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JAC • Class XII • Physics • Ch 6
Estimated Time: 45 Mins
Study Progress: In Progress

Electromagnetic Induction

सन् 1831 में माइकल फैराडे द्वारा की गई विद्युतचुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) की खोज मानव सभ्यता के इतिहास के सबसे क्रांतिकारी वैज्ञानिक आविष्कारों में से एक है। यदि गतिमान आवेश चुंबकीय क्षेत्र पैदा कर सकते हैं, तो क्या चुंबकीय क्षेत्र से विद्युत धारा पैदा की जा सकती है? फैराडे ने सिद्ध किया कि जब भी किसी बंद चालक परिपथ से बद्ध चुंबकीय फ्लक्स ($\Phi_B = \int \vec{B}\cdot d\vec{A}$, मात्रक वेबर) में समय के साथ परिवर्तन होता है, तो परिपथ में एक प्रेरित विद्युत वाहक बल (Induced EMF) और प्रेरित धारा उत्पन्न हो जाती है। फैराडे का द्वितीय नियम ($\mathcal{E} = -N \frac{d\Phi_B}{dt}$) इस प्रेरित विभवांतर की समय दर निर्धारित करता है। ऋण चिह्न की भौतिक व्याख्या लेंज के नियम द्वारा होती है—प्रेरित धारा सदैव उस कारण का विरोध करती है जिससे वह स्वयं उत्पन्न हुई है, जो कि ऊर्जा संरक्षण के सार्वभौमिक नियम का प्रत्यक्ष और अकाट्य प्रमाण है। चुंबकीय क्षेत्र में गतिमान चालक में उत्पन्न गतिक विद्युत वाहक बल ($\mathcal{E} = Bvl$), घूर्णन करती छड़ में $\mathcal{E} = \frac{1}{2}B\omega l^2$, तथा ठोस धातु खंडों में चक्करदार भंवर धाराएं (Eddy Currents) इस सिद्धांत के गतिशील विस्तार हैं। परिपथों के वैद्युत जड़त्व (Electrical Inertia) को व्यक्त करने वाला स्वप्रेरकत्व ($L$, परिनालिका $L = \mu_0 n^2 A l$, संचित ऊर्जा $U = \frac{1}{2}LI^2$) तथा दो कुंडलियों के बीच अन्योन्य प्रेरकत्व ($M$) ट्रांसफॉर्मर और मोटरों का आधार बनते हैं। अंततः, यांत्रिक ऊर्जा को ज्यावक्रीय प्रत्यावर्ती विद्युत में बदलने वाला AC जनित्र (Alternator: $\mathcal{E} = \mathcal{E}_0 \sin\omega t$) इस अध्याय का सर्वप्रमुख औद्योगिक अनुप्रयोग है।

बुलेट ट्रेन 300 किमी/घंटा की गति से दौड़ते हुए बिना किसी घर्षण और बिना पहियों को छुए कैसे रुक जाती है?

सामान्य कारों और बसों में ब्रेक दबाने पर ब्रेक पैड पहियों से रगड़ खाते हैं, जिससे भयानक गर्मी और घिसावट पैदा होती है। परंतु 300 किमी/घंटे से अधिक रफ्तार से दौड़ने वाली जापानी शिंकानसेन (बुलेट ट्रेन) के पास जब रुकने का समय आता है, तो कोई पहिया किसी धातु से नहीं घिसता! इसके बजाय पहियों के पास लगे शक्तिशाली विद्युत चुंबकों को सक्रिय कर दिया जाता है। घूमती हुई धातु की भारी डिस्क में क्षण भर में 'भंवर धाराएं' (Eddy Currents) पैदा हो जाती हैं जो लेंज के नियमानुसार पहियों के घूमने का प्रचंड चुंबकीय विरोध करती हैं और विशाल ट्रेन बिना एक भी चिंगारी निकले मक्खन की तरह रुक जाती है! यह है फैराडे और लेंज के विद्युतचुंबकीय प्रेरण का विस्मयकारी जादू!

Why This Chapter Matters

JAC और CBSE कक्षा 12वीं भौतिकी बोर्ड परीक्षा में 'विद्युतचुंबकीय प्रेरण' अत्यंत उच्च अंक-भार वाली इकाई है। फैराडे के दोनों नियमों का कथन, लेंज का नियम और इसका ऊर्जा संरक्षण से संबंध (सिद्ध करने हेतु 3 अंकों का प्रश्न), गतिक विद्युत वाहक बल ($\mathcal{E} = Bvl$) का निगमन एवं ऊर्जा रूपांतरण की पुष्टि, भंवर धाराएं (परिभाषा, हानियां, पटलित क्रोड एवं 3 उपयोग—चुंबकीय ब्रेक, प्रेरण भट्टी, रुद्धदोल गैल्वेनोमीटर), स्वप्रेरकत्व व अन्योन्य प्रेरकत्व की परिभाषाएं, मात्रक हेनरी, लंबी परिनालिका के स्वप्रेरकत्व का सूत्र ($L = \mu_0 n^2 Al$) व संचित ऊर्जा ($U = \frac{1}{2}LI^2$), तथा AC जनित्र का संपूर्ण सचित्र सिद्धांत व कार्यविधि ($\mathcal{E} = NBA\omega\sin\omega t$) पर प्रतिवर्ष 5 अंकों का दीर्घ-उत्तरीय प्रश्न शत-प्रतिशत पूछा जाता है।

Before You Begin (Prerequisites)

