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JAC • Class XII • Physics • Ch 1
Estimated Time: 45 Mins
Study Progress: In Progress

Electric Charges and Fields

स्थिरवैद्युतिकी (Electrostatics) भौतिक विज्ञान की वह आधारभूत शाखा है जिसके अंतर्गत विराम अवस्था में स्थित आवेशों, उनके मध्य पारस्परिक अन्योन्यक्रिया बलों, उनके द्वारा उत्पन्न विद्युत क्षेत्रों, तथा उनसे संबंधित विभव और ऊर्जा का क्रमबद्ध व गणितीय अध्ययन किया जाता है। वैद्युत आवेश द्रव्य का वह मूलभूत आंतरिक गुण है जिसके कारण वह वैद्युत एवं चुंबकीय प्रभाव उत्पन्न करता है तथा उनका अनुभव करता है। आवेश दो प्रकार के होते हैं—धनात्मक और ऋणात्मक। आवेश के तीन सार्वभौमिक मूलभूत गुणधर्म हैं: आवेश की योज्यता ($Q = \sum q_i$), आवेश का संरक्षण (विलगित निकाय का कुल आवेश नियत रहता है), तथा आवेश का क्वांटीकरण ($q = \pm ne$ जहाँ $e = 1.6 \times 10^{-19}\text{ C}$)। दो बिंदु आवेशों के मध्य लगने वाला आकर्षण अथवा प्रतिकर्षण बल कूलॉम के नियम ($F = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{|q_1 q_2|}{r^2}$) द्वारा निर्धारित होता है। विद्युत क्षेत्र ($\u000bec{E} = \frac{\vec{F}}{q_0}$) आवेश के चारों ओर का वह प्रभाव क्षेत्र है जहाँ अन्य आवेश वैद्युत बल का अनुभव करते हैं। दो समान परिमाण परंतु विपरीत प्रकृति के आवेश जब अति अल्प दूरी ($2a$) पर स्थित होते हैं, तो वे विद्युत द्विध्रुव ($\vec{p} = q(2\vec{a})$) का निर्माण करते हैं, जिसका अक्षीय विद्युत क्षेत्र ($E_{\text{axial}} = \frac{2kp}{r^3}$) निरक्षीय विद्युत क्षेत्र ($E_{\text{equatorial}} = \frac{kp}{r^3}$) का ठीक दोगुना होता है। स्थिरवैद्युतिकी का सर्वोपरि सिद्धांत गाउस का नियम (Gauss's Law: $\oint \vec{E}\cdot d\vec{A} = \frac{q_{\text{in}}}{\varepsilon_0}$) है, जो सममित आवेश वितरणों—जैसे अनंत रेखीय आवेशित तार ($E = \frac{\lambda}{2\pi\varepsilon_0 r}$), अनंत समतल अचालक चादर ($E = \frac{\sigma}{2\varepsilon_0}$), तथा आवेशित गोलीय खोल (खोल के भीतर $E=0$, बाहर $E \propto 1/r^2$)—के विद्युत क्षेत्र का सटीक निर्धारण करने का सबसे शक्तिशाली माध्यम है। यह अध्याय बोर्ड एवं JEE/NEET दोनों के लिए भौतिकी की नींव तैयार करता है।

सर्दियों में स्वेटर उतारते समय चट-चट की आवाज और अंधेरे में चिंगारी क्यों निकलती है?

जब आप सर्दियों में ऊनी या नायलॉन का स्वेटर शरीर से उतारते हैं, तो चट-चट की तीखी आवाज सुनाई देती है और कभी-कभी तो अंधेरे में नीली चिंगारी भी दिखाई देती है! इतना ही नहीं, प्लास्टिक की कंघी को सूखे बालों में रगड़कर यदि कागज के छोटे-छोटे टुकड़ों के पास लाया जाए, तो वे जादू की तरह कंघी से चिपक जाते हैं। यह कोई जादू नहीं, बल्कि लगभग 2600 वर्ष पूर्व ग्रीक दार्शनिक थेल्स द्वारा खोजी गई 'स्थिरवैद्युतिकी' (Electrostatics) की अद्भुत शक्ति है! घर्षण के कारण इलेक्ट्रॉन एक वस्तु से दूसरी वस्तु में स्थानांतरित होते हैं और विशाल वैद्युत बल सक्रिय हो जाते हैं। आइए जानें कि कैसे सूक्ष्म इलेक्ट्रॉनों का यह खेल पूरे ब्रह्मांड के परमाणुओं को आपस में बांधे रखता है!

Why This Chapter Matters

JAC और CBSE कक्षा 12वीं भौतिकी बोर्ड परीक्षा में 'वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र' स्थिरवैद्युतिकी इकाई का सबसे महत्वपूर्ण और आधारभूत अध्याय है। आवेश के क्वांटीकरण ($q = ne$), कूलॉम के नियम के सदिश रूप एवं माध्यम के परावैद्युतांक ($K$), विद्युत क्षेत्र रेखाओं के चार विशिष्ट गुणधर्म, विद्युत द्विध्रुव की अक्षीय एवं निरक्षीय स्थितियों में विद्युत क्षेत्र का व्यंजक ($E_{\text{axial}} = 2E_{\text{equatorial}}$), एकसमान विद्युत क्षेत्र में द्विध्रुव पर बल आघूर्ण ($\tau = pE\sin\theta$) व स्थितिज ऊर्जा, तथा गाउस के नियम का कथन व उसके तीनों अनुप्रयोगों (अनंत लंबा तार, अचालक समतल चादर, व गोलीय खोल) के निगमन पर प्रतिवर्ष 3 से 5 अंकों के दीर्घ-उत्तरीय और संख्यात्मक प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं।

Before You Begin (Prerequisites)

  • सदिश बीजगणित (Vector Algebra): सदिशों का योग, घटक वियोजन, अदिश (Dot) व सदिश (Cross) गुणनफल।
  • परमाणु संरचना: इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन और मूल आवेश ($e = 1.6 \times 10^{-19}\text{ C}$)।
  • गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम ($F = G\frac{m_1 m_2}{r^2}$) से तुलनात्मक समझ।

What You Will Learn (Core Objectives)

