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NIOS • Class X • Science & Technology (212) • Ch 18
Estimated Time: 45 Mins
Study Progress: In Progress

Sound and Communication

दैनिक जीवन में हम अपने चारों ओर विभिन्न स्रोतों—जैसे मनुष्यों, पक्षियों, घंटियों, वाहनों, संगीत वाद्यों, रेडियो तथा टेलीविजन से अनगिनत प्रकार की ध्वनियाँ सुनते हैं। ध्वनि (Sound) ऊर्जा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण रूप है, जो हमारे कानों में श्रवण (सुनने) की संवेदना उत्पन्न करती है। जिस प्रकार प्रकाश हमें देखने में सहायता करता है, उसी प्रकार ध्वनि परस्पर संवाद, सूचना संप्रेषण तथा परिवेश को समझने का अनिवार्य माध्यम है। भौतिक विज्ञान के दृष्टिकोण से ध्वनि का उत्पादन सदैव किसी वस्तु के कंपन (Vibration) द्वारा होता है। जब कोई वस्तु कंपित होती है, तो वह अपने आस-पास के माध्यम (ठोस, द्रव या गैस) के कणों में विक्षोभ (Disturbance) उत्पन्न करती है। यह विक्षोभ माध्यम के कणों के दोलन के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान तक अनुदैर्ध्य यांत्रिक तरंगों (Longitudinal Mechanical Waves) के रूप में आगे बढ़ता है। ध्वनि संचरण के लिए एक भौतिक माध्यम की उपस्थिति अनिवार्य होती है—ध्वनि कभी भी निर्वात (Vacuum) में संचरित नहीं हो सकती। माध्यम में यह तरंग संपीडन (Compression - उच्च घनत्व व दाब क्षेत्र) तथा विरलन (Rarefaction - निम्न घनत्व व दाब क्षेत्र) की क्रमिक श्रृंखला के रूप में गमन करती है। इस अध्याय में हम ध्वनि तरंग के मूलभूत अभिलक्षणों—तरंगदैर्घ्य ($\lambda$), आवृत्ति ($\nu$), आवर्तकाल ($T$), आयाम ($A$) तथा तरंग वेग ($v = \nu \lambda$), ध्वनि के गुणों—तारत्व (Pitch), प्रबलता (Loudness) एवं गुणवत्ता (Timbre), ध्वनि के परावर्तन के नियमों, प्रतिध्वनि (Echo - स्पष्ट प्रतिध्वनि हेतु $17.2\text{ m}$ न्यूनतम दूरी), सभागारों में अनुरणन (Reverberation) तथा उसके नियंत्रण, श्रव्यता के परिसर ($20\text{ Hz}$ से $20,000\text{ Hz}$), पराध्वनि (Ultrasound) के क्रांतिकारी चिकित्सा व औद्योगिक अनुप्रयोगों (सोनार - SONAR, अल्ट्रासोनोग्राफी), तथा मानव कर्ण (Human Ear) की आंतरिक कार्यप्रणाली का विस्तृत व प्रामाणिक अध्ययन करेंगे। झारखंड अधिविद्य परिषद् (NIOS Class 9) बोर्ड परीक्षा में यह अध्याय 6 से 8 अंकों का अनिवार्य भार रखता है। ध्वनि संचरण हेतु माध्यम की अनिवार्यता (विद्युत घंटी प्रयोग), सिद्ध कीजिए $v = \nu \lambda$, स्पष्ट प्रतिध्वनि सुनने की शर्तें एवं संख्यात्मक प्रश्न, सोनार की कार्यप्रणाली, तथा मानव कर्ण के प्रमुख भागों पर सचित्र प्रश्न प्रतिवर्ष बोर्ड में पूछे जाते हैं।

🦇 चमगादड़ घने अंधेरे में बिना आंखें खोले भी बिजली के पतले तारों से टकराए बिना 50 किमी/घंटे की रफ्तार से कैसे उड़ लेता है?

घोर अंधेरी रात में जब आप अपनी ही हथेली नहीं देख सकते, तब चमगादड़ (Bat) गुफाओं और पेड़ों के झुरमुट में तूफानी गति से उड़ता है और हवा में उड़ते हुए नन्हें मच्छरों का सटीक शिकार कर लेता है!

