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JAC • Class XII • Physics • Ch 2
Estimated Time: 45 Mins
Study Progress: In Progress

Electrostatic Potential and Capacitance

स्थिरवैद्युतिकी के प्रथम अध्याय में हमने विद्युत क्षेत्र को सदिश दृष्टिकोण ($\u000bec{E}$) से समझा; यह द्वितीय अध्याय उसी स्थिरवैद्युत क्षेत्र की कार्य और ऊर्जा पर आधारित अदिश दृष्टिकोण—स्थिरवैद्युत विभव ($V$) तथा आवेश संचयन की युक्ति संधारित्र (Capacitor)—का गहन और अत्यंत उपयोगी विश्लेषण प्रस्तुत करता है। स्थिरवैद्युत बल संरक्षी बल (Conservative Force) होते हैं, जिसके कारण किसी परीक्षण आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में किया गया कार्य पथ पर निर्भर नहीं करता। अनंत से एकांक धन परीक्षण आवेश को विद्युत क्षेत्र के किसी बिंदु तक लाने में बाह्य कर्ता द्वारा किए गए कार्य को उस बिंदु का स्थिरवैद्युत विभव ($V = \frac{W}{q_0}$, SI मात्रक वोल्ट) कहते हैं। विद्युत क्षेत्र और विभव में $E = -\frac{dV}{dr}$ का गहरा संबंध होता है। एक ऐसा पृष्ठ जिसके प्रत्येक बिंदु पर विभव समान रहे, समविभव पृष्ठ (Equipotential Surface) कहलाता है, जिस पर किसी आवेश को चलाने में शून्य कार्य होता है और विद्युत क्षेत्र रेखाएं इसके सदैव लंबवत होती हैं। विद्युत द्विध्रुव की निरक्षीय रेखा पर विभव शून्य ($V=0$) होता है, यद्यपि विद्युत क्षेत्र अशून्य रहता है! आवेश और ऊर्जा के भंडारण हेतु संधारित्र ($C = \frac{Q}{V}$) का आविष्कार आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स का आधार बना। समांतर पट्टिका संधारित्र की धारिता $C = \frac{\varepsilon_0 A}{d}$ होती है, जिसे परावैद्युत माध्यम ($K$) डालकर $C = \frac{K\varepsilon_0 A}{d}$ तक बढ़ाया जा सकता है। संधारित्र में संचित ऊर्जा $U = \frac{1}{2}CV^2$ तथा ऊर्जा घनत्व $u = \frac{1}{2}\varepsilon_0 E^2$ होता है। यह अध्याय सिद्धांत और संख्यात्मक दोनों ही दृष्टियों से बोर्ड परीक्षा के शीर्ष भार वाले अध्यायों में शामिल है।

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Why This Chapter Matters

JAC और CBSE कक्षा 12वीं भौतिकी बोर्ड परीक्षा में 'स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता' स्थिरवैद्युतिकी इकाई का सबसे पसंदीदा अध्याय है। बिंदु आवेश के कारण विद्युत विभव ($V = \frac{kq}{r}$), समविभव पृष्ठ के चार विशिष्ट लक्षण, विद्युत द्विध्रुव की अक्षीय व निरक्षीय स्थिति में विभव (निरक्ष पर $V=0$ का प्रमाण), समांतर पट्टिका संधारित्र की धारिता का निगमन ($C = \frac{\varepsilon_0 A}{d}$ एवं आंशिक परावैद्युत पट्टी $t$ रखने पर), संधारित्रों के श्रेणीक्रम व समांतरक्रम संयोजन पर संख्यात्मक प्रश्न, तथा संधारित्र में संचित ऊर्जा ($U = \frac{1}{2}CV^2$) एवं चालकों को जोड़ने पर ऊर्जा हानि ($\Delta U$) के सूत्रों पर प्रतिवर्ष 3 से 5 अंकों के दीर्घ-उत्तरीय प्रश्न निश्चित रूप से पूछे जाते हैं।

Before You Begin (Prerequisites)

  • विद्युत क्षेत्र ($\u000bec{E}$) एवं कूलॉम के नियम की समझ।
  • कार्य, ऊर्जा और संरक्षी बलों (Work, Energy & Conservative forces) की यांत्रिकी अवधारणा।
  • समाकलन (Integration: $\int r^{-2}dr = -1/r$) की सामान्य जानकारी।

What You Will Learn (Core Objectives)

  • स्थिरवैद्युत विभव एवं विभवांतर की भौतिक परिभाषा देना तथा बिंदु आवेश व द्विध्रुव के कारण विभव का निगमन करना।
  • समविभव पृष्ठ के गुणधर्मों और विद्युत क्षेत्र व विभव प्रवणता संबंध ($E = -\frac{dV}{dr}$) को समझना।
  • आवेशों के निकाय की स्थिरवैद्युत स्थितिज ऊर्जा की गणना करना।
  • समांतर पट्टिका संधारित्र की धारिता का सूत्र (निर्वात, पूर्ण परावैद्युत तथा आंशिक परावैद्युत पट्टी हेतु) व्युत्पन्न करना।
  • संधारित्रों के श्रेणी व समांतर क्रम संयोजन के तुल्य मान निकालना तथा संचित ऊर्जा ($U = \frac{1}{2}CV^2$) व ऊर्जा हानि का विश्लेषण करना।

Chapter Roadmap & Progression

1 1. स्थिरवैद्युत विभव, विभवांतर एवं...
2 2. समविभव पृष्ठ एवं विद्युत क्षेत्र...
3 3. विद्युत द्विध्रुव के कारण विभव ए...
4 4. संधारित्र एवं धारिता: समांतर पट्...
5 5. संधारित्रों का संयोजन, संचित ऊर्...