  • वैद्युत आवेश की प्रकृति, आवेशन की विधियों (घर्षण, चालन, प्रेरण) और आवेश के तीन मूल गुणों (योज्यता, संरक्षण, क्वांटीकरण) को स्पष्ट करना।
  • कूलॉम के नियम को अदिश व सदिश रूप में व्युत्पन्न करना और परावैद्युतांक ($K$) के प्रभाव का विश्लेषण करना।
  • विद्युत क्षेत्र, परीक्षण आवेश, और विद्युत क्षेत्र रेखाओं के अनिवार्य भौतिक गुणों का वर्णन करना।
  • विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण की परिभाषा देना तथा अक्षीय एवं निरक्षीय स्थिति में विद्युत क्षेत्र की तीव्रता के सूत्रों का संपूर्ण गणितीय निगमन करना।
  • गाउस के नियम का कथन लिखना, इसे कूलॉम नियम से सिद्ध करना, तथा अनंत लंबे तार, समतल चादर एवं गोलीय खोल के विद्युत क्षेत्र की गणना करना।

Chapter Roadmap & Progression

1 1. वैद्युत आवेश एवं इसके मूल गुणधर्...
2 2. कूलॉम का नियम एवं माध्यम का पराव...
3 3. विद्युत क्षेत्र एवं विद्युत क्षे...
4 4. विद्युत द्विध्रुव: अक्षीय व निरक...
5 5. विद्युत फ्लक्स, गाउस का नियम एवं...

Complete Concept Guide (100% Curriculum Coverage)

1. वैद्युत आवेश एवं इसके मूल गुणधर्म (Electric Charge and its Properties)

1.1 वैद्युत आवेश क्या है? आवेशन की विधियां

वैद्युत आवेश (Electric Charge): द्रव्य का वह अंतर्निहित गुण जिसके कारण वह वैद्युत तथा चुंबकीय क्षेत्रों को उत्पन्न करता है और उनका अनुभव करता है। इसका SI मात्रक कूलॉम (Coulomb - C) है और इसकी विमा $[AT]$ होती है।

  • आवेश के प्रकार: अमेरिकी वैज्ञानिक बेंजामिन फ्रैंकलिन ने आवेशों को दो वर्गों में विभाजित किया—धनात्मक (+ve) एवं ऋणात्मक (-ve)। सजातीय आवेश एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं जबकि विजातीय आवेश एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं।
  • आवेशन की विधियां (Methods of Charging):
    1. घर्षण द्वारा आवेशन (Charging by Friction): दो वस्तुओं को परस्पर रगड़ने पर इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण होता है। (जैसे कांच की छड़ को रेशम से रगड़ने पर कांच धनावेशित व रेशम ऋणावेशित हो जाता है)।
    2. चालन / स्पर्श द्वारा आवेशन (Charging by Conduction): किसी अनावेशित चालक को आवेशित चालक के सीधे संपर्क में लाने पर आवेश का पुनर्वितरण।
    3. स्थिरवैद्युत प्रेरण (Electrostatic Induction): बिना किसी भौतिक संपर्क के, निकट रखे आवेशित पिंड के प्रभाव से अनावेशित चालक के समीपवर्ती पृष्ठ पर विपरीत प्रकृति का तथा दूरवर्ती पृष्ठ पर समान प्रकृति का आवेश उत्पन्न हो जाना।

1.2 वैद्युत आवेश के तीन आधारभूत गुणधर्म (Fundamental Properties of Charge)

  1. 1. आवेश की योज्यता (Additivity of Electric Charges):
    आवेश एक अदिश राशि है। किसी निकाय का कुल वैद्युत आवेश उसमें उपस्थित सभी व्यक्तिगत आवेशों के बीजगणितीय योग (Algebraic Sum) के बराबर होता है:
    $$Q = q_1 + q_2 + q_3 + \dots + q_n$$(चिह्नों का ध्यान रखा जाता है, जैसे $+5\text{ C} - 3\text{ C} = +2\text{ C}$)।
  2. 2. वैद्युत आवेश का संरक्षण (Conservation of Electric Charge):
    किसी विलगित निकाय (Isolated System) का कुल आवेश सदैव संरक्षित (अपरिवर्तनीय) रहता है। आवेश को न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है; इसे केवल एक पिंड से दूसरे पिंड में स्थानांतरित किया जा सकता है।
  3. 3. आवेश का क्वांटीकरण (Quantisation of Electric Charge):
    क्वांटीकरण का सिद्धांत: प्रकृति में किसी भी आवेशित वस्तु पर कुल आवेश सदैव एक मूल आवेश (इलेक्ट्रॉनिक आवेश $e$) का पूर्ण गुणज (Integral Multiple) ही हो सकता है:
    $$\mathbf{q = \pm n e}$$जहाँ $n = 1, 2, 3, \dots$ (एक पूर्णांक है) तथा $e = 1.602 \times 10^{-19}\text{ C}$ (मूल आवेश)।
    टिप्पणी: आवेश कभी भी $1.5e, 2.7e$ या भिन्न (fraction) के रूप में स्वतंत्र अवस्था में नहीं पाया जा सकता।

2. कूलॉम का नियम एवं माध्यम का परावैद्युतांक (Coulomb's Law & Dielectric Constant)

2.1 कूलॉम का नियम (Coulomb's Law in Electrostatics)

सन् 1785 में फ्रांसीसी भौतिकशास्त्री चार्ल्स ऑगस्टिन डी कूलॉम ने दो स्थिर बिंदु आवेशों के मध्य कार्य करने वाले बल के संबंध में एक नियम प्रतिपादित किया:

कथन: दो स्थिर बिंदु आवेशों ($q_1$ व $q_2$) के मध्य कार्य करने वाला स्थिरवैद्युत बल (आकर्षण अथवा प्रतिकर्षण) दोनों आवेशों के परिमाणों के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती तथा उनके बीच की दूरी ($r$) के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। यह बल दोनों आवेशों को मिलाने वाली रेखा के अनुदिश कार्य करता है।

$$F \propto \frac{|q_1 q_2|}{r^2} \implies F = k \frac{|q_1 q_2|}{r^2}$$जहाँ $k$ एक समानुपातिक स्थिरांक है।

