Follow Us
माध्यम चुनें / Select Medium:
Eng (English) Hindi (हिन्दी)
NIOS • कक्षा X • Social Science (213) • अध्याय 22
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जन-सहभागिता (Democratic Participation)

लोकतंत्र में जनता सीधे तौर पर शासन नहीं करती, बल्कि अपने चुने हुए पद के माध्यम से सरकार चलाती है। यह अध्याय भारत में लोकतांत्रिक लोकतंत्र की संपूर्ण प्रक्रिया, उसके सिद्धांत, तंत्र और संवैधानिक लोकतंत्र का एक जीवंत और व्यावहारिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अध्याय हरियाणा में 1987 के विधानसभा चुनाव और चौधरी देवीलाल के 'न्याय युद्ध' के रोमांचक केस की शुरुआत होती है। इसके बाद यह स्पष्ट हो गया कि चुनाव क्यों अनिवार्य हैं, राजनीतिक समीकरण के गुण-दोष क्या हैं, और एक चुनाव में लोकतांत्रिक बनाने वाली न्यूनतम कसौटियां क्या हैं। अध्याय में भारत की पुरातात्विक व्यवस्था-543 इलेक्ट्रोइलेक्ट्रिक क्षेत्र, राज्य क्षेत्र (झारखंड के 81), ज्वालामुखी जनजाति (एससी) और जनजाति का नामांकन (ईपीआईसी), सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनिवार्य संपत्ति और आपराधिक रिकॉर्ड का हलफनामा, चुनाव के ऐतिहासिक नारा ('गरीबी हटाओ', 'लोकतंत्र बचाओ'), और आदर्श आचार संहिता (आदर्श आचार संहिता) का विवरण है। अंत में भारत के स्वतंत्र इलेक्ट्रोनिक आयोग (ईसीआई), आम जनता की बहुमत भागीदारी (टर्नआउट) और इंडिपेंडेंट व स्टार्स के संयुक्त प्रदर्शन (धनबल, बाहुबली, वंशवाद) का गंभीर आकलन किया गया है। एनआईओएस बोर्ड परीक्षा में इलेक्ट्रोनिक आयोग की शक्तियां, चुनावी आचार संहिता, इलेक्ट्रोनिक इलेक्ट्रोरैक्टर और बेंचमार्क पर प्रश्न बार पूछे जाते हैं।

देवीलाल का 'न्याय युद्ध' और किसानों का कर्ज माफ: 76 सीटों का ऐतिहासिक भूचाल

1987 में हरियाणा में कांग्रेस पार्टी की मजबूत सरकार थी। लेकिन 76 साल के फ्लोरिडा नेता चौधरी देवीलाल ने 'न्याय युद्ध' (न्याय के लिए संघर्ष) नामक आंदोलन चलाया और नई पार्टी नामक 'लोक दल' बनाया। चुनावी प्रचार के दौरान देवीलाल ने हरियाणा के किसानों और छोटी पार्टियों से एक ऐतिहासिक वादा किया: 'अगर मेरी पार्टी सत्ता में आ गई, तो सरकार बनाएगी ही सबसे पहले काम किसान और छोटे किसानों का कर्ज माफ करना होगा!' इस एक घोषणापत्र में ऐसा वादा किया गया है कि जनता कांग्रेस से वादा किया गया है कि देवीलाल के पाले में बाढ़ आ जाएगी। राज्य की 90वीं विधानसभा में देवीलाल के गठबंधन ने 76वीं मंजिल पर प्रचंड बहुमत हासिल किया, जबकि कांग्रेस पार्टी ने 5वीं विधानसभा में बहुमत हासिल किया! शपथ लेते ही देवीलाल ने सबसे पहले कर्ज़ माफ़ी का आदेश जारी किया। यह घटना असहमत है कि चुनाव केवल कागजी प्रक्रिया नहीं है; यह एक सामान्य नागरिक देश की सबसे शक्तिशाली सरकार को लाभ पहुंचाने वाला एक जादुई हथियार है!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है जहां 97 करोड़ से अधिक पंजीकृत धारक अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं। झारखंड में 14 मंजिल और 81 मंजिल शामिल हैं, जिनमें शामिल हैं (ST) के लिए 28 मंजिल और SC के लिए 9 मंजिल हैं। यह अध्याय 18 वर्ष की आयु के विद्यार्थियों को एक जिम्मेदारी और व्यक्तित्व व्यक्तित्व बनने, चुनावी सुधारों को समझाने और लोकतांत्रिक राजनीति में शुचिता लाने की प्रेरणा देता है। एनआईओएस बोर्ड परीक्षा में राजनीति विज्ञान के अंतर्गत यह सबसे महत्वपूर्ण अध्याय है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • लोकतंत्र की मूल परिभाषा और जनता द्वारा प्रतिनिधियों के चयन की अवधारणा।
  • वयस्क मताधिकार (18 वर्ष) का बुनियादी ज्ञान।
  • संसद (लोकसभा/राज्यसभा) और राज्य विधानसभा (विधायक/सांसद) का अंतर।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • लोकतांत्रिक चुनाव के पांच अनिवार्य पैमानों को स्पष्ट करना।
  • राजनीतिक दलों के बीच चुनावी प्रतिस्पर्धा के गुण (जवाबदेही) और दोष (गुटबाजी, संकीर्णता) का मूल्यांकन करना।
  • भारत की चुनावी प्रक्रिया के सभी चरणों (परिसीमन, आरक्षण, मतदाता सूची, नामांकन, अभियान, मतदान व मतगणना) को क्रमबद्ध लिखना।
  • चुनाव आयोग (ईसीआई) की संवैधानिक स्वायत्तता, शक्तियां और आदर्श आचार संहिता का निर्धारण।
  • भारत में चुनाव परिणामों की विश्वसनीयता और सत्ता पक्ष के नियमित हारने के कारणों का विश्लेषण करना।
  • भारतीय चुनावों में धनबल, बाहुबल और वंशवाद जैसी चुनौतियों की पहचान कर चुनाव सुधारों के सुझाव देना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. चुनाव क्यों जरूरी हैं? और एक चुन...
2 2. राजनीतिक चुनावी प्रतिस्पर्धा: गु...
3 3. हमारी चुनाव प्रणाली: निर्वाचन क्...
4 4. उम्मीदवारों का नामांकन, चुनाव अभ...
5 5. भारत में चुनाव निष्पक्ष क्यों है...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. चुनाव क्यों जरूरी हैं? और एक चुनाव को क्या लोकतांत्रिक बनाता है?

