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NIOS • कक्षा X • Social Science (213) • अध्याय 3
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

आधुनिक विश्व - I (Modern World - I)

आधुनिक विश्व - I (आधुनिक विश्व - I) के लिए व्यापक अध्ययन सामग्री और अध्याय नोट्स, एनआईओएस माध्यमिक (कक्षा 10) सामाजिक विज्ञान (213) के लिए व्यवस्थित रूप से तैयार किया गया। नवीनतम नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग पाठ्यक्रम के अनुरूप, यह गाइड मुख्य सैद्धांतिक अवधारणाओं, ऐतिहासिक कालक्रम, भौगोलिक विश्लेषण, संवैधानिक सिद्धांतों, ट्यूटर मार्क्ड असाइनमेंट (टीएमए) दिशानिर्देशों और सार्वजनिक परीक्षा में महारत पर जोर देती है।

क्या एक चित्रकार का स्वप्न पूरे महाद्वीप के नक्शे को हमेशा के लिए बदल सकता है?

1848 में फ्रांसीसी कलाकार फ्रेडरिक सॉरयू ने एक काल्पनिक चित्र बनाया जिसमें यूरोप और अमेरिका के लोग एक लंबी कतार में स्वतंत्रता की प्रतिमा की वंदना करते हुए आगे बढ़ रहे थे। उस समय न जर्मनी एक देश था, न इटली, और न ही पोलैंड! चारों ओर निरंकुश राजाओं का शासन था। लेकिन अगले 70 वर्षों में लोगों ने अपने प्राणों की बाजी लगाकर राजमुकुटों को धूल चटा दी और अपनी साझा भाषा, संस्कृति और स्वतंत्रता के आधार पर आधुनिक राष्ट्र-राज्यों का निर्माण किया। आइए जानें कि कैसे तिरंगे झंडे, राष्ट्रगान, और क्रांति की ज्वाला ने आधुनिक यूरोप की नींव रखी!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

एनआईओएस और एनआईओएस कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा में 'यूरोप में राष्ट्रीयता का उदय' इतिहास खंड का सर्वाधिक अंक-भर (हाई-वेटेज) वाला अध्याय है। नेपोलियन की नागरिक संहिता (1804) की विशेषताएं, 1815 की वियना संधि के उद्देश्य, गुसेपे मेत्सिनी के विचार, जर्मनी और इटली के एकीकरण की चरणबद्ध प्रक्रिया, और बाल्कन संकट पर दीर्घ उत्तरीय (5 अंक) प्रश्न पूछे जाते हैं। यह अध्याय छात्रों को आधुनिक लोकतंत्र, संप्रभुता, और नागरिक अधिकारों के ऐतिहासिक अवशेषों से जोड़ा गया है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • 1789 की फ्रांसीसी क्रांति के बुनियादी कारणों और परिणामों की समझ (कक्षा 9 इतिहास)।
  • यूरोप के प्रमुख देशों (फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, ऑस्ट्रिया-हंगरी) की भौगोलिक अवस्थिति का प्रारंभिक ज्ञान।
  • राजतंत्र (राजशाही), उदारवाद (उदारवाद), और रूढ़िवाद (रूढ़िवाद) की सामान्य संरचना से परिचय।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • फ्रेडरिक सॉरयू के यूटोपियाई (काल्पनिक आदर्श) चित्र और अर्नेस्ट रेनन के राष्ट्र-सिद्धांत का विश्लेषणात्मक मूल्यांकन करना।
  • नेपोलियन की 1804 की नागरिक संहिता के प्रशासनिक सुधारों तथा उसकी सीमाओं की स्पष्ट व्याख्या करना।
  • 1815 की विएना संधि की व्यवस्थाओं और रूढ़िवादी शासनों के दमनकारी चरित्र का समालोचनात्मक परीक्षण करना।
  • जर्मनी (बिस्मार्क की लौह एवं रक्त नीति) तथा इटली (कावूर, मेत्सिनी, गैरीबाल्डी) के एकीकरण की प्रक्रियाओं की तुलनात्मक समझ विकसित करना।
  • राष्ट्र के मानवीकरण (मारिआन और जर्मेनिया) तथा बाल्कन क्षेत्र में साम्राज्यवाद और राष्ट्रवाद के टकराव का परीक्षण करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. फ्रेडरिक सॉरयू की कल्पना एवं फ्र...
2 2. यूरोप में राष्ट्रवाद का निर्माण...
3 3. क्रांतिकारी, क्रांतियों का युग (...
4 4. जर्मनी और इटली का एकीकरण एवं ब्र...
5 5. राष्ट्र की दृश्य-कल्पना एवं बाल्...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. फ्रेडरिक सॉरयू की कल्पना एवं फ्रांसीसी क्रांति: राष्ट्र का विचार

1.1 फ्रेडरिक सॉरयू का स्वप्न (1848)

1848 में एक फ्रांसीसी कलाकार फ्रेडरिक सॉरयू (Frédéric Sorrieu) ने चार चित्रों की एक श्रृंखला बनाई। इनमें उसने अपने सपनों का एक संसार रचा जो उसके शब्दों में 'जनतांत्रिक और सामाजिक गणतंत्रों' (Democratic and Social Republics) से मिलकर बना था:

  • स्वतंत्रता की प्रतिमा (Statue of Liberty): जुलूस में लोग एक महिला रूपक के सामने से गुजरते हैं जिसके एक हाथ में 'ज्ञानोदय की मशाल' (Torch of Enlightenment) और दूसरे हाथ में 'मनुष्य के अधिकारों का घोषणापत्र' (Charter of the Rights of Man) है।
  • निरंकुश संस्थानों के अवशेष: प्रतिमा के सामने जमीन पर निरंकुश (Absolutist) राजशाही के प्रतीकों, मुकुटों और जंजीरों के टुकड़े बिखरे पड़े हैं।
  • यूटोपिया (कल्पनादर्श): सॉरयू की दृष्टि में दुनिया के लोग विभिन्न राष्ट्रों के समूहों में बंटे हैं, जिनकी पहचान उनके कपड़ों, राष्ट्रीय झंडे और वेशभूषा से होती है। जुलूस का नेतृत्व संयुक्त राज्य अमेरिका और स्विट्जरलैंड कर रहे हैं जो उस समय तक राष्ट्र-राज्य बन चुके थे। उनके पीछे फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रिया, पोलैंड, इंग्लैंड आदि हैं।

