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JAC • Class X • Science • Ch 11
Estimated Time: 45 Mins
Study Progress: In Progress

Electricity

विद्युत (Electricity) आधुनिक मानव सभ्यता की जीवनरेखा है। हमारे घरों की रोशनी, पंखे, रेफ्रिजरेटर, कंप्यूटर से लेकर विशाल औद्योगिक संयंत्रों और तीव्रगामी ट्रेनों का संचालन विद्युत ऊर्जा पर ही निर्भर है। विद्युत का मूल आधार विद्युत आवेश (Electric Charge - $Q$) है, जिसका SI मात्रक कूलॉम (Coulomb, C) है। एक इलेक्ट्रॉन पर $-1.6 \times 10^{-19}\text{ C}$ का ऋण आवेश होता है। किसी चालक के किसी अनुप्रस्थ काट से एकांक समय में प्रवाहित होने वाले आवेश की मात्रा को विद्युत धारा (Electric Current - $I$) कहते हैं ($I = Q/t$)। इसका SI मात्रक एम्पीयर (Ampere, A) है और इसे परिपथ में सदैव श्रेणीक्रम में जुड़े एमीटर (Ammeter) द्वारा मापा जाता है। किसी परिपथ में आवेशों को प्रवाहित कराने के लिए विद्युत दाब में अंतर होना आवश्यक है, जिसे विद्युत विभवांतर (Potential Difference - $V$) कहते हैं ($V = W/Q$)। इसका मात्रक वोल्ट (Volt, V) है और इसे परिपथ के सिरों पर पार्श्वक्रम (समांतर क्रम) में जुड़े वोल्टमीटर (Voltmeter) द्वारा मापा जाता है। जर्मन भौतिक विज्ञानी जॉर्ज साइमन ओम द्वारा प्रतिपादित ओम का नियम (Ohm's Law) धारा और विभवांतर के मध्य मौलिक संबंध ($V = IR$) स्थापित करता है। किसी चालक का प्रतिरोध (Resistance - $R$) उसकी लंबाई ($l$) के अनुक्रमानुपाती, अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल ($A$) के व्युत्क्रमानुपाती तथा पदार्थ की विद्युत प्रतिरोधकता (Resistivity - $\rho$) पर निर्भर करता है ($R = \rho \frac{l}{A}$, मात्रक: $\Omega\cdot\text{m}$)। प्रतिरोधकों के दो मुख्य संयोजन होते हैं: (1) श्रेणीक्रम संयोजन (Series Combination)—जिसमें तुल्य प्रतिरोध $R_s = R_1 + R_2 + R_3$ होता है, धारा समान रहती है और विभवांतर विभाजित होता है। (2) पार्श्वक्रम या समांतर क्रम संयोजन (Parallel Combination)—जिसमें तुल्य प्रतिरोध का व्युत्क्रम $\frac{1}{R_p} = \frac{1}{R_1} + \frac{1}{R_2} + \frac{1}{R_3}$ होता है, विभवांतर समान रहता है और परिपथ का कुल प्रतिरोध न्यूनतम हो जाता है (घरेलू वायरिंग में अत्यंत उपयोगी)। विद्युत धारा के प्रवाहित होने पर प्रतिरोध के कारण ऊष्मा उत्पन्न होती है, जिसे जूल का तापन नियम (Joule's Law of Heating - $H = I^2Rt$) कहते हैं (विद्युत हीटर, टोस्टर, प्रेस और सुरक्षा फ्यूज इसी पर कार्य करते हैं)। विद्युत ऊर्जा के उपभोग की दर को विद्युत शक्ति (Electric Power - $P = VI = I^2R = \frac{V^2}{R}$) कहते हैं, जिसका मात्रक वाट (W) है। विद्युत ऊर्जा का व्यावसायिक मात्रक किलोवाट-घंटा (kWh / 1 Unit = $3.6 \times 10^6\text{ J}$) होता है।

⚡ क्या आपने कभी सोचा है: जब आप दीवार का स्विच दबाते हैं, तो पंखा और बल्ब एक मिलीसेकंड में कैसे चालू हो जाते हैं?

जरा सोचिए: बिजली के तार के अंदर इलेक्ट्रॉन कछुए से भी धीमी गति—मात्र कुछ मिलीमीटर प्रति सेकंड की ड्रिफ्ट चाल (Drift velocity)—से रेंगते हैं। तो फिर जैसे ही आप कमरे की दीवार पर स्विच 'ऑन' करते हैं, उसी क्षण छत पर लगा पंखा या 100 मीटर दूर लगा बल्ब पलक झपकते ही कैसे जल उठता है? क्या इलेक्ट्रॉन तार के एक सिरे से दौड़कर दूसरे सिरे तक पहुँचे? बिल्कुल नहीं! जब आप स्विच ऑन करते हैं, तो पूरे तार में प्रकाश की गति (3,00,000 किमी/सेकंड) से एक विद्युत क्षेत्र (Electric Field) का संचरण होता है, जो तार के अंदर मौजूद खरबों इलेक्ट्रॉनों को एक साथ आगे की ओर धक्का देता है—ठीक वैसे ही जैसे पानी से भरी नली में एक सिरे पर पानी डालते ही दूसरे सिरे से तुरंत पानी बाहर गिर जाता है! इतना ही नहीं, क्या कभी आपने विचार किया कि हमारे घरों की वायरिंग में सभी उपकरण 'समांतर क्रम' में ही क्यों जोड़े जाते हैं, यदि उन्हें 'श्रेणीक्रम' में जोड़ दिया जाए तो क्या होगा? और बिजली का बिल निकालने वाला '1 यूनिट' वास्तव में कितनी जूल ऊर्जा के बराबर होता है? आइए, इस अध्याय में विद्युत के इस जादुई परिपथ का पूर्ण विश्लेषण करें!

Why This Chapter Matters

इस अध्याय का अध्ययन आपके लिए क्यों अनिवार्य है?

