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NIOS • कक्षा X • Social Science (213) • अध्याय 10
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

जलवायु (Climate)

भारत की जलवायु को 'मानसूनी' जलवायु (मानसून जलवायु) कहा जाता है। 'मानसून' शब्द की व्युत्पति अरबी भाषा के शब्द 'मौसिम' (मौसिम) से हुआ है, जिसका शाब्दिक अर्थ 'ऋतु' (ऋतु) है। यह अध्याय मौसम (मौसम) और जलवायु (जलवायु) के मध्य अंतर, जलवायु को नियंत्रित करने वाले प्रमुख 6 ग्रह (अक्षांश, द्वीप, वायुदाब और पवन, समुद्र से दूरी, महासागरीय धाराएं और उच्चावच), भारतीय सिद्धांतों की उत्पत्ति की जटिल प्रक्रिया (आईटीसीजेड, जेट धाराएं, तिब्बती महासागर, और एल नीनो और दक्षिणी आंदोलन - ईएनएसओ), भारत के चार प्रमुख मौसम- शीत ऋतु (महावत सहित), ग्रीशम मौसम (लू और काल बैसाखी), वर्षा ऋतु (दक्षिण-पश्चिमी बहस, बहस का मंच और मौसिनराम की मोस्ट रीसा), और बहस (दक्षिण-पश्चिम की बहस) का विस्तृत वैज्ञानिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अंत में यह अध्याय सिद्ध करता है कि किस प्रकार पूरे भारतीय उपमहाद्वीप को एक सांस्कृतिक और कृषि सूत्र में पिरोने वाला 'एकता का परिचायक' (एकीकृत बंधन) कहा जाता है। झारखंड बोर्ड (एनआईओएस) परीक्षा में 'भारतीय बहस की उत्पत्ति के कारण', 'मौसम और जलवायु में अंतर', 'लू, महावत और आम्र वर्षा की परिभाषा', और 'तमिलनाडु तट पर शीतकालीन वर्षा का कारण' से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं।

द्रास में -45°C और थार में 50°C: भारत की जलवायु का हैरतअंगेज विस्तार

जरा सोचिए कि एक ही समय में एक ही देश के दो देश में क्या हो सकते हैं? दिसंबर की रात में नींद के 'द्रास' (द्रास) में तापमान शून्य से 45 डिग्री नीचे (-45°C) गिर जाता है जहां पानी तुरंत बर्फ की चट्टान बन जाता है; जबकि उसी रात केरल के तिरुवनंतपुरम में तापमान 22°C का सुखद अहसास हो रहा है! इसी प्रकार जून की शुरुआत में राजस्थान के मरुस्थल में पारा 50°C रहता है, जबकि कश्मीर के प्रथमगाम में तापमान 20°C रहता है। और तो और, मेघालय के मौसिनराम (मासिनराम) में साल भर में 1,141 सेमी बारिश होती है, जबकि पूरे साल में 10 सेमी पानी भी नहीं गिरता! भारत की यह अद्भुत वैश्विक विविधता वाले जादुई तंत्र से कैसे संचालित होती है, यही इस अध्याय का विषयवस्तु है।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

