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NIOS • कक्षा X • Science & Technology (212) • अध्याय 29
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

प्राकृतिक पर्यावरण (Natural Environment)

प्राकृतिक पर्यावरण के लिए व्यापक अध्ययन सामग्री और अध्याय नोट्स, एनआईओएस माध्यमिक (कक्षा 10) विज्ञान और प्रौद्योगिकी (212) के लिए व्यवस्थित रूप से तैयार किया गया। नवीनतम नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग पाठ्यक्रम के साथ संरेखित, यह गाइड मुख्य सैद्धांतिक अवधारणाओं, प्रयोगशाला टिप्पणियों, प्रयोगात्मक तरीकों, ट्यूटर मार्क्ड असाइनमेंट (टीएमए) दिशानिर्देशों और सार्वजनिक परीक्षा में निपुणता पर जोर देती है।

🦅 क्या आपने कभी सोचा है: खेतों में छिड़का गया कीटनाशक हज़ारों मील दूर उड़ने वाले बाज और आपके पीने के दूध में कैसे पहुँच गया?

जरा सोचिए: किसी किसान ने अपनी फसल को कीड़ों से बचाने के लिए उस पर केवल एक चुटकी रासायनिक कीटनाशक (जैसे डीडीटी) छिड़का। बारिश हुई, वह ड्रग ढोल कर पास के तालाब में चला गया। तालाब में वैज्ञानिकों ने उस दवा के छोटी मछलियों को खा लिया, छोटी मछलियों को बड़ी मछली ने खा लिया, और उस बड़ी मछली को एक बाज या बगुले ने खा लिया।

अब विज्ञान का सबसे पवित्र सच: तालाब के पानी में जो रासायनिक मात्रा 0.000003 भाग प्रति मिलियन (पीपीएम) थी, वह बाज के शरीर तक पहुँचते-पहुँचते 25 पीपीएम हो गया—यानी उसका सान्द्र लगभग एक करोड़ गुना बढ़ गया! इस भयानक ज़हर ने बाजों के अंडों के छिलकों को इतना ख़राब कर दिया कि अंडा माता के बैठने से पहले ही फ़ुट हो गए और पूरी दुनिया में बाजों की आर्किटेक्चरल मशीनरी की आखिरी परत चढ़ गई!

और हमारे सिर के ऊपर 25 किमी की अलास्का पर गैस की एक अदृश्य, डोर सीरी छत तनी है—ओजोन पार्ट! अगर वह न हो, तो सूर्य की पराबैंगनी किरणें 10 मिनट में हमारी त्वचा को कैंसर कर देगी। आओ, प्रकृति के इस अद्भुत, आकर्षक और अनोखे में जुड़े हुए ताने-बाने को स्वीकारें!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

इस अध्याय का अध्ययन आपके लिए क्यों आवश्यक है?

  1. बोर्ड परीक्षा में शत-प्रतिशत प्रश्न: एनआईओएस कक्षा 10वीं विज्ञान परीक्षा में "10% ऊर्जा प्रवाह का नियम", "जीव आवर्धन की परिभाषा एवं उदाहरण", "ओजोन परत का निर्माण एवं अवशोषण के उपाय कारण (सीएफसी)", "अपघटकों की क्षमता में भूमिका", और "कचरा प्रबंधन के" पर 4 से 6 अंक के प्रश्न आते हैं।
  2. पर्यावरणीय निजी एवं पर्यावरण अनुसंधान: यूपीएससी, एसएससी, एनईईटी और राज्य स्तरीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों के पर्यावरण एवं पर्यावरण (पारिस्थितिकी और पर्यावरण) खंड का यह सबसे दर्शनीय अध्याय है।
  3. पृथ्वी के संरक्षण में व्यक्तिगत योगदान: प्लास्टिक का न्यूनीकरण, अपशिष्ट का पृथक्करण (गीला और सूखा कचरा), और प्रकृति के संतुलन को बनाए रखा गया अवशेष का अवशेष।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • प्रकाश संश्लेषण की क्रियाविधि (पौधों द्वारा भोजन निर्माण)।
  • सजीवों में पोषण के विभिन्न प्रकार (स्वपोषी, विषमपोषी, मृतजीवी)।
  • वायुमंडल की विभिन्न परतें (क्षोभमंडल, समतापमंडल)।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • पारितंत्र के जैविक घटकों (उत्पादक, उपभोक्ता, अपघटक) और अजैविक घटकों की परस्पर निर्भरता स्पष्ट कर सकेंगे।
  • आहार श्रृंखला और आहार जाल का रेखाचित्र बनाकर विभिन्न पोषण स्तरों की पहचान कर सकेंगे।
  • लिंडमैन के 10% ऊर्जा नियम का प्रयोग कर किसी भी आहार श्रृंखला में विभिन्न स्तरों पर उपलब्ध ऊर्जा की सटीक गणना कर सकेंगे।
  • जैव आवर्धन (बायोमैग्निफिकेशन) की क्रियाविधि और मानव स्वास्थ्य पर इसके घातक प्रभावों का विश्लेषण कर सकेंगे।
  • ओजोन परत के निर्माण ($O_2 + O \to O_3$), सीएफसी द्वारा इसके क्षरण और मॉन्ट्रियल फोटो के महत्वपूर्ण विवरण कर निर्धारण।
  • जैव-निम्नीकरणीय और अजैव-निम्नीकरणीय कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की विधियों का प्रस्ताव कर सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. पारितंत्र: घटक, उत्पादक, उपभोक्त...
2 2. आहार श्रृंखला, आहार जाल एवं 10%...
3 3. जैव आवर्धन की परिघटना (जैविक आवर...
4 4. ओजोन परत एवं कमी (Ozone Layer &...
5 5. कचरा प्रबंधन: जैव-निम्नीकरणीय बन...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. पारितंत्र: घटक, उत्पादक, उपभोक्ता एवं अपघटक

