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JAC • Class XII • Mathematics • Ch 5
Estimated Time: 45 Mins
Study Progress: In Progress

Continuity and Differentiability

सांतत्य तथा अवकलनीयता (Continuity and Differentiability) उच्च गणित एवं संपूर्ण कलन (Calculus) की केंद्रीय रीढ़ है। कक्षा 11वीं में सीमा (Limits) और अवकलज के मूलभूत सिद्धांतों को पढ़ने के पश्चात, कक्षा 12वीं में यह अध्याय फलनों के व्यवहार के अत्यंत सूक्ष्म एवं परिष्कृत विश्लेषण को प्रस्तुत करता है। सांतत्य का ज्यामितीय अभिप्राय किसी वक्र का बिना पेंसिल उठाए अनवरत खींचे जाना है; गणितीय भाषा में, बिंदु $x = c$ पर फलन $f(x)$ तब सतत कहलाता है जब वाम-पक्ष सीमा (Left Hand Limit), दक्षिण-पक्ष सीमा (Right Hand Limit) और फलन का वास्तविक मान तीनों परस्पर बराबर हों, अर्थात $\lim_{x \to c^-} f(x) = \lim_{x \to c^+} f(x) = f(c)$। अवकलनीयता किसी बिंदु पर वक्र की अद्वितीय स्पर्श रेखा (Unique Tangent) के अस्तित्व तथा तात्कालिक परिवर्तन की दर का मापन करती है। इस अध्याय में एक सर्वमान्य मौलिक प्रमेय सिद्ध किया जाता है: प्रत्येक अवकलनीय फलन अनिवार्यतः सतत होता है, किंतु इसका विलोम (Converse) सदैव सत्य नहीं होता (उदा. $f(x) = |x|$ बिंदु $x=0$ पर सतत है परंतु अवकलनीय नहीं)। इसके उपरांत श्रृंखला नियम (Chain Rule), अस्पष्ट फलन (Implicit Functions), प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलनों के अवकलज, चरघातांकी ($e^x$) व लघुगणकीय ($\log x$) फलन, जटिल फलनों के लिए लघुगणकीय अवकलन (Logarithmic Differentiation), प्राचलिक समीकरणों ($x = f(t), y = g(t)$) का अवकलन, द्वितीय कोटि अवकलज ($d^2y/dx^2$), तथा रोले का प्रमेय (Rolle's Theorem) एवं लांग्रांज का मध्यमान प्रमेय (Lagrange's Mean Value Theorem) का संपूर्ण सैद्धांतिक, विश्लेषणात्मक एवं परीक्षा-उन्मुख निरूपण किया गया है।

सुपरसोनिक जेट और रोलर-कोस्टर: बिना किसी जानलेवा झटके के गति का रहस्य!

क्या आपने कभी सोचा है कि रोलर-कोस्टर के ट्रैक कभी भी नुकीले कोनों (Sharp Corners) वाले क्यों नहीं बनाए जाते? यदि ट्रैक में कोई तीक्ष्ण कोना (Cusp/Corner) आ जाए, तो वहां वक्र की ढाल (Derivative) अचानक छलांग मारती है! भौतिकी में त्वरण (Acceleration) स्थिति का द्वितीय अवकलज ($d^2x/dt^2$) होता है और त्वरण के परिवर्तन की दर को जर्क (Jerk = $d^3x/dt^3$) कहते हैं। यदि कोई फलन अवकलनीय नहीं है, तो उस नुकीले बिंदु पर तात्कालिक बल अनंत हो जाएगा, जिससे रोलर कोस्टर पटरी से उतर जाएगा! यही कारण है कि इंजीनियर और रॉकेट वैज्ञानिक ट्रैक और उपग्रह प्रक्षेपवक्र को न केवल सतत (Continuous) बल्कि सुचारू रूप से अवकलनीय (Smoothly Differentiable) डिजाइन करते हैं!

Why This Chapter Matters

JAC तथा CBSE 12वीं गणित बोर्ड परीक्षा में यह अध्याय कलन (Calculus) इकाई का 10 से 12 अंकों का विशाल आधार तैयार करता है: 1. सांतत्य एवं अज्ञात चर ($k$) का मान: 2 से 3 अंक का अनिवार्य प्रश्न, जहाँ बिंदु पर फलन के सतत होने की शर्त से अज्ञात राशि ज्ञात की जाती है। 2. लघुगणकीय अवकलन (Logarithmic Differentiation): चर की घात चर वाले फलन ($y = x^{\sin x} + (\cos x)^x$) का अवकलन, जो 4 या 5 अंकों के दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों में बार-बार पूछा जाता है। 3. प्राचलिक रूप एवं द्वितीय कोटि अवकलज: $x = a( heta + \sin heta), y = a(1 - \cos heta)$ के लिए $d^2y/dx^2$ सिद्ध करने का 5-अंकीय प्रश्न। 4. प्रतियोगी परीक्षाएं (JEE / NDA / CUET): फलनों की असंततता के बिंदु खोजना तथा अवकलनीयता की जांच करना अनिवार्य रूप से पूछा जाता है।

Before You Begin (Prerequisites)

  • कक्षा 11वीं के सीमाओं (Limits) के बीजगणितीय और त्रिकोणमितीय मानक सूत्र (उदा. $\lim_{x \to 0} \frac{\sin x}{x} = 1$)।
  • मूलभूत अवकलज सूत्र (उदा. $x^n, \sin x, \cos x, e^x, \ln x$ का अवकलन)।
  • फलनों के आलेख (Graphs of Functions like $|x|, [x], \text{sgn}(x)$)।

What You Will Learn (Core Objectives)

