धर्मनिरपेक्षता का सीधा अर्थ है—धर्म को राज्य (राजनीतिक व प्रशासनिक शक्ति) से अलग रखना। एक लोकतांत्रिक समाज में इसके दो सबसे प्रमुख कारण हैं:
- 1. बहुमतीय निरंकुशता से बचाव (Tyranny of the Majority): यदि किसी देश में किसी धर्म के लोग बहुसंख्यक हैं और उनके हाथों में राज्य की सत्ता आ जाए, तो वे अपनी शक्ति और वित्तीय संसाधनों का उपयोग अल्पसंख्यकों के दमन, जबरन धर्मांतरण या उनके अधिकारों को छीनने में कर सकते हैं।
- 2. धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा (Protection of Religious Freedom): प्रत्येक नागरिक को यह अधिकार होना चाहिए कि वह अपने जन्म के धर्म को त्याग सके, कोई दूसरा धर्म अपना सके, या धार्मिक शिक्षाओं की अपनी बुद्धि से अलग व्याख्या कर सके। यदि राज्य का कोई धर्म होगा तो यह स्वतंत्रता समाप्त हो जाएगी।