1.1 गाइगर-मार्सडेन / रदरफोर्ड प्रयोग (1911)
एक रेडियोऐक्टिव स्रोत ($^{214}\text{Bi}$) से उत्सर्जित तीव्रगामी $5.5\text{ MeV}$ ऊर्जा वाले $\alpha$-कणों ($^4_2\text{He}^{2+}$) के संकीर्ण पुंज को सोने की अत्यंत पतली पन्नी ($2.1 \times 10^{-7}\text{ m}$ मोटी) पर आपतित कराया गया। जिंक सल्फाइड (ZnS) पर्दे तथा सूक्ष्मदर्शी की सहायता से प्रकीर्णित कणों की संख्या मापी गई।
- 3 मुख्य प्रेक्षण (Observations):
- अधिकांश $\alpha$-कण (लगभग $\mathbf{99.86\%}$) बिना किसी विक्षेपण के सोने की पन्नी को पार करके सीधे निकल गए।
- लगभग $0.14\%$ कण $1^\circ$ से बड़े कोणों पर विक्षेपित हुए।
- अत्यंत दुर्लभ—लगभग $8000$ में से केवल $1$ $\alpha$-कण $90^\circ$ से बड़े कोण पर प्रकीर्णित हुआ, और लगभग $180^\circ$ पर ठीक पीछे लौट आया!
1.2 महत्वपूर्ण निष्कर्ष एवं संघट्ट प्राचल
- परमाणु का अधिकांश भाग खोखला है: चूंकि $99.86\%$ कण सीधे निकल गए।
- नाभिक की खोज: परमाणु का संपूर्ण धनावेश एवं लगभग समस्त द्रव्यमान उसके केंद्र में एक अत्यंत सूक्ष्म आयतन में संकेंद्रित है जिसे नाभिक (Nucleus) कहते हैं।
- निकटतम पहुँच की दूरी (Distance of Closest Approach - $r_0$):
हेड-ऑन ($180^\circ$) संघट्ट में $\alpha$-कण की संपूर्ण गतिज ऊर्जा नाभिक के ठीक सामने पहुंचकर स्थिरवैद्युत स्थितिज ऊर्जा में बदल जाती है:
$$K = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{(2e)(Ze)}{r_0} \implies \mathbf{r_0 = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{2Ze^2}{K}}$$
सोने ($Z = 79$) के लिए $r_0 \approx 4 \times 10^{-14}\text{ m}$ प्राप्त हुआ, जिससे सिद्ध हुआ कि नाभिक की त्रिज्या $10^{-14}\text{ m}$ से भी छोटी होती है। - संघट्ट प्राचल (Impact Parameter - $b$): नाभिक के केंद्र से $\alpha$-कण के प्रारंभिक वेग सदिश की लंबवत दूरी:
$$\mathbf{b = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{Ze^2 \cot(\theta/2)}{K}}$$
• $b$ बड़ा होने पर विक्षेपण कोण $\theta$ अत्यंत छोटा होता है।
• हेड-ऑन संघट्ट हेतु $b = 0 \implies \cot(\theta/2) = 0 \implies \theta = 180^\circ$।
1.3 रदरफोर्ड मॉडल की कमियां (Failures of Rutherford Model)
1. परमाणु के स्थायित्व की व्याख्या में असमर्थ: मैक्सवेल के शास्त्रीय विद्युतचुंबकीय सिद्धांत के अनुसार वृत्ताकार मार्ग में चक्कर लगाता इलेक्ट्रॉन एक त्वरित आवेश है, जिसे निरंतर विद्युतचुंबकीय तरंगें उत्सर्जित करनी चाहिए। ऊर्जा क्षय होने से इलेक्ट्रॉन की कक्षा की त्रिज्या घटती जानी चाहिए और मात्र $10^{-8}\text{ सेकंड}$ में उसे नाभिक में गिर जाना चाहिए! परंतु परमाणु स्थायी होते हैं。
2. रेखीय स्पेक्ट्रम की व्याख्या में असमर्थ: यदि इलेक्ट्रॉन लगातार ऊर्जा उत्सर्जित करे तो स्पेक्ट्रम सतत (Continuous) होना चाहिए, जबकि प्रायोगिक रूप से परमाणु विविक्त रेखीय स्पेक्ट्रम (Line Spectrum) उत्सर्जित करते हैं।