किसी क्षेत्र के सभी जीव तथा पर्यावरण के अजीव कारक संयुक्त रूप से एक परितंत्र (पारिस्थितिकी तंत्र) का निर्माण करते हैं।

(क) पारितोषिक के दो मुख्य घटक:

  1. अजैविक घटक (अजैविक घटक): भौतिक एवं रासायनिक वातावरण—जैसे तापमान, वर्षा, प्रकाश, वायु, जल, विखंडन एवं खनिज लवण।
  2. जैविक घटक (जैविक अवयव): सभी सजीव जीव, समग्र पोषण विधि के आधार पर तीन गुणों में बंटा हुआ है:
    • निर्माता (निर्माता): वे सभी हरे उपचार और नील-हरित छाया (साइनोबैक्टीरिया) द्वारा जो पर्णहरित और सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में प्रकाश उपकरण अकार्बनिक सहायक ($CO_2$ और जल) से प्रचलित भोज्य मसाला धूम मचाते हैं। स्वपोषी कहते हैं। वे प्रवर्तक में सौर ऊर्जा का एकमात्र प्राथमिक द्वार हैं।
    • उपभोक्ता (उपभोक्ता): वे जीव जो अपने पोषण के लिए प्रत्यक्ष या संरक्षण के रूप में उत्पादकों पर अनियंत्रित होते हैं (विषमपोशी):
      • प्राथमिक उपभोक्ता (शाकाहारी/शाकाहारी): सीधे तौर पर खाते हैं (उदा. गाय, हिरण, टिड्डा, खरगोश)।
      • द्वितीयक उपभोक्ता (छोटे मांसाहारी / मांसाहारी): शाकाहारियों को शिकार करते हैं (उदा. भेड़, फॉक्स, पक्षी)।
      • तृतीयक / शीर्ष उपयोगकर्ता (शीर्ष मांसाहारी): अन्य मांसाहारियों को खाते हैं (उदा. शेर, बाघ, बाज, मनुष्य)।
      • परजीवी (परजीवी): अन्य मोटे शरीर पर या भीतरी स्तर पर पोषण लेते हैं (उदा. अमरबेल, जूँ, फ़िटकृमि)।
    • अपघटक (डीकंपोजर):जीवाणु (बैक्टीरिया) और कवक (कवक) जैसे बैक्टीरिया जो मृत बैक्टीरिया के शरीर और उत्सर्जी पदार्थों का अपघटन करते हैं।
परितंत्र में अपघटकों की 3 अनिवार्य भूमिकाएँ (जेएसी बोर्ड 3 अंक):
1. प्राकृतिक सफाईकर्मी (प्राकृतिक मैला ढोने वाले): ये मृत पैडपों और जंतुओं के यथार्थ को पर्यावरण से जोड़कर दुर्गंध, गंदगी और महामारी से मुक्त रखते हैं।
2. पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण (पोषक तत्त्व पुनर्चक्रण): ये जटिल यौगिक पदार्थ को सरल अकार्बनिक पदार्थ (नाइट्रोजन, नाइट्रोजन, कार्बन) में मायोनियम पुनःस्थापन और वायु में मिलते हैं, जिससे फिर से खनिज प्राप्त हो सकते हैं।
3. मृदा की उर्वराता वृद्धि: अपघटन के प्लास्टर मायरस का निर्माण होता है जो भूमि की क्षमता को बनाए रखता है।

2. आहार श्रृंखला, आहार जाल एवं 10% ऊर्जा नियम

(क) आहार श्रृंखला (Food Chain) एवं पोषण स्तर (Trophic Levels)

जीवों की एक ऐसी श्रृंखला जिसमें प्रत्येक जीव अपने से नीचे वाले जीव को भोजन के रूप में खाता है और स्वयं अगले जीव का भोजन बन जाता है, आहार श्रृंखला कहलाती है।

आहार श्रृंखला के प्रत्येक चरण या स्तर को पोषण स्तर (Trophic Level) कहते हैं:

पोषण स्तर जीवों की श्रेणी विशिष्ट उदाहरण
प्रथम पोषण स्तर ($T_1$) उत्पादक (स्वपोषी) घास, पेड़-पौधे, पादप प्लवक (Phytoplankton)
द्वितीय पोषण स्तर ($T_2$) प्राथमिक उपभोक्ता (शाकाहारी) टिड्डा, हिरण, खरगोश, प्राणि प्लवक (Zooplankton)
तृतीय पोषण स्तर ($T_3$) द्वितीयक उपभोक्ता (मांसाहारी) मेंढक, लोमड़ी, छोटी मछली
चतुर्थ पोषण स्तर ($T_4$) तृतीयक / शीर्ष उपभोक्ता साँप, बाज, शेर, मनुष्य, बड़ी मछली

(ख) लिंडमैन का 10% ऊर्जा नियम (10% Law of Energy Transfer)

