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NIOS • कक्षा X • Social Science (213) • अध्याय 2
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

मध्यकालीन विश्व (Medieval World)

मध्यकालीन विश्व के लिए व्यापक अध्ययन सामग्री और अध्याय नोट्स, एनआईओएस माध्यमिक (कक्षा 10) सामाजिक विज्ञान (213) के लिए व्यवस्थित रूप से तैयार किए गए। नवीनतम नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग पाठ्यक्रम के अनुरूप, यह गाइड मुख्य सैद्धांतिक अवधारणाओं, ऐतिहासिक कालक्रम, भौगोलिक विश्लेषण, संवैधानिक सिद्धांतों, ट्यूटर मार्क्ड असाइनमेंट (टीएमए) दिशानिर्देशों और सार्वजनिक परीक्षा में महारत पर जोर देती है।

क्या एक साधारण आलू ने यूरोप के लाखों लोगों की जिंदगी और मौत का फैसला किया था?

आज हमारे खान-पान का सिद्धांत अंग बन अति आलू, टमाटर, काली मिर्च, मक्का और मसाला लगभग पांच सौ साल पहले तक हमारी मांग के पास नहीं थे! ये खाद्य पदार्थ टैब यूरोप और एशिया क्षेत्र जब कोलंबस ने अमेरिका की खोज की। आयरलैंड के गरीब आलू पर आशावादी हो गए कि जब 1845-1849 के बीच आलू की बीमारी (फंगस) की बीमारी से आलू की फसल नष्ट हो गई, तो करीब 10 लाख लोग भुखमरी से तड़प-तड़प कर मर गए! इसे इतिहास में 'आयरिश आलू अकाल' (आयरिश आलू अकाल) कहा जाता है। यह बात का प्रमाणिक प्रमाण है कि वैश्विक संपर्क ने मानव इतिहास की कितनी गहराई को प्रभावित किया।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

एनआईओएस और एनआईओएस कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षा में 'भूमंडलीकृत विश्व कादों' से रेशम मार्ग के महत्व, कॉर्न लॉ के प्रभाव, 19वीं शताब्दी में तकनीकी भूमिका (प्रशिक्षित जहाज), रिंडरपेस्ट महामारी के अफ्रीकन समाज पर प्रभाव, गिरमिटिया श्रम प्रणाली, 1929 की महानदी के कारण और भारत पर प्रभाव, और ब्रेटन वुड्स के संस्थापकों (आईएमएफ और विश्व बैंक) पर 3 से 5 तक के भौतिक विज्ञान के प्रश्न अनिवार्य रूप से बताए गए हैं। यह अध्याय समकालीन अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और वित्तीय संकटों को समझने की क्षमता तैयार करता है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • विश्व मानचित्र पर प्रमुख महाद्वीपों (एशिया, यूरोप, अफ्रीका, उत्तर व दक्षिण अमेरिका) की अवस्थिति का बुनियादी ज्ञान।
  • उपनिवेशवाद और औद्योगिक क्रांति की बुनियादी समझ।
  • मुद्रा (मुद्रा), आयात-निर्यात (व्यापार) और प्रवासन (प्रवासन) की प्राथमिक संकल्पनाएँ।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • प्राचीन रेशम मार्ग (रेशम मार्ग) और खाद्य पदार्थों के संयोजन-सक्षम (खाद्य यात्रा) के ऐतिहासिक महत्व का विश्लेषण करना।
  • अमेरिका की विजय में कीटाणुओं (चेचक) की विनाशकारी भूमिका तथा यूरोप में 'कॉर्न लॉ' के उन्मूलन के प्रभावों की व्याख्या करना।
  • 19वीं सदी में तकनीक (प्रशीतित पोत), अफ्रीका में रिंडरपेस्ट महामारी तथा भारत से गिरमिटिया मजदूरी प्रथा की कार्यप्रणाली का मूल्यांकन करना।
  • 1929 की महामंदी के प्रमुख कारणों, उसके वैश्विक फैलाव तथा भारतीय कृषि व अर्थव्यवस्था पर पड़े प्रभावों का परीक्षण करना।
  • ब्रेटन वुड्स कॉन्फ्रेंस (1944), ब्रेटन वुड्स ट्विन पिक्चर्स (आईएमएफ और विश्व बैंक) और जी-77 के गठन की पृष्ठभूमि को स्पष्ट करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. आधुनिक युग से पहले: रेशम मार्ग,...
2 2. उन्नीसवीं सदी (1815–1914): विश्व...
3 3. 19वीं सदी के उत्तरार्ध में उपनिव...
4 4. महायुद्धों के बीच अर्थव्यवस्था:...
5 5. युद्धोत्तर पुनर्निर्माण: ब्रेटन...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. आधुनिक युग से पहले: रेशम मार्ग, भोजन की यात्रा और कीटाणु

1.1 रेशम मार्ग (Silk Routes) से जुड़ती दुनिया

आधुनिक युग से पूर्व विश्व के विभिन्न भागों को परस्पर जोड़ने वाले व्यापारिक व सांस्कृतिक संपर्कों का सबसे जीवंत उदाहरण रेशम मार्ग (Silk Route) है:

  • नामकरण: इस मार्ग से पश्चिमी एशिया और यूरोप को भेजे जाने वाले चीनी रेशम (Silk) के भारी व्यापार के कारण इसे 'रेशम मार्ग' कहा गया।
  • भौगोलिक विस्तार: यह थल और जल दोनों मार्गों से विस्तृत था। इसने एशिया के विशाल भूभागों को परस्पर जोड़ने के साथ-साथ एशिया को यूरोप और उत्तरी अफ्रीका से जोड़ा। यह ईसा पूर्व के समय से 15वीं सदी तक फलता-फूलता रहा।
  • सांस्कृतिक व व्यापारिक आदान-प्रदान: चीनी पॉटरी, भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के मसाले व कपड़े इसी रास्ते पश्चिम जाते थे। वापसी में सोना-चांदी जैसी कीमती धातुएं यूरोप से एशिया आती थीं। इसी मार्ग से ईसाई मिशनरी, मुस्लिम उपदेशक और बौद्ध धर्म के प्रचारक विभिन्न देशों में पहुंचे।

