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CBSE • कक्षा 8 • Science • अध्याय 10
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

Light: Mirrors and Lenses

केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) एवं NCERT पाठ्यक्रम पर आधारित कक्षा 8 विज्ञान का अंतिम एवं सर्वाधिक महत्वपूर्ण तेरहवाँ अध्याय "प्रकाश" (Light) प्रकाशिकी (Optics) और मानव संवेदी दृष्टि तंत्र का संपूर्ण वैज्ञानिक विवेचन प्रस्तुत करता है। हम अपने चारों ओर के सुंदर संसार, रंगों, वृक्षों, पहाड़ों और पुस्तकों को प्रकाश के माध्यम से ही देख पाते हैं। इस अध्याय में प्रकाश का परावर्तन (Reflection of Light), परावर्तन के दो सार्वभौमिक नियम (आपतन कोण = परावर्तन कोण, $\angle i = \angle r$), समतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब निर्माण के अभिलक्षण, नियमित बनाम विसरित परावर्तन (Regular vs Diffused Reflection), बहु-प्रतिबिंब (Multiple Reflections), कैलिडोस्कोप (बहुमूर्तिदर्शी) एवं पेरिस्कोप (परिदर्शी), सूर्य के श्वेत प्रकाश का विक्षेपण (Dispersion into 7 Colors - VIBGYOR), मानव नेत्र (Human Eye) की सूक्ष्म आंतरिक संरचना (कॉर्निया, परितारिका, पुतली, लेंस, रेटिना की शलाकाएँ व शंकु, अंध बिंदु), दृष्टि-स्थायित्व (Persistence of Vision), दृष्टि दोष (निकट व दूर दृष्टि दोष, मोतियाबिंद), नेत्रों की वैज्ञानिक देखभाल तथा दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए वरदान ब्रेल प्रणाली (Braille System) का सांगोपांग व प्रामाणिक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।

👁️ क्या आपने कभी सोचा है कि जब आप शीशे के सामने खड़े होते हैं, तो दायाँ हाथ बायाँ क्यों दिखता है?

क्या आपने कभी गौर किया है कि सिनेमा हॉल में जब कोई फिल्म चलती है, तो परदे पर वास्तव में कोई गतिशील वीडियो नहीं होता, बल्कि 1 सेकंड में 24 स्थिर तस्वीरें हमारी आँखों के सामने से गुजारी जाती हैं और हमारा दिमाग उन्हें एक जीवंत गति मान लेता है? मोर के पंखों और साबुन के बुलबुलों में इंद्रधनुषी रंग कहाँ से आते हैं? उल्लू घने अंधेरे में भी चूहों का शिकार कैसे कर लेता है, जबकि दिन के उजाले में उसे ठीक से क्यों नहीं दिखता? और लुई ब्रेल ने केवल 6 उभरे हुए बिंदुओं के सहारे दृष्टिबाधित लोगों के लिए ज्ञान के सारे द्वार कैसे खोल दिए? आइए, प्रकाश और दृष्टि की इस जादुई दुनिया के वैज्ञानिक रहस्यों को विस्तार से समझें!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

