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JAC • Class XII • Physics • Ch 11
Estimated Time: 45 Mins
Study Progress: In Progress

Dual Nature of Radiation and Matter

20वीं सदी के प्रारंभ में प्रकाश-विद्युत प्रभाव की खोज ने भौतिकी की शास्त्रीय नींव को झकझोर कर रख दिया। मैक्सवेल का तरंग सिद्धांत यह समझाने में पूर्णतः असमर्थ रहा कि प्रकाश की तीव्रता बढ़ाने पर भी इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा क्यों नहीं बढ़ती, एक विशेष देहली आवृत्ति ($\nu_0$) से नीचे उत्सर्जन क्यों असंभव है, तथा फोटॉनों के गिरते ही बिना किसी समय विलंब ($< 10^{-9}\text{ s}$) के इलेक्ट्रॉन क्यों छलक पड़ते हैं। सन् 1905 में अल्बर्ट आइंस्टीन ने मैक्स प्लैंक के क्वांटम सिद्धांत को विस्तारित करते हुए प्रतिपादित किया कि प्रकाश ऊर्जा के अविभाज्य पैकेटों अथवा कणों से मिलकर बना है जिन्हें फोटॉन (Photon: $E = h\nu$, संवेग $p = h/\lambda$) कहते हैं। ऊर्जा संरक्षण पर आधारित आइंस्टीन का प्रकाश-विद्युत समीकरण [$K_{\max} = h\nu - \Phi_0 = h(\nu - \nu_0)$ अथवा $e V_0 = h\nu - \Phi_0$] ने इन सभी रहस्यों को सुलझाकर आधुनिक क्वांटम यांत्रिकी की नींव रखी (जिसके लिए 1921 में नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया)। इसके पश्चात सन् 1924 में फ्रांसीसी भौतिक विज्ञानी लुई दे ब्रॉग्ली ने प्रकृति की गहन सममिति का अद्वितीय विचार रखा—यदि विकिरण (तरंग) कण जैसा व्यवहार कर सकता है, तो पदार्थ कणों (इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन) को भी तरंग जैसा व्यवहार करना चाहिए! दे ब्रॉग्ली द्रव्य तरंग संबंध ($\lambda = \frac{h}{p} = \frac{h}{mv}$) तथा $V$ वोल्ट से त्वरित इलेक्ट्रॉन की तरंगदैर्ध्य $\lambda = \frac{1.227}{\sqrt{V}}\text{ nm}$ की सत्यता को डेविसन एवं जर्मर के इलेक्ट्रॉन विवर्तन प्रयोग ने प्रयोगात्मक रूप से सिद्ध कर विज्ञान जगत को स्तब्ध कर दिया—जिसने इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी के आविष्कार का मार्ग प्रशस्त किया।

एक मंद पराबैंगनी किरण धातु से इलेक्ट्रॉन बाहर निकाल फेंकती है, जबकि लाल रंग की प्रचंड लेजर बीम एक भी इलेक्ट्रॉन क्यों नहीं हिला पाती?

कल्पना कीजिए कि आपके सामने लोहे की एक गेंद बंधी है। यदि आप उस पर लगातार पानी की लाखों तेज धारें (प्रचंड तीव्रता) मारें, तो तरंग सिद्धांत के अनुसार गेंद को ऊर्जा सोखकर हिल जाना चाहिए। परंतु प्रकाश की दुनिया में ऐसा नहीं होता! यदि आप किसी धातु की प्लेट पर लाल रंग की कितनी भी शक्तिशाली, आंखें चौंधिया देने वाली लेजर बीम लगातार कई घंटों तक चमकाते रहें, तब भी धातु से एक भी इलेक्ट्रॉन बाहर नहीं निकलेगा! परंतु जैसे ही आप पराबैंगनी (UV) प्रकाश की एक अत्यंत धीमी, नन्हीं सी किरण डालते हैं, वैसे ही तत्क्षण खरबों इलेक्ट्रॉन छिटक कर बाहर आ जाते हैं! क्यों? क्योंकि प्रकाश कोई सतत बहती नदी नहीं है, बल्कि ऊर्जा की नन्हीं-नन्हीं गोलियों (फोटॉनों) की बौछार है! इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए एक ही झटके में आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा (कार्यफलन) चाहिए, जो केवल उच्च आवृत्ति वाले पराबैंगनी फोटॉन के पास होती है। आइए जानें क्वांटम भौतिकी के इस चमत्कारी रहस्य को!

Why This Chapter Matters

JAC और CBSE कक्षा 12वीं भौतिकी बोर्ड परीक्षा में 'विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति' एक अत्यंत उच्च स्कोरिंग इकाई है। प्रकाश-विद्युत प्रभाव के 4 प्रायोगिक नियम (तीव्रता, निरोधी विभव $V_0$, देहली आवृत्ति $\nu_0$, समय-पश्चता का अभाव), शास्त्रीय तरंग सिद्धांत की विफलता के 3 मुख्य कारण, आइंस्टीन का प्रकाश-विद्युत समीकरण ($K_{\max} = h\nu - \Phi_0$) तथा इसके आधार पर सभी प्रयोगात्मक नियमों की व्याख्या, $V_0$ बनाम $\nu$ ग्राफ की प्रवणता ($h/e$) द्वारा प्लैंक नियतांक का निर्धारण, दे ब्रॉग्ली परिकल्पना एवं द्रव्य तरंगदैर्ध्य के सूत्र ($\lambda = \frac{h}{p} = \frac{h}{\sqrt{2mE}} = \frac{1.227}{\sqrt{V}}\text{ nm}$), तथा डेविसन-जर्मर प्रयोग का सिद्धांत एवं निष्कर्ष पर प्रतिवर्ष 3 से 5 अंकों के प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं।