निर्वात अथवा वायु में:$$k = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} = 8.98755 \times 10^9 \approx 9 \times 10^9 \text{ N}\cdot\text{m}^2/\text{C}^2$$जहाँ $\varepsilon_0$ (एप्साइलन नॉट) निर्वात की विद्युतशीलता (Permittivity of Free Space) है:
$$\varepsilon_0 = 8.854 \times 10^{-12} \text{ C}^2/(\text{N}\cdot\text{m}^2) \quad \text{[विमीय सूत्र: } [M^{-1}L^{-3}T^4A^2]\text{]}$$अतः निर्वात में दो आवेशों के बीच बल:$$F_0 = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{|q_1 q_2|}{r^2}$$

2.2 कूलॉम के नियम का सदिश रूप (Vector Form of Coulomb's Law)

माना दो बिंदु आवेश $q_1$ तथा $q_2$ के स्थिति सदिश क्रमशः $\vec{r}_1$ व $\vec{r}_2$ हैं। $q_1$ से $q_2$ की ओर दिष्ट एकांक सदिश $\hat{r}_{12} = \frac{\vec{r}_2 - \vec{r}_1}{|\vec{r}_2 - \vec{r}_1|}$ है।

  • आवेश $q_2$ पर $q_1$ द्वारा लगाया गया बल:$$\vec{F}_{21} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q_1 q_2}{r^2} \hat{r}_{12}$$
  • आवेश $q_1$ पर $q_2$ द्वारा लगाया गया बल:$$\vec{F}_{12} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q_1 q_2}{r^2} \hat{r}_{21} = -\vec{F}_{21} \quad (\because \hat{r}_{21} = -\hat{r}_{12})$$
  • निष्कर्ष: कूलॉम का नियम न्यूटन के गति के तृतीय नियम (क्रिया-प्रतिक्रिया नियम) का पूर्णतः पालन करता है और यह एक केंद्रीय बल (Central Force) है।

2.3 माध्यम का परावैद्युतांक या आपेक्षिक विद्युतशीलता (Dielectric Constant - K)

यदि दोनों आवेशों को निर्वात के स्थान पर किसी परावैद्युत माध्यम (जैसे जल, कांच, मोम) में समान दूरी पर रख दिया जाए, तो उनके बीच बल घटकर $F_m$ हो जाता है:

$$F_m = \frac{1}{4\pi\varepsilon} \frac{|q_1 q_2|}{r^2}$$
परावैद्युतांक ($K$ या $\varepsilon_r$): निर्वात में दो आवेशों के मध्य बल ($F_0$) तथा उसी दूरी पर माध्यम में उन आवेशों के मध्य बल ($F_m$) के अनुपात को उस माध्यम का परावैद्युतांक कहते हैं:
$$\mathbf{K = \varepsilon_r = \frac{\varepsilon}{\varepsilon_0} = \frac{F_0}{F_m}}$$विशेष मान: निर्वात हेतु $K=1$, वायु हेतु $K \approx 1.0006$, शुद्ध जल हेतु $K \approx 81$, तथा चालकों (धातुओं) के लिए $K = \infty$।

3. विद्युत क्षेत्र एवं विद्युत क्षेत्र रेखाएं (Electric Field & Field Lines)

3.1 विद्युत क्षेत्र की तीव्रता (Electric Field Intensity - $\vec{E}$)

किसी स्थिर आवेश के चारों ओर का वह क्षेत्र जिसमें कोई अन्य परीक्षण आवेश वैद्युत बल का अनुभव करता है, विद्युत क्षेत्र कहलाता है।

परिभाषा: विद्युत क्षेत्र में किसी बिंदु पर रखे अत्यंत सूक्ष्म धन परीक्षण आवेश ($q_0 \to 0$) पर लगने वाले वैद्युत बल ($\u000bec{F}$) तथा उस परीक्षण आवेश के मान के अनुपात को उस बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता (Electric Field Intensity) कहते हैं:
$$\mathbf{\vec{E} = \lim_{q_0 \to 0} \frac{\vec{F}}{q_0}}$$• प्रकृति: सदिश राशि (दिशा वही होती है जो धन आवेश पर लगने वाले बल की होती है)।
• SI मात्रक: $\text{N/C}$ (न्यूटन प्रति कूलॉम) अथवा $\text{V/m}$ (वोल्ट प्रति मीटर)।
• विमीय सूत्र: $[MLT^{-3}A^{-1}]$।

बिंदु आवेश $q$ के कारण दूरी $r$ पर विद्युत क्षेत्र:$$E = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{r^2}$$

3.2 विद्युत क्षेत्र रेखाएं एवं उनके प्रमुख गुणधर्म (Electric Field Lines)

माइकल फैराडे द्वारा विद्युत क्षेत्र की ज्यामितीय और दृश्य व्याख्या हेतु विद्युत क्षेत्र रेखाओं की संकल्पना प्रस्तुत की गई थी। विद्युत क्षेत्र रेखा वह निष्कोण वक्र है जिस पर एक पृथक्कृत स्वतंत्र एकांक धन आवेश गति करने की प्रवृत्ति रखता है।

क्रमांकविद्युत क्षेत्र रेखाओं का गुणधर्मभौतिक कारण एवं निष्कर्ष
1क्षेत्र रेखाएं धनावेश से प्रारंभ होकर ऋणावेश पर समाप्त होती हैं। एकल धनावेश के लिए ये अनंत तक जाती हैं, तथा एकल ऋणावेश के लिए अनंत से आती हैं।परीक्षण धनावेश धनात्मक आवेश से प्रतिकर्षित तथा ऋणात्मक आवेश की ओर आकर्षित होता है।
2क्षेत्र रेखा के किसी बिंदु पर खींची गई स्पर्श रेखा (Tangent) उस बिंदु पर परिणामी विद्युत क्षेत्र की दिशा को दर्शाती है।विद्युत क्षेत्र एक सदिश राशि है जिसकी किसी दिए गए बिंदु पर एक अद्वितीय दिशा होती है।
3दो क्षेत्र रेखाएं कभी भी एक-दूसरे को नहीं काट सकतीं।यदि वे काटेंगी, तो कटान बिंदु पर दो स्पर्श रेखाएं खींची जा सकेंगी, जिसका अर्थ होगा कि उस बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की दो दिशाएं हैं, जो कि सर्वथा असंभव है।
4विद्युत क्षेत्र रेखाएं कभी भी बंद लूप (Closed Loops) नहीं बनातीं।स्थिरवैद्युत क्षेत्र एक संरक्षी बल क्षेत्र (Conservative Field) है; किसी आवेश द्वारा लूप में किए गए कार्य का मान शून्य होना चाहिए।
5जहाँ क्षेत्र रेखाएं सघन (घनी) होती हैं, वहाँ विद्युत क्षेत्र तीव्र होता है; जहाँ विरल होती हैं, वहाँ विद्युत क्षेत्र दुर्बल होता है।रेखाओं का क्षेत्रीय घनत्व विद्युत क्षेत्र के परिमाण के समानुपाती होता है।

