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JAC • Class XII • Physics • Ch 12
Estimated Time: 45 Mins
Study Progress: In Progress

Atoms

पदार्थ के सूक्ष्मतम अविभाज्य कण माने जाने वाले 'परमाणु' की आंतरिक संरचना का अनावरण आधुनिक भौतिकी की सर्वाधिक रोमांचक यात्रा है। सन् 1911 में अर्नेस्ट रदरफोर्ड के मार्गदर्शन में गाइगर एवं मार्सडेन द्वारा किए गए $\alpha$-कण प्रकीर्णन प्रयोग ने जे.जे. थॉमसन के 'तरबूज मॉडल' को ध्वस्त कर दिया और सिद्ध किया कि परमाणु का लगभग संपूर्ण द्रव्यमान एवं समस्त धनावेश उसके केंद्र में एक अतिसूक्ष्म आयतन ($10^{-15}\text{ m}$) में संकेंद्रित है जिसे नाभिक (Nucleus) कहते हैं। निकटतम पहुँच की दूरी ($r_0 = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0}\frac{2Ze^2}{K}$) ने नाभिक के आकार का प्रथम आंकलन दिया। परंतु शास्त्रीय विद्युतगतिकी के अनुसार त्वरित इलेक्ट्रॉन द्वारा ऊर्जा उत्सर्जन से परमाणु के पतन का संकट खड़ा हो गया। इस संकट का समाधान सन् 1913 में नील्स बोहर ने प्लैंक के क्वांटम सिद्धांत का साहसिक प्रयोग करके किया। बोहर के तीन अभिगृहीतों—विशेषकर कोणीय संवेग का क्वांटीकरण ($mvr = \frac{nh}{2\pi}$) तथा आवृत्ति शर्त ($E_2 - E_1 = h\nu$)—ने हाइड्रोजन परमाणु की $n$-वीं कक्षा की त्रिज्या ($r_n = n^2 a_0$, जहाँ बोहर त्रिज्या $a_0 = 0.529\text{ \AA}$) तथा ऊर्जा स्तरों के सार्वभौमिक सूत्र $E_n = -\frac{13.6}{n^2}\text{ eV}$ का जन्म दिया। रिडबर्ग सूत्र $\frac{1}{\lambda} = R\left(\frac{1}{n_1^2} - \frac{1}{n_2^2}\right)$ द्वारा हाइड्रोजन के रेखीय स्पेक्ट्रम की पांचों श्रेणियों—लाइमन (पराबैंगनी), बामर (दृश्य), पाशन, ब्रैकेट एवं फुंड (अवरक्त)—की पूर्ण व्याख्या तथा दे ब्रॉग्ली द्वारा बोहर के क्वांटीकरण नियम ($2\pi r = n\lambda$) के अपरगामी तरंग स्पष्टीकरण ने परमाणु भौतिकी को अमर बना दिया।

यदि रदरफोर्ड की स्वर्ण पन्नी पर दागी गई अल्फा तोप का गोला कागज के एक टुकड़े से टकराकर वापस आ जाए तो?

अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने अपने अल्फा प्रकीर्णन प्रयोग के परिणाम को देखकर स्वयं आश्चर्य से कहा था—'यह उतना ही अविश्वसनीय था जैसे आप एक टिशू पेपर के टुकड़े पर 15 इंच का तोप का गोला दाग दें, और वह गोला उस पतले कागज से टकराकर वापस लौटे और खुद आपको ही मार गिराए!' सोने की अत्यंत पतली पन्नी (मात्र 1000 परमाणु मोटी) पर जब हीलियम के भारी और तीव्रगामी अल्फा कणों की बौछार की गई, तो 99.86% कण ऐसे सीधे निकल गए मानो सामने कुछ था ही नहीं! परंतु 8000 में से एक अल्फा कण लगभग 180° के कोण पर ठीक पीछे लौट आया! इस एक अकेले कण की वापसी ने साबित कर दिया कि परमाणु का 99.99% स्थान पूरी तरह खोखला है और उसका सारा वजन एक अत्यंत ठोस, नन्हें से केंद्रीय दुर्ग में कैद है जिसे हम 'नाभिक' कहते हैं! आइए जानें परमाणु के इस जादुई सूक्ष्म संसार का संपूर्ण विज्ञान!

Why This Chapter Matters

JAC और CBSE कक्षा 12वीं भौतिकी बोर्ड परीक्षा में 'परमाणु' अध्याय से प्रतिवर्ष 3 से 5 अंकों के अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे जाते हैं। रदरफोर्ड के अल्फा प्रकीर्णन प्रयोग के प्रेक्षण एवं निष्कर्ष, संघट्ट प्राचल ($b$) एवं निकटतम पहुँच की दूरी ($r_0$) का सूत्र, रदरफोर्ड मॉडल की दो सीमाएं (स्थायित्व व रेखीय स्पेक्ट्रम), नील्स बोहर के तीनों अभिगृहीत, हाइड्रोजन परमाणु की $n$-वीं कक्षा की त्रिज्या ($r_n \propto n^2$) तथा कुल ऊर्जा ($E_n = -\frac{13.6}{n^2}\text{ eV}$) का संपूर्ण निगमन, गतिज, स्थितिज एवं कुल ऊर्जा में संबंध ($E = -K = U/2$), हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की श्रेणियां (लाइमन, बामर, पाशन, ब्रैकेट, फुंड) के लिए तरंगदैर्ध्य गणना व स्पेक्ट्रमी क्षेत्र, तथा बोहर के द्वितीय अभिगृहीत का दे ब्रॉग्ली द्वारा तरंग निरूपण बोर्ड परीक्षा में बार-बार दोहराए जाने वाले मुख्य विषय हैं।

