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NIOS • कक्षा X • Social Science (213) • अध्याय 20
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

केंद्रीय स्तर पर शासन (Governance at Union Level)

लोकतंत्र में एकमात्र जनता द्वारा शासकों को चुना जाना भर का नाम नहीं है; वास्तविक लोकतांत्रिक शासकों के लिए संवैधानिक नियम-क़ानून, ढील और प्रतिबंधों के अंतर्गत काम करना अनिवार्य शर्त है। प्रस्तुत अध्याय भारत की लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था के तीन प्रमुख पद हैं-विधायिका (संसद), कार्यपालिका (राजनीतिक और संवैधानिक कार्यपालिका) और स्वतंत्र न्यायपालिका (सर्वोच्च न्यायालय) -के अधिकार, बहुमत और सरकार की वैज्ञानिक समझ। अध्याय 13 अगस्त 1990 के ऐतिहासिक सरकारी कार्यालय आदेश (मंडल आयोग के तहत अन्य परत वर्ग - ओबीसी को 27% नवीनीकृत) के जीवंत केश अध्ययन से शुरू होता है। इसके माध्यम से यह स्पष्ट हो गया है कि देश में कोई भी बड़ा नीतिगत निर्णय नहीं लिया जाता है, संसद की क्या भूमिका होती है, सोलह और राज्यसभा की शक्तियों में क्या अंतर है (लोकसभा की सर्वोच्चता के तीन कारण), और राजनीतिक कार्यपालिका (मंत्री) स्थायी कार्यपालिका (IAS/नौकरशाही) से अधिक शक्तिशाली क्यों है। अध्याय में प्रधानमंत्री के व्यापक अधिकार, मंत्रिपरिषद की संरचना, गठबंधन की सेनाओं की ताकतें, राष्ट्रपति की संवैधानिक स्थिति, और गुलामी की स्वतंत्रता, धार्मिक समीक्षा (न्यायिक समीक्षा) और विध्वंस सूची (पीआईएल) का गहन विश्लेषण किया गया है। झारखंड बोर्ड (एनआईओएस) परीक्षा में मंडल आयोग विवाद, समाजवादी बनाम राज्य सभा, प्रधानमंत्री की शक्तियां और लोकतंत्र की स्वतंत्रता पर दीर्घ उत्तरीय प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं।

एक पन्ने का सरकारी आदेश और पूरे देश में हड़कंप: मंडल आयोग और 27% आरक्षण का महासंग्राम

13 अगस्त 1990 को भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के एक संयुक्त सचिव ने एक साधारण से सरकारी आदेश (कार्यालय अधिकार सं. 36012/31/90) पर हस्ताक्षर किये। यह आदेश केवल एक पन्ने का था, लेकिन इसके जारी होने से पूरे देश में राजनीतिक और सामाजिक भूचाल आ गया! अख़बारों के अभिलेख, रैलियां, हिंसक प्रदर्शन अदालत और बंधकों की बाढ़ आज़। इस आदेश ने सरकारी पत्रिका में 'सामाजिक और शैक्षणिक रूप से बैकलॉग' (एसईबीसी/ओबीसी) के लिए 27 प्रतिशत नवीनता लागू कर दी थी। संयुक्त सचिव ने यह एक पन्ने के आदेश का निर्णय क्या लिया? बिल्कुल नहीं! इसके पीछे 1979 में फोटोग्राफर बी.पी. आयोग मंडल की रिपोर्ट, 1989 के आम चुनाव में वी.पी. सिंह की राष्ट्रीय मोर्चा सरकार की कार्यकारिणी की घोषणा पत्र, केंद्रीय मंडल की संयुक्त बैठक, संसद में लंबी बहस, और सर्वोच्च न्यायालय का ऐतिहासिक निर्णय ('इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ, 1992') शामिल थे। यह घटना सिखाती है कि लोकतंत्र में कोई भी निर्णय किसी एक व्यक्ति की विचारधारा से नहीं, बल्कि संवैधानिक विचारधारा के एक विशाल जाल के माध्यम से होता है।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