वह अंधेरे में देखता कैसे है? क्या उसकी आँखों में नाइट विजन कैमरा लगा है? बिल्कुल नहीं! वास्तव में चमगादड़ उड़ते समय अपनी आँखों का उपयोग ही नहीं करता! वह अपने गले से अत्यधिक उच्च आवृत्ति वाली पराध्वनि तरंगें (Ultrasonic Waves - >20,000 Hz) उत्सर्जित करता है, जिन्हें मानव कान कभी नहीं सुन सकते। ये पराध्वनि तरंगें सामने उड़ रहे कीड़े या दीवार से टकराकर परावर्तित होती हैं। चमगादड़ अपने संवेदनशील कानों से इस प्रतिध्वनि को पकड़ता है और $0.001$ सेकंड में यह भांप लेता है कि शिकार कितनी दूरी पर, किस दिशा में और किस गति से उड़ रहा है!

प्रकृति की इस अद्भुत रडार प्रणाली को विज्ञान ने जब समझा, तो समुद्र की गहराइयों में डूबी पनडुब्बियों और टाइटैनिक के मलबे को खोजने वाला 'सोनार' (SONAR) यंत्र बना डाला! आइए, ध्वनि की उन तरंगों के वैज्ञानिक साम्राज्य का अन्वेषण करें जिन्हें हम सुनते भी हैं और जिन्हें हम सुन नहीं पाते!

Why This Chapter Matters

यह अध्याय आपकी शैक्षणिक यात्रा एवं जीवन के लिए क्यों निर्णायक है?

  1. NIOS बोर्ड परीक्षा में उच्च स्कोरिंग: तरंग सूत्र $v = \nu \lambda$ पर संख्यात्मक प्रश्न (2-3 अंक), प्रतिध्वनि व सोनार के आंकिक प्रश्न (3 अंक), तथा मानव कान की क्रियाविधि हर वर्ष बोर्ड में आते हैं।
  2. Class 11 & 12 Physics (Waves & Acoustics) का आधार: 11वीं कक्षा का 'Waves' (डॉप्लर प्रभाव, अप्रगामी तरंगें, विस्पंद / Beats) का संपूर्ण मूल आधार इसी अध्याय की संकल्पनाओं पर टिका है।
  3. चिकित्सा एवं आधुनिक प्रौद्योगिकी: अल्ट्रासाउंड स्कैनिंग (गर्भावस्था व आंतरिक अंगों की जांच), ईसीजी (Echocardiography), समुद्र की गहराई मापना, और सिनेमा हॉल व ऑडिटोरियम की ध्वनिक डिजाइनिंग (Acoustics) को समझना।

Before You Begin (Prerequisites)

  • आवर्तकाल और आवृत्ति की सामान्य समझ (घड़ी के लोलक की गति)।
  • चाल का मौलिक सूत्र (चाल = दूरी / समय)।
  • प्रकाश के परावर्तन के नियमों की आधारभूत जानकारी।

What You Will Learn (Core Objectives)

  • सिद्ध कर सकेंगे कि ध्वनि कंपित वस्तुओं द्वारा उत्पन्न होती है और इसके संचरण के लिए भौतिक माध्यम अनिवार्य है।
  • अनुदैर्ध्य (Longitudinal) और अनुप्रस्थ (Transverse) तरंगों में संपीडन और विरलन के आधार पर अंतर स्पष्ट कर सकेंगे।
  • ध्वनि तरंग के पांचों अभिलक्षणों (तरंगदैर्घ्य, आवृत्ति, आवर्तकाल, आयाम, वेग) को परिभाषित कर सूत्र $v = \nu \lambda$ का निगमन कर सकेंगे।
  • तारत्व (आवृत्ति पर निर्भर) और प्रबलता (आयाम पर निर्भर) के बीच का वैज्ञानिक अंतर समझा सकेंगे।
  • प्रतिध्वनि (Echo) की परिभाषा देते हुए सामान्य ताप पर परावर्तक सतह की न्यूनतम दूरी ($17.2\text{ m}$) की गणना कर सकेंगे।
  • अनुरणन (Reverberation) के कारणों और सिनेमा हॉलों में इसके निवारण के उपायों का विश्लेषण कर सकेंगे।
  • श्रव्य, अवश्रव्य (Infrasonic) और पराश्रव्य (Ultrasonic) ध्वनि के आवृत्ति परिसरों का वर्गीकरण कर सकेंगे।
  • सोनार (SONAR) की कार्यप्रणाली समझकर समुद्र की गहराई मापने के संख्यात्मक प्रश्नों को हल कर सकेंगे।

Chapter Roadmap & Progression

1 1. ध्वनि का उत्पादन, संचरण एवं माध्...
2 2. ध्वनि तरंग के अभिलक्षण एवं संबंध...
3 3. ध्वनि का परावर्तन, प्रतिध्वनि (E...
4 4. श्रव्यता का परिसर, पराध्वनि (Ult...

