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JAC • Class XII • Physics • Ch 8
Estimated Time: 45 Mins
Study Progress: In Progress

Electromagnetic Waves

19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में जेम्स क्लर्क मैक्सवेल ने विद्युत और चुंबकत्व के समस्त नियमों को चार सुरुचिपूर्ण समीकरणों में समेटकर भौतिकी के इतिहास का सबसे महान सैद्धांतिक एकीकरण प्रस्तुत किया। ऐम्पियर के परिपथीय नियम की आंतरिक असंगति को दूर करते हुए मैक्सवेल ने सिद्ध किया कि केवल चालक तार में प्रवाहित मुक्त इलेक्ट्रॉन ही नहीं, बल्कि समय के साथ परिवर्तनशील विद्युत क्षेत्र भी एक धारा उत्पन्न करता है जिसे 'विस्थापन धारा' (Displacement Current) [$I_d = \varepsilon_0 \frac{d\Phi_E}{dt}$] कहते हैं। इस क्रांतिकारी खोज ने यह उद्घाटित किया कि जिस प्रकार बदलता चुंबकीय क्षेत्र विद्युत क्षेत्र उत्पन्न करता है (फैराडे नियम), ठीक उसी प्रकार बदलता विद्युत क्षेत्र भी चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है! इन दोनों क्षेत्रों के परस्पर पुनरुत्पादक दोलनों से अंतरिक्ष में बिना किसी भौतिक माध्यम के प्रकाश की गति ($c = \frac{1}{\sqrt{\mu_0 \varepsilon_0}} = 3 \times 10^8\text{ m/s}$) से यात्रा करने वाली विद्युतचुंबकीय तरंगों (Electromagnetic Waves) का जन्म हुआ। विद्युतचुंबकीय तरंगें पूर्णतः अनुप्रस्थ (Transverse) प्रकृति की होती हैं, जिनमें विद्युत सदिश ($\vec{E}$) एवं चुंबकीय सदिश ($\vec{B}$) परस्पर लंबवत तथा तरंग संचरण दिशा ($\vec{E} \times \vec{B}$) के लंबवत दोलन करते हैं तथा इनके आयामों का अनुपात $c = \frac{E_0}{B_0}$ होता है। गामा किरणों से लेकर रेडियो तरंगों तक फैला विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम—जिसमें एक्स-किरणें, पराबैंगनी, दृश्य प्रकाश, अवरक्त ऊष्मा तरंगें, सूक्ष्म तरंगें (रडार व ओवन), तथा रेडियो तरंगें शामिल हैं—आधुनिक चिकित्सा, उपग्रह संचार, इंटरनेट तथा खगोल भौतिकी का प्राणतत्व है।

सूर्य और पृथ्वी के बीच 15 करोड़ किमी का शून्य अंतरिक्ष है जहाँ हवा का एक अणु तक नहीं है; फिर धूप और गर्मी हम तक कैसे पहुँचती है?

ध्वनि तरंगों को चलने के लिए हवा या पानी जैसे माध्यम की जरूरत होती है—यदि आप अंतरिक्ष में चिल्लाएंगे तो पास खड़ा अंतरिक्ष यात्री भी कुछ नहीं सुन पाएगा। फिर सूर्य से निकलने वाला प्रचंड प्रकाश और ऊष्मा करोड़ों किलोमीटर के सन्नाटे और निर्वात (Vacuum) को चीरते हुए मात्र 8 मिनट 20 सेकंड में धरती पर कैसे आ धमकती है? उन्हें किसी माध्यम के पहियों की जरूरत नहीं होती! प्रकाश वास्तव में एक 'विद्युतचुंबकीय तरंग' है। विद्युत क्षेत्र बदलता है तो वह चुंबकीय क्षेत्र पैदा करता है, और चुंबकीय क्षेत्र बदलता है तो वह विद्युत क्षेत्र पैदा करता है! ये दोनों एक-दूसरे की उंगली पकड़कर, एक-दूसरे को जन्म देते हुए निर्वात के सूने आसमान में $3,00,000$ किलोमीटर प्रति सेकंड की ब्रह्मांडीय गति से छलांग लगाते हैं! आइए समझें मैक्सवेल के इस जादुई प्रकाश का रहस्य!

Why This Chapter Matters

JAC और CBSE कक्षा 12वीं भौतिकी बोर्ड परीक्षा में 'विद्युतचुंबकीय तरंगें' एक अत्यंत स्कोरिंग और संकल्पनात्मक अध्याय है। विस्थापन धारा (Displacement Current) की आवश्यकता, परिभाषा तथा सूत्र ($I_d = \varepsilon_0 \frac{d\Phi_E}{dt}$) का निगमन, ऐम्पियर-मैक्सवेल का संशोधित नियम एवं मैक्सवेल के चारों समीकरण, विद्युतचुंबकीय तरंगों के 5 प्रमुख लक्षण (अनुप्रस्थ प्रकृति, निर्वात में चाल $c = 1/\sqrt{\mu_0\varepsilon_0}$, $c = E_0/B_0$, ऊर्जा घनत्व व संवेग), हर्ट्ज का प्रयोग तथा तरंगों की उत्पत्ति (त्वरित आवेश द्वारा), तथा संपूर्ण विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम (गामा, एक्स, यूवी, दृश्य, अवरक्त, सूक्ष्म, रेडियो तरंगें) की उत्पत्ति, तरंगदैर्ध्य परास एवं 2-2 व्यावहारिक उपयोगों पर प्रतिवर्ष 3 से 5 अंकों के प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं।

Before You Begin (Prerequisites)