  • किसी बिंदु तथा दिए गए अंतराल में किसी फलन के सांतत्य की गणितीय जांच करना।
  • वाम-पक्ष अवकलज (LHD) एवं दक्षिण-पक्ष अवकलज (RHD) ज्ञात कर किसी बिंदु पर फलन की अवकलनीयता सिद्ध करना।
  • श्रृंखला नियम (Chain Rule) एवं अस्पष्ट फलनों (Implicit Functions) का सफलतापूर्वक अवकलन करना।
  • लघुगणकीय अवकलन विधि का उपयोग कर जटिल गुणांकों एवं फलनों की घात वाले व्यंजकों का अवकलज प्राप्त करना।
  • प्राचलिक फलनों (Parametric Functions) के प्रथम एवं द्वितीय कोटि के अवकलज की गणना करना।
  • रोले के प्रमेय एवं मध्यमान प्रमेय की ज्यामितीय सार्थकता समझकर उनका सत्यापन करना।

Chapter Roadmap & Progression

1 1. सांतत्य की संकल्पना, परिभाषा एवं...
2 2. अवकलनीयता, LHD/RHD एवं सांतत्य क...
3 3. श्रृंखला नियम एवं अस्पष्ट फलनों...
4 4. चरघातांकी, लघुगणकीय एवं प्राचलिक...
5 5. रोले का प्रमेय एवं लांग्रांज का...

Complete Concept Guide (100% Curriculum Coverage)

1. सांतत्य की संकल्पना, परिभाषा एवं बीजगणित (Concept and Algebra of Continuity)

1.1 किसी बिंदु पर सांतत्य की औपचारिक परिभाषा

मान लीजिए $f$ किसी वास्तविक संख्याओं के उपसमुच्चय पर परिभाषित एक वास्तविक फलन है तथा $c$ उसके प्रांत में कोई बिंदु है। फलन $f$, बिंदु $x = c$ पर सतत (Continuous) कहलाता है यदि और केवल यदि:

$$\lim_{x \to c} f(x) = f(c)$$

विस्तृत रूप में, इसका अर्थ है कि निम्नलिखित तीनों शर्तें एक साथ संतुष्ट होनी चाहिए:

  1. फलन का मान $f(c)$ अस्तित्व में हो (अर्थात यह अपरिभाषित या अनिरूपित न हो)।
  2. बिंदु $c$ पर सीमा अस्तित्व में हो: वाम-पक्ष सीमा (LHL) तथा दक्षिण-पक्ष सीमा (RHL) परिमित रूप से विद्यमान एवं समान हों:
  3. $$\text{LHL} = \lim_{h \to 0^+} f(c - h) = \lim_{h \to 0^+} f(c + h) = \text{RHL}$$
  4. सीमा का मान बिंदु पर फलन के मान के बराबर हो:
  5. $$\lim_{x \to c^-} f(x) = \lim_{x \to c^+} f(x) = f(c)$$

1.2 किसी अंतराल में सांतत्य (Continuity in an Interval)

  • विवृत अंतराल (Open Interval) $(a, b)$ में सांतत्य: फलन $f$ अंतराल $(a, b)$ के प्रत्येक बिंदु पर सतत होना चाहिए।
  • संवृत अंतराल (Closed Interval) $[a, b]$ में सांतत्य: फलन $f$ को $[a, b]$ में सतत कहा जाता है यदि:
    1. वह विवृत अंतराल $(a, b)$ के प्रत्येक बिंदु पर सतत हो,
    2. बिंदु $x = a$ पर दाईं ओर से सतत हो: $\lim_{x \to a^+} f(x) = f(a)$, तथा
    3. बिंदु $x = b$ पर बाईं ओर से सतत हो: $\lim_{x \to b^-} f(x) = f(b)$।

1.3 सतत फलनों का बीजगणित (Algebra of Continuous Functions)

मान लीजिए $f$ और $g$ दो वास्तविक फलन हैं जो किसी बिंदु $c$ पर सतत हैं। तब:

  • योग (Sum): $(f + g)(x) = f(x) + g(x)$, बिंदु $c$ पर सतत होता है।
  • अंतर (Difference): $(f - g)(x) = f(x) - g(x)$, बिंदु $c$ पर सतत होता है।
  • अदिश गुणन (Scalar Multiple): $(\alpha f)(x) = \alpha f(x)$, जहाँ $\alpha \in \mathbb{R}$, सतत होता है।
  • गुणनफल (Product): $(f \cdot g)(x) = f(x) \cdot g(x)$, बिंदु $c$ पर सतत होता है।
  • भागफल (Quotient): $\left(\frac{f}{g}\right)(x) = \frac{f(x)}{g(x)}$, बिंदु $c$ पर सतत होता है, बशर्ते $g(c) \neq 0$ हो।

1.4 महत्वपूर्ण मानक सतत फलन

गणित के निम्नलिखित मूलभूत फलन अपने संपूर्ण प्रांत (Domain) में सर्वत्र सतत होते हैं:

  • प्रत्येक बहुपदीय फलन (Polynomial Function, जैसे $P(x) = a_n x^n + \dots + a_0$) $\mathbb{R}$ पर सतत होता है।
  • त्रिकोणमितीय फलन $\sin x$ तथा $\cos x$ संपूर्ण $\mathbb{R}$ पर सतत हैं। $\tan x$ अपने प्रांत $\mathbb{R} \setminus \{(2n+1)\frac{\pi}{2}\}$ पर सतत है।
  • चरघातांकी फलन $f(x) = e^x$ तथा लघुगणकीय फलन $g(x) = \ln x$ ($x > 0$) अपने प्रांत में सतत हैं।
  • मापांक फलन (Modulus function) $f(x) = |x|$ संपूर्ण $\mathbb{R}$ पर सतत है।
  • संयुक्त फलन प्रमेय (Composite Function Theorem): यदि $g$, बिंदु $c$ पर सतत है और $f$, बिंदु $g(c)$ पर सतत है, तो संयुक्त फलन $(f \circ g)(x) = f(g(x))$ भी बिंदु $c$ पर सतत होता है। (उदा. $\sin(x^2)$ सतत है क्योंकि $x^2$ और $\sin x$ दोनों सतत हैं)।

2. अवकलनीयता, LHD/RHD एवं सांतत्य के साथ संबंध (Differentiability and its Relation to Continuity)

