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JAC • Class X • Science • Ch 3
Estimated Time: 45 Mins
Study Progress: In Progress

Metals and Non-Metals

तत्वों को उनके भौतिक एवं रासायनिक गुणधर्मों के आधार पर मुख्य रूप से दो प्रमुख वर्गों—धातु (Metals) तथा अधातु (Non-Metals)—में वर्गीकृत किया जाता है। ब्रह्मांड और मानव सभ्यता के विकास में धातुओं की भूमिका इतनी केंद्रीय रही है कि मानव इतिहास के विभिन्न युगों के नामकरण ही धातुओं के आधार पर हुए हैं, जैसे ताम्र युग (Copper Age), कांस्य युग (Bronze Age) तथा लौह युग (Iron Age)। भौतिक दृष्टिकोण से, अधिकांश धातुएँ सामान्य ताप पर कठोर, चमकदार, उच्च घनत्व एवं उच्च गलनांक वाली होती हैं। धातुओं में आघातवर्ध्यता (Malleability) का अद्वितीय गुण होता है जिसके कारण उन्हें पीटकर पतली चादरों में ढाला जा सकता है (सोना और चांदी सर्वाधिक आघातवर्ध्य हैं), तथा तन्यता (Ductility) के गुण के कारण उन्हें बारीक तारों में खींचा जा सकता है (1 ग्राम सोने से 2 किमी लंबा तार बनाया जा सकता है)। धातुएं ऊष्मा एवं विद्युत की उत्तम सुचालक (चांदी व तांबा सर्वश्रेष्ठ) तथा ध्वानिक (Sonorous) होती हैं। इसके विपरीत, अधातुएँ प्रायः भंगुर, चमकहीन, ऊष्मा व विद्युत की कुचालक होती हैं। रासायनिक रूप से, धातुएँ विद्युत-धनात्मक (Electropositive) होती हैं क्योंकि वे अपने संयोजकता इलेक्ट्रॉनों का त्याग करके धनायन बनाती हैं (जैसे $Na \to Na^+ + e^-$)। वे ऑक्सीजन से क्रिया करके क्षारीय धात्विक ऑक्साइड बनाती हैं, जिनमें से कुछ (जैसे एल्युमिनियम ऑक्साइड $Al_2O_3$ व जिंक ऑक्साइड $ZnO$) अम्ल और क्षारक दोनों से क्रिया करने के कारण उभयधर्मी ऑक्साइड (Amphoteric Oxides) कहलाते हैं। धातुओं की सापेक्षिक क्रियाशीलता को दर्शाने वाली श्रेणी को सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series) कहा जाता है, जिसमें पोटैशियम व सोडियम शीर्ष पर तथा सोना व चांदी सबसे नीचे स्थित हैं। इसके अतिरिक्त, धातुओं और अधातुओं के परस्पर संयोजन से बनने वाले आयनिक यौगिक (Ionic Compounds) के गुणधर्म (क्रिस्टलीय ठोस, उच्च गलनांक व क्वथनांक, ठोस अवस्था में कुचालक किंतु जलीय/गलित अवस्था में सुचालक), खनिजों एवं अयस्कों से शुद्ध धातु प्राप्त करने की प्रक्रिया—धातुकर्म (Metallurgy: भर्जन, निस्तापन, विद्युत अपघटनी परिष्करण)—तथा धातुओं के संक्षारण से बचाव हेतु मिश्रधातुओं (Alloys: पीतल, कांसा, सोल्डर, स्टेनलेस स्टील) का निर्माण इस अध्याय के अत्यंत महत्वपूर्ण सैद्धांतिक और व्यावहारिक विषय हैं। झारखंड बोर्ड (JAC Class 10) विज्ञान परीक्षा में धातु एवं अधातु अध्याय 7 से 9 अंकों का अत्यधिक महत्वपूर्ण भार रखता है। इसमें आघातवर्ध्यता व तन्यता की परिभाषा, सक्रियता श्रेणी, उभयधर्मी ऑक्साइड, आयनिक यौगिकों के गुणधर्म, भर्जन बनाम निस्तापन, और तांबे का विद्युत अपघटनी परिष्करण पर दीर्घ उत्तरीय प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।

⚡ क्या आपने कभी सोचा है: जिस सोने और लोहे को हम हथौड़े से भी नहीं तोड़ पाते, वहीं सोडियम धातु को साधारण मक्खन की तरह चाकू से क्यों काटा जा सकता है?

हम सब जानते हैं कि धातुएं बहुत मजबूत और कठोर होती हैं—रेलवे पटरियां, विशाल पुल, और गगनचुंबी इमारतें सब लोहे और स्टील से बनती हैं। लेकिन जरा सोचिए: एक ऐसी धातु भी है जिसे आप रसोई के साधारण चाकू से पनीर या मक्खन की तरह आसानी से काट सकते हैं—वह है सोडियम (Sodium) और पोटैशियम (Potassium)!

इतना ही नहीं, यदि सोडियम के एक छोटे से टुकड़े को पानी में फेंक दिया जाए, तो वह पानी की सतह पर नाचते हुए भयंकर आग पकड़ लेता है और तेज धमाके के साथ फट जाता है! इसीलिए इसे हमेशा मिट्टी के तेल (केरोसिन) में डुबोकर रखा जाता है।

दूसरी ओर, क्या आपने कभी विचार किया कि पारा (Mercury) धातु होते हुए भी कमरे के तापमान पर पानी की तरह बहने वाला द्रव क्यों है? 1 ग्राम सोने से 2 किलोमीटर लंबा महीन तार कैसे खींचा जा सकता है? और तांबे में जस्ता मिलाकर 'पीतल' जैसी मजबूत मिश्रधातु कैसे बनाई जाती है? आइए, धातुओं और अधातुओं के इस रोमांचक वैज्ञानिक रहस्य का अन्वेषण करें!

