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NIOS • कक्षा X • Social Science (213) • अध्याय 9
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

भारत का भौतिक स्वरूप (Physiography of India)

भारत विभिन्न स्थलाकृतियों वाला एक विशाल देश है जहाँ पर्वत, मैदान, मरुस्थल, वराण द्वीप समूह सभी प्रकार के भू-आकृतिक लक्षण स्वामी हैं। यह अध्याय प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत (प्लेट टेक्टोनिक्स का सिद्धांत), प्राचीन गोंडवानालैंड (गोंडवानालैंड) के विखंडन, टेथिस सागर (टेथिस सागर) के अवसादों के वलान से लेकर हिमालय पर्वत का निर्माण, और भारत के 6 प्रमुख भू-आध्यात्मिक खंड-हिमालय पर्वत शृंखला (हिमालय पर्वत), उत्तरी मैदान (उत्तरी मैदान), प्रायद्वीपीय पठार (प्रायद्वीपीय पठार - जिसमें प्रशांत महासागर का ज्वालामुखी शामिल है), भारतीय मरुस्थल (भारतीय) रेगिस्तान), तटीय मैदान (तटीय मैदान), और द्वीप समूह (द्वीप) - का गहनता, वैज्ञानिक और अध्ययनात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। झारखंड अधिविद्य परिषद (एनआईओएस) बोर्ड परीक्षा में 'भांगर और खादर में अंतर', 'पश्चिमी घाट और पूर्वी घाट की तुलना', 'हिमालय के तीन जिलों (हिमाद्री, हिमाचल, शिवालिक) की विशेषताएं', और 'छोटा नागपुर सागर का महत्व' बेहद लोकप्रिय और अनिवार्य प्रश्न हैं।

माउंट एवरेस्ट की चोटी पर समुद्री जीवाश्म: टेथिस सागर से हिमालय की उत्पत्ति का रहस्य

क्या आप जानते हैं कि दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत शिखर माउंट एवरेस्ट (8,848.86 मीटर) के चट्टानों में चट्टानी पत्थर और प्राचीन समुद्री तट (समुद्री जीवाश्म) के अवशेष पाए जाते हैं? करोड़ों वर्ष पूर्व जहां आज गगनचुंबी हिमालय खड़ा है, वहां एक उखा समुद्र तलता था जिसे 'टेथिस सागर' कहा जाता था। जब दक्षिण से भारतीय प्लेट उत्तर की ओर यूरेशियन प्लेट से टकराई, तो टेथिस सागर के तलछट पर इतनी भयंकर तूफ़ानी बल लगा कि समुद्र का तल दुनिया की सबसे युवा और गहरी घाटी वाली पर्वतमाला (यंग फोल्ड पर्वत)-हिमालय-में बदल गई। यह टक्कर आज भी जारी है और हिमालय की कुछ ऊंची वस्तुएं ऊंची उठ रही हैं!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

भारत के भौतिक स्वरूप की विविधता ही हमारे देश की प्राकृतिक संपदा का आधार है। हिमालय न केवल सदानीरा और नदियाँ जल-विद्युत का स्रोत है, बल्कि वह उत्तर से आने वाली आइसली साइबेरियाई सीमाओं को रोककर भारत को एक अद्वितीय जलवायु प्रदान करता है। उत्तरी मैदानी क्षेत्र के 'अन्न का कटोरा' हैं, जबकि प्रायद्वीपीय पठार—विशेष रूप से झारखंड का छोटा नागपुर क्षेत्र—खनिजों का विशाल भंडारगृह है, जिसने देश के औद्योगिकीकरण को गति दी है। तटीय क्षेत्र द्वीप और समूह मत्स्यपालन और विदेशी व्यापार के प्रमुख केंद्र हैं। एनआईओएस बोर्ड परीक्षा में भूगोल खंड में यह सबसे विस्तृत और सबसे बड़ा भारांक वाला अध्याय है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • पृथ्वी की आंतरिक संरचना (क्रस्ट, मैंटल, कोर) की आधारभूत जानकारी।
  • अपरदन (कटाव), अपक्षय (अपक्षय) और निक्षेपण (जमाव) की परत का ज्ञान।
  • पर्वत, पठार और मैदान की परिभाषा और दृश्य पहचान।
  • भारत के मानचित्र पर प्रमुख नदियों (गंगा, सिंधु, ब्रह्मपुत्र) और पर्वतमालाओं की अवस्थिति।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत और तीन प्रकार की प्लेट सीमाओं (अभिसारी, अपसारी, रूपांतर) की व्याख्या करना।
  • हिमालय की तीन समानांतर श्रेणियों—महान हिमालय (हिमाद्रि), निम्न हिमालय (हिमाचल), और बाह्य हिमालय (शिवालिक) की भू-आकृतिक विशेषताओं का विश्लेषण करना।
  • उत्तरी मैदान के चार विशिष्ट क्षेत्रों—भाबर, तराई, भांगर, और खादर में तुलनात्मक अंतर स्पष्ट करना।
  • प्रायद्वीपीय पठार के दो मुख्य भागों (मध्य उच्चभूमि और दक्कन का पठार) तथा पश्चिमी घाट व पूर्वी घाट के लक्षणों की तुलना करना।
  • झारखंड के छोटानागपुर पठार की भू-आकृतिक स्थिति, दामोदर भ्रंश घाटी और खनिज संपन्नता को समझना।
  • थार मरुस्थल (बरकान), तटीय मैदानों (कोंकण, मालाबार, कोरोमंडल) तथा द्वीपों (लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार) के लक्षणों का मूल्यांकन करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. भूगर्भीय निर्माण एवं प्लेट विवर्...
2 2. हिमालय पर्वत शृंखला (हिमालय पर्व...
3 3. उत्तरी मैदान (उत्तरी मैदान): भाब...
4 4. प्रायद्वीपीय पठार (प्रायद्वीपीय...
5 5. भारतीय मरुस्थल, तटीय मैदान और द्...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. भूगर्भीय निर्माण एवं प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत (प्लेट टेक्टोनिक्स)