Before You Begin (Prerequisites)

  • कूलॉम का स्थिरवैद्युत नियम ($F = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0}\frac{q_1 q_2}{r^2}$) एवं विद्युत स्थितिज ऊर्जा ($U = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0}\frac{q_1 q_2}{r}$)।
  • वृत्तीय गति में अभिकेंद्रीय बल ($F_c = \frac{mv^2}{r}$) एवं कोणीय संवेग ($L = mvr$)।
  • ऊर्जा संरक्षण का नियम तथा गतिज ऊर्जा ($K = \frac{1}{2}mv^2$)।

What You Will Learn (Core Objectives)

  • रदरफोर्ड के अल्फा प्रकीर्णन प्रयोग के प्रेक्षणों के आधार पर नाभिकीय परमाणु मॉडल की स्थापना करना।
  • संघट्ट प्राचल ($b$) तथा निकटतम पहुँच की दूरी ($r_0$) का गणितीय परिकलन करना।
  • बोहर के तीन अभिगृहीतों को समझना तथा हाइड्रोजन परमाणु की कक्षा त्रिज्या व ऊर्जा स्तरों का निगमन करना।
  • हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की विभिन्न श्रेणियों के तरंगदैर्ध्य परास, अधिकतम व न्यूनतम तरंगदैर्ध्य की गणना करना।
  • दे ब्रॉग्ली द्रव्य-तरंग परिकल्पना द्वारा बोहर के कोणीय संवेग क्वांटीकरण नियम ($mvr = nh/2\pi$) को सिद्ध करना।

Chapter Roadmap & Progression

1 1. रदरफोर्ड का अल्फा-कण प्रकीर्णन प...
2 2. बोहर का हाइड्रोजन परमाणु मॉडल (B...
3 3. हाइड्रोजन परमाणु के ऊर्जा स्तर ए...
4 4. बोहर के द्वितीय अभिगृहीत का दे ब...

Complete Concept Guide (100% Curriculum Coverage)

1. रदरफोर्ड का अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग एवं नाभिकीय मॉडल

1.1 गाइगर-मार्सडेन / रदरफोर्ड प्रयोग (1911)

एक रेडियोऐक्टिव स्रोत ($^{214}\text{Bi}$) से उत्सर्जित तीव्रगामी $5.5\text{ MeV}$ ऊर्जा वाले $\alpha$-कणों ($^4_2\text{He}^{2+}$) के संकीर्ण पुंज को सोने की अत्यंत पतली पन्नी ($2.1 \times 10^{-7}\text{ m}$ मोटी) पर आपतित कराया गया। जिंक सल्फाइड (ZnS) पर्दे तथा सूक्ष्मदर्शी की सहायता से प्रकीर्णित कणों की संख्या मापी गई।

  • 3 मुख्य प्रेक्षण (Observations):
    1. अधिकांश $\alpha$-कण (लगभग $\mathbf{99.86\%}$) बिना किसी विक्षेपण के सोने की पन्नी को पार करके सीधे निकल गए।
    2. लगभग $0.14\%$ कण $1^\circ$ से बड़े कोणों पर विक्षेपित हुए।
    3. अत्यंत दुर्लभ—लगभग $8000$ में से केवल $1$ $\alpha$-कण $90^\circ$ से बड़े कोण पर प्रकीर्णित हुआ, और लगभग $180^\circ$ पर ठीक पीछे लौट आया!

1.2 महत्वपूर्ण निष्कर्ष एवं संघट्ट प्राचल

  1. परमाणु का अधिकांश भाग खोखला है: चूंकि $99.86\%$ कण सीधे निकल गए।
  2. नाभिक की खोज: परमाणु का संपूर्ण धनावेश एवं लगभग समस्त द्रव्यमान उसके केंद्र में एक अत्यंत सूक्ष्म आयतन में संकेंद्रित है जिसे नाभिक (Nucleus) कहते हैं।
  3. निकटतम पहुँच की दूरी (Distance of Closest Approach - $r_0$):
    हेड-ऑन ($180^\circ$) संघट्ट में $\alpha$-कण की संपूर्ण गतिज ऊर्जा नाभिक के ठीक सामने पहुंचकर स्थिरवैद्युत स्थितिज ऊर्जा में बदल जाती है:
    $$K = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{(2e)(Ze)}{r_0} \implies \mathbf{r_0 = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{2Ze^2}{K}}$$
    सोने ($Z = 79$) के लिए $r_0 \approx 4 \times 10^{-14}\text{ m}$ प्राप्त हुआ, जिससे सिद्ध हुआ कि नाभिक की त्रिज्या $10^{-14}\text{ m}$ से भी छोटी होती है।
  4. संघट्ट प्राचल (Impact Parameter - $b$): नाभिक के केंद्र से $\alpha$-कण के प्रारंभिक वेग सदिश की लंबवत दूरी:
    $$\mathbf{b = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{Ze^2 \cot(\theta/2)}{K}}$$
    • $b$ बड़ा होने पर विक्षेपण कोण $\theta$ अत्यंत छोटा होता है।
    • हेड-ऑन संघट्ट हेतु $b = 0 \implies \cot(\theta/2) = 0 \implies \theta = 180^\circ$।