सन् 1942 में रेमंड लिंडमैन ने पारितंत्र में ऊर्जा प्रवाह का 10% नियम प्रतिपादित किया:

नियम का कथन (अत्यंत महत्वपूर्ण 3 अंक):
"एक पोषण स्तर से दूसरे पोषण स्तर में केवल 10% ऊर्जा ही स्थानांतरित होती है। शेष 90% ऊर्जा जीव द्वारा जैविक क्रियाओं (श्वसन, पाचन, वृद्धि, गति) और ऊष्मा के रूप में पर्यावरण में लुप्त हो जाती है।"
  • सौर ऊर्जा का अवशोषण: हरे पौधे अपने ऊपर पड़ने वाले कुल सौर प्रकाश का केवल लगभग 1% भाग ही खाद्य ऊर्जा में रूपांतरित कर पाते हैं।
  • आहार श्रृंखला 3 से 4 चरणों की ही क्यों होती है? (बोर्ड 2 अंक):
    चूँकि प्रत्येक स्तर पर 90% ऊर्जा नष्ट हो जाती है, अतः 3-4 पोषण स्तरों के बाद बची हुई ऊर्जा की मात्रा इतनी सूक्ष्म हो जाती है कि वह किसी अगले जीव के जीवन निर्वाह के लिए अपर्याप्त होती है। इसीलिए आहार श्रृंखलाएं सामान्यतः 4 चरणों से लंबी नहीं होतीं।
  • ऊर्जा प्रवाह की एकदिशिक प्रकृति (Unidirectional Flow):
    पारितंत्र में ऊर्जा का प्रवाह सदैव एक ही दिशा में होता है—सूर्य $\to$ उत्पादक $\to$ शाकाहारी $\to$ मांसाहारी। उपभोक्ता द्वारा ग्रहण की गई ऊर्जा कभी वापस उत्पादक या सूर्य को नहीं लौट सकती।

(ग) आहार जाल (Food Web)

प्रकृति में आहार श्रृंखलाएं कभी पृथक और सीधी रेखा में नहीं होतीं। एक ही जीव कई विभिन्न प्रकार के जीवों को खा सकता है और स्वयं कई जीवों द्वारा खाया जा सकता है। इस प्रकार अनेक आहार श्रृंखलाएं आपस में जुड़कर एक जटिल जाल जैसी संरचना बनाती हैं, जिसे आहार जाल (Food Web) कहते हैं। आहार जाल पारितंत्र को स्थिरता और संतुलन प्रदान करता है।

3. जैव आवर्धन की परिघटना (जैविक आवर्धन)

(क) जैव आवर्धन (जैवआवर्धन) की परिभाषा एवं क्रियाविधि

फ़सलों को प्रशिक्षण और जहाज़ों से बरामदे के लिए भारी मात्रा में कार्यशालाओं (जैसे DDT, BHC) और स्लीपनाशियों का उपयोग किया जाता है। ये रसायन अजीव-निम्नीकरणीय (गैर-जैव-निम्नीकरणीय) होते हैं, यानि कि संभावित विखंडन नहीं किया जा सकता।

जैव आवर्धन की परिभाषा (JAC बोर्ड 3 अंक):
"आहार श्रृंखला के माध्यम से अजीव-निम्नचरित्रीय ओझा (कीटनाकों, भारी अजब-गजब) की एकाग्रता का हर उत्तर श्रेणी पोषण स्तर पर तेजी से बढ़ता जा रहा है जैव आवर्धन समूह है।"

(ख) जलीय आहार श्रृंखला में जैव आवर्धन का क्लासिक उदाहरण (डीडीटी सांद्रण):

  1. जल (जल): $0.000003\text{ ppm}$ (अत्यंत सूक्ष्म सांद्रता).
  2. पादप प्लवक (फाइटोप्लांकटन - उत्पादक): $0.04\text{ ppm}$ (रसायन का अवशोषण).
  3. छोटी मछलियाँ (छोटी मछली - प्राथमिक उपभोक्ता): $0.5\text{ ppm}$ (हजारों प्लवकों को खाने से लेकर सांद्रण तक)।
  4. बड़ी मछली (बड़ी मछली - द्वितीयक उपयोगकर्ता): $2.0\text{ ppm}$.
  5. मत्स्यभक्षी पक्षी / मनुष्य (शीर्ष उपभोक्ता): $25.0\text{ ppm}$ (लगभग 1 करोड़ गुना वृद्धि!).

(जी) मनुष्य में सर्वाधिक एकाग्रता क्यों पायी जाती है?

चूंकि मनुष्य किसी भी आहार श्रृंखला के शीर्ष (शीर्ष) पोषण स्तर पर स्थित है, वास्तव में इन तृष्णा अजीव-निम्नीकरणीय सिद्धांत की सर्वोच्च मानव शरीर (वासा छात्र, जीव, मस्तिष्क और माता के दूध के) में ही संग्रहीत है। इसके कारण कैंसर, तंत्रिका तंत्र विकार, गुर्दे की विफलता और विकृतियां उत्पन्न होती हैं।

4. ओजोन परत एवं कमी (Ozone Layer & Depletion)

ओजोन ($O_3$) ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से मिलकर एक परमाणु बनता है। क्षोभमंडल में ओजोन एक घातक विष है, क्षोभमंडल में 3§ समताप मंडल (स्ट्रैटोस्फियर - 15 से 30 किमी .)