  1. बोर्ड परीक्षा में सर्वाधिक अंक भार: JAC कक्षा 10वीं विज्ञान परीक्षा में "ओम का नियम एवं प्रायोगिक सत्यापन", "श्रेणीक्रम बनाम पार्श्वक्रम संयोजन के सूत्र व्युत्पत्ति", "जूल का तापन नियम", तथा "विद्युत शक्ति एवं बिजली बिल की गणना पर आधारित संख्यात्मक प्रश्न" से 8 से 10 अंक के प्रश्न निश्चित पूछे जाते हैं।
  2. JEE / NEET भौतिकी का आधारस्तम्भ: 12वीं भौतिकी का 'Current Electricity' अध्याय पूरी तरह इसी नींव पर खड़ा है।
  3. दैनिक जीवन एवं घरेलू सुरक्षा: घर के बिजली बिल का हिसाब लगाना, सही रेटिंग का विद्युत फ्यूज चुनना और शॉर्ट सर्किट व आग लगने के खतरों से सुरक्षा की वैज्ञानिक समझ।

Before You Begin (Prerequisites)

  • परमाणु संरचना (धनावेशित प्रोटॉन, ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन)।
  • कार्य और ऊर्जा की आधारभूत संकल्पना (कार्य = बल × विस्थापन, मात्रक जूल)।
  • बीजगणितीय समीकरणों को हल करने तथा भिन्नों का योग (ल.स.) निकालने की क्षमता।

What You Will Learn (Core Objectives)

  • विद्युत आवेश ($Q = ne$), विद्युत धारा ($I = Q/t$) और विभवांतर ($V = W/Q$) की परिभाषा और मात्रक स्पष्ट कर सकेंगे।
  • ओम के नियम ($V = IR$) का कथन, $I-V$ ग्राफ और प्रायोगिक सत्यापन का परिपथ आरेख बना सकेंगे।
  • चालक के प्रतिरोध को प्रभावित करने वाले कारकों ($R = \rho l / A$) और प्रतिरोधकता का विश्लेषण कर सकेंगे।
  • प्रतिरोधकों के श्रेणीक्रम ($R_s$) एवं पार्श्वक्रम ($R_p$) संयोजन के सूत्रों की व्युत्पत्ति कर जटिल परिपथों का तुल्य प्रतिरोध निकाल सकेंगे।
  • जूल के तापन नियम ($H = I^2Rt$) और विद्युत शक्ति ($P = VI$) का उपयोग कर संख्यात्मक प्रश्न हल कर सकेंगे तथा किलोवाट-घंटा में बिजली बिल की गणना कर सकेंगे।

Chapter Roadmap & Progression

1 1. विद्युत आवेश, विद्युत धारा एवं व...
2 2. ओम का नियम, प्रतिरोध एवं प्रतिरो...
3 3. प्रतिरोधकों का संयोजन: श्रेणीक्र...
4 4. विद्युत धारा का तापीय प्रभाव एवं...
5 5. विद्युत शक्ति एवं विद्युत ऊर्जा...

Complete Concept Guide (100% Curriculum Coverage)

1. विद्युत आवेश, विद्युत धारा एवं विद्युत विभव

(क) विद्युत आवेश (Electric Charge - $Q$)

  • पदार्थ का वह मूल गुण जिसके कारण वह विद्युत एवं चुंबकीय प्रभाव उत्पन्न करता है तथा अनुभव करता है।
  • आवेश दो प्रकार के होते हैं: धनावेश ($+$) तथा ऋणावेश ($-$)। सजातीय आवेश एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं तथा विजातीय आवेश आकर्षित करते हैं।
  • SI मात्रक: कूलॉम (Coulomb, C)।
  • आवेश का क्वांटमीकरण: $Q = ne$, जहाँ $n$ = इलेक्ट्रॉनों की संख्या, $e = 1.6 \times 10^{-19}\text{ C}$।
  • 1 कूलॉम आवेश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या (बोर्ड 1 अंक): $$n = \frac{Q}{e} = \frac{1}{1.6 \times 10^{-19}} = 6.25 \times 10^{18} \approx 6 \times 10^{18}\text{ इलेक्ट्रॉन}$$

(ख) विद्युत धारा (Electric Current - $I$)

किसी चालक के किसी अनुप्रस्थ काट से एकांक समय में प्रवाहित होने वाले कुल नेट आवेश की दर को विद्युत धारा कहते हैं:

$$I = \frac{Q}{t}$$
  • SI मात्रक: एम्पीयर (Ampere, A) (फ्रांसीसी वैज्ञानिक आंद्रे-मेरी एम्पीयर के सम्मान में)।
  • 1 एम्पीयर की परिभाषा (अति महत्वपूर्ण): यदि किसी चालक के किसी अनुप्रस्थ काट से 1 सेकंड में 1 कूलॉम आवेश प्रवाहित होता है, तो उस चालक में प्रवाहित धारा 1 एम्पीयर कहलाती है ($1\text{ A} = 1\text{ C/s}$)।
  • छोटे मात्रक: मिलीएम्पीयर ($1\text{ mA} = 10^{-3}\text{ A}$), माइक्रोएम्पीयर ($1\text{ }\mu\text{A} = 10^{-6}\text{ A}$)।
  • धारा की दिशा: परिपथ में विद्युत धारा की दिशा धनात्मक आवेश के प्रवाह की दिशा (यानी बैटरी के धन सिरे से ऋण सिरे की ओर) मानी जाती है, जो कि इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह की दिशा के ठीक विपरीत होती है।
  • मापन यंत्र: धारा को मापने के लिए एमीटर (Ammeter) का उपयोग किया जाता है, जिसे परिपथ में सदैव श्रेणीक्रम (Series) में जोड़ा जाता है (आदर्श एमीटर का प्रतिरोध शून्य होना चाहिए)।

