Follow Us
Select Medium / माध्यम चुनें:
Eng (English) Hindi (हिन्दी)
JAC • Class XII • Chemistry • Ch 4
Estimated Time: 45 Mins
Study Progress: In Progress

The d- and f-Block Elements

आवर्त सारणी के वर्ग 3 से 12 तक के तत्व d-ब्लॉक तत्व अथवा संक्रमण तत्व (Transition Elements) कहलाते हैं, क्योंकि इनमें उपांतिम कोश (penultimate shell) के d-कक्षक आंशिक रूप से भरे होते हैं और इनके गुण अत्यधिक धनविद्युती s-ब्लॉक तथा ऋणविद्युती p-ब्लॉक तत्वों के मध्यवर्ती होते हैं। प्रस्तुत अध्याय में $3d$ श्रेणी के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (विशेषकर $\text{Cr}$ एवं $\text{Cu}$ के अपवाद), धात्विक आबंध, उच्च गलनांक/क्वथनांक, परमाण्विक व आयनिक त्रिज्याओं के रूझान का गहन विश्लेषण किया गया है। संक्रमण तत्वों के विशिष्ट गुणों जैसे—परिवर्तनशील ऑक्सीकरण अवस्थाएं (Variable Oxidation States), रंगीन आयनों का निर्माण ($d-d$ संक्रमण), चुंबकीय गुण (अनुचुंबकत्व एवं चक्रण-मात्र चुंबकीय आघूर्ण $\mu = \sqrt{n(n+2)}\text{ BM}$), उत्प्रेरकीय व्यवहार, अंतराकाशी यौगिक (Interstitial Compounds) तथा मिश्रधातु निर्माण की विशद व्याख्या की गई है। संक्रमण धातुओं के दो महत्वपूर्ण औद्योगिक यौगिकों—पोटैशियम डाइक्रोमेट ($\text{K}_2\text{Cr}_2\text{O}_7$) एवं पोटैशियम परमैंगनेट ($\text{KMnO}_4$) के विरचन, संरचना तथा अम्लीय माध्यम में ऑक्सीकारक अभिक्रियाओं का रासायनिक समीकरणों सहित संकलन है। इसके अतिरिक्त, f-ब्लॉक तत्वों (आंतरिक संक्रमण तत्व) के अंतर्गत लैंथेनाइड संकुचन (Lanthanoid Contraction), इसके कारण तथा परिणामों (जैसे $\text{Zr-Hf}$ युग्म का समान आकार, क्षारीयता में कमी) एवं ऐक्टिनाइड्स के साथ तुलनात्मक अध्ययन को बोर्ड परीक्षा के अनुरूप प्रस्तुत किया गया है।

लोहा, सोना, तांबा और प्लैटिनम—मानव सभ्यता के सभी बहुमूल्य धातुएं आवर्त सारणी के इसी मध्य भाग में क्यों हैं?

पाषाण युग के बाद मानव सभ्यता का वास्तविक विकास तांबा युग, कांस्य युग और लौह युग से हुआ। आज भी हमारी आधुनिक अर्थव्यवस्था टाइटेनियम, प्लैटिनम और सोने के इर्द-गिर्द घूमती है। इतना ही नहीं, हमारे रक्त में ऑक्सीजन ढोने वाला हीमोग्लोबिन लोहे ($\text{Fe}$) का संकुल है, और पौधों में प्रकाश संश्लेषण का उत्प्रेरक मैंगनीज ($\text{Mn}$) है! ये सभी तत्व d-ब्लॉक के संक्रमण तत्व हैं। इनके $d$-कक्षकों के अयुग्मित इलेक्ट्रॉन इन्हें न केवल अद्भुत कठोरता और चमक देते हैं, बल्कि इन्हें रंग-बिरंगे यौगिक बनाने और दुनिया के सबसे बेहतरीन उत्प्रेरक बनने की जादुई शक्ति भी प्रदान करते हैं! आइए जानें कि d- और f-ब्लॉक के इन तत्वों के परमाणु के भीतर कौन-सी अद्भुत व्यवस्था छुपी है!

Why This Chapter Matters

JAC तथा CBSE कक्षा 12वीं रसायन विज्ञान बोर्ड परीक्षा में 'd- एवं f-ब्लॉक के तत्व' अध्याय से 7 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। लैंथेनाइड संकुचन क्या है तथा इसके दो परिणाम लिखिए (3 अंक), संक्रमण तत्व रंगीन यौगिक क्यों बनाते हैं तथा उत्प्रेरकीय गुण क्यों दर्शाते हैं (कारण स्पष्टीकरण), $\text{Zn}, \text{Cd}, \text{Hg}$ को संक्रमण तत्व क्यों नहीं माना जाता, $\text{K}_2\text{Cr}_2\text{O}_7$ एवं $\text{KMnO}_4$ की अम्लीय माध्यम में ऑक्सीकारक अभिक्रियाओं के संतुलित रासायनिक समीकरण, तथा चक्रण-मात्र चुंबकीय आघूर्ण (Spin-only magnetic moment) ज्ञात करने के आंकिक प्रश्न बोर्ड परीक्षा में बारंबार पूछे जाने वाले सर्वोच्च प्राथमिकताओं वाले विषय हैं।

Before You Begin (Prerequisites)

  • आउफबाऊ नियम (Aufbau Principle), हुंड का नियम एवं पाउली अपवर्जन सिद्धांत।
  • परमाणु संरचना: कक्षक ($s, p, d, f$) एवं प्रभावी नाभिकीय आवेश ($Z_{\text{eff}}$)।
  • ऑक्सीकरण अवस्था एवं रेडॉक्स अभिक्रियाओं का प्राथमिक ज्ञान।

What You Will Learn (Core Objectives)

  • संक्रमण तत्वों की परिभाषा, इलेक्ट्रॉनिक विन्यास तथा $\text{Cr}$ व $\text{Cu}$ के अपवादों की व्याख्या करना।
  • $\text{Zn}, \text{Cd}, \text{Hg}$ के संक्रमण तत्व न माने जाने के कारण को तर्कसंगत रूप से स्पष्ट करना।
  • संक्रमण तत्वों के परिवर्तनशील ऑक्सीकरण अवस्था, रंग, उत्प्रेरकीय व चुंबकीय गुणों ($d-d$ संक्रमण व $\mu$) को समझाना।
  • $\text{K}_2\text{Cr}_2\text{O}_7$ एवं $\text{KMnO}_4$ के विरचन एवं ऑक्सीकारक गुणों के संतुलित रासायनिक समीकरण लिखना।
  • लैंथेनाइड संकुचन की परिभाषा, कारण तथा रासायनिक व भौतिक परिणामों का विशद विश्लेषण करना।

Chapter Roadmap & Progression

1 1. संक्रमण तत्वों की परिभाषा, विन्य...
2 2. संक्रमण तत्वों के अभिलाक्षणिक गु...
3 3. पोटैशियम डाइक्रोमेट एवं पोटैशियम...
4 4. f-ब्लॉक तत्व: लैंथेनाइड्स, लैंथे...

