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ICSE • कक्षा 6 • Mathematics • अध्याय 8
अनुमानित समय: 45-60 मिनट
प्रगति: अध्ययनरत

अनुपात और समानुपात (Ratio and Proportion)

काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशंस (CISCE) के कक्षा 6 के गणित पाठ्यक्रम में 'अनुपात और समानुपात' का अध्याय तुलनात्मक अंकगणित, वाणिज्यिक गणित और बीजगणितीय प्रतिरूपण की सबसे आधारभूत नींव है। दैनिक जीवन में दो राशियों की तुलना करने की दो मुख्य विधियाँ होती हैं: अंतर द्वारा तुलना और भाग द्वारा तुलना। अंतर द्वारा तुलना घटाव पर आधारित होती है, जो यह बताती है कि एक राशि दूसरी राशि से कितनी अधिक या कम है। यद्यपि यह विधि सरल है, परंतु यह सापेक्ष आकार और पैमाने को प्रकट करने में असमर्थ रहती है। इसके विपरीत, भाग द्वारा तुलना यह निर्धारित करती है कि एक राशि दूसरी राशि का कितना गुना है अथवा उसका कौन सा भिन्न भाग है। समान प्रकार की और एक ही मात्रक (इकाई) में मापी गई दो राशियों के बीच भाग द्वारा इस तुलनात्मक संबंध को 'अनुपात' (Ratio) कहा जाता है। गणितीय रूप से दो राशियों a और b के अनुपात को उनके बीच एक कोलन लगाकर लिखा जाता है, जिसे a : b दर्शाया जाता है तथा 'a अनुपात b' पढ़ा जाता है। इसे साधारण भिन्न a / b के रूप में भी लिखा जा सकता है, जहाँ उत्तरपद b का मान कभी भी शून्य नहीं हो सकता। अनुपात a : b में पहले पद a को 'पूर्वपद' (Antecedent) कहा जाता है, तथा दूसरे पद b को 'उत्तरपद' (Consequent) कहा जाता है। अनुपात के संदर्भ में सबसे महत्वपूर्ण सार्वभौमिक सत्य यह है कि अनुपात एक शुद्ध, मात्रक-हीन संख्या होती है। चूंकि अनुपात एक ही मात्रक में मापी गई दो राशियों का भागफल होता है, अतः अंश और हर के मात्रक परस्पर पूरी तरह कट जाते हैं। इसलिए अनुपात के साथ 'मीटर', 'किलोग्राम' अथवा 'रुपये' जैसे मात्रक लगाना गणितीय रूप से अमान्य है; इसका उत्तर केवल 3 : 4 जैसा विशुद्ध अंक होता है। इसके अतिरिक्त, अनुपात में पदों का क्रम अत्यंत महत्वपूर्ण होता है: a : b का मान b : a के बराबर नहीं होता, जब तक कि a और b दोनों संख्याएँ समान न हों। उदाहरण के लिए, यदि किसी कक्षा में 15 लड़के और 20 लड़कियाँ हैं, तो लड़कों का लड़कियों से अनुपात 15 : 20 (अर्थात 3 : 4) होगा, जबकि लड़कियों का लड़कों से अनुपात 20 : 15 (अर्थात 4 : 3) होगा। क्रम बदलने से तुलना का पूरा अर्थ बदल जाता है। अनुपात स्थापित करने से पूर्व राशियों का सजातीयता नियम (Homogeneity Principle) का पालन करना अनिवार्य है। इसका सीधा अर्थ यह है कि अनुपात केवल एक ही भौतिक गुण (जैसे लंबाई की लंबाई से, द्रव्यमान की द्रव्यमान से) वाली राशियों के बीच ही निकाला जा सकता है। पाँच किलोग्राम और दस मीटर के बीच अनुपात निकालना असंभव है, क्योंकि द्रव्यमान और दूरी दो भिन्न भौतिक विमाएँ हैं। साथ ही, यदि राशियाँ एक ही प्रकार की हों परंतु उनके मात्रक भिन्न हों—जैसे 75 पैसे और 3 रुपये, अथवा 500 मीटर और 2 किलोमीटर—तो अनुपात निकालने से पहले दोनों राशियों को एक ही उभयनिष्ठ मात्रक में बदलना अनिवार्य होता है। 3 रुपये को 300 पैसे में बदलने पर अनुपात 75 पैसे : 300 पैसे बनता है, जो सरल करने पर 1 : 4 प्राप्त होता है। कोई अनुपात अपने सरलतम रूप (या न्यूनतम पदों) में तब कहलाता है जब उसके पूर्वपद और उत्तरपद का महत्तम समापवर्तक (HCF) ठीक 1 हो, अर्थात दोनों सह-अभाज्य पूर्णांक हों। भिन्नों की भांति ही, किसी अनुपात के दोनों पदों को एक ही अशून्य संख्या से गुणा या भाग करने पर तुल्य अनुपात प्राप्त होते हैं। अनुपात का एक प्रमुख व्यावहारिक उपयोग किसी दी गई कुल राशि को निश्चित अनुपात में विभाजित करना है। जब किसी धनराशि, संपत्ति अथवा मिश्रण को दो व्यक्तियों में m : n के अनुपात में बांटना होता है, तो पूरी राशि को (m + n) बराबर भागों में बंटा हुआ माना जाता है। इसके पश्चात पहले व्यक्ति को कुल राशि का m / (m + n) भाग तथा दूसरे व्यक्ति को n / (m + n) भाग प्राप्त होता है। यही नियम तीन अथवा अधिक पदों वाले अनुपातों जैसे a : b : c में भी लागू होता है, जहाँ कुल भागों की संख्या a + b + c होती है। जब दो अलग-अलग अनुपात आपस में मान में बराबर होते हैं, तो उनकी इस समानता को 'समानुपात' (Proportion) कहा जाता है। यदि अनुपात a : b का मान अनुपात c : d के बराबर हो, तो चारों राशियाँ a, b, c, d समानुपाती कहलाती हैं, जिसे a : b :: c : d लिखा जाता है। समानुपात के पहले और चौथे पद (a और d) बाहरी सिरों पर स्थित होते हैं, अतः इन्हें 'बाह्य पद' (Extremes) कहते हैं; जबकि दूसरे और तीसरे पद (b और c) मध्य में स्थित होते हैं, अतः इन्हें 'मध्य पद' (Means) कहते हैं। समानुपात का स्वर्णिम आधारभूत नियम यह है कि 'बाह्य पदों का गुणनफल सदैव मध्य पदों के गुणनफल के बराबर होता है' (a गुणा d बराबर b गुणा c)। यह नियम चार संख्याओं के समानुपाती होने की जांच करने और किसी अज्ञात पद का मान निकालने की अचूक कुंजी है। एक विशेष स्थिति तब उत्पन्न होती है जब तीन राशियाँ a, b, c इस प्रकार संबंधित हों कि a : b बराबर b : c हो; इसे 'सतत समानुपात' (Continued Proportion) कहते हैं। यहाँ मध्य पद b को a और c का 'मध्यानुपाती' (Mean Proportional) कहा जाता है, जहाँ b का वर्ग बराबर ac होता है, अर्थात b बराबर वर्गमूल ac होता है; तथा तीसरे पद c को 'तृतीयानुपाती' (Third Proportional) कहा जाता है, जिसका मान b का वर्ग बटा a होता है। अध्याय का अंतिम महत्वपूर्ण खंड 'एकिक नियम' (The Unitary Method) है। एकिक नियम व्यावहारिक अंकगणित की वह दो-चरणीय विधि है जिसमें पहले भाग देकर 1 इकाई का मान निकाला जाता है, और फिर गुणा करके अभीष्ट संख्या में वस्तुओं का मान ज्ञात किया जाता है। चाहे बाज़ार से सामान खरीदने की गणना हो, वाहन की गति और दूरी का संबंध हो, अथवा मजदूरी की गणना, एकिक नियम छात्रों को त्रुटि-रहित गणना की तार्किक क्षमता प्रदान करता है। कक्षा 6 के स्तर पर अनुपात, समानुपात और एकिक नियम में दक्षता प्राप्त करना छात्रों को प्रतिशत, लाभ-हानि, साधारण ब्याज, रेखागणित और विज्ञान के आगामी अध्यायों के लिए पूर्णतः सशक्त बनाता है।

क्या आपने कभी सोचा है?