(ग) विद्युत विभव एवं विभवांतर (Electric Potential Difference - $V$)

एकांक धन आवेश को अनंत से किसी बिंदु तक लाने में किए गए कार्य को उस बिंदु का विद्युत विभव कहते हैं।

किसी धारावाही विद्युत परिपथ के दो बिंदुओं के बीच एकांक धन आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में किए गए कार्य को उन दोनों बिंदुओं के बीच का विभवांतर (Potential Difference) कहते हैं:

$$V = \frac{W}{Q}$$
  • SI मात्रक: वोल्ट (Volt, V) (इतालवी वैज्ञानिक अलेसांद्रो वोल्टा के सम्मान में)।
  • 1 वोल्ट की परिभाषा: यदि किसी धारावाही चालक के दो बिंदुओं के बीच 1 कूलॉम आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में 1 जूल कार्य किया जाता है, तो उन दोनों बिंदुओं के बीच विभवांतर 1 वोल्ट कहलाता है ($1\text{ V} = 1\text{ J/C}$)।
  • मापन यंत्र: विभवांतर मापने के लिए वोल्टमीटर (Voltmeter) का उपयोग किया जाता है, जिसे सदैव उन दो बिंदुओं के बीच पार्श्वक्रम (Parallel) में जोड़ा जाता है (आदर्श वोल्टमीटर का प्रतिरोध अनंत होना चाहिए ताकि वह परिपथ से न्यूनतम धारा ले)।

2. ओम का नियम, प्रतिरोध एवं प्रतिरोधकता

(क) ओम का नियम (Ohm's Law)

सन् 1827 में जर्मन भौतिक विज्ञानी जॉर्ज साइमन ओम ने किसी चालक के सिरों पर विभवांतर तथा उसमें प्रवाहित धारा के मध्य संबंध स्थापित किया:

ओम के नियम का कथन (JAC Board 3 अंक):
"यदि किसी चालक की भौतिक अवस्थाएं (विशेषतः तापमान) अपरिवर्तित रहें, तो चालक के सिरों के बीच का विभवांतर ($V$) उसमें प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा ($I$) के सीधा अनुक्रमानुपाती होता है।"
$$V \propto I \implies V = IR \quad \text{अथवा} \quad R = \frac{V}{I}$$
  • यहाँ $R$ एक नियतांक है जिसे चालक का विद्युत प्रतिरोध (Resistance) कहते हैं।
  • $V-I$ ग्राफ: ओम के नियम का पालन करने वाले चालकों (ओमीय चालक - ताँबा, एल्युमीनियम) के लिए $V$ और $I$ के बीच खींचा गया ग्राफ मूल बिंदु $(0,0)$ से गुजरने वाली एक सीधी सरल रेखा (Straight Line) होता है। इस ग्राफ का ढाल (Slope) प्रतिरोध $R$ का मान देता है।

(ख) विद्युत प्रतिरोध एवं 1 ओम की परिभाषा

चालक का वह गुण जिसके द्वारा वह अपने में से प्रवाहित होने वाले आवेशों (धारा) के प्रवाह का विरोध करता है, प्रतिरोध कहलाता है।

  • SI मात्रक: ओम ($\Omega$) (Greek letter Omega)।
  • 1 ओम की परिभाषा: यदि किसी चालक के दोनों सिरों के बीच 1 वोल्ट का विभवांतर होने पर उसमें 1 एम्पीयर की धारा प्रवाहित हो, तो उस चालक का प्रतिरोध 1 ओम कहलाता है ($1\text{ }\Omega = \frac{1\text{ V}}{1\text{ A}}$)।
  • परिवर्ती प्रतिरोध / धारा नियंत्रक (Rheostat): परिपथ के विभवांतर को बदले बिना उसमें धारा को नियंत्रित करने वाला यंत्र।

(ग) चालक का प्रतिरोध किन कारकों पर निर्भर करता है? (बोर्ड 3 अंक)

  1. चालक की लंबाई पर ($l$): प्रतिरोध चालक की लंबाई के अनुक्रमानुपाती होता है ($R \propto l$)। तार दोगुना लंबा करने पर प्रतिरोध दोगुना हो जाता है।
  2. अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल पर ($A$): प्रतिरोध तार के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है ($R \propto \frac{1}{A}$)। मोटा तार कम प्रतिरोध प्रदान करता है, पतला तार अधिक प्रतिरोध।
  3. पदार्थ की प्रकृति पर: भिन्न-भिन्न धातुओं की प्रतिरोधकता भिन्न-भिन्न होती है।
  4. तापमान पर: शुद्ध धातुओं का तापमान बढ़ाने पर उनका प्रतिरोध बढ़ता है।

समीकरणों को मिलाने पर:

$$R = \rho \frac{l}{A}$$

जहाँ $\rho$ (रो) चालक के पदार्थ की विद्युत प्रतिरोधकता (Resistivity) है।

  • प्रतिरोधकता का SI मात्रक: $\mathbf{\Omega\cdot\text{m}}$ (ओम-मीटर)।
  • विशेष गुण: प्रतिरोधकता चालक के आकार (लंबाई या मोटाई) पर निर्भर नहीं करती; यह केवल पदार्थ की प्रकृति और तापमान पर निर्भर करती है।
  • मिश्रधातुओं (Alloys) की विशेषताएं: नाइक्रोम (Ni-Cr-Mn-Fe), मैंगनीन और कॉन्स्टेंटन जैसी मिश्रधातुओं की प्रतिरोधकता उनकी अवयवी धातुओं से बहुत अधिक होती है और उच्च तापमान पर उनका दहन (ऑक्सीकरण) नहीं होता। इसीलिए विद्युत हीटर, गीजर और टोस्टर के तापन अवयव (Heating elements) शुद्ध धातुओं के न बनाकर नाइक्रोम के बनाए जाते हैं।

