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JAC • Class XII • Physics • Ch 3
Estimated Time: 45 Mins
Study Progress: In Progress

Current Electricity

विद्युतगतिकी (Electrodynamics) भौतिकी की वह व्यावहारिक और गतिशील शाखा है जिसके अंतर्गत गतिमान आवेशों, विद्युत धाराओं तथा परिपथों के नियमों का सूक्ष्म और स्थूल अध्ययन किया जाता है। चालक के किसी अनुप्रस्थ काट से प्रति एकांक समय में प्रवाहित नेट आवेश को विद्युत धारा ($I = \frac{dq}{dt}$, मात्रक एम्पियर) कहते हैं। चालक में धारा मुक्त इलेक्ट्रॉनों के तापीय वेग ($10^5\text{ m/s}$) के कारण नहीं, बल्कि बाह्य विद्युत क्षेत्र द्वारा आरोपित अति सूक्ष्म औसत अनुगमन वेग यानी अपवाह वेग ($v_d \approx 10^{-4}\text{ m/s}$) के कारण प्रवाहित होती है, जिसका धारा के साथ मूलभूत संबंध $I = n e A v_d$ है। ओम का नियम ($V = IR$) तथा इसका सूक्ष्म सदिश रूप $\vec{j} = \sigma \vec{E}$ चालक की प्रतिरोधकता ($\rho = \frac{m}{n e^2 \tau}$) को विश्रांति काल ($\tau$) से जोड़ता है। रासायनिक सेलों के व्यवहार को समझने के लिए विद्युत वाहक बल ($\mathcal{E}$), आंतरिक प्रतिरोध ($r$), तथा टर्मिनल विभवांतर ($V = \mathcal{E} - Ir$) के संबंध अनिवार्य हैं। जटिल विद्युत नेटवर्कों के विश्लेषण हेतु किरखोफ के दो सार्वभौमिक नियम—संधि नियम (आवेश संरक्षण) तथा लूप नियम (ऊर्जा संरक्षण)—सर्वोपरि आधार प्रदान करते हैं। प्रतिरोधों के अत्यंत यथार्थ मापन हेतु व्हीटस्टोन सेतु (संतुलन शर्त: $\frac{P}{Q} = \frac{R}{S}$) तथा शून्य-विक्षेप विधि पर आधारित विभवमापी (Potentiometer) विभव और आंतरिक प्रतिरोध मापन के सबसे सटीक उपकरण हैं। यह अध्याय बोर्ड परीक्षा में संख्यात्मक एवं प्रयोगात्मक दोनों दृष्टियों से अत्यधिक महत्वपूर्ण है।

जब इलेक्ट्रॉन चींटी की चाल ($0.1\text{ mm/s}$) से चलते हैं, तो स्विच दबाते ही 100 मीटर दूर पंखा पलक झपकते ही कैसे चालू हो जाता है?

यह जानकर आपको आश्चर्य होगा कि जब आप कमरे का पंखा या बल्ब जलाते हैं, तो तार के भीतर इलेक्ट्रॉन मात्र 0.1 मिलीमीटर प्रति सेकंड की कछुआ चाल (Drift Velocity) से आगे रेंगते हैं! इस गति से एक इलेक्ट्रॉन को स्विच से छत के पंखे तक पहुँचने में कई घंटे लग जाने चाहिए। फिर स्विच ऑन करते ही 1 माइक्रोसेकंड में बल्ब कैसे जल उठता है? रहस्य यह है कि विद्युत धारा किसी एक इलेक्ट्रॉन के दौड़ने का नाम नहीं है, बल्कि तार में पहले से मौजूद अरबों-खरबों मुक्त इलेक्ट्रॉनों पर प्रकाश की गति ($3 \times 10^8\text{ m/s}$) से फैलने वाले 'विद्युत क्षेत्र' का सामूहिक प्रभाव है! जैसे ही स्विच दबता है, पूरे तार में एक साथ विद्युत क्षेत्र स्थापित हो जाता है और सारे इलेक्ट्रॉन एक साथ कदमताल करने लगते हैं। आइए धारा और परिपथों के इस जादुई भौतिकी का उद्घाटन करें!

Why This Chapter Matters

JAC और CBSE कक्षा 12वीं भौतिकी बोर्ड परीक्षा में 'विद्युत धारा' से प्रतिवर्ष 7 से 10 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। अपवाह वेग ($v_d = \frac{eE\tau}{m}$) एवं धारा संबंध ($I = neAv_d$) का निगमन, ओम के नियम का सूक्ष्म निगमन एवं प्रतिरोधकता पर ताप का प्रभाव, सेल का विद्युत वाहक बल, टर्मिनल विभवांतर और आंतरिक प्रतिरोध संबंध ($V = \mathcal{E} - Ir$ एवं $r = R(\mathcal{E}/V - 1)$), किरखोफ के दोनों नियम (संधि नियम व लूप नियम) और इनके संरक्षण सिद्धांत, व्हीटस्टोन सेतु की संतुलन शर्त ($\frac{P}{Q} = \frac{R}{S}$) का किरखोफ नियमों से निगमन, तथा विभवमापी द्वारा दो सेलों के EMF की तुलना ($\frac{\mathcal{E}_1}{\mathcal{E}_2} = \frac{l_1}{l_2}$) और आंतरिक प्रतिरोध के व्यंजक पर निश्चित रूप से दीर्घ-उत्तरीय और संख्यात्मक प्रश्न आते हैं।

Before You Begin (Prerequisites)