लोकतांत्रिक संस्थाएं शासन के प्रमुख हैं। कई बार छात्रों को लगता है कि बैठकों में निर्णय लेने में ढील, मतभेद और बहसें बहुत देर से होती हैं और तानाशाही ज्यादा तेज होती है। परंतु यह अध्याय सिद्ध करता है कि विचारधारा-विचार-विमर्श ही लोकतंत्र की मूल ढाल है, जो प्रेस में जाने वाले विध्वंसक और तानाशाही विचारधारा को रोकती है। झारखंड की तरह राज्य में प्रयोगशाला सहयोगियों, जन जातीय भूमि विधानों और जातीय समूहों के लिए कार्यपालिका और न्यायिक का अध्ययन करना आवश्यक है। एनआईओएस बोर्ड परीक्षा में यह अध्याय राजनीतिक विज्ञान का सबसे महत्वपूर्ण और वैचारिक अध्याय है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • लोकतंत्र, संसद और संविधान के बुनियादी स्वरूप की समझ।
  • संसद (सांसद), मंत्रिपरिषद (प्रधानमंत्री/मंत्री) और अदालत (जज) के कार्यों का प्रारंभिक ज्ञान।
  • आरक्षण और सामाजिक समानता की सामान्य अवधारणा।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • 13 अगस्त 1990 के मंडल आयोग कार्यालय ज्ञापन के माध्यम से सरकारी निर्णय प्रक्रिया के चरणों का विश्लेषण करना।
  • लोकतंत्र में संस्थाओं (संसद, कार्यपालिका, न्यायपालिका) की अनिवार्यता और निर्णयों में विचार-विमर्श के महत्व को सिद्ध करना।
  • संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) की संरचना, शक्तियों और लोकसभा की व्यावहारिक सर्वोच्चता के 3 कारणों की व्याख्या करना।
  • राजनीतिक कार्यपालिका (मंत्रिपरिषद) और स्थायी कार्यपालिका (नौकरशाही/सिविल सेवक) के बीच अंतर स्पष्ट करना।
  • प्रधानमंत्री के पद, शक्तियों, कैबिनेट प्रणाली और गठबंधन सरकारों में प्रधानमंत्री की बदलती भूमिका का मूल्यांकन करना।
  • न्यायिक समीक्षा (न्यायिक समीक्षा) और न्यायिक समीक्षा (पीआईएल) का महत्व।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. एक प्रमुख नीतिगत फैसला कैसे लिया...
2 2. राजनीतिक संसदीय की आवश्यकता और स...
3 3. संसद के दोनों सदन: लोकसभा बनाम र...
4 4. राजनीतिक कार्यपालिका: प्रधानमंत्...
5 5. स्वतंत्र न्यायपालिका (न्यायपालिक...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. एक प्रमुख नीतिगत फैसला कैसे लिया जाता है? (मंडल आयोग केस स्टडी)

लोकतंत्र में कोई भी बड़ा नीतिगत निर्णय किसी एक व्यक्ति के सनक से नहीं होता, बल्कि इसके पीछे एक लंबी रणनीति प्रक्रिया होती है:

1. कार्यालय ज्ञापन (कार्यालय ज्ञापन - 13 अगस्त 1990):

  • भारत सरकार ने 13 अगस्त 1990 को ओ.एम. क्रमांक 36012/31/90 जारी किया गया जिसमें केंद्र सरकार के सिविल कार्यालय में 27% रिक्तियां सामाजिक और शैक्षणिक रूप से बैचलर (एसईबीसी) के लिए कार्यालय की ओर से जारी किया गया।
  • इस आदेश पर एक संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी ने हस्ताक्षर किये थे, लेकिन वे केवल सरकार के निर्णय को औपचारिक रूप दे रहे थे।

2. इस जजमेंट की पृष्ठभूमि और चित्र श्रृंखला:

  1. मंडल आयोग (मंडल आयोग - 1979): भारत सरकार ने 1979 में बी.पी. मंडल के मंडल में दूसरा फ़्लैम वर्ग आयोग बनाया गया। आयोग ने 1980 में अपनी रिपोर्ट दी और सरकारी दस्तावेजों में 27% नटखट लोगों की।
  2. संसद में चर्चा: कई वर्षों तक कलाकारों ने इस रिपोर्ट को लागू करने की मांग की।
  3. चुनावी घोषणापत्र (1989): जनता दल ने 1989 के लोकसभा चुनाव में वादा किया था कि सत्य में आने पर मंडल आयोग की सलाहें लागू होंगी।
  4. कैबिनेट का निर्णय: वी.पी. सिंह के प्रधानमंत्री बनने के बाद सेंट्रल कैबिनेट ने 6 अगस्त 1990 को निर्णय लिया।
  5. प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री संसद को सूचना:प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह ने संसद के दोनों सदनों में नामांकन दिया और इसके बाद संबंधित मंत्रालय ने कार्यालय नामांकन तैयार किया।

3. विवाद और बंधक का हस्तक्षेप:

  • इस जजमेंट के खिलाफ देश भर में हिंसक प्रदर्शन और विरोध हुआ। इस आदेश में असंवैधानिक शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं सौंपी गईं।
  • 'इंदिरा साहनी एवं अन्य बनाम भारत' (1992): सर्वोच्च न्यायालय के 11 न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने निर्णय लिया कि सरकार का यह आदेश संवैधानिक रूप से वैध है, लेकिन सरकार को इसमें संशोधन करना चाहिए ताकि पिछड़ा वर्ग के प्रमुख लोगों (क्रीमी लेयर - क्रीमी लेयर) को इस प्रतिष्ठा का लाभ न मिले। सरकार ने इस संशोधन को स्वीकार कर नया आदेश जारी किया और विवाद शांत हो गया।

2. राजनीतिक संसदीय की आवश्यकता और संसद (संसद) की भूमिका

सरकार के ऑपरेशन और नागरिकों की सुरक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए सलाह का होना अनिवार्य है:

संस्थाओं की आवश्यकता क्यों है?

