1789 ईस्वी से पूर्व फ्रांस की संपूर्ण सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था को 'प्राचीन व्यवस्था' (Ancien Régime) कहा जाता है। यह व्यवस्था विशेषाधिकारों, सामंती शोषण और निरंकुश राजतंत्र पर आधारित थी। इस समाज की सबसे बड़ी विडंबना यह थी कि शासन, धर्म और सेना के शीर्ष पदों पर आसीन अल्पसंख्यक वर्ग सभी अधिकारों का उपभोग करता था, जबकि उत्पादन करने वाला और करों का बोझ उठाने वाला बहुसंख्यक वर्ग मानवीय गरिमा से भी वंचित था।
फ्रांसीसी समाज कानूनी तौर पर तीन वर्गों या 'एस्टेट्स' (Three Estates) में बंटा हुआ था:
कैथोलिक चर्च का फ्रांस में असाधारण प्रभाव था। देश की कुल 2.5 करोड़ आबादी में पादरियों की संख्या लगभग 1,30,000 (लगभग 0.5%) थी।
- भूमि व धन-संपत्ति: चर्च फ्रांस की लगभग 10% उपजाऊ कृषि भूमि का स्वामी था। चर्च के अपने विशाल मठ, महल और अपार जागीरें थीं।
- धार्मिक कर (टाइथ / Tithe): चर्च को किसानों से उनकी कृषि उपज का दसवां भाग (लगभग 8% से 10%) धार्मिक कर के रूप में वसूलने का विशेषाधिकार प्राप्त था, जिसे 'टाइथ' कहा जाता था।
- कर-मुक्ति: चर्च राज्य को कोई प्रत्यक्ष कर नहीं देता था। वह अपनी मर्जी से केवल राजा को एक नगण्य 'स्वैच्छिक उपहार' (Don Gratuit) भेंट करता था।
- आंतरिक विभाजन (उच्च बनाम निम्न पादरी):
- उच्च पादरी (Higher Clergy): आर्चबिशप, बिशप और मठाधीश, जो कुलीन परिवारों से आते थे। वे वर्साय के राजदरबार में विलासितापूर्ण जीवन जीते थे और धार्मिक कर्तव्यों की पूरी उपेक्षा करते थे।
- निम्न पादरी (Lower Clergy / क्योर - Curés): लगभग 50,000 ग्रामीण पुरोहित। वे अत्यंत साधारण व निर्धन जीवन जीते थे। वे किसानों के दुख-दर्द से गहराई से जुड़े थे, इसलिए क्रांति के समय उन्होंने तीसरे एस्टेट का खुलकर समर्थन किया।
द्वितीय एस्टेट में सामंत और रईस शामिल थे, जिनकी संख्या लगभग 3,50,000 (लगभग 1.5%) थी।
- भूमि पर आधिपत्य: कुलीन वर्ग के पास फ्रांस की 20% से 25% भूमि थी।
- पदों पर एकाधिकार: सेना के सभी उच्च अधिकारी पद, प्रांतीय सूबेदारी, न्यायिक पद और राजदरबार के सम्माननीय पद केवल कुलीनों के लिए आरक्षित थे।
- सामंती विशेषाधिकार: कुलीन वर्ग राज्य के सभी प्रत्यक्ष करों (जैसे टाइल) से पूर्णतः मुक्त था। इसके अतिरिक्त वे किसानों से सामंती कर, टोल टैक्स (मार्ग कर) और शिकार के विशेष अधिकार वसूलते थे।
- कुलीनों के दो प्रमुख वर्ग:
- तलवार के कुलीन (Nobles of the Sword / Nobles d'Épée): प्राचीन वंशानुगत सामंत, जो अपनी वंशावली और सैन्य परंपरा पर गर्व करते थे। वे वर्साय के दरबार में रहते थे।
- पोशाक के कुलीन (Nobles of the Robe / Nobles de Robe): अमीर बुर्जुआ, जिन्होंने राजा से प्रशासनिक या न्यायिक पद (जैसे पार्लमां के न्यायाधीश पद) खरीदकर कुलीनता का दर्जा हासिल किया था। वे पुराने कुलीनों की तुलना में अधिक रूढ़िवादी और विशेषाधिकारों के रक्षक थे।
