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JAC • Class XII • Chemistry • Ch 3
Estimated Time: 45 Mins
Study Progress: In Progress

Chemical Kinetics

रासायनिक बलगतिकी भौतिक रसायन विज्ञान की वह महत्वपूर्ण शाखा है जिसमें रासायनिक अभिक्रियाओं के वेग (Rate of Reaction), वेग को प्रभावित करने वाले कारकों (सांद्रता, ताप, दाब, उत्प्रेरक) तथा अभिक्रिया की क्रियाविधि (Mechanism) का अध्ययन किया जाता है। प्रस्तुत अध्याय में औसत वेग ($r_{\text{avg}}$) एवं तात्क्षणिक वेग ($r_{\text{inst}} = -d[R]/dt$) की संकल्पना तथा रससमीकरणमितीय संबंधों का निरूपण किया गया है। अध्याय का केंद्रीय आधार अभिक्रिया की कोटि (Order of Reaction) एवं आण्विकता (Molecularity) के मध्य तात्विक विभेद है। शून्य कोटि अभिक्रिया हेतु समाकलित वेग समीकरण ($[R] = [R]_0 - kt$) तथा अर्ध-आयु ($t_{1/2} = [R]_0 / 2k$) का गणितीय निगमन प्रस्तुत किया गया है। सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्रथम कोटि अभिक्रिया हेतु समाकलित वेग व्यंजक ($k = \frac{2.303}{t}\log\frac{[R]_0}{[R]}$) तथा इसकी अर्ध-आयु ($t_{1/2} = \frac{0.693}{k}$) का प्रारंभिक सांद्रता से स्वतंत्र होना सिद्ध किया गया है, जिसके अंतर्गत गैसीय प्रावस्था अभिक्रियाएं एवं छद्म प्रथम कोटि अभिक्रियाएं (जैसे एस्टर का जल-अपघटन) समाहित हैं। अभिक्रिया वेग पर ताप के प्रभाव को स्पष्ट करने वाला आरहेनियस समीकरण ($k = A e^{-E_a/RT}$), सक्रियण ऊर्जा ($E_a$) की गणना, तथा संघट्ट सिद्धांत (ऊर्जा व दिक्विन्यास अवरोध) का विशद बोर्ड-उन्मुख संकलन किया गया है।

डायनामाइट का विस्फोट एक मिलीसेकंड में क्यों हो जाता है, जबकि हीरे को ग्रेफाइट बनने में लाखों वर्ष क्यों लगते हैं?

ऊष्मागतिकी के अनुसार हीरा कमरे के ताप पर अस्थायी है और इसे स्वतः ग्रेफाइट में बदल जाना चाहिए—परंतु आपकी दादी की हीरे की अंगूठी पीढ़ियों बाद भी वैसी ही चमकती रहती है! दूसरी ओर, आरडीएक्स या डायनामाइट चिंगारी छूते ही एक सेकंड के हजारवें हिस्से में विनाशकारी धमाका कर देता है। ऐसा क्यों? क्योंकि ऊष्मागतिकी केवल यह बताती है कि क्या अभिक्रिया संभव है, परंतु यह कभी नहीं बताती कि वह कितनी तेज होगी! यह रहस्य खोलती है 'रासायनिक बलगतिकी'। हीरे के रूपांतरण की सक्रियण ऊर्जा ($E_a$) का पहाड़ इतना ऊंचा है कि सामान्य ताप पर कोई अणु उसे पार ही नहीं कर पाता! आइए जानें कि कैसे तापमान और उत्प्रेरक इस ऊर्जा के पहाड़ को काटकर अभिक्रिया के वेग को लाखों गुना बढ़ा देते हैं!

Why This Chapter Matters

JAC और CBSE कक्षा 12वीं रसायन विज्ञान बोर्ड परीक्षा में 'रासायनिक बलगतिकी' से 7 अंकों के महत्वपूर्ण प्रश्न आते हैं। अभिक्रिया की कोटि एवं आण्विकता में अंतर (3 अंक), प्रथम कोटि अभिक्रिया के समाकलित वेग समीकरण ($k = \frac{2.303}{t}\log\frac{[R]_0}{[R]}$) तथा अर्ध-आयु ($t_{1/2}$) पर आधारित आंकिक प्रश्न (जैसे $99.9\%$ पूर्ण होने में लगा समय $t_{1/2}$ का 10 गुना होता है सिद्ध करना), वेग स्थिरांक ($k$) की विभिन्न कोटियों हेतु इकाइयां, छद्म प्रथम कोटि अभिक्रिया की परिभाषा व उदाहरण, तथा आरहेनियस समीकरण पर आधारित $\log(k_2/k_1) = \frac{E_a}{2.303 R}\left[\frac{1}{T_1} - \frac{1}{T_2}\right]$ से सक्रियण ऊर्जा ($E_a$) ज्ञात करने के आंकिक प्रश्न बोर्ड परीक्षा में प्रतिवर्ष अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं।

Before You Begin (Prerequisites)