भारत एक कृषि प्रधान देश है जहां 140 करोड़ लोगों का भोजन और अर्थव्यवस्था पर निर्भरता बनी हुई है। समय पर सैद्धांतिक वर्षा पर खेत लहलहाते हैं, उद्योग बनते हैं और सिद्धांतों में उछाल आता है; जबकि असफलता या सूखे देश को संकट में डाल देता है। झारखंड की कृषि (विशेषकर धान की खेती) पूरी तरह से फ़ुहारों पर प्रतिबंधित है। जलवायु परिवर्तन, वैश्विक तापमान और अल नीनो के बढ़ते प्रभाव को समझने के लिए इस अध्याय में ज्ञान जीवन भर का काम बताया गया है। एनआईओएस बोर्ड परीक्षा में भूगोल खंड का यह सर्वोच्च वैज्ञानिक और महत्वपूर्ण अध्याय है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • मौसम (मौसम - जलवायु परिवर्तन) और जलवायु (जलवायु - 30+ वर्ष का औसत) अंतर में।
  • तापमान और वायुदाब का व्युत्क्रमानुपाती संबंध (उच्च तापमान = निम्न वायुदाब)।
  • हवा की गति की दिशा: सदैव उच्च दाब (उच्च दाब) से निम्न दाब (निम्न दाब) की ओर।
  • भारत के मानचित्र पर विभिन्न दिशाओं और मानसूनी पवनों के मार्ग का ज्ञान।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • मौसम और जलवायु की सटीक परिभाषा व अंतर को स्पष्ट करना।
  • विश्व के किसी भी स्थान की जलवायु को नियंत्रित करने वाले 6 मूलभूत कारकों की विवेचना करना।
  • कोरिओलिस बल (फेरेल का नियम) और जेट स्ट्रीम (जेट स्ट्रीम) की आपूर्ति को धीमा करें।
  • भारतीय सिद्धांतों की उत्पत्ति के प्रमुख घटक-आईटीसीजेड का स्लिपना, तिब्बती का पिस्टन, सोमाली जेट, और एल नीनो (ईएनएसओ)-का विश्लेषण करना।
  • भारत की चारों ऋतुओं (शीत, ग्रीष्म, वर्षा, और शरद/लौटता मानसून) की मौसमी विशेषताओं व स्थानीय पवनों (लू, महावट, काल बैसाखी, आम्र वर्षा) का वर्णन करना।
  • भारतीय जनजीवन, कृषि और त्योहारों के 'एकता के परिचायक' (एकीकृत बंधन) के रूप में सिद्धांत को सिद्ध करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. मौसम बनाम जलवायु और जलवायु नियंत...
2 2. कोरियोलिस बल, जेट धाराएं और पश्च...
3 3. भारतीय मानसून की उत्पत्ति और इसक...
4 4. भारत की चार प्रमुख ऋतुएं और मौसम...
5 5. सिद्धांत: एक एकता का परिचायक (एक...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. मौसम बनाम जलवायु और जलवायु नियंत्रण के 6 प्रमुख कारक

मौसम (मौसम): किसी स्थान की एक विशेष समय में स्क्वाड्रन की क्षणिक अवस्था को मौसम कहा जाता है। मौसम के तत्व - तापमान, शक्ति दबाव, पवन, संरचना और वर्ष - दिन में कई बार बदलाव हो सकते हैं (जैसे सुबह की धूप और दोपहर की बारिश)। भारत की उष्णकटीबंधीय ड्रैगडी जलवायु है।

जलवायु नियंत्रण के 6 प्रमुख कारक (जलवायु नियंत्रण):

  1. अक्षांश (अक्षांश): पृथ्वी की गोलाई का कारण ध्रुवों की ओर जाने वाली सौर ऊर्जा की मात्रा है, घटता है. भारत के मध्य से कर्क रेखा (23°30' उत्तर) दक्षिण भाग में उष्णकटिबंधीय और उत्तरी भाग उपोष्णकटिबन्धीय है। यही कारण है कि वर्षा ऋतु में भी वायुदाब और पवन तंत्र जैसे पर्वतीय स्थान ठंडे रहते हैं। (महाद्वीपीयता - महाद्वीपीयता): समुद्री तापमान पर समकारी (मध्यम) प्रभाव पड़ता है। जैसे-जैसे समुद्र से दूरी त्रिज्या होती है, यह प्रभाव घटता है और मौसम चरम (एक्सट्रीम) हो जाता है—अर्थात् समुद्र में बहुत अधिक गर्मी और समुद्र में भीषण ठंड होती है। इसे महाद्वीपीय धाराकहते हैं (उदा. दिल्ली बनाम मुंबई)।
  2. महासागरीय धाराएँ (महासागरीय धाराएँ): गर्म या महासागरीय महासागरीय धाराएँ समुद्री जलधाराओं के साथ मिलकर तट के तापमान को गर्म या ठंडी कर देती हैं।
  3. उच्चावच लक्षण (राहत) विशेषताएँ): जंगली पर्वत आकर्षण या गर्म पर्यटन स्थलों के लिए प्राकृतिक अवरोध का कार्य किया जाता है। यदि पर्वतीय महाकाव्यों के मार्ग में हों, तो वे उभरते हुए परचम लहराते हैं और पर्वतीय वर्षा (भौगोलिक वर्षा) संरचनाएँ हैं (जैसे पश्चिमी घाट और मेघालय के पहाड़ियाँ); जबकि पर्वत का दूसरा भाग वृष्टि छाया क्षेत्र (वर्षा छाया क्षेत्र) रह जाता है।