3. प्रतिरोधकों का संयोजन: श्रेणीक्रम बनाम पार्श्वक्रम (Series & Parallel)

(क) श्रेणीक्रम संयोजन (Resistors in Series)

जब दो या अधिक प्रतिरोधकों को एक के बाद एक सिरे से सिरा जोड़कर परिपथ बनाया जाता है:

  • विशेषताएं:
    1. प्रत्येक प्रतिरोधक में से समान विद्युत धारा ($I$) प्रवाहित होती है।
    2. कुल विभवांतर सभी प्रतिरोधकों के सिरों के विभवांतरों के योग के बराबर होता है: $V = V_1 + V_2 + V_3$।
  • सूत्र व्युत्पत्ति:
    ओम के नियम से: $V_1 = IR_1$, $V_2 = IR_2$, $V_3 = IR_3$
    चूँकि $V = V_1 + V_2 + V_3$:
    $$IR_s = IR_1 + IR_2 + IR_3 \implies R_s = R_1 + R_2 + R_3$$
  • निष्कर्ष: श्रेणीक्रम में तुल्य प्रतिरोध ($R_s$) परिपथ के सबसे बड़े प्रतिरोधक से भी बड़ा होता है।

(ख) पार्श्वक्रम / समांतर क्रम संयोजन (Resistors in Parallel)

जब सभी प्रतिरोधकों के एक सिरे को एक बिंदु से तथा दूसरे सिरों को एक साथ दूसरे बिंदु से जोड़ा जाता है:

  • विशेषताएं:
    1. प्रत्येक प्रतिरोधक के सिरों के बीच समान विभवांतर ($V$) होता है।
    2. कुल धारा व्यक्तिगत प्रतिरोधकों की शाखाओं में विभाजित धाराओं के योग के बराबर होती है: $I = I_1 + I_2 + I_3$।
  • सूत्र व्युत्पत्ति:
    ओम के नियम से: $I_1 = \frac{V}{R_1}$, $I_2 = \frac{V}{R_2}$, $I_3 = \frac{V}{R_3}$
    चूँकि $I = I_1 + I_2 + I_3$:
    $$\frac{V}{R_p} = \frac{V}{R_1} + \frac{V}{R_2} + \frac{V}{R_3} \implies \frac{1}{R_p} = \frac{1}{R_1} + \frac{1}{R_2} + \frac{1}{R_3}$$
  • निष्कर्ष: पार्श्वक्रम में तुल्य प्रतिरोध ($R_p$) परिपथ के सबसे छोटे प्रतिरोधक से भी छोटा हो जाता है।

(ग) घरेलू विद्युत परिपथों में पार्श्वक्रम संयोजन के 4 बड़े लाभ (JAC Board 3 अंक):

  1. स्वतंत्र स्विच नियंत्रण: प्रत्येक उपकरण का अपना अलग स्विच होता है; एक उपकरण को बंद या खराब होने पर अन्य उपकरणों के कार्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। (श्रेणीक्रम में एक बल्ब फ्यूज होते ही पूरा परिपथ टूट जाता है)।
  2. समान वोल्टेज (220 V) की उपलब्धता: सभी उपकरणों को समान मानक विभवांतर (220 V) प्राप्त होता है, जिससे वे अपनी पूर्ण दक्षता पर कार्य कर सकते हैं।
  3. न्यूनतम कुल प्रतिरोध: पार्श्वक्रम संयोजन पूरे परिपथ का तुल्य प्रतिरोध घटा देता है, जिससे शक्ति का अनावश्यक अपव्यय नहीं होता।
  4. विभिन्न धारा मांग की पूर्ति: विभिन्न उपकरणों (जैसे हीटर को 15 A और बल्ब को 0.5 A) को उनकी आवश्यकता के अनुसार उचित धारा मिलती है।

4. विद्युत धारा का तापीय प्रभाव एवं जूल का नियम (Heating Effect & Joule's Law)

जब किसी विशुद्ध रूप से प्रतिरोधक चालक में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो स्रोत की संपूर्ण ऊर्जा लगातार ऊष्मा (Heat) के रूप में व्यय होती रहती है। इसे विद्युत धारा का तापीय प्रभाव (Heating Effect of Electric Current) कहते हैं।

(क) जूल का तापन नियम (Joule's Law of Heating)

किसी प्रतिरोधक $R$ में से समय $t$ तक धारा $I$ प्रवाहित करने पर उत्पन्न ऊष्मा ($H$):

$$H = VIt = I^2Rt = \frac{V^2}{R}t$$
जूल के नियम के तीन मुख्य बिंदु:
उत्पन्न ऊष्मा ($H$):
1. विद्युत धारा के वर्ग के अनुक्रमानुपाती होती है ($H \propto I^2$)।
2. चालक के प्रतिरोध के अनुक्रमानुपाती होती है ($H \propto R$)।
3. उस समय के अनुक्रमानुपाती होती है जितने समय तक धारा प्रवाहित होती है ($H \propto t$)।

(ख) तापीय प्रभाव के व्यावहारिक अनुप्रयोग:

  • विद्युत तापक उपकरण (Electric Iron, Toaster, Geyser, Heater): इनमें उच्च प्रतिरोधकता एवं उच्च गलनांक वाली मिश्रधातु नाइक्रोम की कुंडली का उपयोग किया जाता है, जो रक्त तप्त (Red hot) होकर प्रचुर ऊष्मा देती है किंतु जलती (ऑक्सीकृत) नहीं है।
  • विद्युत बल्ब (Electric Bulb): बल्ब का तंतु (फिलामेंट) टंगस्टन (Tungsten - गलनांक $3380^\circ\text{C}$) का बनाया जाता है जो अत्यधिक उच्च ताप पर बिना पिघले तीव्र प्रकाश उत्सर्जित करता है। बल्ब के अंदर तंतु की आयु बढ़ाने के लिए अक्रिय गैसें—नाइट्रोजन एवं आर्गन—भरी जाती हैं।
  • विद्युत फ्यूज (Electric Fuse - सुरक्षा उपकरण):
    • फ्यूज एक सुरक्षा युक्ति है जिसे परिपथ में उपकरणों की सुरक्षा हेतु सजीव तार (Live wire) के श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है।
    • यह कम गलनांक वाली मिश्रधातु (सीसा + टिन / Lead-Tin alloy) का एक तार होता है।
    • जब अतिभारण (Overloading) या लघुपथन (Short-circuiting) के कारण परिपथ में सुरक्षित सीमा से अधिक धारा बहती है, तो जूल के नियम ($H \propto I^2$) के अनुसार अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न होने से फ्यूज तार पिघलकर टूट जाता है और परिपथ विच्छेदित होकर कीमती उपकरणों और आग लगने से रक्षा करता है।
    • घरेलू परिपथों में 1 A, 2 A, 3 A, 5 A और 15 A रेटिंग के फ्यूज उपयोग किए जाते हैं।

5. विद्युत शक्ति एवं विद्युत ऊर्जा की व्यावसायिक गणना (Electric Power & Billing)

(क) विद्युत शक्ति (Electric Power - $P$)

किसी विद्युत परिपथ में विद्युत ऊर्जा के उपभोग (या कार्य करने) की दर को विद्युत शक्ति कहते हैं:

$$P = \frac{W}{t} = VI = I^2R = \frac{V^2}{R}$$
  • SI मात्रक: वाट (Watt, W)।
  • 1 वाट की परिभाषा: 1 वाट उस परिपथ की शक्ति है जिसमें 1 वोल्ट के विभवांतर पर 1 एम्पीयर की धारा प्रवाहित हो रही हो ($1\text{ W} = 1\text{ V} \times 1\text{ A} = 1\text{ J/s}$)।
  • बड़ा मात्रक: 1 किलोवाट ($1\text{ kW} = 1000\text{ W}$), 1 मेगावाट ($1\text{ MW} = 10^6\text{ W}$), 1 अश्वशक्ति ($1\text{ HP} = 746\text{ W}$)।

(ख) विद्युत ऊर्जा का व्यावसायिक मात्रक: किलोवाट-घंटा (kWh / 1 Unit)

ऊर्जा = शक्ति $\times$ समय ($E = P \times t$)।

दैनिक जीवन में जूल बहुत छोटा मात्रक है, अतः बिजली विभाग ऊर्जा खपत को किलोवाट-घंटा (kWh) या साधारण भाषा में "यूनिट" (Board of Trade Unit - B.O.T.U.) में मापता है:

1 किलोवाट-घंटा (1 kWh) का जूल में रूपांतरण (JAC Board 2 अंक):
$$1\text{ kWh} = 1\text{ kW} \times 1\text{ hour}$$ $$1\text{ kWh} = 1000\text{ W} \times 3600\text{ s} = 3,600,000\text{ J} = \mathbf{3.6 \times 10^6\text{ J}}$$

विद्युत ऊर्जा (यूनिट) निकालने का सूत्र:

$$\text{कुल यूनिट (kWh)} = \frac{\text{उपकरणों की कुल शक्ति (Watt में)} \times \text{प्रतिदिन घंटे} \times \text{दिनों की संख्या}}{1000}$$

Key Formulas, Reactions & Definitions

आवेश का क्वांटमीकरण
Q = ne [e = 1.6 × 10^{-19} C, 1 C में 6.25 × 10^{18} इलेक्ट्रॉन]
विद्युत धारा सूत्र
$$I = \frac{Q}{t} \quad [1\text{ A} = 1\text{ C/s}]$$
विद्युत विभवांतर सूत्र
$$V = \frac{W}{Q} \quad [1\text{ V} = 1\text{ J/C}]$$
ओम का नियम
$$V = IR \iff I = \frac{V}{R} \iff R = \frac{V}{I}$$
प्रतिरोध एवं प्रतिरोधकता संबंध
R = {l}{A} [ का मात्रक: ·m]
श्रेणीक्रम संयोजन तुल्य प्रतिरोध
$$R_s = R_1 + R_2 + R_3 + \dots + R_n$$
पार्श्वक्रम संयोजन तुल्य प्रतिरोध
$$\frac{1}{R_p} = \frac{1}{R_1} + \frac{1}{R_2} + \frac{1}{R_3} + \dots + \frac{1}{R_n}$$
दो प्रतिरोधकों हेतु पार्श्वक्रम सूत्र
$$R_p = \frac{R_1 R_2}{R_1 + R_2}$$
जूल का तापन नियम
H = I^2Rt = VIt = {V^2}{R}t [जूल में]
विद्युत शक्ति के विभिन्न रूप
P = VI = I^2R = {V^2}{R} [वाट (W) में]
व्यावसायिक ऊर्जा रूपांतरण
$$1\text{ kWh (1 Unit)} = 3.6 \times 10^6\text{ J}$$
विद्युत ऊर्जा बिल सूत्र
खपत यूनिट = {P (W) × t (घंटे)}{1000}

Conceptual Solved Examples & Case Studies

Example 1
प्रश्न 1 (JAC 2023 - 5 अंक): प्रतिरोध R के किसी तार के टुकड़े को पाँच बराबर भागों में काटा जाता है। इन टुकड़ों को फिर पार्श्वक्रम में संयोजित कर देते हैं। यदि संयोजन का तुल्य प्रतिरोध R' है, तो R/R' अनुपात का मान क्या होगा? विस्तृत गणना कीजिए।
Step-by-Step Solution:

हल: 1. प्रत्येक टुकड़े का प्रतिरोध: हम जानते हैं कि चालक का प्रतिरोध उसकी लंबाई के अनुक्रमानुपाती होता है ($R \propto l$)। जब मूल तार (प्रतिरोध $R$) को 5 बराबर भागों में काटा जाता है, तो प्रत्येक टुकड़े की लंबाई $\frac{l}{5}$ हो जाएगी। अतः प्रत्येक टुकड़े का नया प्रतिरोध:

$$r = \frac{R}{5}$$

2. पाँचों टुकड़ों का पार्श्वक्रम में संयोजन: पार्श्वक्रम सूत्र के अनुसार:

$$\frac{1}{R'} = \frac{1}{r} + \frac{1}{r} + \frac{1}{r} + \frac{1}{r} + \frac{1}{r} = \frac{5}{r}$$

$r = \frac{R}{5}$ का मान रखने पर:

$$\frac{1}{R'} = \frac{5}{R/5} = \frac{25}{R}$$

3. अनुपात R/R' की गणना:

$$\frac{1}{R'} = \frac{25}{R} \implies \frac{R}{R'} = \mathbf{25}$$

उत्तर: अनुपात $\frac{R}{R'}$ का मान 25 होगा।

Example 2
प्रश्न 2 (JAC 2022 - 5 अंक): दिए गए परिपथ में R₁ = 10 Ω, R₂ = 40 Ω, R₃ = 30 Ω, R₄ = 20 Ω, R₅ = 60 Ω हैं तथा प्रतिरोधकों के इस विन्यास को 12 V की बैटरी से संयोजित किया गया है। (क) परिपथ का कुल प्रतिरोध, तथा (ख) परिपथ में प्रवाहित कुल धारा परिकलित कीजिए। (जहाँ R₁, R₂ समांतर हैं और R₃, R₄, R₅ समांतर हैं, और दोनों समूह आपस में श्रेणी में हैं)।
Step-by-Step Solution:

हल: (क) कुल प्रतिरोध की गणना:

  1. $R_1$ तथा $R_2$ समांतर क्रम में जुड़े हैं:

$$\frac{1}{R_A} = \frac{1}{R_1} + \frac{1}{R_2} = \frac{1}{10} + \frac{1}{40} = \frac{4 + 1}{40} = \frac{5}{40} = \frac{1}{8} \implies R_A = 8\text{ }\Omega$$

  1. $R_3, R_4, R_5$ समांतर क्रम में जुड़े हैं:

$$\frac{1}{R_B} = \frac{1}{30} + \frac{1}{20} + \frac{1}{60} = \frac{2 + 3 + 1}{60} = \frac{6}{60} = \frac{1}{10} \implies R_B = 10\text{ }\Omega$$

  1. दोनों समूह आपस में श्रेणीक्रम में जुड़े हैं:

$$R_{\text{total}} = R_A + R_B = 8\text{ }\Omega + 10\text{ }\Omega = \mathbf{18\text{ }\Omega}$$

परिपथ का कुल प्रतिरोध 18 ओम है।

(ख) कुल विद्युत धारा ($I$): ओम के नियम से:

$$I = \frac{V}{R_{\text{total}}} = \frac{12\text{ V}}{18\text{ }\Omega} = \frac{2}{3}\text{ A} \approx \mathbf{0.67\text{ A}}$$

परिपथ में प्रवाहित कुल धारा 0.67 एम्पीयर होगी।

Example 3
प्रश्न 3 (JAC 2021 - 3 अंक): किसी विद्युत हीटर की डोरी (Connecting cord) क्यों उत्तप्त (Glow) नहीं होती, जबकि उसका तापन-अवयव (Heating element) उत्तप्त हो जाता है?
Step-by-Step Solution:

उत्तर: जूल के तापन नियम के आधार पर व्याख्या: हम जानते हैं कि किसी चालक में उत्पन्न ऊष्मा उसके प्रतिरोध के अनुक्रमानुपाती होती है ($H = I^2Rt \implies H \propto R$, क्योंकि श्रेणीक्रम में धारा $I$ समान होती है)।

  1. हीटर की डोरी (कॉपर वायर): हीटर को जोड़ने वाली डोरी ताँबे (Copper) की बनी होती है, जिसकी विद्युत प्रतिरोधकता और प्रतिरोध ($R$) अत्यंत नगण्य (कम) होता है। अतः इसमें बहुत कम ऊष्मा उत्पन्न होती है और यह गर्म होकर नहीं चमकती।
  2. तापन-अवयव (नाइक्रोम कुंडली): हीटर का तापन अवयव नाइक्रोम मिश्रधातु का बना होता है, जिसका प्रतिरोध ($R$) डोरी की तुलना में सैकड़ों गुना अधिक होता है।
  3. उच्च प्रतिरोध होने के कारण इसमें अत्यधिक मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न होती है, जिससे यह लाल तप्त (Red hot) होकर चमकने और ऊष्मा विकीर्ण करने लगता है।
Example 4
प्रश्न 4 (JAC 2020 - 5 अंक): किसी घर में 250 W का एक टी.वी. प्रतिदिन 1 घंटे तथा 1000 W का एक विद्युत टोस्टर 10 मिनट प्रतिदिन चलाया जाता है। कौन-सा उपकरण अधिक ऊर्जा उपभुक्त करता है? यदि 400 W का एक रेफ्रिजरेटर 8 घंटे प्रतिदिन चले, तो ₹3.00 प्रति यूनिट की दर से 30 दिन के लिए इसका बिजली बिल कितना होगा?
Step-by-Step Solution:

हल: (क) टी.वी. बनाम टोस्टर की ऊर्जा खपत: ऊर्जा सूत्र: $E = P \times t$ • टी.वी. द्वारा उपभुक्त ऊर्जा:

$$E_{\text{TV}} = 250\text{ W} \times 1\text{ hr} = 250\text{ W}\cdot\text{hr} = 250 \times 3600\text{ J} = 900,000\text{ J} = 9 \times 10^5\text{ J}$$