2.1 अवकलनीयता की परिभाषा

मान लीजिए $f$ विवृत अंतराल $(a, b)$ में परिभाषित एक वास्तविक फलन है तथा $c \in (a, b)$। फलन $f$, बिंदु $c$ पर अवकलनीय (Differentiable) कहलाता है यदि सीमा:

$$f'(c) = \lim_{h \to 0} \frac{f(c + h) - f(c)}{h}$$

परिमित रूप से अस्तित्व में हो। इस सीमा को बिंदु $c$ पर फलन का अवकलज (Derivative) कहते हैं।

2.2 वाम-पक्ष अवकलज एवं दक्षिण-पक्ष अवकलज

सीमा के अस्तित्व के लिए दोनों पार्श्व सीमाओं का बराबर होना आवश्यक है:

  • वाम-पक्ष अवकलज (Left Hand Derivative - LHD):
  • $$L f'(c) = \lim_{h \to 0^+} \frac{f(c - h) - f(c)}{-h}$$
  • दक्षिण-पक्ष अवकलज (Right Hand Derivative - RHD):
  • $$R f'(c) = \lim_{h \to 0^+} \frac{f(c + h) - f(c)}{h}$$

अवकलनीयता की अनिवार्य शर्त: फलन $f$, $x = c$ पर अवकलनीय होगा यदि और केवल यदि:

$$L f'(c) = R f'(c) = \text{परिमित वास्तविक संख्या}$$

2.3 मौलिक प्रमेय: अवकलनीयता बनाम सांतत्य

प्रमेय (Theorem): यदि कोई फलन $f$ किसी बिंदु $c$ पर अवकलनीय है, तो वह उस बिंदु पर अनिवार्य रूप से सतत भी होता है।

उपपत्ति (Proof):

मान लीजिए $f$, बिंदु $c$ पर अवकलनीय है। अतः:

$$f'(c) = \lim_{x \to c} \frac{f(x) - f(c)}{x - c} \quad (\text{परिमित})$$

किसी भी $x \neq c$ के लिए हम लिख सकते हैं:

$$f(x) - f(c) = \frac{f(x) - f(c)}{x - c} \cdot (x - c)$$

दोनों पक्षों में $x \to c$ की सीमा लेने पर:

$$\lim_{x \to c} [f(x) - f(c)] = \lim_{x \to c} \left[ \frac{f(x) - f(c)}{x - c} \right] \cdot \lim_{x \to c} (x - c)$$$$\lim_{x \to c} [f(x) - f(c)] = f'(c) \cdot 0 = 0$$$$\implies \lim_{x \to c} f(x) = f(c)$$

अतः फलन $f$, बिंदु $x = c$ पर सतत सिद्ध होता है। इति सिद्धम्।

विलोम का असत्य होना (Converse is NOT True): प्रत्येक सतत फलन का अवकलनीय होना आवश्यक नहीं है!

प्रति-उदाहरण (Counter-Example): फलन $f(x) = |x|$, बिंदु $x = 0$ पर सतत है, परंतु अवकलनीय नहीं है।

  • $L f'(0) = \lim_{h \to 0^+} \frac{|0 - h| - |0|}{-h} = \lim_{h \to 0^+} \frac{h}{-h} = -1$
  • $R f'(0) = \lim_{h \to 0^+} \frac{|0 + h| - |0|}{h} = \lim_{h \to 0^+} \frac{h}{h} = +1$

चूँकि $L f'(0) = -1 \neq +1 = R f'(0)$, अतः $f(x) = |x|$ बिंदु $x = 0$ पर अवकलनीय नहीं है, यद्यपि यह वहां सतत है! ज्यामितीय रूप से, $x = 0$ पर वक्र में एक नुकीला मोड़ (Corner/Cusp) है जहाँ कोई अद्वितीय स्पर्श रेखा नहीं खींची जा सकती।

3. श्रृंखला नियम एवं अस्पष्ट फलनों का अवकलन (Chain Rule and Implicit Differentiation)

3.1 संयुक्त फलनों का अवकलन: श्रृंखला नियम (Chain Rule)

यदि कोई फलन $y = f(u)$ और $u = g(x)$ है, अर्थात $y = f(g(x))$ एक संयुक्त फलन है, तो $y$ का $x$ के सापेक्ष अवकलज:

$$\frac{dy}{dx} = \frac{dy}{du} \cdot \frac{du}{dx}$$

तीन फलनों की श्रृंखला के लिए, यदि $y = f(u), u = g(v), v = h(x)$ हो, तो:

$$\frac{dy}{dx} = \frac{dy}{du} \cdot \frac{du}{dv} \cdot \frac{dv}{dx}$$

उदाहरण: $\frac{d}{dx}[\sin(x^2 + 5)]$ ज्ञात करने के लिए $u = x^2 + 5$ मानें:

$$\frac{d}{dx}[\sin(x^2 + 5)] = \cos(x^2 + 5) \cdot \frac{d}{dx}(x^2 + 5) = 2x \cos(x^2 + 5)$$

3.2 अस्पष्ट फलनों का अवकलन (Implicit Differentiation)

जब किसी समीकरण में $x$ और $y$ इस प्रकार परस्पर जुड़े हों कि $y$ को $x$ के स्पष्ट फलन ($y = f(x)$) के रूप में सीधे पृथक न किया जा सके (जैसे $x^2 + 2xy + y^3 = 4$), तो ऐसे फलन को अस्पष्ट फलन (Implicit Function) कहते हैं।

अवकलन की कार्यविधि:

  1. समीकरण के दोनों पक्षों का $x$ के सापेक्ष पद-दर-पद अवकलन करें।
  2. जहाँ भी $y$ का पद आए, वहाँ श्रृंखला नियम का प्रयोग करें (उदा. $\frac{d}{dx}(y^3) = 3y^2 \frac{dy}{dx}$ तथा $\frac{d}{dx}(xy) = x \frac{dy}{dx} + y$)।
  3. समीकरण में $\frac{dy}{dx}$ युक्त सभी पदों को बाएं पक्ष (LHS) में एकत्रित करें तथा शेष पदों को दाएं पक्ष (RHS) में भेजें।
  4. $\frac{dy}{dx}$ को उभयनिष्ठ (Common) लेकर उसका अभीष्ट मान प्राप्त करें।