Before You Begin (Prerequisites)

  • कार्य एवं गतिज ऊर्जा ($K = \frac{1}{2}mv^2 = \frac{p^2}{2m}$, संवेग $p = mv$)।
  • विद्युत स्थितिज ऊर्जा एवं विभवांतर ($W = qV = eV$)।
  • तरंग गति (प्रकाश की चाल $c = \nu\lambda$) एवं इलेक्ट्रॉन-वोल्ट ($1\text{ eV} = 1.6 \times 10^{-19}\text{ J}$)।

What You Will Learn (Core Objectives)

  • प्रकाश-विद्युत प्रभाव के प्रयोगात्मक प्रेक्षणों (निरोधी विभव, संतृप्त धारा, देहली आवृत्ति) का विश्लेषण करना।
  • शास्त्रीय तरंग सिद्धांत की विफलताओं को चिन्हित करना और आइंस्टीन के फोटॉन मॉडल द्वारा प्रकाश-विद्युत समीकरण व्युत्पन्न करना।
  • निरोधी विभव बनाम आवृत्ति ग्राफ ($V_0 - \nu$) से प्लैंक नियतांक ($h$) तथा कार्यफलन ($\Phi_0$) का मान ज्ञात करना।
  • द्रव्य-तरंगों की दे ब्रॉग्ली परिकल्पना को समझना तथा विभिन्न भौतिक परिस्थितियों में तरंगदैर्ध्य ($\lambda$) का परिकलन करना।
  • डेविसन-जर्मर प्रयोग के सिद्धांत को समझना और सिद्ध करना कि गतिशील इलेक्ट्रॉन तरंग प्रकृति प्रदर्शित करते हैं।

Chapter Roadmap & Progression

1 1. प्रकाश-विद्युत प्रभाव एवं प्रायो...
2 2. आइंस्टीन का प्रकाश-विद्युत समीकर...
3 3. द्रव्य की द्वैत प्रकृति एवं दे ब...
4 4. डेविसन-जर्मर प्रयोग एवं इलेक्ट्र...

Complete Concept Guide (100% Curriculum Coverage)

1. प्रकाश-विद्युत प्रभाव एवं प्रायोगिक अध्ययन

1.1 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं परिभाषा

परिभाषा: जब किसी उपयुक्त उच्च आवृत्ति (जैसे पराबैंगनी या दृश्य प्रकाश) का प्रकाश किसी धात्विक पृष्ठ पर आपतित होता है, तो धातु की सतह से इलेक्ट्रॉनों का उत्सर्जन होने लगता है। इस परिघटना को प्रकाश-विद्युत प्रभाव (Photoelectric Effect) तथा उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों को प्रकाश-इलेक्ट्रॉन (Photoelectrons) कहते हैं।

  • हर्ट्ज का प्रेक्षण (1887): स्पार्क गैप पर पराबैंगनी प्रकाश डालने पर विद्युत विसर्जन अधिक सुगमता से होता है।
  • हॉलवैक्स तथा लेनार्ड के प्रयोग (1888-1902): उन्होंने निर्वातित नलिका में दो इलेक्ट्रोडों (उत्सर्जक $C$ व संग्राहक $A$) पर प्रकाश डालकर प्रकाश-विद्युत धारा का विस्तृत अध्ययन किया।

1.2 प्रकाश-विद्युत प्रभाव के 4 प्रमुख प्रायोगिक निष्कर्ष

  1. 1. प्रकाश की तीव्रता का प्रभाव:
    एक नियत आवृत्ति पर, प्रकाश-विद्युत धारा आपतित प्रकाश की तीव्रता के अनुक्रमानुपाती होती है ($I \propto \text{Intensity}$)। तीव्रता बढ़ाने पर प्रति सेकंड उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ती है, परंतु उनकी अधिकतम गतिज ऊर्जा में कोई परिवर्तन नहीं होता।
  2. 2. विभव का प्रभाव एवं निरोधी विभव (Stopping Potential - $V_0$):
    • संग्राहक पट्टिका $A$ का धन विभव बढ़ाने पर धारा बढ़कर एक अधिकतम नियत मान पर पहुंच जाती है जिसे संतृप्त धारा (Saturation Current) कहते हैं।
    • संग्राहक पट्टिका पर लगाया गया वह न्यूनतम ऋणात्मक विभव जिस पर प्रकाश-विद्युत धारा शून्य हो जाती है, निरोधी विभव (संस्तब्ध विभव - Cut-off Potential $V_0$) कहलाता है:
    $$\mathbf{e V_0 = K_{\max} = \frac{1}{2} m v_{\max}^2}$$
    महत्वपूर्ण: निरोधी विभव $V_0$ आपतित प्रकाश की तीव्रता पर बिल्कुल निर्भर नहीं करता, बल्कि केवल आवृत्ति पर निर्भर करता है।
  3. 3. देहली आवृत्ति (Threshold Frequency - $\nu_0$):
    प्रत्येक धातु के लिए आपतित प्रकाश की एक निश्चित न्यूनतम आवृत्ति होती है जिसके नीचे धातु से कोई इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित नहीं होता, चाहे प्रकाश की तीव्रता कितनी भी अधिक क्यों न हो। इसे देहली आवृत्ति ($\nu_0$) तथा संगत अधिकतम तरंगदैर्ध्य को देहली तरंगदैर्ध्य (Threshold Wavelength - $\lambda_0 = c/\nu_0$) कहते हैं।
  4. 4. उत्सर्जन की तात्कालिकता (No Time Lag):
    धातु की सतह पर प्रकाश के आपतित होने तथा इलेक्ट्रॉनों के उत्सर्जित होने के मध्य कोई समय-पश्चता नहीं होती। यह प्रक्रिया तात्क्षणिक होती है (समय अंतराल $\mathbf{< 10^{-9}\text{ सेकंड}}$)।

