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ICSE • कक्षा 6 • Mathematics • अध्याय 9
अनुमानित समय: 45-60 मिनट
प्रगति: अध्ययनरत

ऐकिक नियम (Unitary Method)

ऐकिक नियम (Unitary Method) अंकगणित की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और मौलिक विधि है, जिसका उपयोग समानुपातिक राशियों से संबंधित प्रश्नों को हल करने के लिए किया जाता है। इस विधि की मुख्य विशेषता यह है कि इसमें दी गई अनेक इकाइयों के कुल मान से पहले भाग (Division) द्वारा एक एकल इकाई (1 Unit) का मान ज्ञात किया जाता है, और फिर उस एकल मान में अभीष्ट इकाइयों की संख्या से गुणा (Multiplication) करके कुल मान प्राप्त किया जाता है। हिंदी में 'ऐकिक' शब्द की उत्पत्ति 'एक' (एकल इकाई) से हुई है, ठीक उसी प्रकार जैसे अंग्रेजी में 'Unitary' शब्द 'Unit' (अर्थात एक) से बना है। यह विधि दो चरणों वाले एक तार्किक सेतु की तरह कार्य करती है: पहले भाग देकर अनेक वस्तुओं से एक वस्तु पर आना (मान का संकुचन), और फिर गुणा करके एक वस्तु से अभीष्ट अनेक वस्तुओं पर पहुंचना (मान का विस्तार)। यह सार्वभौमिक नियम प्राथमिक अंकगणित को बीजगणित, प्रतिशत, लाभ-हानि, चाल-दूरी और वाणिज्यिक गणित के उच्च सिद्धांतों से जोड़ता है। काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशंस (CISCE) एवं आईसीएसई (ICSE) कक्षा 6 गणित के पाठ्यक्रम में ऐकिक नियम का अध्ययन मुख्यतः प्रत्यक्ष विचरण (Direct Variation या सीधा विचरण) के संदर्भ में किया जाता है। दो राशियां प्रत्यक्ष विचरण में तब मानी जाती हैं, जब एक राशि में वृद्धि होने पर दूसरी राशि में भी उसी अनुपात में वृद्धि होती है, अथवा एक राशि में कमी होने पर दूसरी राशि में भी उसी अनुपात में कमी आती है, बशर्ते कि प्रति इकाई दर सदैव स्थिर रहे। प्रत्यक्ष विचरण में दोनों राशियों का भागफल या अनुपात सदैव एक धनात्मक नियतांक k के बराबर होता है। उदाहरण के लिए, यदि खरीदी जाने वाली पुस्तकों की संख्या दोगुनी कर दी जाए, तो कुल व्यय भी ठीक दोगुना हो जाएगा। यदि कोई वाहन एकसमान चाल से चल रहा है, तो यात्रा का समय दोगुना होने पर तय की गई दूरी भी ठीक दोगुनी हो जाएगी। चूंकि प्रति इकाई दर अपरिवर्तित रहती है, अतः ठीक एक इकाई का मान ज्ञात करना वह आधारशिला बन जाता है जिससे भविष्य की किसी भी मात्रा का सटीक मूल्यांकन किया जा सकता है। कक्षा 6 के स्तर पर ऐकिक नियम के प्रश्नों को अज्ञात राशि के आधार पर दो मुख्य श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है: प्रकार A प्रश्न (दी गई संख्या हेतु कुल मूल्य ज्ञात करना): इस श्रेणी के प्रश्नों में n वस्तुओं का कुल मूल्य दिया गया होता है, और m वस्तुओं का कुल मूल्य ज्ञात करने को कहा जाता है। इसके समाधान का निश्चित कलन-विधि (Algorithm) क्रम इस प्रकार है: सर्वप्रथम, दिए गए कुल मूल्य में n से भाग देकर 1 वस्तु का मूल्य निकालें। तत्पश्चात, 1 वस्तु के मूल्य में अभीष्ट संख्या m से गुणा करें। अर्थात, अभीष्ट मूल्य बराबर होता है (दिया गया कुल मूल्य / n) × m। चाहे अभीष्ट संख्या m दी गई संख्या n से बड़ी हो (मात्रा में वृद्धि) अथवा m का मान n से छोटा हो (मात्रा में कमी), दोनों ही स्थितियों में यह समान द्वि-चरणीय तर्क निर्बाध रूप से लागू होता है। प्रकार B प्रश्न (दिए गए बजट या धनराशि में वस्तुओं की संख्या ज्ञात करना): इस विपरीत दृष्टिकोण वाले प्रश्नों में n वस्तुओं का मूल्य दिया होता है, किंतु एक निश्चित उपलब्ध धनराशि या बजट B देकर यह पूछा जाता है कि इस राशि में कुल कितनी वस्तुएं खरीदी जा सकती हैं। इसके समाधान हेतु विद्यार्थी पहले भाग द्वारा 1 वस्तु का मूल्य निकालते हैं, और फिर उपलब्ध कुल धनराशि B में 1 वस्तु के मूल्य से भाग देकर अभीष्ट वस्तुओं की संख्या प्राप्त करते हैं (वस्तुओं की संख्या = कुल बजट / 1 वस्तु का मूल्य)। वैकल्पिक रूप से, विद्यार्थी यह भी निकाल सकते हैं कि 1 रुपये में कितनी वस्तुएं आती हैं और फिर उसे B से गुणा कर सकते हैं। दैनिक जीवन की वस्तुओं के क्रय-विक्रय के अतिरिक्त, ऐकिक नियम एकसमान गति, चाल, दूरी और समय की समस्याओं का मूलभूत आधार है। एकसमान चाल (Speed) की परिभाषा ही यह है कि एकांक समय (1 घंटा, 1 मिनट या 1 सेकंड) में तय की गई दूरी। अतः जब हम कुल दूरी में कुल समय से भाग देकर 1 घंटे में तय की गई दूरी निकालते हैं, तो हम वस्तुतः ऐकिक नियम की प्रथम संक्रिया कर रहे होते हैं। एक बार चाल (1 घंटे की दूरी) ज्ञात हो जाने पर, अभीष्ट समय से गुणा करके दूरी निकाली जा सकती है, अथवा अभीष्ट दूरी में चाल से भाग देकर आवश्यक समय ज्ञात किया जा सकता है। आईसीएसई बोर्ड परीक्षाओं का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील बिंदु मात्रक समांगीकरण (Unit Homogenisation) और व्यापारिक गणना मात्रकों का ज्ञान है। परीक्षा के प्रश्नों में अक्सर विभिन्न मात्रकों का मिश्रण जानबूझकर दिया जाता है ताकि विद्यार्थी की सतर्कता की जांच की जा सके। विद्यार्थियों को पारंपरिक व्यापारिक मात्रक रूपांतरणों का पूर्ण ज्ञान होना अनिवार्य है: 1 दर्जन में 12 इकाइयां होती हैं; 1 कोरी (Score) में 20 इकाइयां होती हैं; तथा 1 ग्रॉस (Gross) में 12 दर्जन अर्थात 144 इकाइयां होती हैं। इसके अतिरिक्त, मीट्रिक प्रणाली के रूपांतरण जैसे किलोग्राम से ग्राम (1 किग्रा = 1,000 ग्राम), लीटर से मिलीलीटर (1 लीटर = 1,000 मिलीलीटर), मीटर से सेंटीमीटर (1 मीटर = 100 सेमी), तथा घंटा से मिनट (1 घंटा = 60 मिनट) को भाग की संक्रिया करने से पहले ही एक समान इकाई में बदलना अनिवार्य है। अंत में, पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष विचरण और प्रतिलोम विचरण (Inverse Variation) के अंतर से भी परिचित कराता है। यद्यपि कक्षा 6 में मुख्य ध्यान प्रत्यक्ष विचरण पर होता है जहाँ 'अधिक वस्तुएं = अधिक मूल्य, तथा कम वस्तुएं = कम मूल्य' का नियम चलता है, परंतु मजदूरों और कार्य दिवसों से संबंधित प्रश्नों में स्थिति विपरीत होती है ('अधिक मजदूर = कम दिन, तथा कम मजदूर = अधिक दिन')। विद्यार्थी सीखते हैं कि किसी भी प्रश्न को हल करने से पहले यह जांचना अनिवार्य है कि राशियां समान दिशा में घट-बढ़ रही हैं या विपरीत दिशा में। इस सतर्क दृष्टिकोण से विद्यार्थी परीक्षा में बिना किसी त्रुटि के पूर्ण अंक प्राप्त करते हैं।

क्या आपने कभी सोचा है?

