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JAC • Class XII • Physics • Ch 10
Estimated Time: 45 Mins
Study Progress: In Progress

Wave Optics

जब प्रकाश अत्यंत सूक्ष्म अवरोधों और झिरियों से होकर गुजरता है, तो उसका सरल किरण रूपी व्यवहार टूट जाता है और उसका वास्तविक तरंग स्वरूप (Wave Nature) सामने आता है। सन् 1678 में क्रिश्चियन हाइगेंस द्वारा प्रतिपादित तरंग सिद्धांत एवं तरंगाग्र (Wavefront) की संकल्पना ने प्रकाशिकी में क्रांति ला दी। हाइगेंस के द्वितीयक तरंगिकाओं के सिद्धांत से परावर्तन के नियमों ($i=r$) तथा अपवर्तन के स्नेल नियम ($\frac{\sin i}{\sin r} = \frac{v_1}{v_2} = \frac{n_2}{n_1}$) का अकाट्य गणितीय निगमन सिद्ध करता है कि सघन माध्यम में प्रकाश की चाल विरल माध्यम की तुलना में कम ($v = c/n$) होती है—जिसने न्यूटन के कणिका सिद्धांत को सदैव के लिए ध्वस्त कर दिया। दो कला-संबद्ध स्रोतों से निकलने वाली तरंगों के अध्यारोपण से अंतरिक्ष में ऊर्जा का पुनर्वितरण प्रकाश का व्यतिकरण (Interference) कहलाता है। सन् 1801 में थॉमस यंग द्वारा किए गए ऐतिहासिक द्वि-स्लिट प्रयोग (YDSE) ने समान चौड़ाई की दीप्त व अदीप्त फ्रिंजों ($\beta = \frac{\lambda D}{d}$) का निर्माण कर तरंग सिद्धांत पर अंतिम मुहर लगाई। प्रकाश का अपने मार्ग में पड़ने वाले सूक्ष्म अवरोध के तीक्ष्ण किनारों पर मुड़कर ज्यामितीय छाया में फैल जाना प्रकाश का विवर्तन (Diffraction) कहलाता है (एकल झिरी केंद्रीय उच्चिष्ठ $2\lambda D/a$)। अंततः, प्रकाश तरंगों की अनुप्रस्थ प्रकृति (Transverse Nature) का अंतिम व निर्विवाद प्रमाण प्रकाश का ध्रुवण (Polarization - मैलस नियम $I = I_0 \cos^2\theta$ व ब्रूस्टर नियम $\tan i_p = n$) प्रस्तुत करता है।

साबुन के रंगहीन पारदर्शी बुलबुले धूप में चमकते ही इंद्रधनुष जैसे चटक रंगों से कैसे भर जाते हैं?

साबुन का झाग या पानी में मिला डिटर्जेंट पूरी तरह पारदर्शी और रंगहीन होता है। परंतु जब आप धूप में साबुन का एक बुलबुला फुलाते हैं, तो उसकी पारदर्शी सतह पर तैरते हुए लाल, पीले, नीले और हरे रंगों की अद्भुत फिल्में थिरकती हुई दिखाई देती हैं! यह कोई रंग (Dye) या रासायनिक जादू नहीं है, बल्कि बुलबुले की अत्यंत सूक्ष्म पतली झिल्ली के ऊपरी और निचले पृष्ठों से परावर्तित होने वाली प्रकाश तरंगों का आपस में टकराना है! कुछ रंगों की तरंगें एक-दूसरे को मारकर अंधकार कर देती हैं (विनाशी व्यतिकरण), तो कुछ रंगों की तरंगें एक-दूसरे से जुड़कर चमक उठती हैं (संपोषी व्यतिकरण)! आइए जानें तरंगों के इस जादुई नृत्य का संपूर्ण भौतिक शास्त्र!

Why This Chapter Matters

JAC और CBSE कक्षा 12वीं भौतिकी बोर्ड परीक्षा में 'तरंग प्रकाशिकी' सर्वाधिक महत्वपूर्ण सिद्धांतिक अध्यायों में से एक है। तरंगाग्र की परिभाषा (गोलीय, बेलनाकार, समतल), हाइगेंस का द्वितीयक तरंगिकाओं का सिद्धांत, तथा हाइगेंस सिद्धांत द्वारा प्रकाश के परावर्तन एवं अपवर्तन के नियमों का निगमन (5 अंकों का अनिवार्य प्रश्न), कला-संबद्ध स्रोत (Coherent sources) की शर्तें, संपोषी व विनाशी व्यतिकरण की पथांतर व कलांतर शर्तें, यंग के द्वि-स्लिट प्रयोग में फ्रिंज चौड़ाई ($\beta = \frac{\lambda D}{d}$) का निगमन एवं माध्यम बदलने पर प्रभाव, एकल झिरी विवर्तन (Single Slit Diffraction) में निम्निष्ठ व केंद्रीय उच्चिष्ठ की चौड़ाई, व्यतिकरण व विवर्तन में अंतर की सारणी, तथा ब्रूस्टर का नियम ($\tan i_p = n$) व ध्रुवण पर प्रतिवर्ष लघु व दीर्घ-उत्तरीय प्रश्न शत-प्रतिशत पूछे जाते हैं।

Before You Begin (Prerequisites)

  • तरंग गति (आवृत्ति $\nu$, तरंगदैर्ध्य $\lambda$, कला $\phi$, तरंग समीकरण: $y = A\sin(\omega t - kx)$)।
  • तरंगों के अध्यारोपण का सिद्धांत (Principle of Superposition) एवं सदिश योग।
  • समतल ज्यामिति तथा त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाएं।

What You Will Learn (Core Objectives)

