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NIOS • कक्षा X • Social Science (213) • अध्याय 21
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

राजनीतिक दल एवं दबाव समूह (Political Parties and Pressure Groups)

राजनीतिक दलों और दबाव समूहों के लिए व्यापक अध्ययन सामग्री और अध्याय नोट्स, एनआईओएस माध्यमिक (कक्षा 10) सामाजिक विज्ञान (213) के लिए व्यवस्थित रूप से तैयार किए गए। नवीनतम नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग पाठ्यक्रम के अनुरूप, यह गाइड मुख्य सैद्धांतिक अवधारणाओं, ऐतिहासिक कालक्रम, भौगोलिक विश्लेषण, संवैधानिक सिद्धांतों, ट्यूटर मार्क्ड असाइनमेंट (टीएमए) दिशानिर्देशों और सार्वजनिक परीक्षा में महारत पर जोर देती है।

यदि देश के सारे राजनीतिक दल कल सुबह अचानक भंग कर दिए जाएं, तो क्या होगा?

हम अक्सर नेताओं और राजनीतिक दलों को भ्रष्टाचार, कलह और वादे तोड़ने के लिए कोसते हैं। लेकिन कल्पना कीजिए कि कल सुबह भारत के सभी राजनीतिक दल हमेशा के लिए खत्म कर दिए जाएं! तब क्या होगा? संसद में 543 स्वतंत्र (निर्दलीय) सांसद बैठेंगे। हर सांसद केवल अपने गांव या शहर की सड़क और नाली की बात करेगा। देश की सेना, विदेश नीति, मुद्रा और राष्ट्रीय बजट का फैसला कौन करेगा? कोई नहीं! सरकार बनेगी भी तो वह एक दिन में गिर जाएगी। राजनीतिक दल भले ही कितने विवादित लगें, लेकिन वे ही लोकतंत्र का वह मजबूत गोंद हैं जो 140 करोड़ लोगों के देश को एक सूत्र में बांधते हैं! आइए समझें कि कैसे राजनीतिक दल सत्ता और जनता के बीच का सबसे बड़ा पुल बनते हैं।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

एनआईओएस और एनआईओएस कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षा में 'राजनीतिक दल' नागरिक शास्त्र के सबसे अधिक पूछे जाने वाले अध्यायों में से एक है। राजनीतिक दल की परिभाषा और उसके तीन घटक दल, राजनीतिक दल की परिभाषा और उसके तीन घटक दल, राजनीतिक दल के प्रमुख चुनाव आयोग के मानक, राजनीतिक दल के सामने चार प्रमुख चुनाव (दलों की आवश्यकता), एक-दलीय, दो-दलीय और बहु-दलीय व्यवस्था की तुलना (भारत में बहु-दलीय व्यवस्था क्यों है?), राजनीतिक दल और क्षेत्रीय/राज्य दल के प्रमुख चुनाव आयोग के मानक, राजनीतिक दल के सामने चार प्रमुख चुनौतियाँ (वंशवाद, धनबल, आंतरिक लोकतंत्र), तथा राजनीतिक दलीय, द्विदलीय और बहुदलीय व्यवस्था की तुलना (भारत में बहुदलीय व्यवस्था क्यों है?), राजनीतिक दल की परिभाषा और इसके तीन घटक दल। दीर्घ-उत्तरीय प्रश्न अन्यत्र अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • लोकतांत्रिक चुनाव, मतदान और संसद की सामान्य समझ।
  • सत्तारूढ़ दल (सरकार) और विपक्षी दल (विपक्ष) की प्राथमिक अवधारणा।
  • देश के प्रमुख राष्ट्रीय दलों (जैसे भाजपा, कांग्रेस) और क्षेत्रीय दलों के नामों से सामान्य परिचय।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • राजनीतिक दल की परिभाषा, उसके तीन अनिवार्य घटकों (नेता, सक्रिय सदस्य, समर्थक) और लोकतंत्र में उसके सात प्रमुख कार्यों का विश्लेषण करना।
  • प्रतिनिधि लोकतंत्र में राजनीतिक दलों की अपरिहार्य आवश्यकता की व्याख्या करना।
  • एक-दलीय, दो-दलीय और बहु-दलीय शासन व्यवस्थाओं के गुण-दोषों की तुलना करना और भारत में बहु-दलीय प्रणाली के कारणों को समझना।
  • चुनाव आयोग द्वारा राष्ट्रीय दल और राज्य (क्षेत्रीय) दल की मान्यता के विधायी मापदंडों का परीक्षण करना।
  • राजनीतिक दलों के समक्ष विद्यमान चार प्रमुख चुनौतियों (आंतरिक लोकतंत्र का अभाव, वंशवाद, धन-बाहुबल, सार्थक विकल्प का अभाव) का मूल्यांकन करना और सुधार के उपायों की रूपरेखा तैयार करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. राजनीतिक दल क्या हैं? घटक एवं लो...
2 2. राजनीतिक दलों की आवश्यकता क्यों...
3 3. दलीय प्रणालियाँ: एक-दलीय, दो-दली...
4 4. राष्ट्रीय दल बनाम राज्य (क्षेत्र...
5 5. राजनीतिक दलों के समक्ष चार चुनौत...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. राजनीतिक दल क्या हैं? घटक एवं लोकतंत्र में उनके सात प्रमुख कार्य

