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NIOS • कक्षा X • Social Science (213) • अध्याय 12
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

भारत में कृषि (Agriculture in India)

भारत में कृषि (भारत में कृषि) के लिए व्यापक अध्ययन सामग्री और अध्याय नोट्स, एनआईओएस माध्यमिक (कक्षा 10) सामाजिक विज्ञान (213) के लिए व्यवस्थित रूप से तैयार किए गए। नवीनतम नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग पाठ्यक्रम के अनुरूप, यह गाइड मुख्य सैद्धांतिक अवधारणाओं, ऐतिहासिक कालक्रम, भौगोलिक विश्लेषण, संवैधानिक सिद्धांतों, ट्यूटर मार्क्ड असाइनमेंट (टीएमए) दिशानिर्देशों और सार्वजनिक परीक्षा में महारत पर जोर देती है।

जब बिना एक भी गोली चले, हजारों एकड़ जमीन गरीबों में बंट गई!

18 अप्रैल 1951 आंध्र प्रदेश (अब तेलंगाना) के पोचमपल्ली गांव में महात्मा गांधी के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी विनोबा भावे क्षेत्र। वहां 80 भूमिहीन हरिजनों ने अपने गुजरात के लिए 80 ओक भूमि को निःशुल्क रखा। विनोबा जी अभी सोच ही रहे थे कि सभा में एक जमींदोज श्री रामचन्द्र रेड्डी उठे और उन्होंने अपनी 80वीं मंजिल पर भूमि दान करने की घोषणा की! तुलना से जन्म हुआ इतिहास का सबसे अनोखा 'भूदान-ग्रामदान' आंदोलन का, जिसे इतिहासकारों ने 'रक्तहीन क्रांति' (रक्तहीन क्रांति) कहा है। आइए जानते हैं कि रसोईघर में भारतीय अन्नदाता की पूरी कहानी क्या है।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

एनआईओएस एवं एनआईओएस 10वीं बोर्ड परीक्षा में 'कृषि' भूगोल का सर्वाधिक प्रश्न-प्रदाता और उच्च अंक-भार वाला अध्याय है। प्रारंभिक जीविका निर्वाह (झूम) कृषि के विभिन्न राज्यों में स्थानीय नाम, रबी व रसायन की तुलना, चावल एवं मिट्टी के भौगोलिक दशाएं (तापमान, वर्षा, मिट्टी, शीर्ष उत्पादक राज्य), टमाटर कृषि की विशेषताएं, कृषि आधारित कृषि एवं प्रौद्योगिकी सुधार (केसीसी, एमएसपी, फसल बीमा), तथा विनोबा भावे के 'भूदान-ग्रामदान' पर 3 से 5 बिंदु के प्रश्न प्रमुख रूप से बताए गए हैं। मानचित्र कार्य (मानचित्र कार्य) में चावल, लकड़ी, चाय, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपास और जूट के सबसे बड़े उत्पादक राज्यों को चुनौती देने वाले प्रश्न 100% आते हैं।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • भारत की मानसूनी जलवायु (ग्रीष्मकालीन दक्षिण-पश्चिम मानसून और शीतकालीन पश्चिमी विक्षोभ) की समझ।
  • जलोढ़, काली, लाल और लैटेराइट मृदाओं की मूल विशेषताओं से परिचय।
  • अनाज (खाद्य फसलें) और अनाज/व्यापारिक बीज (नकदी फसलें) का सामान्य अर्थ।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • प्रारंभिक जीविका निर्वाह (झूम), गहन जीविका और वाणिज्यिक/रोपण कृषि की विशेषताओं और कार्यपद्धति में अंतर स्पष्ट करना।
  • रबी, खरीफ और जायद शस्य प्रारूपों के बुवाई-कटाई के समय, मुख्य फसलों और जलवायु परिस्थितियों का विश्लेषण करना।
  • भारत की मुख्य फसलों (चावल, गेहूं, मोटे अनाज, दालें, गन्ना, चाय, कॉफी, कपास, जूट) की भौगोलिक आवश्यकताओं और राज्यवार वितरण की व्याख्या करना।
  • स्वतंत्रता के बाद कृषि के विकास के सिद्धांत को लागू किया गया चिप्स (जमींदारी सीमेंट, चकबंदी) और प्रौद्योगिकी (हरिता क्रांति, केसीसी, एमएसपी) सुधारों का आकलन।
  • विनोबा भावे द्वारा संचालित 'भूदान-ग्रामदान आंदोलन' (रक्तहीन क्रांति) और भारतीय कृषि पर वैश्वीकरण के प्रभावों का समालोचनात्मक परीक्षण करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. कृषि के प्रकार: प्रारंभिक जीविका...
2 2. भारत की फसल ऋतु (फसल ऋतु: रबी, फ...
3 3. भारत की प्रमुख फसलें: खाद्यान्न,...
4 4. अखाद्य, नकदी एवं रेशेदार फसलें:...
5 5. संस्थागत व तकनीकी सुधार एवं भूदा...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. कृषि के प्रकार: प्रारंभिक जीविका, गहन जीविका एवं वाणिज्यिक कृषि

1.1 प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि (झूम अथवा कर्तन-दहन प्रणाली)