  • तरंगाग्र के प्रकारों की पहचान करना तथा हाइगेंस के सिद्धांत का उपयोग करके परावर्तन व अपवर्तन के नियमों का निगमन करना।
  • कला-संबद्ध स्रोतों की उत्पत्ति तथा व्यतिकरण में संपोषी एवं विनाशी दशाओं के गणितीय प्रतिबंधों को स्थापित करना।
  • यंग के द्वि-स्लिट प्रयोग (YDSE) का किरण आरेख खींचना और फ्रिंज चौड़ाई ($\beta$) के सूत्र का संपूर्ण निगमन करना।
  • एकल झिरी विवर्तन प्रतिरूप में केंद्रीय उच्चिष्ठ तथा निम्निष्ठों की कोणीय एवं रैखिक चौड़ाई का परिकलन करना।
  • व्यतिकरण एवं विवर्तन में स्पष्ट विभेद करना तथा मैलस व ब्रूस्टर के ध्रुवण नियमों का अनुप्रयोग करना।

Chapter Roadmap & Progression

1 1. तरंगाग्र एवं हाइगेंस का तरंग सिद...
2 2. प्रकाश का व्यतिकरण एवं कला-संबद्...
3 3. यंग का द्वि-स्लिट प्रयोग (Young'...
4 4. प्रकाश का विवर्तन (Diffraction o...
5 5. प्रकाश का ध्रुवण (Polarization o...

Complete Concept Guide (100% Curriculum Coverage)

1. तरंगाग्र एवं हाइगेंस का तरंग सिद्धांत

1.1 तरंगाग्र (Wavefront) की परिभाषा एवं प्रकार

परिभाषा: किसी माध्यम में प्रकाश स्रोत से निकलने वाले विक्षोभ के कारण समान कला (Same Phase) में कंपन करने वाले सभी कणों के बिंदुपथ (Locus) को तरंगाग्र कहते हैं। प्रकाश किरणें सदैव तरंगाग्र के लंबवत होती हैं।

  • 1. गोलीय तरंगाग्र (Spherical Wavefront): किसी बिंदु प्रकाश स्रोत (Point Source) से परिमित दूरी पर उत्पन्न तरंगाग्र संकेंद्री गोले होते हैं।
  • 2. बेलनाकार तरंगाग्र (Cylindrical Wavefront): किसी रेखीय प्रकाश स्रोत (जैसे संकीर्ण स्लिट अथवा ट्यूबलाइट) से परिमित दूरी पर उत्पन्न तरंगाग्र संकेंद्री बेलन होते हैं।
  • 3. समतल तरंगाग्र (Plane Wavefront): जब कोई प्रकाश स्रोत (बिंदु या रेखीय) अत्यधिक अनंत दूरी पर स्थित हो (जैसे सूर्य या दूरस्थ तारा), तो तरंगाग्र का एक छोटा भाग समतल प्रतीत होता है।

1.2 हाइगेंस का द्वितीयक तरंगिकाओं का सिद्धांत (Huygens' Principle)

  1. किसी तरंगाग्र का प्रत्येक बिंदु एक नए विक्षोभ स्रोत की भांति कार्य करता है, जिससे नई गोलीय तरंगें निकलती हैं जिन्हें द्वितीयक तरंगिकाएं (Secondary Wavelets) कहते हैं। ये तरंगिकाएं माध्यम में प्रकाश के वेग ($v$) से आगे बढ़ती हैं।
  2. किसी दिए गए समय $t$ पर इन द्वितीयक तरंगिकाओं को आगे की ओर स्पर्श करने वाला पृष्ठ (अन्वालोप - Forward Envelope) उस क्षण नए तरंगाग्र की स्थिति को प्रदर्शित करता है।

1.3 हाइगेंस सिद्धांत द्वारा प्रकाश के अपवर्तन के नियम का निगमन (स्नेल नियम)

संपूर्ण बोर्ड निगमन:
1. माना $XY$ एक समतल अंतरापृष्ठ है जो दो माध्यमों को अलग करता है। माध्यम-1 में प्रकाश की चाल $v_1$ तथा माध्यम-2 में चाल $v_2$ है ($n_1 < n_2$, माध्यम-2 सघन है)।
2. माना एक समतल तरंगाग्र $AB$ अंतरापृष्ठ पर आपतन कोण $i$ पर आपतित होता है।
3. सिरा $A$ पृष्ठ को छूता है, जबकि सिरे $B$ को बिंदु $C$ तक पहुँचने में $t$ समय लगता है: अतः $\mathbf{BC = v_1 t}$。
4. इस दौरान बिंदु $A$ से द्वितीयक तरंगिका माध्यम-2 में गति करती है और $t$ समय में $AD$ दूरी तय करती है: अतः $\mathbf{AD = v_2 t}$。
5. बिंदु $C$ से $AD$ पर स्पर्श रेखा खींचने पर समतल $CD$ अपवर्तित तरंगाग्र बनता है, जहाँ अपवर्तन कोण $r$ है。

• समकोण त्रिभुज $\Delta ABC$ में: $\sin i = \frac{BC}{AC} = \frac{v_1 t}{AC}$
• समकोण त्रिभुज $\Delta ADC$ में: $\sin r = \frac{AD}{AC} = \frac{v_2 t}{AC}$

भाग देने पर:
$$\mathbf{\frac{\sin i}{\sin r} = \frac{v_1 t / AC}{v_2 t / AC} = \frac{v_1}{v_2}}$$
चूंकि अपवर्तनांक $n_1 = c/v_1$ तथा $n_2 = c/v_2 \implies \frac{v_1}{v_2} = \frac{n_2}{n_1}$:
$$\mathbf{\frac{\sin i}{\sin r} = \frac{n_2}{n_1} = {_1n_2}}$$ (स्नेल का नियम इति सिद्धम्)
क्रांतिक निष्कर्ष: चूंकि सघन माध्यम में $n_2 > n_1$, अतः $\frac{\sin i}{\sin r} > 1 \implies \sin i > \sin r \implies i > r$ (किरण अभिलंब की ओर झुकती है) तथा $v_2 < v_1$ (सघन माध्यम में प्रकाश का वेग कम होता है)।