  • विद्युत फ्लक्स ($\Phi_E = EA$), संधारित्र का आवेशन ($q = CV$) एवं ऐम्पियर का परिपथीय नियम।
  • फैराडे का विद्युतचुंबकीय प्रेरण नियम तथा तरंगों की सामान्य अवधारणा (आवृत्ति, तरंगदैर्ध्य: $c = u\lambda$)।
  • सदिश गुणनफल ($\u000bec{A} imes \u000bec{B}$) एवं समतल प्रगामी तरंग का समीकरण।

What You Will Learn (Core Objectives)

  • ऐम्पियर नियम की असंगति को समझना तथा विस्थापन धारा ($I_d$) और ऐम्पियर-मैक्सवेल समीकरण का निगमन करना।
  • मैक्सवेल के चारों मूलभूत समीकरणों के भौतिक अर्थ एवं महत्व की व्याख्या करना।
  • विद्युतचुंबकीय तरंगों की उत्पत्ति (त्वरित आवेश) तथा इनके अनुप्रस्थ लक्षण ($c = E_0/B_0$, ऊर्जा समविभाजन) को सिद्ध करना।
  • विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम के सभी 7 घटकों (गामा से रेडियो तक) को तरंगदैर्ध्य व आवृत्ति क्रम में व्यवस्थित करना।
  • स्पेक्ट्रम के प्रत्येक घटक के स्रोत, संसूचक तथा चिकित्सा, संचार व दैनिक जीवन में उनके प्रमुख अनुप्रयोगों का विश्लेषण करना।

Chapter Roadmap & Progression

1 1. विस्थापन धारा एवं ऐम्पियर-मैक्सव...
2 2. मैक्सवेल के चार समीकरण (Maxwell'...
3 3. विद्युतचुंबकीय तरंगें: उत्पत्ति,...
4 4. संपूर्ण विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्र...

Complete Concept Guide (100% Curriculum Coverage)

1. विस्थापन धारा एवं ऐम्पियर-मैक्सवेल का नियम

1.1 ऐम्पियर के नियम की असंगति (Inconsistency of Ampere's Law)

जब किसी समांतर प्लेट संधारित्र को बैटरी द्वारा आवेशित किया जाता है, तो संयोजक तारों में चालक धारा ($I_c$) बहती है।

  • तार के चारों ओर एक लूप $C$ लेने पर ऐम्पियर के नियम से: $\oint \vec{B}\cdot d\vec{l} = \mu_0 I_c \ne 0$ (चुंबकीय क्षेत्र उपस्थित है)।
  • किंतु यदि उसी लूप $C$ की परिधि पर आधारित एक बर्तन के आकार का पृष्ठ चुनें जो संधारित्र की प्लेटों के बीच से गुजरता हो: चूंकि प्लेटों के बीच कोई चालक तार नहीं है, अतः $I_c = 0 \implies \oint \vec{B}\cdot d\vec{l} = 0$।
  • यह एक ही परिपथ में एक गंभीर विरोधाभास (असंगति) था: संधारित्र के बाहर चुंबकीय क्षेत्र है परंतु प्लेटों के बीच नहीं, जबकि प्रयोगों ने सिद्ध किया कि प्लेटों के बीच भी चुंबकीय सुई विक्षेपित होती है!

1.2 विस्थापन धारा (Displacement Current - $I_d$) का समाधान

मैक्सवेल (1864) ने इस समस्या को सुलझाते हुए बताया कि संधारित्र के आवेशन के दौरान प्लेटों के बीच संचित आवेश $q$ बढ़ता है, जिससे प्लेटों के बीच का विद्युत क्षेत्र ($E$) तथा विद्युत फ्लक्स ($\Phi_E$) समय के साथ तेजी से बदलता है।

विस्थापन धारा की परिभाषा: समय के साथ परिवर्तनशील विद्युत क्षेत्र (अथवा विद्युत फ्लक्स) के कारण अंतरिक्ष में उत्पन्न होने वाली आभासी धारा को विस्थापन धारा कहते हैं:

$$\mathbf{I_d = \varepsilon_0 \frac{d\Phi_E}{dt}}$$
• निगमन: संधारित्र की प्लेटों के बीच विद्युत क्षेत्र $E = \frac{q}{\varepsilon_0 A}$
विद्युत फ्लक्स $\Phi_E = E \cdot A = \frac{q}{\varepsilon_0 A} \times A = \frac{q}{\varepsilon_0} \implies q = \varepsilon_0 \Phi_E$
समय के सापेक्ष अवकलन करने पर: $\frac{dq}{dt} = \varepsilon_0 \frac{d\Phi_E}{dt}$
$$\mathbf{I_c = I_d = \varepsilon_0 \frac{d\Phi_E}{dt}}$$• सततता का नियम: संयोजक तारों में केवल चालक धारा होती है ($I = I_c$, $I_d = 0$), जबकि प्लेटों के बीच केवल विस्थापन धारा होती है ($I = I_d$, $I_c = 0$)। अतः परिपथ में कुल धारा $\mathbf{I = I_c + I_d}$ की सततता सर्वत्र बनी रहती है!

1.3 ऐम्पियर-मैक्सवेल का संशोधित नियम (Ampere-Maxwell Law)

$$\mathbf{\oint_C \vec{B}\cdot d\vec{l} = \mu_0 (I_c + I_d) = \mu_0 \left( I_c + \varepsilon_0 \frac{d\Phi_E}{dt} \right)}$$निष्कर्ष: चुंबकीय क्षेत्र न केवल वास्तविक गतिमान आवेशों (चालक धारा $I_c$) द्वारा, बल्कि बदलते हुए विद्युत क्षेत्र द्वारा भी उत्पन्न किया जा सकता है!