Complete Concept Guide (100% Curriculum Coverage)

1. स्थिरवैद्युत विभव, विभवांतर एवं बिंदु आवेश के कारण विभव

1.1 स्थिरवैद्युत विभवांतर एवं विभव की परिभाषा

स्थिरवैद्युत बल एक संरक्षी बल (Conservative Force) है। संरक्षी बल क्षेत्र में किसी आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में किया गया कार्य केवल प्रारंभिक व अंतिम बिंदुओं की स्थितियों पर निर्भर करता है, गति के पथ पर नहीं।

विद्युत विभवांतर (Potential Difference - $\Delta V$): विद्युत क्षेत्र में किसी एकांक धन परीक्षण आवेश ($+q_0$) को एक बिंदु $A$ से दूसरे बिंदु $B$ तक बिना किसी त्वरण के ले जाने में बाह्य कर्ता द्वारा किए गए कार्य को उन दो बिंदुओं के बीच का विभवांतर कहते हैं:
$$V_B - V_A = \frac{W_{A \to B}}{q_0} = -\int_A^B \vec{E}\cdot d\vec{r}$$
स्थिरवैद्युत विभव (Electrostatic Potential - $V$): एकांक धन परीक्षण आवेश को अनंत से विद्युत क्षेत्र के किसी बिंदु तक लाने में बाह्य कर्ता द्वारा किए गए कार्य को उस बिंदु का स्थिरवैद्युत विभव कहते हैं (मानकर कि $V_\infty = 0$):
$$\mathbf{V = \frac{W_{\infty \to P}}{q_0}}$$• प्रकृति: अदिश राशि (चिह्न सहित लिया जाता है: धनावेश का विभव धनात्मक, ऋणावेश का ऋणात्मक)।
• SI मात्रक: जूल प्रति कूलॉम ($\text{J/C}$) अथवा वोल्ट (Volt - V)।
• विमीय सूत्र: $[ML^2T^{-3}A^{-1}]$।

1.2 बिंदु आवेश के कारण किसी बिंदु पर विद्युत विभव का निगमन

माना बिंदु $O$ पर एक बिंदु आवेश $+q$ स्थित है। इससे $r$ दूरी पर स्थित बिंदु $P$ पर विभव ज्ञात करना है:

  • $O$ से $x$ दूरी पर परीक्षण आवेश $q_0$ पर लगने वाला कूलॉम बल: $F = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q q_0}{x^2}$ (बाहर की ओर)
  • परीक्षण आवेश को बल के विरुद्ध सूक्ष्म दूरी $dx$ विस्थापित करने में किया गया कार्य: $dW = -F\,dx = -\frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q q_0}{x^2} dx$
  • अनंत से दूरी $r$ तक लाने में कुल कार्य:$$W = -\int_\infty^r \frac{q q_0}{4\pi\varepsilon_0 x^2} dx = -\frac{q q_0}{4\pi\varepsilon_0} \left[ -\frac{1}{x} \right]_\infty^r = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q q_0}{r}$$
  • अतः विभव $V = \frac{W}{q_0}$:$$\mathbf{V = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{r}} \quad \implies V \propto \frac{1}{r}$$

तुलना: विद्युत क्षेत्र $E \propto \frac{1}{r^2}$ दूरी के वर्ग के साथ घटता है, जबकि विभव $V \propto \frac{1}{r}$ दूरी के प्रथम घात के साथ घटता है।

2. समविभव पृष्ठ एवं विद्युत क्षेत्र व विभव में संबंध

2.1 समविभव पृष्ठ (Equipotential Surface) एवं इसके 4 प्रमुख लक्षण

परिभाषा: विद्युत क्षेत्र में स्थित ऐसा कोई भी काल्पनिक अथवा वास्तविक पृष्ठ जिसके प्रत्येक बिंदु पर स्थिरवैद्युत विभव का मान समान रहता है, समविभव पृष्ठ कहलाता है।

समविभव पृष्ठ के चार अति-महत्वपूर्ण गुणधर्म:

  1. आवेश को गति कराने में शून्य कार्य: समविभव पृष्ठ पर किन्हीं दो बिंदुओं के बीच विभवांतर शून्य होता है ($V_B - V_A = 0$)। अतः किसी परीक्षण आवेश को पृष्ठ पर एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में किया गया कार्य शून्य होता है:
    $$W = q_0 (V_B - V_A) = q_0 \times 0 = \mathbf{0}$$
  2. विद्युत क्षेत्र रेखाएं सदैव लंबवत होती हैं: चूंकि $dW = \vec{E}\cdot d\vec{r} = E\,dr\cos\theta = 0$, अतः $\cos\theta = 0 \implies \mathbf{\theta = 90^\circ}$। विद्युत क्षेत्र रेखाएं समविभव पृष्ठ के प्रत्येक बिंदु पर अभिलंबवत होती हैं।
  3. दो समविभव पृष्ठ कभी एक-दूसरे को नहीं काटते: यदि वे काटेंगे तो कटान बिंदु पर विभव के दो मान होंगे, जो कि असंभव है।
  4. विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का मापक: जहाँ विद्युत क्षेत्र तीव्र होता है, वहाँ समविभव पृष्ठ एक-दूसरे के समीप होते हैं; और जहाँ क्षेत्र दुर्बल होता है, वहाँ पृष्ठ एक-दूसरे से दूर होते हैं।