2. प्रकाश का व्यतिकरण एवं कला-संबद्ध स्रोत

2.1 व्यतिकरण की परिभाषा एवं परिणामी तीव्रता

परिभाषा: जब समान आवृत्ति तथा लगभग समान आयाम की दो प्रकाश तरंगें एक ही दिशा में संचरित होकर एक-दूसरे पर अध्यारोपित होती हैं, तो माध्यम में प्रकाश ऊर्जा का पुनर्वितरण हो जाता है—कुछ स्थानों पर तीव्रता अधिकतम (दीप्त) तथा कुछ स्थानों पर न्यूनतम या शून्य (अदीप्त) हो जाती है। इस घटना को प्रकाश का व्यतिकरण कहते हैं।

  • यदि $y_1 = a_1 \sin(\omega t)$ तथा $y_2 = a_2 \sin(\omega t + \phi)$ हों, तो परिणामी आयाम $R$ तथा तीव्रता $I$:$$R^2 = a_1^2 + a_2^2 + 2 a_1 a_2 \cos\phi$$$$\mathbf{I = I_1 + I_2 + 2\sqrt{I_1 I_2} \cos\phi}$$यदि $I_1 = I_2 = I_0$ हो: $\mathbf{I = 4 I_0 \cos^2\left(\frac{\phi}{2}\right)}$

2.2 संपोषी एवं विनाशी व्यतिकरण की शर्तें

लक्षणसंपोषी व्यतिकरण (Constructive)विनाशी व्यतिकरण (Destructive)
प्रकृतिदीप्त फ्रिंज (Bright Fringe - अधिकतम चमक)अदीप्त फ्रिंज (Dark Fringe - अंधकार)
कलांतर ($\phi$)$$\mathbf{\phi = 2n\pi} \quad (n = 0, 1, 2...)$$
(सम गुणज: $0, 2\pi, 4\pi...$)
$$\mathbf{\phi = (2n - 1)\pi} \quad (n = 1, 2, 3...)$$
(विषम गुणज: $\pi, 3\pi, 5\pi...$)
पथांतर ($\Delta x$)$$\mathbf{\Delta x = n\lambda} \quad (n = 0, 1, 2...)$$
(तरंगदैर्ध्य का पूर्ण गुणज)
$$\mathbf{\Delta x = (2n - 1)\frac{\lambda}{2}}$$
(अर्ध-तरंगदैर्ध्य का विषम गुणज)
अधिकतम/न्यूनतम तीव्रता$$I_{\max} = (\sqrt{I_1} + \sqrt{I_2})^2 = (a_1 + a_2)^2$$$$I_{\min} = (\sqrt{I_1} - \sqrt{I_2})^2 = (a_1 - a_2)^2$$

2.3 कला-संबद्ध स्रोत (Coherent Sources)

परिभाषा: ऐसे दो प्रकाश स्रोत जिनसे निकलने वाली प्रकाश तरंगों की आवृत्तियां बिल्कुल समान हों तथा जिनके मध्य कलांतर समय के साथ सदैव नियत (अपरिवर्तनीय) रहे, कला-संबद्ध स्रोत कहलाते हैं。

• दो स्वतंत्र प्रकाश स्रोत (जैसे दो अलग-अलग मोमबत्तियां या एलईडी बल्ब) कभी कला-संबद्ध नहीं हो सकते—क्योंकि परमाणुओं से प्रकाश उत्सर्जन यादृच्छिक रूप से $10^{-8}\text{ सेकंड}$ में बदलता रहता है。
• स्थायी व्यतिकरण प्रतिरूप प्राप्त करने हेतु एक ही मूल स्रोत से (द्वि-स्लिट द्वारा या परावर्तन/अपवर्तन द्वारा) दो आभासी स्रोत बनाकर कला-संबद्ध स्रोत तैयार किए जाते हैं।

3. यंग का द्वि-स्लिट प्रयोग (Young's Double Slit Experiment - YDSE)

3.1 प्रयोग की व्यवस्था एवं किरण आरेख

थॉमस यंग (1801) ने एक संकीर्ण स्लिट $S$ के आगे दो समांतर संकीर्ण स्लिटें $S_1$ व $S_2$ रखीं जो परस्पर $d$ दूरी पर हैं। स्लिटों से $D$ दूरी पर एक पर्दा रखा गया है।

  • पर्दे के किसी बिंदु $P$ (केंद्रीय बिंदु $O$ से दूरी $y$) पर दोनों स्लिटों से पहुँचने वाली तरंगों का पथांतर:$$\Delta x = S_2 P - S_1 P = d \sin\theta \approx d \tan\theta = \mathbf{\frac{y d}{D}}$$

3.2 फ्रिंज चौड़ाई (Fringe Width - $\beta$) का संपूर्ण निगमन

  1. $n$-वीं दीप्त फ्रिंज की स्थिति: संपोषी शर्त $\Delta x = n\lambda$ से:
    $$\frac{y_n d}{D} = n\lambda \implies \mathbf{y_n = n \frac{\lambda D}{d}} \quad (n = 0, 1, 2...)$$
  2. $n$-वीं अदीप्त फ्रिंज की स्थिति: विनाशी शर्त $\Delta x = (2n - 1)\frac{\lambda}{2}$ से:
    $$\mathbf{y_n' = (2n - 1) \frac{\lambda D}{2d}} \quad (n = 1, 2, 3...)$$
  3. फ्रिंज चौड़ाई (Fringe Width - $\beta$): किन्हीं दो क्रमागत दीप्त अथवा अदीप्त फ्रिंजों के बीच की दूरी:
    $$\beta = y_{n} - y_{n-1} = n \frac{\lambda D}{d} - (n - 1) \frac{\lambda D}{d}$$
    $$\mathbf{\beta = \frac{\lambda D}{d}}$$
    • निष्कर्ष: YDSE में सभी दीप्त एवं अदीप्त फ्रिंजों की चौड़ाई परस्पर बिल्कुल समान होती है।
    • माध्यम बदलने का प्रभाव: जब उपकरण को जल ($n$) में डुबो दिया जाता है, तो तरंगदैर्ध्य $\lambda' = \lambda/n$ हो जाती है, जिससे फ्रिंज चौड़ाई $\mathbf{\beta' = \frac{\beta}{n}}$ (घट जाती है)।
    • श्वेत प्रकाश का उपयोग: केंद्रीय फ्रिंज श्वेत होती है तथा दोनों ओर कुछ रंगीन फ्रिंजें दिखती हैं।