यह कृषि भूमि के छोटे टुकड़ों पर आदिम औजारों (जैसे लकड़ी के हल, डाओ और खुदाई करने वाली छड़ी) तथा पारिवारिक या सामुदायिक श्रम की सहायता से की जाती है:

  • कर्तन एवं दहन प्रणाली (Slash and Burn): किसान जंगल के एक छोटे हिस्से की वनस्पति को काटकर साफ करते हैं और फिर उसे जला देते हैं। राख को मिट्टी में मिला दिया जाता है और उस पर फसलें उगाई जाती हैं। जब मिट्टी की उर्वरता कम हो जाती है, तो किसान उस जमीन को छोड़ देते हैं और किसी दूसरे नए भूखंड को साफ करते हैं।
  • विशेषताएं: यह पूरी तरह मानसून, मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता और पर्यावरण पर निर्भर होती है। इसमें रासायनिक खादों या आधुनिक उपकरणों का प्रयोग नहीं होता; अतः उत्पादकता बहुत कम होती है।

झूम कृषि के विभिन्न स्थानीय व वैश्विक नाम (बोर्ड परीक्षा हेतु अति-महत्वपूर्ण):

क्षेत्र / राज्य / देशस्थानीय नाम
पूर्वोत्तर राज्य (असम, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड)झूम (Jhumming)
मध्य प्रदेशबेवर (Bewar) या दहिया (Dahiya)
आंध्र प्रदेशपोडू (Podu) या पेंडा (Penda)
ओडिशापामा डाबी (Pama Dabi), कोमान या बरिंगा
पश्चिमी घाटकुमारी (Kumari)
दक्षिण-पूर्वी राजस्थानवालरे (Valre) या वाल्टरे
हिमालयी क्षेत्रखिल (Khil)
झारखंडकुरुवा (Kuruwa)
बस्तर (छत्तीसगढ़) व अंडमान-निकोबारदीपा (Dipa)
मैक्सिको व मध्य अमेरिका (विश्व)मिल्पा (Milpa)
ब्राजील (दक्षिण अमेरिका)रोका (Roca)
मलेशिया व इंडोनेशिया (एशिया)लादांग (Ladang)

1.2 गहन जीविका कृषि (Intensive Subsistence Farming)

  • यह कृषि उन क्षेत्रों में की जाती है जहाँ भूमि पर जनसंख्या का दबाव अत्यधिक होता है।
  • यह श्रम-सघन (Labour intensive) कृषि है जहाँ सीमित भूमि से अधिकतम उत्पादन प्राप्त करने के लिए जैव-रासायनिक उर्वरकों और अत्यधिक सिंचाई का उपयोग किया जाता है।
  • भू-जोत का छोटा आकार: 'पीढ़ी-दर-पीढ़ी उत्तराधिकार के अधिकार' (Right of inheritance) के कारण खेतों का आकार निरंतर छोटा और अलाभकारी होता जा रहा है। किसान सीमित भूमि से ही पूरी जीविका चलाने के लिए बाध्य हैं।

1.3 वाणिज्यिक कृषि एवं रोपण कृषि (Commercial & Plantation Agriculture)

इस कृषि का मुख्य उद्देश्य फसल को बाजार में बेचकर भारी लाभ कमाना होता है। इसमें आधुनिक तकनीकों, अधिक उपज देने वाले प्रमाणित बीजों (HYV), रासायनिक खादों और कीटनाशकों का बड़े पैमाने पर प्रयोग किया जाता है।

रोपण कृषि (Plantation Agriculture) की मुख्य विशेषताएं:
1. यह एक प्रकार की वाणिज्यिक कृषि है जिसमें एक बहुत बड़े विस्तृत भूखंड पर केवल एक ही फसल (एकल फसल) उगाई जाती है।
2. यह उद्योग और कृषि के बीच का 'अंतरापृष्ठ' (Interface) है; यानी यहाँ पैदा होने वाली फसल उद्योगों के लिए कच्चा माल बनती है।
3. इसमें भारी मात्रा में पूंजी (Capital intensive) और प्रवासी श्रमिकों (Migrant labourers) की आवश्यकता होती है।
4. प्रमुख उदाहरण: चाय (असम व उत्तरी बंगाल), कॉफी (कर्नाटक की नीलगिरि पहाड़ियाँ), रबड़ (केरल), गन्ना, और केला (तमिलनाडु)।

2. भारत की फसल ऋतु (फसल ऋतु: रबी, फसल और जायद)

2.1 भारत की तीन शस्य ऋतुएँ

भारत में भौतिक विविधता और जलवायु चक्र के अनुसार तीन मुख्य फसल ऋतुएँ पाई जाती हैं:

§
शस्य ऋतुबुवाई का समयकटाई का समयप्रमुख फसलेंप्राकृतिक जलवायु एवं प्रमुख राज्य
रबी (रबी)शीत ऋतु में (अक्टूबर से) दिसंबर)ग्रीष्म ऋतु में (अप्रैल से जून)गेहूं, जौ, मटर, चना, सर्दीशीतकाल में पश्चिमी शीतोष्ण चक्रवात से वली वर्षा के लिए है. पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश। )धन (चावल), मक्का, ज्वार, बाजरा, अरहर (तूर), मूंग, उड़द, कपास, जूट, मूंगफली, सोयाबीनदक्षिण-पश्चिम एशिया की भारी वर्षा और उच्च तापमान। असम, प. बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र। (असम, प. बंगाल वयोवृद्ध में धान के 3 फ़सलें: औस, अमन और बोर ओगै जाती हैं।)
जायद (ज़ैद)रबी और आंध्र प्रदेश के मध्य ग्रीष्म ऋतु में (मार्च से) मई)मई से जूनतरबूज, खरबूजा, खेडा, सब्जी और चारे की फसलेंशुश्क व गर्म मौसम; सींच के अनमोल नदियों के खारों में उबई जाती हैं। (गन्ने की फ़सल को तैयार होने में लगभग एक साल लग रहा है).