कल्पना कीजिए कि आप नए शैक्षणिक सत्र के लिए अभ्यास पुस्तिकाएं (कॉपियां) खरीदने एक स्टेशनरी की दुकान पर जाते हैं। दुकानदार आपको बताता है कि 6 कॉपियों के एक पैकेट का मूल्य 210 रुपये है। आपको अपने विषयों के लिए केवल 4 कॉपियों की आवश्यकता है, जबकि आपके मित्र को 9 कॉपियां खरीदनी हैं। आप दोनों बिना किसी संकोच या अनुमान लगाए यह कैसे तय करेंगे कि प्रत्येक को कितने रुपये चुकाने हैं? इसी प्रकार, मान लीजिए आपके परिवार की कार 12 लीटर पेट्रोल में 180 किलोमीटर की दूरी तय करती है। 35 लीटर की भरी हुई टंकी में कार कितनी दूर तक जाएगी, और 300 किलोमीटर की यात्रा के लिए कितने लीटर ईंधन की आवश्यकता होगी? दैनिक जीवन की इन सभी व्यवहारिक पहेलियों को सरलता से हल करने वाली जादुई गणितीय कुंजी है: ऐकिक नियम (The Unitary Method)। किसी भी समूह से पहले केवल एक एकल इकाई का मान ज्ञात करके, आप किसी भी अभीष्ट संख्या का सटीक मान पलक झपकते ही निकाल सकते हैं।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

ऐकिक नियम निस्संदेह माध्यमिक विद्यालय के गणितीय पाठ्यक्रम का सबसे अधिक व्यावहारिक, जीवनोपयोगी और प्रासंगिक अध्याय है। जहाँ अमूर्त बीजगणितीय प्रमेय दैनिक जीवन से दूर प्रतीत हो सकते हैं, वहीं ऐकिक नियम का उपयोग प्रत्येक व्यक्ति प्रतिदिन अनजाने में करता है। जब भी आप किसी किराना स्टोर या सुपरमार्केट में दो अलग-अलग आकार के पैकेटों की प्रति ग्राम कीमत की तुलना करके सबसे किफायती सामान चुनते हैं, लंबी सड़क यात्रा पर जाने से पहले वाहन के माइलेज के आधार पर आवश्यक पेट्रोल और बजट का आकलन करते हैं, पारिवारिक मेहमानों के आगमन पर भोजन की रेसिपी में सामग्रियों की मात्रा को दुगुना करते हैं, अथवा विदेश यात्रा के दौरान मुद्रा विनिमय की गणना करते हैं, आप वस्तुतः ऐकिक नियम का ही प्रयोग कर रहे होते हैं। यह नियम एक जागरूक और तार्किक उपभोक्ता बनने की आधारशिला प्रदान करता है। विज्ञान और उच्च गणित की शैक्षणिक यात्रा में ऐकिक नियम अनेक विषयों का प्रवेश द्वार है। भौतिक विज्ञान में चाल (प्रति सेकंड दूरी), घनत्व (प्रति एकांक आयतन द्रव्यमान), विद्युत धारा (प्रति सेकंड आवेश), और दाब (प्रति एकांक क्षेत्रफल बल) जैसी सभी मूलभूत भौतिक राशियां ऐकिक दर के सिद्धांत पर ही आधारित हैं। रसायन विज्ञान में रससमीकरणमिति (Stoichiometry) और मोल संकल्पना पूरी तरह ऐकिक विस्तार पर निर्भर करती है। अर्थशास्त्र और वित्त में साधारण ब्याज, चक्रवृद्धि ब्याज, लाभ-हानि प्रतिशत, जीएसटी और कर निर्धारण में ऐकिक नियम की त्रुटिरहित समझ आवश्यक होती है। कक्षा 6 में इस अध्याय पर पूर्ण अधिकार प्राप्त करने से विद्यार्थियों में गणना का आत्मविश्वास जाग्रत होता है और भविष्य की सभी प्रतियोगी व बोर्ड परीक्षाओं के लिए एक मजबूत नींव तैयार होती है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • प्राकृत संख्याओं और पूर्ण संख्याओं के दीर्घ विभाजन (Long Division) और बहु-अंकीय गुणन में दक्षता।
  • उचित, अनुचित और मिश्रित भिन्नों की मूलभूत समझ तथा भिन्नों का सरलतम रूप में रूपांतरण।
  • दशमलव संख्याओं, दशमलव स्थानीय मान और दशमलवों के जोड़, घटाव, गुणा व भाग का आधारभूत ज्ञान।
  • मानक मीट्रिक मात्रक रूपांतरणों का ज्ञान: 1 किग्रा = 1,000 ग्राम, 1 लीटर = 1,000 मिलीलीटर, 1 किमी = 1,000 मीटर, 1 मीटर = 100 सेमी।
  • समय के मात्रकों की समझ: 1 घंटा = 60 मिनट, 1 मिनट = 60 सेकंड।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • ऐकिक नियम की सटीक गणितीय परिभाषा, शाब्दिक अर्थ और द्वि-चरणीय संक्रियात्मक संरचना (भाग फिर गुणा) को स्पष्ट रूप से समझाना।
  • प्रत्यक्ष विचरण (Direct Variation) और प्रतिलोम विचरण के मध्य अंतर पहचानना और यह परखना कि राशियां समान दिशा में परिवर्तित हो रही हैं या नहीं।
  • प्रकार A प्रश्नों को पूर्ण सटीकता से हल करना: भाग देकर 1 इकाई का मान निकालना और गुणा द्वारा अभीष्ट मात्रा का कुल मूल्य ज्ञात करना।
  • प्रकार B प्रश्नों को धाराप्रवाह रूप से हल करना: किसी निश्चित उपलब्ध बजट या धनराशि में खरीदी जा सकने वाली अधिकतम वस्तुओं की संख्या निकालना।
  • एकसमान गति के प्रश्नों में ऐकिक नियम का अनुप्रयोग करके चाल (1 घंटे की दूरी), किसी निश्चित समय में दूरी, तथा दूरी हेतु आवश्यक समय निकालना।
  • व्यापारिक मात्रकों (1 दर्जन = 12, 1 कोरी = 20, 1 ग्रॉस = 144) और मीट्रिक इकाइयों का मात्रक समांगीकरण प्रश्नों में सफलतापूर्वक करना।
  • भिन्नात्मक और दशमलव इकाई मानों को बिना समय-पूर्व सन्निकटन (Rounding off) के सटीकता से हल करना ताकि अंतिम उत्तर विकृत न हो।
  • आईसीएसई बोर्ड परीक्षा के 4-चरणीय हल प्रारूप का पालन करना: दिया गया मान लिखना, 1 इकाई निकालना, अभीष्ट से गुणा करना, और तार्किक औचित्य की जांच करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 मॉड्यूल 1: ऐकिक नियम की संकल्पना, श...
2 मॉड्यूल 2: प्रत्यक्ष विचरण — संकल्प...
3 मॉड्यूल 3: प्रकार A प्रश्न — दी गई...
4 मॉड्यूल 4: प्रकार B प्रश्न — दिए गए...
5 मॉड्यूल 5: एकसमान गति, चाल, दूरी एव...
6 मॉड्यूल 6: बहु-इकाई मात्रक एवं रूपा...
7 मॉड्यूल 7: अनुप्रयुक्त वाणिज्यिक गण...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