4. प्रकाश का विवर्तन (Diffraction of Light) एवं एकल झिरी प्रतिरूप

4.1 प्रकाश के विवर्तन की परिभाषा

परिभाषा: जब प्रकाश की किरणें किसी अत्यंत संकीर्ण छिद्र, झिरी या किसी तीक्ष्ण अवरोध (जिसका आकार प्रकाश की तरंगदैर्ध्य के तुल्य हो, $a \approx \lambda$) के किनारों से टकराती हैं, तो वे किनारों पर मुड़कर ज्यामितीय छाया वाले क्षेत्र में प्रवेश कर जाती हैं। इस घटना को प्रकाश का विवर्तन कहते हैं।

4.2 एकल झिरी द्वारा फ्रॉनहॉफर विवर्तन (Fraunhofer Diffraction at a Single Slit)

माना $a$ चौड़ाई की एक एकल झिरी पर $\lambda$ तरंगदैर्ध्य का समतल तरंगाग्र आपतित होता है। झिरी से $D$ दूरी पर रखे पर्दे पर विवर्तन प्रतिरूप प्राप्त होता है:

  • निम्निष्ठों की स्थिति (Condition of Minima): झिरी के दोनों सिरों के बीच पथांतर $a \sin\theta = n\lambda$ होने पर झिरी दो बराबर हिस्सों में बंट जाती है जो एक-दूसरे को विनाशी व्यतिकरण द्वारा निरस्त कर देते हैं:$$\mathbf{a \sin\theta = n \lambda \implies \theta_n \approx \frac{n\lambda}{a}} \quad (n = 1, 2, 3...)$$पर्दे पर प्रथम निम्निष्ठ की दूरी: $y_1 = \frac{\lambda D}{a}$
  • केंद्रीय उच्चिष्ठ (Central Maximum): $\theta = 0$ पर सभी तरंगिकाएं समान कला में मिलती हैं, जिससे केंद्र पर अत्यंत तीव्र व चौड़ा चमकीला पट्टा बनता है।
  • केंद्रीय उच्चिष्ठ की कोणीय चौड़ाई: प्रथम निम्निष्ठों के बीच का कोणीय फैलाव:$$\mathbf{2\theta = \frac{2\lambda}{a}}$$
  • केंद्रीय उच्चिष्ठ की रैखिक चौड़ाई:$$\mathbf{\beta_0 = 2 y_1 = \frac{2\lambda D}{a} = 2\beta}$$(केंद्रीय उच्चिष्ठ की चौड़ाई अन्य गौण उच्चिष्ठों की चौड़ाई से ठीक दोगुनी होती है!)

4.3 व्यतिकरण एवं विवर्तन में अंतर (Interference vs Diffraction)

तुलना का आधारप्रकाश का व्यतिकरण (Interference)प्रकाश का विवर्तन (Diffraction)
1. स्रोतदो पृथक कला-संबद्ध तरंगाग्रों से आने वाली तरंगों के अध्यारोपण से उत्पन्न होता है।एक ही तरंगाग्र के विभिन्न बिंदुओं से निकलने वाली द्वितीयक तरंगिकाओं के अध्यारोपण से होता है।
2. फ्रिंजों की चौड़ाईसभी दीप्त और अदीप्त फ्रिंजों की चौड़ाई परस्पर बिल्कुल समान ($\beta = \lambda D/d$) होती है।फ्रिंजों की चौड़ाई समान नहीं होती; केंद्रीय उच्चिष्ठ की चौड़ाई अन्य से दोगुनी होती है।
3. दीप्त फ्रिंजों की तीव्रतासभी दीप्त फ्रिंजों की चमक (तीव्रता) परस्पर एकसमान होती है।केंद्रीय उच्चिष्ठ सर्वाधिक चमकीला होता है; आगे बढ़ने पर तीव्रता बहुत तेजी से घटती है।
4. अंधकार का स्तरअदीप्त फ्रिंजें पूर्णतः काली (शून्य तीव्रता) होती हैं, जिससे विषमता (Contrast) श्रेष्ठ होती है।निम्निष्ठ पूरी तरह अंधेरे नहीं होते, अतः कंट्रास्ट कमजोर होता है।

5. प्रकाश का ध्रुवण (Polarization of Light) एवं ब्रूस्टर का नियम

5.1 प्रकाश का ध्रुवण एवं अनुप्रस्थ प्रकृति

ध्रुवण: साधारण (अध्रुवित) प्रकाश में विद्युत सदिश $\vec{E}$ के कंपन तरंग संचरण दिशा के लंबवत सभी दिशाओं में सममित रूप से होते हैं। जब इस प्रकाश को टूरमैलीन क्रिस्टल या पोलेरॉइड से गुजारा जाता है, तो इसके कंपन केवल एक ही तल में सीमित रह जाते हैं। इस घटना को प्रकाश का ध्रुवण कहते हैं।

अत्यंत महत्वपूर्ण तथ्य: ध्रुवण की परिघटना यह अकाट्य रूप से सिद्ध करती है कि प्रकाश तरंगें अनुप्रस्थ (Transverse) तरंगें हैं, अनुदैर्ध्य (ध्वनि जैसी) नहीं—क्योंकि अनुदैर्ध्य तरंगों का ध्रुवण कभी संभव नहीं है!
  • मैलस का नियम (Malus' Law): जब पूर्णतः समतल ध्रुवित प्रकाश किसी विश्लेषक (Analyzer) से गुजरता है जिसकी अक्ष ध्रुवक से $\theta$ कोण पर झुकी है:$$\mathbf{I = I_0 \cos^2\theta}$$• जब दोनों अक्ष समानांतर हों ($\theta = 0^\circ$): $I = I_0$ (अधिकतम पारगमन)।
    • जब दोनों अक्ष क्रॉसित हों ($\theta = 90^\circ$): $I = 0$ (पूर्ण अंधकार)।