पृथ्वी की सतह के निर्माण का वर्णन प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत (प्लेट टेक्टोनिक्स का सिद्धांत) द्वारा बताया गया है। इस सिद्धांत के अनुसार पृथ्वी की ऊपरी सतह 7 बड़ी और कुछ छोटी परिकल्पना से बनी है।

प्लेटों की गतियों के तीन प्रकार:

  • 1. अभिसारी सीमा (अभिसरण सीमा): जब दो प्लेटें एक-दूसरे के करीब आती हैं, तो वे या तो वलनाकर मुड़ जाती हैं (वलन - फोल्डिंग) या एक प्लेट दूसरी तरफ धंस जाती है। हिमालय पर्वत के निर्माण की इसी प्रक्रिया का परिणाम है।
  • 2. अपसारी सीमा (अपसारी सीमा): जब दो प्लेटें एक-दूसरे से दूर जाती हैं, तो भ्रंश (दोषपूर्ण) और टूटी हुई संरचनाएं और स्कॉलरशिप लावा बाहर की ओर जाती हैं।
  • 3. रूपांतर सीमा (Transform Boundary): जब दो प्लेटें एक-दूसरे के समानांतर रूप से भिन्न होती हैं, जिससे भूकंप आते हैं।

गोंडवानालैंड और हिमालय की उत्पत्ति:

प्राचीन काल में पृथ्वी पर एक ही विशाल दृश्य था जिसे पैंजिया कहा जाता था। इसका दक्षिणी भाग गोंडवानालैंड (गोंडवानालैंड) कहलाया जिसमें आज का भारत, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और अंटार्कटिका शामिल थे; जबकि उत्तरी भाग अंगारालैंड कहलाया.

संवाहनीय धारा ने गोंडवानालैंड को कई दबावों में तोड़ दिया। भारतीय प्लेट उत्तर दिशा की ओर बहती हुई और बहुत बड़ी यूरेशियन प्लेट से बनी हुई। इस घटना का कारण दोनों रहस्यों के बीच स्थित टेथिस सागर (टेथिस जियोसिंक्लाइन) की तालचट्टी चट्टानें ऊपर उठीं और हिमालय की पर्वत शृंखला का निर्माण हुआ।

2. हिमालय पर्वत शृंखला (हिमालय पर्वत)

हिमालय भारत की उत्तरी सीमा पर फोटो भूगर्भिक रूप से युवा और मजबूत के दृश्य से वलित पर्वत शृंखला (फोल्ड पर्वत) है। यह पश्चिम में सिंधु नदी से लेकर पूर्व में ब्रह्मपुत्र तक 2,400 किमी की लंबाई में एक चाप (आर्क) के रूप में है। इसकी चौड़ाई कश्मीर में 400 किमी और नारियल प्रदेश में 150 किमी है।

उत्तर से दक्षिण की ओर तीन समानान्तर श्रेणियाँ:

श्रेणी का नाम औसत वॉलपेपर चौड़ाई शैल संरचना प्रमुख चोटियाँ / घाटियाँ / दर्रे
1. महान या आंतरिक हिमालय (हिमाद्रि - हिमाद्रि) औसत वॉलपेपर 6,000 मीटर; सबसे सतत शृंखला कोर ग्रेनाइट (ग्रेनाइट) का निर्माण होता है; हमेशा बर्फ से ढका रहता है माउंट एवरेस्ट रेस्तरां (8,848 मी.), कंचनजंगा (8,598 मी.), मकालू, धौलागिरि, नंगा पर्वत, नंदा देवी। गंगोत्री व यमुनोत्री हिमानियां।
2. निम्न या मध्य हिमालय (हिमाचल - हिमाचल) ऊंचाई 3,700 से 4,500 मीटर; चौड़ाई 50km अत्याधिक नक्षत्र तथा कायांतरित चट्टानें (मेटामॉर्फिक चट्टानें) सबसे लंबी शृंखला पीर पंजाल; धौलाधार और महाभारत श्रेणियां। कश्मीर, आश्रम और मछुआरों के प्रसिद्ध घाटियाँ और पर्यटन स्थल (शिमला, मसूरी, आदि)
3. आकर्षक हिमालय (शिवालिक - शिवालिक) ऊंचाई 900 से 1,100 मीटर; चौड़ाई 10 से 50km असंपीड़ित अवसादों, बजरी और जलोढ़ से निर्मित निम्न हिमाचल और शिवालिक के बीच की अनुदैर्ध्य घाटियों को 'दून' (डन्स) कहा जाता है—जैसे झील, कोटली दून और पाटली दून।

नदी घाटियों के आधार पर प्रादेशिकडिवीजन:

  • पंजाब हिमालय: सिंधु और सतलुज के बीच (कश्मीर और हिमाचल हिमालय).
  • कुमाऊँ हिमालय: सतलुज और काली नदी के बीच।
  • नेपाल हिमालय: काली और तीस्ता नदी के बीच।
  • असम हिमालय: तीस्ता और दिहांग (ब्रह्मपुत्र) नदी के बीच।
  • पूर्वाचल (पूर्वाचल): दिहांग महाखड्ड के बाद हिमालय दक्षिण की ओर मुख है—पटकाई, नागा, मिजो और मठ पहाड़ियां।

3. उत्तरी मैदान (उत्तरी मैदान): भाबर, तराई, भांगर और खादर

उत्तरी मैदान तीन प्रमुख नदी नदी-सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र और सहायक नदियाँ बहाकर द्वारा बनाई गई जलोढ़ मिट्टी (जलोढ़ मिट्टी) लाखों वर्षों के निक्षेपण से बनी है। इसका अभिलेख 7 लाख वर्ग किलोमीटर है। यह मैदान 2,400 किमी लंबा और 240 से 320 किमी लंबा है। मिश्रित मिट्टी, मिश्रित मिट्टी, प्राकृतिक जल और मिट्टी के खनिज के कारण यह भारत का सबसे अधिक उत्पादक कृषि क्षेत्र है।

मृदा एवं उद्यमीय स्वरूप के आधार पर 4 उप-क्षेत्र:

क्षेत्र अवस्थिति व फर्म जल प्रवाह व वनस्पति लक्षण कृषि समीक्षा
1. भाबर (भाबर) शिवालिक की ढलान पर 8 से 16 किमी लंबी संकरी पट्टी; काँच-पत्थरों (कंकड़) का जमव। अत्याधिक पारगम्यता के कारण सभी सागर इस स्त्रियां में युगल (भूमिगत) हो जाते हैं। कृषि के लिए अनुपयुक्त।
2. तराई (तराई) भाबर के दक्षिण में स्थित; प्राकृतिक मिट्टी का जमव. विलुप्त नदियाँ पुनः सतह पर दिखाई देती हैं, जिससे दलदली और नाम (दलदली) क्षेत्र बनता है। सिंथेटिक वनों और पौधों से युक्त (उदा. दुधवा राष्ट्रीय उद्यान). वनों को साभार के रूप में बसाया गया और खेती, चावल की खेती होती है।
3. भांगर (भांगर) नादियों के बाढ़ के मैदान के ऊपर स्थित पुराना जलोढ़ (पुराना जलोढ़); वेदिका (छत) जैसा शीर्ष। मृदा में चूनेदार निक्षेप पाए जाते हैं जिनमें स्थानीय भाषा में 'कंकड़' (कांकर) कहा जाता है। कम स्टोरी; गहनता की आवश्यकता है।
4. खादर बाढ़ के मैदानों की नवीन जलोढ़ (नवीन जलोढ़) मिट्टी; निचला भाग. हर साल बाढ़ के पानी से नई महीन गाद (सिल्ट) डाली जाती है। सार्वभौमिक रचना; गहन कृषि (गहन धान, खेती, दालहन) के लिए आदर्श।

