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NIOS • कक्षा X • Science & Technology (212) • अध्याय 21
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

जीवन की इकाइयाँ: कोशिका एवं ऊतक (Cell and Tissues)

एककोशिकीय रसायन (जैसे अमीबा, पैरामेशियम) में जीवन की सभी रासायनिक जैविक क्रियाएं-जैसे भोजन इंटरग्रेन, श्वसन, ऑपरेशंस और गति-एक ही कोशिका रसायन की जाती है। लेकिन बहुकोशिकीय परतें (जैसे मनुष्य, वृक्ष, पक्षी) में लाखों-करोड़ों की संख्या होती हैं। इन श्रमिकों में शरीर के विभिन्न कार्यों के लिए श्रम-विभाजन (श्रम का विभाजन) पाया जाता है। विशेष उद्यमों को किराये पर रखने के लिए विशिष्ट नाविकों का समूह एक निश्चित स्थान पर है। समान उत्पत्ति, समान संरचना और किसी विशिष्ट कार्य को एक समूह के साथ-साथ नाविक बनाने वाली के समूह को ऊतक (ऊतक) कहा जाता है। उदाहरण के लिए,समुद्र में मांसपेशीय स्थैतिक स्ट्रक्चर व प्रसारण मोशन का परिवहन किया जाता है, और रक्त (तारलासंकी सैटलाइट) ऑक्सीजन, भोजन व सूक्ष्मजीवी का परिवहन किया जाता है। वैद्यकीय में संवहन रसायन (ज़िलम और फ्लोएम) जल, खनिज लवण और भोजन का पूरा पादप शरीर में संवहन किया जाता है। प्रशिक्षित और जंतुओं की जीवन शैली, लेवल और स्केल में भारी अंतर होता है। उपचार स्थिर रहते हैं और उन्हें दृढ़ता व सहारा देना चाहिए, इसलिए उनका बहुमत होता है मृत व यांत्रिक सहारा दिए जाने वाले हैं। मानक की वृद्धि कुछ निश्चित क्षेत्र (विभज्योतक) तक सीमित है। इसके विपरीत जंतु निरंतर गतिमान रहते हैं, उन्हें अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है, और उनकी वृद्धि पूरे शरीर में एकसमान होती है। मूल रूप से पादप रसायन को विभज्योतक (मेरिस्टेमेटिक) एवं स्थायी शल्य चिकित्सा (सरल: पैरेन्काइमा, कॉलेनकैमा, स्क्लेरेन्काइमा; एवं कॉम्प्लेक्स: जाइलम व फ़्लोएम) में विभाजित किया गया है, जबकि जंतु को प्रमुख चार रचना- उपकला (उपकला), सांगी (संयोजी: रक्त, अस्थि, उपस्थि, स्नायु, कंदरा), पेशीय (मांसपेशी: रेंकिट, अरलिंकिट, हृदय पेशी) तथा तंत्रिका संवेदन (तंत्रिका ऊतक) में किया जाता है। झारखंड अधिविद्य परिषद (एनआईओएस कक्षा 9) बोर्ड परीक्षा में इस अध्याय से 6 से 8 अंक के अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे जाते हैं। विशेष रूप से जैलम एवं फ्लोएम में समतुल्य अंतर, सरल स्थिर स्नायुबंधन (मृदुतक, स्तूलकोण डेंटन, दृढ़ोतक) में अंतर, तीन प्रकार के पेशी रेशों का सचित्र अंतर, न्यूरॉन (तांत्रिक कोशिका) का प्रमुख चित्र, तथा स्नायु (लिगामेंट) एवं कंदरा (टेंडन) में अंतर परीक्षण के प्रमुख आकर्षण बिंदु हैं।

🌳 क्या आपने कभी सोचा है: 100 मीटर मदर सिकुआ (रेडवुड) के पेड़ की सबसे निचली सतह तक 1000 लीटर पानी बिना किसी बिजली की मोटर के कैसे चढ़ता है?

हमारे घर में सिर्फ दूसरी या तीसरी मंजिल की पानी की टंकी तक जल चढ़ाने के लिए हमें 1 या 2 घोड़े की पावरफुल इलेक्ट्रिक मोटर चालनी मिलती है।

लेकिन कैलिफ़ोर्निया के जंगलों में 300 से 350 फीट की ऊँचाई वाले 'रेडवुड' (सिकुआ) के भव्य पेड़ों को देखें! ज़मीन के सैकड़ों फ़ीट नीचे से हज़ारों लीटर पानी और खनिज लवण बिना किसी मोटर के, बिना किसी तार के और एक यूनिट बिजली के ख़र्चे के दिन-रात लगातार सबसे अधिक गहराई तक की वृद्धि बिना चढ़े रहते हैं!

यह प्रकृति का अजूबा पंप कौन सा है? यह कोई कृत्रिम मशीन नहीं है, बल्कि पैडपों का एक अदृश्य संवहन महामार्ग है जिसे जाइलम स्कोनस (जाइलम ऊतक) कहा जाता है! और स्टॉक में सूर्य की किरण से बना मीठा भोजन, गुरु के विरुद्ध रेस्टॉरेंट तक कौन पहुंचता है? वह है फ्लोएम टेक्सटाइल (फ्लोएम ऊतक)!