(क) ओजोन का निर्माण (Farmation of Ozone):

सूर्य से आने वाली उच्च ऊर्जा वाली पराबैंगनी (यूवी) विकिरण विकिरण ऑक्सीजन ($O_2$) को स्वतंत्र ऑक्सीजन परमाणुओं में विखंडित कर बिंदु हैं:

$$O_2 \xrightarrow{\text{UV विकिरण}} O + O$$

यह स्वतंत्र और अत्यधिक क्रियाशील ऑक्सीजन परमाणु ऑक्सीजन ऑक्सीजन से संयुक्त तारा ओजोन का निर्माण करता है:

$$O + O_2 \to O_3 \quad (\text{ओजोन})$$

(ख) ओजोन परत का जैविक महत्व:

ओजोन परत सूर्य से आने वाली किरण पराबैंगनी किरण (यूवी-बी विकिरण) को अवशोषित कर लगाती है और उन्हें पृथ्वी की सतह तक सतह से रोकती है। यदि ये किरणें पृथ्वी तक पहुंचें, तो त्वचा कैंसर (त्वचा कैंसर), आंखों में मोतियाबिंद (मोतियाबिंद), रोग दृष्टि क्षमता में कमी और

में प्रकाश साक्ष्य की कमी होगी।

(जी) ओजोन क्षरण का मुख्य कारण एवं मॉन्ट्रियल रिकार्ड:

  • सन् 1980 के दशक में अंटार्कटिका के ऊपर ओजोन परत की भारी गिरावट का आकलन किया गया, जिसमें ओजोन छिद्र (ओजोन छिद्र) बताया गया था।
  • मुख्य कारण: मानव-निर्मित संश्लेषित रसायन—क्लोरोफ्लोरोकार्बन (सीएफसी)। सीएफसी का उपयोग करने वाले उपकरण (शीतलन), एयर एनीइक और अग्निशामक यंत्रों का व्यापक रूप से उपयोग किया गया था। सीएफसी से लॉन्च किए गए परमाणु ओजोन प्लांट को तेजी से नष्ट किया जा सकता है।
  • मॉन्ट्रियल रॉकेट (1987): संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) के तहत विश्व के देशों ने 1987 में मॉन्ट्रियल (कनाडा) में एक ऐतिहासिक संधि पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत सीएफसी के उत्पादन स्तर को 1986 में ही रेफ्रिजरेटर (प्रतिबंधित) पर रखा गया और अब सभी सीएफसी-मुक्त गैसों में शामिल हो गए। (एचएफसी) का उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है।

5. कचरा प्रबंधन: जैव-निम्नीकरणीय बनाम अजैव-निम्नीकरणीय अपशिष्ट

हमारे लोकतंत्र में बदलाव और उपयोग करके रचनात्मकता (उपयोग करो और फेंको) की प्रवृत्ति के कारण प्रतिदिन टनों कचरा पैदा हो रहा है।

(क) अपशिष्टों के दो प्रकार:

तुलना का बिंदु जैव-निम्नीकरणीय (बायोडिग्रेडेबल) अजीव-निम्नीकरणीय (गैर-जैवनिम्नीकरणीय)
परिभाषा वे पदार्थ जो कार्बनिक पदार्थ (कीटनाशक जीव) आसानी से सरल पदार्थों में शामिल हो जाते हैं। वे रासायनिक रासायनिक कार्यक्रमों द्वारा प्राकृतिक रूप से अपघटन नहीं होता।
पर्यावरण पर प्रभाव पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाते; पर्यावरण में सैकड़ों वर्षों तक बने रहते हैं, मलिनकिरण, जल और वायु को जोड़ते हैं और नालों को अवरुद्ध करते हैं।
उदाहरण सब्जियों और फलों के टुकड़े, कागज, सूती कपड़ा, गोबर, लकड़ी, सूक्ष्मजीव। प्लास्टिक, पॉलीथिन थैलियाँ, धातु के नवीन, कांच, डीडीटी, प्लास्टिक।

(ख) कचरा निस्तारण की वैज्ञानिक विधियां (अपशिष्ट निपटान विधियां):

  1. कचरे का पृथक्करण (स्रोत पर पृथक्करण): अजीब डंक (हरा डिब्बा - जैव-निम्नीकरण) और स्कीच चिप्स (नीला डिब्बा - पुनर्चक्रण प्लास्टिक पात्र, कांच) को घर पर ही अलग-अलग एक साथ करना।
  2. खाद बनाना (खाद बनाना): जैव-निम्नीकरणीय गुड़ (सब्जी के छिलके, मित्र) को मिलाकर उत्कृष्ट प्राकृतिक जैविक खाद और वर्मीकम्पोस्ट तैयार करना।
  3. पुनर्चक्रन (पुनर्चक्रण): प्लास्टिक, कागज और कांच को मसाले में पुनः आरंभ करके नई उपयोगी सामग्री बनाना।
  4. भस्मीकरण (भस्मीकरण): जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट (बायोमेडिकल अपशिष्ट) को विशेष भट्टियों में $1000^\circ\text{C}$ से अधिक तापमान पर भस्म राख में भस्म।
  5. बायोगेसिस प्लांट (बायोगैस प्लांट): गोबर और जैविक उत्पादों से स्मोकरिमोट बायोगैस (मीथेन) जैविक और समृद्ध खाद प्राप्त करना।
कुल्हड़ (मिट्टी के कप) बनाम प्लास्टिक प्लास्टिक कप (रेलवे का अनुभव):
पहले प्लास्टिक के कपों का उपयोग होता था जो अजीव-निम्नीकरणीय कचरा और नालों में प्लास्टीक पैदा करते थे। फिर मिट्टी के कुल्हड़ों का विकल्प लाया गया, लाखों कुल्हड़ों के निर्माण से वैज्ञानिकों की ऊपरी मिट्टी नष्ट हो गई। अंततः पुनर्चक्रान योग्य कलाकृति पेपर के कप (पेपर कप) पर्यावरण की दृष्टि से सबसे उपयुक्त समाधान माना गया।

महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र, अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

लिंडमैन का 10% ऊर्जा नियम
E_{n+1} = 0.10 × E_n (अगले स्तर को केवल 10% ऊर्जा मिलती है)
सौर ऊर्जा से पौधों द्वारा अवशोषण
खाद्य ऊर्जा ≈ 1\% of Total Solar Energy falling on leaves
ओजोन निर्माण समीकरण 1 (विखंडन)
O_2 →{पराबैंगनी किरणें (UV)} O + O (मुक्त ऑक्सीजन परमाणु)
ओजोन निर्माण समीकरण 2 (संलयन)
O_2 + O → O_3 (ओजोन अणु)
जैव आवर्धन संबंध
विषाक्त रसायन सांद्रता: T_1 < T_2 < T_3 < T_4 (शीर्ष पर अधिकतम)
ऊर्जा प्रवाह की दिशा
सूर्य → उत्पादक → शाकाहारी → मांसाहारी (सदैव एकदिशिक)
मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल वर्ष
1987 (UNEP - CFC उत्पादन फ्रीज संधि)

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
प्रश्न 1 (जेएसी 2023 - 5 अंक): किसी भी तरह से लिंडमैन के 10% ऊर्जा नियमों को समझाया गया। यदि किसी आहार श्रृंखला के उत्पादक स्तर (घास) पर 20,000 जूल सौर ऊर्जा एकत्रित खाद्य ऊर्जा में कमी है, तो तीसरे पोषण स्तर (मेंढक) को कितनी ऊर्जा उपलब्ध होगी? गणना दर्शन।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

हल: 1. लिंडमैन के 10% नियम का सिद्धांत: एक पोषण स्तर से पोषण स्तर तक केवल 10% ऊर्जा की खपत होती है, जबकि 90% ऊर्जा श्वसन, गति और ऊर्जा के रूप में खर्च होती है।

2. आहार श्रृंखला के स्तर:

$$\text{घास (उत्पादक, } T_1) \to \text{टिड्डा (शाकाहारी, } T_2) \to \text{मेंढक (मांसाहारी, } T_3)$$

3. ऊर्जा की गणना: • प्रथम पोषण स्तर ($T_1$ - घास):

$$E_1 = 20,000\text{ J}$$

• दिव्य पोषण स्तर ($T_2$ - टिड्डा):

$$E_2 = 10\% \text{ of } 20,000\text{ J} = \frac{10}{100} \times 20,000 = 2,000\text{ J}$$

• तृतीय पोषण स्तर ($T_3$ - आवृत्ति):

$$E_3 = 10\% \text{ of } 2,000\text{ J} = \frac{10}{100} \times 2,000 = \mathbf{200\text{ J}}$$

उत्तर: तीसरा पोषण स्तर (मेंढक) को केवल 200 जूल ऊर्जा प्राप्त होगी।

उदाहरण 2
प्रश्न 2 (जेएसी 2022 - 3 अंक): जैव आवर्धन (जैविक आवर्धन) क्या है? क्या यह पासपोर्ट के अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग होगा? मनुष्य के संदर्भ में इसका क्या प्रभाव है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: 1. जैव आवर्धन की परिभाषा: आहार शृंखला के माध्यम से अजैव-निम्नीकरण पैमाइश पैमाइश (जैसे कि कॉमर्सियल डीडीटी, सीसा, पारा) की एकाग्रता का प्रत्येक उत्तर श्रेणी स्तर पर पोषण पर धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो रही है जैव आवर्धन के पास है।

2. विभिन्न परावर्तन: हाँ, यह पारितंत्र के भिन्न-भिन्न पर निश्चित रूप से भिन्न-भिन्न होगा। उत्पादक स्तर ($T_1$) पर इसकी सांद्रता न्यूनतम होगी और जैसे-जैसे हम आहार श्रृंखला में ऊपर बढ़ रहे हैं, प्रत्येक स्तर पर इसकी सांद्रता कई गुना गुणा हो जाती है।

3. मनुष्य पर प्रभाव: संतृप्त मानव आहार श्रृंखला के शीर्ष पोषण स्तर पर सर्वाहारी जीव स्थित है, मूल रूप से इनमें से एक पुरावशेष मानव शरीर में अधिकतम संतृप्त मानव शरीर में ही जमा होता है। इससे तंत्रिका तंत्र संबंधी विकार, लिवर क्षति, मधुमेह रोगी, कैंसर और भ्रूण में असामान्य विकार उत्पन्न होते हैं।