4. विद्युत द्विध्रुव: अक्षीय व निरक्षीय क्षेत्र तथा एकसमान क्षेत्र में बल आघूर्ण

4.1 विद्युत द्विध्रुव एवं द्विध्रुव आघूर्ण (Electric Dipole & Dipole Moment)

जब दो समान परिमाण परंतु विपरीत प्रकृति के बिंदु आवेश ($-q$ व $+q$) एक-दूसरे से अति अल्प दूरी ($2a$) पर स्थित होते हैं, तो इस निकाय को विद्युत द्विध्रुव (Electric Dipole) कहते हैं (उदा: $\text{HCl}, \text{H}_2\text{O}, \text{NH}_3$)।

विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण ($\vec{p}$): किसी एक आवेश के परिमाण ($q$) तथा दोनों आवेशों के बीच की दूरी ($2a$) के गुणनफल को विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण कहते हैं:
$$\mathbf{\vec{p} = q(2\vec{a})}$$• दिशा: सदैव ऋणावेश ($-q$) से धनावेश ($+q$) की ओर।
• SI मात्रक: कूलॉम-मीटर ($\text{C}\cdot\text{m}$)।

4.2 अक्षीय स्थिति (End-on / Axial Position) में विद्युत क्षेत्र का निगमन

द्विध्रुव के केंद्र $O$ से उसकी अक्ष पर दूरी $r$ पर स्थित बिंदु $P$ पर:

  • $+q$ के कारण विद्युत क्षेत्र: $E_+ = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{(r - a)^2}$ (दिशा $\vec{p}$ के अनुदिश)
  • $-q$ के कारण विद्युत क्षेत्र: $E_- = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{(r + a)^2}$ (दिशा $\vec{p}$ के विपरीत)
  • परिणामी क्षेत्र $E_{\text{axial}} = E_+ - E_- = \frac{q}{4\pi\varepsilon_0} \left[ \frac{1}{(r-a)^2} - \frac{1}{(r+a)^2} \right] = \frac{q}{4\pi\varepsilon_0} \frac{4ar}{(r^2 - a^2)^2}$
  • चूंकि $p = q(2a)$:$$E_{\text{axial}} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{2pr}{(r^2 - a^2)^2}$$
  • लघु द्विध्रुव हेतु ($r \gg a$): $a^2$ की उपेक्षा करने पर:$$\mathbf{E_{\text{axial}} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{2p}{r^3}} \quad (\text{दिशा: } \vec{p} \text{ के अनुदिश})$$

4.3 निरक्षीय स्थिति (Broadside-on / Equatorial Position) में विद्युत क्षेत्र का निगमन

द्विध्रुव के लंब द्विभाजक (निरक्षीय रेखा) पर केंद्र $O$ से दूरी $r$ पर स्थित बिंदु पर दोनों आवेशों से दूरी समान $\sqrt{r^2 + a^2}$ होती है।

  • लंबवत घटक ($E\sin\theta$) परस्पर विपरीत होने के कारण निरस्त हो जाते हैं, जबकि क्षैतिज घटक ($E\cos\theta$) जुड़ जाते हैं:
  • $E_{\text{equatorial}} = 2 E_+ \cos\theta = 2 \left( \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{r^2 + a^2} \right) \left( \frac{a}{\sqrt{r^2 + a^2}} \right) = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q(2a)}{(r^2 + a^2)^{3/2}}$
  • लघु द्विध्रुव हेतु ($r \gg a$):$$\mathbf{E_{\text{equatorial}} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{p}{r^3}} \quad (\text{दिशा: } \vec{p} \text{ के ठीक विपरीत})$$
अक्षीय व निरक्षीय क्षेत्रों में संबंध:
समान दूरी $r$ पर: $\mathbf{E_{\text{axial}} = 2 \times E_{\text{equatorial}}}$

4.4 एकसमान विद्युत क्षेत्र में द्विध्रुव पर बल आघूर्ण एवं स्थितिज ऊर्जा

जब एक द्विध्रुव ($\vec{p}$) को एकसमान विद्युत क्षेत्र ($\vec{E}$) में क्षेत्र की दिशा से $\theta$ कोण पर रखा जाता है:

  • कुल बल: $+q$ पर बल $+q\vec{E}$ तथा $-q$ पर बल $-q\vec{E}$ लगता है। अतः परिणामी बल $\mathbf{F_{\text{net}} = 0}$ होता है (स्थानांतरीय गति नहीं होती)।
  • बल आघूर्ण (Torque - $\vec{\tau}$): दोनों बलों की क्रिया रेखा भिन्न होने के कारण एक बलयुग्म बनता है:$$\tau = \text{बल} \times \text{क्रिया रेखाओं के बीच लंबवत दूरी} = (qE) \times (2a\sin\theta) = (q\cdot 2a) E \sin\theta$$$$\mathbf{\vec{\tau} = \vec{p} \times \vec{E} \implies \tau = pE\sin\theta}$$• महत्तम बल आघूर्ण: जब $\theta = 90^\circ \implies \tau_{\max} = pE$
    • साम्यावस्था: $\theta = 0^\circ$ पर स्थायी साम्यावस्था; $\theta = 180^\circ$ पर अस्थाई साम्यावस्था।
  • स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy - $U$):$$U = -\vec{p}\cdot\vec{E} = -pE\cos\theta$$

5. विद्युत फ्लक्स, गाउस का नियम एवं इसके तीन प्रमुख अनुप्रयोग

5.1 विद्युत फ्लक्स (Electric Flux - $\Phi_E$)