2.2 विद्युत क्षेत्र एवं विभव प्रवणता में संबंध (Relation between E and V)

माना दो अत्यंत समीपवर्ती समविभव पृष्ठ जिनके विभव क्रमशः $V$ तथा $V - dV$ हैं, परस्पर लंबवत दूरी $dr$ पर स्थित हैं। एकांक धनावेश को विद्युत क्षेत्र के विरुद्ध $dr$ विस्थापित करने में किया गया कार्य विभवांतर $dV$ के बराबर होगा:

$$dW = -E\,dr = dV \implies \mathbf{E = -\frac{dV}{dr}}$$
• $\frac{dV}{dr}$ को विभव प्रवणता (Potential Gradient) कहते हैं।
• ऋण चिह्न का भौतिक अर्थ: विद्युत क्षेत्र ($\u000bec{E}$) की दिशा सदैव घटते हुए विभव की दिशा में होती है।

3. विद्युत द्विध्रुव के कारण विभव एवं आवेश निकाय की स्थितिज ऊर्जा

3.1 विद्युत द्विध्रुव के कारण विभव (Potential due to an Electric Dipole)

द्विध्रुव आघूर्ण $\vec{p} = q(2\vec{a})$ के केंद्र $O$ से दूरी $r$ तथा कोण $\theta$ पर स्थित बिंदु पर परिणामी विभव का व्यापक सूत्र:

$$V = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{p\cos\theta}{r^2}$$
  • 1. अक्षीय स्थिति (Axial Position, $\theta = 0^\circ$):$$\mathbf{V_{\text{axial}} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{p}{r^2}}$$(यदि बिंदु $-q$ की ओर हो तो $\theta = 180^\circ \implies V = -\frac{kp}{r^2}$)।
  • 2. निरक्षीय स्थिति (Equatorial Position, $\theta = 90^\circ$):$$\cos 90^\circ = 0 \implies \mathbf{V_{\text{equatorial}} = 0}$$
    परीक्षा का प्रसिद्ध प्रश्न: क्या ऐसा संभव है कि किसी बिंदु पर विद्युत क्षेत्र अशून्य हो ($E \neq 0$) परंतु विद्युत विभव शून्य हो ($V = 0$)?
    उत्तर: हाँ! विद्युत द्विध्रुव की निरक्षीय रेखा (Equatorial Line) के प्रत्येक बिंदु पर $V = 0$ होता है जबकि विद्युत क्षेत्र $E = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{p}{r^3} \neq 0$ होता है।

3.2 आवेशों के निकाय की स्थिरवैद्युत स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy of Charges)

आवेशों को अनंत से उनकी परस्पर दूरियों तक लाकर एक निकाय का निर्माण करने में बाह्य कर्ता द्वारा किए गए कुल कार्य को उस निकाय की स्थितिज ऊर्जा ($U$) कहते हैं:

  • दो बिंदु आवेशों का निकाय:$$\mathbf{U = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q_1 q_2}{r_{12}}}$$(चिह्नों के साथ मान रखा जाता है; सजातीय आवेशों हेतु $U > 0$, विजातीय आवेशों हेतु $U < 0$)।
  • तीन बिंदु आवेशों का निकाय:$$U = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \left[ \frac{q_1 q_2}{r_{12}} + \frac{q_2 q_3}{r_{23}} + \frac{q_1 q_3}{r_{13}} \right]$$
  • एकसमान बाह्य विद्युत क्षेत्र में द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा:$$\mathbf{U = -\vec{p}\cdot\vec{E} = -pE\cos\theta}$$द्विध्रुव को $\theta_1$ से $\theta_2$ तक घुमाने में किया गया कार्य: $W = pE(\cos\theta_1 - \cos\theta_2)$।

4. संधारित्र एवं धारिता: समांतर पट्टिका संधारित्र व परावैद्युत का प्रभाव

4.1 वैद्युत धारिता की अवधारणा (Concept of Capacitance)

जब किसी चालक को आवेश दिया जाता है, तो उसका विभव उसी अनुपात में बढ़ता है ($Q \propto V \implies Q = CV$)।

वैद्युत धारिता ($C$): किसी चालक को दिए गए आवेश ($Q$) तथा उसके कारण चालक के विभव में होने वाली वृद्धि ($V$) के अनुपात को उस चालक की वैद्युत धारिता (Capacitance) कहते हैं:
$$\mathbf{C = \frac{Q}{V}}$$• SI मात्रक: कूलॉम/वोल्ट अथवा फैराड (Farad - F)।
• चूंकि 1 फैराड एक अत्यधिक विशाल मात्रक है, अतः व्यावहारिक मात्रक प्रयुक्त होते हैं: $1\text{ }\mu\text{F} = 10^{-6}\text{ F}$, $1\text{ nF} = 10^{-9}\text{ F}$, $1\text{ pF} = 10^{-12}\text{ F}$।