  • प्रधानमंत्री और कैबिनेट नीतिगत जज हैं।
  • सिविल सेवक (नौकरशाह) इन अवकाश को अवकाश पर लागू करते हैं।
  • यदि नागरिकों और सरकार के बीच कोई विवाद हो, तो सर्वोच्च न्यायालय उनके न्यायाधीश समाधान करते हैं।
  • संस्थाओं में देरी का लाभ: सिद्धांतों में कायदे-कानूनों, बैठकों और परामर्श के कारण निर्णय लेने में समय लगता है, लेकिन यह प्रक्रिया किसी भी खराब और गैर-जिम्मेदाराना निर्णय को लागू करने से रोकती है।

संसद (संसद) की सर्वोच्च शक्तियां:

भारत में रिहायशी मकानों की राष्ट्रीय सभा को संसद कहा जाता है (राज्यों में इसे विधानमंडल कहा जाता है)। संसद के पास प्रमुख प्रमुख शक्तियाँ हैं:

  1. कानून बनाने की सर्वोच्च संस्था: देश में नए कानून बनाना, पुराने कानूनों को फिर से शुरू करना या खत्म करना संसद का विशेष अधिकार है।
  2. सरकार पर नियंत्रण: संसद सरकार (मंत्रि परिषद) पर सीधा नियंत्रण है; सरकार केवल तभी तक सत्ता में रह सकती है जब तक उसे संसद का विश्वास प्राप्त हो।
  3. सरकारी धन पर नियंत्रण: जनता के टैक्स से आने वाले पैसे का एक-एक संसद की मंजूरी के बिना खर्च नहीं किया जा सकता है। देश का वार्षिक बजट संसद द्वारा ही जारी किया जाता है।
  4. सार्वजनिक बहस का सर्वोच्च मंच: देश की कोई भी समस्या, विदेश नीति या विनाश के मुद्दे पर खुली चर्चा और बहस का यह सर्वोच्च राष्ट्रीय मंच है।

3. संसद के दोनों सदन: लोकसभा बनाम राज्यसभा (शक्तियों की तुलना)

भारतीय संसद के दो सदन हैं: लोकसभा (लोगों का सदन / निचला सदन) और राज्यसभा (राज्यों की परिषद / उच्च सदन)। भारत के राष्ट्रपति भी संसद के सिद्धांत अंग होते हैं।

आधार लोकसभा (निचला सदन) राज्यसभा (उच्च सदन)
सदस्य संख्या एवं चुनाव कुल 543 सदस्य। जनता द्वारा प्रत्यक्ष मतदान सेलेक्ट करें. अधिकतम 250 सदस्य (238 राज्यों के विधानसभाओं के प्रमुख चयन + 12 राष्ट्रपतियों द्वारा मनोनीत)।
कार्यकाल एवं स्थिर 5 वर्ष (समय से पहले भी भंग किया जा सकता है)। स्थायी सदन (कभी-कभी भंग नहीं होता); प्रत्येक 2 वर्ष पर एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं (6 वर्ष का सदस्य)।
सन्युक्त मूर्तिकला प्रभाव साधारण लार्सन पर समानता होने पर संयुक्त बैठक होती है। विपक्ष की सदस्य संख्या (543) से अधिक है सदस्य संख्या (245) कम होने के कारण संयुक्त बैठक में अपनी बात मनवा पाना कठिन होता है।
धन कारोबार (मनी बिल) बजट और धन कारखाने केवल सामान्यतः पेश किए जा सकते हैं। यूक्रेन के पास होने से इसे खारिज नहीं किया जा सकता। धन वैभव को अधिकतम 14 दिन तक रोका जा सकता है या सुझाव दिया जा सकता है, जिसे सामान्य आधार पर मान्यता प्राप्त है।
सरकार पर नियंत्रण मंत्रि परिषद् केवल जनमत के प्रति गैर जिम्मेदार है। यदि अविश्वास 'अविश्वास प्रस्ताव' (अविश्वास प्रस्ताव) पास कर दे तो प्रधानमंत्री सहित पूरी सरकार को छोड़ देना है। राज्यसभा का अविश्वास प्रस्ताव पास करके सरकार को नहीं छोड़ा जा सकता।

निष्कर्ष:बोलचाल में साझीदारी को 'उच्च सदन' कहा जाता है, लेकिन वास्तविक और व्यावहारिक रूप में लोकसभा ही अधिक शक्तिशाली सदन है क्योंकि यह जनता की प्रत्यक्ष प्रतिनिधि सभा है।

4. राजनीतिक कार्यपालिका: प्रधानमंत्री, कैबिनेट और राष्ट्रपति

सरकार की नीतियों को अमली जामा पहनाने वाले तंत्र को कार्यपालिका (Executive) कहते हैं। इसके दो रूप हैं:

  1. राजनीतिक कार्यपालिका (Political Executive): जनता द्वारा एक निश्चित अवधि के लिए चुने गए मंत्री (जैसे प्रधानमंत्री, गृह मंत्री)। ये बड़े नीतिगत फैसले लेते हैं।
  2. स्थायी कार्यपालिका (Permanent Executive / Civil Services): प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC) द्वारा चुने गए सिविल सेवक (IAS, IPS आदि)। ये सरकार बदलने पर भी पद पर बने रहते हैं और मंत्रियों को नीति निर्माण में तकनीकी सलाह देते हैं।
मंत्री नौकरशाह से अधिक शक्तिशाली क्यों होता है?
अक्सर सिविल सेवक (IAS) संबंधित विषय (अर्थशास्त्र, रक्षा) में मंत्री से कहीं अधिक शिक्षित और विशेषज्ञ होते हैं। फिर भी अंतिम निर्णय मंत्री ही लेता है क्योंकि लोकतंत्र में जनता की इच्छा सर्वोपरि है। मंत्री जनता द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधि होता है और उसे जनता के प्रति जवाबदेह होना पड़ता है; विशेषज्ञ केवल विकल्प बताते हैं, निर्णय जनहित को ध्यान में रखकर जनता का प्रतिनिधि ही करता है।

प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद (Prime Minister & Council of Ministers):

  • प्रधानमंत्री देश की सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक संस्था हैं। राष्ट्रपति लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल या गठबंधन के नेता को प्रधानमंत्री नियुक्त करते हैं।
  • मंत्रिपरिषद के तीन स्तर होते हैं:
    1. कैबिनेट मंत्री (Cabinet Ministers - लगभग 25): सत्तारूढ़ दल के शीर्ष नेता जो प्रमुख मंत्रालयों (गृह, वित्त, रक्षा, विदेश) के प्रभारी होते हैं। कैबिनेट सरकार की मुख्य निर्णयकारी धुरी है।
    2. स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री: प्रायः छोटे मंत्रालयों के प्रभारी।
    3. राज्य मंत्री (Deputy Ministers): कैबिनेट मंत्रियों को उनके कार्य में सहायता देने वाले।
  • प्रधानमंत्री की शक्तियां: वे कैबिनेट की बैठकों की अध्यक्षता करते हैं, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बनाते हैं, मंत्रियों के विभागों का बंटवारा व फेरबदल करते हैं, और किसी भी मंत्री को बर्खास्त कर सकते हैं। यदि प्रधानमंत्री इस्तीफा दे दें, तो पूरी मंत्रिपरिषद का स्वतः पतन हो जाता है।
  • गठबंधन सरकार की सीमाएं: 1989 के बाद भारत में गठबंधन सरकारों का दौर शुरू हुआ, जिसमें प्रधानमंत्री अपने मनमुताबिक फैसले नहीं ले सकते; उन्हें सहयोगी दलों के नेताओं की राय और शर्तों का सम्मान करना पड़ता है।

भारत के राष्ट्रपति (The President):

  • राष्ट्रपति देश के राष्ट्राध्यक्ष (Head of the State) होते हैं, जबकि प्रधानमंत्री सरकार के प्रमुख (Head of the Government) होते हैं।
  • राष्ट्रपति का चुनाव सीधे जनता नहीं करती, बल्कि संसद (सांसद) और राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य (विधायक) करते हैं।
  • राष्ट्रपति राज्य के केवल नाममात्र के प्रमुख (Nominal Executive) हैं। संविधान के अनुसार राष्ट्रपति प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद की सलाह पर ही अपने अधिकारों का प्रयोग करते हैं।
  • विवेकाधीन शक्ति: जब किसी चुनाव में किसी भी दल या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता, तो राष्ट्रपति अपने विवेक से उस नेता को प्रधानमंत्री नियुक्त करते हैं जो उनकी राय में सदन में बहुमत साबित कर सकता हो।

5. स्वतंत्र न्यायपालिका (न्यायपालिका) एवं समीक्षा

भारत में एक एकीकृत और स्वतंत्र न्यायपालिका (एकीकृत और स्वतंत्र न्यायपालिका) है, जिसका शीर्ष न्यायालय सर्वोच्च न्यायालय (भारत का सर्वोच्च न्यायालय) है जो नई दिल्ली में स्थित है। इसके अलावा महाद्वीप में उच्च न्यायालय (उच्च न्यायालय) और जिला अदालतें मौजूद हैं।

1. दस्तावेज़ की आज़ादी कैसे सुनिश्चित की जाती है:

  • न्यायाधीशों की सलाह: सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की सलाह भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) और वरिष्ठ न्यायाधीशों की सलाह (कॉलेज सिस्टमियम) से दी जाती है। इसमें कार्यपालिका की राजनीतिक यात्रीअंदाजी नागिन्य होती है।
  • हटाने की जटिल प्रक्रिया (महाभियोग - महाभियोग): किसी भी न्यायाधीश को पद से हटाना लगभग असंभव है। उन्हें केवल संसद के दोनों सदनों में अलग-अलग दो-तिहाई (2/3) बहुमत से महाभियोग प्रस्ताव स्वीकार करके ही हटाया जा सकता है। स्वतंत्र भारत के इतिहास में आज तक किसी भी न्यायाधीश को महाभियोग द्वारा नहीं हटाया गया है।

