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NIOS • कक्षा X • Science & Technology (212) • अध्याय 24
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

जैव प्रक्रम-3: जनन (Reproduction)

जीवन प्रक्रियाओं के लिए व्यापक अध्ययन सामग्री और अध्याय नोट्स - 3: प्रजनन, एनआईओएस माध्यमिक (कक्षा 10) विज्ञान और प्रौद्योगिकी (212) के लिए व्यवस्थित रूप से तैयार किया गया। नवीनतम नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग पाठ्यक्रम के साथ संरेखित, यह गाइड मुख्य सैद्धांतिक अवधारणाओं, प्रयोगशाला टिप्पणियों, प्रयोगात्मक तरीकों, ट्यूटर मार्क्ड असाइनमेंट (टीएमए) दिशानिर्देशों और सार्वजनिक परीक्षा में निपुणता पर जोर देती है।

🌱 क्या आपने कभी सोचा है: छिपकली की कटी पूंछ वापस कैसे उग आती है, और एक नन्हे बीज से विशालकाय वटवृक्ष कैसे प्रकट हो जाता है?

जरा सोचिए: अगर किसी छिपकली की पूंछ शत्रु के हमलों में कट जाए, तो कुछ ही चमत्कार में उसकी नई पूंछ उगती है। यदि आप प्लेनेरिया नामक एक छोटे से जलजीव को ब्लेड से ब्लेड से तीन बार बाँट देते हैं, तो कुछ ही दिनों में वे तीन नए जीवित प्लेनेरिया बन जाते हैं! दूसरी ओर, एक विशाल बरगद का पेड़ जिसके नीचे सैकड़ों लोग विश्राम करते हैं, उसका पूरा जीवन, उसकी जड़ें, पत्तियां और पौधे की संपूर्ण जानकारी एक सरसों के दाने से भी छोटे बीज के अंदर बंद हो गया था! और सबसे बड़ा चमत्कार तो हमारे स्वयं के सिद्धांत में है: हम में से प्रत्येक व्यक्ति के जीवन के पहले पहलू में केवल एक एकल कोशिका-युग्मनज (ज़ीगोट)-था, जो सुई की नोक पर एक बिंदु से भी छोटा था। उन्होंने आज 37 ट्रिलियन (37,00,000 करोड़) का एक टुकड़ा विभाजित किया, जो कि समुद्री के कॉम्प्लेक्स, बुद्धि और भावनाओं से संबंधित मानव शरीर में रूपांतरित कैसे हुआ? आइए, जीवन का इस अद्भुत और अनंत विस्तार-'जनन'-के चमत्कारों को विज्ञान की दृष्टि से देखें!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

इस अध्याय का अध्ययन आपके लिए क्यों आवश्यक है?

  1. बोर्ड परीक्षा में उच्च अंक भार: झारखंड बोर्ड (एनआईओएस कक्षा 10) विज्ञान परीक्षा में इस अध्याय से 6 से 8 अंकों के प्रश्न विभिन्न आते हैं। "पुष्प की अनुदैर्ध्य बिल्ली का वर्णन", "नर एवं मादा जनन तंत्र का विवरण", "अमीबा में द्विखंडन बनाम बहुखंडन", "अपरा (प्लेसेंटा) के कार्य", और "गर्भनिरोधक गर्भाधान के प्रकार" प्रमुख प्रश्न हैं।
  2. NEET एवं मेडिकल फाउंडेशन: मानव शरीर क्रिया विज्ञान (मानव प्रजनन), भ्रूणविज्ञान (भ्रूणविज्ञान), और पादप जन्म (पादप आनुवंशिकी) संपूर्ण का आधार यही NIOS चैप्टर से निर्मित होता है।
  3. व्यक्तिगत स्वास्थ्य एवं सामाजिक जागरुकता:एनओसी में होने वाले शारीरिक एवं शिशु रोग विशेषज्ञ, जनसंख्या स्वतंत्रता (प्रजनन स्वच्छता), पारिवारिक उद्देश्य एवं यौन संचारित बीमारी (एचआईवी/एड्स, सिफलिस) के प्रति वैज्ञानिक समझ विकसित करना।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • कोशिका की संरचना, केंद्रक (नाभिक) और गुणसूत्र (क्रोमोसोम) की भूमिका।
  • समसूत्री विभाजन (माइटोसिस) और अर्धसूत्री विभाजन (माइटोसिस) की संकल्पना।
  • डी.एन.ए. (डीएनए) आनुवंशिक सूचना वाहक के रूप में पहचान।
  • पादपों एवं जंतुओं के जीवन चक्र की बुनियादी समझ।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • जनन की परिभाषा, डीएनए प्रकृति के महत्व और संततियों में विभिन्न भिन्नताओं के लाभ को स्पष्ट कर दिया गया है।
  • अलैंगिक जनन की सभी विधियों (द्विखंडन, बहुखंडन, मुकुलन, खंडन, पुनरुद्भवन, बीजाणु समासंघ, कायिक प्रवर्धन) का तुलनात्मक विश्लेषण कर सकेंगे।
  • पुष्प के सभी भागों (बाह्यदल, दल, पुंकेसर, स्त्रीकेसर) की पहचान कर स्व-परागण, पर-परागण तथा दोहरे निषेचन की प्रक्रिया का सचित्र वर्णन कर सकेंगे।
  • मानव नर एवं मादा जनन तंत्र के अंगों, शुक्राणु/अंडाणु निर्माण और हार्मोनल नियंत्रण को रेखांकित कर सकेंगे।
  • निषेचन, अपरा (प्लेसेंटा) की कार्यप्रणाली, मासिक चक्र (ऋतुस्राव), गर्भनिरोधन के तरीकों और यौन संचारित संक्रमणों की रोकथाम का वैज्ञानिक विश्लेषण कर सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. जनन का मूल आधार: DNA प्रतिकृति ए...
2 2. अलैंगिक जनन की विभिन्न विधियाँ (...
3 3. पुष्पीय वनस्पति में लैंगिक जनन (...
4 4. मानव जनन तंत्र (मानव प्रजनन प्रण...
5 5. निषेचन, जोन, ऋतुस्राव एवं जनन स्...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. जनन का मूल आधार: DNA प्रतिकृति एवं विविधता का महत्व

जीव अपने सदृश ही संतति उत्पन्न करते हैं क्योंकि उनकी शारीरिक अभिकल्पना (Body Design), अंग तंत्र और कार्यप्रणाली समान होती है। इस समानता का मूल आधार कोशिका के केंद्रक में उपस्थित DNA (डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल) के अणु हैं।

(क) DNA प्रतिकृति का निर्माण (DNA Replication)