  • चुंबकीय क्षेत्र ($\u000bec{B}$), बायो-सावर्ट नियम तथा परिनालिका के चुंबकीय क्षेत्र ($B = \mu_0 n I$) का ज्ञान।
  • कार्य, शक्ति, ऊर्जा संरक्षण तथा घूर्णी गतििकी ($\omega$) की अवधारणा।
  • अवकलन (Differentiation: $\frac{d}{dt}\cos\omega t = -\omega\sin\omega t$) की प्राथमिक समझ।

What You Will Learn (Core Objectives)

  • चुंबकीय फ्लक्स की परिभाषा, सूत्र व मात्रक वेबर को स्पष्ट करना तथा फैराडे के प्रेरण के नियमों का गणितीय निरूपण करना।
  • लेंज के नियम की व्याख्या करना और सिद्ध करना कि यह ऊर्जा संरक्षण के नियम का पालन करता है।
  • गतिक विद्युत वाहक बल ($\mathcal{E} = Bvl$) एवं घूर्णनशील छड़ के EMF का निगमन करना तथा शक्ति संरक्षण की पुष्टि करना।
  • भंवर धाराओं की उत्पत्ति, क्रोड को पटलित करने का कारण और इसके व्यावहारिक अनुप्रयोगों का विश्लेषण करना।
  • स्वप्रेरण व अन्योन्य प्रेरण के सूत्रों का निगमन करना तथा AC जनरेटर के सिद्धांत, संरचना व कार्यविधि का संपूर्ण वर्णन करना।

Chapter Roadmap & Progression

1 1. चुंबकीय फ्लक्स एवं फैराडे के विद...
2 2. लेंज का नियम एवं ऊर्जा संरक्षण क...
3 3. गतिक विद्युत वाहक बल एवं भंवर धा...
4 4. स्वप्रेरण, अन्योन्य प्रेरण एवं स...
5 5. प्रत्यावर्ती धारा जनित्र (AC Gen...

Complete Concept Guide (100% Curriculum Coverage)

1. चुंबकीय फ्लक्स एवं फैराडे के विद्युतचुंबकीय प्रेरण के नियम

1.1 चुंबकीय फ्लक्स (Magnetic Flux - $\Phi_B$)

किसी चुंबकीय क्षेत्र में स्थित किसी काल्पनिक अथवा वास्तविक पृष्ठ से अभिलंबवत गुजरने वाली चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की कुल संख्या की माप को चुंबकीय फ्लक्स कहते हैं:

$$\mathbf{\Phi_B = \int_A \vec{B}\cdot d\vec{A} = B A \cos\theta}$$• $\theta$: चुंबकीय क्षेत्र $\vec{B}$ तथा तल के अभिलंब सदिश $d\vec{A}$ के बीच का कोण।
• प्रकृति: अदिश राशि।
• SI मात्रक: टेस्ला-मीटर$^2$ ($\text{T}\cdot\text{m}^2$) अथवा वेबर (Weber - Wb)। ($1\text{ Wb} = 1\text{ V}\cdot\text{s} = 10^8\text{ Maxwell}$)।
• विमीय सूत्र: $[ML^2T^{-2}A^{-1}]$।

1.2 फैराडे के विद्युतचुंबकीय प्रेरण के दो नियम (Faraday's Laws)

प्रथम नियम (गुणात्मक नियम - Qualitative Rule):
जब कभी किसी बंद परिपथ अथवा कुंडली से बद्ध चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है, तो परिपथ में एक विद्युत वाहक बल (Induced EMF) प्रेरित हो जाता है। यदि परिपथ बंद हो, तो उसमें एक प्रेरित धारा बहने लगती है। यह प्रेरित EMF केवल तब तक रहता है जब तक कि चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता रहता है。

द्वितीय नियम (परिमाणात्मक नियम - Quantitative Rule):
परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल ($\mathcal{E}$) का परिमाण, परिपथ से बद्ध चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की समय दर (ऋणात्मक दर) के अनुक्रमानुपाती होता है:
$$\mathbf{\mathcal{E} = -\frac{d\Phi_B}{dt}}$$
यदि कुंडली में फेरों की संख्या $N$ हो, तो कुल प्रेरित विद्युत वाहक बल:
$$\mathbf{\mathcal{E} = -N \frac{d\Phi_B}{dt}} = -N \frac{\Phi_2 - \Phi_1}{\Delta t}$$जहाँ ऋण चिह्न (Negative sign) लेंज के नियम को निरूपित करता है।

2. लेंज का नियम एवं ऊर्जा संरक्षण का सिद्धांत

2.1 लेंज का नियम (Lenz's Law)

सन् 1834 में रूसी भौतिकशास्त्री हेनरिक लेंज ने प्रेरित धारा की दिशा निर्धारित करने हेतु एक सार्वभौमिक नियम प्रतिपादित किया:

कथन: विद्युतचुंबकीय प्रेरण की प्रत्येक अवस्था में प्रेरित विद्युत वाहक बल अथवा प्रेरित धारा की दिशा सदैव ऐसी होती है कि वह उस कारण का विरोध करती है जिससे वह स्वयं उत्पन्न हुई है।

प्रायोगिक उदाहरण:1. जब किसी चुंबक के उत्तरी ध्रुव ($N$) को कुंडली के पास लाते हैं, तो कुंडली का सम्मुख फलक उत्तरी ध्रुव ($N$) बन जाता है (वामावर्त धारा), जिससे वह चुंबक की गति का प्रतिकर्षण द्वारा विरोध करता है।
2. जब चुंबक के उत्तरी ध्रुव को कुंडली से दूर ले जाते हैं, तो सम्मुख फलक दक्षिणी ध्रुव ($S$) बन जाता है (दक्षिणावर्त धारा), जिससे वह चुंबक को दूर जाने से रोकने हेतु आकर्षण द्वारा विरोध करता है।