4. प्रायद्वीपीय पठार (प्रायद्वीपीय पठार) एवंनाग छोटापुर प्रायद्वीप (झारखंड)

प्रायद्वीपीय व्रायंस एक मास का शीर्ष वाला भूभाग है जो पुराना क्रिस्टलीय, आग्नेय तथा कायन्तरित शैलों से बना है। यह प्राचीन गोंडवानालैंड के निर्माण और उत्तर दिशा में खिसकने से बना है, इसलिए यह भारत का सबसे प्राचीन टुकड़ा है।

पत्थर के दो मुख्य भाग:

  1. 1. मध्य उच्चभूमि (सेंट्रल हाइलैंड्स): नर्मदा नदी उत्तर में स्थित है। इसमें मालवा का ऑप्रेशन शामिल है। इसके पूर्व विस्तार को स्थानीय रूप से बुंदेलखंड और बघेलखंड कहा जाता है। इसका पूर्वी विस्तार छोटा नागपुर पठार (छोटानागपुर पठार) है, जिससे दामोदर नदी बहती है।
  2. 2. दक्कन का पठार (दक्कन का पठार): एक तेलाकार भूभाग है जो नर्मदा नदी के दक्षिण में स्थित है। उत्तर में इसका परमाणु आधार सतपुड़ा श्रृखंला पर है, जबकि महादेव, कैमूर के पहाड़ियां और मैकल शृंखला इसका पूर्वी विस्तार हैं। बाद में इसे मेघालय का ऑप्रेशन और कार्बी एंगलोंग ऑपरेशंस कहा जाता है (गारो, वोक्स, जेनेटिया माउंटेनियंस)।

दक्कन ट्रैप (डेक्कन ट्रैप):

प्रायद्वीपीय महासागर के पश्चिमी भाग में पाई जाने वाली काली मिट्टी (काली मिट्टी) को 'दक्कन जाल' कहा जाता है। इसकी उत्पत्ति के सिद्धांत लावा के अपक्षय से हुई है, जो कि रसोई की खेती के लिए सबसे अच्छा है।

पश्चिमी घाट बनाम पूर्वी घाट का तुलनात्मक विश्लेषण:

लक्षण पश्चिमी घाट (पश्चिमी घाट - सह्याद्रि) पूर्वी घाट (पूर्वी घाट)
निरंतरता (निरंतरता) सतत् (निरंतर) शृंखला; केवल दर्रों (थल घाट, भोर घाट, पाल घाट) को ही पार किया जा सकता है। असतत (असंतत) और धारा; बंगाल की खाड़ी में पानी वाली नदियाँ (गोदावरी, कृष्णा, कावेरी) ने इसे काटा है।
औसत वॉलपे ऊँचे हैं; औसत आयाम 900 से 1,600 मीटर. अपेक्षाकृत नीचे हैं; औसत स्टेडियम 600 मीटर.
सर्वोच्च शिखर अनाईमुडी (2,695 मी.) तथा डोडाबेटा (2,637 मी.) महेन्द्रगिरि (1,501 मी.).
वर्ष का प्रकार पर्वतीय वर्षा (भौगोलिक वर्षा); पश्चिमी ढलानों पर 250 सेमी से अधिक वर्षा। कम वर्षा; शीत ऋतु में पैकेज से वर्षा होती है।

झारखंड का छोटानागपुर ऑप्रेशन:

झारखण्ड राज्य का अधिकांश भाग छोटा नगर निगम पर स्थित है। यह खनिज भंडार (लोहा, कोयला, तांबा, अभ्रक, बॉक्सलाइट) अत्यधिक समृद्ध है और इसे 'भारत का रूर' (भारत का रूहर) कहा जाता है। पारसनाथ पहाड़ी (1,365 मीटर) इस पर्वत की ऊँचाई सबसे अधिक है। दामोदर, स्वर्ण रेखा, बराकर और उत्तरी कोयल की प्रमुख नदियाँ हैं।

5. भारतीय मरुस्थल, तटीय मैदान और द्वीप समूह

भारत के शेष तीन भौतिक स्वरूप, देशों की भौगोलिक विविधता को पूर्णता प्रदान करते हैं:

1. भारतीय मरुस्थल (भारतीय रेगिस्तान - थार):

  • अरावली पर्वत के पश्चिमी तट पर रेत के टिब्बों से ढका एक तरंगित मैदान है।
  • यहाँ प्राकृतिक 150मिमी से भी कम वर्षा होती है। शुष्क जलवायु और वनस्पति विज़न क्षेत्र है।
  • वर्षा ऋतु में कुछ सागरतट दिखते हैं जो रेत में ही विलीन हो जाते हैं। लूनी (लूनी) इस क्षेत्र की एकमात्र बड़ी नदी है।
  • कान (बार्चन्स): अर्धचंद्राकार रेत का टीला जिसका प्रकाशन बहुत बड़ा क्षेत्र है (विशेषकर भारत-प्रवीण सीमा के पास साझीदारी में)।