2. मैक्सवेल के चार समीकरण (Maxwell's Four Equations)

2.1 विद्युत-चुंबकत्व के चार सार्वभौमिक समीकरण

मैक्सवेल ने संपूर्ण विद्युत-चुंबकत्व को चार मौलिक अवकल/समाकल समीकरणों में संकलित किया:

समीकरणगणितीय रूप (समाकल रूप)भौतिक सार्थकता / स्रोत नियम
1. मैक्सवेल का प्रथम समीकरण$$\mathbf{\oint_S \vec{E}\cdot d\vec{A} = \frac{q_{\text{enclosed}}}{\varepsilon_0}}$$स्थिरवैद्युतिकी का गाउस नियम: विद्युत आवेश विद्युत क्षेत्र का स्रोत होते हैं। स्वतंत्र एकल आवेश संभव हैं।
2. मैक्सवेल का द्वितीय समीकरण$$\mathbf{\oint_S \vec{B}\cdot d\vec{A} = 0}$$चुंबकत्व का गाउस नियम: प्रकृति में एकल चुंबकीय ध्रुव (Magnetic Monopole) का अस्तित्व नहीं होता; चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं सतत बंद लूप बनाती हैं।
3. मैक्सवेल का तृतीय समीकरण$$\mathbf{\oint_C \vec{E}\cdot d\vec{l} = -\frac{d\Phi_B}{dt}}$$फैराडे का विद्युतचुंबकीय प्रेरण नियम: समय के साथ बदलता चुंबकीय क्षेत्र विद्युत क्षेत्र उत्पन्न करता है। (लेंज नियम सहित)।
4. मैक्सवेल का चतुर्थ समीकरण$$\mathbf{\oint_C \vec{B}\cdot d\vec{l} = \mu_0 \left( I_c + \varepsilon_0 \frac{d\Phi_E}{dt} \right)}$$ऐम्पियर-मैक्सवेल नियम: चुंबकीय क्षेत्र चालक धारा तथा बदलते विद्युत क्षेत्र (विस्थापन धारा) दोनों द्वारा उत्पन्न होता है।

3. विद्युतचुंबकीय तरंगें: उत्पत्ति, स्वरूप एवं प्रमुख विशेषताएं

3.1 विद्युतचुंबकीय तरंगों की उत्पत्ति (Origin of EM Waves)

  • स्थिर आवेश केवल स्थिरवैद्युत क्षेत्र $\vec{E}$ उत्पन्न करता है (तरंगें नहीं)।
  • नियत वेग से गतिमान आवेश स्थिर विद्युत क्षेत्र और चुंबकीय क्षेत्र $\vec{B}$ उत्पन्न करता है, परंतु ऊर्जा विकरित नहीं करता।
  • त्वरित अथवा दोलायमान आवेश (Accelerated or Oscillating Charge): जब कोई आवेश त्वरित होता है (जैसे $LC$ दोलक में दोलन करता इलेक्ट्रॉन), तो वह समय के साथ परिवर्तित विद्युत क्षेत्र उत्पन्न करता है, जो बदलते चुंबकीय क्षेत्र को जन्म देता है। यह चक्र अंतरिक्ष में निरंतर आगे बढ़ता है और विद्युतचुंबकीय तरंगों का विकिरण करता है।
  • हर्ट्ज का प्रयोग (1887): हेनरिक हर्ट्ज ने स्लिंग स्पार्क गैप और $LC$ परिपथ द्वारा सर्वप्रथम प्रयोगशाला में लगभग $6\text{ मीटर}$ तरंगदैर्ध्य वाली विद्युतचुंबकीय तरंगें उत्पन्न कर मैक्सवेल के सिद्धांत को सत्य सिद्ध किया।

3.2 विद्युतचुंबकीय तरंगों की 6 प्रमुख विशेषताएं (Characteristics of EM Waves)