  • लघुगणक के नियम: $\log(ab) = \log a + \log b$, $\log(a/b) = \log a - \log b$, $\log(a^x) = x \log a$, $\ln x = 2.303 \log_{10} x$।
  • अवकलन व समाकलन के प्राथमिक सूत्र: $\int dx = x$, $\int \frac{1}{x} dx = \ln x$।
  • रासायनिक साम्य एवं द्रव्य अनुपाती क्रिया का नियम।

What You Will Learn (Core Objectives)

  • अभिक्रिया के औसत एवं तात्क्षणिक वेग की परिभाषा लिखना तथा रससमीकरणमितीय व्यंजक स्थापित करना।
  • अभिक्रिया की कोटि एवं आण्विकता में तुलनात्मक विभेद करना तथा वेग स्थिरांक की इकाइयाँ निर्धारित करना।
  • शून्य एवं प्रथम कोटि अभिक्रियाओं के समाकलित वेग समीकरणों का निगमन करना तथा उनकी अर्ध-आयु का परिकलन करना।
  • आरहेनियस समीकरण का उपयोग कर दो भिन्न तापों पर वेग स्थिरांक एवं सक्रियण ऊर्जा ($E_a$) की गणना करना।
  • संघट्ट सिद्धांत के आधार पर प्रभावी टक्करों, ऊर्जा अवरोध एवं दिक्विन्यास अवरोध की व्याख्या करना।

Chapter Roadmap & Progression

1 1. अभिक्रिया का वेग एवं रससमीकरणमित...
2 2. वेग नियम, अभिक्रिया की कोटि एवं...
3 3. शून्य एवं प्रथम कोटि अभिक्रियाओं...
4 4. ताप का प्रभाव, आरहेनियस समीकरण ए...

Complete Concept Guide (100% Curriculum Coverage)

1. अभिक्रिया का वेग एवं रससमीकरणमितीय संबंध

1.1 अभिक्रिया के वेग की परिभाषा

एकांक समय में किसी अभिकारक अथवा उत्पाद की सांद्रता में होने वाले परिवर्तन को अभिक्रिया का वेग (Rate of Reaction) कहते हैं:

  • औसत वेग ($r_{\text{avg}}$): एक निश्चित समयांतराल ($\Delta t$) में सांद्रता परिवर्तन:
    $$r_{\text{avg}} = -\frac{\Delta [R]}{\Delta t} = +\frac{\Delta [P]}{\Delta t}$$
    (ऋणात्मक चिह्न दर्शाता है कि समय के साथ अभिकारकों की सांद्रता घटती है)।
  • तात्क्षणिक वेग ($r_{\text{inst}}$): किसी निश्चित क्षण ($t$) पर अभिक्रिया का वेग जब $\Delta t \to 0$ हो:
    $$r_{\text{inst}} = -\frac{d[R]}{dt} = +\frac{d[P]}{dt}$$
  • इकाई: $\text{mol L}^{-1}\text{ s}^{-1}$ (या $\text{mol L}^{-1}\text{ min}^{-1}$); गैसीय अभिक्रियाओं हेतु $\text{atm s}^{-1}$ या $\text{bar s}^{-1}$।

1.2 रससमीकरणमितीय गुणांकों का संबंध (Stoichiometric Relations)

सामान्य अभिक्रिया हेतु: $a A + b B \longrightarrow c C + d D$

$$\mathbf{\text{अभिक्रिया का वेग} = -\frac{1}{a}\frac{d[A]}{dt} = -\frac{1}{b}\frac{d[B]}{dt} = +\frac{1}{c}\frac{d[C]}{dt} = +\frac{1}{d}\frac{d[D]}{dt}}$$

उदा. $2\text{N}_2\text{O}_5(g) \longrightarrow 4\text{NO}_2(g) + \text{O}_2(g)$
वेग $= -\frac{1}{2}\frac{d[\text{N}_2\text{O}_5]}{dt} = +\frac{1}{4}\frac{d[\text{NO}_2]}{dt} = +\frac{d[\text{O}_2]}{dt}$
यहाँ $\text{NO}_2$ के बनने की दर $\text{N}_2\text{O}_5$ के लुप्त होने की दर से दोगुनी है!

2. वेग नियम, अभिक्रिया की कोटि एवं आण्विकता

2.1 वेग नियम (Rate Law) एवं विशिष्ट अभिक्रिया वेग ($k$)

प्रायोगिक रूप से निर्धारित वह गणितीय व्यंजक जो अभिकारकों की मोलर सांद्रताओं के पदों में अभिक्रिया के वेग को व्यक्त करता है, वेग नियम कहलाता है:
$$r = k [A]^x [B]^y$$
जहाँ $k$ = वेग स्थिरांक (Rate Constant) या विशिष्ट अभिक्रिया वेग।
जब $[A] = [B] = 1\text{ mol L}^{-1}$ हो, तो $r = k$। अतः एकांक सांद्रता पर अभिक्रिया का वेग ही वेग स्थिरांक है।
वेग स्थिरांक ($k$) की सामान्य इकाई:$$\mathbf{\text{इकाई of } k = (\text{mol L}^{-1})^{1-n} \text{ s}^{-1}}$$
• शून्य कोटि ($n=0$): $\text{mol L}^{-1}\text{ s}^{-1}$
• प्रथम कोटि ($n=1$): $\text{s}^{-1}$ (सांद्रता से स्वतंत्र)
• द्वितीय कोटि ($n=2$): $\text{mol}^{-1}\text{ L s}^{-1}$