आधुनिक प्रतिनिधि लोकतंत्र में सभी नागरिक शासन के दैनिक कार्यों में प्रत्यक्ष भाग नहीं ले सकते। मूल रूप से चुनाव (चुनाव) वह नियमित व्यवस्था है जिसके द्वारा लोग एक निश्चित समयांतराल पर अपने-अपने निर्देशों को स्वीकार करते हैं और यदि निर्धारित करते हैं तो उन्हें बदला भी जा सकता है।

चुनाव में कलाकार क्या-क्या निर्णय लेते हैं:

  • वे यह चुन सकते हैं कि उनके लिए कानून कौन बनाएगा.
  • वे यह तय कर सकते हैं कि सरकार कौन बनाएगा और बड़ा नीतिगत फैसला कौन करेगा.
  • वे यह तय कर सकते हैं कि किस पार्टी की नामांकित सरकार और कानून निर्माण का समन्वय।

एक चुनाव डेमोक्रेटिक बनाने वाली न्यूनतम शर्त (5 कसौटियाँ):

  1. हर किसी को फ्रैंचाइज़: प्रत्येक वयस्क नागरिक को एक वोट देने का अधिकार हो और प्रत्येक वोट का समान मूल्य हो (यूनिवर्सल एडल्ट फ्रैंचाइज़)।
  2. चुनाव में वास्तविक विकल्प: ऐतिहासिक स्थलों के सामने विभिन्न राजनीतिक दल और स्वतंत्र उम्मीदवार होने चाहिए जो पूरी तरह से स्वतंत्र हों।
  3. नियमित अंतराल पर चुनाव: चुनाव कुछ वर्षों के नियमित अंतराल पर निश्चित रूप से होना चाहिए (भारत में सामान्यतः 5 वर्ष)।
  4. जनपसंद का उम्मीदवार ही जीतेगा: जिसे जनता असल में सबसे ज्यादा पसंद करे, उसी का चुनाव होना चाहिए।
  5. स्वतंत्र और तानाशाही चुनाव होना चाहिए: चुनाव पूरी तरह से स्वतंत्र और सरदार सरदार में होना चाहिए जहां लोग बिना किसी भय या कष्ट के अपने से वोट डाल सकते हैं।

2. राजनीतिक चुनावी प्रतिस्पर्धा: गुण और दोष

चुनाव का मूल तत्व राजनीतिक आध्यात्म और आक्षेप के बीच खुला खुला है। यह कार्यक्रम कई बार क्लासिक हो जाता है:

चुनावी मौसम के दोष (हनियां) चुनावी संगीत के गुण (लाभ)
• गुटबाजी और फूट: यह समाज और मुसलमानों में दलीय गुटबाजी (गुटबाजी) का जन्म होता है।
• अनुचित हथकंडे: चुनाव के लिए खेल पर एक-दूसरे पर आरोप लगाते हैं और जात-पात और धर्म का सहारा लेते हैं।
• दीर्घकालिक विधानसभा की अनदेखी: केवल अगले चुनाव को टक्कर के चक्कर में दूरगामी लोकहितैषी विधानसभा की बलि चढ़ती है।
• अच्छे लोगों का दूर होना: इस राजनीति के डर से समाज के कई प्रभाव और सेवाभावी लोग जातीय उछालने की राजनीति में आने से कतराते हैं।
• नई प्रतिस्पर्धा की प्रतियोगिता: ठीक वैसे ही जैसे बाजार में ग्राहकों को अच्छी वस्तु दी जाती है, वैसे ही प्रतियोगिता प्रतियोगिता को जनता की सेवा करने के लिए सशक्त बनाता है।
• प्रदर्शन पर पुरस्कार या दंड: यदि कोई पार्टी अच्छा काम करती है तो जनता पार्टी निर्वाचित होती है; अगर वह जनता की नजर में है तो अगले चुनाव में जनता उसे सत्ता से बेदखल कर देगी।
• अदृश्य प्रेरणा: भले ही किसी नेता की नियत केवल सत्ता में बने रहने की हो, कांग्रेस होड ने उसे जनता की मांगें पूरी करने के लिए मजबूर कर दिया है।

3. हमारी चुनाव प्रणाली: निर्वाचन क्षेत्र, आरक्षण एवं मतदाता सूची

भारत में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव हर पांच साल पर होते हैं। पांच साल बाद सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त हो जाता है।

1. निर्वाचन क्षेत्र (Electoral Constituencies):

  • चुनाव के उद्देश्य से पूरे देश को अनेक क्षेत्रों में बांट लिया जाता है जिन्हें निर्वाचन क्षेत्र (Constituency) कहते हैं। एक क्षेत्र में रहने वाले मतदाता अपने एक प्रतिनिधि का चुनाव करते हैं।
  • लोकसभा चुनाव: पूरे देश को 543 संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक क्षेत्र से चुने गए प्रतिनिधि को सांसद (Member of Parliament - MP) कहते हैं। सभी निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या लगभग समान रखने का प्रयास किया जाता है।
  • विधानसभा चुनाव: प्रत्येक राज्य को उसकी जनसंख्या के आधार पर विधानसभा क्षेत्रों में बांटा जाता है। यहाँ से चुने प्रतिनिधि को विधायक (Member of Legislative Assembly - MLA) कहते हैं। (उदाहरण: झारखंड में 81 विधानसभा क्षेत्र हैं)।
  • स्थानीय निकाय: पंचायतों और नगरपालिकाओं में निर्वाचन क्षेत्रों को 'वार्ड' (Ward) कहा जाता है।

2. आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र (Reserved Constituencies):

  • हमारे संविधान निर्माताओं को चिंता थी कि खुली चुनावी प्रतिस्पर्धा में कमजोर वर्गों (कम साधन, शिक्षा व संपर्कों के कारण) के लोग लोकसभा या विधानसभाओं में शायद न पहुंच पाएं।
  • इसलिए कमजोर वर्गों के लिए आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र की व्यवस्था की गई:
  • अनुसूचित जाति (SC): लोकसभा की 84 सीटें अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित हैं (यहाँ केवल SC उम्मीदवार ही चुनाव लड़ सकता है)।
  • अनुसूचित जनजाति (ST): लोकसभा की 47 सीटें अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित हैं।
  • स्थानीय निकायों में महिलाओं का आरक्षण: ग्रामीण पंचायतों और शहरी नगरपालिकाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई (33%) सीटें कानूनी रूप से आरक्षित हैं।

3. मतदाता सूची (Voters' List / Electoral Roll):

  • लोकतांत्रिक चुनाव में मतदान की योग्यता रखने वाले सभी नागरिकों की एक आधिकारिक सूची बनाई जाती है जिसे मतदाता सूची कहते हैं।
  • सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार: भारत में 18 वर्ष या उससे अधिक आयु का प्रत्येक नागरिक, चाहे उसकी जाति, धर्म, लिंग या आर्थिक स्थिति कुछ भी हो, मतदान का अधिकारी है।
  • मतदाता फोटो पहचान पत्र (EPIC): फर्जी मतदान रोकने के लिए सरकार मतदाताओं को फोटो पहचान पत्र जारी करती है, हालांकि वोट डालने के लिए आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या राशन कार्ड जैसे अन्य पहचान पत्र भी मान्य हैं।

4. उम्मीदवारों का नामांकन, चुनाव अभियान एवं आदर्श आचार संहिता

चुनावी मुकाबले का अगला चरण उम्मीदवारों का चयन और जनता के बीच प्रचार अभियान है:

1. उम्मीदवारों का नामांकन (Nomination of Candidates):

  • भारत में कोई भी व्यक्ति जो 25 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो, लोकसभा या विधानसभा का चुनाव लड़ सकता है (मतदान की आयु 18 वर्ष है)।
  • राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों को मनोनीत करते हैं जिसे आम बोलचाल में 'पार्टी टिकट' कहा जाता है। उम्मीदवार को एक नामांकन पत्र (Nomination Form) भरना होता है और कुछ जमानत राशि (Security Deposit) जमा करनी होती है।
  • सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार कानूनी शपथपत्र (Affidavit): प्रत्येक उम्मीदवार को सार्वजनिक घोषणा करनी होती है जिसमें:
    1. उम्मीदवार के खिलाफ चल रहे गंभीर आपराधिक मामलों का ब्यौरा।
    2. उम्मीदवार और उसके परिवार की संपत्ति और देनदारियों (कर्ज) का पूरा विवरण।
    3. उम्मीदवार की शैक्षणिक योग्यता।
    इससे मतदाताओं को सही जानकारी के आधार पर निर्णय लेने का अधिकार मिलता है।