1.3 रदरफोर्ड मॉडल की कमियां (Failures of Rutherford Model)

दो गंभीर सीमाएं:
1. परमाणु के स्थायित्व की व्याख्या में असमर्थ: मैक्सवेल के शास्त्रीय विद्युतचुंबकीय सिद्धांत के अनुसार वृत्ताकार मार्ग में चक्कर लगाता इलेक्ट्रॉन एक त्वरित आवेश है, जिसे निरंतर विद्युतचुंबकीय तरंगें उत्सर्जित करनी चाहिए। ऊर्जा क्षय होने से इलेक्ट्रॉन की कक्षा की त्रिज्या घटती जानी चाहिए और मात्र $10^{-8}\text{ सेकंड}$ में उसे नाभिक में गिर जाना चाहिए! परंतु परमाणु स्थायी होते हैं。
2. रेखीय स्पेक्ट्रम की व्याख्या में असमर्थ: यदि इलेक्ट्रॉन लगातार ऊर्जा उत्सर्जित करे तो स्पेक्ट्रम सतत (Continuous) होना चाहिए, जबकि प्रायोगिक रूप से परमाणु विविक्त रेखीय स्पेक्ट्रम (Line Spectrum) उत्सर्जित करते हैं।

2. बोहर का हाइड्रोजन परमाणु मॉडल (Bohr's Atomic Model)

2.1 नील्स बोहर के तीन अभिगृहीत (Three Postulates of Bohr)

  1. प्रथम अभिगृहीत (स्थायी कक्षाएं): इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर केवल कुछ निश्चित अ-विकिरणी (Non-radiating) कक्षाओं में चक्कर लगाते हैं जिन्हें स्थायी कक्षाएं (Stationary Orbits) कहते हैं। इनमें घूमते समय इलेक्ट्रॉन ऊर्जा उत्सर्जित नहीं करते। आवश्यक अभिकेंद्रीय बल कूलॉम आकर्षण बल से मिलता है:
    $$\mathbf{\frac{m v^2}{r} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{e^2}{r^2}}$$
  2. द्वितीय अभिगृहीत (बोहर की क्वांटम शर्त): इलेक्ट्रॉन केवल उन्हीं कक्षाओं में चक्कर लगा सकता है जिनमें उसका कक्षीय कोणीय संवेग ($L$) $\frac{h}{2\pi}$ का पूर्ण गुणज (Integral Multiple) हो:
    $$\mathbf{L = m v r = \frac{n h}{2\pi}} \quad (n = 1, 2, 3... \text{ मुख्य क्वांटम संख्या})$$
  3. तृतीय अभिगृहीत (बोहर की आवृत्ति शर्त): जब कोई इलेक्ट्रॉन किसी उच्च स्थायी कक्षा ($E_2$) से निम्न स्थायी कक्षा ($E_1$) में संक्रमण करता है, तो दोनों स्तरों के अंतर के बराबर ऊर्जा का एक फोटॉन उत्सर्जित होता है:
    $$\mathbf{E_2 - E_1 = h\nu = \frac{hc}{\lambda}}$$

2.2 हाइड्रोजन परमाणु की कक्षा त्रिज्या एवं वेग का निगमन

  • अभिगृहीत (2) से: $v = \frac{n h}{2\pi m r}$
  • अभिगृहीत (1) में मान रखने पर: $\frac{m}{r}\left(\frac{n h}{2\pi m r}\right)^2 = \frac{e^2}{4\pi\varepsilon_0 r^2}$
  • हल करने पर $n$-वीं कक्षा की त्रिज्या:
    $$\mathbf{r_n = \frac{\varepsilon_0 n^2 h^2}{\pi m e^2} = n^2 r_1}$$
    प्रथम कक्षा की त्रिज्या ($n = 1$) को बोहर त्रिज्या (Bohr Radius - $a_0$) कहते हैं:
    $$\mathbf{a_0 = r_1 = 0.529\text{ \AA} = 0.0529\text{ nm}}$$
    • त्रिज्या का अनुपात: $r_1 : r_2 : r_3 = 1 : 4 : 9$ ($r_n \propto n^2$)।
  • $n$-वीं कक्षा में इलेक्ट्रॉन की चाल:
    $$\mathbf{v_n = \frac{e^2}{2\varepsilon_0 n h} \propto \frac{1}{n}}$$
    प्रथम कक्षा में चाल: $v_1 = \frac{c}{137} \approx 2.18 \times 10^6\text{ m/s}$।

