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ICSE • कक्षा 6 • Mathematics • अध्याय 6
अनुमानित समय: 45-60 मिनट
प्रगति: अध्ययनरत

दशमलव (Decimals)

दशमलव संख्याएं प्रारंभिक गणित के इतिहास में सबसे क्रांतिकारी और व्यावहारिक संकल्पनाओं में से एक हैं। काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशंस (CISCE) के कक्षा 6 के गणित पाठ्यक्रम में यह अध्याय छात्रों को असतत पूर्ण वस्तुओं की गिनती से आगे ले जाकर सतत वास्तविक भौतिक राशियों के सूक्ष्म व यथार्थ मापन की ओर अग्रसर करता है। हमारी पारंपरिक आधार-दस (डेसिमल) स्थानीय मान प्रणाली में, जब भी हम इकाई के स्थान से बाईं ओर एक पद बढ़ते हैं, तो स्थानीय मान दस गुना बढ़ जाता है: इकाई से दहाई (दस गुना), दहाई से सैकड़ा (दस गुना), और सैकड़े से हजार (दस गुना)। सदियों तक यह नियम इकाई के स्थान पर आकर ठहर जाता था। दशमलव भिन्नों का मूलभूत वैचारिक चमत्कार इस सत्य को समझने में निहित है कि यही नियम इकाई के स्थान के दाईं ओर भी अनंत तक उसी क्रम में लागू रहता है, जहाँ प्रत्येक अगला दायां स्थान अपने ठीक पिछले बाएं स्थान के मान का दसवां भाग (अर्थात एक बटा दस) होता है। इस प्रकार इकाई के ठीक दाईं ओर चलने पर दशांश (दसवां भाग या 1/10 = 0.1), उसके आगे शतांश (सौवां भाग या 1/100 = 0.01), उसके आगे सहस्त्रांश (हजारवां भाग या 1/1000 = 0.001), और इसी क्रम में दस-सहस्त्रांश तथा लक्ष्यांश आदि स्थान प्राप्त होते हैं। संरचनात्मक रूप से किसी भी दशमलव संख्या के तीन अभिन्न अंग होते हैं: पहला, पूर्ण संख्या भाग (या पूर्णांक भाग) जो दशमलव बिंदु के बाईं ओर स्थित होता है; दूसरा, दशमलव बिंदु, जो एक छोटा सा बिंदु या डॉट होता है तथा पूर्ण इकाइयों और भिन्नात्मक भागों के बीच विभाजक सीमा रेखा का कार्य करता है; और तीसरा, दशमलव भिन्नात्मक भाग, जो दशमलव बिंदु के ठीक दाईं ओर स्थित होता है। उदाहरण के लिए, दशमलव संख्या पच्चीस दशमलव सात चार (25.74) में 25 पूर्णांक भाग है, बिंदु दशमलव विभाजक है, तथा 7 दशांश और 4 शतांश मिलकर भिन्नात्मक भाग बनाते हैं। यहाँ एक अत्यंत महत्वपूर्ण भाषाई व गणितीय नियम का पालन करना अनिवार्य है: दशमलव बिंदु के बाईं ओर की पूर्ण संख्या को हम एक साथ संयुक्त संख्या के रूप में पढ़ते हैं (जैसे पच्चीस), किंतु दशमलव बिंदु के दाईं ओर के अंकों को सदैव पृथक-पृथक एक-एक अंक करके पढ़ा जाता है (सात चार, कभी भी चौहत्तर नहीं), क्योंकि प्रत्येक अंक दस की एक विशिष्ट भिन्नात्मक घात का प्रतिनिधित्व करता है न कि पूर्ण दहाई या इकाई का। दशमलव स्थानीय मान सारणी दशमलव संख्याओं के विश्लेषण और प्रसारित रूप का सबसे सशक्त आधार प्रस्तुत करती है। जिस प्रकार किसी पूर्ण संख्या को उसके अंकों के स्थानीय मानों के योग के रूप में प्रसारित किया जाता है, उसी प्रकार किसी भी दशमलव संख्या को दो प्रकार से प्रसारित किया जा सकता है: भिन्नात्मक प्रसारित रूप और दशमलव प्रसारित रूप। उदाहरण के लिए, तीन सौ पचहत्तर दशमलव चार आठ दो (375.482) का भिन्नात्मक प्रसारित रूप तीन सौ धन सत्तर धन पांच धन चार बटा दस धन आठ बटा सौ धन दो बटा एक हजार होता है। इसी संख्या का दशमलव प्रसारित रूप तीन सौ धन सत्तर धन पांच धन शून्य दशमलव चार धन शून्य दशमलव शून्य आठ धन शून्य दशमलव शून्य शून्य दो होता है। यह विभाजन स्पष्ट करता है कि किसी अंक का वास्तविक मान उसके अंकीय मान (अंकित मान) तथा उसके स्थानीय मान के गुणनफल के बराबर होता है। संख्या रेखा पर दशमलवों का ज्यामितीय निरूपण छात्रों को उनकी वास्तविक माप और परिमाण की सहज समझ प्रदान करता है। संख्या रेखा पर शून्य और एक के बीच की दूरी एक पूर्ण इकाई को दर्शाती है। यदि इस दूरी को दस बराबर भागों में बांट दिया जाए, तो प्रत्येक भाग एक दशांश (0.1) को व्यक्त करता है, जिन्हें शून्य दशमलव एक, शून्य दशमलव दो से लेकर शून्य दशमलव नौ तक चिह्नित किया जाता है। यदि शून्य दशमलव छह और शून्य दशमलव सात के बीच के अंतराल को आवर्धित (ज़ूम) करके पुनः दस बराबर उप-भागों में विभाजित किया जाए, तो प्रत्येक सूक्ष्म कदम एक शतांश (0.01) को निरूपित करता है, जिससे शून्य दशमलव छह चार जैसे बिंदुओं को अत्यंत सटीकता से दर्शाया जा सकता है। संख्या रेखा का यह मॉडल दशमलवों की तुलना का स्वर्णिम नियम स्थापित करता है: जो दशमलव संख्या संख्या रेखा पर किसी दूसरी संख्या के बाईं ओर स्थित होती है वह उससे सदैव छोटी होती है, तथा जो संख्या दाईं ओर स्थित होती है वह उससे सदैव बड़ी होती है। पाठ्यक्रम का एक अन्य महत्वपूर्ण स्तंभ समान दशमलव और असमान दशमलव की संकल्पना है। जिन दशमलव संख्याओं में दशमलव बिंदु के बाद अंकों की संख्या बिल्कुल समान होती है, उन्हें समान दशमलव कहा जाता है, जैसे तीन दशमलव चार पांच और बारह दशमलव शून्य आठ। जिन दशमलव संख्याओं में दशमलव बिंदु के बाद अंकों की संख्या भिन्न-भिन्न होती है, उन्हें असमान दशमलव कहा जाता है, जैसे पांच दशमलव दो और आठ दशमलव सात तीन नौ। यहाँ अंतिम शून्यों का अपरिवर्तनीयता नियम अत्यंत प्रभावी सिद्ध होता है: किसी भी दशमलव संख्या के भिन्नात्मक भाग के चरम दाईं ओर कितने भी शून्य बढ़ा दिए जाएं या हटा दिए जाएं, उस संख्या के मूल संख्यात्मक मान में रत्ती भर भी अंतर नहीं आता। उदाहरण के लिए, शून्य दशमलव पांच का मान शून्य दशमलव पांच शून्य के समान है, और यही मान शून्य दशमलव पांच शून्य शून्य के समान है, क्योंकि पांच दशांश, पचास शतांश, और पांच सौ सहस्त्रांश सभी सरलतम रूप में एक बटा दो के ही बराबर होते हैं। इस नियम का प्रयोग करके किसी भी असमान दशमलव समूह को उनके दाईं ओर शून्य जोड़कर सरलता से समान दशमलवों में परिवर्तित किया जाता है, जो कि दशमलवों के जोड़, घटाव और तुलना की प्राथमिक अनिवार्यता है। दशमलव और साधारण भिन्नों के बीच का द्विमार्गी रूपांतरण सेतु पाठ्यक्रम का एक अनिवार्य व्यावहारिक भाग है। किसी शांत दशमलव को सरलतम भिन्न में बदलने के लिए दशमलव बिंदु को हटाकर पूरी संख्या को अंश में लिखा जाता है, तथा हर में एक के आगे दशमलव स्थानों जितने शून्य लगाए जाते हैं, तत्पश्चात अंश और हर को उनके महत्तम समापवर्तक (HCF) से विभाजित करके सरलतम रूप प्राप्त किया जाता है। इसके विपरीत, किसी साधारण भिन्न को दशमलव में बदलने के दो प्रमुख तरीके हैं: पहला, तुल्य भिन्न विधि जिसमें भिन्न के हर को दस, सौ, या एक हजार की घात में बदला जाता है (जैसे तीन बटा चार में अंश और हर को पच्चीस से गुणा करके पचहत्तर बटा सौ अर्थात शून्य दशमलव सात पांच प्राप्त करना); और दूसरा, दीर्घ भाग विधि जिसमें अंश को हर से विभाजित किया जाता है और आवश्यकतानुसार दशमलव बिंदु लगाकर शून्य बढ़ाए जाते हैं। अंत में, दशमलवों पर चार मूलभूत गणितीय संक्रियाएं—योग, व्यवकलन, गुणन एवं भाग—दैनिक जीवन और मापन प्रणालियों के संचालन का आधार हैं। दशमलवों के जोड़ और घटाव का स्वर्णिम नियम यह है कि सभी संख्याओं के दशमलव बिंदुओं को एक सीधी ऊर्ध्वाधर रेखा में संरेखित किया जाए, आवश्यकतानुसार दाईं ओर शून्य जोड़कर उन्हें समान दशमलव बनाया जाए, और फिर साधारण पूर्ण संख्याओं की भांति हासिल और उधार लेते हुए संक्रिया संपन्न की जाए। गुणन के नियम के अंतर्गत, पहले दशमलव बिंदुओं की उपेक्षा करते हुए संख्याओं का साधारण गुणन किया जाता है, फिर दोनों संख्याओं के दशमलव स्थानों का योग करके, गुणनफल में चरम दाईं ओर से उतने ही अंक गिनकर दशमलव बिंदु लगाया जाता है। दस, सौ, या एक हजार जैसी दस की घातों से गुणा करने पर दशमलव बिंदु क्रमशः एक, दो, या तीन स्थान दाईं ओर खिसकता है, जबकि दस की घातों से भाग देने पर दशमलव बिंदु बाईं ओर खिसकता है। भाग की संक्रिया में यदि भाजक में दशमलव बिंदु उपस्थित हो, तो भाजक और भाज्य दोनों को दस की उपयुक्त घात से गुणा करके पहले भाजक को एक पूर्ण संख्या बनाया जाता है, जिसके बाद सामान्य भाग संपन्न होता है। इन सभी नियमों का सुदृढ़ अभ्यास छात्रों को उच्चतर कक्षाओं के भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, वाणिज्य तथा व्यावहारिक जीवन में सटीक गणनाएं करने में पूर्णतः समर्थ बनाता है।