Complete Concept Guide (100% Curriculum Coverage)

1. संक्रमण तत्वों की परिभाषा, विन्यास एवं अपवाद

1.1 संक्रमण तत्व (d-ब्लॉक तत्व) की परिभाषा

वे तत्व जिनके परमाण्विक अवस्था में अथवा किसी भी स्थायी ऑक्सीकरण अवस्था में उपांतिम $(n-1)d$ कक्षक आंशिक रूप से भरे (Partially filled) होते हैं ($d^1$ से $d^9$), संक्रमण तत्व (Transition Elements) कहलाते हैं।

महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न: $\text{Zn}, \text{Cd}$ तथा $\text{Hg}$ को संक्रमण तत्व क्यों नहीं माना जाता?
जिंक ($\text{Zn}$), कैडमियम ($\text{Cd}$) तथा मर्करी ($\text{Hg}$) की मूल अवस्था (Ground state) तथा इनकी सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था ($+2$) दोनों में $d$-उपकोश पूर्ण रूप से भरे ($d^{10}$) होते हैं (उदा. $\text{Zn} = [\text{Ar}] 3d^{10} 4s^2$, $\text{Zn}^{2+} = [\text{Ar}] 3d^{10}$)। अतः उपांतिम d-कक्षक आंशिक रूप से न भरे होने के कारण इन्हें संक्रमण तत्व नहीं माना जाता, यद्यपि ये d-ब्लॉक के तत्व हैं।

1.2 सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास एवं $3d$ श्रेणी के अपवाद

d-ब्लॉक तत्वों का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: $(n-1)d^{1-10} ns^{1-2}$ होता है (जहाँ $n = 4, 5, 6, 7$)।
प्रथम संक्रमण श्रेणी ($3d$ श्रेणी: $\text{Sc}_{21}$ से $\text{Zn}_{30}$):

तत्वसंकेत ($Z$)इलेक्ट्रॉनिक विन्यासटिप्पणी / अपवाद
स्कैंडियम$\text{Sc} (21)$$[\text{Ar}] 3d^1 4s^2$प्रथम संक्रमण तत्व
टाइटेनियम$\text{Ti} (22)$$[\text{Ar}] 3d^2 4s^2$सामान्य विन्यास
वैनेडियम$\text{V} (23)$$[\text{Ar}] 3d^3 4s^2$सामान्य विन्यास
क्रोमियम$\mathbf{\text{Cr} (24)}$$\mathbf{[\text{Ar}] 3d^5 4s^1}$अपवाद: अर्ध-पूरित $3d^5$ कक्षक का अतिरिक्त स्थायित्व एवं उच्च विनिमय ऊर्जा (Exchange energy)।
मैंगनीज$\text{Mn} (25)$$[\text{Ar}] 3d^5 4s^2$अधिकतम 5 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन ($+7$ तक ऑक्सीकरण)
आयरन$\text{Fe} (26)$$[\text{Ar}] 3d^6 4s^2$फेरोमैग्नेटिक
कोबाल्ट$\text{Co} (27)$$[\text{Ar}] 3d^7 4s^2$संकुल निर्माण
निकेल$\text{Ni} (28)$$[\text{Ar}] 3d^8 4s^2$उत्प्रेरक
कॉपर$\mathbf{\text{Cu} (29)}$$\mathbf{[\text{Ar}] 3d^{10} 4s^1}$अपवाद: पूर्ण-पूरित $3d^{10}$ कक्षक का अधिकतम सममितीय स्थायित्व।
जिंक$\text{Zn} (30)$$[\text{Ar}] 3d^{10} 4s^2$पूर्ण पूरित $d^{10}$, अ-संक्रमण तत्व

2. संक्रमण तत्वों के अभिलाक्षणिक गुण (General Characteristics)

2.1 परिवर्तनशील ऑक्सीकरण अवस्थाएं (Variable Oxidation States)

संक्रमण तत्व विभिन्न प्रकार की परिवर्तनशील ऑक्सीकरण अवस्थाएं प्रदर्शित करते हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि $(n-1)d$ तथा $ns$ कक्षकों के ऊर्जा स्तरों में अंतर बहुत कम होता है, जिससे दोनों कक्षकों के इलेक्ट्रॉन रासायनिक बंध निर्माण में भाग ले सकते हैं।
• $3d$ श्रेणी में $\text{Sc}$ केवल $+3$ दर्शाता है, जबकि $\text{Mn}$ न्यूनतम $+2$ से लेकर उच्चतम $+7$ (उदा. $\text{KMnO}_4$) तक ऑक्सीकरण अवस्थाएं दर्शाता है।
• उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्थाएं प्रायः फ्लोरीन तथा ऑक्सीजन के साथ ही प्रदर्शित होती हैं (उदा. $\text{OsO}_4$ में $\text{Os}$ की $+8$)।

2.2 रंगीन आयनों का निर्माण एवं $d-d$ संक्रमण ($d-d$ Transition)

अधिकांश संक्रमण धातु आयन जलीय विलयन में रंगीन होते हैं।
कारण: जब लिगैंड या विलायक के अणु संक्रमण धातु आयन के संपर्क में आते हैं, तो समभ्रंश (degenerate) d-कक्षक दो ऊर्जा स्तरों—निम्न ऊर्जा ($t_{2g}$) एवं उच्च ऊर्जा ($e_g$) में विपाटित (split) हो जाते हैं। जब दृश्य प्रकाश इन पर पड़ता है, तो $d$-इलेक्ट्रॉन एक निश्चित तरंगदैर्घ्य के प्रकाश को अवशोषित कर निम्न d-कक्षक से उच्च d-कक्षक में चले जाते हैं। इसे $d-d$ संक्रमण ($d-d$ transition) कहते हैं। उत्सर्जित/परावर्तित पूरक रंग (Complementary color) हमें दिखाई देता है।
नोट: जिन आयनों में $d^0$ (उदा. $\text{Sc}^{3+}, \text{Ti}^{4+}$) अथवा पूर्ण-पूरित $d^{10}$ विन्यास (उदा. $\text{Zn}^{2+}, \text{Cu}^+$) होता है, उनमें $d-d$ संक्रमण संभव नहीं होता, अतः वे रंगहीन (Colorless) होते हैं!