  1. 1. अनुप्रस्थ प्रकृति (Transverse Nature):
    विद्युत क्षेत्र $\vec{E}$ तथा चुंबकीय क्षेत्र $\vec{B}$ परस्पर लंबवत होते हैं और दोनों तरंग संचरण की दिशा के भी लंबवत दोलन करते हैं। यदि तरंग $x$-अक्ष के अनुदिश संचरित हो रही हो:
    $$E_y = E_0 \sin(kx - \omega t) \quad \text{तथा} \quad B_z = B_0 \sin(kx - \omega t)$$तरंग संचरण की दिशा पॉइंटिंग सदिश $\mathbf{\vec{S} = \frac{1}{\mu_0} (\vec{E} \times \vec{B})}$ द्वारा दी जाती है।
  2. 2. निर्वात में प्रकाश की चाल से संचरण:
    विद्युतचुंबकीय तरंगें निर्वात में प्रकाश की चाल $c$ से चलती हैं:
    $$\mathbf{c = \frac{1}{\sqrt{\mu_0 \varepsilon_0}} = 3 \times 10^8 \text{ m/s}}$$
    किसी पारदर्शी माध्यम में इनकी चाल: $v = \frac{1}{\sqrt{\mu \varepsilon}} = \frac{c}{n}$ (जहाँ $n = \sqrt{\mu_r \varepsilon_r}$ अपवर्तनांक है)।
  3. 3. आयामों का अनुपात (Ratio of Amplitudes):
    किसी भी क्षण विद्युत क्षेत्र के शिखर मान और चुंबकीय क्षेत्र के शिखर मान का अनुपात प्रकाश के वेग के बराबर होता है:
    $$\mathbf{\frac{E_0}{B_0} = \frac{E}{B} = c = 3 \times 10^8 \text{ m/s}}$$
    चूंकि $E_0 = c B_0$, अतः विद्युत क्षेत्र का परिमाण बहुत विशाल होता है। प्रकाशिक प्रभाव (जैसे रेटिना संवेदनशीलता) मुख्य रूप से $\vec{E}$ द्वारा होते हैं, इसीलिए $\vec{E}$ को प्रकाश सदिश (Light Vector) कहते हैं।
  4. 4. ऊर्जा घनत्व एवं समविभाजन (Energy Density):
    तरंग की कुल औसत ऊर्जा घनत्व विद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों में समान रूप से विभाजित होती है:
    $$u_E = \frac{1}{4}\varepsilon_0 E_0^2 \quad \text{तथा} \quad u_B = \frac{B_0^2}{4\mu_0} \implies \mathbf{u_E = u_B}$$
    कुल औसत ऊर्जा घनत्व: $\mathbf{u = u_E + u_B = \frac{1}{2}\varepsilon_0 E_0^2 = \frac{B_0^2}{2\mu_0}}$।
  5. 5. संवेग एवं विकिरण दाब (Momentum & Radiation Pressure):
    जब $U$ ऊर्जा वाली तरंग किसी सतह पर गिरती है, तो वह सतह को संवेग स्थानांतरित करती है: $\mathbf{p = \frac{U}{c}}$। सतह पर डाला गया दाब विकिरण दाब कहलाता है।
  6. 6. माध्यम की आवश्यकता नहीं: इन्हें संचरण हेतु किसी भौतिक माध्यम की आवश्यकता नहीं होती (उदासीन प्रकृति, विद्युत व चुंबकीय क्षेत्रों द्वारा विक्षेपित नहीं होतीं)।

4. संपूर्ण विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम (The Electromagnetic Spectrum)

4.1 विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम का वर्गीकरण

तरंगदैर्ध्य ($\lambda$) के बढ़ते क्रम अथवा आवृत्ति ($\nu$) के घटते क्रम में संपूर्ण विद्युतचुंबकीय तरंगों का सुव्यवस्थित वर्गीकरण स्पेक्ट्रम कहलाता है ($c = \nu \lambda$):

तरंग का नामतरंगदैर्ध्य परास ($\lambda$)उत्पत्ति का स्रोत2 प्रमुख व्यावहारिक उपयोग
1. गामा किरणें ($\gamma$-rays)$\mathbf{< 10^{-11}\text{ m}}$
($< 0.01\text{ nm}$)
परमाणु के नाभिक के रेडियोऐक्टिव विघटन से।1. कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने में (रेडियोथेरेपी)।
2. नाभिकीय संरचना के अध्ययन में।
2. एक्स-किरणें (X-rays)$\mathbf{10^{-11}\text{ m} - 10^{-8}\text{ m}}$
($0.01\text{ nm} - 10\text{ nm}$)
उच्च गलनांक वाले भारी लक्ष्य (टंगस्टन) पर तीव्रगामी इलेक्ट्रॉनों की टक्कर से (कूलीज नलिका)।1. चिकित्सा में अस्थि-भंग (हड्डियों की टूट-फूट) व सीटी स्कैन में।
2. क्रिस्टल संरचना एवं धातु वेल्डिंग दोष जांच में।
3. पराबैंगनी किरणें (UV rays)$\mathbf{10^{-8}\text{ m} - 4 \times 10^{-7}\text{ m}}$
($10\text{ nm} - 400\text{ nm}$)
सूर्य, विद्युत आर्क एवं पारा वाष्प लैंप। (ओजोन परत द्वारा अवशोषित)।1. जीवाणुनाशक के रूप में जल शोधन (RO Water Purifier) में।
2. जाली दस्तावेजों, फिंगरप्रिंट तथा LASIK नेत्र सर्जरी में।
4. दृश्य प्रकाश (Visible Light)$\mathbf{400\text{ nm} - 700\text{ nm}}$
($4 \times 10^{-7}\text{ m} - 7 \times 10^{-7}\text{ m}$)
उत्तेजित परमाणुओं में इलेक्ट्रॉनों के संक्रमण से (तापदीप्त लैंप, ज्वाला)।1. मानव नेत्रों में दृष्टि संवेदना उत्पन्न कर संसार को दृश्य बनाना।
2. प्रकाश-संश्लेषण एवं ऑप्टिकल फाइबर संचार।
5. अवरक्त किरणें (Infrared - Heat Waves)$\mathbf{700\text{ nm} - 1\text{ mm}}$
($7 \times 10^{-7}\text{ m} - 10^{-3}\text{ m}$)
गर्म वस्तुओं एवं अणुओं के तापीय कंपनों द्वारा। (इन्हें ऊष्मा तरंगें भी कहते हैं)।1. टीवी, एसी के रिमोट कंट्रोल में।
2. पौधा घर प्रभाव (Greenhouse), कोहरे में फोटोग्राफी व रात्रि दृष्टि उपकरण।
6. सूक्ष्म तरंगें (Microwaves)$\mathbf{1\text{ mm} - 0.1\text{ m}}$
($10^{-3}\text{ m} - 10^{-1}\text{ m}$)
मैग्नेट्रॉन, क्लाइस्ट्रॉन वाल्व एवं गन डायोड द्वारा।1. माइक्रोवेव ओवन में भोजन पकाने में।
2. वायुयानों के रडार सिस्टम एवं उपग्रह संचार में।
7. रेडियो तरंगें (Radio Waves)$\mathbf{> 0.1\text{ m}}$
($0.1\text{ m} - 10^4\text{ m}$)
चालक तारों में त्वरित/दोलित आवेशों द्वारा ($LC$ दोलित्र)।1. रेडियो तथा दूरदर्शन (TV) प्रसारण में।
2. सेल्युलर फोन संचार तथा WiFi नेटवर्किंग में।