3. हाइड्रोजन परमाणु के ऊर्जा स्तर एवं स्पेक्ट्रम

3.1 गतिज, स्थितिज एवं कुल ऊर्जा का संपूर्ण निगमन

  • गतिज ऊर्जा ($K$): $K = \frac{1}{2}mv^2 = \frac{1}{8\pi\varepsilon_0} \frac{e^2}{r}$
  • स्थितिज ऊर्जा ($U$): $U = -\frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{e^2}{r}$
  • कुल ऊर्जा ($E$):
    $$E = K + U = \frac{1}{8\pi\varepsilon_0} \frac{e^2}{r} - \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{e^2}{r} = -\frac{1}{8\pi\varepsilon_0} \frac{e^2}{r}$$
    ऊर्जाओं में स्वर्णिम संबंध:
    $$\mathbf{E = -K = \frac{U}{2} \quad \iff \quad U = 2E = -2K}$$
  • त्रिज्या $r_n$ का मान रखने पर कुल ऊर्जा का सूत्र:
    $$E_n = -\frac{m e^4}{8\varepsilon_0^2 n^2 h^2}$$
    सभी नियतांकों का मान रखने पर:
    $$\mathbf{E_n = -\frac{13.6}{n^2} \text{ eV}}$$
    • $n = 1$ (मूल स्तर / Ground State): $\mathbf{E_1 = -13.6\text{ eV}}$
    • $n = 2$ (प्रथम उत्तेजित अवस्था): $\mathbf{E_2 = -3.4\text{ eV}}$
    • $n = 3$ (द्वितीय उत्तेजित अवस्था): $\mathbf{E_3 = -1.51\text{ eV}}$
    • $n = \infty$ (आयनित अवस्था): $\mathbf{E_\infty = 0\text{ eV}}$
    ऋणात्मक चिन्ह का अर्थ: इलेक्ट्रॉन नाभिक के साथ स्थिरवैद्युत बंधन में बंधा हुआ है। इलेक्ट्रॉन को परमाणु से पूरी तरह मुक्त करने हेतु आवश्यक ऊर्जा को आयनन ऊर्जा (Ionization Energy = $+13.6\text{ eV}$) कहते हैं।

3.2 हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की 5 श्रेणियां (Spectral Series)

जब इलेक्ट्रॉन उच्च ऊर्जा स्तर $n_2$ से निम्न ऊर्जा स्तर $n_1$ में कूदता है, तो उत्सर्जित तरंगदैर्ध्य का रिडबर्ग सूत्र:

$$\mathbf{\frac{1}{\lambda} = R \left(\frac{1}{n_1^2} - \frac{1}{n_2^2}\right)}$$

जहाँ $R = \frac{m e^4}{8\varepsilon_0^2 c h^3} \approx 1.097 \times 10^7\text{ m}^{-1}$ रिडबर्ग नियतांक है।

श्रेणी$n_1$$n_2$स्पेक्ट्रमी क्षेत्रतरंगदैर्ध्य सूत्र
1. लाइमन श्रेणी (Lyman)$1$$2, 3, 4, ...$पराबैंगनी (Ultraviolet)$\frac{1}{\lambda} = R\left(1 - \frac{1}{n_2^2}\right)$
2. बामर श्रेणी (Balmer)$2$$3, 4, 5, ...$दृश्य प्रकाश (Visible)$\frac{1}{\lambda} = R\left(\frac{1}{4} - \frac{1}{n_2^2}\right)$
3. पाशन श्रेणी (Paschen)$3$$4, 5, 6, ...$अवरक्त (Infrared)$\frac{1}{\lambda} = R\left(\frac{1}{9} - \frac{1}{n_2^2}\right)$
4. ब्रैकेट श्रेणी (Brackett)$4$$5, 6, 7, ...$सुदूर अवरक्त (Far IR)$\frac{1}{\lambda} = R\left(\frac{1}{16} - \frac{1}{n_2^2}\right)$
5. फुंड श्रेणी (Pfund)$5$$6, 7, 8, ...$सुदूर अवरक्त (Far IR)$\frac{1}{\lambda} = R\left(\frac{1}{25} - \frac{1}{n_2^2}\right)$

4. बोहर के द्वितीय अभिगृहीत का दे ब्रॉग्ली स्पष्टीकरण

4.1 दे ब्रॉग्ली का अपरगामी तरंग मॉडल (1923)

नील्स बोहर यह नहीं समझा सके थे कि कोणीय संवेग केवल $\frac{nh}{2\pi}$ ही क्यों होता है। इसका संतोषजनक स्पष्टीकरण लुई दे ब्रॉग्ली ने दिया:

  • नाभिक के चारों ओर वृत्ताकार कक्षा में चक्कर लगाते इलेक्ट्रॉन से संबद्ध द्रव्य-तरंग एक अपरगामी तरंग (Standing Wave) बनाती है।
  • कक्षा तभी स्थायी हो सकती है जब इलेक्ट्रॉन तरंग अपने ही ऊपर रचनात्मक व्यतिकरण करे, अर्थात वृत्ताकार कक्षा की परिधि दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य की पूर्ण गुणज हो:
    $$\mathbf{2\pi r = n\lambda} \quad (n = 1, 2, 3...)$$
  • दे ब्रॉग्ली सूत्रानुसार $\lambda = \frac{h}{p} = \frac{h}{m v}$ का मान रखने पर:
    $$2\pi r = n \left(\frac{h}{m v}\right) \implies m v r = \frac{n h}{2\pi}$$
    $$\mathbf{L = m v r = \frac{n h}{2\pi}}$$ (बोहर का द्वितीय अभिगृहीत इति सिद्धम्)
    अतः बोहर की रहस्यमयी क्वांटम शर्त वास्तव में इलेक्ट्रॉन द्रव्य-तरंगों के अपरगामी स्वरूप का स्वाभाविक परिणाम है!

