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CBSE • कक्षा 8 • Mathematics • अध्याय 1
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

A Square and A Cube

केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) एवं NCERT पाठ्यक्रम पर आधारित कक्षा 8 गणित का पाँचवाँ अध्याय "वर्ग और वर्गमूल" (Squares and Square Roots) संख्या सिद्धांत और व्यावहारिक क्षेत्रमिति की आधारशिला है। जब किसी संख्या को उसी संख्या से गुणा किया जाता है, तो प्राप्त गुणनफल उस संख्या का "वर्ग" (Square) कहलाता है, तथा मूल संख्या उस गुणनफल का "वर्गमूल" (Square Root) कहलाती है। इस अध्याय में पूर्ण वर्ग संख्याओं (Perfect Squares) के विशिष्ट लक्षण (इकाई अंक के नियम, शून्यों की सम संख्या), वर्गों के रोचक प्रतिरूप (विषम संख्याओं का योग, दो क्रमागत वर्गों के बीच 2n संख्याएँ), पाइथागोरस त्रिक (Pythagorean Triplets: 2m, m² - 1, m² + 1), वर्गमूल ज्ञात करने की तीन प्रमुख विधियाँ—बार-बार घटाने की विधि, अभाज्य गुणनखंडन विधि तथा दीर्घ भाग विधि (Long Division Method), दशमलव संख्याओं का वर्गमूल एवं वर्गमूल का सन्निकटन व व्यावहारिक अनुप्रयोगों का संपूर्ण एवं परीक्षा-उपयोगी अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।

📐 1225 पौधों को एक वर्गाकार बगीचे में इस प्रकार लगाना है कि पंक्तियों की संख्या प्रत्येक पंक्ति में पौधों की संख्या के बराबर हो—कैसे तय करें?

क्या आपने कभी गौर किया है कि किसी भी पूर्ण वर्ग संख्या के अंत में कभी भी 2, 3, 7 या 8 क्यों नहीं आता? यदि आपको प्रथम 10 विषम प्राकृत संख्याओं (1 + 3 + 5 + 7 + ... + 19) का योग निकालना हो, तो बिना जोड़े केवल एक सेकंड में आप 100 कैसे बता सकते हैं? 3, 4 और 5 की संख्याओं में ऐसा क्या जादुई संबंध है कि 3² + 4² = 5² बन जाता है और राजमिस्त्री दीवार का कोना 90° का समकोण बनाने के लिए इसी 3-4-5 के फीते का उपयोग करते हैं? और 5-अंकों या 6-अंकों की विशाल संख्या का वर्गमूल बिना कैलकुलेटर के चुटकियों में कैसे निकाला जाता है? आइए, वर्ग और वर्गमूल के इस अद्भुत गणितीय रहस्य को समझें!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