इसी प्रकार हमारे शरीर में बिना दिल थके 70-80 साल तक धड़कन कैसे रहती है? और पैर के हुक्म में कांटा कठिनते ही $0.01$ सेकेंड में मस्तिष्क तक चीखने का संकेत कौन देता है? आयो, संयुक्त राष्ट्र की इस संयुक्त सेना—उतकों के अद्भुत साम्राज्य का सजीव अध्ययन करें!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

यह अध्याय आपकी वैज्ञानिक यात्रा एवं जीवन के लिए क्यों भिन्न है?

  1. एनआईओएस बोर्ड परीक्षा में निश्चित अंक: जाइलम बनाम फ्लोएम का 3-अंक का प्रश्न, न्यूरॉन के प्रमुख चित्र (3 अंक), लाइनिंग-अलाइनिट-हृदय पेशी में अंतर, और रक्त की संरचना पर प्रश्न बोर्ड परीक्षा में हर साल पूछे जाते हैं।
  2. कक्षा 11 और 12 जीव विज्ञान (पौधों और जानवरों के ऊतकों की शारीरिक रचना) का आधार: 11वीं कक्षा का 'फूलों के पौधों की शारीरिक रचना' और 'पशुओं में संरचनात्मक संगठन' का सार-चित्रण इसी अध्याय का विस्तार है।
  3. मानव स्वास्थ्य एवं दैनिक मूल्यांकन: नारियल के रेशे (स्केलेरेंकेइमा), मस्कुलर क्रैम्प्स (पेशिये का टूटना), मोच आना (स्नायु का टूटना), रक्त परीक्षण रिपोर्ट अध्ययन, और जोड़ों और जोड़ों के दर्द के वैज्ञानिक अध्ययन।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • कोशिका की आधारभूत संरचना (कोशिका भित्ति, केंद्रक, कोशिका द्रव्य)।
  • पादप एवं जंतु कोशिका के बीच का अंतर।
  • पौधों में प्रकाश संश्लेषण एवं वाष्पोत्सर्जन की प्राथमिक समझ।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • ऊतक की वैज्ञानिक परिभाषा और बहुकोशिकीय जीवों में इसके महत्व की व्याख्या कर सकेंगे।
  • पादप ऊतकों के प्रमुख प्रकारों (विभज्योतक: शीर्षस्थ, अंतर्विष्ट, पार्श्वीय; तथा स्थायी ऊतक) का प्रवाह चार्ट बना सकेंगे।
  • सरल स्थायी ऊतक (पैरेन्काइमा, कॉलेन्काइमा, स्क्लेरेन्काइमा) के संरचनात्मक व कार्यात्मक अंतर स्पष्ट कर सकेंगे।
  • जटिल स्थायी स्कोलैटम-जाइलम (जाइलम) और फ्लोएम (फ्लोएम) के चार-चार घटक और उनके संवहन कार्य की विस्तृत तुलना कर फ़ार्म।
  • जंतु ऊतकों के चारों वर्गों (उपकला, संयोजी, पेशीय, तंत्रिका ऊतक) के लक्षण एवं उदाहरण बता सकेंगे।
  • रक्त के अवशेष (आरबीसी, डब्ल्यूबीसी, प्लेट प्लेट) और अस्थि, उपस्थि, स्नायु और कंदरा के कार्य का विश्लेषण कर सकते हैं।
  • रेखाकृत (कंकाल), रेखाकृत (चिकना) और हृदय पेशी (हृदय) के मध्य सचित्र अंतर स्पष्ट कर शक्तिशाली।
  • न्यूरॉन (तंत्रिका कोशिका) का नामांकित चित्र बनाकर आवेग संचरण की प्रक्रिया को समझ सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. पादप स्नायुबंधन: विभज्योतक (मेरि...
2 2. कॉम्प्लेक्स स्थायी रचना: जाइलम (...
3 3. जंतु ऊतक: उपकला ऊतक एवं संयोजी ऊ...
4 4. पेशीय ऊतक एवं तंत्रिका ऊतक (न्यू...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. पादप स्नायुबंधन: विभज्योतक (मेरिस्टेमेटिक) एवं सरल स्थिर स्नायुबंधन

(क) विभज्योतक ऊतक (Meristematic Tissue)

पौधों में वृद्धि केवल कुछ विशिष्ट भागों में ही होती है। निरंतर विभाजित होने वाली कोशिकाओं के इस ऊतक को विभज्योतक (Meristem) कहते हैं। स्थान के आधार पर यह तीन प्रकार का होता है:

  1. शीर्षस्थ विभज्योतक (Apical Meristem): यह जड़ों एवं तनों के वृद्धि वाले शीर्ष भागों पर स्थित होता है तथा उनकी लंबाई में वृद्धि करता है।
  2. पार्श्वीय विभज्योतक / कैम्बियम (Lateral Meristem): यह तने अथवा जड़ की परिधि पर होता है और उसकी मोटाई (Girth / घेरा) में वृद्धि करता है।
  3. अंतर्विष्ट विभज्योतक (Intercalary Meristem): यह पत्तियों के आधार में या टहनी की पर्वसंधियों (Nodes) के दोनों ओर स्थित होता है (उदा. घास व बांस में)।