1.3 शास्त्रीय तरंग सिद्धांत की विफलता (Failure of Wave Theory)

मैक्सवेल का प्रकाश तरंग सिद्धांत क्यों असफल रहा? (3 मुख्य कारण):
1. तीव्रता व ऊर्जा का विरोधाभास: तरंग सिद्धांत के अनुसार तरंग की ऊर्जा तीव्रता पर निर्भर करती है। अतः अधिक तीव्रता के प्रकाश से उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की गतिज ऊर्जा अधिक होनी चाहिए थी, जबकि प्रयोगों में गतिज ऊर्जा केवल आवृत्ति पर निर्भर पाई गई!
2. देहली आवृत्ति की व्याख्या में असमर्थ: तरंग सिद्धांत के अनुसार किसी भी आवृत्ति का प्रकाश, यदि पर्याप्त तीव्रता का हो, इलेक्ट्रॉनों को उत्सर्जित करने में समर्थ होना चाहिए था। अतः देहली आवृत्ति का अस्तित्व तरंग सिद्धांत से नहीं समझाया जा सका।
3. समय-पश्चता का विरोधाभास: तरंग सिद्धांत के अनुसार आपतित प्रकाश की ऊर्जा तरंगाग्र पर संपूर्ण धातु तल पर फैल जाती है। गणना के अनुसार एक इलेक्ट्रॉन को कार्यफलन जितनी ऊर्जा सोखने में कई घंटे लग जाने चाहिए थे, जबकि उत्सर्जन पलक झपकते ही ($10^{-9}\text{ s}$) हो जाता है!

2. आइंस्टीन का प्रकाश-विद्युत समीकरण एवं फोटॉन सिद्धांत

2.1 फोटॉन की संकल्पना (Concept of Photon)

आइंस्टीन (1905) के अनुसार प्रकाश ऊर्जा के नन्हें-नन्हें बंडलों या पैकेटों के रूप में चलता है जिन्हें फोटॉन (Photon) कहते हैं:

  • प्रत्येक फोटॉन की ऊर्जा: $\mathbf{E = h\nu = \frac{hc}{\lambda}}$ (जहाँ $h = 6.63 \times 10^{-34}\text{ J}\cdot\text{s}$ प्लैंक नियतांक है)।
  • फोटॉन का संवेग: $\mathbf{p = \frac{E}{c} = \frac{h}{\lambda}}$।
  • फोटॉन का विराम द्रव्यमान (Rest Mass) सदैव शून्य होता है।
  • फोटॉन विद्युत रूप से पूर्णतः उदासीन होते हैं (विद्युत व चुंबकीय क्षेत्रों द्वारा विक्षेपित नहीं होते)।

2.2 कार्यफलन एवं आइंस्टीन का समीकरण

कार्यफलन (Work Function - $\Phi_0$ या $W$): धातु की सतह से किसी इलेक्ट्रॉन को ठीक बाहर निकालने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा को उस धातु का कार्यफलन कहते हैं:

$$\mathbf{\Phi_0 = h\nu_0 = \frac{hc}{\lambda_0}}$$
ऊर्जा संरक्षण द्वारा निगमन:
जब $h\nu$ ऊर्जा का एक फोटॉन धातु के किसी इलेक्ट्रॉन से पूर्णतः अवशोषित होता है, तो यह ऊर्जा दो भागों में व्यय होती है:
1. एक भाग धातु के आकर्षण से मुक्त होने (कार्यफलन $\Phi_0$) में।
2. शेष भाग उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन को अधिकतम गतिज ऊर्जा ($K_{\max}$) प्रदान करने में।

$$h\nu = \Phi_0 + K_{\max} = h\nu_0 + \frac{1}{2}m v_{\max}^2$$
$$\mathbf{K_{\max} = h\nu - \Phi_0 = h(\nu - \nu_0) = hc\left(\frac{1}{\lambda} - \frac{1}{\lambda_0}\right)}$$
चूंकि $K_{\max} = e V_0$:
$$\mathbf{e V_0 = h\nu - \Phi_0 \implies V_0 = \left(\frac{h}{e}\right)\nu - \frac{\Phi_0}{e}}$$• $V_0 - \nu$ आरेख: $V_0$ और $\nu$ के बीच खींचा गया ग्राफ एक सरल रेखा ($y = mx + c$) होता है जिसकी प्रवणता (Slope) सर्वदा $\mathbf{\frac{h}{e}}$ (सार्वत्रिक नियतांक) होती है तथा $V_0$-अक्ष पर अंतःखंड $\mathbf{-\frac{\Phi_0}{e}}$ होता है।