जब कोई वास्तुकार किसी विशाल गगनचुंबी इमारत का नक्शा तैयार करता है, जहाँ कागज़ पर एक सेंटीमीटर ज़मीन के दो सौ सेंटीमीटर का प्रतिनिधित्व करता है, या जब कोई रसोइया चार व्यक्तियों की खीर की विधि को चार सौ अतिथियों के बड़े भोज के लिए स्वाद बदले बिना बड़ा करता है, अथवा जब आपका स्मार्टफोन किसी हाई-डेफिनिशन फिल्म को बिना किसी चेहरे को खींचे या विकृत किए सोलह अनुपात नौ के पहलू अनुपात में प्रदर्शित करता है, तब गणित अपनी सबसे सुंदर और व्यावहारिक कला का प्रदर्शन कर रहा होता है: आनुपातिक तर्कणा। दैनिक जीवन में केवल घटाव करके अंतर निकालना हमें यह तो बताता है कि कोई वस्तु दूसरी से कितनी अधिक है, परंतु वह उनके बीच के सापेक्ष संबंध, संतुलन और मापक्रम को पूरी तरह छिपा लेता है। यदि एक चूहे का भार एक किलोग्राम बढ़ जाए और एक हाथी का भार भी एक किलोग्राम बढ़ जाए, तो घटाव के अनुसार दोनों का वजन समान बढ़ा है, परंतु चूहे के शरीर के लिए यह एक क्रांतिकारी बदलाव है जबकि हाथी के लिए नगण्य! सापेक्ष तुलना, निष्पक्ष बंटवारे और संतुलन को वैज्ञानिक रूप से समझने के लिए गणित ने अनुपात और समानुपात की अवधारणाएं विकसित की हैं।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

अनुपात और समानुपात केवल परीक्षा में अंक प्राप्त करने के लिए नहीं हैं; वे भौतिक, तकनीकी और कलात्मक संसार की वास्तविक भाषा हैं। जब कोई कलाकार किसी चेहरे का चित्र बनाता है, तो वह मानवीय अंगों के संतुलन को बनाए रखने के लिए स्वर्णिम अनुपात के नियमों का उपयोग करता है। इंजीनियरिंग और वास्तुकला में, बड़े-बड़े पुलों और बहुमंजिला भवनों के लघु मॉडल और ब्लूप्रिंट पैमाने के अनुपात (जैसे 1 : 100) के आधार पर ही बनाए जाते हैं, जिससे वास्तविक निर्माण में एक मिलीमीटर की भी त्रुटि न हो। चिकित्सा और औषध विज्ञान में, डॉक्टर किसी रोगी के शारीरिक भार के अनुपात में ही जीवन रक्षक दवाओं की मात्रा तय करते हैं; अनुपात में तनिक सी चूक घातक सिद्ध हो सकती है। आधुनिक डिजिटल उपकरणों, जैसे कंप्यूटर मॉनिटर, टेलीविजन और स्मार्टफोन में पिक्सल का पहलू अनुपात (Aspect Ratio) चित्रों को बिना खींचे या चपटा किए सही आकार में दिखाता है। व्यापार में लाभ-हानि का बंटवारा, विदेशी मुद्रा की विनिमय दरें, तथा रसोई में भोजन पकाने की विधियाँ सभी प्रत्यक्ष रूप से समानुपाती नियमों और एकिक नियम पर निर्भर हैं। इस अध्याय को गहराई से समझने से छात्रों में तार्किक विश्लेषण, मानसिक संतुलन और व्यावहारिक गणितीय आत्मविश्वास का विकास होता है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • प्राकृत संख्याओं और पूर्ण संख्याओं पर चार आधारभूत संक्रियाओं (जोड़, घटाव, गुणा, भाग) का स्पष्ट ज्ञान।
  • भिन्नों की अवधारणा, तुल्य भिन्न बनाना, तथा महत्तम समापवर्तक (HCF) द्वारा भिन्न को उसके सरलतम रूप में बदलना।
  • दैनिक जीवन के मानक मापन मात्रकों का रूपांतरण (रुपये और पैसे, मीटर और सेंटीमीटर, किलोमीटर और मीटर, किलोग्राम और ग्राम, घंटे और मिनट)।
  • पूर्ण वर्ग संख्याओं के वर्गमूल की प्रारंभिक समझ (जैसे 16 का वर्गमूल 4, 64 का वर्गमूल 8)।
  • इबारती (शब्द) समस्याओं को पढ़कर उनमें से दिए गए संख्यात्मक मानों को समझना और अज्ञात मान की पहचान करना।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • अंतर द्वारा तुलना और भाग द्वारा तुलना में अंतर स्पष्ट करना तथा अनुपात को समान प्रकार की दो राशियों की मात्रक-हीन तुलना के रूप में परिभाषित करना।
  • अनुपात के पूर्वपद (Antecedent) और उत्तरपद (Consequent) की पहचान करना तथा यह समझना कि पदों का क्रम क्यों महत्वपूर्ण है और अनुपात का कोई मात्रक क्यों नहीं होता।
  • सजातीयता नियम के अनुसार राशियों को एक ही मात्रक में बदलकर अनुपात को उसके सरलतम रूप (HCF = 1) में रूपांतरित करना।
  • वज्र-गुणन (Cross-Multiplication) अथवा उभयनिष्ठ हर विधि का उपयोग करके दो अनुपातों की तुलना करना और बड़े अनुपात की पहचान करना।
  • कुल भागों की विधि का उपयोग करके किसी दी गई कुल राशि को दिए गए दो-पदों अथवा तीन-पदों के अनुपात में विभाजित करना।
  • समानुपात को दो अनुपातों की समानता के रूप में परिभाषित करना, बाह्य और मध्य पदों की पहचान करना तथा बाह्य पदों का गुणनफल बराबर मध्य पदों का गुणनफल नियम को सिद्ध करना।
  • चार-पदों के समानुपात में अज्ञात पद का मान ज्ञात करना तथा सतत समानुपात में मध्यानुपाती और तृतीयानुपाती की सटीक गणना करना।
  • दो-चरणीय एकिक नियम (भाग द्वारा 1 इकाई का मान, गुणा द्वारा अभीष्ट मान) का उपयोग करके दैनिक जीवन और परीक्षा की व्यावहारिक समस्याओं को हल करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 मॉड्यूल 1: अनुपात की संकल्पना, राशि...
2 मॉड्यूल 2: सरलतम रूप (न्यूनतम पद),...
3 मॉड्यूल 3: अनुपातों की तुलना एवं दी...
4 मॉड्यूल 4: समानुपात की संकल्पना, पद...
5 मॉड्यूल 5: सतत समानुपात, मध्यानुपात...
6 मॉड्यूल 6: एकिक नियम (The Unitary M...
7 मॉड्यूल 7: व्यावहारिक इबारती प्रश्न...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