विलगित गोलीय चालक की धारिता: $C = 4\pi\varepsilon_0 R$ (पृथ्वी की त्रिज्या $R=6400\text{ km}$ रखने पर पृथ्वी की धारिता मात्र $\approx 711\text{ }\mu\text{F}$ आती है)।

4.2 समांतर पट्टिका संधारित्र (Parallel Plate Capacitor) की धारिता का निगमन

माना दो समांतर चालक पट्टिकाओं में प्रत्येक का क्षेत्रफल $A$ है और उनके बीच की दूरी $d$ है। एक पट्टिका पर $+Q$ तथा दूसरी पर $-Q$ आवेश है (पृष्ठीय आवेश घनत्व $\sigma = \frac{Q}{A}$)।

  • पट्टिकाओं के बीच एकसमान विद्युत क्षेत्र: $E = \frac{\sigma}{\varepsilon_0} = \frac{Q}{\varepsilon_0 A}$
  • पट्टिकाओं के बीच विभवांतर: $V = E \cdot d = \frac{Q d}{\varepsilon_0 A}$
  • धारिता $C_0 = \frac{Q}{V} = \frac{Q}{\frac{Q d}{\varepsilon_0 A}}$:$$\mathbf{C_0 = \frac{\varepsilon_0 A}{d}} \quad (\text{निर्वात या वायु में})$$

4.3 परावैद्युत माध्यम का प्रभाव (Effect of Dielectric Medium)

  1. संपूर्ण स्थान में परावैद्युत ($K$) भरा होने पर: पट्टिकाओं के बीच विद्युत क्षेत्र घटकर $E = E_0 / K$ हो जाता है, जिससे विभव $V = V_0 / K$ हो जाता है:
    $$\mathbf{C = \frac{K\varepsilon_0 A}{d} = K C_0}$$
    निष्कर्ष: संधारित्र की पट्टिकाओं के बीच परावैद्युत पदार्थ रखने पर उसकी धारिता $K$ गुना बढ़ जाती है!
  2. आंशिक रूप से $t$ मोटाई की परावैद्युत पट्टी ($t < d$) रखने पर:
    वायु में दूरी $= (d - t)$, परावैद्युत में दूरी $= t$
    विभवांतर $V = E_0 (d - t) + E_m t = E_0 \left( d - t + \frac{t}{K} \right) = \frac{Q}{\varepsilon_0 A} \left( d - t + \frac{t}{K} \right)$
    $$\mathbf{C = \frac{\varepsilon_0 A}{d - t + \frac{t}{K}}}$$

5. संधारित्रों का संयोजन, संचित ऊर्जा एवं चालकों में आवेश पुनर्वितरण

5.1 संधारित्रों का संयोजन (Combination of Capacitors)

संयोजन का प्रकारपरिपथ की विशेषतातुल्य धारिता का सूत्र
1. श्रेणीक्रम संयोजन (Series Combination)सभी संधारित्रों पर आवेश $Q$ समान रहता है, जबकि कुल विभवांतर बंट जाता है ($V = V_1 + V_2 + V_3$)।$$\mathbf{\frac{1}{C_s} = \frac{1}{C_1} + \frac{1}{C_2} + \frac{1}{C_3}}$$
नोट: तुल्य धारिता सबसे छोटे संधारित्र के मान से भी कम होती है।
2. समांतरक्रम संयोजन (Parallel Combination)सभी संधारित्रों की पट्टिकाओं के बीच विभवांतर $V$ समान रहता है, जबकि कुल आवेश बंट जाता है ($Q = Q_1 + Q_2 + Q_3$)।$$\mathbf{C_p = C_1 + C_2 + C_3}$$
नोट: जब अधिक धारिता प्राप्त करनी हो तो समांतरक्रम चुनते हैं।

5.2 संधारित्र में संचित ऊर्जा एवं ऊर्जा घनत्व (Energy Stored & Energy Density)

संधारित्र को आवेशित करने में बाह्य स्रोत (बैटरी) द्वारा किया गया कार्य पट्टिकाओं के मध्य विद्युत क्षेत्र के रूप में संचित हो जाता है:

  • किसी क्षण जब आवेश $q$ तथा विभव $v = q/C$ हो, तो अतिरिक्त आवेश $dq$ देने में कार्य: $dW = v\,dq = \frac{q}{C} dq$
  • कुल आवेश $Q$ देने में कुल कार्य (संचित ऊर्जा $U$):$$U = \int_0^Q \frac{q}{C} dq = \frac{1}{C} \left[ \frac{q^2}{2} \right]_0^Q = \frac{Q^2}{2C}$$
  • चूंकि $Q = CV$:$$\mathbf{U = \frac{1}{2} C V^2 = \frac{1}{2} \frac{Q^2}{C} = \frac{1}{2} Q V}$$
  • विद्युत क्षेत्र का ऊर्जा घनत्व (Energy Density - $u$): प्रति एकांक आयतन में संचित स्थिरवैद्युत ऊर्जा:$$u = \frac{U}{\text{आयतन}} = \frac{\frac{1}{2} C V^2}{A \cdot d} = \frac{\frac{1}{2} \left( \frac{\varepsilon_0 A}{d} \right) (E d)^2}{A d} = \mathbf{\frac{1}{2} \varepsilon_0 E^2}$$