Why This Chapter Matters

इस अध्याय का अध्ययन आपके लिए क्यों अनिवार्य है?

  1. बोर्ड परीक्षा में उच्च स्कोरिंग: JAC कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षा में "उभयधर्मी ऑक्साइड (उदाहरण सहित)", "आयनिक यौगिकों के चार प्रमुख गुणधर्म", "भर्जन बनाम निस्तापन में अंतर", और "तांबे का विद्युत अपघटनी परिष्करण" पर 3 और 5 अंक के प्रश्न अनिवार्य रूप से आते हैं।
  2. इंजीनियरिंग एवं धातुकर्म का आधार: भविष्य में मैकेनिकल, सिविल या मैटेरियल साइंस इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए धातुओं के निष्कर्षण, क्रिस्टल जालक और मिश्रधातुओं का यह ज्ञान सबसे अनिवार्य नींव है।
  3. दैनिक जीवन एवं सुरक्षा: घर की बिजली वायरिंग में तांबे और पीवीसी का उपयोग, आभूषणों में 22 कैरेट सोने का रहस्य, और बर्तनों पर संक्षारण की रोकथाम।

Before You Begin (Prerequisites)

  • तत्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (Electronic Configuration) एवं अष्टक नियम (Octet Rule)।
  • संयोजकता इलेक्ट्रॉन (Valence Electrons) और धनायन व ऋणायन बनने की क्रिया।
  • ऑक्सीकरण एवं अपचयन (Redox) अभिक्रियाओं की आधारभूत समझ।

What You Will Learn (Core Objectives)

  • धातुओं और अधातुओं के भौतिक गुणधर्मों (आघातवर्ध्यता, तन्यता, चालकता, चमक, ध्वानिकता) और उनके अपवादों (पारा, आयोडीन, ग्रेफाइट, सोडियम) की व्याख्या कर सकेंगे।
  • धातुओं की जल, वायु (ऑक्सीजन), अम्लों और अन्य धातु लवणों के साथ रासायनिक अभिक्रियाओं का संतुलित समीकरण लिख सकेंगे।
  • उभयधर्मी ऑक्साइडों (Al₂O₃, ZnO) की अम्ल एवं क्षारक दोनों के साथ अभिक्रियाओं को सिद्ध कर सकेंगे।
  • सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series) के आधार पर विस्थापन अभिक्रियाओं की दिशा का पूर्व-अनुमान लगा सकेंगे।
  • इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण द्वारा आयनिक यौगिकों (NaCl, MgCl₂) के निर्माण का रेखाचित्र बना सकेंगे तथा उनके चार प्रमुख भौतिक गुणधर्मों का कारण स्पष्ट कर सकेंगे।
  • अयस्कों के सांद्रण, भर्जन (Roasting), निस्तापन (Calcination), अपचयन तथा विद्युत-अपघटनी परिष्करण (Electrolytic Refining) के चरणों का सविस्तार वर्णन कर सकेंगे।

Chapter Roadmap & Progression

1 1. धातुओं एवं अधातुओं के भौतिक गुणध...
2 2. धातुओं के रासायनिक गुणधर्म एवं स...
3 3. आयनिक यौगिक: निर्माण एवं अभिलाक्...
4 4. धातुओं की प्राप्ति, धातुकर्म (Me...

Complete Concept Guide (100% Curriculum Coverage)

1. धातुओं एवं अधातुओं के भौतिक गुणधर्म तथा महत्वपूर्ण अपवाद

(क) भौतिक गुणधर्मों की तुलना

गुणधर्म धातुएँ (Metals) अधातुएँ (Non-Metals)
भौतिक अवस्था कमरे के ताप पर सामान्यतः ठोस। ठोस या गैस रूप में पाई जाती हैं।
धात्विक चमक (Lustre) शुद्ध अवस्था में इनकी सतह चमकदार होती है। सामान्यतः चमकहीन (मैलिन) होती हैं।
कठोरता सामान्यतः अत्यधिक कठोर होती हैं। सामान्यतः मुलायम एवं भंगुर (Brittle) होती हैं।
आघातवर्ध्यता (Malleability) हथौड़े से पीटने पर पतली चादरों में बदल जाती हैं। आघातवर्ध्य नहीं होतीं; पीटने पर चूर्ण बन जाती हैं।
तन्यता (Ductility) इन्हें खींचकर पतले तारों में ढाला जा सकता है। तन्य नहीं होती हैं।
विद्युत एवं ऊष्मा चालकता उत्तम सुचालक होती हैं (चांदी सर्वश्रेष्ठ)। विद्युत एवं ऊष्मा की कुचालक होती हैं।
गलनांक एवं क्वथनांक अत्यधिक उच्च (High) होते हैं। अपेक्षाकृत निम्न (Low) होते हैं।
ध्वानिकता (Sonorous) कठोर सतह से टकराने पर गूंजने वाली ध्वनि उत्पन्न करती हैं। ध्वानिक नहीं होती हैं।

(ख) बोर्ड परीक्षा में बार-बार पूछे जाने वाले अपवाद (Crucial Exceptions)