2.2 कोटि एवं आण्विकता में तुलनात्मक अंतर (सर्वाधिक महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न)

लक्षणअभिक्रिया की कोटि (Order)अभिक्रिया की आण्विकता (Molecularity)
परिभाषावेग नियम में प्रयुक्त सांद्रता पदों की घातों का योग ($n = x + y$)।प्राथमिक पद में एक साथ संघट्ट करने वाली स्पीशीज (अणुओं/परमाणुओं) की संख्या।
प्रकृतियह पूर्णतः एक प्रायोगिक (Experimental) मान है।यह एक सैद्धांतिक (Theoretical) संकल्पना है।
मानयह शून्य, पूर्णांक अथवा भिन्नात्मक (Fractional) हो सकती है।यह सदैव एक धनात्मक पूर्णांक ($1, 2, 3$) होती है। शून्य या भिन्न कभी नहीं हो सकती।
जटिल अभिक्रियाएंजटिल अभिक्रियाओं हेतु संपूर्ण अभिक्रिया की कोटि परिभाषित होती है।जटिल अभिक्रियाओं हेतु आण्विकता का कोई अर्थ नहीं होता (प्रत्येक पद की अलग होती है)।
क्रियाविधियह सबसे धीमे पद (Rate Determining Step) पर आधारित होती है।यह सीधे संतुलित रासायनिक समीकरण से निर्धारित नहीं की जा सकती।

3. शून्य एवं प्रथम कोटि अभिक्रियाओं के समाकलित वेग समीकरण

3.1 शून्य कोटि की अभिक्रिया (Zero Order Reaction)

वह अभिक्रिया जिसका वेग अभिकारकों की सांद्रता की शून्य घात के समानुपाती होता है (अर्थात सांद्रता पर निर्भर नहीं करता):
$$-\frac{d[R]}{dt} = k [R]^0 = k \implies -d[R] = k dt$$
समाकलन करने पर: $\mathbf{[R] = [R]_0 - kt} \implies \mathbf{k = \frac{[R]_0 - [R]}{t}}$
अर्ध-आयु काल ($t_{1/2}$): वह समय जिसमें अभिकारक की सांद्रता अपनी प्रारंभिक सांद्रता की आधी रह जाए ($[R] = [R]_0 / 2$):
$$\mathbf{t_{1/2} = \frac{[R]_0}{2k}} \quad \implies \mathbf{t_{1/2} \propto [R]_0}$$
प्रमुख उदाहरण: उच्च दाब पर तप्त $\text{Pt}$ की सतह पर अमोनिया का अपघटन: $2\text{NH}_3(g) \xrightarrow{\text{Pt, } 1130\text{ K}} \text{N}_2(g) + 3\text{H}_2(g)$।

3.2 प्रथम कोटि की अभिक्रिया (First Order Reaction)

वह अभिक्रिया जिसका वेग अभिकारक की सांद्रता की प्रथम घात के समानुपाती होता है:
$$-\frac{d[R]}{dt} = k [R] \implies \frac{d[R]}{[R]} = -k dt$$
समाकलन करने पर: $\ln [R] = -kt + \ln [R]_0 \implies \ln \frac{[R]_0}{[R]} = kt$
लघुगणक ($2.303 \log_{10}$) के रूप में:

$$\mathbf{k = \frac{2.303}{t} \log_{10} \frac{[R]_0}{[R]}} \quad \text{अथवा} \quad \mathbf{k = \frac{2.303}{t} \log_{10} \frac{a}{a - x}}$$

प्रथम कोटि की अर्ध-आयु ($t_{1/2}$):
जब $t = t_{1/2}$ हो, तो $[R] = [R]_0 / 2$:
$$k = \frac{2.303}{t_{1/2}} \log_{10} \frac{[R]_0}{[R]_0 / 2} = \frac{2.303}{t_{1/2}} \log_{10}(2) = \frac{2.303 \times 0.3010}{t_{1/2}}$$
$$\mathbf{t_{1/2} = \frac{0.693}{k}}$$
परम निष्कर्ष: प्रथम कोटि की अभिक्रिया का अर्ध-आयु काल अभिकारक की प्रारंभिक सांद्रता ($[R]_0$) से सर्वथा स्वतंत्र होता है!
प्रमुख उदाहरण: समस्त रेडियोऐक्टिव विघटन प्रक्रम, $\text{N}_2\text{O}_5$ एवं $\text{SO}_2\text{Cl}_2$ का तापीय वियोजन।

3.3 छद्म प्रथम कोटि की अभिक्रिया (Pseudo First Order Reaction)

वे अभिक्रियाएं जिनकी वास्तविक कोटि उच्च होती है, परंतु एक अभिकारक के अत्यधिक आधिक्य (Excess) में होने के कारण उसका सांद्रता परिवर्तन नगण्य रहता है और अभिक्रिया प्रथम कोटि की तरह व्यवहार करती है:
• अम्लीय माध्यम में एथिल ऐसीटेट का जल-अपघटन:
$$\text{CH}_3\text{COOC}_2\text{H}_5 + \text{H}_2\text{O} (\text{आधिक्य}) \xrightarrow{\text{H}^+} \text{CH}_3\text{COOH} + \text{C}_2\text{H}_5\text{OH}$$
वेग $= k' [\text{CH}_3\text{COOC}_2\text{H}_5][\text{H}_2\text{O}] = k [\text{CH}_3\text{COOC}_2\text{H}_5]$ (जहाँ $k = k'[\text{H}_2\text{O}]$)।