मॉड्यूल 1: अनुपात की संकल्पना, राशियों की तुलना एवं मूलभूत गुणधर्म

1.1 राशियों की तुलना की दो विधियाँ: अंतर बनाम भाग

दैनिक जीवन में हम निरंतर विभिन्न मापों—जैसे ऊँचाई, भार, प्राप्तांक, मूल्य एवं आयु—की परस्पर तुलना करते हैं। गणित में दो राशियों की तुलना करने की दो प्राथमिक विधियाँ हैं:

1. अंतर द्वारा तुलना (घटाव विधि)

एक राशि में से दूसरी राशि को घटाया जाता है: "रोहन की लंबाई $150\text{ सेमी}$ और आर्यन की लंबाई $120\text{ सेमी}$ है। रोहन $150 - 120 = 30\text{ सेमी}$ अधिक लंबा है।"
सीमा: यह केवल पूर्ण अंतर बताता है, परंतु सापेक्ष अनुपात और पैमाने को छिपा लेता है।

2. भाग द्वारा तुलना (अनुपात विधि)

एक राशि को दूसरी राशि से विभाजित किया जाता है: "एक कलम का मूल्य ₹$20$ और पेंसिल का मूल्य ₹$5$ है। $\frac{20}{5} = 4$, अर्थात कलम का मूल्य पेंसिल से $4$ गुना है।"
लाभ: यह दोनों राशियों के मध्य वास्तविक आनुपातिक पैमाने और गुणज संबंध को स्पष्ट रूप से प्रकट करता है।

1.2 अनुपात की परिभाषा एवं पदों की पहचान (पूर्वपद एवं उत्तरपद)

समान प्रकार की और एक ही मात्रक (इकाई) में व्यक्त की गई दो राशियों की भाग द्वारा तुलना को अनुपात (Ratio) कहते हैं।

$$a \text{ का } b \text{ से अनुपात} = a : b = \frac{a}{b} \quad (b \neq 0)$$

पढ़ा जाता है: '$a$ अनुपात $b$' (अंग्रेजी में: '$a$ is to $b$')

पूर्वपद (Antecedent: $a$)

अनुपात के पहले पद $a$ को 'पूर्वपद' कहा जाता है। यह भिन्न के अंश (Numerator) के स्थान पर होता है।

उत्तरपद (Consequent: $b$)

अनुपात के दूसरे पद $b$ को 'उत्तरपद' कहा जाता है। यह भिन्न के हर (Denominator) के स्थान पर होता है ($b \neq 0$)।

1.3 अनुपात के तीन स्वर्णिम नियम (Core Invariants)

नियम 1: अनुपात एक विशुद्ध मात्रक-हीन संख्या है (कोई मात्रक नहीं!)

चूँकि अनुपात एक ही मात्रक में मापी गई दो राशियों का भागफल होता है, अतः अंश और हर के मात्रक परस्पर कट जाते हैं।

$$\frac{6\text{ किग्रा}}{9\text{ किग्रा}} = \frac{6}{9} = \frac{2}{3} = 2 : 3$$ परीक्षक चेतावनी: $2 : 3\text{ किग्रा}$ अथवा $2\text{ मीटर} : 3\text{ मीटर}$ लिखना पूर्णतः अमान्य है। अनुपात का कोई भी मात्रक नहीं होता।

नियम 2: पदों का क्रम अनिवार्य होता है ($a : b \neq b : a$)

प्रश्न में जिस राशि का उल्लेख पहले किया गया है, वही पूर्वपद बनेगी और दूसरी राशि उत्तरपद बनेगी।

यदि एक कक्षा में $15$ लड़के और $20$ लड़कियाँ हैं:
• लड़कों का लड़कियों से अनुपात $= 15 : 20 = 3 : 4$
• लड़कियों का लड़कों से अनुपात $= 20 : 15 = 4 : 3$
ध्यान दें कि $3 : 4 \neq 4 : 3$। क्रम बदलने से तुलना का अभिप्राय पूर्णतः उलट जाता है!

नियम 3: तीन पदों का अनुपात ($a : b : c$)

अनुपात तीन अथवा अधिक राशियों की एक साथ तुलना कर सकता है। जैसे यदि किसी त्रिभुज के कोण $30^\circ, 60^\circ, 90^\circ$ हों, तो उनका अनुपात $30 : 60 : 90 = 1 : 2 : 3$ होगा। तीनों पदों को एक ही उभयनिष्ठ गुणनखंड से विभाजित किया जाता है।

मॉड्यूल 2: सरलतम रूप (न्यूनतम पद), तुल्य अनुपात एवं मात्रक एकरूपता

2.1 अनुपात का सरलतम रूप (Lowest Terms)

कोई अनुपात $a : b$ अपने सरलतम रूप (Simplest Form) में तब कहलाता है जब $a$ और $b$ दोनों पूर्णांक हों तथा उनमें $1$ के अतिरिक्त कोई अन्य उभयनिष्ठ गुणनखंड न हो (अर्थात दोनों सह-अभाज्य हों):

$$a : b \text{ सरलतम रूप में है} \iff \text{HCF}(a, b) = 1$$
सरल करने की विधि: पूर्वपद और उत्तरपद दोनों को उनके महत्तम समापवर्तक (HCF) से भाग दीजिए।
• उदाहरण: $48 : 72$ को सरलतम रूप में बदलिए।
  $\text{HCF}(48, 72) = 24$। दोनों को $24$ से भाग देने पर: $(48 \div 24) : (72 \div 24) = \mathbf{2 : 3}$।

2.2 तुल्य अनुपात (Equivalent Ratios)

तुल्य भिन्नों की भाँति ही, किसी अनुपात के दोनों पदों को एक ही अशून्य संख्या ($m \neq 0$) से गुणा या भाग करने पर उसके मान में कोई परिवर्तन नहीं आता।

$$a : b = (a \times m) : (b \times m) = (a \div m) : (b \div m) \quad (m \neq 0)$$

उदाहरण के लिए, अनुपात $2 : 5$ के दोनों पदों को $3$ से गुणा करने पर $6 : 15$ मिलता है; $4$ से गुणा करने पर $8 : 20$ मिलता है। अतः $2 : 5, 6 : 15,$ तथा $8 : 20$ आपस में तुल्य अनुपात हैं।

2.3 सजातीयता नियम एवं मात्रक एकरूपता (Unit Homogenisation)

अनुपात निकालने से पूर्व यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि दोनों राशियाँ एक ही भौतिक गुण की हों तथा एक ही मात्रक (इकाई) में व्यक्त की गई हों!