झारखण्ड के वास्तुशिल्प, भूमि मापन (प्लॉट का क्षेत्रफल), निर्माण इंजीनियरिंग, पाइथागोरस प्रमेय के अनुप्रयोगों, भौतिकी के गति समीकरणों ($v^2 = u^2 + 2as$) तथा प्रतियोगी परीक्षाओं में वर्ग और वर्गमूल का ज्ञान अत्यंत आवश्यक है। यह अध्याय कक्षा 9 और 10 के द्विघात समीकरणों और त्रिकोणमिति का अनिवार्य आधार है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • प्राकृत संख्याओं का गुणन और पहाड़े (Tables 1 to 20)।
  • अभाज्य संख्याएँ (Prime Numbers: 2, 3, 5, 7, 11, 13...) तथा अभाज्य गुणनखंडन।
  • समकोण त्रिभुज और पाइथागोरस प्रमेय (कर्ण² = आधार² + लम्ब²) का सामान्य अनुभव।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • पूर्ण वर्ग संख्याओं की पहचान इकाई अंकों (0, 1, 4, 5, 6, 9) और शून्यों की संख्या के आधार पर कर सकेंगे।
  • पाइथागोरस त्रिक (2m, m² - 1, m² + 1) की संरचना समझकर किसी एक दी गई संख्या से पूरा त्रिक ज्ञात कर सकेंगे।
  • अभाज्य गुणनखंडन विधि द्वारा दी गई संख्या का वर्गमूल ज्ञात कर सकेंगे तथा पूर्ण वर्ग बनाने हेतु गुणा/भाग की संख्या निकाल सकेंगे।
  • दीर्घ भाग विधि (Long Division Method) से बड़ी संख्याओं और दशमलव संख्याओं का वर्गमूल शुद्धता से निकाल सकेंगे।
  • न्यूनतम जोड़ी जाने वाली अथवा घटाई जाने वाली संख्या ज्ञात कर दी गई संख्या को पूर्ण वर्ग बना सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. वर्ग संख्या की अवधारणा एवं महत्व...
2 2. वर्गों के रोचक प्रतिरूप एवं पाइथ...
3 3. वर्गमूल ज्ञात करने की विधियाँ: घ...
4 4. दशमलव संख्याओं का वर्गमूल एवं व्...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. वर्ग संख्या की अवधारणा एवं महत्वपूर्ण गुणधर्म

यदि किसी प्राकृत संख्या $m$ को $n^2$ के रूप में व्यक्त किया जा सके (जहाँ $n$ भी एक प्राकृत संख्या है), तो $m$ को एक वर्ग संख्या (Square Number) या पूर्ण वर्ग (Perfect Square) कहते हैं।

संख्या ($n$) 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10
वर्ग ($n^2$) 1 4 9 16 25 36 49 64 81 100

पूर्ण वर्ग संख्याओं के स्वर्णिम नियम:

  • इकाई अंक का नियम: किसी भी पूर्ण वर्ग संख्या का इकाई अंक केवल 0, 1, 4, 5, 6 या 9 ही हो सकता है।

    नियम: जिस संख्या के अंत में 2, 3, 7 या 8 आता है, वह कभी भी पूर्ण वर्ग नहीं हो सकती (जैसे 1057, 23453, 7928 पूर्ण वर्ग नहीं हैं)।

  • शून्यों की संख्या: किसी पूर्ण वर्ग संख्या के अंत में शून्यों की संख्या सदैव सम (Even) होती है (जैसे 100, 2500, 90000); यदि शून्यों की संख्या विषम हो (जैसे 1000, 500000), तो वह पूर्ण वर्ग नहीं हो सकती।
  • सम व विषम संख्याओं के वर्ग: सम संख्या का वर्ग सदैव सम होता है (जैसे $6^2 = 36$), तथा विषम संख्या का वर्ग सदैव विषम होता है (जैसे $9^2 = 81$)।

2. वर्गों के रोचक प्रतिरूप एवं पाइथागोरस त्रिक

A. वर्गों के आश्चर्यजनक प्रतिरूप (Patterns in Square Numbers):

  1. प्रथम $n$ विषम प्राकृत संख्याओं का योग: प्रथम $n$ विषम प्राकृत संख्याओं का योग $n^2$ होता है:
    • $1 = 1^2$
    • $1 + 3 = 4 = 2^2$
    • $1 + 3 + 5 = 9 = 3^2$
    • $1 + 3 + 5 + 7 = 16 = 4^2$
    • $1 + 3 + 5 + ... + (2n - 1) = n^2$
  2. दो क्रमागत वर्ग संख्याओं के बीच की संख्याएँ: किन्हीं दो क्रमागत वर्ग संख्याओं $n^2$ और $(n + 1)^2$ के बीच ठीक $2n$ अ-वर्ग संख्याएँ होती हैं:

    उदाहरण: $12^2 = 144$ और $13^2 = 169$ के बीच प्राकृत संख्याओं की संख्या $= 2 \times 12 = 24$ होगी।