मॉड्यूल 1: ऐकिक नियम की संकल्पना, शाब्दिक उत्पत्ति एवं आधारभूत सिद्धांत

दैनिक जीवन और व्यापारिक अंकगणित में हमें अक्सर ऐसी स्थितियों का सामना करना पड़ता है जहाँ वस्तुओं के एक निश्चित समूह का कुल मूल्य, भार, दूरी या समय ज्ञात होता है, और हमें उसी अनुपात में किसी अन्य संख्या का मान ज्ञात करना होता है। ऐसी समानुपातिक समस्याओं को पूर्ण सटीकता से हल करने वाली गणितीय विधि को ऐकिक नियम (Unitary Method) कहा जाता है।

शाब्दिक उत्पत्ति एवं औपचारिक परिभाषा

हिंदी में 'ऐकिक' शब्द का मूल स्रोत 'एक' (अर्थात एकल इकाई) है। इसी प्रकार अंग्रेजी में 'Unitary' शब्द लैटिन और अंग्रेजी मूल शब्द 'Unit' से बना है, जिसका अर्थ भी 'एक' होता है।

औपचारिक परिभाषा: ऐकिक नियम वह अंकगणितीय प्रक्रिया है जिसमें दी गई अनेक इकाइयों के कुल मान से पहले भाग (Division) द्वारा एक एकल इकाई (1 वस्तु, 1 घंटा, 1 किलोग्राम, 1 लीटर) का मान निकाला जाता है, और फिर उस एकल मान में अभीष्ट इकाइयों से गुणा (Multiplication) करके कुल मान प्राप्त किया जाता है।

सार्वभौमिक द्वि-चरणीय संक्रिया तंत्र

ऐकिक नियम दो चरणों वाले एक सुव्यवस्थित तार्किक सेतु के रूप में कार्य करता है। यह किसी भी जटिल समस्या को दो सरल प्राथमिक संक्रियाओं में विभाजित कर देता है:

चरण 1 : भाग दें (DIVISION)

इकाई मान न्यूनीकरण चरण

अनेक वस्तुओं से 1 एकल वस्तु पर आना। जब हम अधिक वस्तुओं से एक वस्तु की ओर जाते हैं, तो मान आनुपातिक रूप से घटता है। अतः हम भाग करते हैं:

1 इकाई का मान = (दिया गया कुल मान) ÷ (दी गई इकाइयों की संख्या n)
चरण 2 : गुणा करें (MULTIPLICATION)

अभीष्ट मान विस्तार चरण

1 एकल वस्तु से अभीष्ट वस्तुओं (m) पर जाना। जब हम एक वस्तु से अधिक वस्तुओं की ओर जाते हैं, तो मान आनुपातिक रूप से बढ़ता है। अतः हम गुणा करते हैं:

m इकाइयों का मान = (1 इकाई का मान) × (अभीष्ट इकाइयों की संख्या m)

घटाव या जोड़ की विफलता: समानुपातिक बनाम योगात्मक चिंतन

शुरुआती विद्यार्थियों में प्रायः एक भ्रांति देखी जाती है कि वे राशियों की तुलना जोड़ या घटाव से करने लगते हैं। उदाहरण के लिए, यदि 4 पेंसिलों का मूल्य ₹24 है और 7 पेंसिलों का मूल्य पूछा जाए, तो कुछ विद्यार्थी सोच सकते हैं: "7 पेंसिलें 4 से 3 अधिक हैं, तो क्या ₹24 में 3 जोड़ दें?"

यह चिंतन पूर्णतः त्रुटिपूर्ण है क्योंकि बाजार में वस्तुएं गुणात्मक (Multiplicatively) रूप से बढ़ती हैं, न कि योगात्मक रूप से। प्रत्येक पेंसिल का आंतरिक व्यावसायिक मूल्य ₹24 ÷ 4 = ₹6 है। इसलिए 7 पेंसिलों का मूल्य 7 × ₹6 = ₹42 होगा (न कि ₹24 + 3 = ₹27)। ऐकिक नियम अनिवार्य रूप से बीच में 1 इकाई का मान निकालकर विद्यार्थियों को इस योगात्मक भ्रम से सुरक्षित रखता है।

महत्वपूर्ण शैक्षणिक सूत्र:

जब भी आपको अनेक का मान देकर अनेक का मान पूछा जाए, तो आप एक छलांग में सीधे उत्तर तक नहीं पहुंच सकते। आपको पहले 1 इकाई के आधारभूत पुल से होकर ही गुजरना होगा!

मॉड्यूल 2: प्रत्यक्ष विचरण — संकल्पना, विशेषताएं एवं पहचान

किसी भी प्रश्न में आंख मूंदकर भाग और गुणा करने से पूर्व, आईसीएसई के विद्यार्थी को दोनों राशियों के मध्य संबंध की प्रकृति को समझना चाहिए। कक्षा 6 में पढ़ाया जाने वाला मानक ऐकिक नियम प्रत्यक्ष विचरण (Direct Variation या सीधा समानुपात) के गणितीय नियम पर आधारित होता है।

प्रत्यक्ष विचरण का गणितीय सिद्धांत

दो राशियां x और y प्रत्यक्ष विचरण में तब कहलाती हैं, जब x में वृद्धि होने पर y में भी उसी अनुपात में वृद्धि हो, या x में कमी होने पर y में भी उसी अनुपात में कमी आए, जिससे उनका अनुपात (भागफल) सदैव स्थिर रहता है:

x / y = k     (जहाँ k एक धनात्मक नियतांक है जिसे विचरण नियतांक या इकाई दर कहते हैं)

तुल्य रूप से: y = k × x। यदि राशि x को दोगुना किया जाए, तो y भी दोगुना हो जाता है। यदि x आधा हो, तो y भी आधा हो जाता है।

दैनिक जीवन में प्रत्यक्ष विचरण के प्रमुख उदाहरण

व्यावहारिक क्षेत्र प्रथम राशि (x) द्वितीय राशि (y) इकाई दर (k) का अर्थ
व्यापार / क्रय-विक्रय वस्तुओं की संख्या कुल मूल्य (₹) प्रति वस्तु मूल्य (₹/इकाई)
वाहन / यात्रा ईंधन की मात्रा (लीटर) तय दूरी (किमी) माइलेज (किमी/लीटर)
एकसमान गति बीता हुआ समय (घंटे) तय दूरी (किमी) चाल (किमी/घंटा)
श्रम एवं मजदूरी कार्य दिवस कुल मजदूरी (₹) दैनिक मजदूरी दर (₹/दिन)
भार एवं अनाज अनाज का भार (किग्रा) कुल कीमत (₹) प्रति किग्रा भाव (₹/किग्रा)

प्रत्यक्ष विचरण की पहचान हेतु तार्किक दिशा परीक्षण

परीक्षा में हल लिखने से पूर्व सदैव स्वयं से यह प्रश्न पूछें:

  • स्वयं से पूछें: "यदि मैं अधिक वस्तुएं खरीदूँगा, तो कुल बिल अधिक आएगा या कम?" यदि अधिक, तो यह प्रत्यक्ष विचरण है।
  • स्वयं से पूछें: "यदि कार अधिक समय तक चलेगी, तो अधिक दूरी तय करेगी या कम?" यदि अधिक, तो यह प्रत्यक्ष विचरण है।
  • प्रत्यक्ष नियम: सभी प्रत्यक्ष विचरण स्थितियों में, पहले भाग देकर 1 इकाई निकालें, फिर गुणा करके अभीष्ट मान प्राप्त करें।
परीक्षक जाल चेतावनी (प्रतिलोम विचरण से सावधान):

जब प्रश्न में मजदूरों की संख्या और कार्य पूरा करने के दिन दिए हों, तो सावधान रहें! यदि 5 मजदूर एक दीवार 12 दिन में बनाते हैं, तो क्या 10 मजदूर अधिक दिन लेंगे? नहीं! अधिक मजदूर मिलकर काम को जल्दी (कम दिनों में) समाप्त कर देंगे। इसे प्रतिलोम विचरण (Inverse Variation) कहते हैं, जहाँ 1 मजदूर के दिन निकालने हेतु पहले गुणा (5 × 12 = 60 दिन) किया जाता है। हमेशा विचरण की दिशा परखें!

