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WBB • कक्षा 9 • Information Technology • अध्याय 4
अनुमानित समय: 50 मिनट
प्रगति: अध्ययनरत

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पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (WBBSE) और राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (NSQF) के अंतर्गत कक्षा 9 सूचना प्रौद्योगिकी पाठ्यक्रम के प्रथम अध्याय 'आईटी और आईटीईएस उद्योग का परिचय' में आपका स्वागत है। सूचना प्रौद्योगिकी से तात्पर्य कंप्यूटर हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और दूरसंचार नेटवर्क का उपयोग करके डेटा के निर्माण, प्रसंस्करण, भंडारण और सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक आदान-प्रदान से है। इस आधारभूत अध्याय में विद्यार्थी जानेंगे कि कैसे सूचना प्रौद्योगिकी सक्षम सेवाएँ (ITeS) आधुनिक दूरसंचार की सहायता से दूरस्थ स्थानों से उच्च गुणवत्ता वाली व्यावसायिक सेवाएँ प्रदान करती हैं, जिसने बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (BPO) और बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट (BPM) को जन्म दिया। पाठ्यक्रम में भारतीय आईटी-बीपीएम उद्योग के चार प्रमुख उप-क्षेत्रों (आईटी सर्विसेज, बीपीएम, सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट्स और इंजीनियरिंग आर एंड डी) तथा बहुराष्ट्रीय निगमों (MNC), भारतीय सेवा प्रदाताओं (ISP) और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) जैसे संगठनात्मक ढाँचों का गहन विश्लेषण किया गया है। विद्यार्थी दैनिक जीवन में स्मार्ट उपकरणों के उपयोग, आधुनिक पुस्तकालयों में बारकोड व आरएफआईडी के समन्वय और आधुनिक डिजिटल कक्षाओं में लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम व कंप्यूटर-आधारित मूल्यांकन की भूमिका का अध्ययन करेंगे। इसके अतिरिक्त, ई-कॉमर्स, इंजीनियरिंग में कैड और कैम तकनीक, मौसम पूर्वानुमान में सुपरकंप्यूटिंग और चिकित्सा विज्ञान में सीटी स्कैन, एमआरआई व टेलीमेडिसिन जैसी जीवनरक्षक प्रौद्योगिकियों का विवरण प्रस्तुत किया गया है। अंत में, कोर बैंकिंग समाधान और ई-गवर्नेंस के विभिन्न मॉडलों के माध्यम से नागरिकों तक पारदर्शी व त्वरित सरकारी सेवाओं के वितरण को समझाया गया है।

क्या आपने कभी सोचा है?

क्या आपने कभी सोचा है कि न्यूयॉर्क का एक विशेषज्ञ डॉक्टर कोलकाता में लिए गए मरीज के एक्स-रे की जांच मात्र बीस मिनट में कैसे कर लेता है, या दुनिया भर में करोड़ों अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के टिकट और ऑनलाइन बैंक ट्रांसफर चौबीसों घंटे बिना किसी रुकावट के कैसे संपन्न होते हैं? इस वैश्विक निर्बाध कनेक्टिविटी के पीछे सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और सूचना प्रौद्योगिकी सक्षम सेवाएँ (ITeS) उद्योग का सबसे बड़ा हाथ है—जिसने भारत को दुनिया की अग्रणी डिजिटल ज्ञान शक्ति और सेवा केंद्र बना दिया है।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

21वीं सदी के डिजिटल युग में आत्मनिर्भर बनने और भविष्य की तकनीकी क्रांति का हिस्सा बनने के लिए आईटी और आईटीईएस उद्योग को समझना अनिवार्य है। भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में इस उद्योग का योगदान 7 प्रतिशत से अधिक है और यह लाखों कुशल पेशेवरों को रोजगार प्रदान करता है, जिससे यह देश के आर्थिक विकास और वैश्विक प्रतिष्ठा का मुख्य स्तंभ बन चुका है। यह ज्ञान सैद्धांतिक कंप्यूटर शिक्षा को वास्तविक दुनिया के व्यावसायिक अनुप्रयोगों से जोड़ता है, जिससे विद्यार्थियों को यह समझने में मदद मिलती है कि अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला, बैंकिंग प्रणाली, अस्पताल और सार्वजनिक सेवाएं कैसे कार्य करती हैं। यह सॉफ्टवेयर विकास, क्लाउड तकनीक, डेटा विश्लेषण और डिजिटल शासन में उभरते करियर के अवसरों का मार्गदर्शन करता है। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि मानवीय श्रम को स्वचालित और त्रुटिहीन डिजिटल प्रक्रियाओं में बदलने की क्षमता को समझकर छात्र केवल उपभोक्ता बनने के बजाय भविष्य के डिजिटल निर्माता और समस्या-समाधानकर्ता बनने के लिए प्रेरित होते हैं।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • कंप्यूटर प्रणाली की बुनियादी कार्यप्रणाली (हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, डेटा और सूचना की समझ)।
  • इंटरनेट, दूरसंचार और डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का बुनियादी उपयोग।
  • एटीएम, ऑनलाइन शॉपिंग और सर्च इंजन जैसी दैनिक डिजिटल सेवाओं का सामान्य अनुभव।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और सूचना प्रौद्योगिकी सक्षम सेवाओं (ITeS) की सटीक परिभाषा और उनके बीच के अंतर को स्पष्ट करना।
  • बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (BPO) और बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट (BPM) के महत्व, कार्यक्षेत्र और आर्थिक प्रभाव को समझना।
  • भारतीय आईटी-बीपीएम (IT-BPM) उद्योग के चार प्रमुख उप-क्षेत्रों (IT Services, BPM, Software Products और ER&D) को वर्गीकृत करना।
  • बहुराष्ट्रीय निगमों (MNC), भारतीय सेवा प्रदाताओं (ISP) और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) के संगठनात्मक मॉडल में भेद करना।
  • दैनिक जीवन, आधुनिक पुस्तकालयों (बारकोड, RFID, OPAC) और डिजिटल शिक्षा (स्मार्ट क्लासरूम, LMS, DIKSHA) में आईटी के अनुप्रयोगों की व्याख्या करना।
  • व्यापार, इंजीनियरिंग (CAD/CAM, सुपरकंप्यूटिंग) और चिकित्सा क्षेत्र के नैदानिक उपकरणों (ECG, EEG, Ultrasound, CT Scan, MRI, टेलीमेडिसिन) में आईटी की भूमिका का विश्लेषण करना।
  • आधुनिक कोर बैंकिंग सॉल्यूशंस (CBS, ATM, NEFT, RTGS, UPI) और ई-गवर्नेंस के विभिन्न सेवा मॉडलों (G2C, G2B, G2G, G2E) का मूल्यांकन करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