  1. पारा (Mercury - Hg): एकमात्र ऐसी धातु जो कमरे के तापमान पर द्रव (Liquid) अवस्था में पाई जाती है।
  2. ब्रोमीन (Bromine - Br): एकमात्र ऐसी अधातु जो कमरे के तापमान पर द्रव रूप में होती है।
  3. आयोडीन (Iodine - I): अधातु होते हुए भी यह अत्यंत चमकदार (Lustrous) होती है।
  4. ग्रेफाइट (Graphite): कार्बन (अधातु) का एक अपररूप होने के बावजूद यह विद्युत का उत्तम सुचालक है।
  5. हीरा (Diamond): कार्बन का अपररूप, जो प्रकृति का सबसे कठोरतम ज्ञात प्राकृतिक पदार्थ है तथा इसका गलनांक अत्यधिक उच्च होता है।
  6. सोडियम (Na), पोटैशियम (K) एवं लिथियम (Li): इतनी मुलायम धातुएँ हैं कि इन्हें चाकू से आसानी से काटा जा सकता है और इनका घनत्व व गलनांक बहुत कम होता है।
  7. गैलियम (Ga) एवं सीज़ियम (Cs): इनका गलनांक इतना कम (लगभग 30°C) होता है कि हथेली पर रखते ही शरीर की गर्मी से पिघलने लगती हैं।

2. धातुओं के रासायनिक गुणधर्म एवं सक्रियता श्रेणी

1. धातुओं की ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया

धातुएँ ऑक्सीजन के साथ संयोग करके क्षारीय धात्विक ऑक्साइड बनाती हैं:

$$\text{धातु} + \text{ऑक्सीजन} \to \text{धातु ऑक्साइड}$$
  • सोडियम एवं पोटैशियम की अत्यधिक क्रियाशीलता: ये हवा में खुला रखने पर कमरे के ताप पर ही आग पकड़ लेती हैं। अतः इन्हें सुरक्षित रखने तथा आकस्मिक आग रोकने के लिए सदैव मिट्टी के तेल (केरोसिन) में डुबोकर रखा जाता है।
  • तांबे को गर्म करना: कॉपर को वायु में गर्म करने पर उस पर काले रंग के कॉपर(II) ऑक्साइड की परत चढ़ जाती है: $$2Cu + O_2 \xrightarrow{\Delta} 2CuO \text{ (काला)}$$
  • उभयधर्मी ऑक्साइड (Amphoteric Oxides - अति महत्वपूर्ण): वे धातु ऑक्साइड जो अम्ल तथा क्षारक दोनों से अभिक्रिया करके लवण तथा जल बनाते हैं, उभयधर्मी ऑक्साइड कहलाते हैं।
    उदाहरण: एल्युमिनियम ऑक्साइड ($Al_2O_3$) की अभिक्रियाएँ:
    (i) अम्ल के साथ (क्षारक की भांति व्यवहार): $$Al_2O_3 + 6HCl \to 2AlCl_3 + 3H_2O$$ (ii) क्षारक के साथ (अम्ल की भांति व्यवहार): $$Al_2O_3 + 2NaOH \to 2NaAlO_2 \text{ (सोडियम एल्युमिनेट)} + H_2O$$

2. धातुओं की जल के साथ अभिक्रिया

  • शीतल जल के साथ: सोडियम और पोटैशियम ठंडे पानी से अत्यंत तीव्र और ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया करते हैं जिससे निकली $H_2$ गैस तुरंत आग पकड़ लेती है: $$2Na(s) + 2H_2O(l) \to 2NaOH(aq) + H_2(g)↑ + \text{ऊष्मा}$$
  • कैल्शियम की अभिक्रिया: ठंडे पानी से धीमी होती है; उत्पन्न ऊष्मा हाइड्रोजन में आग लगाने के लिए पर्याप्त नहीं होती। कैल्शियम तैरने लगता है क्योंकि $H_2$ गैस के बुलबुले उसकी सतह से चिपक जाते हैं।
  • गर्म जल के साथ: मैग्नीशियम ठंडे पानी से नहीं बल्कि गर्म पानी से क्रिया करता है।
  • केवल भाप (Steam) के साथ: एल्युमिनियम, लोहा और जिंक न तो ठंडे और न ही गर्म जल से क्रिया करते हैं, बल्कि केवल भाप से क्रिया करते हैं: $$3Fe(s) + 4H_2O(g) \to Fe_3O_4(s) + 4H_2(g)↑$$ $$2Al(s) + 3H_2O(g) \to Al_2O_3(s) + 3H_2(g)↑$$
  • जल से बिल्कुल क्रिया न करने वाली धातुएं: लेड, कॉपर, सिल्वर और गोल्ड जल की किसी भी अवस्था से कोई क्रिया नहीं करते।

3. सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series)

सक्रियता श्रेणी वह सूची है जिसमें धातुओं को उनकी क्रियाशीलता के अवरोही (घटते हुए) क्रम में व्यवस्थित किया गया है:

तत्व प्रतीक सक्रियता स्तर निष्कर्षण / अभिक्रिया गुणधर्म
पोटैशियमKसर्वाधिक अभिक्रियाशीलविद्युत अपघटन द्वारा निष्कर्षण (मुक्त अवस्था में नहीं मिलते)
सोडियमNaअत्यधिक सक्रियठंडे जल व हवा से तीव्र अभिक्रिया
कैल्शियमCaअत्यधिक सक्रियठंडे जल से अभिक्रिया
मैग्नीशियमMgमध्यम सक्रियगर्म जल से अभिक्रिया
एल्युमिनियमAlमध्यम सक्रियभाप से अभिक्रिया
जिंकZnमध्यम सक्रियकार्बन द्वारा अपचयन द्वारा निष्कर्षण
लोहा (Iron)Feमध्यम सक्रियभाप से अभिक्रिया
लेडPbमध्यम सक्रियअम्लों से धीमी अभिक्रिया
[हाइड्रोजन]H[अधातु संदर्भ]सक्रियता का विभाजक बिंदु
कॉपरCuकम अभिक्रियाशीलअम्लों से H₂ विस्थापित नहीं कर सकता
पाराHgकम अभिक्रियाशीलकेवल गर्म करने से निष्कर्षण
चांदी (Silver)Agअति कम सक्रियमुक्त अवस्था में पाए जाते हैं
सोना (Gold)Auसबसे कम अभिक्रियाशीलउत्कृष्ट धातुएं; संक्षारण-मुक्त