Complete Concept Guide (100% Curriculum Coverage)

1. ध्वनि का उत्पादन, संचरण एवं माध्यम की अनिवार्यता

(क) ध्वनि का उत्पादन (Production of Sound)

ध्वनि विभिन्न वस्तुओं के कंपन (Vibration - किसी वस्तु की अपनी माध्य स्थिति के इधर-उधर त्वरित गति) द्वारा उत्पन्न होती है। जब हम बोलते हैं, तो हमारे गले के वाक्-तंतुओं (Vocal Cords) में कंपन होता है; गिटार या सितार में तानित तार कंपित होते हैं; तबले में तानित झिल्ली और बाँसुरी में वायु स्तंभ के कंपन से ध्वनि उत्पन्न होती है।

(ख) ध्वनि संचरण हेतु माध्यम की अनिवार्यता (विद्युत घंटी प्रयोग)

ध्वनि एक यांत्रिक तरंग है। इसके संचरण के लिए ठोस, द्रव अथवा गैस जैसे भौतिक माध्यम की आवश्यकता अनिवार्य होती है। ध्वनि निर्वात (Vacuum) में गमन नहीं कर सकती।

प्रायोगिक सत्यापन (Bell Jar Experiment): एक कांच के बेलजार में एक विद्युत घंटी लटकाते हैं और बेलजार को वैक्यूम पंप (वायु निष्कासन पंप) से जोड़ते हैं। जब बेलजार में हवा भरी होती है और स्विच दबाया जाता है, तो घंटी की स्पष्ट और तेज आवाज बाहर सुनाई देती है। अब वैक्यूम पंप चलाकर बेलजार से हवा को धीरे-धीरे बाहर निकालना प्रारंभ करते हैं। जैसे-जैसे हवा कम होती जाती है, घंटी की आवाज धीमी होती चली जाती है, यद्यपि घंटी का हथौड़ा पहले की तरह ही घंटी पर बजता हुआ स्पष्ट दिखाई देता है। जब बेलजार के भीतर पूर्ण निर्वात (Vacuum) उत्पन्न हो जाता है, तो घंटी की आवाज पूर्णतः बंद हो जाती है। यह सिद्ध करता है कि ध्वनि संचरण के लिए माध्यम अनिवार्य है। (यही कारण है कि चंद्रमा पर वायुमंडल न होने के कारण अंतरिक्ष यात्री सीधे एक-दूसरे की आवाज नहीं सुन सकते और रेडियो तरंगों का उपयोग करते हैं)।

(ग) अनुदैर्ध्य तरंग के रूप में संचरण: संपीडन एवं विरलन

वायु में ध्वनि अनुदैर्ध्य तरंगों (Longitudinal Waves) के रूप में गमन करती है, जिसमें माध्यम के कण तरंग संचरण की दिशा के समानांतर आगे-पीछे दोलन करते हैं:

  • संपीडन (Compression - C): जब कंपित वस्तु आगे बढ़ती है, तो वह अपने सामने की वायु को धक्का देकर संपीड़ित करती है। इस उच्च घनत्व तथा उच्च दाब वाले क्षेत्र को संपीडन कहते हैं।
  • विरलन (Rarefaction - R): जब कंपित वस्तु पीछे हटती है, तो सामने एक निम्न दाब और निम्न घनत्व का क्षेत्र बन जाता है, जिसे विरलन कहते हैं।

2. ध्वनि तरंग के अभिलक्षण एवं संबंध $v = \nu \lambda$

किसी ध्वनि तरंग का पूर्ण वैज्ञानिक विवरण निम्नलिखित 5 अभिलक्षणों द्वारा दिया जाता है:

  1. तरंगदैर्घ्य (Wavelength - $\lambda$): दो क्रमागत संपीडनों (C) अथवा दो क्रमागत विरलनों (R) के बीच की दूरी को तरंगदैर्घ्य कहते हैं। इसका SI मात्रक मीटर (m) है।
  2. आवृत्ति (Frequency - $ u$ या $f$): एकांक समय (1 सेकंड) में उत्पन्न होने वाले कुल दोलनों या संपीडन-विरलन के जोड़ों की संख्या को आवृत्ति कहते हैं। इसका SI मात्रक हर्ट्ज़ (Hertz - Hz) है (1 Hz = 1 कंपन प्रति सेकंड)। हेनरिक हर्ट्ज़ के सम्मान में यह नाम रखा गया।
  3. आवर्तकाल (Time Period - $T$): माध्यम के किसी बिंदु द्वारा एक पूर्ण दोलन पूरा करने में लिए गए समय को आवर्तकाल कहते हैं। इसका SI मात्रक सेकंड (s) है।
    $$\mathbf{ u = rac{1}{T} \quad ext{अर्थात} \quad T = rac{1}{ u}}$$
  4. आयाम (Amplitude - $A$): माध्यम के कणों का उनकी मूल संतुलित (माध्य) स्थिति से दोनों ओर होने वाले अधिकतम विस्थापन को तरंग का आयाम कहते हैं। ध्वनि की प्रबलता (Loudness) आयाम के वर्ग के समानुपाती होती है ($L \propto A^2$)।
  5. तरंग वेग (Wave Velocity - $v$): तरंग द्वारा एकांक समय में तय की गई दूरी को तरंग वेग कहते हैं ($v = ext{दूरी} / ext{समय} = ext{m/s}$)।

तरंग चाल, आवृत्ति तथा तरंगदैर्घ्य में संबंध ($v = u \lambda$) का निगमन:

$$ ext{चाल } (v) = rac{ ext{तय की गई दूरी}}{ ext{लिया गया समय}} = rac{ ext{तरंगदैर्घ्य } (\lambda)}{ ext{आवर्तकाल } (T)}$$ $$v = \lambda imes \left( rac{1}{T} ight)$$ चूँकि $ rac{1}{T} = u$ (आवृत्ति), अतः मान रखने पर: $$\mathbf{v = u imes \lambda} \quad ( ext{तरंग चाल} = ext{आवृत्ति} imes ext{तरंगदैर्घ्य})$$
माध्यम (25°C पर) ध्वनि की चाल ($v$) भौतिक नियम
ठोस (उदा. एल्युमिनियम) $6420 ext{ m/s}$ (सर्वाधिक तीव्र) ध्वनि की चाल: ठोस > द्रव > गैस। माध्यम का घनत्व और प्रत्यास्थता जितनी अधिक होगी, ध्वनि का वेग उतना ही अधिक होगा। तापमान बढ़ाने पर भी ध्वनि की चाल बढ़ जाती है (वायु में 0°C पर $331 ext{ m/s}$ तथा 22°C पर $344 ext{ m/s}$)।
द्रव (समुद्री जल) $1531 ext{ m/s}$ (मध्यम)
गैस (वायु, 22°C पर) $344 ext{ m/s}$ (न्यूनतम)

3. ध्वनि का परावर्तन, प्रतिध्वनि (Echo) एवं अनुरणन (Reverberation)

(क) प्रतिध्वनि (Echo) एवं स्पष्ट प्रतिध्वनि की न्यूनतम दूरी

जब कोई ध्वनि किसी बड़े अवरोधक (जैसे ऊँची दीवार, पहाड़ या इमारत) से टकराकर परावर्तित होकर पुनः सुनाई देती है, तो इस परावर्तित ध्वनि को प्रतिध्वनि (Echo) कहते हैं।

स्पष्ट प्रतिध्वनि सुनने के लिए न्यूनतम दूरी ($17.2 ext{ m}$) की गणना:
हमारे मस्तिष्क में किसी भी ध्वनि की संवेदना लगभग $0.1 ext{ सेकंड} \ ( rac{1}{10} ext{ s})$ तक बनी रहती है (इसे श्रवण का निर्बंध / Persistence of Hearing कहते हैं)। अतः मूल ध्वनि और परावर्तित प्रतिध्वनि के बीच कम से कम $0.1 ext{ s}$ का समय अंतराल होना अनिवार्य है।
22°C पर वायु में ध्वनि की चाल $v = 344 ext{ m/s}$।
$0.1 ext{ s}$ में ध्वनि द्वारा तय की गई कुल दूरी (जाने और आने की दूरी = $2d$):
$$2d = ext{चाल } (v) imes ext{समय } (t) = 344 ext{ m/s} imes 0.1 ext{ s} = 34.4 ext{ m}$$ अतः श्रोता से परावर्तक सतह की न्यूनतम एकतरफा दूरी ($d$):
$$d = rac{34.4 ext{ m}}{2} = \mathbf{17.2 ext{ मीटर}}$$ अतः 22°C पर स्पष्ट प्रतिध्वनि सुनने के लिए परावर्तक तल की न्यूनतम दूरी कम से कम 17.2 मीटर होनी चाहिए।