3.3 प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलनों के अवकलज

  • $\frac{d}{dx}(\sin^{-1} x) = \frac{1}{\sqrt{1 - x^2}}, \quad |x| < 1$
  • $\frac{d}{dx}(\cos^{-1} x) = -\frac{1}{\sqrt{1 - x^2}}, \quad |x| < 1$
  • $\frac{d}{dx}(\tan^{-1} x) = \frac{1}{1 + x^2}, \quad x \in \mathbb{R}$
  • $\frac{d}{dx}(\cot^{-1} x) = -\frac{1}{1 + x^2}, \quad x \in \mathbb{R}$
  • $\frac{d}{dx}(\sec^{-1} x) = \frac{1}{|x|\sqrt{x^2 - 1}}, \quad |x| > 1$
  • $\frac{d}{dx}(\csc^{-1} x) = -\frac{1}{|x|\sqrt{x^2 - 1}}, \quad |x| > 1$

4. चरघातांकी, लघुगणकीय एवं प्राचलिक अवकलन (Exponential, Logarithmic & Parametric Differentiation)

4.1 चरघातांकी एवं लघुगणकीय फलनों के अवकलज

प्राकृतिक आधार $e$ के संदर्भ में:

  • $\frac{d}{dx}(e^x) = e^x$
  • $\frac{d}{dx}(a^x) = a^x \ln a \quad (a > 0, a \neq 1)$
  • $\frac{d}{dx}(\ln x) = \frac{1}{x} \quad (x > 0)$
  • $\frac{d}{dx}(\log_a x) = \frac{1}{x \ln a} \quad (\text{आधार परिवर्तन नियम: } \log_a x = \frac{\ln x}{\ln a})$

4.2 लघुगणकीय अवकलन विधि (Logarithmic Differentiation)

जब फलन $y = [f(x)]^{g(x)}$ के रूप में हो (अर्थात चर की घात चर हो), अथवा अनेक जटिल गुणनफलों व भागफलों का संयोजन हो जैसे:

$$y = \frac{(x-1)(x-2)}{(x-3)(x-4)}$$

तो दोनों पक्षों का प्राकृतिक लघुगणक ($\ln$) लेकर अवकलन करना अत्यंत सरल हो जाता है:

  1. दोनों पक्षों का प्राकृतिक लघुगणक लें: $\ln y = g(x) \ln [f(x)]$।
  2. $x$ के सापेक्ष दोनों पक्षों का अवकलन करें: $\frac{1}{y} \frac{dy}{dx} = \frac{d}{dx}\Big(g(x) \ln [f(x)]\Big)$।
  3. $\frac{dy}{dx} = y \cdot \left[ g'(x) \ln [f(x)] + g(x) \frac{f'(x)}{f(x)} \right]$।
  4. अंत में $y$ का मूल मान प्रतिस्थापित करें।
अति महत्वपूर्ण परीक्षा सावधानी: यदि फलन $y = u(x) + v(x)$ के रूप में हो (जैसे $y = x^{\sin x} + (\sin x)^x$), तो सीधे $\ln y = \ln u + \ln v$ कभी न लिखें (क्योंकि $\ln(u+v) \neq \ln u + \ln v$)! इसके स्थान पर $y = u + v \implies \frac{dy}{dx} = \frac{du}{dx} + \frac{dv}{dx}$ लिखकर $u$ और $v$ का अलग-अलग लघुगणकीय अवकलन करें।

4.3 प्राचलिक फलनों का अवकलन (Parametric Differentiation)

जब $x$ और $y$ दोनों किसी तीसरे चर (प्राचल/Parameter) $t$ या $\theta$ के फलन हों: $x = f(t)$ तथा $y = g(t)$, तब:

$$\frac{dy}{dx} = \frac{dy/dt}{dx/dt} = \frac{g'(t)}{f'(t)}, \quad \text{बशर्ते } f'(t) \neq 0$$

4.4 द्वितीय कोटि का अवकलज (Second Order Derivative)

यदि $y = f(x)$, तो प्रथम अवकलज $y' = \frac{dy}{dx}$ का पुनः $x$ के सापेक्ष अवकलन करने पर द्वितीय कोटि अवकलज प्राप्त होता है:

$$\frac{d}{dx}\left(\frac{dy}{dx}\right) = \frac{d^2y}{dx^2} = y'' = f''(x)$$

प्राचलिक रूप में द्वितीय अवकलज का विशेष नियम:

$$\frac{d^2y}{dx^2} = \frac{d}{dx}\left(\frac{dy}{dx}\right) = \frac{d}{dt}\left(\frac{dy}{dx}\right) \cdot \frac{dt}{dx} = \frac{\frac{d}{dt}\left(\frac{dy}{dx}\right)}{\frac{dx}{dt}}$$

5. रोले का प्रमेय एवं लांग्रांज का मध्यमान प्रमेय (Rolle's & Mean Value Theorems)

5.1 रोले का प्रमेय (Rolle's Theorem)

मान लीजिए $f : [a, b] \to \mathbb{R}$ एक वास्तविक फलन है जो निम्नलिखित तीन शर्तों को संतुष्ट करता है:

  1. $f$ संवृत अंतराल $[a, b]$ में सतत है,
  2. $f$ विवृत अंतराल $(a, b)$ में अवकलनीय है, तथा
  3. $f(a) = f(b)$ है।

तब विवृत अंतराल $(a, b)$ में कम से कम एक ऐसा बिंदु $c \in (a, b)$ अवश्य अस्तित्व में होगा जहाँ:

$$f'(c) = 0$$

ज्यामितीय अर्थ: वक्र $y = f(x)$ पर कम से कम एक ऐसा बिंदु $c$ अवश्य होता है जहाँ खींची गई स्पर्श रेखा (Tangent) $x$-अक्ष के पूर्णतः समांतर (Horizontal) होती है।