2. कोरियोलिस बल, जेट धाराएं और पश्चिमी विक्षोभ

भारत के जलवायु से प्रभावित होने वाले तीन विशिष्ट साइंटिफिक तंत्र निम्नलिखित हैं:

1. कोरियोलिस बल एवं फेरेल का नियम (कोरियोलिस बल):

पृथ्वी के अपने धुरी पर घूर्णन (रोटेशन) के कारण उत्पन्न आभा बल को कोरियोलिस बल कहते हैं।

फेरेल का नियम (फेरेल का नियम): इस बल के प्रभाव से उत्तरी ध्रुव पर सभी पवनें अपनी मूल स्थिति से दाहिनी ओर (दाएं) और दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर (बाएं) विक्षेपित (विक्षेपित) हो जाते हैं। दक्षिणी गोलार्ध की दक्षिण-पूर्व वाणिज्यिक पवनें जब श्मशान रेखा को पार करती हैं, तो कोरियोलिस बल के कारण दाहिनी ओर मुड़कर दक्षिण-पश्चिमी वाणिज्यिक पवनें बन जाती हैं।

2. जेट धाराएँ (जेट धाराएँ):

क्षोभमंडल (क्षोभमंडल) की ऊपरी सतह में (लगभग 12,000 मीटर से अधिक भूमिगत पर) संकरी पट्टियों में तीव्र गति से चलने वाली पश्चिमी पवनों को जेट धारा कहा जाता है। समुद्र में 110 किमी/घंटा और समुद्र में लगभग 184 किमी/घंटा है। गर्मी को यह साल भर के लिए ठीक कर देता है, हिमालय के दक्षिण में। पश्चिमी समुद्री विक्षोभ (पश्चिमी चक्रवाती विक्षोभ):

शीत ऋतु में मध्य सागर (भूमध्य सागर) के ऊपर उठने वाले ज्वालामुखी उपोष्ण पश्चिमी जेट तूफान के साथ भारत के उत्तर और उत्तर-पश्चिमी समुद्र में ज्वालामुखी विक्षोभ हैं। इनका कारण पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शीतकालीन वर्षा होती है और कश्मीर और हिमाचल में हिमपात होता है। यह वर्षा रबी की बुआई (गेहूँ) के लिए शोभायमान है और इसे स्थानीय रूप से 'महावत' (महावत) कहा जाता है।

3. भारतीय मानसून की उत्पत्ति और इसकी क्रियाविधि

भारतीय बहस की उत्पत्ति एक कॉम्प्लेक्स कंपनी प्रक्रिया है। इसके प्रमुख वैज्ञानिक कारक निम्नलिखित हैं:

1. स्थल और जल का विभेदी तापन (भूमि और समुद्र का विभेदक तापन):

जल ऋतु में भारत का विशाल भूभाग (विशेषकर मरुस्थल और उत्तर-पश्चिमी मैदान) में भीषण गर्मी होती है, जिससे वहां तीव्र उन्नत वायुदाब (निम्न दबाव) का केंद्र बन जाता है। इसके विपरीत, चारों ओर प्रशांत महासागर का जल धीरे-धीरे गर्म होता है, जिससे समुद्र पर उच्च वायुदाब (उच्च दबाव) बना रहता है। इस भारी दबाव के कारण झील समुद्री पवनें समुद्र से स्थलों की ओर घूमती हैं।

2. अंतर-उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) का ढलान:

विशुवतीय ढलानों पर स्थित निम्न वायुदाब का ढलान (गर्त), जहां उत्तर-पूर्व और दक्षिण-पूर्व वाणिज्यिक पवनेंसेट हैं, ITCZ कंपनी है। गर्मी में सूर्य के उत्तरायण होने से यह गर्त खिसक कर गंगा के मैदान (लगभग 20°-25° उत्तर) पर आ जाता है, जिसे 'मानसून गर्त' कहा जाता है।

3. तिब्बती समुद्र तल से 4,500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित तिब्बती समुद्र तल से 17§

गर्मियों में भीषण गर्मी होती है, जिसके कारण यहां तीव्र वायु धाराएं उत्पन्न होती हैं और 9 किमी की गहराई तक समुद्र तल से 4,500 मीटर की ऊंचाई पर वायुदाब बन जाता है।

4. दक्षिणी हलचल और एल नीनो (ENSO - दक्षिणी दोलन और अल नीनो):