क्या आपने कभी सोचा है?

जब कोई ओलंपिक धावक सौ मीटर की दौड़ नौ दशमलव पांच आठ (9.58) सेकंड में पूरी करता है, या जब किसी आधुनिक प्रयोगशाला की अति-संवेदनशील तुला पर किसी रासायनिक पदार्थ का द्रव्यमान शून्य दशमलव शून्य शून्य चार पांच (0.0045) ग्राम मापा जाता है, अथवा पेट्रोल पंप की मशीन पर चार दशमलव आठ दो पांच (4.825) लीटर पेट्रोल का मूल्य चार सौ तिरसठ रुपये बीस पैसे (463.20) दिखाई देता है, तब केवल पूर्ण संख्याओं (1, 2, 3...) की सहायता से भौतिक जगत के इन यथार्थ मापों को व्यक्त करना असंभव हो जाता है। हजारों वर्षों तक मानव सभ्यता दो पूर्ण इकाइयों के बीच के मान को व्यक्त करने के लिए जटिल साधारण भिन्नों से जूझती रही। वर्ष 1585 में फ्लेमिश गणितज्ञ साइमन स्टीविन ने अपनी ऐतिहासिक पुस्तिका 'द थिएंडे' (The Tenth) प्रकाशित करके यह सिद्ध किया कि भारतीय-अरबी दशमलव स्थानीय मान प्रणाली की जो अद्भुत शक्ति पूर्ण संख्याओं के जोड़ और गुणा को अत्यंत सरल बनाती है, उसे दस की घात वाले हर वाली भिन्नों तक सुगमता से विस्तारित किया जा सकता है। इसके पश्चात जॉन नेपियर ने दशमलव बिंदु का प्रयोग आरंभ किया और देखते ही देखते वैश्विक व्यापार, खगोल विज्ञान, नौवहन तथा आधुनिक इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एक युगांतरकारी क्रांति आ गई। दशमलव कोई भिन्न प्रजाति की संख्याएं नहीं हैं, बल्कि यह स्थानीय मान के उसी शाश्वत सौंदर्य का विस्तार हैं जो हमारी गणनाओं को अनंत सूक्ष्मता प्रदान करता है।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

दशमलव प्रणाली का ज्ञान केवल गणित की परीक्षा उत्तीर्ण करने का साधन नहीं है, बल्कि यह आधुनिक मानव समाज और वैश्विक विज्ञान की सार्वभौमिक भाषा है। दैनिक जीवन में वित्तीय लेन-देन, बैंकिंग, मुद्रा विनिमय और व्यापार पूरी तरह से दशमलव की सटीकता पर निर्भर करते हैं। रुपये और पैसे, डॉलर और सेंट, पाउंड और पेंस—संसार की लगभग सभी आधुनिक मुद्राएं दशमलव पद्धति पर आधारित हैं, जहाँ ब्याज की दरें, छूट, लाभ-हानि और करों की गणना दशमलव के बिना संभव ही नहीं है। इसके अतिरिक्त, अंतरराष्ट्रीय मात्रक प्रणाली (SI मीट्रिक प्रणाली) पूरी तरह से आधार-दस दशमलव संरचना पर टिकी हुई है। लंबाई को मिलीमीटर, सेंटीमीटर, मीटर और किलोमीटर में व्यक्त करना हो; द्रव्यमान को मिलीग्राम, ग्राम और किलोग्राम में मापना हो; अथवा आयतन को मिलीलीटर और लीटर में नापना हो—इन सभी इकाइयों का परस्पर रूपांतरण दस, सौ और हजार के गुणा व भाग द्वारा दशमलवों में ही किया जाता है। चिकित्सा और औषध विज्ञान के क्षेत्र में तो दशमलव का महत्व जीवन और मृत्यु का प्रश्न बन जाता है; किसी बच्चे के लिए औषधि की खुराक शून्य दशमलव शून्य पांच मिलीग्राम प्रति किलोग्राम निर्धारित करते समय यदि दशमलव बिंदु एक स्थान भी गलत लग जाए, तो परिणाम अत्यंत घातक हो सकते हैं। आधुनिक कंप्यूटर विज्ञान, जीपीएस नेविगेशन प्रणाली, मौसम का पूर्वानुमान, खेलकूद में सेकंड के सौवें हिस्से की समय-गणना तथा अंतरिक्ष अभियानों में उपग्रहों के प्रक्षेपण पथ का निर्धारण दशमलवों की उच्च कोटि की सूक्ष्मता पर ही संचालित होता है। कक्षा 6 के स्तर पर इस अध्याय की गहरी समझ छात्रों के मस्तिष्क में तार्किक स्पष्टता, मापन संवेदनशीलता और भविष्य के वैज्ञानिक अध्ययन की मजबूत नींव स्थापित करती है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • भारतीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्थानीय मान प्रणाली की समझ, जिसमें अंकों का अंकीय मान, स्थानीय मान और पूर्ण संख्याओं का विस्तारित रूप सम्मिलित हो।
  • साधारण भिन्नों (उचित, अनुचित, मिश्र भिन्न) की संकल्पना तथा अंश व हर को समान संख्या से गुणा या भाग करके तुल्य भिन्न ज्ञात करने की विधि का ज्ञान।
  • बहु-अंकीय पूर्ण संख्याओं की मूलभूत अंकगणितीय संक्रियाओं (हासिल वाला जोड़, उधार वाला घटाव, गुणा तथा दीर्घ भाग) में पूर्ण दक्षता।
  • संख्या रेखा की अवधारणा तथा उस पर पूर्ण संख्याओं और साधारण भिन्नों को बिंदुओं के रूप में निरूपित करने की बुनियादी समझ।
  • दैनिक जीवन में प्रयुक्त मीट्रिक मापन इकाइयों (रुपये और पैसे, मीटर और सेंटीमीटर, किलोग्राम और ग्राम, लीटर और मिलीलीटर) का प्रारंभिक परिचय।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • आधार-दस स्थानीय मान प्रणाली के भिन्नात्मक विस्तार (दशांश, शतांश, सहस्त्रांश) की व्याख्या करना तथा दशमलव संख्या के तीनों संरचनात्मक अंगों की पहचान करना।
  • दशमलव संख्याओं को शब्दों में शुद्ध रूप से पढ़ना और लिखना, मानक संख्यात्मक रूप में लिखना तथा उनके भिन्नात्मक व दशमलव प्रसारित रूपों को व्यक्त करना।
  • संख्या रेखा पर दशांश और शतांश के आवर्धित अंतराल बनाकर दशमलव संख्याओं को दृश्य रूप से सटीक स्थिति पर निरूपित व व्याख्यायित करना।
  • समान एवं असमान दशमलव संख्याओं में भेद करना तथा अंतिम शून्यों के अपरिवर्तनीयता नियम का प्रयोग करके असमान दशमलवों को समान दशमलवों में रूपांतरित करना।
  • बाएँ से दाएँ स्थानीय मान तुलना एल्गोरिदम का उपयोग करके दशमलव संख्याओं की तुलना करना तथा उन्हें आरोही व अवरोही क्रम में व्यवस्थित करना।
  • शांत दशमलव संख्याओं को उनके सरलतम न्यूनतम भिन्नों में बदलना तथा तुल्य हर विधि व दीर्घ भाग विधि द्वारा साधारण भिन्नों को दशमलव में रूपांतरित करना।
  • दशमलव बिंदुओं के ऊर्ध्वाधर संरेखण एवं शून्य जोड़कर समान दशमलव बनाकर जोड़ और घटाव की संक्रियाओं को हासिल और उधार के साथ शुद्धता से हल करना।
  • दस की घातों से गुणा और भाग पर दशमलव बिंदु के विस्थापन नियमों को लागू करना, दशमलव संख्याओं का परस्पर गुणन करना, तथा मुद्रा, लंबाई, भार और धारिता के व्यावहारिक प्रश्नों को हल करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 मॉड्यूल 1: दशमलव की ऐतिहासिक आवश्यक...
2 मॉड्यूल 2: दशमलव स्थानीय मान सारणी,...
3 मॉड्यूल 3: संख्या रेखा पर निरूपण, स...
4 मॉड्यूल 4: रूपांतरण सेतु: दशमलव एवं...
5 मॉड्यूल 5: दशमलवों का योग एवं व्यवक...
6 मॉड्यूल 6: दशमलवों का गुणन: 10 की घ...
7 मॉड्यूल 7: दशमलवों का भाग: 10 की घा...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