विभज्योतक कोशिकाओं के अभिलक्षण: ये अत्यधिक सक्रिय होती हैं, इनका कोशिका द्रव्य सघन होता है, कोशिका भित्ति पतली (सेल्युलोज की) होती है, केंद्रक सुस्पष्ट व बड़ा होता है, तथा इनमें रसधानियाँ (Vacuoles) अनुपस्थित होती हैं (क्योंकि इन्हें भोजन संचय की नहीं, केवल तीव्र विभाजन की आवश्यकता होती है)।

(ख) सरल स्थायी ऊतक (Simple Permanent Tissues)

विभज्योतक कोशिकाएं विभाजन की क्षमता खोकर एक निश्चित आकार, रूप और कार्य ग्रहण कर लेती हैं। इस प्रक्रिया को विभेदीकरण (Differentiation) कहते हैं। एक ही प्रकार की कोशिकाओं से बने ऊतक सरल स्थायी ऊतक कहलाते हैं:

गुणधर्म पैरेन्काइमा (मृदूतक) कॉलेन्काइमा (स्थूलकोण ऊतक) स्क्लेरेन्काइमा (दृढ़ोतक)
1. कोशिका की प्रकृति जीवित कोशिकाएं, भित्ति पतली (सेल्युलोज निर्मित)। जीवित, लंबी कोशिकाएं, कोनों पर पेक्टिन का जमाव। मृत कोशिकाएं, लिग्निन (Lignin) के जमाव से अत्यधिक मोटी भित्ति।
2. अंतराकोशिकीय स्थान कोशिकाओं के बीच काफी रिक्त स्थान होता है। अंतराकोशिकीय स्थान बहुत कम या नगण्य होता है। अंतराकोशिकीय स्थान पूर्णतः अनुपस्थित होता है।
3. मुख्य कार्य भोजन का भंडारण, पौधों को सहारा देना। पौधों में लचीलापन (Flexibility) व यांत्रिक शक्ति प्रदान करना (हवा में बिना टूटे झुकना)। पौधों को कठोरता एवं मजबूती प्रदान करना (उदा: नारियल का रेशा/छिलका, बीज कवच)।
4. रूपांतरण - क्लोरेन्काइमा: जब इसमें क्लोरोफिल होता है, तो प्रकाश संश्लेषण करता है।
- एरेन्काइमा: जलीय पौधों में हवा की बड़ी गुहिकाएं जो तैरने में उत्पलावकता देती हैं।
पत्ती के डंठल (Petiole) तथा तने के एपिडर्मिस के नीचे पाया जाता है। तने में संवहन बंडल के समीप, पत्तियों की शिराओं तथा फलों/अखरोट के छिलकों में।

2. कॉम्प्लेक्स स्थायी रचना: जाइलम (जाइलम) एवं फ्लोएम (फ्लोएम)

एक से अधिक प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बने ऊतक, जो एक इकाई के रूप में मिलकर कार्य करते हैं, जटिल स्थायी ऊतक कहलाते हैं। पौधों में संवहन का कार्य करने के कारण इन्हें संवहन ऊतक (Vascular Tissues) भी कहा जाता है। ये दो प्रकार के होते हैं:

(क) जाइलम (Xylem - दारू)

यह जड़ों द्वारा अवशोषित जल और घुलित खनिज लवणों का ऊर्ध्वमुखी संवहन (केवल ऊपर की ओर, Unidirectional) पत्तियों एवं अन्य भागों तक करता है। इसके 4 घटक होते हैं:

  1. वाहिनिकाएँ (Tracheids): लंबी, नलाकार मृत कोशिकाएं, जिनके सिरे नुकीले होते हैं। भित्ति पर लिग्निन का जमाव होता है। यह जल का संवहन करती हैं।
  2. वाहिकाएँ (Vessels): बेलनाकार नली के समान मृत कोशिकाएं, जो एक के ऊपर एक जुड़ी रहती हैं। आवृतबीजी (Angiosperms) पौधों में जल संवहन का मुख्य घटक हैं।
  3. जाइलम पैरेन्काइमा (Xylem Parenchyma): जाइलम का एकमात्र जीवित घटक है। यह भोजन का संचय करता है तथा जल के पार्श्वीय संवहन में मदद करता है।
  4. जाइलम फाइबर / रेशे (Xylem Sclerenchyma): मृत कोशिकाएं, जो पौधे को यांत्रिक सहारा प्रदान करती हैं।

(ख) फ्लोएम (Phloem - पोषवाह)

यह पत्तियों में बने घुलनशील कार्बनिक भोजन (सुक्रोज) का संवहन पौधे के सभी भागों (ऊपर और नीचे दोनों दिशाओं में, Bidirectional) में करता है। इस प्रक्रिया को स्थानांतरण (Translocation) कहते हैं। इसके 4 घटक होते हैं:

  1. चालनी नलिकाएँ (Sieve Tubes): छिद्रित भित्ति (चालनी पट्टिका) वाली नलिकाकार कोशिकाएं। परिपक्व होने पर इनमें केंद्रक नहीं होता, किंतु कोशिका द्रव्य रहता है (जीवित)।
  2. साथी कोशिकाएं (Companion Cells): केंद्रक युक्त जीवित कोशिकाएं जो चालनी नलिकाओं के पार्श्व में सटकर उनके कार्यों का नियंत्रण करती हैं।
  3. फ्लोएम पैरेन्काइमा (Phloem Parenchyma): जीवित कोशिकाएं, जो भोजन व रेजिन का संचय करती हैं।
  4. फ्लोएम रेशे (Phloem Fibres / Bast Fibres): फ्लोएम का एकमात्र मृत घटक है (उदा. पटसन/जूट के रेशे)। यह यांत्रिक मजबूती प्रदान करता है।
तुलना का बिंदु जाइलम (Xylem) फ्लोएम (Phloem)
1. संवहित पदार्थ जल एवं अकार्बनिक खनिज लवण। पत्तियों में निर्मित भोजन (कार्बनिक पोषक)।
2. प्रवाह की दिशा केवल एकदिशीय—जड़ों से ऊपर पत्तियों की ओर (↑)। द्विदिशीय—पत्तियों से ऊपर तथा नीचे जड़ों दोनों ओर (↕)।
3. कोशिकाओं की जीवितता अधिकांश कोशिकाएं मृत होती हैं (केवल जाइलम पैरेन्काइमा जीवित)। अधिकांश कोशिकाएं जीवित होती हैं (केवल फ्लोएम रेशे मृत)।
4. ऊर्जा की आवश्यकता भौतिक बलों (वाष्पोत्सर्जन खिंचाव) द्वारा होता है, ATP नहीं चाहिए। भोजन का स्थानांतरण सक्रिय होता है, जिसमें ATP ऊर्जा का उपयोग होता है।

3. जंतु ऊतक: उपकला ऊतक एवं संयोजी ऊतक

(क) उपकला ऊतक (Epithelial Tissue - संरक्षी आवरण)

यह जंतु शरीर को ढकने या बाह्य रक्षा प्रदान करने वाला ऊतक है। कोशिकाएं परस्पर सटी रहती हैं और इनके बीच कोई अंतराकोशिकीय स्थान नहीं होता।

  • शल्की उपकला (Squamous): चपटी, पतली कोशिकाएं (उदा: रक्त वाहिकाओं की भित्ति, फेफड़ों की कूपिकाएं, आहारनाल का अस्तर)। त्वचा की बहुस्तरीय शल्की उपकला को स्तरित शल्की कहते हैं जो कटने-फटने से बचाती है।
  • घनाकार उपकला (Cuboidal): घन जैसी कोशिकाएं (उदा: वृक्क नलिकाएं, लार ग्रंथि की नली)। यह यांत्रिक सहारा देती है।
  • स्तंभाकार उपकला (Columnar): खंभे जैसी लंबी कोशिकाएं (उदा: आंत का भीतरी अस्तर जहाँ अवशोषण होता है)। श्वास नली में इन पर सिलिया (रोम) होते हैं, जिसे पक्ष्माभी स्तंभाकार (Ciliated) कहते हैं।
  • ग्रंथिल उपकला (Glandular): जब उपकला कोशिकाएं भीतर की ओर मुड़कर विशिष्ट स्रावी ग्रंथियों का निर्माण करती हैं।

(ख) संयोजी ऊतक (Connective Tissue)

यह विभिन्न अंगों को आपस में जोड़ने, सहारा देने और बांधने का कार्य करता है। इसकी कोशिकाएं एक अंतराकोशिकीय आधात्री (Matrix) में ढीली धंसी रहती हैं:

  1. रक्त (Blood - तरल संयोजी ऊतक): इसके तरल आधात्री भाग को प्लाज्मा (Plasma) कहते हैं, जिसमें लाल रक्त कणिकाएं (RBC - हीमोग्लोबिन युक्त, $O_2$ का परिवहन), श्वेत रक्त कणिकाएं (WBC - रोगाणुओं से सुरक्षा), और प्लेटलेट्स (रक्त का थक्का जमाना) तैरते रहते हैं।
  2. अस्थि (Bone): कठोर, मजबूत संयोजी ऊतक जो शरीर का कंकाल बनाता है। इसकी आधात्री कैल्शियम तथा फॉस्फोरस के यौगिकों से बनी होती है।
  3. उपास्थि (Cartilage): लचीला संयोजी ऊतक जिसकी आधात्री प्रोटीन और शर्करा से बनी होती है। यह जोड़ों की सतह को चिकना बनाता है (उदा: नाक की नोक, कान का पिन्ना, श्वास नली, कंठ)।
  4. स्नायु एवं कंडरा (Ligament and Tendon - JAC Board अति-महत्वपूर्ण):
    • स्नायु (Ligament): दो अस्थियों को आपस में जोड़ने वाला अत्यधिक लचीला एवं मजबूत ऊतक है। (इसमें बहुत कम आधात्री होती है; इसमें खिंचाव आने पर मोच आती है)।
    • कंडरा (Tendon): मांसपेशियों को अस्थि से जोड़ने वाला अत्यधिक मजबूत, सीमित लचीलेपन वाला रेशेदार ऊतक है।
  5. एरिओलर ऊतक (Areolar): त्वचा और मांसपेशियों के बीच, रक्त नलिकाओं व तंत्रिकाओं के चारों ओर स्थित। यह अंगों के आंतरिक रिक्त स्थानों को भरता है और ऊतकों की मरम्मत करता है।
  6. एडिपोज ऊतक (Adipose - वसा ऊतक): त्वचा के नीचे तथा आंतरिक अंगों के बीच वसा का संचय करता है। यह शरीर में ऊष्मीय कुचालक (Thermal Insulator) का कार्य करता है।