2.3 चुंबकीय गुण (Magnetic Properties)

अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति के कारण अधिकांश संक्रमण धातु आयन अनुचुंबकीय (Paramagnetic) होते हैं।
चक्रण-मात्र चुंबकीय आघूर्ण (Spin-only magnetic moment) का सूत्र:$$\mathbf{\mu = \sqrt{n(n + 2)} \text{ BM}}$$
जहाँ $n$ = अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों (Unpaired electrons) की संख्या, $\text{BM}$ = बोर मैग्नेटन (Bohr Magneton)।
• $n=1 \implies \mu = \sqrt{1(3)} = 1.73\text{ BM}$
• $n=5 \implies \mu = \sqrt{5(7)} = \sqrt{35} = 5.92\text{ BM}$ (जैसे $\text{Mn}^{2+}$ एवं $\text{Fe}^{3+}$)।

2.4 उत्प्रेरकीय गुण, अंतराकाशी यौगिक एवं मिश्रधातु निर्माण

  • उत्प्रेरकीय गुण: संक्रमण तत्व उत्कृष्ट उत्प्रेरक होते हैं (उदा. हैबर प्रक्रम में $\text{Fe}$, वनस्पति घी निर्माण में $\text{Ni}$, संस्पर्श प्रक्रम में $\text{V}_2\text{O}_5$)। कारण: (i) परिवर्तनशील संयोजकता द्वारा अस्थायी मध्यवर्ती यौगिक बनाना, (ii) अभिकारकों के अधिशोषण हेतु रिक्त d-कक्षक एवं विशाल पृष्ठीय क्षेत्रफल प्रदान करना।
  • अंतराकाशी यौगिक (Interstitial Compounds): जब छोटे गैर-धात्विक परमाणु जैसे $\text{H, C, N}$ अथवा $\text{B}$ संक्रमण धातुओं के क्रिस्टल जालक के अंतराकाशी स्थलों (interstitial voids) में फंस जाते हैं, तो अंतराकाशी यौगिक बनते हैं (उदा. $\text{TiC, Fe}_3\text{H, Mn}_4\text{N}$)। इनके गुण: ये अत्यधिक कठोर होते हैं, उच्च गलनांक रखते हैं तथा धात्विक चालकता बनाए रखते हैं।
  • मिश्रधातु (Alloys): संक्रमण धातुओं की परमाण्विक त्रिज्याएं लगभग समान होने के कारण एक धातु के परमाणु क्रिस्टल जालक में दूसरी धातु के परमाणुओं को सुगमता से प्रतिस्थापित कर ठोस विलयन (मिश्रधातु) बनाते हैं (उदा. पीतल, कांसा, स्टेनलेस स्टील)।

3. पोटैशियम डाइक्रोमेट एवं पोटैशियम परमैंगनेट के विरचन व गुण

3.1 पोटैशियम डाइक्रोमेट ($\text{K}_2\text{Cr}_2\text{O}_7$)

क्रोमाइट अयस्क ($\text{FeCr}_2\text{O}_4$) से विरचन के तीन पद:
1. क्रोमाइट अयस्क का $\text{Na}_2\text{CO}_3$ व वायु के साथ भर्जन:
$$4\text{FeCr}_2\text{O}_4 + 8\text{Na}_2\text{CO}_3 + 7\text{O}_2 \longrightarrow 8\text{Na}_2\text{CrO}_4 (\text{पीला}) + 2\text{Fe}_2\text{O}_3 + 8\text{CO}_2$$
2. सोडियम क्रोमेट का अम्लीकरण:
$$2\text{Na}_2\text{CrO}_4 + \text{H}_2\text{SO}_4 \longrightarrow \text{Na}_2\text{Cr}_2\text{O}_7 (\text{नारंगी}) + \text{Na}_2\text{SO}_4 + \text{H}_2\text{O}$$
3. $\text{KCl}$ के साथ क्रिया द्वारा कम विलेय $\text{K}_2\text{Cr}_2\text{O}_7$ का क्रिस्टलन:
$$\text{Na}_2\text{Cr}_2\text{O}_7 + 2\text{KCl} \longrightarrow \text{K}_2\text{Cr}_2\text{O}_7 + 2\text{NaCl}$$
pH का प्रभाव: क्रोमेट आयन ($\text{CrO}_4^{2-}$, पीला) अम्लीय माध्यम में डाइक्रोमेट ($\text{Cr}_2\text{O}_7^{2-}$, नारंगी) में तथा क्षारीय माध्यम में पुनः क्रोमेट में परिवर्तित हो जाता है:
$$2\text{CrO}_4^{2-} + 2\text{H}^+ \rightleftharpoons \text{Cr}_2\text{O}_7^{2-} + \text{H}_2\text{O}$$

अम्लीय माध्यम में ऑक्सीकारक गुण:
$$\text{Cr}_2\text{O}_7^{2-} + 14\text{H}^+ + 6e^- \longrightarrow 2\text{Cr}^{3+} + 7\text{H}_2\text{O} \quad (E^\circ = +1.33\text{ V})$$
• आयोडाइड को आयोडीन में: $6\text{I}^- \longrightarrow 3\text{I}_2 + 6e^-$
• फेरस को फेरिक में: $6\text{Fe}^{2+} \longrightarrow 6\text{Fe}^{3+} + 6e^-$

3.2 पोटैशियम परमैंगनेट ($\text{KMnO}_4$)