1.2 1789 की फ्रांसीसी क्रांति और सामूहिक पहचान का निर्माण

राष्ट्रवाद की पहली स्पष्ट अभिव्यक्ति 1789 में फ्रांसीसी क्रांति के साथ हुई। क्रांति ने संप्रभुता को राजतंत्र से निकालकर फ्रांसीसी नागरिकों की संस्था को हस्तांतरित कर दिया। क्रांतिकारियों ने फ्रांसीसी लोगों में एक सामूहिक पहचान (Collective Identity) की भावना पैदा करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए:

सुधार / कदमउद्देश्य एवं प्रभाव
पितृभूमि (La Patrie) और नागरिक (Le Citoyen)संयुक्त समुदाय के विचार पर बल दिया जिसने संविधान के अंतर्गत समान अधिकार प्राप्त किए।
नया तिरंगा झंडा (Tricolour)पुराने शाही ध्वज (Royal Standard) को हटाकर नए तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में चुना गया।
स्टेट्स जनरल का पुनर्गठनसक्रिय नागरिकों द्वारा चुनी गई संस्था बनी और इसका नाम बदलकर नेशनल असेंबली (National Assembly) रखा गया।
नई स्तुतियाँ व शपथेंराष्ट्र के नाम पर नई राष्ट्रभक्ति पूर्ण स्तुतियाँ रची गईं, शपथें ली गईं और शहीदों का गुणगान हुआ।
केंद्रीय प्रशासनिक व्यवस्थासभी नागरिकों के लिए समान कानून बनाए गए; आंतरिक आयात-निर्यात शुल्क समाप्त किए गए और नाप-तौल की एकसमान व्यवस्था लागू की गई।
पेरिस की फ्रेंच भाषा को प्रोत्साहनक्षेत्रीय बोलियों को हतोत्साहित किया गया और फ्रेंच राष्ट्र की साझा भाषा बन गई।

1.3 नेपोलियन की नागरिक संहिता (1804) - सिविल कोड

नेपोलियन बोनापार्ट ने यद्यपि फ्रांस में लोकतंत्र को नष्ट कर दिया, किंतु प्रशासनिक क्षेत्र में उसने क्रांतिकारी सिद्धांतों का समावेश किया ताकि संपूर्ण व्यवस्था अधिक तर्कसंगत और कुशल बन सके। 1804 की नागरिक संहिता (जिसे नेपोलियन कोड कहा जाता है) की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित थीं:

  1. जन्म पर आधारित विशेषाधिकारों की समाप्ति: कानून के समक्ष सबकी समानता स्थापित की गई और संपत्ति के अधिकार को सुरक्षित बनाया गया।
  2. सामंती व्यवस्था का खात्मा: किसानों को भू-दासत्व (Serfdom) और जागीरदारी शुल्कों से मुक्ति दिलाई गई।
  3. शहरी गिल्ड प्रतिबंधों की समाप्ति: शहरों में कारीगरों की श्रेणियों (Guilds) के कठोर नियंत्रणों को हटा दिया गया।
  4. यातायात व संचार में सुधार: मानकीकृत नाप-तौल, राष्ट्रीय मुद्रा और व्यापारिक सुगमता प्रदान की गई।
प्रारंभिक उत्साह का विरोध में बदलना: हॉलैंड, स्विट्जरलैंड, ब्रुसेल्स, मेंज और वारसॉ में फ्रांसीसी सेनाओं का शुरुआत में 'स्वतंत्रता के दूत' के रूप में स्वागत हुआ। किंतु जल्द ही लोगों को समझ आ गया कि नई प्रशासनिक व्यवस्था राजनीतिक स्वतंत्रता के अनुकूल नहीं थी। बढ़े हुए कर, सेंसरशिप, और बाकी यूरोप को जीतने के लिए फ्रेंच सेना में जबरन भर्ती (Forced Conscription) ने जनता को नेपोलियन का विरोधी बना दिया।

2. यूरोप में राष्ट्रवाद का निर्माण एवं 1815 के बाद नया रूढ़िवाद

2.1 अठारहवीं सदी के मध्य का यूरोप

अठारहवीं सदी के मध्य में कोई 'राष्ट्र-राज्य' नहीं थे। जर्मनी, इटली और स्विट्जरलैंड कई राजशाहियों, डचों और कैंटनों में बंटे हुए थे। उदाहरण के लिए, हैब्सबर्ग साम्राज्य (Habsburg Empire) जो ऑस्ट्रिया-हंगरी पर शासन करता था, कई अलग-अलग क्षेत्रों और जनसमूहों का एक पैचवर्क (पैबंद) था:

  • आल्प्स के टिरोल, ऑस्ट्रिया और सुडेटनलैंड में जर्मन भाषी कुलीन वर्ग था।
  • बोहेमिया में जर्मन भाषा का बोलबाला था।
  • इटली भाषी प्रांतों में लोम्बार्डी और वेनेशिया शामिल थे।
  • हंगरी में आधी आबादी मैग्यार भाषा बोलती थी, जबकि बाकी लोग विभिन्न बोलियाँ बोलते थे।

2.2 कुलीन वर्ग और नया मध्यम वर्ग

सामाजिक और राजनीतिक रूप से जमीन का मालिक कुलीन वर्ग (Aristocracy) महाद्वीप का सबसे प्रभावशाली वर्ग था। वे फ्रेंच भाषा बोलते थे, उनके परिवार वैवाहिक संबंधों से जुड़े थे। किंतु जनसंख्या का अधिकांश भाग कृषक था। पश्चिमी और मध्य यूरोप में औद्योगिकीकरण के प्रसार से एक नए व्यावसायिक मध्यम वर्ग का उदय हुआ, जिसमें उद्योगपति, व्यापारी, और पेशेवर (डॉक्टर, शिक्षक, वकील) शामिल थे। इसी शिक्षित, उदारवादी मध्यम वर्ग के बीच राष्ट्रीय एकता के विचारों को लोकप्रियता मिली।

2.3 उदारवादी राष्ट्रवाद के मायने

उदारवाद (Liberalism) लातिनी भाषा के मूल शब्द 'liber' पर आधारित है, जिसका अर्थ है 'आज़ाद'। नए मध्यम वर्गों के लिए उदारवाद के दो आयाम थे:

राजनीतिक क्षेत्र में उदारवाद
  • सहमति पर आधारित सरकार (संविधान और प्रतिनिधि सरकार)।
  • निरंकुश राजतंत्र और पादरी वर्ग के विशेषाधिकारों की समाप्ति।
  • कानून के समक्ष समानता (यद्यपि इसमें सार्वभौमिक मताधिकार शामिल नहीं था; मताधिकार केवल संपत्तिवान पुरुषों तक सीमित था)।
आर्थिक क्षेत्र में उदारवाद
  • बाजारों की मुक्ति और चीजों तथा पूंजी के आवागमन पर राज्य द्वारा लगाए गए नियंत्रणों की समाप्ति।
  • जोलवेराइन (Zollverein - 1834): प्रशा की पहल पर स्थापित एक शुल्क संघ, जिसने शुल्क अवरोधों को समाप्त किया और मुद्राओं की संख्या 30 से घटाकर केवल 2 कर दी। रेलवे के जाल ने गतिशीलता बढ़ाई।

2.4 1815 के बाद नया रूढ़िवाद एवं विएना कांग्रेस

1815 में वाटरलू के युद्ध में नेपोलियन की पराजय के बाद यूरोपीय सरकारें रूढ़िवाद (Conservatism) की भावना से संचालित हुईं। रूढ़िवादी मानते थे कि राज्य और समाज की स्थापित पारंपरिक संस्थाओं -- जैसे राजतंत्र, चर्च, सामाजिक ऊँच-नीच, संपत्ति और परिवार -- को बनाए रखा जाना चाहिए।

विएना संधि (Treaty of Vienna - 1815):
ब्रिटेन, रूस, प्रशा और ऑस्ट्रिया जैसी यूरोपीय शक्तियों ने, जिन्होंने नेपोलियन को हराया था, विएना में एक सम्मेलन आयोजित किया। इसकी अध्यक्षता ऑस्ट्रिया के चांसलर ड्यूक मैटरनिख (Duke Metternich) ने की। मुख्य निर्णय:
  • फ्रांस में बूर्बों वंश (Bourbon Dynasty) को पुनः सत्ता सौंपी गई।
  • फ्रांस की सीमाओं पर कई राज्य कायम किए गए ताकि भविष्य में फ्रांस विस्तार न कर सके (उत्तर में नीदरलैंड्स, दक्षिण में पीडमोंट में जेनोआ जोड़ा गया)।
  • प्रशा को उसकी पश्चिमी सीमा पर महत्वपूर्ण नए इलाके दिए गए, जबकि ऑस्ट्रिया को उत्तरी इटली का नियंत्रण सौंपा गया।
  • नेपोलियन द्वारा स्थापित 39 राज्यों के जर्मन महासंघ को बरकरार रखा गया।
1815 में स्थापित रूढ़िवादी शासन व्यवस्थाएं निरंकुश थीं। वे आलोचना और असहमति बर्दाश्त नहीं करती थीं और उन्होंने अखबारों, नाटकों और गीतों पर कठोर सेंसरशिप लागू की।

3. क्रांतिकारी, क्रांतियों का युग (1830-1848) एवं रूमानीवाद

3.1 क्रांतिकारी: ग्यूसेपे मेत्सिनी (Giuseppe Mazzini)

1815 के बाद के वर्षों में दमन के डर से अनेक उदारवादी-राष्ट्रवादी भूमिगत हो गए। गुप्त संगठनों का जाल बिछ गया। इटली के महान क्रांतिकारी ग्यूसेपे मेत्सिनी (जन्म 1807, जेनोआ) कार्बोनारी के गुप्त संगठन के सदस्य बने। 24 साल की युवावस्था में लिगुरिया में क्रांति करने के आरोप में उन्हें देश निकाला दे दिया गया। उन्होंने दो गुप्त संगठन स्थापित किए:

  1. यंग इटली (Young Italy): मार्सेई में स्थापित।
  2. यंग यूरोप (Young Europe): बर्न में स्थापित (जिसके सदस्य पोलैंड, फ्रांस, इटली और जर्मन राज्यों के समान विचार वाले युवा थे)।

मेत्सिनी का अटूट विश्वास था कि 'ईश्वर की मर्जी के अनुसार राष्ट्र ही मनुष्यों की प्राकृतिक इकाई हैं।' अतः इटली छोटे राज्यों का पैबंद नहीं रह सकता था; उसका एकीकृत गणतंत्र बनना आवश्यक था। मेत्सिनी के रूढ़िवाद के घोर विरोध और लोकतांत्रिक गणतंत्रों के स्वप्न से भयभीत होकर मैटरनिख ने उसे 'हमारी सामाजिक व्यवस्था का सबसे खतरनाक दुश्मन' करार दिया।

3.2 क्रांतियों का युग: 1830 और 1848

  • जुलाई 1830 की फ्रांसीसी क्रांति: बूर्बों राजाओं को उखाड़ फेंका गया और लुई फिलिप की अध्यक्षता में एक संवैधानिक राजतंत्र स्थापित हुआ। मैटरनिख ने टिप्पणी की थी: 'जब फ्रांस छींकता है, तो बाकी यूरोप को सर्दी-जुकाम हो जाता है।' (When France sneezes, the rest of Europe catches cold).
  • बेल्जियम का विद्रोह: जुलाई क्रांति से प्रेरित होकर ब्रुसेल्स में विद्रोह हुआ और यूनाइटेड किंगडम ऑफ द नीदरलैंड्स से बेल्जियम अलग हो गया।
  • यूनान का स्वतंत्रता संग्राम (1821-1832): यूनान पंद्रहवीं सदी से ऑटोमन साम्राज्य का हिस्सा था। कवियों और कलाकारों ने यूनान को 'यूरोपीय सभ्यता का पालना' (Cradle of European Civilization) बताकर जनमत जुटाया। अंग्रेज कवि लॉर्ड बायरन धन इकट्ठा करके युद्ध लड़ने गए, जहाँ 1824 में बुखार से उनकी मृत्यु हो गई। अंततः 1832 की कुस्तुनतुनिया की संधि (Treaty of Constantinople) ने यूनान को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दी।

3.3 रूमानीवाद और राष्ट्रीय भावना

राष्ट्रवाद का विकास केवल युद्धों और क्षेत्रीय विस्तार से नहीं हुआ। संस्कृति ने राष्ट्र के विचार को गढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई: कला, काव्य, कहानियों और संगीत ने राष्ट्रवादी भावनाओं को व्यक्त और निर्मित किया। रूमानीवाद (Romanticism) एक ऐसा सांस्कृतिक आंदोलन था जो तर्क-वितर्क और विज्ञान के महिमामंडन की आलोचना करता था और अंतर्दृष्टि, रहस्यवादी भावनाओं तथा लोक संस्कृति पर बल देता था:

  • जोहान गॉटफ्रीड हर्डर (Johann Gottfried Herder): जर्मन दार्शनिक ने दावा किया कि सच्ची जर्मन संस्कृति आम लोगों (Das Volk) में निहित है। लोकगीत, लोकनृत्य और लोककाव्य ही राष्ट्र की सच्ची आत्मा (Volksgeist) को प्रकट करते हैं।
  • भाषा की भूमिका (पोलैंड का उदाहरण): 18वीं सदी के अंत में रूस, प्रशा और ऑस्ट्रिया द्वारा विभाजित पोलैंड में संगीत और भाषा के माध्यम से राष्ट्रीय भावना जीवित रखी गई। कैरोल कुर्पिन्स्की ने ओपेरा और संगीत के माध्यम से पोलिश संघर्ष का गुणगान किया और 'पोलोनेज' व 'माजुर्का' जैसे लोकनृत्यों को राष्ट्रीय प्रतीकों में बदला। रूसी कब्जे के बाद जब रूसी भाषा थोपी गई, तो पोलिश पादरियों ने धार्मिक शिक्षा और आयोजनों में पोलिश भाषा के प्रयोग को हथियार बनाया, जिसके लिए अनेक बिशपों को साइबेरिया भेज दिया गया।

4. जर्मनी और इटली का एकीकरण एवं ब्रिटेन का अजीब मामला

4.1 जर्मनी का एकीकरण: बिस्मार्क और लौह-रक्त नीति

1848 में जर्मन मध्यम वर्ग ने फ्रैंकफर्ट के सेंट पॉल चर्च में एक सर्व-जर्मन नेशनल असेंबली बुलाई और प्रशा के राजा फ्रेडरिक विल्हेम चतुर्थ को ताज पहनाने की पेशकश की, किंतु राजा ने इसे अस्वीकार कर दिया और सेना ने संसद को भंग कर दिया। इसके बाद जर्मनी के एकीकरण का नेतृत्व प्रशा के प्रमुख राज्य ने संभाला:

तथ्य / चरणविवरण
एकीकरण के वास्तुकारप्रशा के प्रमुख मंत्री (चांसलर) ऑटो वॉन बिस्मार्क (Otto von Bismarck) जिन्होंने प्रशा की सेना और नौकरशाही की मदद ली।
सात वर्षों में तीन युद्धप्रशा ने ऑस्ट्रिया, डेनमार्क और फ्रांस के खिलाफ तीन युद्ध लड़े और तीनों में विजय प्राप्त की।
एकीकरण की पूर्णता (1871)जनवरी 1871 में वर्साय के महल के शीशमहल (Hall of Mirrors) में प्रशा के राजा विलियम प्रथम (Kaiser William I) को नए जर्मन साम्राज्य का सम्राट घोषित किया गया।

4.2 इटली का एकीकरण: तीन महानायकों की गाथा

19वीं सदी के मध्य में इटली सात राज्यों में बंटा हुआ था, जिनमें से केवल एक -- सार्डिनिया-पीडमोंट -- पर इतालवी राजघराने का शासन था। उत्तरी भाग ऑस्ट्रियाई हैब्सबर्गों के अधीन था, मध्य भाग पर पोप का शासन था, और दक्षिणी भाग स्पेन के बूर्बों राजाओं के नियंत्रण में था।

महानायकभूमिका एवं योगदान
ग्यूसेपे मेत्सिनी (विचारक / आत्मा)1830 के दशक में 'यंग इटली' के जरिए एकीकृत इतालवी गणतंत्र का वैचारिक आधार तैयार किया।
काउंट कैमिलो दे कावूर (कूटनीतिज्ञ / मस्तिष्क)सार्डिनिया-पीडमोंट का प्रमुख मंत्री। न तो क्रांतिकारी था, न लोकतांत्रिक; इतालवी से बेहतर फ्रेंच बोलता था। फ्रांस के साथ एक चतुर कूटनीतिक संधि (1859) करके ऑस्ट्रियाई सेनाओं को पराजित किया।
ग्यूसेपे गैरीबाल्डी (सैनिक / तलवार)'रेड शर्ट्स' (Red Shirts) नामक स्वयंसेवकों की सेना लेकर 1860 में दक्षिणी इटली और दो सिसिली के राज्यों में प्रवेश किया और स्थानीय किसानों के समर्थन से स्पेनिश शासकों को उखाड़ फेंका।
विक्टर इमैनुएल द्वितीय1861 में एकीकृत इटली का राजा घोषित किया गया।

4.3 ब्रिटेन का अजीबोगरीब मामला (The Strange Case of Britain)

ब्रिटेन में राष्ट्र-राज्य का निर्माण किसी अचानक हुई उथल-पुथल या क्रांति का परिणाम नहीं था, बल्कि एक लंबी चलने वाली संसदीय प्रक्रिया थी:

  • अठारहवीं सदी से पहले कोई ब्रितानी राष्ट्र नहीं था; मुख्य पहचान नृजातीय (Ethnic) थीं -- अंग्रेज, वेल्श, स्कॉटिश या आयरिश।
  • 1688 में एक रक्तहीन क्रांति द्वारा अंग्रेजी संसद ने राजतंत्र से सत्ता छीन ली।
  • एक्ट ऑफ यूनियन (1707): इंग्लैंड और स्कॉटलैंड के बीच समझौते से 'यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन' का गठन हुआ, जिसने स्कॉटलैंड की विशिष्ट संस्कृति और राजनीतिक संस्थाओं को योजनाबद्ध तरीके से दबा दिया।
  • आयरलैंड का विलय (1801): आयरलैंड कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट धार्मिक गुटों में गहराई से बंटा था। अंग्रेजों ने प्रोटेस्टेंटों को बढ़ावा दिया। वोल्फ टोन और उसकी यूनाइटेड आयरिशमेन (1798) के असफल विद्रोह के बाद 1801 में आयरलैंड को जबरन यूनाइटेड किंगडम में शामिल कर लिया गया।
  • नया 'ब्रिटिश राष्ट्र' उभरा जिसके प्रतीक थे: यूनियन जैक (झंडा), 'गॉड सेव अवर नोबल किंग' (राष्ट्रगान), और अंग्रेजी भाषा।

5. राष्ट्र की दृश्य-कल्पना एवं बाल्कन संकट (साम्राज्यवाद)

5.1 राष्ट्र का मानवतावाद: रूपक (रूपक)