Key Formulas, Laws & Physical Constants

निकटतम पहुँच दूरी r₀
$$r_0 = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0}\frac{2Ze^2}{K} \quad (r_0 \approx 10^{-14}\text{ m})$$
संघट्ट प्राचल b
$$b = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0}\frac{Ze^2 \cot(\theta/2)}{K} \quad (b=0 \implies \theta=180^\circ)$$
बोहर कोणीय संवेग शर्त
$$L = mvr = \frac{nh}{2\pi} \quad (n = 1, 2, 3...)$$
बोहर आवृत्ति शर्त
$$E_2 - E_1 = h\nu = \frac{hc}{\lambda}$$
बोहर त्रिज्या
$$r_n = \frac{\varepsilon_0 n^2 h^2}{\pi m e^2} = n^2 a_0; \quad a_0 = 0.529\text{ \AA}$$
कक्षीय चाल
$$v_n = \frac{e^2}{2\varepsilon_0 n h} = \frac{c}{137 n} \propto \frac{1}{n}$$
ऊर्जा स्तर सूत्र
$$E_n = -\frac{13.6}{n^2}\text{ eV}; \quad E_1 = -13.6\text{ eV}, E_2 = -3.4\text{ eV}$$
ऊर्जा संबंध
$$E = -K = \frac{U}{2} \implies U = 2E = -2K$$
रिडबर्ग सूत्र
$$\frac{1}{\lambda} = R\left(\frac{1}{n_1^2} - \frac{1}{n_2^2}\right); \quad R \approx 1.097 \times 10^7\text{ m}^{-1}$$
लाइमन श्रेणी (UV)
$$n_1 = 1, n_2 = 2, 3...; \quad \lambda_{\min} = 1/R = 912\text{ \AA}$$
बामर श्रेणी (Visible)
n_1 = 2, n_2 = 3, 4...; H_ = 6563 (लाल)
दे ब्रॉग्ली बोहर सत्यापन
$$2\pi r = n\lambda = n\left(\frac{h}{mv}\right) \implies mvr = \frac{nh}{2\pi}$$

Conceptual Solved Examples & Case Studies

Example 1
हाइड्रोजन परमाणु के मूल स्तर (Ground State) में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा $-13.6\text{ eV}$ है। इस अवस्था में इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा ($K$) तथा स्थितिज ऊर्जा ($U$) ज्ञात कीजिए। यदि इलेक्ट्रॉन प्रथम उत्तेजित अवस्था ($n = 2$) में जाता है तो आवश्यक उत्तेजन ऊर्जा क्या होगी?
Step-by-Step Solution:
दिया है:
मूल स्तर में कुल ऊर्जा $E = -13.6\text{ eV}$

1. गतिज ऊर्जा ($K$):
हम जानते हैं कि: $K = -E$
$$K = -(-13.6\text{ eV}) = \mathbf{+13.6\text{ eV}}$$

2. स्थितिज ऊर्जा ($U$):
हम जानते हैं कि: $U = 2E$
$$U = 2 \times (-13.6\text{ eV}) = \mathbf{-27.2\text{ eV}}$$

3. प्रथम उत्तेजित अवस्था ($n = 2$) हेतु उत्तेजन ऊर्जा:
$$E_2 = -\frac{13.6}{2^2} = -\frac{13.6}{4} = -3.4\text{ eV}$$
आवश्यक उत्तेजन ऊर्जा: $\Delta E = E_2 - E_1$
$$\Delta E = -3.4\text{ eV} - (-13.6\text{ eV}) = -3.4 + 13.6 = \mathbf{+10.2\text{ eV}}$$
Example 2
हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की बामर श्रेणी (Balmer Series) की प्रथम रेखा ($H_\alpha$) की तरंगदैर्ध्य की गणना कीजिए। ($R = 1.097 \times 10^7\text{ m}^{-1}$)। यह रेखा स्पेक्ट्रम के किस भाग में स्थित है?
Step-by-Step Solution:
दिया है:
बामर श्रेणी हेतु निम्न स्तर $n_1 = 2$
प्रथम रेखा ($H_\alpha$) हेतु उच्च स्तर $n_2 = 3$
रिडबर्ग नियतांक $R = 1.097 \times 10^7\text{ m}^{-1}$