  • विद्युत आवेश, कूलॉम बल तथा विभवांतर ($V = W/q$) की प्राथमिक समझ।
  • इलेक्ट्रॉनों की गति और चालकों में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की अवधारणा।
  • सरल डीसी परिपथ (बैटरी, प्रतिरोध, अमीटर, वोल्टमीटर) का सामान्य ज्ञान।

What You Will Learn (Core Objectives)

  • विद्युत धारा, धारा घनत्व, विश्रांति काल, तथा अपवाह वेग की अवधारणाओं को स्पष्ट करना और $I = neAv_d$ का संपूर्ण निगमन करना।
  • ओम के नियम के सूक्ष्म रूप $\vec{j} = \sigma \vec{E}$ को व्युत्पन्न करना और चालकों, अर्धचालकों पर ताप के प्रभाव की व्याख्या करना।
  • सेल के EMF, आंतरिक प्रतिरोध तथा टर्मिनल वोल्टता के बीच संबंधों का गणितीय विश्लेषण करना।
  • किरखोफ के संधि एवं लूप नियमों को परिपथों में लागू करना और उनके संरक्षण नियमों को सिद्ध करना।
  • व्हीटस्टोन सेतु की संतुलन अवस्था तथा विभवमापी के सिद्धांत एवं अनुप्रयोगों का संपूर्ण अध्ययन करना।

Chapter Roadmap & Progression

1 1. विद्युत धारा, अपवाह वेग एवं धारा...
2 2. ओम का नियम, प्रतिरोधकता एवं ताप...
3 3. सेल का EMF, आंतरिक प्रतिरोध, टर्...
4 4. किरखोफ के नियम (Kirchhoff's Laws...
5 5. व्हीटस्टोन सेतु एवं विभवमापी (Wh...

Complete Concept Guide (100% Curriculum Coverage)

1. विद्युत धारा, अपवाह वेग एवं धारा घनत्व (Current & Drift Velocity)

1.1 विद्युत धारा एवं धारा घनत्व

विद्युत धारा (Electric Current - $I$): किसी चालक के अनुप्रस्थ काट से प्रति सेकंड प्रवाहित होने वाले नेट आवेश की दर को विद्युत धारा कहते हैं:

$$I = \frac{\Delta Q}{\Delta t} \quad \text{अथवा} \quad I = \frac{dq}{dt}$$• प्रकृति: अदिश राशि (यद्यपि इसमें दिशा होती है, परंतु यह सदिश योग के नियमों का पालन नहीं करती)।
• SI मात्रक: एम्पियर ($\text{Ampere - A} = \text{C/s}$)।
• धारा घनत्व (Current Density - $\vec{j}$): चालक के भीतर किसी बिंदु पर प्रति एकांक अनुप्रस्थ क्षेत्रफल से अभिलंबवत गुजरने वाली धारा को धारा घनत्व कहते हैं:
$$\mathbf{\vec{j} = \frac{I}{A} \hat{n}} \quad \implies I = \int \vec{j}\cdot d\vec{A}$$• प्रकृति: सदिश राशि (SI मात्रक: $\text{A/m}^2$)।

1.2 मुक्त इलेक्ट्रॉनों की गति एवं अपवाह वेग (Drift Velocity - $v_d$)

सामान्य ताप पर चालक के भीतर मुक्त इलेक्ट्रॉन गैस के अणुओं की तरह यादृच्छिक रूप से $10^5\text{ m/s}$ के प्रचंड तापीय वेग से गति करते हैं, परंतु सभी दिशाओं में सममित होने के कारण उनका औसत तापीय वेग शून्य होता है ($\vec{u}_{\text{avg}} = 0$), अतः बिना बैटरी के कोई धारा नहीं बहती।

अपवाह वेग (Drift Velocity): जब चालक के सिरों पर बैटरी लगाकर बाह्य विद्युत क्षेत्र ($\vec{E}$) आरोपित किया जाता है, तो मुक्त इलेक्ट्रॉनों पर क्षेत्र के विपरीत दिशा में एक स्थिरवैद्युत बल $\vec{F} = -e\vec{E}$ लगता है। धनायनों से लगातार टक्करों के बावजूद इलेक्ट्रॉन क्षेत्र के विपरीत दिशा में एक अत्यंत मंद नियत औसत वेग से खिसकने (अपवाहित होने) लगते हैं, जिसे अपवाह वेग ($v_d$) कहते हैं:
$$\mathbf{\vec{v}_d = -\frac{e \vec{E} \tau}{m}} \quad \implies v_d = \frac{e E \tau}{m}$$जहाँ $e = 1.6 \times 10^{-19}\text{ C}$, $m = 9.1 \times 10^{-31}\text{ kg}$ (इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान), तथा $\tau$ = विश्रांति काल (Relaxation Time)—दो क्रमागत टक्करों के बीच का औसत समय अंतराल (लगभग $10^{-14}\text{ s}$)।
अपवाह वेग का परिमाण: अत्यंत सूक्ष्म ($v_d \approx 10^{-4}\text{ m/s} = 0.1\text{ mm/s}$)।

1.3 विद्युत धारा एवं अपवाह वेग में संबंध ($I = n e A v_d$) का निगमन

माना $L$ लंबाई तथा $A$ अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल वाले एक चालक के एकांक आयतन में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या (इलेक्ट्रॉन घनत्व) $n$ है:

  • चालक का कुल आयतन $= A \cdot L$
  • चालक में कुल मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या $N = n \times (A \cdot L)$
  • चालक में कुल मुक्त आवेश $q = N e = n A L e$
  • इलेक्ट्रॉनों द्वारा $L$ लंबाई पार करने में लगा समय: $t = \frac{L}{v_d}$
  • अतः प्रवाहित धारा $I = \frac{q}{t} = \frac{n A L e}{\frac{L}{v_d}}$:$$\mathbf{I = n e A v_d}$$$$\mathbf{j = \frac{I}{A} = n e v_d}$$

गतिशीलता (Mobility - $\mu$): प्रति एकांक विद्युत क्षेत्र में प्राप्त अपवाह वेग को गतिशीलता कहते हैं:
$$\mu = \frac{v_d}{E} = \frac{e\tau}{m} \quad (\text{SI मात्रक: } \text{m}^2\text{V}^{-1}\text{s}^{-1})$$

2. ओम का नियम, प्रतिरोधकता एवं ताप पर निर्भरता

2.1 ओम के नियम का सूक्ष्म निगमन (Microscopic Deduction of Ohm's Law)

हम जानते हैं कि $I = n e A v_d$ तथा $v_d = \frac{e E \tau}{m}$। मान प्रतिस्थापित करने पर:

$$I = n e A \left( \frac{e E \tau}{m} \right) = \left( \frac{n e^2 \tau}{m} \right) A E$$

चूंकि $E = \frac{V}{L}$ (जहाँ $V$ सिरों पर विभवांतर तथा $L$ लंबाई है):

$$I = \left( \frac{n e^2 \tau A}{m L} \right) V \implies V = \left( \frac{m}{n e^2 \tau} \frac{L}{A} \right) I$$
नियत ताप व भौतिक परिस्थितियों में कोष्ठक की राशि नियत रहती है, जिसे चालक का वैद्युत प्रतिरोध ($R$) कहते हैं:
$$\mathbf{V = I R} \quad (\text{ओम का नियम})$$जहाँ $R = \rho \frac{L}{A}$ तथा चालक की विशिष्ट प्रतिरोधकता (Resistivity - $\rho$):
$$\mathbf{\rho = \frac{m}{n e^2 \tau}}$$• ओम के नियम का सदिश / सूक्ष्म रूप:
चूंकि $j = \frac{I}{A} = \left( \frac{n e^2 \tau}{m} \right) E = \sigma E$ (जहाँ $\sigma = \frac{1}{\rho}$ चालकता है):
$$\mathbf{\vec{j} = \sigma \vec{E}} \quad \text{अथवा} \quad \mathbf{\vec{E} = \rho \vec{j}}$$

2.2 प्रतिरोधकता पर ताप का प्रभाव (Temperature Dependence of Resistivity)

सूत्र $\rho = \frac{m}{n e^2 \tau}$ के आधार पर ताप बढ़ाने पर विभिन्न पदार्थों का व्यवहार:

पदार्थ का प्रकारताप बढ़ाने पर व्यवहार एवं कारणप्रतिरोध ताप गुणांक ($\alpha$)
1. धातुएं / चालक (Metals)ताप बढ़ाने पर धनायनों का कंपन बढ़ता है, जिससे टक्करें तेज होती हैं और विश्रांति काल ($\tau$) घट जाता है। अतः प्रतिरोधकता बढ़ती है:
$R_t = R_0(1 + \alpha \Delta t)$
धनात्मक ($\alpha > 0$)
2. अर्धचालक (Semiconductors: Si, Ge)ताप बढ़ाने पर सहसंयोजक बंध टूटते हैं जिससे मुक्त आवेश घनत्व ($n$) चरघातांकी रूप से बढ़ता है। अतः प्रतिरोधकता तेजी से घटती है।ऋणात्मक ($\alpha < 0$)
3. मिश्र धातुएं (Nichrome, Manganin)इनकी प्रतिरोधकता बहुत अधिक होती है और ताप के साथ परिवर्तन नगण्य होता है। इसीलिए मानक प्रतिरोध कुंडलियां मैंगनीन या कांस्टेंटन की बनाई जाती हैं।अति-अल्प धनात्मक

3. सेल का EMF, आंतरिक प्रतिरोध, टर्मिनल विभवांतर एवं संयोजन

3.1 विद्युत वाहक बल (EMF), आंतरिक प्रतिरोध ($r$) एवं टर्मिनल विभवांतर ($V$)

  • विद्युत वाहक बल (Electromotive Force - $\mathcal{E}$): एकांक आवेश को पूरे परिपथ (सेल सहित) में प्रवाहित कराने में सेल द्वारा दी गई कुल ऊर्जा को सेल का EMF कहते हैं। खुले परिपथ ($I=0$) में सेल के दोनों ध्रुवों के मध्य अधिकतम विभवांतर।
  • आंतरिक प्रतिरोध ($r$): धारा प्रवाहित होने पर सेल के अंदर वैद्युत अपघट्य के घोल द्वारा प्रस्तुत किए गए प्रतिरोध को सेल का आंतरिक प्रतिरोध कहते हैं। (यह सांद्रता व इलेक्ट्रोडों की दूरी बढ़ाने पर बढ़ता है)।
  • टर्मिनल विभवांतर (Terminal Voltage - $V$): बंद परिपथ में जब सेल से धारा ली जा रही हो, तो सेल के दोनों ध्रुवों के बीच का विभवांतर।
मूलभूत संबंध:
• जब सेल निरावेशित (Discharging) हो रहा हो (धारा सेल से बाहर निकल रही हो):
$$\mathbf{V = \mathcal{E} - I r} \quad \implies I = \frac{\mathcal{E}}{R + r}$$
• जब सेल आवेशित (Charging) किया जा रहा हो:
$$\mathbf{V = \mathcal{E} + I r}$$
• सेल के आंतरिक प्रतिरोध का प्रायोगिक सूत्र:
$$r = \frac{\mathcal{E} - V}{I} = \frac{\mathcal{E} - V}{V/R} = \mathbf{R \left( \frac{\mathcal{E}}{V} - 1 \right)}$$