1.1 राजनीतिक दल की परिभाषा एवं तीन प्रमुख घटक

परिभाषा: राजनीतिक दल लोगों का एक ऐसा संयुक्त समूह है जो चुनावी गठबंधन और सरकार में राजनीतिक सत्ता (कुर्सी) हासिल करने के उद्देश्य से एक साथ मिलकर काम करता है। यह समाज के सामूहिक हित को ध्यान में रखते हुए कुछ कार्यक्रम और कार्यक्रम तय करता है। नेता (The लीडर्स): जो दल की आतिशबाजी करते हैं और चुनाव में दल का नेतृत्व करते हैं।
  • 2। सक्रिय सदस्य (सक्रिय सदस्य): जो दल के कार्यक्रम, रैली और सांगथनिक कार्यकलापों में निरंतर भाग लेते हैं।
  • 3. अनुयायी या समर्थक: जो दल एक-दूसरे पर विश्वास रखते हैं और चुनाव में उन्हें वोट देते हैं। चुनावी वर्गीकरण: अधिकांश लोकतांत्रिक देशों में चुनावी राजनीतिक पार्टियों द्वारा साझा किए गए संयुक्त राष्ट्र के बीच लड़ाई होती है। दल अपने लोकप्रिय क्लासिक का चयन कर उन्हें चुनावी मैदान में उतारते हैं।
  • 2। उद्योग और कार्यक्रम सामने रखें: विभिन्न राजनीतिक दल जनता के सामने अपने-अपने उद्यम, घोषणा-पत्र और कार्यक्रम पेश करते हैं। अलग-अलग पसंद की कंपनी वाले दल को योगदान देते हैं।
  • 3। कानून निर्माण में ऐतिहासिक भूमिका: संसद और विधानसभाओं में बने सभी सदनों में राजनीतिक आश्रमों के सदस्य बहस करते हैं और दल के सचेतक (निर्देश) के मतदान करते हैं।
  • 4। सरकार बनाना और चलाना: चुनाव में बहुमत हासिल करने वाला दल सरकार बनाती है। वह अपने वयोवृद्ध नेताओं को मंत्री नियुक्त करता है और देश के प्रशासन को अपने उद्यमों के संग्रहालय बनाता है।
  • 5। विपक्ष की भूमिका निभाना (विपक्ष की भूमिका): चुनाव वाले दल की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे सरकार की गलत कंपनियां, घोटालों और कमियों की आलोचना करते हैं और सरकार को तानाशाही से अलग कर देते हैं।
  • 6। जनमत का निर्माण करना (Shaping Public Opinion): दल जनता के सामान्य मंडलों को बनाते हैं, रैली करते हैं, चित्रकार और आंदोलन करते हैं, जिससे आम जनता का गठन होता है।
  • 7. सरकारी मान्यता और परिभाषा तक पहुंच: एक आम नागरिक के लिए किसी भी सरकारी अधिकारी से नौकरी पाना कठिन हो सकता है, लेकिन किसी स्थानीय पार्टी कार्यकर्ता या नेता से नियुक्ति बहुत आसान होती है। दल-जनता और सरकार के बीच सेतु का काम करते हैं।
  • 2. राजनीतिक दलों की आवश्यकता क्यों है? (बिना दलों के लोकतंत्र)

    2.1 यदि राजनीतिक दल नहीं है, तो क्या होगा?

    हम नैतिकता की आवश्यकता को तब बेहतर समझ सकते हैं जब हम उनके बिना किसी व्यवस्था की कल्पना करते हैं:

    दलों के बिना शासन की शाश्वत स्थिति:
    1. हर दावेदार निर्दलीय (निर्दलीय) होगा: कोई भी समर्थक किसी भी बड़े राष्ट्रीय नीतिगत बदलाव के बारे में जनता से कोई ठोस वादा नहीं कर सकता。
    2. सरकारों का अविश्वास और पंगु अनुभव:चुनाव के बाद सरकार बन भी जाए, तो उसका सबसे बड़ा दावाडोल रहेगा। प्रत्येक न्यूनतम केवल अपने स्थानीय विद्युत क्षेत्र के प्रति उत्तरदेह होगा; पूरे देश का शासन कैसे चलेगा, इसके लिए कोई भी जिम्मेदार नहीं होगा。
    3. बख्तरबंद प्रतिनिधि लोकतंत्र की अनिवार्यता: बड़े और जटिल समाजों में लाखों लोगों के विचारों को एक मंच पर लाना, सरकार का समर्थन करना या उस पर टूटना, शेयरधारिता बनाना और विभिन्न समुदायों पर सरकार का मार्गदर्शन करना अनिवार्य शर्त है।

    3. दलीय प्रणालियाँ: एक-दलीय, दो-दलीय एवं बहु-दलीय व्यवस्था

    3.1 तीन प्रमुख दलीय प्रणालियाँ (पार्टी प्रणालियाँ)

    व्यवस्थाविशेषताएँ एवं सत्ताप्रमुख उदाहरण
    1. एक-दलीय व्यवस्था (वन-पार्टी सिस्टम)जहाँ केवल एक ही दल को सरकार बनाना और बनाना कानूनी रूप से आवश्यक है। यहां नागरिकों के पास कोई वास्तविक विकल्प नहीं होता; मूल रूप से इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था नहीं माना जाता है। द्विदलीय व्यवस्था (दो दलीय व्यवस्था)जहाँ सत्य मुख्य रूप से दो प्रमुख आश्रमों के बीच ही स्थिर निवास है। दल छोटे हो सकते हैं, लेकिन सरकार की वास्तविक परिकल्पना केवल दो बड़े विज्ञापन की होती है। लेबर).
    3. बहुदलीय व्यवस्था (मल्टी-पार्टी सिस्टम)जहाँ दो से अधिक राजनीतिक दल सत्य की होड़ में होते हैं और वे अपने दम पर या अन्य विचारधारा के साथ मिलकर सरकार बनाने की पूर्ण क्षमता रखते हैं।भारत, फ्रांस, जर्मनी।

    3.2 भारत ने बहु-दलीय व्यवस्था क्यों अपनाई?