2. चुनाव अभियान के प्रसिद्ध नारे (Historic Slogans):

  • 'गरीबी हटाओ' (Garibi Hatao): 1971 के लोकसभा चुनाव में इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस पार्टी द्वारा दिया गया नारा।
  • 'लोकतंत्र बचाओ' (Save Democracy): 1977 के लोकसभा चुनाव में आपातकाल की ज्यादतियों के खिलाफ जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में जनता पार्टी द्वारा दिया गया नारा।
  • 'जमीन जोतने वाले को' (Land to the Tiller): 1977 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में वामपंथी मोर्चे (Left Front) द्वारा दिया गया नारा।
  • 'तेलुगु स्वाभिमान की रक्षा' (Protect Self-Respect of Telugus): 1983 के आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में एन.टी. रामाराव (तेलुगु देशम पार्टी) का नारा।

3. चुनाव कानून और आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct):

स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए चुनाव कानूनों के तहत किसी भी पार्टी या उम्मीदवार को निम्नलिखित की सख्त मनाही है:

  • मतदाताओं को प्रलोभन (रिश्वत) देना, शराब बांटना या डराना-धमकाना।
  • जाति या धर्म के नाम पर वोट मांगना।
  • चुनाव प्रचार के लिए सरकारी संसाधनों, सरकारी वाहनों या पूजा स्थलों (मंदिर, मस्जिद, चर्च) का उपयोग करना।
  • लोकसभा चुनाव में प्रति निर्वाचन क्षेत्र 95 लाख रुपये (बड़े राज्यों में) तथा विधानसभा चुनाव में 40 लाख रुपये से अधिक खर्च करना।
आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) के प्रमुख नियम:
चुनाव की तारीखों की घोषणा होते ही यह लागू हो जाती है। इसके तहत मंत्रियों और सत्तारूढ़ दल को कोई भी नई नीतिगत घोषणा करने, नई योजनाओं का शिलान्यास करने या सरकारी अधिकारियों के तबादले करने का अधिकार नहीं होता ताकि सत्ताधारी दल को अनुचित लाभ न मिल सके।

5. भारत में चुनाव निष्पक्ष क्यों हैं? चुनाव आयोग एवं चुनौतियां

भारत में तीन प्रमुख स्तंभों पर टिकी है:

1. स्वतंत्र एवं शक्तिशाली इलेक्ट्रॉनिक्स आयोग (भारत का चुनाव आयोग - ईसीआई):

  • भारत में चुनाव एक पूर्णतः स्वतंत्र एवं स्वतंत्र संस्था निर्वाण आयोग कराती है। इसे वैधानिकता ही स्वतंत्रता प्राप्त है।
  • मुख्य निदेशालय (सीईसी) की घोषणा राष्ट्रपति करते हैं, लेकिन एक बार नियुक्ति के बाद सीईसी सरकार या राष्ट्रपति के प्रति कोई अवज्ञा नहीं होती और उन्हें पद से हटाना लगभग असंभव है।
  • आयोग की शक्तियां: चुनाव की अधिसूचना जारी करने से लेकर घोषणा तक की अधिसूचना प्रक्रिया पर नियंत्रण, आचार संहिता लागू करना, उल्लंघन पर सजा देना, और चुनाव के दौरान सरकारी अधिकारियों पर नियंत्रण रखना (अधिकारी आयोग के मातहत काम करते हैं, सरकार के नहीं)।

2. जनता की भारी भागीदारी (लोकप्रिय भागीदारी):

  • पश्चिम के समृद्ध देशों (जैसे अमेरिका) के विपरीत, भारत में अमीर और संपत्ति प्राप्त कलाकारों की तुलना में गरीब, अनपढ़ और मुद्रा लोग अधिक प्रतिशत में वोटिंग करते हैं।
  • भारतीय चर्च का अटूट विश्वास है कि उनके वोट से सरकार की कंपनियों और देश की दिशा पर सीधा असर पड़ता है।

3. नतीजे की स्वीकृति:

  • भारत में मेट्रोपॉलिटन नियमित रूप से चुनावी हारती हैं (लगभग सभी वर्तमान यूरोपीय और विधायक चुनावी हारती हैं)।
  • पराजित् परियोजना जनता के जजमेंट (जनादेश) को सर-मैथे स्वीकार करती है और स्थिर सत्य स्थानांतरण होता है।

स्वतंत्र एवं राजनीतिक दल के प्रमुख सिद्धांत:

  1. अतिधिक धनबल का प्रभाव: बड़े सहायक कलाकार दल और अमीर प्रतियोगी छोटे स्तर और स्थिर संतृप्ति पर भारी आधार हैं।
  2. आपराधिक पृष्ठभूमि के दावेदार: बाहुबली और आपराधिक छवि वाले लोग पैसा और धौंस के दम पर कॉलेज मैदान से बाहर कर टिकट हासिल कर लेते हैं।
  3. पारिवारिक वंशवाद (वंशवादी राजनीति): राजनीतिक के शीर्षलेख और टिकट वितरण पर कुछ खास परिवारों का ही कब्ज़ा बना रहता है।
  4. सार्थक विकल्पों का अभाव: प्रमुख राजनीतिक आश्रमों के समुदायों और कार्यक्रमों में दर्शन अंतर कम होता जा रहा है, जिससे चर्च के पास वास्तविक नीतिगत विकल्प सीमित हो जाते हैं।

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शब्दावली, कालक्रम एवं प्रशासनिक व्यवस्था

लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र
543 कुल सीटें (SC: 84 आरक्षित, ST: 47 आरक्षित)
जनसंख्या के आधार पर परिसीमित संसदीय क्षेत्र।
झारखंड विधानसभा सीटें
81 निर्वाचित सीटें (ST: 28, SC: 9, सामान्य: 44)
आदिवासी बहुल राज्य होने के कारण अनुसूचित जनजातियों को विशेष प्रतिनिधित्व।
आयु सीमाएं
मतदान: 18 वर्ष | चुनाव लड़ना (लोकसभा/विधानसभा): 25 वर्ष
61वें संविधान संशोधन 1988 द्वारा मतदान आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष की गई।
चुनाव आयोग (ईसीआई)
संविधान का अनुच्छेद 324
स्वतंत्र संवैधानिक निकाय, मुख्य इलेक्ट्रॉनिक्स कमिश्नर (सीईसी) के संस्थापक राष्ट्रपति द्वारा।
हरियाणा 1987 'न्याय युद्ध'
चौधरी देवीलाल (लोक दल) - 90 में से 76 सीटें जीतीं
चुनावी वादे (किसानों की कर्ज माफी) के दम पर प्रचंड बहुमत का ऐतिहासिक उदाहरण।
प्रसिद्ध चुनावी नारे
गरीबी हटाओ (1971) | लोकतंत्र बचाओ (1977) | जमीन जोतने वाले को (1977)
चुनावी जनमत को लामबंद करने वाले ऐतिहासिक नारे।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
प्रश्न 1 (उत्तर प्रदेश): भारत का निर्वाचन आयोग (ईसीआई) स्वतंत्र विमान आयोग के लिए कौन-कौन सी शक्तियों का प्रयोग करता है? सविस्तार व्याख्या।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: भारतीय संविधान के अनुसार 324 के अंतर्गत आने वाले मतदाता आयोग को अत्यंत व्यापक और स्वामीभक्त शक्तियां प्रदान की जाती हैं, जो दुनिया के किसी भी अन्य देश के चुनाव आयोग से अधिक हैं:

  1. चुनाव प्रक्रिया पर संपूर्ण नियंत्रण: चुनाव आयोग चुनाव की अधिसूचना (तारीखों) की घोषणा से लेकर नतीजों के अंतिम घोषणा तक चुनाव संचालन के हर पहलू पर संपूर्ण निर्णय लेता है।
  2. आदर्श आचार संहिता (आदर्श आचार संहिता) का सिद्धांत: यह चुनाव आचार संहिता लागू होती है और इसका उल्लंघन करने वाले किसी भी उम्मीदवार या राजनीतिक दल को शामिल करने की शक्ति होती है।
  3. सरकारी सिद्धांतों के सिद्धांतों पर रोक: चुनाव की अवधि के दौरान आयोग सरकार को निर्देश-निर्देश जारी किया जा सकता है ताकि सरकारी मान्यता प्राप्त, सहायक या अधिकारियों का उपयोग किसी भी शुचि पार्टी के प्रचार के लिए न हो सके।
  4. अ शस्त्रागार पर नियंत्रण: चुनाव आयोग पर सभी सरकारी कर्मचारी और पुलिस बल आयोग सीधे नियंत्रण में काम करते हैं; इस दौरान वे अपनी नियमित सरकार के अधीन नहीं होते।
  5. पुनर्मतदान (पुनर्मतदान) का आदेश: यदि आयोग को लगता है कि किसी मतदान केन्द्र या चुनावी क्षेत्र में बूथों पर वोटिंग, हिंसा या धांधली हुई है, तो वह वहां का मतदान रद्द कर नये सिरे से पुनर्मतदान (पुनर्मतदान) का आदेश दे सकता है।
उदाहरण 2
प्रश्न 2 (लघु उत्तरीय): 'आरक्षित विद्युत क्षेत्र' (आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र) की व्यवस्था क्यों की गई है? लोकसभा में एससी और एसटी के लिए विशेष प्रवेश द्वार हैं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