5.3 दो आवेशित चालकों को जोड़ने पर आवेश का पुनर्वितरण एवं ऊर्जा हानि

माना धारिता $C_1, C_2$ वाले दो चालक विभव $V_1, V_2$ पर हैं। उन्हें एक पतले चालक तार से जोड़ने पर:
1. उभयनिष्ठ विभव (Common Potential - $V$):
$$V = \frac{\text{कुल आवेश}}{\text{कुल धारिता}} = \mathbf{\frac{C_1 V_1 + C_2 V_2}{C_1 + C_2}}$$
2. ऊर्जा में ह्रास / हानि (Loss of Energy - $\Delta U$):
तार में धारा प्रवाहित होने पर ऊष्मा व प्रकाश के रूप में ऊर्जा क्षय होती है:
$$\mathbf{\Delta U = U_{\text{initial}} - U_{\text{final}} = \frac{1}{2} \frac{C_1 C_2}{C_1 + C_2} (V_1 - V_2)^2}$$
चूंकि $(V_1 - V_2)^2 > 0$, अतः चालकों को जोड़ने पर सदैव ऊर्जा की हानि होती है (जब तक कि $V_1 = V_2$ न हो)।

Key Formulas, Laws & Physical Constants

विद्युत विभव
V = {W}{q_0} (SI मात्रक: Volt = J/C, अदिश राशि)
बिंदु आवेश का विभव
$$V = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{r} \quad \left(V \propto \frac{1}{r}\right)$$
विद्युत क्षेत्र व विभव संबंध
E = -{dV}{dr} (दिशा सदैव घटते विभव की ओर)
द्विध्रुव अक्षीय विभव (r >> a)
$$V_{\text{axial}} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{p}{r^2}$$
द्विध्रुव निरक्षीय विभव
V_{equatorial} = 0 (जबकि E ≠ 0)
दो आवेशों की स्थितिज ऊर्जा
$$U = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q_1 q_2}{r_{12}}$$
समांतर पट्टिका संधारित्र (वायु)
$$C_0 = \frac{\varepsilon_0 A}{d} \quad (\varepsilon_0 = 8.854 \times 10^{-12}\text{ F/m})$$
परावैद्युत माध्यम सहित धारिता
$$C = \frac{K\varepsilon_0 A}{d} = K C_0 \quad (K > 1)$$
आंशिक परावैद्युत पट्टी (t)
$$C = \frac{\varepsilon_0 A}{d - t + \frac{t}{K}}$$
श्रेणीक्रम तुल्य धारिता
{1}{C_s} = {1}{C_1} + {1}{C_2} + {1}{C_3} (Q समान)
समांतरक्रम तुल्य धारिता
C_p = C_1 + C_2 + C_3 (V समान)
संधारित्र में संचित ऊर्जा
$$U = \frac{1}{2} C V^2 = \frac{Q^2}{2C} = \frac{1}{2} Q V; \quad u = \frac{1}{2}\varepsilon_0 E^2$$

Conceptual Solved Examples & Case Studies

Example 1
$4 \times 10^{-7}\text{ C}$ के एक बिंदु आवेश के कारण इससे $9\text{ cm}$ दूरी पर स्थित किसी बिंदु पर स्थिरवैद्युत विभव परिकलित कीजिए। इस बिंदु पर $2 \times 10^{-9}\text{ C}$ के आवेश को अनंत से लाने में किया गया कार्य क्या होगा?
Step-by-Step Solution:
दिया है:
स्रोत आवेश $q = 4 \times 10^{-7}\text{ C}$
दूरी $r = 9\text{ cm} = 0.09\text{ m} = 9 \times 10^{-2}\text{ m}$
लाया जाने वाला आवेश $q_0 = 2 \times 10^{-9}\text{ C}$

(a) बिंदु पर विद्युत विभव ($V$):
$$V = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{r} = \frac{(9 \times 10^9) \times (4 \times 10^{-7})}{9 \times 10^{-2}}$$
$$V = \frac{36 \times 10^2}{9 \times 10^{-2}} = 4 \times 10^4\text{ V} = 40,000\text{ Volt}$$

(b) अनंत से बिंदु तक लाने में किया गया कार्य ($W$):
$$W = q_0 \times V = (2 \times 10^{-9}\text{ C}) \times (4 \times 10^4\text{ V}) = 8 \times 10^{-5}\text{ Joule}$$
टिप्पणी: यह कार्य पथ पर बिल्कुल निर्भर नहीं करता क्योंकि स्थिरवैद्युत बल संरक्षी होते हैं।
Example 2
एक समांतर पट्टिका संधारित्र की प्रत्येक पट्टिका का क्षेत्रफल $90\text{ cm}^2$ है और उनके बीच की दूरी $2.5\text{ mm}$ है। (a) संधारित्र की धारिता ज्ञात कीजिए। (b) यदि इसे $400\text{ V}$ के संभरण से जोड़ दिया जाए तो संधारित्र पर आवेश तथा संचित स्थिरवैद्युत ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
Step-by-Step Solution:
दिया है:
क्षेत्रफल $A = 90\text{ cm}^2 = 90 \times 10^{-4}\text{ m}^2 = 9 \times 10^{-3}\text{ m}^2$
दूरी $d = 2.5\text{ mm} = 2.5 \times 10^{-3}\text{ m}$
विभवांतर $V = 400\text{ V}$
$\varepsilon_0 = 8.854 \times 10^{-12}\text{ F/m}$