3. आयनिक यौगिक: निर्माण एवं अभिलाक्षणिक गुणधर्म

(क) आयनिक बंध एवं आयनिक यौगिकों का निर्माण

जब एक धातु अपने संयोजी इलेक्ट्रॉनों को किसी अधातु को स्थानांतरित करती है, तो धातु धनायन ($M^+$) तथा अधातु ऋणायन ($X^-$) बनाती है। इन विपरीत आवेशित आयनों के मध्य लगने वाले प्रबल स्थिर-वैद्युत आकर्षण बल (Electrostatic Force of Attraction) से बने यौगिकों को आयनिक यौगिक (विद्युत-संयोजी यौगिक) कहते हैं।

सोडियम क्लोराइड ($NaCl$) का निर्माण:
• सोडियम का विन्यास: $Na (2, 8, 1) \to Na^+ (2, 8) + e^-$ (एक इलेक्ट्रॉन त्यागा)
• क्लोरीन का विन्यास: $Cl (2, 8, 7) + e^- \to Cl^- (2, 8, 8)$ (एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण किया)
• परस्पर संयोजन: $Na^+ + Cl^- \to NaCl$

मैग्नीशियम क्लोराइड ($MgCl_2$) का निर्माण:
• मैग्नीशियम दो इलेक्ट्रॉन त्यागता है: $Mg (2, 8, 2) \to Mg^{2+} (2, 8) + 2e^-$
• क्लोरीन के दो परमाणु एक-एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करते हैं: $2Cl + 2e^- \to 2Cl^-$
• सूत्र: $[Mg^{2+}][Cl^-]_2 \to MgCl_2$

(ख) आयनिक यौगिकों के चार प्रमुख गुणधर्म (बोर्ड परीक्षा का सर्वप्रमुख 5 अंक प्रश्न)

  1. भौतिक प्रकृति: धनायनों और ऋणायनों के बीच मजबूत स्थिर-वैद्युत आकर्षण बल होने के कारण ये ठोस एवं कठोर होते हैं। ये सामान्यतः भंगुर (Brittle) होते हैं तथा दबाव डालने पर टुकड़ों में टूट जाते हैं।
  2. उच्च गलनांक एवं क्वथनांक (High Melting & Boiling Points): आयनिक जालक में विपरीत आयनों के मजबूत अंतरा-आयनिक आकर्षण बल को तोड़ने के लिए अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होती है। (उदा. $NaCl$ का गलनांक 1074 K / 801°C है)।
  3. घुलनशीलता (Solubility): आयनिक यौगिक सामान्यतः जल में विलेय (घुलनशील) होते हैं, परंतु केरोसिन, पेट्रोल, बेंजीन जैसे अध्रुवीय कार्बनिक विलायकों में अविलेय होते हैं।
  4. विद्युत चालकता (Electrical Conductivity):
    • ठोस अवस्था में: आयनिक यौगिक विद्युत का चालन नहीं करते, क्योंकि ठोस अवस्था में आयन अपने क्रिस्टल जालक में बंधे होने के कारण गति करने के लिए स्वतंत्र नहीं होते।
    • जलीय विलयन अथवा गलित अवस्था में: ये विद्युत का उत्तम चालन करते हैं, क्योंकि जल में अथवा गलने पर आयन मुक्त हो जाते हैं और विद्युत धारा प्रवाहित करने पर विपरीत इलेक्ट्रोडों की ओर गमन करते हैं।

4. धातुओं की प्राप्ति, धातुकर्म (Metallurgy) एवं परिष्करण

(क) खनिज, अयस्क एवं गैंग की परिभाषा

  • खनिज (Minerals): पृथ्वी की भूपर्पटी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले तत्वों या अकार्बनिक यौगिकों को खनिज कहते हैं।
  • अयस्क (Ores): वे खनिज जिनमें किसी विशेष धातु की प्रचुर मात्रा होती है और जिससे धातु को कम खर्च में और सरलता से (लाभप्रद रूप से) निष्कर्षित किया जा सकता है, उन्हें अयस्क कहते हैं। (अतः सभी अयस्क खनिज हैं, किंतु सभी खनिज अयस्क नहीं होते)।
  • गैंग (Gangue): पृथ्वी से खोदे गए अयस्कों में उपस्थित रेत, मिट्टी, चूना पत्थर आदि जैसी अवांछनीय अशुद्धियों को गैंग कहते हैं।

(ख) भर्जन बनाम निस्तापन (Roasting vs Calcination)

तुलना का बिंदु भर्जन (Roasting) निस्तापन (Calcination)
अयस्क का प्रकार मुख्यतः सल्फाइड अयस्कों के लिए प्रयुक्त होता है। मुख्यतः कार्बोनेट अयस्कों के लिए प्रयुक्त होता है।
वायु की उपस्थिति अयस्क को वायु (ऑक्सीजन) की नियमित उपस्थिति में गलनांक से कम ताप पर गर्म किया जाता है। अयस्क को सीमित वायु या वायु की अनुपस्थिति में गर्म किया जाता है।
निकलने वाली गैस सल्फर डाइऑक्साइड ($SO_2$) गैस निकलती है। कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) गैस निकलती है।
उदाहरण रासायनिक समीकरण जिंक ब्लेंड (सल्फाइड अयस्क):
$$2ZnS + 3O_2 \xrightarrow{\Delta} 2ZnO + 2SO_2↑$$
कैलामाइन (कार्बोनेट अयस्क):
$$ZnCO_3 \xrightarrow{\Delta} ZnO + CO_2↑$$