प्रकाश विज्ञान आधुनिक लेजर तकनीक, ऑप्टिकल फाइबर संचार, खगोलीय दूरबीनों, कैमरों और नेत्र शल्य चिकित्सा (मोतियाबिंद व लेसिक सर्जरी) का आधार है। आज के डिजिटल युग में कंप्यूटर, स्मार्टफोन और टीवी स्क्रीन के अत्यधिक उपयोग से छात्रों की आँखों पर भारी तनाव पड़ रहा है। नेत्र सुरक्षा, सही रोशनी में अध्ययन, संतुलित पोषण (विटामिन A) तथा दृष्टिहीनों के प्रति मानवीय संवेदना व ब्रेल लिपि की समझ हर जिम्मेदार नागरिक के लिए अपरिहार्य है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • प्रकाश सरल रेखा में गमन करता है (ऋजुरेखीय संचरण)।
  • दीप्त वस्तुएँ (सूर्य, दीपक) तथा अदीप्त वस्तुएँ (चंद्रमा, मेज, पुस्तक) की समझ।
  • दर्पण द्वारा चेहरा देखने का दैनिक अनुभव।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • प्रकाश के परावर्तन के दोनों नियमों को रेखाचित्र द्वारा सिद्ध कर आपतन कोण व परावर्तन कोण की गणना कर सकेंगे।
  • नियमित (दर्पण) तथा विसरित (खुरदरे पृष्ठ) परावर्तन में वैज्ञानिक अंतर स्पष्ट कर सकेंगे।
  • कैलिडोस्कोप और पेरिस्कोप की रचना तथा बहु-प्रतिबिंबों की संख्या ($n = 360^\circ/\theta - 1$) की गणना कर सकेंगे।
  • मानव नेत्र के मुख्य भागों (कॉर्निया, आइरिस, पुतली, लेंस, रेटिना, अंध बिंदु) की कार्यप्रणाली का सचित्र वर्णन कर सकेंगे।
  • दृष्टि-स्थायित्व (Persistence of Vision: 1/16 s) के सिद्धांत पर चलचित्र (Cinematography) का कार्य सिद्धांत समझा सकेंगे।
  • नेत्रों की देखभाल के नियम तथा ब्रेल लिपि (Braille System) के 63 बिंदु-पैटर्नों का महत्व बता सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. प्रकाश का परावर्तन एवं इसके सार्...
2 2. नियमित बनाम विसरित परावर्तन एवं...
3 3. मानव नेत्र (Human Eye): संरचना,...
4 4. दृष्टि दोष, नेत्र सुरक्षा एवं ब्...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. प्रकाश का परावर्तन एवं इसके सार्वभौमिक नियम

जब प्रकाश की किरण किसी चमकदार या पॉलिशदार पृष्ठ (जैसे समतल दर्पण) पर गिरती है, तो वह उसी माध्यम में एक निश्चित दिशा में वापस लौट जाती है। प्रकाश के किसी पृष्ठ से टकराकर वापस लौटने की इस परिघटना को प्रकाश का परावर्तन (Reflection of Light) कहते हैं।

परावर्तन से संबंधित महत्वपूर्ण परिभाषाएँ:

  • आपतित किरण (Incident Ray): पृष्ठ पर पड़ने वाली प्रकाश की किरण।
  • आपतन बिंदु (Point of Incidence): पृष्ठ का वह बिंदु जिस पर आपतित किरण टकराती है।
  • परावर्तित किरण (Reflected Ray): पृष्ठ से टकराकर वापस जाने वाली प्रकाश की किरण।
  • अभिलंब (Normal): आपतन बिंदु पर पृष्ठ के लम्बवत खींची गई काल्पनिक रेखा ($90^\circ$ का कोण)।
  • आपतन कोण ($\angle i$): आपतित किरण और अभिलंब के मध्य बना कोण।
  • परावर्तन कोण ($\angle r$): परावर्तित किरण और अभिलंब के मध्य बना कोण।

प्रकाश के परावर्तन के दो सार्वभौमिक नियम (Laws of Reflection):

  1. प्रथम नियम: आपतन कोण ($\angle i$) सदैव परावर्तन कोण ($\angle r$) के ठीक बराबर होता है: $$\angle i = \angle r$$ (यदि आपतन कोण $45^\circ$ है, तो परावर्तन कोण भी अनिवार्यतः $45^\circ$ ही होगा)।
  2. द्वितीय नियम: आपतित किरण, आपतन बिंदु पर अभिलंब तथा परावर्तित किरण—ये तीनों सदैव एक ही तल (Same Plane) में स्थित होते हैं।

समतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिंब के अभिलक्षण:

  • प्रतिबिंब सदैव आभासी (Virtual) तथा सीधा (Erect) होता है (इसे परदे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता)।
  • प्रतिबिंब का आकार वस्तु (बिंब) के आकार के ठीक बराबर होता है।
  • प्रतिबिंब दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है जितनी दूरी पर वस्तु दर्पण के आगे रखी होती है।
  • पार्श्व परिवर्तन (Lateral Inversion): वस्तु का दायाँ भाग प्रतिबिंब में बायाँ तथा बायाँ भाग दायाँ दिखाई देता है। इसी कारण एम्बुलेंस (AMBULANCE) गाड़ी पर उल्टे अक्षरों में लिखा जाता है ताकि आगे चल रहे वाहन के रियर-व्यू मिरर में वह सीधा पढ़ा जा सके।