  • कोशिका के केंद्रक में उपस्थित गुणसूत्रों के DNA में प्रोटीन निर्माण की संपूर्ण आनुवंशिक सूचनाएं कोडित होती हैं।
  • जनन के समय कोशिकाएं रासायनिक अभिक्रियाओं द्वारा DNA की दो समरूप प्रतियाँ (प्रतिकृतियाँ) तैयार करती हैं।
  • केवल DNA की प्रतिकृति बनाना ही पर्याप्त नहीं है; नई संतति कोशिका के अस्तित्व के लिए आवश्यक कोशिकीय संरचना (Cellular Apparatus—माइटोकॉन्ड्रिया, राइबोसोम, कोशिकाद्रव्य) का भी निर्माण होता है।
  • अंततः एक कोशिका विभाजित होकर दो नई संतति कोशिकाओं में विभक्त हो जाती है।

(ख) विभिन्नता (Variation) का जैविक महत्व

कोई भी जैव-रासायनिक प्रणाली 100% सटीक नहीं होती। अतः DNA प्रतिकृति बनते समय कुछ सूक्ष्म त्रुटियाँ (Inaccuracies) रह जाती हैं। इन्हीं सूक्ष्म परिवर्तनों के कारण संतति अपने जनकों के एकदम समान होते हुए भी उनसे थोड़ी भिन्न दिखाई देती है। इसे विभिन्नता (Variation) कहते हैं।

पहलू व्यक्तिगत स्तर पर प्रभाव समष्टि (Population) के स्तर पर महत्व
पर्यावरणीय संकट से सुरक्षा प्रायः कोई प्रत्यक्ष लाभ नहीं, कभी-कभी हानिकारक भी हो सकता है। यदि वैश्विक तापन या प्रदूषण से जल का तापमान अत्यधिक बढ़ जाए, तो शीतोष्ण जीवाणुओं की समष्टि नष्ट हो जाएगी; किंतु ऊष्मा-प्रतिरोधी विभिन्नता वाले कुछ जीवाणु जीवित बचकर वंश आगे बढ़ाएंगे।
जैव विकास (Evolution) अकेले व्यक्ति का विकास नहीं होता। पीढ़ी-दर-पीढ़ी संचित होने वाली उपयोगी विभिन्नताएं ही लाखों वर्षों में नई प्रजातियों की उत्पत्ति (Speciation) का मार्ग प्रशस्त करती हैं।
निकेत (Niche) में स्थायित्व जीव अपने पारितंत्र में जीवन यापन करता है। विभिन्नताएं प्रजाति को बदलते हुए निकेत में अनुकूलित रहने की सामर्थ्य प्रदान करती हैं।
बोर्ड परीक्षा टिप: "डी.एन.ए. प्रतिकृति का जनन में क्या महत्व है?"—यह 2 अंक का प्रश्न प्रतिवर्ष आता है। उत्तर में हमेशा दो बिंदु लिखें: (1) जनकों के आनुवंशिक गुणों को संतति में स्थानांतरित करना, और (2) प्रतिकृति में होने वाली अपूर्णताओं से विभिन्नता उत्पन्न करना जो प्रजाति के अस्तित्व के लिए आवश्यक है।

2. अलैंगिक जनन की विभिन्न विधियाँ (अलैंगिक प्रजनन के तरीके)

अलैंगिक जनन में संतति का निर्माण केवल एक ही जनक द्वारा होता है। इसमें युग्मक निर्माण या निषेचन नहीं होता। यह मुख्य रूप से सरल शारीरिक संरचना वाले एककोशिकीय एवं सरल बहुकोशिकीय जीवों में पाया जाता है:

विधि कार्यप्रणाली एवं क्रियाविधि विशिष्ट उदाहरण मुख्य विशेषता
1. द्विखंडन (Binary Fission) जनक कोशिका केंद्रक और कोशिकाद्रव्य के विभाजन द्वारा दो समान संतति कोशिकाओं में विभाजित होती है। अमीबा (Amoeba) (किसी भी तल में), लीशमैनिया (Leishmania) (कालाजार का रोगाणु - अनुदैर्ध्य तल में) लीशमैनिया में एक सिरे पर कोड़े जैसी संरचना (कशाभ) होने के कारण विभाजन एक निश्चित दिशा में होता है।
2. बहुखंडन (Multiple Fission) प्रतिकूल परिस्थितियों में जनक के चारों ओर मोटी सुरक्षात्मक भित्ति (पुटी/Cyst) बनती है। अंदर केंद्रक कई बार विभाजित होता है, अनुकूल समय पर पुटी टूटती है और अनेक संततियां निकलती हैं। प्लाज्मोडियम (Plasmodium) (मलेरिया परजीवी) एक ही जनक से एक साथ सैकड़ों नई संततियों की उत्पत्ति होती है।
3. मुकुलन (Budding) जनक शरीर की सतह पर बार-बार कोशिका विभाजन से एक छोटा उभार (मुकुल/Bud) बनता है। यह विकसित होकर नए जीव में बदलता है और जनक से अलग हो जाता है। हाइड्रा (Hydra), यीस्ट (Yeast) (एककोशिकीय कवक) पुनरुद्भवन कोशिकाओं (Regenerative cells) के उपयोग द्वारा मुकुल का विकास होता है।
4. खंडन (Fragmentation) सरल संरचना वाले बहुकोशिकीय जीव पूर्ण विकसित होने पर छोटे-छोटे टुकड़ों (खंडों) में टूट जाते हैं। प्रत्येक खंड वृद्धि कर नया जीव बन जाता है। स्पाइरोगायरा (Spirogyra) (तंतुमय शैवाल) यह केवल उन जीवों में संभव है जिनकी शारीरिक संरचना सरल और अप्रभेदित होती है।
5. पुनरुद्भवन (Regeneration) यदि किसी जीव का शरीर किसी कारणवश कई टुकड़ों में कट जाए, तो प्रत्येक टुकड़े की विशिष्ट कोशिकाएं तेजी से विभाजित होकर पूरे नए जीव का पुनर्निर्माण कर लेती हैं। प्लेनेरिया (Planaria), हाइड्रा पुनरुद्भवन वास्तव में जनन का विशिष्ट प्रकार नहीं है, क्योंकि जीव सामान्यतः कटने की प्रतीक्षा नहीं करते।
6. बीजाणु समासंघ (Spore Formation) कवक तंतुओं के शीर्ष पर गोल संरचनाएं—बीजाणुधानी (Sporangia)—बनती हैं, जिनमें मोटे आवरण वाले सूक्ष्म बीजाणु (Spores) सुरक्षित रहते हैं। नमी मिलने पर ये अंकुरित होते हैं। राइजोपस (Rhizopus) (ब्रेड मोल्ड), म्यूकर बीजाणुओं की मोटी भित्ति उन्हें प्रतिकूल परिस्थितियों (सूखा, गर्मी) से बचाती है।

