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NIOS • कक्षा X • Science & Technology (212) • अध्याय 9
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

गति और उसका वर्णन (Motion and its Description)

ब्रह्माण्ड में प्रत्येक वस्तु सतत गति में है। पृथ्वी अपनी धुरी पर स्थिर गति वाले सूर्य की किरणें बना रही है, रक्त हमारी धमनियों और शिराओं में दौड़ रही है, और वायु के अदृश्य पिंड निरंतर तीव्र वेग से टकरा रही हैं। सामान्य बोलचाल में जब किसी वस्तु की स्थिति समय के साथ बदलती है, तो हम कहते हैं कि वह वस्तु गति (मोशन) में है। भौतिक विज्ञान में गति की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह अपेक्षिक (सापेक्ष) होती है; एक प्रेक्षक के लिए कोई वस्तु स्थिर गति में हो सकती है जबकि दूसरे प्रेक्षक के लिए कोई वस्तु स्थिर गति में हो सकती है। उदाहरण के लिए, एक मोटरबाइक वाली रेलगाड़ी में बैठे यात्रियों के लिए उनकी सह-यात्री स्थिर होती है, लेकिन चलने वाले किनारे वाले व्यक्ति के लिए गाड़ी, यात्री और अंदर का सारा सामान वाहन होता है। किसी वस्तु की गति का वैज्ञानिक वैज्ञानिक विवरण देने के लिए एक निर्देश बिंदु या मूल बिंदु (संदर्भ बिंदु/उत्पत्ति) आवश्यक है। गति के अध्ययन में प्रारंभिक भौतिक राशियाँ हैं—दूरी (दूरी - आदिश राशि) तथा विस्थापन (विस्थापन - आदिश राशि)। जब कोई गतिशील वस्तु समान समय अंतरितों में समान दूरियां तय करती है, तो उसकी गति को एकसमान गति (यूनिफ़ॉर्म मोशन) कहा जाता है, जबकि असंतुलित दूरियां तय करने पर उसे असमान गति (नॉन-यूनिफ़ॉर्म मोशन) कहा जाता है। गति की गति को शामिल करने के लिए चाल (स्पीड) और दिशा चाल को वेग (वेग) कहा जाता है। वेग में समय के साथ परिवर्तन की दर को त्वरण (त्वरण) कहते हैं। गति का ग्राफ़िक ग्राफ़ की ढाल (ढलान) चाल** को अलग किया जाता है, जबकि वेग-समय ग्राफ़ की ढाल को और उसके चित्र का चित्र तय किया जाता है कुल दूरी/ढलान को चित्रित किया जाता है। सर आइज़क न्यूटन द्वारा प्रतिपादित गति के मूल तीन गुणनखंड ($v = u + at$, $s = ut + \frac{1}{2}at^2$, $v^2 = u^2 + 2as$) और एकसमान वृत्तीय गति (यूनिफ़ॉर्म सर्कुलर मोशन) इस अध्याय का केंद्रीय विषयवस्तु हैं। झारखंड अधिविद्य परिषद (एनआईओएस रांची कक्षा 9) बोर्ड परीक्षा में इस अध्याय का 6 से 8 अंकों का स्थायी अधिकार रहता है। दूरी और दूरी में अंतर, गति के गणक का ग्राफ़ निर्धारण, वेग-समय ग्राफ़ से दूरी की गणना, और दूरी और गति गणक पर आधारित गणितीय प्रश्न अलग-अलग अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं।

🏎️ क्या ऐसा संभव है कि आप 1000 किलोमीटर की तूफानी यात्रा करके घर लौटें, लेकिन विज्ञान की नजर में आपका विस्थापन शून्य (0) हो?