2. नियमित बनाम विसरित परावर्तन एवं बहु-प्रतिबिंब

A. नियमित बनाम विसरित परावर्तन:

तुलना का आधार नियमित परावर्तन (Regular Reflection) विसरित / अनियमित परावर्तन (Diffused)
पृष्ठ की प्रकृति पूर्णतः चिकना व पॉलिशदार पृष्ठ (जैसे समतल दर्पण, शांत जल, चमचमाती स्टील प्लेट)। खुरदरा या असमतल पृष्ठ (जैसे दीवार, लकड़ी की मेज, पुस्तक का पन्ना, कार्डबोर्ड)।
परावर्तित किरणें समांतर आपतित किरणें परावर्तन के पश्चात भी परस्पर समांतर रहती हैं। समांतर आपतित किरणें विभिन्न दिशाओं में बिखर (विसरित हो) जाती हैं।
प्रतिबिंब निर्माण सुस्पष्ट व चमकीला प्रतिबिंब बनता है। कोई प्रतिबिंब नहीं बनता; वस्तु सभी दिशाओं से केवल दिखाई देती है।
परावर्तन के नियम परावर्तन के नियमों का पूर्ण पालन होता है। प्रत्येक व्यक्तिगत बिंदु पर परावर्तन के नियमों का पालन होता है, परंतु पृष्ठ के असमतल होने से किरणें बिखरती हैं।

B. बहु-प्रतिबिंब (Multiple Reflections) एवं प्रकाशिकी यंत्र:

जब दो समतल दर्पणों को एक निश्चित कोण ($\theta$) पर झुकाकर रखा जाता है, तो एक दर्पण से बना प्रतिबिंब दूसरे दर्पण के लिए वस्तु का कार्य करता है, जिससे अनेक प्रतिबिंब बनते हैं:

  • प्रतिबिंबों की संख्या का सूत्र: $$n = \frac{360^\circ}{\theta} - 1$$ (यदि $\theta = 90^\circ$, तो $n = \frac{360}{90} - 1 = 4 - 1 = 3$ प्रतिबिंब; यदि दोनों दर्पण परस्पर समांतर ($\theta = 0^\circ$) रखे जाएँ, तो अनंत ($\infty$) प्रतिबिंब बनते हैं, जैसा नाई की दुकान में होता है)।
  • बहुमूर्तिदर्शी (कैलिडोस्कोप / Kaleidoscope): तीन आयताकार समतल दर्पणों को $60^\circ$ के कोण पर जोड़कर एक त्रिभुजाकार नली बनाई जाती है। इसके एक सिरे पर रंगीन चूड़ियों के टुकड़े रखे जाते हैं। बहु-परावर्तन के कारण इसमें अत्यंत सुंदर, सममित व अनूठे पैटर्न बनते हैं। वस्त्र व वॉलपेपर डिजाइनर नए डिजाइनों की प्रेरणा के लिए इसका उपयोग करते हैं।
  • परिदर्शी (पेरिस्कोप / Periscope): इसमें एक नली के दोनों कोनों पर दो समतल दर्पण परस्पर समांतर $45^\circ$ के कोण पर लगाए जाते हैं। इसका उपयोग पनडुब्बियों (Submarines) में जलमग्न रहकर सतह के जहाजों को देखने तथा सेना के बंकरों में छिपकर शत्रुओं पर नजर रखने में होता है।

3. मानव नेत्र (Human Eye): संरचना, कार्यप्रणाली एवं दृष्टि-स्थायित्व

मानव नेत्र लगभग गोलाकार संरचना वाला एक अत्यंत परिष्कृत जैव-ऑप्टिकल कैमरा है। इसके मुख्य संरचनात्मक घटक निम्नलिखित हैं:

1. कॉर्निया (स्वच्छ मंडल):

