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NIOS • कक्षा X • Social Science (213) • अध्याय 23
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

भारतीय लोकतंत्र की चुनौतियाँ (Challenges to Indian Democracy)

भारतीय लोकतंत्र की चुनौतियों के लिए व्यापक अध्ययन सामग्री और अध्याय नोट्स, एनआईओएस माध्यमिक (कक्षा 10) सामाजिक विज्ञान (213) के लिए व्यवस्थित रूप से तैयार किए गए। नवीनतम नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग पाठ्यक्रम के अनुरूप, यह गाइड मुख्य सैद्धांतिक अवधारणाओं, ऐतिहासिक कालक्रम, भौगोलिक विश्लेषण, संवैधानिक सिद्धांतों, ट्यूटर मार्क्ड असाइनमेंट (टीएमए) दिशानिर्देशों और सार्वजनिक परीक्षा में महारत पर जोर देती है।

यदि लोकतंत्र इतना ही महान है, तो हमारे देश में आज भी गरीबी, भ्रष्टाचार और धीमापन क्यों है?

हम अक्सर सुनते हैं कि किसी तानाशाही देश (जैसे चीन) में एक हफ्ते में 1000 किलोमीटर की बुलेट ट्रेन पटरी बिछ गई या 10 दिन में अस्पताल खड़ा हो गया, जबकि हमारे यहाँ एक फ्लाईओवर बनने में 5 साल लग जाते हैं और फाइलों में भ्रष्टाचार का खेल चलता है। तो क्या हमें लोकतंत्र को छोड़कर किसी फौजी तानाशाह का शासन ले आना चाहिए? बिल्कुल नहीं! क्योंकि तानाशाही में यदि राजा पागल या अत्याचारी निकल जाए, तो आपके पास केवल रोने और मरने का विकल्प होता है; जबकि लोकतंत्र में 5 साल बाद आप बड़े से बड़े अहंकारी प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री को एक वोट की चोट से गद्दी से उतारकर घर बैठा सकते हैं! आइए जानें कि लोकतंत्र धीमा होने के बावजूद दुनिया की सबसे बेहतरीन व्यवस्था क्यों है!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

एनआईओएस और एनआईओएस कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षा में 'लोकतंत्र के परिणाम' नागरिक शास्त्र का सबसे सिद्धांत और उच्च अंक-भार वाला अध्याय है। लोकतंत्र शासन प्रशासन (तानाशाही) से अन्य बेहतर क्यों है (5 कारण), लोकतंत्र, जिम्मेवार और वैध शासन की अवधारणा (पारिता का महत्व), आर्थिक संवर्द्धन और विकास के सिद्धांतों पर लोकतंत्र का वास्तविक रिकॉर्ड (50 के दशक), आर्थिक लोकतंत्र और लोकतंत्र के अभाव में लोकतंत्र के आंकड़े, सामाजिक मतभेदों के अर्थशास्त्र के दो अनिवार्य दावे (बहुमत अल्पसंख्यकों के साथ काम करे), और 'नागरिकों की विचारधारा' लोकतंत्र की सफलता का प्रमाण 'पर 3 से 5 सांख्यिकी के विश्लेषणात्मक प्रश्न से पूछो जाओ।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • लोकतंत्र, तानाशाही और राजशाही के अंतर की बुनियादी समझ।
  • मौलिक अधिकारों (समानता और स्वतंत्रता) की संवैधानिक अवधारणा।
  • वोट देने के अधिकार (सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार) का सामान्य ज्ञान।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • तानाशाही की तुलना में लोकतंत्र के नैतिक और संस्थागत श्रेष्ठता के पाँच बुनियादी आधारों का विश्लेषण करना।
  • ज़िम्मेदार (जवाबदेह), जिम्मेवार (उत्तरदायी) और वैलिड (वैध) शासन के रूप में लोकतंत्र का आकलन करना।
  • आर्थिक विकास, असमानता और गरीबी उन्मूलन के मोर्चे पर लोकतंत्र के वास्तविक प्रदर्शन की निष्पक्ष समीक्षा करना।
  • सामाजिक विविधताओं और अंतर्विरोधों के शांतिपूर्ण सामंजस्य की शर्तों का परीक्षण करना।
  • नागरिकों की गरिमा, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और हाशियाकृत समूहों (महिलाओं व दलितों) के सशक्तिकरण में लोकतंत्र की भूमिका को रेखांकित करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. लोकतंत्र के परिणामों का मूल्यांक...
2 2. जवाबदेह, जिम्मेवार और वैध शासन (...
3 3. आर्थिक संवृद्धि, विकास एवं असमान...
4 4. सामाजिक विविधता में सामंजस्य (सा...
5 5. नागरिकों की गरिमा और आजादी: लोकत...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. लोकतंत्र के परिणामों का मूल्यांकन: तानाशाही से श्रेष्ठता के पांच आधार

1.1 लोकतंत्र अन्य शासन व्यवस्था को बढ़ावा क्यों देता है?