मॉड्यूल 3: प्रकार A प्रश्न — दी गई संख्या हेतु कुल मूल्य ज्ञात करना

कक्षा 6 की परीक्षाओं में सबसे सामान्य और सर्वाधिक पूछा जाने वाला प्रारूप प्रकार A है: दी गई कुछ वस्तुओं का कुल मूल्य ज्ञात होने पर, किसी अन्य अभीष्ट संख्या की वस्तुओं का कुल मूल्य निकालना।

प्रकार A हेतु मानक चरणबद्ध प्रारूप (Algorithm)

दिया है: n वस्तुओं का मूल्य = ₹C
ज्ञात करना है: m वस्तुओं का कुल मूल्य

कथन 1: n वस्तुओं का मूल्य = ₹C
कथन 2: 1 वस्तु का मूल्य = ₹(C / n)         [भाग संक्रिया]
कथन 3: m वस्तुओं का मूल्य = ₹(C / n) × m    [गुणा संक्रिया]

स्थिति 1: मात्रा में वृद्धि (अभीष्ट संख्या m दी गई संख्या n से बड़ी है)

हल किया गया उदाहरण 1:

यदि 8 एक जैसी ज्यामिति पेटियों (Geometry boxes) का मूल्य ₹360 है, तो ऐसी 15 ज्यामिति पेटियों का मूल्य क्या होगा?

• 8 ज्यामिति पेटियों का मूल्य = ₹360
• अतः 1 ज्यामिति पेटी का मूल्य = ₹360 ÷ 8 = ₹45
• इसलिए 15 ज्यामिति पेटियों का मूल्य = 15 × ₹45 = ₹675
अंतिम उत्तर: 15 ज्यामिति पेटियों का मूल्य ₹675 है।

स्थिति 2: मात्रा में कमी (अभीष्ट संख्या m दी गई संख्या n से छोटी है)

हल किया गया उदाहरण 2:

25 फाइलों के एक थोक पैकेट का मूल्य ₹875 है। एक विद्यार्थी को केवल 6 फाइलों की आवश्यकता है। उसे कितने रुपये देने होंगे?

• 25 फाइलों का मूल्य = ₹875
• अतः 1 फाइल का मूल्य = ₹875 ÷ 25 = ₹35
• इसलिए 6 फाइलों का मूल्य = 6 × ₹35 = ₹210
अंतिम उत्तर: विद्यार्थी को ₹210 देने होंगे।

महत्वपूर्ण रणनीति: भिन्नात्मक इकाई मानों को संभालना

अनेक बोर्ड प्रश्नों में 1 वस्तु का मान पूर्ण संख्या नहीं आता, बल्कि अशांत या आवर्ती दशमलव बनता है। ऐसी स्थिति में समय से पहले दशमलव सन्निकटन कभी न करें! इकाई मूल्य को साधारण भिन्न (Fraction) के रूप में ही रखें:

उदाहरण: 14 अभ्यास पुस्तिकाओं का मूल्य ₹245 है। 18 पुस्तिकाओं का मूल्य ज्ञात कीजिए।

1 पुस्तिका का मूल्य = ₹(245 / 14)। अंश और हर को 7 से विभाजित करने पर: ₹(35 / 2) प्राप्त होता है।
इसे दशमलव (17.5) में बदले बिना भिन्न ही रखें: 18 पुस्तिकाओं का मूल्य = 18 × (35 / 2) = 9 × 35 = ₹315।
भिन्न रूप में रखने से अगली संख्या के साथ उभयनिष्ठ गुणनखंड आसानी से कट जाते हैं और सटीक पूर्णांक उत्तर मिलता है!

मॉड्यूल 4: प्रकार B प्रश्न — दिए गए बजट या धनराशि में वस्तुओं की संख्या ज्ञात करना

दुकानदारी और बजट प्रबंधन में प्रायः हमारे पास धन की एक सीमित राशि होती है, और हम यह जानना चाहते हैं: "निश्चित बजट ₹B में कुल कितनी वस्तुएं खरीदी जा सकती हैं?" ऐसे प्रश्नों को प्रकार B प्रश्न कहा जाता है।

प्रकार B के समाधान हेतु दो दृष्टिकोण

प्रकार B प्रश्नों को हल करने के दो गणितीय मार्ग हैं। दोनों से समान उत्तर मिलता है, किंतु विधि 1 आईसीएसई उत्तर पुस्तिकाओं में सबसे अधिक स्वीकृत है:

विधि 1: पहले 1 वस्तु का मूल्य (मानक विधि)

1. 1 वस्तु का मूल्य निकालें = (कुल मूल्य C) ÷ n.
2. कुल बजट B में 1 वस्तु के मूल्य से भाग दें:

वस्तुओं की संख्या = कुल बजट B ÷ (1 वस्तु का मूल्य)
विधि 2: प्रति रुपये वस्तुओं की दर (वैकल्पिक)

1. ₹C में मिलने वाली वस्तुएं = n.
2. ₹1 में मिलने वाली वस्तुएं = n / C.
3. ₹B में मिलने वाली वस्तुएं = (n / C) × B.

वस्तुओं की संख्या = (n ÷ C) × B

हल किया गया उदाहरण

उदाहरण:

एक स्टेशनरी विक्रेता 18 जेल पेन ₹270 में बेचता है। एक विद्यार्थी ₹405 में कितने जेल पेन खरीद सकता है?

• 18 जेल पेनों का मूल्य = ₹270
• अतः 1 जेल पेन का मूल्य = ₹270 ÷ 18 = ₹15
• कुल उपलब्ध धनराशि (बजट) = ₹405
• ₹405 में खरीदे जा सकने वाले पेन = कुल बजट ÷ 1 पेन का मूल्य = 405 ÷ 15 = 27
अंतिम उत्तर: विद्यार्थी ₹405 में 27 जेल पेन खरीद सकता है।
कथन संरेखण का स्वर्णिम नियम:

आईसीएसई बोर्ड में शिक्षकों का सख्त निर्देश होता है कि जिस राशि को ज्ञात करना हो, उसे कथन में सदैव दाईं ओर (Right Hand Side) लिखा जाए। प्रकार A में मूल्य ज्ञात करना था, अतः मूल्य दाईं ओर था: "1 वस्तु का मूल्य = ₹..."। प्रकार B में वस्तुओं की संख्या ज्ञात करनी है, अतः संख्या दाईं ओर होगी: "₹270 में मिलने वाले पेन = 18"। इस नियम का पालन करने से प्रस्तुति के पूर्ण अंक मिलते हैं!

मॉड्यूल 5: एकसमान गति, चाल, दूरी एवं समय में ऐकिक नियम

कक्षा 6 गणित में ऐकिक नियम का एक अत्यंत महत्वपूर्ण भौतिक अनुप्रयोग एकसमान गति (Uniform Motion) है। जब कोई वाहन एकसमान चाल से गतिमान होता है, तो उसके द्वारा तय की गई दूरी व्यतीत हुए समय के सीधे समानुपाती होती है।

चाल : एक मौलिक इकाई दर

चाल (Speed) क्या है? गणितीय रूप से, चाल एकांक समय (1 घंटा, 1 मिनट या 1 सेकंड) में तय की गई दूरी है।

चाल = (1 घंटे में तय दूरी) = कुल दूरी ÷ कुल समय (घंटों में)

चूंकि चाल वस्तुतः प्रति घंटे की ऐकिक दर ही है, अतः गति के सभी प्रश्नों को बिना किसी जटिल भौतिकी सूत्र के केवल दो चरणों वाले ऐकिक नियम से हल किया जा सकता है!