नेत्र का सबसे बाहरी पारदर्शी उभरा हुआ भाग। यह प्रकाश को नेत्र में प्रवेश करने देता है तथा प्रकाश किरणों का अधिकांश अपवर्तन इसी तल पर होता है।

2. आइरिस (परितारिका):

कॉर्निया के पीछे गहरा पेशीय डायफ्राम जो आँख के विशिष्ट रंग (काली, भूरी, नीली, हरी) का निर्धारण करता है। यह पुतली के आकार को नियंत्रित करता है।

3. पुतली (Pupil):

आइरिस के केंद्र में स्थित छोटा छिद्र। मंद प्रकाश में पुतली बड़ी हो जाती है ताकि अधिक प्रकाश अंदर जाए; तीव्र धूप में यह सिकुड़कर छोटी हो जाती है।

4. नेत्र लेंस (Eye Lens):

लचीले रेशेदार जेली जैसे पदार्थ का बना द्वि-उत्तल (Convex) लेंस। पक्ष्माभी पेशियाँ (Ciliary Muscles) इसकी वक्रता बदलकर दूर व पास की वस्तुओं पर फोकस करती हैं।

रेटिना (दृष्टि पटल) एवं प्रकाश-संवेदी कोशिकाएँ:

रेटिना आँख का पिछला पर्दा है जिस पर वस्तु का वास्तविक तथा उल्टा (Real & Inverted) प्रतिबिंब बनता है। रेटिना में लगभग 13 करोड़ प्रकाश-सुग्राही तंत्रिका कोशिकाएँ होती हैं:

  • शलाका कोशिकाएँ (Rods): ये मंद प्रकाश (Dim light) के प्रति अत्यंत संवेदनशील होती हैं। (उल्लू की आँखों में शलाकाएँ अत्यधिक होती हैं, जिससे वह रात में भली-भाँति देख पाता है)।
  • शंकु कोशिकाएँ (Cones): ये तीव्र प्रकाश तथा रंगों (Colors) की पहचान के प्रति संवेदनशील होती हैं। (मुर्गे की आँखों में शंकु अधिक होते हैं, इसलिए वह सूर्योदय होते ही जाग जाता है)।
  • अंध बिंदु (Blind Spot): दृष्टि तंत्रिका (Optic Nerve) और रेटिना की संधि पर कोई प्रकाश-संवेदी कोशिका नहीं होती। इस बिंदु पर पड़ने वाले प्रकाश का कोई संकेत मस्तिष्क को नहीं जाता, अतः इसे अंध बिंदु कहते हैं।

दृष्टि-स्थायित्व (Persistence of Vision):

रेटिना पर बने प्रतिबिंब का प्रभाव वस्तु के हट जाने के तुरंत बाद समाप्त नहीं होता, बल्कि लगभग 1/16 सेकंड तक बना रहता है।

सिनेमा और एनिमेशन का रहस्य: यदि किसी गतिशील वस्तु के स्थिर चित्रों को 16 चित्र प्रति सेकंड से अधिक दर (प्रायः 24 चित्र प्रति सेकंड) पर आँखों के सामने से गुजारा जाए, तो दृष्टि-स्थायित्व के कारण आँख को चित्र निरंतर गति करते हुए प्रतीत होते हैं।

4. दृष्टि दोष, नेत्र सुरक्षा एवं ब्रेल प्रणाली (Braille System)

A. प्रमुख दृष्टि दोष एवं उनका निवारण:

दृष्टि दोष लक्षण वैज्ञानिक निवारण (सुधारात्मक लेंस)
1. निकट दृष्टि दोष (Myopia) पास की वस्तुएँ स्पष्ट दिखाई देती हैं, परंतु दूर की वस्तुएँ धुंधली दिखती हैं। (प्रतिबिंब रेटिना से आगे बनता है)। उचित फोकस दूरी का अवतल लेंस (Concave Lens)।
2. दूर दृष्टि दोष (Hypermetropia) दूर की वस्तुएँ स्पष्ट दिखती हैं, परंतु पास की (पढ़ने की) वस्तुएँ धुंधली दिखती हैं। (प्रतिबिंब रेटिना के पीछे बनता है)। उचित फोकस दूरी का उत्तल लेंस (Convex Lens)।
3. मोतियाबिंद (Cataract) वृद्धावस्था में नेत्र का क्रिस्टलीय लेंस दूधिया या धुंधला हो जाता है, जिससे दृष्टि मंद हो जाती है। शल्य चिकित्सा (Surgery) द्वारा अपारदर्शी लेंस को हटाकर कृत्रिम लेंस (IOL) लगाना।