3. द्रव्य की द्वैत प्रकृति एवं दे ब्रॉग्ली संबंध

3.1 दे ब्रॉग्ली की परिकल्पना (de Broglie Hypothesis)

सन् 1924 में फ्रांसीसी भौतिक विज्ञानी लुई दे ब्रॉग्ली ने प्रकृति की सममिति के आधार पर यह क्रांतिकारी विचार प्रस्तुत किया:

  • समस्त ब्रह्मांड केवल दो तत्वों से बना है—विकिरण (ऊर्जा) तथा द्रव्य (पदार्थ)।
  • प्रकृति सममिति को प्रेम करती है। यदि विकिरण (प्रकाश) में तरंग व कण दोनों के गुण हैं, तो गतिशील द्रव्य कणों (इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन, परमाणु) के साथ भी एक तरंग संबद्ध होनी चाहिए। इन तरंगों को द्रव्य तरंगें (Matter Waves) कहते हैं।

3.2 दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य के विभिन्न सूत्र

  1. मूल सूत्र (कण के संवेग $p$ के पदों में):
    आइंस्टीन के अनुसार फोटॉन ऊर्जा $E = mc^2$ तथा प्लैंक के अनुसार $E = h\nu = hc/\lambda$।
    अतः $mc^2 = hc/\lambda \implies mc = h/\lambda \implies p = h/\lambda$
    किसी $m$ द्रव्यमान व $v$ वेग वाले द्रव्य कण के लिए संवेग $p = mv$ रखने पर:
    $$\mathbf{\lambda = \frac{h}{p} = \frac{h}{m v}}$$
  2. गतिज ऊर्जा ($K$) के पदों में:
    चूंकि $K = \frac{p^2}{2m} \implies p = \sqrt{2mK}$:
    $$\mathbf{\lambda = \frac{h}{\sqrt{2mK}}}$$
  3. तापीय साम्यावस्था में गैस अणु ($T$ केल्विन ताप पर):
    औसत गतिज ऊर्जा $K = \frac{3}{2} k_B T$:
    $$\mathbf{\lambda = \frac{h}{\sqrt{3m k_B T}}}$$
  4. $V$ वोल्ट विभवांतर से त्वरित इलेक्ट्रॉन के लिए:
    इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा $K = e V$:
    $$\lambda = \frac{h}{\sqrt{2m e V}}$$
    मान रखने पर ($h = 6.63 \times 10^{-34}\text{ J}\cdot\text{s}$, $m = 9.11 \times 10^{-31}\text{ kg}$, $e = 1.6 \times 10^{-19}\text{ C}$):
    $$\mathbf{\lambda = \frac{1.227}{\sqrt{V}} \text{ nm} = \frac{12.27}{\sqrt{V}} \text{ \AA}}$$
    उदाहरण: यदि $V = 100\text{ Volt}$ हो, तो $\lambda = \frac{1.227}{\sqrt{100}} = \frac{1.227}{10} = \mathbf{0.1227\text{ nm} = 1.227\text{ \AA}}$ (यह तरंगदैर्ध्य एक्स-किरणों के तुल्य है!)।

4. डेविसन-जर्मर प्रयोग एवं इलेक्ट्रॉन की तरंग प्रकृति

4.1 डेविसन एवं जर्मर का प्रयोग (1927)

क्लिंटन डेविसन तथा लेस्टर जर्मर ने सर्वप्रथम प्रयोगात्मक रूप से सिद्ध किया कि गतिशील इलेक्ट्रॉन तरंगों की भांति व्यवहार करते हैं और विवर्तन प्रदर्शित करते हैं (विवर्तन केवल तरंगों का लक्षण है)।

  • प्रायोगिक व्यवस्था: तप्त फिलामेंट से निकले इलेक्ट्रॉनों को $V$ वोल्ट के विभवांतर से त्वरित करके एक संकीर्ण पुंज के रूप में निकल (Nickel) क्रिस्टल के फलक पर डाला जाता है। क्रिस्टल के परमाणुओं द्वारा प्रकीर्णित इलेक्ट्रॉनों की तीव्रता एक आयनन कोष्ठ (Detector) द्वारा मापी जाती है।
  • मुख्य प्रेक्षण: जब त्वरक विभव $\mathbf{V = 54\text{ Volt}}$ किया गया, तो प्रकीर्णन कोण $\mathbf{\theta = 50^\circ}$ पर विवर्तित इलेक्ट्रॉनों की तीव्रता में एक सुस्पष्ट शिखर (Bump / Maximum) प्राप्त हुआ!

4.2 प्रायोगिक मान एवं दे ब्रॉग्ली सैद्धांतिक मान की तुलना

1. ब्रैग के विवर्तन नियम से प्रायोगिक मान:
निकल क्रिस्टल हेतु परमाण्विक दूरी $D = 0.091\text{ nm}$ तथा ग्लांसिंग कोण $\phi = 90^\circ - \frac{\theta}{2} = 90^\circ - 25^\circ = 65^\circ$।
ब्रैग का नियम: $2d \sin\phi = 1 \times \lambda$
$$\lambda_{\text{exp}} = 2 \times (0.091\text{ nm}) \times \sin 65^\circ = 2 \times 0.091 \times 0.906 \approx \mathbf{0.165\text{ nm}}$$

2. दे ब्रॉग्ली सूत्र से सैद्धांतिक मान:
$$\lambda_{\text{theory}} = \frac{1.227}{\sqrt{V}} = \frac{1.227}{\sqrt{54}} = \frac{1.227}{7.348} \approx \mathbf{0.167\text{ nm}}$$

अकाट्य निष्कर्ष: प्रायोगिक मान ($0.165\text{ nm}$) और दे ब्रॉग्ली सैद्धांतिक मान ($0.167\text{ nm}$) में अद्भुत समानता ने यह पूर्णतः सिद्ध कर दिया कि इलेक्ट्रॉनों में वास्तविक तरंग गुण उपस्थित होते हैं!