(ख) पादपों में कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation)

जब किसी पौधे के कायिक भागों—जैसे जड़, तना या पत्ती—से नए पौधे का निर्माण होता है, तो इसे कायिक प्रवर्धन कहते हैं:

  • जड़ों द्वारा: शकरकंद (Sweet potato), डहेलिया।
  • तने द्वारा: आलू की आँखें (कंद), अदरक का प्रकंद (Rhizome), पुदीना।
  • पत्तियों द्वारा: ब्रायोफिलम (पत्थरचट्टा) की पत्ती के किनारों के खांचों में कलिकाएं (Buds) विकसित होती हैं, जो जमीन पर गिरकर नया पौधा बनाती हैं।
  • कृत्रिम विधियां: कलम लगाना (Cutting - गुलाब), लेयरिंग या दाब लगाना (Layering - चमेली), रोपण (Grafting - आम, सेब)।
  • ऊतक संवर्धन (Tissue Culture): पौधे के शीर्ष विभज्योतक से कोशिकाओं का छोटा समूह लेकर पोषक माध्यम में कैलस (Callus) बनाया जाता है और हार्मोन द्वारा नए पादपक तैयार किए जाते हैं (जैसे सजावटी पौधे, आर्किड)। यह रोगमुक्त पौधे प्राप्त करने की आधुनिक तकनीक है।
कायिक प्रवर्धन के तीन प्रमुख लाभ (बोर्ड में 3 अंक):
1. जो पौधे बीज उत्पन्न करने की क्षमता खो चुके हैं (जैसे केला, संतरा, गुलाब, चमेली), उन्हें इस विधि द्वारा आसानी से उगाया जा सकता है।
2. इस प्रकार उत्पन्न नए पौधे बीज से उगाए गए पौधों की तुलना में बहुत कम समय में फूल और फल देने लगते हैं।
3. सभी नए पौधे आनुवंशिक रूप से अपने जनक पौधे के शत-प्रतिशत समान होते हैं, जिससे उत्कृष्ट गुणों का संरक्षण होता है।

3. पुष्पीय वनस्पति में लैंगिक जनन (फूलों के पौधों में लैंगिक प्रजनन)

आवृतबीजी (Angiosperms) पौधों में जनन अंग पुष्प (Flower) में स्थित होते हैं। एक पूर्ण पुष्प में चार चक्र (Whorls) होते हैं:

  1. बाह्यदल पुंज (Calyx/Sepals): हरे रंग की पत्तियाँ जो कली की अवस्था में पुष्प की सुरक्षा करती हैं।
  2. दल पुंज (Corolla/Petals): रंगीन और सुगंधित पंखुड़ियाँ जो परागण के लिए कीटों और तितलियों को आकर्षित करती हैं।
  3. पुमंग (Androecium - नर जननांग): यह पुंकेसर (Stamen) की इकाइयों से बना होता है। प्रत्येक पुंकेसर में एक पतला तंतु (Filament) और शीर्ष पर द्विपालिक परागकोश (Anther) होता है। परागकोश में पीले रंग के परागकण (Pollen Grains) बनते हैं, जो नर युग्मक (Male Gametes) उत्पन्न करते हैं।
  4. जायांग (Gynoecium - मादा जननांग): यह पुष्प के केंद्र में स्थित स्त्रीकेसर (Pistil/Carpel) से बनता है। इसके तीन प्रमुख भाग होते हैं:
    • वर्तिकाग्र (Stigma): शीर्ष पर चिपचिपा भाग जिस पर परागकण आकर चिपकते हैं।
    • वर्तिका (Style): बीच की लंबी नलिकाकार ग्रीवा जो वर्तिकाग्र को अंडाशय से जोड़ती है।
    • अंडाशय (Ovary): नीचे का फूला हुआ आधार भाग, जिसके अंदर एक या अधिक बीजांड (Ovules) होते हैं। प्रत्येक बीजांड के अंदर मादा युग्मक (अंड कोशिका / Egg cell) उपस्थित होती है।

(ख) परागण (Pollination): स्व-परागण बनाम पर-परागण

तुलना का आधार स्व-परागण (Self-Pollination) पर-परागण (Cross-Pollination)
परिभाषा परागकणों का उसी पुष्प के अथवा उसी पौधे के अन्य पुष्प के वर्तिकाग्र पर स्थानांतरण। परागकणों का उसी प्रजाति के किसी दूसरे पौधे के पुष्प के वर्तिकाग्र पर स्थानांतरण।
बाहरी कारक (Agents) बाहरी कारकों (हवा, जल, कीट) की आवश्यकता नहीं होती या बहुत कम होती है। हवा, जल, कीट (मधुमक्खी), पक्षी जैसे बाह्य कारकों की अनिवार्य आवश्यकता होती है।
आनुवंशिक विभिन्नता विभिन्नताएं उत्पन्न नहीं होतीं; संतति जनक के समान होती है। उच्च स्तरीय आनुवंशिक विभिन्नताएं और संकर ओज (Hybrid Vigour) उत्पन्न होता है।
उदाहरण मटर (Pea), गेहूँ, चावल। गुलाब, सरसों, मक्का, पपीता, सूरजमुखी।

(ग) परागनलिका की वृद्धि एवं दोहरा निषेचन (Double Fertilization)

  1. जब परागकण वर्तिकाग्र पर गिरता है, तो वर्तिकाग्र के शर्करायुक्त स्राव को अवशोषित कर वह अंकुरित होता है और एक परागनलिका (Pollen Tube) निकलती है।
  2. यह परागनलिका वर्तिका से होते हुए रसायनानुवर्तन (Chemotropism) द्वारा बीजांड की ओर बढ़ती है और अपने साथ दो नर युग्मक ले जाती है।
  3. बीजांड के भ्रूणकोष (Embryo Sac) में प्रवेश कर परागनलिका फट जाती है:
    • युग्मक संलयन (Syngamy): प्रथम नर युग्मक अंड कोशिका ($n$) से संलयित होकर द्विगुणित युग्मनज (Zygote - $2n$) बनाता है, जो भविष्य का भ्रूण (Embryo) बनता है।
    • त्रिसंलयन (Triple Fusion): द्वितीय नर युग्मक ($n$) केंद्रीय कोशिका के दो ध्रुवीय केंद्रकों ($n + n$) से मिलकर त्रिगुणित प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक (PEN - $3n$) बनाता है, जो विकासशील भ्रूण को पोषण देने वाला भ्रूणपोष (Endosperm) बनाता है।
  4. चूँकि एक ही भ्रूणकोष में दो बार संलयन होता है, अतः इसे दोहरा निषेचन (Double Fertilization) कहते हैं। यह आवृतबीजी पौधों का अनूठा लक्षण है।

निषेचन के पश्चात होने वाले परिवर्तन:

  • युग्मनज बार-बार विभाजित होकर भ्रूण (Embryo) में बदलता है।
  • बीजांड (Ovule) एक कठोर आवरण विकसित कर बीज (Seed) बन जाता है। बीज में मूलांकुर (भविष्य की जड़), प्रांकुर (भविष्य का प्ररोह) और बीजपत्र (भोजन संग्रह) होते हैं।
  • अंडाशय (Ovary) तीव्र वृद्धि कर फल (Fruit) में रूपांतरित हो जाता है।
  • बाह्यदल, दल, पुंकेसर, वर्तिका और वर्तिकाग्र सूखकर गिर जाते हैं।

4. मानव जनन तंत्र (मानव प्रजनन प्रणाली)

मनुष्य एकलिंगी (Dioecious) जीव है जिसमें स्पष्ट लैंगिक द्विरूपता (Sexual Dimorphism) पाई जाती है। किशोरावस्था में जब शरीर में प्रजनन परिपक्वता आती है, तो उसे यौवनारंभ (Puberty) कहते हैं। लड़कों में 13-14 वर्ष की आयु में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन तथा लड़कियों में 10-12 वर्ष की आयु में एस्ट्रोजन व प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के प्रभाव से द्वितीयक लैंगिक लक्षण विकसित होते हैं।

(क) नर जनन तंत्र (Male Reproductive System)

अंग शारीरिक स्थिति एवं संरचना प्रमुख कार्य
1. वृषण (Testes - एक जोड़ी) उदर गुहा के बाहर एक थैली जैसी संरचना—वृषण कोष (Scrotum)—में स्थित होते हैं। (1) नर युग्मक शुक्राणु (Sperms) का निर्माण। (2) नर लिंग हार्मोन टेस्टोस्टेरोन का स्राव। वृषण कोष का तापमान शरीर के सामान्य तापमान से 2-2.5°C कम रहता है, जो शुक्राणुजनन के लिए अनिवार्य है।
2. शुक्रवाहिका (Vas Deferens) प्रत्येक वृषण से निकलने वाली लंबी संकीर्ण पेशीय नली। परिपक्व शुक्राणुओं को वृषण से मूत्रमार्ग (Urethra) तक ले जाना।
3. सहायक ग्रंथियां (शुक्राशय + प्रोस्टेट) शुक्रवाहिका के मार्ग में जुड़ने वाली ग्रंथियां। क्षारीय एवं पोषक तरल का स्राव करती हैं। यह तरल शुक्राणुओं को तरलता, गतिशीलता प्रदान करता है और योनि की अम्लीयता से सुरक्षा देता है। (शुक्राणु + तरल = वीर्य / Semen)।
4. मूत्रमार्ग (Urethra) एवं शिश्न (Penis) मूत्राशय से आने वाला मार्ग और शिश्न की पेशीय संरचना। मूत्र एवं वीर्य दोनों के निकास का उभयनिष्ठ मार्ग (Common duct) है; शिश्न मैथुन के दौरान वीर्य को मादा योनि में स्थानांतरित करता है।

(ख) मादा जनन तंत्र (Female Reproductive System)

अंग संरचना एवं स्थिति प्रमुख कार्य
1. अंडाशय (Ovary - एक जोड़ी) उदर गुहा के निचले भाग में दोनों ओर स्थित बादाम के आकार के अंग। (1) मादा युग्मक अंड कोशिका (Ovum/Egg) का निर्माण। (2) मादा हार्मोन एस्ट्रोजन एवं प्रोजेस्टेरोन का स्राव। यौवनारंभ के बाद प्रति माह एक अंडाशय से एक परिपक्व अंड निकलता है (अंडोत्सर्ग / Ovulation)।
2. अंडवाहिका या फैलोपियन नलिका (Fallopian Tube) अंडाशय के ऊपर कीप जैसी संरचना से गर्भाशय तक फैली नली। अंडे को गर्भाशय की ओर ले जाना। निषेचन (Fertilization) की क्रिया अंडवाहिका के एम्पुला भाग में ही संपन्न होती है (अत्यंत महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न)।
3. गर्भाशय (Uterus / Womb) उल्टी रखी नाशपाती के आकार की अत्यधिक पेशीय, लचीली और खोखली थैली। निषेचित भ्रूण का रोपण (Implantation), 9 महीने तक भ्रूण का पोषण, संरक्षण एवं प्रसव (Parturition)।
4. गर्भाशय ग्रीवा (Cervix) एवं योनि (Vagina) गर्भाशय का संकरा मुख ग्रीवा है, जो पेशीय नली योनि में खुलता है। मैथुन के समय शुक्राणुओं का ग्रहण मार्ग तथा प्रसव के समय जन्म नाल (Birth Canal) का निर्माण।

5. निषेचन, जोन, ऋतुस्राव एवं जनन स्वास्थ्य (निषेचन, मासिक धर्म चक्र और प्रजनन स्वास्थ्य)

(क) निषेचन एवं भ्रूण का पोषण: अपरा (Placenta)

मैथुन के दौरान लाखों शुक्राणु योनि में स्खलित होते हैं, जो तैरकर अंडवाहिका तक पहुँचते हैं। यदि वहाँ अंड उपस्थित हो, तो एक शुक्राणु अंड में प्रवेश कर संलयित होता है जिसे निषेचन (Fertilization) कहते हैं।

  • निषेचन से बना युग्मनज (Zygote) विभाजित होते हुए गर्भाशय में आता है और गर्भाशय की मोटी, स्पंजी भित्ति (एंडोमेट्रियम) में धँस जाता है। इस प्रक्रिया को रोपण (Implantation) कहते हैं।
  • अपरा (Placenta): यह भ्रूण और माता के रक्त के मध्य एक तश्तरीनुमा विशिष्ट संवहनी ऊतक संबंध है।
    • संरचना: भ्रूण की ओर की सतह पर लाखों रंसांकुर (Villi) होते हैं, जो माता के ऊतकों के रक्त स्थानों (Blood spaces) में डूबे रहते हैं। इससे पदार्थों के आदान-प्रदान हेतु एक विशाल पृष्ठीय क्षेत्रफल मिलता है।
    • कार्य: माता के रक्त से ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, जल और ऑक्सीजन को भ्रूण तक पहुँचाना, तथा भ्रूण द्वारा उत्पन्न अपशिष्ट पदार्थों (यूरिया, $CO_2$) को माता के रक्त में विसर्जित करना ताकि माता के वृक्क व फेफड़े उन्हें बाहर निकाल सकें।
  • मानव में गर्भकाल (Gestation Period) लगभग 9 माह (280 दिन) का होता है।

(ख) जब अंड का निषेचन नहीं होता: ऋतुस्राव (Menstruation)