2. तटीय मैदान (तटीय मैदान):

प्रायद्वीपीय समुद्र तटीय द्वीपसमूह द्वीपसमूह का विस्तार है:

  • पश्चिमी तट मैदान: अरब सागर और पश्चिमी घाट के बीच का मैदान है। इसके तीन भाग हैं: उत्तर में कोंकण (मुंबई और गोवा), मध्य में कन्नड़ मैदान, और दक्षिण में मालाबार तट (केरल - लैगून और कयाल).
  • पूर्वी तटीय मैदान: बंगाल की खाड़ी के साथ समुद्र तटीय क्षेत्र और तटीय मैदान है। उत्तरी भाग को उत्तरी सरकार (उत्तरी सरकार) और दक्षिणी भाग को कोरोमंडल तट (कोरोमंडल तट) कहा जाता है। महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी विशाल डेल्टा हैं। ओडिशा में स्थित है चिल्का झील (चिलिका झील) भारत की सबसे बड़ी पानी की लैगून झील है।

3. समूह द्वीप (द्वीप समूह):

  • लक्षद्वीप समूह: केरल के मंगलबार तट के पास स्थित छोटा प्रवाल द्वीप (कोरल द्वीप समूह) से बना है। इसका दस्तावेज़ीकरण 32 वर्गवर्ग है। क्वार्टी इसका मुख्यालय है। पिटली द्वीप जहां मानव निवास नहीं है, वहां एक पक्षी अभयारण्य है।
  • अंडमान और निकोबार द्वीप समूह: बंगाल की खाड़ी में उत्तर से दक्षिण की ओर मुख्‍य द्वीप समूह की शृंखला है। ये जलमग्न पर्वत स्थान के शिखर हैं। यह आकार में बड़ा, संख्या में बहुल और प्रतिशत में हैं। उत्तर में अंडमान और दक्षिण में निकोबार है। यहाँ विषुवतीय जलवायु पाई जाती है। भारत का एकमात्र भाग सक्रिय शिल्पकार 'बैरन द्वीप' (बैरेन द्वीप) अंडमान और निकोबार में ही स्थित है।

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शब्दावली, कालक्रम एवं प्रशासनिक व्यवस्था

माउंट एवरेस्ट
8,848.86 मीटर (नेपाल)
विश्व का सर्वोच्च शिखर; महान हिमालय (हिमाद्रि) में स्थित।
कंचनजुंगा
8,598 मीटर (सिक्किम, भारत)
भारत में स्थित हिमालय का सर्वोच्च शिखर।
अनाईमुडी
2,695 मीटर (केरल)
प्रायद्वीपीय भारत और पश्चिमी घाट का सर्वोच्च शिखर।
महेंद्रगिरि
1,501 मीटर (ओडिशा)
पूर्वी घाट का सर्वोच्च शिखर।
पारसनाथ पहाड़ी
1,365 मीटर (गिरिडीह, झारखंड)
छोटा नागपुर पठार और झारखंड का सर्वोच्च शिखर।
चिल्का झील
ओडिशा (महानदी डेल्टा के दक्षिण)
भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की लैगून झील।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
प्रश्न 1 (लघु उत्तरीय): उत्तरी मैदान के 'भांगर' (भांगर) और 'खादर' (खादर) में मुख्य अंतर स्पष्ट है।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: उत्तरी मैदान की आयु और नवीनता के आधार पर दो पौराणिक कथाओं में कहा जाता है:

लक्षण भांगर (भांगर) खादर (खादर)
मृदा की प्रकृति यह पुरातन जलोढ़ (पुराना जलोढ़) मिट्टी से बना है। यह नवीन जलोढ़ (नवीन जलोढ़) मिट्टी से बना है।
अवस्थिति नादियों के बाढ़ वाले मैदान से ऊपर स्थित है झाडू का पानी का पता नहीं। नादियों के भूजल का पानी का पता कहाँ स्थित है।
कंकड़ व स्तम्भन इसमें चूनेदार निक्षेप (कंकड़) पाए जाते हैं; यह अंतिम कम डिज़ाइन है। यह इलेक्ट्रोनिक गाड से युक्त होता है; यह अत्याधिक ताकत और गहन कृषि सबसे अच्छी है।
उदाहरण 2
प्रश्न 2 (दीर्घ उत्तरीय): पश्चिमी घाट और पूर्वी घाट के बीच तुलनात्मक अंतर स्पष्ट कीजिए। कौन-सा घाट अधिक ऊंचा और सतत है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: प्रायद्वीपीय प्रायद्वीप के पश्चिमी और पूर्वी तट क्रमशः पश्चिमी और पूर्वी घाट स्थित हैं:

1. पश्चिमी घाट (पश्चिमी घाट - सह्याद्रि):

  • सतत् शृंखला: यह एक सतत पर्वतमाला है जिसे केवल थाल घाट, भोर घाट और पाल घाट दर्रो से ही पार किया जा सकता है।
  • ऊंचाई: यह अधिक ऊंचा है; इसका औसत वॉलपेप 900 से 1,600 मीटर है।
  • सर्वोच्च शिखर: अनाईमुडी (2,695 मीटर) और डोडाबेटा (2,637 मीटर)।
  • वर्ष: अरब सागर से आने वाली दक्षिण-पश्चिमी पवनों को रोककर पश्चिमी घाटों पर भारी पर्वतीय वर्षा (250 सेमी+) कराता है।

2. पूर्वी घाट (पूर्वी घाट):

  • असतत शृंखला: यह सतत नहीं है बल्कि बंगाल की खाड़ी में स्थित महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी नदियों में कई स्थल विखंडित (कटा-फटा) हैं।
  • ऊँचाय: आख़िरकार नीचा है; इसकी औसत ज़मीन मात्र 600 मीटर है।
  • सर्वोच्च शिखर: महेंद्रगिरि (1,501 मीटर)।
  • वर्ष: यहां ग्रीशकाल में काम वर्षा होती है; मुख्य वर्षा शीतकाल में उत्तर-पूर्वी थोकख़ाना से होता है।

निष्कर्ष: पश्चिमी घाट पूर्वी घाट की तुलना में काफी अधिक ऊंचाई और स्थिरता है।

उदाहरण 3
प्रश्न 3 (लघु उत्तरीय): हिमालय की तीन प्रमुख समानांतर श्रेणियों—हिमाद्रि, हिमाचल और शिवालिक की मुख्य विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: उत्तर से दक्षिण दिशा में हिमालय की तीन प्रमुख समानांतर श्रेणियां हैं:

  1. महान या आंतरिक हिमालय (हिमाद्रि): यह सबसे उत्तरी और सबसे टिकाऊ श्रेणी है। इसका औसत पैवेलियन 6,000 मीटर है। इसका कोर आर्किटेक्चर बना हुआ है और विश्व के सर्वोच्च शिखर (माउंट एवरेस्ट, कंचनजंगा) इसी में स्थित हैं। यह बर्फ हमेशा से पुरानी रहती है।
  2. निम्न या मध्य हिमालय (हिमाचल): हिमाद्रि के दक्षिण में स्थित है। औसत मंजिल 3,700 से 4,500 मीटर और चौड़ाई 50 किमी है। पीर पंजाल सबसे लंबी शृंखला है। कश्मीर, आश्रम और वैज्ञानिकों की सुंदर घाटियाँ स्थित हैं।
  3. बाह्य हिमालय (शिवालिक): यह सबसे दक्षिणी श्रेणी है जिसका क्षेत्रफल द्वीप 900 से 1,100 मीटर है। यह नदी बहाकर द्वारा बताई गई असंपीड़ित अवसादों से बनी है। निम्नतम हिमाचल और शिवालिक के समुद्र तट की घाटियों को 'दून' (जैसे मित्र) कहा जाता है।
उदाहरण 4
प्रश्न 4 (विश्लेषणात्मक): झारखंड के संदर्भ में 'छोटा नागपुर पठार' की भौगोलिक स्थिति और इसके आर्थिक महत्व की विवेचना कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

1. भूवैज्ञानिक स्थिति:

छोटा नागपुर प्रायद्वीप प्रायद्वीपीय प्रायद्वीप का मध्य उच्चभूमि का धुर पूर्वी विस्तार है। झारखंड़ राज्य का लगभग संपूर्ण भूभाग एकाधिकार पर अवस्थित है। इसका निर्माण अत्यंत प्राचीन आर्कियन ग्रेडिएंट और नीस आर्किटेक्चर से हुआ है। दामोदर, स्वर्ण रेखा, बराकर और उत्तरी कोयल की प्रमुख नदियाँ हैं। पारसनाथ पहाड़ी (1,365 मीटर) इस द्वीप का सर्वोच्च बिंदु है।

2. आर्थिक महत्व:

  • खनिज भंडार का भंडारगृह: भारत का 40% से अधिक खनिज संसाधन इसी स्रोत में पाया जाता है। झरिया, बोकारो, कर्णपुरा में उत्तम कोटि का कोयला; सिंहभूम में लौह अयस्क, तांबा और यूरेनियम (जादूगोड़ा); तथा कोडरमा एवं गिरिडीह में विश्व प्रसिद्ध अभ्रक (अभ्रक) पाया जाता है। इसलिए इसे 'भारत का रूर' (भारत का रुहर) कहा जाता है।
  • भरी कॉम्बिनेशन के सारांश: स्टार स्टार का टाटा स्टील (TISCO), बोकारो स्टील प्लांट, और रांची का HEC प्लांट एरेशिया की खनिज संपदा पर आधारित हैं।
  • जल-विद्युत: दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) भारत की पहली बहुउद्देश्यीय नदी घाटी परियोजना है जो इस ईरान की जीवन रेखा है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

भारत की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को भारत में बताना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

माउंट एवरेस्ट रेस्टोरेंट (8,848.86 मी.) नेपाल में स्थित है। भारत में हिमालय की सर्वोच्च चोटी 'कंचनजंगा' (8,598 मी., सागर) और पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में K2 (गॉडविन ऑस्टिन - 8,611 मी.) है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

'भाबर' और 'तराई' के क्रम में भ्रम होना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

पहाड़ की तलहटी में पहले कंकड़-पत्थरों वाला 'भाबर' (जहाँ नदियां लुप्त होती हैं) आता है; उसके दक्षिण में दलदली और वनाच्छादित 'तराई' (जहाँ नदियां पुनः प्रकट होती हैं) आता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

पश्चिमी घाट और पूर्वी घाट के सर्वोच्च शिखरों को उलट देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

पश्चिमी घाट का सर्वोच्च शिखर 'अनाईमुडी' (2,695 मी.) है; पूर्वी घाट का सर्वोच्च शिखर 'महेंद्रगिरि' (1,501 मी.) है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

लक्षद्वीप को ज्वालामुखीय द्वीप समझना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

लक्षद्वीप 'प्रवाल द्वीप' (कोरल द्वीप - सूक्ष्म चतुर्थांश के कंकालों से निर्मित) है; जबकि अंडमान-निकोबार का बैरन द्वीप भारत का सक्रिय मस्कुलर द्वीप है।

भारत के 6 प्रमुख भू-आकृतिक विभाग एवं पर्वत प्रणालियां

भारत का भौतिक स्वरूप: 6 प्रमुख भू-आकृतिक इकाइयां एवं शैल संरचना 1. हिमालय एवं उत्तरी मैदान • हिमालय की 3 श्रेणियां: 1. हिमाद्रि (6000 मी., ग्रेनाइट कोर) 2. हिमाचल (3700-4500 मी., पीर पंजाल) 3. शिवालिक (900-1100 मी., दून घाटियां) • उत्तरी मैदान के 4 भाग: 1. भाबर: कंकड़ पट्टी, नदियां लुप्त 2. तराई: दलदली, सघन वन (दुधवा) 3. भांगर: पुराना जलोढ़, कंकड़ युक्त 4. खादर: नवीन जलोढ़, अति-उर्वर सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र बेसिन • क्षेत्रफल: 7 लाख वर्ग किमी • लंबाई: 2,400 किमी • देश का सबसे बड़ा अन्न भंडार 2. प्रायद्वीपीय पठार व घाट • प्राचीन गोंडवानालैंड का भाग: - मध्य उच्चभूमि (मालवा, बुंदेलखंड) - दक्कन का पठार (दक्कन ट्रैप-काली मिट्टी) - छोटानागपुर पठार (खनिज भंडार/रूर) • पश्चिमी घाट (सह्याद्रि): - सतत शृंखला (ऊंचाई 900-1600 मी.) - अनाईमुडी (2,695 मी.) सर्वोच्च शिखर - पर्वतीय वर्षा (250 सेमी+) • पूर्वी घाट: - असतत व कटा-फटा (ऊंचाई 600 मी.) - महेंद्रगिरि (1,501 मी.) सर्वोच्च शिखर झारखंड: पारसनाथ (1,365 मी.) दामोदर, स्वर्णरेखा, लोहा व कोयला 3. मरुस्थल, तट एवं द्वीप • थार मरुस्थल (The Desert): - 150 मिमी/वर्ष से कम वर्षा - 'बरकान' (अर्धचंद्राकार बालू का टीला) - लूनी नदी (एकमात्र बड़ी नदी) • तटीय मैदान: - पश्चिम: कोंकण, कन्नड़, मालाबार तट - पूर्व: उत्तरी सरकार, कोरोमंडल तट - चिल्का झील (भारत की सबसे बड़ी लैगून) • द्वीप समूह (Islands): - लक्षद्वीप: 32 वर्ग किमी, प्रवाल द्वीप - अंडमान-निकोबार: जलमग्न पर्वत शिखर - बैरन द्वीप: भारत का सक्रिय ज्वालामुखी अतुल्य प्राकृतिक विविधता