पायरोलुसाइट ($\text{MnO}_2$) से विरचन:
1. $\text{MnO}_2$ को $\text{KOH}$ एवं ऑक्सीकारक ($\text{KNO}_3$ या $\text{O}_2$) के साथ संगलित करने पर हरा पोटैशियम मैंगनेट बनता है:
$$2\text{MnO}_2 + 4\text{KOH} + \text{O}_2 \longrightarrow 2\text{K}_2\text{MnO}_4 (\text{हरा}) + 2\text{H}_2\text{O}$$
2. मैंगनेट का अम्लीय माध्यम में असमानुपातन (Disproportionation) या विद्युत-अपघटनी ऑक्सीकरण:
$$3\text{MnO}_4^{2-} + 4\text{H}^+ \longrightarrow 2\text{MnO}_4^- (\text{बैंगनी}) + \text{MnO}_2 + 2\text{H}_2\text{O}$$

अम्लीय माध्यम में प्रबल ऑक्सीकारक गुण:
$$\text{MnO}_4^- + 8\text{H}^+ + 5e^- \longrightarrow \text{Mn}^{2+} + 4\text{H}_2\text{O} \quad (E^\circ = +1.51\text{ V})$$
• ऑक्सालेट आयन को $\text{CO}_2$ में: $5\text{C}_2\text{O}_4^{2-} + 2\text{MnO}_4^- + 16\text{H}^+ \longrightarrow 2\text{Mn}^{2+} + 10\text{CO}_2 + 8\text{H}_2\text{O}$
• फेरस आयन को फेरिक में: $5\text{Fe}^{2+} + \text{MnO}_4^- + 8\text{H}^+ \longrightarrow \text{Mn}^{2+} + 5\text{Fe}^{3+} + 4\text{H}_2\text{O}$

4. f-ब्लॉक तत्व: लैंथेनाइड्स, लैंथेनाइड संकुचन एवं ऐक्टिनाइड्स

4.1 f-ब्लॉक तत्व (आंतरिक संक्रमण तत्व)

वे तत्व जिनमें अंतिम इलेक्ट्रॉन उपांत्य-पूर्व (antepenultimate) कोश के $f$-कक्षकों ($(n-2)f$) में प्रवेश करता है, f-ब्लॉक तत्व कहलाते हैं। इनका सामान्य विन्यास: $(n-2)f^{1-14} (n-1)d^{0-1} ns^2$ होता है।

4.2 लैंथेनाइड संकुचन (Lanthanoid Contraction) - बोर्ड का सर्वाधिक महत्वपूर्ण टॉपिक

परिभाषा: लैंथेनाइड श्रेणी ($\text{La}_{57}$ से $\text{Lu}_{71}$) में परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ-साथ परमाण्विक तथा आयनिक ($\text{M}^{3+}$) त्रिज्याओं में होने वाली क्रमिक एवं नियमित कमी को लैंथेनाइड संकुचन कहते हैं।

कारण: लैंथेनाइड्स में नया आने वाला इलेक्ट्रॉन भीतरी $4f$ उपकोश में प्रवेश करता है। $4f$ कक्षकों की विस्तृत एवं विसरित (diffuse) आकृति के कारण उनका परिरक्षण प्रभाव (Shielding effect) अत्यंत दुर्बल (poor) होता है। अतः परमाणु क्रमांक बढ़ने पर प्रभावी नाभिकीय आवेश ($Z_{\text{eff}}$) का मान दुर्बल परिरक्षण की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ता है, जिसके परिणामस्वरूप बाह्यतम इलेक्ट्रॉन अभ्र नाभिक की ओर संकुचित हो जाता है।

लैंथेनाइड संकुचन के प्रमुख परिणाम:
1. द्वितीय ($4d$) एवं तृतीय ($5d$) संक्रमण श्रेणियों की त्रिज्याओं की समानता: लैंथेनाइड संकुचन के कारण जर्कोनियम ($\text{Zr}$, $4d$) एवं हाफ्नियम ($\text{Hf}$, $5d$) की परमाण्विक त्रिज्याएं लगभग समान ($160\text{ pm}$ व $159\text{ pm}$) हो जाती हैं। अतः इनके रासायनिक गुणधर्मों में अत्यधिक समानता होती है और इन्हें पृथक करना अत्यंत कठिन होता है।
2. हाइड्रॉक्साइडों के क्षारीय सामर्थ्य में क्रमिक कमी: $\text{La}^{3+}$ से $\text{Lu}^{3+}$ तक आकार घटने से सहसंयोजी लक्षण बढ़ता है (फायान्स नियम)। अतः $\text{La(OH)}_3$ सबसे अधिक क्षारीय होता है तथा $\text{Lu(OH)}_3$ सबसे कम क्षारीय होता है।
3. लैंथेनाइड्स के पृथक्करण में कठिनाई: त्रिज्याओं में अति सूक्ष्म अंतर के कारण इनके गुणों में अत्यधिक समानता होती है।

4.3 लैंथेनाइड्स एवं ऐक्टिनाइड्स की तुलना

लक्षणलैंथेनाइड्स ($4f$ श्रेणी)ऐक्टिनाइड्स ($5f$ श्रेणी)
इलेक्ट्रॉनिक विन्यासअंतिम इलेक्ट्रॉन $4f$ कक्षक में भरता है।अंतिम इलेक्ट्रॉन $5f$ कक्षक में भरता है।
ऑक्सीकरण अवस्थाएंमुख्यतः $+3$ दर्शाते हैं (अल्पतः $+2, +4$)।$+3$ के अतिरिक्त $+4, +5, +6, +7$ भी दर्शाते हैं (ऊर्जा अंतर कम होने से)।
रेडियोऐक्टिवताप्रोमेथियम ($\text{Pm}$) को छोड़कर सभी अ-रेडियोऐक्टिव हैं।सभी तत्व रेडियोऐक्टिव हैं।
संकुल निर्माणसंकुल बनाने की प्रवृत्ति कम होती है।आवेश घनत्व उच्च होने से संकुल बनाने की प्रबल प्रवृत्ति होती है।
संकुचनलैंथेनाइड संकुचन होता है।ऐक्टिनाइड संकुचन लैंथेनाइड संकुचन से भी अधिक तीव्र होता है ($5f$ का परिरक्षण $4f$ से भी दुर्बल)।