4. ताप का प्रभाव, आरहेनियस समीकरण एवं संघट्ट सिद्धांत

4.1 वेग पर ताप का प्रभाव एवं ताप गुणांक

अधिकांश रासायनिक अभिक्रियाओं में तापमान में $10^\circ\text{C}$ की वृद्धि करने पर अभिक्रिया का वेग लगभग दोगुना या तिगुना हो जाता है:
$$\text{ताप गुणांक} = \frac{k_{T + 10}}{k_T} \approx 2 \text{ से } 3$$

4.2 आरहेनियस समीकरण (Arrhenius Equation)

ताप और वेग स्थिरांक के मात्रात्मक संबंध को स्वांते आरहेनियस ने प्रतिपादित किया:

$$\mathbf{k = A \cdot e^{-E_a / RT}}$$
जहाँ $A$ = आरहेनियस कारक / आवृत्ति कारक (Frequency Factor),
$E_a$ = सक्रियण ऊर्जा (Activation Energy) (इकाई: $\text{J mol}^{-1}$ या $\text{kJ mol}^{-1}$),
$R$ = गैस स्थिरांक ($8.314\text{ J K}^{-1}\text{mol}^{-1}$), $T$ = परम ताप (केल्विन में)।
$e^{-E_a/RT}$ = उन अणुओं का अंश जिनकी ऊर्जा सक्रियण ऊर्जा ($E_a$) के बराबर या उससे अधिक है।

लघुगणकीय रूप:
$$\mathbf{\log_{10} k = \log_{10} A - \frac{E_a}{2.303 R T}}$$
यदि $\log_{10} k$ एवं $1/T$ के मध्य ग्राफ खींचा जाए, तो एक सरल रेखा प्राप्त होती है जिसकी ढाल (Slope) $= -\frac{E_a}{2.303 R}$ होती है।

दो भिन्न तापों ($T_1$ व $T_2$) पर वेग स्थिरांक ($k_1$ व $k_2$):$$\mathbf{\log_{10} \frac{k_2}{k_1} = \frac{E_a}{2.303 R} \left[\frac{1}{T_1} - \frac{1}{T_2}\right] = \frac{E_a}{2.303 R} \left[\frac{T_2 - T_1}{T_1 T_2}\right]}$$

4.3 सक्रियण ऊर्जा ($E_a$) एवं उत्प्रेरक का प्रभाव

  • देहली ऊर्जा (Threshold Energy - $E_T$): रासायनिक अभिक्रिया संपन्न करने हेतु अणुओं के पास आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा।
    $$\mathbf{E_a = E_T - E_{\text{reactants}}}$$
  • उत्प्रेरक की भूमिका: धनात्मक उत्प्रेरक सक्रियण ऊर्जा ($E_a$) के मान को घटाकर एक नया निम्न-ऊर्जा वाला मध्यवर्ती पथ प्रदान करता है, जिससे ऊर्जा अवरोध पार करने वाले अणुओं की संख्या बढ़ जाती है और अभिक्रिया का वेग तीव्र हो जाता है। उत्प्रेरक $\Delta H$ या $\Delta G$ को परिवर्तित नहीं करता।

4.4 संघट्ट सिद्धांत (Collision Theory)

अभिक्रिया होने के लिए अभिकारक अणुओं के मध्य प्रभावी संघट्ट (Effective Collisions) आवश्यक हैं, जिसके लिए दो अवरोध पार करने होते हैं:
1. ऊर्जा अवरोध (Energy Barrier): अणुओं के पास देहली ऊर्जा ($E_T$) होनी चाहिए।
2. दिक्विन्यास अवरोध (Orientation Barrier): अणुओं की टक्कर सही दिशा (Proper Orientation) में होनी चाहिए ताकि पुराने बंध टूटें और नए बंध बन सकें।
सूत्र: $\mathbf{\text{Rate} = P \cdot Z_{AB} \cdot e^{-E_a/RT}}$ (जहाँ $P$ = त्रिविम कारक/प्रायिकता कारक, $Z_{AB}$ = संघट्ट आवृत्ति)।