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत के अनुसार पृथ्वी की पर्पटी 7 प्रमुख प्लेटों से बनी है; भारतीय और यूरेशियन प्लेट के अभिसरण से टेथिस सागर से हिमालय की उत्पत्ति हुई।
मुख्य बिंदु 2
हिमालय 2,400 किमी लंबा वलित पर्वत है; इसकी 3 श्रेणियां हैं—महान हिमालय/हिमाद्रि (6,000 मी.), निम्न हिमालय/हिमाचल (3,700-4,500 मी.), और बाह्य हिमालय/शिवालिक (900-1,100 मी.)।
मुख्य बिंदु 3
शिवालिक और हिमाचल के मध्य स्थित अनुदैर्ध्य घाटियों को 'दून' (जैसे देहरादून, पाटली दून) कहा जाता है।
मुख्य बिंदु 4
उत्तरी मैदान सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र द्वारा लाई गई जलोढ़ मिट्टी से बना 7 लाख वर्ग किमी का उपजाऊ मैदान है।
मुख्य बिंदु 5
धरातलीय बनावट के आधार पर उत्तरी मैदान 4 भागों में बंटा है: भाबर (कंकड़ पट्टी, नदियां लुप्त), तराई (दलदली, सघन वन), भांगर (पुरातन जलोढ़, कंकड़) और खादर (नवीन जलोढ़, अति-उर्वर)।
मुख्य बिंदु 6
प्रायद्वीपीय पठार प्राचीन गोंडवानालैंड का भाग है और कठोर आग्नेय व कायांतरित चट्टानों से बना देश का सबसे पुराना भूखंड है।
मुख्य बिंदु 7
पश्चिमी घाट एक सतत और ऊंचा पर्वत (औसत 900-1,600 मी., सर्वोच्च शिखर अनाईमुडी 2,695 मी.) है; जबकि पूर्वी घाट असतत और नदियों द्वारा विखंडित है (सर्वोच्च शिखर महेंद्रगिरि 1,501 मी.)।
मुख्य बिंदु 8
झारखंड का छोटानागपुर पठार खनिजों (कोयला, लोहा, तांबा, अभ्रक) का विपुल भंडारगृह है और इसे 'भारत का रूर' कहा जाता है; पारसनाथ (1,365 मी.) इसका सर्वोच्च शिखर है।
मुख्य बिंदु 9
थार मरुस्थल 150 मिमी से कम वर्षा वाला रेतीला मैदान है जहाँ 'बरकान' (अर्धचंद्राकार बालू के टीले) और लूनी नदी पाई जाती है।
मुख्य बिंदु 10
अरब सागर में लक्षद्वीप प्रवाल द्वीपों से बना है; जबकि बंगाल की खाड़ी में अंडमान-निकोबार में भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी 'बैरन द्वीप' स्थित है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
उत्तरी मैदान की उस संकीर्ण पट्टी को क्या कहा जाता है जहाँ नदियां कंकड़-पत्थरों के जमाव के कारण भूमिगत (विलुप्त) हो जाती हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
शिवालिक की ढाल पर 8 से 16 किमी चौड़ी पट्टी 'भाबर' कहलाती है जहाँ अत्यधिक पारगम्यता के कारण नदियां विलुप्त हो जाती हैं।
2
प्रायद्वीपीय भारत और पश्चिमी घाट (पश्चिमी घाट) का सर्वोच्च शिखर निम्नलिखित में से कौन सा है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
अनाईमुडी (2,695 मीटर) केरल में स्थित है जो प्रायद्वीपीय भारत और पश्चिमी घाट दोनों का सबसे ऊंचा पर्वत शिखर है।
3
झारखंड का छोटानागपुर क्षेत्र अपने विपुल खनिज संपदा के कारण विश्व के किस प्रसिद्ध औद्योगिक क्षेत्र का नाम 'भारत का रूर' (भारत का रुहर) है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
जर्मनी की रूर घाटी कोयले और खनिजों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। छोटानागपुर पठार में भी प्रचुर कोयला व लोहा मिलने के कारण इसे 'भारत का रूर' कहा जाता है।
4
भारत का अखंड सक्रिय ज्वालामुखी (सक्रिय ज्वालामुखी) कहाँ स्थित है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
भारत का एकमात्र सक्रिय परमाणु अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के 'बैरन द्वीप' (बैरेन द्वीप) पर स्थित है।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
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