B. नेत्रों की वैज्ञानिक देखभाल:

  • सामान्य दृष्टि के लिए पढ़ने की न्यूनतम सुस्पष्ट दूरी लगभग 25 सेमी होनी चाहिए। बहुत पास या बहुत दूर रखकर न पढ़ें।
  • न तो बहुत मंद प्रकाश में और न ही अत्यधिक प्रखर सूर्य के प्रकाश/लेजर की ओर सीधे देखें।
  • आँखों में धूल या कचरा जाने पर आँखों को मलें नहीं, बल्कि स्वच्छ ठंडे पानी से धोएँ।
  • संतुलित आहार: भोजन में विटामिन A की कमी से रतौंधी (Night Blindness) हो जाती है। अतः गाजर, पपीता, हरी पत्तेदार सब्जियाँ (पालक), दूध, मक्खन और आम का नियमित सेवन करें।

दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए ब्रेल प्रणाली (Braille System):

फ्रांसीसी विद्वान लुई ब्रेल (Louis Braille) ने सन् 1821 में दृष्टिबाधित व्यक्तियों के पढ़ने-लिखने के लिए एक अनूठी स्पर्श-आधारित लिपि का आविष्कार किया, जिसे 1932 में अंतर्राष्ट्रीय मान्यता मिली:

  • ब्रेल प्रणाली में कुल 63 बिंदु-पैटर्न (Dot Patterns) या वर्ण होते हैं।
  • प्रत्येक वर्ण एक सेल में 6 उभरे हुए बिंदुओं (6 Dots) के विन्यास से बना होता है, जो दो ऊर्ध्वाधर पंक्तियों में 3-3 के क्रम में व्यवस्थित होते हैं।
  • दृष्टिबाधित व्यक्ति इन उभरे हुए बिंदुओं पर उंगलियाँ फेरकर अत्यंत तीव्र गति से साहित्य, गणितीय संकेत और वैज्ञानिक पाठ पढ़ सकते हैं।

महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र, अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