Key Formulas, Reactions & Definitions

अभिक्रिया का वेग
$$r = -\frac{1}{a}\frac{d[A]}{dt} = +\frac{1}{c}\frac{d[C]}{dt}$$
वेग नियम
r = k [A]^x [B]^y (कोटि n = x + y)
k की सामान्य इकाई
$$(\text{mol L}^{-1})^{1-n} \text{ s}^{-1}$$
शून्य कोटि समाकलित वेग
$$[R] = [R]_0 - kt \implies k = \frac{[R]_0 - [R]}{t}$$
शून्य कोटि अर्ध-आयु
$$t_{1/2} = \frac{[R]_0}{2k} \quad (t_{1/2} \propto [R]_0)$$
प्रथम कोटि समाकलित वेग
$$k = \frac{2.303}{t} \log_{10} \frac{[R]_0}{[R]} = \frac{2.303}{t} \log_{10} \frac{a}{a - x}$$
प्रथम कोटि अर्ध-आयु
t_{1/2} = {0.693}{k} ([R]_0 से स्वतंत्र)
गैस प्रावस्था प्रथम कोटि
$$k = \frac{2.303}{t} \log_{10} \frac{p_i}{2p_i - p_t}$$
आरहेनियस समीकरण
$$k = A \cdot e^{-E_a / RT}$$
लॉग आरहेनियस समीकरण
$$\log_{10} k = \log_{10} A - \frac{E_a}{2.303 R T}$$
दो तापों पर आरहेनियस
$$\log_{10} \frac{k_2}{k_1} = \frac{E_a}{2.303 R} \left[\frac{T_2 - T_1}{T_1 T_2}\right]$$
देहली ऊर्जा संबंध
$$E_T = E_a + E_{\text{reactants}}$$

Conceptual Solved Examples & Case Studies

Example 1
सिद्ध कीजिए कि एक प्रथम कोटि की रासायनिक अभिक्रिया को $99.9\%$ पूर्ण होने में लगा समय उसकी अर्ध-आयु ($t_{1/2}$) का 10 गुना होता है।
Step-by-Step Solution:
1. प्रथम कोटि अभिक्रिया का वेग समीकरण:
$$t = \frac{2.303}{k} \log_{10} \frac{[R]_0}{[R]}$$
2. $99.9\%$ अभिक्रिया पूर्ण होने हेतु:
प्रारंभिक सांद्रता $[R]_0 = 100$
शेष सांद्रता $[R] = 100 - 99.9 = 0.1$
$$t_{99.9\%} = \frac{2.303}{k} \log_{10} \left(\frac{100}{0.1}\right) = \frac{2.303}{k} \log_{10}(1000) = \frac{2.303}{k} \log_{10}(10^3)$$
$$t_{99.9\%} = \frac{2.303 \times 3}{k} = \frac{6.909}{k} \quad \text{--- (समीकरण 1)}$$

3. अर्ध-आयु ($t_{1/2}$):
$$t_{1/2} = \frac{0.693}{k} \quad \text{--- (समीकरण 2)}$$

4. समीकरण (1) को समीकरण (2) से भाग देने पर:
$$\frac{t_{99.9\%}}{t_{1/2}} = \frac{6.909 / k}{0.693 / k} = \frac{6.909}{0.693} \approx \mathbf{10}$$
$$\mathbf{t_{99.9\%} = 10 \times t_{1/2}} \quad \text{[इति सिद्धम्]}$$
Example 2
एक प्रथम कोटि की अभिक्रिया का वेग स्थिरांक $60\text{ s}^{-1}$ है। अभिकारक की प्रारंभिक सांद्रता को अपने प्रारंभिक मान का $1/16$वाँ भाग रह जाने में कितना समय लगेगा?
Step-by-Step Solution:
दिया है:
वेग स्थिरांक $k = 60\text{ s}^{-1}$
माना प्रारंभिक सांद्रता $[R]_0 = 1$, तो अंतिम सांद्रता $[R] = \frac{1}{16}$

प्रथम कोटि समाकलित वेग समीकरण से:
$$t = \frac{2.303}{k} \log_{10} \frac{[R]_0}{[R]}$$
$$t = \frac{2.303}{60} \log_{10} \left(\frac{1}{1/16}\right) = \frac{2.303}{60} \log_{10}(16)$$
चूंकि $\log_{10}(16) = \log_{10}(2^4) = 4 \log_{10}(2) = 4 \times 0.3010 = 1.2040$。
$$t = \frac{2.303 \times 1.2040}{60} = \frac{2.7728}{60} = \mathbf{0.0462\text{ s}} = \mathbf{4.62 \times 10^{-2}\text{ सेकंड}}$$
उत्तर: आवश्यक समय $\mathbf{4.62 \times 10^{-2}\text{ सेकंड}}$ है।
Example 3
किसी अभिक्रिया का $500\text{ K}$ तथा $700\text{ K}$ पर वेग स्थिरांक क्रमशः $0.02\text{ s}^{-1}$ तथा $0.07\text{ s}^{-1}$ है। सक्रियण ऊर्जा ($E_a$) की गणना कीजिए। [$R = 8.314\text{ J K}^{-1}\text{mol}^{-1}$]
Step-by-Step Solution:
दिया है:
$T_1 = 500\text{ K}, \quad k_1 = 0.02\text{ s}^{-1}$
$T_2 = 700\text{ K}, \quad k_2 = 0.07\text{ s}^{-1}$
$R = 8.314\text{ J K}^{-1}\text{mol}^{-1}$