3.2 सेलों का संयोजन (Combination of Cells)

1. श्रेणीक्रम संयोजन: $\mathcal{E}_{\text{eq}} = \mathcal{E}_1 + \mathcal{E}_2$, $r_{\text{eq}} = r_1 + r_2$ (यदि $n$ समरूप सेल हों तो $I = \frac{n\mathcal{E}}{R + nr}$)।
2. समांतरक्रम संयोजन: दो सेलों $\mathcal{E}_1, r_1$ तथा $\mathcal{E}_2, r_2$ के लिए:
$$\mathbf{\mathcal{E}_{\text{eq}} = \frac{\frac{\mathcal{E}_1}{r_1} + \frac{\mathcal{E}_2}{r_2}}{\frac{1}{r_1} + \frac{1}{r_2}} = \frac{\mathcal{E}_1 r_2 + \mathcal{E}_2 r_1}{r_1 + r_2}} \quad \text{तथा} \quad \mathbf{\frac{1}{r_{\text{eq}}} = \frac{1}{r_1} + \frac{1}{r_2}}$$

4. किरखोफ के नियम (Kirchhoff's Laws) एवं जटिल परिपथ विश्लेषण

4.1 किरखोफ का प्रथम नियम: संधि नियम (Kirchhoff's Current Law - KCL)

कथन: किसी वैद्युत परिपथ में किसी भी संधि (Junction) पर मिलने वाली सभी विद्युत धाराओं का बीजगणितीय योग सदैव शून्य होता है:

$$\mathbf{\sum I = 0} \quad \implies \sum I_{\text{आने वाली}} = \sum I_{\text{जाने वाली}}$$संरक्षण सिद्धांत: किरखोफ का प्रथम नियम 'वैद्युत आवेश के संरक्षण' (Conservation of Charge) के नियम पर आधारित है (संधि पर आवेश संचित नहीं हो सकता)।

4.2 किरखोफ का द्वितीय नियम: लूप नियम (Kirchhoff's Voltage Law - KVL)

कथन: किसी बंद वैद्युत पाश (लूप) के चारों ओर सभी विभवांतरों (सेलों के EMF एवं प्रतिरोधों पर $IR$ पात) का बीजगणितीय योग सदैव शून्य होता है:

$$\mathbf{\sum \Delta V = 0} \quad \text{अथवा} \quad \mathbf{\sum \mathcal{E} = \sum I R}$$संरक्षण सिद्धांत: किरखोफ का द्वितीय नियम 'ऊर्जा संरक्षण' (Conservation of Energy) के सिद्धांत पर आधारित है (स्थिरवैद्युत बल संरक्षी होते हैं, अतः बंद लूप में कुल कार्य शून्य होता है)।

चिह्न परिपाटी (Sign Convention):1. लूप में चलने की दिशा में धारा प्रवाहित हो रही हो तो विभव पात ऋणात्मक ($-IR$) लें।
2. सेल के ऋण सिरे से धन सिरे की ओर जाने पर EMF धनात्मक ($+\mathcal{E}$) तथा धन से ऋण सिरे की ओर जाने पर EMF ऋणात्मक ($-\mathcal{E}$) लें।

5. व्हीटस्टोन सेतु एवं विभवमापी (Wheatstone Bridge & Potentiometer)

5.1 व्हीटस्टोन सेतु (Wheatstone Bridge) एवं संतुलन की शर्त

चार प्रतिरोधों $P, Q, R, S$ को एक चतुर्भुज $ABCD$ की भुजाओं में जोड़कर एक विकर्ण में गैल्वेनोमीटर तथा दूसरे विकर्ण में सेल जोड़ा जाता है:

संतुलन अवस्था: जब गैल्वेनोमीटर में बहने वाली धारा शून्य हो जाए ($I_g = 0$), तो संधि $B$ और $D$ का विभव समान हो जाता है ($V_B = V_D$)। इस अवस्था में सेतु संतुलित कहलाता है और संतुलन की शर्त है:

$$\mathbf{\frac{P}{Q} = \frac{R}{S}}$$
• मीटर सेतु (Meter Bridge): व्हीटस्टोन सेतु के सिद्धांत पर कार्य करता है। $1\text{ m}$ लंबे तार पर संतुलन लंबाई $l$ प्राप्त होने पर अज्ञात प्रतिरोध: $\mathbf{S = R \left( \frac{100 - l}{l} \right)}$।