तानाशाही, राजतंत्र या सैनिक शासन की तुलना में लोकतंत्र को सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि यह:

  1. नागरिकों में लोकतंत्र को बढ़ावा देता है: कानून के समान सभी समकक्ष हैं; 'एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य' का सिद्धांत अमीर और गरीब, अगड़े और पिछड़े को समान रूप से दर्शाता है। है: लोकतंत्र में जजमेंट किसी एक तानाशाह की सनक पर नहीं, बल्कि संसद में गहन विचार-विमर्श, बहस, विशेषज्ञ की सलाह और आम सहमति के लिए जाते हैं। इस तरह के गलत नमूने की संभावना न्यूनतम हो जाती है। डेमोक्रेटिक बातचीत, एकांत और सत्ता की भागीदारी के माध्यम से इन मराठों को सुलझाया जाता है। या फिर जनता अगले चुनाव में उस सरकार को ही बदल देगी! तानाशाही में यह कभी संभव नहीं होता। देता है।'
    समाधान: हमारी वियेटीज़ दवाएं ही इस कीटनाशक को जन्म देती हैं। हमें यह दावा करना होगा कि लोकतंत्र केवल शासन का एक स्वरूप (सरकार का रूप) है, कोई लाठी नहीं जो सभी सामाजिक, आर्थिक और ऐतिहासिक पहलुओं को एक अर्थ में हल कर दे। यह केवल ऐसी ही उपयुक्त दवा और नागरिक अधिकार उत्पन्न करता है, जो कि बैचलर लाभ समूह नागरिकों को स्वयं अपने लक्ष्य को प्राप्त करना होता है।

2. जवाबदेह, जिम्मेवार और वैध शासन (जवाबदेह, उत्तरदायी और वैध)

2.1 लोकतंत्र के तीन राजनीतिक नतीजे

परिणामअर्थ एवं आकलनतात्विक निष्कर्ष
1. उत्तरदायी सरकारलोकतंत्र में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि शासन करते हैं। सरकार अपने हर फैसले के लिए जनता और संसद के प्रति प्रतिक्रिया देती है। यदि सरकार जनता के हितों की अनदेखी करती है तो नागरिक अगले चुनाव में उसे उखाड़ फेंकते हैं। लोकतंत्र में निर्णय विचार-विमर्श के कारण वास्तव में स्थिर होते हैं, लेकिन अधिक प्रभावशाली, कमजोर और जनता को रोजगार मिलता है।
2। जिम्मेवार शासन (उत्तरदायी सरकार)एक डेमोक्रेटिक सरकार से यह विशेषता है कि वह आम जनता की प्रेमिका, बंधन और समर्थकों के प्रति संवेदनशीलता और तत्पर रहे, तथापि कार्यकर्ता से मुक्त हो जाते हैं। हैं।
3। वैध शासन (वैध सरकार)लोकतंत्र की सबसे मजबूत और संवैधानिक विशेषता यह है कि यह एक 'वैध शासन' (वैध सरकार) है। यह मध्यम, कम कुशल या घटिया घटिया हो सकता है, लेकिन यह 'जनता की अपनी नई हुई सरकार' (पीपुल्स ओन गवर्नमेंट) होती है।यही कारण है कि आज पूरे विश्व (और विशेष रूप से दक्षिण एशिया के भारत, बांग्लादेश, नेपाल, पाकिस्तान और पाकिस्तान) में जनता का प्रचंड बहुमत तानाशाही के लोकतांत्रिक शासकों का समर्थन है। है।

3. आर्थिक संवृद्धि, विकास एवं असमानता की कमी

3.1 आर्थिक संविधान और विकास का वास्तविक रिकॉर्ड

अगर हम 1950 से 2000 के बीच के 50 वर्षों के वैश्विक आर्थिक आंकड़ों का अध्ययन करें, तो याद रखें कि तानाशाही वाले यूरोप में आर्थिक संविधान लोकतंत्र की तुलना में कुछ बेहतर हो रहा है। परंतु केवल इस आधार पर लोकतंत्र को महत्व नहीं दिया जा सकता:

  • आर्थिक विकास के अन्य कारण: किसी भी देश के आर्थिक विकास को केवल उसकी शासन प्रणाली पर अनुमोदित नहीं किया जा सकता; बल्कि देशों के मानचित्र के आकार, वैश्विक आर्थिक स्थिति, अन्य देशों से सहयोग और देशों द्वारा अपनाई गई आर्थिक योजनाओं पर सिफारिश की जाती है। है।
  • अतः जब आर्थिक विकास के मामले में दोनों में कोई बड़ा अंतर नहीं है, तो हमें लोकतंत्र को ही महत्व देना चाहिए क्योंकि इसके साथ-साथ व्यक्ति की आजादी और सम्मान की भावना भी शामिल है। की स्थापना:
    लोकतंत्र राजनीतिक समानता (राजनीतिक समानता - एक व्यक्ति, एक वोट) तो स्थापित कर देता है, लेकिन यह समाज में समृद्ध ' आर्थिक असमानता' (आर्थिक असमानता) को आरक्षण में पूर्ण रूप से सफल नहीं पाया गया है:
    1. अति-अमीरों का विचरण: अति-अमीरों का पूरा देश अमीरों के देश के कुल राष्ट्रीय आय और संपदा के बहुत बड़े हिस्सों पर कब्जा कर लिया गया है और उनकी संपत्ति दिन-दूनी रात-चौगुनी बढ़ रही है。
    2. गरीबों की बर्थ डेशा: समाज के सबसे काहिलों पर रहने वाले गरीब गरीबों की बर्थ डेज जा रही है; उनके पास भोजन, कपड़ा, मकान, शिक्षा और समान स्वास्थ्य स्थापत्य कलाकारों को पूरा करने के भी साधन नहीं हैं。
    3. लोकतांत्रिक वास्तुशिल्प का चर्च: एकाधिकार गरीब लोकतंत्र में सबसे बड़ा वोट बैंक है और कोई भी पार्टी अपनी हिस्सेदारी खोना नहीं चाहती है, फिर भी लोकतांत्रिक रूप से समर्थित गरीबी के अवसरों को एकजुट और एकजुटता से लागू नहीं किया जा सकता है।

4. सामाजिक विविधता में सामंजस्य (सामाजिक विविधता का समायोजन)

4.1 लोकतंत्र सामाजिक मराठों को कैसे समर्थन मिलता है?

दुनिया का कोई भी ऐसा समाज नहीं है जहां विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और भाषाई विचारधारा के बीच समानता पूरी तरह से समाप्त हो गई हो। गैर-लोकतांत्रिक सरकार बार-बार इन समृद्ध समूहों से बाहर निकलती है, उन्हें दबाती है या दबाती है (जैसे कि श्रीलंका)। सामाजिक शांति की दो अनिवार्य शर्तें

तंत्र में सामाजिक शांति बनाए रखने की दो अनिवार्य शर्तें:
1. बहुमत को अल्पसंख्यकों के साथ मिलकर काम करना चाहिए: लोकतंत्र का अर्थ केवल बहुमत की राय नहीं है। बहुसंख्यक हमेशा अल्पसंख्यक समुदाय के हितों और विचारों का सम्मान करते हैं, उनके साथ सामूहिक समानता होती है, ताकि सरकार पूरे समाज के सामान्य दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व कर सके。
2. बहुमत का शासन किसी एक धर्म या जाति का शासन न बने: 'बहुमत के शासन' का अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि किसी एक धर्म (जैसे बौद्ध या हिंदू), एक भाषा (जैसे सिंहली) या एक जाति का स्थायी शासन स्थापित हो जाए। इसका अर्थ यह है कि प्रत्येक नागरिक को किसी भी चुनाव या नीतिगत निर्णय में 'बहुमत का हिस्सा बनने का अवसर' मिलना चाहिए। यदि जन्म के आधार पर किसी को बहुमत में आने से रोका जाता है, तो वहां लोकतंत्र समाप्त हो जाता है।

5. नागरिकों की गरिमा और आजादी: लोकतंत्र की अंतहीन परीक्षा

5.1 नागरिकों की गरिमा और स्वतंत्रता का अभिनंदन

व्यक्ति की गरिमा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा के मामले में दुनिया में किसी अन्य शासन व्यवस्था लोकतंत्र के समकक्ष नहीं रह सकती:

  • महिलाओं की गरिमा: विश्व भर में समाज ऐतिहासिक रूप से पुरुष-प्रधान के रूप में मौजूद हैं। महिलाओं के लंबे संघर्षों के बाद आज यह लोकतांत्रिक सिद्धांत स्थापित हो गया है कि महिलाओं के साथ समानता और सम्मान का व्यवहार एक सभ्य समाज की अनिवार्य शर्त है। लोकतंत्र में महिलाओं के पास यह अधिकार कानूनी और नैतिक आधार मौजूद है, जबकि तानाशाही में यह आधार ही नहीं होता है। आज यदि कोई उनके साथ जातिगत भेदभाव नहीं करता है, तो वे कानून और अदालत का सहारा ले सकते हैं। जैसे ही लोकतंत्र एक सामने परीक्षा पास करता है, जनता के पास दूसरी परीक्षा होती है। जब लोगों को लोकतंत्र से कुछ लाभ मिलता है, तो वे और अधिक वैभव की मांग करते हैं और शासन करते हैं और बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं。
    2. यही कारण है कि जब भी आप नागरिकों से पूछेंगे, तो वे हमेशा सरकार के कार्यों की कमियां और संगीत का अंबार लगा देंगे。
    3. सफलता का सबसे बड़ा पैमाना: नागरिकों का लोकतंत्र का अंबार चलना और असंतोष व्यक्त करना लोकतंत्र की विफलता नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी सफलता का प्रमाण है! इसमें कहा गया है कि नागरिक अब मूक, राजनीतिज्ञ और दारपोक 'प्रजा' नहीं रहे, बल्कि वे समर्थक, और राजनीतिज्ञों का आकलन करने वाले संप्रभु 'नागरिक' बन गए हैं!