मान लीजिए कि आप अपनी सुपरकार में बैठते हैं और राँची से प्रस्थान करके हजारीबाग, बोकारो, धनबाद और जमशेदपुर का 1000 किलोमीटर लंबा चक्कर 120 किमी/घंटे की रफ्तार से काटकर शाम को ठीक अपने घर के गैराज में वापस गाड़ी पार्क कर देते हैं।

आपकी कार का ओडोमीटर (दूरी मापक यंत्र) चिल्ला-चिल्ला कर कहेगा कि आपने 1000 किलोमीटर की विशाल दूरी तय की है और आपका 80 लीटर पेट्रोल जल चुका है। परंतु जब भौतिक विज्ञान का एक वैज्ञानिक आपसे मिलने आएगा, तो वह मुस्कुराते हुए कहेगा—"आपने कोई विस्थापन नहीं किया, विज्ञान के नियमों के अनुसार आपका कुल विस्थापन शून्य (0 मीटर) है!"

यह कैसा विचित्र विरोधाभास है? 1000 किलोमीटर चलने के बाद भी विस्थापन शून्य कैसे हो सकता है? और जब एक धावक 400 मीटर के वृत्ताकार ट्रैक पर दौड़कर अपनी शुरुआती लाइन पर वापस आता है, तो उसकी चाल तो होती है परंतु उसका औसत वेग शून्य क्यों हो जाता है? आइए, गति, विस्थापन, वेग और त्वरण के इन अद्भुत भौतिक नियमों का पर्दाफाश करें!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

यह अध्याय आपकी वैज्ञानिक यात्रा एवं जीवन के लिए क्यों भिन्न है?

  1. NIOS बोर्ड परीक्षा में संख्याओं का राजा: गति के त्रिगुण गुणांक ($v = u + at$, $s = ut + \frac{1}{2}at^2$, $v^2 = u^2 + 2as$) पर 3 से 5 अंकों की संख्या प्रश्न 100% निश्चित होते हैं।
  2. कक्षा 11 भौतिकी (कीनेमेटिक्स - गतिकी) की जीवन रेखा: बारहवीं कक्षा की 'एक सीधी रेखा में गति' और 'एक समतल में गति' (प्रक्षेप्य गति, गतिकी) पूरी तरह से इसी अध्याय के सिद्धांतों पर आधारित है।
  3. दैनिक जीवन एवं वाहन सुरक्षा: स्पेक्ट्रम में स्पीडोमीटर और ओडोमीटर की रोशनी, आकस्मिक ब्रेक उपस्थिति पर अंकित की सुरक्षित दूरी (रुकने की दूरी), और सड़कों पर सुरक्षित घुमाव के वैज्ञानिक सिद्धांतों को स्थापित किया जाता है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • समय (दूसरा - s) और लंबाई/दूरी (मीटर - मी) के एसआई मात्रा।
  • सामान्य बीजीय समीकरणों को हल करने की क्षमता।
  • ग्राफ पेपर पर x-अक्ष और y-अक्ष पर बिंदुओं को आलेखित करने की समझ।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • दूरी (दूरी) और विखंडन (विस्थापन) में वैज्ञानिक अंतर स्पष्ट दूरी कर फ़ायदेमंद और शून्य एकांत का स्पेक्ट्रम का वर्णन कर फ़ायदेमंद।
  • चाल (गति) और वेग (वेग) के बीच आदिश एवं सदीश राशि के आधार पर विभेद कर लाभ।
  • औसत चाल एवं औसत वेग के संख्यात्मक प्रश्नों को हल कर सकेंगे।
  • एकसमान एवं सम्मिलित गति की परिभाषा देते हुए चिल्ला ($a = \frac{v - u}{t}$) की गणना कर दोषी।
  • दूरी-समय एवं वेग-समय ग्राफ की ढाल तथा क्षेत्रफल के भौतिक अर्थ का विश्लेषण कर सकेंगे।
  • गति के ग्राफ़िकीय विधि से चरणबद्ध निगमन (व्युत्पत्ति) कर लागत।
  • एकसमान वृत्तीय गति (यूनिफ़ॉर्म सर्कुलर मोशन) को तत्काल गति सिद्ध कर फ़िनिश और वेग ($v = \frac{2\pi r}{T}$) ज्ञात कर फ़ाइनी।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. गति का वर्णन: दूरी, विस्थापन, चा...
2 2. त्वरण (एक्सेलेरेशन) एवं गति का ग...
3 3. निगमन (व्युत्पत्ति)
4 4. एकसमान वृत्तीय गति (यूनिफ़ॉर्म स...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. गति का वर्णन: दूरी, विस्थापन, चाल एवं वेग