गति के दो प्रमुख प्रश्न प्रारूप

प्रारूप 1: अभीष्ट समय में दूरी ज्ञात करना

• चरण 1: 1 घंटे में दूरी = कुल दूरी ÷ दिए गए घंटे
• चरण 2: t घंटों में दूरी = (1 घंटे की दूरी) × t

उदाहरण: एक रेलगाड़ी 4 घंटे में 240 किमी जाती है।
1 घंटे में दूरी = 240 ÷ 4 = 60 किमी।
7 घंटों में दूरी = 60 × 7 = 420 किमी।

प्रारूप 2: अभीष्ट दूरी हेतु समय ज्ञात करना

• चरण 1: 1 किमी हेतु समय = कुल समय ÷ कुल दूरी
• अथवा: चाल निकालें (किमी/घंटा), फिर समय = दूरी ÷ चाल

उदाहरण: वही रेलगाड़ी (चाल = 60 किमी/घंटा)।
540 किमी जाने में कितना समय लगेगा?
समय = 540 ÷ 60 = 9 घंटे।

समय रूपांतरण: घंटे और मिनट का समन्वय

यदि कोई बस 2 घंटे में 90 किमी चलती है, और 40 मिनट में दूरी पूछी जाए, तो समय को मिनट में बदलकर ऐकिक दर निकालें:

• 2 घंटे (120 मिनट) में तय दूरी = 90 किमी
• 1 मिनट में तय दूरी = 90 ÷ 120 = 9/12 = 3/4 किमी (या 0.75 किमी)
• 40 मिनट में तय दूरी = 40 × (3/4) = 10 × 3 = 30 किमी।
सदैव गुणा करने से पूर्व समय के मात्रक को एक समान कर लें!

मॉड्यूल 6: बहु-इकाई मात्रक एवं रूपांतरण (दर्जन, ग्रॉस, कोरी, मीट्रिक प्रणाली)

व्यापारिक प्रश्नों में वस्तुएं अक्सर दर्जन, कोरी या ग्रॉस जैसे सामूहिक मात्रकों में खरीदी जाती हैं। इसी प्रकार अनाज, तरल पदार्थ और कपड़े मीट्रिक प्रणाली (किग्रा, ग्राम, लीटर, मीटर) में मापे जाते हैं। ऐकिक नियम लगाने से पूर्व मात्रक समांगीकरण (Unit Homogenisation) करना गणित का अनिवार्य नियम है।

प्रमुख व्यापारिक गणना मात्रक

1 दर्जन (DOZEN)
12 इकाइयां
अंडे, केले, पेन
1 कोरी / बीसी (SCORE)
20 इकाइयां
सेब, आम, चूड़ियां
1 ग्रॉस (GROSS)
144 इकाइयां
12 दर्जन (बटन, पेंसिलें)

मीट्रिक प्रणाली रूपांतरण तालिका

मापन आयाम बड़ा मात्रक छोटा मात्रक रूपांतरण संबंध
द्रव्यमान / भार 1 किलोग्राम (किग्रा) ग्राम 1 किग्रा = 1,000 ग्राम
धारिता / आयतन 1 लीटर (ली) मिलीलीटर (मिली) 1 ली = 1,000 मिली
लंबाई / दूरी 1 किलोमीटर (किमी) मीटर (मी) 1 किमी = 1,000 मीटर
लंबाई / दूरी 1 मीटर (मी) सेंटीमीटर (सेमी) 1 मी = 100 सेमी

मात्रक समांगीकरण सहित हल किया गया उदाहरण

उदाहरण:

2.5 किग्रा बासमती चावल का मूल्य ₹225 है। 800 ग्राम चावल का मूल्य क्या होगा?

• चरण 1: किग्रा को ग्राम में बदलें: 2.5 किग्रा = 2.5 × 1,000 ग्राम = 2,500 ग्राम
• 2,500 ग्राम चावल का मूल्य = ₹225
• चरण 2: 1 ग्राम चावल का मूल्य = ₹225 ÷ 2,500 = ₹(225 / 2,500) = ₹0.09
• चरण 3: 800 ग्राम चावल का मूल्य = 800 × ₹0.09 = ₹72
अंतिम उत्तर: 800 ग्राम चावल का मूल्य ₹72 है।

मॉड्यूल 7: अनुप्रयुक्त वाणिज्यिक गणित एवं 4-चरणीय बोर्ड परीक्षा रणनीति

कक्षा 6 की बोर्ड परीक्षाओं में मजदूरों की मजदूरी, ईंधन व्यय और दो प्रतिस्पर्धात्मक पैकेटों में से 'सर्वोत्तम खरीद (Best Buy)' का चयन करने वाले बहु-चरणीय प्रश्न पूछे जाते हैं। पूरे अंक अर्जित करने के लिए विद्यार्थियों को 4-चरणीय कार्यविधि का कड़ाई से पालन करना चाहिए।

उपभोक्ता अंकगणित : इकाई दर द्वारा 'सर्वोत्तम खरीद' की पहचान

सुपरमार्केट में एक ही वस्तु विभिन्न पैकेट आकारों और कीमतों में मिलती है। ऐकिक नियम द्वारा प्रति इकाई दर निकालकर हम यह तय करते हैं कि कौन सा विकल्प अधिक किफायती है:

किफायती खरीद का उदाहरण:

ब्रांड A 500 ग्राम डिटर्जेंट पाउडर ₹140 में बेचता है। ब्रांड B 750 ग्राम डिटर्जेंट पाउडर ₹195 में बेचता है। कौन सा ब्रांड अधिक किफायती है?

• ब्रांड A: 1 ग्राम का मूल्य = 140 ÷ 500 = ₹0.28 प्रति ग्राम (अर्थात ₹28 प्रति 100 ग्राम)
• ब्रांड B: 1 ग्राम का मूल्य = 195 ÷ 750 = ₹0.26 प्रति ग्राम (अर्थात ₹26 प्रति 100 ग्राम)
• तुलना: चूंकि ₹0.26 का मान ₹0.28 से कम है, अतः ब्रांड B प्रति इकाई सस्ता है।
अंतिम निष्कर्ष: ब्रांड B अधिक किफायती (Best Buy) है।

आईसीएसई बोर्ड परीक्षा का 4-चरणीय हल प्रारूप

चरण 1: दी गई जानकारी पहचानें व संरेखित करें

प्रश्न को ध्यान से पढ़ें। ज्ञात युग्म और अज्ञात पद को पहचानें। जो पद ज्ञात करना है, उसे कथन में सदैव दाईं ओर रखें।

चरण 2: मात्रक समांगीकरण निष्पादित करें

भाग देने से पूर्व दोनों राशियों को एक ही मात्रक में बदलें (किग्रा को ग्राम में, घंटे को मिनट में, दर्जन को इकाइयों में)।

चरण 3: भाग द्वारा 1 इकाई का मान ज्ञात करें

ठीक 1 इकाई का मान निकालें। यदि मान अशांत दशमलव बने, तो उसे न्यूनतम भिन्न रूप में ही रखें ताकि आगे गुणनखंड कट सकें।

चरण 4: गुणा करें व तार्किक औचित्य जांचें

इकाई दर में अभीष्ट संख्या से गुणा करें। उत्तर के साथ सही भौतिक मात्रक (₹, किग्रा, किमी, घंटे) लिखें और तार्किक जांच करें।

महत्वपूर्ण सूत्र, सर्वसमिकाएँ एवं प्रमेय

इकाई मान समीकरण (चरण 1 : भाग संक्रिया)
1 इकाई का मान = (दिया गया कुल मान) / (दी गई इकाइयों की संख्या n)
अभीष्ट विस्तार समीकरण (चरण 2 : गुणा संक्रिया)
अभीष्ट मान = (1 इकाई का मान) × (अभीष्ट इकाइयों की संख्या m)
बजट क्रय सूत्र (प्रकार B संख्या गणना)
वस्तुओं की संख्या = (कुल उपलब्ध बजट B) / (1 वस्तु का मूल्य)
प्रत्यक्ष विचरण का नियम (समानुपातिक नियतांक)
x₁ / y₁ = x₂ / y₂ = k (स्थिर इकाई दर)
एकसमान चाल एवं दूरी सूत्र
t घंटों में दूरी = [कुल दूरी / कुल समय (घंटे)] × t = (चाल) × t
यात्रा समय अवधि सूत्र
आवश्यक समय = (तय की जाने वाली दूरी) / [1 इकाई समय में तय दूरी (चाल)]
व्यापारिक बहु-इकाई रूपांतरण नियतांक
1 दर्जन = 12 इकाइयां | 1 कोरी = 20 इकाइयां | 1 ग्रॉस = 12 दर्जन = 144 इकाइयां
उपभोक्ता सर्वोत्तम खरीद पैमाना (इकाई दर तुलना)
इकाई दर = (पैकेट का कुल मूल्य) / (पैकेट की कुल मात्रा)

