(के) न्यूरॉन की संरचना के तीन प्रमुख भाग
न्यूरॉन तंत्रिका तंत्र की सूक्ष्मतम घटक एवं क्रियात्मक इकाई है:
- ड्रुमिका (डेंड्राइट): सेल काय से निकले छोटे-छोटे अजाकनुमा प्रवर्ध, जो ज्ञानेन्द्रियों (रिसेप्टर्स) से सिंकाई या उद्दीपनों को रासायनिक रूप में ग्रहण कर उन्हें विद्युत अध्येता में शामिल हैं।
- कोशिकाकाय (साइटन/सेल बॉडी): इसमें एक सुस्पष्ट केन्द्र और विशिष्ट कोशिका द्रव्य (निसल कणिकाएँ) होते हैं। यह साधना एक्सॉन की ओर से भेजी गई है।
- तंत्रिकाक्ष (एक्सॉन): कैसलकाय से टॉवर वाला एक लंबा बेलनाकार प्रवर्ध, जिसके ऊपर माइलिन शीथ (सुरक्षा कवच) चढ़ता है। यह विद्युत शास्त्र को रसायन विज्ञान से दूर अंतिम सिरों (एक्सॉन टर्मिनल्स) तक ले जाया जाता है।
(ख) सिनेप्स (सिनैप्स / अंतर्ग्रंथन) पर रासायनिक परिवर्त्तन
दो भूगर्भिक न्यूरॉन के बीच के अति सूक्ष्म सूक्ष्म रिक्त स्थान को सिनेप्स (सिनैप्स) कहते हैं:
- जब विद्युत शास्त्र एक्सॉन के अंतिम चरण पर प्रकाश डाला जाता है, तो विद्युत संकेत आगे नहीं बढ़ पाता क्योंकि बीच में रिक्त स्थान (साइनेप्स) होता है।
- अतः एक्सॉन का सिरा कुछ रासायनिक संदेशवाहकों—न्यूरोट्रांसमीटर (जैसे एसिटिलकोलीन)—को साइनेपर्क में मुक्त होता है।
- ये रासायनिक विसारित अगले न्यूरॉन की ड्रुमिका (डेंड्राइट) की सतह पर स्थित ग्रहियों से जुड़ते हैं और वहां पुनः एक नया सिद्धांत उत्पन्न कर देते हैं।
- टिप्पणी: सिनेप्स यह प्रमाणित करता है कि तंत्रिका अभ्यास केवल एक ही दिशा में (ड्रुमिका $\to$ एक्सॉन $\to$ सिनेप्स $\to$ अगला ड्रमिका) प्रवाहित हो, कभी उल्टी दिशा में नहीं।