Key Formulas, Reactions & Definitions

d-ब्लॉक सामान्य विन्यास
$$(n-1)d^{1-10} ns^{1-2}$$
f-ब्लॉक सामान्य विन्यास
$$(n-2)f^{1-14} (n-1)d^{0-1} ns^2$$
चक्रण-मात्र चुंबकीय आघूर्ण
= {n(n+2)} BM (n = अयुग्मित e^-)
डाइक्रोमेट आयन अम्लीय रेडॉक्स
$$\text{Cr}_2\text{O}_7^{2-} + 14\text{H}^+ + 6e^- \longrightarrow 2\text{Cr}^{3+} + 7\text{H}_2\text{O}$$
परमैंगनेट आयन अम्लीय रेडॉक्स
$$\text{MnO}_4^- + 8\text{H}^+ + 5e^- \longrightarrow \text{Mn}^{2+} + 4\text{H}_2\text{O}$$
क्रोमेट-डाइक्रोमेट साम्यावस्था
2CrO_4^{2-} (पीला) + 2H^+ Cr_2O_7^{2-} (नारंगी) + H_2O
परमैंगनेट ऑक्सालेट रेडॉक्स
$$2\text{MnO}_4^- + 5\text{C}_2\text{O}_4^{2-} + 16\text{H}^+ \longrightarrow 2\text{Mn}^{2+} + 10\text{CO}_2 + 8\text{H}_2\text{O}$$
देहली ऊर्जा संबंध
$$E_T = E_a + E_{\text{reactants}}$$
फेरस का ऑक्सीकरण (KMnO4)
$$\text{MnO}_4^- + 5\text{Fe}^{2+} + 8\text{H}^+ \longrightarrow \text{Mn}^{2+} + 5\text{Fe}^{3+} + 4\text{H}_2\text{O}$$
फेरस का ऑक्सीकरण (K2Cr2O7)
$$\text{Cr}_2\text{O}_7^{2-} + 6\text{Fe}^{2+} + 14\text{H}^+ \longrightarrow 2\text{Cr}^{3+} + 6\text{Fe}^{3+} + 7\text{H}_2\text{O}$$

Conceptual Solved Examples & Case Studies

Example 1
$\text{Fe}^{3+}$ ($Z = 26$) आयन के चक्रण-मात्र चुंबकीय आघूर्ण (Spin-only magnetic moment) की गणना बोर मैग्नेटन (BM) में कीजिए।
Step-by-Step Solution:
1. आयरन ($\text{Fe}$) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ($Z = 26$):
$\text{Fe} = [\text{Ar}] 3d^6 4s^2$

2. $\text{Fe}^{3+}$ आयन का विन्यास:
तीन इलेक्ट्रॉन निकालने पर (बाह्यतम $4s$ से 2 इलेक्ट्रॉन तथा $3d$ से 1 इलेक्ट्रॉन):
$$\text{Fe}^{3+} = [\text{Ar}] 3d^5 4s^0$$
चूंकि $3d$ उपकोश में 5 कक्षक होते हैं और हुंड के नियमानुसार प्रत्येक कक्षक में 1-1 इलेक्ट्रॉन होगा।
अतः अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या $n = 5$।

3. चुंबकीय आघूर्ण सूत्र से:
$$\mu = \sqrt{n(n + 2)} \text{ BM}$$
$$\mu = \sqrt{5(5 + 2)} = \sqrt{5 \times 7} = \sqrt{35} \approx \mathbf{5.92\text{ BM}}$$
उत्तर: $\text{Fe}^{3+}$ आयन का चक्रण-मात्र चुंबकीय आघूर्ण $\mathbf{5.92\text{ BM}}$ है।
Example 2
संक्रमण तत्व अनुचुंबकीय (Paramagnetic) तथा रंगीन यौगिक क्यों बनाते हैं? $\text{Sc}^{3+}$ तथा $\text{Zn}^{2+}$ रंगहीन क्यों हैं?
Step-by-Step Solution:
1. अनुचुंबकीय होने का कारण: संक्रमण तत्वों एवं उनके आयनों के $(n-1)d$ कक्षकों में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन (Unpaired electrons) उपस्थित होते हैं। प्रत्येक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन का एक निश्चित चक्रण चुंबकीय आघूर्ण होता है, जिससे वे बाह्य चुंबकीय क्षेत्र द्वारा आकर्षित होते हैं और अनुचुंबकीय व्यवहार प्रदर्शित करते हैं।

2. रंगीन यौगिक बनाने का कारण: जब संक्रमण धातु आयन संकुल बनाते हैं, तो लिगैंडों के प्रभाव से $d$-कक्षक दो भिन्न ऊर्जा स्तरों ($t_{2g}$ एवं $e_g$) में विपाटित हो जाते हैं। जब दृश्य प्रकाश इन पर आपतित होता है, तो $d$-इलेक्ट्रॉन प्रकाश की निश्चित तरंगदैर्घ्य अवशोषित कर निम्न स्तर से उच्च स्तर में जाते हैं ($d-d$ संक्रमण)। परावर्तित पूरक प्रकाश के कारण आयन रंगीन दिखाई देते हैं।

3. $\text{Sc}^{3+}$ एवं $\text{Zn}^{2+}$ रंगहीन क्यों हैं?
• $\text{Sc}^{3+} = [\text{Ar}] 3d^0 4s^0$ (रिक्त $d$-कक्षक, कोई $d$-इलेक्ट्रॉन नहीं)
• $\text{Zn}^{2+} = [\text{Ar}] 3d^{10} 4s^0$ (पूर्ण-पूरित $d$-कक्षक, कोई रिक्त $d$-कक्षक नहीं)
चूंकि दोनों में ही $d-d$ संक्रमण असंभव है, अतः ये दोनों आयन रंगहीन (Colorless) होते हैं।
Example 3
लैंथेनाइड संकुचन (Lanthanoid Contraction) क्या है? इसके कारण तथा इसके दो प्रमुख रासायनिक परिणाम स्पष्ट कीजिए।
Step-by-Step Solution:
1. परिभाषा: लैंथेनाइड श्रेणी में परमाणु संख्या ($57$ से $71$) बढ़ने के साथ-साथ परमाण्विक तथा त्रिधनात्मक आयनिक ($\text{M}^{3+}$) त्रिज्याओं में होने वाली क्रमिक एवं नियमित कमी को लैंथेनाइड संकुचन कहते हैं।