• टोस्टर द्वारा उपभुक्त ऊर्जा:

$$E_{\text{toaster}} = 1000\text{ W} \times 10\text{ min} = 1000\text{ W} \times \frac{10}{60}\text{ hr} = 166.7\text{ W}\cdot\text{hr} = 1000 \times 600\text{ s} = 6 \times 10^5\text{ J}$$

निष्कर्ष: टी.वी. ($9 \times 10^5\text{ J}$) टोस्टर ($6 \times 10^5\text{ J}$) की तुलना में अधिक ऊर्जा उपभुक्त करता है।

(ख) रेफ्रिजरेटर का बिजली बिल (30 दिन): • प्रतिदिन उपभुक्त ऊर्जा (यूनिट में):

$$\text{यूनिट प्रति दिन} = \frac{400\text{ W} \times 8\text{ hr}}{1000} = \frac{3200}{1000} = 3.2\text{ kWh (यूनिट)}$$

• 30 दिन में कुल उपभुक्त ऊर्जा:

$$\text{कुल यूनिट} = 3.2 \times 30 = 96\text{ kWh (यूनिट)}$$

• ₹3.00 प्रति यूनिट की दर से कुल खर्च:

$$\text{कुल बिल} = 96 \times 3.00 = \mathbf{₹288.00}$$

Example 5
प्रश्न 5 (JAC 2019 - 3 अंक): एक ताँबे के तार का व्यास 0.5 मिमी तथा प्रतिरोधकता 1.6 × 10⁻⁸ Ω·m है। 10 Ω का प्रतिरोधक बनाने के लिए कितने लंबे तार की आवश्यकता होगी? यदि तार का व्यास दोगुना कर दिया जाए, तो प्रतिरोध में क्या परिवर्तन होगा?
Step-by-Step Solution:

हल: (क) तार की आवश्यक लंबाई ($l$): दिए गए मान: • व्यास, $d = 0.5\text{ mm} = 0.5 \times 10^{-3}\text{ m} = 5 \times 10^{-4}\text{ m}$ • त्रिज्या, $r = \frac{d}{2} = 2.5 \times 10^{-4}\text{ m}$ • क्षेत्रफल, $A = \pi r^2 = 3.14 \times (2.5 \times 10^{-4})^2 = 3.14 \times 6.25 \times 10^{-8} = 1.9625 \times 10^{-7}\text{ m}^2$ • प्रतिरोधकता, $\rho = 1.6 \times 10^{-8}\text{ }\Omega\cdot\text{m}$ • वांछित प्रतिरोध, $R = 10\text{ }\Omega$

सूत्र: $R = \rho \frac{l}{A} \implies l = \frac{RA}{\rho}$

$$l = \frac{10 \times 1.9625 \times 10^{-7}}{1.6 \times 10^{-8}} = \frac{1.9625 \times 10^{-6}}{1.6 \times 10^{-8}} = \frac{196.25}{1.6} \approx \mathbf{122.7\text{ मीटर}}$$

अतः तार की आवश्यक लंबाई लगभग 122.7 मीटर होगी।

(ख) व्यास दोगुना करने पर प्रतिरोध:

$$R = \rho \frac{l}{\pi (d/2)^2} = \frac{4\rho l}{\pi d^2} \implies R \propto \frac{1}{d^2}$$

यदि व्यास $d$ को दोगुना ($2d$) कर दिया जाए, तो नया प्रतिरोध:

$$R' \propto \frac{1}{(2d)^2} = \frac{1}{4d^2} = \frac{R}{4}$$

अतः नया प्रतिरोध मूल प्रतिरोध का एक-चौथाई (1/4 गुना = 2.5 Ω) रह जाएगा।

Common Misconceptions & Examiner Traps

Common Misconception

एमीटर और वोल्टमीटर के संयोजन क्रम को उलट देना।

Scientific Reality & Correction

एमीटर सदैव श्रेणीक्रम (Series) में जुड़ता है; वोल्टमीटर सदैव समांतर क्रम (Parallel) में जुड़ता है।

Common Misconception

श्रेणीक्रम और समांतर क्रम संयोजन के सूत्रों को परस्पर बदल देना।

Scientific Reality & Correction

श्रेणीक्रम में सीधा योग Rs = R1 + R2 + R3 होता है; समांतर क्रम में व्युत्क्रमों का योग 1/Rp = 1/R1 + 1/R2 + 1/R3 होता है।

Common Misconception

विद्युत ऊर्जा (यूनिट) निकालते समय समय को सेकंड में बदल देना।

Scientific Reality & Correction

किलोवाट-घंटा (kWh) में समय सदैव घंटे (Hours) में रखा जाता है, सेकंड में नहीं! शक्ति को किलोवाट में और समय को घंटे में रखें।

Common Misconception

यह मानना कि तार को खींचकर लंबा करने पर प्रतिरोधकता बदल जाती है।

Scientific Reality & Correction

प्रतिरोधकता (ρ) पदार्थ का आंतरिक गुण है; तार को खींचने से लंबाई और क्षेत्रफल बदलता है जिससे R बदलता है, पर ρ अपरिवर्तित रहती है।