सूत्र:
$$\frac{1}{\lambda} = R\left(\frac{1}{n_1^2} - \frac{1}{n_2^2}\right) = R\left(\frac{1}{2^2} - \frac{1}{3^2}\right) = R\left(\frac{1}{4} - \frac{1}{9}\right)$$
$$\frac{1}{\lambda} = R \left(\frac{9 - 4}{36}\right) = \frac{5R}{36}$$
$$\lambda = \frac{36}{5R} = \frac{36}{5 \times (1.097 \times 10^7\text{ m}^{-1})} = \frac{36}{5.485 \times 10^7} \approx 6.563 \times 10^{-7}\text{ m}$$
$$\mathbf{\lambda = 656.3\text{ nm} = 6563\text{ \AA}}$$
उत्तर: $H_\alpha$ रेखा की तरंगदैर्ध्य $\mathbf{6563\text{ \AA}}$ है और यह विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम के दृश्य प्रकाश क्षेत्र (Visible Region - लाल रंग) में स्थित है।
Example 3
बोहर के परमाणु मॉडल के तीनों अभिगृहीत लिखिए।
Step-by-Step Solution:
नील्स बोहर ने 1913 में हाइड्रोजन परमाणु के लिए निम्नलिखित तीन अभिगृहीत प्रतिपादित किए:

1. प्रथम अभिगृहीत (स्थायी कक्षाएं - Stationary Orbits):
परमाणु में इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर केवल कुछ निश्चित अ-विकिरणी कक्षाओं में घूमते हैं जिन्हें स्थायी कक्षाएं कहते हैं। इन कक्षाओं में परिक्रमण करते समय इलेक्ट्रॉन ऊर्जा का विकिरण नहीं करते। आवश्यक अभिकेंद्रीय बल कूलॉम आकर्षण बल से प्राप्त होता है:
$$\frac{m v^2}{r} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{e^2}{r^2}$$

2. द्वितीय अभिगृहीत (कोणीय संवेग का क्वांटीकरण):
इलेक्ट्रॉन केवल उन्हीं कक्षाओं में घूम सकता है जिनमें उसका कक्षीय कोणीय संवेग ($L$) $\frac{h}{2\pi}$ का पूर्ण गुणज हो:
$$L = m v r = \frac{n h}{2\pi} \quad (n = 1, 2, 3...)$$
जहाँ $n$ मुख्य क्वांटम संख्या है。

3. तृतीय अभिगृहीत (बोहर की आवृत्ति शर्त):
जब कोई इलेक्ट्रॉन किसी उच्च ऊर्जा वाली स्थायी कक्षा ($E_2$) से निम्न ऊर्जा वाली कक्षा ($E_1$) में संक्रमण करता है, तो दोनों स्तरों के अंतर के बराबर ऊर्जा का एक फोटॉन उत्सर्जित होता है:
$$E_2 - E_1 = h\nu = \frac{hc}{\lambda}$$
Example 4
दे ब्रॉग्ली की द्रव्य-तरंग परिकल्पना का उपयोग करके बोहर के द्वितीय अभिगृहीत ($mvr = \frac{nh}{2\pi}$) का निगमन कीजिए।
Step-by-Step Solution:
दे ब्रॉग्ली द्वारा बोहर के नियम का सत्यापन:
1. लुई दे ब्रॉग्ली (1923) के अनुसार, नाभिक के चारों ओर वृत्ताकार कक्षा में गतिमान इलेक्ट्रॉन के साथ एक द्रव्य-तरंग संबद्ध होती है जिसकी तरंगदैर्ध्य $\lambda = \frac{h}{mv}$ होती है。
2. इलेक्ट्रॉन की वृत्ताकार कक्षा तभी स्थायी हो सकती है जब इलेक्ट्रॉन तरंग अपने पथ पर अपरगामी तरंग (Standing Wave) का निर्माण करे, ताकि रचनात्मक व्यतिकरण द्वारा तरंग नष्ट न हो。
3. इसके लिए कक्षा की कुल परिधि ($2\pi r$) द्रव्य-तरंग की तरंगदैर्ध्य ($\lambda$) का पूर्ण गुणज होनी चाहिए:
$$2\pi r = n\lambda \quad (n = 1, 2, 3...)$$
4. दे ब्रॉग्ली सूत्र से $\lambda = \frac{h}{mv}$ का मान प्रतिस्थापित करने पर:
$$2\pi r = n \left(\frac{h}{mv}\right)$$
पुनर्व्यवस्थित करने पर:
$$m v r = n \left(\frac{h}{2\pi}\right) = \frac{nh}{2\pi}$$
$$\mathbf{L = mvr = \frac{nh}{2\pi}} \quad \text{(इति सिद्धम्)}$$
अतः बोहर की रहस्यमयी क्वांटम शर्त इलेक्ट्रॉन द्रव्य-तरंगों के अपरगामी व्यवहार का स्वाभाविक ज्यामितीय परिणाम है।
Example 5
रदरफोर्ड के अल्फा प्रकीर्णन प्रयोग में 'निकटतम पहुँच की दूरी' (Distance of Closest Approach) से क्या तात्पर्य है? इसके सूत्र का निगमन कीजिए।
Step-by-Step Solution:
निकटतम पहुँच की दूरी की परिभाषा:
जब कोई $\alpha$-कण सोने के नाभिक की ओर ठीक सीधे (Head-on Collision) गति करता है, तो नाभिक के प्रचंड प्रतिकर्षण बल के कारण उसकी गति मंद होती जाती है और नाभिक के समीप एक निश्चित बिंदु पर उसकी गतिज ऊर्जा क्षण भर के लिए शून्य हो जाती है, जहाँ से वह $180^\circ$ पर वापस लौट आता है। इस न्यूनतम दूरी को निकटतम पहुँच की दूरी ($r_0$) कहते हैं। यह नाभिक के वास्तविक आकार की ऊपरी सीमा निर्धारित करती है。