(ख) अनुरणन (Reverberation) एवं इसका निवारण

किसी बड़े हॉल या सभागार में ध्वनि स्रोत के बंद हो जाने के बाद भी दीवारों, छत और फर्श से बार-बार होने वाले बहुल परावर्तनों के कारण ध्वनि का कुछ समय तक गूँजते रहना अनुरणन (Reverberation) कहलाता है। अत्यधिक अनुरणन के कारण वक्ता की आवाज अस्पष्ट और धुंधली हो जाती है।

अनुरणन को कम करने के व्यावहारिक उपाय:

  • सभागारों की छतों एवं दीवारों पर ध्वनि अवशोषक सामग्री (जैसे संपीड़ित फाइबर बोर्ड, थर्मोकोल, खुरदरा प्लास्टर) लगाना।
  • खिड़कियों और दरवाजों पर भारी पर्दे (Heavy Drapes) लटकाना।
  • फर्श पर मोटे कालीन (Carpets) बिछाना।
  • सीटों की गद्दियों को ध्वनि-अवशोषक पदार्थों से बनाना।

4. श्रव्यता का परिसर, पराध्वनि (Ultrasound) के अनुप्रयोग एवं सोनार (SONAR)

(क) श्रव्यता का परिसर (Range of Hearing)

  • श्रव्य ध्वनि (Audible Sound): सामान्य स्वस्थ मानव कान द्वारा सुनी जा सकने वाली ध्वनियों की आवृत्ति सीमा $20 ext{ Hz}$ से $20,000 ext{ Hz}$ ($20 ext{ kHz}$) तक होती है।
  • अवश्रव्य ध्वनि (Infrasonic Sound): $20 ext{ Hz}$ से कम आवृत्ति की ध्वनि। (उदा: राइनोसेरोस/गैंडा $5 ext{ Hz}$ की अवश्रव्य ध्वनि से संवाद करता है; व्हेल तथा हाथी अवश्रव्य तरंगें उत्पन्न करते हैं; भूकंप के मुख्य झटकों से पूर्व अवश्रव्य तरंगें निकलती हैं)।
  • पराध्वनि / पराश्रव्य (Ultrasonic Sound): $20,000 ext{ Hz}$ ($20 ext{ kHz}$) से अधिक आवृत्ति की ध्वनि। (उदा: चमगादड़, डॉल्फिन, चूहे और पोरपोइस पराध्वनि उत्पन्न व सुन सकते हैं)।

(ख) पराध्वनि (Ultrasound) के औद्योगिक व चिकित्सीय अनुप्रयोग

  1. धातु के ब्लॉकों में दरारों एवं दोषों का पता लगाना: भारी मशीनों और पुलों में धातु के भीतर छिपी अदृश्य दरारों की पहचान पराध्वनि के परावर्तन द्वारा बिना तोड़े की जाती है।
  2. इकोकार्डियोग्राफी (Echocardiography - ECG): हृदय के विभिन्न भागों से पराध्वनि तरंगों को परावर्तित कराकर हृदय का सजीव प्रतिबिंब प्राप्त किया जाता है।
  3. अल्ट्रासोनोग्राफी (USG): शरीर के आंतरिक अंगों (यकृत, पित्ताशय, गर्भाशय, वृक्क) में पथरी, ट्यूमर या भ्रूण की वृद्धि की जांच हेतु।
  4. गुर्दे की पथरी तोड़ना: पराध्वनि की उच्च ऊर्जा तरंगों द्वारा गुर्दे की पथरी को बारीक कणों में तोड़ दिया जाता है जो मूत्र के साथ बाहर निकल जाती है।

(ग) सोनार (SONAR - Sound Navigation and Ranging)

सोनार एक ऐसी तकनीक है जिसमें जल में स्थित पिंडों (जैसे पनडुब्बी, डूबे हुए जहाज, हिमखंड, समुद्र की गहराई) की दूरी, दिशा तथा चाल मापने के लिए पराध्वनि तरंगों का उपयोग किया जाता है।

इसमें जहाज की पेंदी में दो प्रमुख उपकरण लगे होते हैं: (1) प्रेषित्र (Transmitter): पराध्वनि तरंगें उत्पन्न करके समुद्र के तल की ओर भेजता है। (2) संसूचक (Detector): तल से टकराकर लौटने वाली परावर्तित तरंगों को ग्रहण करके उन्हें विद्युत संकेतों में बदलता है।