4. पेशीय ऊतक एवं तंत्रिका ऊतक (न्यूरॉन की संरचना)

(क) पेशीय ऊतक (Muscular Tissue) के तीन प्रकार

पेशीय ऊतक लंबी कोशिकाओं से बने होते हैं जिन्हें पेशी रेशा कहते हैं। इनमें एक विशेष संकुचनशील प्रोटीन (Contractile Protein - एक्टिन व मायोसिन) होता है जो गति उत्पन्न करता है:

लक्षण रेखित पेशी (Striated / कंकाल) अरेखित पेशी (Smooth / चिकनी) हृद पेशी (Cardiac Muscle)
1. इच्छा पर नियंत्रण ऐच्छिक (Voluntary)—हमारी इच्छानुसार गति करती हैं। अनैच्छिक (Involuntary)—स्वतः कार्य करती हैं, इच्छा के अधीन नहीं। अनैच्छिक—स्वतः जीवन भर लयबद्ध संकुचन करती हैं।
2. कोशिका का आकार लंबी, बेलनाकार, अशाखित। लंबी, दोनों सिरों से नुकीली (तर्कुरूप / Spindle-shaped)। बेलनाकार, शाखान्वित (Branched)।
3. पट्टियाँ (Striations) गहरे व हल्के रंग की एकांतर धारियाँ (पट्टियाँ) स्पष्ट दिखती हैं। कोई धारियाँ नहीं होतीं (चिकनी / अरेखित)। हल्की धारियाँ (Striations) उपस्थित होती हैं।
4. केंद्रक बहुकेंद्रकी (Multinucleate)—परिधि पर अनेक केंद्रक। एककेंद्रकी (Uninucleate)—मध्य में एक केंद्रक। एककेंद्रकी, मध्य में स्थित।
5. थकान (Fatigue) लगातार कार्य करने पर शीघ्र थक जाती हैं। थकती नहीं हैं। कभी नहीं थकतीं, आजीवन बिना रुके धड़कती हैं।
6. शरीर में स्थान हाथ, पैर, गर्दन की कंकाल से जुड़ी मांसपेशियां। आहारनाल, आमाशय, रक्त वाहिकाएं, आंख की परितारिका, मूत्रवाहिनी। केवल हृदय की भित्ति (Myocardium) में।

(ख) तंत्रिका ऊतक एवं न्यूरॉन (Neuron - तंत्रिका कोशिका)

मस्तिष्क, मेरुरज्जु तथा तंत्रिकाएं सभी तंत्रिका ऊतक से बनी हैं। तंत्रिका ऊतक की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई को न्यूरॉन (Neuron) कहते हैं। यह मानव शरीर की सबसे लंबी कोशिका (1 मीटर तक लंबी) हो सकती है।

न्यूरॉन के तीन मुख्य भाग होते हैं:

  1. द्रुमिकाएं (Dendrites): कोशिका काय से निकलने वाले छोटे, बाल जैसी शाखाएं जो ग्राही अंगों से रासायनिक/विद्युत सूचनाएं ग्रहण करती हैं।
  2. कोशिका काय (Cell Body / Cyton): मुख्य भाग जिसमें केंद्रक और प्ररूपी कोशिका द्रव्य स्थित होता है।
  3. तंत्रिकाक्ष (एक्सॉन - Axon): कोशिका काय से निकलने वाला एक बहुत लंबा रेशा, जो तंत्रिका आवेग (Nerve Impulse) को अगले न्यूरॉन तक ले जाता है। इसके अंतिम सिरे को तंत्रिका का अंतिम सिरा (Nerve Ending) कहते हैं। दो न्यूरॉनों के बीच के सूक्ष्म संधि-स्थल को सिनैप्स (Synapse) कहते हैं।

महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र, अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

ऊतक की वैज्ञानिक परिभाषा
समान संरचना, उत्पत्ति और विशिष्ट कार्य संपन्न करने वाली कोशिकाओं का समूह
पादप संवहन ऊतक (संवहन बंडल)
जाइलम (जल व खनिज) + फ्लोएम (पोषक भोजन)
रक्त के प्रमुख घटक
प्लाज्मा (55%) + रक्त कणिकाएं RBC, WBC, प्लेटलेट्स (45%)
स्नायु का कार्य (लिगामेंट)
अस्थि को अस्थि से जोड़ना (Bone to Bone)
कंडरा का कार्य (टेंडन)
मांसपेशी को अस्थि से जोड़ना (Muscle to Bone)
मानव शरीर की सबसे लंबी कोशिका
न्यूरॉन / तंत्रिका कोशिका (लगभग 1 मीटर तक लंबी)
जाइलम का जीवित घटक
जाइलम पैरेन्काइमा (अन्य तीनों वाहिनिका, वाहिका, फाइबर मृत हैं)
फ्लोएम का मृत घटक
फ्लोएम फाइबर / रेशे (अन्य तीनों चालनी नलिका, साथी कोशिका, पैरेन्काइमा जीवित हैं)