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शब्दावली, कालक्रम एवं प्रशासनिक व्यवस्था

लोकतंत्र की 5 श्रेष्ठताएं
समानता, गरिमा, बेहतर फैसले, टकराव निवारण, गलतियों में सुधार की गुंजाइश।
वैध शासन (जवाबदेह)
संसद व जनता के प्रति जवाबदेह; नियमित व निष्पक्ष चुनाव द्वारा बदलाव की शक्ति।
पारदर्शिता (पारदर्शिता)
फैसले नियमों के तहत लिए गए या नहीं, यह जानने का नागरिक का कानूनी अधिकार।
वैध शासन (वैध)
जनता की अपनी चुनी हुई सरकार; धीमी होने पर भी दुनिया में सर्वाधिक लोकप्रिय।
50 वर्षों के विकास आंकड़े
तानाशाही में आर्थिक विकास दर थोड़ी अधिक, परंतु गरीब देशों में अंतर नगण्य।
आर्थिक असमानता की विफलता
राजनीतिक समानता के बावजूद शीर्ष अमीरों का वर्चस्व व गरीबों की दयनीय दशा।
सामाजिक सामंजस्य की शर्त 1
बहुमत को हमेशा अल्पसंख्यकों के साथ मिलकर पूरे देश का प्रतिनिधित्व करना होगा।
सामाजिक सामंजस्य की शर्त 2
बहुमत का शासन किसी एक धर्म, जाति या भाषा का स्थायी शासन नहीं होना चाहिए।
महिलाओं व दलितों की गरिमा
समानता व सम्मान के दावों को लोकतांत्रिक संविधान द्वारा कानूनी व नैतिक बल।
अंतहीन परीक्षा
एक अपेक्षा पूरी होते ही नई मांगें; शिकायतों का अंबार लोकतंत्र की सफलता का प्रमाण।
प्रजा से नागरिक का रूपांतरण
लाचार प्रजा के स्थान पर सत्ताधीशों का मूल्यांकन करने वाले संप्रभु नागरिक।
दक्षिण एशिया में लोकतंत्र
भारत, नेपाल, बांग्लादेश, पाक, श्रीलंका में जनता का भारी बहुमत लोकतंत्र के पक्ष में।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था तानाशाही (अलोकतांत्रिक) व्यवस्था से किस प्रकार बेहतर है? किन्हीं पांच मुख्य बिंदुओं के आधार पर सिद्ध कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
लोकतंत्र को तानाशाही, राजतंत्र या सैनिक शासन की तुलना में निम्नलिखित पांच ठोस आधारों पर श्रेष्ठ माना जाता है:

1. नागरिकों में समानता को बढ़ावा देना: लोकतंत्र में कानून के अनुरूप सभी नागरिक समान हैं। 'एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य' का सिद्धांत अमीर और गरीब, राष्ट्रपति और एक कार्यकर्ता को समान राजनीतिक शक्ति प्रदान करता है।
2. व्यक्ति की गरिमा में समानता:लोकतंत्र प्रत्येक व्यक्ति का मान-सम्मान और लोकतंत्र की रक्षा करता है। नागरिकों को किसी तानाशाह की लाचार पेज के बजाय देश का संप्रभु मालिक माना जाता है।
3. फैसलों की गुणवत्ता में गुणात्मक सुधार: लोकतंत्र में कोई भी निर्णय किसी एक व्यक्ति की मनमर्जी या सनक से नहीं लिया जाता; बल्कि संसद में खुली बहस, विचार-विमर्श और विशेषज्ञों की राय ली जाती है। यह गलत है और आत्मघाती हमले की संभावना बहुत कम है।
4. सामाजिक सामाजियों को तलने और संगीत की क्षमता: समाज में मजबूत, धर्मों और समुद्रों के बीच की समानताएं हैं। तानाशाही इन कट्टरपंथियों को लाठी और बंदूक से दबाया जाता है; जबकि डेमोक्रेसी इंटरेक्शन, एकांत और सत्ता की भागीदारी (जैसे बेल्जियम मॉडल) को जॉर्डन हल द्वारा हटा दिया गया है।
5। गलतियों को लोकतंत्र में कोई भी गलती हमेशा के लिए नहीं रह सकती; उस पर सार्वजनिक चर्चा है और सरकार को अपनी नीति बदलनी है। अगर सरकार हथधर्मी बनी रही, तो जनता अगले चुनाव में उस सरकार को ही बदल देगी।
उदाहरण 2
लोकतंत्र किस प्रकार एक 'उत्तराद' (जवाबदेह), 'जिम्मेवार' (उत्तरदायी) और 'वैध' (वैध) शासन व्यवस्था की स्थापना करता है? सविस्तार व्याख्या उद्धरण।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
लोकतंत्र राजनीतिक प्रकाशन पर तीन अत्यंत महत्वपूर्ण परिणाम उत्पन्न होते हैं:

1. उत्तराखंड शासन (जवाबदेह सरकार):
लोकतंत्र में सत्ता में बैठे नेता जनता के प्रति सीधे जवाबदेह होते हैं क्योंकि उन्हें हर पांच साल में जनता के पास वोट प्रबलता मिलती है। यदि वे जनता की विचारधारा के खिलाफ काम करते हैं तो जनता उन्हें चुनाव में हरा देती है। साथ ही लोकतंत्र में 'पारदर्शिता' (पारदर्शिता) होती है; सूचना का अधिकार (आरटीआई) किसी भी नागरिक द्वारा यह जांच की जा सकती है कि सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया है या नहीं。

2। जिम्मेवार शासन (उत्तरदायी सरकार):
एक लोकतांत्रिक सरकार जनता की दैनिक समस्याएं (जैसे किसान, सूखा, बीमारी, शिक्षा) के प्रति प्रतिभा और तत्परता के लिए बनी रहती है। तानाशाही सरकार के सामूहिक अवकाश पर भी अपने मौज-मस्ती में रह सकते हैं, लेकिन लोकतांत्रिक सरकार को मीडिया, तानाशाही और लोकतांत्रिक सरकार के दबाव में राहत कार्य जारी हैं。

3. वैध शासन (वैध सरकार):
यह लोकतंत्र की सबसे गौरवशाली उपलब्धि है। लोकतांत्रिक सरकार आम हो सकती है, कुछ मामलों में अकुशल या आंशिक रूप से निष्क्रिय हो सकती है, लेकिन यह 'जनता की अपनी सरकार' (लोगों की अपनी सरकार) होती है जिसे जनता स्वयं चुनती है। इसी वैधानिकता का कारण आज पूरी दुनिया में जनता का लोकतंत्र सबसे प्रिय सहयोगी है।
उदाहरण 3
आर्थिक संवृद्धि (विकास) और असमानता की कमी के पैमाने पर लोकतंत्र का वास्तविक रिकॉर्ड कैसा रहा है? समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
आर्थिक लोकतंत्र पर लोकतंत्र का रिकॉर्ड मिला-जुला और कुछ हद तक नष्ट हो रहा है:

1. आर्थिक संवद्र्धन और विकास:
• 1950 से 2000 के बीच के 50 वर्षों के वैश्विक आंकड़े। देश और ग़रीब लोकतांत्रिक देशों के बीच तुलना करें, तो विकास दर का यह अंतर बिल्कुल नागान्य (नामामात्र) रह जाता है। बल्कि स्वतंत्रता और सम्मान के साथ लोकतंत्र ही सर्वोत्तम विकल्प है。

2. आर्थिक गरीबी और गरीबी में कमी (लोकतंत्र की विफलता):
• लोकतंत्र की राजनीतिक संभावनाएं तो बनती हैं, लेकिन यह समाज में आर्थिक रूप से कमजोर है। है।
•गरीब सबसे बड़े जिज्ञासु वर्ग के होने के बावजूद डेमोक्रेटिक गरीबी गरीबी आसा के ढलान के कदम उठाने में बार-बार ढमुल बनते हैं।
उदाहरण 4
लोकतांत्रिक संविधान में 'सामाजिक विविधताओं के सामंजस्य' (सामाजिक विविधता का समायोजन) के लिए किन दो अनिवार्यताओं का पूरा होना आवश्यक है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
डेमोक्रेटिक विभिन्न सामाजिक, भाषाई और धार्मिक संचार के बीच मेक्सिको सह-अस्तित्व का सबसे श्रेष्ठ मंच है, लेकिन इसके लिए निम्नलिखित दो अनिवार्य शराब का पालन करना आवश्यक है:

1. बहुमत को हमेशा अल्पसंख्यकों के साथ मिलकर काम करना चाहिए:
लोकतंत्र का अर्थ केवल बहुसंख्यकों का संप्रदाय या तानाशाही नहीं है। बहुमत को हमेशा अल्पसंख्यकों के विचार, संस्कृति और संप्रदाय का आदर करते हुए उनके सामूहिक शासन को चलाना चाहिए। जब बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक सामूहिक काम करते हैं, तब सरकार पूरे राष्ट्र के सामान्य दृष्टिकोण और हितों का सच्चा प्रतिनिधित्व कर पाती है。

2. बहुमत का शासन किसी एक समुदाय या धर्म का स्थायी शासन न बने:
'बहुमत के शासन' का अर्थ यह नहीं है कि किसी एक धर्म (जैसे बौद्ध धर्म) या एक जाति का हमेशा के लिए शासन स्थापित हो जाए। इसका मतलब यह है कि अलग-अलग अलग और चुनाव में अलग-अलग लोग और समूह बनाया जा सकता है। देश के प्रत्येक नागरिक को यह अवसर मिलना चाहिए कि वह किसी भी बहुमत में बहुमत का हिस्सा न बन सके। यदि किसी नागरिक को उसके जन्म, जाति या धर्म के आधार पर बहुमत का हिस्सा बनने से स्थायी रूप से रोक दिया जाता है, तो उस व्यक्ति के लिए लोकतंत्र का अर्थ निहित होता है।
उदाहरण 5
'लोकतंत्र की परीक्षा कभी समाप्त नहीं होती।' इस कथन की समीक्षा करते हुए स्पष्ट कीजिए कि नागरिकों का शिकायतों का अंबार लगाना लोकतंत्र की सफलता का प्रमाण कैसे है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
यह लोकतंत्र का सबसे जीवंत और अलौकिक प्रकृति को दर्शाता है:

1। अपेक्षाओं की निरंतर वृद्धि:लोकतंत्र की सबसे बड़ी सुविधा यह है कि इसकी जांच और परख कभी खत्म नहीं होती। जब लोकतंत्र एक परीक्षा पास कर लेता है और जनता को कुछ अधिकार और सुविधाएं मिल जाती हैं, तो जनता को बैठने की जगह के बजाय सरकार से और अधिक सुविधाएं, बेहतर स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार की मांग की जाती है।
2. शिकायतों का अंबार ले जाना सफलता का सूचक:
तानाशाही या राजतंत्र में किसी आम नागरिक की यह बात नहीं होती कि वह राजा या तानाशाह के खिलाफ एक शब्द भी बोल सके; वहां केवल मौन और भय होता है।
परंतु लोकतंत्र में नागरिक फ्रैंक सरकार की कमियों की आलोचना करते हैं, काव्य पर चित्र देते हैं और अपने नाटक का अंबार दावा करते हैं।
3. प्रजा से संप्रभु नागरिक में रूपांतरण:
यह स्थिति इस बात का सबसे अचूक प्रमाण है कि लोग अब लाचार और शोषित 'प्रजा' नहीं रहे, बल्कि वे परिकल्पनाएं और शक्तियां से 'नागरिक' बन गए हैं। वे यह अच्छी तरह से जानते हैं कि उनका वोट देश की सरकार को मजबूत बनाता है और सरकार उनका प्रतिउत्तर देती है। मूल रूप से कैथोलिक और कैथोलिक लोकतंत्र की विफलता नहीं, बल्कि उनकी सबसे बड़ी जीवंत सफलता का प्रमाण हैं।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

लोकतंत्र को सभी सामाजिक व आर्थिक समस्याओं का तात्कालिक जादूई हल मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

लोकतंत्र समस्याओं के समाधान हेतु केवल अनुकूल परिस्थितियां और अधिकार देता है; समस्याओं का हल नागरिकों के विवेक और सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह मान लेना कि तानाशाही वाले गरीब देश लोकतांत्रिक गरीब देशों से बहुत ज्यादा अमीर हैं।

सही वैज्ञानिक तथ्य

गरीब तानाशाही और गरीब लोकतांत्रिक देशों के बीच आर्थिक विकास दर का अंतर लगभग नगण्य (नाममात्र) है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

बहुमत के शासन को किसी एक धर्म या जाति का स्थायी शासन समझ लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

बहुमत का शासन किसी एक धर्म या जाति का शासन नहीं होता; यह नीतिगत फैसलों में बनने वाला बहुमत है जिसमें हर नागरिक को कभी भी शामिल होने का अवसर मिलता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

जनता की शिकायतों को लोकतंत्र की विफलता का प्रतीक लिखना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

जनता का खुलकर शिकायतें दर्ज कराना लोकतंत्र की 'सफलता' का प्रमाण है, क्योंकि यह दर्शाता है कि नागरिक भयमुक्त हैं और अपनी शक्ति को पहचानते हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