5.2 विभवमापी (Potentiometer): सिद्धांत एवं अनुप्रयोग

सिद्धांत: जब एकसमान अनुप्रस्थ काट वाले तार में नियत धारा प्रवाहित की जाती है, तो तार के किसी भी भाग पर विभव पतन ($V$) उस भाग की लंबाई ($l$) के अनुक्रमानुपाती होता है:

$$V \propto l \implies \mathbf{V = k l}$$जहाँ $k = \frac{V}{L}$ तार की विभव प्रवणता (Potential Gradient) है (मात्रक: $\text{V/m}$)।
  • अनुप्रयोग 1: दो सेलों के EMF की तुलना:
    संतुलन लंबाइयां क्रमशः $l_1$ व $l_2$ प्राप्त होने पर:
    $$\mathbf{\frac{\mathcal{E}_1}{\mathcal{E}_2} = \frac{l_1}{l_2}}$$
  • अनुप्रयोग 2: सेल का आंतरिक प्रतिरोध ($r$) ज्ञात करना:
    खुले परिपथ में संतुलन लंबाई $l_1$ तथा प्रतिरोध बॉक्स $R$ जोड़ने पर बंद परिपथ में संतुलन लंबाई $l_2$ हो, तो:
    $$\mathbf{r = R \left( \frac{l_1}{l_2} - 1 \right)}$$
विभवमापी वोल्टमीटर से श्रेष्ठ क्यों है?
वोल्टमीटर पाठ्यांक लेते समय परिपथ से कुछ धारा अवश्य खींचता है, जिससे वह सेल का वास्तविक EMF न मापकर कुछ कम टर्मिनल वोल्टता मापता है। जबकि विभवमापी शून्य-विक्षेप विधि (Null deflection method) पर कार्य करता है और संतुलन की स्थिति में परिपथ से बिल्कुल धारा नहीं लेता। अतः यह एक अनंत प्रतिरोध वाले आदर्श वोल्टमीटर की भांति कार्य करता है!

Key Formulas, Laws & Physical Constants

विद्युत धारा
I = {dq}{dt} = n e A v_d (मात्रक: Ampere = C/s)
अपवाह वेग (Drift Velocity)
v_d = {e E }{m} ≈ 10^{-4} m/s ( = विश्रांति काल)
धारा घनत्व व गतिशीलता
$$j = \frac{I}{A} = n e v_d; \quad \mu = \frac{v_d}{E} = \frac{e\tau}{m}$$
ओम का नियम (सूक्ष्म रूप)
{j} = {E} अथवा {E} = {j}; V = IR
प्रतिरोधकता सूत्र
$$\rho = \frac{m}{n e^2 \tau} \implies R = \rho \frac{L}{A}$$
प्रतिरोध ताप निर्भरता
R_t = R_0(1 + t) (धातुओं हेतु > 0, अर्धचालक < 0)
टर्मिनल विभवांतर (निरावेशन)
$$V = \mathcal{E} - I r \implies r = R \left( \frac{\mathcal{E}}{V} - 1 \right)$$
किरखोफ प्रथम नियम (KCL)
I = 0 (आवेश संरक्षण पर आधारित)
किरखोफ द्वितीय नियम (KVL)
V = 0 ⇒ {E} = I R (ऊर्जा संरक्षण पर)
व्हीटस्टोन सेतु संतुलन
{P}{Q} = {R}{S} (I_g = 0 होने पर)
मीटर सेतु अज्ञात प्रतिरोध
$$S = R \left( \frac{100 - l}{l} \right)$$
विभवमापी सूत्र
$$V = k l; \quad \frac{\mathcal{E}_1}{\mathcal{E}_2} = \frac{l_1}{l_2}; \quad r = R \left( \frac{l_1}{l_2} - 1 \right)$$

Conceptual Solved Examples & Case Studies

Example 1
$1.0\text{ mm}^2$ अनुप्रस्थ काट वाले तांबे के तार में $1.34\text{ A}$ की धारा प्रवाहित हो रही है। यदि तांबे में मुक्त इलेक्ट्रॉन घनत्व $8.5 \times 10^{28}\text{ m}^{-3}$ हो, तो इलेक्ट्रॉनों का अपवाह वेग ज्ञात कीजिए।
Step-by-Step Solution:
दिया है:
क्षेत्रफल $A = 1.0\text{ mm}^2 = 1.0 \times 10^{-6}\text{ m}^2$
धारा $I = 1.34\text{ A}$
इलेक्ट्रॉन घनत्व $n = 8.5 \times 10^{28}\text{ m}^{-3}$
इलेक्ट्रॉन आवेश $e = 1.6 \times 10^{-19}\text{ C}$

सूत्र:
$$I = n e A v_d \implies v_d = \frac{I}{n e A}$$
गणना:
$$v_d = \frac{1.34}{(8.5 \times 10^{28}) \times (1.6 \times 10^{-19}) \times (1.0 \times 10^{-6})}$$
$$v_d = \frac{1.34}{(8.5 \times 1.6) \times 10^{28 - 19 - 6}} = \frac{1.34}{13.6 \times 10^3} = 0.0985 \times 10^{-3}\text{ m/s}$$
$$v_d \approx \mathbf{9.85 \times 10^{-5}\text{ m/s} \approx 0.1\text{ mm/s}}$$
निष्कर्ष: इलेक्ट्रॉनों का अपवाह वेग मात्र लगभग $0.1\text{ mm/s}$ होता है।
Example 2
एक बैटरी का विद्युत वाहक बल $10\text{ V}$ तथा आंतरिक प्रतिरोध $3\text{ }\Omega$ है। इसे एक बाह्य प्रतिरोध $R$ से जोड़ने पर परिपथ में $0.5\text{ A}$ की धारा बहती है। (a) प्रतिरोध $R$ का मान क्या है? (b) परिपथ बंद होने पर सेल की टर्मिनल वोल्टता क्या होगी?
Step-by-Step Solution:
दिया है:
सेल का EMF $\mathcal{E} = 10\text{ V}$
आंतरिक प्रतिरोध $r = 3\text{ }\Omega$
धारा $I = 0.5\text{ A}$