विद्युत क्षेत्र में स्थित किसी काल्पनिक पृष्ठ से अभिलंबवत गुजरने वाली विद्युत क्षेत्र रेखाओं की कुल संख्या की माप को विद्युत फ्लक्स कहते हैं।

$$\mathbf{\Phi_E = \int_A \vec{E}\cdot d\vec{A} = \int_A E\,dA\cos\theta}$$• प्रकृति: अदिश राशि।
• SI मात्रक: $\text{N}\cdot\text{m}^2/\text{C}$ अथवा $\text{Volt}\cdot\text{meter}$ ($\text{V}\cdot\text{m}$)।

5.2 गाउस का नियम (Gauss's Law)

कथन: किसी बंद काल्पनिक पृष्ठ (गाउसीय पृष्ठ - Gaussian Surface) से निर्गत कुल विद्युत फ्लक्स उस बंद पृष्ठ द्वारा परिबद्ध (घेरे गए) कुल नेट आवेश ($q_{\text{enclosed}}$) का $\frac{1}{\varepsilon_0}$ गुना होता है:

$$\mathbf{\oint_S \vec{E}\cdot d\vec{A} = \frac{q_{\text{in}}}{\varepsilon_0}}$$महत्वपूर्ण बिंदु: यदि बंद पृष्ठ के भीतर कोई आवेश नहीं है ($q_{\text{in}} = 0$), तो पृष्ठ से निर्गत कुल विद्युत फ्लक्स शून्य होगा (चाहे बाहर कितने भी आवेश उपस्थित हों)।

5.3 गाउस के नियम के तीन महत्वपूर्ण अनुप्रयोग (Applications of Gauss's Law)

  1. 1. अनंत लंबाई के एकसमान आवेशित सीधे तार के कारण विद्युत क्षेत्र:
    माना तार का रेखीय आवेश घनत्व $\lambda = \frac{q}{L}$ है। तार से $r$ दूरी पर $L$ लंबाई का एक समाक्षीय बेलनाकार गाउसीय पृष्ठ चुनते हैं:
    समतल वृत्ताकार फलकों से फ्लक्स $= 0$ (क्योंकि $\vec{E} \perp d\vec{A}$); वक्र पृष्ठ से फ्लक्स $= E \times (2\pi r L)$।
    गाउस के नियम से: $E(2\pi r L) = \frac{\lambda L}{\varepsilon_0}$
    $$\mathbf{E = \frac{\lambda}{2\pi\varepsilon_0 r}} \quad \implies E \propto \frac{1}{r}$$
  2. 2. अनंत विस्तार की एकसमान आवेशित अचालक समतल चादर के कारण विद्युत क्षेत्र:
    माना चादर का पृष्ठीय आवेश घनत्व $\sigma = \frac{q}{A}$ है। चादर के आर-पार अनुप्रस्थ काट $A$ वाला एक बेलनाकार पिलबॉक्स चुनते हैं:
    बेलन के दोनों वृत्ताकार फलकों से फ्लक्स $= E A + E A = 2EA$; वक्र पृष्ठ से फ्लक्स $= 0$।
    गाउस के नियम से: $2EA = \frac{\sigma A}{\varepsilon_0}$
    $$\mathbf{E = \frac{\sigma}{2\varepsilon_0}}$$
    महत्वपूर्ण निष्कर्ष: अनंत समतल चादर के निकट विद्युत क्षेत्र दूरी $r$ पर निर्भर नहीं करता; यह एकसमान विद्युत क्षेत्र होता है!
  3. 3. एकसमान आवेशित पतले गोलीय खोल (Spherical Shell) के कारण विद्युत क्षेत्र:
    माना त्रिज्या $R$ के गोलीय खोल पर कुल आवेश $q$ एकसमान रूप से वितरित है ($q = \sigma \cdot 4\pi R^2$):
    • खोल के बाहर ($r > R$): त्रिज्या $r$ का संकेंद्रीय गोलीय गाउसीय पृष्ठ लेने पर: $E(4\pi r^2) = \frac{q}{\varepsilon_0} \implies \mathbf{E = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{r^2}}$ (खोल ऐसे व्यवहार करता है मानो सारा आवेश केंद्र पर स्थित हो)।
    • खोल के पृष्ठ पर ($r = R$): $\mathbf{E = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{R^2} = \frac{\sigma}{\varepsilon_0}}$ (अधिकतम)।
    • खोल के भीतर ($r < R$): चूंकि चालक खोल के भीतर कोई आवेश नहीं होता ($q_{\text{in}} = 0$):
    $$E(4\pi r^2) = 0 \implies \mathbf{E = 0}$$
    अनुप्रयोग: स्थिरवैद्युत परिरक्षण (Electrostatic Shielding)—आकाशीय बिजली चमकने पर कार या बस के भीतर बैठे रहना बाहर खड़े रहने से ज्यादा सुरक्षित होता है क्योंकि धातु की बॉडी एक बंद खोल की तरह व्यवहार करती है जिसके भीतर विद्युत क्षेत्र शून्य होता है।

Key Formulas, Laws & Physical Constants

आवेश का क्वांटीकरण
$$q = \pm n e \quad (e = 1.6 \times 10^{-19}\text{ C}, n = 1, 2, 3\dots)$$
कूलॉम का नियम (निर्वात)
$$F = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{|q_1 q_2|}{r^2} \quad \left(\frac{1}{4\pi\varepsilon_0} = 9 \times 10^9\text{ N}\cdot\text{m}^2/\text{C}^2\right)$$
परावैद्युतांक (K)
$$K = \varepsilon_r = \frac{\varepsilon}{\varepsilon_0} = \frac{F_0}{F_m} \implies F_m = \frac{F_0}{K}$$
विद्युत क्षेत्र की तीव्रता
{E} = {{F}}{q_0} = {1}{4_0} {q}{r^2}{r} (SI मात्रक: N/C या V/m)
विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण
{p} = q(2{a}) (दिशा: -q से +q, मात्रक: C·m)
द्विध्रुव अक्षीय क्षेत्र (r >> a)
E_{axial} = {1}{4_0} {2p}{r^3} (दिशा: {p} के अनुदिश)
द्विध्रुव निरक्षीय क्षेत्र (r >> a)
$$E_{\text{equatorial}} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{p}{r^3} \implies E_{\text{axial}} = 2 E_{\text{equatorial}}$$
एकसमान क्षेत्र में बल आघूर्ण
$$\vec{\tau} = \vec{p} \times \vec{E} \implies \tau = pE\sin\theta \quad (\tau_{\max} = pE \text{ at } 90^\circ)$$
द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा
$$U = -\vec{p}\cdot\vec{E} = -pE\cos\theta$$
विद्युत फ्लक्स
_E = _A {E}· d{A} = E A (मात्रक: N·m^2/C)
गाउस का नियम
$$\oint_S \vec{E}\cdot d\vec{A} = \frac{q_{\text{enclosed}}}{\varepsilon_0}$$
गाउस अनुप्रयोग (3 रूप)
तार: E = {2_0 r}; चादर: E = {2_0}; खोल भीतर: E = 0