Common Misconception

जूल के नियम में धारा I का वर्ग करना भूल जाना।

Scientific Reality & Correction

H = I²Rt होता है, IRt नहीं! यदि धारा दोगुनी हो जाए, तो ऊष्मा 4 गुना बढ़ जाएगी।

विद्युत परिपथ, ओम का नियम एवं प्रतिरोधकों का संयोजन चार्ट

विद्युत भौतिकी: ओम का नियम, प्रतिरोधक संयोजन एवं जूल तापन (Electricity Circuit) ओम का नियम एवं परिपथ संयोजन ओम का नियम (Ohm's Law - V = IR): V ∝ I ⇒ V = IR | R = ρ (l / A) V-I ग्राफ सीधी रेखा होती है (ढाल = प्रतिरोध R) 1. श्रेणीक्रम संयोजन (Series Combination): R_s = R₁ + R₂ + R₃ + ... • विद्युत धारा (I) समान रहती है • विभवांतर विभाजित होता है: V = V₁ + V₂ + V₃ • तुल्य प्रतिरोध अधिकतम होता है 2. पार्श्वक्रम / समांतर संयोजन (Parallel): 1/R_p = 1/R₁ + 1/R₂ + 1/R₃ • विभवांतर (V) प्रत्येक पर समान (220 V) रहता है • कुल धारा विभाजित होती है: I = I₁ + I₂ + I₃ • तुल्य प्रतिरोध न्यूनतम (घरेलू वायरिंग में प्रयुक्त) जूल तापन प्रभाव एवं विद्युत शक्ति जूल का तापन नियम (Joule's Heating Law): H = I²Rt = VIt = (V² / R) t H ∝ I² (धारा दोगुनी \to ऊष्मा 4 गुना) व्यावहारिक अनुप्रयोग (Practical Applications): • विद्युत हीटर: नाइक्रोम मिश्रधातु (उच्च ρ, अ-दहनीय) • विद्युत बल्ब: टंगस्टन तंतु (गलनांक 3380°C) • विद्युत फ्यूज: सजीव तार के श्रेणीक्रम में सुरक्षा (अतिभारण/लघुपथन पर तार पिघलकर टूट जाता है) विद्युत शक्ति एवं बिजली बिल (Power & Energy): P = VI = I²R = V² / R [मात्रक: वाट (W)] • 1 kWh = 1 Unit = 3.6 × 10⁶ J (ऊर्जा मात्रक) • खपत यूनिट = (कुल वाट × घंटे × दिन) / 1000

Chapter Summary & 10 Key Takeaways

Takeaway 1
विद्युत आवेश का मात्रक कूलॉम (C) है; 1 कूलॉम में 6.25 × 10¹⁸ इलेक्ट्रॉन होते हैं।
Takeaway 2
विद्युत धारा I = Q / t; मात्रक एम्पीयर (A) है; एमीटर को सदैव श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है।
Takeaway 3
विभवांतर V = W / Q; मात्रक वोल्ट (V) है; वोल्टमीटर को सदैव समांतर क्रम में जोड़ा जाता है।
Takeaway 4
ओम का नियम: V = IR (स्थिर ताप पर V और I का अनुपात स्थिरांक R होता है)।
Takeaway 5
प्रतिरोध R = ρ (l / A); लंबाई बढ़ने पर R बढ़ता है, मोटाई बढ़ने पर R घटता है; प्रतिरोधकता ρ का मात्रक Ω·m है।
Takeaway 6
श्रेणीक्रम में धारा समान रहती है और तुल्य प्रतिरोध Rs = R₁ + R₂ + R₃ (अधिकतम) होता है।
Takeaway 7
समांतर क्रम में वोल्टेज समान रहता है और 1/Rp = 1/R₁ + 1/R₂ + 1/R₃ (घरेलू वायरिंग में उपयुक्त)।
Takeaway 8
जूल का तापन नियम: H = I²Rt (हीटर में नाइक्रोम और बल्ब में टंगस्टन 3380°C का उपयोग)।
Takeaway 9
फ्यूज तार कम गलनांक वाली मिश्रधातु का बना होता है जो अतिभारण व लघुपथन से परिपथ की रक्षा करता है।
Takeaway 10
विद्युत शक्ति P = VI = I²R = V²/R (मात्रक: वाट); 1 kWh (1 यूनिट) = 3.6 × 10⁶ J होता है।

Check Your Understanding (Diagnostic Practice Questions)

Diagnostic questions testing core conceptual clarity. Answers are hidden initially — solve each problem first, then click to reveal the step-by-step verified solution.

1
1. किसी चालक तार में 2 एम्पीयर की धारा 10 सेकंड तक प्रवाहित होती है। परिपथ से गुजरने वाले कुल आवेश और इलेक्ट्रॉनों की संख्या ज्ञात कीजिए।
Reveal Answer & Explanation
Answer: आवेश Q = I × t = 2 × 10 = 20 कूलॉम; इलेक्ट्रॉनों की संख्या n = Q / e = 20 / (1.6 × 10⁻¹⁹) = 1.25 × 10²⁰ इलेक्ट्रॉन।
2
2. यदि 6 Ω के तीन प्रतिरोधकों को समांतर क्रम में जोड़ा जाए, तो संयोजन का तुल्य प्रतिरोध कितना होगा?
Reveal Answer & Explanation
Answer: 1/Rp = 1/6 + 1/6 + 1/6 = 3/6 = 1/2 ⇒ Rp = 2 Ω (तुल्य प्रतिरोध 2 ओम होगा)।
3
3. घरेलू विद्युत परिपथों में उपकरणों को श्रेणीक्रम में क्यों नहीं जोड़ा जाता? कोई दो कारण दीजिए।
Reveal Answer & Explanation
Answer: (1) श्रेणीक्रम में एक उपकरण खराब होने पर पूरा परिपथ टूट जाता है; (2) सभी उपकरणों को 220 V का समान वोल्टेज नहीं मिलता और अलग-अलग स्विच से नियंत्रित नहीं किया जा सकता।
4
4. 1 किलोवाट-घंटा (1 kWh) में कितने जूल होते हैं? गणना दर्शाइए।
Reveal Answer & Explanation
Answer: 1 kWh = 1000 W × 3600 s = 3,600,000 J = 3.6 × 10⁶ जूल।
5
5. विद्युत हीटर और टोस्टर के तापन अवयव शुद्ध ताँबे के न बनाकर नाइक्रोम मिश्रधातु के क्यों बनाए जाते हैं?
Reveal Answer & Explanation
Answer: क्योंकि नाइक्रोम की प्रतिरोधकता बहुत अधिक होती है और यह उच्च तापमान पर रक्त तप्त होने पर भी आसानी से ऑक्सीकृत (दहन) नहीं होती।
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