  3. दो क्रमागत सम या विषम संख्याओं का गुणनफल: $(a - 1)(a + 1) = a^2 - 1$ (जैसे $11 \times 13 = 12^2 - 1 = 143$)।

B. पाइथागोरस त्रिक (Pythagorean Triplets):

तीन धनात्मक प्राकृत संख्याओं $a, b, c$ का ऐसा समूह जिसमें दो संख्याओं के वर्गों का योग तीसरी संख्या के वर्ग के बराबर हो ($a^2 + b^2 = c^2$), पाइथागोरस त्रिक कहलाता है (जैसे 3, 4, 5 क्योंकि $3^2 + 4^2 = 9 + 16 = 25 = 5^2$)।

पाइथागोरस त्रिक का व्यापक रूप:

किसी भी प्राकृत संख्या $m > 1$ के लिए: $$2m, \quad m^2 - 1, \quad m^2 + 1$$ सदैव एक पाइथागोरस त्रिक बनाते हैं।

सत्यापन: $(2m)^2 + (m^2 - 1)^2 = 4m^2 + m^4 - 2m^2 + 1 = m^4 + 2m^2 + 1 = (m^2 + 1)^2$।

3. वर्गमूल ज्ञात करने की विधियाँ: घटाना, गुणनखंडन एवं भाग विधि

वर्गमूल, वर्ग करने की संक्रिया का प्रतिलोम (Inverse Operation) है। यदि $a^2 = b$ हो, तो $b$ का वर्गमूल $a$ होता है, जिसे $\sqrt{b} = a$ लिखते हैं (जैसे $\sqrt{81} = 9$ क्योंकि $9^2 = 81$)।

वर्गमूल ज्ञात करने की 3 मुख्य विधियाँ:

विधि 1: बार-बार घटाने की विधि (Repeated Subtraction Method)

दी गई संख्या में से क्रमशः विषम संख्याओं (1, 3, 5, 7, 9...) को तब तक घटाते हैं जब तक कि शेषफल 0 न आ जाए। घटाने के चरणों (Steps) की कुल संख्या ही अभीष्ट वर्गमूल होती है।

उदाहरण: $\sqrt{25}$ के लिए: 25 - 1 = 24 (1), 24 - 3 = 21 (2), 21 - 5 = 16 (3), 16 - 7 = 9 (4), 9 - 9 = 0 (5)। कुल 5 चरण हुए, अतः $\sqrt{25} = 5$।

विधि 2: अभाज्य गुणनखंडन विधि (Prime Factorisation Method)

दी गई संख्या के सभी अभाज्य गुणनखंड ज्ञात कीजिए। समान अभाज्य गुणनखंडों के दो-दो के जोड़े (Pairs) बनाइए। प्रत्येक जोड़े में से एक-एक गुणनखंड लेकर उनका गुणनफल निकालिए। वही अभीष्ट वर्गमूल होगा।

उदाहरण: 6400 = $2 \times 2 \times 2 \times 2 \times 2 \times 2 \times 2 \times 2 \times 5 \times 5 = (2^2) \times (2^2) \times (2^2) \times (2^2) \times (5^2)$। $\sqrt{6400} = 2 \times 2 \times 2 \times 2 \times 5 = 80$।

विधि 3: दीर्घ भाग विधि (Long Division Method)

बड़ी संख्याओं और दशमलव संख्याओं के लिए यह सर्वाधिक शक्तिशाली विधि है:

  1. इकाई स्थान से प्रारंभ करके अंकों के ऊपर दो-दो के जोड़े (बार / Bars) लगाते हैं।
  2. सबसे बाईं ओर के जोड़े या अकेले अंक के लिए वह सबसे बड़ा अंक ढूँढते हैं जिसका वर्ग उस जोड़े के बराबर या उससे कम हो।
  3. भागफल लिखते हैं, शेषफल निकालते हैं और अगला बार-युग्म नीचे उतारते हैं।
  4. भाजक का दोगुना करके नया भाजक बनाते हैं और प्रक्रिया दोहराते हैं।