सामान्यतः जब दक्षिणी प्रशांत महासागर में वायुदाब होता है, तो हिंद महासागर में निम्न वायुदाब होता है। लेकिन कुछ वर्षों में यह स्थिति उल्टी हो गयी है। दक्षिणी हलचल (दक्षिणी दोलन - SO) के चक्रीय उलटफेर को कहते हैं। है. 'एल नीनो' स्पैनिश शब्द का अर्थ है 'शिशु' (ईसा मसीह के बाल रूप का प्रतीक यह क्रिसमस के समय से शुरू हुआ है)। यह पूर्ण परिघटना ENSO (अल नीनो दक्षिणी दोलन) को कहा जाता है।

4. भारत की चार प्रमुख ऋतुएं और मौसमी विशेषताएं

मानसून पवनों की लयबद्धता के आधार पर भारत के मौसम विज्ञानी वर्ष को चार प्रमुख ऋतुओं में बांटते हैं:

1. शीत ऋतु (The Cold Weather Season - मध्य नवंबर से फरवरी):

  • उत्तर भारत में दिसंबर और जनवरी सबसे ठंडे महीने होते हैं। तापमान दक्षिण से उत्तर की ओर घटता जाता है (चेन्नई में 24°-25°C जबकि उत्तर भारत में 10°-15°C)।
  • उत्तर-पूर्वी व्यापारिक पवनें स्थल से समुद्र की ओर बहती हैं, अतः देश के अधिकांश भागों में मौसम शुष्क रहता है।
  • अपवाद: तमिलनाडु के कोरोमंडल तट पर ये पवनें बंगाल की खाड़ी के ऊपर से नमी ग्रहण करके आती हैं और वहाँ शीतकाल में भारी वर्षा कराती हैं।
  • पश्चिमी विक्षोभों द्वारा उत्तर भारत में 'महावट' की वर्षा होती है जो रबी फसलों (गेहूं) के लिए अत्यंत लाभकारी है।

2. ग्रीष्म ऋतु (The Hot Weather Season - मार्च से मई):

  • सूर्य के उत्तरायण होने से तापमान तेजी से बढ़ता है। मार्च में दक्कन पठार पर 38°C, अप्रैल में म.प्र. व गुजरात में 42°C और मई में उत्तर-पश्चिमी भारत में 45°C तापमान दर्ज होता है।
  • लू (Loo): मई और जून में उत्तर और उत्तर-पश्चिमी भारत में दिन के समय चलने वाली धूल भरी, प्रचंड, गर्म और शुष्क पवनों को 'लू' कहते हैं। इसका सीधा प्रभाव जानलेवा (हीट स्ट्रोक) हो सकता है।
  • काल बैसाखी (Kaal Baisakhi): ग्रीष्म ऋतु के अंत में पश्चिम बंगाल में मूसलाधार बारिश, गरज और ओलावृष्टि वाले विनाशकारी स्थानीय तूफानों को 'काल बैसाखी' (बैसाख महीने का विनाशक) कहा जाता है।
  • आम्र वर्षा (Mango Showers): ग्रीष्म ऋतु के अंत में केरल और कर्नाटक के तटीय भागों में होने वाली पूर्व-मानसूनी फुहारों को 'आम्र वर्षा' कहते हैं क्योंकि यह आमों को जल्दी पकने में सहायता करती है।

3. वर्षा ऋतु या दक्षिण-पश्चिम मानसून (The Advancing Monsoon - जून से सितंबर):

  • जून के आरंभ में निम्न दाब का गर्त इतना गहरा हो जाता है कि दक्षिणी गोलार्ध की व्यापारिक पवनें भूमध्य रेखा पार कर मुड़ती हैं और भारत में अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी की दो शाखाओं के रूप में प्रवेश करती हैं।
  • मानसून प्रस्फोट (Burst of Monsoon): मानसूनी पवनों के आगमन के साथ सामान्य वर्षा में अचानक तीव्र वृद्धि हो जाती है और यह कई दिनों तक लगातार जारी रहती है। इसे 'मानसून का टूटना' या 'प्रस्फोट' कहते हैं।
  • मौसिनराम (Mawsynram): मेघालय की खासी पहाड़ियों में स्थित मौसिनराम अपनी कीपाकार पहाड़ियों की स्थिति के कारण विश्व में सबसे अधिक औसत वार्षिक वर्षा (1,141 सेमी) प्राप्त करता है।
  • वर्षा में विराम (Breaks in Monsoon): मानसून के दौरान वर्षा लगातार नहीं होती; वर्षा वाले दिनों के बीच कई शुष्क अंतराल (Wet and Dry Spells) आते हैं। जब मानसून गर्त हिमालय की तलहटी में खिसक जाता है, तो मैदानों में सूखा पड़ता है और पहाड़ों में भीषण बाढ़ आती है।