Conceptual Solved Examples & Case Studies

Example 1
एक चालक पर $8.0 \times 10^{-18}\text{ C}$ धनात्मक आवेश है। इस चालक पर सामान्य अवस्था से कितने इलेक्ट्रॉनों की अधिकता अथवा कमी है?
Step-by-Step Solution:
दिया है:
चालक पर आवेश $q = +8.0 \times 10^{-18}\text{ C}$
मूल आवेश $e = 1.6 \times 10^{-19}\text{ C}$

सूत्र:
आवेश के क्वांटीकरण के नियमानुसार:
$$q = ne \implies n = \frac{q}{e}$$
गणना:
$$n = \frac{8.0 \times 10^{-18}}{1.6 \times 10^{-19}} = \frac{8.0}{1.6} \times 10^{-18 - (-19)} = 5 \times 10^1 = 50$$
निष्कर्ष:
चूंकि चालक पर धनात्मक आवेश है, अतः इस पर 50 इलेक्ट्रॉनों की कमी है।
Example 2
वायु में एक-दूसरे से $30\text{ cm}$ दूरी पर रखे दो छोटे आवेशित गोलों पर क्रमशः $2 \times 10^{-7}\text{ C}$ तथा $3 \times 10^{-7}\text{ C}$ आवेश हैं। उनके बीच कितना स्थिरवैद्युत बल कार्यरत है? यदि उन्हें $K=81$ वाले जल में रख दिया जाए तो नया बल क्या होगा?
Step-by-Step Solution:
दिया है:
$q_1 = 2 \times 10^{-7}\text{ C}$, $q_2 = 3 \times 10^{-7}\text{ C}$
दूरी $r = 30\text{ cm} = 0.3\text{ m}$
स्थिरांक $\frac{1}{4\pi\varepsilon_0} = 9 \times 10^9\text{ N}\cdot\text{m}^2/\text{C}^2$

(i) वायु में बल ($F_0$):
$$F_0 = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q_1 q_2}{r^2} = \frac{(9 \times 10^9) \times (2 \times 10^{-7}) \times (3 \times 10^{-7})}{(0.3)^2}$$
$$F_0 = \frac{54 \times 10^{-5}}{0.09} = 600 \times 10^{-5} = 6 \times 10^{-3}\text{ N} = 0.006\text{ N}$$
चूंकि दोनों आवेश सजातीय (धनात्मक) हैं, अतः बल प्रतिकर्षण बल होगा।

(ii) जल ($K=81$) में नया बल ($F_m$):
$$F_m = \frac{F_0}{K} = \frac{6 \times 10^{-3}}{81} \approx 7.41 \times 10^{-5}\text{ N}$$
Example 3
एक विद्युत द्विध्रुव के आवेश $\pm 2\text{ }\mu\text{C}$ परस्पर $4\text{ cm}$ की दूरी पर स्थित हैं। द्विध्रुव के केंद्र से $50\text{ cm}$ की दूरी पर (a) अक्षीय स्थिति में, तथा (b) निरक्षीय स्थिति में विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात कीजिए।
Step-by-Step Solution:
दिया है:
$q = 2\text{ }\mu\text{C} = 2 \times 10^{-6}\text{ C}$
दूरी $2a = 4\text{ cm} = 0.04\text{ m} \implies a = 0.02\text{ m}$
प्रेक्षण दूरी $r = 50\text{ cm} = 0.5\text{ m}$
द्विध्रुव आघूर्ण $p = q(2a) = (2 \times 10^{-6}\text{ C}) \times (0.04\text{ m}) = 8 \times 10^{-8}\text{ C}\cdot\text{m}$

चूंकि $r = 0.5\text{ m} \gg a = 0.02\text{ m}$, अतः लघु द्विध्रुव के सूत्र प्रयुक्त होंगे:

(a) अक्षीय स्थिति में विद्युत क्षेत्र ($E_{\text{axial}}$):
$$E_{\text{axial}} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{2p}{r^3} = \frac{(9 \times 10^9) \times 2 \times (8 \times 10^{-8})}{(0.5)^3}$$
$$E_{\text{axial}} = \frac{1440}{0.125} = 11520\text{ N/C} = 1.152 \times 10^4\text{ N/C}$$

(b) निरक्षीय स्थिति में विद्युत क्षेत्र ($E_{\text{equatorial}}$):
$$E_{\text{equatorial}} = \frac{E_{\text{axial}}}{2} = \frac{1.152 \times 10^4}{2} = 5.76 \times 10^3\text{ N/C}$$
Example 4
एकसमान आवेशित अनंत लंबे सीधे तार से $2\text{ cm}$ की दूरी पर $9 \times 10^4\text{ N/C}$ का विद्युत क्षेत्र उत्पन्न होता है। तार का रेखीय आवेश घनत्व ($\lambda$) ज्ञात कीजिए।
Step-by-Step Solution:
दिया है:
दूरी $r = 2\text{ cm} = 0.02\text{ m} = 2 \times 10^{-2}\text{ m}$
विद्युत क्षेत्र $E = 9 \times 10^4\text{ N/C}$
हम जानते हैं कि $\frac{1}{4\pi\varepsilon_0} = 9 \times 10^9\text{ N}\cdot\text{m}^2/\text{C}^2 \implies \frac{1}{2\pi\varepsilon_0} = 2 \times (9 \times 10^9) = 18 \times 10^9$