2.2 लेंज का नियम एवं ऊर्जा संरक्षण (Lenz's Law & Conservation of Energy)

सिद्ध करना कि लेंज नियम ऊर्जा संरक्षण पर आधारित है:
• जब हम चुंबक को कुंडली की ओर ले जाते हैं, तो उत्पन्न प्रतिकर्षण बल के विरुद्ध हमें यांत्रिक कार्य (Mechanical Work) करना पड़ता है。
• इसी प्रकार, चुंबक को दूर ले जाते समय आकर्षण बल के विरुद्ध यांत्रिक कार्य करना पड़ता है。
• कर्ता द्वारा किया गया यही यांत्रिक कार्य परिपथ में वैद्युत ऊर्जा (Electrical Energy) के रूप में प्रकट होता है, जो अंततः जूल ऊष्मा ($I^2Rt$) बनकर विकरित हो जाता है。
• यदि लेंज का नियम सत्य न होता: तो चुंबक को थोड़ा सा धक्का देने पर आकर्षण बल स्वतः बढ़ता चला जाता और बिना कोई ऊर्जा खर्च किए अनंत विद्युत ऊर्जा पैदा होने लगती, जो कि ऊर्जा संरक्षण नियम का घोर उल्लंघन होता!
अतः लेंज का नियम ऊर्जा संरक्षण के सार्वभौमिक नियम का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

3. गतिक विद्युत वाहक बल एवं भंवर धाराएं (Motional EMF & Eddy Currents)

3.1 गतिक विद्युत वाहक बल (Motional EMF)

जब $l$ लंबाई का एक चालक एकसमान चुंबकीय क्षेत्र $B$ में $v$ वेग से क्षेत्र के लंबवत गति करता है:

  • चालक के भीतर मुक्त इलेक्ट्रॉनों पर चुंबकीय लॉरेंट्ज बल: $F_m = e v B$ (एक सिरे की ओर)
  • आवेशों के जमाव से उत्पन्न विद्युत बल: $F_e = e E$
  • साम्यावस्था में: $e E = e v B \implies E = v B$
  • चालक के सिरों के बीच उत्पन्न विभवांतर (गतिक EMF):$$\mathbf{\mathcal{E} = E \cdot l = B v l}$$
  • यदि परिपथ का प्रतिरोध $R$ हो, तो प्रेरित धारा: $I = \frac{\mathcal{E}}{R} = \frac{Bvl}{R}$
  • चालक को नियत वेग से खींचने हेतु आवश्यक बाह्य बल: $F = I l B = \frac{B^2 l^2 v}{R}$
  • शक्ति संरक्षण: यांत्रिक शक्ति $P_{\text{mech}} = F v = \frac{B^2 l^2 v^2}{R} = I^2 R = P_{\text{elec}}$ (यांत्रिक शक्ति = वैद्युत ऊष्मीय शक्ति)।
  • घूर्णन करती छड़ में EMF: एक सिरा स्थिर रखकर $\omega$ कोणीय वेग से घुमाने पर: $\mathbf{\mathcal{E} = \frac{1}{2} B \omega l^2}$।

3.2 भंवर धाराएं (Eddy Currents / Foucault Currents)

परिभाषा: जब किसी धातु के बड़े ठोस टुकड़े से बद्ध चुंबकीय फ्लक्स में तीव्र परिवर्तन होता है, तो धातु के संपूर्ण आयतन में जल में उठने वाले भंवरों के समान चक्करदार प्रेरित धाराएं उत्पन्न हो जाती हैं। इन धाराओं को भंवर धाराएं कहते हैं (खोजकर्ता: फोको, 1895)।

भंवर धाराओं की हानियां एवं निवारण:भंवर धाराओं का प्रतिरोध बहुत कम होने के कारण इनका मान विशाल होता है, जिससे ट्रांसफॉर्मर, मोटर और डायनेमो के क्रोड में भारी मात्रा में विद्युत ऊर्जा ऊष्मा के रूप में व्यर्थ नष्ट हो जाती है।
• निवारण: क्रोड को एक ठोस ब्लॉक बनाने के बजाय पटलित क्रोड (Laminated Core) बनाया जाता है—अर्थात लोहे की पतली-पतली पत्तियों को वार्निश की विद्युतरोधी परत द्वारा परस्पर चिपका दिया जाता है, जिससे भंवर धाराओं का परिपथ टूट जाता है और ऊर्जा हानि न्यूनतम हो जाती है।

भंवर धाराओं के 4 प्रमुख उपयोगी अनुप्रयोग:

  1. रेलगाड़ियों में चुंबकीय ब्रेक (Magnetic Braking in Trains): पहियों के पास विद्युत चुंबक चालू करते ही उत्पन्न भंवर धाराएं ट्रेन को बिना घिसावट के रोक देती हैं।
  2. प्रेरण भट्टी (Induction Furnace): अत्यधिक तीव्र भंवर धाराओं द्वारा उत्पन्न ऊष्मा से धातुओं को पिघलाया जाता है।
  3. रुद्धदोल गैल्वेनोमीटर (Dead Beat Galvanometer): तांबे के फ्रेम पर कुंडली लपेटने से भंवर धाराएं सुई को तुरंत विराम में ला देती हैं।
  4. विद्युत ऊर्जा मीटर (Energy Meter): घरों में लगे मीटर की एल्युमिनियम चकती भंवर धाराओं द्वारा घूमती है।