परावर्तन का प्रथम नियम (First Law of Reflection)
∠i = ∠r
आपतन कोण (i) सदैव परावर्तन कोण (r) के बराबर होता है।
झुके हुए दो दर्पणों द्वारा बने प्रतिबिंबों की संख्या (Number of Images in Inclined Mirrors)
n = (360° / θ) - 1
जहाँ θ = दर्पणों के बीच का कोण। यदि θ = 60° हो, तो n = (360/60) - 1 = 6 - 1 = 5 प्रतिबिंब।
सुस्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी (Least Distance of Distinct Vision)
D = 25 cm
एक सामान्य स्वस्थ मानव नेत्र 25 सेमी से लेकर अनंत (Infinity) तक की वस्तुओं को स्पष्ट देख सकता है।
दृष्टि-स्थायित्व समयावधि (Persistence of Vision Duration)
t = 1/16 second
रेटिना पर प्रतिबिंब का प्रभाव 1/16 सेकंड तक बना रहता है। सिनेमा में 24 फ्रेम/सेकंड की गति उपयोग होती है।
ब्रेल सेल संरचना (Braille Cell Structure)
6 Dots per Cell (2 columns × 3 rows) ⇒ 63 Dot Patterns
लुई ब्रेल (1821) द्वारा विकसित 63 कोड अक्षरों, विराम चिह्नों और गणितीय प्रतीकों का निरूपण करते हैं।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
एक प्रकाश किरण समतल दर्पण के पृष्ठ से $30^\circ$ का कोण बनाते हुए आपतित होती है। परावर्तन कोण ($\angle r$) का मान ज्ञात कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:\nसावधानी: यहाँ दर्पण पृष्ठ से कोण दिया है, न कि अभिलंब से!\nदर्पण पृष्ठ और अभिलंब के बीच कोण = $90^\circ$\n\nअतः आपतन कोण ($\angle i$):\n$$\angle i = 90^\circ - 30^\circ = 60^\circ$$\n\nपरावर्तन के प्रथम नियमानुसार:\n$$\text{परावर्तन कोण } (\angle r) = \text{आपतन कोण } (\angle i)$$\n$$\angle r = 60^\circ$$\n\nउत्तर: परावर्तन कोण का मान $60^\circ$ है।
उदाहरण 2
दो समतल दर्पण एक-दूसरे से $90^\circ$ के कोण पर रखे हैं। उनके बीच रखी एक मोमबत्ती के कुल कितने प्रतिबिंब दिखाई देंगे?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:\nदिया गया है:\nदर्पणों के बीच का कोण ($\theta$) = $90^\circ$\n\nप्रतिबिंबों की संख्या का सूत्र:\n$$n = \frac{360^\circ}{\theta} - 1$$\n$$n = \frac{360^\circ}{90^\circ} - 1 = 4 - 1 = 3$$\n\nउत्तर: मोमबत्ती के कुल 3 प्रतिबिंब दिखाई देंगे।
उदाहरण 3
एक व्यक्ति समतल दर्पण से 3 मीटर की दूरी पर खड़ा है। व्यक्ति और उसके प्रतिबिंब के बीच की दूरी कितनी होगी? यदि वह दर्पण की ओर 1 मीटर आगे बढ़े, तो अब उसके और प्रतिबिंब के बीच की दूरी क्या होगी?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:\nस्थिति 1:\nव्यक्ति की दर्पण से दूरी = 3 m\nसमतल दर्पण में प्रतिबिंब दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है = 3 m\nअतः व्यक्ति और प्रतिबिंब के बीच कुल दूरी = $3 + 3 = 6 \text{ मीटर}$।\n\nस्थिति 2:\nजब व्यक्ति 1 मीटर आगे बढ़ता है:\nअब दर्पण से दूरी = $3 - 1 = 2 \text{ मीटर}$\nप्रतिबिंब की दर्पण से दूरी = 2 m\nअब व्यक्ति और प्रतिबिंब के बीच कुल दूरी = $2 + 2 = 4 \text{ मीटर}$।\n\nउत्तर: प्रारंभिक दूरी 6 मीटर तथा नई दूरी 4 मीटर होगी।
उदाहरण 4
मंद प्रकाश में कमरे में प्रवेश करने पर हमें वस्तुएँ तुरंत स्पष्ट क्यों नहीं दिखाई देतीं, परंतु कुछ सेकंड बाद स्पष्ट दिखने लगती हैं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:\n1. तीव्र प्रकाश में आँख की पुतली सिकुड़कर छोटी हो जाती है ताकि आँख में सीमित प्रकाश ही प्रवेश करे।\n2. जब हम अचानक मंद प्रकाश वाले कमरे में जाते हैं, तो छोटी पुतली से पर्याप्त प्रकाश रेटिना तक नहीं पहुँच पाता, जिससे कुछ सेकंड तक अंधेरा लगता है।\n3. कुछ ही सेकंडों में आइरिस की पेशियाँ पुतली को फैलाकर बड़ा कर देती हैं, जिससे अधिक प्रकाश अंदर जाता है और साथ ही रेटिना की शलाका कोशिकाएँ (Rods) सक्रिय हो जाती हैं।\n4. इसके बाद वस्तुएँ स्पष्ट दिखाई देने लगती हैं।
उदाहरण 5
खुरदरे पृष्ठ (जैसे दीवार या मेज) से परावर्तन के पश्चात कोई प्रतिबिंब क्यों नहीं बनता, जबकि वह प्रकाश का परावर्तन करता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:\n1. खुरदरे पृष्ठ पर सूक्ष्म स्तर पर असंख्य उभार और गड्ढे होते हैं, जिससे पृष्ठ के विभिन्न बिंदुओं पर अभिलंब अलग-अलग दिशाओं में झुके होते हैं।\n2. जब समांतर प्रकाश किरण पुंज खुरदरे पृष्ठ पर गिरता है, तो प्रत्येक किरण अपने स्थानीय अभिलंब के अनुसार परावर्तित होकर भिन्न-भिन्न दिशाओं में बिखर (विसरित हो) जाती है।\n3. इस विसरित परावर्तन (Diffused Reflection) के कारण परावर्तित किरणें किसी एक निश्चित बिंदु पर केंद्रित या अपसरित नहीं होतीं, अतः कोई प्रतिबिंब नहीं बनता।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