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2 मॉड्यूल 2: बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सि...
3 मॉड्यूल 3: दैनिक जीवन, पुस्तकालय प्...
4 मॉड्यूल 4: व्यापार, विज्ञान, इंजीनि...
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सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

मॉड्यूल 1: सूचना प्रौद्योगिकी (IT) एवं सूचना प्रौद्योगिकी सक्षम सेवाएँ (ITeS) के मूल सिद्धांत

1.1 सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्या है?

सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology - IT) का तात्पर्य उन सभी तकनीकों से है जिनका उपयोग सूचना के सृजन, संग्रहण, प्रसंस्करण, हेरफेर और सुरक्षित संप्रेषण के लिए किया जाता है। आधुनिक संदर्भ में यह इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर, सॉफ्टवेयर और दूरसंचार नेटवर्क (जैसे इंटरनेट व सैटेलाइट) का एक शक्तिशाली संगम है।

  • डेटा (Data): कच्चे, असंसाधित और असंगठित तथ्य, आंकड़े या संकेत जिनका अपने आप में कोई स्पष्ट अर्थ नहीं होता (जैसे: 95, 'कोलकाता', 101)।
  • सूचना (Information): जब कच्चे डेटा को व्यवस्थित, संसाधित और प्रासंगिक संदर्भ प्रदान किया जाता है, जिससे वह निर्णय लेने योग्य बन सके, तब उसे सूचना कहा जाता है (जैसे: "कोलकाता के रोल नंबर 101 वाले छात्र ने कक्षा 9 में 95% अंक प्राप्त किए")।
  • हार्डवेयर स्टैक: कंप्यूटर प्रणाली के सभी भौतिक और दृश्यमान घटक जैसे सीपीयू (CPU), मेमोरी, मदरबोर्ड, फाइबर ऑप्टिक केबल और नेटवर्क राउटर।
  • सॉफ्टवेयर स्टैक: कंप्यूटर को संचालित करने वाले प्रोग्राम और ऑपरेटिंग सिस्टम (जैसे Windows, Linux), जो हार्डवेयर को डेटा प्रोसेस करने के निर्देश देते हैं।
मूलभूत सूचना प्रसंस्करण चक्र (Information Cycle):

डेटा संग्रहण (Data Capture) → डिजिटल भंडारण (Storage) → एल्गोरिद्मिक प्रसंस्करण (Processing) → नेटवर्क संप्रेषण (Transmission) → उपयोगी सूचना (Information)।

1.2 सूचना प्रौद्योगिकी सक्षम सेवाएँ (ITeS)

सूचना प्रौद्योगिकी सक्षम सेवाएँ (IT-enabled Services - ITeS), जिन्हें वेब-सक्षम सेवाएँ या दूरस्थ सेवाएँ भी कहा जाता है, उन सभी व्यावसायिक प्रक्रियाओं और ग्राहक परिचालनों को कवर करती हैं जो किसी संस्था की परिचालन दक्षता, गुणवत्ता और सेवा वितरण की गति को बढ़ाने के लिए आईटी का उपयोग करती हैं।

पारंपरिक व्यापार में बिलिंग, ग्राहक सेवा और डेटा रिकॉर्ड के रखरखाव के लिए विशाल कागजी फाइलों और कार्यालयों की आवश्यकता होती थी। उच्च गति इंटरनेट और क्लाउड तकनीक के आगमन से ये सभी कार्य दुनिया के किसी भी कोने से दूरस्थ रूप से (Remotely) न्यूनतम लागत और उच्चतम सटीकता के साथ किए जा सकते हैं।

1.3 उद्योग में ITeS के प्रमुख उदाहरण
आईटीईएस क्षेत्र कार्यप्रणाली व्यावहारिक लाभ एवं प्रभाव
मेडिकल ट्रांसक्रिप्शन डॉक्टर मरीज की जांच के दौरान आवाज में नोट्स रिकॉर्ड करते हैं; प्रशिक्षित ऑपरेटर उस ऑडियो को सुनकर डिजिटल मेडिकल रिकॉर्ड (EHR) में टाइप करते हैं। डॉक्टरों के समय की बचत होती है और अस्पताल के मरीजों का रिकॉर्ड शत-प्रतिशत कानूनी सटीकता के साथ डिजिटल रूप में सुरक्षित रहता है।
कस्टमर कॉल सेंटर (CRM) कंप्यूटर टेलीफोनी और इंटरएक्टिव वॉयस रिस्पांस (IVR) का उपयोग करके ग्राहकों के फोन कॉल का त्वरित उत्तर देना। ग्राहकों की समस्याओं का 24 घंटे समाधान, तकनीकी सहायता और त्वरित टेली-बैंकिंग सुविधा।
बैक-ऑफिस डेटा प्रोसेसिंग बैंक चेक क्लीयरेंस, बीमा दावों की जांच, कर्मचारियों का वेतन (पेरोल) प्रबंधन और बल्क डेटा एंट्री। कंपनियों का प्रशासनिक बोझ कम होता है और परिचालन लागत में 40% से 60% तक की भारी कमी आती है।
जीआईएस (GIS) मैपिंग उपग्रह स्थानिक डेटा और भौगोलिक सूचनाओं का डिजिटल विश्लेषण और मानचित्रण। सटीक जीपीएस नेविगेशन (गूगल मैप्स), शहरी बाढ़ नियंत्रण और टेलीकॉम ऑप्टिकल फाइबर बिछाने में अत्यंत उपयोगी।

मॉड्यूल 2: बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (BPO) एवं भारतीय आईटी-बीपीएम उद्योग की संरचना

2.1 बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (BPO) क्या है?

बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (BPO) एक ऐसी व्यावसायिक व्यवस्था है जिसमें कोई कंपनी अपने गैर-मुख्य कार्यों (जैसे ग्राहक सेवा, वेतन गणना या डेटा एंट्री) को स्वयं करने के बजाय किसी बाहरी विशेषज्ञ सेवा प्रदाता एजेंसी को अनुबंध पर सौंप देती है। इससे कंपनी अपने मुख्य व्यावसायिक उद्देश्यों और उत्पादों के नवाचार पर ध्यान केंद्रित कर पाती है।

2.2 वैश्विक कंपनियाँ भारत में आउटसोर्सिंग क्यों करती हैं?
  • विशाल कुशल कार्यबल: भारत में प्रतिवर्ष लाखों तकनीकी रूप से दक्ष और अंग्रेजी बोलने वाले इंजीनियरिंग व वाणिज्य स्नातक तैयार होते हैं।
  • लागत में भारी बचत (Cost Arbitrage): अमेरिका या यूरोप की तुलना में भारत में परिचालन और कार्यबल लागत बहुत कम होने से विदेशी कंपनियों को 40% से 60% तक की सीधी बचत होती है।
  • समय क्षेत्र का लाभ (24 घंटे का कार्य चक्र): अमेरिका और भारत के बीच लगभग 10.5 से 12.5 घंटे का समय अंतर है। न्यूयॉर्क में शाम 5 बजे बंद हुआ काम भारत में रात भर में पूरा होकर अगली सुबह वहां तैयार मिलता है।
  • विश्वस्तरीय आईटी अवसंरचना: हाई-स्पीड ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी और सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स (STPI) की व्यापक मौजूदगी।
  • सकारात्मक सरकारी नीतियां: विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ), कर प्रोत्साहन और डिजिटल इंडिया मिशन।
2.3 नैसकॉम (NASSCOM) के अनुसार आईटी-बीपीएम उद्योग के 4 उप-क्षेत्र
  1. आईटी सर्विसेज (IT Services - ITS): कस्टम सॉफ्टवेयर निर्माण, सिस्टम इंटीग्रेशन, आईटी परामर्श, साइबर सुरक्षा और क्लाउड सेवाएं।
  2. बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट (BPM): कंपनियों के नियमित वित्तीय रिकॉर्ड, पेरोल, मानव संसाधन (HR) और ग्राहक सहायता का प्रबंधन।
  3. सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट्स (Software Products - SPD): रेडीमेड सॉफ्टवेयर पैकेज, एंटीवायरस, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम और सास (SaaS) प्लेटफॉर्म का विकास।
  4. इंजीनियरिंग रिसर्च एंड डेवलपमेंट (ER&D): ऑटोमोबाइल, विमानन, इलेक्ट्रॉनिक चिप्स और सेमीकंडक्टर का प्रोटोटाइप डिजाइन व परीक्षण।
2.4 आईटी-बीपीएम संगठनों के 3 प्रमुख संरचनात्मक मॉडल
3 मुख्य संगठनात्मक मॉडल:
  • मल्टीनेशनल कॉर्पोरेशन (MNC): वे अंतरराष्ट्रीय कंपनियाँ जिनका मुख्यालय भारत के बाहर (अमेरिका या यूरोप) है, लेकिन उनके बड़े डिलीवरी सेंटर भारत में हैं और वे दुनिया भर के ग्राहकों को सेवाएं देते हैं (जैसे: IBM, Accenture, Microsoft, Capgemini)।
  • इंडियन सर्विस प्रोवाइडर (ISP): वे कंपनियाँ जिनका जन्म और मुख्यालय भारत में हुआ, लेकिन दुनिया भर में उनके कार्यालय हैं और वे वैश्विक ग्राहकों को सेवाएं प्रदान करते हैं (जैसे: TCS, Infosys, Wipro, HCL Tech, Tech Mahindra)।
  • ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC / GIC): किसी विदेशी कंपनी द्वारा भारत में स्थापित इन-हाउस तकनीकी केंद्र, जो केवल अपनी मूल कंपनी के आंतरिक आईटी और व्यावसायिक कार्यों को संभालते हैं और किसी बाहरी ग्राहक को सेवा नहीं देते (जैसे: Target India, Wells Fargo Center, HSBC Technology India)।

मॉड्यूल 3: दैनिक जीवन, पुस्तकालय प्रबंधन एवं आधुनिक शिक्षा में सूचना प्रौद्योगिकी

3.1 दैनिक जीवन में सूचना प्रौद्योगिकी

आज हमारा दैनिक जीवन माइक्रोप्रोसेसर और इंटरनेट से जुड़े उपकरणों से घिरा हुआ है:

  • स्मार्ट घरेलू उपकरण: वॉशिंग मशीन, माइक्रोवेव ओवन और स्मार्ट फ्रिज में लगे माइक्रोचिप तापमान, पानी और समय का स्वचालित नियंत्रण करते हैं।
  • डिजिटल मनोरंजन एवं संचार: ओटीटी प्लेटफॉर्म (Netflix, YouTube), सोशल मीडिया, वीडियो कॉलिंग और पॉडकास्ट।
  • व्यक्तिगत कंप्यूटिंग: स्प्रेडशीट में पारिवारिक मासिक बजट बनाना, ऑनलाइन बिजली/पानी का बिल भरना और ट्रेन टिकट बुक करना।
3.2 पुस्तकालय प्रबंधन में सूचना प्रौद्योगिकी

पारंपरिक कागजी कार्ड कैटलॉग वाले पुस्तकालय अब पूरी तरह स्वचालित डिजिटल पुस्तकालयों में बदल चुके हैं:

  • बारकोड एवं आरएफआईडी (RFID - Radio Frequency Identification): पुस्तकों पर लगे बारकोड या आरएफआईडी टैग को स्कैनर के सामने लाते ही कुछ ही सेकंड में पुस्तक जारी या जमा हो जाती है और रिकॉर्ड तुरंत अपडेट हो जाता है।
  • ओपेक (OPAC - Online Public Access Catalogue): एक कंप्यूटरीकृत सार्वजनिक खोज टर्मिनल, जिसकी सहायता से विद्यार्थी स्वयं कंप्यूटर पर पुस्तक का शीर्षक, लेखक या विषय टाइप करके यह जान सकते हैं कि पुस्तक उपलब्ध है या नहीं और वह किस शेल्फ पर रखी है।
  • डिजिटल ई-लाइब्रेरी: घर बैठे इंटरनेट के माध्यम से लाखों ई-पुस्तकों और अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं तक असीमित पहुंच।
3.3 आधुनिक शिक्षा एवं कक्षाओं में सूचना प्रौद्योगिकी
शिक्षा तकनीक शिक्षण कार्यप्रणाली उदाहरण एवं प्लेटफॉर्म
स्मार्ट इंटरएक्टिव क्लासरूम पारंपरिक ब्लैकबोर्ड के स्थान पर टचस्क्रीन डिजिटल बोर्ड और 3D विजुअल्स द्वारा जटिल वैज्ञानिक सिद्धांतों को आसान बनाना। स्मार्ट इंटरएक्टिव व्हाइटबोर्ड, मल्टीमीडिया प्रोजेक्टर्स।
लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (LMS) डिजिटल हब जहाँ शिक्षक पाठ्य सामग्री साझा करते हैं, छात्र ऑनलाइन असाइनमेंट जमा करते हैं और स्वचालित परीक्षा परिणाम देखते हैं। Google Classroom, Moodle, Canvas।
सरकारी ई-लर्निंग पोर्टल निशुल्क डिजिटल पाठ्यपुस्तकें, क्यूआर-कोड आधारित वीडियो पाठ और प्रमाणित अध्ययन सामग्री का राष्ट्रीय भंडार। DIKSHA, SWAYAM, e-Pathshala, Banglar Shiksha।
सीबीटी (CBT) एवं वर्चुअल लैब्स कंप्यूटर आधारित वस्तुनिष्ठ परीक्षा (Computer Based Testing) और कंप्यूटर स्क्रीन पर विज्ञान प्रयोगों का सिमुलेशन। TargetExams ऑनलाइन टेस्ट, OLabs (वर्चुअल साइंस लैब्स)।

मॉड्यूल 4: व्यापार, विज्ञान, इंजीनियरिंग एवं स्वास्थ्य सेवा निदान में सूचना प्रौद्योगिकी

4.1 व्यापार एवं ई-कॉमर्स में सूचना प्रौद्योगिकी

आधुनिक वाणिज्यिक गतिविधियां पूरी तरह स्वचालित डिजिटल प्रणालियों पर निर्भर हैं:

  • ईआरपी (Enterprise Resource Planning - ERP): एक केंद्रीकृत सॉफ्टवेयर जो कंपनी के कच्चे माल की खरीद, विनिर्माण, इन्वेंट्री, मानव संसाधन और वित्तीय खातों को एक ही साझा डेटाबेस में प्रबंधित करता है (जैसे: SAP, Oracle ERP)।
  • ई-कॉमर्स एवं डिजिटल मार्केटिंग: इंटरनेट पर सामान की ऑनलाइन खरीद-बिक्री (Amazon, Flipkart) और सुरक्षित डिजिटल भुगतान गेटवे।
  • सीआरएम (Customer Relationship Management - CRM): ग्राहकों के संपर्क इतिहास, खरीद विवरण और शिकायतों का रिकॉर्ड रखकर बेहतर ग्राहक सेवा सुनिश्चित करना।
4.2 विज्ञान, इंजीनियरिंग एवं मौसम पूर्वानुमान में आईटी
  • कैड (CAD - Computer-Aided Design): विशेष ग्राफिक्स सॉफ्टवेयर (जैसे: AutoCAD) जिसके द्वारा इंजीनियर और वास्तुकार इमारतों, पुलों, हवाई जहाजों और ऑटोमोबाइल के अत्यंत सटीक 2D ब्लूप्रिंट और 3D मॉडल बनाते हैं।
  • कैम (CAM - Computer-Aided Manufacturing): वह तकनीक जिसमें कैड डिजाइन के अनुसार सीधे सीएनसी (CNC) मशीनों और लेजर कटर को निर्देश देकर बिना किसी मानवीय त्रुटि के सटीक पुर्जे बनाए जाते हैं।
  • मौसम विज्ञान एवं अंतरिक्ष अनुसंधान: भारत के 'परम' (PARAM) श्रृंखला जैसे शक्तिशाली सुपरकंप्यूटर उपग्रह डेटा का विश्लेषण करके चक्रवातों की दिशा, मानसून और इसरो (ISRO) के अंतरिक्ष मिशनों की सटीक गणना करते हैं।
4.3 आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में नैदानिक प्रणालियाँ

अस्पतालों में कंप्यूटर आधारित नैदानिक उपकरणों ने गंभीर रोगों की पहचान को अत्यंत त्वरित और सटीक बना दिया है:

चिकित्सा उपकरण पूर्ण रूप एवं कार्य सिद्धांत प्रमुख नैदानिक उपयोग
ईसीजी (ECG) इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (Electrocardiogram): मानव हृदय की धड़कनों और मांसपेशियों की विद्युत तरंगों को ग्राफ पर रिकॉर्ड करता है। हार्ट अटैक, असामान्य धड़कन और हृदय संबंधी विकारों का पता लगाना।
ईईजी (EEG) इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम (Electroencephalogram): मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिकाओं (न्यूरॉन्स) द्वारा उत्पन्न विद्युत तरंगों को रिकॉर्ड करता है। मिर्गी (Epilepsy), मस्तिष्क की चोट, नींद विकार और ब्रेन ट्यूमर की जांच।
अल्ट्रासाउंड / सोनोग्राफी उच्च आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगों (Sound Waves) का शरीर के भीतरी अंगों से टकराकर लौटने वाले प्रतिध्वनि संकेतों से चित्र बनाना। गर्भावस्था में भ्रूण के विकास की निगरानी; गुर्दे व पित्त की थैली की पथरी की जांच।
सीटी स्कैन (CT Scan) कंप्यूटेड टोमोग्राफी (Computed Tomography): 360-डिग्री एक्स-रे किरणों और कंप्यूटर एल्गोरिदम के मेल से अंगों के 3D क्रॉस-सेक्शनल स्लाइस चित्र बनाना। आंतरिक रक्तस्राव, जटिल हड्डियों के फ्रैक्चर और पेट के गंभीर संक्रमण का पता लगाना।
एमआरआई (MRI) मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (Magnetic Resonance Imaging): बिना किसी हानिकारक विकिरण के शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र और रेडियो तरंगों द्वारा कोमल ऊतकों के अति-सटीक चित्र बनाना। मस्तिष्क की संरचना, रीढ़ की हड्डी की चोट, लिगामेंट टूटने और ट्यूमर की सूक्ष्म जांच।
टेलीमेडिसिन एवं रोबोटिक सर्जरी:

टेलीमेडिसिन के माध्यम से सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के मरीज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और डिजिटल सेंसरों की मदद से बड़े शहरों के विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श ले सकते हैं। इसके अतिरिक्त, कंप्यूटर-सहायता प्राप्त रोबोटिक सर्जरी डॉक्टरों को सूक्ष्म चीरों के माध्यम से इंसानी हाथों से कहीं अधिक सटीकता के साथ जटिल ऑपरेशन करने में सक्षम बनाती है।

मॉड्यूल 5: आधुनिक बैंकिंग प्रणाली एवं ई-गवर्नेंस (G2C, G2B, G2G डिजिटल सेवाएँ)

5.1 आधुनिक बैंकिंग में सूचना प्रौद्योगिकी

एक समय था जब पैसे निकालने या पासबुक अपडेट करने के लिए ग्राहकों को अपनी मूल शाखा में लंबी कतारों में लगना पड़ता था। सूचना प्रौद्योगिकी ने बैंकिंग को एक निर्बाध 24x7 डिजिटल सेवा बना दिया है:

  • कोर बैंकिंग सॉल्यूशन (Core Banking Solution - CBS): एक केंद्रीकृत नेटवर्किंग व्यवस्था जिसमें ग्राहक का खाता किसी एक शाखा में सीमित रहने के बजाय बैंक के केंद्रीय सर्वर पर स्थित होता है। सीबीएस के कारण ग्राहक किसी विशिष्ट शाखा का नहीं, बल्कि "पूरे बैंक का ग्राहक" बन जाता है और देश-दुनिया की किसी भी शाखा या एटीएम से लेनदेन कर सकता है।
  • एटीएम (Automated Teller Machine) एवं सीडीएम (Cash Deposit Machine): 24 घंटे बिना बैंक कर्मचारी के पैसे निकालने, जमा करने और बैलेंस चेक करने वाले इलेक्ट्रॉनिक कियोस्क।
  • आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक भुगतान विधियाँ:
    • NEFT (National Electronic Funds Transfer): देश भर में आधे-आधे घंटे के बैच में होने वाला इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर।
    • RTGS (Real Time Gross Settlement): बड़े लेनदेनों (न्यूनतम 2 लाख रुपये) के लिए तत्काल और रियल-टाइम सेटलमेंट।
    • IMPS (Immediate Payment Service): मोबाइल और नेट बैंकिंग द्वारा 24x7 तत्काल पैसे भेजने की सुविधा।
    • UPI (Unified Payments Interface): भारत द्वारा विकसित क्रांतिकारी प्रणाली, जिसमें बैंक खाता या IFSC कोड साझा किए बिना केवल एक वर्चुअल आईडी (VPA) या QR कोड स्कैन करके सेकंडों में भुगतान हो जाता है।
5.2 ई-गवर्नेंस (E-Governance) क्या है?

ई-गवर्नेंस (Electronic Governance) का अर्थ है सरकारी प्रशासनिक सेवाओं और सूचनाओं को सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से पारदर्शी, त्वरित और भ्रष्टाचार-मुक्त तरीके से सीधे नागरिकों तक पहुँचाना।

5.3 ई-गवर्नेंस के 4 प्रमुख डिलीवरी मॉडल
मॉडल का नाम पूर्ण रूप एवं विवरण व्यावहारिक डिजिटल उदाहरण
G2C Government-to-Citizen: सरकार द्वारा सीधे नागरिकों को प्रदान की जाने वाली सेवाएं। ऑनलाइन जन्म/मृत्यु प्रमाण पत्र, आधार कार्ड अपडेट, मतदाता पहचान पत्र सुधार, बिजली बिल भुगतान।
G2B Government-to-Business: सरकार और व्यापारिक संस्थानों के बीच का डिजिटल इंटरफेस। ऑनलाइन जीएसटी (GST) रिटर्न, नए उद्योग के लिए ट्रेड लाइसेंस और ई-निविदा (e-Tender)।
G2G Government-to-Government: विभिन्न सरकारी विभागों और मंत्रालयों के बीच आंतरिक संचार। स्मार्ट पुलिस नेटवर्क (CCTNS), अंतर-मंत्रालयी ई-ऑफिस और साझा डेटाबेस।
G2E Government-to-Employee: सरकारी कर्मचारियों के कल्याण और सेवा संबंधी सुविधाएं। कर्मचारियों के ऑनलाइन अवकाश आवेदन, जीपीएफ (GPF) विवरण और डिजिटल पेंशन प्रणाली।
प्रमुख डिजिटल इंडिया एवं ई-गवर्नेंस पोर्टल:
  • डिजिलॉकर (DigiLocker): एक राष्ट्रीय डिजिटल वॉल्ट जहाँ शैक्षणिक अंकपत्र, ड्राइविंग लाइसेंस और पैन कार्ड भौतिक मूल दस्तावेजों के समान कानूनी मान्यता के साथ सुरक्षित रहते हैं।
  • उमंग (UMANG): केंद्र और राज्य सरकारों की एक हजार से अधिक नागरिक सेवाओं को एक ही मोबाइल ऐप पर उपलब्ध कराने वाला एकीकृत मंच।
  • ई-हॉस्पिटल (e-Hospital): सरकारी अस्पतालों में ऑनलाइन ओपीडी पर्ची बनवाने और ब्लड बैंक में रक्त की उपलब्धता जानने की डिजिटल प्रणाली।
  • বাংলার ভূমি (BanglarBhumi): पश्चिम बंगाल का ऑनलाइन भूमि सुधार पोर्टल जिसके माध्यम से नागरिक जमीन का खतियान और म्यूटेशन घर बैठे देख सकते हैं।