2. कारण: नया आने वाला विभेदी इलेक्ट्रॉन उपांत्य-पूर्व $4f$ उपकोश में प्रवेश करता है। $4f$ कक्षकों की विसरित (diffuse) आकृति के कारण उनका परिरक्षण प्रभाव (Shielding effect) अत्यंत दुर्बल होता है। अतः परमाणु क्रमांक बढ़ने पर प्रभावी नाभिकीय आवेश ($Z_{\text{eff}}$) तेजी से बढ़ता है और बाह्य कोश को अपनी ओर खींच लेता है, जिससे आकार घटता है।

3. दो प्रमुख परिणाम:
(i) $\text{Zr}$ और $\text{Hf}$ की त्रिज्याओं की समानता: लैंथेनाइड संकुचन के कारण द्वितीय संक्रमण श्रेणी के $\text{Zr}$ ($160\text{ pm}$) तथा तृतीय संक्रमण श्रेणी के $\text{Hf}$ ($159\text{ pm}$) का आकार लगभग समान हो जाता है, जिससे इनके रासायनिक गुण समरूप होते हैं और इन्हें अलग करना कठिन होता है।
(ii) हाइड्रॉक्साइडों की क्षारीय प्रकृति में कमी: $\text{La}^{3+}$ से $\text{Lu}^{3+}$ तक त्रिज्या घटने से धनायन का ध्रुवण सामर्थ्य बढ़ता है, जिससे $\text{M-OH}$ बंध में सहसंयोजी लक्षण बढ़ता है। फलस्वरूप $\text{La(OH)}_3$ सबसे अधिक क्षारीय तथा $\text{Lu(OH)}_3$ सबसे कम क्षारीय होता है।
Example 4
अम्लीय माध्यम में पोटैशियम परमैंगनेट ($\text{KMnO}_4$) द्वारा (i) ऑक्सालेट आयन ($\text{C}_2\text{O}_4^{2-}$), तथा (ii) फेरस आयन ($\text{Fe}^{2+}$) के ऑक्सीकरण की संतुलित आयनिक अभिक्रियाएं लिखिए।
Step-by-Step Solution:
1. अम्लीय माध्यम में परमैंगनेट आयन की मूल अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया:
$$\text{MnO}_4^- + 8\text{H}^+ + 5e^- \longrightarrow \text{Mn}^{2+} + 4\text{H}_2\text{O} \quad \text{--- (A)}$$

(i) ऑक्सालेट आयन का $\text{CO}_2$ में ऑक्सीकरण:
ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया: $\text{C}_2\text{O}_4^{2-} \longrightarrow 2\text{CO}_2 + 2e^- \quad \text{--- (B)}$
इलेक्ट्रॉनों को संतुलित करने हेतु (A) को 2 से तथा (B) को 5 से गुणा कर जोड़ने पर:
$$\mathbf{2\text{MnO}_4^- + 5\text{C}_2\text{O}_4^{2-} + 16\text{H}^+ \longrightarrow 2\text{Mn}^{2+} + 10\text{CO}_2 + 8\text{H}_2\text{O}}$$

(ii) फेरस आयन का फेरिक आयन में ऑक्सीकरण:
ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया: $\text{Fe}^{2+} \longrightarrow \text{Fe}^{3+} + e^- \quad \text{--- (C)}$
समीकरण (C) को 5 से गुणा कर समीकरण (A) में जोड़ने पर:
$$\mathbf{\text{MnO}_4^- + 5\text{Fe}^{2+} + 8\text{H}^+ \longrightarrow \text{Mn}^{2+} + 5\text{Fe}^{3+} + 4\text{H}_2\text{O}}$$
Example 5
संक्रमण तत्व अंतराकाशी यौगिक (Interstitial Compounds) क्यों बनाते हैं? इनके दो प्रमुख भौतिक गुणधर्म लिखिए।
Step-by-Step Solution:
1. निर्माण का कारण: संक्रमण धातुओं के क्रिस्टल जालक (Crystal lattice) में संवृत संकुलन के कारण धातु परमाणुओं के मध्य छोटे-छोटे रिक्त स्थान (Voids या Interstices) रह जाते हैं। जब अधातुओं के छोटे आकार वाले परमाणु जैसे हाइड्रोजन ($\text{H}$), कार्बन ($\text{C}$), नाइट्रोजन ($\text{N}$) अथवा बोरॉन ($\text{B}$) इन अंतराकाशी स्थलों में बिना कोई रासायनिक बंध बनाए फंस जाते हैं, तो अंतराकाशी यौगिक बनते हैं (उदा. $\text{TiC, Fe}_3\text{H, VH}_{0.56}$)।

2. दो प्रमुख भौतिक गुणधर्म:
• अत्यधिक कठोरता एवं उच्च गलनांक: ये यौगिक शुद्ध धातुओं से भी अत्यधिक कठोर होते हैं (कुछ कार्बाइड हीरे के समान कठोर होते हैं) तथा इनके गलनांक शुद्ध धातुओं से अधिक होते हैं।
• धात्विक चालकता एवं रासायनिक अक्रियता: ये अपनी धात्विक चालकता को अक्षुण्ण बनाए रखते हैं तथा रासायनिक रूप से अत्यंत अक्रिय (Inert) होते हैं।

Common Misconceptions & Examiner Traps

Common Misconception

जिंक (Zn), कैडमियम (Cd) एवं मर्करी (Hg) को संक्रमण तत्व मान लेना।

Scientific Reality & Correction

Zn, Cd तथा Hg d-ब्लॉक के तत्व तो हैं, परंतु इनकी मूल एवं आयनिक दोनों अवस्थाओं में d-कक्षक पूर्ण ($d^{10}$) भरे होते हैं। अतः इन्हें संक्रमण तत्व नहीं माना जाता।

Common Misconception

लैंथेनाइड संकुचन का कारण प्रभावी नाभिकीय आवेश को भूलकर केवल इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ना लिख देना।

Scientific Reality & Correction

मुख्य कारण 4f कक्षकों का दुर्बल परिरक्षण प्रभाव (Poor shielding effect) है, जिसके कारण नाभिकीय आकर्षण बाह्य इलेक्ट्रॉनों पर अत्यधिक बढ़ जाता है।