(क) दूरी (दूरी) बनाम गति (विस्थापन)

  • दूरी (दूरी): किसी गतिशील वस्तु द्वारा दिए गए समय अंतराल में तय किए गए वास्तविक पथ (मार्ग) की कुल लंबाई को दूरी कहते हैं। यह एक आदिश राशि (अदिश राशि) है (इसमें केवल परिमाण होता है, दिशा नहीं)। दूरी धनात्मक ($>0$) होती है, यह कभी भी शून्य या ऋणात्मक नहीं हो सकती। इसका SI माप मीटर (m) है।
  • विस्थापन (विस्थापन): किसी वस्तु की प्रारंभिक स्थिति और अंतिम स्थिति के बीच की न्यूनतम सरल-रेखीय दूरी को विस्थापन कहा जाता है। यह एक सादिश राशि (वेक्टर मात्रा) है (इसमें परिमाण के साथ-साथ दिशा भी निश्चित होती है)। धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य भी हो सकता है। इसका SI माप मीटर (m) है।
अति-महत्वपूर्ण नियम: किसी वस्तु द्वारा तय की गई दूरी हमेशा उसके माप के बराबर या उससे अधिक होती है ($ ext{दूरी} \ge | ext{विस्थापन}|$)। दूरी भी कभी भी देशभक्ति से कम नहीं हो सकती।

(ख) चाल (गति) बनाम वेग (वेग)

तुलना का बिंदु चाल (स्पीड) वेग (वेग)
परिभाषा वस्तु द्वारा एकांक समय में तय की गई दूरी को चाल कहते हैं ($ ext{चाल} = rac{ ext{दूरी}}{ ext{समय}}$). वास्तु द्वारा एकांक समय में हुए विस्फोट को वेग कहते हैं ($ ext{वेग} = rac{ ext{विस्थापन}}{ ext{समय}}$).
राशि की प्रकृति आदिश राशि (क्रमशः) सादिश राशि (परिमाण एवं दिशा दोनों)।
श्रृंग / मान सदैव धनात्मक होता है। धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य हो सकता है।
औसत मान सूत्र $$ ext{औसत चाल} = rac{ ext{कुल तय की गई दूरी}}{ ext{लिया गया कुल समय}}$$ $$ ext{औसत वेग} = rac{ ext{कुल विस्थापन}}{ ext{कुल समय}} = rac{u + v}{2}$$
SI मात्रा मीटर प्रति सेकंड ($ ext{m/s}$ या $ ext{m s}^{-1}$). मीटर प्रति सेकंड ($ ext{m/s}$ या $ ext{m s}^{-1}$).

2. त्वरण (एक्सेलेरेशन) एवं गति का ग्राफ़ निरूपण

(के) चित्रकार की वैज्ञानिक विचारधारा

किसी वस्तु के वेग में समय के साथ होने वाले परिवर्तन की दर को त्वरण (त्वरण) कहते हैं।

$$ ext{त्वरण } (a) = rac{ ext{अंतिम वेग } (v) - ext{प्रारंभिक वेग } (u)}{ ext{समय } (t)} \implies a = rac{v - u}{t}$$
  • त्वरण का SI मात्रक $ ext{m/s}^2$ (मीटर प्रति सेकंड वर्ग या $ ext{m s}^{-2}$) होता है। यह एक सादिश राशि है।
  • धनात्मक चमत्कार: यदि समय के साथ वस्तु का वेग बढ़ता है, तो धनात्मक चमत्कार होता है ($v > u$).
  • ऋणात्मक ऋणात्मक होता है ($v < u$)। इसे मंदन कहते हैं।
  • शुन्य किरणें: यदि वस्तु एकसमान वेग से सीधी रेखा में चल रही हो ($v = u$), तो शून्य किरण होती है।

(ख) गति का ग्राफ़िक निरूपण (ग्राफ़िकल प्रतिनिधित्व)