5.2 परावर्तन द्वारा ध्रुवण एवं ब्रूस्टर का नियम (Brewster's Law)

ब्रूस्टर का नियम: जब साधारण प्रकाश किसी पारदर्शी माध्यम के पृष्ठ पर एक विशेष आपतन कोण पर गिरता है जिसे ध्रुवण कोण (Polarizing Angle - $i_p$) कहते हैं, तो परावर्तित प्रकाश पूर्णतः समतल ध्रुवित हो जाता है।

माध्यम का अपवर्तनांक ध्रुवण कोण की स्पर्शज्या (Tangent) के बराबर होता है:
$$\mathbf{n = \tan i_p}$$ (ब्रूस्टर का नियम)

सिद्ध करना कि ध्रुवण कोण पर परावर्तित एवं अपवर्तित किरणें परस्पर लंबवत ($90^\circ$) होती हैं:
स्नेल के नियमानुसार: $n = \frac{\sin i_p}{\sin r_p}$
ब्रूस्टर के नियमानुसार: $n = \tan i_p = \frac{\sin i_p}{\cos i_p}$
तुलना करने पर: $\frac{\sin i_p}{\sin r_p} = \frac{\sin i_p}{\cos i_p} \implies \sin r_p = \cos i_p = \sin(90^\circ - i_p)$
$$\mathbf{r_p = 90^\circ - i_p \implies i_p + r_p = 90^\circ}$$
अतः परावर्तित किरण और अपवर्तित किरण के बीच का कोण $= 180^\circ - (i_p + r_p) = 180^\circ - 90^\circ = \mathbf{90^\circ}$ (इति सिद्धम्)।

Key Formulas, Laws & Physical Constants

हाइगेंस अपवर्तन (स्नेल नियम)
$$\frac{\sin i}{\sin r} = \frac{v_1}{v_2} = \frac{n_2}{n_1} \quad (v = c/n)$$
व्यतिकरण परिणामी तीव्रता
$$I = I_1 + I_2 + 2\sqrt{I_1 I_2}\cos\phi; \quad I = 4I_0 \cos^2(\phi/2)$$
संपोषी व्यतिकरण (दीप्त)
$$\Delta x = n\lambda; \quad \phi = 2n\pi \implies I_{\max} = (\sqrt{I_1} + \sqrt{I_2})^2$$
विनाशी व्यतिकरण (अदीप्त)
$$\Delta x = (2n - 1)\frac{\lambda}{2}; \quad \phi = (2n - 1)\pi \implies I_{\min} = (\sqrt{I_1} - \sqrt{I_2})^2$$
YDSE फ्रिंज चौड़ाई
= { D}{d} (जल में: ' = / n)
YDSE फ्रिंज स्थितियां
y_n = n { D}{d} (दीप्त); y_n' = (2n - 1){ D}{2d} (अदीप्त)
एकल झिरी विवर्तन निम्निष्ठ
$$a \sin\theta = n\lambda \implies \theta_n \approx \frac{n\lambda}{a}$$
केंद्रीय उच्चिष्ठ की चौड़ाई
2 = {2}{a} (कोणीय); _0 = {2 D}{a} = 2 (रैखिक)
मैलस का नियम
$$I = I_0 \cos^2\theta$$
ब्रूस्टर का नियम
n = i_p ⇔ i_p + r_p = 90^ (परावर्तित अपवर्तित)
तीव्रता व आयाम अनुपात
$$\frac{I_{\max}}{I_{\min}} = \left(\frac{a_1 + a_2}{a_1 - a_2}\right)^2 = \left(\frac{r + 1}{r - 1}\right)^2 \quad (r = a_1/a_2)$$
ध्रुवण सार्थकता
ध्रुवण केवल अनुप्रस्थ तरंगों में संभव है; प्रकाश अनुप्रस्थ तरंग है

Conceptual Solved Examples & Case Studies

Example 1
यंग के द्वि-स्लिट प्रयोग में दो स्लिटों के बीच की दूरी $0.2\text{ mm}$ तथा स्लिटों से पर्दे की दूरी $1.0\text{ m}$ है। यदि प्रयुक्त प्रकाश की तरंगदैर्ध्य $6000\text{ \AA}$ ($600\text{ nm}$) हो, तो (a) फ्रिंज चौड़ाई ($\beta$), तथा (b) केंद्रीय फ्रिंज से पाँचवीं दीप्त फ्रिंज की दूरी ज्ञात कीजिए।
Step-by-Step Solution:
दिया है:
स्लिटों के बीच दूरी $d = 0.2\text{ mm} = 0.2 \times 10^{-3}\text{ m} = 2 \times 10^{-4}\text{ m}$
पर्दे की दूरी $D = 1.0\text{ m}$
तरंगदैर्ध्य $\lambda = 6000\text{ \AA} = 6000 \times 10^{-10}\text{ m} = 6 \times 10^{-7}\text{ m}$

(a) फ्रिंज चौड़ाई ($\beta$):
$$\beta = \frac{\lambda D}{d} = \frac{(6 \times 10^{-7}\text{ m}) \times (1.0\text{ m})}{2 \times 10^{-4}\text{ m}} = 3 \times 10^{-3}\text{ m} = \mathbf{3.0\text{ mm}}$$

(b) पाँचवीं दीप्त फ्रिंज की दूरी ($y_5$):
सूत्र: $y_n = n \beta$
$$y_5 = 5 \times \beta = 5 \times 3.0\text{ mm} = \mathbf{15.0\text{ mm} = 1.5\text{ cm}}$$
Example 2
व्यतिकरण करने वाली दो तरंगों के आयामों का अनुपात $3:1$ है। अधिकतम तथा न्यूनतम तीव्रताओं का अनुपात ($I_{\max} : I_{\min}$) ज्ञात कीजिए।
Step-by-Step Solution:
दिया है:
आयामों का अनुपात: $\frac{a_1}{a_2} = \frac{3}{1} \implies a_1 = 3x, a_2 = x$