Key Formulas, Laws & Physical Constants

फोटॉन ऊर्जा व संवेग
$$E = h\nu = \frac{hc}{\lambda}; \quad p = \frac{E}{c} = \frac{h}{\lambda} \quad (m_0 = 0)$$
कार्यफलन
$$\Phi_0 = h\nu_0 = \frac{hc}{\lambda_0} \quad (1\text{ eV} = 1.6 \times 10^{-19}\text{ J})$$
आइंस्टीन समीकरण
$$K_{\max} = h\nu - \Phi_0 = h(\nu - \nu_0) = hc\left(\frac{1}{\lambda} - \frac{1}{\lambda_0}\right)$$
निरोधी विभव संबंध
$$e V_0 = K_{\max} = \frac{1}{2} m v_{\max}^2; \quad V_0 = \left(\frac{h}{e}\right)\nu - \frac{\Phi_0}{e}$$
दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य
$$\lambda = \frac{h}{p} = \frac{h}{m v}$$
गतिज ऊर्जा रूप
$$\lambda = \frac{h}{\sqrt{2mK}} = \frac{h}{\sqrt{2m q V}}$$
त्वरित इलेक्ट्रॉन λ
$$\lambda = \frac{1.227}{\sqrt{V}}\text{ nm} = \frac{12.27}{\sqrt{V}}\text{ \AA}$$
त्वरित प्रोटॉन λ
$$\lambda_p = \frac{0.0286}{\sqrt{V}}\text{ nm}$$
तापीय न्यूट्रॉन λ
$$\lambda = \frac{h}{\sqrt{3m k_B T}}$$
V₀ - ν ग्राफ प्रवणता
Slope = {h}{e} (सार्वत्रिक नियतांक, धातु से स्वतंत्र)
डेविसन-जर्मर विभव
$$V = 54\text{ V}, \theta = 50^\circ \implies \lambda = 0.165\text{ nm} \approx 0.167\text{ nm}$$
इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी
विभेदन क्षमता 1/; _{electron} _{light}

Conceptual Solved Examples & Case Studies

Example 1
सीजियम (Cesium) धातु का कार्यफलन $2.14\text{ eV}$ है। (a) सीजियम की देहली आवृत्ति ($\nu_0$), तथा (b) देहली तरंगदैर्ध्य ($\lambda_0$) ज्ञात कीजिए।
Step-by-Step Solution:
दिया है:
कार्यफलन $\Phi_0 = 2.14\text{ eV} = 2.14 \times (1.6 \times 10^{-19}\text{ J}) = 3.424 \times 10^{-19}\text{ J}$
प्लैन नियतांक $h = 6.63 \times 10^{-34}\text{ J}\cdot\text{s}$
प्रकाश का वेग $c = 3.0 \times 10^8\text{ m/s}$

(a) देहली आवृत्ति ($\nu_0$):
सूत्र: $\Phi_0 = h \nu_0 \implies \nu_0 = \frac{\Phi_0}{h}$
$$\nu_0 = \frac{3.424 \times 10^{-19}\text{ J}}{6.63 \times 10^{-34}\text{ J}\cdot\text{s}} = \mathbf{5.16 \times 10^{14}\text{ Hz}}$$

(b) देहली तरंगदैर्ध्य ($\lambda_0$):
$$\lambda_0 = \frac{c}{\nu_0} = \frac{3.0 \times 10^8\text{ m/s}}{5.16 \times 10^{14}\text{ Hz}} = 5.814 \times 10^{-7}\text{ m} = \mathbf{581.4\text{ nm} = 5814\text{ \AA}}$$
उत्तर: देहली आवृत्ति $\mathbf{5.16 \times 10^{14}\text{ Hz}}$ तथा देहली तरंगदैर्ध्य $\mathbf{581.4\text{ nm}}$ है।
Example 2
किसी धातु की सतह पर $6.0 \times 10^{14}\text{ Hz}$ आवृत्ति का प्रकाश आपतित होने पर उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों का निरोधी विभव $0.5\text{ V}$ है। जब आपतित प्रकाश की आवृत्ति $10.0 \times 10^{14}\text{ Hz}$ कर दी जाती है, तो निरोधी विभव $2.15\text{ V}$ हो जाता है। प्लैंक नियतांक ($h$) तथा धातु का कार्यफलन ($\Phi_0$) ज्ञात कीजिए।
Step-by-Step Solution:
दिया है:
$\nu_1 = 6.0 \times 10^{14}\text{ Hz}$, $V_{01} = 0.5\text{ V}$
$\nu_2 = 10.0 \times 10^{14}\text{ Hz}$, $V_{02} = 2.15\text{ V}$

सूत्र:
आइंस्टीन के समीकरण से: $e V_0 = h\nu - \Phi_0$
समीकरण (1): $e (0.5) = h (6.0 \times 10^{14}) - \Phi_0$
समीकरण (2): $e (2.15) = h (10.0 \times 10^{14}) - \Phi_0$