1. आधिकारिक अभिनय की आवश्यकता:

संविधान कलाकारों को यह खतरा था कि सामान्य रूप से खुले समूह में समाज के लचीलेपन, साधनहीन और शोषित वर्ग (अनुसूचित जाति और वर्ग जनजाति) अमीर, साधन कलाकारों और लचीले कलाकारों के सामने जीत हासिल नहीं कर पाएंगे। यदि विधायिका में लोकतंत्र का प्रतिनिधित्व नहीं होगा, तो हमारे लोकतंत्र की आवाज अधूरी और अधूरी रहेगी। फ़्राईम ड्राइंग के लिए विशिष्ट उत्कृष्ट श्रेणी की पेशकश की जाती है जहां केवल समान श्रेणी का प्रतियोगी चुनावी मुकाबला हो सकता है।

2. वर्तमान में नॉमिनेट की स्थिति:

  • अनुसूचित जाति (एससी): 84 गंतव्य आउटडोर हैं।
  • अनुसूचित जनजाति (ST): 47 गंतव्य प्राचीन हैं।

(नोट: स्थानीय स्वशासन जापान-पंचायतों और कंपनियों में महिलाओं के लिए भी 33% पैरिश हैं)।

उदाहरण 3
प्रश्न 3 (लघु उत्तरीय): चुनाव में नामांकन भरते समय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार उम्मीदवारों को कौन-कौन सी जानकारियां कानूनी हलफनामे में देना अनिवार्य है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय के अनुसार प्रत्येक चुनाव में लड़ने वाले प्रतियोगी को नामांकन पत्र के साथ एक वैधानिक शपथपत्र (शपथ पत्र) भरना होता है जिसमें निम्नलिखित तीन जानकारी सार्वजनिक करना अनिवार्य है:

  1. आपराधिक रिकॉर्ड: कोर्ट के खिलाफ अभ्यर्थियों के सभी गंभीर आपराधिक मामले और यदि किसी मामले में दोषसिद्धि (साजा) हुई हो, तो उनका संपूर्ण विवरण।
  2. संपत्ति और ऋणपत्रों का विवरण: दावेदार, उसके पति/पत्नी और गरीब बच्चों की चलन और अचल संपत्ति और पद/वित्तीय छात्रों के सभी ऋणों (डेन्डारियों) का व्यवसाय।
  3. शाैक्षणिक योग्यता: उम्मीदवार की प्रमुख शैक्षणिक डिग्री या शिक्षा का विवरण।

उद्देश्य: इस चुनौती को उम्मीदवार की पृष्ठभूमि से वोट देने का अधिकार है।

उदाहरण 4
प्रश्न 4 (लघु उत्तरीय): भारत में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के समक्ष उपस्थित किन्हीं तीन प्रमुख चुनौतियों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: भारतीय चुनाव प्रणाली विश्व में सबसे विश्वसनीय होने के बाद भी गंभीर गाथा से सीख रही है:

  1. अत्याधिक धनबल का भारी प्रभाव: प्रतिष्ठा में करोड़ों रुपये खर्च हो जाते हैं, जिससे बड़े और अमीर राजनीतिक आश्रमों को छोटे-छोटे आश्रमों और असंतों की तुलना में असमानता मिल जाती है।
  2. अपराधियों की नॉकआउट (बाहुबल): आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोग अपने बाहुबल और धन बल के पर अन्य साहसकर बड़ी गर्लफ्रेंड की टिकटें हथिया लेते हैं।
  3. पारिवारिक राजवंशवाद (वंशवादी राजनीति): अधिकांशतः राजनीतिक अधर्म में लोकतंत्र के आंतरिक का अभाव है; वे आम दार्शनिकों की सलाह पर टिकटें केवल अपने परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों को ही देते हैं।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

मतदान करने की आयु और चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु को एक समान समझ लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

मतदान (वोट) करने की न्यूनतम आयु 18 वर्ष है, जबकि लोकसभा या राज्य विधानसभा का चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष (राज्यसभा के लिए 30 वर्ष) होना अनिवार्य है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह सोचना कि आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र में केवल आरक्षित वर्ग के लोग ही वोट डाल सकते हैं।

सही वैज्ञानिक तथ्य

ऑरिजिनल क्षेत्र में केवल 'उम्मीदवार' उस ऑरल वर्ग (एससी या एसटी) का होना चाहिए, लेकिन वोट करें उस क्षेत्र के सभी पंजीकृत वयस्क नागरिक शामिल हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

आदर्श आचार संहिता को सामान्य कानून की तरह समझना जो संसद ने बनाया हो।

सही वैज्ञानिक तथ्य

आदर्श आचार संहिता सभी राजनीतिक दलों की सर्वसम्मति से बनी एक स्वैच्छिक नियमावली है जिसे निर्वाचन आयोग चुनाव अधिसूचना से लेकर परिणाम तक सख्ती से लागू करवाता है।