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
यदि 15 एक जैसे जेल पेनों का मूल्य ₹225 है, तो ऐसे 8 जेल पेनों का मूल्य ज्ञात कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

चरण 1: दिया गया कथन लिखें। 15 जेल पेनों का मूल्य = ₹225

चरण 2: भाग द्वारा 1 जेल पेन का मूल्य निकालें। 1 जेल पेन का मूल्य = कुल मूल्य ÷ 15 = ₹225 / 15 = ₹15

चरण 3: गुणा द्वारा अभीष्ट 8 जेल पेनों का मूल्य निकालें। 8 जेल पेनों का मूल्य = 8 × 1 पेन का मूल्य = 8 × ₹15 = ₹120

अंतिम उत्तर: 8 जेल पेनों का मूल्य ₹120 है।

उदाहरण 2
एक स्वचालित कारखाने की मशीन 6 घंटे के निरंतर संचालन में 720 लोहे के बोल्ट बनाती है। इसी स्थिर उत्पादन दर से, 1,080 बोल्ट बनाने में उसे कितने घंटे लगेंगे?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

चरण 1: उत्पादन का कथन लिखें। 6 घंटे में मशीन बनाती है = 720 बोल्ट

चरण 2: 1 घंटे में उत्पादन दर (इकाई दर) निकालें। 1 घंटे में बने बोल्ट = 720 ÷ 6 = 120 बोल्ट प्रति घंटा

चरण 3: 1,080 बोल्ट बनाने में आवश्यक समय ज्ञात करें। आवश्यक समय = कुल अभीष्ट बोल्ट ÷ 1 घंटे का उत्पादन = 1,080 / 120 = 9 घंटे

वैकल्पिक प्रतिलोम कथन विधि: 720 बोल्ट बनाने में लगा समय = 6 घंटे 1 बोल्ट बनाने में लगा समय = 6 / 720 घंटे = 1 / 120 घंटे 1,080 बोल्ट बनाने में लगा समय = 1,080 × (1 / 120) = 9 घंटे

अंतिम उत्तर: 1,080 बोल्ट बनाने में मशीन को 9 घंटे लगेंगे।

उदाहरण 3
एक दर्जन अभ्यास पुस्तिकाओं (कॉपियों) का मूल्य ₹192 है। (क) ऐसी 7 अभ्यास पुस्तिकाओं का मूल्य क्या होगा? (ख) ₹320 में कितनी अभ्यास पुस्तिकाएं खरीदी जा सकती हैं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

मात्रक समांगीकरण: हम जानते हैं कि 1 दर्जन = 12 इकाइयां। अतः 12 अभ्यास पुस्तिकाओं का मूल्य = ₹192

1 अभ्यास पुस्तिका का मूल्य ज्ञात करना: 1 अभ्यास पुस्तिका का मूल्य = ₹192 ÷ 12 = ₹16


(क) 7 अभ्यास पुस्तिकाओं का मूल्य: 7 पुस्तिकाओं का मूल्य = 7 × 1 पुस्तिका का मूल्य = 7 × ₹16 = ₹112


(ख) ₹320 में खरीदी जा सकने वाली पुस्तिकाएं: उपलब्ध कुल धनराशि = ₹320 पुस्तिकाओं की संख्या = कुल धनराशि ÷ 1 पुस्तिका का मूल्य = 320 ÷ 16 = 20 पुस्तिकाएं

अंतिम उत्तर: (क) 7 अभ्यास पुस्तिकाओं का मूल्य ₹112 है। (ख) ₹320 में 20 अभ्यास पुस्तिकाएं खरीदी जा सकती हैं।

उदाहरण 4
3.5 किग्रा उत्तम चीनी का मूल्य ₹154 है। ज्ञात कीजिए: (i) 8 किग्रा चीनी का मूल्य, (ii) 500 ग्राम चीनी का मूल्य, और (iii) ₹352 में कितने किलोग्राम चीनी खरीदी जा सकती है।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

चरण 1: 1 किग्रा चीनी का मूल्य (इकाई दर) ज्ञात करना। 3.5 किग्रा चीनी का मूल्य = ₹154 1 किग्रा चीनी का मूल्य = ₹154 ÷ 3.5 = 154 / (35 / 10) = (154 × 10) / 35 = 1540 / 35 = ₹44 प्रति किग्रा


(i) 8 किग्रा चीनी का मूल्य: 8 किग्रा का मूल्य = 8 × 1 किग्रा का मूल्य = 8 × ₹44 = ₹352


(ii) 500 ग्राम चीनी का मूल्य: ग्राम को किलोग्राम में बदलें: 500 ग्राम = 500 / 1000 किग्रा = 0.5 किग्रा (या 1/2 किग्रा) 500 ग्राम का मूल्य = 0.5 × ₹44 = ₹22


(iii) ₹352 में खरीदी जा सकने वाली चीनी: चीनी की मात्रा = कुल धनराशि ÷ 1 किग्रा का मूल्य = 352 ÷ 44 = 8 किग्रा

अंतिम उत्तर: (i) 8 किग्रा चीनी का मूल्य = ₹352 (ii) 500 ग्राम चीनी का मूल्य = ₹22 (iii) ₹352 में प्राप्त चीनी = 8 किग्रा

उदाहरण 5
एक पर्यटक बस एकसमान चाल से 3 घंटे में 180 किमी की दूरी तय करती है। ज्ञात कीजिए: (i) बस द्वारा 5 घंटे में तय की गई दूरी, (ii) 40 मिनट में तय की गई दूरी, और (iii) 450 किमी की यात्रा पूरी करने में बस द्वारा लिया गया समय।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

चरण 1: चाल (एकांक समय 1 घंटे में तय दूरी) निकालना। 3 घंटे में तय दूरी = 180 किमी 1 घंटे में तय दूरी (चाल) = 180 ÷ 3 = 60 किमी प्रति घंटा


(i) 5 घंटे में तय दूरी: दूरी = चाल × समय = 60 किमी/घंटा × 5 घंटे = 300 किमी


(ii) 40 मिनट में तय दूरी: विधि 1 (मिनट को घंटे में बदलकर): 40 मिनट = 40 / 60 घंटा = 2 / 3 घंटा दूरी = 60 × (2 / 3) = 20 × 2 = 40 किमी

विधि 2 (प्रति मिनट ऐकिक दर द्वारा): 60 मिनट में दूरी = 60 किमी 1 मिनट में दूरी = 60 ÷ 60 = 1 किमी 40 मिनट में दूरी = 40 × 1 किमी = 40 किमी


(iii) 450 किमी की दूरी हेतु समय: समय = कुल दूरी ÷ चाल = 450 ÷ 60 = 45 / 6 = 15 / 2 = 7.5 घंटे 0.5 घंटे को मिनट में बदलने पर: 0.5 × 60 = 30 मिनट कुल समय = 7 घंटे 30 मिनट

अंतिम उत्तर: (i) 5 घंटे में दूरी = 300 किमी (ii) 40 मिनट में दूरी = 40 किमी (iii) 450 किमी हेतु समय = 7 घंटे 30 मिनट (या 7.5 घंटे)

उदाहरण 6
एक निर्माण ठेकेदार के पास 12 कुशल मजदूर काम करते हैं जो 1 दिन के काम के लिए कुल ₹10,800 कमाते हैं। (i) 1 मजदूर की दैनिक मजदूरी क्या है? (ii) 24 कार्य दिवसों वाले एक महीने में 1 मजदूर की कुल कमाई क्या होगी? (iii) यदि ठेकेदार 18 मजदूरों को 15 दिनों के एक विशेष प्रोजेक्ट के लिए काम पर रखता है, तो कुल मजदूरी खर्च कितना होगा? (iv) यदि कोई दूसरा ठेकेदार 1 मजदूर को 6 दिन के काम के लिए ₹4,800 देता है, तो कौन सा ठेकेदार अधिक दैनिक मजदूरी दर देता है और कितनी अधिक?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