4. दशमलव संख्याओं का वर्गमूल एवं व्यावहारिक अनुप्रयोग

A. दशमलव संख्याओं का वर्गमूल (Square Root of Decimals):

  • दशमलव संख्या में बार (जोड़े) लगाते समय:
    • पूर्णांक भाग में: इकाई अंक से बाईं ओर दो-दो के जोड़े बनते हैं।
    • दशमलव भाग में: दशमलव बिंदु के तुरंत बाद दाईं ओर दो-दो के जोड़े बनते हैं (यदि अंत में एक अंक बचे तो शून्य बढ़ाकर जोड़ा पूरा करते हैं)।
  • उदाहरण: 17.64 में 17 पर एक बार तथा 64 पर दूसरा बार होगा। भाग विधि से $\sqrt{17.64} = 4.2$।

B. पूर्ण वर्ग बनाने हेतु जोड़ी जाने वाली या घटाई जाने वाली संख्या:

1. घटाई जाने वाली न्यूनतम संख्या:

दी गई संख्या का भाग विधि से वर्गमूल निकालते हैं। जो शेषफल (Remainder) बचता है, वही घटाई जाने वाली न्यूनतम संख्या होती है।

संख्या में से शेषफल घटाने पर प्राप्त संख्या पूर्ण वर्ग बन जाती है।

2. जोड़ी जाने वाली न्यूनतम संख्या:

यदि भागफल $k$ आता है, तो दी गई संख्या $k^2$ और $(k + 1)^2$ के बीच स्थित होती है।

जोड़ी जाने वाली संख्या = $(k + 1)^2 - \text{दी गई संख्या}$

महत्वपूर्ण सूत्र, सर्वसमिकाएँ एवं प्रमेय

पूर्ण वर्ग सूत्र (Perfect Square Definition)
m = n² ⇒ √m = n (जहाँ m, n ∈ ℕ)
वर्गमूल वर्ग करने की प्रतिलोम संक्रिया है। किसी संख्या के वर्गमूल में अंकों की संख्या n/2 या (n+1)/2 होती है।
पाइथागोरस त्रिक व्यापक सूत्र (Pythagorean Triplet Formula)
Triplets: (2m, m² - 1, m² + 1) जहाँ m > 1
(2m)² + (m² - 1)² = (m² + 1)²। सबसे छोटी संख्या प्रायः 2m होती है।
प्रथम n विषम संख्याओं का योग (Sum of First n Odd Numbers)
1 + 3 + 5 + 7 + ... + (2n - 1) = n²
यदि किसी संख्या को 1 से प्रारंभ होने वाली क्रमागत विषम संख्याओं के योग के रूप में न लिखा जा सके, तो वह पूर्ण वर्ग नहीं है।
दो क्रमागत वर्गों के मध्य अ-वर्ग संख्याएँ (Numbers between Consecutive Squares)
Count = 2n (between n² and (n + 1)²)
जैसे 9² और 10² के बीच 2 × 9 = 18 संख्याएँ स्थित हैं।
पूर्ण वर्ग बनाने हेतु जोड़ी जाने वाली संख्या (Number to be Added for Perfect Square)
Added Value = (k + 1)² - N
जहाँ k भाग विधि से प्राप्त भागफल है तथा k² < N < (k + 1)²।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
वह सबसे छोटी संख्या ज्ञात कीजिए जिससे 252 को गुणा करने पर यह एक पूर्ण वर्ग संख्या बन जाए। इस प्रकार प्राप्त नई संख्या का वर्गमूल भी ज्ञात कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:\nचरण 1: 252 का अभाज्य गुणनखंडन करने पर:\n$$252 = 2 \times 2 \times 3 \times 3 \times 7$$\n$$252 = (2 \times 2) \times (3 \times 3) \times 7$$\n\nचरण 2: गुणनखंडों के जोड़े (Pairs) बनाने पर हम देखते हैं कि अभाज्य गुणनखंड 7 का कोई जोड़ा नहीं है।\nपूर्ण वर्ग बनाने के लिए 7 का एक और गुणनखंड आवश्यक है।\nअतः 252 को 7 से गुणा करना होगा।\n\nचरण 3: नई संख्या:\n$$\text{नई संख्या} = 252 \times 7 = 1764$$\n\nचरण 4: नई संख्या का वर्गमूल:\n$$\sqrt{1764} = \sqrt{(2 \times 2) \times (3 \times 3) \times (7 \times 7)} = 2 \times 3 \times 7 = 42$$\n\nउत्तर: सबसे छोटी संख्या 7 है तथा प्राप्त संख्या का वर्गमूल 42 है।
उदाहरण 2
एक पाइथागोरस त्रिक लिखिए जिसकी सबसे छोटी संख्या 6 है।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:\nहम जानते हैं कि किसी भी प्राकृत संख्या $m > 1$ के लिए पाइथागोरस त्रिक $2m, m^2 - 1, m^2 + 1$ होता है।\n\nसबसे छोटी संख्या = $2m = 6$ लेने पर:\n$$m = \frac{6}{2} = 3$$\n\nअब त्रिक के अन्य दो सदस्य:\n$$m^2 - 1 = 3^2 - 1 = 9 - 1 = 8$$\n$$m^2 + 1 = 3^2 + 1 = 9 + 1 = 10$$\n\nजाँच:\n$$6^2 + 8^2 = 36 + 64 = 100 = 10^2$$\nअतः पाइथागोरस त्रिक 6, 8, 10 है।
उदाहरण 3
दीर्घ भाग विधि (Long Division Method) द्वारा 529 का वर्गमूल ज्ञात कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:\nचरण 1: 529 में दाईं ओर से बार (जोड़े) लगाते हैं: $\overline{5}\;\overline{29}$।\n\nचरण 2: सबसे बायाँ अंक 5 है।\nवह सबसे बड़ी संख्या जिसका वर्ग $\le 5$ हो, 2 है ($2^2 = 4$)।\nभाजक = 2, भागफल = 2।\nशेषफल = $5 - 4 = 1$।\n\nचरण 3: अगला जोड़ा 29 नीचे उतारते हैं, नया भाज्य = 129।\n\nचरण 4: भाजक का दोगुना करते हैं: $2 \times 2 = 4$।\nअब 4 के आगे वह अंक $d$ ढूँढते हैं कि $4d \times d = 129$ हो।\n$43 \times 3 = 129$।\nअतः नया अंक = 3, भागफल = 23।\nशेषफल = $129 - 129 = 0$।\n\nउत्तर: $\sqrt{529} = 23$।
उदाहरण 4
वह न्यूनतम संख्या ज्ञात कीजिए जिसे 4000 में से घटाने पर एक पूर्ण वर्ग संख्या प्राप्त हो जाए। इस प्रकार प्राप्त पूर्ण वर्ग संख्या का वर्गमूल भी निकालिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:\n4000 का भाग विधि से वर्गमूल निकालने पर:\nजोड़े: $\overline{40}\;\overline{00}$\n- प्रथम चरण: $6^2 = 36$, शेषफल = $40 - 36 = 4$, जोड़ा 00 उतारने पर भाज्य = 400।\n- द्वितीय चरण: भाजक $6 \times 2 = 12$।\n$123 \times 3 = 369$ ($124 \times 4 = 496 > 400$),\nशेषफल = $400 - 369 = 31$।\n\nयहाँ शेषफल 31 बचता है, जिसका अर्थ है कि $63^2$, 4000 से 31 कम है।\nअतः घटाई जाने वाली न्यूनतम संख्या = 31।\n\nपूर्ण वर्ग संख्या = $4000 - 31 = 3969$\nवर्गमूल = $\sqrt{3969} = 63$।\n\nउत्तर: न्यूनतम संख्या 31 है तथा वर्गमूल 63 है।
उदाहरण 5
एक वर्गाकार मैदान का क्षेत्रफल $2025 \text{ m}^2$ है। एक धावक को इस मैदान के चारों ओर 4 चक्कर लगाने में कितनी दूरी तय करनी होगी?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:\nमाना वर्गाकार मैदान की भुजा की लंबाई = $a$ मीटर\nक्षेत्रफल = $a^2 = 2025 \text{ m}^2$\n\nभुजा की लंबाई ($a$):\n$$a = \sqrt{2025}$$\nअभाज्य गुणनखंडन द्वारा: $2025 = (3 \times 3) \times (3 \times 3) \times (5 \times 5)$\n$$a = 3 \times 3 \times 5 = 45 \text{ मीटर}$$\n\nमैदान का परिमाप = $4 \times \text{भुजा} = 4 \times 45 = 180 \text{ मीटर}$\n\n4 चक्कर लगाने में कुल तय दूरी:\n$$\text{कुल दूरी} = 4 \times \text{परिमाप} = 4 \times 180 = 720 \text{ मीटर}$$\n\nउत्तर: धावक को कुल 720 मीटर की दूरी तय करनी होगी।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