दी गई राशियाँ समान मात्रक में रूपांतरण प्रारंभिक अनुपात सरलतम रूप
$75\text{ पैसे}$ का ₹$3$ से ₹$3 = 3 \times 100 = 300\text{ पैसे}$ $75 : 300$ $1 : 4$
$500\text{ मीटर}$ का $2\text{ किमी}$ से $2\text{ किमी} = 2 \times 1000 = 2000\text{ मीटर}$ $500 : 2000$ $1 : 4$
$45\text{ मिनट}$ का $2\text{ घंटे}$ से $2\text{ घंटे} = 2 \times 60 = 120\text{ मिनट}$ $45 : 120$ $3 : 8$
$250\text{ ग्राम}$ का $1.5\text{ किग्रा}$ से $1.5\text{ किग्रा} = 1.5 \times 1000 = 1500\text{ ग्राम}$ $250 : 1500$ $1 : 6$
$8\text{ माह}$ का $1\text{ वर्ष}$ से $1\text{ वर्ष} = 12\text{ माह}$ $8 : 12$ $2 : 3$
बोर्ड परीक्षा का घातक जाल: कभी भी मिश्रित मात्रकों से सीधा अनुपात न निकालें! जैसे $75\text{ पैसे}$ और ₹$3$ का अनुपात सीधे $75 : 3 = 25 : 1$ लिखना सर्वथा गलत है। पहले ₹$3$ को $300\text{ पैसे}$ में बदलना अनिवार्य है जिससे सही उत्तर $1 : 4$ मिले।

मॉड्यूल 3: अनुपातों की तुलना एवं दी गई राशि का अनुपात में विभाजन

3.1 दो अनुपातों की तुलना: कौन सा अनुपात बड़ा है?

दो अनुपातों $a : b$ और $c : d$ की तुलना करने के लिए उन्हें भिन्न $\frac{a}{b}$ तथा $\frac{c}{d}$ के रूप में लिखा जाता है। तुलना की दो प्रामाणिक विधियाँ हैं:

विधि 1: वज्र-गुणन विधि (Cross-Multiplication)

$\frac{a}{b}$ तथा $\frac{c}{d}$ के तिर्यक गुणनफलों की तुलना करें:

• यदि $a \times d > b \times c \implies a : b > c : d$
• यदि $a \times d < b \times c \implies a : b < c : d$
• यदि $a \times d = b \times c \implies a : b = c : d$

विधि 2: उभयनिष्ठ हर विधि (लघुत्तम समापवर्त्य - LCM)

हरों का $\text{LCM}$ लेकर दोनों भिन्नों को समान हर में बदलें:

$3 : 4$ तथा $5 : 6$ की तुलना:
$\frac{3}{4} = \frac{9}{12}$ तथा $\frac{5}{6} = \frac{10}{12}$।
चूँकि $9 < 10 \implies 3 : 4 < 5 : 6$।

3.2 किसी कुल राशि को दिए गए अनुपात ($m : n$) में बांटना

जब किसी कुल राशि $Q$ को दो पक्षों $A$ और $B$ के मध्य $m : n$ के अनुपात में बांटना हो, तो पूरी राशि को कुल बराबर भागों में विभाजित किया जाता है:

चरणबद्ध विभाजन नियम:

  1. अनुपाती भागों का योग ज्ञात करें: $\text{कुल भाग} = m + n$
  2. पहले पक्ष का भाग: $\text{भाग}_A = \left(\frac{m}{m + n}\right) \times Q$
  3. दूसरे पक्ष का भाग: $\text{भाग}_B = \left(\frac{n}{m + n}\right) \times Q$
  4. जांच: $\text{भाग}_A + \text{भाग}_B = Q$
हल किया गया उदाहरण: ₹$1,200$ को रीना और टीना के मध्य $3 : 5$ के अनुपात में बांटिए।
• अनुपाती भागों का योग $= 3 + 5 = 8$
• रीना का भाग $= \frac{3}{8} \times 1200 = 3 \times 150 = \mathbf{\text{₹}450}$
• टीना का भाग $= \frac{5}{8} \times 1200 = 5 \times 150 = \mathbf{\text{₹}750}$
• जांच: $450 + 750 = 1200$ ✓

3.3 तीन पक्षों में विभाजन ($a : b : c$)

तीन पक्षों में $a : b : c$ के अनुपात में बांटने पर यही नियम विस्तारित होता है:

$$\text{कुल भाग} = a + b + c$$ $$\text{पहला भाग} = \frac{a}{a+b+c} \times Q, \quad \text{दूसरा भाग} = \frac{b}{a+b+c} \times Q, \quad \text{तीसरा भाग} = \frac{c}{a+b+c} \times Q$$
उदाहरण: $72\text{ किग्रा}$ मिठाई को $A, B, C$ में $2 : 3 : 4$ के अनुपात में बांटिए।
कुल भाग $= 2 + 3 + 4 = 9$।
$A = \frac{2}{9} \times 72 = 16\text{ किग्रा}$,   $B = \frac{3}{9} \times 72 = 24\text{ किग्रा}$,   $C = \frac{4}{9} \times 72 = 32\text{ किग्रा}$।
जांच: $16 + 24 + 32 = 72\text{ किग्रा}$ ✓

मॉड्यूल 4: समानुपात की संकल्पना, पद एवं समानुपात का मूल नियम

4.1 समानुपात की संकल्पना एवं परिभाषा

अनुपात दो राशियों की तुलना करता है, जबकि दो अनुपातों की समानता को समानुपात (Proportion) कहा जाता है।

$$a : b = c : d \iff a : b :: c : d \iff \frac{a}{b} = \frac{c}{d}$$

पढ़ा जाता है: '$a$ अनुपात $b$ समानुपात $c$ अनुपात $d$'

चार राशियाँ $a, b, c, d$ समानुपाती कहलाती हैं यदि पहले दो पदों का अनुपात अंतिम दो पदों के अनुपात के बराबर हो। इन चारों संख्याओं को समानुपात के पद (Terms) कहा जाता है।

4.2 समानुपात के पद: बाह्य पद एवं मध्य पद

समानुपात $a : b :: c : d$ में:

बाह्य पद (Extreme Terms या Extremes)

पहला पद ($a$) और चौथा पद ($d$) बाहरी सिरों पर स्थित होते हैं, अतः इन्हें बाह्य पद कहा जाता है।

मध्य पद (Middle Terms या Means)

दूसरा पद ($b$) और तीसरा पद ($c$) बीच में स्थित होते हैं, अतः इन्हें मध्य पद कहा जाता है।

4.3 समानुपात का आधारभूत नियम (वज्र-गुणन नियम)

प्रत्येक वैध समानुपात को नियंत्रित करने वाला सार्वभौमिक गणितीय प्रमेय है:

$$\text{बाह्य पदों का गुणनफल} = \text{मध्य पदों का गुणनफल}$$ $$a \times d = b \times c$$
अनुप्रयोग 1: चार संख्याओं के समानुपाती होने की जांच
क्या $4, 6, 8, 12$ समानुपात में हैं?
• बाह्य पदों का गुणनफल $= 4 \times 12 = 48$
• मध्य पदों का गुणनफल $= 6 \times 8 = 48$
चूँकि बाह्य पदों का गुणनफल = मध्य पदों का गुणनफल $= 48$, अतः हाँ, $4 : 6 :: 8 : 12$ समानुपात में हैं!
अनुप्रयोग 2: अज्ञात पद ($x$) का मान ज्ञात करना
यदि $x : 15 :: 8 : 12$ हो, तो $x$ का मान ज्ञात कीजिए।
$$\text{बाह्य पदों का गुणनफल} = \text{मध्य पदों का गुणनफल} \implies x \times 12 = 15 \times 8$$ $$12x = 120 \implies x = \frac{120}{12} = \mathbf{10}$$

मॉड्यूल 5: सतत समानुपात, मध्यानुपाती एवं तृतीयानुपाती

5.1 सतत समानुपात (Continued Proportion)

तीन राशियाँ $a, b, c$ सतत समानुपाती कहलाती हैं यदि पहली और दूसरी का अनुपात, दूसरी और तीसरी के अनुपात के बराबर हो:

$$a : b :: b : c \iff \frac{a}{b} = \frac{b}{c}$$

समानुपात के गुणन नियम ($a \times c = b \times b$) का प्रयोग करने पर महत्वपूर्ण संबंध प्राप्त होता है: $$b^2 = ac$$