(ग) तांबे का विद्युत-अपघटनी परिष्करण (Electrolytic Refining of Copper)

धातुओं से बची हुई सूक्ष्म अशुद्धियों को दूर कर 99.9% शुद्ध धातु प्राप्त करने की सर्वप्रमुख विधि है:

  • एनोड (धनात्मक): अशुद्ध कॉपर धातु की मोटी छड़ बनाई जाती है।
  • कैथोड (ऋणात्मक): शुद्ध कॉपर धातु की पतली पट्टी बनाई जाती है।
  • विद्युत अपघट्य: कॉपर सल्फेट ($CuSO_4$) का अम्लीकृत जलीय विलयन।
  • प्रक्रिया: जब विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो एनोड से शुद्ध तांबा घुलकर $Cu^{2+}$ आयनों के रूप में विलयन में जाता है, और उतनी ही मात्रा में शुद्ध तांबा विलयन से कैथोड पर निक्षेपित (जमा) हो जाता है।
  • एनोड पंक (Anode Mud): अशुद्ध कॉपर में उपस्थित अविलेय अशुद्धियाँ (सोना, चांदी, प्लेटिनम) एनोड के नीचे तलहटी में बैठ जाती हैं, जिसे एनोड पंक कहते हैं।

(घ) मिश्रधातुएं (Alloys)

दो या दो से अधिक धातुओं अथवा एक धातु एवं अधातु के समांगी मिश्रण को मिश्रधातु कहते हैं। इससे धातुओं की कठोरता, संक्षारण प्रतिरोधकता और मजबूती बढ़ जाती है:

  • पीतल (Brass): तांबा ($Cu \approx 70\%$) + जस्ता ($Zn \approx 30\%$) - बर्तन, सजावटी सामान।
  • कांसा (Bronze): तांबा ($Cu \approx 90\%$) + टिन ($Sn \approx 10\%$) - मूर्तियाँ, सिक्के, पदक।
  • सोल्डर (Solder): लेड ($Pb \approx 50\%$) + टिन ($Sn \approx 50\%$) - कम गलनांक के कारण बिजली के तारों को जोड़ने (टांका लगाने) में।
  • स्टेनलेस स्टील: लोहा + निकेल + क्रोमियम + सूक्ष्म कार्बन - कभी जंग नहीं लगता, शल्य चिकित्सा उपकरण व रसोई बर्तन।
  • अमलगम (Amalgam): यदि किसी मिश्रधातु में एक धातु पारा (Mercury) हो, तो उसे अमलगम कहते हैं (जैसे दंत चिकित्सा में प्रयुक्त सिल्वर अमलगम)।

Key Formulas, Reactions & Definitions

धातु + ऑक्सीजन
4Na + O₂ → 2Na₂O (कमरे के ताप पर तीव्र अभिक्रिया)
उभयधर्मी ऑक्साइड (अम्ल से)
Al₂O₃ + 6HCl → 2AlCl₃ + 3H₂O
उभयधर्मी ऑक्साइड (क्षार से)
Al₂O₃ + 2NaOH → 2NaAlO₂ (सोडियम एल्युमिनेट) + H₂O
सोडियम की शीतल जल से क्रिया
2Na(s) + 2H₂O(l) → 2NaOH(aq) + H₂(g)↑ + ऊष्मा
भाप पर लोहे की क्रिया
3Fe(s) + 4H₂O(g) → Fe₃O₄(s) + 4H₂(g)↑
सिनेबार (पारे का अयस्क) भर्जन
2HgS + 3O₂ —Δ→ 2HgO + 2SO₂↑, फिर 2HgO —Δ→ 2Hg + O₂↑
जिंक सल्फाइड का भर्जन (Roasting)
2ZnS + 3O₂ —Δ→ 2ZnO + 2SO₂↑
जिंक कार्बोनेट का निस्तापन (Calcination)
ZnCO₃ —Δ→ ZnO + CO₂↑
कार्बन द्वारा धातु ऑक्साइड का अपचयन
ZnO + C → Zn + CO↑
थर्मिट अभिक्रिया (रेलवे पटरी जोड़ना)
Fe₂O₃(s) + 2Al(s) → 2Fe(l) (गलित लोहा) + Al₂O₃(s) + भारी ऊष्मा
तांबे का विद्युत अपघटनी परिष्करण एनोड
एनोड: Cu(अशुद्ध) → Cu²⁺ + 2e⁻
तांबे का विद्युत अपघटनी परिष्करण कैथोड
कैथोड: Cu²⁺ + 2e⁻ → Cu(शुद्ध जमा)
पीतल (Brass) संघटन
Cu (70%) + Zn (30%)
कांसा (Bronze) संघटन
Cu (90%) + Sn (10%)
सोल्डर (Solder) संघटन
Pb (50%) + Sn (50%) - निम्न गलनांक
शुद्ध सोना बनाम 22 कैरेट आभूषण सोना
24 कैरेट = 100% शुद्ध (मुलायम); 22 कैरेट = 22 भाग सोना + 2 भाग तांबा/चांदी