4. स्वप्रेरण, अन्योन्य प्रेरण एवं संचित चुंबकीय ऊर्जा

4.1 स्वप्रेरण एवं स्वप्रेरकत्व (Self-Induction - $L$)

जब किसी कुंडली में प्रवाहित धारा में परिवर्तन किया जाता है, तो स्वयं उसी कुंडली से बद्ध चुंबकीय फ्लक्स बदलता है, जिससे उसी कुंडली में एक विरोधी प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न हो जाता है। इस परिघटना को स्वप्रेरण कहते हैं।

  • कुंडली का चुंबकीय फ्लक्स धारा के समानुपाती होता है: $\Phi_B \propto I \implies \mathbf{\Phi_B = L I}$
  • फैराडे के नियम से स्व-प्रेरित EMF:$$\mathbf{\mathcal{E} = -L \frac{dI}{dt}}$$जहाँ $L$ कुंडली का स्वप्रेरकत्व (Self-Inductance) अथवा स्वप्रेरण गुणांक है।
    • SI मात्रक: हेनरी (Henry - H) ($\text{H} = \text{Wb/A} = \text{V}\cdot\text{s/A}$)।
    • वैद्युत जड़त्व (Electrical Inertia): स्वप्रेरकत्व परिपथ में धारा की वृद्धि अथवा कमी दोनों का विरोध करता है; अतः इसे परिपथ का वैद्युत जड़त्व कहते हैं।
  • लंबी परिनालिका का स्वप्रेरकत्व:$$\mathbf{L = \mu_0 n^2 A l = \frac{\mu_0 N^2 A}{l}} \quad (\text{क्रोड की आपेक्षिक चुंबकशीलता } \mu_r \text{ होने पर } L = \mu_r L_0)$$
  • प्रेरक में संचित चुंबकीय स्थितिज ऊर्जा (Magnetic Energy):$$\mathbf{U = \frac{1}{2} L I^2} \quad \text{तथा चुंबकीय ऊर्जा घनत्व } \mathbf{u_B = \frac{B^2}{2\mu_0}}$$

4.2 अन्योन्य प्रेरण एवं अन्योन्य प्रेरकत्व (Mutual Induction - $M$)

जब पास-पास रखी दो कुंडलियों में से प्राथमिक कुंडली ($P$) में प्रवाहित धारा में परिवर्तन किया जाता है, तो द्वितीयक कुंडली ($S$) से बद्ध फ्लक्स बदलने के कारण द्वितीयक कुंडली में प्रेरित EMF उत्पन्न हो जाता है। इसे अन्योन्य प्रेरण कहते हैं।

$$\Phi_2 = M I_1 \implies \mathbf{\mathcal{E}_2 = -M \frac{dI_1}{dt}}$$

• दो समाक्षीय परिनालिकाओं का अन्योन्य प्रेरकत्व:$$\mathbf{M = \frac{\mu_0 N_1 N_2 A}{l} = \mu_0 n_1 n_2 A l}$$युग्मन गुणांक $k = \frac{M}{\sqrt{L_1 L_2}}$ ($0 \le k \le 1$)।

5. प्रत्यावर्ती धारा जनित्र (AC Generator / Alternator)

5.1 AC जनित्र का कार्य सिद्धांत एवं संरचना

सिद्धांत: विद्युतचुंबकीय प्रेरण के सिद्धांत पर आधारित वह युक्ति जो यांत्रिक ऊर्जा को प्रत्यावर्ती वैद्युत ऊर्जा में रूपांतरित करती है।

  • चार मुख्य भाग:
    1. क्षेत्र चुंबक (Field Magnet): शक्तिशाली विद्युत चुंबक अथवा स्थायी चुंबक ($N-S$) जो एकसमान चुंबकीय क्षेत्र $\vec{B}$ उत्पन्न करता है।
    2. आर्मेचर (Armature): नर्म लोहे के क्रोड पर तांबे के विद्युतरोधी तारों के $N$ फेरों वाली आयताकार कुंडली $ABCD$।
    3. सर्पी वलय (Slip Rings - $R_1, R_2$): पीतल के दो छल्ले जो आर्मेचर के सिरों से जुड़े होते हैं और धुरी के साथ घूमते हैं।
    4. कार्बन ब्रश ($B_1, B_2$): स्थिर कार्बन के गुटके जो सर्पी वलयों को स्पर्श करते हैं और बाह्य परिपथ में धारा भेजते हैं।

5.2 प्रेरित विद्युत वाहक बल का संपूर्ण गणितीय निगमन

माना $N$ फेरों तथा $A$ क्षेत्रफल वाली कुंडली को एकसमान चुंबकीय क्षेत्र $B$ में एक नियत कोणीय वेग $\omega$ से घुमाया जाता है।

  • समय $t$ पर कुंडली के तल के अभिलंब तथा $\vec{B}$ के बीच कोण: $\theta = \omega t$
  • इस क्षण कुंडली से बद्ध कुल चुंबकीय फ्लक्स:$$\Phi_B = N B A \cos\theta = N B A \cos(\omega t)$$
  • फैराडे के विद्युतचुंबकीय प्रेरण के नियमानुसार प्रेरित EMF:$$\mathcal{E} = -\frac{d\Phi_B}{dt} = -\frac{d}{dt} [N B A \cos(\omega t)] = -N B A [-\omega \sin(\omega t)]$$$$\mathbf{\mathcal{E} = N B A \omega \sin(\omega t)}$$$$\mathbf{\mathcal{E} = \mathcal{E}_0 \sin(\omega t)}$$जहाँ $\mathbf{\mathcal{E}_0 = N B A \omega = 2\pi \nu N B A}$ प्रेरित EMF का शिखर मान (Peak Value) है।
  • यदि परिपथ का कुल प्रतिरोध $R$ हो, तो प्रेरित प्रत्यावर्ती धारा:$$\mathbf{I = \frac{\mathcal{E}}{R} = \frac{\mathcal{E}_0}{R} \sin(\omega t) = I_0 \sin(\omega t)}$$
निष्कर्ष: विद्युत वाहक बल और धारा समय के साथ ज्यावक्रीय (Sinusoidally) बदलते हैं; आधे चक्र में धारा एक दिशा में तथा शेष आधे चक्र में विपरीत दिशा में बहती है। इसी को प्रत्यावर्ती धारा (Alternating Current - AC) कहते हैं।