आरहेनियस समीकरण:
$$\log_{10} \frac{k_2}{k_1} = \frac{E_a}{2.303 R} \left[\frac{T_2 - T_1}{T_1 T_2}\right]$$
$$\log_{10} \left(\frac{0.07}{0.02}\right) = \frac{E_a}{2.303 \times 8.314} \left[\frac{700 - 500}{500 \times 700}\right]$$
$$\log_{10}(3.5) = \frac{E_a}{19.147} \left[\frac{200}{350000}\right]$$
$0.5441 = \frac{E_a}{19.147} \times 5.714 \times 10^{-4}$
$$E_a = \frac{0.5441 \times 19.147}{5.714 \times 10^{-4}} = \frac{10.4179}{0.0005714} = \mathbf{18,232\text{ J mol}^{-1}} = \mathbf{18.23\text{ kJ mol}^{-1}}$$
उत्तर: सक्रियण ऊर्जा $\mathbf{18.23\text{ kJ mol}^{-1}}$ है।
Example 4
अभिक्रिया की कोटि (Order) तथा आण्विकता (Molecularity) में पांच प्रमुख अंतर स्पष्ट कीजिए।
Step-by-Step Solution:
कोटि एवं आण्विकता में तुलनात्मक सारणी:

क्रमांकअभिक्रिया की कोटि (Order of Reaction)आण्विकता (Molecularity)
1वेग नियम व्यंजक में सांद्रताओं की घातों का कुल योग होती है।प्राथमिक पद में एक साथ संघट्ट करने वाले अणुओं/परमाणुओं की संख्या होती है।
2यह पूर्णतः एक प्रायोगिक (Experimental) मान है।यह अभिक्रिया क्रियाविधि पर आधारित सैद्धांतिक (Theoretical) मान है।
3इसका मान शून्य, पूर्णांक अथवा भिन्न (Fractional) हो सकता है।यह सदैव एक धनात्मक पूर्णांक (1, 2 या 3) होती है; शून्य या भिन्न नहीं हो सकती।
4यह जटिल अभिक्रियाओं के लिए भी समग्र रूप से परिभाषित होती है।जटिल अभिक्रियाओं के लिए इसका कोई औचित्य नहीं होता (केवल प्राथमिक पदों हेतु मान्य)।
5यह ताप, दाब तथा सांद्रता की परिस्थितियों के साथ बदल सकती है।यह एक स्थिर आंतरिक राशि है जो परिस्थितियों से स्वतंत्र रहती है।
Example 5
शून्य कोटि अभिक्रिया के लिए समाकलित वेग समीकरण ($[R] = [R]_0 - kt$) का निगमन कीजिए तथा सिद्ध कीजिए कि इसका अर्ध-आयु काल अभिकारक की प्रारंभिक सांद्रता के समानुपाती होता है।
Step-by-Step Solution:
1. समाकलित वेग समीकरण का निगमन:
माना शून्य कोटि अभिक्रिया है: $R \longrightarrow P$
वेग नियमानुसार: $-\frac{d[R]}{dt} = k [R]^0 = k \implies -d[R] = k dt$
दोनों पक्षों का समाकलन करने पर:
$$\int d[R] = -k \int dt \implies [R] = -kt + I \quad \text{--- (1)}$$
जहाँ $I$ समाकलन स्थिरांक है। जब $t = 0$, तो $[R] = [R]_0$ (प्रारंभिक सांद्रता):
$$[R]_0 = -k(0) + I \implies I = [R]_0$$
$I$ का मान समीकरण (1) में रखने पर:
$$\mathbf{[R] = -kt + [R]_0} \implies \mathbf{[R] = [R]_0 - kt} \implies \mathbf{k = \frac{[R]_0 - [R]}{t}}$$

2. अर्ध-आयु ($t_{1/2}$) का निगमन:
जब $t = t_{1/2}$, तो $[R] = \frac{[R]_0}{2}$:
$$\frac{[R]_0}{2} = [R]_0 - k t_{1/2} \implies k t_{1/2} = [R]_0 - \frac{[R]_0}{2} = \frac{[R]_0}{2}$$
$$\mathbf{t_{1/2} = \frac{[R]_0}{2k}} \implies \mathbf{t_{1/2} \propto [R]_0}$$
अतः सिद्ध हुआ कि शून्य कोटि अभिक्रिया का अर्ध-आयु काल प्रारंभिक सांद्रता के अनुक्रमानुपाती (समानुपाती) होता है।

Common Misconceptions & Examiner Traps

Common Misconception

संतुलित रासायनिक समीकरण के रससमीकरणमितीय गुणांकों को देखकर सीधे कोटि लिख देना।

Scientific Reality & Correction

अभिक्रिया की कोटि सैद्धांतिक नहीं बल्कि पूर्णतः प्रायोगिक मान है। जब तक वेग नियम न दिया हो या अभिक्रिया प्राथमिक न हो, गुणांकों से कोटि निर्धारित नहीं की जा सकती।

Common Misconception

प्रथम कोटि अभिक्रिया के अर्ध-आयु काल को सांद्रता पर निर्भर मान लेना।

Scientific Reality & Correction

प्रथम कोटि की अर्ध-आयु $t_{1/2} = \frac{0.693}{k}$ होती है, जिसमें प्रारंभिक सांद्रता $[R]_0$ का कोई पद नहीं होता। यह सांद्रता से पूर्णतः स्वतंत्र है।