(a) बाह्य प्रतिरोध $R$ की गणना:
$$I = \frac{\mathcal{E}}{R + r} \implies R + r = \frac{\mathcal{E}}{I}$$
$$R + 3 = \frac{10}{0.5} = 20 \implies R = 20 - 3 = \mathbf{17\text{ }\Omega}$$

(b) टर्मिनल वोल्टता ($V$):
विधि 1: $V = I R = (0.5\text{ A}) \times (17\text{ }\Omega) = \mathbf{8.5\text{ Volt}}$
विधि 2: $V = \mathcal{E} - I r = 10 - (0.5 \times 3) = 10 - 1.5 = \mathbf{8.5\text{ Volt}}$
Example 3
किरखोफ के दोनों नियमों का उल्लेख कीजिए तथा बताइए कि वे किन-किन भौतिक राशियों के संरक्षण के नियमों पर आधारित हैं?
Step-by-Step Solution:
1. किरखोफ का प्रथम नियम (संधि नियम - Kirchhoff's Junction Rule):
• कथन: किसी विद्युत परिपथ में किसी भी संधि पर मिलने वाली सभी धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है ($\sum I = 0$)। अर्थात, संधि की ओर आने वाली धाराओं का कुल योग संधि से दूर जाने वाली धाराओं के कुल योग के बराबर होता है:
$$\sum I_{\text{in}} = \sum I_{\text{out}}$$
• संरक्षण सिद्धांत: यह नियम 'आवेश संरक्षण' (Conservation of Electric Charge) के नियम पर आधारित है, क्योंकि संधि पर न तो कोई आवेश उत्पन्न हो सकता है और न ही संचित हो सकता है。

2. किरखोफ का द्वितीय नियम (लूप नियम - Kirchhoff's Loop Rule):
• कथन: किसी बंद विद्युत परिपथ (लूप) के विभिन्न भागों में प्रवाहित धाराओं तथा उनके संगत प्रतिरोधों के गुणनफलों का बीजगणितीय योग, उस लूप में उपस्थित सभी सेलों के विद्युत वाहक बलों के बीजगणितीय योग के बराबर होता है:
$$\sum I R = \sum \mathcal{E} \quad \text{अथवा} \quad \sum \Delta V = 0$$
• संरक्षण सिद्धांत: यह नियम 'ऊर्जा संरक्षण' (Conservation of Energy) के सिद्धांत पर आधारित है, क्योंकि एक आवेश को किसी बंद लूप में पूरा चक्कर लगाकर पुनः उसी बिंदु पर लाने में स्थिरवैद्युत बल द्वारा किया गया कुल कार्य शून्य होता है।
Example 4
व्हीटस्टोन सेतु का परिपथ आरेख बनाइए तथा किरखोफ के नियमों का प्रयोग करके सेतु की संतुलन अवस्था ($\frac{P}{Q} = \frac{R}{S}$) का व्यंजक निगमित कीजिए।
Step-by-Step Solution:
व्हीटस्टोन सेतु रचना:
चार प्रतिरोध $P, Q, R, S$ एक चतुर्भुज $ABCD$ की चार भुजाओं $AB, BC, AD, DC$ में जुड़े हैं। $A$ व $C$ के बीच सेल $\mathcal{E}$ तथा $B$ व $D$ के बीच गैल्वेनोमीटर $G$ जुड़ा है。

किरखोफ के नियमों से निगमन:
1. माना संधि $A$ पर मुख्य धारा $I$ दो भागों में बंटती है: भुजा $AB$ में $I_1$ तथा $AD$ में $I_2$।
2. संतुलन की स्थिति में: गैल्वेनोमीटर में कोई विक्षेप नहीं होता अर्थात गैल्वेनोमीटर धारा $I_g = 0$।
अतः संधि $B$ पर: भुजा $BC$ में धारा भी $I_1$ होगी。
तथा संधि $D$ पर: भुजा $DC$ में धारा भी $I_2$ होगी。

3. बंद लूप $ABDA$ में KVL लागू करने पर:
$$I_1 P + I_g G - I_2 R = 0$$
चूंकि $I_g = 0$:$$I_1 P - I_2 R = 0 \implies I_1 P = I_2 R \quad \text{--- (समीकरण 1)}$$

4. बंद लूप $BCDB$ में KVL लागू करने पर:
$$I_1 Q - I_2 S - I_g G = 0$$
चूंकि $I_g = 0$:$$I_1 Q - I_2 S = 0 \implies I_1 Q = I_2 S \quad \text{--- (समीकरण 2)}$$

5. समीकरण (1) को समीकरण (2) से भाग देने पर:
$$\frac{I_1 P}{I_1 Q} = \frac{I_2 R}{I_2 S} \implies \mathbf{\frac{P}{Q} = \frac{R}{S}}$$
यही व्हीटस्टोन सेतु के संतुलन की अभीष्ट शर्त है। (इति सिद्धम्)
Example 5
विभवमापी (Potentiometer) का सिद्धांत स्पष्ट कीजिए। विभवमापी की सहायता से दो सेलों के विद्युत वाहक बलों ($\mathcal{E}_1$ व $\mathcal{E}_2$) की तुलना करने का सूत्र निगमित कीजिए।
Step-by-Step Solution:
विभवमापी का सिद्धांत:
यदि एकसमान अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल और समरूप विशिष्ट प्रतिरोध वाले तार में एक नियत धारा प्रवाहित हो रही हो, तो तार के किसी भी भाग पर होने वाला विभव पतन ($V$) उस भाग की लंबाई ($l$) के सीधे अनुक्रमानुपाती होता है:
$$V \propto l \implies V = k l$$
जहाँ $k = \frac{V}{l}$ को विभव प्रवणता (Potential Gradient) कहते हैं。