    दलीय व्यवस्था कुछ ऐसी चीज नहीं है जिसका कोई देश अपने साम्राज्य से चुन ले; यह समाज की प्रकृति, सामाजिक विभाजन और इतिहास के लंबे दौर में विकसित हुआ है:

    • विशाल भौगोलिक और सामाजिक विविधता: भारत इतना विशाल और विविधताएं (अनेक धर्म, भाषाएं, जातियां और क्षेत्र) से भरा देश है कि दो या तीन दल देशों की संपूर्ण सामाजिक-सांस्कृतिक परंपराओं को शामिल नहीं किया गया है
    • गठबंधन गठबंधन (गठबंधन) का युग: बहु-दलीय प्रणाली के कारण जब किसी एक दल को बहुमत नहीं मिला, तो कई दल गठबंधन गठबंधन (गठबंधन) टूट गए (जैसे राजग - एनडीए, संप्रग - यूपीए)। अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्रीय हितों को राष्ट्रीय मंच पर मजबूत आवाज दी गई है।

    4. राष्ट्रीय दल बनाम राज्य (क्षेत्रीय) दल: चुनाव आयोग के मानक

    4.1 चुनाव आयोग के मानक (चुनाव आयोग के मानदंड)

    भारत के मतदाता आयोग के प्रत्येक पंजीकृत दल को उनकी एक विशिष्ट 'चुनाव इकाई' की अनुमति है और उनके प्रदर्शन के आधार पर उन्हें जानकारी दी गई है:

    दल का प्रकारमान्यता हाल
    1. राज्य दल (राज्य/क्षेत्रीय पार्टी)जब कोई राजनीतिक दल राज्य विधानसभा के चुनाव में कुल पड़े वैध टिकट का कम से कम 6% मत हासिल करे और कम से कम 2 गंतव्य जीत।
    उदाहरण: मोटर रैली मोर्चा (जेएमएम), डेमोक्रेटिक कांग्रेस, द्रमुक, बीजू जनता दल (बीजेडी), समाजवादी पार्टी।
    2। राष्ट्रीय दल (नेशनल पार्टी)जब कोई राजनीतिक दल, लोकसभा चुनाव में या 4 राज्यों के विधानसभा चुनाव में कुल वैध वोट का कम से कम 6% मत प्राप्त करें और लोकसभा की कम से कम 4 बहुमत समाजवादी पार्टी।
    उदाहरण: भाजपा (भाजपा), कांग्रेस। (INC), आम आदमी पार्टी (AAP), बहुजन समाज पार्टी (BSP), प्लास्टिक (CPI-M)। 1980 में भारतीय जनसंघ (श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा 1951 में स्थापित) को पुनः स्थापित किया गया। दार्शनिक उपाध्याय के 'एकात्म मानववाद' और 'अंत्योदय', सांस्कृतिक राष्ट्रवाद (हिंदुत्व), और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर बल। राजग (NDA) का नेतृत्व।
  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC): 1885 में स्थापित विश्व की सबसे पुरानी विचारधारा में से एक। मध्यमार्गी (सेंट्रिस्ट) फ़्लोरिडा, फ़्लोरिडा फ़्रांसीसी कल्याण और उदारवादी आर्थिक उद्यमियों के समर्थक। संप्रग (UPA) का नेतृत्व.
  • बहुजन समाज पार्टी (BSP): 1984 में कांशीराम के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी. समाज (दलित, आदिवासी, दलित और धार्मिक अल्पसंख्यक) के आत्मसम्मान और सत्ता में सोलोमन का मुख्य उद्देश्य। ग़ुलाम, मुफ़्त शिक्षा व स्वास्थ्य, और मॉस्क मॉडल।
  • 5. राजनीतिक दलों के समक्ष चार चुनौतियाँ एवं सुधार के उपाय