Conceptual Solved Examples & Case Studies

Example 1
प्रश्न 1 (अति लघु उत्तरीय - 1 अंक): उभयधर्मी ऑक्साइड (Amphoteric Oxides) क्या होते हैं? किन्हीं दो उभयधर्मी ऑक्साइडों के नाम और सूत्र लिखिए।
Step-by-Step Solution:
उत्तर:
वे धातु ऑक्साइड जो अम्ल तथा क्षारक दोनों के साथ रासायनिक अभिक्रिया करके लवण तथा जल का निर्माण करते हैं, उभयधर्मी ऑक्साइड कहलाते हैं।
दो उदाहरण:
  1. एल्युमिनियम ऑक्साइड ($Al_2O_3$)
  2. जिंक ऑक्साइड ($ZnO$)
Example 2
प्रश्न 2 (लघु उत्तरीय - 2 अंक): सोडियम और पोटैशियम को मिट्टी के तेल (केरोसिन) में डुबोकर क्यों रखा जाता है?
Step-by-Step Solution:
उत्तर:
सोडियम ($Na$) और पोटैशियम ($K$) अत्यधिक क्रियाशील धातुएँ हैं। सक्रियता श्रेणी में ये सबसे शीर्ष पर स्थित हैं। जब इन्हें खुले वायुमंडल में रखा जाता है, तो ये हवा में उपस्थित ऑक्सीजन और नमी से सामान्य कमरे के ताप पर ही इतनी तीव्र और ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया करती हैं कि स्वतः आग पकड़ लेती हैं। अतः इन धातुओं को सुरक्षित रखने तथा आकस्मिक दुर्घटनाओं और आग से बचाव के लिए सदैव मिट्टी के तेल (केरोसिन) में डुबोकर रखा जाता है, क्योंकि ये केरोसिन के साथ कोई अभिक्रिया नहीं करतीं।
Example 3
प्रश्न 3 (लघु उत्तरीय - 3 अंक): आयनिक यौगिकों के गलनांक और क्वथनांक उच्च क्यों होते हैं? ठोस अवस्था में ये विद्युत के कुचालक किंतु गलित अवस्था में सुचालक क्यों होते हैं?
Step-by-Step Solution:
उत्तर:
(1) उच्च गलनांक का कारण:
आयनिक यौगिकों में विपरीत रूप से आवेशित धनायन और ऋणायन एक निश्चित क्रिस्टलीय जालक में अत्यधिक शक्तिशाली स्थिर-वैद्युत आकर्षण बलों द्वारा आपस में बंधे होते हैं। इस विशाल अंतरा-आयनिक आकर्षण बल को तोड़ने और आयनों को पृथक करने के लिए अत्यधिक मात्रा में ऊष्मा ऊर्जा की आवश्यकता होती है, इसलिए इनके गलनांक एवं क्वथनांक बहुत उच्च होते हैं।
(2) विद्युत चालकता का कारण:
विद्युत धारा के प्रवाह के लिए मुक्त आवेशित कणों (आयनों) की गतिशीलता आवश्यक है:
  • ठोस अवस्था में: क्रिस्टल जालक में आयन अपनी निश्चित स्थितियों पर मजबूती से बंधे होते हैं और गति करने के लिए स्वतंत्र नहीं होते, अतः ठोस अवस्था में ये विद्युत के कुचालक होते हैं।
  • गलित या जलीय अवस्था में: ऊष्मा या जल के कारण स्थिर-वैद्युत बंध टूट जाते हैं और आयन स्वतंत्र रूप से विचरण करने लगते हैं, जिससे वे विद्युत धारा का उत्तम चालन करते हैं।
Example 4
प्रश्न 4 (दीर्घ उत्तरीय - 5 अंक): भर्जन (Roasting) और निस्तापन (Calcination) में अंतर स्पष्ट कीजिए। जिंक के सल्फाइड अयस्क (जिंक ब्लेंड) और कार्बोनेट अयस्क (कैलामाइन) से धातु निष्कर्षण के संतुलित समीकरण लिखिए।
Step-by-Step Solution:
उत्तर:
भर्जन बनाम निस्तापन में मूलभूत अंतर:
तुलना का बिंदुभर्जन (Roasting)निस्तापन (Calcination)
अयस्क की प्रकृतिसल्फाइड अयस्कों के लिए उपयोग किया जाता है।कार्बोनेट अयस्कों व जलयोजित अयस्कों के लिए।
वायु की उपस्थितिवायु (ऑक्सीजन) की आधिक्य उपस्थिति में गर्म किया जाता है।सीमित वायु या वायु की अनुपस्थिति में गर्म करते हैं।
उत्सर्जित गैससल्फर डाइऑक्साइड ($SO_2$) गैस बाहर निकलती है।कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) गैस बाहर निकलती है।

जिंक के निष्कर्षण के रासायनिक समीकरण:
  1. सल्फाइड अयस्क (जिंक ब्लेंड - $ZnS$) का भर्जन:
    $$2ZnS(s) + 3O_2(g) \xrightarrow{\Delta} 2ZnO(s) + 2SO_2(g)↑$$
  2. कार्बोनेट अयस्क (कैलामाइन - $ZnCO_3$) का निस्तापन:
    $$ZnCO_3(s) \xrightarrow{\Delta} ZnO(s) + CO_2(g)↑$$
  3. धातु ऑक्साइड का अपचयन (Reduction):
    प्राप्त जिंक ऑक्साइड ($ZnO$) को कार्बन (कोक) के साथ गर्म करके अपचयित किया जाता है:
    $$ZnO(s) + C(s) \xrightarrow{\Delta} Zn(s) + CO(g)↑$$
Example 5
प्रश्न 5 (दीर्घ उत्तरीय - 5 अंक): तांबे (कॉपर) के विद्युत-अपघटनी परिष्करण (Electrolytic Refining) का सचित्र सिद्धांत समझाइए। एनोड पंक (Anode Mud) क्या है और इसमें कौन-सी बहुमूल्य धातुएं पाई जाती हैं?
Step-by-Step Solution:
उत्तर:
तांबे का विद्युत-अपघटनी परिष्करण (Electrolytic Refining of Copper):
अशुद्ध धातुओं से अत्यंत उच्च शुद्धता (99.9%) का कॉपर प्राप्त करने के लिए विद्युत अपघटन विधि का उपयोग किया जाता है।
उपकरण की संरचना:
  • एनोड (Anode - धनात्मक): अशुद्ध तांबे की मोटी छड़।
  • कैथोड (Cathode - ऋणात्मक): शुद्ध तांबे की अत्यंत पतली पट्टी।
  • विद्युत अपघट्य (Electrolyte): कॉपर सल्फेट ($CuSO_4$) का अम्लीकृत जलीय विलयन (जिसमें तनु $H_2SO_4$ की कुछ बूंदें मिलाई जाती हैं)।