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
JAC बोर्ड मॉडल प्रश्न (3 अंक): जाइलम एवं फ्लोएम में कोई तीन प्रमुख अंतर लेखन।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

जाइलम एवं फ्लोएम में अंतर:

  1. संवहित पदार्थ: जाइलम जड़ों द्वारा अवशोषित जल और अकार्बनिक खनिज लवणों का संवहन करता है, जबकि फ्लोएम पत्तियों में प्रकाश संश्लेषण द्वारा बने कार्बनिक भोजन (शर्करा) का संवहन करता है।
  2. प्रवाह की दिशा: जाइलम में जल का प्रवाह केवल एकदिशीय (नीचे जड़ों से ऊपर पत्तियों की ओर) होता है, जबकि फ्लोएम में भोजन का स्थानांतरण द्विदिशीय (पत्तियों से ऊपर व नीचे दोनों दिशाओं में) होता है।
  3. कोशिकीय प्रकृति: जाइलम के अधिकांश घटक मृत होते हैं (केवल जाइलम पैरेन्काइमा जीवित है), जबकि फ्लोएम के अधिकांश घटक जीवित होते हैं (केवल फ्लोएम रेशे मृत होते हैं)।
उदाहरण 2
विभेदन काई (3 अंक): स्नायु (लिगामेंट) और कंदरा (टेंडन) का अंतर स्पष्ट प्रश्न।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

अंतर खंड:

  • स्नायु (लिगामेंट):

    1. यह दो अस्थियों को एक साथ जोड़ता है (अस्थि से अस्थियाँ)।
    2. यह भारी लचीलेपन (High Elasticity) और मजबूत होता है।
    3. इसमें अंतरकोशिकीय हफ़ात्री बहुत कम होती है।
    4. इसमें अचानक वैक्सिएलिक आन पर 'मोच' (मोच) आ जाती है।
  • कंडरा (कण्डरा):

    1. यह कंकाल पेशी को अस्थियों से जोड़ा जाता है।
    2. यह मजबूत श्वेत रेशेदार सेंसिटिव होता है जो कि असंबद्ध होता है।
    3. यह मिश्रण के संरचनात्मक बल को जोड़ों तक पहुंचाकर संभावित गति प्रदान करता है।
उदाहरण 3
सचित्र विवरण (3 अंक): न्यूरॉन (तंत्रिका कोशिका) के तीन प्रमुख भागों के नाम एवं उनके कार्य लिखिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

न्यूरॉन के तीन प्रमुख भाग:

  1. द्रुमिका (डेंड्राइट):मासिक काय से आबे वाले साखित रेशे हैं जो पर्यावरण या अन्य न्यूरॉन से आकर्षण (उद्दीपन) विद्युत-रासायनिक संकेत के रूप में ग्रहण करते हैं।
  2. कोशिका काय (साइटन/सेल बॉडी): इसमें केन्द्रक और कोशिकांग स्थित होते हैं। यह प्राप्त उद्दीपनों को विधान सिद्धांत (आवेग) में परिवर्तित कर दिया गया है।
  3. त्रान्तिकाक्ष (एक्सॉन): यह एक व्यापक एकल प्रवर्ध है जो विद्युत् शास्त्र को कोशिका से दूर अगले न्यूरॉन की ड्रमिका या पेशी/ग्रंथी तक पहुंचाता है।
उदाहरण 4
कारण बताइए (2 अंक): नारियल का रेशा (छिलका) किस ऊतक का बना होता है और यह इतना कठोर क्यों होता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

नारियल का छिलका (रेशा) स्क्लेरेन्केइमा (दृढ़ोतक) से उत्पन्न होता है। वैज्ञानिक कारण: दृढ़ोतक की राजधानी मृत, संकरी और लंबी होती है और विषाणु के टुकड़े पर लिग्निन (लिग्निन) नामक एक प्राकृतिक जल-अभेद्य रासायनिक संकट का गंभीर मोटापा जमाव होता है। लिग्निन का यह अत्यधिक जमाव के कारण ही नारियल का छिलका अत्यधिक कठोर, मजबूत और जल प्रतिरोधी होता है।

उदाहरण 5
तुलना कीजिए (3 अंक): रेखित पेशी, अरेखित पेशी और हृद पेशी में कोई तीन अंतर लिखिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

अंतर:

  1. नियंत्रण: रेखित पेशी ऐच्छिक (इच्छानुसार गति) होती है; अरेखित पेशी और हृद पेशी दोनों अनैच्छिक (स्वतः कार्य करने वाली) होती हैं।
  2. संरचना: रेखित पेशी बेलनाकार, अशाखित व बहुकेंद्रकी होती है; अरेखित पेशी दोनों सिरों से नुकीली (तर्कुरूप) व एककेंद्रकी होती है; हृद पेशी बेलनाकार, शाखान्वित व एककेंद्रकी होती है।
  3. थकान: रेखित पेशी कार्य करने पर शीघ्र थक जाती है; जबकि हृद पेशी जीवन भर बिना थके लयबद्ध रूप से संकुचित व प्रसारित होती रहती है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