लोकतंत्र में फैसलों में होने वाली देरी को निरर्थक समझना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

लोकतंत्र में विचार-विमर्श और बहस के कारण फैसले भले देर से होते हैं, परंतु वे अधिक परिपक्व, पारदर्शी और जनता को स्वीकार्य होते हैं।

लोकतंत्र के परिणाम: 5 श्रेष्ठताएं, 3 राजनीतिक परिणाम व अंतहीन परीक्षा

लोकतंत्र के परिणाम: 5 श्रेष्ठताएं, उत्तरदायी शासन एवं अंतहीन परीक्षा1. तानाशाही से श्रेष्ठता5 बुनियादी आधार• 1. नागरिकों में समानता की स्थापना• 2. व्यक्ति की गरिमा में वृद्धि• 3. फैसलों की गुणवत्ता में सुधार:विचार-विमर्श व बहस द्वारा निर्णय• 4. टकरावों को शांतिपूर्ण संभालना• 5. गलतियों में सुधार की गुंजाइश• सिद्धांत vs व्यवहार दुविधा का हल:यह केवल अनुकूल शर्तें देता है2. तीन राजनीतिक परिणामउत्तरदायी, जिम्मेवार व वैध• 1. उत्तरदायी (Accountable):संसद व जनता के प्रति जवाबदेह;पारदर्शिता (RTI): कार्यविधि जांच• 2. जिम्मेवार (Responsive):जनता की मांगों के प्रति संवेदनशील• 3. वैध शासन (Legitimate):'जनता की अपनी चुनी हुई सरकार'• विकास में गरीब देशों में अंतर नगण्य3. गरिमा व अंतहीन परीक्षाप्रजा से संप्रभु नागरिक• सामाजिक सामंजस्य की 2 शर्तें:1. बहुमत अल्पसंख्यकों संग चले2. बहुमत किसी धर्म/जाति का न बने• महिलाओं व वंचित जातियों की गरिमा• अंतहीन परीक्षा:एक लाभ मिलने पर नई मांगें;असंतोष व शिकायतें सफलता का सबूत• मुखर संप्रभु नागरिक की विजयबोर्ड परीक्षा के प्रमुख संप्रत्यय (Golden Outcomes of Democracy Capsule)पारदर्शिता व उत्तरदायित्व:RTI कानून द्वारा फैसले की कार्यविधि जांचने का अधिकार; जन-जवाबदेही।वैध शासन (Legitimate):धीमी या कम कुशल होने पर भी 'जनता की अपनी सरकार'; विश्व भर में प्रचंड समर्थन।शिकायतें = सफलता:जनता का असंतोष व मांगें प्रजा के संप्रभु व जागरूक नागरिक बनने का प्रमाण हैं।

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
लोकतंत्र तानाशाही से बेहतर है क्योंकि यह समानता, गरिमा, बेहतर फैसले, टकराव निवारण और गलतियों में सुधार देता है।
मुख्य बिंदु 2
लोकतंत्र कोई जादुई छड़ी नहीं है; यह केवल नागरिकों के विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियां और अधिकार उत्पन्न करता है।
मुख्य बिंदु 3
लोकतंत्र एक उत्तरदायी शासन है जो चुनाव और संसद के जरिए जनता के प्रति जवाबदेह रहता है।
मुख्य बिंदु 4
प्रतिनिधि (पारदर्शिता) लोकतंत्र की पहचान है जिसमें नागरिक लोकतंत्र की दस्तावेजों की जांच की जा सकती है।
मुख्य बिंदु 5
लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबी 'वैध शासन' (वैध सरकार) है क्योंकि यह जनता की अपनी हुई सरकार है।
मुख्य बिंदु 6
तानाशाही में 50 वर्षों की विकास दर थोड़ी बेहतर रही है, परंतु गरीब देशों के स्तर पर दोनों में अंतर नगण्य है।
मुख्य बिंदु 7
लोकतंत्र राजनीतिक समानता देता है, परंतु आर्थिक असमानता और गरीबी दूर करने में अभी पूरी तरह सफल नहीं हुआ है।
मुख्य बिंदु 8
सामाजिक सामंजस्य हेतु जरूरी है कि बहुमत हमेशा अल्पसंख्यकों के साथ मिलकर चले और बहुमत किसी एक धर्म या जाति का न बने।
मुख्य बिंदु 9
लोकतंत्र ने महिलाओं और शोषित जातियों (दलितों/आदिवासियों) की गरिमा और कानूनी अधिकारों को मजबूत किया है।
मुख्य बिंदु 10
लोकतंत्र की परीक्षा कभी समाप्त नहीं होती; नागरिकों का शिकायतों का अंबार लगाना और अधिक मांगें करना ही इसकी सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