फ्रांस की शेष 98% जनसंख्या (लगभग 2.5 करोड़ लोग) तृतीय एस्टेट में शामिल थी। यह वर्ग आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से अत्यधिक विषम था:
- बुर्जुआ वर्ग (Bourgeoisie - मध्यम वर्ग): इसमें बड़े व्यापारी, साहूकार, उद्योगपति, जहाज मालिक, वकील, डॉक्टर, प्रोफेसर, लेखक और सरकारी कर्मचारी शामिल थे। वे शिक्षित, विचारवान और आर्थिक रूप से संपन्न थे। फ्रांस के व्यापार और धन के निर्माता होने के बावजूद उन्हें कोई राजनीतिक अधिकार या सामाजिक प्रतिष्ठा प्राप्त नहीं थी। उच्च पदों पर केवल कुलीनों का कब्जा था। इस अपमान और उपेक्षा ने बुर्जुआ वर्ग को क्रांति का बौद्धिक और संगठनात्मक नेता बना दिया।
- किसान वर्ग (Peasantry): फ्रांस की कुल आबादी का लगभग 80% भाग किसान थे। यद्यपि अधिकांश किसान कानूनी रूप से स्वतंत्र थे, फिर भी वे सामंती बंधनों में जकड़े हुए थे:
- कोरवी (Corvée): बिना मजदूरी के सड़कों और शाही महलों के निर्माण के लिए किया जाने वाला अनिवार्य बेगार श्रम।
- बनालिते (Banalités): सामंत की चक्की में आटा पीसने, उसके तंदूर में रोटी पकाने और उसके कोल्हू में अंगूर पेरने के लिए दिया जाने वाला अनिवार्य शुल्क।
- चंपार्ट (Champart) व सेंसीव (Censive): सामंत को दी जाने वाली नकद व जिंस लगान। अपनी कुल आय का 70% से 80% भाग किसान राजा, चर्च और सामंत को करों के रूप में चुका देते थे।
- शहरी दस्तकार, शिल्पी और मजदूर (साँ-कुलोत्त - Sans-culottes): पेरिस और अन्य नगरों में रहने वाले बढ़ई, मोची, लोहार, दिहाड़ी मजदूर और घरेलू नौकर। ये लोग महंगाई, ब्रेड (रोटी) की कमी और भुखमरी से सबसे ज्यादा त्रस्त थे। इन्हें 'साँ-कुलोत्त' (बिना घुटने वाली पैंट पहनने वाले) कहा जाता था, जो क्रांति के सबसे उग्र सिपाही बने।
| एस्टेट (सामाजिक वर्ग) | जनसंख्या प्रतिशत | भूमि स्वामित्व | प्रमुख विशेषाधिकार | कर दायित्व |
|---|---|---|---|---|
| प्रथम एस्टेट (पादरी - Clergy) | लगभग 0.5% (1,30,000) | 10% उपजाऊ भूमि | किसानों से 'टाइथ' कर वसूली, स्वतंत्र न्यायालय, सेंसरशिप अधिकार | सभी प्रत्यक्ष करों से पूर्ण मुक्त (केवल स्वैच्छिक उपहार) |
| द्वितीय एस्टेट (कुलीन - Nobility) | लगभग 1.5% (3,50,000) | 20% - 25% भूमि | सेना व प्रशासन के शीर्ष पदों पर एकाधिकार, सामंती कर, शिकार का अधिकार | टाइल जैसे मुख्य राज्य करों से मुक्त |
| तृतीय एस्टेट (Third Estate) | 98% (लगभग 2.5 करोड़) | 65% - 70% (विखंडित) | शून्य विशेषाधिकार; राजनीतिक शक्ति और सामाजिक सम्मान से पूर्ण वंचित | राज्य, चर्च और सामंतों के समस्त प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष करों का 100% भार |
"पादरी प्रार्थना करते हैं, कुलीन युद्ध करते हैं, और तृतीय एस्टेट इन दोनों का खर्च चलाने के लिए कर चुकाता है।" (The clergy pray, the nobles fight, the third estate pays for all.) यह कहावत प्राचीन व्यवस्था की क्रूर सच्चाई को उजागर करती है।