  1. दूरी-समय ग्राफ (दूरी-समय ग्राफ):
    • समय को $x$-अक्ष पर और दूरी को $y$-अक्ष पर क्रमबद्ध किया जाता है।
    • एकसमान चाल से गतिशील वस्तु का दूरी-समय ग्राफ़ एक सीधी सरल रेखा होता है।
    • स्वर्णिम नियम: दूरी-समय ग्राफ़ की ढलान (ढलान / ढलान) वस्तु की चाल को दर्शाया जाता है:
      $$ ext{ढाल} = rac{s_2 - s_1}{t_2 - t_1} = ext{चाल } (v)$$
  2. वेग-समय ग्राफ (वेग-समय ग्राफ):
    • समय को $x$-अक्ष पर तथा वेग को $y$-अक्ष पर स्थापित किया जाता है।
    • स्वर्णिम नियम 1: वेग-समय ग्राफ़ की ढीली वस्तु के त्वरण ($a$) को खोखला है:
      $$ ext{ढाल} = rac{v_2 - v_1}{t_2 - t_1} = ext{त्वरण } (a)$$
    • स्वर्णिम नियम 2: वेग-समय रेखाचित्र तथा समय अक्ष के बीच का क्षेत्रफल (ग्राफ़ के अंतर्गत क्षेत्र) वस्तु तय द्वारा निर्धारित कुल दूरी/अंतर ($s$) के बराबर होता है!

3. निगमन (व्युत्पत्ति)

द्वारा ग्राफ़ की गति विधि के तीन अंक

मान के साथ कोई आरंभिक वेग $u$ से एकसमान चित्र $a$ के प्रवेश द्वार की शुरुआत होती है और $t$ समय के बाद उसका अंतिम वेग $v$ हो जाता है। इस दौरान वह कुल दूरी $s$ तय करती है:

(1) प्रथम गुणांक: वेग-समय संबंध ($v = u + at$) का निगमन

वेग-समय ग्राफ़ से, $a = ext{रेखा AB की ढाल}$

$$a = rac{BC}{AC} = rac{v - u}{t}$$ $$at = v - u \implies \mathbf{v = u + at}$$

(2) द्वितीय क्रम: समय-स्थिति संबंध ($s = ut + rac{1}{2}at^2$) का निगमन

वस्तु $t$ समय में तय की गई दूरी $s = ext{समलंब OABD का क्षेत्रफल}$

$$s = ext{आयत OACD का क्षेत्रफल} + ext{त्रिभुज ABC का क्षेत्रफल}$$ $$s = (OA imes OD) + rac{1}{2}(AC imes BC)$$ यहाँ $OA = u$, $OD = AC = t$, तथा $BC = v - u = at$ (समीकरण 1 से) $$s = (u imes t) + rac{1}{2}(t imes at)$$ $$\mathbf{s = ut + rac{1}{2}at^2}$$

(3) तृतीय गुणांक: स्थिति-वेग संबंध ($v^2 = u^2 + 2as$) का निगमन

ताय की दूरी $s = ext{समलंब OABD का क्षेत्रफल} = rac{ ext{समानांतर भुजाओं का योग} imes ext{उनके बीच की दूरी}}{2}$

$$s = rac{(OA + BD) imes OD}{2} = rac{(u + v) imes t}{2}$$ प्रथम गुणांक से, $t = rac{v - u}{a}$। इसका मान रखें: $$s = rac{(v + u)}{2} imes rac{(v - u)}{a} = rac{v^2 - u^2}{2a}$$ $$2as = v^2 - u^2 \implies \mathbf{v^2 = u^2 + 2as}$$

4. एकसमान वृत्तीय गति (यूनिफ़ॉर्म सर्कुलर मोशन)

जब कोई वस्तु एक वृत्ताकार पथ पर एकसमान चाल (स्थिर गति) से चलती है, तो उसकी गति को एकसमान वृत्तीय गति कहा जाता है।

JAC बोर्ड का क्लासिक सिद्धांत प्रश्न: एकसमान वृत्तीय गति में चाल अचर (स्थिर) रहती है, फिर भी इसे त्वरित गति (त्वरित गति) क्यों कहा जाता है?
वैज्ञानिक कारण: वृत्त के प्रत्येक बिंदु पर गति की दिशा स्पर्श रेखा (स्पर्श रेखा) के अनुदिश निरंतर बनी रहती है। वेग एक सदीश राशि है, दिशा परिवर्तन के कारण वस्तु का वेग निरंतर परिवर्तन रहता है। वेग में निरंतर परिवर्तन के कारण इसमें एक पिरामिड पिरामिड एक दिशा में होता है जो हमेशा वृत्त के केंद्र की ओर होता है (इसे अभिकेंद्री त्वरण कहा जाता है)। मूलतः एकसमान वृत्तीय गति एक तत्काल गति है।