Key Formulas, Laws & Physical Constants

चुंबकीय फ्लक्स
_B = {B}· d{A} = B A (मात्रक: Weber - Wb)
फैराडे का द्वितीय नियम
$$\mathcal{E} = -N \frac{d\Phi_B}{dt} = -N \frac{\Delta\Phi}{\Delta t}$$
गतिक विद्युत वाहक बल
{E} = B v l ({v} {B} {l} होने पर)
घूर्णनशील छड़ का EMF
$$\mathcal{E} = \frac{1}{2} B \omega l^2 = B \pi l^2 \nu$$
गतिक वैद्युत शक्ति
P = F v = {B^2 l^2 v^2}{R} = I^2 R (यांत्रिक शक्ति = वैद्युत शक्ति)
स्वप्रेरित EMF
{E} = -L {dI}{dt} (_B = L I, मात्रक: Henry - H)
परिनालिका का स्वप्रेरकत्व
$$L = \mu_0 n^2 A l = \frac{\mu_0 N^2 A}{l}$$
प्रेरक में संचित ऊर्जा
$$U = \frac{1}{2} L I^2; \quad u_B = \frac{B^2}{2\mu_0}$$
अन्योन्य प्रेरित EMF
$$\mathcal{E}_2 = -M \frac{dI_1}{dt} \quad (\Phi_2 = M I_1)$$
दो परिनालिकाओं का M
$$M = \frac{\mu_0 N_1 N_2 A}{l} = \mu_0 n_1 n_2 A l$$
AC जनरेटर प्रेरित EMF
$$\mathcal{E} = \mathcal{E}_0 \sin(\omega t) \quad (\mathcal{E}_0 = N B A \omega = 2\pi\nu N B A)$$
भंवर धारा निवारण
क्रोड को पटलित (Laminated) बनाना; अनुप्रयोग: चुंबकीय ब्रेक, प्रेरण भट्टी

Conceptual Solved Examples & Case Studies

Example 1
एक 50 फेरों वाली कुंडली से बद्ध चुंबकीय फ्लक्स समीकरण $\Phi_B = (2t^3 - 4t^2 + 6t + 10)\text{ Wb}$ के अनुसार बदलता है। $t = 2\text{ सेकंड}$ पर कुंडली में प्रेरित विद्युत वाहक बल ($\mathcal{E}$) का मान ज्ञात कीजिए।
Step-by-Step Solution:
दिया है:
फेरों की संख्या $N = 50$
फ्लक्स $\Phi_B = 2t^3 - 4t^2 + 6t + 10$
समय $t = 2\text{ s}$

सूत्र:
फैराडे के नियमानुसार प्रेरित विद्युत वाहक बल:
$$\mathcal{E} = -N \frac{d\Phi_B}{dt}$$
गणना:
$$\frac{d\Phi_B}{dt} = \frac{d}{dt}(2t^3 - 4t^2 + 6t + 10) = 6t^2 - 8t + 6$$
$t = 2\text{ s}$ पर मान रखने पर:
$$\left. \frac{d\Phi_B}{dt} \right|_{t=2} = 6(2)^2 - 8(2) + 6 = 6(4) - 16 + 6 = 24 - 16 + 6 = 14\text{ Wb/s}$$
अतः प्रेरित विद्युत वाहक बल:
$$\mathcal{E} = -50 \times 14 = \mathbf{-700\text{ Volt}}$$
उत्तर: $t = 2\text{ s}$ पर प्रेरित विद्युत वाहक बल का परिमाण $\mathbf{700\text{ V}}$ है।
Example 2
$1.0\text{ m}$ लंबी धातु की एक छड़ $0.5\text{ T}$ के एकसमान क्षैतिज चुंबकीय क्षेत्र में $10\text{ m/s}$ की चाल से क्षेत्र के लंबवत गति कर रही है। (a) छड़ के सिरों के बीच प्रेरित विभवांतर ज्ञात कीजिए। (b) यदि छड़ का प्रतिरोध $2\text{ }\Omega$ हो और परिपथ बंद हो, तो प्रवाहित धारा तथा आवश्यक यांत्रिक शक्ति की गणना कीजिए।
Step-by-Step Solution:
दिया है:
लंबाई $l = 1.0\text{ m}$
चुंबकीय क्षेत्र $B = 0.5\text{ T}$
चाल $v = 10\text{ m/s}$
प्रतिरोध $R = 2\text{ }\Omega$

(a) प्रेरित विभवांतर (गतिक EMF):
$$\mathcal{E} = B v l = (0.5\text{ T}) \times (10\text{ m/s}) \times (1.0\text{ m}) = \mathbf{5.0\text{ Volt}}$$