2. यहूदियों के प्रमुख अधिकार एवं शक्तियाँ:

  1. विवादों का संबंध: देश के नागरिकों के बीच, नागरिकों और सरकार के बीच, दो या अधिक राज्यों के बीच, और केंद्र और राज्य सरकार के बीच में गठित आबादी का अंतिम हिस्सा सर्वोच्च न्यायालय है।
  2. संवैधानिक व्याख्या और निर्देशांक समीक्षा (न्यायिक समीक्षा): सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों को देश के संविधान की व्याख्या करने का सर्वोच्च अधिकार है। यदि संसद या कार्यपालिका द्वारा कोई विधि संविधान के सिद्धांतों के विरुद्ध बनाया गया है, तो न्यायालय उस विधि को अवैध और असंवैधानिक (शून्य और शून्य) घोषित कर सकता है।
  3. मूल अधिकार का संरक्षक: नागरिक अपने मौलिक अधिकार का अधिकार सीधे उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय पर जा सकता है।
  4. जनहित याचिका (जनहित याचिका - पीआईएल): यदि सरकार की किसी नीति या विफलता से व्यापक नामांकन या गरीबों के अधिकारों का हनन हो रहा है, तो कोई भी नागरिक या संस्था में नामांकन पत्र (पीआईएल) दायर किया जा सकता है। रक्षा के लिए अदालत ने सरकार को स्थायी आदेश जारी कर दिया है।

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शब्दावली, कालक्रम एवं प्रशासनिक व्यवस्था

आयोग मंडल (मंडल आयोग)
अध्यक्ष: बी.पी. मंडल (1979) | रिपोर्ट: 1980
सरकारी दस्तावेज़ में अन्य फ़्लैम वर्ग (OBC/SEBC) में 27% नवीन की ऐतिहासिक पत्रिकाएँ।
कार्यालय ज्ञापन (कार्यालय ज्ञापन)
13 अगस्त 1990 (O.M. No. 36012/31/90)
प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह के नेतृत्व में मंडल आयोग की सिफारिशें लागू करने का आदेश।
इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ (1992)
सर्वोच्च न्यायालय का 11 जजों का ऐतिहासिक फैसला
27% आरक्षण को वैध ठहराया गया, परंतु क्रीमी लेयर (संपन्न पिछड़े) को बाहर करने का निर्देश दिया गया।
लोकसभा बनाम राज्यसभा
लोकसभा: 543 सदस्य (प्रत्यक्ष चुनाव) | राज्यसभा: 250 सदस्य (अप्रत्यक्ष चुनाव)
धन विधेयक व अविश्वास प्रस्ताव में लोकसभा को अनन्य सर्वोच्च अधिकार प्राप्त हैं।
महाभियोग (महाभियोग)
संसद के दोनों सदनों में 2/3 विशेष बहुमत
सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को पद से हटाने की एकमात्र संवैधानिक प्रक्रिया।
अदालत समीक्षा (न्यायिक समीक्षा) और जनहित याचिका
संविधान के मूल ढांचे की रक्षा एवं जनहित याचिका
संसद द्वारा बनाए असंवैधानिक कानूनों को निरस्त करने की न्यायपालिका की शक्ति।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
प्रश्न 1 (दीर्घ उत्तरीय): लोकसभा राज्यसभा की तुलना में अधिक शक्तिशाली सदन क्यों है? इसके समर्थन में किन्हीं तीन मुख्य कारणों का सविस्तार वर्णन कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: हालाँकि प्रजातंत्र को 'उच्च सदनों' के रूप में कहा जाता है, लेकिन भारतीय संविधान के अंतर्गत संवैधानिक और वित्तीय मामलों में लोकसभा ही अधिक शक्तिशाली सदन है। इसके तीन प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:

  1. संयुक्त मजबूत स्थिति में मजबूत बहुमत (संयुक्त बैठक): किसी भी सामान्य बहुमत पर दोनों सदनों के बीच प्रतिष्ठा होने की स्थिति में राष्ट्रपति दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुलाते हैं। डेमोक्रेट की सदस्य संख्या (543) साओजामी (245) से भी अधिक है, मूल रूप से संयुक्त बैठक में समाजवादी पार्टी की राय ही विजयी है।
  2. वित्तीय मामले और बजट में सर्वोच्चता (मनी बिल):आयाम द्वारा एक बार देश का बजट या कोई अन्य धन घोटाला (मनी बिल) पास कर दिया जाए, तो उसे दायरे में नहीं रखा जा सकता। उसे केवल अधिकतम 14 दिन तक रोका जा सकता है या केवल संशोधन की अनुशंसा दी जा सकती है। 16§ इन सुझावों में से किसी एक के लिए बिल्कुल सही नहीं है।
  3. कार्यपालिका और सरकार पर वास्तविक नियंत्रण (विश्वास प्रस्ताव): सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मंत्रिपरिषद केवल मुस्लिम समुदाय के प्रति गैर-जिम्मेदार है। यदि समाजवादी पार्टी की बहुमत सरकार के खिलाफ 'विश्वास प्रस्ताव' (अविश्वास प्रस्ताव) स्वीकृत कर दे, तो प्रधानमंत्री और उनके पूरे दलों को तुरंत त्यागपत्र देना है। सर्जरी के पास सरकारने की ऐसी कोई शक्ति नहीं है।