सूत्र का निगमन:
1. अनंत पर $\alpha$-कण ($q_1 = +2e$) की प्रारंभिक गतिज ऊर्जा $K = \frac{1}{2}m v^2$ है तथा स्थितिज ऊर्जा $U_i = 0$ है。
2. निकटतम पहुँच के बिंदु ($r = r_0$) पर कण क्षण भर के लिए रुक जाता है: अतः अंतिम गतिज ऊर्जा $K_f = 0$。
3. इस बिंदु पर $\alpha$-कण और नाभिक ($q_2 = +Ze$) के बीच स्थिरवैद्युत स्थितिज ऊर्जा:
$$U_f = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q_1 q_2}{r_0} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{(2e)(Ze)}{r_0} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{2Ze^2}{r_0}$$
4. ऊर्जा संरक्षण के नियमानुसार: प्रारंभिक कुल ऊर्जा = अंतिम कुल ऊर्जा
$$K + 0 = 0 + U_f \implies K = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{2Ze^2}{r_0}$$
$$\mathbf{r_0 = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{2Ze^2}{K}} \quad \text{(इति सिद्धम्)}$$

Common Misconceptions & Examiner Traps

Common Misconception

ऊर्जा स्तर सूत्र में ऋणात्मक चिन्ह भूल जाना।

Scientific Reality & Correction

ऊर्जा स्तर का सूत्र $E_n = -13.6/n^2\text{ eV}$ है; ऋणात्मक चिन्ह दर्शाता है कि इलेक्ट्रॉन नाभिक से बंधा हुआ है।

Common Misconception

बामर श्रेणी को पराबैंगनी क्षेत्र में मान लेना।

Scientific Reality & Correction

बामर श्रेणी दृश्य प्रकाश क्षेत्र (Visible Region) में आती है; पराबैंगनी क्षेत्र में केवल लाइमन श्रेणी आती है।

Common Misconception

प्रथम उत्तेजित अवस्था को $n = 1$ मान लेना।

Scientific Reality & Correction

मूल स्तर (Ground State) $n = 1$ होता है; प्रथम उत्तेजित अवस्था (First Excited State) $n = 2$ होती है।

Common Misconception

रदरफोर्ड प्रयोग में सभी अल्फा कणों के विक्षेपित होने का भ्रम।

Scientific Reality & Correction

99.86% अल्फा कण बिना किसी विक्षेपण के सीधे निकल जाते हैं; केवल 8000 में से 1 कण ही $180^\circ$ पर लौटता है।

Common Misconception

गतिज ऊर्जा को ऋणात्मक मान लेना।

Scientific Reality & Correction

गतिज ऊर्जा सदैव धनात्मक होती है ($K = -E = +13.6/n^2\text{ eV}$); स्थितिज ऊर्जा ऋणात्मक होती है ($U = 2E = -27.2/n^2\text{ eV}$)।

परमाणु: रदरफोर्ड मॉडल, बोहर ऊर्जा स्तर व स्पेक्ट्रमी श्रेणियां

परमाणु: रदरफोर्ड नाभिकीय मॉडल, बोहर अभिगृहीत व हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम1. रदरफोर्ड अल्फा प्रकीर्णननाभिक की खोज (1911)• 99.86% कण सीधे निकलेपरमाणु का अधिकांश भाग खोखला• 1 in 8000 कण 180° पर लौटासूक्ष्म सघन धनावेशित नाभिक• निकटतम पहुँच r₀:r₀ = (1/4πε₀) 2Ze² / K ≈ 10⁻¹⁴ m• कमियां: 1. परमाणु स्थायित्व2. रेखीय स्पेक्ट्रम की विफलता2. बोहर अभिगृहीतक्वांटीकरण व ऊर्जा स्तर• कोणीय संवेग L = nh / 2πअ-विकिरणी स्थायी कक्षाएं• बोहर त्रिज्या r_n = n² a₀a₀ = 0.529 Å (n=1)• ऊर्जा सूत्र: E_n = -13.6 / n² eVE₁ = -13.6 eV, E₂ = -3.4 eV• स्वर्णिम ऊर्जा संबंध:E = -K = U / 2 (U = -2K)3. हाइड्रोजन स्पेक्ट्रमरिडबर्ग सूत्र 1/λ• 1/λ = R [1/n₁² - 1/n₂²]1. लाइमन: n₁=1 (पराबैंगनी UV)2. बामर: n₁=2 (दृश्य Visible)H_α = 6563 Å (लाल रंग)3. पाशन: n₁=3 (अवरक्त IR)4. ब्रैकेट: n₁=4 (सुदूर IR)5. फुंड: n₁=5 (सुदूर IR)दे ब्रॉग्ली: 2πr = nλ ⇒ mvr=nh/2πबोर्ड परीक्षा के प्रमुख संप्रत्यय (Golden Atomic Physics Capsule)रदरफोर्ड r₀:r₀ = (1/4πε₀) 2Ze²/K; 99.86% कण सीधे निकले; नाभिक त्रिज्या ≈ 10⁻¹⁴ m।बोहर ऊर्जा स्तर:E_n = -13.6/n² eV; E = -K = U/2; बोहर त्रिज्या a₀ = 0.529 Å (r_n ∝ n²)।स्पेक्ट्रमी श्रेणियां:लाइमन (UV), बामर (दृश्य), पाशन/ब्रैकेट/फुंड (IR); दे ब्रॉग्ली 2πr = nλ।

