ICSE • कक्षा 6 • Mathematics • अध्याय 8
अनुमानित समय: 45-60 मिनट
प्रगति: अध्ययनरत
अनुपात और समानुपात (Ratio and Proportion)
काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशंस (CISCE) के कक्षा 6 के गणित पाठ्यक्रम में 'अनुपात और समानुपात' का अध्याय तुलनात्मक अंकगणित, वाणिज्यिक गणित और बीजगणितीय प्रतिरूपण की सबसे आधारभूत नींव है। दैनिक जीवन में दो राशियों की तुलना करने की दो मुख्य विधियाँ होती हैं: अंतर द्वारा तुलना और भाग द्वारा तुलना। अंतर द्वारा तुलना घटाव पर आधारित होती है, जो यह बताती है कि एक राशि दूसरी राशि से कितनी अधिक या कम है। यद्यपि यह विधि सरल है, परंतु यह सापेक्ष आकार और पैमाने को प्रकट करने में असमर्थ रहती है। इसके विपरीत, भाग द्वारा तुलना यह निर्धारित करती है कि एक राशि दूसरी राशि का कितना गुना है अथवा उसका कौन सा भिन्न भाग है। समान प्रकार की और एक ही मात्रक (इकाई) में मापी गई दो राशियों के बीच भाग द्वारा इस तुलनात्मक संबंध को 'अनुपात' (Ratio) कहा जाता है।
गणितीय रूप से दो राशियों a और b के अनुपात को उनके बीच एक कोलन लगाकर लिखा जाता है, जिसे a : b दर्शाया जाता है तथा 'a अनुपात b' पढ़ा जाता है। इसे साधारण भिन्न a / b के रूप में भी लिखा जा सकता है, जहाँ उत्तरपद b का मान कभी भी शून्य नहीं हो सकता। अनुपात a : b में पहले पद a को 'पूर्वपद' (Antecedent) कहा जाता है, तथा दूसरे पद b को 'उत्तरपद' (Consequent) कहा जाता है। अनुपात के संदर्भ में सबसे महत्वपूर्ण सार्वभौमिक सत्य यह है कि अनुपात एक शुद्ध, मात्रक-हीन संख्या होती है। चूंकि अनुपात एक ही मात्रक में मापी गई दो राशियों का भागफल होता है, अतः अंश और हर के मात्रक परस्पर पूरी तरह कट जाते हैं। इसलिए अनुपात के साथ 'मीटर', 'किलोग्राम' अथवा 'रुपये' जैसे मात्रक लगाना गणितीय रूप से अमान्य है; इसका उत्तर केवल 3 : 4 जैसा विशुद्ध अंक होता है। इसके अतिरिक्त, अनुपात में पदों का क्रम अत्यंत महत्वपूर्ण होता है: a : b का मान b : a के बराबर नहीं होता, जब तक कि a और b दोनों संख्याएँ समान न हों। उदाहरण के लिए, यदि किसी कक्षा में 15 लड़के और 20 लड़कियाँ हैं, तो लड़कों का लड़कियों से अनुपात 15 : 20 (अर्थात 3 : 4) होगा, जबकि लड़कियों का लड़कों से अनुपात 20 : 15 (अर्थात 4 : 3) होगा। क्रम बदलने से तुलना का पूरा अर्थ बदल जाता है।
अनुपात स्थापित करने से पूर्व राशियों का सजातीयता नियम (Homogeneity Principle) का पालन करना अनिवार्य है। इसका सीधा अर्थ यह है कि अनुपात केवल एक ही भौतिक गुण (जैसे लंबाई की लंबाई से, द्रव्यमान की द्रव्यमान से) वाली राशियों के बीच ही निकाला जा सकता है। पाँच किलोग्राम और दस मीटर के बीच अनुपात निकालना असंभव है, क्योंकि द्रव्यमान और दूरी दो भिन्न भौतिक विमाएँ हैं। साथ ही, यदि राशियाँ एक ही प्रकार की हों परंतु उनके मात्रक भिन्न हों—जैसे 75 पैसे और 3 रुपये, अथवा 500 मीटर और 2 किलोमीटर—तो अनुपात निकालने से पहले दोनों राशियों को एक ही उभयनिष्ठ मात्रक में बदलना अनिवार्य होता है। 