1. प्लैंक नियतांक ($h$):
समीकरण (2) में से (1) घटाने पर:
$$e (2.15 - 0.5) = h (10.0 - 6.0) \times 10^{14}$$
$$e (1.65) = h (4.0 \times 10^{14}) \implies h = \frac{1.65 \times (1.6 \times 10^{-19})}{4.0 \times 10^{14}}$$
$$h = \frac{2.64 \times 10^{-19}}{4.0 \times 10^{14}} = \mathbf{6.60 \times 10^{-34}\text{ J}\cdot\text{s}}$$

2. कार्यफलन ($\Phi_0$):
$$\Phi_0 = h\nu_1 - e V_{01} = \frac{h\nu_1}{e} - V_{01} \text{ (eV में)}$$
$$\frac{h\nu_1}{e} = \frac{(6.60 \times 10^{-34}) \times (6.0 \times 10^{14})}{1.6 \times 10^{-19}} = \frac{3.96 \times 10^{-19}}{1.6 \times 10^{-19}} = 2.475\text{ eV}$$
$$\Phi_0 = 2.475\text{ eV} - 0.5\text{ eV} = \mathbf{1.975\text{ eV}}$$
Example 3
$100\text{ V}$ के विभवांतर से त्वरित एक इलेक्ट्रॉन की दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य (de Broglie Wavelength) की गणना कीजिए।
Step-by-Step Solution:
दिया है:
त्वरक विभवांतर $V = 100\text{ Volt}$

सूत्र:
विभवांतर $V$ से त्वरित इलेक्ट्रॉन की दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य:
$$\lambda = \frac{1.227}{\sqrt{V}}\text{ nm} = \frac{12.27}{\sqrt{V}}\text{ \AA}$$
गणना:
$$\lambda = \frac{1.227}{\sqrt{100}} = \frac{1.227}{10} = \mathbf{0.1227\text{ nm} = 1.227\text{ \AA}}$$
उत्तर: $100\text{ V}$ से त्वरित इलेक्ट्रॉन की दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य $\mathbf{0.1227\text{ nm}}$ है (जो कि एक्स-किरणों के तरंगदैर्ध्य परास में आती है)।
Example 4
आइंस्टीन का प्रकाश-विद्युत समीकरण लिखिए तथा इसके आधार पर प्रकाश-विद्युत प्रभाव के निम्नलिखित नियमों की व्याख्या कीजिए: (a) देहली आवृत्ति का अस्तित्व, तथा (b) गतिज ऊर्जा का तीव्रता से स्वतंत्र होना।
Step-by-Step Solution:
आइंस्टीन का प्रकाश-विद्युत समीकरण:
$$K_{\max} = \frac{1}{2}m v_{\max}^2 = h\nu - \Phi_0 = h(\nu - \nu_0)$$
जहाँ $h\nu$ = आपतित फोटॉन की ऊर्जा, $\Phi_0 = h\nu_0$ = धातु का कार्यफलन, तथा $K_{\max}$ = उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा。

(a) देहली आवृत्ति का अस्तित्व:
1. समीकरण से स्पष्ट है कि $K_{\max} = h(\nu - \nu_0)$。
2. चूंकि किसी कण की गतिज ऊर्जा कभी ऋणात्मक नहीं हो सकती ($K_{\max} \ge 0$), अतः इलेक्ट्रॉन उत्सर्जन केवल तभी संभव है जब $h(\nu - \nu_0) \ge 0 \implies \mathbf{\nu \ge \nu_0}$。
3. यदि आपतित प्रकाश की आवृत्ति $\nu < \nu_0$ होगी, तो $K_{\max}$ ऋणात्मक होगा जो भौतिक रूप से असंभव है। अतः $\nu_0$ से कम आवृत्ति पर कोई इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित नहीं हो सकता चाहे तीव्रता कितनी भी अधिक क्यों न हो।

(b) गतिज ऊर्जा का तीव्रता से स्वतंत्र होना:
1. आइंस्टीन के अनुसार प्रकाश की तीव्रता बढ़ाने का अर्थ केवल प्रति सेकंड आपतित होने वाले फोटॉनों की संख्या बढ़ाना है, प्रत्येक फोटॉन की ऊर्जा ($h\nu$) नहीं बदलती。
2. चूंकि एक इलेक्ट्रॉन केवल एक ही फोटॉन को अवशोषित करता है, अतः प्रत्येक इलेक्ट्रॉन को मिलने वाली ऊर्जा $h\nu$ नियत रहती है。
3. इसलिए उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा ($K_{\max} = h\nu - \Phi_0$) केवल आवृत्ति $\nu$ पर निर्भर करती है, प्रकाश की तीव्रता पर बिल्कुल निर्भर नहीं करती।
Example 5
डेविसन-जर्मर प्रयोग का मुख्य उद्देश्य क्या था? इसके द्वारा प्राप्त निष्कर्ष की व्याख्या कीजिए।
Step-by-Step Solution:
डेविसन-जर्मर प्रयोग का मुख्य उद्देश्य:
इस ऐतिहासिक प्रयोग (1927) का मुख्य उद्देश्य लुई दे ब्रॉग्ली द्वारा प्रतिपादित इलेक्ट्रॉनों (द्रव्य कणों) की तरंग प्रकृति (Wave Nature) की प्रयोगात्मक पुष्टि करना था。