उदाहरण 3
प्रश्न 3 (JAC 2021 - 3 अंक): ओजोन भाग क्या है और यह हमारे लिए क्यों आवश्यक है? ओजोन परत के क्षारण के लिए मुख्य रूप से कौन-सा रसायन शास्त्र है और इसके संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर क्या कदम उठाया गया है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: 1. ओजोन परत एवं अनिवार्यता: ओजोन ($O_3$) समताप मंडल में स्थित तीन ऑक्सीजन परमाणुओं से बनी गैस की एक उत्पत्ति होती है। यह सूर्य से आने वाली लालची पराबैंगनी (यूवी) विकिरणों को अवशोषित करके उन्हें पृथ्वी तक से रोकती है। यदि यह मौजूद नहीं है, तो पृथ्वी पर यूवी किरणें त्वचा कैंसर, मोतियाबिंद, प्रतिरक्षा तंत्र की विफलता का कारण बनेंगी।

2. उत्तर प्रदेश के लिए: ओजोन किरण के लिए मुख्य रूप से क्लोरोफ्लोरोकार्बन (सीएफसी) को जिम्मेदार ठहराया जाता है, अन्य उपयोगी प्रशिक्षकों, एयर एसाइनडों और एरोसोल टायर में शीतलक के रूप में काम किया गया था।

3. अंतर्राष्ट्रीयकदम: सन् 1987 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) के तहत 'मॉन्ट्रियल पर्यावरण कार्यक्रम' के तहत समझौता किया गया, जिसके तहत वैश्विक स्तर पर सीएफसी के उत्पादन और उपयोग को रेफ्रीजरेटर बनाया गया और अन्य स्थानों पर पर्यावरण-अनुकूल पर्यावरण (एचएफसी) का उपयोग अनिवार्य कर दिया गया।

उदाहरण 4
प्रश्न 4 (जेएसी 2020 - 3 अंक): यदि हम एक पोषण स्तर के सभी देशों को समाप्त कर देते हैं (मार्च 2020), तो परमिट पर क्या प्रभाव पड़ेगा? हिरन और बाघ के उदाहरण से स्पष्ट।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: 1. पारितंत्र पर प्रभाव: यदि किसी पोषण स्तर के सभी जीवों को समाप्त कर दिया जाए, तो आहार श्रृंखला टूट जाएगी और पूरे पारितंत्र का पारिस्थितिकीय संतुलन पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगा: (क) निचले पोषण स्तर पर प्रभाव: उस स्तर से ठीक नीचे वाले जीवों को खाने वाला कोई नहीं रहेगा, जिससे उनकी संख्या अनियंत्रित रूप से बढ़ जाएगी। (ख) ऊपरी पोषण स्तर पर प्रभाव: उस स्तर से ऊपर वाले जीवों को भोजन नहीं मिलेगा, जिससे वे भूख से मरने लगेंगे अथवा पलायन कर जाएंगे।

2. जंगल के उदाहरण से स्पष्टीकरण: यदि किसी जंगल से सभी हिरणों (शाकाहारियों) को मार दिया जाए, तो: • घास और वनस्पतियों को चरने वाला कोई नहीं रहेगा, जिससे जंगल में अवांछित खरपतवार और घास का अत्यधिक फैलाव हो जाएगा। • भोजन के अभाव में बाघ और शेर (मांसाहारी) भूखे मरने लगेंगे और भोजन की तलाश में मानव बस्तियों पर हमला करने लगेंगे, जिससे पूरी खाद्य श्रृंखला नष्ट हो जाएगी।

उदाहरण 5
प्रश्न 5 (JAC 2019 - 3 अंक): कचरा प्रबंधन की किन्हीं तीन आधुनिक और वैज्ञानिक वैज्ञानिकों का संक्षिप्त विवरण। प्लास्टिक की जगह कागज के कपों का उपयोग सबसे अच्छा क्यों माना जाता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: 1. कचरा प्रबंधन की तीन वैज्ञानिक विधियाँ:

  1. स्रोत पर पृथक्करण (पृथक्करण): नारियल (जैव-निम्नीकरण) और चिप्स (अजीव-निम्नीकरण) को घर पर ही अलग-अलग हरे और नीले डिब्बों में एक साथ करना।
  2. जैविक खाद निर्माण (कम्पोस्टिंग):रसोई के जैविक मंडल (सब्जी के गूदे, जूठन) को पूरी तरह से मिलाकर उत्कृष्ट प्राकृतिक खाद बनाना।
  3. पुनर्चक्रण (पुनर्चक्रण):पुराने कागज, प्लास्टिक और धातु के बर्तनों को प्रसंस्कृत करके नई सामग्री बनाना।

2. कागज के कप प्लास्टिक से बेहतर क्यों हैं? (क) प्लास्टिक के कप अजीव-निम्नीकरणीय (गैर-बायोडिग्रेडेबल) होते हैं, जो सैकड़ों साल तक नालियों को जाम करते हैं और जलने पर थोक डाइऑक्सिन गैसें निकलती हैं। (ख) इसके विपरीत, कागज के कप जीव-निम्नीकरण होते हैं, जो मिट्टी में कुछ ही प्राकृतिक रूप से लागू हो सकते हैं, पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचता और आसानी से पुनर्जन्म भी हो जाता है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

ओजोन (O3) और ऑक्सीजन (O2) के रासायनिक सूत्र में भ्रमित होना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

प्राणवायु ऑक्सीजन दो परमाणुओं (O2) से बनती है; जबकि ओजोन तीन परमाणुओं (O3) से बनती है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

10% नियम में पौधों द्वारा सूर्य के प्रकाश का 10% अवशोषण लिख देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

पौधे कुल सूर्य के प्रकाश का केवल लगभग 1% ही अवशोषित कर भोजन बनाते हैं; 10% नियम एक पोषण स्तर से अगले पोषण स्तर तक स्थानांतरण पर लागू होता है!