3 रुपये को 300 पैसे में बदलने पर अनुपात 75 पैसे : 300 पैसे बनता है, जो सरल करने पर 1 : 4 प्राप्त होता है। कोई अनुपात अपने सरलतम रूप (या न्यूनतम पदों) में तब कहलाता है जब उसके पूर्वपद और उत्तरपद का महत्तम समापवर्तक (HCF) ठीक 1 हो, अर्थात दोनों सह-अभाज्य पूर्णांक हों। भिन्नों की भांति ही, किसी अनुपात के दोनों पदों को एक ही अशून्य संख्या से गुणा या भाग करने पर तुल्य अनुपात प्राप्त होते हैं।
अनुपात का एक प्रमुख व्यावहारिक उपयोग किसी दी गई कुल राशि को निश्चित अनुपात में विभाजित करना है। जब किसी धनराशि, संपत्ति अथवा मिश्रण को दो व्यक्तियों में m : n के अनुपात में बांटना होता है, तो पूरी राशि को (m + n) बराबर भागों में बंटा हुआ माना जाता है। इसके पश्चात पहले व्यक्ति को कुल राशि का m / (m + n) भाग तथा दूसरे व्यक्ति को n / (m + n) भाग प्राप्त होता है। यही नियम तीन अथवा अधिक पदों वाले अनुपातों जैसे a : b : c में भी लागू होता है, जहाँ कुल भागों की संख्या a + b + c होती है।
जब दो अलग-अलग अनुपात आपस में मान में बराबर होते हैं, तो उनकी इस समानता को 'समानुपात' (Proportion) कहा जाता है। यदि अनुपात a : b का मान अनुपात c : d के बराबर हो, तो चारों राशियाँ a, b, c, d समानुपाती कहलाती हैं, जिसे a : b :: c : d लिखा जाता है। समानुपात के पहले और चौथे पद (a और d) बाहरी सिरों पर स्थित होते हैं, अतः इन्हें 'बाह्य पद' (Extremes) कहते हैं; जबकि दूसरे और तीसरे पद (b और c) मध्य में स्थित होते हैं, अतः इन्हें 'मध्य पद' (Means) कहते हैं। समानुपात का स्वर्णिम आधारभूत नियम यह है कि 'बाह्य पदों का गुणनफल सदैव मध्य पदों के गुणनफल के बराबर होता है' (a गुणा d बराबर b गुणा c)। यह नियम चार संख्याओं के समानुपाती होने की जांच करने और किसी अज्ञात पद का मान निकालने की अचूक कुंजी है। एक विशेष स्थिति तब उत्पन्न होती है जब तीन राशियाँ a, b, c इस प्रकार संबंधित हों कि a : b बराबर b : c हो; इसे 'सतत समानुपात' (Continued Proportion) कहते हैं। यहाँ मध्य पद b को a और c का 'मध्यानुपाती' (Mean Proportional) कहा जाता है, जहाँ b का वर्ग बराबर ac होता है, अर्थात b बराबर वर्गमूल ac होता है; तथा तीसरे पद c को 'तृतीयानुपाती' (Third Proportional) कहा जाता है, जिसका मान b का वर्ग बटा a होता है।
अध्याय का अंतिम महत्वपूर्ण खंड 'एकिक नियम' (The Unitary Method) है। एकिक नियम व्यावहारिक अंकगणित की वह दो-चरणीय विधि है जिसमें पहले भाग देकर 1 इकाई का मान निकाला जाता है, और फिर गुणा करके अभीष्ट संख्या में वस्तुओं का मान ज्ञात किया जाता है। चाहे बाज़ार से सामान खरीदने की गणना हो, वाहन की गति और दूरी का संबंध हो, अथवा मजदूरी की गणना, एकिक नियम छात्रों को त्रुटि-रहित गणना की तार्किक क्षमता प्रदान करता है। कक्षा 6 के स्तर पर अनुपात, समानुपात और एकिक नियम में दक्षता प्राप्त करना छात्रों को प्रतिशत, लाभ-हानि, साधारण ब्याज, रेखागणित और विज्ञान के आगामी अध्यायों के लिए पूर्णतः सशक्त बनाता है।