समुद्र की गहराई ($d$) का सूत्र:
यदि जल में पराध्वनि की चाल $v$ हो तथा प्रेषण से संसूचन तक लगा कुल समय $t$ हो:
$$ ext{कुल तय की गई दूरी} = 2d = v imes t \implies \mathbf{d = rac{v imes t}{2}}$$ (इस विधि को 'इको-रेंजिंग' / प्रतिध्वनि परासन कहते हैं)।

Key Formulas, Reactions & Definitions

तरंग चाल संबंध सूत्र
v = ν × λ (चाल = आवृत्ति × तरंगदैर्घ्य)
आवृत्ति एवं आवर्तकाल संबंध
ν = 1 / T अथवा T = 1 / ν
स्पष्ट प्रतिध्वनि की न्यूनतम दूरी
d = (v × t) / 2 = (344 × 0.1) / 2 = 17.2 m (22°C वायु में)
सोनार (SONAR) द्वारा गहराई
d = (v × t) / 2
मानव श्रव्यता परिसर
20 Hz से 20,000 Hz (20 kHz)
वायु में ध्वनि की चाल (22°C)
344 m/s (0°C पर 331 m/s)
अवश्रव्य ध्वनि आवृत्ति
< 20 Hz
पराध्वनि आवृत्ति
> 20,000 Hz (> 20 kHz)

Conceptual Solved Examples & Case Studies

Example 1
JAC बोर्ड संख्यात्मक प्रश्न (3 अंक): एक ध्वनि तरंग की आवृत्ति 2 kHz और उसकी तरंगदैर्घ्य 35 cm है। यह 1.5 km दूरी तय करने में कितना समय लेगी?
Step-by-Step Solution:

दिया गया है: आवृत्ति ($\nu$) = $2\text{ kHz} = 2000\text{ Hz}$ तरंगदैर्घ्य ($\lambda$) = $35\text{ cm} = \frac{35}{100}\text{ m} = 0.35\text{ m}$ तय की जाने वाली दूरी ($s$) = $1.5\text{ km} = 1500\text{ m}$

चरण 1: ध्वनि तरंग की चाल ($v$) ज्ञात करना:

$$v = \nu \times \lambda$$

$$v = 2000\text{ Hz} \times 0.35\text{ m} = 700\text{ m/s}$$

चरण 2: लिया गया समय ($t$) ज्ञात करना:

$$t = \frac{\text{दूरी } (s)}{\text{चाल } (v)}$$

$$t = \frac{1500\text{ m}}{700\text{ m/s}} = \frac{15}{7} \approx 2.14\text{ सेकंड}$$

अतः ध्वनि तरंग को $1.5\text{ km}$ दूरी तय करने में $2.14\text{ सेकंड}$ का समय लगेगा।

Example 2
JAC बोर्ड सोनार संख्यात्मक प्रश्न (3 अंक): एक पनडुब्बी से एक सोनार संकेत भेजा जाता है जो समुद्र तल की चट्टान से टकराकर 3.42 सेकंड के पश्चात संसूचित होता है। यदि समुद्री जल में ध्वनि की चाल 1531 m/s हो, तो पनडुब्बी से चट्टान की दूरी ज्ञात कीजिए।
Step-by-Step Solution:

दिया गया है: ध्वनि प्रेषण से संसूचन का कुल समय ($t$) = $3.42\text{ s}$ समुद्री जल में पराध्वनि की चाल ($v$) = $1531\text{ m/s}$

सूत्र: सोनार द्वारा तय की गई कुल दूरी = $2d = v \times t$

$$\text{दूरी } (d) = \frac{v \times t}{2}$$

$$d = \frac{1531\text{ m/s} \times 3.42\text{ s}}{2} = 1531 \times 1.71 = 2618.01\text{ m}$$

अतः पनडुब्बी से समुद्र तल की चट्टान की दूरी $2618\text{ मीटर}$ (अर्थात $2.62\text{ km}$) है।

Example 3
JAC बोर्ड विश्लेषणात्मक प्रश्न (3 अंक): अनुरणन क्या है? इसे किस प्रकार कम किया जा सकता है? कोई दो उपाय लिखिए।
Step-by-Step Solution:

किसी बड़े हॉल में ध्वनि स्रोत के बंद हो जाने के पश्चात भी दीवारों, छत और फर्श से बार-बार होने वाले बहुल परावर्तनों के कारण ध्वनि का कुछ समय तक गूँजते रहना अनुरणन (Reverberation) कहलाता है। अनुरणन कम करने के दो प्रमुख उपाय:

  1. हॉल की दीवारों एवं छतों पर ध्वनि अवशोषक सामग्री जैसे संपीड़ित फाइबर बोर्ड (Acoustic panels) या खुरदरा प्लास्टर लगाना।
  2. खिड़कियों पर भारी पर्दे लगाना तथा फर्श पर कालीन बिछाना ताकि ध्वनि ऊर्जा अवशोषित हो सके।
Example 4
विभेदन कीजिए (2 अंक): पराश्रव्य (पराध्वनि) और अवश्रव्य ध्वनि में अंतर स्पष्ट कीजिए। प्रत्येक का एक-एक उदाहरण दीजिए।
Step-by-Step Solution:
  • अवश्रव्य ध्वनि (Infrasonic): वह ध्वनि जिसकी आवृत्ति $20\text{ Hz}$ से कम होती है। इसे मानव कान नहीं सुन सकते। उदाहरण: गैंडा (Rhinoceros) $5\text{ Hz}$ की अवश्रव्य ध्वनि द्वारा संवाद करता है; भूकंपीय तरंगें।
  • पराश्रव्य ध्वनि (Ultrasonic): वह ध्वनि जिसकी आवृत्ति $20,000\text{ Hz}$ ($20\text{ kHz}$) से अधिक होती है। उदाहरण: चमगादड़ और डॉल्फिन पराध्वनि तरंगें उत्सर्जित करते हैं।
Example 5
कारण स्पष्ट कीजिए (2 अंक): आकाश में बिजली चमकने की कौंध पहले दिखाई देती है, जबकि बादलों की गड़गड़ाहट कुछ सेकंड बाद सुनाई देती है। क्यों?
Step-by-Step Solution:
क्योंकि वायु में प्रकाश की चाल अत्यंत तीव्र ($3 \times 10^8\text{ m/s}$ अर्थात 3 लाख किमी/सेकंड) होती है, जबकि वायु में ध्वनि की चाल मात्र लगभग $344\text{ m/s}$ होती है। प्रकाश की अत्यधिक तीव्र गति के कारण कौंध हमारी आँखों तक पलक झपकते ही पहुँच जाती है, जबकि उसी बिंदु पर उत्पन्न ध्वनि को हमारे कानों तक पहुँचने में कुछ सेकंड का समय लग जाता है।

Common Misconceptions & Examiner Traps

Common Misconception

सोनार या प्रतिध्वनि के प्रश्नों में 2 से भाग देना भूल जाना।

Scientific Reality & Correction

याद रखें: संकेत स्रोत से लक्ष्य तक जाता है और पुनः लौटता है, अतः कुल दूरी $2d = v \times t$ होती है। दूरी $d = (v \times t) / 2$ होगी।

Common Misconception

ध्वनि को निर्वात में गमन करने योग्य मान लेना।

Scientific Reality & Correction

प्रकाश निर्वात में चल सकता है, परंतु ध्वनि एक यांत्रिक तरंग है जो बिना भौतिक माध्यम के कभी संचरित नहीं हो सकती।

Common Misconception

kHz को सीधे संख्यात्मक गणना में रख देना।

Scientific Reality & Correction

1 kHz = 1000 Hz होता है। गणना से पूर्व आवृत्ति को सदैव हर्ट्ज़ (Hz) में बदलना अनिवार्य है।

Common Misconception

प्रबलता और तारत्व को एक ही समझना।

Scientific Reality & Correction

प्रबलता (Loudness) आयाम पर निर्भर करती है (ध्वनि तेज या धीमी); जबकि तारत्व (Pitch) आवृत्ति पर निर्भर करता है (ध्वनि तीखी/पतली या भारी/मोटी)।

Common Misconception

ध्वनि की चाल ठोस में सबसे कम मान लेना।

Scientific Reality & Correction

ध्वनि की चाल ठोसों में सर्वाधिक तीव्र (उदा. स्टील में ~5000 m/s), द्रवों में मध्यम, तथा गैसों में सबसे धीमी होती है।

ध्वनि तरंग के अभिलक्षण एवं सोनार कार्यप्रणाली (Sound Waves & SONAR Map)