Common Misconception

Cu+ एवं Sc3+ को रंगीन मान लेना क्योंकि ये संक्रमण श्रेणी के हैं।

Scientific Reality & Correction

Cu+ में 3d10 तथा Sc3+ में 3d0 विन्यास होता है। d-d संक्रमण न होने के कारण ये पूर्णतः रंगहीन होते हैं।

Common Misconception

चुंबकीय आघूर्ण सूत्र में कुल इलेक्ट्रॉनों की संख्या रख देना।

Scientific Reality & Correction

सूत्र μ = √(n(n+2)) BM में n केवल अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों (Unpaired electrons) की संख्या है, कुल इलेक्ट्रॉनों की नहीं।

Common Misconception

KMnO4 की अम्लीय अभिक्रिया में Mn का अपचयन Mn4+ में कर देना।

Scientific Reality & Correction

अम्लीय माध्यम में MnO4- सीधे 5 इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर रंगहीन Mn2+ में अपचयित होता है; उदासीन माध्यम में यह MnO2 (Mn4+) बनाता है।

d- एवं f-ब्लॉक तत्व: विन्यास, गुण, यौगिक एवं लैंथेनाइड संकुचन

d- एवं f-ब्लॉक के तत्व (d- & f-Block Elements): संक्रमण धातुएं, KMnO₄ व लैंथेनाइड संकुचन1. संक्रमण तत्व (d-Block)General Characteristics• विन्यास: (n-1)d¹⁻¹⁰ ns¹⁻²Cr: 3d⁵ 4s¹ | Cu: 3d¹⁰ 4s¹• अपवाद: Zn, Cd, Hg अ-संक्रमणक्योंकि मूल व +2 में d¹⁰ पूर्ण है• परिवर्तनशील ऑक्सीकरण अवस्थाएं:Mn: +2 से +7 (सर्वाधिक)• रंगीन आयन & d-d संक्रमण:Sc³⁺ (d⁰) व Zn²⁺ (d¹⁰) रंगहीन!• चुंबकीय: μ = √(n(n+2)) BM2. प्रमुख यौगिक (Compounds)K₂Cr₂O₇ & KMnO₄• पोटैशियम डाइक्रोमेट (K₂Cr₂O₇):क्रोमाइट अयस्क (FeCr₂O₄) से विरचन2CrO₄²⁻ (पीला) + 2H⁺ ⇌ Cr₂O₇²⁻ (नारंगी)Cr₂O₇²⁻ + 14H⁺ + 6e⁻ → 2Cr³⁺ + 7H₂O• पोटैशियम परमैंगनेट (KMnO₄):पायरोलुसाइट (MnO₂) से विरचनMnO₄⁻ + 8H⁺ + 5e⁻ → Mn²⁺ + 4H₂O• अंतराकाशी यौगिक (TiC, Fe₃H):अत्यधिक कठोर, उच्च गलनांक, चालक3. f-ब्लॉक व संकुचनLanthanoid Contraction• लैंथेनाइड संकुचन की परिभाषा:La से Lu तक त्रिज्या में क्रमिक कमी• संकुचन का मुख्य कारण:4f कक्षकों का दुर्बल परिरक्षण प्रभावप्रभावी नाभिकीय आवेश (Zeff) में वृद्धि• संकुचन के परिणाम:1. Zr व Hf की त्रिज्या समान (समान गुण)2. La(OH)₃ अधिक क्षारीय, Lu(OH)₃ कमऐक्टिनाइड संकुचन और भी प्रबल (5f)d- एवं f-ब्लॉक के त्वरित परीक्षा बिंदु (Golden Transition Metals Capsule)Zn, Cd, Hg अ-संक्रमण:मूल व +2 अवस्था में d¹⁰ कक्षक पूर्ण रूप से भरे होने के कारण संक्रमण तत्व नहीं हैं।रंग व चुंबकत्व:रंगीन आयन d-d संक्रमण द्वारा; अयुग्मित e⁻ से अनुचुंबकीय; चक्रण आघूर्ण μ = √(n(n+2)) BM।लैंथेनाइड संकुचन:4f के दुर्बल परिरक्षण से Zr-Hf त्रिज्या समान; La(OH)₃ सर्वाधिक क्षारीय व Lu(OH)₃ न्यूनतम क्षारीय।

Chapter Summary & 10 Key Takeaways

Takeaway 1
संक्रमण तत्व वे तत्व हैं जिनकी मूल अवस्था या किसी स्थायी ऑक्सीकरण अवस्था में अपूर्ण (n-1)d कक्षक होते हैं।
Takeaway 2
Zn, Cd तथा Hg में d-कक्षक पूर्ण रूप से भरे (d¹⁰) होने के कारण इन्हें संक्रमण तत्व नहीं माना जाता।
Takeaway 3
d-ब्लॉक का सामान्य विन्यास (n-1)d¹⁻¹⁰ ns¹⁻² होता है; Cr (3d⁵ 4s¹) एवं Cu (3d¹⁰ 4s¹) इसके प्रमुख अपवाद हैं।
Takeaway 4
(n-1)d एवं ns कक्षकों की निकटवर्ती ऊर्जा के कारण संक्रमण धातुएं परिवर्तनशील ऑक्सीकरण अवस्थाएं दर्शाती हैं (Mn: +2 से +7)।
Takeaway 5
लिगैंड की उपस्थिति में d-कक्षकों के विपाटन के कारण d-d संक्रमण होता है, जिससे संक्रमण धातु आयन रंगीन दिखाई देते हैं।
Takeaway 6
d⁰ (उदा. Sc³⁺) तथा d¹⁰ (उदा. Zn²⁺, Cu⁺) विन्यास वाले आयनों में d-d संक्रमण न होने के कारण वे रंगहीन होते हैं।
Takeaway 7
अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों के कारण संक्रमण धातुएं अनुचुंबकीय होती हैं; चक्रण-मात्र चुंबकीय आघूर्ण μ = √(n(n+2)) BM होता है।
Takeaway 8
क्रिस्टल जालक के रिक्त स्थानों में छोटे अधातु परमाणुओं (H, C, N) के समाने से कठोर अंतराकाशी यौगिक बनते हैं।
Takeaway 9
K₂Cr₂O₇ तथा KMnO₄ अम्लीय माध्यम में क्रमशः 6 तथा 5 इलेक्ट्रॉनों का विनिमय कर प्रबल ऑक्सीकारक का कार्य करते हैं।
Takeaway 10
4f कक्षकों के दुर्बल परिरक्षण के कारण लैंथेनाइड संकुचन होता है, जिसके फलस्वरूप Zr और Hf की त्रिज्याएं लगभग समान हो जाती हैं।

Check Your Understanding (Diagnostic Practice Questions)

Diagnostic questions testing core conceptual clarity. Answers are hidden initially — solve each problem first, then click to reveal the step-by-step verified solution.