प्रयोग का निष्कर्ष:
1. प्रयोग में जब इलेक्ट्रॉनों को $V = 54\text{ V}$ के विभवांतर से त्वरित कर निकल क्रिस्टल पर डाला गया, तो प्रकीर्णन कोण $\theta = 50^\circ$ पर एक सुस्पष्ट तीव्रता शिखर (विवर्तन उच्चिष्ठ) देखा गया。
2. क्रिस्टल जालक के ब्रैग विवर्तन सूत्र ($2d\sin\phi = \lambda$) से गणना करने पर इलेक्ट्रॉन की तरंगदैर्ध्य:
$$\lambda_{\text{exp}} = \mathbf{0.165\text{ nm}}$$
3. दे ब्रॉग्ली के सैद्धांतिक सूत्र ($\lambda = 1.227/\sqrt{V}$) से $V = 54\text{ V}$ पर तरंगदैर्ध्य:
$$\lambda_{\text{theory}} = \frac{1.227}{\sqrt{54}} = \mathbf{0.167\text{ nm}}$$
4. अंतिम निष्कर्ष: प्रायोगिक और सैद्धांतिक मानों की यह असाधारण समानता अकाट्य रूप से प्रमाणित करती है कि गतिशील इलेक्ट्रॉन तरंगों की भांति व्यवहार करते हैं और विवर्तन प्रदर्शित करते हैं। इसी सिद्धांत पर आधुनिक 'इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी' कार्य करता है।

Common Misconceptions & Examiner Traps

Common Misconception

प्रकाश की तीव्रता बढ़ाने पर उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की गतिज ऊर्जा बढ़ने का भ्रम।

Scientific Reality & Correction

तीव्रता बढ़ाने से केवल प्रति सेकंड उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की संख्या (धारा) बढ़ती है; गतिज ऊर्जा केवल 'आवृत्ति' ($\nu$) पर निर्भर करती है।

Common Misconception

देहली आवृत्ति से कम आवृत्ति पर भी समय बीतने पर उत्सर्जन संभव मान लेना।

Scientific Reality & Correction

यदि आवृत्ति $\nu < \nu_0$ है, तो तीव्रता कितनी भी अधिक हो या कितने भी दिनों तक चमकाया जाए, एक भी इलेक्ट्रॉन कभी उत्सर्जित नहीं होगा।

Common Misconception

फोटॉन का विराम द्रव्यमान शून्य न मानना।

Scientific Reality & Correction

फोटॉन का विराम द्रव्यमान (Rest Mass) शून्य होता है; यह केवल प्रकाश की चाल ($c$) से गतिमान अवस्था में ही अस्तित्व रखता है।

Common Misconception

दे ब्रॉग्ली तरंगों को विद्युतचुंबकीय तरंगें समझ लेना।

Scientific Reality & Correction

द्रव्य तरंगें विद्युतचुंबकीय तरंगें नहीं हैं; ये आवेश पर निर्भर नहीं करतीं (उदासीन कण न्यूट्रॉन के साथ भी द्रव्य तरंग होती है)।

Common Misconception

$V_0 - \nu$ ग्राफ की ढाल को धातु पर निर्भर मानना।

Scientific Reality & Correction

$V_0$ बनाम $\nu$ ग्राफ की ढाल $\frac{h}{e}$ होती है जो सभी धातुओं के लिए पूर्णतः एकसमान (सार्वत्रिक नियतांक) होती है।

द्वैत प्रकृति: प्रकाश-विद्युत प्रभाव, आइंस्टीन समीकरण, दे ब्रॉग्ली व डेविसन-जर्मर

विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति: प्रकाश-विद्युत प्रभाव व दे ब्रॉग्ली संबंध1. प्रकाश-विद्युत प्रभावप्रायोगिक प्रेक्षण• धारा ∝ तीव्रता (संख्या बढ़ती)गतिज ऊर्जा तीव्रता पर निर्भर नहीं• निरोधी विभव eV₀ = K_maxV₀ केवल आवृत्ति पर निर्भर• देहली आवृत्ति ν₀:ν < ν₀ पर शून्य उत्सर्जन• तात्कालिक प्रक्रिया:समय-पश्चता < 10⁻⁹ सेकंडतरंग सिद्धांत यहाँ पूर्णतः विफल2. आइंस्टीन समीकरणफोटॉन क्वांटम सिद्धांत• फोटॉन ऊर्जा E = hν = hc/λसंवेग p = h/λ, विराम द्रव्यमान=0• कार्यफलन Φ₀ = hν₀ = hc/λ₀सीजियम Φ₀ = 2.14 eV (न्यूनतम)• आइंस्टीन समीकरण:K_max = hν - Φ₀ = h(ν - ν₀)• निरोधी विभव रूप:V₀ = (h/e)ν - Φ₀/eV₀-ν ग्राफ ढाल = h/e (नियत)3. दे ब्रॉग्ली व डेविसनद्रव्य तरंगें एवं विवर्तन• दे ब्रॉग्ली सूत्र: λ = h / pλ = h / (mv) = h / √(2mK)• V वोल्ट से त्वरित इलेक्ट्रॉन:λ = 1.227 / √V nm100V पर λ = 0.1227 nm• डेविसन-जर्मर प्रयोग (1927):V = 54V, θ = 50° पर विवर्तन शिखरλ_exp = 0.165 nm ≈ λ_th = 0.167 nmइलेक्ट्रॉन की तरंग प्रकृति प्रमाणित!बोर्ड परीक्षा के प्रमुख संप्रत्यय (Golden Dual Nature Capsule)आइंस्टीन समीकरण:K_max = h(ν - ν₀); eV₀ = hν - Φ₀; V₀-ν ग्राफ की ढाल h/e सार्वत्रिक नियतांक है।तीव्रता बनाम आवृत्ति:तीव्रता से केवल धारा (इलेक्ट्रॉन संख्या) बढ़ती है; गतिज ऊर्जा व V₀ केवल ν से बढ़ते हैं।दे ब्रॉग्ली इलेक्ट्रॉन λ:λ = 1.227/√V nm; डेविसन-जर्मर ने 54V पर विवर्तन द्वारा तरंग प्रकृति सिद्ध की।