Key Formulas, Laws & Physical Constants

विस्थापन धारा (Displacement Current)
I_d = _0 {d_E}{dt} (प्लेटों के बीच I_c = 0, I_d = I_c)
ऐम्पियर-मैक्सवेल नियम
$$\oint_C \vec{B}\cdot d\vec{l} = \mu_0 (I_c + I_d) = \mu_0 \left( I_c + \varepsilon_0 \frac{d\Phi_E}{dt} \right)$$
मैक्सवेल प्रथम (गाउस विद्युत)
$$\oint_S \vec{E}\cdot d\vec{A} = \frac{q}{\varepsilon_0}$$
मैक्सवेल द्वितीय (गाउस चुंबक)
_S {B}· d{A} = 0 (एकल ध्रुव असंभव)
मैक्सवेल तृतीय (फैराडे नियम)
$$\oint_C \vec{E}\cdot d\vec{l} = -\frac{d\Phi_B}{dt}$$
निर्वात में तरंग की चाल
$$c = \frac{1}{\sqrt{\mu_0 \varepsilon_0}} = 3 \times 10^8\text{ m/s}; \quad v = \frac{c}{\sqrt{\mu_r \varepsilon_r}} = \frac{c}{n}$$
क्षेत्र आयामों का अनुपात
$$c = \frac{E_0}{B_0} = \frac{E_{\text{rms}}}{B_{\text{rms}}}$$
पॉइंटिंग सदिश (दिशा व तीव्रता)
$$\vec{S} = \frac{1}{\mu_0} (\vec{E} \times \vec{B}); \quad I = \langle S \rangle = \frac{1}{2} c \varepsilon_0 E_0^2$$
औसत ऊर्जा घनत्व
$$u = u_E + u_B = \frac{1}{2}\varepsilon_0 E_0^2 = \frac{B_0^2}{2\mu_0} \quad (u_E = u_B)$$
संवेग व विकिरण दाब
p = {U}{c}; P_{rad} = {I}{c} (अवशोषण), P_{rad} = {2I}{c} (परावर्तन)
तरंग समीकरण संबंध
$$c = \nu \lambda = \frac{\omega}{k} \quad (k = 2\pi/\lambda, \omega = 2\pi\nu)$$
स्पेक्ट्रम क्रम (λ बढ़ता क्रम)
-किरणें < एक्स-किरणें < पराबैंगनी < दृश्य < अवरक्त < सूक्ष्म < रेडियो

Conceptual Solved Examples & Case Studies

Example 1
एक समांतर प्लेट संधारित्र की वृत्ताकार प्लेटों की त्रिज्या $6.0\text{ cm}$ तथा धारिता $100\text{ pF}$ है। इसे $230\text{ V}, 50\text{ Hz}$ के AC स्रोत से जोड़ा गया है। (a) परिपथ में प्रवाहित चालन धारा का RMS मान क्या है? (b) क्या संधारित्र की प्लेटों के बीच विस्थापन धारा चालन धारा के बराबर होगी?
Step-by-Step Solution:
दिया है:
धारिता $C = 100\text{ pF} = 100 \times 10^{-12}\text{ F} = 10^{-10}\text{ F}$
वोल्टता $V_{\text{rms}} = 230\text{ V}$
आवृत्ति $\nu = 50\text{ Hz} \implies \omega = 2\pi \times 50 = 100\pi \approx 314.16\text{ rad/s}$

(a) चालन धारा ($I_{\text{rms}}$):
संधारित्र का प्रतिघात:
$$X_C = \frac{1}{\omega C} = \frac{1}{(100\pi) \times 10^{-10}} = \frac{10^8}{\pi}\text{ }\Omega \approx 3.18 \times 10^7\text{ }\Omega$$
चालन धारा का RMS मान:
$$I_{\text{rms}} = \frac{V_{\text{rms}}}{X_C} = \frac{230}{\frac{10^8}{\pi}} = 230 \pi \times 10^{-8} = 722.56 \times 10^{-8}\text{ A} = \mathbf{7.23 \times 10^{-6}\text{ A} = 7.23\text{ }\mu\text{A}}$$

(b) विस्थापन धारा से तुलना:
हाँ, मैक्सवेल के सततता सिद्धांत के अनुसार संधारित्र की प्लेटों के बीच प्रत्येक क्षण विस्थापन धारा चालन धारा के पूर्णतः बराबर ($I_d = I_c$) होगी। अतः विस्थापन धारा का RMS मान भी $\mathbf{7.23\text{ }\mu\text{A}}$ होगा।
Example 2
निर्वात में संचरित एक समतल विद्युतचुंबकीय तरंग के विद्युत क्षेत्र का आयाम $E_0 = 120\text{ N/C}$ तथा आवृत्ति $\nu = 50\text{ MHz}$ है। (a) इसके चुंबकीय क्षेत्र का आयाम ($B_0$), (b) कोणीय आवृत्ति ($\omega$), तथा (c) तरंगदैर्ध्य ($\lambda$) ज्ञात कीजिए।
Step-by-Step Solution:
दिया है:
$E_0 = 120\text{ N/C}$
$\nu = 50\text{ MHz} = 50 \times 10^6\text{ Hz} = 5 \times 10^7\text{ Hz}$
$c = 3 \times 10^8\text{ m/s}$