3. भारत की प्रमुख फसलें: खाद्यान्न, मोटे अनाज एवं दालें

3.1 प्रमुख खाद्यान्न फसलें: चावल एवं गेहूं

तुलना का आधारचावल (Rice / धान) - खरीफ फसलगेहूं (Wheat) - रबी फसल
महत्वभारत के अधिकांश लोगों का मुख्य खाद्यान्न। भारत चीन के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है।भारत की दूसरी सबसे महत्वपूर्ण खाद्यान्न फसल जो उत्तर और उत्तर-पश्चिमी भागों का मुख्य भोजन है।
तापमानउच्च तापमान (25°C से अधिक) और उच्च आर्द्रता (नमी)।उगते समय ठंडी जलवायु और पकते समय खिली व तेज धूप की आवश्यकता।
वार्षिक वर्षा100 सेमी से अधिक वर्षा (कम वर्षा वाले क्षेत्रों में सिंचाई आवश्यक)।समान रूप से वितरित 50 से 75 सेमी वार्षिक वर्षा।
उपयुक्त मृदाचिकनी दोमट और जलोढ़ मृदा (जो पानी को रोक सके)।दोमट जलोढ़ मृदा तथा दक्कन की काली मिट्टी।
शीर्ष उत्पादक राज्यपश्चिम बंगाल (प्रथम), उत्तर प्रदेश, पंजाब, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, बिहार।उत्तर प्रदेश (प्रथम), पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार।

3.2 मोटे अनाज (Millets / पोषक अनाज)

ज्वार, बाजरा और रागी भारत में उगाए जाने वाले तीन प्रमुख मोटे अनाज हैं। इनमें पोषक तत्वों (आयरन, कैल्शियम, फाइबर) की प्रचुरता होती है:

  • ज्वार (Jowar): क्षेत्रफल और उत्पादन की दृष्टि से चावल और गेहूं के बाद देश की तीसरी सबसे महत्वपूर्ण खाद्य फसल है। यह मुख्यतः वर्षा-पोषित फसल है जिसे सिंचाई की बहुत कम आवश्यकता होती है। महाराष्ट्र ज्वार का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है, इसके बाद कर्नाटक, आ.प्र. और म.प्र. हैं।
  • बाजरा (Bajra): यह बलुई (रेतीली) मिट्टी और उथली काली मिट्टी पर अच्छी तरह उगाया जाता है। राजस्थान देश का सबसे बड़ा बाजरा उत्पादक राज्य है, इसके बाद उत्तर प्रदेश, गुजरात और हरियाणा हैं।
  • रागी (Ragi): यह शुष्क प्रदेशों की फसल है जो लाल, काली, बलुई और दोमट मिट्टी पर अच्छी तरह उगती है। इसमें प्रचुर मात्रा में आयरन, कैल्शियम और रफेज होता है। कर्नाटक रागी का सबसे बड़ा उत्पादक है, इसके बाद तमिलनाडु है।
  • मक्का (Maize): यह खाद्यान्न और चारा दोनों रूपों में प्रयुक्त होती है। यह खरीफ फसल है जिसके लिए 21°C से 27°C तापमान और पुरानी जलोढ़ मिट्टी अनुकूल होती है (बिहार में मक्का रबी ऋतु में भी उगाई जाती है)। कर्नाटक, म.प्र., यू.पी. अग्रणी हैं।

3.3 दालें (Pulses)

भारत विश्व में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक तथा सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है:

  • शाकाहारी भोजन में दालें प्रोटीन का सबसे प्रमुख स्रोत हैं। मुख्य दालें: तुअर (अरहर), उड़द, मूंग, मसूर, मटर और चना हैं।
  • फलीदार फसलें (Leguminous Crops): अरहर को छोड़कर अन्य सभी दालें हवा से नाइट्रोजन लेकर भूमि में स्थिर (Fix) करती हैं, जिससे मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता पुनः बहाल हो जाती है। इसलिए इन्हें प्रायः अन्य फसलों के साथ आवर्तन (Crop rotation) में बोया जाता है।
  • प्रमुख उत्पादक राज्य: मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक।