मध्यानुपाती (Mean Proportional: $b$)

$a$ और $c$ के बीच के मध्य पद $b$ को मध्यानुपाती कहते हैं:

$$b = \sqrt{ac}$$
उदाहरण: $4$ और $16$ का मध्यानुपाती ज्ञात कीजिए।
$$b = \sqrt{4 \times 16} = \sqrt{64} = \mathbf{8}$$ जांच: $\frac{4}{8} = \frac{8}{16} = \frac{1}{2}$ ✓

तृतीयानुपाती (Third Proportional: $c$)

दी गई दो संख्याओं $a$ और $b$ के लिए तीसरे पद $c$ को तृतीयानुपाती कहते हैं:

$$c = \frac{b^2}{a}$$
उदाहरण: $9$ और $12$ का तृतीयानुपाती ज्ञात कीजिए।
$$c = \frac{12^2}{9} = \frac{144}{9} = \mathbf{16}$$ जांच: $\frac{9}{12} = \frac{3}{4}$ तथा $\frac{12}{16} = \frac{3}{4}$ ✓
परीक्षक चेतावनी: चतुर्थानुपाती और तृतीयानुपाती में भ्रमित न हों!
• 4 पदों वाले समानुपात ($a, b, c, d$) में $d$ चतुर्थानुपाती होता है ($d = \frac{bc}{a}$)।
• 3 पदों वाले सतत समानुपात ($a, b, c$) में $c$ तृतीयानुपाती होता है ($c = \frac{b^2}{a}$)।

मॉड्यूल 6: एकिक नियम (The Unitary Method) — प्रत्यक्ष विचरण

6.1 एकिक नियम क्या है?

'एकिक' शब्द 'एक' (Unit या Single item) से बना है।

पहले भाग देकर एक इकाई का मान ज्ञात करना, और फिर गुणा करके अभीष्ट संख्या में वस्तुओं का मान ज्ञात करने की विधि को 'एकिक नियम' कहते हैं।

6.2 दो-चरणीय कलनविधि (The Two-Step Algorithm)

1 चरण 1: भाग द्वारा 1 इकाई का मान

$$\text{1 इकाई का मान} = \frac{\text{दी गई वस्तुओं का कुल मान}}{\text{दी गई वस्तुओं की संख्या}}$$

(एक वस्तु का मूल्य या माप प्राप्त करने हेतु भाग दें)
2 चरण 2: गुणा द्वारा अभीष्ट मान

$$\text{अभीष्ट वस्तुओं का मान} = (\text{1 इकाई का मान}) \times \text{अभीष्ट वस्तुओं की संख्या}$$

(अंतिम अभीष्ट मात्रा तक पहुँचने हेतु गुणा करें)

6.3 एकिक नियम के दो प्रकार के परीक्षा प्रश्न

प्रकार 1: मूल्य या मान ज्ञात करना

"यदि $6$ कॉपियों का मूल्य ₹$150$ है, तो $14$ कॉपियों का मूल्य ज्ञात कीजिए।"

$1$ कॉपी का मूल्य $= \frac{150}{6} = \text{₹}25$
$14$ कॉपियों का मूल्य $= 14 \times 25 = \mathbf{\text{₹}350}$

प्रकार 2: वस्तुओं की संख्या ज्ञात करना

"यदि $6$ कॉपियों का मूल्य ₹$150$ है, तो ₹$200$ में कितनी कॉपियाँ खरीदी जा सकती हैं?"

₹$1$ में कॉपियों की संख्या $= \frac{6}{150} = \frac{1}{25}$
₹$200$ में कॉपियाँ $= 200 \times \frac{1}{25} = \mathbf{8\text{ कॉपियाँ}}$

मॉड्यूल 7: व्यावहारिक इबारती प्रश्न, वास्तविक प्रतिरूपण एवं बहु-चरणीय अनुप्रयोग

7.1 आनुपातिक तर्कणा के व्यावहारिक अनुप्रयोग

अनुपात और समानुपात अनेक विज्ञान एवं वाणिज्यिक क्षेत्रों का संचालन करते हैं:

1. धातु विज्ञान एवं मिश्रण:
मिश्रधातु पीतल में तांबा और जस्ता $7 : 3$ के अनुपात में मिलाया जाता है।
2. मानचित्र का पैमाना (मानचित्रकला):
पैमाना $1 : 100,000$ दर्शाता है कि नक्शे पर $1\text{ सेमी}$ वास्तव में $1\text{ किमी}$ है।
3. एकसमान चाल एवं यात्रा:
नियत चाल पर तय की गई दूरी, व्यतीत समय के सीधे समानुपाती होती है।
4. व्यापारिक साझेदारी:
साझेदारों के बीच लाभ का बंटवारा उनके द्वारा निवेश की गई पूंजी के अनुपात में होता है।

7.2 परीक्षा में समस्या समाधान की 4-चरणीय कार्यनीति

बोर्ड परीक्षा में पूरे अंक प्राप्त करने हेतु 4 चरण:
चरण 1: मात्रकों की तुरंत जांच करें! यदि एक राशि मीटर में और दूसरी किलोमीटर में है, तो अनुपात बनाने से पहले तुरंत दोनों को समान मात्रक में बदलें।
चरण 2: प्रश्न के प्रकार की पहचान करें: क्या यह सरल अनुपात है, राशि का भागों में बंटवारा है, समानुपात की जांच ($ad = bc$) है, या एकिक नियम की समस्या है?
चरण 3: सूत्र को स्पष्ट रूप से लिखें: 'बाह्य पदों का गुणनफल = मध्य पदों का गुणनफल' जैसे सूत्र लिखने से विधि के अनिवार्य अंक सुरक्षित होते हैं।
चरण 4: उत्तर में मात्रक का ध्यान रखें: अनुपात का कोई मात्रक नहीं होता। परंतु एकिक नियम के उत्तर में भौतिक मात्रक (₹, किग्रा, किमी, घंटे) लगाना न भूलें!

महत्वपूर्ण सूत्र, सर्वसमिकाएँ एवं प्रमेय

अनुपात की परिभाषा एवं सरलतम रूप सर्वसमिका
$$a : b = {a}{b} (b ≠ 0); a : b सरलतम रूप में है ⇔ HCF(a, b) = 1$$
तुल्य अनुपात का अदिश गुणन नियम
$$a : b = (a \times k) : (b \times k) = (a \div k) : (b \div k) \quad (k \neq 0)$$
सजातीयता एवं मात्रक एकरूपता नियम
$$अनुपात(Q_1, Q_2) = {Q_1 (समान मात्रक U में) enquiry}{Q_2 (समान मात्रक U में)} = विशुद्ध संख्या (कोई मात्रक नहीं)$$
वज्र-गुणन अनुपात तुलना नियम
$$\frac{a}{b} > \frac{c}{d} \iff a \times d > b \times c; \quad \frac{a}{b} = \frac{c}{d} \iff a \times d = b \times c$$
कुल भागों द्वारा राशि विभाजन सूत्र
$$भाग_A = ≤ft({m}{m + n}) × Q, भाग_B = ≤ft({n}{m + n}) × Q (कुल भाग = m + n)$$
समानुपात का आधारभूत नियम (वज्र-गुणन नियम)
$$a : b :: c : d ⇔ बाह्य पदों का गुणनफल = मध्य पदों का गुणनफल ⇔ a × d = b × c$$
सतत समानुपात, मध्यानुपाती एवं तृतीयानुपाती सूत्र
$$a : b :: b : c ⇔ b^2 = ac ⇒ b = {ac} (मध्यानुपाती); c = {b^2}{a} (तृतीयानुपाती)$$
दो-चरणीय एकिक नियम कलनविधि सूत्र
$$चरण 1: u_1 = {V_{दिया}}{N_{दिया}} (भाग द्वारा); चरण 2: V_{अभीष्ट} = u_1 × N_{अभीष्ट} (गुणा द्वारा)$$