Common Misconception

आण्विकता को शून्य या भिन्नात्मक मान लेना।

Scientific Reality & Correction

टक्कर करने वाले अणुओं की संख्या कभी शून्य या $1.5$ नहीं हो सकती। आण्विकता सदैव $1, 2$ या $3$ ही होगी।

Common Misconception

आरहेनियस समीकरण में तापमान को सेल्सियस में रख देना।

Scientific Reality & Correction

आरहेनियस समीकरण में ताप $T$ सदैव केल्विन ($T = t^\circ\text{C} + 273.15$) में ही प्रयुक्त किया जाता है।

Common Misconception

उत्प्रेरक को अभिक्रिया की गिब्स मुक्त ऊर्जा ($\Delta G$) या साम्य स्थिरांक ($K_c$) को बदलने वाला मान लेना।

Scientific Reality & Correction

उत्प्रेरक केवल सक्रियण ऊर्जा ($E_a$) को घटाकर साम्यावस्था शीघ्र स्थापित करता है; यह $\Delta H, \Delta G$ अथवा साम्य स्थिरांक $K_c$ को किंचित भी नहीं बदलता।

रासायनिक बलगतिकी: वेग नियम, कोटि, अर्ध-आयु एवं आरहेनियस समीकरण

रासायनिक बलगतिकी (Chemical Kinetics): वेग नियम, कोटि, समाकलित समीकरण व Ea1. वेग, कोटि व आण्विकताRate, Order & Molecularity• वेग r = -d[R]/dt = +d[P]/dt• वेग नियम: r = k [A]^x [B]^yकोटि n = x + y (प्रायोगिक)कोटि शून्य/पूर्णांक/भिन्न हो सकती• आण्विकता (Molecularity):प्राथमिक टक्कर में अणुओं की संख्यासदैव धनात्मक पूर्णांक (1, 2, 3)• k की इकाई:(mol L⁻¹)^(1-n) s⁻¹2. समाकलित वेग समीकरणZero & First Order• शून्य कोटि (n = 0):[R] = [R]₀ - ktt₁/₂ = [R]₀ / (2k) ⇒ t₁/₂ ∝ [R]₀• प्रथम कोटि (n = 1):k = (2.303/t) log([R]₀/[R])अर्ध-आयु काल:t₁/₂ = 0.693 / k ([R]₀ से स्वतंत्र!)• छद्म प्रथम कोटि:एथिल ऐसीटेट जल-अपघटन (H₂O आधिक्य)3. ताप प्रभाव व आरहेनियसArrhenius & Ea• ताप गुणांक:kT+10 / kT ≈ 2 से 3 (दोगुना)• आरहेनियस समीकरण:k = A · e^(-Ea / RT)log k = log A - Ea/(2.303 RT)ढाल (Slope) = -Ea / (2.303 R)• दो तापों पर:log(k₂/k₁) = (Ea/2.303R)[(T₂-T₁)/T₁T₂]उत्प्रेरक Ea को घटाता है (नया पथ)रासायनिक बलगतिकी के मुख्य परीक्षा सूत्र व अवधारणाएं (Golden Chemistry Capsule)कोटि vs आण्विकता:कोटि प्रायोगिक है (शून्य/भिन्न संभव); आण्विकता सैद्धांतिक है (सदैव 1, 2 या 3 पूर्णांक)।प्रथम कोटि अर्ध-आयु:t₁/₂ = 0.693/k सांद्रता से स्वतंत्र; t(99.9%) = 10 × t₁/₂; रेडियोऐक्टिव क्षय प्रथम कोटि हैं।आरहेनियस समीकरण:k = A e^(-Ea/RT); उत्प्रेरक सक्रियण ऊर्जा (Ea) को कम करके वेग बढ़ाता है, ΔG अपरिवर्तित।

Chapter Summary & 10 Key Takeaways

Takeaway 1
अभिक्रिया का वेग एकांक समय में अभिकारक या उत्पाद की सांद्रता में परिवर्तन है (r = -d[R]/dt = +d[P]/dt)।
Takeaway 2
वेग नियम r = k [A]^x [B]^y में घातों का योग (n = x + y) अभिक्रिया की कोटि कहलाता है।
Takeaway 3
कोटि एक प्रायोगिक मान है जो शून्य, पूर्णांक या भिन्न हो सकती है; आण्विकता सैद्धांतिक पूर्णांक (1, 2, 3) होती है।
Takeaway 4
वेग स्थिरांक k की सामान्य इकाई (mol L⁻¹)^(1-n) s⁻¹ होती है। प्रथम कोटि हेतु इकाई s⁻¹ है।
Takeaway 5
शून्य कोटि अभिक्रिया: [R] = [R]₀ - kt; अर्ध-आयु t₁/₂ = [R]₀ / 2k (प्रारंभिक सांद्रता के समानुपाती)।
Takeaway 6
प्रथम कोटि अभिक्रिया: k = (2.303/t) log([R]₀/[R]); अर्ध-आयु t₁/₂ = 0.693 / k (सांद्रता से पूर्णतः स्वतंत्र)।
Takeaway 7
छद्म प्रथम कोटि अभिक्रिया में एक अभिकारक अत्यधिक आधिक्य में होता है (जैसे एथिल ऐसीटेट का अम्लीय जल-अपघटन)।
Takeaway 8
आरहेनियस समीकरण: k = A e^(-Ea/RT); log(k₂/k₁) = (Ea / 2.303 R) [(T₂ - T₁) / (T₁ T₂)]।
Takeaway 9
सक्रियण ऊर्जा (Ea) वह न्यूनतम अतिरिक्त ऊर्जा है जो सामान्य अभिकारक अणुओं को देहली ऊर्जा तक पहुँचाने हेतु आवश्यक है।
Takeaway 10
उत्प्रेरक अभिक्रिया को निम्न सक्रियण ऊर्जा वाला वैकल्पिक पथ प्रदान करता है, परंतु ΔH, ΔG या साम्य स्थिरांक को नहीं बदलता।