चुंकी लोकतंत्र में जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से चुनी गई नियुक्ति (लोकसभा) की इच्छा ही सर्वोपरि होनी चाहिए, इसलिए संविधान नेलोकतंत्र को ये सर्वोच्च शक्तियां प्रदान करती हैं।

उदाहरण 2
प्रश्न 2 (लघु उत्तरीय): राजनीतिक कार्यपालिका (राजनीतिक कार्यकारिणी) और स्थायी कार्यपालिका (स्थायी कार्यकारिणी) में अंतर स्पष्ट होगा। मंत्री सिविल सेवक अधिक शक्तिशाली क्यों होता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

1. दोनों में मुख्य अंतर:

राजनीतिक कार्यपालिका स्थायी कार्यपालिका
जनता द्वारा एक निश्चित अवधि (5 वर्ष) के लिए आमादी होते हैं (जैसे प्रधानमंत्री, मंत्री)। सिविल सेवा महाविद्यालयों द्वारा दीर्घकाल के लिए नियुक्तियां होती हैं और संन्यास तक पद पर बने रहते हैं (जैसे आईएएस, आईपीएस)।
ये बड़ी नीतिगत चर्चाएं होती हैं और जनता के प्रति जवाब देते हैं। ये मंत्रियों के समूह को क्रियान्वित करते हैं और समुद्र तट के सहयोगियों को काम करते हैं।

2. मंत्री के अधिक शक्तिशाली होने का कारण:

लोकतंत्र में जनता की इच्छा सर्वोपरि होती है। मंत्री जनता द्वारा चुना गया प्रतिनिधि होता है और उसे अगले चुनाव में जनता को जवाब मिलता है। सिविल सेवक वेल ही अधिक शिक्षित या तकनीकी विशेषज्ञ हों, परंतु विशेषज्ञ केवल तकनीकी सलाह देते हैं; समग्र दृष्टिकोण और विश्लेषण को ध्यान में रखते हुए अंतिम निर्णय जनता का प्रतिनिधि (मंत्री) ही करता है।

उदाहरण 3
प्रश्न 3 (लघु उत्तरीय): मंडल आयोग (मंडल आयोग) क्या था? इसके प्रमुख सिद्धांत क्या थे और इसे किस प्रकार लागू किया गया?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

  1. गठन: भारत सरकार ने 1979 में बी.पी. मंडल के मंडल में 'दूसरा फ़्लाम वर्ग आयोग' का प्रदर्शन किया गया जिसे आम तौर पर मंडल आयोग कहा जाता है। इसका कार्य भारत में सामाजिक और वैज्ञानिक रूप से बैचलर ऑफ आर्ट्स की पहचान करना था।
  2. सिपरीश: आयोग ने 1980 में अपनी रिपोर्ट में बताया कि केंद्र सरकार के सिविल सचिवालय में 27 प्रतिशत रिक्तियां अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी/एसईबीसी) के लिए ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय।
  3. क्रियान्वयन: 1989 में राष्ट्रीय मोर्चा की सरकार बनने पर प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह ने 13 अगस्त 1990 को कार्यालय ज्ञापन द्वारा इस कार्य को लागू करने की घोषणा की। सर्वोच्च न्यायालय ने 1992 में 'इंदिरा साहनी केस' में क्रीमी झील को इस पूर्वोत्तर को वैध दोषी ठहराया।
उदाहरण 4
प्रश्न 4 (लघु उत्तरीय): न्यायपालिका की स्वतंत्रता से क्या तात्पर्य है? भारतीय न्यायपालिका को स्वतंत्र बनाए रखने के लिए संविधान में क्या प्रावधान हैं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

1. मुर्दाघर की आज़ादी का अर्थ:

इसका अर्थ है कि अदालतें कार्यपालिका (सरकार) या विधायिका (संसद) के अनुसार दबाव या नियंत्रण में काम नहीं करतीं और न्यायाधीश बिना किसी राजनीतिक भय या पूर्व के संविधान के व्यावहारिक न्याय करते हैं।

2. स्वतंत्रता के प्रमुख संवैधानिक प्रोविज़:

  • नियुक्ति में स्वतंत्रता: न्यायाधीशों की नियुक्ति में मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) और कॉलेजियम की नियुक्ति अनिवार्य है; सरकार अपने सॉसेज से किसी भी राजनीतिक व्यक्ति को जज नहीं बना सकती।
  • पद की सुरक्षा (महाभियोग): किसी भी न्यायाधीश को उसके पद से हटाना लगभग असंभव है। उन्हें केवल संसद के दोनों सदनों में अलग-अलग दो-तिहाई विशेष बहुमत से महाभियोग (महाभियोग) प्रस्ताव स्वीकार करके ही कदाचार के आधार पर हटाया जा सकता है।
  • वेतन और विशिष्टता: न्यायाधीशों के वेतन-भत्ते भारत की संचित निधि से नीचे दिए गए हैं जहां पर संसद में मतदान नहीं हो सकता।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