भारत की संपूर्ण चुनावी प्रक्रिया एवं संस्थागत तंत्र

भारतीय चुनाव प्रक्रिया: निर्वाचन क्षेत्र से मतगणना तक की यात्रा Electoral Politics: Architecture of Indian Democracy & Election Machinery 1. परिसीमन व आरक्षण • 543 लोकसभा क्षेत्र • SC आरक्षित: 84 • ST आरक्षित: 47 • झारखंड: 81 MLA समान जनसंख्या प्रतिनिधित्व 2. मतदाता सूची (Roll) • 18+ वयस्क मताधिकार • EPIC फोटो पहचान पत्र • निरंतर संशोधन • कोई भेदभाव नहीं एक व्यक्ति, एक वोट 3. नामांकन व हलफनामा • न्यूनतम आयु: 25 वर्ष • पार्टी टिकट व जमानत • आपराधिक रिकॉर्ड • संपत्ति व शिक्षा विवरण पारदर्शिता व जानकारी 4. अभियान व आचार संहिता • 2 सप्ताह का प्रचार • रैलियां, जनसंपर्क, नारे • सरकारी तंत्र का निषेध • खर्च सीमा: 95L / 40L समान खेल का मैदान 5. मतदान एवं परिणाम • गुप्त मतदान (EVM+VVPAT) • उंगली पर अमिट स्याही • निष्पक्ष मतगणना • जनादेश की स्वीकार्यता शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण निर्वाचन आयोग (ECI) की संवैधानिक शक्तियां ✓ अनुच्छेद 324: न्यायपालिका के समान पूर्ण स्वायत्तता। ✓ CEC की सुरक्षा: राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त, पर सरकार से स्वतंत्र। ✓ आचार संहिता उल्लंघन पर दंड: रैलियों/प्रचार पर प्रतिबंध। ✓ सरकारी तंत्र पर नियंत्रण: चुनाव दौरान अधिकारी ECI के अधीन। ✓ पुनर्मतदान शक्ति: गड़बड़ी पर मतदान रद्द करने का पूर्ण अधिकार। परिणाम: भारत में सत्तारूढ़ दल भी नियमित चुनाव हारते हैं भारतीय चुनाव के समक्ष 4 प्रमुख चुनौतियां ⚠ 1. अत्यधिक धनबल: अमीर उम्मीदवारों व कॉर्पोरेट्स का प्रभाव। ⚠ 2. आपराधिक छवि (बाहुबल): आपराधिक पृष्ठभूमि वालों की जीत। ⚠ 3. पारिवारिक वंशवाद: दलों में आंतरिक लोकतंत्र का भारी अभाव। ⚠ 4. सार्थक विकल्पों की कमी: दलों की नीतियों में वैचारिक समानता। ⚠ 5. छोटे दलों/निर्दलीयों की हानि: चुनाव व्यवस्था में असमानता। समाधान: व्यापक चुनाव सुधार एवं जागरूक नागरिक सहभागिता JAC Class 9 Civics • चुनावी राजनीति: लोकतंत्र का उत्सव और जनता की सर्वोच्च संप्रभुता का प्रकटीकरण