(a) चुंबकीय क्षेत्र का आयाम ($B_0$):
सूत्र: $c = \frac{E_0}{B_0} \implies B_0 = \frac{E_0}{c}$
$$B_0 = \frac{120}{3 \times 10^8} = 40 \times 10^{-8}\text{ T} = \mathbf{4.0 \times 10^{-7}\text{ T} = 0.4\text{ }\mu\text{T}}$$

(b) कोणीय आवृत्ति ($\omega$):
$$\omega = 2\pi \nu = 2 \times 3.1416 \times (5 \times 10^7) = \mathbf{3.14 \times 10^8\text{ rad/s}}$$

(c) तरंगदैर्ध्य ($\lambda$):
$$\lambda = \frac{c}{\nu} = \frac{3 \times 10^8\text{ m/s}}{5 \times 10^7\text{ Hz}} = \mathbf{6.0\text{ Meter}}$$
Example 3
विस्थापन धारा (Displacement Current) से क्या तात्पर्य है? इसकी आवश्यकता क्यों पड़ी तथा इसका गणितीय सूत्र व्युत्पन्न कीजिए।
Step-by-Step Solution:
विस्थापन धारा की आवश्यकता:
ऐम्पियर का मूल परिपथीय नियम $\oint \vec{B}\cdot d\vec{l} = \mu_0 I_c$ संधारित्र के आवेशन/निरावेशण के दौरान असंगत सिद्ध हो रहा था, क्योंकि तारों के चारों ओर तो धारा $I_c$ थी किंतु प्लेटों के बीच के रिक्त स्थान में $I_c = 0$ होने से चुंबकीय क्षेत्र शून्य प्रतीत होता था, जो कि प्रयोगात्मक रूप से असत्य था。

परिभाषा एवं निगमन:
मैक्सवेल ने स्पष्ट किया कि समय के साथ बदलते विद्युत क्षेत्र के कारण रिक्त स्थान में एक प्रभावी धारा उत्पन्न होती है, जिसे विस्थापन धारा कहते हैं。
1. माना संधारित्र की प्लेटों पर तात्क्षणिक आवेश $q$ तथा क्षेत्रफल $A$ है。
2. प्लेटों के मध्य एकसमान विद्युत क्षेत्र: $E = \frac{\sigma}{\varepsilon_0} = \frac{q}{\varepsilon_0 A}$
3. प्लेटों से गुजरने वाला विद्युत फ्लक्स: $\Phi_E = E \cdot A = \left( \frac{q}{\varepsilon_0 A} \right) A = \frac{q}{\varepsilon_0}$
4. आवेश का मान: $q = \varepsilon_0 \Phi_E$
5. समय के सापेक्ष परिवर्तन की दर (धारा):
$$\frac{dq}{dt} = \varepsilon_0 \frac{d\Phi_E}{dt}$$
चूंकि यह धारा बदलते विद्युत फ्लक्स के कारण है, अतः इसे विस्थापन धारा ($I_d$) कहा गया:
$$\mathbf{I_d = \varepsilon_0 \frac{d\Phi_E}{dt}}$$ (इति सिद्धम्)
यही धारा प्लेटों के बीच चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है और परिपथ में धारा की सततता ($I_c = I_d$) बनाए रखती है।
Example 4
विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम में निम्नलिखित तरंगों को उनकी बढ़ती हुई आवृत्ति के क्रम में व्यवस्थित कीजिए तथा प्रत्येक का एक-एक प्रमुख उपयोग लिखिए: (a) एक्स-किरणें, (b) सूक्ष्म तरंगें (Microwaves), (c) पराबैंगनी किरणें, (d) गामा किरणें, (e) अवरक्त किरणें।
Step-by-Step Solution:
बढ़ती हुई आवृत्ति के क्रम में सुव्यवस्थित क्रम ($ u$ बढ़ता हुआ, $\lambda$ घटता हुआ):
$$\text{सूक्ष्म तरंगें} < \text{अवरक्त किरणें} < \text{पराबैंगनी किरणें} < \text{एक्स-किरणें} < \text{गामा किरणें}$$

प्रत्येक का एक-एक प्रमुख उपयोग:
1. सूक्ष्म तरंगें (Microwaves): वायुयानों के संचालन हेतु रडार प्रणाली (RADAR) में तथा माइक्रोवेव ओवन में।
2. अवरक्त किरणें (Infrared rays): टीवी एवं घरेलू उपकरणों के रिमोट कंट्रोल में तथा कोहरे में फोटोग्राफी में।
3. पराबैंगनी किरणें (UV rays): जल शोधक (Water purifiers) में जीवाणुओं को नष्ट करने में तथा LASIK नेत्र शल्यक्रिया में।
4. एक्स-किरणें (X-rays): चिकित्सा विज्ञान में अस्थि-भंग (टूटी हड्डियों का पता लगाने) तथा सीटी स्कैन में।
5. गामा किरणें ($\gamma$-rays): कैंसर के उपचार में रेडियोथेरेपी (घातक ट्यूमर कोशिकाओं को नष्ट करने) में।
Example 5
सिद्ध कीजिए कि विद्युतचुंबकीय तरंगों में विद्युत क्षेत्र सदिश एवं चुंबकीय क्षेत्र सदिश के औसत ऊर्जा घनत्व परस्पर बराबर होते हैं ($u_E = u_B$) तथा कुल ऊर्जा दोनों में समान रूप से विभाजित होती है।
Step-by-Step Solution:
विद्युत क्षेत्र का औसत ऊर्जा घनत्व:
$$u_E = \frac{1}{2} \varepsilon_0 E_{\text{rms}}^2 = \frac{1}{2} \varepsilon_0 \left( \frac{E_0}{\sqrt{2}} \right)^2 = \mathbf{\frac{1}{4} \varepsilon_0 E_0^2} \quad \text{--- (समीकरण 1)}$$