4. मानसून की वापसी या शरद ऋतु (Retreating Monsoon - अक्टूबर और नवंबर):

  • अक्टूबर के आरंभ में सूर्य के दक्षिणायन होने से गंगा के मैदान पर निम्न दाब का गर्त कमजोर पड़ जाता है और दक्षिण-पश्चिम मानसून पीछे हटना शुरू कर देता है। आसमान साफ हो जाता है और तापमान बढ़ जाता है।
  • क्वार की उमस (October Heat): उच्च तापमान और दिन की अत्यधिक आर्द्रता (नमी) के कारण दिन का मौसम अत्यंत कष्टकारी और बेचैन करने वाला हो जाता है। इस दशा को सामान्यतः 'क्वार की उमस' कहते हैं।
  • अंडमान सागर पर उत्पन्न होने वाले चक्रवाती अवदाब (Cyclonic Depressions) पूर्वी तट (ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु) पर भारी तबाही मचाते हैं। गोदावरी, कृष्णा और कावेरी के डेल्टा क्षेत्रों में ये चक्रवात जान-माल का अपार नुकसान करते हैं।

5. सिद्धांत: एक एकता का परिचायक (एक एकीकृत बंधन)

यद्यपि भारत के विभिन्न वर्षावनों और वर्षा की मात्रा में भारी प्रादेशिक विविधता पाई जाती है, सूत्र फिर भी मानसून पूरे देश को एक में बांधने वाली एक सार्वभौमिक शक्ति है:

  • ऋतु चक्र की व्याख्या: हिमालय भारत को नामांकित मध्य एशियाई फ़्लोरिडा से बचकर एक विशिष्ट जलवायु जलवायु प्रारूप प्रदान करता है। पूरे देश में साल भर की डिमांडी पवनों के आने, बारिश होने और उनकी वापसी के लिए नियमित चक्र की प्रतीक्षा रहती है। 12§
  • सांस्कृतिक और सामाजिक उत्सव: भारत के विभिन्न साम्राज्यों में मनाए जाने वाले ज्यादातर लोकगीत, संगीत और प्रमुख त्योहार हैं - जैसे ओणम, पोंगल बि, हू, सावन के झूले, तीज, हरियाली - मानसून के आगमन और अच्छी संस्कृतियों की कहानियां हैं।

अतः हिमालय से लेकर कन्याकुमारी तक और गुजरात से लेकर असम तक पूरे देश में सूडानी वर्षा के इस ताने-बाने से, सांस्कृतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से एकभाज्य राष्ट्र के रूप में बंधन हुआ है।

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शब्दावली, कालक्रम एवं प्रशासनिक व्यवस्था

फेरेल का नियम (फेरेल का नियम)
उत्तरी गोलार्ध = दाईं ओर | दक्षिणी गोलार्ध = बाईं ओर
कोरियोलिस बल के प्रभाव से पवनों के विक्षेपण की दिशा।
मौसिनराम (मावसिनराम)
1,141 सेमी औसत वार्षिक वर्षा (मेघालय)
खासी पहाड़ियों में स्थित; विश्व में सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान।
महावत (महावत)
पश्चिमी विक्षोभ द्वारा उत्तर भारत में शीतकालीन वर्षा
रबी की फसलों (गेहूं) की वृद्धि के लिए संजीवनी।
क्वार की अवधि (अक्टूबर हीट)
अक्टूबर में उच्च तापमान + उच्च आर्द्रता
लौटते मानसून के समय दिन का असहनीय कष्टप्रद मौसम।
एल नीनो (एल नीनो)
पेरू तट पर 2-5 वर्षों में प्रकट होने वाली गर्म समुद्री धारा
भारतीय मानसून को कमजोर करती है और सूखा लाती है।
आईटीसीजेड
अंतर-उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र
विषुवतीय निम्न दाब का गर्त जहाँ व्यापारिक पवनें अभिसरित होती हैं।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
प्रश्न 1 (लघु उत्तरीय): 'मौसम' (मौसम) और 'जलवायु' (जलवायु) के बीच मुख्य अंतर स्पष्ट है। भारत की जलवायु किस प्रकार की है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: मौसम और जलवायु के बीच रासायनिक अंतर निम्नलिखित हैं:

  • मौसम (मौसम): किसी स्थान की छुट्टी (एक दिन, कुछ घंटे या सप्ताह) सामान्य दशाएँ—जैसे तापमान, वर्षा, हवा और धूप—को मौसम कहते हैं। यह एक ही दिन में कई बार बदल सकता है।
  • जलवायु (जलवायु): किसी विस्तृत भूभाग में एक लंबी अवधि (कम से कम 30 वर्ष या अधिक) के मौसम की दशाओं और विविधताओं के कुल औसत को जलवायु कहा जाता है। यह निर्दिष्ट जलवायु है।

भारत की जलवायु: भारत की जलवायु

उदाहरण 2
प्रश्न 2 (दीर्घ उत्तरीय): भारतीय मानसून की उत्पत्ति को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों की सविस्तार व्याख्या कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: भारतीय बहस की उत्पत्ति और अनुयायियों के लिए निम्नलिखित प्रमुख अभिनेता आदर्श हैं:

1. स्थल और जल का विभेदी तापन:

जल तापन भारत के उत्तरी मैदानी भूभाग में अत्यधिक गर्मी के कारण तीव्र तीव्र वायुदाब बनता है, जबकि आसपास के हिन्द महासागर में उच्च वायुदाब रहता है। इस डबट्रांस से समुद्री पवनें जापान लेकर भारत की ओर खानदानी हैं।

2। ITCZ (मानसून गर्त) की स्थिति में बदलाव:

गर्मियों में सूर्य की किरणें अंतर-उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) विशुवत रेखा से उत्तर की ओर खिसककर गंगा के मैदान (20°-25° N) पर निकलती हैं, जिससे आपूर्ति का मार्ग बना रहता है।

3. तिब्बती दबाव का तापन:

गर्मियों में तिब्बती का शक्तिशाली शक्तिशाली गर्म हो जाता है, तीव्र तरल वायु धाराएँ उत्पन्न होती हैं और ऊपरी क्षेत्र में निम्न दाब बनता है।

4. जेट धारा की भूमिका:

गर्मियों में पश्चिमी जेट धारा हिमालय के उत्तर में खिसकती है तथा 14° उत्तर प्रायद्वीपीय भारत के ऊपर उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट धारा सक्रिय धारा धारा धारा 20§21

5. दक्षिणी आंदोलन और एल नीनो (ENSO):

प्रशांत और हिंद महासागर के बीच वायुदाब का चक्रीय परिवर्तन (दक्षिणी आंदोलन) और पेरू तट पर गर्म धारा 'एल नीनो' का आविर्भाव के सिद्धांतों को दर्शाता है।

उदाहरण 3
प्रश्न 3 (लघु उत्तरीय): (क) लू (लू), (ख) काल बैसाखी, (ग) महावत।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

  • (क) लू (लू): गर्मी के मौसम में (माई-जून) उत्तर और उत्तर-पश्चिमी भारत (राजस्थान, पंजाब, यूपी, बिहार) में दो के समय में चलने वाली धूल भरी, प्रचंड, गर्म और सूखी हवाओं को 'लू' कहा जाता है। यह स्वास्थ्य के लिए अत्यंत प्राकृतिक है। हालाँकि यह विमान को नुकसान पहुंचाता है, पर चाय और जूट के लिए उपयोगी है। यह रबी का फल (गेहूं) के लिए अमृत समान है।
उदाहरण 4
प्रश्न 4 (विश्लेषणात्मक): 'तमिलनाडु के कोरोमंडल तट पर शीतकाल में वर्षा क्यों होती है?' तथा 'क्वार की माइक्रो' (अक्टूबर हीट) क्या है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

1. तमिलनाडु में शीतकालीन वर्षा का कारण:

  • शीत ऋतु में पूरे भारत में उत्तर-पूर्वी व्यावसायिक पवनें स्थल से समुद्र की ओर मशविरे होते हैं, मूलतः वे शुष्क होते हैं और देशों में वर्षा नहीं होती। कोरोमंडल तट से टकराती हैं, तो वहां अक्टूबर-दिसंबर के शीतकालीन महीनों में भारी वर्षा होती है।