5.2 लांग्रांज का मध्यमान प्रमेय (Lagrange's Mean Value Theorem - LMVT)

मान लीजिए $f : [a, b] \to \mathbb{R}$ एक फलन है जो दो शर्तों को संतुष्ट करता है:

  1. $f$ संवृत अंतराल $[a, b]$ में सतत है, तथा
  2. $f$ विवृत अंतराल $(a, b)$ में अवकलनीय है।

तब विवृत अंतराल $(a, b)$ में कम से कम एक ऐसा बिंदु $c \in (a, b)$ अवश्य अस्तित्व में होगा जिसके लिए:

$$f'(c) = \frac{f(b) - f(a)}{b - a}$$

ज्यामितीय अर्थ: बिंदु $(a, f(a))$ और $(b, f(b))$ को मिलाने वाली जीवा (Secant line) की प्रवणता $\frac{f(b)-f(a)}{b-a}$ होती है। LMVT कहता है कि वक्र पर कम से कम एक ऐसा बिंदु $c$ अवश्य होगा जहाँ स्पर्श रेखा की प्रवणता इस जीवा की प्रवणता के ठीक बराबर (अर्थात स्पर्श रेखा जीवा के समांतर) होगी।

विशेष स्थिति: यदि $f(a) = f(b)$, तो LMVT ही रोले के प्रमेय ($f'(c) = 0$) में रूपांतरित हो जाता है।

Key Formulas, Identities & Theorems

सांतत्य की शर्त (Condition of Continuity)
$$\lim_{x \to c^-} f(x) = \lim_{x \to c^+} f(x) = f(c)$$
वाम-पक्ष सीमा = दक्षिण-पक्ष सीमा = बिंदु पर फलन का वास्तविक मान।
अवकलनीयता की परिभाषा (Definition of Derivative)
$$f'(c) = \lim_{h \to 0} \frac{f(c+h) - f(c)}{h}$$
बिंदु c पर अवकलज तात्कालिक परिवर्तन की दर व स्पर्श रेखा की ढाल व्यक्त करता है।
श्रृंखला नियम (Chain Rule)
$$\frac{dy}{dx} = \frac{dy}{du} \cdot \frac{du}{dx}$$
संयुक्त फलन y = f(g(x)) के अवकलन हेतु।
प्रतिलोम ज्या अवकलज (Derivative of arcsin)
$$\frac{d}{dx}(\sin^{-1} x) = \frac{1}{\sqrt{1-x^2}}, \quad |x| < 1$$
प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलन arcsin का मानक अवकलज।
प्रतिलोम स्पर्शज्या अवकलज (Derivative of arctan)
$$\frac{d}{dx}(\tan^{-1} x) = \frac{1}{1+x^2}$$
प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलन arctan का मानक अवकलज।
चरघातांकी अवकलज (Exponential Derivative)
$$\frac{d}{dx}(a^x) = a^x \ln a, \quad \frac{d}{dx}(e^x) = e^x$$
सामान्य व प्राकृतिक चरघातांकी फलनों का अवकलज।
प्राचलिक अवकलज (Parametric Derivative)
$$\frac{dy}{dx} = \frac{dy/dt}{dx/dt}, \quad \frac{dx}{dt} \neq 0$$
x = f(t), y = g(t) के प्रथम अवकलज का सूत्र।
प्राचलिक द्वितीय अवकलज (Parametric Second Derivative)
$$\frac{d^2y}{dx^2} = \frac{\frac{d}{dt}\left(\frac{dy}{dx}\right)}{\frac{dx}{dt}}$$
प्राचलिक रूप में द्वितीय अवकलज ज्ञात करने का सही नियम।
रोले का प्रमेय (Rolle's Theorem)
$$f'(c) = 0, \quad c \in (a, b)$$
सतत, अवकलनीय एवं f(a)=f(b) होने पर क्षैतिज स्पर्श रेखा का बिंदु।
मध्यमान प्रमेय (Lagrange's MVT)
$$f'(c) = \frac{f(b) - f(a)}{b - a}, \quad c \in (a, b)$$
जीवा की प्रवणता के समांतर स्पर्श रेखा का अस्तित्व।