Chapter Summary & 10 Key Takeaways

Takeaway 1
रदरफोर्ड अल्फा प्रकीर्णन में 99.86% कण सीधे निकले; सिद्ध हुआ परमाणु का अधिकांश भाग खोखला है।
Takeaway 2
निकटतम पहुँच की दूरी r₀ = (1/4πε₀)(2Ze²/K) ≈ 10⁻¹⁴ m नाभिक का आकार दर्शाती है।
Takeaway 3
रदरफोर्ड मॉडल परमाणु के स्थायित्व तथा रेखीय स्पेक्ट्रम की व्याख्या करने में विफल रहा।
Takeaway 4
बोहर प्रथम अभिगृहीत: इलेक्ट्रॉन अ-विकिरणी स्थायी कक्षाओं में घूमते हैं (अभिकेंद्रीय = कूलॉम बल)।
Takeaway 5
बोहर द्वितीय अभिगृहीत: कक्षीय कोणीय संवेग L = mvr = nh / 2π (क्वांटीकृत) होता है।
Takeaway 6
बोहर तृतीय अभिगृहीत: संक्रमण पर फोटॉन उत्सर्जन E₂ - E₁ = hν = hc/λ होता है।
Takeaway 7
बोहर त्रिज्या r_n = n² a₀ (a₀ = 0.529 Å) तथा वेग v_n ∝ 1/n होता है।
Takeaway 8
कुल ऊर्जा E_n = -13.6/n² eV; ऊर्जा संबंध E = -K = U/2 (आयनन ऊर्जा = +13.6 eV)।
Takeaway 9
हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम श्रेणियां: लाइमन (UV), बामर (दृश्य), पाशन (IR), ब्रैकेट (IR), फुंड (IR)।
Takeaway 10
दे ब्रॉग्ली ने अपरगामी तरंग परिधि 2πr = nλ मानकर बोहर के mvr = nh/2π को प्रमाणित किया।

Check Your Understanding (Diagnostic Practice Questions)

Diagnostic questions testing core conceptual clarity. Answers are hidden initially — solve each problem first, then click to reveal the step-by-step verified solution.

1
रदरफोर्ड के अल्फा प्रकीर्णन प्रयोग से नाभिक के आकार के संबंध में क्या निष्कर्ष प्राप्त हुआ?
Reveal Answer & Explanation
Answer: निकटतम पहुँच की दूरी (r₀) की गणना से यह सिद्ध हुआ कि नाभिक का आकार लगभग 10⁻¹⁵ m से 10⁻¹⁴ m (फर्मी स्तर) होता है, जो कि परमाणु के कुल आकार (लगभग 10⁻¹⁰ m) की तुलना में लगभग 10,000 से 100,000 गुना छोटा होता है।
2
बोहर के परमाणु मॉडल में कोणीय संवेग के क्वांटीकरण का नियम लिखिए।
Reveal Answer & Explanation
Answer: इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर केवल उन्हीं स्थायी कक्षाओं में परिक्रमण कर सकता है जिनमें उसका कक्षीय कोणीय संवेग (L = mvr) h/2π का पूर्ण गुणज (Integral Multiple) हो, अर्थात L = mvr = nh / 2π (जहाँ n = 1, 2, 3...)।
3
हाइड्रोजन परमाणु के ऊर्जा स्तर सूत्र में ऋणात्मक चिन्ह (-13.6/n² eV) क्या प्रदर्शित करता है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: ऋणात्मक चिन्ह यह प्रदर्शित करता है कि इलेक्ट्रॉन नाभिक के साथ स्थिरवैद्युत आकर्षण बल द्वारा एक परिबद्ध (Bound) अवस्था में बंधा हुआ है। इसे नाभिक के आकर्षण से अनंत तक पूरी तरह मुक्त करने के लिए बाहर से धनात्मक ऊर्जा देनी होगी।
4
हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की कौन सी श्रेणी विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम के 'दृश्य प्रकाश' (Visible) क्षेत्र में पड़ती है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: बामर श्रेणी (Balmer Series - n₁ = 2, n₂ = 3, 4, 5...) दृश्य प्रकाश क्षेत्र में पड़ती है।
5
दे ब्रॉग्ली के अनुसार स्थायी कक्षा की परिधि तथा इलेक्ट्रॉन की द्रव्य-तरंगदैर्ध्य में क्या संबंध होता है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: कक्षा की परिधि दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य की पूर्ण गुणज होती है: 2πr = nλ (जहाँ n = 1, 2, 3... मुख्य क्वांटम संख्या है)।
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