Chapter Summary & 10 Key Takeaways

Takeaway 1
प्रकाश-विद्युत प्रभाव में धारा ∝ तीव्रता; अधिकतम गतिज ऊर्जा तीव्रता पर निर्भर नहीं करती।
Takeaway 2
निरोधी विभव eV₀ = K_max = ½mv_max²; V₀ केवल आपतित आवृत्ति पर निर्भर करता है।
Takeaway 3
देहली आवृत्ति ν₀ से कम आवृत्ति पर कोई इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित नहीं होता; प्रक्रिया तात्कालिक (< 10⁻⁹ s) है।
Takeaway 4
शास्त्रीय तरंग सिद्धांत ऊर्जा वितरण, देहली आवृत्ति व समय विलंब समझाने में पूर्णतः विफल रहा।
Takeaway 5
फोटॉन ऊर्जा E = hν = hc/λ, संवेग p = h/λ, तथा विराम द्रव्यमान शून्य होता है।
Takeaway 6
कार्यफलन Φ₀ = hν₀ = hc/λ₀ (सीजियम का न्यूनतम 2.14 eV) होता है।
Takeaway 7
आइंस्टीन समीकरण K_max = hν - Φ₀ = h(ν - ν₀) अथवा eV₀ = hν - Φ₀ (V₀-ν ग्राफ ढाल = h/e)।
Takeaway 8
दे ब्रॉग्ली परिकल्पना: गतिशील द्रव्य कण तरंग प्रदर्शित करते हैं (λ = h/p = h/mv)।
Takeaway 9
V वोल्ट विभवांतर से त्वरित इलेक्ट्रॉन की तरंगदैर्ध्य λ = 1.227/√V nm = 12.27/√V Å होती है।
Takeaway 10
डेविसन-जर्मर प्रयोग ने 54V पर इलेक्ट्रॉन विवर्तन (λ = 0.165 nm) द्वारा तरंग प्रकृति सिद्ध की।

Check Your Understanding (Diagnostic Practice Questions)

Diagnostic questions testing core conceptual clarity. Answers are hidden initially — solve each problem first, then click to reveal the step-by-step verified solution.

1
'निरोधी विभव' (Stopping Potential) किसे कहते हैं? क्या यह आपतित प्रकाश की तीव्रता पर निर्भर करता है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: संग्राहक पट्टिका पर लगाया गया वह न्यूनतम ऋणात्मक विभव जिस पर प्रकाश-विद्युत धारा का मान घटकर शून्य हो जाता है, निरोधी विभव (V₀) कहलाता है। नहीं, यह तीव्रता पर बिल्कुल निर्भर नहीं करता, बल्कि केवल आपतित प्रकाश की आवृत्ति पर निर्भर करता है।
2
धातु के 'कार्यफलन' (Work Function) से क्या तात्पर्य है? इसका SI मात्रक क्या है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: किसी धातु की सतह से एक इलेक्ट्रॉन को ठीक बाहर निकालने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा को उस धातु का कार्यफलन (Φ₀ = hν₀) कहते हैं। इसका SI मात्रक 'जूल' (Joule) है, परंतु प्रायोगिक रूप से इसे 'इलेक्ट्रॉन-वोल्ट' (eV) में व्यक्त करते हैं।
3
प्रकाश-विद्युत प्रभाव में निरोधी विभव (V₀) तथा आपतित प्रकाश की आवृत्ति (ν) के मध्य खींचे गए ग्राफ की प्रवणता (Slope) क्या प्रदर्शित करती है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: ग्राफ की प्रवणता (Slope) सार्वत्रिक नियतांक h/e (प्लैंक नियतांक तथा इलेक्ट्रॉन के आवेश का अनुपात) प्रदर्शित करती है, जो सभी धातुओं के लिए सर्वदा एकसमान रहती है।
4
V वोल्ट विभवांतर से त्वरित एक इलेक्ट्रॉन की दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य का सूत्र लिखिए।
Reveal Answer & Explanation
Answer: λ = 1.227 / √V nm = 12.27 / √V Å।
5
डेविसन तथा जर्मर के प्रयोग का क्या महत्व है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: डेविसन तथा जर्मर के प्रयोग ने निकल क्रिस्टल द्वारा इलेक्ट्रॉनों के विवर्तन को प्रदर्शित करके सर्वप्रथम यह प्रयोगात्मक प्रमाण दिया कि गतिशील इलेक्ट्रॉन (पदार्थ के कण) वास्तव में तरंग प्रकृति (Wave Nature) रखते हैं।
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