प्रत्येक माह गर्भाशय संभावित भ्रूण के रोपण के लिए अपनी आंतरिक भित्ति को मोटा, स्पंजी और रक्त वाहिकाओं से प्रचुर बनाता है।

  • यदि अंड का निषेचन नहीं होता, तो अंड लगभग 24 घंटे जीवित रहने के बाद नष्ट हो जाता है।
  • गर्भाशय की इस मोटी आंतरिक परत की अब कोई आवश्यकता नहीं रहती। अतः यह परत धीरे-धीरे टूटती है और रुधिर तथा श्लेष्मा (Mucus) के रूप में योनि मार्ग से बाहर निकलती है।
  • इस चक्र को ऋतुस्राव, रजोधर्म या माहवारी (Menstruation) कहते हैं। यह चक्र लगभग प्रत्येक 28 दिन में दोहराया जाता है और रक्तस्राव की अवधि 3 से 5 दिन तक रहती है।

(ग) जनन स्वास्थ्य एवं गर्भनिरोधन की विधियां (Contraceptive Methods)

अवांछित गर्भधारण को रोकने और जनसंख्या विस्फोट पर नियंत्रण हेतु विभिन्न गर्भनिरोधक तकनीकें उपलब्ध हैं:

विधि का प्रकार कार्य सिद्धांत एवं उपकरण लाभ एवं सुरक्षा
1. यांत्रिक अवरोधक (Mechanical Barrier) कंडोम (Condom) का शिश्न पर उपयोग या योनि में डायाफ्राम / सर्वाइकल कैप का उपयोग। शुक्राणु को अंड तक पहुँचने से रोकता है। गर्भधारण से सुरक्षा के साथ-साथ यौन संचारित रोगों (STDs जैसे HIV/AIDS, गोनोरिया) से भी एकमात्र विश्वसनीय सुरक्षा प्रदान करता है।
2. रासायनिक / हार्मोनल गोलियाँ (Oral Pills) प्रोजेस्टेरोन-एस्ट्रोजन युक्त मुख से ली जाने वाली गोलियाँ (उदा. सहेली)। ये शरीर में हार्मोन संतुलन बदलकर अंडोत्सर्ग (Ovulation) को रोक देती हैं। गर्भधारण रोकने में अत्यधिक प्रभावी, किंतु हार्मोनल असंतुलन के कारण कुछ महिलाओं में जी मिचलाना, वजन बढ़ना जैसे पार्श्व प्रभाव (Side effects) हो सकते हैं। STDs से सुरक्षा नहीं करती।
3. अंतःगर्भाशयी युक्तियां (IUDs) डॉक्टर या नर्स द्वारा गर्भाशय में कॉपर-टी (Copper-T) या लूप स्थापित करना। कॉपर आयन शुक्राणुओं की गतिशीलता और निषेचन क्षमता को घटाते हैं। दीर्घकालिक गर्भनिरोधक समाधान (3 से 5 वर्ष); गर्भाशय में जलन या संक्रमण की संभावना हो सकती है।
4. शल्य चिकित्सा विधियां (Surgical Methods) पुरुष नसबंदी (Vasectomy): शुक्रवाहिका को काटकर बाँधना।
महिला नसबंदी (Tubectomy): अंडवाहिका (फैलोपियन ट्यूब) को काटकर बाँधना।
यह स्थायी और 100% अपरिवर्तनीय (Irreversible) विधि है। युग्मक स्थानांतरण का मार्ग सदैव के लिए अवरुद्ध हो जाता है।
यौन संचारित रोग (STDs - Sexually Transmitted Diseases):
• जीवाणु जनित (Bacterial): गोनोरिया (Gonorrhoea), सिफलिस (Syphilis) — एंटीबायोटिक दवाओं से उपचार योग्य।
• विषाणु जनित (Viral): मस्सा (Genital Warts - HPV द्वारा), एच.आई.वी.-एड्स (HIV-AIDS) — असाध्य, जानलेवा; कंडोम का उपयोग और सुरक्षित यौन आचरण ही एकमात्र बचाव है।

महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र, अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

DNA प्रकृति का सिद्धांत
मातृ DNA (2 स्ट्रैंड) → 2 संतति DNA अणु (समान आनुवंशिक कूट + सूक्ष्म विभिन्नता)
अमीबा में द्विखंडन
1 जनक अमीबा →{केंद्रक विभाजन + कोशिकाद्रव्य विभाजन} 2 समरूप संतति अमीबा
प्लाज्मोडियम में बहुखंडन
1 जनक परजीवी →{पुटी के अंदर बहु-केंद्रक विभाजन} सैंकड़ों नन्हे संतति जीव
पुष्प के चार चक्र
बाह्यदल (सुरक्षा) + दल (आकर्षण) + पुंकेसर (नर) + स्त्रीकेसर (मादा)
परागण की दिशा
परागकोश (Anther) से परागकण →{हवा / जल / कीट} वर्तिकाग्र (Stigma)
युग्मक संलयन (Syngamy)
नर युग्मक (n) + अंड कोशिका (n) → द्विगुणित युग्मनज (2n) → भ्रूण
त्रिसंलयन (ट्रिपल फ्यूजन)
नर युग्मक (n) + दो ध्रुवीय केंद्रक (n + n) → त्रिगुणित भ्रूणपोष (PEN - 3n)
दोहरा निषेचन (डबल फर्टिलाइजेशन)
युग्मक संलयन (2n) + त्रिसंलयन (3n) = आवृतबीजी का विशिष्ट गुण
निषेचन स्थल (मानव)
अंडवाहिका का एम्पुला (Fallopian Tube - Ampulla)
मानव गर्भकाल (गर्भाधान)
लगभग 9 माह = 38-40 सप्ताह = 280 दिन
ऋतुस्राव चक्र की अवधि
सामान्यतः 28 दिन (रक्तस्राव काल: 3 से 5 दिन)
शल्य नसबंदी समीकरण
नर: शुक्रवाहिका उच्छेदन (Vasectomy) | मादा: अंडवाहिका उच्छेदन (Tubectomy)

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
प्रश्न 1 (JAC 2023 - 5 अंक): पुष्पी पादप में अगले निषेचन (डबल फर्टिलाइजेशन) से आप क्या हैं? निशेचन के बाद पुष्प के विभिन्न प्रयोगों में होने वाले का उल्लेख किया गया है।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: 1. भगत निश्चेचन की परिभाषा एवं क्रियाविधि: अवृत्तबीजी (पुष्पी) प्रमाणित में जब परनालिका बीजाण्ड के भ्रूणकोष में प्रवेश होता है, तो वह दो अगुणित ($n$) नर युग्मक मुक्त करती है: (क) युग्मक संलयन (Syngamy): पहला नर युग्मक ($n$) और कोशिका ($n$) से संलयित द्विगुणित ($2n$) युग्मनज (ज़ीगोट) बनता है। इससे आगे भ्रूणहत्या का विकास होता है।

$$n \text{ (नर युग्मक)} + n \text{ (अंड कोशिका)} \to 2n \text{ (युग्मनज)}$$

(ख) त्रिसंलयन (ट्रिपल फ्यूजन): दूसरा नर युग्मक ($n$) केंद्रीय कोशिका में स्थित दो ध्रुवीय केंद्रक ($n + n$) के साथ संलयित तारा त्रिगुणित ($3n$) प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक निर्मित होता है।

$$n \text{ (नर युग्मक)} + 2n \text{ (ध्रुवीय केंद्रक)} \to 3n \text{ (भ्रूणपोष)}$$

