश्यरूप: 3 लंबा : 1 बौना | जीनरूप: 1 TT : 2 Tt : 1 tt मानव में लिंग निर्धारण (Sex Determination) माता (स्त्री) 44 + XX पिता (पुरुष) 44 + XY अंड (केवल X) X (100%) शुक्राणु (X या Y) 50% X | 50% Y X अंड + X शुक्राणु XX मादा शिशु (लड़की) - 50% X अंड + Y शुक्राणु XY नर शिशु (लड़का) - 50% वैज्ञानिक सत्य: लिंग निर्धारण पिता के शुक्राणु (X/Y) पर निर्भर करता है, माता पर नहीं। प्रायिकता = 50% : 50%

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
आनुवंशिकता जनकों से संतति में लक्षणों का संचरण है; ग्रेगर जॉन मेंडल को आनुवंशिकी का जनक कहा जाता है।
मुख्य बिंदु 2
मेंडल ने उद्यान मटर (पिसम सैटिवम) का चयन 7 स्पष्ट विपर्यसी मिश्रण, द्विलिंगी पुष्प, सहज पर-परागण और छोटे जीवन चक्र के कारण किया।
मुख्य बिंदु 3
जीन डीएनए का क्रियात्मक खंड है; एक ही जीन के वैकल्पिक सिद्धांत को युग्मविकल्पी (एलेल्स) कहते हैं।
मुख्य बिंदु 4
प्रभावकारी लक्षण विषमयुग्मजी (Tt) में भी व्यक्ति होता है; अप्रभावी लक्षण केवल समयुग्मजी (tt) में संचार होता है।
मुख्य बिंदु 5
एकसंकर संकरण में F2 पीढ़ी का दृश्यरूप अनुपात 3 : 1 तथा जीनरूप अनुपात 1 : 2 : 1 होता है।
मुख्य बिंदु 6
प्रभाविता का नियम: विषमयुग्मजी में केवल एक कारक (प्रभावी) व्यक्त होता है।
मुख्य बिंदु 7
पृथक्करण का नियम: युग्मक बनते समय दोनों कारक पृथक हो जाते हैं; युग्मक सदैव शुद्ध होते हैं।
मुख्य बिंदु 8
द्विसंकर संकरण में दो लक्षणों का अध्ययन किया जाता है; F2 दृश्यरूप अनुपात 9 : 3 : 3 : 1 होता है।
मुख्य बिंदु 9
स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम: विभिन्न लक्षणों के युग्मविकल्पी एक-दूसरे से स्वतंत्र होकर नए संयोजन (गोल-हरा, झुर्रीदार-पीला) बनाते हैं।
मुख्य बिंदु 10
मानव में 23 जोड़े गए टुकड़े हैं (22 जोड़े गए ऑटोसोम + 1 जोड़े के टुकड़े XX/XY); लिंग निर्धारण पिता के X या Y डॉक्टर को अनुमति नहीं है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
1. मेंडल के एकसंकर संकरण में F2 जेनरेशन में प्राप्त शुद्ध लॉन्ग (TT) और संक्रान लॉन्ग (Tt) ओके का अनुपात क्या होता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: शुद्ध लांग (टीटी) और संकर लांग (टीटी) का अनुपात 1 : 2 होता है (कुल जीनरूप अनुपात 1 टीटी : 2 टीटी : 1 टीटी होता है)।
2
2. यदि एक पुरुष का रक्त समूह O है और एक महिला का रक्त समूह A है तथा उनकी पुत्री का रक्त समूह O है, तो क्या यह सूचना पर्याप्त है कि कौन-सा लक्षण प्रभावी है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: हां; क्योंकि पुत्री का रक्त समूह O (समयुग्मजी ii) है, मूलतः उसे एक जीन पिता से और एक जीन माता से मिला। इसका अर्थ है कि माता विषमयुग्मजी (IA i) है। यह सिद्ध होता है कि रक्त समूह ए, ओ प्रभावी है।
3
3. मेण्डल के किस नियम को "युग्मकों की शुद्धता का नियम" (युग्मकों की शुद्धता का नियम) भी कहा जाता है और क्यों?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: पृथक्करण के नियम (कानून का पृथक्करण) को; क्योंकि युग्मक निर्माण के समय दोनों युग्मविकल्पी अलग-अलग हो जाते हैं और प्रत्येक युग्मक में केवल एक ही कारक मिलता है, जिससे युग्मक कभी संश्लेषित नहीं होता।
4
4. मानव में अलिंग सेमेस्टर्स (ऑटोसोम्स) की संख्या कितनी होती है और इनके क्या कार्य हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: मानव में 22 जोड़े (कुल 44) अलिंग गुणसूत्र होते हैं; ये लिंग निर्धारण के अतिरिक्त शरीर के सभी सामान्य दैहिक लक्षणों (रंग, ऊँचाई, उपापचय आदि) को नियंत्रित करते हैं।
5
5. जीवनकाल में वजन कम होना या भाषा सीखना अगली पीढ़ी में क्यों स्थानांतरित नहीं होता?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: क्योंकि ये उपार्जित (अर्जित) लक्षण हैं जो केवल कायिक नक्षत्र में होते हैं; इनके जनन अणु (अंडानु/शुक्राणु) के डीएनए पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, मूलतः ये वंशावली नहीं होती।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
अभ्यास के लिए तैयार?