वृत्तान्तीय गति में चाल का सूत्र:
यदि $r$ त्रिचक्र के वृत्ताकार पथ का एक पूरा चक्कर वस्तु को $T$ समय लगता है, तो तय किया गया वृत्त का परिभ्रमण ($2\pi r$) होगा:

$$v = rac{ ext{तय की गई दूरी}}{ ext{समय}} = rac{2\pi r}{T}$$

दैनिक जीवन के उदाहरण: (1) सूर्य की परिक्रमा। (2) पृथ्वी के चारों ओर चंद्रमा या कृत्रिम उपग्रह की तस्वीरें। (3) घड़ी की सूइयों की नोक की गति।

महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र, अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

चाल का सूत्र
चाल (v) = दूरी (s) / समय (t); मात्रक: m/s
वेग का सूत्र
वेग (v) = विस्थापन / समय; मात्रक: m/s (सदिश)
औसत चाल सूत्र
v_avg = कुल दूरी / कुल समय
त्वरण का सूत्र
a = (v - u) / t; मात्रक: m/s²
गति का प्रथम समीकरण
v = u + at (वेग-समय संबंध)
गति का द्वितीय समीकरण
s = ut + (1/2)at² (स्थिति-समय संबंध)
गति का तृतीय समीकरण
v² = u² + 2as (स्थिति-वेग संबंध)
एकसमान वृत्तीय गति में चाल
v = (2πr) / T
km/h से m/s रूपांतरण
1 km/h = 5/18 m/s (18 km/h = 5 m/s)
m/s से km/h रूपांतरण
1 m/s = 18/5 km/h

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
जेएसी बोर्ड संख्यात्मक प्रश्न (3 अंक): एक किसान 10 मीटर भुजा वाले एक वर्गाकार खेत की सीमा 40 सेकंड में एक चक्कर लगाता है। 2 मिनट 20 सेकंड के बाद किसान के गणतंत्र का आकार क्या होगा?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

दिया गया है: वर्गाकार खेत की भुजा = $10\text{ m}$ खेत का कुल परिमाप (एक चक्कर की दूरी) = $4 \times 10 = 40\text{ m}$ एक चक्कर लगाने में लगा समय = $40\text{ s}$

कुल समय = 2 मिनट 20 सेकंड = $(2 \times 60) + 20 = 140\text{ s}$

चरण 1: 140 सेकंड में चक्करों की कुल संख्या:

$$\text{चक्करों की संख्या} = \frac{\text{कुल समय}}{\text{1 चक्कर का समय}} = \frac{140}{40} = 3.5\text{ चक्कर}$$

यानी किसान 3 पूरे चक्कर वाले क्षेत्र के ठीक विपरीत (तिरछे विपरीत) कोने पर पहुंच।

चरण 2: प्रारंभिक बिंदु A से अंतिम बिंदु C तक की सीधी दूरी: वर्ग = वर्ग का विकर्ण

$$\text{विकर्ण } AC = \sqrt{\text{भुजा}^2 + \text{भुजा}^2} = \sqrt{10^2 + 10^2} = \sqrt{200} = 10\sqrt{2}\text{ m}$$

$\sqrt{2} \approx 1.414$,

$$\text{विस्थापन} = 10 \times 1.414 = 14.14\text{ m}$$

मूल रूप से 2 मिनट 20 सेकंड बाद किसान के क्रांति का आयाम $14.14\text{ m}$ (या $10\sqrt{2}\text{ m}$) होगा।

उदाहरण 2
JAC बोर्ड संख्या प्रश्न (3 अंक): एक बस विश्राम से प्रारंभ होती है और 2 मिनट तक $0.1\text{ m/s}^2$ के एकसमान शिखर से यात्रा होती है। परिचालित किया गया: (ए) प्राप्त की गई चाल और (बी) की गई कुल दूरी।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