जाइलम में भोजन का संवहन लिख देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

जाइलम केवल जल और खनिज लवणों का संवहन करता है। भोजन (सुक्रोज) का संवहन केवल फ्लोएम करता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

स्नायु और कंडरा के कार्यों को उल्टा लिख देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

सरल ट्रिक याद रखें: लिगामेंट = हड्डी से हड्डी (हड्डी से हड्डी); टेंडन = मांसपेशी से हड्डी (मांसपेशी से हड्डी तक)।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

हृद पेशी को ऐच्छिक मान लेना क्योंकि वह निरंतर कार्य करती है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

हृदय पेशी पूर्णत: अनैच्छिक (अनैच्छिक) है, हमारे हृदय की गति पर कोई सीधा नियंत्रण नियंत्रण नहीं होता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

फ्लोएम के सभी घटकों को मृत समझ लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

फ्लोएम का केवल 1 घटक (फ्लोएम रेशे) मृत होता है, शेष तीनों (चालनी नलिकाएं, साथी कोशिकाएं, फ्लोएम पैरेन्काइमा) जीवित होते हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

रक्त को उपकला ऊतक मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

रक्त एक विशिष्ट "तरल संयोजी ऊतक" (द्रव संयोजी ऊतक) है, उपकला संक्रामक नहीं।

पदप एवं जंतु प्रशिक्षक का संपूर्ण ऊतक वर्गीकरण मानचित्र (संपूर्ण ऊतक वर्गीकरण मानचित्र)

पादप एवं जंतु ऊतकों का संपूर्ण वर्गीकरण NCERT / JAC Board Class 9 Science Chapter 6 पादप ऊतक (PLANT TISSUES) 1. विभज्योतक • शीर्षस्थ (लंबाई) • पार्श्वीय (मोटाई/घेरा) • अंतर्विष्ट (पर्वसंधि) 2. स्थायी ऊतक अविभाजित कोशिकाएं विशिष्ट आकार व कार्य (सरल व जटिल) सरल स्थायी: • पैरेन्काइमा (भंडारण) • कॉलेन्काइमा (लचीलापन) • स्क्लेरेन्काइमा (दृढ़ता) जटिल संवहन: • जाइलम (जल संवहन, ↑) • फ्लोएम (भोजन संवहन, ↕) (वाहिकाएं + चालनी नलिकाएं) जंतु ऊतक (ANIMAL TISSUES) 1. उपकला (Epithelial) • शल्की (Squamous) • घनाकार (Cuboidal) • स्तंभाकार (Columnar) 2. संयोजी (Connective) • रक्त (तरल Matrix) • अस्थि, उपास्थि • स्नायु, कंडरा, एडिपोज 3. पेशीय (Muscular) • रेखित (कंकाल, ऐच्छिक) • अरेखित (चिकनी, अनैच्छिक) • हृद पेशी (अथक धड़कन) 4. तंत्रिका (Nervous) • न्यूरॉन (तंत्रिका कोशिका) • द्रुमिका, Cyton, Axon • विद्युत आवेग संचरण जाइलम = जल व खनिज (एकदिशीय) • फ्लोएम = भोजन (द्विदिशीय) • लिगामेंट = अस्थि से अस्थि • टेंडन = पेशी से अस्थि