दो सेलों के EMF की तुलना:
1. विभवमापी के प्राथमिक परिपथ में संचायक सेल, धारा नियंत्रक और कुंजी को तार $AB$ के श्रेणीक्रम में जोड़ते हैं。
2. द्वितीयक परिपथ में दोनों सेलों $\mathcal{E}_1$ व $\mathcal{E}_2$ के धनात्मक ध्रुवों को तार के उच्च विभव वाले सिरे $A$ से जोड़ते हैं तथा ऋणात्मक ध्रुवों को द्विमार्गी कुंजी और गैल्वेनोमीटर के माध्यम से जॉकी से जोड़ते हैं。
3. जब प्रथम सेल $\mathcal{E}_1$ परिपथ में हो, तो जॉकी को खिसकाकर शून्य-विक्षेप स्थिति प्राप्त करते हैं। माना संतुलन लंबाई $l_1$ है:
$$\mathcal{E}_1 = k l_1 \quad \text{--- (समीकरण 1)}$$
4. अब द्वितीय सेल $\mathcal{E}_2$ को परिपथ में जोड़कर शून्य-विक्षेप स्थिति प्राप्त करते हैं। माना संतुलन लंबाई $l_2$ है:
$$\mathcal{E}_2 = k l_2 \quad \text{--- (समीकरण 2)}$$
5. समीकरण (1) को समीकरण (2) से विभाजित करने पर:
$$\mathbf{\frac{\mathcal{E}_1}{\mathcal{E}_2} = \frac{l_1}{l_2}}$$
इस सूत्र की सहायता से दोनों सेलों के विद्युत वाहक बलों की यथार्थ तुलना की जाती है।

Common Misconceptions & Examiner Traps

Common Misconception

विद्युत धारा को उसकी तीर की दिशा देखकर सदिश राशि लिख देना।

Scientific Reality & Correction

विद्युत धारा एक अदिश राशि है क्योंकि यह सदिश योग के त्रिभुज या समांतर चतुर्भुज नियम का पालन नहीं करती; इसे बीजगणितीय रूप से जोड़ा जाता है।

Common Misconception

अपवाह वेग को प्रकाश के वेग के बराबर मान लेना।

Scientific Reality & Correction

अपवाह वेग अत्यंत मंद होता है ($v_d \approx 10^{-4}\text{ m/s} = 0.1\text{ mm/s}$); प्रकाश के वेग ($c$) से केवल विद्युत क्षेत्र फैलता है।

Common Misconception

सेल के टर्मिनल विभवांतर को हमेशा EMF से छोटा मानना।

Scientific Reality & Correction

आवेशन (Charging) की स्थिति में टर्मिनल विभवांतर EMF से बड़ा होता है ($V = \mathcal{E} + Ir$); केवल निरावेशन में $V = \mathcal{E} - Ir$ होता है।

Common Misconception

किरखोफ के लूप नियम को आवेश संरक्षण पर आधारित बताना।

Scientific Reality & Correction

किरखोफ का प्रथम (संधि) नियम 'आवेश संरक्षण' पर तथा द्वितीय (लूप) नियम 'ऊर्जा संरक्षण' पर आधारित होता है।

Common Misconception

विभवमापी में शून्य विक्षेप न मिलने पर जॉकी को जोर से रगड़ना।

Scientific Reality & Correction

जॉकी को तार पर कभी रगड़ना नहीं चाहिए क्योंकि इससे तार का अनुप्रस्थ काट असमान हो जाता है और विभव प्रवणता अचर नहीं रहती।

विद्युत धारा: अपवाह वेग, किरखोफ नियम, व्हीटस्टोन सेतु व विभवमापी

विद्युत धारा: अपवाह वेग, ओम नियम, किरखोफ नियम व विभवमापी1. अपवाह वेग व धारा (I)सूक्ष्म विद्युतगतिकी• अपवाह वेग: v_d = eEτ / mv_d ≈ 10^-4 m/s (0.1 mm/s)• धारा सूत्र: I = n e A v_dधारा घनत्व j = I/A = n e v_d• प्रतिरोधकता: ρ = m / (ne²τ)धातु: ताप बढ़ने पर ρ बढ़ता है (α > 0)अर्धचालक: ताप बढ़ने पर ρ घटता है• सेल: V = ℰ - Ir (निरावेशन)• आंतरिक r = R (ℰ/V - 1)2. किरखोफ के नियमपरिपथ विश्लेषण नियम• 1. संधि नियम (Junction Rule):∑ I = 0 (∑ I_in = ∑ I_out)⇒ आवेश संरक्षण पर आधारित• 2. लूप नियम (Loop Rule):∑ ΔV = 0 अथवा ∑ ℰ = ∑ IR⇒ ऊर्जा संरक्षण पर आधारित• जटिल जालों में धारा वितरण• परिपाटी: धारा दिशा में -IR• सेल ऋण से धन जाने पर +ℰ3. व्हीटस्टोन सेतु व विभवमापीशून्य-विक्षेप परिशुद्धता• व्हीटस्टोन सेतु संतुलन:जब I_g = 0 ⇒ P / Q = R / S• मीटर सेतु: S = R (100-l) / l• विभवमापी सिद्धांत: V = k lk = विभव प्रवणता (Volt/m)• 2 मुख्य अनुप्रयोग:1. EMF तुलना: ℰ₁ / ℰ₂ = l₁ / l₂2. आंतरिक r: r = R (l₁/l₂ - 1)• वोल्टमीटर से श्रेष्ठ (धारा = 0)बोर्ड परीक्षा के प्रमुख संप्रत्यय (Golden Current Electricity Capsule)अपवाह वेग संबंध:I = n e A v_d; v_d = eEτ / m ≈ 0.1 mm/s; प्रकाश वेग से विद्युत क्षेत्र फैलता है।किरखोफ संरक्षण नियम:संधि नियम (KCL) = आवेश संरक्षण; लूप नियम (KVL) = ऊर्जा संरक्षण।विभवमापी की श्रेष्ठता:शून्य-विक्षेप विधि से संतुलन पर परिपथ से धारा नहीं खींचता (आदर्श वोल्टमीटर तुल्य)।

