1.1 दंड चुंबक एवं चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण (Magnetic Dipole Moment - $\vec{M}$)
एक दंड चुंबक में दो बराबर व विपरीत ध्रुव होते हैं—उत्तरी ध्रुव ($+m$, ध्रुव प्राबल्य) तथा दक्षिणी ध्रुव ($-m$)। दोनों ध्रुवों के बीच की दूरी को चुंबकीय प्रभावी लंबाई ($2l$) कहते हैं।
$$\mathbf{\vec{M} = m(2\vec{l})}$$• दिशा: सदैव दक्षिणी ध्रुव ($S$) से उत्तरी ध्रुव ($N$) की ओर (विद्युत द्विध्रुव की भांति $-q$ से $+q$ की ओर)।
• SI मात्रक: $\text{A}\cdot\text{m}^2$ (एम्पियर-मीटर$^2$) अथवा जूल प्रति टेस्ला ($\text{J/T}$)।
• विमीय सूत्र: $[L^2 A]$।
1.2 अक्षीय एवं निरक्षीय स्थिति में चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field on Axial & Equatorial Lines)
केंद्र से $r$ दूरी पर ($r \gg l$ लघु चुंबक हेतु):
- 1. अक्षीय स्थिति (End-on / Axial Position):$$\mathbf{B_{\text{axial}} = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{2M}{r^3}} \quad (\text{दिशा: } \vec{M} \text{ के अनुदिश})$$
- 2. निरक्षीय स्थिति (Broadside-on / Equatorial Position):$$\mathbf{B_{\text{equatorial}} = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{M}{r^3}} \quad (\text{दिशा: } \vec{M} \text{ के विपरीत})$$
- तुलनात्मक संबंध: समान दूरी $r$ पर:
$$\mathbf{B_{\text{axial}} = 2 \times B_{\text{equatorial}}}$$
एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में बल आघूर्ण एवं स्थितिज ऊर्जा:
बल आघूर्ण: $\mathbf{\vec{\tau} = \vec{M} \times \vec{B} \implies \tau = MB\sin\theta}$
स्थितिज ऊर्जा: $\mathbf{U = -\vec{M}\cdot\vec{B} = -MB\cos\theta}$ (स्थायी साम्यावस्था $\theta = 0^\circ$ पर $U = -MB$ न्यूनतम)।