Conceptual Solved Examples & Case Studies

Example 1
मान लीजिए $f(x) = \begin{cases} \frac{k \cos x}{\pi - 2x}, & \text{यदि } x \neq \frac{\pi}{2} \\[6pt] 3, & \text{यदि } x = \frac{\pi}{2} \end{cases}$। यदि $f(x)$, बिंदु $x = \frac{\pi}{2}$ पर सतत है, तो अज्ञात अचर $k$ का मान ज्ञात कीजिए। [JAC Board 2018, 2022]
Step-by-Step Solution:
चरण 1: बिंदु पर फलन का मान लिखना:
दिया गया है कि $x = \frac{\pi}{2}$ पर फलन का मान:
$$f\left(\frac{\pi}{2}\right) = 3 \quad \text{--- (समीकरण 1)}$$
चरण 2: बिंदु $x = \frac{\pi}{2}$ पर सीमा की गणना:
$$\lim_{x \to \frac{\pi}{2}} f(x) = \lim_{x \to \frac{\pi}{2}} \frac{k \cos x}{\pi - 2x}$$
प्रतिस्थापन करें: माना $x = \frac{\pi}{2} + h$। जब $x \to \frac{\pi}{2}$, तब $h \to 0$।
अतः अंश: $\cos x = \cos\left(\frac{\pi}{2} + h\right) = -\sin h$
तथा हर: $\pi - 2x = \pi - 2\left(\frac{\pi}{2} + h\right) = \pi - \pi - 2h = -2h$
अतः सीमा का रूपांतरित रूप:
$$\lim_{h \to 0} \frac{k(-\sin h)}{-2h} = \frac{k}{2} \lim_{h \to 0} \frac{\sin h}{h}$$
मानक त्रिकोणमितीय सीमा $\lim_{h \to 0} \frac{\sin h}{h} = 1$ का उपयोग करने पर:
$$\lim_{x \to \frac{\pi}{2}} f(x) = \frac{k}{2} \cdot 1 = \frac{k}{2} \quad \text{--- (समीकरण 2)}$$
चरण 3: सांतत्य की शर्त लागू करना:
चूँकि फलन $x = \frac{\pi}{2}$ पर सतत है, अतः सीमा फलन के मान के बराबर होनी चाहिए:
$$\lim_{x \to \frac{\pi}{2}} f(x) = f\left(\frac{\pi}{2}\right)$$
$$\frac{k}{2} = 3 \implies k = 6$$
अंक योजना (Marking Scheme): 1 अंक: f(π/2) = 3 लिखना; 2 अंक: प्रतिस्थापन x = π/2 + h द्वारा सीमा हल करना; 1 अंक: k = 6 प्राप्त करना। कुल: 4 अंक।
Example 2
सिद्ध कीजिए कि फलन $f(x) = |x - 1|, x \in \mathbb{R}$, बिंदु $x = 1$ पर सतत है, परंतु $x = 1$ पर अवकलनीय नहीं है। [NCERT / JAC Model Paper]
Step-by-Step Solution:
चरण 1: $x = 1$ पर सांतत्य की जांच:
फलन की परिभाषा: $f(x) = \begin{cases} -(x - 1) = 1 - x, & x < 1 \\[4pt] 0, & x = 1 \\[4pt] x - 1, & x > 1 \end{cases}$
फलन का मान: $f(1) = |1 - 1| = 0$।
वाम-पक्ष सीमा (LHL): $\lim_{x \to 1^-} f(x) = \lim_{h \to 0} f(1 - h) = \lim_{h \to 0} |(1 - h) - 1| = \lim_{h \to 0} |-h| = 0$।
दक्षिण-पक्ष सीमा (RHL): $\lim_{x \to 1^+} f(x) = \lim_{h \to 0} f(1 + h) = \lim_{h \to 0} |(1 + h) - 1| = \lim_{h \to 0} |h| = 0$।
चूँकि $\text{LHL} = \text{RHL} = f(1) = 0$, अतः फलन $x = 1$ पर सतत है।

चरण 2: $x = 1$ पर अवकलनीयता की जांच:
वाम-पक्ष अवकलज (LHD):
$$L f'(1) = \lim_{h \to 0^+} \frac{f(1 - h) - f(1)}{-h} = \lim_{h \to 0^+} \frac{|(1 - h) - 1| - 0}{-h} = \lim_{h \to 0^+} \frac{h}{-h} = -1$$
दक्षिण-पक्ष अवकलज (RHD):
$$R f'(1) = \lim_{h \to 0^+} \frac{f(1 + h) - f(1)}{h} = \lim_{h \to 0^+} \frac{|(1 + h) - 1| - 0}{h} = \lim_{h \to 0^+} \frac{h}{h} = +1$$
निष्कर्ष:
चूँकि $L f'(1) = -1 \neq +1 = R f'(1)$, अतः बिंदु $x = 1$ पर फलन अवकलनीय नहीं है। इति सिद्धम्।
अंक योजना (Marking Scheme): 2 अंक: सांतत्य की उपपत्ति (LHL=RHL=f(1)); 2 अंक: LHD = -1 व RHD = +1 निकालकर असाम्यता दर्शाना। कुल: 4 अंक।
Example 3
यदि $y = x^{\sin x} + (\sin x)^{\cos x}$ हो, तो $\frac{dy}{dx}$ का मान ज्ञात कीजिए। [JAC 2019, 2023]
Step-by-Step Solution:
चरण 1: फलनों को $u$ तथा $v$ में विभक्त करना:
माना $y = u + v$, जहाँ $u = x^{\sin x}$ तथा $v = (\sin x)^{\cos x}$।
अवकलन करने पर: $\frac{dy}{dx} = \frac{du}{dx} + \frac{dv}{dx} \quad \text{--- (समीकरण 1)}$

चरण 2: $\frac{du}{dx}$ का मान प्राप्त करना:
$u = x^{\sin x}$। दोनों पक्षों का प्राकृतिक लघुगणक लेने पर:
$$\ln u = \sin x \cdot \ln x$$
$x$ के सापेक्ष दोनों पक्षों का अवकलन करने पर (गुणनफल नियम):
$$\frac{1}{u} \frac{du}{dx} = \frac{d}{dx}(\sin x) \cdot \ln x + \sin x \cdot \frac{d}{dx}(\ln x)$$
$$\frac{1}{u} \frac{du}{dx} = \cos x \ln x + \frac{\sin x}{x}$$
$$\frac{du}{dx} = x^{\sin x} \left[ \cos x \ln x + \frac{\sin x}{x} \right] \quad \text{--- (समीकरण 2)}$$

चरण 3: $\frac{dv}{dx}$ का मान प्राप्त करना:
$v = (\sin x)^{\cos x}$। दोनों पक्षों का लघुगणक लेने पर:
$$\ln v = \cos x \cdot \ln(\sin x)$$
$x$ के सापेक्ष अवकलन करने पर:
$$\frac{1}{v} \frac{dv}{dx} = (-\sin x) \ln(\sin x) + \cos x \cdot \frac{1}{\sin x} \cdot \cos x$$
$$\frac{1}{v} \frac{dv}{dx} = -\sin x \ln(\sin x) + \cos x \cot x$$
$$\frac{dv}{dx} = (\sin x)^{\cos x} \left[ \cos x \cot x - \sin x \ln(\sin x) \right] \quad \text{--- (समीकरण 3)}$$