छात्र अक्सर सोचते हैं कि जिस संख्या के अंत में 0, 1, 4, 5, 6, 9 है वह अनिवार्य रूप से पूर्ण वर्ग ही होगी।

सही वैज्ञानिक तथ्य

यह आवश्यक शर्त है परंतु पर्याप्त नहीं; जैसे 19 के अंत में 9 है, 24 के अंत में 4 है, परंतु ये पूर्ण वर्ग नहीं हैं। अंत में 2, 3, 7, 8 होने पर निश्चित रूप से पूर्ण वर्ग नहीं होगी।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

पाइथागोरस त्रिक में सबसे छोटी संख्या को सीधे m मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

पाइथागोरस त्रिक में सबसे छोटी सम संख्या को 2m माना जाता है, m नहीं। जैसे यदि संख्या 8 है, तो 2m = 8 ⇒ m = 4, अतः त्रिक 8, 15, 17 होगा।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

दशमलव संख्याओं में बाईं ओर से ही बार (जोड़े) लगाना शुरू कर देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

दशमलव के पहले पूर्णांक भाग में इकाई से बाईं ओर तथा दशमलव के बाद वाले भाग में दशमलव से दाईं ओर दो-दो के जोड़े लगाए जाते हैं।

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

वर्ग और वर्गमूल (Squares & Roots): ज्यामिति, प्रतिरूप व दीर्घ भाग विधि A. ज्यामितीय वर्ग व पाइथागोरस त्रिक 5² = 25 भुजा = 5 इकाई आधार = 4 लम्ब = 3 कर्ण = 5 पाइथागोरस त्रिक: (2m, m² − 1, m² + 1) 3² + 4² = 9 + 16 = 25 = 5² इकाई अंक: 0, 1, 4, 5, 6, 9 (2,3,7,8 कभी नहीं) B. दीर्घ भाग विधि (Long Division Method) 2 3 (भागफल = 23) 2 5 . 29 - 4 43 1 29 - 1 29 0 (शेषफल) • दाईं ओर से 2-2 के जोड़े (बार) लगाएँ • भाजक को दोगुना कर नया अंक जोड़ें √529 = 23 (पूर्ण वर्ग) घटाने की संख्या = शेषफल | जोड़ने की संख्या = (k+1)² − N