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:
चरण 1: दोनों राशियों को एक ही उभयनिष्ठ मात्रक (मिनट) में बदलना:
• पहली राशि $= 45\text{ मिनट}$
• दूसरी राशि $= 2\text{ घंटे } 15\text{ मिनट} = (2 \times 60) + 15 = 120 + 15 = 135\text{ मिनट}$ [1 अंक]

चरण 2: अनुपात बनाकर सरलतम रूप में बदलना:
$$\text{अभीष्ट अनुपात} = 45 : 135 = \frac{45}{135}$$
$45$ और $135$ का महत्तम समापवर्तक (HCF) $= 45$ है।
अंश और हर दोनों को $45$ से भाग देने पर:
$$\frac{45 \div 45}{135 \div 45} = \frac{1}{3}$$
$$\mathbf{\text{उत्तर: } 1 : 3}$$ [1 अंक]
(नोट: अनुपात मात्रक-हीन होता है, अतः $1\text{ मिनट} : 3\text{ मिनट}$ लिखना सर्वथा अमान्य है।)
उदाहरण 2
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:
चरण 1: दोनों अनुपातों को भिन्नों के रूप में लिखना:
$$\text{पहला अनुपात: } \frac{5}{8}, \quad \text{दूसरा अनुपात: } \frac{7}{12}$$ [1 अंक]

चरण 2: वज्र-गुणन नियम (Cross-Multiplication) का प्रयोग:
$\frac{a}{b} = \frac{5}{8}$ तथा $\frac{c}{d} = \frac{7}{12}$ के तिर्यक गुणनफल $(a \times d)$ और $(b \times c)$ ज्ञात करने पर:
• पहला तिर्यक गुणनफल $= 5 \times 12 = 60$
• दूसरा तिर्यक गुणनफल $= 8 \times 7 = 56$ [1 अंक]

चरण 3: मानों की तुलना एवं निष्कर्ष:
चूँकि $60 > 56$ है, अतः:
$$\frac{5}{8} > \frac{7}{12}$$
$$\mathbf{\text{उत्तर: } 5 : 8 \text{ का मान } 7 : 12 \text{ से बड़ा है।}}$$ [1 अंक]
(वैकल्पिक विधि: हरों का लघुत्तम लेकर $\frac{15}{24} > \frac{14}{24}$ द्वारा भी निष्कर्ष समान रहता है।)
उदाहरण 3
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:
चरण 1: अनुपाती भागों का कुल योग ज्ञात करना:
दिया गया अनुपात $= 2 : 3 : 5$
$$\text{कुल भाग} = 2 + 3 + 5 = 10$$ [1 अंक]

चरण 2: प्रत्येक व्यक्ति का हिस्सा निकालना:
बांटी जाने वाली कुल धनराशि $= \text{₹}2,400$
• अमन का हिस्सा:
$$\text{हिस्सा}_{\text{अमन}} = \frac{2}{10} \times 2400 = 2 \times 240 = \mathbf{\text{₹}480}$$ [0.5 अंक]
• बॉबी का हिस्सा:
$$\text{हिस्सा}_{\text{बॉबी}} = \frac{3}{10} \times 2400 = 3 \times 240 = \mathbf{\text{₹}720}$$ [0.5 अंक]
• चेतन का हिस्सा:
$$\text{हिस्सा}_{\text{चेतन}} = \frac{5}{10} \times 2400 = 5 \times 240 = \mathbf{\text{₹}1,200}$$ [0.5 अंक]

चरण 3: जांच एवं सत्यापन:
$$\text{कुल योग} = 480 + 720 + 1200 = \text{₹}2,400 \quad (\text{कुल धनराशि से पूर्णतः सत्यापित})$$ [0.5 अंक]
उदाहरण 4
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:
भाग (a): क्या $16, 24, 20, 30$ समानुपात में हैं?
समानुपात के आधारभूत नियम के अनुसार:
$$\text{बाह्य पदों का गुणनफल} = \text{मध्य पदों का गुणनफल}$$
यहाँ बाह्य पद $16$ और $30$ हैं; मध्य पद $24$ और $20$ हैं।
• $\text{बाह्य पदों का गुणनफल} = 16 \times 30 = 480$
• $\text{मध्य पदों का गुणनफल} = 24 \times 20 = 480$ [1 अंक]
चूँकि $\text{बाह्य पदों का गुणनफल} = \text{मध्य पदों का गुणनफल} = 480$,
$$\mathbf{\text{हाँ, संख्याएँ } 16, 24, 20, 30 \text{ समानुपात में हैं } (16 : 24 :: 20 : 30)।}$$ [1 अंक]

भाग (b): $25 : 35 :: x : 49$ में $x$ का मान निकालना:
समानुपात के नियम से:
$$\text{बाह्य पदों का गुणनफल} = \text{मध्य पदों का गुणनफल}$$
$$25 \times 49 = 35 \times x$$ [0.5 अंक]
पक्षांतरण करने पर:
$$x = \frac{25 \times 49}{35}$$
$49$ और $35$ को $7$ से काटने पर:
$$x = \frac{25 \times 7}{5}$$
$25$ को $5$ से काटने पर:
$$x = 5 \times 7 = \mathbf{35}$$ [1 अंक]
जांच: $25 : 35 = 5 : 7$ तथा $35 : 49 = 5 : 7$ (दोनों अनुपात समान हैं)। [0.5 अंक]
उदाहरण 5
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:
भाग (a): $9$ और $25$ का मध्यानुपाती:
माना मध्यानुपाती $b$ है।
सतत समानुपात की परिभाषा से $9 : b :: b : 25$, अर्थात:
$$b^2 = 9 \times 25$$ [0.5 अंक]
$$b^2 = 225$$
धनात्मक वर्गमूल लेने पर:
$$b = \sqrt{225} = \mathbf{15}$$ [1 अंक]
सत्यापन: $\frac{9}{15} = \frac{3}{5}$ तथा $\frac{15}{25} = \frac{3}{5}$ (दोनों अनुपात समान हैं)। [0.5 अंक]

भाग (b): $16$ और $24$ का तृतीयानुपाती:
माना तृतीयानुपाती $c$ है।
तब $16, 24, c$ सतत समानुपात में हैं, अर्थात:
$$16 : 24 :: 24 : c$$ [0.5 अंक]
समानुपात के गुणन नियम से:
$$16 \times c = 24 \times 24$$
$$16c = 576$$
$$c = \frac{576}{16} = \mathbf{36}$$ [1 अंक]
सत्यापन: $\frac{16}{24} = \frac{2}{3}$ तथा $\frac{24}{36} = \frac{2}{3}$ (अतः $c = 36$ पूर्णतः सत्यापित है)। [0.5 अंक]
उदाहरण 6
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:
भाग (a): एकिक नियम द्वारा $25$ छड़ों का मूल्य ज्ञात करना:
• $12$ छड़ों का मूल्य $= \text{₹}4,320$
• चरण 1 (भाग द्वारा 1 छड़ का मूल्य):
$$\text{1 छड़ का मूल्य} = \frac{4320}{12} = \text{₹}360$$ [0.5 अंक]
• चरण 2 (गुणा द्वारा 25 छड़ों का मूल्य):
$$\text{25 छड़ों का मूल्य} = 25 \times 360 = \mathbf{\text{₹}9,000}$$ [1 अंक]