एक ही भ्रूणकोष में निषेचन की क्रिया दो बार रची जाती है, मूलतः इसे दोहरा निषेचन कहा जाता है।

2. निशेचन के बाद पुष्प में बदलाव:

  1. युग्मनज (ज़ीगोट): बार-बार विभक्त नए उपचारों के भ्रूण (भ्रूण) में परिवर्तन होता है।
  2. बीजंड (ओवुले): एक मजबूत रक्षात्मक पोषक तत्व बीज (बीज) में रूपांतरित होता है।
  3. अंदाशय (अंडाशय):आदिवासी फूलकर और वयोवृद्ध फल (फल) का निर्माण होता है।
  4. बह्यादल, दल, पंकेसर, वर्तिका व वर्तिकाग्र:सुखकर चौंक जाते हैं।
उदाहरण 2
प्रश्न 2 (जेएसी 2022 - 3 अंक): योगा में मुकुलन (बडिंग) और प्लेनेरिया में पुनरुद्भवन (पुनर्जनन) में मुख्य अंतर स्पष्ट। पुर्नरुद्भवन को जनन का एक रूप क्या माना जा सकता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: 1. अभ्यास में मुकुलन बनाम प्लेनरिया में पुनरुद्भवन: • योगा में मुकुलन: योगा के शरीर का एक निश्चित स्थान समुद्र के बार-बार समसूत्री प्रभाग से एक छोटा सा ऊतक प्रवर्ध या मुकुल (बड) नक्षत्र है। यह मुकुल पोषण प्राप्त कर एक सूक्ष्म जीव का रूप ले लेता है और जेन के शरीर से अलग स्वतंत्र जीवन जीना प्रतीत होता है। यह एक स्वाभाविक अलैंगिक जनन विधि है। • प्लेनेरिया में पुनरुद्भवन: यदि प्लेनेरिया किसी दुर्घटना या चोट के कारण दो या तीन प्रसव में कट जाता है, तो उसके शरीर की विशिष्ट पुनरुद्भवन संख्या (पुनर्योजी कोशिकाएं) तेजी से विभाजित कट भाग से पूर्ण नया शरीर बना देती हैं।

2. पुनरूद्भवन जनन का रूप क्या है? वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पुनरुद्भवन को सामान्य जनन नहीं माना जाता क्योंकि: (क) कोई भी जीव अपनी संतति पैदा करने के लिए अपने शरीर के कटने या अपवित्र होने की प्रतीक्षा नहीं करता। (ख) यह वास्तव में तरल पदार्थ के शरीर की परत और खोए हुए भाग को पुनः प्राप्त करने की एक विकासात्मक अनुकूलन क्षमता है।

उदाहरण 3
प्रश्न 3 (JAC 2020 - 3 अंक): माँ के शरीर में गर्भस्थ शिशु को पोषण किस प्रकार प्राप्त होता है? अपरा (प्लेसेंटा) की संरचना एवं दो प्रमुख कार्यों का वर्णन।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: माँ के शरीर में गर्भस्थ भ्रूण को संपूर्ण पोषण एक विशिष्ट प्रयोगशाला संरचना प्राप्त होती है जिसे अपरा (प्लेसेंटा) कहा जाता है।

1. संरचना: • यह एक तश्तरीनुमा (डिस्क के आकार का) स्फुरण है जो गर्भाधान के दरवाजे में धँसा रहता है। • भ्रूण की ओर के प्रयोगशाला में भारी संख्या में सूक्ष्म जैसे सूक्ष्म रंसांकूर (विली) होते हैं। • माता की ओर के साक्षियों में बड़े-बड़े रक्त कोटर (रक्त स्थान) होते हैं जो इन रंसांकुरों के चारों ओर से बने रहते हैं। यह विशाल सतही विज्ञापन प्रदान करता है।

2. दो प्रमुख कार्य:

  1. पोषक एवं ऑक्सीजन की आपूर्ति: माता के रुधिर से ग्लूकोज, अमीनो एसिड, खनिज लवण और ऑक्सीजन रंसाकुरों द्वारा विसरित गर्भपात की नाभि-रज्जु (नाम्बिलिकल कॉर्ड) के माध्यम से भ्रूण तक पहुंचाते हैं।
  2. उत्सर्जी मादक द्रव्य का निष्कासन: उन्नत भ्रूणह्रास द्वारा उत्पन्न विषाक्त पदार्थ पदार्थ (जैसी और $CO_2$) अपरा के माध्यम से ही माता के रुधिर में वापस विसर्जित हो जाते हैं, जिसमें माता का औषधि तंत्र समाप्त हो जाता है।
उदाहरण 4
प्रश्न 4 (JAC 2021 - 3 अंक): गर्भनिरोधन (गर्भनिरोधन) की विभिन्न विधियाँ कौन सी हैं? कॉन्डम के उपयोग से वाले विशाल लाभ को स्पष्ट होगा।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: 1. गर्भनिरोधन के प्रमुख चार उपाय:

  1. यांत्रिक अवरोधक विधियां: नर द्वारा कंडोम (कंडोम) या माडा द्वारा डायफ्राम या सर्वाइकल कैप का उपयोग, जिससे स्पाइसर और अंड का भौतिक संपर्क न हो सके।
  2. रसायनिक (हार्मोनल) विधियाँ: गर्भनिरोधक औषधि (ओरल पिल्स) का सेवन, जो हार्मोन का स्तर हार्मोन एंडोत्सर्ग (ओव्यूलेशन) को रोकता है।
  3. अंतःगर्भाशयी युक्तियाँ (आईयूडी):गर्भाशय में कॉपर-टी (कॉपर-टी) स्थापित करना, जो गर्भनिरोधक की निषेचन क्षमता को समाप्त करता है। 4।