ध्वनि तरंग के अभिलक्षण एवं सोनार (SONAR) कार्यप्रणाली NCERT / JAC Board Class 9 Science Chapter 11 ध्वनि तरंग का ग्राफीय निरूपण तरंगदैर्घ्य (λ) संपीडन (C) विरलन (R) आयाम (A) v = ν × λ श्रव्य परिसर: 20 Hz से 20,000 Hz प्रतिध्वनि न्यूनतम दूरी = 17.2 m सोनार (SONAR) कार्यप्रणाली जहाज (Ship) समुद्र तल (Sea Bed) प्रेषित तरंग परावर्तित तरंग d = (v × t) / 2 पराध्वनि द्वारा समुद्र की गहराई की माप ध्वनि = अनुदैर्ध्य तरंग • संचरण हेतु माध्यम अनिवार्य • चाल: ठोस > द्रव > गैस

Chapter Summary & 10 Key Takeaways

Takeaway 1
ध्वनि वस्तुओं के कंपन द्वारा उत्पन्न होती है तथा माध्यम के कणों के दोलन द्वारा आगे बढ़ती है।
Takeaway 2
ध्वनि एक अनुदैर्ध्य यांत्रिक तरंग है जिसके संचरण के लिए माध्यम (ठोस, द्रव, गैस) अनिवार्य है; यह निर्वात में गमन नहीं कर सकती।
Takeaway 3
तरंग चाल, आवृत्ति और तरंगदैर्घ्य में संबंध: v = ν × λ होता है।
Takeaway 4
ध्वनि की चाल ठोसों में सर्वाधिक, द्रवों में मध्यम तथा गैसों में सबसे कम होती है।
Takeaway 5
स्पष्ट प्रतिध्वनि सुनने के लिए मूल ध्वनि और परावर्तित ध्वनि के बीच कम से कम 0.1 s का समय तथा न्यूनतम 17.2 m की दूरी होनी चाहिए।
Takeaway 6
सभागारों में ध्वनि का बार-बार परावर्तित होकर गूँजते रहना अनुरणन (Reverberation) कहलाता है।
Takeaway 7
मानव कान 20 Hz से 20,000 Hz की आवृत्ति सुन सकता है; <20 Hz अवश्रव्य तथा >20,000 Hz पराश्रव्य ध्वनि है।
Takeaway 8
पराध्वनि का उपयोग आंतरिक दरारों की पहचान, ईसीजी, अल्ट्रासोनोग्राफी एवं पथरी तोड़ने में होता है।
Takeaway 9
सोनार (SONAR) द्वारा समुद्र की गहराई तथा जलमग्न वस्तुओं की दूरी d = (v × t) / 2 सूत्र से मापी जाती है।

Check Your Understanding (Diagnostic Practice Questions)

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1
ध्वनि तरंगों को यांत्रिक तरंगें क्यों कहते हैं?
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Answer: क्योंकि ध्वनि तरंगों के संचरण के लिए माध्यम के भौतिक कणों के परस्पर संपर्क व दोलन की आवश्यकता होती है और यह निर्वात में नहीं चल सकती।
2
स्पष्ट प्रतिध्वनि सुनने के लिए परावर्तक सतह की न्यूनतम दूरी 17.2 मीटर क्यों होनी चाहिए?
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Answer: क्योंकि मानव मस्तिष्क में श्रवण का निर्बंध 0.1 सेकंड तक रहता है। 22°C पर वायु में ध्वनि की चाल 344 m/s होती है, अतः 0.1 s में तय कुल दूरी 34.4 m होती है। एकतरफा न्यूनतम दूरी 34.4 / 2 = 17.2 m होनी चाहिए।
3
तारत्व (Pitch) और प्रबलता (Loudness) में क्या अंतर है?
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Answer: तारत्व ध्वनि की आवृत्ति (Frequency) पर निर्भर करता है (ध्वनि का पतला या भारी होना), जबकि प्रबलता ध्वनि तरंग के आयाम (Amplitude) पर निर्भर करती है (ध्वनि का मंद या तेज होना)।
4
सोनार (SONAR) का पूरा नाम क्या है? यह किस सिद्धांत पर कार्य करता है?
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Answer: SONAR का पूरा नाम Sound Navigation and Ranging है। यह पराध्वनि तरंगों के प्रतिध्वनि परासन (Echo-ranging) के सिद्धांत पर कार्य करता है।
5
चमगादड़ अपना शिकार पकड़ने के लिए किस प्रकार की ध्वनि का उपयोग करता है?
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Answer: चमगादड़ 20,000 Hz से अधिक आवृत्ति वाली "पराध्वनि तरंगों" (Ultrasonic Waves) का उपयोग करके प्रतिध्वनि द्वारा शिकार की स्थिति और दूरी का पता लगाता है।
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