1.2 भोजन की यात्रा: स्पैगेटी और आलू

व्यापारी और यात्री जब नए देशों में जाते थे, तो जाने-अनजाने नई फसलों के बीज भी वहाँ पहुंचा देते थे:

  • नूडल्स और स्पैगेटी: माना जाता है कि नूडल्स चीन से पश्चिम पहुंचे और वहाँ उनसे स्पैगेटी (Spaghetti) का जन्म हुआ। पास्ता 5वीं सदी में अरब यात्रियों के साथ इटली के सिसिली द्वीप पहुंचा।
  • अमेरिका से नए खाद्य पदार्थ: आलू, सोया, मूंगफली, मक्का, टमाटर, मिर्च और शकरकंद जैसे आम खाद्य पदार्थ कोलंबस द्वारा 16वीं सदी में अमेरिका की खोज के बाद शेष विश्व में पहुंचे।
  • आयरिश आलू अकाल (1845–1849): आलू के आने से यूरोप के गरीबों का जीवन पूरी तरह बदल गया। आयरलैंड के गरीब काश्तकार आलू पर इतने निर्भर हो गए कि जब 1840 के दशक के मध्य में फंगस से आलू की फसल नष्ट हुई, तो 10 लाख से अधिक लोग भुखमरी से मर गए और लाखों लोग आजीविका की तलाश में विदेश भाग गए।

1.3 विजय, बीमारी और व्यापार: अमेरिका में कीटाणुओं का हथियार

16वीं सदी में पुर्तगाली और स्पेनिश सेनाओं द्वारा अमेरिका की विजय केवल सैन्य शक्ति पर आधारित नहीं थी:

जैविक हथियार के रूप में चेचक (Smallpox): सदियों तक दुनिया के अन्य हिस्सों से अलग-थलग रहने के कारण अमेरिका के मूल निवासियों के शरीर में यूरोप से आने वाली बीमारियों से लड़ने की रोग-प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) नहीं थी। स्पेनिश विजेताओं के साथ पहुंचे चेचक के कीटाणु एक घातक जैविक हथियार साबित हुए। इसने पूरे के पूरे समुदायों का सफाया कर दिया और स्पेनियों को बिना किसी बड़े सैन्य प्रतिरोध के जीत दिला दी।

18वीं सदी तक चीन और भारत विश्व के सबसे धनी देश थे और एशियाई व्यापार में उनका दबदबा था। परंतु 15वीं सदी के बाद चीन ने अपने विदेशी संबंध सीमित कर लिए, जिससे विश्व व्यापार का केंद्र धीरे-धीरे पश्चिम की ओर यानी यूरोप में स्थानांतरित हो गया।

2. उन्नीसवीं सदी (1815–1914): विश्व अर्थव्यवस्था और तकनीकी प्रगति

2.1 अर्थशास्त्रियों द्वारा पहचाने गए तीन वैश्विक प्रवाह (Three Flows)

19वीं सदी के अंतरराष्ट्रीय आर्थिक आदान-प्रदान में अर्थशास्त्रियों ने तीन प्रकार के प्रवाहों को चिह्नित किया:

  1. व्यापार का प्रवाह (Flow of Trade): वस्तुओं (जैसे कपड़ा या गेहूं) का सीमा पार आदान-प्रदान।
  2. श्रम का प्रवाह (Flow of Labour): रोजगार की तलाश में लोगों का एक स्थान से दूसरे स्थान पर प्रवासन।
  3. पूंजी का प्रवाह (Flow of Capital): अल्पकालिक या दीर्घकालिक निवेश हेतु दूर-दराज के क्षेत्रों में पूंजी का संचलन।

2.2 कॉर्न लॉ (Corn Laws) का निरसन और वैश्विक कृषि अर्थव्यवस्था

18वीं सदी के अंत में ब्रिटेन की जनसंख्या तेजी से बढ़ी, जिससे खाद्यान्न की मांग बढ़ गई। भूस्वामियों के दबाव में सरकार ने मक्के (Corn) के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया। इन कानूनों को 'कॉर्न लॉ' कहा जाता था।

  • प्रभाव: खाद्य पदार्थों की कीमतें आसमान छूने लगीं। उद्योगपतियों और शहरी निवासियों के भारी विरोध के चलते सरकार को कॉर्न लॉ रद्द करने पड़े।
  • कॉर्न लॉ रद्द होने के परिणाम:
    • ब्रिटेन में विदेशों से खाद्यान्न का आयात इतना सस्ता हो गया कि ब्रिटिश किसान आयातित अनाज की कीमतों का मुकाबला नहीं कर सके।
    • हजारों एकड़ भूमि पर खेती बंद हो गई, लाखों किसान बेरोजगार होकर शहरों या विदेशों (अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया) में पलायन कर गए।
    • ब्रिटेन में भोजन सस्ता होने से उपभोग बढ़ा, और रूस, अमेरिका व ऑस्ट्रेलिया में ब्रिटिश मांग को पूरा करने के लिए विशाल कृषि भूमि तैयार की गई।

2.3 तकनीक की भूमिका: रेलवे, भाप के जहाज और प्रशीतित पोत

19वीं सदी के वैश्विक परिवर्तन में रेलवे, स्टीमशिप और टेलीग्राफ का असाधारण योगदान रहा:

तकनीकी नवाचारपहले की स्थितितकनीक के बाद क्रांतिकारी बदलाव
प्रशीतित जलपोत (Refrigerated Ships)1870 के दशक तक अमेरिका से यूरोप केवल जीवित जानवर भेजे जाते थे। वे जहाजों में बहुत जगह घेरते थे, कई रास्ते में बीमार हो जाते या मर जाते थे। इस कारण यूरोप में मांस एक दुर्लभ और महंगा विलासिता उत्पाद था।नई तकनीक से जहाजों में रेफ्रिजरेशन लगाया गया। अब जानवरों को अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया में ही काटकर उनका मांस ठंडा करके भेजा जाने लगा। इससे परिवहन लागत गिरी और यूरोप में गरीबों को भी सस्ता मांस, मक्खन व अंडे मिलने लगे।
रेलवे और भाप के इंजनखेतों से बंदरगाहों तक माल ढोना धीमा और खर्चीला था।दूरदराज के कृषि क्षेत्रों को बंदरगाहों से तेजी से जोड़ा गया; भारी मात्रा में अनाज व कच्चा माल वैश्विक बाजारों में पहुंचने लगा।

3. 19वीं सदी के उत्तरार्ध में उपनिवेशवाद, रिंडरपेस्ट और गिरमिटिया श्रम

3.1 अफ्रीका का बंटवारा और रिंडरपेस्ट महामारी (1890 का दशक)

1885 में बर्लिन में यूरोपीय सेनाओं ने एक सम्मेलन आयोजित किया और अफ्रीका के मानचित्र पर रूझान खींचकर पूरे महाद्वीप को जीत में शामिल कर लिया (अफ्रीका का कागजी विभाजन)। 1880 के दशक के उत्तरार्ध में ब्रिटिश एशिया से पूर्वी अफ़्रीका की बीमारी के माध्यम से उन युवाओं को आकर्षित किया गया, जिनमें इतालवी सैनिकों का भोजन शामिल था।
1. रिंडरपेस्ट जंगल आग की तरह फैला हुआ है और अफ्रीका के लगभग 90% जंगल को मार डाला
2। अफ़्रीका के लोग गुटबाजी पर अड़े हुए थे और वे तानाशाही करने की इच्छा नहीं रखते थे। 12§3। यूरोपीय उपनिवेशवादियों ने एकाधिकारिक और अफ़्रीकी लोगों को ऐतिहासिक खदानों और बागों में मत्था टेकने के लिए कहा। बागवानों, खदानों और रेलवे निर्माण के तहत इंजीनियरों को भेजा गया। इस एग्रीमेंट को मजदूर 'गिरमिटिया' कहते थे, जिससे वे 'गिरमितिया' (गिरमिटिया मजदूर) कहलाए।

  • गंतव्य देश: कैरेबियाई द्वीप (त्रिनिदाद, गुयाना, सूरीनाम), मॉरीशस, फिजी और सीलोन (श्रींका)। अर्थशास्त्रियों ने 'नई दास प्रथा' (गुलामी की नई प्रणाली) का नाम दिया।
  • सांस्कृतिक समावेशन: इसके विपरीत अर्थशास्त्रियों ने अपनी कविता का सम्मिलन किया:
    • त्रिनिदाद में मूरम के मार्च को एक विशाल उत्सवी फिल्म का रूप दिया गया। 'होसे' (होसे) कहा गया, जिसमें सभी कलाकारों और धर्मों के लोग भाग लेते थे।
    • सूरीनाम और गयाना में 'चटनी म्यूजिक' (चटनी म्यूजिक) का जन्म हुआ।
    • नोबेल पुरस्कार विजेता लेखक वी.एस. नायपॉल और वेस्ट के क्रिकेटर शिवनारायण चंद्रपॉल और रामनरेश सरवन डूबते गिरमिटिया के कलाकार।

4. महायुद्धों के बीच अर्थव्यवस्था: 1929 की महामंदी

4.1 प्रथम विश्व युद्ध और युद्ध कालानुक्रमिक रूपांतरण

पहला विश्व युद्ध (1914-1918) आधुनिक औद्योगिक युद्ध जिसमें मशीनगन, टैंकों, हवाई हथियारों और रासायनिक हथियारों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया गया था। 90 लाख से अधिक लोग मारे गए और 2 करोड़ घायल हो गए।

4.2 महामंदी के कारण (1929 की महामंदी)

1929 के आसपास शुरू हुई महामंदी ने विश्व के अधिकांश क्षेत्रों में उत्पादन, रोजगार, आय और व्यापार में भयंकर गिरावट ला दी। इसके दो मुख्य कारण थे:

  1. कृषि क्षेत्र में अति-उत्पादन (कृषि अतिउत्पादन): युद्ध के दौरान कृषि उत्पादन में अत्यधिक वृद्धि हुई। युद्ध समाप्त होने के बाद सैनिक बुरी तरह गिरीं। किसानों ने अपना आय बनाए रखा, उत्पादन और स्केल के लिए बाजार में माल प्लाट और जमीन बेची और नीचे गिरा दिया; 23§
  2. अमेरिकी कर्जों पर भारी संपत्ति: 1920 के दशक में दुनिया भर के देश अमेरिका से कर्ज ले रहे थे। जब अमेरिका ने कर्ज़ में कटौती शुरू की, तो उन पर उदार देशों में वित्तीय संकट खड़ा हो गया। यूरोप में कई बड़े बैंक डूब गए और मुद्रा का अवमूल्यन हो गया (ब्रिटिश पाउंड की तरह)।

अक्टूबर 1929 में न्यूयॉर्क के वॉल स्ट्रीट एक्सचेंज (वॉल स्ट्रीट एक्सचेंज) के शेयर बाजार के धराशायी होने से महामंडी की शुरुआत हुई। अमेरिका में 4,000 से अधिक बैंक दिवालिया हो गए और 1,10,000 कंपनियां बंद हो गईं। रहा:

  • आयात-निर्यात आधा रह: 1928 से 1934 के बीच भारत का विदेशी व्यापार लगभग आधा रह।
  • किसानों पर भीषण मार: एशिया में सबसे बड़ा किसान संकट में डूब गया, भारत में किसानों की संख्या 50% तक गया. औपनिवेशिक सरकार ने साभार कम करने से इनकार कर दिया, जिससे किसान कर्ज के दुष्चक्र में फंस गए। 1930 के दशक में भारत में भारी मात्रा में सोने का सहयोगी बन गया, जिसने ब्रिटिश अर्थव्यवस्था को तो सहारा दिया लेकिन भारतीय ग्रामीण समाज को कंगाल बना दिया।

5. युद्धोत्तर पुनर्निर्माण: ब्रेटन वुड्स संस्थाएँ एवं G-77

5.1 ब्रेटन वुड्स कॉन्फ्रेंस (1944) और ट्विन संस्थाएं

अन्य विश्व युद्ध के बाद अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने महसूस किया कि आर्थिक स्थिरता के बिना विश्व शांति संभव नहीं है। जुलाई 1944 में अमेरिका के न्यू हैप्सशायर के ब्रेटन वुड्स (ब्रेटन वुड्स) में संयुक्त राष्ट्र संघ एवं वित्तीय सम्मेलन हुआ:

1. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF)

सदस्या देश के विदेशी व्यापार में लाभ और समृद्धि से लेकर विलासिता तक की जगह उपलब्ध है। पुनर्विकास की स्थिरता सुनिश्चित करना।

2। विश्व बैंक (IBRD)

युद्धस्तर पुनर्निर्माण और विकास कार्यों के लिए अमेरीका में साझा करना।

दोनों सिद्धांतों को 'ब्रेटन वुड्स की जुड़वाँ माताएँ' (ब्रेटन वुड्स ट्विन्स) कहा जाता है। इन पर पश्चिमी औद्योगिक और विशेष रूप से अमेरिका का वीटो अधिकार था। संयुक्त बाजार G-77 (77 देशों का समूह) का गठन।

  • उनकी मुख्य मांग नई अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था (NIEO - New International इकोनॉमिक ऑर्डर) थी, जिसके अंतर्गत वे:
    • अपने प्राकृतिक सिद्धांत पर वास्तविक संप्रभुता चाहते हैं थे
    • कच्चे माल के नियोजित बांध और विकसित देश के उपकरण में अपनी तैयार माल की आसान पहुँच चाहते थे। (MNCs) का उदय

      1970 दशक से अमेरिकी डॉलर की सर्वोच्चता कमजोर स्थिति और स्थिर विनिमय दर (निश्चित विनिमय दर) का स्थान परिवर्तन विनिमय दर (फ्लोटिंग विनिमय दर) की प्रणाली लागू हुई।

      1970 के दशक के उत्तरार्ध से बहुराष्ट्रीय निगमों ने उत्पादन उत्पादन संयुक्त राज्य अमेरिका (विशेषकर चीन, भारत, वियतनाम) में स्थानांतरित करना शुरू किया गया जहां श्रम बहुत सस्ता था। वैश्विक व्यापार और रोजगार के परिदृश्य को पूरी तरह से बदल दिया गया।

  • महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शब्दावली, कालक्रम एवं प्रशासनिक व्यवस्था

    रेशम मार्ग (रेशम मार्ग)
    एशिया को यूरोप व उत्तरी अफ्रीका से जोड़ने वाला ऐतिहासिक व्यापारिक व सांस्कृतिक नेटवर्क।
    1845 - 1849
    आयरिश आलू अकाल (Irish Potato Famine); 10 लाख से अधिक लोगों की भुखमरी से मृत्यु।
    मकई कानून (मकई कानून)
    ब्रिटेन में मक्के के आयात पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून (19वीं सदी में निरस्त)।
    1885 बर्लिन सम्मेलन
    यूरोपीय शक्तियों द्वारा अफ्रीका का मानचित्र पर लकीरें खींचकर बंटवारा।
    1890 का दशक (अफ्रीका)
    रिंडरपेस्ट (मवेशी प्लेग) महामारी; 90% मवेशियों की मौत और श्रम नियंत्रण।
    अनुबंधित श्रम (गिरमिटिया)
    अनुबंध पर त्रिनिदाद, फिजी, मॉरीशस आदि भेजे गए भारतीय मजदूर ('नई दास प्रथा')।
    होसे (होसे) मेला
    त्रिनिदाद में मुहर्रम पर सभी धर्मों के गिरमिटिया मजदूरों द्वारा मनाया जाने वाला कार्निवल।
    अक्टूबर 1929
    न्यूयॉर्क के वॉल स्ट्रीट एक्सचेंज का पतन; महामंदी (Great Depression) की शुरुआत।
    1928 - 1934
    महामंदी के दौरान भारत का विदेशी व्यापार 50% गिरा; गेहूं के दाम आधे हुए।
    जुलाई 1944
    ब्रेटन वुड्स सम्मेलन (अमेरिका); IMF और विश्व बैंक (IBRD) की स्थापना।
    जी-77 और एनआईईओ
    विकासशील देशों का समूह जिसने 'नई अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रणाली' की मांग की।
    एमएनसी (बहुराष्ट्रीय कंपनी)
    ऐसी कंपनी जिसका उत्पादन व व्यापार एक से अधिक देशों में फैला होता है।

    अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

    उदाहरण 1
    रेशम मार्ग (सिल्क रूट) से क्या अभिप्राय है? विश्व के अंतर-संबंधों को पुराण बनाने में इसकी क्या भूमिका थी?
    विस्तृत समाधान / उत्तर:
    रेशम मार्ग का अर्थ:
    'रेशम मार्ग' थाल और जल दोनों चित्रों से स्थापित एक ऐतिहासिक अंतर-महाद्वीपीय व्यावसायिक नेटवर्क था, जो ईसा पूर्व की राजधानी से लेकर 15वीं शताब्दी तक फलता-फूलता रहा। इस मार्ग से पश्चिम को भेजे जाने वाले स्कार्फ चीनी रेशम (सिल्क) के कारण इसका नाम 'सिल्क रूट' है।

    विश्व संपर्क में रेशम मार्ग की भूमिका:
    1। भौगोलिक शहर: इस मार्ग ने एशिया के विशाल क्षेत्रों को जोड़ा और एशिया को यूरोप और उत्तरी अफ्रीका से जोड़ा।
    2. वस्तुओं का व्यापार: चीनी मिट्टी के बर्तन (P陶tery), भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के कपड़े और इसी मार्ग से यूरोप गये थे। यूरोप में वापसी सोना, चाँदी और सेंसेक्स जैसी धातुएँ एशिया में आती हैं।
    3। सांस्कृतिक व धार्मिक प्रचार: केवल व्यावसायिक सामान ही नहीं, बल्कि ज्ञान और धर्म का उद्गम-बोध भी इसी मार्ग से हुआ। ईसाई ईसाई मिशनरी, मुस्लिम धर्मप्रचारक और भारत से बौद्ध धर्म इसी मार्ग से मध्य एशिया, चीन और जापान तक।
    उदाहरण 2
    ब्रिटेन में 'कॉर्न लॉ' को समाप्त करने के क्या कारण थे? इसके उन्मूलन के ब्रिटिश अर्थव्यवस्था और समाज पर क्या दूरगामी प्रभाव पड़े?
    विस्तृत समाधान / उत्तर:
    कॉर्न लॉ की समाप्ति का कारण:
    18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में ब्रिटेन की जनसंख्या में तेजी से वृद्धि और औद्योगिकीकरण के कारण शहरों का विस्तार हुआ।
    खाद्य की मांग पर बढ़ी भूस्वामियों ने सरकार पर दबाव बनाने वाली कंपनियों (विशेषकर मक्के) के आयात पर भारी मात्रा में प्रतिबंध लगा दिया, जिसमें 'कॉर्न लॉ' भी शामिल है। उनके व्यापक जनांदोलन के कारण अंततः ब्रिटिश संसद को कॉर्न लॉ रद्द करना पड़ा। सबसे सस्ते अनाज का आयात: कानूनी उत्पादन के बाद अनाज का इतना सस्ता आयात शुरू हुआ कि ब्रिटिश किसान उसका मुकाबला नहीं कर सके।
    2. कृषि भूमि का परित्याग और स्थानांतरण: ब्रिटेन में बड़े पैमाने पर कृषि बंद हो गई। लाखों किसान मजदूर खेत शहरों या अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की ओर से पलायन कर गए।
    3. वैश्विक कृषि क्रांति: ब्रिटेन में अनाज की बहुलता वाली संपत्तियों को पूरा करने के लिए पूर्वी यूरोप, रूस, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में लाखों हेक्टेयर को साफ कर कृषि भूमि बनाई गई और उन्हें बंदरगाहों से जोड़ने के लिए रेलवे का जाल बिछाया गया।
    उदाहरण 3
    प्रौद्योगिकी ने उन्नीसवीं सदी की वैश्विक उद्योग को किस प्रकार रूपांतरित किया? 'प्रशीतित जलपोतों' (प्रशीतित जहाज) का उदाहरण स्पष्ट है।
    विस्तृत समाधान / उत्तर:
    तकनीकी आविष्कार—जैसे रेलवे, एसटीडी के कर्मचारी और टेलीग्राफ—ने 19वीं सदी की दुनिया को एक पंजीकृत वैश्विक बाजार में बदल दिया। इसका सबसे क्रांतिकारी उदाहरण मांस व्यापार में रेफ्रिजरेशन तकनीक का आगमन था:

    1. 1870 के दशक से पहले की समस्या: अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया से जीवित साथियों को लड़कों में लादकर यूरोप ले जाया गया था। जीवित पशु-पक्षी बहुत अधिक जगह घेरते थे, यात्रा के दौरान समुद्री तूफ़ान और झीलों से बड़ी संख्या में मर जाते थे, या उनका वज़न बहुत कम हो जाता था जिससे वे खाने योग्य नहीं रह जाते थे। मूल रूप से यूरोप में मांस बहुत महंगा था और केवल समृद्ध पास्ता वर्ग ही इसे खा सकता था।
    2। प्रशिक्षित खिलाड़ियों का आविष्कार: 1870 के दशक के अंत में प्रशीतित खिलाड़ियों के विकसित होने से स्थिति पूरी तरह से बदल गयी। अब अमेरिका या ऑस्ट्रेलिया में ही बूचड़खानों को अनकहा जाने लगा और केवल उनके जमे हुए मांस को यूरोप भेजने लगा।
    3. आर्थिक और सामाजिक परिणाम:बेरोजगारी में जगह की बचत बढ़ी और परिवहन लागत में भारी गिरावट आई। यूरोप के उपकरणों में मांस के दाम बहुत कम हो गए। अब यूरोप के गरीब मजदूर भी अपने आहार में मांस, मक्खन और अंडों को शामिल कर सकते थे। इस बाइबिल के जीवन स्तर में सुधार और सामाजिक शांति स्थापित करने में मदद मिली।
    उदाहरण 4
    1929 की महामंदी (महामंदी) के प्रमुख लक्षण। इसका भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा?
    विस्तृत समाधान / उत्तर:
    1929 की महानदी के प्रमुख कारण:
    1. कृषि में अति-उत्पादन (कृषि अतिउत्पादन): प्रथम विश्व युद्ध के दौरान मांग पूरी करने से विश्व भर में अनाज का उत्पादन अत्यधिक बढ़ गया था। युद्ध के बाद मांग घटी उत्पाद जारी हो रहा है, जिससे सुपरमार्केट जमीन पर आ गिरीं। किसानों ने घोटाले और अधिक उत्पादन किया, जिससे बाजार में सामान मंगाने लगा और किसानों की विखंडित शक्ति नष्ट हो गई।
    2. अमेरिकी ऋण प्रणाली का चरमराना: 1920 के दशक में वैश्विक अर्थव्यवस्था अमेरिकी ऋण पर टिकी थी। प्रगति के लक्षण - अमेरिकी बैंकों ने घरेलू और विदेशी ऋण वापसी की शुरुआत नीचे दी है। अक्टूबर 1929 में न्यूयॉर्क का 'वॉल स्ट्रीट रिव्यू' धराशायी हो गया। अमेरिका में हजारों बैंक और लाखों कंपनियां दिवालिया हो गईं।