अठारहवीं और उन्नीसवीं शताब्दी के कलाकारों ने राष्ट्र का मानवीकरण (व्यक्तिीकरण) किया, अर्थात वे राष्ट्र को एक व्यक्ति के रूप में चित्रित करते हैं। राष्ट्र को प्रस्तुत करने के लिए नारी रूपकों (महिला रूपक) का सहारा लिया गया:

रूपक (रूपक)राष्ट्र विशिष्टताएँ एवं प्रतीक
मारियन (मैरियन)फ्रांसलोकप्रिय ईसाई नाम; लाल टोपी (स्वतंत्रता), ध्वज, कलगी; इसके सिक्के और डाक टिकट पर चित्र अंकित किए गए और चौक-चौराहों पर प्रतिमाएं लगाई गईं ताकि जनता में राष्ट्रीय एकता का संचार हो सके। सिर पर ब्लूट (ओक) का क्राउन पहनाती है क्योंकि जर्मन बलूट वीरता का प्रतीक है; हाथ में तलवारें (मुकाबले की तत्परता) और जैतून की लकड़ी (शांति की चाहत)। (बाल्कन) था। यह क्षेत्र भौगोलिक और न. यहां के बाल आम तौर पर स्लाव (स्लाव) पर कहा जाता है:

  • ऑटोमन साम्राज्य का पतन:कन का एक बड़ा हिस्सा ऑटोमन साम्राज्य के नियंत्रण में था। 19वीं सदी में ऑटोमन साम्राज्य के बाल्कन राज्य में एक-एक स्वतंत्रता की घोषणा करने की घोषणा की गई थी। महाशक्तियों--रूस, जर्मनी, इंग्लैंड, और ऑस्ट्रिया-हंगरी--के बीच व्यापार, उपनिवेशों और नौसैनिक शक्तियों के लिए भयंकर आक्रमण चल रहा था। रूस स्लाव एकता के नाम पर बाल्कन पर प्रभाव की तलाश थी, जबकि बाल ऑस्ट्रिया-हंगरी अपने क्षेत्र का विस्तार करना चाहता था। युद्ध) के महाविनाश में बदल दिया गया। राष्ट्रीय साम्राज्यवाद से जुड़कर मानव सभ्यता के लिए भारी विनाश का कारण बना।

    महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शब्दावली, कालक्रम एवं प्रशासनिक व्यवस्था

    1789 की क्रांति
    फ्रांस में संप्रभुता का राजतंत्र से नागरिकों में स्थानांतरण; 'ला पात्रिया' (पितृभूमि) व 'ले सितोयेन' (नागरिक) का विचार
    नेपोलियन नागरिक संहिता (1804)
    जन्म पर आधारित विशेषाधिकार समाप्त, कानून के समक्ष समानता, सामंती व्यवस्था का अंत, संपत्ति के अधिकार की सुरक्षा
    जोलवेराइन (1834)
    प्रशा की पहल पर स्थापित जर्मन सीमा-शुल्क संघ जिसने 30 से अधिक मुद्राओं को घटाकर केवल 2 कर दिया और व्यापारिक शुल्क हटाए
    विएना संधि (1815)
    ड्यूक मैटरनिख की अध्यक्षता में बूर्बों वंश की पुनर्स्थापना, फ्रांस की सीमाओं पर घेराबंदी, रूढ़िवाद व कठोर सेंसरशिप
    कुस्तुनतुनिया की संधि (1832)
    ऑटोमन साम्राज्य के विरुद्ध ग्रीक स्वतंत्रता संग्राम की समाप्ति और यूनान को एक स्वतंत्र राष्ट्र की मान्यता
    फ्रैंकफर्ट संसद (1848)
    सेंट पॉल चर्च में 831 निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा जर्मन संविधान का निर्माण, राजा फ्रेडरिक विल्हेम चतुर्थ द्वारा अस्वीकार
    जर्मनी एकीकरण सूत्र
    प्रशा + ऑटो वॉन बिस्मार्क (चांसलर) + लौह व रक्त नीति + 3 युद्ध (7 वर्ष) = कैसर विलियम प्रथम सम्राट (1871)
    इटली एकीकरण त्रिमूर्ति
    ग्यूसेपे मेत्सिनी (विचार / यंग इटली) + काउंट कावूर (कूटनीति) + गैरीबाल्डी (रेड शर्ट्स सैन्य शक्ति) = विक्टर इमैनुएल II (1861)
    राष्ट्रीय नारी रूपक
    मारिआन (फ्रांस - लाल टोपी, तिरंगा) | जर्मेनिया (जर्मनी - बलूत के पत्तों का मुकुट, वीरता व शक्ति की तलवार)
    बाल्कन बारूद का ढेर
    ऑटोमन विघटन + स्लाव राष्ट्रवाद + महाशक्तियों (रूस, ऑस्ट्रिया, जर्मनी, ब्रिटेन) की प्रतिद्वंद्विता = प्रथम विश्व युद्ध (1914)

    अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

    उदाहरण 1
    नेपोलियन की 1804 की नागरिक संहिता (सिविल कोड) की प्रमुख विशेषताओं और प्रशासनिक सुधारों का विस्तृत वर्णन कीजिए।
    विस्तृत समाधान / उत्तर:

    नेपोलियन ने प्रशासनिक क्षेत्र में क्रांतिकारी सुधार किए जिन्हें 1804 की नागरिक संहिता या 'नेपोलियन कोड' कहा जाता है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित थीं:

    1. विशेषाधिकारों की समाप्ति: जन्म पर आधारित सभी विशेषाधिकार समाप्त कर दिए गए। कानून के समक्ष सभी नागरिकों को समानता प्रदान की गई और संपत्ति के अधिकार को सुरक्षित बनाया गया।
    2. सामंती व्यवस्था का अंत: नेपोलियन ने प्रशासनिक विभाजनों को सरल बनाया। सामंती व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया और किसानों को भू-दासत्व तथा जागीरदारी शुल्कों से मुक्ति दिलाई गई।
    3. व्यापार और कारीगरों की मुक्ति: शहरों में मध्यकालीन गिल्ड (श्रेणी) के कठोर नियंत्रणों को समाप्त कर दिया गया, जिससे व्यापारियों और शिल्पकारों को कार्य करने की पूर्ण स्वतंत्रता मिली।
    4. एकसमान आर्थिक प्रणाली: एकसमान राष्ट्रीय मुद्रा, मानकीकृत वजन व नाप की प्रणाली, और राज्यों के बीच वस्तुओं के निर्बाध आवागमन ने व्यापार को तीव्र गति दी।
    5. सीमाएँ / कमियाँ: यद्यपि प्रशासनिक सुधार उत्कृष्ट थे, किंतु राजनीतिक स्वतंत्रता छीन ली गई, करों में वृद्धि की गई, कठोर सेंसरशिप लागू की गई, और बाकी यूरोप को जीतने के लिए सेना में जबरन भर्ती की गई जिससे जनता असंतुष्ट हो गई।
    उदाहरण 2
    1815 की विएना कांग्रेस के प्रमुख उद्देश्यों और निर्णयों का परीक्षण कीजिए।
    विस्तृत समाधान / उत्तर:

    1815 में नेपोलियन ने मैट वाली चार प्रमुख यूरोपीय शक्तियों - ब्रिटेन, रूस, प्रशांत और ऑस्ट्रिया पर विजय प्राप्त की - ने ऑस्ट्रियाई चांसलर डुकेरनिख की राजधानी वियना में सम्मेलन आयोजित किया। इसके प्रमुख उद्देश्य एवं निर्णय निम्नलिखित थे:

    1. मुख्य उद्देश्य: नेपोलियन द्वारा यूरोप में सभी बाजारों को उलट दिया गया और यूरोप में एक नई रूढ़िवादी व्यवस्था (कंजर्वेटिव ऑर्डर) और शक्ति संतुलन की पुनर्स्थापना की गई।
    2. बरबों राजवंश की बहाली: फ्रांसीसी क्रांति के दौरान बरबों राजवंश को फ्रांस की सत्ता में बहाल कर दिया गया।
    3. फ्रांस की सीमाओं पर: फ्रांस के भविष्य के विस्तार पर रोक लगाने के लिए उसकी सीमाओं पर मजबूत राज्य की स्थापना की गई - उत्तर में नीदरलैंड का राज्य बनाया गया जिसमें बेल्जियम को शामिल किया गया, और दक्षिण में पीडमोंट को जेनोआ में शामिल किया गया।
    4. प्रादेशिक पुनर्वितरण: प्रशा ने अपने पश्चिमी सीमा पर दिए गए महत्वपूर्ण नए क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया, ऑस्ट्रिया पर उत्तरी इटली (लोम्बार्डी और वेनेशिया) पर नियंत्रण कर लिया गया, और रूस पर पोलैंड का एक हिस्सा चला गया।
    5. दमनकारी चरित्र: 1815 में स्थापित शासन पूर्णत: निरंकुश थे; उन्होंने प्रेस की स्वतंत्रता पर सेंसरशिप और उदारवादी एवं राष्ट्रवादी विचारधारा का दमन किया।
    उदाहरण 3
    इटली के एकीकरण की प्रक्रिया का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए। इसमें मेत्सिनी, कावूर और गैरीबाल्डी के योगदान को स्पष्ट कीजिए।
    विस्तृत समाधान / उत्तर:

    उन्नीसवीं सदी के मध्य में इटली सात अलग-अलग राज्यों में खंडित था। केवल सार्डिनिया-पीडमोंट पर इतालवी राजघराने का शासन था। एकीकरण की प्रक्रिया तीन चरणों और महानायकों के योगदान से पूरी हुई:

    1. ग्यूसेपे मेत्सिनी (वैचारिक आधार): मेत्सिनी ने 1830 के दशक में एकीकृत इतालवी गणतंत्र की स्थापना के लिए 'यंग इटली' नामक गुप्त संगठन बनाया। यद्यपि 1831 और 1848 के क्रांतिकारी विद्रोह असफल रहे, किंतु उन्होंने जनता में राष्ट्रीय चेतना की ज्वाला जलाए रखी।
    2. काउंट कैमिलो दे कावूर (कूटनीतिक नेतृत्व): सार्डिनिया-पीडमोंट के प्रधानमंत्री कावूर ने फ्रांस के साथ एक चतुर कूटनीतिक गठबंधन किया। इस गठबंधन की मदद से सार्डिनिया-पीडमोंट ने 1859 में ऑस्ट्रियाई सेनाओं को करारी शिकस्त दी और उत्तरी इटली को मुक्त कराया।
    3. ग्यूसेपे गैरीबाल्डी (सैनिक पराक्रम): गैरीबाल्डी ने अपने सशस्त्र स्वयंसेवकों (रेड शर्ट्स) के साथ 1860 में दक्षिणी इटली और दो सिसिली के राज्यों में अभियान चलाया। स्थानीय किसानों का भारी समर्थन पाकर उन्होंने स्पेनिश सेना को खदेड़ दिया।
    4. एकीकरण की घोषणा: 1861 में विक्टर इमैनुएल द्वितीय को एकीकृत इटली का सम्राट घोषित किया गया, और बाद में रोम को राजधानी बनाया गया।
    उदाहरण 4
    जर्मनी के एकीकरण की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए। ऑटो वॉन बिस्मार्क को इसका वास्तुकार क्यों कहा जाता है?
    विस्तृत समाधान / उत्तर:

    जर्मनी की एकीकरण की ऐतिहासिक प्रक्रिया के बाद स्टैड में रची गई:

    1. 1848 की विफलता: 1848 में मध्यम श्रेणी के जर्मनों ने फ्रैंकफर्ट में संसद में एकीकरण का प्रयास किया, अन्य राजशाही और सेना के संयुक्त दमन ने इसे कुचल दिया।
    2. प्रशा का नेतृत्व और बिस्मार्क की भूमिका: इसके बाद एकीकरण का बीड़ा प्रशा साम्राज्य ने उठाया। प्रशा के राजा विलियम प्रथम ने ऑटो वॉन बिस्मार्क को चांसलर नियुक्त किया। बिस्मार्क को आधुनिक जर्मनी का 'वास्तुकार' इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने संसद और भाषणों पर भरोसा न करके 'रक्त और लोहा' (रक्त और लौह) की नीति अपनाई और प्रशा की सेना और मसालों का इस्तेमाल किया।
    3. सात वर्ष में तीन अलग-अलग देशों के बीच युद्ध: 1864 से 1870 के बीच प्रशा ने तीन अलग-अलग देशों के साथ युद्ध लड़ा:
      • स्लेसविग पर नियंत्रण के खिलाफ डेनिश युद्ध (1864)।
      • ऑस्ट्रिया का युद्ध (1866) में जर्मन युद्ध में ऑस्ट्रिया का निष्कासन।
      • फ्रांस का युद्ध (1870-71) फ्रांस की ऐतिहासिक पराजय में।
    4. सम्राट की घोषणा (1871): 18 जनवरी 1871 को वर्साय के महल के विशाल कोल्ड शीशमहल (हॉल ऑफ मिरर्स) में जर्मनी के सभी साम्राज्यों, सेना के सैनिकों और सैनिकों की उपस्थिति में प्रशा के राजा विलियम प्रथम को नए जर्मन साम्राज्य का सम्राट घोषित किया गया।
    उदाहरण 5
    1871 के बाद बाल्कन क्षेत्र में राष्ट्रवादी तनाव क्यों पनपा? इसने प्रथम विश्व युद्ध को कैसे जन्म दिया?
    विस्तृत समाधान / उत्तर:

    1871 के बाद बाल्कन प्रायद्वीप यूरोप में सबसे विस्फोटक और अशांत क्षेत्र बन गया। इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित थे:

    1. भौगोलिक एवं नृजातीय विविधता: बाल्कन में आधुनिक रोमानिया, बुल्गारिया, अल्बानिया, यूनान, सर्बिया, बोस्निया आदि क्षेत्र शामिल थे, जहाँ मुख्य रूप से स्लाव आबादी निवास करती थी।
    2. ऑटोमन साम्राज्य का पतन: बाल्कन का बड़ा हिस्सा कमजोर हो रहे ऑटोमन (तुर्क) साम्राज्य के अधीन था। जब यूरोपीय राष्ट्रवाद के विचारों ने जोर पकड़ा, तो विभिन्न स्लाव राष्ट्रों ने एक-एक करके स्वतंत्रता और संप्रभुता की घोषणा कर दी।
    3. बाल्कन राज्यों का आंतरिक संघर्ष: प्रत्येक बाल्कन राज्य अपनी सीमाओं का विस्तार करने के लिए दूसरे राज्यों की जमीन हड़पने की फिराक में था। उनमें आपसी ईर्ष्या और विद्वेष चरम पर था।
    4. यूरोपीय महाशक्तियों की प्रतिद्वंद्विता: सबसे घातक मोड़ तब आया जब यूरोपीय साम्राज्यवादी शक्तियाँ -- रूस, जर्मनी, ब्रिटेन और ऑस्ट्रिया-हंगरी -- बाल्कन में अपने प्रभाव, व्यापारिक मार्गों और नौसैनिक वर्चस्व को स्थापित करने के लिए आमने-सामने आ गईं। रूस स्लावों का संरक्षक बनना चाहता था जबकि ऑस्ट्रिया अपना विस्तार चाहता था।
    5. प्रथम विश्व युद्ध की परिणति: बाल्कन क्षेत्र में एक के बाद एक कई छोटे युद्ध हुए। जब 1914 में सारायेवो में ऑस्ट्रिया के राजकुमार आर्कड्यूक फर्डिनेंड की हत्या हुई, तो यही बाल्कन संघर्ष दावानल बनकर भड़क उठा और 1914 के विनाशकारी प्रथम विश्व युद्ध में परिवर्तित हो गया।

    सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

    सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

    यह मानना कि नेपोलियन ने पूरे यूरोप में लोकतंत्र की स्थापना की थी।

    सही वैज्ञानिक तथ्य

    नेपोलियन ने फ्रांस और विजित क्षेत्रों में लोकतंत्र को नष्ट कर दिया था; उसने केवल 'प्रशासनिक और नागरिक सुधार' (1804 की संहिता) किए थे।

    सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

    विएना संधि (1815) की अध्यक्षता नेपोलियन द्वारा की गई समझना।

    सही वैज्ञानिक तथ्य

    विएना सम्मेलन नेपोलियन की पराजय के बाद आयोजित हुआ था और इसकी अध्यक्षता ऑस्ट्रिया के घोर रूढ़िवादी चांसलर ड्यूक मैटरनिख ने की थी।

    सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

    गैरीबाल्डी और कावूर के कार्यों को आपस में मिला देना।

    सही वैज्ञानिक तथ्य

    कावूर एक कूटनीतिज्ञ मंत्री थे जिन्होंने फ्रांस से संधि करके ऑस्ट्रिया को हराया; गैरीबाल्डी एक लोकप्रिय सैनिक नेता थे जिन्होंने 'रेड शर्ट्स' सेना के साथ दक्षिणी इटली व सिसिली को जीता।

    सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

    जर्मेनिया रूपक को फ्रांस का और मारिआन को जर्मनी का प्रतीक मान लेना।

    सही वैज्ञानिक तथ्य

    मैरिएन (मैरिएन) फ्रांस का राष्ट्रीय रूप है, जबकि जर्मेनिया (जर्मनिया) जर्मनी का राष्ट्रीय नारी रूप है (जो बलूत के सैनिक का मुकुट पहनती है)।

    सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

    बाल्कन संकट को केवल एक धार्मिक झगड़ा समझ लेना।

    सही वैज्ञानिक तथ्य

    बाल्कन संकट राष्ट्रीय स्वतंत्रता, क्षेत्रीय विस्तार की लालसा तथा यूरोपीय महाशक्तियों (रूस, ऑस्ट्रिया, जर्मनी, ब्रिटेन) की साम्राज्यवादी प्रतिद्वंद्विता का जटिल परिणाम था।

    यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय - ऐतिहासिक घटनाक्रम एवं एकीकरण का प्रवाह

    यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय (1789 - 1914) - ऐतिहासिक प्रवाहफ्रांसीसी क्रांति से लेकर विएना रूढ़िवाद, राष्ट्रीय एकीकरण और बाल्कन संकट तक का संपूर्ण कालक्रमचरण 1: 1789 - 1815क्रांति व नेपोलियन युग• 1789 फ्रांसीसी क्रांति:राजतंत्र का अंत; संप्रभुतानागरिकों के हाथ में आई।• 1804 सिविल कोड:विशेषाधिकार समाप्त; कानूनके समक्ष सबकी समानता।• सीमाएँ:सेंसरशिप व सेना में जबरन भर्तीसे जनता विद्रोही बनी।चरण 2: 1815 - 1848रूढ़िवाद व गुप्त संगठन• 1815 विएना कांग्रेस:मैटरनिख की अध्यक्षता;बूर्बों वंश की पुनर्स्थापना।• ग्यूसेपे मेत्सिनी:यंग इटली व यंग यूरोप;लोकतांत्रिक गणतंत्र का स्वप्न।• 1848 फ्रैंकफर्ट संसद:सेंट पॉल चर्च में संविधान सभा;सेना द्वारा दमन व बिखराव।चरण 3: 1859 - 1871जर्मनी व इटली एकीकरण• जर्मनी एकीकरण (1871):बिस्मार्क की लौह-रक्त नीति;कैसर विलियम I सम्राट घोषित।• इटली एकीकरण (1861):कावूर (कूटनीति) + गैरीबाल्डी(रेड शर्ट्स); विक्टर इमैनुएल II।• 1871 के बाद बाल्कन:महाशक्तियों की होड़ ने 1914में प्रथम विश्व युद्ध भड़काया।बोर्ड परीक्षा हेतु प्रमुख संधियाँ व सूत्रविएना संधि (1815):रूढ़िवादी पुनर्स्थापना; फ्रांस की घेराबंदी; मैटरनिख का युग।कुस्तुनतुनिया संधि (1832):यूनान (Greece) को ऑटोमन साम्राज्य से स्वतंत्र राष्ट्र की मान्यता।जोलवेराइन (1834):प्रशा का शुल्क संघ; 30 मुद्राओं से घटाकर केवल 2; आर्थिक राष्ट्रवाद।

    अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

    मुख्य बिंदु 1
    1848 में फ्रेडरिक सॉरयू के चित्रों ने 'जनतांत्रिक और सामाजिक गणतंत्रों' से बने विश्व की यूटोपियाई कल्पना प्रस्तुत की।
    मुख्य बिंदु 2
    1789 की फ्रांसीसी क्रांति ने संप्रभुता नागरिकों को सौंपी और 'ला पात्रिया' (पितृभूमि) तथा 'ले सितोयेन' (नागरिक) जैसे विचारों से सामूहिक पहचान गढ़ी।
    मुख्य बिंदु 3
    नेपोलियन की 1804 की नागरिक संहिता ने विशेषाधिकार समाप्त कर समानता स्थापित की, परंतु राजनीतिक नियंत्रण व जबरन सेना भर्ती से असंतोष बढ़ा।
    मुख्य बिंदु 4
    1815 में नेपोलियन की पराजय के बाद विएना कांग्रेस (अध्यक्षता: ड्यूक मैटरनिख) ने रूढ़िवादी व्यवस्था बहाल की और बूर्बों वंश को वापस सत्ता दी।
    मुख्य बिंदु 5
    ग्यूसेपे मेत्सिनी ने 'यंग इटली' और 'यंग यूरोप' जैसे गुप्त संगठन बनाकर इतालवी लोकतांत्रिक गणतंत्र का वैचारिक मार्ग प्रशस्त किया।
    मुख्य बिंदु 6
    1832 की कुस्तुनतुनिया की संधि द्वारा यूनान को एक स्वतंत्र राष्ट्र का दर्जा प्राप्त हुआ, जिसे 'यूरोपीय सभ्यता का पालना' कहा गया।
    मुख्य बिंदु 7
    जर्मनी का एकीकरण ऑटो वॉन बिस्मार्क के नेतृत्व में प्रशा द्वारा लड़े गए 7 वर्षों के 3 युद्धों के बाद 1871 में वर्साय में पूर्ण हुआ।
    मुख्य बिंदु 8
    इटली का एकीकरण कावूर की चतुर कूटनीति, गैरीबाल्डी के रेड शर्ट्स स्वयंसेवकों, और विक्टर इमैनुएल द्वितीय के राजत्व में 1861 में हुआ।
    मुख्य बिंदु 9
    राष्ट्रों का मानवीकरण करने के लिए नारी रूपकों का उपयोग किया गया -- फ्रांस में 'मारिआन' और जर्मनी में 'जर्मेनिया'।
    मुख्य बिंदु 10
    1871 के बाद बाल्कन क्षेत्र में स्लाव राष्ट्रवाद और यूरोपीय महाशक्तियों (रूस, ऑस्ट्रिया, जर्मनी, ब्रिटेन) की प्रतिद्वंद्विता ने 1914 के प्रथम विश्व युद्ध को जन्म दिया।

    स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

    मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

    1
    फ्रेडरिक सॉरयू कौन था और उसने 1848 में किस प्रकार के संसार की कल्पना की थी?
    उत्तर एवं व्याख्या देखें
    उत्तर: फ्रेडरिक सॉरयू एक फ्रांसीसी कलाकार था, जिसने 1848 में चार चित्रों की श्रृंखला बनाकर 'जनतांत्रिक और सामाजिक गणतंत्रों' से बने विश्व की यूटोपियाई (काल्पनिक) छवि प्रस्तुत की थी।
    2
    नेपोलियन की 1804 की नागरिक संहिता का कोई एक प्रमुख गुण और एक प्रमुख दोष बताइए।
    उत्तर एवं व्याख्या देखें
    उत्तर: प्रमुख गुण: जन्म आधारित विशेषाधिकार समाप्त कर कानून के समक्ष समानता स्थापित की। प्रमुख दोष: राजनीतिक स्वतंत्रता छीन ली गई और सेना में जबरन भर्ती की गई।
    3
    ड्यूक मैटरनिख ने ग्यूसेपे मेत्सिनी को क्या कहकर पुकारा था?
    उत्तर एवं व्याख्या देखें
    उत्तर: मैत्रनिख ने मेत्सिनी को 'हमारी सामाजिक व्यवस्था का सबसे खतरनाक शत्रु' (हमारी सामाजिक व्यवस्था का सबसे खतरनाक दुश्मन) कहकर पुकारा था।
    4
    जर्मनी के एकीकरण का मुख्य वास्तुकार कौन था और उसने कौन सी नीति अपनाई थी?
    उत्तर एवं व्याख्या देखें
    उत्तर: जर्मनी के एकीकरण के मुख्य वास्तुशिल्प प्रशा का जो चांसलर ऑटो वॉन बिस्मार्क था, 'लौह और रक्त की नीति' (रक्त और लोहे की नीति) अपनाई थी।
    5
    फ्रांस और जर्मनी के राष्ट्रीय नारी रूपकों के नाम लिखिए।
    उत्तर एवं व्याख्या देखें
    उत्तर: फ्रांस का राष्ट्रीय रूपक 'मारिअन' (मैरिएन) है और जर्मनी का राष्ट्रीय रूपक 'जर्मेनिया' (जर्मनिया) है।
    अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
    अभ्यास के लिए तैयार?

    ऑनलाइन CBT टेस्ट देकर तैयारी का मूल्यांकन करें

    झारखण्ड बोर्ड परीक्षा पैटर्न पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नों का ऑनलाइन टेस्ट दें। तुरंत परिणाम, समय विश्लेषण और प्रत्येक प्रश्न का विस्तृत हल प्राप्त करें।

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