(b) प्रेरित धारा ($I$) एवं यांत्रिक शक्ति ($P$):
$$I = \frac{\mathcal{E}}{R} = \frac{5.0\text{ V}}{2\text{ }\Omega} = \mathbf{2.5\text{ Ampere}}$$
छड़ पर लगने वाला चुंबकीय बल: $F = I l B = (2.5) \times (1.0) \times (0.5) = 1.25\text{ N}$
आवश्यक यांत्रिक शक्ति: $P = F v = (1.25\text{ N}) \times (10\text{ m/s}) = \mathbf{12.5\text{ Watt}}$
जांच: वैद्युत ऊष्मीय शक्ति $I^2 R = (2.5)^2 \times 2 = 6.25 \times 2 = 12.5\text{ W}$ (ऊर्जा संरक्षित है)।
Example 3
लेंज का नियम लिखिए तथा स्पष्ट कीजिए कि यह किस प्रकार ऊर्जा संरक्षण के नियम का पालन करता है?
Step-by-Step Solution:
लेंज का नियम (Lenz's Law):
विद्युतचुंबकीय प्रेरण के कारण किसी परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल अथवा प्रेरित धारा की दिशा सदैव ऐसी होती है कि वह उस कारण का विरोध करती है जिसके द्वारा वह स्वयं उत्पन्न होती है。

ऊर्जा संरक्षण के नियम से संगति का प्रमाण:
1. प्रायोगिक स्थिति: माना एक चुंबक के उत्तरी ध्रुव ($N$) को एक चालक कुंडली के समीप लाया जाता है।
2. लेंज के नियमानुसार, कुंडली के सामने वाले फलक पर वामावर्त दिशा में धारा प्रेरित होती है जिससे वह फलक भी उत्तरी ध्रुव ($N$) बन जाता है।
3. सजातीय ध्रुव होने के कारण दोनों के बीच एक चुंबकीय प्रतिकर्षण बल कार्य करता है।
4. चुंबक को कुंडली की ओर ले जाने हेतु बाह्य कर्ता को इस प्रतिकर्षण बल के विरुद्ध यांत्रिक कार्य (Mechanical Work) करना पड़ता है।
5. कर्ता द्वारा खर्च की गई यही यांत्रिक ऊर्जा कुंडली में वैद्युत ऊर्जा के रूप में रूपांतरित होती है, जिससे परिपथ में धारा प्रवाहित होती है तथा प्रतिरोध में ऊष्मा ($I^2Rt$) उत्पन्न होती है。
6. विपरीत स्थिति की कल्पना: यदि लेंज का नियम न होता और पास लाने पर दक्षिणी ध्रुव बनता, तो चुंबक आकर्षण के कारण स्वतः त्वरित होता और बिना किसी ऊर्जा खर्च के निरंतर विद्युत ऊर्जा उत्पन्न होती रहती, जो कि असंभव है。
अतः लेंज का नियम ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत का पूर्णतः पालन करता है।
Example 4
भंवर धाराएं (Eddy Currents) क्या हैं? इनके दो उपयोग तथा दो हानियां लिखिए। ट्रांसफॉर्मर के क्रोड में इन्हें कम करने का उपाय बताइए।
Step-by-Step Solution:
भंवर धाराएं:
जब किसी धातु के विशाल टुकड़े या चालक ब्लॉक से गुजरने वाले चुंबकीय फ्लक्स में समय के साथ परिवर्तन होता है, तो धातु के भीतर बंद चक्रों के रूप में शक्तिशाली प्रेरित धाराएं उत्पन्न हो जाती हैं। इन धाराओं को भंवर धाराएं (फोको धाराएं) कहते हैं。

दो प्रमुख हानियां:
1. ऊर्जा का अपव्यय: ट्रांसफॉर्मर, जनरेटर तथा विद्युत मोटरों के क्रोड में विशाल भंवर धाराओं के कारण वैद्युत ऊर्जा व्यर्थ ऊष्मा में बदल जाती है।
2. अत्यधिक तापन: उपकरणों के क्रोड अत्यधिक गर्म हो जाते हैं, जिससे उनका विद्युतरोधन (Insulation) जलने का खतरा रहता है。

हानियों को कम करने का उपाय:
क्रोड को लोहे के एक ठोस टुकड़े के रूप में न बनाकर पटलित क्रोड (Laminated Core) बनाया जाता है—अर्थात पतली-पतली धातु पत्तियों (Laminations) पर वार्निश की अचालक परत चढ़ाकर उन्हें एक साथ जोड़ा जाता है। इससे भंवर धाराओं का वृत्ताकार पथ टूट जाता है और ऊर्जा हानि नगण्य हो जाती है。

दो प्रमुख उपयोग:
1. रेलगाड़ियों में चुंबकीय ब्रेक (Magnetic Braking in Trains): पहिए के पास चुंबकीय क्षेत्र लगाने पर भंवर धाराएं पहिए की गति का तीव्र विरोध करके बिना घिसावट के ट्रेन को रोक देती हैं।
2. प्रेरण भट्टी (Induction Furnace): उच्च आवृत्ति की भंवर धाराओं से उत्पन्न तीव्र ऊष्मा द्वारा धातुओं को पिघलाया जाता है।
Example 5
एक प्रत्यावर्ती धारा जनित्र (AC Generator) का नामांकित रेखाचित्र बनाइए तथा इसके द्वारा उत्पन्न प्रेरित विद्युत वाहक बल के तात्क्षणिक मान का व्यंजक ($e = e_0 \sin\omega t$) निगमित कीजिए।
Step-by-Step Solution:
AC जनित्र का सिद्धांत:
जब किसी आयताकार कुंडली को एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में एक अक्ष के परितः घुमाया जाता है, तो कुंडली से बद्ध चुंबकीय फ्लक्स लगातार बदलता है, जिससे उसमें ज्यावक्रीय प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है。