2. के कॉनडम गेन लाभ: (के) अवांछित गर्भ से पूर्ण सुरक्षा: यह वीर्य को योनि में प्रवेश करने से मिलता है, जिसमें शामिल नहीं होता है। (ख) सुरक्षा सुरक्षा यौन संचारित्रिया (एसटीडी) से: अन्य किसी भी तरह के विपरीत, कंडोम फिजिकल द्रव्यों के पार्टनर-एड्स को प्रोमोट करता है, यह एच.आई.वी./एड्स (एचआईवी/एड्स), गोनो, सिफलिस और एसटीडी मास जैसे भयानक संचारी द्रव्यों के एड्स (एचआईवी/एड्स) से व्यक्ति की रक्षा करता है।

उदाहरण 5
प्रश्न 5 (JAC 2019 - 2 अंक): यदि कोई महिला कॉपर-टी का प्रयोग कर रही है, तो उसे यौन संचारित स्टोर (STDs) से उबरने में क्या सहायता मिलेगी? तर्क उत्तर सहित दें।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: नहीं, कॉपर-टी महिला को यौन संचारित स्टोर (एसटीडी) से बिल्कुल नहीं बचाओ।

तर्क:

  1. कॉपर-टी केवल एक अंतःगर्भाशयी युक्ति (आईयूडी) है जिसे गर्भाशय के अंदर स्थापित किया जाता है। इसका कार्य कॉपर आयन मुक्त निर्माताओं को निष्क्रिय करना और उद्यमियों को लाभ पहुंचाना है।
  2. यह धर्म के दौरान नर और मादा के उपदेशों एवं शारीरिक द्रव्यों के मध्य में कोई भौतिक अवरोध (शारीरिक बाधा) स्थापित नहीं करता है।
  3. मूल रूप से यदि पुरुष मित्र पीड़ित है, तो रोगाणु (जैसे एचआईवी वायरस या गोनोरिया के बैक्टीरिया) योनि और गर्भपात के संपर्क में आसानी से महिला के शरीर में प्रवेश कर जाएंगे। एसटीडी से सुरक्षा केवल मैकेनिकल ब्लॉक्स (जैसे कंडोम) से ही संभव है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह परागण (परागण) और निषेचन (निषेचन) दोनों एक ही प्रक्रिया हैं।

सही वैज्ञानिक तथ्य

परागण केवल परागकोश से परागकणों का वर्तिकाग्र तक पहुँचने की भौतिक प्रक्रिया है; जबकि निषेचन नर युग्मक और अंड कोशिका के वास्तविक जैविक संलयन से युग्मनज बनने की प्रक्रिया है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

मानव में निषेचन का स्थान गर्भाशय (गर्भाशय) लिख देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

निषेचन गर्भाधान में नहीं बल्कि अंडवाहिका (फैलोपियन ट्यूब / ओविडक्ट) के एम्पुला भाग में होता है; गर्भाधान में केवल निषेचित भ्रूण का गर्भपात (प्रत्यारोपण) और पोषण होता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

द्विखंडन (बाइनरी विखंडन) और विखंडन/खंडन (विखंडन) में होना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

द्विखंडन एककोशिकीय जीवों (अमीबा, पैरामीशियम) में कोशिका विभाजन है; जबकि खंडन सरल बहुकोशिकीय तंतुमय जीवों (जैसे स्पाइरोगायरा) का परिपक्व होकर टुकड़ों में टूटना है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

वेसेक्टॉमी और ट्यूबेक्टॉमी में लिंगों का अदल-बदल कर देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

याद रखें: वास डिफेरेंस (शुक्रवाहिका) पुरुषों में होता है \to पुरुष नसबंदी (पुरुष नसबंदी); फैलोपियन ट्यूब (अंडवाहिका) महिलाओं में होती है ट्यूबेक्टोमी (महिला अंडवाहिका)।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

ऐसा लगता है कि सभी गर्भनिरोधक विधियां एड्स (एचआईवी) से सुरक्षा प्रदान करती हैं।

सही वैज्ञानिक तथ्य

गर्भनिरोधक कैप्सूल, कॉपर-टी या स्थायी केवल इंजेक्शन रोकती हैं, वे एसटीडी से 0% सुरक्षा सेवाएं हैं। केवल सुरक्षा कंडोम (कंडोम) ही जोड़ों और एसटीडी दोनों से एक साथ देता है।

तिमाही में जनन: अलैंगिक और पादपलांगिक जनन चक्र (दोहरा निषेचन और प्रजनन मोड)

जीवों में जनन एवं दोहरा निषेचन (Reproduction & Double Fertilization Pathway) अलैंगिक जनन की विधियाँ (Asexual Modes) 1 द्विखंडन एवं बहुखंडन (Fission) अमीबा (अनियमित द्विखंडन) | प्लाज्मोडियम (पुटी में बहुखंडन) 2 मुकुलन एवं पुनरुद्भवन (Budding / Regen.) यीस्ट, हाइड्रा (मुकुल निर्माण) | प्लेनेरिया (कटे अंग से पूर्ण जीव) 3 खंडन एवं बीजाणु (Fragmentation / Spore) स्पाइरोगायरा (तंतु टूटना) | राइजोपस (बीजाणुधानी में बीजाणु) 4 कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation) • जड़: शकरकंद | तना: आलू (आँखें), अदरक • पत्ती: ब्रायोफिलम (पत्ती के खांचों में कलिकाएं) • लाभ: बीजहीन पौधे उगाना, तीव्र वृद्धि, 100% समानता पुष्पी पादप: दोहरा निषेचन (Double Fertilization) चरण 1: परागण (Pollination) परागकण वर्तिकाग्र (Stigma) पर चिपके \to परागनलिका निकली ▼ चरण 2: परागनलिका का प्रवेश (Tube Penetration) वर्तिका से होकर बीजांड के भ्रूणकोष में 2 नर युग्मक छोड़े ▼ (क) युग्मक संलयन नर युग्मक (n) + अंड कोशिका (n) = युग्मनज (2n) \to भ्रूण (ख) त्रिसंलयन द्वितीय नर युग्मक (n) + 2 ध्रुवीय केंद्रक (2n) = भ्रूणपोष (3n) निषेचन उपरांत रूपांतरण (Post-Fertilization) • बीजांड (Ovule) \to कठोर बीजावरण युक्त बीज (Seed) • अंडाशय (Ovary) \to पककर रसीला फल (Fruit)