दिया गया है: विरामावस्था से चलन के कारण प्रारंभिक वेग ($u$) = $0\text{ m/s}$ किराया ($a$) = $0.1\text{ m/s}^2$ समय ($t$) = 2 मिनट = $2 \times 60 = 120\text{ s}$

(ए) प्राप्त अंतिम चाल ($v$): गति के प्रथम स्थान से:

$$v = u + at$$

$$v = 0 + (0.1 \times 120) = 12\text{ m/s}$$

मूल रूप से बस अंतिम चाल $12\text{ m/s}$ (अर्थात $12 \times \frac{18}{5} = 43.2\text{ km/h}$) द्वारा प्राप्त किया गया है।

(बी) तय की गई दूरी ($s$): गति के द्वितीय गुणांक से:

$$s = ut + \frac{1}{2}at^2$$

$$s = (0 \times 120) + \frac{1}{2} \times 0.1 \times (120)^2$$

$$s = 0 + 0.05 \times 14400 = 720\text{ m}$$

मूलतः बस द्वारा तय की गई कुल दूरी $720\text{ मीटर}$ है।

उदाहरण 3
जेएसी बोर्ड संख्यात्मक प्रश्न (3 अंक): एक रेलगाड़ी 90 किमी/घंटा की चाल से चल रही है। ब्रेक प्लांट जाने पर वह $-0.5\text{ m/s}^2$ का एकसमान ज्वालामुखी उत्पन्न होता है। रेलगाड़ी पुराने जमाने में आने से पहले कितनी दूरी तय करेगी?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

दिया गया है: प्रारंभिक वेग ($u$) = $90\text{ km/h} = 90 \times \frac{5}{18} = 25\text{ m/s}$ अंतिम वेग ($v$) = $0\text{ m/s}$ (अंतिम चरण में) किराया ($a$) = $-0.5\text{ m/s}^2$ (मंदन)

गति के तृतीय स्थान से:

$$v^2 = u^2 + 2as$$

$$0^2 = (25)^2 + 2(-0.5)s$$

$$0 = 625 - 1s \implies s = 625\text{ m}$$

मूलतः उदय से पूर्व रेलगाड़ी $625\text{ मीटर}$ की दूरी तय।

उदाहरण 4
विभेदन कीजिए (2 अंक): दूरी और विस्थापन में दो मूलभूत अंतर लिखिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
  1. दूरी किसी वस्तु द्वारा तय किए गए वास्तविक पथ की कुल लंबाई है, जबकि विस्थापन प्रारंभिक और अंतिम स्थिति के बीच की न्यूनतम सरल-रेखीय दूरी है।
  2. दूरी एक अदिश राशि है जो सदैव धनात्मक होती है, जबकि विस्थापन एक सदिश राशि है जिसका मान धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य हो सकता है।
उदाहरण 5
JAC बोर्ड विश्लेषणात्मक प्रश्न (3 अंक): एकसमान वृत्तीय गति से आप क्या समझते हैं? इसे तत्काल गति क्यों माना जाता है? सूत्र लिखें।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
जब कोई वस्तु एक निश्चित वृत्ताकार पथ पर अचर चाल से गति करती है, तो उसकी गति को 'एकसमान वृत्तीय गति' कहा जाता है। त्वरित गति होने का कारण: वृत्ताकार मार्ग के प्रत्येक बिंदु पर वस्तु की गति की दिशा लगातार कमजोर बनी रहती है। दिशा परिवर्तन से वेग निरंतर परिवर्तित होता है। चैरिटेबल वेग चेंज की दर में बढ़ोतरी होती है, मूल रूप से चाल अचर होती है यह एक त्वरित गति है। चाल का सूत्र: $v = \frac{2\pi r}{T}$ (जहाँ $r$ = वृत्त का चक्र, $T$ = 1 चक्कर का चक्र)।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