4. अखाद्य, नकदी एवं रेशेदार फसलें: गन्ना, चाय, कॉफी, कपास एवं जूट

4.1 गन्ना, तिलहन, चाय एवं कॉफी

फसल का नामभौगोलिक एवं जलवायु आवश्यकताएंविशेषताएं एवं शीर्ष उत्पादक राज्य
गन्ना (Sugarcane)उष्ण और उपोष्ण कटिबंधीय फसल; 21°C से 27°C तापमान और 75 से 100 सेमी वार्षिक वर्षा; गर्म व आर्द्र जलवायु।ब्राजील के बाद भारत गन्ने का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। चीनी, गुड़, खांडसारी का स्रोत। उत्तर प्रदेश (शीर्ष), महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु।
तिलहन (Oilseeds)देश के कुल बोए गए क्षेत्र के लगभग 12% भाग पर तिलहन उगाए जाते हैं। मुख्य तिलहन: मूंगफली, सरसों, नारियल, तिल, सोयाबीन, अरंडी, बिनौला, अलसी, सूरजमुखी।मूंगफली (Groundnut) खरीफ फसल है और कुल तिलहन उत्पादन का आधा हिस्सा है; गुजरात मूंगफली का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। (अरंडी का बीज खरीफ व रबी दोनों है)।
चाय (Tea)उष्ण व उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु; गहरी उपजाऊ ह्यूमस और जीवांश युक्त सुअपवाहित (Well-drained) ढलवां मिट्टी; वर्ष भर समान रूप से होने वाली हल्की बौछारें।महत्वपूर्ण पेय पदार्थ; रोपण कृषि; श्रम-सघन उद्योग (पत्तियां चुनने हेतु कुशल सस्ता श्रम)। असम (शीर्ष उत्पादक), पश्चिम बंगाल (दार्जिलिंग की चाय सुगंध हेतु विश्व विख्यात), तमिलनाडु, केरल।
कॉफी (Coffee)उष्ण व आर्द्र जलवायु, छायादार ढलान। भारत की 'अरेबिका' (Arabica) किस्म अपनी उत्तम गुणवत्ता के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है, जो मूल रूप से यमन से लाई गई थी।इसकी खेती की शुरुआत ऐतिहासिक रूप से बाबा बूदन की पहाड़ियों (कर्नाटक) पर हुई थी। आज भी इसकी खेती मुख्यतः नीलगिरि की पहाड़ियों (कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु) में केंद्रित है।

4.2 रेशेदार फसलें: कपास एवं जूट ('सुनहरा रेशा')

कपास (Cotton)

• भारत को कपास के पौधे का मूल स्थान माना जाता है। सूती वस्त्र उद्योग का मुख्य कच्चा माल।
• भौगोलिक दशाएं: दक्कन पठार की काली मृदा (Black Soil), उच्च तापमान, हल्की वर्षा या सिंचाई, 210 पाला-रहित दिन (Frost-free days) और खिली हुई तेज धूप।
• यह खरीफ फसल है जिसे पककर तैयार होने में 6 से 8 महीने लगते हैं।
• शीर्ष उत्पादक राज्य: गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, राजस्थान।

जूट (Jute) - 'सुनहरा रेशा' (Golden Fibre)

• जूट को अपनी चमक और मूल्यवान प्रकृति के कारण 'सुनहरा रेशा' (Golden Fibre) कहा जाता है।
• भौगोलिक दशाएं: बाढ़ के मैदानों में प्रतिवर्ष नवीकृत होने वाली उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी, उच्च तापमान और भारी वर्षा।
• उपयोग: गनी बैग्स (बोरियां), रस्सियां, चटाई, तंबू, कालीन और सजावटी सामान बनाने में।
• चुनौतियाँ: उच्च उत्पादन लागत और सिंथेटिक फाइबर (नायलॉन व प्लास्टिक पैकिंग) के सस्ते विकल्पों से कड़ी प्रतिस्पर्धा।
• शीर्ष उत्पादक राज्य: पश्चिम बंगाल (हुगली बेसिन), बिहार, असम, ओडिशा।

5. संस्थागत व तकनीकी सुधार एवं भूदान-ग्रामदान आंदोलन

5.1 स्वतंत्रता के अंतिम चरण और तकनीकी सुधार

कृषि में हजारों वर्षों से निरंतर लकड़ी के हल और पारंपरिक उपकरणों के उपयोग से अलग रखा गया था। इसे गति देने के लिए सरकार ने सुधार किया:

1.
• प्रथम पंचवर्षीय योजना में 'भूमि सुधार' (भूमि सुधार) को मुख्य लक्ष्य बनाया गया।
• जमींदारी का समावेश: बिचौलियों और मस्जिदों की व्यवस्था समाप्त कर जमीन का मालिकाना हक जोतने वाले व्यवसाय को दिया गया।
• चकबन्दी (जोत का समेकन): उत्तराधिकार के कारण प्रोत्साहन में बँधी बखरी हुई भूमि को एक स्थान पर एकजुटता चक बनाया गया।
• साहचर्य खेती (सहयोग) को बढ़ावा दिया गया।
2. तकनीकी एवं वित्तीय सुधार (तकनीकी सुधार):
• 1960 और 1970 के दशक में हरित क्रांति (हरित क्रांति) और श्वेत क्रांति (ऑपरेशन फ्लड) की शुरुआत; HYV बीज, रासायनिक बैंक और नहरी सीना। स्थापना
• किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और व्यक्तिगत मृत्यु बीमा योजना (PAIS) की शुरुआत।
• आकाशवाणी और दूरदर्शन पर किसानों के लिए विशेष कृषि योजनाएं और सीजन समाचारों का प्रसारण।
• बिचौलियों और किताबों से जुड़े शोध के लिए सरकार द्वारा दावा न्यूनतम। मूल्य (एमएसपी - न्यूनतम समर्थन मूल्य) की घोषणा।

5.2 विनोबा भावे का 'भूदान-ग्रामदान' आंदोलन (रक्तहीन क्रांति)

महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज और सर्वोदय संदेश के लिए जन-जन तक उनके प्रिय शिष्य संत विनोबा भावे पूरे देश में पदयात्रा शुरू की:§50

  • भूदान (भूदान): 1951 आंध्र प्रदेश (वर्तमान तेलांगना) के पोचम गांव में जब भूमिहीन भूमि ने 80 भूमि भूमि को बनाए रखा, तो स्थानीय धनी भूमि श्री रामदेव ने 80वीं सदी में भूमिहीन भूमि पर कब्जा कर लिया। दान कर दी. इसे 'भूदान' कहा गया है।
  • ग्रामदान (ग्रामदान): बाद में बड़े पैमाने पर कई जमींदारों ने अपने पूरे-के-पूरे गांव भूमिहीनों में क्रांति की नींव रखी, जिसे 'ग्रामदान' कहा गया। (काई जमींदारों ने भूमि-सीमा कानून से भागने के लिए भी जमीन दान की थी)।

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शब्दावली, कालक्रम एवं प्रशासनिक व्यवस्था

2/3 भारतीय आबादी
भारत की दो-तिहाई जनसंख्या प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से कृषि पर निर्भर।
झूम / कर्तन-दहन
आदिम जीविका कृषि; पूर्वोत्तर में झूम, म.प्र. में बेवर, झारखंड में कुरुवा।
चावल (चावल)
खरीफ; 25°C+ तापमान; 100 सेमी+ वर्षा; चिकनी जलोढ़ मृदा; प. बंगाल शीर्ष।
गेहूं (गेहूं)
रबी; 50-75 सेमी वर्षा; पकते समय खिली धूप; दोमट मृदा; उत्तर प्रदेश शीर्ष।
ज्वार (ज्वार)
देश की तीसरी मुख्य खाद्य फसल; वर्षा-पोषित; महाराष्ट्र शीर्ष उत्पादक।
बाजरा व रागी
बाजरा: बलुई मिट्टी (राजस्थान शीर्ष); रागी: आयरन व कैल्शियम समृद्ध (कर्नाटक शीर्ष)।
फलीदार दालें
वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कर मिट्टी की उर्वरता बहाल करने वाली फसलें।
अरेबिका कॉफी
यमन से लाई गई उच्च गुणवत्ता वाली किस्म; बाबा बूदन व नीलगिरि पहाड़ियों में उत्पादन।
कपास (कपास)
दक्कन की काली मिट्टी; 210 पाला-रहित दिन; खिली धूप; गुजरात शीर्ष।
सुनहरा रेशा (जूट)
बाढ़ मैदानों की जलोढ़ मिट्टी; बोरियां व रस्सियां; पश्चिम बंगाल शीर्ष।
KCC एवं एमएसपी
किसान क्रेडिट कार्ड (सस्ता ऋण) एवं न्यूनतम समर्थन मूल्य (मूल्य सुरक्षा)।
1951 पोचमपल्ली
विनोबा भावे का भूदान-ग्रामदान आंदोलन ('रक्तहीन क्रांति') प्रारंभ।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि (झूम कृषि) और गहन जीविका कृषि के मध्य प्रमुख अंतरों की तुलना कीजिए। (तालिका रूप में)
विस्तृत समाधान / उत्तर:
प्रारंभिक जीविका कृषि और गहन जीविका कृषि दोनों ही जीविका निर्मित के साधन हैं, लेकिन व्यावसायिक पद्धतियाँ और स्पेक्ट्रम में गहन अंतर है:

§पूर्वोत्तर भारत (असम, मिजोरम), मध्य प्रदेश, ओडिशा, झारखंड (कुरुवा)।
तुलना का आधारप्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि (झूम कृषि)घन जीविका कृषि (गहन) निर्वाह)
भूमि पर जनसंख्या दबावकम आर्थिक दबाव वाले पर्वत और वनच्छादित कृषि में की जाती है। है।
उपकरण प्रौद्योगिकीपारंपरिक और आदिम उपकरण (लकड़ी का हल, दाओ, खुरपी) और पारिवारिक श्रम।आधुनिक कृषि उपकरण, उन्नत बीज और जैव-रसायनिक मानक।
उर्वरकता का आधारपूरी तरह प्राकृतिक उर्वर्तता (जंगल साहित्य रचना से बनी राख) पर। वैकल्पिक।
खेतों का स्वरूपअस्थायी खेत (करतन-दहन); उर्वरता घटते ही किसान नए आसमां पर चले जाते हैं।स्थायी खेत; परंतु उत्तराधिकार के पुराने कारण जोतों का आकार बहुत छोटा होता है। है।
प्रमुख क्षेत्रउत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, पंजाब, हरियाणा, सागर डेल्टा।
उदाहरण 2
चावल और गेहूं भारत की दो प्रमुख खाद्यान्न फसलें हैं। इनकी भौगोलिक दशाओं (तापमान, वर्षा, मृदा और शीर्ष उत्पादक राज्य) की विस्तृत तुलना कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
चावल और मसाले भारत के खाद्य सुरक्षा के स्टोर हैं। ऑब्जेक्टिव ऑब्जेक्ट की तुलना निम्न है:

1. चावल (धान) की भौगोलिक दशाएं:
• फसल का प्रकार: यह मुख्य रूप से खरीफ फसल है जो जून-जुलाई में बोया और अक्टूबर में आती है।
• तापमान: इसके अलावा उच्च तापमान (25°C से) अधिक) और उच्च संरचना की आवश्यकता है।
• वार्षिक वर्षा: इसके लिए 100 सेमी से अधिक भारी वर्षा होनी चाहिए। कम वर्षा वाले क्षेत्र (जैसे कि पंजाब, हरियाणा) में इसे नहरी और बिजली संयंत्र द्वारा बनाया गया है। प्रदेश और बिहार。

2. गेहूं की भौगोलिक दशाएं:
• फसल का प्रकार: यह मुख्य रूप से रबी फसल है जो शीतकाल (अक्टूबर-दिसंबर) में बोया ग्रीष्मकाल (अप्रैल) में समाप्त होती है।
• तापमान: इसके लिए उगते समय उष्णकटिबंधीय तापमान (10°C से 15°C) और पकते समय खिली और तेज धूप (20°C से 25°C) की आवश्यकता होती है।
• वार्षिक वर्षा: इसके लिए समान रूप से पानी 50 से 75 सेमी वर्षा संयंत्र है। शीतकाल में पश्चिमी विक्षोभ से होने वाली भूमि वर्षा के लिए अमृत समान है। राजस्थान।
उदाहरण 3
तरबूज़ कृषि (वृक्षारोपण कृषि) की मुख्य विशेषताएं क्या हैं? भारत के दो प्रमुख सूक्ष्मदर्शी और उनके उत्पादक क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
रोपण कृषि की मुख्य विशेषताएं:
1. विशाल योग पर एकल वित्तीय: तरबूज़ कृषि एक प्रकार की बड़े पैमाने पर व्यावसायिक खेती है जिसमें एक बहुत बड़े बागान (विस्तारित क्षेत्र) पर केवल एक ही लागत पर एक ही लागत वाली व्यावसायिक खेती होती है।
2. कृषि और उद्योग का मिलन: यह उद्योग और कृषि के मध्य एक सेतु है। बैग में सामान रॉ माल सीधे स्टोर में प्रोसंस्कृत होता है (जैसे चाय की सब्जी, रबर का लेटेक्स)।
3. पूंजी और श्रमिक विज्ञान: इसमें आधुनिक वैज्ञानिक वैज्ञानिक, प्रबंधकीय कौशल, भारी निवेश और बड़ी संख्या में बहुमत वैयक्तिक बौद्ध धर्म की आवश्यकता होती है।
4. परिवहन तंत्र पर प्रवचन: बताया गया है कि सारा उत्पाद बाजार के लिए होता है, वास्तव में बागवानों को मजबूत और बंदरगाहों से जोड़ने के लिए विकसित परिवहन और संचार व्यवस्था आवश्यक है。

भारत के दो प्रमुख बाजार व्यवसाय:
1. चाय (चाय): यह एक महत्वपूर्ण पेय पदार्थ है। इसके लिए वर्ष भर में समान रूप से पोखरे बहारें और ढाँचे की मंजिल की भूमि मिलनी चाहिए। मुख्य क्षेत्र: असम, पश्चिम बंगाल (दार्जिलिंग और जलपाईगुड़ी के पहाड़ियां), तमिलनाडु और केरल।
2। कॉफी (Coffee): भारत में ओबाई जाने वाली यमन की 'अरेबिका' कॉफी विश्व प्रसिद्ध है। इसकी खेती मुख्यतः कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु की नीलगिरि शिखर (विशेष रूप से कर्नाटक के बाबा बूडन क्षेत्र) में होती है।
उदाहरण 4
स्वतंत्रता के पश्चात भारत सरकार द्वारा कृषि में किए गए प्रमुख 'संस्थागत' और 'तकनीकी' सुधारों का सविस्तार वर्णन कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारतीय कृषि अतिपिछड़ा और सामंती बंधनों में गुलामी हुई थी। इसके आधुनिकीकरण के लिए सरकार ने दो भागों में व्यापक सुधार किये:

1. संस्थागत सुधार (संस्थागत सुधार):
• जमींदारी उदाहरण: तीस से अधिक किसानों का ख्वाब वाली मध्यस्थों और जमीदारों की व्यवस्था को कानूनी रूप से समाप्त कर जोतने वाले ने भूमि का निर्माण किया। एक बड़ा चक बनाया गया ताकि आधुनिक जूटाई संभव हो सके। तकनीकी एवं वित्तीय सुधार (तकनीकी सुधार):
• हरित क्रांति: 1960 के दशक में उच्च वाले रसायन विज्ञान, रसायन विज्ञान और प्रौद्योगिकी सुधार (HYV), रासायनिक खादों, रसायनों और वैज्ञानिकों के प्रयोग से (विशेषकर प्रयोगशालाएं और चावल) उत्पादन में ऐतिहासिक वृद्धि हुई।
• किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) व फसल बीमा: केसीसी द्वारा किसानों के लिए 'फसल बीमा' की सुरक्षा दी गई है।
उदाहरण 5
संत विनोबा भावे द्वारा संचालित 'भूदान-ग्रामदान आंदोलन' को 'रक्तहीन क्रांति' क्यों कहा जाता है? इसके आरंभ और महत्व को स्पष्ट कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
आंदोलन का आरंभ:
महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपने को साकार करने के लिए उनके आध्यात्मिक उत्तराधिकारी संत विनोबा भावे ने पूरे भारत में पदयात्राएं कीं। 18 अप्रैल 1951 को जब वे आंध्र प्रदेश (अबतेलंगाना) के पोचम गांव द्वीप पहुंचे, तो वहां के 80 भूमि भूमिहीन दलित परिवारों ने अपनी जमीन की मांग की। यह इतिहास का पहला 'दान' था। (रक्तहीन क्रांति) कहे जाने का कारण:
विश्व इतिहास में जब भी भूमि का पुनर्निर्माण हुआ (जैसे रूस या चीन में), तब उसके बाद भयंकर खूनी संघर्ष, युद्ध और लाखों लोगों की हत्याएं ही संभव हुईं। लेकिन भारत में विनोबा भावे के नैतिक प्रभाव और अंतरात्मा की पुकार पर बिना एक भी लाठी चले, बिना किसी हिंसा या गोलीबारी के, और बिना किसी कानूनी बल के प्रयोग के जमीदारों ने लाखों भूमि निर्धनों को दान कर दिया। इसी कारण से इतिहासकारों ने इसे विश्व के इतिहास में 'रक्तहीन क्रांति' की संज्ञा दी है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