चरण 4: अभीष्ट अवकलज:
$$\frac{dy}{dx} = x^{\sin x} \left[ \frac{\sin x}{x} + \cos x \ln x \right] + (\sin x)^{\cos x} \left[ \cos x \cot x - \sin x \ln(\sin x) \right]$$
अंक योजना (Marking Scheme): 1 अंक: y = u+v विभाजन; 2 अंक: du/dx का सही परिकलन; 2 अंक: dv/dx का सही परिकलन; 1 अंक: अंतिम योग। कुल: 6 अंक।
Example 4
यदि $x = a(\theta + \sin \theta)$ तथा $y = a(1 - \cos \theta)$ हो, तो $\theta = \frac{\pi}{2}$ पर $\frac{d^2y}{dx^2}$ का मान ज्ञात कीजिए। [JAC 2020, 2024]
Step-by-Step Solution:
चरण 1: $\frac{dx}{d\theta}$ तथा $\frac{dy}{d\theta}$ ज्ञात करना:
$$\frac{dx}{d\theta} = a(1 + \cos \theta) = 2a \cos^2\left(\frac{\theta}{2}\right)$$
$$\frac{dy}{d\theta} = a(0 - (-\sin \theta)) = a \sin \theta = 2a \sin\left(\frac{\theta}{2}\right) \cos\left(\frac{\theta}{2}\right)$$

चरण 2: प्रथम अवकलज $\frac{dy}{dx}$ निकालना:
$$\frac{dy}{dx} = \frac{dy/d\theta}{dx/d\theta} = \frac{2a \sin(\theta/2) \cos(\theta/2)}{2a \cos^2(\theta/2)} = \tan\left(\frac{\theta}{2}\right)$$

चरण 3: द्वितीय अवकलज $\frac{d^2y}{dx^2}$ निकालना (श्रृंखला नियम सहित):
$$\frac{d^2y}{dx^2} = \frac{d}{dx}\left[\tan\left(\frac{\theta}{2}\right)\right] = \frac{d}{d\theta}\left[\tan\left(\frac{\theta}{2}\right)\right] \cdot \frac{d\theta}{dx}$$
$$\frac{d}{d\theta}\left[\tan\left(\frac{\theta}{2}\right)\right] = \sec^2\left(\frac{\theta}{2}\right) \cdot \frac{1}{2}$$
तथा $\frac{d\theta}{dx} = \frac{1}{dx/d\theta} = \frac{1}{a(1 + \cos \theta)} = \frac{1}{2a \cos^2(\theta/2)}$
अतः गुणनफल:
$$\frac{d^2y}{dx^2} = \frac{1}{2} \sec^2\left(\frac{\theta}{2}\right) \cdot \frac{1}{2a \cos^2(\theta/2)} = \frac{1}{4a} \sec^4\left(\frac{\theta}{2}\right)$$

चरण 4: $\theta = \frac{\pi}{2}$ पर मान निकालना:
जब $\theta = \frac{\pi}{2}$, तब $\frac{\theta}{2} = \frac{\pi}{4}$।
$\sec\left(\frac{\pi}{4}\right) = \sqrt{2}$
$$\left.\frac{d^2y}{dx^2}\right|_{\theta = \pi/2} = \frac{1}{4a} (\sqrt{2})^4 = \frac{1}{4a} \cdot 4 = \frac{1}{a}$$
अंक योजना (Marking Scheme): 1 अंक: dy/dx = tan(θ/2); 2 अंक: d²y/dx² में dθ/dx का प्रयोग; 1 अंक: θ = π/2 पर 1/a मान निकालना। कुल: 4 अंक।
Example 5
यदि $y = (\tan^{-1} x)^2$ हो, तो सिद्ध कीजिए कि $(x^2 + 1)^2 y_2 + 2x(x^2 + 1) y_1 = 2$, जहाँ $y_1 = \frac{dy}{dx}$ तथा $y_2 = \frac{d^2y}{dx^2}$। [NCERT Exemplar / JAC 2017, 2021]
Step-by-Step Solution:
चरण 1: प्रथम अवकलन ($y_1$) प्राप्त करना:
दिया गया है: $y = (\tan^{-1} x)^2$
दोनों पक्षों का $x$ के सापेक्ष अवकलन करने पर (श्रृंखला नियम):
$$y_1 = 2(\tan^{-1} x) \cdot \frac{d}{dx}(\tan^{-1} x) = \frac{2\tan^{-1} x}{1 + x^2}$$
चरण 2: तिरछा गुणा (Cross Multiplication) करना:
भागफल के झंझट से बचने के लिए $(1 + x^2)$ को बाईं ओर लाएं:
$$(1 + x^2) y_1 = 2\tan^{-1} x$$
चरण 3: पुनः $x$ के सापेक्ष अवकलन करना:
बाएं पक्ष में गुणनफल नियम ($ rac{d}{dx}[u \cdot v] = u'v + uv'$) लागू करने पर:
$$\frac{d}{dx}(1 + x^2) \cdot y_1 + (1 + x^2) \cdot \frac{d}{dx}(y_1) = 2 \cdot \frac{d}{dx}(\tan^{-1} x)$$
$$2x y_1 + (1 + x^2) y_2 = 2 \cdot \frac{1}{1 + x^2}$$
चरण 4: पूरे समीकरण को $(1 + x^2)$ से गुणा करना:
$$(1 + x^2)^2 y_2 + 2x(1 + x^2) y_1 = 2$$
अतः अभीष्ट संबंध सिद्ध हुआ। इति सिद्धम्।
अंक योजना (Marking Scheme): 1 अंक: y1 = 2tan⁻¹x / (1+x²); 1 अंक: (1+x²)y1 = 2tan⁻¹x रूप में लिखना; 2 अंक: द्वितीय अवकलन व सरलीकरण द्वारा अंतिम समीकरण प्राप्त करना। कुल: 4 अंक।

Common Misconceptions & Examiner Traps

Common Misconception

लघुगणकीय अवकलन में y = u + v दिए होने पर सीधे ln y = ln u + ln v लिख देना।

Scientific Reality & Correction

लघुगणक योग पर वितरित नहीं होता (ln(u+v) ≠ ln u + ln v)। सदैव y = u + v मानकर dy/dx = du/dx + dv/dx निकालें और u व v का अलग-अलग अवकलन करें।