चुंबकीय क्षेत्र का औसत ऊर्जा घनत्व:
$$u_B = \frac{B_{\text{rms}}^2}{2\mu_0} = \frac{(B_0/\sqrt{2})^2}{2\mu_0} = \mathbf{\frac{B_0^2}{4\mu_0}} \quad \text{--- (समीकरण 2)}$$

तुलना एवं प्रमाण:
हम जानते हैं कि $c = \frac{E_0}{B_0} \implies E_0 = c B_0$ तथा $c = \frac{1}{\sqrt{\mu_0 \varepsilon_0}} \implies c^2 = \frac{1}{\mu_0 \varepsilon_0}$。
समीकरण (1) में $E_0 = c B_0$ प्रतिस्थापित करने पर:
$$u_E = \frac{1}{4} \varepsilon_0 (c B_0)^2 = \frac{1}{4} \varepsilon_0 c^2 B_0^2$$
चूंकि $\varepsilon_0 c^2 = \frac{1}{\mu_0}$:
$$u_E = \frac{1}{4} \left( \frac{1}{\mu_0} \right) B_0^2 = \mathbf{\frac{B_0^2}{4\mu_0}}$$
समीकरण (2) से तुलना करने पर:
$$\mathbf{u_E = u_B}$$ (इति सिद्धम्)
निष्कर्ष: विद्युतचुंबकीय तरंग की कुल औसत ऊर्जा घनत्व विद्युत और चुंबकीय घटकों में ठीक आधी-आधी ($50\%-50\%$) विभाजित होती है।

Common Misconceptions & Examiner Traps

Common Misconception

विस्थापन धारा को केवल एक काल्पनिक गणितीय त्रुटि निवारक मानना।

Scientific Reality & Correction

विस्थापन धारा वास्तविक भौतिक प्रभाव उत्पन्न करती है; यह चालक धारा की तरह ही चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है।

Common Misconception

विद्युतचुंबकीय तरंगों को अनुदैर्ध्य मान लेना।

Scientific Reality & Correction

विद्युतचुंबकीय तरंगें पूर्णतः 'अनुप्रस्थ' (Transverse) होती हैं; $\vec{E}$ तथा $\vec{B}$ दोनों तरंग गति के लंबवत दोलन करते हैं।

Common Misconception

विद्युतचुंबकीय तरंगों की चाल को आवृत्ति या तीव्रता पर निर्भर मानना।

Scientific Reality & Correction

निर्वात में सभी विद्युतचुंबकीय तरंगें (गामा से रेडियो तक) केवल एक ही नियत चाल $c = 3 \times 10^8\text{ m/s}$ से चलती हैं।

Common Misconception

दृश्य प्रकाश में पराबैंगनी से अधिक ऊर्जा होने का भ्रम पालना।

Scientific Reality & Correction

ऊर्जा आवृत्ति के समानुपाती ($E = h\nu$) होती है; पराबैंगनी किरणों की आवृत्ति दृश्य प्रकाश से अधिक होती है, अतः UV अधिक ऊर्जावान होती हैं।

Common Misconception

ध्वनि तरंगों को विद्युतचुंबकीय तरंगों का भाग समझ लेना।

Scientific Reality & Correction

ध्वनि तरंगें यांत्रिक अनुदैर्ध्य तरंगें हैं जिन्हें संचरण हेतु भौतिक माध्यम चाहिए; वे विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम का भाग नहीं हैं।

विद्युतचुंबकीय तरंगें: विस्थापन धारा, मैक्सवेल समीकरण, अनुप्रस्थ तरंग व स्पेक्ट्रम

विद्युतचुंबकीय तरंगें: विस्थापन धारा, मैक्सवेल समीकरण व स्पेक्ट्रम1. विस्थापन धारा व मैक्सवेलऐम्पियर नियम संशोधन• विस्थापन धारा: I_d = ε₀ (dΦ_E / dt)बदलते विद्युत क्षेत्र से चुंबकीय क्षेत्र• कुल धारा I = I_c + I_d (सतत)• 4 मैक्सवेल समीकरण:1. ∮ E·dA = q/ε₀ (गाउस विद्युत)2. ∮ B·dA = 0 (गाउस चुंबक)3. ∮ E·dl = -dΦ_B/dt (फैराडे)4. ∮ B·dl = μ₀(I_c + I_d)• स्रोत: त्वरित आवेश (Accelerated)2. EM तरंग विशेषताएंअनुप्रस्थ प्रकृति व चाल• अनुप्रस्थ: E ⊥ B ⊥ संचरण दिशापॉइंटिंग सदिश S || E x B• निर्वात में चाल c = 3 x 10^8 m/sc = 1 / √(μ₀ ε₀)• आयाम अनुपात c = E₀ / B₀E = प्रकाश सदिश (Light Vector)• ऊर्जा समविभाजन: u_E = u_Bu = ½ ε₀ E₀² = B₀² / (2μ₀)• संवेग p = U/c, विकिरण दाब3. EM स्पेक्ट्रम व उपयोगλ बढ़ता क्रम (ν घटता)1. γ-किरणें: कैंसर रेडियोथेरेपी2. X-किरणें: अस्थि-भंग, CT स्कैन3. UV किरणें: जल शोधन, LASIK4. दृश्य प्रकाश: दृष्टि संवेदना5. अवरक्त (IR): रिमोट, पौधाघर6. सूक्ष्म (Micro): ओवन, रडार7. रेडियो तरंगें: TV, मोबाइल, WiFi• सभी की निर्वात में चाल समान (c)ऊर्जा: E = hν (γ-किरणें सर्वाधिक)बोर्ड परीक्षा के प्रमुख संप्रत्यय (Golden EM Waves Capsule)विस्थापन धारा सूत्र:I_d = ε₀ (dΦ_E / dt); संधारित्र प्लेटों के बीच I_c = 0 परंतु I_d = I_c सतत रहती है।तरंग चाल व अनुपात:c = 1/√(μ₀ε₀) = 3 x 10^8 m/s; c = E₀/B₀; ऊर्जा विद्युत व चुंबकीय में 50-50% बराबर।स्पेक्ट्रम क्रम ट्रिक:गामा < एक्स < यूवी < दृश्य < अवरक्त < सूक्ष्म < रेडियो (तरंगदैर्ध्य बढ़ता क्रम)।