मॉड्यूल 1: दशमलव की ऐतिहासिक आवश्यकता, उत्पत्ति एवं संरचना

1.1 पूर्ण संख्याओं की सीमा एवं दशमलव की ऐतिहासिक आवश्यकता

दैनिक जीवन में जब हम अलग-अलग वस्तुओं को गिनते हैं—जैसे कि 5 पुस्तकें, 12 कुर्सियाँ या 8 सेब—तो हम पूर्ण संख्याओं ($1, 2, 3, 4, \dots$) का प्रयोग करते हैं। किंतु जब हम गिनती से आगे बढ़कर भौतिक राशियों के मापन (Measurement) की ओर बढ़ते हैं—जैसे किसी कपड़े की लंबाई, सोने का भार, दूध का आयतन, या किसी धावक द्वारा लिया गया समय—तो प्रकृति कभी भी केवल पूर्ण संख्याओं तक सीमित नहीं रहती।

एक पेंसिल की लंबाई $14\text{ cm}$ से अधिक किंतु $15\text{ cm}$ से कम हो सकती है। यद्यपि हम इसे साधारण भिन्न के रूप में $14\frac{7}{10}\text{ cm}$ लिख सकते हैं, परंतु भिन्न-भिन्न हरों वाली साधारण भिन्नों (जैसे $\frac{7}{10}$, $\frac{18}{25}$ और $\frac{73}{100}$) को जोड़ना, घटाना, गुणा करना और उनकी परस्पर तुलना करना ऐतिहासिक रूप से अत्यंत जटिल और समय लेने वाला कार्य था। दशमलव (Decimals) का आविष्कार इसी वैश्विक समस्या का स्थायी और सरलतम समाधान बनकर उभरा, जिसने आधार-10 स्थानीय मान प्रणाली को भिन्नों के संसार में सीधे विस्तारित कर दिया।

1.2 ऐतिहासिक मील के पत्थर: प्राचीन भारत से साइमन स्टीविन और जॉन नेपियर तक

प्राचीन भारतीय आधार-10 प्रणाली

शून्य और नौ अंकों ($0$ से $9$) पर आधारित दशमिक स्थानीय मान प्रणाली की उत्पत्ति प्राचीन भारत में हुई, जहाँ से यह अरब जगत और यूरोप में फैली। इस प्रणाली की समरूपता ने $10, 100, 1000$ के हर वाली भिन्नों की अवधारणा का आधार तैयार किया।

साइमन स्टीविन (1585: द थिएंडे)

फ्लेमिश गणितज्ञ साइमन स्टीविन ने द थिएंडे ('दसवां भाग') नामक ग्रंथ प्रकाशित किया। उन्होंने दिखाया कि यदि भिन्नों को दसवें, सौवें और हजारवें भागों में व्यवस्थित कर दिया जाए, तो भिन्नों की गणना भी पूर्ण संख्याओं जितनी ही सरल हो जाती है।

जॉन नेपियर (1617: दशमलव बिंदु)

स्कॉटिश गणितज्ञ जॉन नेपियर ने पूर्ण संख्या और दशमलव भिन्न के बीच विभाजक के रूप में एक छोटे बिंदु (डॉट) का प्रयोग आरंभ किया, जिसने आधुनिक दशमलव संकेतन को जन्म दिया।

1.3 दशमलव संख्या के तीन संरचनात्मक अंग (Anatomy of a Decimal Numeral)

प्रत्येक दशमलव संख्या तीन स्पष्ट और सुनिश्चित भागों से मिलकर बनती है:

58 . 374
↑
पूर्णांक भाग (Integral Part)
(पूर्ण इकाइयाँ: 58)
↑
दशमलव बिंदु (Decimal Point)
(विभाजक सीमा)
↑
दशमलव भाग (Fractional Part)
(दस की घातों के भिन्नात्मक अंश)
1. पूर्णांक भाग:

दशमलव बिंदु के बाईं ओर स्थित भाग। यह पूर्ण इकाइयों (इकाई, दहाई, सैकड़ा आदि) को प्रदर्शित करता है।

2. दशमलव बिंदु:

पूर्ण संख्या भाग और भिन्नात्मक भाग के बीच की स्पष्ट विभाजक सीमा रेखा।

3. दशमलव भिन्नात्मक भाग:

दशमलव बिंदु के दाईं ओर स्थित भाग, जो 1 से कम के भिन्नों (दशांश, शतांश, सहस्त्रांश) को दर्शाता है।

1.4 दशमलव संख्याओं का शुद्ध उच्चारण एवं पठन नियम

बोर्ड परीक्षाओं में परीक्षक अक्सर छात्रों के उच्चारण और शब्दों में लिखने की समझ की जांच करते हैं। इसके लिए सार्वभौमिक नियम इस प्रकार है:

  • पूर्णांक भाग को संयुक्त रूप से पढ़ें: दशमलव बिंदु के बाईं ओर की पूर्ण संख्या को सामान्य संख्या की तरह एक साथ पढ़ा जाता है (जैसे $45$ को पैंतालीस)।
  • दशमलव भाग के अंकों को पृथक-पृथक पढ़ें: दशमलव बिंदु के दाईं ओर के प्रत्येक अंक को अलग-अलग एक-एक करके बोला जाता है।
दशमलव संख्या शुद्ध पठन (मानक रूप) अशुद्ध पठन (परीक्षा में वर्जित)
$12.35$ बारह दशमलव तीन पांच बारह दशमलव पैंतीस (×)
$0.075$ शून्य दशमलव शून्य सात पांच शून्य दशमलव पचहत्तर (×)
$409.608$ चार सौ नौ दशमलव छह शून्य आठ चार सौ नौ दशमलव छह सौ आठ (×)

मॉड्यूल 2: दशमलव स्थानीय मान सारणी, प्रसारित रूप एवं मान प्रणालियाँ

2.1 आधार-10 स्थानीय मान की सममितीय संरचना (Base-10 Symmetry)

हमारी संख्या प्रणाली आधार-10 की सममितीय व्यवस्था पर कार्य करती है। इकाई के स्थान को केंद्र मानकर:

  • बाईं ओर बढ़ने पर: प्रत्येक स्थान का मान पिछले स्थान से 10 गुना ($10^1$) बढ़ता है: इकाई ($1$), दहाई ($10$), सैकड़ा ($100$), हजार ($1000$)।
  • दाईं ओर बढ़ने पर: प्रत्येक स्थान का मान पिछले स्थान का दसवां भाग ($\frac{1}{10}$) हो जाता है: दशांश ($\frac{1}{10} = 0.1$), शतांश ($\frac{1}{100} = 0.01$), सहस्त्रांश ($\frac{1}{1000} = 0.001$)।

2.2 विस्तृत दशमलव स्थानीय मान सारणी (Decimal Place Value Grid)

पूर्ण संख्या भाग (पूर्णांक) बिंदु दशमलव भिन्नात्मक भाग
सैकड़ा (Hundreds) दहाई (Tens) इकाई (Units) (.) दशांश (Tenths) शतांश (Hundredths) सहस्त्रांश (Thousandths)
$100$ $10$ $1$ • $\frac{1}{10} = 0.1$ $\frac{1}{100} = 0.01$ $\frac{1}{1000} = 0.001$
$3$ $7$ $5$ . $4$ $8$ $2$
$3 \times 100 = 300$ $7 \times 10 = 70$ $5 \times 1 = 5$ विभाजक $4 \times \frac{1}{10} = 0.4$ $8 \times \frac{1}{100} = 0.08$ $2 \times \frac{1}{1000} = 0.002$

अंकीय मान / अंकित मान (Face Value)