    भारत पर महामंदी का प्रभाव:
    1. व्यापार में भारी गिरावट: 1928 से 1934 के मध्य भारत का महत्व-निर्यात जुड़ाव आधा (50%) रह गया।
    2. किसानों पर मार्च: अंतरराष्ट्रीय बाजार में मंदी से भारत में 50% और कच्चे पाटसन (जूट) के 60% तक गिर गया। ब्रिटिश हुकूमत ने किसानों की कर्जमाफी में कोई छूट नहीं दी, जिससे किसान भारी कर्ज में डूब गये।
    3. सोने का प्रतियोगी: अपने दैनिक खर्चे और लगाने के लिए किसानों ने अपना 'स्त्रीधन' और सोने के आभूषण बेचे। 1930 के दशक में भारत में भारी मात्रा में सोने का सहयोगी बन गया, जिसने ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को तो अपने कब्जे में ले लिया लेकिन भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थिर कर दिया गया।
    उदाहरण 5
    ब्रेटन वुड्स सम्मेलन (1944) के क्या उद्देश्य थे? इसे 'ब्रेटन वुड्स की जुड़वां संतानें' क्यों कहा जाता है, और विकासशील देशों ने इसके जवाब में G-77 का गठन क्यों किया?
    विस्तृत समाधान / उत्तर:
    ब्रेटन वुड्स सम्मेलन और उद्देश्य:
    जुलाई 1944 में अमेरिका के न्यू हैम्पशायर स्थित ब्रेटन वुड्स में संयुक्त राष्ट्र का स्मारक एवं वित्तीय सम्मेलन आयोजित हुआ। इसका मुख्य उद्देश्य युद्ध काल में वैश्विक आर्थिक स्थिरता और पूर्ण रोजगार की रक्षा करना था। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ): सदस्य देशों के विदेशी व्यापार आकर्षण से विनिमय और विनिमय दर को स्थिर बनाए रखना।
    2. विश्व बैंक (IBRD): युद्ध से लेकर देशों के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए उपलब्ध सुविधाएं।
    चुंकी इन दोनों का जन्म एक ही नाटक से हुआ था, उदाहरण के लिए 'ब्रेटन वुड्स के जुड़वाँ साथी' कहते हैं।

    G-77 का गठन क्यों हुआ:
    1. आईएमएफ और विश्व बैंक पर अमेरिका और पश्चिमी औद्योगिक देशों का दबदबा था। उनके पास 'वीटो पावर' थी।
    2। 1950 और 60 के दशक में स्वतंत्र नव-उपनिवेशित उत्तर पश्चिमी देशों को पश्चिमी देशों से कोई विशेष सहायता या विकास लाभ नहीं मिल रहा था।
    3. मूल रूप से उन्नत अर्थव्यवस्था ने अपने आर्थिक अधिकारों की रक्षा के लिए G-77 (77 देशों का समूह) का निर्माण और एक नई अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली आर्थिक (NIEO) की मांग की, ताकि उन्हें अपने प्राकृतिक सिद्धांतों पर नियंत्रण, कच्चे माल के बांध और विकसित देशों के व्यापार में न्यायसंगत सुविधा मिल सके।

    सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

    सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

    यह समझना कि आलू, टमाटर और मिर्च भारत में प्राचीन काल से ही उगाए जाते रहे हैं।

    सही वैज्ञानिक तथ्य

    आलू, टमाटर, मक्का और मिर्च मूल रूप से अमेरिकी महाद्वीप की फसलें हैं, जो 16वीं सदी में क्रिस्टोफर कोलंबस द्वारा अमेरिका की खोज के बाद यूरोप और एशिया पहुंचीं।

    सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

    रिंडरपेस्ट को मानव बीमारी या चेचक का एक रूप समझ लेना।

    सही वैज्ञानिक तथ्य

    रिंडरपेस्ट मवेशियों (गायों, बैलों व भैंसों) में फैलने वाला एक अत्यंत संक्रामक एवं घातक वायरस-जनित प्लेग था, जिसने 1890 के दशक में अफ्रीका के 90% पशु मार डाले।

    सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

    कॉर्न लॉ को मक्का उगाने को बढ़ावा देने वाला कानून मानना।

    सही वैज्ञानिक तथ्य

    कॉर्न लॉ ब्रिटिश जमींदारों द्वारा मक्के के 'आयात पर प्रतिबंध' लगाने वाले कानून थे ताकि ब्रिटेन में उनके अनाज के दाम ऊंचे बने रहें। इसे 19वीं सदी में निरस्त किया गया।

    सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

    ब्रेटन वुड्स ने जुड़वा बच्चों को संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएन) में शामिल कर लिया।