कार्यप्रणाली एवं रासायनिक अभिक्रियाएँ:
जब विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है:
  1. एनोड से अशुद्ध तांबा घुलकर $Cu^{2+}$ आयनों के रूप में विलयन में प्रवेश करता है:
    एनोड पर ऑक्सीकरण: $$Cu(s) \text{ (अशुद्ध)} \to Cu^{2+}(aq) + 2e^-$$
  2. उतनी ही मात्रा में शुद्ध तांबा विलयन से कैथोड की ओर आकर्षित होकर उस पर जमा हो जाता है:
    कैथोड पर अपचयन: $$Cu^{2+}(aq) + 2e^- \to Cu(s) \text{ (शुद्ध)}$$
  3. जैसे-जैसे प्रक्रिया आगे बढ़ती है, एनोड पतला होता जाता है और कैथोड शुद्ध तांबे की मोटी परत से भारी होता जाता है।

एनोड पंक (Anode Mud):
अशुद्ध कॉपर में उपस्थित विलेय अशुद्धियाँ विलयन में घुल जाती हैं, किंतु अविलेय अशुद्धियाँ एनोड के ठीक नीचे विद्युत अपघटनी सेल की तली में कीचड़ के रूप में एकत्र हो जाती हैं। इसे 'एनोड पंक' कहते हैं। इस पंक में सोना (Gold - Au), चांदी (Silver - Ag) तथा प्लेटिनम (Pt) जैसी अत्यंत बहुमूल्य धातुएँ प्राप्त होती हैं, जिनकी बिक्री से इस परिष्करण प्रक्रिया का पूरा खर्च निकल आता है।

Common Misconceptions & Examiner Traps

Common Misconception

शुद्ध 24 कैरेट सोने से आभूषण बनाए जा सकते हैं।

Scientific Reality & Correction

24 कैरेट सोना 100% शुद्ध होता है, किंतु यह अत्यधिक मुलायम (Soft) होता है। इससे बने आभूषण आसानी से मुड़ जाते हैं या टूट जाते हैं। आभूषण बनाने के लिए सामान्यतः 22 कैरेट सोने का उपयोग किया जाता है, जिसमें 22 भाग शुद्ध सोने में 2 भाग तांबा या चांदी मिलाकर उसे कठोर बनाया जाता है।

Common Misconception

सोल्डर (Solder) का उपयोग भारी वाहनों के निर्माण में समझना।

Scientific Reality & Correction

सोल्डर लेड ($Pb$) और टिन ($Sn$) की मिश्रधातु है। इसका गलनांक बहुत निम्न होता है, इसलिए इसका एकमात्र प्रमुख उपयोग बिजली के तारों को परस्पर जोड़ने (टांका लगाने - Soldering) में किया जाता है।

Common Misconception

थर्मिट अभिक्रिया में कार्बन का अपचायक के रूप में प्रयोग मानना।

Scientific Reality & Correction

थर्मिट अभिक्रिया में आयरन(III) ऑक्साइड ($Fe_2O_3$) को अपचयित करने के लिए कार्बन नहीं बल्कि एल्युमिनियम पाउडर (Al) का उपयोग किया जाता है, जिससे पिघला हुआ लोहा बनकर रेल की टूटी पटरियों को जोड़ता है।

Common Misconception

लोहे के जंग लगने के लिए केवल ऑक्सीजन को उत्तरदायी मानना।

Scientific Reality & Correction

लोहे पर जंग लगने के लिए ऑक्सीजन और नमी (जलवाष्प) दोनों की एक साथ उपस्थिति अनिवार्य है। केवल शुष्क वायु या केवल उबले हुए ऑक्सीजन-रहित जल में लोहे पर जंग कभी नहीं लगता।

Common Misconception

सभी अधातुओं को विद्युत का पूर्ण कुचालक समझना।

Scientific Reality & Correction

कार्बन का अपररूप ग्रेफाइट एक अधातु होते हुए भी अपनी विशिष्ट हेक्सागोनल परतीय संरचना और मुक्त इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति के कारण विद्युत का बहुत अच्छा सुचालक होता है।

सक्रियता श्रेणी एवं धातुकर्म निष्कर्षण विधियाँ

⛏️ धातुओं का निष्कर्षण एवं सक्रियता श्रेणी वर्गीकरण

उच्च अभिक्रियाशील धातुएं

K, Na, Ca, Mg, Al
• कार्बन द्वारा अपचयित नहीं हो सकतीं
• गलित लवणों का विद्युत-अपघटन द्वारा शुद्ध धातु प्राप्त होती है (जैसे गलित NaCl से Na).

मध्यम अभिक्रियाशील धातुएं

Zn, Fe, Pb
• सल्फाइड/कार्बोनेट अयस्क के रूप में
• भर्जन या निस्तापन द्वारा ऑक्साइड में परिवर्तन, फिर कार्बन (कोक) द्वारा अपचयन.