किसी भी अंक का अंकीय मान उसका अपना वास्तविक मान होता है, जो इस बात पर निर्भर नहीं करता कि वह संख्या में किस स्थान पर बैठा है।
उदाहरण: $375.482$ में अंक $8$ का अंकीय मान केवल $8$ है।

स्थानीय मान (Place Value)

अंक का स्थानीय मान उसके अंकीय मान और उसके स्थान के मान के गुणनफल के बराबर होता है:
$$\text{स्थानीय मान} = \text{अंकीय मान} \times \text{स्थान का मान}$$ उदाहरण: $375.482$ में अंक $8$ शतांश के स्थान पर है, अतः इसका स्थानीय मान $8 \times \frac{1}{100} = 0.08$ है।

2.4 दशमलव संख्या के प्रसारित रूप (Two Expanded Notations)

ICSE बोर्ड परीक्षा में किसी दशमलव संख्या को दो भिन्न रूपों में प्रसारित करने के प्रश्न पूछे जाते हैं:

प्रारूप 1: भिन्नात्मक प्रसारित रूप (Fractional Expanded Form)

प्रत्येक दशमलव अंक को 10 की घात वाले हर की भिन्न के रूप में लिखा जाता है:

$$375.482 = 300 + 70 + 5 + \frac{4}{10} + \frac{8}{100} + \frac{2}{1000}$$

प्रारूप 2: दशमलव प्रसारित रूप (Decimal Expanded Form)

प्रत्येक पद को स्वतंत्र दशमलव संख्या के रूप में लिखा जाता है:

$$375.482 = 300 + 70 + 5 + 0.4 + 0.08 + 0.002$$

मॉड्यूल 3: संख्या रेखा पर निरूपण, समान/असमान दशमलव एवं तुलना

3.1 संख्या रेखा पर आवर्धन द्वारा दशमलवों का निरूपण (Magnification Engine)

संख्या रेखा पर दो क्रमागत पूर्ण संख्याओं (जैसे $0$ और $1$) के बीच की दूरी एक पूर्ण इकाई होती है। जब हम इस अंतराल को $10$ बराबर भागों में विभाजित करते हैं, तो प्रत्येक भाग एक दशांश ($0.1$) को प्रदर्शित करता है:

0 —— 0.1 —— 0.2 —— 0.3 —— 0.4 —— 0.5 —— 0.6 —— 0.7 —— 0.8 —— 0.9 —— 1.0

यदि हमें $0.64$ को दर्शाना हो, तो हम $0.6$ और $0.7$ के बीच के सूक्ष्म अंतराल को आवर्धित (ज़ूम) करके पुनः $10$ बराबर उप-भागों में बांटते हैं। अब प्रत्येक छोटा कदम एक शतांश ($0.01$) बन जाता है, और $0.60$ से चौथा कदम सीधे $0.64$ पर पहुंच जाता है।

3.2 समान दशमलव बनाम असमान दशमलव (Like vs Unlike Decimals)

समान दशमलव (Like Decimals)

जिन दशमलव संख्याओं में दशमलव बिंदु के बाद अंकों की संख्या (दशमलव स्थान) बिल्कुल समान होती है, उन्हें समान दशमलव कहते हैं।

उदाहरण: $5.32$, $18.09$, $124.75$ (प्रत्येक में ठीक 2 दशमलव स्थान हैं)।

असमान दशमलव (Unlike Decimals)

जिन दशमलव संख्याओं में दशमलव बिंदु के बाद अंकों की संख्या भिन्न-भिन्न होती है, उन्हें असमान दशमलव कहते हैं।

उदाहरण: $7.4$ (1 स्थान), $19.28$ (2 स्थान), $0.635$ (3 स्थान)।

3.3 अंतिम शून्यों का अपरिवर्तनीयता नियम (Trailing Zeros Invariance Principle)

गणित का एक शाश्वत नियम है: किसी दशमलव संख्या के भिन्नात्मक भाग के अंत (चरम दाईं ओर) शून्य लगाने या हटाने से संख्या के मान में कोई बदलाव नहीं होता।

$$0.5 = 0.50 = 0.500 = \frac{5}{10} = \frac{50}{100} = \frac{500}{1000} = \frac{1}{2}$$

उपयोगिता: इस नियम की सहायता से हम किसी भी असमान दशमलव को चरम दाईं ओर आवश्यक शून्य जोड़कर तुरंत समान दशमलव में बदल सकते हैं। जैसे $4.3$ और $2.175$ को समान बनाने के लिए हम $4.3$ को $4.300$ लिख लेते हैं।

3.4 दशमलव संख्याओं की तुलना का चरणबद्ध एल्गोरिदम (Left-to-Right Place Value Algorithm)

दशमलव संख्याओं की तुलना करते समय 'अंकों की लंबाई' देखकर निर्णय नहीं लिया जाता। तुलना का वैज्ञानिक चरणबद्ध नियम निम्नलिखित है:

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चरण 1: पूर्णांक भागों की तुलना करें: जिस संख्या का पूर्णांक (दशमलव से पहले वाला) भाग बड़ा होगा, वह संख्या सीधे बड़ी होगी। जैसे $15.2$ का मान $9.85$ से बड़ा है क्योंकि $15 > 9$।
2
चरण 2: यदि पूर्णांक भाग समान हों, तो दशांशों की तुलना करें: दशमलव बिंदु के ठीक बाद वाले पहले अंक (दशांश) की तुलना करें। जैसे $6.7$ का मान $6.48$ से बड़ा है क्योंकि $7 > 4$।
3
चरण 3: यदि दशांश भी समान हों, तो शतांशों की तुलना करें: दूसरे दशमलव स्थान के अंक को देखें। जैसे $0.35$ का मान $0.329$ से बड़ा है क्योंकि $5 > 2$।
4
चरण 4: शून्य जोड़कर समान दशमलव बनाकर जांचें: यदि भ्रम हो, तो समान दशमलव बना लें। जैसे $0.4$ और $0.089$ में, $0.400$ और $0.089$ की तुलना करने पर स्पष्ट है कि $400$ सहस्त्रांश $89$ सहस्त्रांश से बड़े हैं, अतः $0.4 > 0.089$।

मॉड्यूल 4: रूपांतरण सेतु: दशमलव एवं साधारण भिन्न

4.1 शांत दशमलव को सरलतम भिन्न में बदलना (Decimal to Vulgar Fraction)

किसी भी शांत दशमलव संख्या को साधारण भिन्न में बदलने के लिए तीन चरणों का पालन किया जाता है:

  1. अंश लिखना: दशमलव बिंदु को हटाकर प्राप्त होने वाली पूरी संख्या को भिन्न के अंश (Numerator) में लिखें।
  2. हर लिखना: भिन्न के हर (Denominator) में $1$ लिखें और उसके आगे दशमलव बिंदु के बाद जितने अंक थे, उतने शून्य ($0$) लगा दें ($10, 100, 1000$ आदि)।
  3. सरलतम रूप में लाना: अंश और हर को उनके महत्तम समापवर्तक (HCF) से विभाजित करके भिन्न को उसके न्यूनतम/सरलतम रूप में संकुचित करें।
विस्तृत उदाहरण: $0.375$ को सरलतम भिन्न में बदलें:
$$0.375 = \frac{375}{1000} = \frac{375 \div 125}{1000 \div 125} = \frac{3}{8}$$

(चूंकि $375$ और $1000$ का HCF $= 125$ है, अतः सरलतम भिन्न $\frac{3}{8}$ प्राप्त हुई।)

4.2 साधारण भिन्न को दशमलव में बदलना (Fraction to Decimal)

साधारण भिन्न को दशमलव में बदलने की दो मुख्य और सशक्त विधियाँ हैं:

विधि 1: तुल्य हर विधि (10 की घात बनाना)

यदि हर के अभाज्य गुणनखंड केवल $2$ और $5$ हों, तो अंश व हर को उपयुक्त संख्या से गुणा करके हर को $10, 100$ या $1000$ बना लेते हैं:

• $2 \times 5 = 10$
• $4 \times 25 = 100$
• $8 \times 125 = 1000$
• $20 \times 5 = 100$
• $25 \times 4 = 100$

उदाहरण: $\frac{7}{8} = \frac{7 \times 125}{8 \times 125} = \frac{875}{1000} = 0.875$

विधि 2: दीर्घ भाग विधि (Long Division)

अंश को हर से विभाजित करें। जब शेषफल बचे, तो भागफल में दशमलव बिंदु लगाएं और शेषफल के दाईं ओर शून्य बढ़ाकर भाग प्रक्रिया जारी रखें जब तक शेषफल शून्य न हो जाए।

उदाहरण: $\frac{5}{16}$ के लिए:
$5.0000 \div 16$
$16 \times 0 = 0$ (शेष 5)
$16 \times 3 = 48$ (शेष 2)
$16 \times 1 = 16$ (शेष 4)
$16 \times 2 = 32$ (शेष 8)
$16 \times 5 = 80$ (शेष 0) → 0.3125

⚡ मानक तुल्यता स्मृति बैंक (ICSE Top Scorer Memory Bank)