(a) धारिता ($C_0$):
$$C_0 = \frac{\varepsilon_0 A}{d} = \frac{(8.854 \times 10^{-12}) \times (9 \times 10^{-3})}{2.5 \times 10^{-3}} = \frac{79.686 \times 10^{-12}}{2.5} \approx 31.87 \times 10^{-12}\text{ F} = 31.87\text{ pF}$$

(b) संधारित्र पर आवेश ($Q$) एवं संचित ऊर्जा ($U$):
$$Q = C V = (31.87 \times 10^{-12}\text{ F}) \times (400\text{ V}) \approx 1.275 \times 10^{-8}\text{ C} = 12.75\text{ nC}$$
$$U = \frac{1}{2} C V^2 = \frac{1}{2} \times (31.87 \times 10^{-12}) \times (400)^2 = \frac{1}{2} \times (31.87 \times 10^{-12}) \times 160000$$
$$U = 31.87 \times 8 \times 10^{-8} \approx 2.55 \times 10^{-6}\text{ J} = 2.55\text{ }\mu\text{J}$$
Example 3
$9\text{ pF}$ के तीन समरूप संधारित्रों को (a) श्रेणीक्रम में, तथा (b) समांतरक्रम में जोड़ा जाता है। प्रत्येक स्थिति में संयोजन की तुल्य धारिता ज्ञात कीजिए। यदि श्रेणीक्रम संयोजन को $120\text{ V}$ के स्रोत से जोड़ा जाए तो प्रत्येक संधारित्र पर विभवांतर क्या होगा?
Step-by-Step Solution:
दिया है: $C_1 = C_2 = C_3 = 9\text{ pF}$

(a) श्रेणीक्रम में तुल्य धारिता ($C_s$):
$$\frac{1}{C_s} = \frac{1}{C_1} + \frac{1}{C_2} + \frac{1}{C_3} = \frac{1}{9} + \frac{1}{9} + \frac{1}{9} = \frac{3}{9} = \frac{1}{3} \implies C_s = 3\text{ pF}$$

(b) समांतरक्रम में तुल्य धारिता ($C_p$):
$$C_p = C_1 + C_2 + C_3 = 9 + 9 + 9 = 27\text{ pF}$$

(c) श्रेणी संयोजन में प्रत्येक पर विभवांतर ($V = 120\text{ V}$):
चूंकि तीनों संधारित्र समरूप हैं, अतः कुल विभव तीनों में बराबर बंटेगा:
$$V_1 = V_2 = V_3 = \frac{V}{3} = \frac{120\text{ V}}{3} = \mathbf{40\text{ Volt}}$$
Example 4
समविभव पृष्ठ (Equipotential Surface) किसे कहते हैं? इसके किन्हीं चार महत्वपूर्ण अभिलक्षणों का उल्लेख कीजिए।
Step-by-Step Solution:
समविभव पृष्ठ: विद्युत क्षेत्र में खींचा गया वह काल्पनिक अथवा वास्तविक पृष्ठ जिसके प्रत्येक बिंदु पर स्थिरवैद्युत विभव ($V$) का मान एकसमान होता है, समविभव पृष्ठ कहलाता है。

चार प्रमुख अभिलक्षण:
1. शून्य कार्य: समविभव पृष्ठ के किन्हीं दो बिंदुओं के बीच विभवांतर शून्य होता है। अतः इस पृष्ठ पर किसी भी परीक्षण आवेश को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में किया गया कार्य सदैव शून्य होता है ($W = q_0 \Delta V = 0$)।
2. विद्युत क्षेत्र रेखाओं की लंबवतता: विद्युत क्षेत्र रेखाएं समविभव पृष्ठ के प्रत्येक बिंदु पर सदैव अभिलंबवत (पृष्ठ से $90^\circ$ के कोण पर) होती हैं। यदि ऐसा न होता, तो पृष्ठ के अनुदिश क्षेत्र का एक अशून्य घटक होता जिसके विरुद्ध आवेश चलाने में कार्य करना पड़ता, जो कि असंभव है।
3. प्रतिच्छेदन का अभाव: दो समविभव पृष्ठ कभी भी एक-दूसरे को नहीं काट सकते। यदि वे काटेंगे तो कटान रेखा पर विभव के दो भिन्न मान होंगे, जो भौतिक रूप से सर्वथा असंगत है।
4. क्षेत्र की तीव्रता का संकेतक: संबंध $E = -\frac{dV}{dr}$ के अनुसार, जिन क्षेत्रों में विद्युत क्षेत्र तीव्र होता है, वहाँ समविभव पृष्ठ एक-दूसरे के बहुत निकट होते हैं; और दुर्बल क्षेत्रों में वे दूर-दूर स्थित होते हैं।
Example 5
सिद्ध कीजिए कि संधारित्र की पट्टिकाओं के बीच संचित स्थिरवैद्युत ऊर्जा $U = \frac{1}{2} C V^2$ होती है। विद्युत क्षेत्र के ऊर्जा घनत्व का व्यंजक भी प्राप्त कीजिए।
Step-by-Step Solution:
संधारित्र में संचित ऊर्जा का निगमन:
1. माना धारिता $C$ वाले एक अनावेशित संधारित्र को बाह्य स्रोत द्वारा धीरे-धीरे $Q$ आवेश दिया जाता है。
2. आवेशन की प्रक्रिया के दौरान किसी क्षण पट्टिकाओं पर आवेश $q$ तथा उनके बीच विभवांतर $v = \frac{q}{C}$ है。
3. इस अवस्था में अत्यंत सूक्ष्म अतिरिक्त आवेश $dq$ को एक पट्टिका से दूसरी पट्टिका तक पहुंचाने में किया गया कार्य:
$$dW = v\,dq = \frac{q}{C} dq$$
4. संधारित्र को $0$ से पूर्ण आवेश $Q$ तक आवेशित करने में किया गया कुल कार्य:
$$W = \int_0^Q \frac{q}{C} dq = \frac{1}{C} \left[ \frac{q^2}{2} \right]_0^Q = \frac{Q^2}{2C}$$
5. चूंकि $Q = CV$ रखने पर:
$$U = W = \frac{(CV)^2}{2C} = \mathbf{\frac{1}{2} C V^2} = \frac{1}{2} Q V$$