सूत्र:
$$I_{\max} = (a_1 + a_2)^2 \quad \text{तथा} \quad I_{\min} = (a_1 - a_2)^2$$
गणना:
$$I_{\max} = (3x + x)^2 = (4x)^2 = 16x^2$$
$$I_{\min} = (3x - x)^2 = (2x)^2 = 4x^2$$
अनुपात:
$$\frac{I_{\max}}{I_{\min}} = \frac{16x^2}{4x^2} = \frac{4}{1} = \mathbf{4 : 1}$$
उत्तर: अधिकतम तथा न्यूनतम तीव्रताओं का अनुपात $\mathbf{4 : 1}$ होगा।
Example 3
हाइगेंस के तरंग सिद्धांत का उपयोग करते हुए प्रकाश के परावर्तन के नियमों का निगमन कीजिए।
Step-by-Step Solution:
हाइगेंस सिद्धांत द्वारा परावर्तन के नियम का निगमन:
1. माना $XY$ एक समतल परावर्तक पृष्ठ है। इस पर एक समतल तरंगाग्र $AB$ आपतन कोण $i$ पर आपतित होता है。
2. $t = 0$ पर तरंगाग्र का सिरा $A$ पृष्ठ को बिंदु $A$ पर स्पर्श करता है, जबकि सिरा $B$ हवा में रहता है。
3. सिरे $B$ को परावर्तक तल के बिंदु $C$ तक पहुँचने में $t$ समय लगता है। यदि माध्यम में प्रकाश की चाल $v$ हो, तो दूरी:
$$\mathbf{BC = v t}$$
4. हाइगेंस के नियमानुसार, जैसे ही सिरा $A$ पृष्ठ को छूता है, वह द्वितीयक तरंगिकाएं उत्सर्जित करने लगता है जो उसी माध्यम में $v$ वेग से आगे बढ़ती हैं। अतः $t$ समय में $A$ से निकली तरंगिका की त्रिज्या:
$$\mathbf{AD = v t}$$
5. बिंदु $C$ से $A$ के परितः खींचे गए चाप पर स्पर्श रेखा खींचने पर समतल $CD$ परावर्तित तरंगाग्र को निरूपित करता है, जहाँ $r$ परावर्तन कोण है。

ज्यामितीय प्रमाण:
समकोण त्रिभुज $\Delta ABC$ तथा $\Delta ADC$ में:
• $\angle ABC = \angle ADC = 90^\circ$ (तरंगाग्र और किरण सदैव लंबवत होते हैं)
• भुजा $BC = AD = vt$ (समान समय में तय दूरी)
• कर्ण $AC = AC$ (उभयनिष्ठ भुजा)
अतः RHS सर्वांगसमता कसौटी से: $\mathbf{\Delta ABC \cong \Delta ADC}$
सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत कोण बराबर होते हैं (CPCT):
$$\mathbf{\angle BAC = \angle DCA} \implies \mathbf{i = r}$$
अर्थात आपतन कोण परावर्तन कोण के बराबर होता है। (परावर्तन का प्रथम नियम इति सिद्धम्)।
साथ ही, आपतित तरंगाग्र, परावर्तित तरंगाग्र तथा परावर्तक तल तीनों कागज के तल के लंबवत हैं, अतः आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा अभिलंब तीनों एक ही तल में स्थित होते हैं। (द्वितीय नियम इति सिद्धम्)।
Example 4
एकल झिरी विवर्तन प्रतिरूप में केंद्रीय उच्चिष्ठ की कोणीय तथा रैखिक चौड़ाई के व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए।
Step-by-Step Solution:
एकल झिरी विवर्तन:
माना $a$ चौड़ाई की एक झिरी पर $\lambda$ तरंगदैर्ध्य का समतल तरंगाग्र आपतित होता है और $D$ दूरी पर स्थित पर्दे पर विवर्तन प्रतिरूप देखा जाता है。

निम्निष्ठों की स्थिति:
झिरी के दोनों सिरों के बीच पथांतर $a \sin\theta$ होता है। जब यह पथांतर $\lambda$ के बराबर होता है, तो झिरी को दो समान भागों में बांटा जा सकता है, जिनके संगत बिंदुओं से चलने वाली तरंगिकाओं में पथांतर $\lambda/2$ होता है और वे एक-दूसरे को नष्ट कर देती हैं。
अतः प्रथम निम्निष्ठ हेतु:
$$a \sin\theta_1 = \lambda \implies \theta_1 \approx \frac{\lambda}{a} \quad (\text{चूंकि } \theta \text{ अत्यंत छोटा है})$$

1. केंद्रीय उच्चिष्ठ की कोणीय चौड़ाई ($2\theta$):
केंद्रीय उच्चिष्ठ केंद्र के दोनों ओर प्रथम निम्निष्ठों ($\pm \theta_1$) के बीच फैला होता है:
$$\mathbf{2\theta = 2 \theta_1 = \frac{2\lambda}{a}}$$

2. केंद्रीय उच्चिष्ठ की रैखिक चौड़ाई ($\beta_0$):
यदि केंद्र से प्रथम निम्निष्ठ की रैखिक दूरी $y_1$ हो, तो $\theta_1 = \frac{y_1}{D} \implies y_1 = \frac{\lambda D}{a}$
अतः केंद्रीय उच्चिष्ठ की कुल रैखिक चौड़ाई:
$$\mathbf{\beta_0 = 2 y_1 = \frac{2\lambda D}{a}}$$
निष्कर्ष: केंद्रीय उच्चिष्ठ की चौड़ाई झिरी की चौड़ाई ($a$) के व्युत्क्रमानुपाती होती है; झिरी जितनी संकीर्ण होगी, विवर्तन फैलाव उतना ही अधिक चौड़ा होगा।
Example 5
ब्रूस्टर का नियम लिखिए तथा सिद्ध कीजिए कि ध्रुवण कोण पर आपतित होने पर परावर्तित किरण तथा अपवर्तित किरण परस्पर लंबवत होती हैं।
Step-by-Step Solution:
ब्रूस्टर का नियम (Brewster's Law):
जब साधारण अध्रुवित प्रकाश किसी पारदर्शी माध्यम (अपवर्तनांक $n$) के पृष्ठ पर एक निश्चित आपतन कोण पर आपतित होता है जिसे ध्रुवण कोण ($i_p$) कहते हैं, तो परावर्तित प्रकाश पूर्णतः समतल ध्रुवित हो जाता है。
ब्रूस्टर के नियमानुसार, माध्यम का अपवर्तनांक ध्रुवण कोण की स्पर्शज्या (Tangent) के बराबर होता है:
$$\mathbf{n = \tan i_p}$$