तीव्र गणना और बोर्ड परीक्षा में समय बचाने के लिए निम्नलिखित मानों को सदैव स्मरण रखें:

$\frac{1}{2} = \mathbf{0.5}$
$\frac{1}{4} = \mathbf{0.25}$
$\frac{3}{4} = \mathbf{0.75}$
$\frac{1}{5} = \mathbf{0.2}$
$\frac{2}{5} = \mathbf{0.4}$
$\frac{3}{5} = \mathbf{0.6}$
$\frac{4}{5} = \mathbf{0.8}$
$\frac{1}{8} = \mathbf{0.125}$
$\frac{3}{8} = \mathbf{0.375}$
$\frac{5}{8} = \mathbf{0.625}$
$\frac{7}{8} = \mathbf{0.875}$
$\frac{1}{20} = \mathbf{0.05}$

मॉड्यूल 5: दशमलवों का योग एवं व्यवकलन: ऊर्ध्वाधर संरेखण एवं मीट्रिक अनुप्रयोग

5.1 ऊर्ध्वाधर स्तंभ संरेखण का स्वर्णिम नियम (Vertical Column Alignment Rule)

दशमलव संख्याओं को जोड़ते या घटाते समय की जाने वाली सबसे सामान्य भूल अंकों को दाएँ किनारे से मिलाना है। दशमलवों का अकाट्य स्वर्णिम नियम यह है:

नियम: सभी संख्याओं के दशमलव बिंदुओं (.) को एक-दूसरे के ठीक नीचे सीधी ऊर्ध्वाधर रेखा में संरेखित करें। खाली स्थानों पर शून्य ($0$) जोड़कर सभी संख्याओं को समान दशमलव बनाएं, और फिर सामान्य पूर्ण संख्याओं की भांति जोड़ें या घटाएं।

शुद्ध जोड़ का उदाहरण:

हल करें: $18.4 + 9.275 + 135.08$

   18.400 ← शून्य जोड़कर 3 स्थान बनाएं
    9.275
+ 135.080 ← शून्य जोड़कर 3 स्थान बनाएं
  162.755

शुद्ध घटाव का उदाहरण (उधार लेना):

हल करें: $45.2 - 18.365$

  45.200 ← 2 शून्य जोड़ना अनिवार्य है!
- 18.365 ← बिंदु संरेखित
  26.835

5.2 मीट्रिक मापन प्रणालियों में दशमलव अनुप्रयोग (Metric System Applications)

मीट्रिक प्रणाली पूरी तरह से आधार-10 पर आधारित है। छोटी इकाइयों को बड़ी इकाइयों में बदलते समय दशमलव बिंदु का प्रयोग अपरिहार्य होता है:

मापन क्षेत्र इकाई संबंध दशमलव रूपांतरण सूत्र व्यावहारिक उदाहरण
मुद्रा (रुपये-पैसे) ₹1 = 100 पैसे 1 पैसा = ₹$\frac{1}{100}$ = ₹0.01 ₹7 और 5 पैसे = ₹7.05 (2 स्थान)
लंबाई (मी-सेमी) 1 m = 100 cm 1 cm = $\frac{1}{100}$ m = 0.01 m 4 m 35 cm = 4.35 m
लंबाई (किमी-मी) 1 km = 1000 m 1 m = $\frac{1}{1000}$ km = 0.001 km 6 km 45 m = 6.045 km (3 स्थान)
द्रव्यमान (किग्रा-ग्रा) 1 kg = 1000 g 1 g = $\frac{1}{1000}$ kg = 0.001 kg 3 kg 8 g = 3.008 kg (3 स्थान)
धारिता (ली-मिली) 1 L = 1000 mL 1 mL = $\frac{1}{1000}$ L = 0.001 L 5 L 75 mL = 5.075 L

मॉड्यूल 6: दशमलवों का गुणन: 10 की घातों के विस्थापन एवं दशमलव स्थानों का योग नियम

6.1 10 की घातों से गुणन: दशमलव बिंदु का दाईं ओर विस्थापन नियम

जब किसी दशमलव संख्या को $10, 100, 1000$ (अर्थात $10^n$) से गुणा किया जाता है, तो संख्या के मूल अंक नहीं बदलते। केवल दशमलव बिंदु दाईं ओर उतने स्थान खिसक जाता है जितने गुणक में शून्य होते हैं:

• $5.834 \times 10 = \mathbf{58.34}$  (1 शून्य → 1 स्थान दाईं ओर)
• $5.834 \times 100 = \mathbf{583.4}$  (2 शून्य → 2 स्थान दाईं ओर)
• $5.834 \times 1000 = \mathbf{5834}$   (3 शून्य → 3 स्थान दाईं ओर)
• $5.8 \times 1000 = \mathbf{5800}$     (आवश्यकता पड़ने पर दाईं ओर शून्य बढ़ाएं!)

6.2 दो दशमलव संख्याओं का गुणन: दशमलव स्थानों का योग नियम

दो दशमलव संख्याओं का परस्पर गुणन करने की तीन-चरणीय प्रमाणित विधि:

1
चरण 1: दशमलव बिंदुओं की उपेक्षा करके गुणा करें: दोनों संख्याओं के दशमलव बिंदुओं को अनदेखा करते हुए उन्हें सामान्य पूर्ण संख्याओं की भांति गुणा करें।
2
चरण 2: दशमलव स्थानों का योग ज्ञात करें: दोनों गुणकों के दशमलव स्थानों की कुल संख्या जोड़ें: $$\text{गुणनफल के कुल दशमलव स्थान} = \text{प्रथम संख्या के स्थान} + \text{द्वितीय संख्या के स्थान}$$
3
चरण 3: दाईं ओर से गिनकर दशमलव बिंदु लगाएं: प्राप्त गुणनफल में चरम दाईं ओर से गिनकर उतने ही स्थानों के पहले दशमलव बिंदु लगाएं। यदि अंक कम पड़ें, तो बाईं ओर शून्य ($0$) जोड़ें।
स्पष्ट उदाहरण: $0.24 \times 0.03$ का मान ज्ञात करें:
  • पूर्ण संख्याओं का गुणन: $24 \times 3 = 72$
  • दशमलव स्थानों का योग: $2 \text{ स्थान (0.24 में)} + 2 \text{ स्थान (0.03 में)} = 4 \text{ स्थान}$
  • चूंकि $72$ में केवल दो अंक हैं, अतः $4$ स्थान पूरे करने के लिए बाईं ओर दो शून्य लगाकर बिंदु लगाएंगे:
$$0.24 \times 0.03 = \mathbf{0.0072}$$

मॉड्यूल 7: दशमलवों का भाग: 10 की घातों के विस्थापन एवं भाजक पूर्णांकन विधि

7.1 10 की घातों से भाग: दशमलव बिंदु का बाईं ओर विस्थापन नियम

जब किसी दशमलव संख्या को $10, 100, 1000$ से भाग दिया जाता है, तो दशमलव बिंदु बाईं ओर उतने स्थान खिसक जाता है जितने भाजक में शून्य होते हैं:

• $427.5 \div 10 = \mathbf{42.75}$  (1 शून्य → 1 स्थान बाईं ओर)
• $427.5 \div 100 = \mathbf{4.275}$  (2 शून्य → 2 स्थान बाईं ओर)
• $427.5 \div 1000 = \mathbf{0.4275}$ (3 शून्य → 3 स्थान बाईं ओर)
• $3.5 \div 100 = \mathbf{0.035}$     (आवश्यकता पड़ने पर बाईं ओर शून्य जोड़ें!)

7.2 दशमलव संख्या को दशमलव संख्या से भाग देना: भाजक पूर्णांकन विधि

यदि भाजक (Divisor) में दशमलव बिंदु हो, तो सीधे भाग देना अत्यंत कठिन और त्रुटिपूर्ण होता है। इसके लिए भाजक पूर्णांकन नियम अपनाया जाता है:

अकाट्य नियम: भाज्य और भाजक दोनों को $10^k$ (जहाँ $k$ भाजक के दशमलव स्थानों की संख्या है) से गुणा करके भाजक को एक पूर्ण संख्या बना लें। भिन्न का मान अपरिवर्तित रहता है: $$\frac{A}{B} = \frac{A \times 10^k}{B \times 10^k}$$
विस्तृत हल: $7.56 \div 0.3$ का मान ज्ञात करें:
  1. भिन्न रूप में लिखें: $\frac{7.56}{0.3}$
  2. भाजक ($0.3$) में 1 दशमलव स्थान है, अतः अंश और हर दोनों को $10$ से गुणा करें: $$\frac{7.56 \times 10}{0.3 \times 10} = \frac{75.6}{3}$$
  3. अब $75.6$ को पूर्ण संख्या $3$ से सामान्य रूप से विभाजित करें: $$75.6 \div 3 = \mathbf{25.2}$$

7.3 व्यावहारिक इबारती प्रश्न समाधान रणनीति (Word Problems Diagnostic)

बोर्ड परीक्षा में शब्द समस्याओं (Word Problems) को हल करते समय निम्नलिखित बिंदुओं की जांच अवश्य करें:

  • इकाइयों की एकरूपता: प्रश्न में दी गई सभी राशियों को एक ही मानक इकाई (जैसे सभी को मीटर में या सभी को रुपये में) में बदलें।
  • एकैकी नियम (Unitary Method): यदि कई वस्तुओं का कुल मूल्य दिया हो और एक का पूछा जाए, तो भाग करें; यदि एक का दिया हो और कई का पूछा जाए, तो गुणा करें।
  • अंतिम उत्तर में इकाई लिखना: संख्यात्मक उत्तर के साथ संबंधित इकाई (उदा. ₹, kg, m, L) लिखना कभी न भूलें।

महत्वपूर्ण सूत्र, सर्वसमिकाएँ एवं प्रमेय

आधार-10 भिन्नात्मक स्थानीय मान सूत्र (Base-10 Fractional Place Value Formula)
$$स्थानीय मान = अंकीय मान × {1}{10^k} = अंकीय मान × 10^{-k}$$
अंतिम शून्यों का अपरिवर्तनीयता नियम (Trailing Zeros Invariance Principle)
$$0.a_1 a_2 … a_k = 0.a_1 a_2 … a_k {00… 0}_{m शून्य} = {a_1 a_2 … a_k}{10^k}$$
शांत दशमलव से साधारण भिन्न में रूपांतरण सूत्र (Terminating Decimal to Vulgar Fraction Formula)
$$N.d_1 d_2 … d_k = {बिना दशमलव की पूरी संख्या}{10^k} = {(N × 10^k) + _{i=1}^k d_i 10^{k-i}}{10^k}$$
10 की घात वाली तुल्य हर रूपांतरण विधि (Equivalent Denominator Power-of-10 Conversion)
$${a}{2^m × 5^n} = {a × 2^{k-m} × 5^{k-n}}{10^k} जहाँ k = (m, n)$$
SI मीट्रिक मात्रक दशमलव रूपांतरण सर्वसमिका (SI Metric Unit Decimal Conversion Identity)
$$बड़ी इकाई में मान = {छोटी इकाई में मान}{10^p} (p = 2 मी/सेमी, रुपये/पैसे हेतु; p = 3 किमी/मी, किग्रा/ग्रा, ली/मिली हेतु)$$
10 की घातों से दशमलव बिंदु विस्थापन नियम (Powers of 10 Decimal Shift Principle)
$$x × 10^n ⇒ दशमलव बिंदु n स्थान दाईं ओर; x 10^n ⇒ दशमलव बिंदु n स्थान बाईं ओर$$
गुणनफल में दशमलव स्थानों का योग नियम (Product Decimal Places Summation Law)
$$गुणनफल के कुल दशमलव स्थान = DecPlaces(A) + DecPlaces(B)$$
भाजक पूर्णांकन नियम (भागफल अपरिवर्तनीयता सिद्धांत) (Divisor Integerization Principle)
$${A}{B} = {A × 10^k}{B × 10^k} जहाँ k = DecPlaces(B)$$

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
दशमलव संख्या $745.385$ का भिन्नात्मक तथा दशमलव दोनों रूपों में प्रसारित रूप लिखिए। साथ ही इस संख्या में आने वाले दोनों पांच (5) के स्थानीय मानों का अंतर ज्ञात कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

चरण 1: प्रसारित रूप लिखना:
• भिन्नात्मक प्रसारित रूप (Fractional Expanded Form):

$$745.385 = 700 + 40 + 5 + \frac{3}{10} + \frac{8}{100} + \frac{5}{1000}$$


• दशमलव प्रसारित रूप (Decimal Expanded Form):

$$745.385 = 700 + 40 + 5 + 0.3 + 0.08 + 0.005$$



चरण 2: दोनों पांच के स्थानीय मान ज्ञात करना:
• पहला $5$ इकाई के स्थान पर है: $\text{स्थानीय मान} = 5 \times 1 = 5.000$
• दूसरा $5$ सहस्त्रांश के स्थान पर है: $\text{स्थानीय मान} = 5 \times \frac{1}{1000} = 0.005$

चरण 3: स्थानीय मानों का अंतर ज्ञात करना:
दशमलव बिंदुओं को संरेखित करके घटाने पर:

$$\begin{array}{r@{\quad}l} 5.000 & \\ - 0.005 & \\ \hline \mathbf{4.995} & \end{array}$$



अंतिम उत्तर:
दोनों पांच के स्थानीय मानों का अभीष्ट अंतर $4.995$ है।

उदाहरण 2
(क) दशमलव संख्या $3.075$ को उसके सरलतम रूप में मिश्र भिन्न में बदलिए।\n(ख) मिश्र भिन्न $4\frac{7}{16}$ को एक शांत दशमलव संख्या में रूपांतरित कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
भाग (क): $3.075$ को सरलतम मिश्र भिन्न में बदलना:
पूर्णांक भाग $3$ है तथा दशमलव भाग $0.075$ है।
$$3.075 = 3 + \frac{75}{1000}$$
अंश ($75$) और हर ($1000$) दोनों को उनके महत्तम समापवर्तक ($25$) से विभाजित करने पर:
$$\frac{75 \div 25}{1000 \div 25} = \frac{3}{40}$$
अतः मिश्र भिन्न = $3\frac{3}{40}$

भाग (ख): $4\frac{7}{16}$ को दशमलव में बदलना:
पूर्णांक भाग $4$ है। अब भिन्नात्मक भाग $\frac{7}{16}$ को दशमलव में बदलते हैं।
चूंकि $16 = 2^4$, हम अंश और हर दोनों को $5^4 = 625$ से गुणा करते हैं:
$$\frac{7}{16} = \frac{7 \times 625}{16 \times 625} = \frac{4375}{10000} = 0.4375$$
अब पूर्णांक और दशमलव भाग को जोड़ने पर:
$$4 + 0.4375 = \mathbf{4.4375}$$

अंतिम उत्तर:
(क) $3.075 = \mathbf{3\frac{3}{40}}$   |   (ख) $4\frac{7}{16} = \mathbf{4.4375}$
उदाहरण 3
सरल कीजिए: $(34.8 + 6.275 + 109.04) - 87.658$। सभी गणना चरणों को ऊर्ध्वाधर स्तंभ संरेखण सहित दर्शाइए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

चरण 1: संख्याओं को समान दशमलव (3 दशमलव स्थान) में बदलना:
• $34.8 = 34.800$
• $6.275 = 6.275$
• $109.04 = 109.040$

चरण 2: ऊर्ध्वाधर संरेखण द्वारा योगफल ज्ञात करना:

$$\begin{array}{r@{\quad}l} 34.800 & \\ 6.275 & \\ + 109.040 & \\ \hline \mathbf{150.115} & \end{array}$$



चरण 3: योगफल ($150.115$) में से $87.658$ को घटाना:

$$\begin{array}{r@{\quad}l} 150.115 & \\ - 87.658 & \\ \hline \mathbf{62.457} & \end{array}$$


घटाव का विवरण:
• सहस्त्रांश: $5 - 8$ संभव नहीं, उधार लिया $15 - 8 = 7$
• शतांश: $0 - 5$ संभव नहीं, उधार लिया $10 - 5 = 5$
• दशांश: $0 - 6$ संभव नहीं, उधार लिया $10 - 6 = 4$
• इकाई: $9 - 7 = 2$
• दहाई: $14 - 8 = 6$

अंतिम उत्तर:
अभिष्ट मान $62.457$ है।

उदाहरण 4
एक आयताकार खेल के मैदान की लंबाई $24.75\text{ m}$ और चौड़ाई $16.4\text{ m}$ है।\n(क) मैदान का कुल क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।\n(ख) यदि मैदान में घास लगाने की दर ₹$12.50$ प्रति वर्ग मीटर हो, तो कुल घास लगाने का व्यय ज्ञात कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
भाग (क): मैदान का क्षेत्रफल ज्ञात करना:
आयताकार मैदान की लंबाई ($L$) = $24.75\text{ m}$ (2 दशमलव स्थान)
आयताकार मैदान की चौड़ाई ($B$) = $16.4\text{ m}$ (1 दशमलव स्थान)
$$\text{क्षेत्रफल} = \text{लंबाई} \times \text{चौड़ाई} = 24.75 \times 16.4$$
चरण i: पूर्ण संख्याओं का गुणन:
$$2475 \times 164 = 405900$$
चरण ii: कुल दशमलव स्थान: $2 + 1 = 3\text{ स्थान}$
गुणनफल में दाईं ओर से 3 स्थान गिनकर दशमलव बिंदु लगाने पर:
$$\text{क्षेत्रफल} = 405.900 = \mathbf{405.9\text{ m}^2}$$

भाग (ख): घास लगाने का कुल व्यय ज्ञात करना:
प्रति वर्ग मीटर दर = ₹$12.50$
कुल व्यय = $\text{क्षेत्रफल} \times \text{दर} = 405.9 \times 12.50$
चरण i: पूर्ण संख्याओं का गुणन:
$$4059 \times 125 = 507375$$
चरण ii: कुल दशमलव स्थान:
$405.9$ में 1 स्थान तथा $12.5$ में 1 स्थान = कुल 2 स्थान
$$\text{कुल व्यय} = \mathbf{₹5073.75}$$

