1.1 समुच्चय की परिभाषा एवं गेऑर्ग कैंटर की ऐतिहासिक क्रांति
दैनिक बोलचाल में हम विभिन्न प्रकार के समूहों के लिए अलग-अलग शब्दों का प्रयोग करते हैं: जैसे पक्षियों का झुंड, ताश की गड्डी, खिलाड़ियों की टीम, अथवा चाबियों का गुच्छा। गणित में हमें एक ऐसे सार्वभौमिक, तार्किक और सटीक ढांचे की आवश्यकता होती है जो बिना किसी व्यक्तिगत पक्षपात के काम करे। उस बुनियादी गणितीय अवधारणा को समुच्चय (Set) कहा जाता है।
समुच्चय सिद्धांत की यह मूलभूत नींव 1870 के दशक में प्रसिद्ध जर्मन गणितज्ञ गेऑर्ग कैंटर (Georg Cantor, 1845–1918) द्वारा रखी गई थी। इस परिभाषा के दो अपरिहार्य स्तंभ हैं: संग्रह की वस्तुएं भिन्न (Distinct) होनी चाहिए (अर्थात कोई पुनरावृत्ति नहीं) और संग्रह पूर्णतः सुपरिभाषित (Well-defined) होना चाहिए।
1.2 "सुपरिभाषित" की कसौटी (वस्तुनिष्ठ नियम बनाम व्यक्तिगत राय)
किसी संग्रह को सुपरिभाषित (Well-defined) तब कहा जाता है जब हमारे पास एक ऐसा निश्चित, वस्तुनिष्ठ और असंदिग्ध नियम उपलब्ध हो, जिसके आधार पर बिना किसी संशय के यह तय किया जा सके कि कोई दी गई वस्तु उस संग्रह की सदस्य है अथवा नहीं। इसमें व्यक्तिगत पसंद, राय या भावना का कोई स्थान नहीं होता।
1.3 अवयव, नामकरण एवं सदस्यता प्रतीक ($\\in$ और $\\notin$)
समुच्चय का निर्माण करने वाली वस्तुओं को उसके अवयव (Elements) या सदस्य (Members) कहा जाता है।
समुच्चय का नामकरण
समुच्चय को सदैव अंग्रेजी वर्णमाला के बड़े अक्षरों (Capital Letters) से दर्शाया जाता है:
A, B, C, X, Y, Z, V, P
अवयवों का अंकन
अवयवों को अंग्रेजी के छोटे अक्षरों (Small Letters), संख्याओं या प्रतीकों द्वारा मँझले कोष्ठक $\{ \}$ के भीतर लिखा जाता है:
a, b, c, x, 1, 2, 3
सदस्यता प्रतीक (यूनानी अक्षर एप्सिलॉन)
यदि वस्तु $x$ समुच्चय $A$ का अवयव है, तो हम लिखते हैं:
$x \\in A$
(पढ़ा जाता है: '$x$, $A$ का सदस्य है' अथवा '$x$ belongs to $A$')
यदि वस्तु $y$ समुच्चय $A$ का अवयव नहीं है, तो हम लिखते हैं:
$y \\notin A$
(पढ़ा जाता है: '$y$, $A$ का सदस्य नहीं है' अथवा '$y$ does not belong to $A$')
• $e \\in V$ (सत्य, क्योंकि $e$ स्वर है)
• $b \\notin V$ (सत्य, क्योंकि $b$ व्यंजन है, स्वर नहीं)
• $5 \\notin V$ (सत्य, क्योंकि 5 संख्या है, स्वर नहीं)
1.4 समुच्चय निर्माण के दो स्वर्णिम नियम
स्वर्णिम नियम 1: अनावृत्ति का नियम (पुनरावृत्ति वर्जित)
किसी भी समुच्चय में एक अवयव को केवल एक ही बार लिखा जाता है। किसी अवयव को बार-बार दोहराने से समुच्चय का आकार या पहचान नहीं बदलती।
अक्षर: M, A, T, H, E, M, A, T, I, C, S
दोहराए गए अक्षरों (M, A, T) को हटाने पर:
$S = \{M, A, T, H, E, I, C, S\}$
(यहाँ कुल 8 भिन्न अवयव हैं, 11 नहीं!)
स्वर्णिम नियम 2: क्रम अपरिवर्तनीयता का नियम
कोष्ठक के भीतर अवयवों को किसी भी क्रम में लिखा जाए, समुच्चय के स्वरूप और समानता में कोई अंतर नहीं आता।
तब गणितीय रूप से:
$A = B = C$
(क्रम बदलने से समुच्चय की सदस्यता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता!)