छात्र अक्सर दर्पण के पृष्ठ से बने कोण को ही आपतन कोण मान लेते हैं।

सही वैज्ञानिक तथ्य

आपतन कोण सदैव आपतित किरण और लम्बवत अभिलंब (Normal) के बीच का कोण होता है, पृष्ठ से बना कोण नहीं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह गलत धारणा कि विसरित (अनियमित) परावर्तन में परावर्तन के नियमों की विफलता होती है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

परावर्तन का नियम (∠i = ∠r) प्रत्येक बिंदु पर शत-प्रतिशत लागू होता है। पृष्ठ की अनियमित बनावट के कारण विभिन्न बिंदुओं के अभिलंब अलग दिशाओं में होते हैं, जिससे किरणें बिखरती हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

निकट दृष्टि दोष में यह सोचना कि व्यक्ति को पास की वस्तुएँ नहीं दिखतीं।

सही वैज्ञानिक तथ्य

निकट दृष्टि दोष (Myopia) में पास की वस्तुएँ तो बिल्कुल स्पष्ट दिखती हैं, परंतु दूर की वस्तुएँ धुंधली दिखाई देती हैं।

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

प्रकाश (Light): परावर्तन के नियम, मानव नेत्र एवं ब्रेल लिपि A. परावर्तन के नियम (∠i = ∠r) समतल दर्पण (Plane Mirror) अभिलंब (N) आपतित किरण परावर्तित किरण ∠i ∠r ∠i = ∠r (सदैव बराबर) B. मानव नेत्र (Human Eye) कॉर्निया आइरिस पुतली लेंस रेटिना दृष्टि तंत्रिका दृष्टि-स्थायित्व = 1/16 सेकंड C. ब्रेल लिपि (Braille System) 6-बिंदु सेल (6-Dot Cell) 1 4 2 5 3 6 लुई ब्रेल (Louis Braille, 1821) कुल 63 उभरे बिंदु-पैटर्न स्पर्श-आधारित ज्ञान प्रणाली

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
  1. प्रकाश के किसी चिकने व पॉलिशदार पृष्ठ से टकराकर उसी माध्यम में वापस लौटने को परावर्तन कहते हैं।
मुख्य बिंदु 2
  1. परावर्तन के नियम: (i) आपतन कोण सदैव परावर्तन कोण के बराबर होता है (∠i = ∠r)। (ii) आपतित किरण, अभिलंब तथा परावर्तित किरण एक ही तल में होते हैं।
मुख्य बिंदु 3
  1. समतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिंब आभासी, सीधा, बिंब के समान आकार का तथा पार्श्व परिवर्तित (दायाँ-बायाँ उल्टा) होता है।
मुख्य बिंदु 4
  1. नियमित परावर्तन चिकने पृष्ठ से होता है जिससे प्रतिबिंब बनता है; विसरित परावर्तन खुरदरे पृष्ठ से होता है जिससे प्रकाश सभी दिशाओं में फैलता है।
मुख्य बिंदु 5
  1. दो झुके हुए दर्पणों के बीच बनने वाले प्रतिबिंबों की संख्या n = (360°/θ) - 1 होती है; समांतर दर्पणों में अनंत प्रतिबिंब बनते हैं।
मुख्य बिंदु 6
  1. कैलिडोस्कोप में 60° पर 3 समतल दर्पण रंग-बिरंगे सुंदर पैटर्न बनाते हैं; पेरिस्कोप में 45° पर 2 दर्पण पनडुब्बी में दृष्टि हेतु प्रयुक्त होते हैं।
मुख्य बिंदु 7
  1. मानव नेत्र में प्रकाश कॉर्निया से प्रवेश करता है, आइरिस पुतली का आकार नियंत्रित करती है, लेंस रेटिना पर वास्तविक उल्टा प्रतिबिंब बनाता है।
मुख्य बिंदु 8
  1. रेटिना में शलाका कोशिकाएँ मंद प्रकाश के लिए तथा शंकु कोशिकाएँ तीव्र प्रकाश व रंगों की पहचान के लिए संवेदनशील होती हैं।
मुख्य बिंदु 9
  1. दृष्टि-स्थायित्व (1/16 सेकंड) के कारण 24 चित्र प्रति सेकंड की दर से चलने पर चलचित्र गतिमान प्रतीत होते हैं।
मुख्य बिंदु 10
  1. दृष्टि दोषों में निकट दृष्टि हेतु अवतल लेंस तथा दूर दृष्टि हेतु उत्तल लेंस प्रयुक्त होता है; दृष्टिबाधितों के लिए 63 बिंदु-पैटर्नों वाली ब्रेल लिपि वरदान है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
परावर्तन के दो मौलिक नियम क्या हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:
  1. आपतन कोण सदैव परावर्तन कोण के बराबर होता है (∠i = ∠r)।\n2. आपतित किरण, आपतन बिंदु पर अभिलंब तथा परावर्तित किरण—ये तीनों एक ही तल में स्थित होते हैं।