1
जिंक (Zn), कैडमियम (Cd) तथा मर्करी (Hg) को संक्रमण तत्व (Transition Elements) क्यों नहीं माना जाता?
Reveal Answer & Explanation
Answer: संक्रमण तत्व की IUPAC परिभाषा के अनुसार, तत्व के परमाणु अथवा उसकी किसी सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था में उपांतिम (n-1)d कक्षक आंशिक रूप से भरे (d¹ से d⁹) होने चाहिए। Zn, Cd तथा Hg की परमाण्विक अवस्था तथा इनकी सर्वाधिक सामान्य द्विधनात्मक (+2) ऑक्सीकरण अवस्था दोनों में ही d-उपकोश पूर्ण रूप से भरे (d¹⁰) होते हैं (उदा. Zn = [Ar] 3d¹⁰ 4s², Zn²⁺ = [Ar] 3d¹⁰)। अतः उपांतिम d-कक्षक आंशिक रूप से न भरे होने के कारण इन्हें संक्रमण तत्व नहीं माना जाता।
2
संक्रमण धातुएं तथा उनके अधिकांश यौगिक अच्छे उत्प्रेरक क्यों होते हैं? दो कारण दीजिए।
Reveal Answer & Explanation
Answer: संक्रमण धातुओं के उत्कृष्ट उत्प्रेरकीय गुणों के दो मुख्य कारण हैं: (1) परिवर्तनशील संयोजकता (Variable Valency): संक्रमण धातुएं अपनी विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाओं का उपयोग कर अभिकारक अणुओं के साथ अस्थायी मध्यवर्ती यौगिक बना लेती हैं, जो निम्न सक्रियण ऊर्जा वाला वैकल्पिक पथ प्रदान करता है। (2) विशाल पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं रिक्त d-कक्षक: इनके पास रिक्त d-कक्षक तथा मुक्त संयोजकताएं होती हैं, जिन पर अभिकारक अणु सुगमता से अधिशोषित हो जाते हैं, जिससे उनके मध्य बंध दुर्बल होकर अभिक्रिया की दर तीव्र हो जाती है।
3
लैंथेनाइड संकुचन क्या है? इसका जर्कोनियम (Zr) तथा हाफ्नियम (Hf) के गुणों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: लैंथेनाइड श्रेणी (La से Lu) में परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ-साथ 4f कक्षकों के अत्यधिक दुर्बल परिरक्षण प्रभाव (Poor shielding effect) के कारण प्रभावी नाभिकीय आवेश में नियमित वृद्धि होती है, जिससे परमाण्विक व आयनिक त्रिज्याओं में होने वाली क्रमिक कमी को लैंथेनाइड संकुचन कहते हैं। प्रभाव: लैंथेनाइड संकुचन के कारण द्वितीय संक्रमण श्रेणी के जर्कोनियम (Zr - 160 pm) तथा तृतीय संक्रमण श्रेणी के हाफ्नियम (Hf - 159 pm) की परमाण्विक त्रिज्याएं लगभग बिल्कुल समान हो जाती हैं। आकार समान होने से इनके भौतिक एवं रासायनिक गुणधर्म आश्चर्यजनक रूप से समरूप होते हैं और इन्हें एक-दूसरे से पृथक करना अत्यंत कठिन होता है।
4
Cr²⁺ एक प्रबल अपचायक है जबकि Mn³⁺ एक प्रबल ऑक्सीकारक है, यद्यपि दोनों का d⁴ विन्यास है। कारण स्पष्ट कीजिए।
Reveal Answer & Explanation
Answer: Cr²⁺ ([Ar] 3d⁴) एक इलेक्ट्रॉन त्यागकर Cr³⁺ ([Ar] 3d³) में परिवर्तित होता है। जलीय माध्यम में d³ विन्यास में t₂g कक्षक अर्ध-पूरित (t₂g³) हो जाता है, जो क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन सिद्धांत के अनुसार अत्यंत स्थायी विन्यास है। अतः Cr²⁺ शीघ्र ऑक्सीकृत होकर प्रबल अपचायक का कार्य करता है। दूसरी ओर, Mn³⁺ ([Ar] 3d⁴) एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर Mn²⁺ ([Ar] 3d⁵) में बदलता है, जहाँ 3d उपकोश पूर्णतः अर्ध-पूरित (d⁵) होकर अतिरिक्त स्थायित्व प्राप्त करता है। अतः Mn³⁺ शीघ्र अपचयित होकर प्रबल ऑक्सीकारक का कार्य करता है।
5
पोटैशियम डाइक्रोमेट (K₂Cr₂O₇) के विलयन में क्षार मिलाने पर उसका रंग नारंगी से पीला क्यों हो जाता है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: पोटैशियम डाइक्रोमेट विलयन में नारंगी डाइक्रोमेट आयन (Cr₂O₇²⁻) तथा पीले क्रोमेट आयन (CrO₄²⁻) के मध्य pH-निर्भर साम्यावस्था होती है: Cr₂O₇²⁻ (नारंगी) + 2OH⁻ ⇌ 2CrO₄²⁻ (पीला) + H₂O। जब विलयन में क्षार (OH⁻) मिलाया जाता है, तो ला-शातेलिए के नियमानुसार साम्यावस्था दाईं ओर विस्थापित हो जाती है, जिससे नारंगी डाइक्रोमेट आयन पीले क्रोमेट आयनों में परिवर्तित हो जाते हैं और विलयन का रंग नारंगी से पीला हो जाता है (अम्ल मिलाने पर पुनः नारंगी हो जाता है)।
Finished Studying This Chapter?
READY TO PRACTICE?

Timed CBT Practice Tests (Exam Simulator)

Put your concepts to the test with official curriculum-aligned Foundation and Advanced practice tests. Get instant accuracy scores, time metrics, and step-by-step verified explanations.