विद्युत क्षेत्र के ऊर्जा घनत्व ($u$) का व्यंजक:
समांतर पट्टिका संधारित्र के लिए $C = \frac{\varepsilon_0 A}{d}$ तथा $V = Ed$ प्रतिस्थापित करने पर:
$$U = \frac{1}{2} \left( \frac{\varepsilon_0 A}{d} \right) (E d)^2 = \frac{1}{2} \varepsilon_0 E^2 (A \cdot d)$$
पट्टिकाओं के मध्य का आयतन $= A \cdot d$। अतः प्रति एकांक आयतन में संचित ऊर्जा (ऊर्जा घनत्व):
$$\mathbf{u = \frac{U}{A \cdot d} = \frac{1}{2} \varepsilon_0 E^2}$$ (इति सिद्धम्)

Common Misconceptions & Examiner Traps

Common Misconception

विद्युत विभव को सदिश राशि मानकर दिशा के साथ जोड़ना।

Scientific Reality & Correction

विद्युत विभव एक अदिश राशि है; विभिन्न आवेशों के विभवों को सामान्य बीजगणितीय योग (चिह्न सहित) द्वारा सीधे जोड़ा जाता है।

Common Misconception

द्विध्रुव की निरक्षीय रेखा पर विभव को विद्युत क्षेत्र की तरह अशून्य मान लेना।

Scientific Reality & Correction

द्विध्रुव की निरक्षीय रेखा पर विभव शून्य ($V=0$) होता है क्योंकि दोनों आवेशों की दूरियां समान होती हैं और विभव निरस्त हो जाते हैं।

Common Misconception

समविभव पृष्ठ पर आवेश को गति कराने में कोई कार्य होने का भ्रम पालना।

Scientific Reality & Correction

समविभव पृष्ठ पर $\Delta V = 0$ होता है, अतः किसी भी आवेश को ले जाने में किया गया कार्य सदैव शून्य ($W = 0$) होता है।

Common Misconception

संधारित्रों के श्रेणी व समांतर क्रम सूत्रों को प्रतिरोधों (Resistors) के सूत्रों से मिला देना।

Scientific Reality & Correction

संधारित्रों के सूत्र प्रतिरोधों के ठीक उल्टे होते हैं: संधारित्रों का श्रेणीक्रम $\frac{1}{C_s} = \frac{1}{C_1} + \frac{1}{C_2}$ तथा समांतरक्रम $C_p = C_1 + C_2$ होता है।

Common Misconception

परावैद्युत पट्टी डालने पर धारिता घटने का अनुमान लगाना।

Scientific Reality & Correction

परावैद्युत माध्यम ($K > 1$) डालने पर पट्टिकाओं के बीच विभव घटता है, जिससे धारिता सदैव $K$ गुना बढ़ जाती है ($C = K C_0$)।

स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता: समविभव पृष्ठ, संधारित्र एवं संचित ऊर्जा

स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता: समविभव पृष्ठ, संधारित्र एवं ऊर्जा घनत्व1. स्थिरवैद्युत विभव (V)अदिश ऊर्जा दृष्टिकोण• विभव V = W / q₀ (Volt = J/C)• बिंदु आवेश विभव: V = kq / r(E ∝ 1/r² जबकि V ∝ 1/r)• क्षेत्र व विभव संबंध:E = -dV/dr (घटते विभव की दिशा)• द्विध्रुव विभव:अक्षीय: V = kp / r²निरक्षीय: V = 0 (जबकि E ≠ 0!)• निकाय ऊर्जा U = kq₁q₂ / r₁₂2. समविभव पृष्ठ (Equipotential)4 प्रमुख अभिलक्षण• 1. शून्य कार्य (W = 0):W = q₀ ΔV = q₀ (0) = 0• 2. E रेखाएं सदैव लंबवत:E·dr = E dr cosθ = 0 ⇒ θ = 90°• 3. प्रतिच्छेदन असंभव:कटान पर विभव के 2 मान नहीं हो सकते• 4. तीव्रता का मापक:तीव्र क्षेत्र में पृष्ठ पास-पास,दुर्बल क्षेत्र में पृष्ठ दूर-दूर3. संधारित्र व संचित ऊर्जाधारिता एवं परावैद्युत• धारिता C = Q / V (Farad - F)• समांतर पट्टिका (वायु): C₀ = ε₀A / d• परावैद्युत (K) का प्रभाव:C = K C₀ (धारिता K गुना बढ़ती है)• संयोजन सूत्र:श्रेणी: 1/C_s = 1/C₁ + 1/C₂समांतर: C_p = C₁ + C₂ + C₃• संचित ऊर्जा U = ½CV² = ½QV• ऊर्जा घनत्व u = ½ε₀E²बोर्ड परीक्षा के प्रमुख संप्रत्यय (Golden Potential & Capacitance Capsule)द्विध्रुव निरक्षीय विभव:निरक्षीय रेखा पर V = 0 होता है जबकि विद्युत क्षेत्र E ≠ 0 रहता है (बोर्ड का हॉट प्रश्न)।समविभव पृष्ठ पर कार्य:W = q₀ ΔV = 0; विद्युत क्षेत्र रेखाएं पृष्ठ के सदैव लंबवत (θ = 90°) होती हैं।संधारित्र में परावैद्युत:माध्यम K डालने पर विभव घटता है और धारिता K गुना बढ़ जाती है (C = K C₀)।