अंतिम उत्तर:
(क) मैदान का क्षेत्रफल = $405.9\text{ m}^2$
(ख) घास लगाने का कुल व्यय = ₹$5,073.75$
उदाहरण 5
समान माप की $15$ लोहे की छड़ों का कुल भार $131.25\text{ kg}$ है।\n(क) प्रत्येक एक छड़ का भार ज्ञात कीजिए।\n(ख) इसी प्रकार की $28$ छड़ों का कुल भार कितना होगा?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
भाग (क): प्रत्येक एक छड़ का भार ज्ञात करना:
$15$ छड़ों का कुल भार = $131.25\text{ kg}$
एकैकी नियम के अनुसार, $1$ छड़ का भार:
$$\text{एक छड़ का भार} = 131.25 \div 15$$
दीर्घ भाग करने पर:
• $131 \div 15 = 8$ (शेषफल $= 131 - 120 = 11$)
• दशमलव बिंदु के बाद का $2$ उतारने पर संख्या बनी $112$, भागफल में दशमलव बिंदु लगाया: $8.$
• $112 \div 15 = 7$ (शेषफल $= 112 - 105 = 7$)
• अगला अंक $5$ उतारने पर संख्या बनी $75$
• $75 \div 15 = 5$ (शेषफल $= 0$)
अतः $1$ छड़ का भार = $8.75\text{ kg}$

भाग (ख): $28$ छड़ों का कुल भार ज्ञात करना:
$$\text{कुल भार} = 8.75 \times 28$$
पूर्ण संख्याओं का गुणा करने पर:
$$875 \times 28 = 24500$$
चूंकि $8.75$ में $2$ दशमलव स्थान हैं, अतः गुणनफल में दाईं ओर से $2$ स्थान पहले दशमलव बिंदु लगाएंगे:
$$\text{कुल भार} = 245.00 = \mathbf{245\text{ kg}}$$

अंतिम उत्तर:
(क) एक छड़ का भार = $8.75\text{ kg}$
(ख) $28$ छड़ों का कुल भार = $245\text{ kg}$
उदाहरण 6
एक किराना व्यापारी ने $45.5\text{ kg}$ बासमती चावल ₹$42.80$ प्रति किग्रा की दर से खरीदे। उसने इसमें से $24.25\text{ kg}$ चावल ₹$48.00$ प्रति किग्रा की दर से बेचे तथा शेष चावल ₹$46.50$ प्रति किग्रा की दर से बेचे।\n(क) व्यापारी का कुल क्रय मूल्य ज्ञात कीजिए।\n(ख) शेष बचे चावल की मात्रा ज्ञात कीजिए।\n(ग) दोनों बिक्रियों से प्राप्त कुल विक्रय मूल्य ज्ञात कीजिए।\n(घ) व्यापारी को पूरे सौदे में कुल कितना लाभ अथवा हानि हुई?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

भाग (क): कुल क्रय मूल्य (Cost Price - CP) ज्ञात करना:
चावल की कुल मात्रा = $45.5\text{ kg}$
खरीद दर = ₹$42.80$ प्रति किग्रा

$$\text{कुल CP} = 45.5 \times 42.80$$


$455 \times 428 = 194740$
कुल दशमलव स्थान = $1 + 1 = 2\text{ स्थान}$ (अंतिम शून्य हटाने के बाद)

$$\text{कुल CP} = \mathbf{₹1947.40}$$



भाग (ख): शेष बचे चावल की मात्रा ज्ञात करना:
समान दशमलव बनाकर घटाने पर:

$$\text{शेष चावल} = 45.50 - 24.25 = \mathbf{21.25\text{ kg}}$$



भाग (ग): कुल विक्रय मूल्य (Selling Price - SP) ज्ञात करना:
• प्रथम बिक्री ($24.25\text{ kg}$ @ ₹$48.00$):

$$\text{SP}_1 = 24.25 \times 48 = 1164.00 = ₹1164.00$$


• द्वितीय बिक्री ($21.25\text{ kg}$ @ ₹$46.50$):

$$\text{SP}_2 = 21.25 \times 46.5 = 988.125 = ₹988.125$$


• कुल SP:

$$\text{कुल SP} = 1164.000 + 988.125 = \mathbf{₹2152.125} \approx \mathbf{₹2152.13}$$



भाग (घ): कुल लाभ (Profit) ज्ञात करना:
चूंकि कुल विक्रय मूल्य कुल क्रय मूल्य से अधिक है ($\text{SP} > \text{CP}$), अतः व्यापारी को लाभ हुआ:

$$\text{लाभ} = \text{कुल SP} - \text{कुल CP} = 2152.125 - 1947.400$$


$$\begin{array}{r@{\quad}l} 2152.125 & \\ - 1947.400 & \\ \hline \mathbf{204.725} & \end{array}$$


निकटतम पैसे में व्यक्त करने पर लाभ = ₹$204.73$ (या यथार्थ मान ₹$204.725$)

अंतिम उत्तर:
(क) कुल क्रय मूल्य = ₹$1,947.40$
(ख) शेष चावल की मात्रा = $21.25\text{ kg}$
(ग) कुल विक्रय मूल्य = ₹$2,152.13$
(घ) कुल लाभ = ₹$204.73$

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

दशमलव के बाद वाले भिन्नात्मक भाग को संयुक्त संख्या के रूप में पढ़ना (जैसे 15.48 को 'पंद्रह दशमलव अड़तालीस' पढ़ना)।

सही वैज्ञानिक तथ्य

15.48 को अनिवार्य रूप से 'पंद्रह दशमलव चार आठ' पढ़ा जाना चाहिए।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

दशमलव संख्याओं की तुलना में 'लंबाई का पूर्वाग्रह' रखना (जैसे 0.089 को 0.4 से बड़ा समझ लेना क्योंकि 89 संख्या 4 से बड़ी है)।

सही वैज्ञानिक तथ्य

0.4 संख्या 0.089 से निश्चित रूप से बड़ी है (0.4 > 0.089)।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

जोड़ते या घटाते समय दशमलव बिंदुओं की उपेक्षा करके अंकों को दाएँ किनारे से संरेखित कर देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

जोड़ या घटाव से पहले सभी दशमलव बिंदुओं (.) को एक-दूसरे के ठीक नीचे सीधी ऊर्ध्वाधर रेखा में संरेखित करें।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

गुणनफल में आवश्यक स्थानों को पूरा करने के लिए शून्य लगाना भूल जाना (जैसे 0.2 × 0.3 = 0.6 लिख देना)।

सही वैज्ञानिक तथ्य

0.2 × 0.3 = 0.06 (क्योंकि कुल 1 + 1 = 2 दशमलव स्थान चाहिए)।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

भाग करते समय भाजक का दशमलव हटाते हुए भाज्य को 10 की उसी घात से गुणा करना भूल जाना (जैसे 36 ÷ 0.04 को 36 ÷ 4 = 9 लिख देना)।

सही वैज्ञानिक तथ्य

36 ÷ 0.04 में दोनों को 100 से गुणा करके 3600 ÷ 4 = 900 ज्ञात किया जाता है (न कि 9)।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

मीट्रिक रूपांतरण में आवश्यक शून्य छोड़ देना (जैसे ₹7 और 5 पैसे को ₹7.5 लिख देना, या 4 किमी 25 मी को 4.25 किमी लिखना)।