भाग (b): ₹$9,000$ में खरीदी जा सकने वाली छड़ों की संख्या:
• चूँकि $1$ छड़ का मूल्य $= \text{₹}360$ है,
• ₹$9,000$ में छड़ों की संख्या:
$$\text{छड़ों की संख्या} = \frac{\text{कुल उपलब्ध धनराशि}}{\text{1 छड़ का मूल्य}} = \frac{9000}{360} = \frac{900}{36} = \mathbf{25\text{ छड़ें}}$$ [1.5 अंक]

भाग (c): $140\text{ सेमी}$ की छड़ को $3 : 4$ के अनुपात में बांटना:
• दिया गया अनुपात $= 3 : 4$
• कुल भागों की संख्या $= 3 + 4 = 7$ भाग [0.5 अंक]
• पहले टुकड़े की लंबाई:
$$\text{लंबाई}_1 = \frac{3}{7} \times 140 = 3 \times 20 = \mathbf{60\text{ सेमी}}$$ [0.5 अंक]
• दूसरे टुकड़े की लंबाई:
$$\text{लंबाई}_2 = \frac{4}{7} \times 140 = 4 \times 20 = \mathbf{80\text{ सेमी}}$$ [0.5 अंक]
• जांच: $60\text{ सेमी} + 80\text{ सेमी} = 140\text{ सेमी}$ तथा $\frac{60}{80} = \frac{3}{4}$ (सत्यापित)। [0.5 अंक]

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

विभिन्न मात्रकों (units) में बिना बदले सीधा अनुपात निकाल देना (जैसे 75 पैसे और ₹3 का अनुपात सीधे 75 : 3 = 25 : 1 लिखना)।

सही वैज्ञानिक तथ्य

दोनों राशियों को पहले एक ही मात्रक में बदलें: ₹3 = 300 पैसे, अतः 75 : 300 = 1 : 4।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

अनुपात के उत्तर के साथ मात्रक/इकाई लिखना (जैसे 2 kg : 5 kg या उत्तर में 2 : 5 किलोग्राम लिखना)।

सही वैज्ञानिक तथ्य

अनुपात एक शुद्ध, विमाहीन (dimensionless) संख्या है और इसमें कभी कोई मात्रक नहीं होता (केवल 2 : 5 लिखें)।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

पूर्वपद (Antecedent) और उत्तरपद (Consequent) का क्रम उलट देना (जैसे लड़कियों और लड़कों के अनुपात में लड़कियां = 15, लड़के = 20 होने पर 4 : 3 लिख देना)।

सही वैज्ञानिक तथ्य

प्रश्न में दिए गए क्रम का कड़ाई से पालन करें: लड़कियों से लड़कों का अनुपात = 15 : 20 = 3 : 4 (4 : 3 गलत है)।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

सतत समानुपात (Continued Proportion) के तीसरे समानुपाती (Third Proportional) और 4 पदों वाले चतुर्थ समानुपाती (Fourth Proportional) में भ्रमित होना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

तीन सतत समानुपाती राशियों (a, b, c) के लिए तृतीय समानुपाती c = b^2 / a होता है। चार राशियों (a, b, c, d) के लिए चतुर्थ समानुपाती d = bc / a होता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

ऐकिक नियम (Unitary Method) में विभाजन से पहले सीधे गुणा कर देना या गलत मान से भाग देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

सदैव दो चरणों का पालन करें: चरण 1 में भाग देकर 1 इकाई का मान ज्ञात करें, फिर चरण 2 में अभीष्ट इकाइयों की संख्या से गुणा करें।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

विजातीय राशियों (Incompatible dimensions) के बीच अनुपात निकालने का प्रयास करना (जैसे 5 किग्रा और 10 मीटर का अनुपात)।

सही वैज्ञानिक तथ्य

अनुपात केवल एक ही प्रकार के भौतिक परिमाण (द्रव्यमान से द्रव्यमान, लंबाई से लंबाई) के बीच ही ज्ञात किया जा सकता है।

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

सीआईएससीई / आईसीएसई कक्षा 6 अनुपात और समानुपात (Ratio and Proportion) संपूर्ण नैदानिक संकल्पना मानचित्र: भाग द्वारा तुलना, समानुपात नियम, सतत समानुपात एवं एकिक नियम 1. अनुपात की संकल्पना एवं विशेषताएँ समान प्रकार व समान मात्रक वाली दो राशियों की भाग द्वारा तुलना अनुपात = a : b = a / b a = पूर्वपद (Antecedent) | b = उत्तरपद (Consequent, b ≠ 0) मात्रक-हीन राशि: अनुपात का कोई मात्रक (इकाई) नहीं होता क्रम का महत्व: a : b ≠ b : a (जब तक कि a = b न हो) समान मात्रक: दोनों राशियों का एक ही मात्रक में होना अनिवार्य मात्रक रूपांतरण ट्रैप: 75 पैसे : ₹3 = 75 पैसे : 300 पैसे = 1 : 4 (75:3 नहीं!) 2. सरलतम रूप एवं राशि का विभाजन न्यूनतम पदों में व्यक्त करना व अनुपात में हिस्सेदारी सरलतम रूप का नियम: HCF(a, b) = 1 उदा. 36 : 48 = (36 ÷ 12) : (48 ÷ 12) = 3 : 4 कुल राशि Q को m : n के अनुपात में बांटना 1. कुल बराबर भाग = m + n 2. पहला भाग = [ m / (m + n) ] × Q 3. दूसरा भाग = [ n / (m + n) ] × Q उदाहरण: ₹600 को 2 : 3 में बांटें → कुल भाग = 5 पहला भाग = (2/5)×600 = ₹240 | दूसरा भाग = ₹360 3. समानुपात एवं बाह्य-मध्य पद नियम दो अनुपातों की समानता: a : b :: c : d a : b = c : d ⟺ a / b = c / d बाह्य पदों का गुणनफल = मध्य पदों का गुणनफल a × d = b × c बाह्य पद (Extremes: a एवं d) a : b :: c : d मध्य पद (Means: b एवं c) 4. सतत समानुपात (Continued Proportion) तीन राशियों का संबंध: a, b, c सतत समानुपाती a : b :: b : c ⟺ a / b = b / c b² = a × c ⟹ b = √(a × c) b = मध्यानुपाती | c = तृतीयानुपाती मध्यानुपाती (Mean Proportional): 4 तथा 16 का मध्यानुपाती → b = √(4 × 16) = √64 = 8 जांच: 4/8 = 8/16 = 1/2 ✓ तृतीयानुपाती (Third Proportional: c): सूत्र: c = b² / a 9 तथा 12 का तृतीयानुपाती → c = 12² / 9 = 144 / 9 = 16 ✓ 5. एकिक नियम (The Unitary Method) पहले 1 इकाई का मान निकालकर अभीष्ट मान ज्ञात करना 1 चरण 1: भाग द्वारा 1 इकाई का मान 1 वस्तु का मूल्य = कुल मूल्य ÷ दी गई वस्तुएँ 2 चरण 2: गुणा द्वारा अभीष्ट मान अभीष्ट वस्तुओं का मूल्य = (1 का मूल्य) × अभीष्ट संख्या व्यावहारिक परीक्षा उदाहरण: प्रश्न: 8 कलमों का मूल्य ₹120 है। 15 कलमों का मूल्य ज्ञात करें। 1 कलम का मूल्य = 120 ÷ 8 = ₹15 15 कलमों का मूल्य = 15 × 15 = ₹225 ✓ 6. अनुपातों की तुलना (Comparison of Ratios) मान का परीक्षण: कौन सा अनुपात बड़ा है? वज्र-गुणन नियम (Cross-Multiplication) a / b तथा c / d की तुलना हेतु: (a × d) तथा (b × c) का मान निकालें यदि a·d > b·c ⟹ a:b > c:d | यदि a·d = b·c ⟹ समानुपाती हल किया गया तुलना उदाहरण: 3 : 5 तथा 5 : 8 की तुलना कीजिए भिन्न रूप: 3/5 बनाम 5/8 पहला वज्र गुणन: 3 × 8 = 24 दूसरा वज्र गुणन: 5 × 5 = 25 चूंकि 24 < 25 ⟹ 3 : 5 < 5 : 8 ✓ टारगेटएग्जाम्स आईसीएसई पाठ्यक्रम श्रृंखला • कक्षा 6 गणित • अध्याय: अनुपात और समानुपात बाह्य पदों का गुणनफल = मध्य पदों का गुणनफल • एकिक नियम • मात्रक-हीन अनुपात