लंबवत होने का प्रमाण:
1. स्नेल के अपवर्तन नियमानुसार:
$$n = \frac{\sin i_p}{\sin r_p} \quad \text{--- (समीकरण 1)}$$
जहाँ $r_p$ संगत अपवर्तन कोण है。
2. ब्रूस्टर के नियम से:
$$n = \tan i_p = \frac{\sin i_p}{\cos i_p} \quad \text{--- (समीकरण 2)}$$
3. समीकरण (1) और (2) की तुलना करने पर:
$$\frac{\sin i_p}{\sin r_p} = \frac{\sin i_p}{\cos i_p} \implies \sin r_p = \cos i_p$$
4. हम जानते हैं कि $\cos i_p = \sin(90^\circ - i_p)$:
$$\sin r_p = \sin(90^\circ - i_p) \implies r_p = 90^\circ - i_p$$
$$\mathbf{i_p + r_p = 90^\circ}$$
5. चित्रानुसार, परावर्तित किरण और अपवर्तित किरण के बीच का कोण $\theta$:
$$\theta = 180^\circ - (i_p + r_p) = 180^\circ - 90^\circ = \mathbf{90^\circ}$$
अतः ध्रुवण कोण पर परावर्तित किरण तथा अपवर्तित किरण परस्पर लंबवत होती हैं। (इति सिद्धम्)

Common Misconceptions & Examiner Traps

Common Misconception

दो स्वतंत्र बल्बों को कला-संबद्ध स्रोत मान लेना।

Scientific Reality & Correction

दो स्वतंत्र स्रोत कभी कला-संबद्ध नहीं हो सकते क्योंकि परमाण्वीय उत्सर्जन यादृच्छिक होता है; कला-संबद्धता हेतु एक ही स्रोत से दो स्लिटें बनाई जाती हैं।

Common Misconception

व्यतिकरण और विवर्तन में फ्रिंज चौड़ाई को एक जैसा समझना।

Scientific Reality & Correction

व्यतिकरण में सभी फ्रिंजों की चौड़ाई एकसमान ($\beta$) होती है; जबकि विवर्तन में केंद्रीय उच्चिष्ठ की चौड़ाई अन्य की तुलना में दोगुनी ($2\beta$) होती है।

Common Misconception

एकल झिरी विवर्तन में निम्निष्ठ की शर्त को व्यतिकरण जैसी मान लेना।

Scientific Reality & Correction

एकल झिरी विवर्तन में निम्निष्ठ की शर्त $a \sin\theta = n\lambda$ होती है (जबकि YDSE में $n\lambda$ दीप्त की शर्त होती है)।

Common Misconception

ध्वनि तरंगों के ध्रुवण की संभावना मान लेना।

Scientific Reality & Correction

ध्रुवण केवल 'अनुप्रस्थ तरंगों' (Transverse Waves) का गुण है; ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य होती हैं, अतः उनका ध्रुवण कभी नहीं हो सकता।

Common Misconception

YDSE उपकरण को पानी में ले जाने पर फ्रिंज चौड़ाई को बढ़ता मान लेना।

Scientific Reality & Correction

पानी में प्रकाश की चाल व तरंगदैर्ध्य घटती है ($\lambda' = \lambda/n$), अतः फ्रिंज चौड़ाई $\beta' = \beta/n$ घट जाती है।

तरंग प्रकाशिकी: हाइगेंस तरंगाग्र, YDSE फ्रिंज, विवर्तन व ब्रूस्टर नियम

तरंग प्रकाशिकी: हाइगेंस सिद्धांत, YDSE व्यतिकरण, एकल झिरी विवर्तन व ध्रुवण1. हाइगेंस तरंगाग्र सिद्धांतपरावर्तन व स्नेल नियम• तरंगाग्र: समान कला में कंपन पृष्ठगोलीय (बिंदु), बेलनाकार, समतल• द्वितीयक तरंगिकाएं:प्रत्येक बिंदु नया स्रोत; अन्वालोप• स्नेल नियम निगमन:sin i / sin r = v₁ / v₂ = n₂ / n₁• सघन में प्रकाश चाल कम (v=c/n)• परावर्तन i = r सर्वांगसमता से2. YDSE व्यतिकरणसमान चौड़ाई फ्रिंजें (β)• कला-संबद्ध स्रोत (Coherent):नियत कलांतर (2 स्वतंत्र बल्ब नहीं)• फ्रिंज चौड़ाई सूत्र:β = λ D / dसभी दीप्त/अदीप्त चौड़ाई समान• पथांतर Δx:दीप्त: Δx = nλ, अदीप्त: (2n-1)λ/2• पानी में β' = β / n (घटती)• श्वेत प्रकाश: केंद्रीय फ्रिंज श्वेत3. विवर्तन व ध्रुवणकिनारों पर मुड़ना व मैलस• एकल झिरी विवर्तन (Diffraction):निम्निष्ठ: a sinθ = nλकेंद्रीय उच्चिष्ठ चौड़ाई = 2λD / a = 2β• ध्रुवण (Polarization):सिद्ध करता है प्रकाश अनुप्रस्थ है• मैलस का नियम: I = I₀ cos²θ• ब्रूस्टर का नियम: n = tan(i_p)ध्रुवण कोण पर: i_p + r_p = 90°परावर्तित ⊥ अपवर्तित किरणबोर्ड परीक्षा के प्रमुख संप्रत्यय (Golden Wave Optics Capsule)हाइगेंस स्नेल नियम:sin i / sin r = v₁/v₂ = n₂/n₁; सघन माध्यम में प्रकाश का वेग कम (v < c) होता है।YDSE फ्रिंज चौड़ाई:β = λD/d; पानी में β' = β/n घट जाती है; सभी दीप्त व अदीप्त फ्रिंजें समान चौड़ी होती हैं।ध्रुवण व ब्रूस्टर:ध्रुवण केवल अनुप्रस्थ तरंगों में होता है; n = tan(i_p); ध्रुवण कोण पर i_p + r_p = 90°।