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

जैव आवर्धन में रसायन की सांद्रता को ऊपर घटती हुई दिखाना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

जैव आवर्धन में सांद्रता प्रत्येक उच्च पोषण स्तर पर बढ़ती है; शीर्ष उपभोक्ता (मनुष्य) में सांद्रता सर्वाधिक होती है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह सोचना कि ओजोन परत का क्षरण ग्लोबल वार्मिंग (ग्रीनहाउस प्रभाव) का मूल कारण है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

ओजोन किरण यूवी किरण को प्रतिबंध से संबंधित है (सीएफसी द्वारा); ग्लोबल ग्लोबल CO2 और मीथेन द्वारा अवशोषक किरण (ऊस्मा) पर प्रतिबंध से संबंधित है। दोनों अलग-अलग परीघटनाएं हैं!

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

विद्युत् में ऊर्जा के प्रवाह को चक्रीय (चक्रीय) बताना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

खनिज/पोषक तत्वों का चक्र चक्र होता है; सौर ऊर्जा का प्रवाह सदैव एकदिशिक (यूनिडायरेक्शनल - अप्रत्यक्ष) होता है।

पारितंत्र में ऊर्जा प्रवाह (10% नियम), ओजोन निर्माण एवं जैव आवर्धन चार्ट

हमारा पर्यावरण: 10% ऊर्जा नियम, आहार श्रृंखला एवं ओजोन परत (Ecosystem & Ozone) 10% ऊर्जा प्रवाह पिरामिड (Lindeman's Rule) T4: बाज / मनुष्य 10 J ऊर्जा T3: मेंढक / छोटी मछली (मांसाहारी) 100 J ऊर्जा (10%) T2: टिड्डा / हिरण (शाकाहारी उपभोक्ता) 1,000 J ऊर्जा (10%) T1: हरे पौधे / घास (प्राथमिक उत्पादक) 10,000 J संचित खाद्य ऊर्जा सौर ऊर्जा इनपुट: 10,00,000 J सूर्य प्रकाश • पौधे केवल 1% सौर ऊर्जा ग्रहण करते हैं (10,000 J) • प्रत्येक स्तर पर 90% ऊर्जा उपापचय व ऊष्मा में लुप्त होती है ओजोन परत एवं जैव आवर्धन ओजोन परत का निर्माण (समताप मंडल): O₂ —(UV किरणें)—> O + O O + O₂ —> O₃ (ओजोन सुरक्षा ढाल) • UV किरणों से रक्षा करती है (त्वचा कैंसर, मोतियाबिंद से बचाव) • क्षरण का कारण: CFCs (रेफ्रिजरेटर/AC) | 1987 मॉन्ट्रियल संधि जैव आवर्धन (Biological Magnification): अजैव-निम्नीकरणीय कीटनाशक (DDT) की सांद्रता वृद्धि: जल: 0.000003 ppm \to प्लवक: 0.04 ppm छोटी मछली: 0.5 ppm \to बड़ी मछली: 2.0 ppm शीर्ष उपभोक्ता (बाज / मनुष्य): 25.0 ppm (अधिकतम!) निष्कर्ष: शीर्ष उपभोक्ता होने से मानव में सर्वाधिक विष जमा उपाय: जैविक खेती एवं जैव-कीटनाशकों का प्रयोग