Chapter Summary & 10 Key Takeaways

Takeaway 1
विस्थापन धारा I_d = ε₀ (dΦ_E / dt) बदलते विद्युत क्षेत्र द्वारा उत्पन्न होती है।
Takeaway 2
ऐम्पियर-मैक्सवेल नियम ∮ B·dl = μ₀(I_c + I_d) धारा की सततता सुनिश्चित करता है।
Takeaway 3
मैक्सवेल के 4 समीकरण स्थिरवैद्युतिकी, चुंबकत्व, प्रेरण तथा विस्थापन धारा का एकीकरण हैं।
Takeaway 4
विद्युतचुंबकीय तरंगें त्वरित अथवा दोलायमान आवेशों द्वारा उत्पन्न होती हैं।
Takeaway 5
EM तरंगें अनुप्रस्थ होती हैं; E ⊥ B ⊥ तरंग संचरण दिशा (S || E x B)।
Takeaway 6
निर्वात में चाल c = 1/√(μ₀ε₀) = 3 x 10^8 m/s तथा आयाम अनुपात c = E₀/B₀ होता है।
Takeaway 7
ऊर्जा घनत्व u_E = u_B = ¼ ε₀ E₀² (विद्युत व चुंबकीय क्षेत्रों में समान रूप से विभाजित)।
Takeaway 8
तरंगें संवेग p = U/c तथा सतहों पर विकिरण दाब स्थानांतरित करती हैं।
Takeaway 9
स्पेक्ट्रम में λ बढ़ता क्रम: गामा < एक्स < यूवी < दृश्य < अवरक्त < सूक्ष्म < रेडियो तरंगें।
Takeaway 10
गामा: कैंसर उपचार; X-किरणें: हड्डी जांच; UV: जल शोधन; अवरक्त: रिमोट/ऊष्मा; सूक्ष्म: ओवन/रडार; रेडियो: संचार।

Check Your Understanding (Diagnostic Practice Questions)

Diagnostic questions testing core conceptual clarity. Answers are hidden initially — solve each problem first, then click to reveal the step-by-step verified solution.

1
'विस्थापन धारा' (Displacement Current) किसे कहते हैं? इसका SI मात्रक लिखिए।
Reveal Answer & Explanation
Answer: समय के साथ परिवर्तनशील विद्युत क्षेत्र अथवा विद्युत फ्लक्स के कारण उत्पन्न होने वाली धारा को विस्थापन धारा कहते हैं: I_d = ε₀ (dΦ_E / dt)। चूंकि यह एक वास्तविक धारा की भांति चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है, अतः इसका SI मात्रक भी 'एम्पियर' (Ampere - A) होता है।
2
विद्युतचुंबकीय तरंगों की उत्पत्ति का मुख्य स्रोत क्या है? क्या एक समान वेग से गतिमान आवेश इन्हें उत्पन्न कर सकता है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: विद्युतचुंबकीय तरंगों का मुख्य स्रोत 'त्वरित आवेश' (Accelerated Charge) अथवा दोलायमान आवेश होता है। नहीं, एकसमान वेग से गतिमान आवेश स्थिर विद्युत व चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है परंतु ऊर्जा विकरित (EM तरंगें उत्पन्न) नहीं कर सकता।
3
विद्युतचुंबकीय तरंगों में विद्युत क्षेत्र के आयाम (E₀) तथा चुंबकीय क्षेत्र के आयाम (B₀) में क्या संबंध होता है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: c = E₀ / B₀ (जहाँ c = 3 x 10^8 m/s निर्वात में प्रकाश की चाल है)।
4
दूरस्थ वस्तुओं और कोहरे में फोटोग्राफी करने के लिए किन विद्युतचुंबकीय तरंगों का उपयोग किया जाता है और क्यों?
Reveal Answer & Explanation
Answer: अवरक्त किरणों (Infrared rays) का उपयोग किया जाता है, क्योंकि इनकी तरंगदैर्ध्य दृश्य प्रकाश से अधिक होती है जिससे रैले के प्रकीर्णन नियमानुसार (Scattering ∝ 1/λ⁴) इनका प्रकीर्णन कोहरे और धुएं द्वारा बहुत कम होता है।
5
ओजोन परत सूर्य से आने वाली किन हानिकारक विद्युतचुंबकीय तरंगों को अवशोषित करती है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: ओजोन परत सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों (Ultraviolet / UV rays) को अवशोषित करके पृथ्वी पर जीवन की रक्षा करती है।
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