2। क्वार की गर्मी (अक्टूबर हीट):

अक्टूबर के महीने में बहस के समय बारिश बंद हो जाती है, आकाश साफ हो जाता है और दिन का तापमान बढ़ जाता है। भूमि में वर्षा के कारण सादृश्य बनी रहती है। इस उच्च आकार और भारी चट्टान का कारण दिन का मौसम भारी चट्टानें और भारी चट्टानी हो जाता है। अशानीय सीज़न को 'क्वार की मास' (अक्टूबर हीट) कहा जाता है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

भारत की संपूर्ण वर्षा को केवल दक्षिण-पश्चिम मानसून से हुआ मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

भारत की अधिकांश वर्षा (80%) दक्षिण-पश्चिम मानसून से होती है, परंतु तमिलनाडु के तट पर शीतकालीन वर्षा उत्तर-पूर्वी लौटते मानसून से तथा पंजाब-हरियाणा में शीतकालीन वर्षा पश्चिमी विक्षोभ (महावट) से होती है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

चेरापूंजी को आज भी सबसे अधिक वर्षा वाला स्थान लिखना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

वर्तमान आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार मेघालय का 'मौसिनराम' (मासिनराम - 1,141 सेमी) विश्व का सर्वाधिक प्रतिष्ठित वार्षिक रैरा वाला स्थान है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

एल नीनो को भारतीय मानसून के लिए अच्छा समझना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

एल नीनो एक गर्म समुद्री धारा है जो सामान्यतः भारतीय मानसून को कमजोर करती है और भारत में सूखे या कम वर्षा की स्थिति पैदा करती है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

कोरियोलिस बल के विक्षेपण की दिशा भूल जाना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

फेरेल के चमत्कार कोरियोलिस बल पवनों को उत्तरी गोलार्ध में 'दाहिनी ओर' (दाएं) और दक्षिणी गोलार्ध में 'बाईं ओर' (बाएं) विक्षेपित है।

भारतीय मानसून की क्रियाविधि एवं चारों ऋतुओं का चक्र

भारत की जलवायु: मानसूनी तंत्र, चार ऋतुएं एवं एकता का परिचायक 1. मानसून की उत्पत्ति के कारक • स्थल-जल दाबांतर: ग्रीष्मकाल में उत्तर मैदान पर निम्न दाब हिंद महासागर पर उच्च दाब (हवाएं खिंचती हैं) • ITCZ व तिब्बत का पठार: विषुवतीय गर्त गंगा मैदान पर खिसकना तिब्बती पठार का अत्यधिक गर्म होना • कोरियोलिस बल व जेट धाराएं: पवनों का दाईं ओर मुड़ना (फेरेल नियम) उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट धारा (14° N) एल नीनो (ENSO प्रभाव): पेरू तट की गर्म धारा → मानसून कमजोर 2. भारत की 4 प्रमुख ऋतुएं 1. शीत ऋतु (नवंबर - फरवरी): - उत्तर-पूर्वी व्यापारिक पवनें (शुष्क) - महावट: गेहूं हेतु अमृत (पश्चिमी विक्षोभ) - तमिलनाडु में शीतकालीन वर्षा 2. ग्रीष्म ऋतु (मार्च - मई): - लू: शुष्क गर्म पवनें (उत्तर मैदान) - काल बैसाखी (प. बंगाल), आम्र वर्षा (केरल) 3. वर्षा ऋतु (जून - सितंबर): - मानसून प्रस्फोट (Burst of Monsoon) - मौसिनराम: विश्व में सर्वाधिक वर्षा (1141 सेमी) 4. लौटता मानसून (अक्टूबर - नवंबर): - क्वार की उमस (October Heat) - पूर्वी तटीय चक्रवात (ओडिशा, आंध्रा) 3. एकता का परिचायक • कृषि अर्थव्यवस्था की धुरी: - खरीफ फसलें (धान, मक्का, दलहन) - जलस्रोतों व भूजल का पुनर्भरण झारखंड में धान बुआई का आधार • सांस्कृतिक व पर्व एकीकरण: - तीज, सावन के झूले, कर्मा (झारखंड) - ओणम (केरल), पोंगल, बिहू (असम) - लोकगीतों व संगीत में वर्षा का उल्लास • हिमालय का सुरक्षा चक्र: - साइबेरियाई ठंडी हवाओं से रक्षा - मानसूनी हवाओं को रोककर वर्षा कराना कश्मीर से कन्याकुमारी तक एक अखंड मानसूनी लय