प्रोग्रामिंग सिंटेक्स, स्टेटमेंट्स एवं भाषा अनुवादक नियम

डेटा से सूचना रूपांतरण सूत्र (Data vs Information Formula)
सूचना (Information) = प्रसंस्करण [ कच्चा डेटा (Raw Data) + प्रासंगिक संदर्भ (Context) + संगठित संरचना (Structure) ]
आईटी-बीपीएम के 4 उप-क्षेत्र (NASSCOM Framework)
IT-BPM उद्योग = आईटी सर्विसेज (ITS) + बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट (BPM) + सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट्स (SPD) + इंजीनियरिंग आर एंड डी (ER&D)
आधुनिक डिजिटल भुगतान चैनल
डिजिटल भुगतान = NEFT (बैच ट्रांसफर) + RTGS (रियल-टाइम बड़ा लेनदेन) + IMPS (24x7 तत्काल) + UPI (वर्चुअल आईडी आधारित भुगतान)
चिकित्सा नैदानिक प्रणालियों का तुलनात्मक सूत्र
ईसीजी (हृदय विद्युत तरंग) | ईईजी (मस्तिष्क तरंग) | अल्ट्रासाउंड (ध्वनि तरंग) | सीटी स्कैन (एक्स-रे 3D स्लाइस) | एमआरआई (चुंबकीय क्षेत्र)
ई-गवर्नेंस के 4 स्तंभ
ई-गवर्नेंस = G2C (नागरिक सेवा) + G2B (व्यापारिक सेवा) + G2G (अंतर-सरकारी सेवा) + G2E (कर्मचारी सेवा)

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और सूचना प्रौद्योगिकी सक्षम सेवाओं (ITeS) के बीच क्या अंतर है? उदाहरण सहित समझाइए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

अंतर इस प्रकार है:

  1. सूचना प्रौद्योगिकी (IT): यह वह बुनियादी ढांचा है जिसमें कंप्यूटर हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और नेटवर्किंग प्रणाली शामिल है जिसका उपयोग डेटा को प्रोसेस और स्टोर करने के लिए किया जाता है।
  2. सूचना प्रौद्योगिकी सक्षम सेवाएँ (ITeS): यह वह क्षेत्र है जो सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग करके विभिन्न व्यावसायिक सेवाओं (जैसे कॉल सेंटर, पेरोल प्रोसेसिंग, मेडिकल ट्रांसक्रिप्शन) को दूरस्थ रूप से कुशलतापूर्वक संचालित करता है। उदाहरण: एक सॉफ्टवेयर कंपनी जो नया अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर बनाती है, वह 'IT' उद्योग का हिस्सा है; जबकि एक वित्तीय एजेंसी जो उस सॉफ्टवेयर का उपयोग करके बहुराष्ट्रीय कंपनियों के कर और वेतन की गणना करती है, वह 'ITeS' उद्योग का हिस्सा है।
उदाहरण 2
पारंपरिक बैंकिंग की तुलना में कोर बैंकिंग सॉल्यूशन (CBS) ग्राहकों के लिए किस प्रकार अधिक सुविधाजनक है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
पारंपरिक बैंकिंग में ग्राहक का रिकॉर्ड केवल उसी शाखा के बही-खाते में दर्ज होता था जहाँ खाता खोला गया था, इसलिए नकदी निकालने या पासबुक अपडेट कराने के लिए उसी शाखा में जाना पड़ता था। कोर बैंकिंग सॉल्यूशन (CBS) में ग्राहक का खाता किसी एक शाखा के बजाय बैंक के केंद्रीय सर्वर पर स्थित होता है। इसके कारण ग्राहक एक शाखा का नहीं, बल्कि 'समग्र बैंक का ग्राहक' बन जाता है। अब वह देश के किसी भी एटीएम, मोबाइल ऐप या किसी भी अन्य शाखा से चौबीसों घंटे तुरंत लेनदेन कर सकता है।
उदाहरण 3
सीटी स्कैन (CT Scan) और एमआरआई (MRI) के बीच तकनीकी और नैदानिक अंतर स्पष्ट कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
  1. सीटी स्कैन (Computed Tomography): यह 360-डिग्री घूमने वाली एक्स-रे ट्यूब और कंप्यूटर का उपयोग करके शरीर के आंतरिक अंगों के त्रि-आयामी (3D) स्लाइस चित्र तैयार करता है। इसमें एक्स-रे विकिरण का उपयोग होता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से हड्डियों के जटिल फ्रैक्चर और आंतरिक रक्तस्राव का पता लगाने के लिए किया जाता है।
  2. एमआरआई (Magnetic Resonance Imaging): इसमें किसी भी प्रकार के हानिकारक एक्स-रे विकिरण का उपयोग नहीं होता। यह बहुत शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र और हानिरहित रेडियो तरंगों द्वारा कोमल ऊतकों, मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और जोड़ों के अत्यंत स्पष्ट और विस्तृत चित्र बनाता है।
उदाहरण 4
आधुनिक पुस्तकालय प्रबंधन में बारकोड/आरएफआईडी और ओपेक (OPAC) का क्या महत्व है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

आधुनिक पुस्तकालयों में यह तकनीक निम्नलिखित लाभ प्रदान करती है:

  1. पुस्तकों का त्वरित आदान-प्रदान: प्रत्येक पुस्तक पर लगे बारकोड या आरएफआईडी टैग को स्कैनर से पढ़ते ही कुछ ही सेकंड में पुस्तक जारी या जमा हो जाती है, जिससे लंबी कतारें नहीं लगतीं और रजिस्टर में मानवीय त्रुटि समाप्त हो जाती है।
  2. ओपेक (OPAC): यह पुस्तकालय का सार्वजनिक कंप्यूटरीकृत कैटलॉग है। छात्र किसी की सहायता के बिना कंप्यूटर पर पुस्तक का नाम या लेखक खोजकर तुरंत यह जान सकते हैं कि पुस्तक उपलब्ध है या नहीं और वह किस शेल्फ पर रखी है।
उदाहरण 5
ई-गवर्नेंस के अंतर्गत G2C और G2B मॉडल में अंतर स्पष्ट कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
  1. G2C (Government-to-Citizen): सरकार जब सीधे आम नागरिकों को उनके कल्याण के लिए डिजिटल सेवाएं प्रदान करती है। उदाहरण: ऑनलाइन आधार कार्ड डाउनलोड, जन्म प्रमाण पत्र आवेदन और भूमि का खतियान देखना।
  2. G2B (Government-to-Business): सरकार और निजी व्यापारिक उद्यमों के बीच के लेन-देन और प्रशासनिक कार्यों को सुगम बनाने के लिए डिजिटल मंच। उदाहरण: ऑनलाइन जीएसटी रिटर्न भरना, नए उद्योग के लिए ट्रेड लाइसेंस आवेदन और सरकारी ई-टेंडरिंग।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

आईटी (IT) और आईटीईएस (ITeS) को एक ही समझना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

आईटी तकनीकी उपकरण और सॉफ्टवेयर के निर्माण से संबंधित है, जबकि आईटीईएस उन तकनीकों का उपयोग करके दूरस्थ व्यावसायिक सेवाएँ प्रदान करने का क्षेत्र है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह समझना कि सीटी स्कैन और एमआरआई दोनों में एक्स-रे विकिरण का उपयोग होता है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

सीटी स्कैन में एक्स-रे विकिरण का उपयोग होता है, जबकि एमआरआई में कोई विकिरण नहीं होता; यह शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र और रेडियो तरंगों पर कार्य करता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

NEFT और RTGS को समान मानना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

NEFT आधे-आधे घंटे के बैच में काम करता है और इसमें न्यूनतम सीमा नहीं होती; जबकि RTGS वास्तविक समय में तुरंत होता है और केवल 2 लाख रुपये या उससे अधिक के बड़े लेनदेनों के लिए है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

BPO का अर्थ केवल टेलीफोन कॉल सेंटर समझना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

कॉल सेंटर बीपीओ का एक छोटा हिस्सा है; इसके अंतर्गत पेरोल मैनेजमेंट, डेटा एनालिटिक्स, वित्तीय ऑडिट और मेडिकल ट्रांसक्रिप्शन जैसे कई जटिल कार्य भी शामिल हैं।

आईटी-आईटीईएस उद्योग, बीपीओ/बीपीएम संरचना एवं अनुप्रयोगों का संपूर्ण कॉन्सेप्ट मैप (WBBSE कक्षा 9 अध्याय 1)

WBBSE कक्षा 9 सूचना प्रौद्योगिकी (IT) • अध्याय 1 आईटी और आईटीईएस उद्योग का परिचय: वास्तुकला एवं संरचना आईटी-बीपीएम उद्योग 1. आईटी एवं आईटीईएस सूचना प्रौद्योगिकी (IT) • डेटा निर्माण एवं भंडारण • प्रोसेसिंग एवं सुरक्षित संचरण • हार्डवेयर व सॉफ्टवेयर प्रणाली कच्चा डेटा → डिजिटल संपत्ति आईटी-सक्षम सेवाएँ (ITeS) • प्रौद्योगिकी आधारित सेवाएँ • कॉल सेंटर व ग्राहक सेवा • मेडिकल ट्रांसक्रिप्शन • बैक-ऑफिस संचालन • डेटा प्रोसेसिंग एवं जीआईएस प्रमुख व्यावसायिक लाभ • 24x7 वैश्विक उपलब्धता • संचालन लागत में कमी • उच्च गुणवत्ता और दक्षता • कुशल प्रतिभा तक पहुँच 2. आईटी-बीपीएम उद्योग 4 प्रमुख उप-क्षेत्र (NASSCOM) • 1. आईटी सेवाएँ (ITS) सॉफ्टवेयर विकास, परामर्श • 2. बीपीएम (BPM) बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट • 3. सॉफ्टवेयर उत्पाद (SPD) • 4. ईआरएंडडी (ER&D) इंजीनियरिंग अनुसंधान व डिजाइन संगठनों का वर्गीकरण • बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ (MNCs) वैश्विक मुख्यालय व ग्राहक (IBM, Microsoft, Accenture) • भारतीय सेवा प्रदाता (ISPs) भारत में स्थापित वैश्विक नेता (TCS, Infosys, Wipro) • आंतरिक केंद्र (GCCs / GICs) मूल कंपनी की अपनी आंतरिक जरूरतों के लिए समर्पित केंद्र 3. शिक्षा, विज्ञान व स्वास्थ्य दैनिक जीवन व शिक्षा • स्मार्ट होम व मनोरंजन • लाइब्रेरी OPAC व RFID • स्मार्ट डिजिटल कक्षाएँ • इंटरएक्टिव व्हाइटबोर्ड • एलएमएस (Google Classroom) • डिजिटल पुस्तकें: DIKSHA • सीबीटी (CBT) ऑनलाइन परीक्षा वर्चुअल लैब्स एवं सिमुलेशन विज्ञान व स्वास्थ्य सेवा • इंजीनियरिंग में CAD/CAM • मौसम पूर्वानुमान सुपरकंप्यूटर • नैदानिक परीक्षण उपकरण: ECG, EEG, अल्ट्रासाउंड सीटी स्कैन (CT), एमआरआई (MRI) • टेलीमेडिसिन परामर्श • इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड रोबोटिक सटीक शल्य चिकित्सा 4. बैंकिंग व ई-गवर्नेंस डिजिटल बैंकिंग प्रणाली • कोर बैंकिंग सॉल्यूशंस (CBS) किसी भी शाखा से कभी भी लेन-देन • 24x7 एटीएम व सीडीएम • इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर: NEFT, RTGS, IMPS, UPI • पीओएस (POS) व माइक्रो-एटीएम • एआई धोखाधड़ी पहचान कागज रहित मोबाइल पासबुक ई-गवर्नेंस लोक सेवाएँ • G2C (सरकार से नागरिक) आधार, डिजिटल भूमि रिकॉर्ड, पासपोर्ट • G2B (सरकार से व्यापार) जीएसटी पोर्टल, ई-टेंडरिंग • G2G एवं G2E पोर्टल • डिजिलॉकर (DigiLocker) पारदर्शी, भ्रष्टाचार मुक्त व कागज रहित डिजिटल भारत

