प्रमेय: चतुर्भुज के चारों ओर अंतःकोणों का योग सदैव $360^\circ$ होता है।
$$\u0007ngle A + \u0007ngle B + \u0007ngle C + \u0007ngle D = 360^\circ$$सरल उपपट्ट:
मान लीजिए $ABCD$ एक चतुर्भुज है। विकर्ण $AC$ रेखा पर यह चतुर्भुज $ riangle ABC$ और $ riangle ADC$ में विभाजित हो जाता है।
तुलनीय के कोने योग गुणधर्म से:
- $ riangle ABC$ में: $\u0007ngle CAB + \u0007ngle B + \u0007ngle BCA = 180^\circ$ ---- (1)
- $ riangle ADC$ में: $\u0007ngle CAD + \u0007ngle D + \u0007ngle DCA = 180^\circ$ ---- (2)
दोनों जोड़ों को जोड़ने पर:
$$(\u0007ngle CAB + \u0007ngle CAD) + \u0007ngle B + (\u0007ngle BCA + \u0007ngle DCA) + \u0007ngle D = 180^\circ + 180^\circ = 360^\circ$$
$$\implies \u0007ngle A + \u0007ngle B + \u0007ngle C + \u0007ngle D = 360^\circ$$
(इति सिद्धम्).
| चतुर्भुज का नाम | भुजाओं के गुणधर्म | कोणों के गुणधर्म | विकारों के गुणधर्म |
|---|---|---|---|
| समलंब (ट्रैपेज़ियम) | सम्मुख भुजाओं का केवल एक युग्म समानांतर ($AB \parallel CD$) | कोई विशेष शर्त नहीं | आवश्यक नहीं कि समान या समद्विभाजक हो |
| समांश चतुर्भुज (समानांतर चतुर्भुज) | सम्मुख भुजाओं के दोनों युग्म समानांतर एवं समान ($AB \parallel CD, AB = CD$) | सम्मुख कोण समान ($\u0007ngle A = \u0007ngle C, \u0007ngle B = \u0007ngle D$) तथा शेष कोण संपूरक | विकर्ण संवाद समद्विभाजित करते हैं ($OA=OC, OB=OD$) |
| आयत (आयत) | सम्मुख भुजाए समानान्तर एवं एकता समान | प्रत्येक अंतःकोण समकोण ($90^\circ$) | विकृति समागम समान होते हैं ($AC = BD$) और समद्विभाजित करते हैं |
| समचतुर्भुज (रोम्बस) | चारों भुजाओं एकता समान ($AB=BC=CD=DA$) एवं तुलनात्मक | सम्मुख कोण समान | विकर्ण संवाद समकोण पर समद्विभाजित करते हैं ($AC \perp BD$) |
| वर्ग (वर्ग) | चारों भुजाओं समान एवं समानांतर | प्रत्येक कोण समकोण ($90^\circ$) | विकरण समान होते हैं तथा एकता समकोण पर समद्विभाजित करते हैं |
| पतंग (पतंग) | आसन्न भुजाओं के दो अतिरिक्त समान ($AB=AD, BC=CD$) | एक सम्मुख कोणों का युग्म समान ($\u0007ngle B = \u0007ngle D$) | विकर्ण संपर्क लॉन्च होते हैं ($AC \perp BD$) |