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
मौसम अल्पकालिक वायुमंडलीय दशा है, जबकि जलवायु 30 से अधिक वर्षों के मौसम का औसत योग है; भारत की जलवायु 'उष्णकटिबंधीय मानसूनी' है।
मुख्य बिंदु 2
जलवायु नियंत्रण के 6 प्रमुख कारक हैं: अक्षांश, ऊंचाई (तुंगता), वायुदाब व पवनें, समुद्र से दूरी (महाद्वीपीयता), महासागरीय धाराएं और उच्चावच।
मुख्य बिंदु 3
कोरियोलिस बल (फेरेल का नियम) पवनों को उत्तरी गोलार्ध में दाईं ओर और दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर मोड़ देता है।
मुख्य बिंदु 4
जेट धाराएं ऊपरी वायुमंडल में तेज गति से बहती हैं; भूमध्य सागर से आने वाले पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत में शीतकालीन वर्षा 'महावट' कराते हैं जो गेहूं के लिए वरदान है।
मुख्य बिंदु 5
ग्रीष्मकाल में भारत के भूभाग पर निम्न दाब और हिंद महासागर पर उच्च दाब बनने से दक्षिण-पश्चिम मानसूनी पवनें भारत की ओर आकर्षित होती हैं।
मुख्य बिंदु 6
गर्मियों में उत्तर-पश्चिम भारत में दिन में चलने वाली गर्म, शुष्क और प्रचंड धूल भरी वस्तुओं को 'लू' (लू) कहा जाता है।
मुख्य बिंदु 7
पश्चिम बंगाल के आंधी-तूफानों को 'काल बैसाखी' और केरल-कर्नाटक की पूर्व-मानसूनी वर्षा को 'आम्र वर्षा' कहते हैं।
मुख्य बिंदु 8
मेघालय के मौसिनराम में कीपाकार पहाड़ियों के कारण विश्व की सर्वाधिक औसत वार्षिक वर्षा (1,141 सेमी) दर्ज होती है।
मुख्य बिंदु 9
अक्टूबर-नवंबर में वापसी के समय उच्च तापमान और भारी तापमान को 'क्वार की गर्मी' (अक्टूबर हीट) कहा जाता है।
मुख्य बिंदु 10
तमिलनाडु के कोरोमंडल तट पर शीतकाल में वर्षा उत्तर-पूर्वी लौटते मानसून से होती है जो बंगाल की खाड़ी से नमी ग्रहण करता है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
मेघालय में स्थित विश्व में सबसे अधिक औसत वार्षिक वर्षा प्राप्त करने वाले स्थान का क्या नाम है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: C
मेघालय के शोरूम मौसिनराम (मावसिनराम) में स्थित 1,141 सेमी औसत वार्षिक वर्षा के साथ विश्व का सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान है।
2
ग्रीष्म ऋतु में उत्तर भारत के मैदानी भागों में दोपहर के समय चलने वाली धूल भरी, प्रचंड और शुष्क पवनों को क्या कहा जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
मई-जून में उत्तर और उत्तर-पश्चिमी भारत में चलने वाली अत्यंत गर्म और शुष्क स्थानीय पवनों को 'लू' कहा जाता है।
3
शीत ऋतु में तमिलनाडु के कोरोमंडल तट पर मुख्य रूप से किन पवनों के कारण वर्षा होती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
शीत ऋतु में चलने वाली उत्तर-पूर्वी पवनें बंगाल की खाड़ी से नमी ग्रहण करके तमिलनाडु के तट पर भारी वर्षा कराती हैं।
4
पेरू के तट पर सामान्य ठंडी धारा के स्थान पर 2 से 5 वर्षों के अंतराल पर प्रकट होने वाली गर्म समुद्री जलधारा का क्या नाम है जो भारतीय मानसून को कमजोर करती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
'एल नीनो' एक गर्म समुद्री जलधारा है जो पेरू तट पर प्रकट होकर प्रशांत महासागर के दबाव को बदलती है और भारतीय मानसून को कमजोर कर सूखा लाती है।
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