राज्यसभा को 'उच्च सदन' मानकर यह समझ लेना कि यह लोकसभा से अधिक शक्तिशाली है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

यह केवल ऐतिहासिक औपनिवेशिक शब्दावली है। भारतीय संविधान में वित्तीय मामलों और सरकार पर नियंत्रण के मामले में लोकसभा, राज्यसभा से कहीं अधिक शक्तिशाली है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की शक्तियों में भ्रमित होना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

राष्ट्रपति 'राष्ट्राध्यक्ष' (राज्य के प्रमुख) और नाममात्र के प्रमुख हैं, जबकि वास्तविक शासक और 'सरकार के प्रमुख' (सरकार के प्रमुख) प्रधान मंत्री और उनके कैबिनेट हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह सोचना कि संसद का कोई भी सदस्य सीधे किसी भी कानून को लागू कर सकता है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

संसद कानून बनाती है, परंतु उसे लागू करने का दायित्व कार्यपालिका (मंत्रियों और सिविल सेवकों) का होता है।

लोकतांत्रिक शासन के तीन प्रमुख अंग एवं शक्ति संतुलन

लोकतंत्र के तीन प्रमुख स्तंभ: विधायिका, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका Working of Institutions: Separation of Powers, Checks & Balances Architecture भारत का संविधान सर्वोच्च विधान विधायिका (संसद / Parliament) • कानून बनाने की सर्वोच्च संस्था लोकसभा: 543 सदस्य (प्रत्यक्ष चुनाव) धन विधेयक व अविश्वास में सर्वोच्च। राज्यसभा: 250 सदस्य (स्थायी सदन) राज्यों के हितों का प्रतिनिधित्व। ✓ राष्ट्रीय बजट व करों पर पूर्ण नियंत्रण कार्य: कानून निर्माण व सरकार पर नियंत्रण कार्यपालिका (Executive) • नीतियों को लागू करने वाली संस्था राष्ट्रपति: राष्ट्राध्यक्ष (नाममात्र) प्रधानमंत्री: सरकार का प्रमुख (वास्तविक) कैबिनेट: प्रमुख मंत्रालयों के 25 मंत्री स्थायी कार्यपालिका: सिविल सेवक (IAS) ✓ मंत्री जनता के प्रति जवाबदेह कार्य: नीति निर्माण एवं दैनिक प्रशासन स्वतंत्र न्यायपालिका (Judiciary - Supreme Court) ✓ संविधान की व्याख्याता एवं मूल अधिकारों की रक्षक ✓ न्यायिक समीक्षा (Judicial Review): असंवैधानिक कानूनों को रद्द करने की शक्ति। ✓ जनहित याचिका (PIL): जनहित के उल्लंघन पर तुरंत न्यायिक हस्तक्षेप। ✓ सुरक्षा: महाभियोग (2/3 संसद बहुमत) के बिना न्यायाधीश को हटाना असंभव। संसद सरकार पर अविश्वास प्रस्ताव ला सकती है न्यायिक समीक्षा द्वारा कानूनों व आदेशों की जांच JAC Class 9 Civics • संस्थाओं का कामकाज: शक्ति पृथक्करण और नियंत्रण एवं संतुलन का जीवंत तंत्र

