वात्सल्य रस का अनुपम उदाहरण:
कवि अपनी नन्हीं बिटिया की चंचलता, उसकी निष्पाप मुस्कान और छोटी-छोटी बाल-सुलभ हठों का अत्यंत भावुक वर्णन करते हैं। बिटिया की उपस्थिति मात्र से घर की सारी चिंताएँ और थकान मिट जाती हैं।
ICSE कक्षा 7 हिंदी की यह अत्यंत संवेदनशील और वात्सल्य रस से ओतप्रोत कविता "मेरी बिटिया रानी" में कवि ने पिता-पुत्री के निश्छल प्रेम, पुत्री की बाल-सुलभ क्रीड़ाओं और उसके प्रति असीम स्नेह का मार्मिक चित्रण किया है। यह कविता बेटी के महत्व और स्त्री-शिक्षा के सम्मान का प्रेरक संदेश देती है।
यह कविता विद्यार्थियों में वात्सल्य रस, पारिवारिक आत्मीयता और समाज में बेटियों के प्रति सम्मान व समता की दृष्टि का विकास करती है।
कवि अपनी नन्हीं बिटिया की चंचलता, उसकी निष्पाप मुस्कान और छोटी-छोटी बाल-सुलभ हठों का अत्यंत भावुक वर्णन करते हैं। बिटिया की उपस्थिति मात्र से घर की सारी चिंताएँ और थकान मिट जाती हैं।
कविता यह संदेश भी देती है कि बेटियाँ किसी पर बोझ नहीं हैं, बल्कि वे परिवार का गौरव और भविष्य हैं। उन्हें शिक्षित और स्वावलंबी बनाना प्रत्येक समाज का प्राथमिक कर्तव्य है।
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इस कविता में वात्सल्य रस की प्रधानता है। जब माता-पिता का अपनी संतान के प्रति निश्छल, निःस्वार्थ और कोमल प्रेम काव्य में व्यक्त होता है, तो वहाँ वात्सल्य रस उत्पन्न होता है। कवि अपनी बेटी की भोली मुस्कान और बाल-लीलाओं को देखकर भाव-विभोर हो उठते हैं।
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