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
पारितंत्र जैविक घटकों (उत्पादक, उपभोक्ता, अपघटक) और अजैविक घटकों (ताप, जल, मृदा) की आत्मनिर्भर इकाई है।
मुख्य बिंदु 2
उत्पादक (हरे पौधे) सौर ऊर्जा का 1% अवशोषित कर प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन बनाते हैं।
मुख्य बिंदु 3
अपघटक (जीवाणु व कवक) मृत अवशेषों का विघटन कर पोषक तत्वों का मृदा में पुनर्चक्रण करते हैं।
मुख्य बिंदु 4
लिंडमैन का 10% नियम: एक पोषण स्तर से अगले स्तर तक केवल 10% ऊर्जा जाती है; 90% उपापचय व ऊष्मा में नष्ट होती है।
मुख्य बिंदु 5
प्रक्षेपास्त्र में ऊर्जा का प्रवाह सदैव एकदिशिक (यूनिडायरेक्शनल) होता है; 3-4 भाग के बाद उपयोगी ऊर्जा नहीं बचती।
मुख्य बिंदु 6
जैव संवर्धन: आहार श्रृंखला में अजैव-निम्नीकरणीय रसायन (डीडीटी) की सांद्रता प्रत्येक स्तर पर होती है; शीर्ष उपयोगकर्ता (मनुष्य) में सबसे प्रमुख है।
मुख्य बिंदु 7
ओजोन (O3) समताप मंडल में UV विकिरण O2 के विखंडन (O + O) और संलयन (O + O2) से उत्पन्न होता है।
मुख्य बिंदु 8
ओजोन परत सूर्य की घातक यूवी किरणों को रोककर त्वचा कैंसर और मोतियाबिंद से रक्षा करती है।
मुख्य बिंदु 9
सीएफसी ओजोन क्षय का मुख्य कारण हैं; 1987 के मॉन्ट्रियल रिकॉर्ड द्वारा सीएफसी उत्पादन को प्रतिबंधित कर दिया गया।
मुख्य बिंदु 10
कचरा प्रबंधन में गीले व सूखे कचरे का पृथक्करण, खाद बनाना, पुनर्चक्रण तथा एकल-उपयोग प्लास्टिक पर प्रतिबंध अनिवार्य उपाय हैं।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
1. पारितंत्र में अपघटक न होने पर क्या परिणाम होगा?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: पृथ्वी पर मृत जीवों और पौधों के अवशेषों का ढेर लग जाएगा, पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण रुक जाएगा और मृदा की उपजाऊ क्षमता समाप्त होने से जीवन असंभव हो जाएगा।
2
2. यदि एक आहार श्रृंखला में एक तृतीयक उपभोक्ता (बाज) को 5 जूल ऊर्जा प्राप्त होती है, तो उत्पादक स्तर पर कितनी ऊर्जा रही होगी?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: T4 (बाज) = 5 J ⇒ T3 (साँप) = 50 J ⇒ T2 (मेंढक) = 500 J ⇒ T1 (उत्पादक) = 5,000 J (उत्पादक स्तर पर 5,000 जूल ऊर्जा रही होगी)।
3
3. ओजोन का एक अणु ऑक्सीजन के कितने परमाणुओं से मिलकर बना होता है और इसका निर्माण समताप मंडल में किस प्रकार होता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: ओजोन 3 ऑक्सीजन परमाणु (O3) से बनता है; समताप मंडल में UV किरणें O2 को दो O परमाणुओं में विखंडित किया जाता है, जो अन्य O2 कणों से मिलकर O3 को विखंडित करते हैं।
4
4. अजैव-निम्नीकरणीय कचरे के दो प्रमुख उदाहरण दीजिए जो पर्यावरण को सबसे अधिक नुकसान पहुँचाते हैं।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: प्लास्टिक (पॉलीथिन बैग) और रासायनिक रसायन (जैसे डीडीटी)।
5
5. किसी आहार श्रृंखला में शीर्ष उपभोक्ता में कीटनाशकों की सांद्रता सर्वाधिक क्यों होती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: जैव आवर्धन (जैविक आवर्धन) का कारण; क्योंकि जीव-जंतुओं में जीव-निम्नीकरण होता है और जीव-जंतुओं में जैव-निम्नीकरण नहीं होता है, जिससे वे प्रत्येक पोषण स्तर पर स्थिर होते हैं।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
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कक्षा 10 Science & Technology (212) के सभी अध्याय

अध्याय 1: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में मापन (Measurement in Science & Tech) अध्याय 2: हमारे आस-पास के पदार्थ (Matter in Our Surroundings) अध्याय 3: परमाणु एवं अणु (Atom and Molecules) अध्याय 4: रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण (Chemical Reactions & Equations) अध्याय 5: परमाणु संरचना (Atomic Structure) अध्याय 6: तत्वों का आवर्त वर्गीकरण (Periodic Classification of Elements) अध्याय 7: रासायनिक आबंधन (Chemical Bonding) अध्याय 8: अम्ल, क्षारक और लवण (Acids, Bases and Salts) अध्याय 9: गति और उसका वर्णन (Motion and its Description) अध्याय 10: बल एवं गति (Force and Motion) अध्याय 11: गुरुत्वाकर्षण (Gravitation) अध्याय 12: ऊर्जा के स्रोत (Sources of Energy) अध्याय 13: कार्य एवं ऊर्जा (Work and Energy) अध्याय 14: ऊष्मीय ऊर्जा (Thermal Energy) अध्याय 15: प्रकाश ऊर्जा (Light Energy) अध्याय 16: विद्युत ऊर्जा (Electrical Energy) अध्याय 17: विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव (Magnetic Effects of Current) अध्याय 18: ध्वनि एवं संचार (Sound and Communication) अध्याय 19: सजीवों का वर्गीकरण (Classification of Living Organisms) अध्याय 20: पृथ्वी पर जीवन का इतिहास (History of Life on Earth) अध्याय 21: जीवन की इकाइयाँ: कोशिका एवं ऊतक (Cell and Tissues) अध्याय 22: जैव प्रक्रम-1: पोषण, वहन, श्वसन एवं उत्सर्जन (Life Processes - 1) अध्याय 23: जैव प्रक्रम-2: नियंत्रण एवं समन्वय (Control and Coordination) अध्याय 24: जैव प्रक्रम-3: जनन (Reproduction) अध्याय 25: आनुवंशिकता (Heredity) अध्याय 26: वायु एवं जल (Air and Water) अध्याय 27: धातु और अधातु (Metals and Non-metals) अध्याय 28: कार्बन और उसके यौगिक (Carbon and Its Compounds) अध्याय 29: प्राकृतिक पर्यावरण (Natural Environment) अध्याय 30: पर्यावरण पर मानवीय प्रभाव (Human Impact on Environment) अध्याय 31: खाद्य उत्पादन (Food Production) अध्याय 32: स्वास्थ्य एवं स्वच्छता (Health and Hygiene)

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