झूम कृषि को केवल भारत में प्रचलित आदिम कृषि समझना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

झूम कृषि (कर्तन-दहन प्रणाली) दुनिया के अनेक देशों में प्रचलित है; इसे मैक्सिको व मध्य अमेरिका में 'मिल्पा', ब्राजील में 'रोका' और मलेशिया में 'लादांग' कहा जाता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

गन्ना और मूंगफली को रबी फसल मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

गन्ना और मूंगफली दोनों मुख्य रूप से 'खरीफ फसलें' हैं जिन्हें मानसून के समय बोया जाता है। (गन्ने को तैयार होने में लगभग 1 वर्ष का समय लगता है)।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

दालों को मिट्टी की उर्वरता घटाने वाली फसल समझना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

अरहर को अन्य सभी दालें 'फलीदार' (फलियां) की फसलें नष्ट कर देती हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

भारत में कॉफी की सबसे पहली किस्म को रोबस्टा मानना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

भारत में सबसे पहले यमन से ले जाया गया था हाई कोटि की 'अरेबिका' (अरेबिका) अनाज की फुलावियों की शुरुआत कर्नाटक की बाबा बूडन चट्टानों से की गई थी।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

भूदान आंदोलन के पहले दानदाता का नाम विनोबा भावे लिख देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

विनोबा भावे आंदोलन के प्रणेता/नेता थे; पहले दानदाता पोचमपल्ली के जमींदार 'श्री रामचंद्र रेड्डी' थे जिन्होंने अपनी 80 एकड़ भूमि दान की थी।

भारतीय कृषि का समग्र स्वरूप: शस्य प्रारूप, मुख्य फसलें एवं संस्थागत सुधार

भारतीय कृषि: शस्य प्रारूप, मुख्य फसलें एवं संस्थागत सुधार1. शस्य प्रारूप (3 ऋतुएं)रबी, खरीफ व जायद• रबी (अक्टूबर - अप्रैल):गेहूं, जौ, चना, सरसों, मटर• खरीफ (जून - अक्टूबर):धान, मक्का, ज्वार, बाजरा,कपास, जूट, मूंगफली, सोयाबीन• जायद (मार्च - मई):तरबूज, खीरा, सब्जियां, चारा• झूम: कर्तन-दहन (झारखंड: कुरुवा)2. प्रमुख फसलें व राज्यखाद्यान्न व नकदी फसलें• चावल: प. बंगाल शीर्ष (100cm+ वर्षा)• गेहूं: उत्तर प्रदेश शीर्ष (50-75cm)• मोटे अनाज: ज्वार (महाराष्ट्र),बाजरा (राजस्थान), रागी (कर्नाटक)• दालें: फलीदार नाइट्रोजन स्थिरीकरण• रोपण: चाय (असम), अरेबिकाकॉफी (कर्नाटक की नीलगिरि)• कपास (गुजरात) व जूट (प. बंगाल)3. संस्थागत व तकनीकी सुधारहरित क्रांति व भूदान• जमींदारी उन्मूलन व चकबंदी• हरित क्रांति (HYV बीज, खाद)• श्वेत क्रांति (ऑपरेशन फ्लड)• किसान क्रेडिट कार्ड (KCC)• न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP)• 1951 भूदान - ग्रामदान आंदोलन:विनोबा भावे की 'रक्तहीन क्रांति'रामचंद्र रेड्डी द्वारा 80 एकड़ दानबोर्ड परीक्षा हेतु प्रमुख कृषि सूत्र (Golden Examination Capsule)कर्तन-दहन (झूम):पूर्वोत्तर में झूम; मध्य प्रदेश में बेवर; झारखंड में कुरुवा; मैक्सिको में मिल्पा।कपास बनाम जूट:कपास: काली मिट्टी (210 पाला-रहित दिन, गुजरात); जूट: 'सुनहरा रेशा' (प. बंगाल)।रक्तहीन क्रांति (1951):संत विनोबा भावे का भूदान-ग्रामदान आंदोलन; बिना हिंसा के भूमिहीनों को भूमि।