प्रेरित विद्युत वाहक बल का निगमन:
1. माना $N$ फेरों और $A$ क्षेत्रफल वाली आयताकार कुंडली एकसमान चुंबकीय क्षेत्र $B$ में नियत कोणीय वेग $\omega$ से घूम रही है。
2. $t = 0$ पर कुंडली का तल चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत है ($\theta = 0^\circ$)।
3. समय $t$ के पश्चात कुंडली $\theta = \omega t$ कोण घूम जाती है。
4. इस क्षण कुंडली से बद्ध कुल चुंबकीय फ्लक्स:
$$\Phi_B = N (\vec{B}\cdot\vec{A}) = N B A \cos(\omega t)$$
5. फैराडे के नियमानुसार कुंडली में उत्पन्न प्रेरित विद्युत वाहक बल:
$$\mathcal{E} = -\frac{d\Phi_B}{dt} = -\frac{d}{dt}[N B A \cos(\omega t)]$$
$$\mathcal{E} = -N B A [-\omega \sin(\omega t)] = \mathbf{N B A \omega \sin(\omega t)}$$
6. यदि शिखर मान $\mathcal{E}_0 = N B A \omega$ रख दिया जाए:
$$\mathbf{\mathcal{E} = \mathcal{E}_0 \sin(\omega t)}$$ (इति सिद्धम्)
जहाँ $\mathcal{E}_0 = 2\pi \nu N B A$ ($\nu$ आवृत्ति है)।

Common Misconceptions & Examiner Traps

Common Misconception

फैराडे के नियम में ऋण चिह्न छोड़ देना।

Scientific Reality & Correction

फैराडे के नियम में ऋण चिह्न ($\mathcal{E} = -d\Phi/dt$) अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह लेंज के नियम तथा ऊर्जा संरक्षण को प्रदर्शित करता है।

Common Misconception

लेंज के नियम को एक स्वतंत्र ऊर्जा स्रोत समझ लेना।

Scientific Reality & Correction

लेंज का नियम कोई ऊर्जा उत्पन्न नहीं करता; यह केवल यह बताता है कि यांत्रिक कार्य ही विद्युत ऊर्जा में रूपांतरित होता है।

Common Misconception

भंवर धाराओं को केवल हानिकारक मान लेना।

Scientific Reality & Correction

भंवर धाराएं चुंबकीय ब्रेक, प्रेरण भट्टी, तथा रुद्धदोल गैल्वेनोमीटर में अत्यंत उपयोगी और जीवनरक्षक अनुप्रयोग प्रदान करती हैं।

Common Misconception

स्वप्रेरकत्व $L$ को धारा $I$ पर निर्भर मान लेना।

Scientific Reality & Correction

स्वप्रेरकत्व केवल कुंडली की ज्यामिति (फेरों की संख्या $N$, क्षेत्रफल $A$, लंबाई $l$) तथा क्रोड की चुंबकशीलता ($\mu$) पर निर्भर करता है, धारा पर नहीं।

Common Misconception

AC जनरेटर में सर्पी वलयों (Slip rings) के स्थान पर विभक्त वलय (Split rings) लिख देना।

Scientific Reality & Correction

AC जनरेटर में दो पूर्ण 'सर्पी वलय' (Slip rings) होते हैं; जबकि DC जनरेटर/मोटर में 'विभक्त वलय' (Commutator) होते हैं।

विद्युतचुंबकीय प्रेरण: फैराडे नियम, लेंज ऊर्जा संरक्षण, स्वप्रेरण व AC जनित्र

विद्युतचुंबकीय प्रेरण: फैराडे व लेंज नियम, भंवर धाराएं, स्वप्रेरण व AC जनित्र1. फैराडे व लेंज का नियमफ्लक्स परिवर्तन व ऊर्जा• चुंबकीय फ्लक्स Φ_B = BA cosθSI मात्रक: Weber (Wb) = T m²• फैराडे नियम: ℰ = -N (dΦ_B / dt)फ्लक्स बदलने पर प्रेरित EMF• लेंज नियम = ऊर्जा संरक्षण:प्रेरित धारा उत्पत्ति कारण का विरोध करतीयांत्रिक कार्य = वैद्युत ऊष्मीय ऊर्जा• गतिक EMF ℰ = B v l• घूर्णन छड़: ℰ = ½ B ω l²2. भंवर धाराएं व स्वप्रेरणवैद्युत जड़त्व (L)• भंवर धाराएं (Eddy Currents):ठोस धातु में चक्करदार धाराएंनिवारण: पटलित क्रोड (Laminated)उपयोग: चुंबकीय ब्रेक, प्रेरण भट्टी• स्वप्रेरकत्व (L) मात्रक हेनरी (H):ℰ = -L (dI/dt); Φ_B = L I• परिनालिका L = μ₀ n² A l• संचित ऊर्जा U = ½ L I²• अन्योन्य M = μ₀ N₁N₂A / l3. AC जनित्र (Alternator)यांत्रिक से वैद्युत ऊर्जा• सिद्धांत: EMI का व्यावहारिक रूप• 4 अंग: चुंबक, आर्मेचर, वलय, ब्रश• फ्लक्स: Φ = NBA cos(ωt)• प्रेरित EMF निगमन:ℰ = -dΦ/dt = NBAω sin(ωt)ℰ = ℰ₀ sin(ωt)शिखर मान ℰ₀ = 2πν NBA• प्रेरित धारा I = I₀ sin(ωt)• सर्पी वलय (Slip Rings) प्रयुक्तबोर्ड परीक्षा के प्रमुख संप्रत्यय (Golden Electromagnetic Induction Capsule)लेंज का नियम:प्रेरित धारा विरोध करती है; यांत्रिक कार्य = वैद्युत ऊर्जा (ऊर्जा संरक्षण का प्रत्यक्ष प्रमाण)।भंवर धारा निवारण:पटलित क्रोड (Laminated Core) द्वारा; अनुप्रयोग: बुलेट ट्रेन ब्रेक व प्रेरण भट्टी।AC जनित्र समीकरण:ℰ = ℰ₀ sin(ωt); शिखर मान ℰ₀ = NBAω; सर्पी वलयों द्वारा AC प्राप्त होती है।