Chapter Summary & 10 Key Takeaways

Takeaway 1
विद्युत धारा I = dq/dt (अदिश, मात्रक A = C/s); धारा घनत्व j = I/A (सदिश, मात्रक A/m²) होता है।
Takeaway 2
मुक्त इलेक्ट्रॉन बाह्य क्षेत्र में अति मंद अपवाह वेग v_d = eEτ/m (लगभग 0.1 mm/s) से खिसकते हैं।
Takeaway 3
धारा व अपवाह वेग का मूलभूत संबंध: I = n e A v_d तथा धारा घनत्व j = n e v_d होता है।
Takeaway 4
ओम के नियम का सूक्ष्म रूप j = σE तथा विशिष्ट प्रतिरोधकता ρ = m / (ne²τ) होती है।
Takeaway 5
ताप बढ़ाने पर चालकों की प्रतिरोधकता बढ़ती है (α > 0) जबकि अर्धचालकों की प्रतिरोधकता घटती है (α < 0)।
Takeaway 6
सेल का टर्मिनल विभवांतर V = ℰ - Ir तथा आंतरिक प्रतिरोध r = R(ℰ/V - 1) होता है।
Takeaway 7
किरखोफ का प्रथम नियम (संधि नियम) आवेश संरक्षण पर तथा द्वितीय नियम (लूप नियम) ऊर्जा संरक्षण पर आधारित है।
Takeaway 8
व्हीटस्टोन सेतु में जब गैल्वेनोमीटर में शून्य धारा हो (I_g = 0), तो संतुलन शर्त P/Q = R/S होती है।
Takeaway 9
विभवमापी का सिद्धांत V = kl है; विभव प्रवणता k = V/l (Volt/m) होती है।
Takeaway 10
विभवमापी द्वारा EMF तुलना ℰ₁/ℰ₂ = l₁/l₂ तथा आंतरिक प्रतिरोध r = R(l₁/l₂ - 1) निकाला जाता है।

Check Your Understanding (Diagnostic Practice Questions)

Diagnostic questions testing core conceptual clarity. Answers are hidden initially — solve each problem first, then click to reveal the step-by-step verified solution.

1
विद्युत धारा में परिमाण और दिशा दोनों होते हैं, फिर भी इसे एक 'अदिश राशि' क्यों माना जाता है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: क्योंकि विद्युत धारा सदिश योग के नियमों (जैसे त्रिभुज या समांतर चतुर्भुज नियम) का पालन नहीं करती; विभिन्न तारों से आने वाली धाराओं का कुल योग साधारण बीजगणितीय योग (Scalar addition) के नियमों द्वारा सीधे जोड़ दिया जाता है।
2
अपवाह वेग (Drift Velocity) किसे कहते हैं? इसका परिमाण लगभग कितना होता है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: चालक पर बाह्य विद्युत क्षेत्र लगाने पर मुक्त इलेक्ट्रॉन धनायनों से टकराते हुए विद्युत क्षेत्र के विपरीत दिशा में जिस नियत औसत वेग से गति करते हैं, उसे अपवाह वेग (v_d) कहते हैं। इसका मान अत्यंत सूक्ष्म लगभग 10^-4 m/s (लगभग 0.1 mm/s) होता है।
3
किरखोफ के प्रथम नियम (संधि नियम) और द्वितीय नियम (लूप नियम) किन भौतिक संरक्षण नियमों पर आधारित हैं?
Reveal Answer & Explanation
Answer: किरखोफ का प्रथम नियम (संधि नियम: ∑ I = 0) 'वैद्युत आवेश के संरक्षण' पर तथा द्वितीय नियम (लूप नियम: ∑ ΔV = 0) 'ऊर्जा के संरक्षण' के सिद्धांत पर आधारित है।
4
व्हीटस्टोन सेतु की संतुलन अवस्था (Balance condition) क्या है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: जब सेतु की चारों भुजाओं के प्रतिरोध इस अनुपात में हों कि गैल्वेनोमीटर से कोई धारा न बहे (I_g = 0), तो सेतु संतुलित होता है और इसकी शर्त P/Q = R/S होती है।
5
किसी सेल का विद्युत वाहक बल (EMF) मापने के लिए वोल्टमीटर की तुलना में विभवमापी को श्रेष्ठ क्यों माना जाता है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: क्योंकि वोल्टमीटर पाठ्यांक लेते समय परिपथ से कुछ धारा अवश्य खींचता है जिससे वह सेल का वास्तविक EMF न मापकर कुछ कम टर्मिनल विभवांतर मापता है; जबकि विभवमापी शून्य-विक्षेप स्थिति में परिपथ से बिल्कुल धारा नहीं लेता और अनंत प्रतिरोध वाले आदर्श वोल्टमीटर की भांति यथार्थ EMF मापता है।
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