चरण 1: 1 मजदूर की 1 दिन की मजदूरी ज्ञात करना। 12 मजदूरों की 1 दिन की मजदूरी = ₹10,800 1 मजदूर की दैनिक मजदूरी = ₹10,800 ÷ 12 = ₹900 प्रति दिन


(i) 1 मजदूर की दैनिक मजदूरी: = ₹900


(ii) 24 कार्य दिवसों में 1 मजदूर की कुल कमाई: कुल कमाई = दैनिक मजदूरी × दिनों की संख्या = ₹900 × 24 = ₹21,600


(iii) 18 मजदूरों का 15 दिनों का कुल मजदूरी खर्च: 1 मजदूर की 1 दिन की मजदूरी = ₹900 18 मजदूरों की 1 दिन की मजदूरी = 18 × ₹900 = ₹16,200 18 मजदूरों की 15 दिनों की मजदूरी = 15 × ₹16,200 = ₹2,43,000


(iv) दूसरे ठेकेदार के साथ मजदूरी की तुलना: दूसरा ठेकेदार: 1 मजदूर को 6 दिन के लिए ₹4,800 मिलते हैं दूसरे ठेकेदार की दैनिक मजदूरी दर = ₹4,800 ÷ 6 = ₹800 प्रति दिन पहले ठेकेदार की दैनिक मजदूरी दर = ₹900 प्रति दिन

तुलना: ₹900 का मान ₹800 से अधिक है। अंतर = ₹900 - ₹800 = ₹100 प्रति दिन

अंतिम उत्तर: (i) 1 मजदूर की दैनिक मजदूरी = ₹900 (ii) 24 दिनों में 1 मजदूर की कमाई = ₹21,600 (iii) 18 मजदूरों का 15 दिनों का मजदूरी बिल = ₹2,43,000 (iv) पहला ठेकेदार अधिक दैनिक मजदूरी देता है, जो दूसरे ठेकेदार से ₹100 प्रति दिन अधिक है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

प्रत्यक्ष विचरण में भाग देने से पहले सीधे गुणा कर देना (जैसे यदि 6 कॉपियों का मूल्य ₹120 है, तो 120 ÷ 6 के स्थान पर 120 × 6 कर देना)।

सही वैज्ञानिक तथ्य

प्रत्यक्ष विचरण में सदैव दो चरणों के क्रम का कड़ाई से पालन करें: चरण 1 (भाग) द्वारा 1 इकाई का मान निकालें, फिर चरण 2 (गुणा) द्वारा अभीष्ट मात्रा का मान निकालें।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

भिन्नात्मक या दशमलव इकाई मानों का समय से पहले सन्निकटन (Rounding off) कर देना (जैसे 1 वस्तु का मूल्य ₹14.285 आने पर उसे ₹14 मान लेना)।

सही वैज्ञानिक तथ्य

अंतिम गुणा चरण तक इकाई मान को न्यूनतम साधारण भिन्न (जैसे ₹100/7) के रूप में ही रखें ताकि उभयनिष्ठ गुणनखंड आसानी से कट जाएं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

इकाई दर निकालने से पूर्व मात्रक समांगीकरण (Unit homogenisation) न करना (जैसे 2 किग्रा का मूल्य ₹120 होने पर 500 ग्राम हेतु सीधे (120/2) × 500 कर देना)।

सही वैज्ञानिक तथ्य

पहले सभी राशियों को एक ही मात्रक में बदलें: 2 किग्रा = 2,000 ग्राम, जिससे 1 ग्राम की दर 120 ÷ 2000 = ₹0.06/ग्राम होगी, और 500 ग्राम का मूल्य 500 × 0.06 = ₹30 होगा।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

प्रकार A (कुल मूल्य ज्ञात करना) और प्रकार B (दिए गए बजट में वस्तुओं की संख्या ज्ञात करना) में भ्रमित होना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

ध्यान से देखें कि क्या पूछा गया है: यदि मूल्य ज्ञात करना है, तो इकाई मूल्य में संख्या से गुणा करें। यदि वस्तुओं की संख्या ज्ञात करनी है, तो कुल बजट में 1 वस्तु के मूल्य से भाग दें।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

एकसमान गति के संबंधों को उलट देना (1 घंटे में दूरी और 1 किमी हेतु समय में भ्रमित होना)।

सही वैज्ञानिक तथ्य

चाल = दूरी ÷ समय (किमी प्रति घंटा)। दूरी ज्ञात करने हेतु चाल में समय से गुणा करें, और समय ज्ञात करने हेतु दूरी में चाल से भाग दें।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

प्रतिलोम विचरण (Inverse Variation) की समस्याओं में सीधे प्रत्यक्ष विचरण का नियम लगाना (जैसे यह मान लेना कि अधिक मजदूर काम में अधिक दिन लेंगे)।

सही वैज्ञानिक तथ्य

विचरण की दिशा जांचें: यदि अधिक मजदूर काम को कम दिनों में पूरा करेंगे, तो यह प्रतिलोम विचरण है (मजदूरों और दिनों का गुणा करके कुल कार्य निकालें, फिर नए मजदूरों से भाग दें)।

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

CISCE / ICSE कक्षा 6 गणित : ऐकिक नियम (THE UNITARY METHOD) द्वि-चरणीय संक्रिया तंत्र • प्रत्यक्ष विचरण संरचना • चाल, कार्य एवं वाणिज्यिक अनुप्रयोग ICSE पाठ्यक्रम चरण 1 : भाग दें इकाई मान न्यूनीकरण चरण 1 एकल इकाई (Unitary Base) का मान ज्ञात करना: 1 इकाई का मान = (दिया गया कुल मान) ÷ (दी गई इकाइयों की संख्या n) • अनेक वस्तुएं ➔ 1 वस्तु (भाग द्वारा संकुचन प्रक्रिया) • उदाहरण: 8 पेनों का मूल्य = ₹160 ➔ 1 पेन का मूल्य = 160 ÷ 8 = ₹20 आधारभूत मान 1 इकाई चरण 2 : गुणा करें अभीष्ट विस्तार चरण अभीष्ट इकाइयों (m) का मान ज्ञात करना: m इकाइयों का मान = (1 इकाई का मान) × (अभीष्ट संख्या m) • 1 वस्तु ➔ अनेक वस्तुएं (गुणा द्वारा विस्तार प्रक्रिया) • उदाहरण: 1 पेन का मूल्य = ₹20 ➔ 12 पेनों का मूल्य = 20 × 12 = ₹240 प्रकार A दी गई संख्या (m) हेतु कुल मूल्य ज्ञात करना दिया है: n वस्तुओं का मूल्य = ₹C। अभीष्ट: m वस्तुओं का कुल मूल्य। सूत्र: अभीष्ट मूल्य = (C / n) × m ✓ चरण 1: कथन लिखें और भाग दें: 1 इकाई का मूल्य = C ÷ n ✓ चरण 2: 1 इकाई के मूल्य में अभीष्ट संख्या m से गुणा करें उदा.: 15 पुस्तकों का मूल्य ₹600 ➔ 1 पुस्तक = ₹40 ➔ 9 पुस्तकें = 40 × 9 = ₹360 प्रकार B दिए गए बजट/धन में वस्तुओं की संख्या ज्ञात करना दिया है: n वस्तुओं का मूल्य = ₹C। अभीष्ट: ₹B में खरीदी जाने वाली वस्तुएं। सूत्र: वस्तुओं की संख्या = कुल बजट B ÷ (1 इकाई का मूल्य) ✓ चरण 1: 1 वस्तु का मूल्य निकालें: इकाई मूल्य = C ÷ n ✓ चरण 2: उपलब्ध धन B में इकाई मूल्य से भाग दें: वस्तुएं = B ÷ इकाई मूल्य उदा.: 12 पेनों का मूल्य ₹180 ➔ 1 पेन = ₹15 ➔ ₹105 में पेन = 105 ÷ 15 = 7 1 एकसमान चाल एवं गति • चाल = 1 इकाई समय में तय दूरी 1 घंटे में दूरी = कुल दूरी ÷ कुल समय • t घंटों में दूरी = (चाल) × t • d किमी हेतु समय = d ÷ (चाल) 2 वाणिज्यिक मात्रक प्रणाली • आवश्यक रूपांतरण नियतांक: • 1 दर्जन = 12 इकाइयां • 1 कोरी = 20 • 1 ग्रॉस = 12 दर्जन = 144 इकाइयां • 1 किग्रा = 1,000 ग्रा • 1 ली = 1,000 मिली • 1 घंटा = 60 मि 3 प्रत्यक्ष विचरण का नियम • स्थिर समानुपातिक अनुपात: x / y = k (स्थिर इकाई दर) • वस्तुएं दुगुनी होने पर मूल्य दुगुना होता है • तार्किक जांच: अधिक वस्तुएं ➔ अधिक मूल्य