निम्न अभिक्रियाशील धातुएं

Cu, Ag, Au
• केवल गर्म करने से ऑक्साइड से धातु (जैसे सिनेबार से पारा)
• सोना (Au) प्रकृति में मुक्त (स्वतंत्र) अवस्था में पाया जाता है.

⚡ आयनिक बंध: धातु (इलेक्ट्रॉन दाता) + अधातु (इलेक्ट्रॉन ग्राही) → मजबूत स्थिर-वैद्युत आकर्षण बल।

Chapter Summary & 10 Key Takeaways

Takeaway 1
  1. धातुएं आघातवर्ध्य, तन्य, चमकदार, कठोर तथा ऊष्मा व विद्युत की उत्तम सुचालक (चांदी व तांबा सर्वश्रेष्ठ) होती हैं।
Takeaway 2
  1. पारा एकमात्र द्रव धातु है; ब्रोमीन एकमात्र द्रव अधातु है; सोडियम और पोटैशियम चाकू से काटी जा सकने वाली मुलायम धातुएँ हैं।
Takeaway 3
  1. ग्रेफाइट अधातु होते हुए भी विद्युत का सुचालक है तथा हीरा सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ है।
Takeaway 4
  1. सोडियम व पोटैशियम हवा में स्वतः जल उठते हैं, अतः इन्हें मिट्टी के तेल (केरोसिन) में रखा जाता है।
Takeaway 5
  1. एल्युमिनियम ऑक्साइड (Al₂O₃) तथा जिंक ऑक्साइड (ZnO) उभयधर्मी ऑक्साइड हैं, जो अम्ल व क्षारक दोनों से क्रिया करते हैं।
Takeaway 6
  1. सक्रियता श्रेणी में सबसे ऊपर स्थित धातुएं (K, Na, Ca) सर्वाधिक क्रियाशील तथा नीचे स्थित धातुएं (Au, Pt) सबसे कम क्रियाशील होती हैं।
Takeaway 7
  1. आयनिक यौगिक विपरीत आयनों के स्थिर-वैद्युत आकर्षण से बनते हैं; इनके गलनांक उच्च होते हैं तथा ये गलित/जलीय रूप में सुचालक होते हैं।
Takeaway 8
  1. सल्फाइड अयस्कों को वायु की उपस्थिति में गर्म करना भर्जन कहलाता है; कार्बोनेट अयस्कों को सीमित वायु में गर्म करना निस्तापन कहलाता है।
Takeaway 9
  1. कॉपर के विद्युत-अपघटनी परिष्करण में अशुद्ध धातु एनोड तथा शुद्ध धातु कैथोड बनती है; अविलेय अशुद्धियां एनोड पंक बनाती हैं।
Takeaway 10
  1. दो या अधिक धातुओं के समांगी मिश्रण को मिश्रधातु कहते हैं (उदा. पीतल = Cu+Zn, कांसा = Cu+Sn, सोल्डर = Pb+Sn, अमलगम = पारा युक्त)।

Check Your Understanding (Diagnostic Practice Questions)

Diagnostic questions testing core conceptual clarity. Answers are hidden initially — solve each problem first, then click to reveal the step-by-step verified solution.

1
1. आघातवर्ध्यता (Malleability) और तन्यता (Ductility) में क्या अंतर है? सबसे अधिक तन्य धातु कौन सी है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: आघातवर्ध्यता धातुओं का वह गुण है जिससे उन्हें पीटकर पतली चादरों में बदला जा सकता है। तन्यता वह गुण है जिससे धातुओं को खींचकर पतले तारों में ढाला जा सकता है। सबसे अधिक तन्य धातु सोना (Gold) है (1 ग्राम सोने से 2 किमी लंबा तार खींचा जा सकता है)।
2
2. उभयधर्मी ऑक्साइड किसे कहते हैं? एल्युमिनियम ऑक्साइड की हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ संतुलित अभिक्रिया लिखिए।
Reveal Answer & Explanation
Answer: वे धातु ऑक्साइड जो अम्ल और क्षारक दोनों से क्रिया करके लवण और जल बनाते हैं, उभयधर्मी ऑक्साइड कहलाते हैं। अभिक्रिया: Al₂O₃ + 6HCl → 2AlCl₃ + 3H₂O।
3
3. आयनिक यौगिक ठोस अवस्था में विद्युत के कुचालक क्यों होते हैं, जबकि गलित अवस्था में वे विद्युत का चालन करते हैं?
Reveal Answer & Explanation
Answer: ठोस अवस्था में आयन अपने जालक में मजबूती से बंधे होने के कारण गति करने के लिए स्वतंत्र नहीं होते, जबकि गलित अवस्था में स्थिर-वैद्युत बंध टूटने से आयन स्वतंत्र होकर विद्युत का चालन करते हैं।
4
4. भर्जन (Roasting) और निस्तापन (Calcination) किन-किन अयस्कों के लिए प्रयुक्त होते हैं?
Reveal Answer & Explanation
Answer: भर्जन सल्फाइड अयस्कों (जैसे ZnS) के लिए वायु की उपस्थिति में किया जाता है, जबकि निस्तापन कार्बोनेट अयस्कों (जैसे ZnCO₃) के लिए सीमित वायु में किया जाता है।
5
5. सोल्डर (Solder) किन दो धातुओं की मिश्रधातु है और इसका प्रमुख उपयोग क्या है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: सोल्डर लेड (Pb) और टिन (Sn) की मिश्रधातु है; अपने अत्यंत कम गलनांक के कारण इसका उपयोग विद्युत तारों को जोड़ने (टांका लगाने) में किया जाता है।
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