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
समान संरचना, उत्पत्ति और किसी विशिष्ट कार्य को संपन्न करने वाली कोशिकाओं का समूह ऊतक कहलाता है।
मुख्य बिंदु 2
विभज्योतक तीन प्रकार के होते हैं: शीर्षस्थ (लंबाई), पार्श्वीय (तने की मोटाई/घेरा), तथा अंतर्विष्ट (पर्वसंधि पर)।
मुख्य बिंदु 3
सरल स्थायी ऊतक तीन हैं: पैरेन्काइमा (भोजन संचय), कॉलेन्काइमा (लचीलापन व यांत्रिक शक्ति), और स्क्लेरेन्काइमा (लिग्निन युक्त मृत, कठोर ऊतक)।
मुख्य बिंदु 4
जटिल संवहन ऊतक दो हैं: जाइलम (जल व खनिज का ऊपर की ओर संवहन) तथा फ्लोएम (भोजन का दोनों दिशाओं में संवहन)।
मुख्य बिंदु 5
जाइलम में केवल जाइलम पैरेन्काइमा जीवित है; फ्लोएम में केवल फ्लोएम रेशे मृत हैं।
मुख्य बिंदु 6
जंतु उपकला ऊतक संरक्षी आवरण है (शल्की, घनाकार, स्तंभाकार, ग्रंथिल)।
मुख्य बिंदु 7
रक्त एक तटस्थ तरल पदार्थ होता है जिसमें अनुपातिक रूप से RBC, WBC और प्लेट चॉकलेट शामिल होते हैं।
मुख्य बिंदु 8
स्नायु (लिगामेंट) अस्थियों को अस्थियों से जोड़ा जाता है; कंदरा (टेंडन) मांस को अस्थियों से जोड़ा जाता है।
मुख्य बिंदु 9
पेशीय ऊतक तीन प्रकार के होते हैं: रेखित (कंकाल/ऐच्छिक), अरेखित (चिकनी/अनैच्छिक) तथा हृद पेशी (अनैच्छिक, बिना थके धड़कने वाली)।
मुख्य बिंदु 10
तंत्रिका तंत्र की इकाई न्यूरॉन में ड्रमिका (डेंड्राइट), कोशिका काय (साइटन) और एक्सॉन (एक्सॉन) होते हैं।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
विभज्योतक प्रयोगशाला में रसधानियाँ (Vacuoles) क्यों होती हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: क्योंकि विभज्योतक कोशिकाओं का एकमात्र कार्य निरंतर तीव्र विभाजन करना होता है। इन्हें भोजन या अपशिष्ट पदार्थों के संचयन की आवश्यकता नहीं होती, अतः इनमें रसधानियाँ नहीं पाई जातीं।
2
नारियल का छिलका किस ऊतक का बना होता है? इसके प्रमुख लक्षण लिखिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: नारियल का छिलका स्क्लेरेन्काइमा (दृढ़ोतक) का बना होता है। यह मृत कोशिकाओं से बना होता है, कोशिका भित्ति पर लिग्निन का मोटा जमाव होता है तथा कोशिकाओं के बीच कोई अंतराकोशिकीय स्थान नहीं होता।
3
फ्लोएम के चारों घटकों के नाम लिखिए। इनमें से कौन-सा घटक मृत है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: फ्लोएम के 4 घटक हैं: (1) चालनी नालिकाएं, (2) फ्लोएम पैरेन्काइमा, और (4) फ्लोएमशे। इनमें से केवल "फ्लोएम रेशे" (फ्लोएम फाइबर) मृत होते हैं, शेष तीन जीवित होते हैं।
4
हृदय पेशी (कार्डियक मसल) के दो विशिष्ट मस्कुल लक्षण लिखे।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (1) हृद पेशी की राजधानी बेलनाकार, शाखान्वित (शाखायुक्त) और एक्क्रेंकी होती हैं। (2) ये जीवन भर बिना थके लयबद्धता, प्रकाशन एवं प्रकाशन रहता है।
5
स्नायु (लिगामेंट) के अंतिम खानदान पर क्या होता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: स्नायु दो अस्थियों को ऑनलाइन जोड़ा गया है। इसके वाइट खान जाने या आंशिक रूप से फैट जाने पर तेज दर्द और सूजन होती है, जिसे सामान्य भाषा में "मोच" (मोच) कहा जाता है।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
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अध्याय 1: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में मापन (Measurement in Science & Tech) अध्याय 2: हमारे आस-पास के पदार्थ (Matter in Our Surroundings) अध्याय 3: परमाणु एवं अणु (Atom and Molecules) अध्याय 4: रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण (Chemical Reactions & Equations) अध्याय 5: परमाणु संरचना (Atomic Structure) अध्याय 6: तत्वों का आवर्त वर्गीकरण (Periodic Classification of Elements) अध्याय 7: रासायनिक आबंधन (Chemical Bonding) अध्याय 8: अम्ल, क्षारक और लवण (Acids, Bases and Salts) अध्याय 9: गति और उसका वर्णन (Motion and its Description) अध्याय 10: बल एवं गति (Force and Motion) अध्याय 11: गुरुत्वाकर्षण (Gravitation) अध्याय 12: ऊर्जा के स्रोत (Sources of Energy) अध्याय 13: कार्य एवं ऊर्जा (Work and Energy) अध्याय 14: ऊष्मीय ऊर्जा (Thermal Energy) अध्याय 15: प्रकाश ऊर्जा (Light Energy) अध्याय 16: विद्युत ऊर्जा (Electrical Energy) अध्याय 17: विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव (Magnetic Effects of Current) अध्याय 18: ध्वनि एवं संचार (Sound and Communication) अध्याय 19: सजीवों का वर्गीकरण (Classification of Living Organisms) अध्याय 20: पृथ्वी पर जीवन का इतिहास (History of Life on Earth) अध्याय 21: जीवन की इकाइयाँ: कोशिका एवं ऊतक (Cell and Tissues) अध्याय 22: जैव प्रक्रम-1: पोषण, वहन, श्वसन एवं उत्सर्जन (Life Processes - 1) अध्याय 23: जैव प्रक्रम-2: नियंत्रण एवं समन्वय (Control and Coordination) अध्याय 24: जैव प्रक्रम-3: जनन (Reproduction) अध्याय 25: आनुवंशिकता (Heredity) अध्याय 26: वायु एवं जल (Air and Water) अध्याय 27: धातु और अधातु (Metals and Non-metals) अध्याय 28: कार्बन और उसके यौगिक (Carbon and Its Compounds) अध्याय 29: प्राकृतिक पर्यावरण (Natural Environment) अध्याय 30: पर्यावरण पर मानवीय प्रभाव (Human Impact on Environment) अध्याय 31: खाद्य उत्पादन (Food Production) अध्याय 32: स्वास्थ्य एवं स्वच्छता (Health and Hygiene)

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