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
ऐकिक नियम अंकगणित की वह विधि है जिसमें पहले भाग द्वारा 1 एकल इकाई का मान ज्ञात किया जाता है, और फिर गुणा द्वारा अभीष्ट इकाइयों का कुल मान निकाला जाता है।
मुख्य बिंदु 2
हिंदी में 'ऐकिक' शब्द 'एक' (एकल इकाई) से उत्पन्न हुआ है, जो अंग्रेजी के 'Unit' का समानार्थी है।
मुख्य बिंदु 3
यह विधि मुख्यतः प्रत्यक्ष विचरण (Direct Variation) के सिद्धांत पर आधारित है, जहाँ x / y = k (स्थिर इकाई दर) होता है।
मुख्य बिंदु 4
सार्वभौमिक द्वि-चरणीय संक्रिया चक्र: चरण 1 (भाग: 1 इकाई = कुल मान ÷ दी गई संख्या n) एवं चरण 2 (गुणा: अभीष्ट मान = 1 इकाई मान × अभीष्ट संख्या m)।
मुख्य बिंदु 5
प्रकार A प्रश्नों में दी गई संख्या हेतु कुल मूल्य निकाला जाता है: अभीष्ट मूल्य = (दिया गया कुल मूल्य / n) × m।
मुख्य बिंदु 6
प्रकार B प्रश्नों में दिए गए बजट में खरीदी जा सकने वाली वस्तुओं की संख्या निकाली जाती है: वस्तुओं की संख्या = कुल बजट ÷ (1 वस्तु का मूल्य)।
मुख्य बिंदु 7
एकसमान गति में चाल एकांक समय (1 घंटे) में तय दूरी होती है: t घंटों में दूरी = चाल × t, तथा d किमी हेतु समय = d ÷ चाल।
मुख्य बिंदु 8
व्यापारिक गणना मात्रकों को पहले सामान्य इकाइयों में बदलना अनिवार्य है: 1 दर्जन = 12, 1 कोरी = 20, तथा 1 ग्रॉस = 12 दर्जन = 144 इकाइयां।
मुख्य बिंदु 9
मीट्रिक मात्रकों का पहले समांगीकरण आवश्यक है: 1 किग्रा = 1,000 ग्राम, 1 लीटर = 1,000 मिली, 1 किमी = 1,000 मीटर, और 1 घंटा = 60 मिनट।
मुख्य बिंदु 10
सुपरमार्केट में 'सर्वोत्तम खरीद (Best Buy)' की पहचान इकाई दर (मूल्य ÷ मात्रा) की तुलना द्वारा की जाती है; कम इकाई दर वाला पैकेट अधिक किफायती होता है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
यदि 9 एक जैसी कॉपियों का मूल्य ₹216 है, तो ऐसी 14 कॉपियों का मूल्य ज्ञात कीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: 1 कॉपी का मूल्य = 216 ÷ 9 = ₹24। 14 कॉपियों का मूल्य = 14 × 24 = ₹336।
पहले 216 में 9 से भाग देकर 1 कॉपी का मूल्य निकालें, फिर 14 से गुणा करें।
2
एक मजदूर 7 दिनों में ₹3,150 कमाता है। इसी दैनिक दर से ₹5,850 कमाने के लिए उसे कितने दिन काम करना होगा?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: 1 दिन की मजदूरी = 3150 ÷ 7 = ₹450 प्रति दिन। आवश्यक दिन = 5850 ÷ 450 = 13 दिन।
पहले भाग देकर 1 दिन की मजदूरी निकालें, फिर 5,850 में उस दैनिक मजदूरी से भाग दें।
3
2 दर्जन केलों का मूल्य ₹96 है। 5 केलों का मूल्य ज्ञात कीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: 2 दर्जन = 24 केले। 1 केले का मूल्य = 96 ÷ 24 = ₹4। 5 केलों का मूल्य = 5 × 4 = ₹20।
2 दर्जन = 2 × 12 = 24 केले। पहले 1 केले का मूल्य निकालें।
4
एक कार 15 लीटर पेट्रोल में 195 किमी चलती है। 22 लीटर पेट्रोल में यह कार कितनी दूर जाएगी?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: 1 लीटर में दूरी = 195 ÷ 15 = 13 किमी। 22 लीटर में दूरी = 22 × 13 = 286 किमी।
195 में 15 से भाग देकर 1 लीटर का माइलेज निकालें, फिर 22 से गुणा करें।
5
यदि 4 किग्रा गेहूं के आटे का मूल्य ₹144 है, तो 750 ग्राम आटे का मूल्य ज्ञात कीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: 1 किग्रा का मूल्य = 144 ÷ 4 = ₹36। 750 ग्राम = 750/1000 किग्रा = 3/4 किग्रा। 750 ग्राम का मूल्य = (3/4) × 36 = 3 × 9 = ₹27।
1 किग्रा का मूल्य निकालें (₹36) और उसे 0.75 किग्रा (3/4 किग्रा) से गुणा करें।
6
एक प्रिंटिंग मशीन 15 मिनट में 450 पृष्ठ छापती है। इसी चाल से 1 घंटे में कितने पृष्ठ छापे जा सकते हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: 1 मिनट में पृष्ठ = 450 ÷ 15 = 30 पृष्ठ। 1 घंटे (60 मिनट) में पृष्ठ = 60 × 30 = 1,800 पृष्ठ।
1 घंटा = 60 मिनट। पहले 1 मिनट में पृष्ठ निकालें, फिर 60 से गुणा करें।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
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कक्षा 6 Mathematics के सभी अध्याय

अध्याय 1: संख्या प्रणाली (संख्या का समेकन) (Number System (Consolidating Sense of Number)) अध्याय 2: अनुमान और पूर्णांकन (Estimation and Rounding Off) अध्याय 3: प्राकृतिक संख्याएँ और पूर्ण संख्याएँ (Natural Numbers and Whole Numbers) अध्याय 4: ऋणात्मक संख्याएँ और पूर्णांक (Negative Numbers and Integers) अध्याय 5: भिन्न (Fractions) अध्याय 6: दशमलव (Decimals) अध्याय 7: सेट का विचार और सेट के प्रकार (Idea of Sets and Types of Sets) अध्याय 8: अनुपात और समानुपात (Ratio and Proportion) अध्याय 9: ऐकिक नियम (Unitary Method) अध्याय 10: बीजगणित की मूलभूत अवधारणाएँ (Fundamental Concepts of Algebra) अध्याय 11: एक चर वाले रैखिक समीकरण (Linear Equations) अध्याय 12: बुनियादी ज्यामितीय अवधारणाएँ (Basic Geometrical Concepts) अध्याय 13: त्रिभुज और चतुर्भुज (Triangles and Quadrilaterals) अध्याय 14: समतल आकृतियों का परिमाप और क्षेत्रफल (Perimeter and Area of Plane Figures) अध्याय 15: डेटा प्रबंधन (बार ग्राफ़ और टेबल्स) (Data Handling (Bar Graphs and Tables))

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