सही वैज्ञानिक तथ्य

₹7 और 5 पैसे = ₹7.05 तथा 4 किमी 25 मी = 4.025 किमी।

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

ICSE कक्षा 6 गणित • दशमलव (Decimals: स्थानीय मान, संक्रियाएं एवं रूपांतरण) आधार-10 भिन्नात्मक विस्तार • स्थानीय मान सारणी • संख्या रेखा आवर्धन • समान व असमान दशमलव • चार मूलभूत संक्रियाएं CISCE / ICSE कक्षा 6 1. आधार-10 दशमलव स्थानीय मान संरचना एवं प्रसारित रूप (Place Value & Expanded Notation) सैकड़ा (Hundreds: 100) 3 3 × 100 = 300 दहाई (Tens: 10) 7 7 × 10 = 70 इकाई (Units: 1) 5 5 × 1 = 5 बिंदु विभाजक (.) दशांश (Tenths: 1/10 = 0.1) 4 4/10 = 0.4 शतांश (Hundredths: 1/100) 8 8/100 = 0.08 सहस्त्रांश (Thousandths: 1/1000) 2 2/1000 = 0.002 प्रसारित रूप (Expanded Notation): 375.482 = 300 + 70 + 5 + 0.4 + 0.08 + 0.002 = 300 + 70 + 5 + (4/10) + (8/100) + (2/1000) 2. संख्या रेखा आवर्धन (Number Line Magnification) स्तर 1: अंतराल [0 से 1] दशांशों (0.1) में 0 0.6 1 ज़ूम [0.6 से 0.7] स्तर 2: शतांश ग्रिड (0.01 के पद) 0.60 0.64 0.70 अंतिम शून्यों का अपरिवर्तनीयता नियम: 0.5 = 0.50 = 0.500 = 5/10 = 1/2 • दशमलव के बाद चरम दाईं ओर शून्य लगाने से   दशमलव संख्या के मान में कोई परिवर्तन नहीं होता! • असमान दशमलवों को समान में बदलने का मुख्य नियम। 3. दशमलव एवं भिन्न रूपांतरण सेतु (Conversion) क. शांत दशमलव → सरलतम भिन्न 0.75 = 75/100 ÷ 25/25 = 3/4 • दशमलव हटाकर अंश में पूरी संख्या लिखें। • हर में 1 के आगे दशमलव अंकों जितने शून्य रखें व सरल करें। ख. साधारण भिन्न → दशमलव (तुल्य हर विधि) 3/8 = (3 × 125) / (8 × 125) = 375/1000 = 0.375 • हर को 10, 100 या 1000 में बदलें:   2 × 5 = 10 | 4 × 25 = 100 | 8 × 125 = 1000 • यदि हर में 2 या 5 न हों तो दीर्घ भाग विधि अपनाएं। मानक तुल्यता स्मृति बैंक (Benchmark Equivalents): 1/2 = 0.5 1/4 = 0.25 3/4 = 0.75 1/5 = 0.2 2/5 = 0.4 4/5 = 0.8 1/8 = 0.125 3/8 = 0.375 5/8 = 0.625 4. दशमलव संक्रियाएं एवं विस्थापन नियम (Operations) 1. स्तंभ संरेखण नियम (योग एवं घटाव):   12.350 ← शून्य जोड़कर समान दशमलव बनाएं +  4.082 ← दशमलव बिंदुओं को सीधा संरेखित करें   16.432 2. गुणन में दशमलव स्थानों का योग नियम: 0.24 (2 स्थान) × 0.3 (1 स्थान) = 0.072 (3 स्थान) • पूर्ण संख्याओं की भांति गुणा करें: 24 × 3 = 72। • कुल स्थान = 2 + 1 = 3 → आगे शून्य जोड़कर 0.072 लिखें। 3. 10 की घातों के विस्थापन नियम: गुणा (× 10ⁿ) → दशमलव बिंदु दाईं ओर खिसकेगा 4.275 × 100 = 427.5 (2 शून्य → 2 स्थान दाईं ओर) भाग (÷ 10ⁿ) → दशमलव बिंदु बाईं ओर खिसकेगा 427.5 ÷ 100 = 4.275 (2 शून्य → 2 स्थान बाईं ओर) 💡 भाजक में दशमलव होने पर: दोनों को 10ⁿ से गुणा कर भाजक को पूर्णांक बनाएं! TargetExams मास्टर अध्ययन सामग्री • CISCE / ICSE कक्षा 6 गणित • दशमलव (Decimals) संपूर्ण मार्गदर्शिका www.targetexams.com

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
दशमलव संख्या आधार-10 स्थानीय मान प्रणाली का ही विस्तार है, जिसमें हर 10 की घातें (10, 100, 1000 आदि) होती हैं।
मुख्य बिंदु 2
प्रत्येक दशमलव संख्या के तीन अभिन्न अंग होते हैं: पूर्णांक भाग, दशमलव बिंदु विभाजक, और दशमलव भिन्नात्मक भाग।
मुख्य बिंदु 3
इकाई के स्थान के दाईं ओर के स्थान क्रमशः दशांश (1/10 = 0.1), शतांश (1/100 = 0.01) और सहस्त्रांश (1/1000 = 0.001) होते हैं।
मुख्य बिंदु 4
दशमलव संख्या को भिन्नात्मक प्रसारित रूप और दशमलव प्रसारित रूप—इन दो पूरक प्रारूपों में व्यक्त किया जाता है।
मुख्य बिंदु 5
संख्या रेखा पर दो पूर्ण संख्याओं के अंतराल को 10 बराबर भागों में बांटकर दशांश तथा पुनः 10 भागों में बांटकर शतांश निरूपित किए जाते हैं।
मुख्य बिंदु 6
अंतिम शून्यों के अपरिवर्तनीयता नियम के अनुसार किसी दशमलव संख्या के चरम दाईं ओर शून्य जोड़ने से संख्या का मान नहीं बदलता (0.5 = 0.50 = 0.500)।
मुख्य बिंदु 7
दशमलव संख्याओं की तुलना बाएँ से दाएँ स्थानीय मानों के क्रम में की जाती है; पहले पूर्णांक भाग, फिर दशांश, फिर शतांश की तुलना होती है।
मुख्य बिंदु 8
दशमलव को सरलतम भिन्न में बदलने के लिए हर में 10 की उपयुक्त घात रखकर महत्तम समापवर्तक (HCF) से विभाजित किया जाता है।
मुख्य बिंदु 9
दशमलवों के जोड़ और घटाव में दशमलव बिंदुओं को एक सीधी ऊर्ध्वाधर रेखा में संरेखित करना और असमान स्थानों पर शून्य जोड़ना अनिवार्य है।
मुख्य बिंदु 10
10 की घातों से गुणा करने पर दशमलव बिंदु दाईं ओर तथा भाग देने पर बाईं ओर खिसकता है; दो दशमलवों के गुणन में दशमलव स्थानों का योग किया जाता है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
दशमलव संख्या 508.064 का भिन्नात्मक एवं दशमलव दोनों रूपों में प्रसारित रूप लिखिए तथा इसमें अंक 6 का स्थानीय मान बताइए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: भिन्नात्मक रूप = 500 + 8 + 6/100 + 4/1000; दशमलव रूप = 500 + 8 + 0.06 + 0.004। अंक 6 शतांश के स्थान पर है, अतः इसका स्थानीय मान 6/100 = 0.06 है।
शतांश के स्थान का मान 1/100 होता है।
2
दी गई संख्याओं को आरोही क्रम (छोटे से बड़े क्रम) में व्यवस्थित कीजिए: 2.3, 2.03, 2.305, 2.003, 2.33
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: समान दशमलव में बदलने पर: 2.003 < 2.030 < 2.300 < 2.305 < 2.330। अतः आरोही क्रम: 2.003, 2.03, 2.3, 2.305, 2.33।
सभी को 3 दशमलव स्थानों वाले समान दशमलव में बदलें: 2.300, 2.030, 2.305, 2.003, 2.330।
3
भिन्न 7/40 को बिना दीर्घ भाग का प्रयोग किए एक शांत दशमलव संख्या में बदलिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: अंश और हर को 25 से गुणा करने पर: (7 × 25) / (40 × 25) = 175 / 1000 = 0.175।
40 = 8 × 5 = 2³ × 5¹। हर को 1000 बनाने के लिए 25 से गुणा करें।
4
सरल कीजिए: 72.5 - 38.648 + 14.07
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: योग = 72.500 + 14.070 = 86.570। व्यवकलन = 86.570 - 38.648 = 47.922।
पहले धनात्मक संख्याओं को जोड़ें: 72.500 + 14.070 = 86.570, फिर 38.648 घटाएं।
5
मान ज्ञात कीजिए: 0.035 × 1.2
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: 35 × 12 = 420। 4 दशमलव स्थान लगाने पर: 0.0420 = 0.042।
पूर्ण संख्याओं का गुणा करें: 35 × 12 = 420। कुल दशमलव स्थान = 3 + 1 = 4।
6
यदि 18 मीटर कपड़े का कुल मूल्य ₹976.50 हो, तो 1 मीटर कपड़े का मूल्य ज्ञात कीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: 976.50 ÷ 18 = ₹54.25 प्रति मीटर।
एकैकी नियम के अनुसार 976.50 को 18 से विभाजित करें।
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कक्षा 6 Mathematics के सभी अध्याय

अध्याय 1: संख्या प्रणाली (संख्या का समेकन) (Number System (Consolidating Sense of Number)) अध्याय 2: अनुमान और पूर्णांकन (Estimation and Rounding Off) अध्याय 3: प्राकृतिक संख्याएँ और पूर्ण संख्याएँ (Natural Numbers and Whole Numbers) अध्याय 4: ऋणात्मक संख्याएँ और पूर्णांक (Negative Numbers and Integers) अध्याय 5: भिन्न (Fractions) अध्याय 6: दशमलव (Decimals) अध्याय 7: सेट का विचार और सेट के प्रकार (Idea of Sets and Types of Sets) अध्याय 8: अनुपात और समानुपात (Ratio and Proportion) अध्याय 9: ऐकिक नियम (Unitary Method) अध्याय 10: बीजगणित की मूलभूत अवधारणाएँ (Fundamental Concepts of Algebra) अध्याय 11: एक चर वाले रैखिक समीकरण (Linear Equations) अध्याय 12: बुनियादी ज्यामितीय अवधारणाएँ (Basic Geometrical Concepts) अध्याय 13: त्रिभुज और चतुर्भुज (Triangles and Quadrilaterals) अध्याय 14: समतल आकृतियों का परिमाप और क्षेत्रफल (Perimeter and Area of Plane Figures) अध्याय 15: डेटा प्रबंधन (बार ग्राफ़ और टेबल्स) (Data Handling (Bar Graphs and Tables))

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