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
चुनाव वह लोकतांत्रिक व्यवस्था है जिसमें नागरिक नियमित अंतराल पर अपने प्रतिनिधियों को चुनते हैं और सरकार बनाते हैं।
मुख्य बिंदु 2
लोकतांत्रिक चुनाव की 5 बुनियादी शर्तें: सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार, स्वतंत्र व निष्पक्ष विकल्प, नियमित चुनाव, बहुमत की पसंद का चुनाव, और भयमुक्त वातावरण।
मुख्य बिंदु 3
राजनीतिक प्रतिस्पर्धा नेताओं को जनता की सेवा करने के लिए विवश करती है; प्रदर्शन न करने पर जनता अगली बार सत्ता से बेदखल कर देती है।
मुख्य बिंदु 4
पूरे देश को 543 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में बांटा गया है; झारखंड में 81 विधानसभा सीटें हैं।
मुख्य बिंदु 5
फ़्राईच सॉलिड के राजनीतिक साख-समुदाय में 84 बेस्ड बेस (ST) और 47 बेस्ड बेस (ST) के लिए ऑर्केस्ट्रा हैं।
मुख्य बिंदु 6
18 वर्ष की आयु प्राप्त प्रत्येक भारतीय नागरिक को बिना किसी भेदभाव के मतदान का अधिकार (सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार) प्राप्त है।
मुख्य बिंदु 7
25 वर्ष की आयु का कोई भी नागरिक चुनाव लड़ सकता है; उसे नामांकन के साथ अपनी आपराधिक पृष्ठभूमि, संपत्ति और शिक्षा का वैधानिक हलफनामा देना होता है।
मुख्य बिंदु 8
आदर्श आचार संहिता (आदर्श आचार संहिता) चुनाव की घोषणा के साथ लागू होती है; इस एनजीओ को सरकारी दस्तावेज़ के मत्थे और नई लोक-लुभावन की घोषणा से रोकती है।
मुख्य बिंदु 9
भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स आयोग (ECI) संविधान के दिशानिर्देश 324 के तहत कार्यपालिका के नियंत्रण से पूर्ण स्वतंत्र एक संवैधानिक संस्था है।
मुख्य बिंदु 10
भारतीय चुनावों की प्रमुख चुनौतियां धनबल, आपराधिक पृष्ठभूमि, पारिवारिक वंशवाद और सार्थक नीतिगत विकल्पों का अभाव हैं जिन्हें दूर करने हेतु चुनाव सुधार आवश्यक हैं।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
भारत में लोकसभा अथवा राज्य विधानसभा का चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु कितनी होनी चाहिए?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: C
मतदान करने की आयु 18 वर्ष है, परंतु लोकसभा या विधानसभा का चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष निर्धारित है।
2
वर्तमान में भारत की ओर से वर्जिनिया रेस्तरां (ST) के लिए क्या कहा जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
543 मंजिल में से 84 मंजिल एससी के लिए और 47 मंजिल अनुसूचित जनजाति (अनुसूचित जनजाति) के लिए रेलवे हैं।
3
1977 के लोकसभा चुनाव में जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में जनता पार्टी द्वारा कौन-सा ऐतिहासिक नारा दिया गया था?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
1977 में विरोधियों के विरोध में जनता पार्टी ने 'लोकतंत्र बचाओ' का नारा दिया था।
4
भारत के मुख्य इलेक्ट्रॉनिक्स कमिश्नर (सीईसी) की कंपनी का नाम क्या है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: C
मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, परंतु पद संभालने के बाद वे सरकार के नियंत्रण से पूर्ण स्वतंत्र होते हैं।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
अभ्यास के लिए तैयार?

ऑनलाइन CBT टेस्ट देकर तैयारी का मूल्यांकन करें

झारखण्ड बोर्ड परीक्षा पैटर्न पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नों का ऑनलाइन टेस्ट दें। तुरंत परिणाम, समय विश्लेषण और प्रत्येक प्रश्न का विस्तृत हल प्राप्त करें।

कक्षा 10 Social Science (213) के सभी अध्याय

अध्याय 1: प्राचीन विश्व (Ancient World) अध्याय 2: मध्यकालीन विश्व (Medieval World) अध्याय 3: आधुनिक विश्व - I (Modern World - I) अध्याय 4: आधुनिक विश्व - II (Modern World - II) अध्याय 5: भारत पर ब्रिटिश शासन का प्रभाव (Impact of British Rule) अध्याय 6: औपनिवेशिक भारत में सामाजिक सुधार (Religious & Social Awakening) अध्याय 7: ब्रिटिश शासन के विरुद्ध जन प्रतिरोध (Popular Resistance) अध्याय 8: भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन (Indian National Movement) अध्याय 9: भारत का भौतिक स्वरूप (Physiography of India) अध्याय 10: जलवायु (Climate) अध्याय 11: जैव विविधता (Bio-diversity) अध्याय 12: भारत में कृषि (Agriculture in India) अध्याय 13: परिवहन एवं संचार (Transport and Communication) अध्याय 14: जनसंख्या: हमारा संसाधन (Population: Our Greatest Resource) अध्याय 15: संवैधानिक मूल्य एवं राजनीतिक व्यवस्था (Constitutional Values) अध्याय 16: मौलिक अधिकार एवं मौलिक कर्तव्य (Fundamental Rights and Duties) अध्याय 17: भारत - एक कल्याणकारी राज्य (India - A Welfare State) अध्याय 18: स्थानीय शासन एवं प्रशासन (Local Governments) अध्याय 19: राज्य स्तर पर शासन (Governance at State Level) अध्याय 20: केंद्रीय स्तर पर शासन (Governance at Union Level) अध्याय 21: राजनीतिक दल एवं दबाव समूह (Political Parties and Pressure Groups) अध्याय 22: लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जन-सहभागिता (Democratic Participation) अध्याय 23: भारतीय लोकतंत्र की चुनौतियाँ (Challenges to Indian Democracy) अध्याय 24: राष्ट्रीय एकीकरण एवं धर्मनिरपेक्षता (National Integration & Secularism) अध्याय 25: सामाजिक-आर्थिक विकास एवं वंचित वर्ग (Socio-Economic Development) अध्याय 26: पर्यावरणीय क्षरण एवं आपदा प्रबंधन (Environmental Degradation) अध्याय 27: शांति एवं सुरक्षा (Peace and Security)

AI अध्ययन मित्र

त्वरित शंका समाधान

लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जन-सहभागिता (Democratic Participation) में कोई संदेह या प्रश्न है? हमारे AI अध्ययन मित्र से तुरंत समझें।