    सही वैज्ञानिक तथ्य

    ब्रेटन वुड्स की जुड़वां संस्थाएँ केवल दो वित्तीय संस्थाएँ हैं: अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और अंतर्राष्ट्रीय पुनर्निर्माण एवं विकास बैंक (IBRD / विश्व बैंक)।

    सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

    यह मानना कि 1929 की महामंदी से भारत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा क्योंकि भारत एक कृषि प्रधान देश था।

    सही वैज्ञानिक तथ्य

    भारत अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ा था; महामंदी से भारत का विदेशी व्यापार 50% गिरा, कृषि उत्पादों (गेहूं, जूट) के दाम आधे हो गए और किसानों को लगान चुकाने हेतु भारी मात्रा में सोना बेचना पड़ा।

    वैश्वीकरण का ऐतिहासिक कालक्रम (सिल्क रूट से ब्रेटन वुड्स तक)

    भूमंडलीकृत विश्व का बनना: ऐतिहासिक चरण एवं संस्थागत ढांचापूर्व आधुनिक काल (16वीं सदी तक)सिल्क रूट व भोजन प्रवाह• सिल्क रूट: एशिया-यूरोप थल/जल• चीनी रेशम, मसाले व चांदी प्रवाह• खाद्य यात्रा: स्पैगेटी, आलू, मिर्च• 1845-49: आयरिश आलू अकाल• अमेरिका पर विजय:चेचक (Smallpox) जैविक हथियार• व्यापार केंद्र का यूरोप खिसकना19वीं सदी (1815 - 1914)विश्व अर्थव्यवस्था व तकनीक• 3 प्रवाह: व्यापार, श्रम, पूंजी• कॉर्न लॉ रद्द: सस्ता अनाज आयात• प्रशीतित पोत: सस्ता मांस व्यापार• 1885 बर्लिन: अफ्रीका का बंटवारा• 1890 रिंडरपेस्ट महामारी:90% मवेशी मरे; मजदूर बनाए गए• गिरमिटिया मजदूरी (फिजी, गयाना)20वीं सदी (महामंदी व पुनर्निर्माण)महामंदी व ब्रेटन वुड्स• प्रथम विश्व युद्ध: अमेरिका साहूकार• 1929 महामंदी (Great Depression):अति-उत्पादन + वॉल स्ट्रीट क्रैश• भारत पर प्रभाव: गेहूं 50% गिरा,व्यापार आधा, भारी सोना निर्यात• 1944 ब्रेटन वुड्स जुड़वां संतानें:IMF और विश्व बैंक (IBRD)• G-77 व NIEO; MNCs का विस्तारबोर्ड परीक्षा के प्रमुख संप्रत्यय (Quick Revision Capsule)कॉर्न लॉ (Corn Laws):ब्रिटेन में अनाज आयात पर रोक; निरस्त होने से वैश्विक कृषि व्यापार का सूत्रपात हुआ।रिंडरपेस्ट (Rinderpest):1890 के दशक में अफ्रीकी मवेशियों की प्लेग महामारी; 90% पशु मरे, औपनिवेशिक श्रम नियंत्रण।ब्रेटन वुड्स जुड़वां संतानें:IMF व विश्व बैंक; इसके पश्चिमी आधिपत्य के जवाब में विकासशील देशों ने G-77 बनाया।

    अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

    मुख्य बिंदु 1
    रेशम मार्ग (सिल्क रूट) ने ईसा पूर्व से 15वीं सदी तक एशिया को यूरोप और उत्तरी अफ्रीका से दोस्ती व्यापार और सांस्कृतिक जुड़ाव-जुटाव में क्रांति ला दी।
    मुख्य बिंदु 2
    कोलंबस द्वारा अमेरिका की खोज के बाद आलू, मक्का, टमाटर और मिर्च दुनिया भर में फैले; आयरलैंड में 1845 का आलू अकाल अत्यधिक खाद्य निर्भरता का परिणाम था।
    मुख्य बिंदु 3
    चेचक (चेचक) के अवशेषों पर कब्जा करने के लिए स्पैनिश ग्रैन्यूल ने अमेरिका के मूल क्षेत्र पर अजेय जैविक हथियार का उपयोग किया।
    मुख्य बिंदु 4
    19वीं सदी के अर्थशास्त्रियों ने अंतरराष्ट्रीय आदान-प्रदान में तीन प्रवाह रेखांकित किए: व्यापार का प्रवाह, श्रम का प्रवाह और पूंजी का प्रवाह।
    मुख्य बिंदु 5
    ब्रिटेन में कॉर्न लॉ निरस्त होने से आयातित अनाज सस्ता हुआ, ब्रिटिश खेतिहर शहरों व विदेशों में पलायन कर गए और वैश्विक कृषि बाजार विकसित हुआ।
    मुख्य बिंदु 6
    प्रशीतित जलपोतों (रेफ्रिजरेटेड जहाजों) का आविष्कार अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया से ठंडा मांस यूरोप भेजा गया, जिसमें सस्ता मांस और गरीबों के भोजन में शामिल हुआ।
    मुख्य बिंदु 7
    1890 के दशक में अफ्रीका में फैली रिंडरपेस्ट (मवेशी प्लेग) ने 90% पशु मार दिए, जिससे अफ्रीकियों की आजीविका छिन गई और वे यूरोपीय बागानों में मजदूर बनने पर विवश हुए।
    मुख्य बिंदु 8
    भारत और चीन से लाखों गिरमिटिया मठवासी (गिरमिटिया मजदूर) कैरेबियाई स्टूडियो, फिजी और मोरिशस को बुलाए गए, जहां 'होसे' मेला और 'चटनी संगीत' जैसे सांस्कृतिक संलयन हुए।
    मुख्य बिंदु 9
    1929 की महामंदी के दो मुख्य कारण थे: कृषि में अति-उत्पादन और अमेरिकी कर्जों पर अत्यधिक निर्भरता; वॉल स्ट्रीट क्रैश के साथ दुनिया भर के बैंक व उद्योग ठप हुए।
    मुख्य बिंदु 10
    जुलाई 1944 में ब्रेटन वुड्स सम्मेलन में आईएमएफ और विश्व बैंक (ब्रेटन वुड्स जुड़वां संतें) की स्थापना हुई; पश्चिमी विक्टोरियन्ट के खिलाफ़ G-77 और NIEO का मंच बनाया गया।