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लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में 'पारदर्शिता' (पारदर्शिता) से क्या अभिप्राय है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: फ़्लॉपी का अर्थ यह है कि सरकार द्वारा किसी भी निर्णय के आधार पर किसी भी प्रकार के अपराधी और कानूनी कार्यकर्ता के लिए यह जांच और उसकी जांच करने का अधिकार और साधन (जैसे आरटीआई) प्रत्येक नागरिक के पास उपलब्ध है।
2
लोकतंत्र को एक 'वैध शासन' (वैध सरकार) क्यों माना जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: क्योंकि यह किसी विदेशी ताकत या सैन्य तानाशाह का थोपा हुआ शासन नहीं है, बल्कि यह 'जनता की अपनी चुनी हुई सरकार' होती है जिसे जनता ने स्वयं मतदान द्वारा वैध सत्ता सौंपी है।
3
आर्थिक विकास के मामले में लोकतंत्र और तानाशाही के 50 वर्षों के रिकॉर्ड का क्या यथार्थ है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: यद्यपि तानाशाही वाले देशों में विकास दर थोड़ी बेहतर रही है, परंतु यदि हम केवल गरीब तानाशाही और गरीब लोकतांत्रिक देशों की तुलना करें तो विकास दर का यह अंतर बिल्कुल नगण्य (नाममात्र) है।
4
लोकतंत्र में सामाजिक विविधताओं के शांतिपूर्ण सामंजस्य के लिए किन दो बातों का ध्यान रखना आवश्यक है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:
  1. बहुमत को हमेशा अल्पसंख्यकों के साथ मिलकर पूरे देश का प्रतिनिधित्व करना चाहिए। 2. बहुमत का शासन किसी एक धर्म, नस्ल या भाषाई समूह का स्थायी शासन नहीं बनना चाहिए।

5
नागरिकों का सरकार के प्रति असंतोष व्यक्त करना और 'शिकायतों का अंबार लगाना' लोकतंत्र की सफलता का प्रमाण कैसे है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: क्योंकि यह दर्शाता है कि नागरिक अब लाचार और डरी हुई 'प्रजा' नहीं रहे, बल्कि वे जागरूक और मुखर 'नागरिक' बन चुके हैं जो सत्ताधीशों से सवाल पूछने और उनका मूल्यांकन करने की ताकत रखते हैं।
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कक्षा 10 Social Science (213) के सभी अध्याय

अध्याय 1: प्राचीन विश्व (Ancient World) अध्याय 2: मध्यकालीन विश्व (Medieval World) अध्याय 3: आधुनिक विश्व - I (Modern World - I) अध्याय 4: आधुनिक विश्व - II (Modern World - II) अध्याय 5: भारत पर ब्रिटिश शासन का प्रभाव (Impact of British Rule) अध्याय 6: औपनिवेशिक भारत में सामाजिक सुधार (Religious & Social Awakening) अध्याय 7: ब्रिटिश शासन के विरुद्ध जन प्रतिरोध (Popular Resistance) अध्याय 8: भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन (Indian National Movement) अध्याय 9: भारत का भौतिक स्वरूप (Physiography of India) अध्याय 10: जलवायु (Climate) अध्याय 11: जैव विविधता (Bio-diversity) अध्याय 12: भारत में कृषि (Agriculture in India) अध्याय 13: परिवहन एवं संचार (Transport and Communication) अध्याय 14: जनसंख्या: हमारा संसाधन (Population: Our Greatest Resource) अध्याय 15: संवैधानिक मूल्य एवं राजनीतिक व्यवस्था (Constitutional Values) अध्याय 16: मौलिक अधिकार एवं मौलिक कर्तव्य (Fundamental Rights and Duties) अध्याय 17: भारत - एक कल्याणकारी राज्य (India - A Welfare State) अध्याय 18: स्थानीय शासन एवं प्रशासन (Local Governments) अध्याय 19: राज्य स्तर पर शासन (Governance at State Level) अध्याय 20: केंद्रीय स्तर पर शासन (Governance at Union Level) अध्याय 21: राजनीतिक दल एवं दबाव समूह (Political Parties and Pressure Groups) अध्याय 22: लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जन-सहभागिता (Democratic Participation) अध्याय 23: भारतीय लोकतंत्र की चुनौतियाँ (Challenges to Indian Democracy) अध्याय 24: राष्ट्रीय एकीकरण एवं धर्मनिरपेक्षता (National Integration & Secularism) अध्याय 25: सामाजिक-आर्थिक विकास एवं वंचित वर्ग (Socio-Economic Development) अध्याय 26: पर्यावरणीय क्षरण एवं आपदा प्रबंधन (Environmental Degradation) अध्याय 27: शांति एवं सुरक्षा (Peace and Security)

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