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
  1. किसी संख्या को उसी से गुणा करने पर प्राप्त संख्या को उस संख्या का वर्ग (Square) कहते हैं (m = n²)।
मुख्य बिंदु 2
  1. पूर्ण वर्ग संख्या की इकाई का अंक केवल 0, 1, 4, 5, 6 या 9 ही हो सकता है; 2, 3, 7 या 8 कभी नहीं हो सकता।
मुख्य बिंदु 3
  1. किसी पूर्ण वर्ग संख्या के अंत में शून्यों की संख्या सदैव सम (Even) होती है।
मुख्य बिंदु 4
  1. सम संख्या का वर्ग सदैव सम तथा विषम संख्या का वर्ग सदैव विषम होता है।
मुख्य बिंदु 5
  1. प्रथम n विषम प्राकृत संख्याओं का योग n² के बराबर होता है [1 + 3 + ... + (2n - 1) = n²]।
मुख्य बिंदु 6
  1. दो क्रमागत वर्ग संख्याओं n² और (n + 1)² के बीच 2n अ-वर्ग संख्याएँ स्थित होती हैं।
मुख्य बिंदु 7
  1. किसी प्राकृत संख्या m > 1 के लिए (2m, m² - 1, m² + 1) एक पाइथागोरस त्रिक बनाते हैं।
मुख्य बिंदु 8
  1. वर्गमूल (√) वर्ग करने की प्रतिलोम संक्रिया है; इसे बार-बार घटाने, अभाज्य गुणनखंडन तथा दीर्घ भाग विधि से निकाला जाता है।
मुख्य बिंदु 9
  1. बड़ी संख्याओं तथा दशमलव संख्याओं का वर्गमूल ज्ञात करने के लिए दीर्घ भाग विधि सर्वाधिक उपयुक्त है।
मुख्य बिंदु 10
  1. किसी संख्या को पूर्ण वर्ग बनाने के लिए भाग विधि में प्राप्त शेषफल को घटाया जाता है, अथवा [(k + 1)² - N] को जोड़ा जाता है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
क्या संख्या 1057 एक पूर्ण वर्ग संख्या हो सकती है? कारण सहित बताइए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: नहीं, 1057 पूर्ण वर्ग संख्या नहीं हो सकती क्योंकि इसका इकाई अंक 7 है।
पूर्ण वर्ग संख्या का इकाई अंक केवल 0, 1, 4, 5, 6 या 9 ही हो सकता है; 2, 3, 7 या 8 नहीं।
2
बिना जोड़े योगफल ज्ञात कीजिए: 1 + 3 + 5 + 7 + 9 + 11 + 13 + 15 + 17 + 19।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: यहाँ प्रथम 10 विषम प्राकृत संख्याएँ हैं। अतः योग = 10² = 100।
सूत्र: प्रथम n विषम संख्याओं का योग = n²।
3
संख्याओं 15² और 16² के बीच कितनी प्राकृत संख्याएँ स्थित हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: 2 × 15 = 30 संख्याएँ।
सूत्र: n² और (n + 1)² के बीच 2n अ-वर्ग प्राकृत संख्याएँ होती हैं।
4
संख्या 144 का वर्गमूल अभाज्य गुणनखंडन विधि से क्या होगा?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: 144 = (2 × 2) × (2 × 2) × (3 × 3) ⇒ √144 = 2 × 2 × 3 = 12।
समान अभाज्य गुणनखंडों के युग्मों में से एक-एक गुणनखंड लेकर गुणा किया जाता है।
5
एक पाइथागोरस त्रिक लिखिए जिसका एक सदस्य 14 है।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: 2m = 14 ⇒ m = 7।\nm² - 1 = 7² - 1 = 49 - 1 = 48।\nm² + 1 = 7² + 1 = 49 + 1 = 50।\nअतः त्रिक (14, 48, 50) है।
जाँच: 14² + 48² = 196 + 2304 = 2500 = 50²।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
अभ्यास के लिए तैयार?

ऑनलाइन CBT टेस्ट देकर तैयारी का मूल्यांकन करें

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