    5.1 राजनीतिक दलों के समक्ष चार प्रमुख चुनौतियाँ

    1. 1. आंतरिक लोकतंत्र का अभाव (Lack of Internal Democracy):
      दलों में सारी शक्ति शीर्ष के एक-दो नेताओं के हाथ में केंद्रित होती है। न तो नियमित सांगठनिक चुनाव होते हैं और न ही दल के सदस्यों का कोई प्रामाणिक रजिस्टर होता है। आम कार्यकर्ता की कोई सुनवाई नहीं होती; जो नेता चापलूसी करते हैं, वे आगे बढ़ जाते हैं।
    2. 2. वंशवाद की चुनौती (Dynastic Succession):
      अधिकांश दलों में शीर्ष पदों पर हमेशा एक ही परिवार के लोगों का कब्जा बना रहता है। यह आम कार्यकर्ताओं के साथ सरासर अन्याय है और लोकतंत्र के लिए अत्यंत घातक है क्योंकि बिना किसी अनुभव और जनसमर्थन के केवल परिवार के नाते अयोग्य व्यक्ति शीर्ष पदों पर आसीन हो जाते हैं।
    3. 3. धन और बाहुबल का बढ़ता प्रभाव (Money and Muscle Power):
      चुनाव जीतने के लिए दल शार्टकट अपनाते हैं। वे ऐसे धनी लोगों को टिकट देते हैं जो चुनाव में पानी की तरह पैसा बहा सकें। साथ ही चुनाव जीतने के लिए आपराधिक छवि वाले बाहुबलियों और अपराधियों को खुलेआम टिकट दिया जाता है।
    4. 4. मतदाताओं के सामने सार्थक विकल्प का अभाव (Lack of Meaningful Choice):
      आजकल विभिन्न राजनीतिक दलों की बुनियादी विचारधारा और आर्थिक नीतियों में कोई बड़ा अंतर नहीं बचा है। सभी दल लगभग एक जैसी बातें करते हैं। ऐसे में मतदाताओं के पास नीतियों के स्तर पर कोई वास्तविक और सार्थक विकल्प नहीं होता।

    5.2 राजनीतिक दलों को सुधारने के लिए किए गए प्रयास एवं सुझाव

    किए गए तीन प्रमुख कानूनी प्रयास:
    1. दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law): विधायकों और सांसदों को चुनाव जीतने के बाद मंत्री पद या पैसे के लालच में अपनी पार्टी बदलने से रोकने हेतु संविधान में संशोधन किया गया। अब दल बदलने पर सदस्यता रद्द हो जाती है。
    2. आपराधिक शपथ-पत्र (Affidavit): सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार प्रत्येक उम्मीदवार को नामांकन भरते समय अपनी कुल संपत्ति और अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों का कानूनी शपथ-पत्र देना अनिवार्य कर दिया गया है。
    3. सांगठनिक चुनाव व आयकर रिटर्न: चुनाव आयोग ने सभी दलों के लिए आंतरिक चुनाव कराना और अपना आयकर रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य किया है。

    सुधार हेतु चार महत्वपूर्ण सुझाव:
    • दलों के आंतरिक कामकाज को विनियमित करने के लिए कड़ा कानून बने。
    • राजनीतिक दल चुनाव के कुल टिकटों में से कम से कम एक-तिहाई (33%) टिकट महिलाओं को अनिवार्य रूप से दें。
    • चुनावों का सरकारी खर्च (State funding of elections): सरकार उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने के लिए पेट्रोल, कागज और टेलीफोन का खर्च दे ताकि चुनावों में काले धन और उद्योगपतियों के प्रभाव को रोका जा सके。
    • जनता द्वारा मीडिया, याचिकाओं और शांतिपूर्ण जन-आंदोलनों द्वारा राजनीतिक दलों पर शुचिता और जवाबदेही का निरंतर दबाव बनाया जाए।

    महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शब्दावली, कालक्रम एवं प्रशासनिक व्यवस्था

    राजनीतिक दल के 3 घटक
    नेता (Leaders) + सक्रिय सदस्य (Active Members) + समर्थक (Followers)।
    दलों के 7 प्रमुख कार्य
    चुनाव लड़ना, नीतियां बनाना, कानून निर्माण, सरकार चलाना, विपक्ष, जनमत निर्माण, योजनाएं।
    रचना की भूमिका (विपक्ष)
    सरकार की गलत नीतियों की आलोचना, पहरेदार की भूमिका व जनता को जागरूक करना।
    एक-दलीय व्यवस्था
    केवल एक दल को शासन की अनुमति (चीन की कम्युनिस्ट पार्टी); अलोकतांत्रिक।
    दो-दलीय व्यवस्था
    सत्ता दो मुख्य दलों में बदलती है (USA: डेमोक्रेटिक/रिपब्लिकन; UK: लेबर/कंजर्वेटिव)।
    बहु-दलीय व्यवस्था
    दो से अधिक दल सत्ता की होड़ में; भारत में सामाजिक विविधता हेतु सर्वोत्तम।
    राज्य दल की मान्यता
    राज्य विधानसभा चुनाव में 6% कुल मत + कम से कम 2 विधानसभा सीटें।
    राष्ट्रीय दल की मान्यता
    लोकसभा या 4 राज्यों में 6% मत + लोकसभा में कम से कम 4 सीटें।
    दलों की 4 चुनौतियाँ
    आंतरिक लोकतंत्र का अभाव + वंशवाद + धन-बाहुबल का प्रभाव + सार्थक विकल्प की कमी।
    दल-बदल विरोधी कानून
    चुनाव बाद पार्टी बदलने वाले सांसद/विधायक की सदन सदस्यता रद्द करने का कानून।
    सुप्रीम कोर्ट शपथ-पत्र
    नामांकन के समय संपत्ति और आपराधिक मुकदमों का हलफनामा देना अनिवार्य।
    चुनावों का सरकारी खर्च
    काले धन और उद्योगपतियों के प्रभाव को रोकने हेतु सरकार द्वारा चुनावी फंडिंग।

    अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

    उदाहरण 1
    राजनीतिक दल किसे कहते हैं? इसके तीन अनिवार्य घटकों का उल्लेख कीजिए और लोकतंत्र में राजनीतिक दलों के किन्हीं चार प्रमुख कार्यों का वर्णन कीजिए।
    विस्तृत समाधान / उत्तर:
    राजनीतिक दल की परिभाषा:
    राजनीतिक दल जनता का एक ऐसा सुगठित और प्रभावशाली समूह है जो चुनावी गठबंधन और सरकार में राजनीतिक सत्ता प्राप्त करने के उद्देश्य से एक साझा मत और समुदाय के आधार पर कार्य करता है。