किमी/घंटा को सीधे पॉइंट्स में रखें बिना एम/एस में बदले।

सही वैज्ञानिक तथ्य

सावधान रहें! समय यदि सेकंड में और पंख $\text{m/s}^2$ में है, तो हमेशा $5/18$ से गुणा करके $\text{m/s}$ में चलें (उदा. 90 किमी/घंटा = $90 \times 5/18 = 25\text{ m/s}$)।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

विश्रामअवस्था (बाकी) से $v = 0$ मन लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

विरामावस्था से शुरू होने पर प्रारंभिक वेग $u = 0$ होता है; और ब्रेक लगाकर रुकने पर अंतिम वेग $v = 0$ होता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

दूरी-समय ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल निकाल लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

दूरी-समय ग्राफ का केवल ढाल (चाल) अर्थपूर्ण होता है। क्षेत्रफल केवल वेग-समय ग्राफ के नीचे का निकाला जाता है जो दूरी को दर्शाता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

विस्थापन को दूरी से अधिक मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

विस्थापन कभी भी दूरी से अधिक नहीं हो सकता। यह या तो दूरी के बराबर होगा (सरल रेखा में) या दूरी से कम होगा।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

मंदन (मंदबुद्धि) में धूर्त का मन धनात्मक रख देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

यदि गाड़ी में ब्रेक लग रहा है या वेग घट रहा है, तो त्वरण $a$ का मान सूत्र में अनिवार्य रूप से ऋणात्मक ($-a$) रखा जाना चाहिए।

वेग-समय ग्राफ एवं गति के गणक का ग्राफ़ निरूपण (वी-टी ग्राफ एवं व्युत्पत्ति)

एकसमान त्वरित गति का वेग-समय (v-t) ग्राफ NCERT / JAC Board Class 9 Science Chapter 7 वेग (v, m/s) → समय (t, सेकंड) → O u (A) B (v) C D (t) त्रिभुज = 1/2 at² आयत OACD = u × t गति के 3 समीकरण v = u + at s = ut + ½ at² v² = u² + 2as कुल क्षेत्रफल = दूरी (s) ढाल = त्वरण (a = BC/AC) • ढाल के नीचे का कुल क्षेत्रफल = तय की गई दूरी (s)

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
स्थिति में समय के साथ परिवर्तन गतिमान है; गति हमेशा सापेक्ष (सापेक्षिक) होती है।
मुख्य बिंदु 2
तय किए गए वास्तविक पथ की लंबाई दूरी (अदिश) है; प्रारंभिक व अंतिम बिंदु के बीच न्यूनतम दूरी विस्थापन (सदिश) है।
मुख्य बिंदु 3
विस्थापन शून्य, धनात्मक या ऋणात्मक हो सकता है, किंतु दूरी सदैव धनात्मक होती है।
मुख्य बिंदु 4
चाल = दूरी / समय (आदि); वेग = विरोध / समय (सादिश)। दोनों का एसआई क्वार्टक एम/एस है।
मुख्य बिंदु 5
वेग परिवर्तन की दर त्वरण कहलाती है: a = (v - u) / t; इसका मात्रक m/s² है।
मुख्य बिंदु 6
दूरी-समय ग्राफ की ढाल चाल को तथा वेग-समय ग्राफ की ढाल त्वरण को प्रदर्शित करती है।
मुख्य बिंदु 7
वेग-समय ग्राफ तथा समय अक्ष के बीच घिरा क्षेत्रफल तय की गई दूरी (विस्थापन) के बराबर होता है।
मुख्य बिंदु 8
एक समान त्वरित गति के 3 गुणांक: (1) v = u + at, (2) s = ut + 1/2 at², (3) v² = u² + 2as।
मुख्य बिंदु 9
एकसमान वृत्तीय गति में चाल अचर रहती है किंतु दिशा बदलने के कारण वेग निरंतर बदलता है, अतः यह त्वरित गति है।
मुख्य बिंदु 10
वृत्तीय गति में चाल सूत्र: v = 2πr / T।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
क्या किसी वस्तु का विस्थापन शून्य हो सकता है यदि उसने कुछ दूरी तय की हो? उदाहरण दीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: हाँ, बिल्कुल हो सकता है। जब कोई वस्तु जिस बिंदु से चलना शुरू करती है, घूम-फिर कर अंत में पुनः उसी प्रारंभिक बिंदु पर लौट आती है, तो तय की गई दूरी धनात्मक होती है किंतु न्यूनतम दूरी (विस्थापन) शून्य होता है (उदा. वृत्ताकार पथ पर एक पूरा चक्कर)।
2
एकसमान गति और असमान गति में क्या अंतर है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: यदि कोई वस्तु समान समय अंतरालों में समान दूरी तय करती है, तो उसकी गति "एकसमान गति" कहलाती है। यदि वह समान समय अंतरालों में भिन्न-भिन्न (असमान) दूरियां तय करती है, तो उसे "असमान गति" कहते हैं।
3
ऋणात्मक त्वरण को क्या कहते हैं? इसका एक व्यावहारिक उदाहरण दीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: ऋणग्रस्त गति को "मंदन" (मंदन या मंदी) कहा जाता है। उदाहरण: जब चलती हुई कार में ब्रेक का अनुमान लगाया जाता है, तो उसका वेग समय के साथ घटता है, जिससे मंदन उत्पन्न होता है।
4
वेग-समय ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल क्या प्रदर्शित करता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: वेग-समय ग्राफ तथा समय अक्ष के बीच घिरा कुल क्षेत्रफल वस्तु द्वारा उस समयावधि में तय की गई कुल दूरी (अथवा विस्थापन) को प्रदर्शित करता है।
5
72 किमी/घंटा की चाल मी/से. में बदली।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: 72 किमी/घंटा = 72 × (5/18) = 4 × 5 = 20 मी./से.
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
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कक्षा 10 Science & Technology (212) के सभी अध्याय