Chapter Summary & 10 Key Takeaways

Takeaway 1
तरंगाग्र समान कला में कंपन करने वाले कणों का बिंदुपथ है (गोलीय, बेलनाकार, समतल)।
Takeaway 2
हाइगेंस सिद्धांत से स्नेल नियम sin i / sin r = v₁/v₂ = n₂/n₁ सिद्ध होता है (सघन में चाल कम)।
Takeaway 3
हाइगेंस सिद्धांत से परावर्तन नियम i = r सिद्ध होता है।
Takeaway 4
व्यतिकरण समान आवृत्ति की दो तरंगों के अध्यारोपण से ऊर्जा का पुनर्वितरण है।
Takeaway 5
कला-संबद्ध स्रोतों में कलांतर सदैव नियत रहता है (दो स्वतंत्र बल्ब कभी कला-संबद्ध नहीं होते)।
Takeaway 6
संपोषी व्यतिकरण (दीप्त): पथांतर Δx = nλ; विनाशी व्यतिकरण (अदीप्त): Δx = (2n-1)λ/2।
Takeaway 7
YDSE में फ्रिंज चौड़ाई β = λD/d (सभी फ्रिंजें समान चौड़ी); पानी में β' = β/n घटती है।
Takeaway 8
एकल झिरी विवर्तन में निम्निष्ठ a sinθ = nλ; केंद्रीय उच्चिष्ठ चौड़ाई 2λD/a = 2β (दोगुनी) होती है।
Takeaway 9
ध्रुवण परिघटना सिद्ध करती है कि प्रकाश तरंगें अनुप्रस्थ (Transverse) तरंगें हैं।
Takeaway 10
मैलस का नियम I = I₀ cos²θ तथा ब्रूस्टर का नियम n = tan(i_p) (i_p + r_p = 90°)।

Check Your Understanding (Diagnostic Practice Questions)

Diagnostic questions testing core conceptual clarity. Answers are hidden initially — solve each problem first, then click to reveal the step-by-step verified solution.

1
हाइगेंस के तरंग सिद्धांत के आधार पर यह कैसे सिद्ध होता है कि सघन माध्यम में प्रकाश की चाल विरल माध्यम से कम होती है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: अपवर्तन के नियम के निगमन में sin i / sin r = v₁ / v₂ = n₂ / n₁ प्राप्त होता है। सघन माध्यम के लिए n₂ > n₁ होने से sin i > sin r अर्थात i > r होता है (किरण अभिलंब की ओर झुकती है), जिससे v₂ < v₁ स्वतः सिद्ध होता है।
2
प्रकाश के व्यतिकरण के लिए 'कला-संबद्ध स्रोत' (Coherent Sources) क्यों अनिवार्य हैं? क्या दो स्वतंत्र मोमबत्तियां व्यतिकरण उत्पन्न कर सकती हैं?
Reveal Answer & Explanation
Answer: स्थायी व्यतिकरण प्रतिरूप प्राप्त करने के लिए दोनों तरंगों के मध्य कलांतर समय के साथ नियत रहना अनिवार्य है। नहीं, दो स्वतंत्र स्रोत कभी कला-संबद्ध नहीं हो सकते क्योंकि परमाणुओं द्वारा प्रकाश का उत्सर्जन यादृच्छिक रूप से 10⁻⁸ सेकंड में बदलता रहता है।
3
यंग के द्वि-स्लिट प्रयोग में यदि पूरे उपकरण को जल (अपवर्तनांक 4/3) में डुबो दिया जाए, तो फ्रिंज चौड़ाई पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
Reveal Answer & Explanation
Answer: जल में प्रकाश की तरंगदैर्ध्य λ' = λ/n हो जाती है। अतः नई फ्रिंज चौड़ाई β' = β/n = β/(4/3) = 0.75 β हो जाएगी, अर्थात फ्रिंज चौड़ाई 25% घट जाएगी (फ्रिंजें पास-पास आ जाएंगी)।
4
व्यतिकरण तथा विवर्तन में कोई दो मुख्य अंतर लिखिए।
Reveal Answer & Explanation
Answer:
  1. व्यतिकरण दो पृथक कला-संबद्ध तरंगाग्रों से आने वाली तरंगों के अध्यारोपण से होता है, जबकि विवर्तन एक ही तरंगाग्र के विभिन्न बिंदुओं से चलने वाली द्वितीयक तरंगिकाओं के अध्यारोपण से होता है। 2. व्यतिकरण में सभी फ्रिंजों की चौड़ाई समान होती है, जबकि विवर्तन में केंद्रीय उच्चिष्ठ की चौड़ाई अन्य गौण उच्चिष्ठों से दोगुनी होती है।

5
ध्रुवण की परिघटना प्रकाश तरंगों के संबंध में क्या महत्वपूर्ण निष्कर्ष प्रदान करती है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: ध्रुवण की परिघटना यह अकाट्य रूप से प्रमाणित करती है कि प्रकाश तरंगें 'अनुप्रस्थ प्रकृति' (Transverse Nature) की होती हैं, क्योंकि अनुदैर्ध्य तरंगों (जैसे ध्वनि) में ध्रुवण की परिघटना कभी घटित नहीं हो सकती।
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