    राजनीतिक दल के तीन प्रमुख घटक:
    1. नेता (नेता): जो दल गठबंधन का नेतृत्व करते हैं और जनसमूह का नेतृत्व करते हैं।
    2. सक्रिय सदस्य (सक्रिय सदस्य): जो दल के संगठन, बैठकें और राष्ट्रीय अभियानों में नियमित रूप से काम करते हैं।
    3. अनुयायी या समर्थक (अनुयायी): जो दल अपने सहयोगियों का समर्थन करते हैं और चुनाव में उन्हें वोट देते हैं。

    राजनीतिक शास्त्र के चार प्रमुख कार्य:
    1. चुनाव श्रेणी: दल अलग-अलग इलेक्ट्रिक क्षेत्र से अपने-अपने उपयुक्त और लोकप्रिय शेयरों को चुनावी मैदान में उतारते हैं।
    2. नीतियां और कार्यक्रम पेश करना: दल झील के सामने अपने घोषणा-पत्र (घोषणापत्र) के माध्यम से देश के विकास और परियोजनाओं के समाधान की पेशकश हैं।
    3. सरकार का गठन और संचालन: चुनाव में बहुमत हासिल करने वाला दल सरकार बनाता है, विलासिता की प्रेरणा है और देश का शासन स्थापित करता है।
    4. विपक्ष की भूमिका (विपक्ष की भूमिका):चुनाव में हारने वाले दल में शामिल सरकार की कमियां, घोटालों और गलत समुदायों की आलोचनाएं होती हैं और सरकार को निरंकुश होने से बचाते हैं।
    उदाहरण 2
    यदि देश में कोई भी राजनीतिक दल न हो, तो लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में क्या-क्या कठिनाइयाँ उत्पन्न होंगी? स्पष्ट कीजिए।
    विस्तृत समाधान / उत्तर:
    राजनीतिक के अभाव में लोकतांत्रिक व्यवस्था पूरी तरह से पंगु और निष्प्रभावी होगी। इसकी मुख्य कठिनाइयाँ निम्नलिखित हैं:

    1. संसद में सभी डेमोक्रेट अल्पसंख्यक: यदि राजनीतिक दल नहीं होगा, तो प्रत्येक दावेदार एक स्वतंत्र (निर्दलीय) विचारधारा के रूप में चुनावी लड़ेगा। कोई भी दावेदार पूरे देश की पार्टियों या समग्र विकास के बारे में जनता से कोई बड़ा वादा करने की स्थिति में नहीं होगा।
    2. राष्ट्रीय निगमों का अभाव: प्रत्येक मोहरे का समुदाय केवल अपने छोटे से स्थानीय विद्युत क्षेत्र के रास्ते, सड़क और नाली की बात करता है। पूरे देश की सुरक्षा, विदेशी मामले, रेल और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए कौन बनेगा जिम्मेदार? देश की जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं होगा।
    3. सरकारों का घोर अस्थायी संकट:चुनाव के बाद यदि जातीय जातीय समूह सरकार कोई बना भी लेते हैं, तो ऐसी सरकार का कोई निश्चित कार्यक्रम या अनुक्रम नहीं होगा। मंत्री पद और धन के लालच में सरकार हर सप्ताह गिरेगी और देश में संवैधानिक पद एक अनिवार्य पूर्व-शर्त हैं।
    उदाहरण 3
    भारत के चुनाव आयोग द्वारा किसी राजनीतिक दल को 'राज्य (क्षेत्रीय) दल' और 'राष्ट्रीय दल' के रूप में मान्यता देने के क्या-क्या कड़े मापदंड निर्धारित किए गए हैं?
    विस्तृत समाधान / उत्तर:
    भारत के निर्वाचन आयोग के प्रदर्शन के आधार पर उन्हें आधिकारिक निर्देश दिया गया है:

    1. राज्य दल (राज्य/क्षेत्रीय पार्टी) के लिए निर्दिष्ट मानक:
    • किसी भी दल को राज्य दल के लिए संबंधित राज्य की विधानसभा के आम चुनाव में कुल पड़े वैधानिक दल का कम से कम 6% मत प्राप्त करना अनिवार्य है। है。

    2. राष्ट्रीय दल (नेशनल पार्टी) के सिद्धांत के मानक:
    • किसी भी दल को राष्ट्रीय दल के लिए लोकसभा के आम चुनाव में या कम से कम 4 राज्यों के विधानसभा चुनावों में कुल मिलाकर 6% मत हासिल करना होगा।
    • इसके अतिरिक्त, उस दल को लोकसभा की कम से कम 4 श्रेणीजीतना अनिवार्य है。

    मान्यता का लाभ: संपूर्ण देश या संबंधित राज्य में एक प्रतिष्ठा और विशिष्टता 'चुनाव सिद्धांत' का उद्देश्य है जिसका उपयोग केवल एक ही दल के प्रमुख हित ही कर सकते हैं।
    उदाहरण 4
    वर्तमान समय में लोकतांत्रिक राजनीतिक दलों के समक्ष कौन-सी चार प्रमुख चुनौतियाँ हैं? सविस्तार विश्लेषण कीजिए।
    विस्तृत समाधान / उत्तर:
    आज पूरी दुनिया और भारत में राजनीतिक विचारधारा के सामने निम्नलिखित चार गंभीर चुनौतियाँ हैं:

    1. आंतरिक लोकतंत्र का घोर अभाव (आंतरिक लोकतंत्र का अभाव):
    दलों में सारी शक्ति शीर्ष के एक या दो बड़े नेताओं के पास समुद्र कर रह है। सिद्धांत में समय पर सैथनिक चुनाव नहीं होता और न ही सिद्धांत की राय ली जाती है। आमकार्यकर्ता केवल ध्वज वृद्धि तक सीमित रहता है। जो नेता चापलूसी में माह होते हैं, उनके पद और टिकट मिलते हैं।

    2। वंशवाद की चुनौती (वंशवाद उत्तराधिकार):
    अधिकांष राजनीतिक संप्रदाय में शीर्ष पर हमेशा एक ही परिवार के लोगों का कब्ज़ा रहता है। पार्टी अध्यक्ष या मुख्यमंत्री के पद के पिता से पुत्र या पुत्री की विरासत देखी जाती है। यह लोकतंत्र के सिद्धांतों के खिलाफ है क्योंकि इससे जमीनी और उपयोगी कार्यकर्ता पीछे छूट जाते हैं और अलग-अलग लोग नेता बन जाते हैं।

    3. धन और बाहुबल का भारी बोलबाला (पैसा और मांसपेशियों की ताकत):
    चुनाव की अंधी दौड़ में दल उन धनी उद्योग के दिग्गजों और दिग्गजों को टिकटें देते हैं जो चुनावों में करोड़ों बाहा बाहुबल और दिग्गजों को ड्रेप-धमका साख देते हैं। इस विधानसभा और विधानसभाओं में संस्थानों की संख्या बढ़ती जा रही है।

    4. सार्थक विकल्पों का अभाव (अर्थपूर्ण विकल्प का अभाव):
    विभिन्न राजनीतिक व्यवस्था के मूल समन्वय और आर्थिक में अब कोई वास्तविक अर्थ नहीं रह गया है। सभी पार्टियों की योजनाएं, नामांकन और मुफ्त की घोषणाएं एक जैसी बातें होती हैं। फ़्लोरिडा के पास केवल व्यक्तिगत परिवर्तन का विकल्प होता है, सामुदायिक का नहीं।
    उदाहरण 5
    भारत में राजनीतिक दलों और उनके नेताओं के आचरण को सुधारने के लिए कौन-से कानूनी कदम उठाए गए हैं और भविष्य के लिए कौन-से सुझाव दिए जा सकते हैं?
    विस्तृत समाधान / उत्तर:
    किए प्रमुख कानूनी चरण:
    1. दल-बदल विरोधी कानून: संविधान में संशोधन करके यह कड़ा नियम बनाया गया है कि यदि कोई नाबालिग या विधायक अपनी पार्टी से अलग हो जाता है, तो उसके सदन के गठित प्रभाव से रद्द कर दिया जाएगा। इसे खरीदने के लिए खरीद-फरोख्त पर लगाम लगी है।
    2. आपराधिक और वित्तीय शपथ-पत्र (शपथपत्र): सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर प्रत्येक जनहित याचिका के लिए नामांकन के समय अपनी संपत्ति और अपने खिलाफ सभी आपराधिक नामांकन का कानूनी हलफनामा देना अनिवार्य कर दिया गया है ताकि जनता सोच-समझकर वोट दे सके।
    3. सांगथनिक चुनाव और क्रीड़ा वापसी: चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक आश्रमों के लिए अपने सांगठनिक चुनाव और आय-व्यय का संगठनात्मक चुनाव और रिटर्न्स नामांकन अनिवार्य कर दिया है。

    भविष्य के लिए महत्वपूर्ण अनुशंसा:
    1. आंतरिक लोकतंत्र आंदोलन कानून: लोकतंत्र के आंतरिक कार्यकर्ताओं को विमुक्त करने के लिए संसद द्वारा कानून बनाया जाएगा ताकि दल के अंदर स्वतंत्र चुनाव हो सके और राजनीतिक दल विवाद से बच सकें।
    2. महिलाओं को 33% तेलंगाना टिकट:आचार के लिए यह कानूनी रूप से जरूरी है कि वे अपने कुल सामान में से कम से कम एक-तिहाई टिकट महिला को दें।
    3. चुनावों का सरकारी अंश (स्टेट फंडिंग): चुनावी खर्च सरकार का कब्जा (जैसे पेट्रोल, पेपर, मीडिया टाइम) ताकि काले धन और उद्यमों के चंदे पर युवाओं की शुरुआत खत्म हो सके।

    सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

    सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

    राजनीतिक दल को केवल चुनाव के समय सक्रिय रहने वाला संगठन मानना।

    सही वैज्ञानिक तथ्य

    राजनीतिक दल पूरे वर्ष सक्रिय रहते हैं; वे जनमत निर्माण, सरकार की नीतियों पर निगरानी और सामाजिक आंदोलन चलाने का निरंतर कार्य करते हैं।

    सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

    चीन की शासन व्यवस्था को लोकतांत्रिक दो-दलीय व्यवस्था समझ लेना।

    सही वैज्ञानिक तथ्य

    चीन में केवल एक दल (कम्युनिस्ट पार्टी) का शासन है; अतः यह 'एक-दलीय व्यवस्था' है जिसे लोकतांत्रिक नहीं माना जाता।

    सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

    दल-बदल विरोधी कानून को केवल दल के साधारण कार्यकर्ताओं पर लागू समझना।

    सही वैज्ञानिक तथ्य

    दल-बदल विरोधी कानून निर्वाचित सांसदों और विधायकों पर लागू होता है; यदि वे चुनाव जीतने के बाद अपनी पार्टी बदलते हैं तो उनकी विधायकी रद्द हो जाती है।

    सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

    राष्ट्रीय दल और राज्य दल के चुनाव आयोग के मत प्रतिशत में भ्रम (6% बनाम 10%) होना।

    सही वैज्ञानिक तथ्य

    दोनों के लिए न्यूनतम मत प्रतिशत 6% ही है; अंतर यह है कि राज्य दल को 2 विधानसभा सीटें चाहिए, जबकि राष्ट्रीय दल को 4 लोकसभा सीटें चाहिए।

    सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

    चुनाव आयोग के टिकट को लेकर शपथ पत्र (शपथ-पत्र) लेना।

    सही वैज्ञानिक तथ्य

    हलफनामा (शपथ पत्र) एक कानूनी दस्तावेज है जिसमें उम्मीदवार अपनी चल-अचल संपत्ति और आपराधिक समर्थक का वकील कोर्टीन शपथ के साथ देता है।

    राजनीतिक दल: 3 घटक, 7 प्रमुख कार्य, मान्यता मानक एवं 4 चुनौतियाँ

    राजनीतिक दल: घटक, 7 प्रमुख कार्य, चुनाव आयोग मानक व 4 चुनौतियाँ1. घटक एवं 7 प्रमुख कार्यलोकतंत्र के पहिए• 3 घटक: नेता, सदस्य, समर्थक• 1. चुनाव लड़ना व प्रत्याशी उतारना• 2. नीतियां व कार्यक्रम तय करना• 3. संसद में कानून निर्माण• 4. सरकार बनाना व चलाना• 5. विपक्ष की पहरेदार भूमिका• 6. जनमत निर्माण व आंदोलन• 7. जनता व प्रशासन के बीच सेतु2. चुनाव आयोग के मानकराष्ट्रीय बनाम राज्य दल• राज्य (क्षेत्रीय) दल मानक:विधानसभा में 6% कुल मत +कम से कम 2 सीटें जीतना• राष्ट्रीय दल मानक:लोकसभा या 4 राज्यों में 6% मत +लोकसभा की 4 सीटें जीतना• प्रमुख दल: BJP, INC, AAP, BSP• भारत में बहु-दलीय प्रणाली:विशाल विविधता हेतु सर्वोत्तम3. चार चुनौतियाँ व सुधारआंतरिक लोकतंत्र व कानून• 4 गंभीर चुनौतियाँ:1. आंतरिक लोकतंत्र का अभाव2. वंशवाद की जकड़न (परिवारवाद)3. धन और बाहुबल का बोलबाला4. सार्थक विकल्प का अभाव• कानूनी सुधार:दल-बदल कानून (सीट रद्दीकरण);आपराधिक शपथ-पत्र (Affidavit)• सुझाव: 33% महिला टिकट, स्टेट फंडबोर्ड परीक्षा के प्रमुख संप्रत्यय (Golden Political Parties Capsule)विपक्ष की भूमिका:सरकार की गलत नीतियों की आलोचना, पहरेदार की भूमिका व जनहित की रक्षा।राष्ट्रीय दल मानक:लोकसभा या 4 राज्यों में 6% कुल मत + 4 लोकसभा सीटें अनिवार्य।दल-बदल विरोधी कानून:चुनाव बाद पार्टी बदलने पर संसद या विधानसभा की सदस्यता स्वतः रद्द हो जाती है।

    अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

    मुख्य बिंदु 1
    राजनीतिक दल चुनाव लड़ने और सत्ता पाने हेतु संगठित समूह है; इसके 3 घटक हैं: नेता, सक्रिय सदस्य, और समर्थक।
    मुख्य बिंदु 2
    दलों के 7 प्रमुख कार्य हैं: चुनाव लड़ना, नीतियां बनाना, कानून निर्माण, सरकार चलाना, विपक्ष की भूमिका, जनमत निर्माण और योजनाएं पहुंचाना।
    मुख्य बिंदु 3
    विपक्षी दल सरकार की गलत नीतियों की आलोचना करके उसे निरंकुश होने से रोकता है और जनहित का पहरेदार बनता है।
    मुख्य बिंदु 4
    बिना राजनीतिक दलों के सभी उम्मीदवार निर्दलीय होंगे और पूरे देश के समग्र शासन की जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं होगा।
    मुख्य बिंदु 5
    एक-दलीय व्यवस्था (चीनी) अलोकतांत्रिक है; संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्रिटेन में दो दलीय व्यवस्था है; भारत में बहु-दलीय प्रणाली है।
    मुख्य बिंदु 6
    भारत की अपार सामाजिक और भौगोलिक विविधता के कारण बहु-दलीय और गठबंधन राजनीति का विकास हुआ है।
    मुख्य बिंदु 7
    राज्य दल बनने हेतु विधानसभा में 6% मत और 2 सीटें; राष्ट्रीय दल हेतु 6% मत और 4 लोकसभा सीटें अनिवार्य हैं।
    मुख्य बिंदु 8
    दलों की 4 प्रमुख चुनौतियाँ हैं: आंतरिक लोकतंत्र का अभाव, वंशवाद, धन-बाहुबल का बढ़ता प्रभाव, और सार्थक विकल्प की कमी।
    मुख्य बिंदु 9
    दल-बदल विरोधी कानून और सर्वोच्च न्यायालय के आपराधिक शपथ-पत्र (शपथपत्र) आदेश द्वारा सुधार का प्रयास किया गया है।
    मुख्य बिंदु 10
    आंतरिक चुनाव में सुधार सुधार, महिलाओं को 1/3 टिकट और चुनाव का सरकारी खर्च (राज्य वित्त पोषण) दिया जाना चाहिए।

