1.1 स्थिरवैद्युत विभवांतर एवं विभव की परिभाषा
स्थिरवैद्युत बल एक संरक्षी बल (Conservative Force) है। संरक्षी बल क्षेत्र में किसी आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में किया गया कार्य केवल प्रारंभिक व अंतिम बिंदुओं की स्थितियों पर निर्भर करता है, गति के पथ पर नहीं।
$$V_B - V_A = \frac{W_{A \to B}}{q_0} = -\int_A^B \vec{E}\cdot d\vec{r}$$
स्थिरवैद्युत विभव (Electrostatic Potential - $V$): एकांक धन परीक्षण आवेश को अनंत से विद्युत क्षेत्र के किसी बिंदु तक लाने में बाह्य कर्ता द्वारा किए गए कार्य को उस बिंदु का स्थिरवैद्युत विभव कहते हैं (मानकर कि $V_\infty = 0$):
$$\mathbf{V = \frac{W_{\infty \to P}}{q_0}}$$• प्रकृति: अदिश राशि (चिह्न सहित लिया जाता है: धनावेश का विभव धनात्मक, ऋणावेश का ऋणात्मक)।
• SI मात्रक: जूल प्रति कूलॉम ($\text{J/C}$) अथवा वोल्ट (Volt - V)।
• विमीय सूत्र: $[ML^2T^{-3}A^{-1}]$।
1.2 बिंदु आवेश के कारण किसी बिंदु पर विद्युत विभव का निगमन
माना बिंदु $O$ पर एक बिंदु आवेश $+q$ स्थित है। इससे $r$ दूरी पर स्थित बिंदु $P$ पर विभव ज्ञात करना है:
- $O$ से $x$ दूरी पर परीक्षण आवेश $q_0$ पर लगने वाला कूलॉम बल: $F = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q q_0}{x^2}$ (बाहर की ओर)
- परीक्षण आवेश को बल के विरुद्ध सूक्ष्म दूरी $dx$ विस्थापित करने में किया गया कार्य: $dW = -F\,dx = -\frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q q_0}{x^2} dx$
- अनंत से दूरी $r$ तक लाने में कुल कार्य:$$W = -\int_\infty^r \frac{q q_0}{4\pi\varepsilon_0 x^2} dx = -\frac{q q_0}{4\pi\varepsilon_0} \left[ -\frac{1}{x} \right]_\infty^r = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q q_0}{r}$$
- अतः विभव $V = \frac{W}{q_0}$:$$\mathbf{V = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{r}} \quad \implies V \propto \frac{1}{r}$$
तुलना: विद्युत क्षेत्र $E \propto \frac{1}{r^2}$ दूरी के वर्ग के साथ घटता है, जबकि विभव $V \propto \frac{1}{r}$ दूरी के प्रथम घात के साथ घटता है।