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1
अभिक्रिया की कोटि (Order of Reaction) तथा आण्विकता (Molecularity) में दो प्रमुख अंतर बताइए। क्या आण्विकता कभी शून्य हो सकती है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: अंतर: (1) कोटि एक प्रायोगिक मान है जो शून्य, पूर्णांक अथवा भिन्न हो सकती है, जबकि आण्विकता एक सैद्धांतिक मान है जो केवल धनात्मक पूर्णांक (1, 2 या 3) ही हो सकती है। (2) कोटि जटिल अभिक्रियाओं के लिए भी समग्र रूप से मान्य है, जबकि आण्विकता केवल प्राथमिक पदों हेतु लागू होती है। आण्विकता कभी भी शून्य नहीं हो सकती, क्योंकि रासायनिक परिवर्तन होने के लिए कम से कम एक अणु का उपस्थित होना अनिवार्य है।
2
प्रथम कोटि की अभिक्रिया का अर्ध-आयु काल (t₁/₂) अभिकारक की प्रारंभिक सांद्रता पर निर्भर क्यों नहीं करता?
Reveal Answer & Explanation
Answer: प्रथम कोटि के समाकलित वेग समीकरण k = (2.303 / t) log([R]₀ / [R]) में जब t = t₁/₂ तथा [R] = [R]₀ / 2 रखा जाता है, तो सांद्रता अनुपात [R]₀ / ([R]₀ / 2) = 2 प्राप्त होता है। इससे t₁/₂ = 2.303 log(2) / k = 0.693 / k व्यंजक प्राप्त होता है। इस अंतिम व्यंजक में प्रारंभिक सांद्रता [R]₀ का कोई पद नहीं रहता, अतः प्रथम कोटि की अर्ध-आयु प्रारंभिक सांद्रता से पूर्णतः स्वतंत्र होती है।
3
छद्म प्रथम कोटि की अभिक्रिया (Pseudo First Order Reaction) किसे कहते हैं? इसका एक उपयुक्त उदाहरण दीजिए।
Reveal Answer & Explanation
Answer: वह रासायनिक अभिक्रिया जिसकी वास्तविक आण्विकता दो या अधिक होती है, परंतु एक अभिकारक के अत्यधिक आधिक्य (Excess) में होने के कारण उसका सांद्रता परिवर्तन नगण्य रहता है और अभिक्रिया प्रथम कोटि की तरह संपन्न होती है, छद्म प्रथम कोटि अभिक्रिया कहलाती है। उदाहरण: अम्लीय माध्यम में एथिल ऐसीटेट का जल-अपघटन: CH₃COOC₂H₅ + H₂O (आधिक्य) → CH₃COOH + C₂H₅OH; वेग = k [CH₃COOC₂H₅]।
4
आरहेनियस समीकरण के अनुसार ताप में 10°C की वृद्धि करने पर अधिकांश अभिक्रियाओं का वेग लगभग दोगुना क्यों हो जाता है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: ताप में 10°C की वृद्धि करने पर अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा में केवल अल्प वृद्धि होती है, परंतु ऊर्जा वितरण वक्र (मैक्सवेल-बोल्ट्ज़मान वितरण) के अनुसार सक्रियण ऊर्जा (Ea) के बराबर या उससे अधिक ऊर्जा रखने वाले प्रभावी अणुओं का अंश (e^(-Ea/RT)) लगभग दोगुना हो जाता है। प्रभावी संघट्टों की संख्या दोगुनी होने से अभिक्रिया का वेग भी लगभग दोगुना हो जाता है।
5
उत्प्रेरक किसी रासायनिक अभिक्रिया के वेग को किस प्रकार बढ़ाता है? क्या यह साम्यावस्था अथवा गिब्स ऊर्जा को बदलता है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: उत्प्रेरक अभिकारक अणुओं के साथ क्रिया करके एक नया अस्थायी मध्यवर्ती बनाता है जो कम सक्रियण ऊर्जा (Ea) वाला वैकल्पिक पथ प्रदान करता है। सक्रियण ऊर्जा कम होने से अधिक संख्या में अणु ऊर्जा अवरोध को पार कर उत्पाद में बदल जाते हैं, जिससे वेग तीव्र हो जाता है। उत्प्रेरक अभिक्रिया की एंथैल्पी (ΔH), गिब्स ऊर्जा (ΔG) अथवा साम्य स्थिरांक (Kc) को किंचित भी नहीं बदलता; यह केवल साम्यावस्था को शीघ्र स्थापित करता है।
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