जब प्रकाश की किरण किसी चमकदार या पॉलिशदार पृष्ठ (जैसे समतल दर्पण) पर गिरती है, तो वह उसी माध्यम में एक निश्चित दिशा में वापस लौट जाती है। प्रकाश के किसी पृष्ठ से टकराकर वापस लौटने की इस परिघटना को प्रकाश का परावर्तन (Reflection of Light) कहते हैं।
परावर्तन से संबंधित महत्वपूर्ण परिभाषाएँ:
- आपतित किरण (Incident Ray): पृष्ठ पर पड़ने वाली प्रकाश की किरण।
- आपतन बिंदु (Point of Incidence): पृष्ठ का वह बिंदु जिस पर आपतित किरण टकराती है।
- परावर्तित किरण (Reflected Ray): पृष्ठ से टकराकर वापस जाने वाली प्रकाश की किरण।
- अभिलंब (Normal): आपतन बिंदु पर पृष्ठ के लम्बवत खींची गई काल्पनिक रेखा ($90^\circ$ का कोण)।
- आपतन कोण ($\angle i$): आपतित किरण और अभिलंब के मध्य बना कोण।
- परावर्तन कोण ($\angle r$): परावर्तित किरण और अभिलंब के मध्य बना कोण।
प्रकाश के परावर्तन के दो सार्वभौमिक नियम (Laws of Reflection):
- प्रथम नियम: आपतन कोण ($\angle i$) सदैव परावर्तन कोण ($\angle r$) के ठीक बराबर होता है: $$\angle i = \angle r$$ (यदि आपतन कोण $45^\circ$ है, तो परावर्तन कोण भी अनिवार्यतः $45^\circ$ ही होगा)।
- द्वितीय नियम: आपतित किरण, आपतन बिंदु पर अभिलंब तथा परावर्तित किरण—ये तीनों सदैव एक ही तल (Same Plane) में स्थित होते हैं।
समतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिंब के अभिलक्षण:
- प्रतिबिंब सदैव आभासी (Virtual) तथा सीधा (Erect) होता है (इसे परदे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता)।
- प्रतिबिंब का आकार वस्तु (बिंब) के आकार के ठीक बराबर होता है।
- प्रतिबिंब दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है जितनी दूरी पर वस्तु दर्पण के आगे रखी होती है।
- पार्श्व परिवर्तन (Lateral Inversion): वस्तु का दायाँ भाग प्रतिबिंब में बायाँ तथा बायाँ भाग दायाँ दिखाई देता है। इसी कारण एम्बुलेंस (AMBULANCE) गाड़ी पर उल्टे अक्षरों में लिखा जाता है ताकि आगे चल रहे वाहन के रियर-व्यू मिरर में वह सीधा पढ़ा जा सके।