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
भारत की दो-तिहाई जनसंख्या कृषि पर निर्भर है जो खाद्यान्न के साथ-साथ उद्योगों के लिए कच्चा माल और निर्यात से विदेशी मुद्रा प्रदान करती है।
मुख्य बिंदु 2
प्रारंभिक जीविका निर्वाह (झूम या कर्तन-दहन) कृषि आदिम औजारों व वर्षा पर निर्भर होती है; इसे झारखंड में 'कुरुवा' और पूर्वोत्तर में 'झूम' कहते हैं।
मुख्य बिंदु 3
गहन जीविका कृषि उच्च जनसंख्या दबाव वाले क्षेत्रों में रासायनिक खादों व सिंचाई के सहारे छोटे भूखंडों पर की जाती है।
मुख्य बिंदु 4
रोपण कृषि एक प्रकार की बड़े पैमाने की पूंजी-सघन वाणिज्यिक कृषि है जिसमें एक बड़े क्षेत्र पर एकल फसल (चाय, कॉफी, रबड़) उगाई जाती है।
मुख्य बिंदु 5
भारत की तीन शस्य ऋतुएं हैं: रबी (शीतकाल - गेहूं, चना, सरसों), खरीफ (मानसून - धान, मक्का, कपास, जूट), और जायद (ग्रीष्मकाल - तरबूज, खीरा)।
मुख्य बिंदु 6
चावल देश का मुख्य खाद्य उत्पाद है (उच्च तापमान, 100 सेमी + वर्षा, प. बंगाल शीर्ष); दूसरा मुख्य खाद्य उत्पाद है (50-75 सेमी वर्षा, खिली धूप, उ.प्र. शीर्ष)।
मुख्य बिंदु 7
ज्वार, बाजरा और रागी पोषक तत्व अनाज (बाजरा) हैं; दलें फलीदार फलें हैं जो वायु सेना से लेकर मिट्टी की उर्वरता बहाल करते हैं।
मुख्य बिंदु 8
कपास दक्कन की काली मिट्टी में 210 पाला-रहित दिनों में पकती है; जूट को 'सुनहरा रेशा' कहा जाता है जिसका सबसे बड़ा उत्पादक पश्चिम बंगाल है।
मुख्य बिंदु 9
स्वतंत्रता के बाद जमींदारी असेंबलियों और चकबंदियों जैसे प्रोसेसर सुधार, और हरित क्रांति, केसीसी और एमएसपी जैसे तकनीकी-वित्तीय सुधार किए गए।
मुख्य बिंदु 10
1951 में पोचमपल्ली से संत विनोबा भावे द्वारा शुरू किया गया 'भूदान-ग्रामदान आंदोलन' विश्व की अनूठी 'रक्तहीन क्रांति' के रूप में विख्यात है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
कर्टन एवं दहन प्रणाली (स्लेश एंड बर्न) क्या है और इसे झारखंड और राज्य में किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: किसान जंगल के एक हिस्से को विच्छेदित और स्पष्ट रूप से साफ किया जाता है और राख मिली मिट्टी पर फसल उगते हैं। उर्वरता घटने पर वे दूसरे न्यूमैट्स पर चले जाते हैं। इसे झारखंड में 'कुरुवा' (कुरुवा) और सीमावर्ती राज्य में 'झूम' (झुमिंग) कहा जाता है।
2
चावल की खेती के लिए आवश्यक दो मुख्य भौगोलिक दशाओं और देश के सबसे बड़े उत्पादक राज्य का नाम लिखिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:
  1. 25°C से अधिक उच्च तापमान और उच्च आर्द्रता। 2. 100 सेमी से अधिक वार्षिक वर्षा (या उत्तम नहरी सिंचाई)। सबसे बड़ा उत्पादक राज्य पश्चिम बंगाल है।

3
किसानों के लिए दालों को फ़सल चक्र (फसल चक्र) में शामिल करना क्यों आवश्यक है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: क्योंकि अरहर को अन्य सभी दालें फलीदार (लेगुमिनस) की फसलें खत्म करने के लिए दिए गए हैं, जो कि प्रोटोटाइप में मौजूद राइजोबियम बैक्टीरिया मसालों को मिट्टी में स्थिर करके उनके प्राकृतिक उर्वरता को बिना खाद के स्वतः बहाल कर देते हैं।
4
कपास की खेती के लिए कौन सी मिट्टी सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है और इसके लिए कितने पाला-रहित दिनों की आवश्यकता होती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: कपास की खेती के लिए दक्कन के किसान की 'काली मिट्टी' (काली/रेगुर मिट्टी) सर्वोत्तम मानी जाती है। इसके आर्किटेक्चर को कम से कम 210 पाला-मुक्त दिन (ठंढ-मुक्त दिन) और खिली हुई तेज धूप की आवश्यकता होती है।
5
विनोबा भावे के 'भूदान-ग्रामदान आंदोलन' को 'रक्तहीन क्रांति' क्यों कहा गया?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: क्योंकि विश्व इतिहास में भूमि का पुनर्वितरण प्रायः हिंसक क्रांतियों और रक्तपात से हुआ था, जबकि भारत में बिना किसी हिंसा, गोलीबारी या कानून के दबाव के बड़े जमींदारों ने स्वेच्छा से अपनी लाखों एकड़ भूमि गरीबों को दान कर दी।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
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