अध्याय 1: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में मापन (Measurement in Science & Tech) अध्याय 2: हमारे आस-पास के पदार्थ (Matter in Our Surroundings) अध्याय 3: परमाणु एवं अणु (Atom and Molecules) अध्याय 4: रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण (Chemical Reactions & Equations) अध्याय 5: परमाणु संरचना (Atomic Structure) अध्याय 6: तत्वों का आवर्त वर्गीकरण (Periodic Classification of Elements) अध्याय 7: रासायनिक आबंधन (Chemical Bonding) अध्याय 8: अम्ल, क्षारक और लवण (Acids, Bases and Salts) अध्याय 9: गति और उसका वर्णन (Motion and its Description) अध्याय 10: बल एवं गति (Force and Motion) अध्याय 11: गुरुत्वाकर्षण (Gravitation) अध्याय 12: ऊर्जा के स्रोत (Sources of Energy) अध्याय 13: कार्य एवं ऊर्जा (Work and Energy) अध्याय 14: ऊष्मीय ऊर्जा (Thermal Energy) अध्याय 15: प्रकाश ऊर्जा (Light Energy) अध्याय 16: विद्युत ऊर्जा (Electrical Energy) अध्याय 17: विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव (Magnetic Effects of Current) अध्याय 18: ध्वनि एवं संचार (Sound and Communication) अध्याय 19: सजीवों का वर्गीकरण (Classification of Living Organisms) अध्याय 20: पृथ्वी पर जीवन का इतिहास (History of Life on Earth) अध्याय 21: जीवन की इकाइयाँ: कोशिका एवं ऊतक (Cell and Tissues) अध्याय 22: जैव प्रक्रम-1: पोषण, वहन, श्वसन एवं उत्सर्जन (Life Processes - 1) अध्याय 23: जैव प्रक्रम-2: नियंत्रण एवं समन्वय (Control and Coordination) अध्याय 24: जैव प्रक्रम-3: जनन (Reproduction) अध्याय 25: आनुवंशिकता (Heredity) अध्याय 26: वायु एवं जल (Air and Water) अध्याय 27: धातु और अधातु (Metals and Non-metals) अध्याय 28: कार्बन और उसके यौगिक (Carbon and Its Compounds) अध्याय 29: प्राकृतिक पर्यावरण (Natural Environment) अध्याय 30: पर्यावरण पर मानवीय प्रभाव (Human Impact on Environment) अध्याय 31: खाद्य उत्पादन (Food Production) अध्याय 32: स्वास्थ्य एवं स्वच्छता (Health and Hygiene)

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