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
सूचना प्रौद्योगिकी (IT) कंप्यूटर हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और संचार नेटवर्क के मेल से डेटा प्रसंस्करण और सूचना प्रबंधन की एकीकृत प्रणाली है।
मुख्य बिंदु 2
सूचना प्रौद्योगिकी सक्षम सेवाएँ (ITeS) व्यावसायिक प्रक्रियाओं को इंटरनेट और दूरसंचार के माध्यम से दूरस्थ रूप से संचालित करके लागत घटाती हैं और गुणवत्ता बढ़ाती हैं।
मुख्य बिंदु 3
बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (BPO) कंपनियों को अपने गैर-मुख्य कार्यों को बाहरी विशेषज्ञ एजेंसियों को सौंपने की सुविधा प्रदान करता है।
मुख्य बिंदु 4
भारतीय आईटी-बीपीएम उद्योग के 4 प्रमुख उप-क्षेत्र हैं: आईटी सर्विसेज (ITS), बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट (BPM), सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट्स (SPD) और इंजीनियरिंग आर एंड डी (ER&D)।
मुख्य बिंदु 5
संगठनात्मक रूप से कंपनियाँ 3 श्रेणियों में बंटी हैं: बहुराष्ट्रीय निगम (MNC), भारतीय सेवा प्रदाता (ISP) और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC)।
मुख्य बिंदु 6
पुस्तकालयों में बारकोड, आरएफआईडी और ओपेक (OPAC) ने पुस्तकों के प्रबंधन और खोज को त्वरित और कागज-रहित बना दिया है।
मुख्य बिंदु 7
शिक्षा में स्मार्ट क्लासरूम, एलएमएस (Google Classroom), सरकारी पोर्टल (DIKSHA, Banglar Shiksha) और कंप्यूटर-आधारित परीक्षण (CBT) ने गुणवत्ता बढ़ाई है।
मुख्य बिंदु 8
उद्योगों में कैड (CAD) से 2D/3D डिजाइन बनते हैं और कैम (CAM) से रोबोटिक मशीनों द्वारा सटीक उत्पादन होता है। मौसम की सटीक भविष्यवाणी के लिए सुपरकंप्यूटर अनिवार्य हैं।
मुख्य बिंदु 9
चिकित्सा क्षेत्र में ईसीजी, ईईजी, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और एमआरआई रोगनिदान के मुख्य आधार हैं; टेलीमेडिसिन दूरस्थ क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सा पहुंचाता है।
मुख्य बिंदु 10
आधुनिक बैंकिंग की रीढ़ कोर बैंकिंग सॉल्यूशन (CBS) है; तात्कालिक भुगतानों के लिए एटीएम, एनईएफटी, आरटीजीएस, आईएमपीएस और यूपीआई (UPI) का उपयोग होता है।
मुख्य बिंदु 11
ई-गवर्नेंस के चार मॉडल (G2C, G2B, G2G, G2E) सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और गति लाते हैं; डिजिलॉकर और उमंग इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
डेटा (Data) और सूचना (Information) के बीच एक प्रमुख अंतर बताइए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: डेटा कच्चे, असंगठित और अर्थहीन आंकड़े होते हैं; जबकि डेटा को संसाधित और सुव्यवस्थित करने के बाद जो अर्थपूर्ण और उपयोगी परिणाम मिलता है, उसे सूचना कहते हैं।
2
ITeS और BPO का पूर्ण रूप क्या है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: ITeS का पूर्ण रूप Information Technology enabled Services है और BPO का पूर्ण रूप Business Process Outsourcing है।
3
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC / GIC) किसे कहते हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: GCC किसी विदेशी कंपनी द्वारा भारत में स्थापित उसका अपना आंतरिक तकनीकी केंद्र होता है, जो केवल अपनी मूल (पैरेंट) कंपनी के तकनीकी और व्यावसायिक कार्यों को संभालता है।
4
पुस्तकालय में OPAC का क्या उपयोग है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: OPAC (Online Public Access Catalogue) के माध्यम से छात्र कंप्यूटर पर पुस्तक का शीर्षक या लेखक खोजकर तुरंत यह जान सकते हैं कि पुस्तक उपलब्ध है या नहीं और वह किस शेल्फ पर रखी है।
5
CAD और CAM का पूर्ण रूप क्या है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: CAD का पूर्ण रूप Computer-Aided Design है और CAM का पूर्ण रूप Computer-Aided Manufacturing है।
6
मस्तिष्क की विद्युत तरंगों को रिकॉर्ड करने के लिए किस चिकित्सा उपकरण का उपयोग किया जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम यानी ईईजी (EEG - Electroencephalogram) मशीन का।
7
बैंकिंग में CBS का पूर्ण रूप और मुख्य लाभ क्या है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: CBS का पूर्ण रूप Core Banking Solution है। इसका मुख्य लाभ यह है कि सभी शाखाएँ एक केंद्रीय सर्वर से जुड़ी होती हैं, जिससे ग्राहक किसी भी शाखा या एटीएम से लेनदेन कर सकता है।
8
भारतीय बैंकिंग में बड़े मूल्य के तत्काल लेनदेन (न्यूनतम 2 लाख रुपये) के लिए किस प्रणाली का उपयोग होता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: आरटीजीएस (RTGS - Real Time Gross Settlement) प्रणाली का।
9
ई-गवर्नेंस के G2C मॉडल का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: ऑनलाइन आधार कार्ड डाउनलोड करना, डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र आवेदन करना या जमीन का खतियान ऑनलाइन देखना।
10
क्या डिजिलॉकर (DigiLocker) में रखे गए डिजिटल दस्तावेज कानूनी रूप से मान्य हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: हाँ, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी नियम 2016 के नियम 9A) के अनुसार डिजिलॉकर में जारी इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज मूल भौतिक दस्तावेजों के समान कानूनी रूप से मान्य हैं।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
अभ्यास के लिए तैयार?

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