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
अनुपात (Ratio) दो सजातीय राशियों की विभाजन द्वारा तुलना है, जिसे a : b या a / b के रूप में व्यक्त किया जाता है (जहाँ b != 0)।
मुख्य बिंदु 2
अनुपात a : b में पहले पद 'a' को पूर्वपद (Antecedent) और दूसरे पद 'b' को उत्तरपद (Consequent) कहा जाता है।
मुख्य बिंदु 3
अनुपात एक शुद्ध विमाहीन (dimensionless) संख्या है, जिसका कोई भौतिक मात्रक (इकाई) नहीं होता।
मुख्य बिंदु 4
अनुपात में पदों का क्रम अत्यंत महत्वपूर्ण होता है: जब तक दोनों पद समान न हों, तब तक a : b और b : a समान नहीं होते।
मुख्य बिंदु 5
अनुपात अपने सरलतम रूप (Simplest Form) में तब होता है जब दोनों पद सह-अभाज्य पूर्णांक हों और उनका म.स.प. (HCF) 1 हो।
मुख्य बिंदु 6
दो राशियों का अनुपात ज्ञात करने से पूर्व दोनों को एक ही मात्रक में परिवर्तित करना अनिवार्य है (समांगता सिद्धांत)।
मुख्य बिंदु 7
किसी राशि Q को m : n के अनुपात में बांटने के लिए कुल भाग (m + n) निकालें, जिससे हिस्से [m / (m + n)] * Q और [n / (m + n)] * Q प्राप्त होते हैं।
मुख्य बिंदु 8
दो अनुपातों की समानता को समानुपात (Proportion) कहते हैं: a : b :: c : d, जहाँ 'a' और 'd' बाह्य पद (Extremes) तथा 'b' और 'c' मध्य पद (Means) कहलाते हैं।
मुख्य बिंदु 9
समानुपात का मूलभूत नियम (वज्र-गुणन नियम): बाह्य पदों का गुणनफल = मध्य पदों का गुणनफल (a * d = b * c)।
मुख्य बिंदु 10
ऐकिक नियम (Unitary Method) में पहले भाग द्वारा 1 इकाई का मान निकाला जाता है, तत्पश्चात गुणा द्वारा अभीष्ट इकाइयों का मान प्राप्त किया जाता है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
250 मीटर का 1.5 किलोमीटर से सरलतम अनुपात ज्ञात कीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: 1.5 किमी = 1.5 * 1000 = 1500 मीटर। अनुपात = 250 : 1500 = 250 / 1500 = 1 / 6 = 1 : 6।
1.5 किमी को मीटर में बदलें (1 किमी = 1,000 मीटर)।
2
अनुपातों 3 : 5 और 4 : 7 की तुलना कीजिए। कौन-सा अनुपात बड़ा है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: तिर्यक गुणनफल: 3 * 7 = 21 और 5 * 4 = 20। चूंकि 21 > 20, अतः 3 : 5 > 4 : 7 (3 : 5 बड़ा अनुपात है)।
तिर्यक गुणन (cross-multiplication) का प्रयोग करें: 3 * 7 और 5 * 4।
3
दो संख्याएं 4 : 7 के अनुपात में हैं। यदि उनका योगफल 132 है, तो दोनों संख्याएं ज्ञात कीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: कुल भाग = 11। पहली संख्या = (4 / 11) * 132 = 4 * 12 = 48। दूसरी संख्या = (7 / 11) * 132 = 7 * 12 = 84। जांच: 48 + 84 = 132।
कुल भाग = 4 + 7 = 11।
4
जांच कीजिए कि क्या 15, 20, 30, 40 समानुपात में हैं।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: बाह्य पदों का गुणनफल = 15 * 40 = 600। मध्य पदों का गुणनफल = 20 * 30 = 600। चूंकि दोनों गुणनफल बराबर हैं, अतः हाँ, ये संख्याएं समानुपात में हैं।
बाह्य पदों का गुणनफल (15 * 40) और मध्य पदों का गुणनफल (20 * 30) ज्ञात करें।
5
4 और 36 के बीच का मध्यानुपाती (Mean Proportional) ज्ञात कीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: b^2 = 4 * 36 = 144 => b = sqrt(144) = 12। अतः मध्यानुपाती 12 है।
मध्यानुपाती b = sqrt(a * c)।
6
यदि 7 मीटर कपड़े का मूल्य ₹560 है, तो ऐकिक नियम द्वारा 12 मीटर कपड़े का मूल्य ज्ञात कीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: 1 मीटर कपड़े का मूल्य = 560 / 7 = ₹80। 12 मीटर कपड़े का मूल्य = 12 * 80 = ₹960।
पहले भाग देकर 1 मीटर का मूल्य निकालें, फिर 12 से गुणा करें।
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कक्षा 6 Mathematics के सभी अध्याय

अध्याय 1: संख्या प्रणाली (संख्या का समेकन) (Number System (Consolidating Sense of Number)) अध्याय 2: अनुमान और पूर्णांकन (Estimation and Rounding Off) अध्याय 3: प्राकृतिक संख्याएँ और पूर्ण संख्याएँ (Natural Numbers and Whole Numbers) अध्याय 4: ऋणात्मक संख्याएँ और पूर्णांक (Negative Numbers and Integers) अध्याय 5: भिन्न (Fractions) अध्याय 6: दशमलव (Decimals) अध्याय 7: सेट का विचार और सेट के प्रकार (Idea of Sets and Types of Sets) अध्याय 8: अनुपात और समानुपात (Ratio and Proportion) अध्याय 9: ऐकिक नियम (Unitary Method) अध्याय 10: बीजगणित की मूलभूत अवधारणाएँ (Fundamental Concepts of Algebra) अध्याय 11: एक चर वाले रैखिक समीकरण (Linear Equations) अध्याय 12: बुनियादी ज्यामितीय अवधारणाएँ (Basic Geometrical Concepts) अध्याय 13: त्रिभुज और चतुर्भुज (Triangles and Quadrilaterals) अध्याय 14: समतल आकृतियों का परिमाप और क्षेत्रफल (Perimeter and Area of Plane Figures) अध्याय 15: डेटा प्रबंधन (बार ग्राफ़ और टेबल्स) (Data Handling (Bar Graphs and Tables))

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