सूत्र:
अनंत लंबे तार के लिए: $E = \frac{\lambda}{2\pi\varepsilon_0 r} = \frac{2 k \lambda}{r}$
$$\lambda = \frac{E \cdot r}{2k} = \frac{E \cdot r}{2 \times (9 \times 10^9)}$$
गणना:
$$\lambda = \frac{(9 \times 10^4) \times (2 \times 10^{-2})}{18 \times 10^9} = \frac{1800}{18 \times 10^9} = 10^{-7}\text{ C/m} = 0.1\text{ }\mu\text{C/m}$$
उत्तर: तार का रेखीय आवेश घनत्व $\mathbf{10^{-7}\text{ C/m}}$ अथवा $0.1\text{ }\mu\text{C/m}$ है।
Example 5
गाउस के नियम का कथन लिखिए तथा इसकी सहायता से कूलॉम के नियम का निगमन कीजिए।
Step-by-Step Solution:
गाउस का नियम: किसी बंद काल्पनिक पृष्ठ (गाउसीय पृष्ठ) से गुजरने वाला संपूर्ण वैद्युत फ्लक्स पृष्ठ द्वारा परिबद्ध कुल आवेश ($q_{\text{in}}$) का $\frac{1}{\varepsilon_0}$ गुना होता है:
$$\oint_S \vec{E}\cdot d\vec{A} = \frac{q_{\text{in}}}{\varepsilon_0}$$
गाउस नियम से कूलॉम के नियम का निगमन:
1. माना बिंदु $O$ पर एक बिंदु आवेश $+q$ स्थित है। इससे $r$ दूरी पर स्थित बिंदु $P$ पर विद्युत क्षेत्र ज्ञात करना है。
2. बिंदु $O$ को केंद्र मानकर $r$ त्रिज्या का एक गोलाकार गाउसीय पृष्ठ खींचते हैं। गोलीय सममिति के कारण इस गोले के प्रत्येक बिंदु पर विद्युत क्षेत्र $\vec{E}$ का परिमाण एकसमान होगा और उसकी दिशा त्रिज्यतः बाहर की ओर होगी。
3. बिंदु $P$ पर क्षेत्रफल अवयव $d\vec{A}$ की दिशा भी त्रिज्यतः बाहर की ओर होगी ($\theta = 0^\circ$)।
4. संपूर्ण पृष्ठ से गुजरने वाला कुल वैद्युत फ्लक्स:
$$\Phi_E = \oint_S \vec{E}\cdot d\vec{A} = \oint_S E\,dA\cos 0^\circ = E \oint_S dA = E(4\pi r^2)$$
5. गाउस के नियमानुसार: $\Phi_E = \frac{q}{\varepsilon_0}$
$$E(4\pi r^2) = \frac{q}{\varepsilon_0} \implies E = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{r^2}$$
6. यदि बिंदु $P$ पर कोई अन्य परीक्षण आवेश $q_0$ रखा जाए, तो उस पर लगने वाला वैद्युत बल:
$$F = q_0 E = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q q_0}{r^2}$$
यही कूलॉम का नियम है। (इति सिद्धम्)

Common Misconceptions & Examiner Traps

Common Misconception

क्वांटीकरण सूत्र $q = ne$ में $n$ का मान दशमलव या भिन्न में रख देना।

Scientific Reality & Correction

$n$ सदैव एक धनात्मक पूर्णांक ($1, 2, 3, \dots$) होना चाहिए; आवेश के स्थानांतरण में आधा या चौथाई इलेक्ट्रॉन कभी स्थानांतरित नहीं हो सकता।

Common Misconception

कूलॉम बल सूत्र में आवेशों के चिह्नों (+ या -) को सीधे गणना में रख देना।

Scientific Reality & Correction

कूलॉम बल के अदिश सूत्र में केवल आवेशों के परिमाण ($|q_1|, |q_2|$) रखे जाते हैं; चिह्नों का उपयोग केवल बल की दिशा (आकर्षण या प्रतिकर्षण) निर्धारित करने हेतु किया जाता है।

Common Misconception

द्विध्रुव के विद्युत क्षेत्र को एकल बिंदु आवेश की भांति $1/r^2$ के समानुपाती मान लेना।

Scientific Reality & Correction

एकल बिंदु आवेश का क्षेत्र $E \propto \frac{1}{r^2}$ होता है, जबकि विद्युत द्विध्रुव का अक्षीय व निरक्षीय क्षेत्र $E \propto \frac{1}{r^3}$ के समानुपाती होता है।

Common Misconception

आवेशित गोलीय खोल के भीतर विद्युत क्षेत्र को पृष्ठ के क्षेत्र के बराबर समझ लेना।

Scientific Reality & Correction

आवेशित गोलीय चालक खोल के भीतर कुल आवेश शून्य ($q_{\text{in}}=0$) होता है, अतः इसके भीतर प्रत्येक बिंदु पर विद्युत क्षेत्र $E = 0$ होता है।

Common Misconception

दो विद्युत क्षेत्र रेखाओं को एक बिंदु पर काटते हुए चित्रित करना।

Scientific Reality & Correction

दो क्षेत्र रेखाएं कभी एक-दूसरे को नहीं काट सकतीं क्योंकि कटान बिंदु पर दो दिशाएं बन जाएंगी जो भौतिक रूप से असंभव हैं।

वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र: कूलॉम नियम, द्विध्रुव एवं गाउस प्रमेय

वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र: कूलॉम नियम, द्विध्रुव क्षेत्र व गाउस अनुप्रयोग1. आवेश व कूलॉम का नियमस्थिरवैद्युतिकी का आधार• 3 गुण: योज्य, संरक्षित, क्वांटीकृतq = ±ne (e = 1.6 x 10^-19 C)• कूलॉम नियम (निर्वात):F = (1/4πε₀) (|q₁q₂| / r²)1/4πε₀ = 9 x 10^9 N m²/C²• माध्यम का परावैद्युतांक (K):F_m = F₀ / K (जल K=81, धातु K=∞)• क्षेत्र E = F/q₀ = (1/4πε₀)(q/r²)• 2 क्षेत्र रेखाएं कभी नहीं काटतीं2. विद्युत द्विध्रुव (Dipole)आघूर्ण एवं विद्युत क्षेत्र• द्विध्रुव आघूर्ण p = q(2a):दिशा: -q से +q की ओर (C m)• अक्षीय क्षेत्र (r >> a):E_axial = (1/4πε₀) (2p / r³)• निरक्षीय क्षेत्र (r >> a):E_equatorial = (1/4πε₀) (p / r³)• E_axial = 2 x E_equatorial• बल आघूर्ण τ = p x E = pE sinθ• स्थितिज ऊर्जा U = -pE cosθ3. गाउस का नियम व अनुप्रयोगविद्युत फ्लक्स प्रमेय• गाउस नियम: ∮ E·dA = q_in/ε₀• 3 प्रमुख अनुप्रयोग:1. अनंत लंबा तार: E = λ / (2πε₀r)2. समतल अचालक चादर: E = σ / 2ε₀(दूरी r पर निर्भर नहीं करता)3. आवेशित गोलीय खोल:खोल के बाहर: E = (1/4πε₀)(q/r²)खोल के भीतर: E = 0 (परिरक्षण)• आकाशीय बिजली में कार सुरक्षितबोर्ड परीक्षा के प्रमुख संप्रत्यय (Golden Physics Capsule)कूलॉम बल माध्यम प्रभाव:F_m = F₀ / K; जल में बल 81 गुना घट जाता है, चालक (धातु) में शून्य हो जाता है।द्विध्रुव अक्षीय अनुपात:E_axial = 2 x E_equatorial; दोनों ही दूरियों के घन (r³) के व्युत्क्रमानुपाती होते हैं।गोलीय खोल व परिरक्षण:चालक गोलीय खोल के भीतर q_in = 0 अतः E = 0 (Electrostatic Shielding)।

Chapter Summary & 10 Key Takeaways

Takeaway 1
वैद्युत आवेश द्रव्य का मूलभूत गुण है; इसके तीन मूल गुण हैं: योज्यता, संरक्षण, तथा क्वांटीकरण (q = ±ne)।
Takeaway 2
कूलॉम के नियम के अनुसार दो स्थिर बिंदु आवेशों के मध्य बल F = (1/4πε₀) (|q₁q₂| / r²) होता है।
Takeaway 3
माध्यम का परावैद्युतांक K = F₀ / F_m होता है; जल के लिए K=81 तथा धातुओं के लिए K=∞ होता है।
Takeaway 4
विद्युत क्षेत्र की तीव्रता E = F/q₀ (SI मात्रक N/C या V/m) एक सदिश राशि है।
Takeaway 5
दो विद्युत क्षेत्र रेखाएं कभी एक-दूसरे को नहीं काटतीं और न ही बंद लूप बनाती हैं।
Takeaway 6
विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण p = q(2a) की दिशा सदैव -q से +q की ओर होती है।
Takeaway 7
लघु द्विध्रुव के लिए अक्षीय क्षेत्र E_axial = 2kp/r³ तथा निरक्षीय क्षेत्र E_equatorial = kp/r³ (E_axial = 2 E_equatorial)।
Takeaway 8
एकसमान विद्युत क्षेत्र में द्विध्रुव पर नेट बल शून्य होता है, परंतु बल आघूर्ण τ = pE sinθ लगता है।
Takeaway 9
गाउस के नियमानुसार किसी बंद पृष्ठ से निर्गत कुल विद्युत फ्लक्स Φ_E = ∮ E·dA = q_in / ε₀ होता है।
Takeaway 10
गाउस अनुप्रयोग: अनंत लंबे तार हेतु E = λ/(2πε₀r), अनंत समतल चादर हेतु E = σ/(2ε₀), तथा गोलीय खोल के भीतर E = 0।

Check Your Understanding (Diagnostic Practice Questions)

Diagnostic questions testing core conceptual clarity. Answers are hidden initially — solve each problem first, then click to reveal the step-by-step verified solution.

1
वैद्युत आवेश के 'क्वांटीकरण' (Quantisation of Charge) से क्या तात्पर्य है? इसका गणितीय सूत्र लिखिए।
Reveal Answer & Explanation
Answer: आवेश के क्वांटीकरण का अर्थ है कि प्रकृति में किसी भी वस्तु पर कुल आवेश सदैव मूल आवेश (इलेक्ट्रॉनिक आवेश e = 1.6 x 10^-19 C) का एक पूर्ण गुणज होता है। इसका गणितीय सूत्र q = ±ne है जहाँ n = 1, 2, 3... एक पूर्णांक है।
2
दो विद्युत क्षेत्र रेखाएं एक-दूसरे को कभी क्यों नहीं काट सकतीं?
Reveal Answer & Explanation
Answer: क्योंकि यदि दो क्षेत्र रेखाएं एक बिंदु पर काटेंगी, तो उस कटान बिंदु पर दो स्पर्श रेखाएं खींची जा सकेंगी, जिसका अर्थ होगा कि उस एक ही बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की दो भिन्न दिशाएं हैं, जो कि भौतिक रूप से असंभव है।
3
विद्युत द्विध्रुव के अक्षीय और निरक्षीय विद्युत क्षेत्र में क्या संबंध होता है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: समान दूरी r (जहाँ r >> a) पर विद्युत द्विध्रुव का अक्षीय विद्युत क्षेत्र उसके निरक्षीय विद्युत क्षेत्र का ठीक दोगुना होता है: E_axial = 2 x E_equatorial।
4
गाउस का नियम (Gauss's Law) लिखिए।
Reveal Answer & Explanation
Answer: किसी बंद काल्पनिक पृष्ठ (गाउसीय पृष्ठ) से गुजरने वाला कुल वैद्युत फ्लक्स उस बंद पृष्ठ द्वारा परिबद्ध कुल नेट आवेश का 1/ε₀ गुना होता है: ∮ E·dA = q_in / ε₀।
5
आकाशीय बिजली चमकते समय खुले मैदान में खड़े रहने के बजाय कार के भीतर बैठे रहना क्यों अधिक सुरक्षित होता है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: क्योंकि कार की धात्विक बॉडी एक आवेशित खोखले चालक (गोलीय खोल) की भांति कार्य करती है जिसके भीतर विद्युत क्षेत्र सदैव शून्य (E = 0) होता है। इसे स्थिरवैद्युत परिरक्षण (Electrostatic Shielding) कहते हैं, जिससे भीतर बैठे व्यक्ति को करंट नहीं लगता।
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