यह नियम समतल, गोलीय तथा किसी भी अन्य परावर्तक पृष्ठ के लिए सार्वभौमिक रूप से सत्य है।
2
समतल दर्पण में बनने वाले पार्श्व परिवर्तन (Lateral Inversion) का क्या अर्थ है? इसका एक व्यावहारिक उदाहरण दें।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: वस्तु का दायाँ भाग दर्पण में बायाँ तथा बायाँ भाग दायाँ दिखाई देने की घटना को पार्श्व परिवर्तन कहते हैं।\nउदाहरण: एम्बुलेंस गाड़ियों पर AMBULANCE शब्द उल्टे अक्षरों में लिखा जाता है ताकि आगे चलने वाले चालक के शीशे में वह सीधा पढ़ा जा सके।
समतल दर्पण में आगे-पीछे का परावर्तन होता है, जिससे बायाँ-दायाँ उलट जाता है।
3
सिनेमा के चलचित्र (Movies) वास्तव में स्थिर चित्र होते हुए भी चलते हुए क्यों दिखाई देते हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: मानव नेत्र के दृष्टि-स्थायित्व (Persistence of Vision: 1/16 सेकंड) के कारण।
जब 24 स्थिर चित्र प्रति सेकंड की दर से आँखों के आगे से गुजारे जाते हैं, तो मस्तिष्क पिछले चित्र का प्रभाव समाप्त होने से पहले अगला चित्र ग्रहण कर लेता है, जिससे गति का आभास होता है।
4
उल्लू रात्रि में अत्यंत स्पष्ट कैसे देख लेता है, जबकि दिन में उसे ठीक से क्यों नहीं दिखता?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: उल्लू की आँखों में बड़ी पुतली, बड़ा कॉर्निया तथा रेटिना में अत्यधिक संख्या में शलाका कोशिकाएँ (Rods) होती हैं जो मंद प्रकाश के प्रति अत्यंत सुग्राही हैं।
उसकी आँखों में शंकु कोशिकाएँ (Cones) बहुत कम होती हैं, इसलिए वह दिन के तीव्र प्रकाश और रंगों को नहीं देख पाता।
5
ब्रेल प्रणाली (Braille System) क्या है और इसमें कितने बिंदु-पैटर्न होते हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: ब्रेल प्रणाली दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए स्पर्श-आधारित पठन-पाठन की विशेष लिपि है। इसमें कुल 63 उभरे हुए बिंदु-पैटर्न (Dot Patterns) होते हैं।
प्रत्येक ब्रेल सेल में 6 बिंदु (2 पंक्तियाँ × 3 कॉलम) होते हैं, जिन्हें उंगलियों से छूकर अक्षर, संख्या और संकेत पढ़े जाते हैं।
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