Common Misconception

प्राचलिक फलनों के द्वितीय अवकलज में d²y/dx² = (d²y/dt²) / (d²x/dt²) लिख देना।

Scientific Reality & Correction

यह पूर्णतः गलत है। d²y/dx² = [d/dt(dy/dx)] · (dt/dx) = [d/dt(dy/dx)] / (dx/dt) होता है।

Common Misconception

यह मान लेना कि यदि कोई फलन सतत है तो वह अवकलनीय भी होगा।

Scientific Reality & Correction

सांतत्य अवकलनीयता की गारंटी नहीं देता! नुकीले कोनों (Corners/Cusps) जैसे f(x) = |x| पर फलन सतत होता है परंतु अवकलनीय नहीं होता।

Common Misconception

रोले के प्रमेय या LMVT का सत्यापन करते समय अंतराल की सीमाओं (Open vs Closed) पर ध्यान न देना।

Scientific Reality & Correction

फलन का सतत होना संवृत अंतराल [a, b] में अनिवार्य है, जबकि अवकलनीयता केवल विवृत अंतराल (a, b) में आवश्यक है। c का मान सदैव विवृत अंतराल a < c < b के भीतर ही आना चाहिए।

सांतत्य, तीक्ष्ण कोना (Cusp) एवं स्पर्श रेखा अवकलनीयता आरेख

सांतत्य एवं अवकलनीयता की ज्यामितीय तुलना (Smooth vs Non-Differentiable)सुगम वक्र: सतत एवं अवकलनीयअद्वितीय स्पर्श रेखा (Unique Tangent, LHD = RHD)स्पर्श रेखा (Slope = f'(c))x = cनुकीला मोड़: सतत किंतु अनवकलनीयउदा. f(x) = |x|, LHD ≠ RHD (कोई निश्चित ढाल नहीं)LHD = -1RHD = +1x = 0 (Corner Point)प्रमेय: अवकलनीय ⇒ सतत, परंतु सतत ⇏ अवकलनीय

Chapter Summary & 10 Key Takeaways

Takeaway 1
फलन f(x), x = c पर सतत कहलाता है यदि LHL = RHL = f(c) हो।
Takeaway 2
सभी बहुपदीय, चरघातांकी, तथा मापांक फलन अपने संबंधित प्रांत में सर्वत्र सतत होते हैं।
Takeaway 3
यदि f और g किसी बिंदु पर सतत हैं, तो उनका योग, अंतर, गुणनफल तथा भागफल (हर ≠ 0) भी सतत होते हैं।
Takeaway 4
बिंदु c पर अवकलनीयता हेतु LHD = RHD = परिमित संख्या होना अनिवार्य है।
Takeaway 5
प्रत्येक अवकलनीय फलन सतत होता है, किंतु इसका विलोम सदैव सत्य नहीं होता (उदा. f(x) = |x| पर x=0)।
Takeaway 6
संयुक्त फलनों के अवकलन हेतु श्रृंखला नियम dy/dx = (dy/du) · (du/dx) का उपयोग किया जाता है।
Takeaway 7
चर की घात चर वाले फलनों y = [f(x)]^(g(x)) में लघुगणकीय अवकलन (Logarithmic Differentiation) अनिवार्य है।
Takeaway 8
यदि x = f(t) तथा y = g(t) हो, तो dy/dx = (dy/dt) / (dx/dt) तथा d²y/dx² = [d/dt(dy/dx)] / (dx/dt) होता है।
Takeaway 9
रोले के प्रमेय हेतु फलन का [a, b] में सतत, (a, b) में अवकलनीय तथा f(a) = f(b) होना आवश्यक है, जिससे f'(c) = 0 प्राप्त होता है।
Takeaway 10
लांग्रांज मध्यमान प्रमेय (LMVT) के अनुसार वक्र पर एक बिंदु c ऐसा होता है जहाँ f'(c) = [f(b) - f(a)] / (b - a) होता है।

Check Your Understanding (Diagnostic Practice Questions)

Diagnostic questions testing core conceptual clarity. Answers are hidden initially — solve each problem first, then click to reveal the step-by-step verified solution.

1
फलन f(x) = [x] (महत्तम पूर्णांक फलन / Greatest Integer Function) किन बिंदुओं पर असतत (Discontinuous) होता है?
(A) केवल x = 0 पर
(B) सभी पूर्णांक बिंदुओं (All Integer Points) पर
(C) सभी अपरिमेय संख्याओं पर
(D) यह सर्वत्र सतत है
Reveal Answer & Explanation
Answer: B
प्रत्येक पूर्णांक k पर, वाम-पक्ष सीमा lim(x→k⁻)[x] = k - 1 तथा दक्षिण-पक्ष सीमा lim(x→k⁺)[x] = k होती है। सीमा समान न होने के कारण यह सभी पूर्णांकों पर असतत होता है।
2
यदि f(x) = |x - 3| हो, तो x = 3 पर f'(3) का मान क्या होगा?
(A) 1
(B) -1
(C) 0
(D) अस्तित्व में नहीं है (Does not exist)
Reveal Answer & Explanation
Answer: D
x = 3 पर LHD = -1 तथा RHD = +1 है। चूँकि LHD ≠ RHD, अतः x = 3 पर अवकलज का अस्तित्व नहीं है।
3
यदि y = e^(3 ln x) हो, तो dy/dx का मान क्या होगा?
(A) 3x²
(B) e^(3 ln x)
(C) 3/x
(D) x³
Reveal Answer & Explanation
Answer: A
लघुगणक गुणधर्म से y = e^(ln(x³)) = x³। अतः dy/dx = d/dx(x³) = 3x²।
4
अंतराल [2, 4] में फलन f(x) = x² के लिए लांग्रांज मध्यमान प्रमेय (LMVT) को संतुष्ट करने वाले बिंदु c का मान क्या होगा?
(A) 2.5
(B) 3
(C) 3.5
(D) √8
Reveal Answer & Explanation
Answer: B
f'(c) = [f(4) - f(2)] / (4 - 2) = (16 - 4) / 2 = 12 / 2 = 6। f'(x) = 2x, अतः 2c = 6 ⇒ c = 3 ∈ (2, 4)।
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