    स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

    मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

    1
    रेशम मार्ग का नाम 'सिल्क रूट' क्यों पड़ा और इसका क्या महत्व था?
    उत्तर एवं व्याख्या देखें
    उत्तर: इस मार्ग से पश्चिमी देशों को भेजे जाने वाले रेशम मार्ग को 'रेशम मार्ग' कहा गया है। एशिया, यूरोप और उत्तरी अफ्रीका में बौद्ध धर्म व्यापार, धर्म (बौद्ध, ईसाई, इस्लाम) और ज्ञान का ऐतिहासिक संयोजन-निर्धारण संभव है।
    2
    प्रशीतित जलपोतों (प्रशीतित जहाज) के आविष्कार ने यूरोप के आम लोगों के खान-पान को कैसे बदला?
    उत्तर एवं व्याख्या देखें
    उत्तर: इससे जीवित पशुओं के स्थान पर मांस को काटकर व ठंडा करके जहाजों में ले जाना संभव हुआ, जिससे परिवहन खर्च काफी कम हो गया। यूरोप के बाजारों में मांस सस्ता हो गया और गरीब मजदूर भी इसे अपने नियमित आहार में शामिल करने लगे।
    3
    अफ्रीका में रिंडरपेस्ट (मवेशी प्लेग) महामारी का क्या सामाजिक और आर्थिक प्रभाव पड़ा?
    उत्तर एवं व्याख्या देखें
    उत्तर: 1890 के दशक की इस बीमारी ने अफ्रीका के 90% मवेशियों को मार डाला। पशु संपदा नष्ट होने से अफ्रीकियों की आजीविका की रीढ़ टूट गई और वे यूरोपीय उपनिवेशवादियों के बागानों और खदानों में कम मजदूरी पर काम करने के लिए मजबूर हो गए।
    4
    1929 की महामंदी का भारतीय किसानों पर क्या प्रभाव पड़ा?
    उत्तर एवं व्याख्या देखें
    उत्तर: महामंदी से अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं और जूट के दाम 50% से 60% तक गिर गए। ब्रिटिश सरकार ने लगान माफ नहीं किया, जिससे किसान कर्ज में डूब गए और उन्हें अपने सोने-चांदी के गहने बेचकर लगान चुकाना पड़ा।
    5
    'ब्रेटन वुड्स की जुड़वां संतानें' किन्हें कहा जाता है और G-77 की स्थापना क्यों की गई?
    उत्तर एवं व्याख्या देखें
    उत्तर: 1944 के ब्रेटन वुड्स सम्मेलन में स्थापित अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक (आईबीआरडी) को ब्रेटन वुड्स की तीन संतानें कहा जाता है। पश्चिमी अमीर देशों के खिलाफ पश्चिमी देशों में इन दलों ने अपने आर्थिक हितों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए जी-77 का गठन किया।
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    अध्याय 1: प्राचीन विश्व (Ancient World) अध्याय 2: मध्यकालीन विश्व (Medieval World) अध्याय 3: आधुनिक विश्व - I (Modern World - I) अध्याय 4: आधुनिक विश्व - II (Modern World - II) अध्याय 5: भारत पर ब्रिटिश शासन का प्रभाव (Impact of British Rule) अध्याय 6: औपनिवेशिक भारत में सामाजिक सुधार (Religious & Social Awakening) अध्याय 7: ब्रिटिश शासन के विरुद्ध जन प्रतिरोध (Popular Resistance) अध्याय 8: भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन (Indian National Movement) अध्याय 9: भारत का भौतिक स्वरूप (Physiography of India) अध्याय 10: जलवायु (Climate) अध्याय 11: जैव विविधता (Bio-diversity) अध्याय 12: भारत में कृषि (Agriculture in India) अध्याय 13: परिवहन एवं संचार (Transport and Communication) अध्याय 14: जनसंख्या: हमारा संसाधन (Population: Our Greatest Resource) अध्याय 15: संवैधानिक मूल्य एवं राजनीतिक व्यवस्था (Constitutional Values) अध्याय 16: मौलिक अधिकार एवं मौलिक कर्तव्य (Fundamental Rights and Duties) अध्याय 17: भारत - एक कल्याणकारी राज्य (India - A Welfare State) अध्याय 18: स्थानीय शासन एवं प्रशासन (Local Governments) अध्याय 19: राज्य स्तर पर शासन (Governance at State Level) अध्याय 20: केंद्रीय स्तर पर शासन (Governance at Union Level) अध्याय 21: राजनीतिक दल एवं दबाव समूह (Political Parties and Pressure Groups) अध्याय 22: लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जन-सहभागिता (Democratic Participation) अध्याय 23: भारतीय लोकतंत्र की चुनौतियाँ (Challenges to Indian Democracy) अध्याय 24: राष्ट्रीय एकीकरण एवं धर्मनिरपेक्षता (National Integration & Secularism) अध्याय 25: सामाजिक-आर्थिक विकास एवं वंचित वर्ग (Socio-Economic Development) अध्याय 26: पर्यावरणीय क्षरण एवं आपदा प्रबंधन (Environmental Degradation) अध्याय 27: शांति एवं सुरक्षा (Peace and Security)

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