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कक्षा 10 Science & Technology (212) के सभी अध्याय

अध्याय 1: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में मापन (Measurement in Science & Tech) अध्याय 2: हमारे आस-पास के पदार्थ (Matter in Our Surroundings) अध्याय 3: परमाणु एवं अणु (Atom and Molecules) अध्याय 4: रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण (Chemical Reactions & Equations) अध्याय 5: परमाणु संरचना (Atomic Structure) अध्याय 6: तत्वों का आवर्त वर्गीकरण (Periodic Classification of Elements) अध्याय 7: रासायनिक आबंधन (Chemical Bonding) अध्याय 8: अम्ल, क्षारक और लवण (Acids, Bases and Salts) अध्याय 9: गति और उसका वर्णन (Motion and its Description) अध्याय 10: बल एवं गति (Force and Motion) अध्याय 11: गुरुत्वाकर्षण (Gravitation) अध्याय 12: ऊर्जा के स्रोत (Sources of Energy) अध्याय 13: कार्य एवं ऊर्जा (Work and Energy) अध्याय 14: ऊष्मीय ऊर्जा (Thermal Energy) अध्याय 15: प्रकाश ऊर्जा (Light Energy) अध्याय 16: विद्युत ऊर्जा (Electrical Energy) अध्याय 17: विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव (Magnetic Effects of Current) अध्याय 18: ध्वनि एवं संचार (Sound and Communication) अध्याय 19: सजीवों का वर्गीकरण (Classification of Living Organisms) अध्याय 20: पृथ्वी पर जीवन का इतिहास (History of Life on Earth) अध्याय 21: जीवन की इकाइयाँ: कोशिका एवं ऊतक (Cell and Tissues) अध्याय 22: जैव प्रक्रम-1: पोषण, वहन, श्वसन एवं उत्सर्जन (Life Processes - 1) अध्याय 23: जैव प्रक्रम-2: नियंत्रण एवं समन्वय (Control and Coordination) अध्याय 24: जैव प्रक्रम-3: जनन (Reproduction) अध्याय 25: आनुवंशिकता (Heredity) अध्याय 26: वायु एवं जल (Air and Water) अध्याय 27: धातु और अधातु (Metals and Non-metals) अध्याय 28: कार्बन और उसके यौगिक (Carbon and Its Compounds) अध्याय 29: प्राकृतिक पर्यावरण (Natural Environment) अध्याय 30: पर्यावरण पर मानवीय प्रभाव (Human Impact on Environment) अध्याय 31: खाद्य उत्पादन (Food Production) अध्याय 32: स्वास्थ्य एवं स्वच्छता (Health and Hygiene)

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