    स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

    मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

    1
    राजनीतिक दल के तीन अनिवार्य घटक कौन-से होते हैं?
    उत्तर एवं व्याख्या देखें
    उत्तर:
    1. नेता (नेता), 2. सक्रिय (सक्रिय सदस्य), और 3. अनुयायी या समर्थक (अनुयायी)।

    2
    लोकतंत्र में 'विपक्षी दल' (विपक्षी दल) की क्या महत्वपूर्ण भूमिका है?
    उत्तर एवं व्याख्या देखें
    उत्तर: विपक्षी दल सरकार की गलत नीतियों, घोटालों और कमियों की खुलकर आलोचना करता है, जनता की समस्याओं को संसद और सड़कों पर उठाता है, और सत्तारूढ़ दल को तानाशाह बनने से रोकता है।
    3
    भारत में 'बहुदलीय शासन व्यवस्था' (बहुदलीय व्यवस्था) के विकसित होने का मुख्य कारण क्या है?
    उत्तर एवं व्याख्या देखें
    उत्तर: क्योंकि भारत का सामाजिक और भौगोलिक विस्तार इतना विशाल और विविधताओं से भरा है कि दो या तीन दल पूरे देश की सामाजिक और क्षेत्रीय आकांक्षाओं को समाहित नहीं कर सकते।
    4
    किसी राजनीतिक दल को 'राष्ट्रीय दल' (नेशनल पार्टी) के रूप में स्वीकृत करने की क्या शर्त है?
    उत्तर एवं व्याख्या देखें
    उत्तर: उस दल को लोकसभा चुनाव में अथवा कम से कम 4 राज्यों के विधानसभा चुनाव में कुल पड़े वैध मतों का कम से कम 6% मत प्राप्त करना होगा और साथ ही लोकसभा की कम से कम 4 सीटें जीतनी होंगी।
    5
    दल-बदल विरोधी कानून (दल-बदल विरोधी कानून) क्या है और क्यों बनाया गया है?
    उत्तर एवं व्याख्या देखें
    उत्तर: यह कानून विधायकों और सांसदों को चुनाव जीतने के बाद मंत्री पद या धन के लालच में अपनी पार्टी बदलने से रोकने के लिए बनाया गया; इसके अनुसार दल बदलने वाले जनप्रतिनिधि की सदन की सदस्यता रद्द हो जाती है।
    अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
    अभ्यास के लिए तैयार?

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    कक्षा 10 Social Science (213) के सभी अध्याय

    अध्याय 1: प्राचीन विश्व (Ancient World) अध्याय 2: मध्यकालीन विश्व (Medieval World) अध्याय 3: आधुनिक विश्व - I (Modern World - I) अध्याय 4: आधुनिक विश्व - II (Modern World - II) अध्याय 5: भारत पर ब्रिटिश शासन का प्रभाव (Impact of British Rule) अध्याय 6: औपनिवेशिक भारत में सामाजिक सुधार (Religious & Social Awakening) अध्याय 7: ब्रिटिश शासन के विरुद्ध जन प्रतिरोध (Popular Resistance) अध्याय 8: भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन (Indian National Movement) अध्याय 9: भारत का भौतिक स्वरूप (Physiography of India) अध्याय 10: जलवायु (Climate) अध्याय 11: जैव विविधता (Bio-diversity) अध्याय 12: भारत में कृषि (Agriculture in India) अध्याय 13: परिवहन एवं संचार (Transport and Communication) अध्याय 14: जनसंख्या: हमारा संसाधन (Population: Our Greatest Resource) अध्याय 15: संवैधानिक मूल्य एवं राजनीतिक व्यवस्था (Constitutional Values) अध्याय 16: मौलिक अधिकार एवं मौलिक कर्तव्य (Fundamental Rights and Duties) अध्याय 17: भारत - एक कल्याणकारी राज्य (India - A Welfare State) अध्याय 18: स्थानीय शासन एवं प्रशासन (Local Governments) अध्याय 19: राज्य स्तर पर शासन (Governance at State Level) अध्याय 20: केंद्रीय स्तर पर शासन (Governance at Union Level) अध्याय 21: राजनीतिक दल एवं दबाव समूह (Political Parties and Pressure Groups) अध्याय 22: लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जन-सहभागिता (Democratic Participation) अध्याय 23: भारतीय लोकतंत्र की चुनौतियाँ (Challenges to Indian Democracy) अध्याय 24: राष्ट्रीय एकीकरण एवं धर्मनिरपेक्षता (National Integration & Secularism) अध्याय 25: सामाजिक-आर्थिक विकास एवं वंचित वर्ग (Socio-Economic Development) अध्याय 26: पर्यावरणीय क्षरण एवं आपदा प्रबंधन (Environmental Degradation) अध्याय 27: शांति एवं सुरक्षा (Peace and Security)

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