कार्बोनिल समूह की संरचना एवं ध्रुवता:
कार्बोनिल कार्बन $sp^2$ संकरित होता है और तीन $\sigma$-आबंध बनाता है जो एक ही समतल में 120° के कोण पर स्थित होते हैं। असंकरित $2p$ कक्षक ऑक्सीजन के $2p$ कक्षक से पार्श्व अतिव्यापन कर $\pi$-आबंध बनाता है।
- ऑक्सीजन की उच्च विद्युत-ऋणात्मकता के कारण $\pi$-इलेक्ट्रॉन ऑक्सीजन की ओर आकर्षित रहते हैं:
$$>\overset{\delta^+}{C}=\overset{\delta^-}{O} \longleftrightarrow >\overset{+}{C}-\overset{-}{O}$$
- क्रियाशीलता क्रम (ऐल्डिहाइड बनाम कीटोन):
ऐल्डिहाइड नाभिकरागी आक्रमण के प्रति कीटोनों से अधिक क्रियाशील होते हैं। इसके 2 कारण हैं:
- प्रेरणिक प्रभाव (Electronic factor): कीटोनों में दो एल्किल समूह ($+I$) कार्बोनिल कार्बन के धनावेश को घटाकर उसे कम इलेक्ट्रॉनरागी बना देते हैं, जबकि ऐल्डिहाइड में केवल एक एल्किल समूह होता है:
$$HCHO > CH_3CHO > CH_3COCH_3$$
- त्रिविम बाधा (Steric factor): कीटोनों में दो बड़े एल्किल समूह आने वाले नाभिकरागी के मार्ग में भारी रुकावट डालते हैं।
प्रमुख नाभिकरागी योग अभिक्रियाएं:
- हाइड्रोजन सायनाइड ($HCN$) का योग: सायनोहाइड्रिन बनते हैं:
$$>C=O + HCN \xrightarrow{OH^-} >C(OH)(CN)$$
- सोडियम हाइड्रोजनसल्फाइट ($NaHSO_3$) का योग: क्रिस्टलीय बाइसल्फाइट योगोत्पाद बनते हैं (शोधन हेतु प्रयुक्त)।
- अमोनिया व्युत्पन्नों ($H_2N-Z$) का योग (जल का निष्कासन):
- हाइड्रॉक्सिलएमीन ($H_2N-OH$) $\rightarrow$ ऑक्सिम ($>C=N-OH$)
- हाइड्रेजीन ($H_2N-NH_2$) $\rightarrow$ हाइड्राजोन ($>C=N-NH_2$)
- 2,4-डाइनाइट्रोफेनिलहाइड्रेजीन (2,4-DNP) $\rightarrow$ नारंगी/पीला अवक्षेप (कार्बोनिल समूह की पहचान का Brady's परीक्षण)