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
जनन निजीकरण की अभिव्यक्ति और राजवंश की तटस्थता के लिए अनिवार्य है; डीएनए प्रतिकृति संस्थान का आधार है।
मुख्य बिंदु 2
डीएनए प्रतिकृति में वाली अपूर्णताएं (भिन्नताएं) पैदा होती हैं, जो पर्यावरण में विद्रूप के अनुभव की रक्षा करती हैं।
मुख्य बिंदु 3
अलैंगिक जनन में एकल जनक भाग लेता है; संतति आनुवंशिक रूप से जनक के क्लोन होती है।
मुख्य बिंदु 4
द्विखंडन (अमीबा), बहुखंडन (प्लाज्मोडियम), मुकुलन (यीस्ट, हाइड्रा), खंडन (स्पाइरोगायरा), और बीजाणु निर्माण (राइजोपस) मुख्य अलैंगिक विधियां हैं।
मुख्य बिंदु 5
कायिक प्रवर्धन द्वारा बिना बीज वाले पौधों (केला, गुलाब) को शीघ्रता से उगाया जाता है; ब्रायोफिलम की पत्ती से नया पौधा बनता है।
मुख्य बिंदु 6
पुष्प के चार चक्र हैं: बाह्यदल, दल, पुंकेसर (नर भाग - परागकण) और स्त्रीकेसर (मादा भाग - वर्तिकाग्र, वर्तिका, अंडाशय)।
मुख्य बिंदु 7
पुष्पी पौधों में दोहरा निषेचन होता है: युग्मक संलयन (2n युग्मनज) + त्रिसंलयन (3n भ्रूणपोष)। निषेचन बाद बीजांड बीज में तथा अंडाशय फल में बदलता है।
मुख्य बिंदु 8
मानव नर में वृषण वृषण कोष में रहकर शुक्राणु व टेस्टोस्टेरोन बनाते हैं; मादा में अंडाशय अंड व एस्ट्रोजन बनाते हैं।
मुख्य बिंदु 9
मानव में निषेचन अंडवाहिका (फैलोपियन ट्यूब) होता है; भ्रूण में अपरा (प्लेसेंटा) द्वारा पोषण व ऑक्सीजन प्राप्त होता है।
मुख्य बिंदु 10
गर्भनिरोधन की विधि में केवल एक ही बात शामिल है जो गर्भनिरोधन के साथ-साथ एसटीडी (एचआईवी/एड्स, सिफलिस) से भी बचाव करती है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
1. मलेरिया परजीवी प्लाज्मोडियम में किस प्रकार का विभाजन होता है और यह किस परिस्थिति में संपन्न होता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: एल्यूमीनियम में बहुखंडन (एकाधिक विखंडन) होता है; विद्रोह में इसके चारों ओर एक रक्षात्मक पुटी (सिस्ट) की परतें होती हैं, जो केंद्र के अंदर बार-बार विभाजित होती हैं, जो सैकड़ा संतति कोटा बनाती हैं।
2
2. अवरितबीजी कंपनी के सीईओ "ट्रिपल फ्यूजन" के ढांचे का निर्माण होता है और इसके आगंतुकों की संख्या क्या है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: त्रिसंलीन से प्राथमिक भ्रूणपोष (एंडोस्पर्म) का निर्माण होता है, जो उच्च स्तरीय भ्रूण को पोषण प्रदान करता है; इसका संग्रह संख्या त्रिगुणित (3n) है।
3
3. पुरुष में विश्ण उदर गुला के बाहर विश्न कोष (स्क्रोटम) में क्यों स्थित होते हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: क्योंकि शुक्राणु निर्माण (शुक्राणुजनन) के लिए शरीर के सामान्य आंतरिक तापमान (37°C) से 2 से 2.5°C कम तापमान की आवश्यकता होती है, जो वृषण कोष प्रदान करता है।
4
4. महिलाओं में अंड का निषेचन न होने की स्थिति में क्या शारीरिक घटना घटित होती है और क्यों?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: ऋतुस्राव (मासिक धर्म) की घटना होती है; क्योंकि निषेचन न पर गर्भ की तैयार मोती, स्प्रिनि रक्त वाहिका कलाकार की संरचना टूटनेकर रुधिर और श्लेष्मा के रूप में योनि से बाहर निकलती है।
5
5. पुरुष नसबंदी (नसबंदी) और महिला नसबंदी (ट्यूबेक्टॉमी) में किन विशिष्ट नल सर्जरी को अज्ञात या छोड़ा जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: शुक्रवाहिका (वास डिफेरेंस) में पुरुष निषेचन (वेसेक्टोमी) को असंबद्ध/बंधा जाता है; महिला नसबंदी (ट्यूबेक्टॉमी) में अंडवाहिका या फैलोपियन नलिका (फैलोपियन ट्यूब) को अनकहा/बांधा किया जाता है।
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कक्षा 10 Science & Technology (212) के सभी अध्याय

अध्याय 1: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में मापन (Measurement in Science & Tech) अध्याय 2: हमारे आस-पास के पदार्थ (Matter in Our Surroundings) अध्याय 3: परमाणु एवं अणु (Atom and Molecules) अध्याय 4: रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण (Chemical Reactions & Equations) अध्याय 5: परमाणु संरचना (Atomic Structure) अध्याय 6: तत्वों का आवर्त वर्गीकरण (Periodic Classification of Elements) अध्याय 7: रासायनिक आबंधन (Chemical Bonding) अध्याय 8: अम्ल, क्षारक और लवण (Acids, Bases and Salts) अध्याय 9: गति और उसका वर्णन (Motion and its Description) अध्याय 10: बल एवं गति (Force and Motion) अध्याय 11: गुरुत्वाकर्षण (Gravitation) अध्याय 12: ऊर्जा के स्रोत (Sources of Energy) अध्याय 13: कार्य एवं ऊर्जा (Work and Energy) अध्याय 14: ऊष्मीय ऊर्जा (Thermal Energy) अध्याय 15: प्रकाश ऊर्जा (Light Energy) अध्याय 16: विद्युत ऊर्जा (Electrical Energy) अध्याय 17: विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव (Magnetic Effects of Current) अध्याय 18: ध्वनि एवं संचार (Sound and Communication) अध्याय 19: सजीवों का वर्गीकरण (Classification of Living Organisms) अध्याय 20: पृथ्वी पर जीवन का इतिहास (History of Life on Earth) अध्याय 21: जीवन की इकाइयाँ: कोशिका एवं ऊतक (Cell and Tissues) अध्याय 22: जैव प्रक्रम-1: पोषण, वहन, श्वसन एवं उत्सर्जन (Life Processes - 1) अध्याय 23: जैव प्रक्रम-2: नियंत्रण एवं समन्वय (Control and Coordination) अध्याय 24: जैव प्रक्रम-3: जनन (Reproduction) अध्याय 25: आनुवंशिकता (Heredity) अध्याय 26: वायु एवं जल (Air and Water) अध्याय 27: धातु और अधातु (Metals and Non-metals) अध्याय 28: कार्बन और उसके यौगिक (Carbon and Its Compounds) अध्याय 29: प्राकृतिक पर्यावरण (Natural Environment) अध्याय 30: पर्यावरण पर मानवीय प्रभाव (Human Impact on Environment) अध्याय 31: खाद्य उत्पादन (Food Production) अध्याय 32: स्वास्थ्य एवं स्वच्छता (Health and Hygiene)

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