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
13 अगस्त 1990 का कार्यालय ज्ञापन (मंडल आयोग की सिफारिश पर अन्य पिछड़े वर्गों हेतु 27% आरक्षण) संस्थागत निर्णय प्रक्रिया का ऐतिहासिक उदाहरण है।
मुख्य बिंदु 2
लोकतंत्र में संस्थाएं (संसद, कार्यपालिका, न्यायपालिका) निर्णयों में व्यापक परामर्श सुनिश्चित करती हैं और किसी तानाशाही फैसले को रोकती हैं।
मुख्य बिंदु 3
संसद सर्वोच्च कानून बनाने वाली, राष्ट्रीय बजट पर नियंत्रण रखने वाली और सरकार से जवाबदेही मांगने वाली संस्था है।
मुख्य बिंदु 4
लोकसभा (543 सदस्य) प्रत्यक्ष रूप से चुनी जाती है, जबकि राज्यसभा (250 सदस्य) राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाला स्थायी उच्च सदन है।
मुख्य बिंदु 5
लोकसभा तीन कारणों से राज्यसभा से अधिक शक्तिशाली है: संयुक्त अधिवेशन में निर्णायक संख्याबल, धन विधेयक/बजट पर अनन्य अधिकार, और अविश्वास प्रस्ताव द्वारा सरकार गिराने की शक्ति।
मुख्य बिंदु 6
राजनीतिक कार्यपालिका (मंत्री) जनता द्वारा नियुक्तियाँ और नीति निर्णायक नियुक्तियाँ होती हैं; स्थायी कार्यपालिका (सिविल सेवक/आईएएस) विशेषज्ञ होते हैं जो नियुक्तियों को क्रियान्वित करते हैं।
मुख्य बिंदु 7
लोकतंत्र में जनता की इच्छा सर्वोपरि होने के कारण मंत्री (जनप्रतिनिधि) तकनीकी विशेषज्ञ नौकरशाह से अधिक शक्तिशाली होता है।
मुख्य बिंदु 8
प्रधानमंत्री सरकार के वास्तविक प्रमुख होते हैं; वे कैबिनेट की अध्यक्षता करते हैं और पूरे मंत्रिमंडल का संचालन करते हैं।
मुख्य बिंदु 9
राष्ट्रपति राष्ट्राध्यक्ष (नाममात्र के प्रमुख) हैं जो प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार संवैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हैं।
मुख्य बिंदु 10
भारत की दस्तावेज़ी स्वतंत्र और संगठित है; सर्वोच्च न्यायालय संविधान का संरक्षक, न्यायिक समीक्षा (न्यायिक समीक्षा) का धारक और मूल अधिकारों का संरक्षक है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
आयोग मंडल (मंडल आयोग) ने सरकारी बोर्ड में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए कितने प्रतिशत नामांकन की घोषणा की थी?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: C
बी.पी. मंडल आयोग ने सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से बैचलर ग्रेड (SEBC/OBC) के लिए 27% नैट की पार्टी की थी।
2
भारत में किसी भी धन बैंक (मनी बिल) और वार्षिक बजट को पारित करने का अंतिम अधिकार किस मकान मालिक के पास है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
धन विधेयक केवल लोकसभा में पेश और पारित किया जा सकता है; राज्यसभा इसे केवल 14 दिनों तक रोक सकती है।
3
यदि लोकसभा में सरकार के खिलाफ कौन-सा प्रस्ताव पारित हो जाए तो प्रधानमंत्री सहित पूरे मंत्रिमंडल को इस्तीफा देना पड़ता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
लोकसभा में 'अविश्वास प्रस्ताव' पारित होने पर सरकार गिर जाती है और प्रधानमंत्री को त्यागपत्र देना होता है।
4
सर्वोच्च न्यायालय अथवा उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश को पद से हटाने के लिए संसद में किस प्रक्रिया की आवश्यकता होती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
न्यायाधीश को केवल संसद के दोनों सदनों में अलग-अलग दो-तिहाई विशेष बहुमत से महाभियोग पारित करके ही हटाया जा सकता है।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
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अध्याय 1: प्राचीन विश्व (Ancient World) अध्याय 2: मध्यकालीन विश्व (Medieval World) अध्याय 3: आधुनिक विश्व - I (Modern World - I) अध्याय 4: आधुनिक विश्व - II (Modern World - II) अध्याय 5: भारत पर ब्रिटिश शासन का प्रभाव (Impact of British Rule) अध्याय 6: औपनिवेशिक भारत में सामाजिक सुधार (Religious & Social Awakening) अध्याय 7: ब्रिटिश शासन के विरुद्ध जन प्रतिरोध (Popular Resistance) अध्याय 8: भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन (Indian National Movement) अध्याय 9: भारत का भौतिक स्वरूप (Physiography of India) अध्याय 10: जलवायु (Climate) अध्याय 11: जैव विविधता (Bio-diversity) अध्याय 12: भारत में कृषि (Agriculture in India) अध्याय 13: परिवहन एवं संचार (Transport and Communication) अध्याय 14: जनसंख्या: हमारा संसाधन (Population: Our Greatest Resource) अध्याय 15: संवैधानिक मूल्य एवं राजनीतिक व्यवस्था (Constitutional Values) अध्याय 16: मौलिक अधिकार एवं मौलिक कर्तव्य (Fundamental Rights and Duties) अध्याय 17: भारत - एक कल्याणकारी राज्य (India - A Welfare State) अध्याय 18: स्थानीय शासन एवं प्रशासन (Local Governments) अध्याय 19: राज्य स्तर पर शासन (Governance at State Level) अध्याय 20: केंद्रीय स्तर पर शासन (Governance at Union Level) अध्याय 21: राजनीतिक दल एवं दबाव समूह (Political Parties and Pressure Groups) अध्याय 22: लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जन-सहभागिता (Democratic Participation) अध्याय 23: भारतीय लोकतंत्र की चुनौतियाँ (Challenges to Indian Democracy) अध्याय 24: राष्ट्रीय एकीकरण एवं धर्मनिरपेक्षता (National Integration & Secularism) अध्याय 25: सामाजिक-आर्थिक विकास एवं वंचित वर्ग (Socio-Economic Development) अध्याय 26: पर्यावरणीय क्षरण एवं आपदा प्रबंधन (Environmental Degradation) अध्याय 27: शांति एवं सुरक्षा (Peace and Security)

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