Chapter Summary & 10 Key Takeaways

Takeaway 1
स्थिरवैद्युत विभव V = W/q₀ (SI मात्रक वोल्ट = J/C) एक अदिश राशि है; बिंदु आवेश हेतु V = kq/r होता है।
Takeaway 2
विद्युत क्षेत्र व विभव प्रवणता संबंध: E = -dV/dr; ऋण चिह्न दर्शाता है कि विद्युत क्षेत्र घटते विभव की दिशा में होता है।
Takeaway 3
समविभव पृष्ठ के प्रत्येक बिंदु पर विभव समान रहता है; इस पर आवेश को चलाने में शून्य कार्य (W=0) होता है।
Takeaway 4
विद्युत क्षेत्र रेखाएं समविभव पृष्ठ के सदैव लंबवत होती हैं और दो समविभव पृष्ठ कभी नहीं काटते।
Takeaway 5
द्विध्रुव का अक्षीय विभव V_axial = kp/r² तथा निरक्षीय विभव V_equatorial = 0 होता है।
Takeaway 6
आवेश निकाय की स्थितिज ऊर्जा U = (1/4πε₀) (q₁q₂ / r₁₂) होती है।
Takeaway 7
वैद्युत धारिता C = Q/V (SI मात्रक फैराड - F); समांतर पट्टिका संधारित्र हेतु C₀ = ε₀A/d होता है।
Takeaway 8
परावैद्युत माध्यम (K) रखने पर धारिता K गुना बढ़कर C = K C₀ हो जाती है।
Takeaway 9
श्रेणीक्रम में 1/C_s = 1/C₁ + 1/C₂ (आवेश समान); समांतरक्रम में C_p = C₁ + C₂ (विभवांतर समान)।
Takeaway 10
संधारित्र में संचित ऊर्जा U = ½CV² = ½Q²/C = ½QV तथा ऊर्जा घनत्व u = ½ε₀E² होता है।

Check Your Understanding (Diagnostic Practice Questions)

Diagnostic questions testing core conceptual clarity. Answers are hidden initially — solve each problem first, then click to reveal the step-by-step verified solution.

1
विद्युत क्षेत्र की तीव्रता (E) तथा विभव प्रवणता में क्या संबंध होता है? इसमें ऋण चिह्न का क्या भौतिक महत्व है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: संबंध: E = -dV/dr। ऋण चिह्न का भौतिक महत्व यह है कि विद्युत क्षेत्र की दिशा सदैव उस दिशा में होती है जिस दिशा में विद्युत विभव तेजी से घट रहा होता है।
2
समविभव पृष्ठ पर किसी परीक्षण आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में कितना कार्य करना पड़ता है और क्यों?
Reveal Answer & Explanation
Answer: किया गया कार्य सदैव शून्य (W = 0) होता है, क्योंकि समविभव पृष्ठ के किन्हीं दो बिंदुओं के बीच विभवांतर शून्य होता है (W = q₀ ΔV = q₀ x 0 = 0)।
3
क्या ऐसा संभव है कि किसी बिंदु पर विद्युत क्षेत्र अशून्य (E ≠ 0) हो परंतु विद्युत विभव शून्य (V = 0) हो? एक उदाहरण दीजिए।
Reveal Answer & Explanation
Answer: हाँ, यह बिल्कुल संभव है। उदाहरण के लिए, एक विद्युत द्विध्रुव की निरक्षीय रेखा (Equatorial line) के प्रत्येक बिंदु पर विद्युत विभव शून्य (V = 0) होता है, जबकि विद्युत क्षेत्र अशून्य (E = kp/r³ ≠ 0) होता है।
4
एक समांतर पट्टिका संधारित्र की पट्टिकाओं के बीच परावैद्युत पदार्थ (Dielectric) भरने पर उसकी धारिता पर क्या प्रभाव पड़ता है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: संधारित्र की धारिता परावैद्युतांक K गुना बढ़ जाती है (C = K C₀), क्योंकि परावैद्युत के आंतरिक ध्रुवण के कारण पट्टिकाओं के बीच विद्युत क्षेत्र व विभवांतर घट जाता है।
5
संधारित्र में संचित स्थिरवैद्युत ऊर्जा के तीन सूत्र लिखिए।
Reveal Answer & Explanation
Answer:
  1. U = ½ C V² (धारिता व विभव के पदों में), 2. U = ½ Q²/C (आवेश व धारिता के पदों में), तथा 3. U = ½ Q V (आवेश व विभव के पदों में)।

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