Chapter Summary & 10 Key Takeaways

Takeaway 1
चुंबकीय फ्लक्स Φ_B = BA cosθ (अदिश, मात्रक वेबर Wb = T m² = V s) होता है।
Takeaway 2
फैराडे का प्रथम नियम: फ्लक्स बदलने पर प्रेरित EMF उत्पन्न होता है जो फ्लक्स परिवर्तन तक रहता है।
Takeaway 3
फैराडे का द्वितीय नियम: ℰ = -N (dΦ_B / dt); प्रेरित विभवांतर फ्लक्स परिवर्तन दर के समानुपाती होता है।
Takeaway 4
लेंज का नियम: प्रेरित धारा सदैव उस कारण का विरोध करती है जिससे वह स्वयं उत्पन्न हुई है।
Takeaway 5
लेंज का नियम 'ऊर्जा संरक्षण' का सीधा प्रमाण है (यांत्रिक कार्य वैद्युत ऊर्जा में बदलता है)।
Takeaway 6
गतिक विद्युत वाहक बल ℰ = Bvl तथा घूर्णन करती छड़ में ℰ = ½Bωl² होता है।
Takeaway 7
भंवर धाराएं धातु के ठोस टुकड़ों में उत्पन्न चक्करदार धाराएं हैं; क्रोड को पटलित बनाकर इन्हें रोका जाता है।
Takeaway 8
स्वप्रेरण परिपथ का वैद्युत जड़त्व है; ℰ = -L (dI/dt), मात्रक हेनरी (H), संचित ऊर्जा U = ½LI² होती है।
Takeaway 9
लंबी परिनालिका का स्वप्रेरकत्व L = μ₀ n² A l = μ₀ N² A / l होता है।
Takeaway 10
AC जनरेटर यांत्रिक ऊर्जा को प्रत्यावर्ती धारा में बदलता है; प्रेरित EMF ℰ = NBAω sin(ωt) = ℰ₀ sin(ωt) होता है।

Check Your Understanding (Diagnostic Practice Questions)

Diagnostic questions testing core conceptual clarity. Answers are hidden initially — solve each problem first, then click to reveal the step-by-step verified solution.

1
फैराडे का विद्युतचुंबकीय प्रेरण संबंधी द्वितीय नियम लिखिए। सूत्र में ऋण चिह्न का क्या भौतिक अर्थ है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: द्वितीय नियम: किसी परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल का परिमाण परिपथ से बद्ध चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की समय दर के ऋणात्मक मान के बराबर होता है: ℰ = -dΦ_B / dt। ऋण चिह्न लेंज के नियम को प्रदर्शित करता है, जिसका अर्थ है कि प्रेरित EMF सदैव फ्लक्स परिवर्तन का विरोध करता है।
2
लेंज का नियम किस भौतिक संरक्षण सिद्धांत पर आधारित है? संक्षिप्त कारण दीजिए।
Reveal Answer & Explanation
Answer: लेंज का नियम 'ऊर्जा संरक्षण' (Conservation of Energy) के सिद्धांत पर आधारित है। क्योंकि चुंबक को कुंडली के पास या दूर ले जाते समय चुंबकीय बलों के विरुद्ध जो यांत्रिक कार्य किया जाता है, वही कार्य परिपथ में वैद्युत ऊर्जा तथा अंततः ऊष्मा में रूपांतरित होता है।
3
ट्रांसफॉर्मर के क्रोड को ठोस लोहे के स्थान पर 'पटलित' (Laminated) क्यों बनाया जाता है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: ताकि भंवर धाराओं (Eddy Currents) के वृत्ताकार पथ को तोड़ा जा सके। पत्तियों पर वार्निश की अचालक परत होने से भंवर धाराओं का परिमाण अत्यंत घट जाता है और क्रोड में तापीय ऊर्जा हानि (Heat loss) न्यूनतम हो जाती है।
4
स्वप्रेरकत्व (Self-Inductance) को परिपथ का 'वैद्युत जड़त्व' (Electrical Inertia) क्यों कहा जाता है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: क्योंकि यांत्रिकी में द्रव्यमान (जड़त्व) गति में परिवर्तन का विरोध करता है, ठीक उसी प्रकार स्वप्रेरकत्व (L) परिपथ में धारा की किसी भी प्रकार की वृद्धि अथवा कमी दोनों का ही विरोध करता है।
5
प्रत्यावर्ती धारा जनित्र में उत्पन्न प्रेरित विद्युत वाहक बल के शिखर मान (ℰ₀) का सूत्र लिखिए।
Reveal Answer & Explanation
Answer: ℰ₀ = N B A ω = 2π ν N B A (जहाँ N = फेरों की संख्या, B = चुंबकीय क्षेत्र, A = कुंडली का क्षेत्रफल, ω = कोणीय वेग, तथा ν = घूर्णन आवृत्ति है)।
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